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                <title>Amrit Vichar - Amrit Vichar</title>
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                            <item>
                <title>23 मई का इतिहास : आज ही के दिन चीन ने किया तिब्बत पर कब्जा, जानिए घटनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> इतिहास में 23 मई का दिन तिब्बत पर चीन के कब्जे के दिन के रूप में दर्ज है। चीन के इस कदम का तिब्बत और दुनिया के कई देशों में जमकर विरोध हुआ था। देश-दुनिया के इतिहास में 23 मई की तारीख पर दर्ज अन्य प्रमुख घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:- </p>
<p style="text-align:justify;">1848 : अमेरिका के राइट बंधुओं से भी पहले ग्लाइडर बनाकर इंसान को पहली बार उड़ना सिखाने वाले ओटो लिलिएंथल का जन्म। <br />1919 : जयपुर राजघराने की राजमाता महारानी गायत्री देवी का जन्म। <br />1945 : जर्मन तानाशाह हिटलर की यहूदी विरोधी खुफिया सेवा के प्रमुख</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582860/history-of-may-23--on-this-day--china-occupied-tibet%E2%80%94learn-about-the-events"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats413.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> इतिहास में 23 मई का दिन तिब्बत पर चीन के कब्जे के दिन के रूप में दर्ज है। चीन के इस कदम का तिब्बत और दुनिया के कई देशों में जमकर विरोध हुआ था। देश-दुनिया के इतिहास में 23 मई की तारीख पर दर्ज अन्य प्रमुख घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:- </p>
<p style="text-align:justify;">1848 : अमेरिका के राइट बंधुओं से भी पहले ग्लाइडर बनाकर इंसान को पहली बार उड़ना सिखाने वाले ओटो लिलिएंथल का जन्म। <br />1919 : जयपुर राजघराने की राजमाता महारानी गायत्री देवी का जन्म। <br />1945 : जर्मन तानाशाह हिटलर की यहूदी विरोधी खुफिया सेवा के प्रमुख हेनरिख हिमलर ने अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की हिरासत में आत्महत्या की। <br />1951 : चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया।<br />1977 : चरमपंथियों ने उत्तरी हालैंड के एक प्राथमिक स्कूल और एक ट्रेन में घुसकर कई लोगों को बंधक बना लिया। कमांडो कार्रवाई के जरिए इस संकट को सुलझाने में बीस दिन का समय लगा। <br />1986 : अमेरिका और पश्चिम यूरोपीय देशों ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ प्रतिबंधों के प्रस्ताव पर वीटो किया। <br />1994 : सऊदी अरब में भगदड़ में 270 तीर्थयात्रियों की मौत। <br />2004 : बांग्लादेश में तूफान के कारण मेघना नदी में नाव पलटने से 250 लोग डूबे।<br />2008 : भारत ने सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल 'पृथ्वी-2' का सफल परीक्षण किया। <br />2009 : भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति रोह मू ह्यून ने अपने घर के नजदीक पहाड़ियों से छलांग लगाकर आत्महत्या की। <br />2010 : उच्चतम न्यायालय ने बिना विवाह किये महिला और पुरुष के एक साथ रहने को अपराध की श्रेणी से बाहर किया। <br />2014 : रूस और चीन ने सीरिया में युद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति का प्रयोग किया। <br />2021 : चीन में मैराथन के दौरान मौसम खराब होने से 21 लोगों की मौत। <br />2022 : जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में तैनात रूसी राजनयिक ने यूक्रेन युद्ध के विरोध में इस्तीफा दिया और कहा कि वह अपने देश की सैन्य कार्रवाई को लेकर शर्मिंदा हैं।<br />2024: नेपाली मूल की महिला पर्वतरोही ने सबसे कम समय में एवरेस्ट पर चढ़ने का रिकॉर्ड बनाया। <br />2025: ईरान और अमेरिका के बीच पांचवे दौर की परमाणु कार्यक्रम वार्ता संपन्न हुई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>इतिहास</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 08:45:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रसंगवश : गुम होते भारतीय संस्कृति के हिस्सा रहे प्याऊ</title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats412.jpg" alt="cats" width="146" height="212" />
<strong>सुनील कुमार महला, लेखक</strong>

<p>  </p>
<p>गर्मियों की भीषण तपिश से इन दिनों पूरा उत्तर भारत झुलस रहा है। सच तो यह है कि प्रचंड गर्मी ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। वास्तव में ऐसे मौसम में मनुष्य को भोजन से अधिक पानी की आवश्यकता होती है, किंतु विडंबना यह है कि आज वही पानी बोतलों में कैद होकर बाज़ार की वस्तु बन गया है। प्राचीन भारत में जगह-जगह पानी का प्याऊ लगाना केवल सेवा नहीं, बल्कि लोकधर्म और पुण्य का कार्य माना जाता था।</p>
<p>राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में आज भी कहीं-कहीं यह परंपरा जीवित दिखाई देती है, जहां गंगासागर-अर्थात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582859/incidentally--the-vanishing--pyau-%E2%80%94an-integral-part-of-indian-culture"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats411.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats412.jpg" alt="cats" width="146" height="212"></img>
