Global Shock से बचना है तो 'Green Energy' की रफ्तार बढ़ानी होगी: पूर्व RBI गवर्नर सी. रंगराजन

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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हैदराबाद: वैश्विक स्तर पर होने वाली उथल-पुथल और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए देश को स्थायी ऊर्जा परिवर्तन (Sustainable Energy Transition) की गति को तेज करना होगा। यह महत्वपूर्ण विचार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सी. रंगराजन ने व्यक्त किए हैं।

वे हैदराबाद के 'आईसीएफएआई स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज' और मुंबई के 'इंद्रिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च' (IGIDR) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 18वें वार्षिक डॉक्टरेट थीसिस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों (IITs, IIMs, NITs, JNU) के करीब 200 शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

घरेलू ताकत मजबूत, पर बाहरी झटके बड़ी चुनौती

आईसीएफएआई फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन के चांसलर डॉ. रंगराजन ने कहा कि वर्तमान में भारत के सामने जो आर्थिक चुनौतियाँ हैं, वे आंतरिक कमियों के कारण नहीं, बल्कि बाहरी और वैश्विक कारणों से पैदा हो रही हैं।

-ग्लोबल क्राइसिस का असर: पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधाओं के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर ईंधन (Energy) और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ा है।

-मजबूत रुपया और अर्थव्यवस्था: उन्होंने भरोसा जताया कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद बेहद मजबूत है। जैसे ही भू-राजनीतिक (Geo-political) तनाव कम होगा, भारतीय मुद्रा में स्थिरता और मजबूती आएगी।

वैश्विक संकट से निपटने का '3-Step फार्मूला'

डॉ. रंगराजन ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक झटकों से भारत को बचाने के लिए एक त्रिस्तरीय (Three-Point) रणनीति का सुझाव दिया:

समयावधि (Timeline) प्रस्तावित रणनीति (Strategy)
अल्पकालिक (Short-term) बेहतर कूटनीतिक संबंध स्थापित करना और कच्चे माल या ऊर्जा के आयात के स्रोतों में विविधता लाना।
मध्यम अवधि (Medium-term) ऊर्जा जैसे अति-संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रणनीतिक सुरक्षा भंडार (Strategic Reserves) तैयार करना।
दीर्घकालिक (Long-term) महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए घरेलू क्षमताओं को प्रतिस्पर्धी बनाना और चुनिंदा आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) को बढ़ावा देना।

नीति निर्माताओं को सलाह

पूर्व गवर्नर ने जोर देकर कहा कि आयात पर अपनी निर्भरता को कम करने और वैश्विक संकटों का डटकर सामना करने के लिए नीति निर्माताओं को नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EVs) की ओर तेजी से कदम बढ़ाने होंगे।

क्लाइमेट फाइनेंसिंग पर भी हुआ मंथन

सम्मेलन में आईजीआईडीआर के निदेशक और कुलपति बसंत कुमार प्रधान ने बदलते वैश्विक पर्यावरण वित्त (Climate Finance) परिदृश्य पर विस्तार से बात की। उन्होंने ग्रीन फाइनेंस, सस्टेनेबल फाइनेंस और ट्रांजिशन फाइनेंस के बीच के अंतर को समझाया और कहा कि पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं में अब निजी पूंजी और प्रोजेक्ट-बेस्ड फंडिंग की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

इस अवसर पर वाइस चांसलर प्रो. तम्मा कोटि रेड्डी और सी.एस. शैलजान भी मौजूद रहे, जिन्होंने अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने में इस सम्मेलन के महत्व को रेखांकित किया।

 

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