Lucknow News: हाई कोर्ट की सख्ती से बैकफुट पर आईं लखनऊ मेयर, सपा पार्षद को दिलाई शपत

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊः लखनऊ की राजनीति रविवार को एक बड़े घटनाक्रम की गवाह बनी। लंबे समय से विवादों में घिरे लखनऊ उत्तर क्षेत्र के निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी ने आखिरकार नगर निगम परिसर में पार्षद पद की शपथ ग्रहण कर ली।

सुबह करीब 9 बजे आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे परिसर में “सत्य की जीत हुई” और “अखिलेश यादव जिंदाबाद” के नारे गूंज उठे। हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश और सख्त रुख के बाद प्रशासन को मजबूरन यह शपथ दिलानी पड़ी।

कई दिनों से चला आ रहा था सस्पेंस

ललित किशोर तिवारी के निर्वाचित होने के बावजूद उन्हें शपथ नहीं दिलाई जा रही थी। इस देरी को लेकर उनके समर्थक और विपक्षी नेता लगातार नाराज थे। कई बार नगर निगम से शपथ की मांग की गई, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। आखिरकार मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने नगर निगम प्रशासन से जवाब तलब किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने पर नाराजगी जताई।

कोर्ट के कड़े संदेश के बाद प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया और शपथ ग्रहण का कार्यक्रम आयोजित कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि अदालत नहीं हस्तक्षेप करती तो यह मामला और लंबा खिंच सकता था।

मेयर की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल की भूमिका भी चर्चा में रही। विपक्ष का आरोप है कि जानबूझकर राजनीतिक कारणों से शपथ में देरी की गई। हालांकि नगर निगम की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया। भाजपा समर्थक इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी इसे विपक्षी जनप्रतिनिधियों के साथ भेदभाव करार दे रही है।

समर्थकों में खुशी का माहौल

शपथ ग्रहण के बाद ललित किशोर तिवारी का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं, ढोल-नगाड़े बजाए और जोरदार नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने इसे एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सत्य और लोकतंत्र की जीत बताया।

लखनऊ उत्तर में नई उम्मीदें

क्षेत्र के स्थानीय लोगों में अब नई उम्मीद जगी है। सड़क, सफाई, जलभराव और पेयजल जैसी लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की उम्मीद बंधी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह घटनाक्रम लखनऊ उत्तर की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है और समाजवादी पार्टी को मनोवैज्ञानिक लाभ पहुंचा सकता है।

विपक्ष को मिला नया मुद्दा

इस मामले ने विपक्ष को भाजपा और नगर निगम प्रशासन पर हमला बोलने का ताज़ा हथियार दे दिया है। समाजवादी नेताओं का कहना है कि न्यायपालिका ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की, वरना विपक्षी प्रतिनिधियों का हक मार लिया जाता।

हाईकोर्ट की इस सक्रिय भूमिका की कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों दोनों तरफ सराहना हो रही है। यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि लोकतंत्र में न्यायपालिका कितनी अहम भूमिका निभाती है।

अब देखना यह होगा कि ललित किशोर तिवारी क्षेत्र की समस्याओं को कितनी प्रभावी ढंग से नगर निगम में उठा पाते हैं और यह मुद्दा आगे कितना राजनीतिक रंग लेता है।

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