<strong>सुनील कुमार महला, लेखक</strong>

<p> </p>
<p>गर्मियों की भीषण तपिश से इन दिनों पूरा उत्तर भारत झुलस रहा है। सच तो यह है कि प्रचंड गर्मी ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। वास्तव में ऐसे मौसम में मनुष्य को भोजन से अधिक पानी की आवश्यकता होती है, किंतु विडंबना यह है कि आज वही पानी बोतलों में कैद होकर बाज़ार की वस्तु बन गया है। प्राचीन भारत में जगह-जगह पानी का प्याऊ लगाना केवल सेवा नहीं, बल्कि लोकधर्म और पुण्य का कार्य माना जाता था।</p>
<p>राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में आज भी कहीं-कहीं यह परंपरा जीवित दिखाई देती है, जहां गंगासागर-अर्थात पीतल या तांबे के नलनुमा पात्र से राहगीरों, पथिकों और थके-हारे यात्रियों को प्रेमपूर्वक पानी पिलाया जाता है। गांवों में खेतों के किनारे पशुओं के लिए ‘खेली’ बनाई जाती थी, कुएं, कुंड और परंपरागत जल-स्रोतों की व्यवस्था रहती थी, किंतु अब ये दृश्य विरले ही दिखाई देते हैं। सच तो यह है कि प्यास बुझाने को पुण्य मानने वाली भारतीय संस्कृति धीरे-धीरे स्मृतियों में सिमटती जा रही है।</p>
<p>भारतीय परंपरा में ‘प्याऊ’ अथवा ‘प्रपा’ सामाजिक संवेदना और मानवीय करुणा का प्रतीक रही है। भीषण गर्मी में राहगीरों और जरूरतमंदों को निःशुल्क शीतल जल उपलब्ध कराना सदियों पुरानी परोपकारी परंपरा थी। भारतीय शास्त्रों विशेषकर भविष्योत्तर पुराण और स्कंद पुराण में ‘प्रपा दान’ अर्थात जलदान को स्वर्णदान और गोदान के समान पुण्यदायी बताया गया है। इसे कई स्थानों पर ‘पौशाला’ भी कहा जाता था। राजा, सेठ-साहूकार, व्यापारी तथा सामान्य लोग चौराहों, बाज़ारों और मार्गों पर प्याऊ लगवाते थे।</p>
<p>बुजुर्ग बताते हैं कि कहीं राहगीरों को पानी के साथ गुड़, बताशे या भुने चने भी प्रेमपूर्वक दिए जाते थे। वास्तव में भारतीय संस्कृति में यह परंपरा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं थी। लोग अपने घरों की छतों पर पक्षियों के लिए मिट्टी के सकोरे रखते थे और पेड़ों के नीचे पशुओं के लिए पानी के पात्र भरकर रखते थे। जल-संरक्षण और जीवों के प्रति करुणा भारतीय जीवनशैली का स्वाभाविक हिस्सा थी। </p>
<p>इतना ही नहीं, कई स्थानों पर प्याऊ पर पानी पिलाने के लिए विधवा महिलाओं अथवा जरूरतमंद लोगों को नियुक्त किया जाता था और उन्हें सम्मानपूर्वक मानदेय भी दिया जाता था। इस प्रकार से प्याऊ सेवा, संवेदना और रोजगार तीनों का माध्यम थी। आज भी कहीं-कहीं रेलवे स्टेशनों पर हमें प्याऊ देखने को मिल जाते हैं।</p>
<p>सदियों से उत्तर भारत में बैसाख और जेठ के महीनों में राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए जल-प्याऊ लगाई जाती रही हैं। लोग स्वयं खड़े होकर राह चलते व्यक्तियों को ठंडा पानी या शर्बत पिलाते थे, क्योंकि भारतीय संस्कृति में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। एक समय था, जब शहरों में लगभग हर एक-दो किलोमीटर पर पेड़ों की छांव में पानी से भरे मिट्टी के घड़े रखे दिखाई देते थे। राहगीर स्वयं पानी निकालकर पीते और अपनी प्यास बुझाते थे। </p>
<p>विडंबना यह भी है कि जो देश कभी प्यासे को पानी पिलाने को सबसे बड़ा पुण्य मानता था, वही आज गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहा है। आज के समय में भूजल स्तर निरंतर नीचे जा रहा है। अनेक बड़े शहर गर्मियों में ‘डे-जीरो’ जैसी भयावह चेतावनियों का सामना कर रहे हैं। यह हमारे समय का सबसे बड़ा विरोधाभास है कि सामाजिक रूप से पानी का संकट गहराता जा रहा है, जबकि व्यावसायिक रूप से पानी हर जगह उपलब्ध है। पानी अब सेवा नहीं, व्यापार बनता जा रहा है। <strong>(ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 05:33:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामयिकी : दावानल लील लेती है प्राकृतिक जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats410.jpg" alt="cats" width="139" height="225" />
<strong>दीपक नौगांई, लेखक</strong>

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">पिछले गुरुवार 21 मई को उत्तराखंड के गोपेश्वर जनपद के जंगल में आग बुझाने गए फायर वॉचर राजेंद्र सिंह की जलने से मौत हो गई। उनका झुलसा हुआ शव करीब 70 मीटर नीचे गहरी खाई में मिला था। पिछले साल भी कुमाऊं में आग बुझाने गए वन कर्मियों की मौत हुई थी। सवाल है कि इस आग को समय रहते क्यों नहीं बुझाया गया और हर साल उत्तराखंड के जंगलों में यह आग लगना क्या सामान्य है? मई माह में उत्तराखंड के जंगल झुलस रहे हैं, अभी जून माह बाकी है। </p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड के जंगलों में आग का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582858/current-affairs--wildfires-devour-natural-life"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats409.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats410.jpg" alt="cats" width="139" height="225"></img>
<strong>दीपक नौगांई, लेखक</strong>

