संपादकीय: महत्वाकांक्षी मिशन
उत्तर प्रदेश को डेटा सेंटर, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का केंद्र बनाने संबंधी जिन नीतियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंड़ी दिखाई है वे राज्य की अर्थव्यवस्था को पुराने उद्योगों के ढर्रे से बाहर निकालकर ज्ञान-आधारित आधुनिकता की ओर ले जाने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को डिजिटल अवसंरचना, डेटा प्रबंधन, एआई अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश का एक अग्रणी राज्य बनाने का है।
सच है कि उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में डेटा सेंटर निवेश को आकर्षित करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर पार्कों में से कुछ का विकास नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हो रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता, विशाल घरेलू उपभोक्ता बाजार, बेहतर एक्सप्रेसवे नेटवर्क और अपेक्षाकृत सस्ती भूमि उपलब्धता ने निवेशकों को आकर्षित किया है।
यदि प्रदेश वास्तव में दो गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के अपने लक्ष्य को हासिल कर लेता है, तो यह भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे में उसकी केंद्रीय और रणनीतिक भूमिका स्थापित कर देगा। इसी प्रकार, नई स्टार्टअप नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करने का सरकारी प्रयास भी अत्यंत स्वागतयोग्य है।
देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले राज्य के लिए यह समय की मांग है कि वह केवल नौकरी तलाशने वालों का प्रदेश न रहकर रोजगार सृजित करने वाले युवाओं का हब बने। एआई, फिनटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक और डीप-टेक जैसे भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों में स्टार्टअप संस्कृति का विकसित होना राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है, लेकिन बुनियादी प्रश्न यह है कि क्या यह डिजिटल सपना जमीन पर उतरने के लिहाज से यथार्थवादी है? और यदि हां, तो इसकी वास्तविक सफलता की अनिवार्य शर्तें क्या हैं? डेटा सेंटर अत्यधिक बिजली तथा पानी की खपत करते हैं। ऐसे में यदि भविष्य में डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ती है, तो क्या राज्य की ऊर्जा अवसंरचना उसी गति से खुद को विकसित कर पाएगी?
कहीं इससे पारंपरिक उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली-पानी का अतिरिक्त दबाव तो नहीं पड़ेगा? डेटा सेंटरों में निवेश तो बहुत विशाल होता है, लेकिन पैदा होने वाले प्रत्यक्ष रोजगार काफी सीमित। प्रस्तावित 'एआई सिटी' और राज्यव्यापी स्टार्टअप हब की अवधारणा भी केवल तभी सफल हो सकती है, जब विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच एक वास्तविक व्यावहारिक साझेदारी विकसित हो। उत्तर प्रदेश को भी इसी राह पर अपनी अकादमिक संस्कृति को सुधारना होगा। इन चुनौतियों के बावजूद, इस पूरी सरकारी पहल का सबसे सकारात्मक और सराहनीय पहलू यह है कि उत्तर प्रदेश पहली बार भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर एक दीर्घकालिक और प्रगतिशील सोच प्रदर्शित कर रहा है।
यदि स्टार्टअप नीति को केवल कागजों के बजाय सीधे राज्य के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से व्यावहारिक रूप से संबद्ध किया जाए; और यदि एआई मिशन को केवल बाहरी निवेश आकर्षित करने का जरिया बनाने के बजाय वास्तविक ज्ञान सृजन का माध्यम बनाया जाए, तो यह निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों को समृद्ध दिशा दे सकता है।