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">पिछले गुरुवार 21 मई को उत्तराखंड के गोपेश्वर जनपद के जंगल में आग बुझाने गए फायर वॉचर राजेंद्र सिंह की जलने से मौत हो गई। उनका झुलसा हुआ शव करीब 70 मीटर नीचे गहरी खाई में मिला था। पिछले साल भी कुमाऊं में आग बुझाने गए वन कर्मियों की मौत हुई थी। सवाल है कि इस आग को समय रहते क्यों नहीं बुझाया गया और हर साल उत्तराखंड के जंगलों में यह आग लगना क्या सामान्य है? मई माह में उत्तराखंड के जंगल झुलस रहे हैं, अभी जून माह बाकी है। </p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड के जंगलों में आग का यह सिलसिला 1995 की गर्मियों में शुरू हुआ था। तब से हर साल आग की विशालकाय लपटें हिमालय की हरीतिमा के एक बड़े हिस्से को कालिमा और राख में तब्दील कर रही है। इस आग से हर साल जहां हजारों की संख्या में हरे वृक्ष स्वाहा हो जाते हैं,  वहीं वन्य जीवों की कई प्रजातियां झुलस कर मर जाती हैं। अब तो आग बुझाने जा रहे लोग भी इस भीषण आग की भेंट चढ़ जा रहे हैं। जन सहभागिता का अभाव, सुदूर गांव में संचार माध्यमों की कमी, जंग खाते अग्नि शमन यंत्र, वन विभाग के पास मैन पॉवर की कमी के चलते इस बार भी अब तक हजारों हेक्टर वन क्षेत्र अग्नि की भेंट चढ़ चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड के जंगल असाधारण रूप से जल रहे हैं और यह आग हर साल बढ़ती ही जा रही है। अभी तक उत्तराखंड में डेढ़ हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल आग की आगोश में समा चुका हैं। स्थिति बहुत खराब है। हिमालय के जंगल लगभग इंडोनेशिया के जंगलों जैसे हो गए हैं, जो गर्मी के मौसम में हमेशा आग से घिरे रहते हैं। इस साल अप्रैल-मई के माह में जंगलों की आग बेकाबू हो चुकी है। नैनीताल से लेकर पौड़ी तक पूरी घाटी में धुंध और धुआं फैलने से लोग खासे परेशान हैं। लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। हर साल आग लगने की घटनाएं अब एक आम बात बन चुकी है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद जंगलों के धधकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुष्क मौसम के चलते जंगल की आग विकराल होती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल आग लगती है, पर इस आग को बुझाने का सिस्टम नाकाफी है। देखा जाए तो वन विभाग के पास कितने बड़े पैमाने पर लगने वाली आग से निपटने की न तो क्षमता है और न ही इच्छा शक्ति। जिम्मेदार अफसर गाड़ियों में घूम कर जंगल में लगी आग का आकलन कर नुकसान की भरपाई के लिए बजट की रूपरेखा तय करते हैं, वहीं दूसरी ओर वन कर्मियों के हाथों में पुराने उपकरण थमाकर भीषण आग को बुझाने के लिए भेज दिया जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">31 साल पहले 1995 में पहाड़ के जंगलों में भीषण आग लगी थी। तब लगभग छह हजार हेक्टेयर वन भूमि आग की भेंट चढ़ गई थी। उस भीषण दावानल की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने आग लगने के कारणों और निवारण की रणनीति सुझाने के लिए इस्पात मंत्रालय के पूर्व सचिव आरपी खोसला की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, लेकिन समिति द्वारा सुझाए दिशा-निर्देशों को कभी लागू नहीं किया गया। दरअसल खोसला समिति की रपट का भी वही हश्र हुआ जो देश में अमूमन इस तरह की समिति की रिपोर्टों का होता है। <strong>(ये लेखक के निजी विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 05:25:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पत्रकारिता, पूर्वाग्रह और भारतीय राजनीति का टकराव</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><em>नार्वे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान प्रेस ब्रीफिंग में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने भारतीय राजनीति, मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।</em></strong></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats408.jpg" alt="cats" width="136" height="169" />
<strong>जयदेव राठी, अधिवक्ता</strong>

<p style="text-align:justify;"><br />हाल ही में नार्वे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने भारतीय राजनीति, मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नार्वेजियन पत्रकार हेले लिंग द्वारा पूछे गए सवाल, विदेश सचिव सीबी जॉर्ज की प्रतिक्रिया और फिर सोशल मीडिया पर मचे राजनीतिक शोर ने इस पूरे मामले को केवल एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582857/journalism--bias--and-the-clash-with-indian-politics"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats407.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><strong><em>नार्वे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान प्रेस ब्रीफिंग में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने भारतीय राजनीति, मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।</em></strong></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats408.jpg" alt="cats" width="136" height="169"></img>
<strong>जयदेव राठी, अधिवक्ता</strong>

<p style="text-align:justify;"><br />हाल ही में नार्वे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने भारतीय राजनीति, मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नार्वेजियन पत्रकार हेले लिंग द्वारा पूछे गए सवाल, विदेश सचिव सीबी जॉर्ज की प्रतिक्रिया और फिर सोशल मीडिया पर मचे राजनीतिक शोर ने इस पूरे मामले को केवल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रहने दिया। यह विवाद अब ‘पत्रकारिता बनाम एजेंडा’, ‘लोकतंत्र बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण’ और ‘भारत की वैश्विक छवि’ जैसे बड़े प्रश्नों में बदल चुका है। नार्वे में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान पत्रकार ने भारत में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए। बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन सवालों का उत्तर देना उचित नहीं समझा और बाद में विदेश सचिव सिबी जॉर्ज ने भारतीय पक्ष रखा। इस दौरान माहौल कुछ तनावपूर्ण हो गया और पत्रकार बीच में प्रेस वार्ता छोड़कर चली गई। यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लोकतांत्रिक देशों में सत्ता से सवाल पूछना पत्रकारिता का मूल धर्म माना जाता है। किसी भी प्रधानमंत्री या सरकार से मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या लोकतंत्र पर प्रश्न पूछना असामान्य नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस या भारत— हर लोकतंत्र में मीडिया सरकार से तीखे सवाल करता है, इसलिए केवल सवाल पूछना अपने आप में गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस पूरे विवाद का दूसरा पक्ष यह है कि क्या सवाल निष्पक्ष जिज्ञासा के तहत पूछा गया था या पहले से तय धारणा के साथ? यही वह बिंदु है जहां बहस गहराती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में जिस प्रकार से प्रश्नों का स्वर दिखाई दिया, उसमें केवल जानकारी लेने की अपेक्षा आरोपों का भाव अधिक महसूस हुआ। ‘भारत पर भरोसा क्यों करें?’ जैसे सवाल सामान्य कूटनीतिक संवाद से अधिक राजनीतिक टिप्पणी जैसे प्रतीत हुए। आलोचकों का कहना है कि यदि किसी पत्रकार का उद्देश्य उत्तर सुनना कम और वैश्विक मंच पर किसी देश की छवि पर प्रश्नचिह्न लगाना अधिक हो, तो पत्रकारिता निष्पक्षता की सीमा से बाहर जाती दिखती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के समर्थक वर्ग का तर्क है कि पश्चिमी मीडिया लंबे समय से भारत को लेकर एक विशेष दृष्टिकोण रखता है। जब भारत आर्थिक, सामरिक और वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुंच रहा है, तब कुछ अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में असहजता दिखाई देती है। इसी कारण लोकतंत्र और मानवाधिकार के मुद्दों को चुनिंदा ढंग से उठाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर यह भी सच है कि किसी लोकतंत्र की ताकत आलोचनाओं को सुनने और उनका उत्तर देने में होती है। केवल ‘विदेशी एजेंडा’ कहकर हर सवाल को खारिज कर देना भी स्वस्थ लोकतांत्रिक सोच नहीं माना जा सकता। विदेश सचिव सिबी जॉर्ज ने प्रेस वार्ता में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां मीडिया स्वतंत्र है और नियमित चुनावों के माध्यम से जनता सरकार चुनती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी प्रतिक्रिया को भारत में काफी लोगों ने ‘कूटनीतिक दृढ़ता’ के रूप में देखा। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि भारतीय अधिकारियों ने संयम और स्पष्टता के साथ जवाब दिया। वहीं कुछ लोगों का मानना था कि ऐसे प्रश्नों का और अधिक विस्तार से जवाब देकर भारत अपनी स्थिति और मजबूती से रख सकता था। इस विवाद का सबसे रोचक पहलू भारत के अंदर की राजनीतिक प्रतिक्रिया रही। विपक्ष और कुछ बुद्धिजीवियों ने पत्रकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता से कठिन सवाल पूछना जरूरी है। वहीं सरकार समर्थकों ने इसे ‘भारत विरोधी मानसिकता’ बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में एक नई प्रवृत्ति देखने को मिली है-सरकार विरोध और राष्ट्र विरोध के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। सत्ता के विरोध में कई बार ऐसे बयान या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं, जिन्हें आम जनता भारत की छवि के खिलाफ मानने लगती है। दूसरी ओर सरकार समर्थक वर्ग हर आलोचना को ‘राष्ट्र विरोध’ बताकर खारिज कर देता है। यही ध्रुवीकरण इस पूरे विवाद में भी स्पष्ट दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल यह है कि क्या किसी विदेशी पत्रकार द्वारा भारत पर सवाल उठाने पर भारतीय विपक्ष को उसका समर्थन करना चाहिए? लोकतांत्रिक दृष्टि से देखा जाए तो विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है, लेकिन जब मामला अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश की छवि से जुड़ जाए, तब राजनीतिक संतुलन की अपेक्षा भी की जाती है। अमेरिका, चीन, रूस या यूरोप के कई देशों में देखा गया है कि आंतरिक राजनीति चाहे कितनी भी तीखी क्यों न हो, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर राष्ट्रीय हितों को लेकर अपेक्षाकृत एकजुटता दिखाई देती है। भारत में यह परंपरा अभी भी कमजोर नजर आती है।<strong>  (ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 05:17:30 +0530</pubDate>
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                <title>प्रौद्योगिकी और समाज का उभरता नया स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><strong><em>प्रौद्योगिकी और समाज का संबंध केवल उपयोगकर्ता और साधन का नहीं है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, बदलते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं।</em></strong></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats406.jpg" alt="cats" width="111" height="144" />
राजेश श्रीनेत,<br />वरिष्ठ पत्रकार

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">प्रौद्योगिकी और समाज का संबंध केवल उपयोगकर्ता और साधन का नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, बदलते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं। इसे परस्पर निर्भरता, सहनिर्भरता, सहप्रभाव और सहउत्पादन के रूप में समझा जा सकता है। समाज तकनीक को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करता है और तकनीक समाज के व्यवहार, सोच, कार्यशैली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582856/the-emerging-new-landscape-of-technology-and-society"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats405.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><strong><em>प्रौद्योगिकी और समाज का संबंध केवल उपयोगकर्ता और साधन का नहीं है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, बदलते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं।</em></strong></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats406.jpg" alt="cats" width="111" height="144"></img>
राजेश श्रीनेत,<br />वरिष्ठ पत्रकार

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">प्रौद्योगिकी और समाज का संबंध केवल उपयोगकर्ता और साधन का नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, बदलते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं। इसे परस्पर निर्भरता, सहनिर्भरता, सहप्रभाव और सहउत्पादन के रूप में समझा जा सकता है। समाज तकनीक को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करता है और तकनीक समाज के व्यवहार, सोच, कार्यशैली और जीवन पद्धति को बदल देती है। आज के भारत में यह संबंध बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, क्योंकि तकनीकी परिवर्तन हमारे जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में डिजिटल क्रांति ने इस संबंध को नई दिशा दी है। पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट और स्मार्टफोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। गांवों से लेकर शहरों तक लोग तकनीक से जुड़ रहे हैं। एक समय था जब सरकारी सेवाओं के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था, लेकिन आज डिजिटल माध्यमों से कई कार्य घर बैठे पूरे किए जा सकते हैं। आधार, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और सरकारी पोर्टलों ने आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है। यहां समाज की जरूरतों ने तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया और तकनीक ने समाज को नई सुविधाएं दीं।<br />भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई इसका एक अच्छा उदाहरण है। समाज को तेज, सुरक्षित और सरल भुगतान व्यवस्था की आवश्यकता थी। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डिजिटल भुगतान प्रणाली को विकसित किया गया। आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यवसाय तक डिजिटल भुगतान को अपनाने लगे हैं। सड़क किनारे सब्जी बेचने वाला व्यक्ति भी क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि समाज और तकनीक एक दूसरे को आगे बढ़ा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा के क्षेत्र में भी यह परिवर्तन देखा जा सकता है। कोविड महामारी के दौरान विद्यालय और विश्वविद्यालय बंद हो गए थे। उस समय ऑनलाइन शिक्षा एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने डिजिटल मंचों का उपयोग करना शुरू किया, हालांकि शुरुआत में कई चुनौतियां भी सामने आईं, जैसे इंटरनेट की कमी, उपकरणों की अनुपलब्धता और डिजिटल ज्ञान का अभाव, लेकिन धीरे-धीरे समाज ने इन तकनीकों को स्वीकार किया और तकनीकी संस्थानों ने भी अपनी सेवाओं में सुधार किया। इससे यह सिद्ध होता है कि समाज तकनीक को आकार देता है और तकनीक समाज को नई दिशा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रभाव भी इसी संबंध का उदाहरण है। भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में इसका उपयोग बढ़ रहा है। किसान मौसम की जानकारी और खेती से जुड़ी सलाह मोबाइल एप्स के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं। अस्पतालों में रोगों की पहचान के लिए नई तकनीकों का प्रयोग हो रहा है। शिक्षा में व्यक्तिगत अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसके साथ रोजगार, गोपनीयता और मानवीय मूल्यों से जुड़ी चिंताएं भी सामने आ रही हैं, इसलिए समाज यह तय कर रहा है कि तकनीक का उपयोग किस सीमा तक और किस प्रकार किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया ने भी समाज और प्रौद्योगिकी के बीच सहप्रभाव को मजबूत किया है। आज लोग अपनी बात कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुंचा सकते हैं। सामाजिक आंदोलनों, जनजागरूकता अभियानों और सरकारी योजनाओं के प्रचार में सोशल मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन इसके साथ गलत सूचनाओं, फर्जी खबरों और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। इस कारण समाज को तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता महसूस हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में कृषि क्षेत्र में तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन, सेंसर और आधुनिक मशीनों का उपयोग खेती को अधिक प्रभावी बना रहा है। किसान डिजिटल मंचों के माध्यम से बाजार की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल कर रहे हैं। यहां भी समाज की आवश्यकताओं ने तकनीकी नवाचार को जन्म दिया और तकनीक ने कृषि व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तकनीक और समाज का संबंध केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और नैतिक पहलुओं को भी प्रभावित करता है। नई तकनीकें लोगों के व्यवहार और संबंधों को बदल रही हैं। आज लोग पहले की तुलना में अधिक डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो गए हैं। परिवारों और मित्रों के बीच संवाद के तरीके बदल गए हैं। कार्य संस्कृति में भी परिवर्तन आया है। वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं तकनीकी विकास का परिणाम हैं, जिन्होंने सामाजिक जीवन को नई दिशा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">तकनीकी विकास के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं। भारत में डिजिटल विभाजन अभी भी एक महत्वपूर्ण समस्या है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की कमी है। सभी लोगों को समान अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दे भी बढ़ रहे हैं। यदि समाज इन चुनौतियों का समाधान नहीं करेगा तो तकनीकी विकास का लाभ सभी तक समान रूप से नहीं पहुंच पाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भारत तेजी से तकनीकी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहित कर रही है। दूसरी ओर समाज भी नई तकनीकों को स्वीकार कर रहा है और अपनी जरूरतों के अनुसार उनमें परिवर्तन की मांग कर रहा है। यह प्रक्रिया बताती है कि तकनीक और समाज एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि दोनों एक दूसरे के निर्माण और विकास में सहभागी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 05:09:57 +0530</pubDate>
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                <title>बेटियां सुरक्षित-व्यापारी बेखौफ, मिट्टी में मिल गए माफिया...  सीएम योगी फिर बोले- छेड़छाड़ करने पर यमराज का टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ/देवरिया, अमृत विचार:</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की कानून व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा कि हर जिले में माफिया सक्रिय थे। त्योहारों पर उपद्रव, गरीबों की जमीनों पर कब्जा, बेटियों और व्यापारियों में भय का माहौल था। आज बेटियां सुरक्षित हैं और व्यापारी बेखौफ। कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता क्योंकि माफिया मिट्टी में मिल गए। योगी ने चेताया कि यदि कोई शोहदा छेड़छाड़ का दुस्साहस करेगा तो यमराज उसका टिकट काटने के लिए तैयार बैठे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार को देवरिया में 655 करोड़ रुपये की लागत से 19 विकास परियोजनाओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582865/daughters-are-safe--traders-fearless--the-mafia-has-been-reduced-to-dust----cm-yogi-reiterates--harassers-will-get-a-one-way-ticket-to-the-realm-of-death"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ/देवरिया, अमृत विचार:</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की कानून व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा कि हर जिले में माफिया सक्रिय थे। त्योहारों पर उपद्रव, गरीबों की जमीनों पर कब्जा, बेटियों और व्यापारियों में भय का माहौल था। आज बेटियां सुरक्षित हैं और व्यापारी बेखौफ। कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता क्योंकि माफिया मिट्टी में मिल गए। योगी ने चेताया कि यदि कोई शोहदा छेड़छाड़ का दुस्साहस करेगा तो यमराज उसका टिकट काटने के लिए तैयार बैठे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार को देवरिया में 655 करोड़ रुपये की लागत से 19 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने को बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कहा कि यह सरकार समस्याओं को टालने वाली नहीं, बल्कि समाधान देने वाली सरकार है। हम समस्याएं नहीं, समाधान देते हैं, तभी जनता जनार्दन हमें चुनती है। आज उत्तर प्रदेश की पहचान बदल चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">“वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया” की जगह “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज” और “वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट” ने ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति पकड़ी है और अब विकास की यह यात्रा रुकने वाली नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवरिया की जनता ने 2022 चुनाव में भाजपा को सातों विधानसभा सीटें जिताकर बड़ा समर्थन दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए सरकार देवरिया की किसी भी विकास परियोजना को रुकने नहीं देगी। उन्होंने पूर्व सपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि तब मोहन सिंह सेतु के लिए केवल “टोकन मनी” दी गई थी, जबकि अब सरकार समयबद्ध तरीके से पुल निर्माण पूरा कराएगी और धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम, सांसद शशांक मणि, विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, विधायक सुरेंद्र चौरसिया, विधायक सभाकुंवर कुशवाहा, विधायक दीपक कुमार मिश्र "शाका", विधायक जय प्रकाश निषाद, डॉ रतनपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का हुआ पुनर्जागरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश की पहचान गुंडों व माफियाओं से होती थी, लेकिन आज पूरे देश में यूपी का नाम सम्मान व गर्व के साथ लिया जाता है। यूपी विरासत और विकास, दोनों का संगम बन चुका है। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, नैमिषारण्य, विंध्यधाम, प्रयागराज और कुशीनगर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का पुनर्जागरण हुआ है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से लिंक होगा देवरिया</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देवरिया फोर लेन कनेक्टिविटी से जुड़ चुका है। यहां से गोरखपुर पहुंचने का समय घट गया है। देवरिया से बलिया तक सड़क परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। देवरिया-कसया फोर लेन मार्ग और बाईपास बनने से न केवल यातायात आसान होगा, बल्कि यह नॉर्थ-साउथ कनेक्टिविटी का बड़ा हिस्सा बनेगा। यह मार्ग देवरिया को मऊ, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, वाराणसी व लखनऊ से जोड़ेगा और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से भी लिंक होगा। इससे पूर्वांचल की कनेक्टिविटी नई ऊंचाई पर पहुंचेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>देवरिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 21:55:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आईपीएल 2026 : अभिषेक-ईशान और क्लासेन ने जड़ा अर्धशतक, हैदराबाद ने  बेंगलुरु को दिया 256 रनों का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद। </strong>सनराइजर्स हैदराबाद ने ईशान किशन (79 रन), अभिषेक शर्मा (56 रन) और हेनरिक क्लासेन (51 रन) के अर्धशतकों की मदद से शुकवार को यहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के खिलाफ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैच में चार विकेट पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईशान ने 46 गेंद का सामना करते हुए आठ चौके और तीन छक्के जमाए। अभिषेक ने 22 गेंद की पारी में चार चौके और पांच छक्के लगाए। क्लासेन 24 गेंद में दो चौके और पांच छक्के से अर्धशतक बनाकर आउट हुए। आरसीबी के लिए रसिख सलाम ने दो जबकि सुयश शर्मा और कृणाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582867/ipl-2026--abhishek--ishan--and-klaasen-score-half-centuries--hyderabad-sets-a-target-of-256-runs-for-bengaluru"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats419.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद। </strong>सनराइजर्स हैदराबाद ने ईशान किशन (79 रन), अभिषेक शर्मा (56 रन) और हेनरिक क्लासेन (51 रन) के अर्धशतकों की मदद से शुकवार को यहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के खिलाफ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैच में चार विकेट पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">ईशान ने 46 गेंद का सामना करते हुए आठ चौके और तीन छक्के जमाए। अभिषेक ने 22 गेंद की पारी में चार चौके और पांच छक्के लगाए। क्लासेन 24 गेंद में दो चौके और पांच छक्के से अर्धशतक बनाकर आउट हुए। आरसीबी के लिए रसिख सलाम ने दो जबकि सुयश शर्मा और कृणाल पंड्या ने एक एक विकेट झटका।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अभिषेक और हेड ने दिलाई तूफानी शुरुआत </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड ने हैदराबाद को तूफानी शुरुआत दिलाई। दोनों ने केवल 4 ओवर में स्कोर बोर्ड पर 45 रन लगा दिए। हेड 26 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद अभिषेक ने ईशान किशन के साथ मिलकर अर्धशतकीय साझेदारी की। अभिषेक शर्मा 22 गेंदों पर 4 चौके 5 छक्कों की मदद से 56 रन बनाकर आउट हुए।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 21:51:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरेली में बिजली संकट गहराया : तीन दिन से बिजली-पानी गुल, गुस्साए लोगों ने लगाया जाम, पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद बहाल हुआ यातायात </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के शांति विहार इलाके में बीते तीन दिनों से बिजली और पानी के लिए 50 हजार की आबादी तरस रही है। जिससे शुक्रवार शाम को लोगों का सब्र टूट गया और गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बवाल बढ़ने की स्थिति में मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह से लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। जिसके बाद जाम खुलवा कर यातायात बहाल कराया गया। सुभाषनगर थाना क्षेत्र के शांति विहार कॉलोनी में तीन दिनों से बिजली पानी नहीं आ रहा है। लोगों के इन्वर्टर भी बंद हो गए हैं और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582866/power-crisis-deepens-in-bareilly--electricity-and-water-supply-cut-off-for-three-days--angry-residents-block-roads--traffic-restored-after-arduous-efforts-by-police"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats417.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के शांति विहार इलाके में बीते तीन दिनों से बिजली और पानी के लिए 50 हजार की आबादी तरस रही है। जिससे शुक्रवार शाम को लोगों का सब्र टूट गया और गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बवाल बढ़ने की स्थिति में मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह से लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। जिसके बाद जाम खुलवा कर यातायात बहाल कराया गया। सुभाषनगर थाना क्षेत्र के शांति विहार कॉलोनी में तीन दिनों से बिजली पानी नहीं आ रहा है। लोगों के इन्वर्टर भी बंद हो गए हैं और सोलर पैनल भी बेकार हो गए। लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जैसे हालात फिर से आ गया है। पहले भी इसी तरह से लाइट कई दिनों तक गायब रहता था। गुस्साए लोगों ने करीब आधे घंटे तक रोड जाम रख कर हाईवोल्टेज ड्रामा काटा। मौके पर सुभाषनगर थाना प्रभारी सतीश कुमार नैन पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। जिसके बाद समझा बुझाकर लोगों को शांत कराया गया और जाम खुलवाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">हंगामा कर रहे लोगों का कहना था कि इस गंभीर समस्या की शिकायत लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों के पास जाओ तो तो समाधान करने के बजाय दुत्कार कर भगा देते हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि जेई रविंद्र कुमार और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने साफ कह दिया कि न तो स्टाफ है और न ही कोई व्यवस्था, जो करना है कर लो।</p>
<p style="text-align:justify;">बिजली विभाग का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया और अभद्र व्यवहार जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। स्थानीय युवाओं और संभ्रांत नागरिकों ने मौके पर टूटे हुए सपोर्टिंग वायर और बिजली लाइनों को दिखाते हुए रोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि कल शाम 7:00 बजे से मुख्य लाइन टूटी पड़ी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन विभाग का कोई कर्मचारी इसे ठीक करने नहीं आया। संविदा कर्मियों के भरोसे पूरे मोहल्ले को छोड़ दिया गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हेल्प डेस्क पर सिर्फ खाना पूर्ति... </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बिजली विभाग के हेल्प डेस्क पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। शिकायत दर्ज तो हो जाती है, लेकिन समाधान नहीं होता। स्टाफ की भारी कमी और वर्टिकल की लापरवाही ने पूरे बरेली जिले की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह झंझोर दिया है। पूरा जिला इन दिनों अंधेरे की चपेट में है। लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। मुख्य अभियंता केवल चेकिंग तक सीमित हैं, जबकि टैक्स वसूली का पैसा आ रहा है, लेकिन जनता की समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो रहा।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats418.jpg" alt="cats" width="1280" height="720"></img>
<strong>C.b Ganj power house</strong>

<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सीबीगंज पावर हाउस का घेराव, उपभोक्ताओं में बढ़ा आक्रोश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सीबीगंज पावर हाउस क्षेत्र में लगातार बिगड़ रही विद्युत व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार की शाम को बाकरगंज वाल्मीकि बस्ती से आए लोगों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उपकेंद्र का घेराव किया। लोगों ने आरोप लगाया कि पावर हाउस पर स्थापित हेल्प डेस्क केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उनका आरोप है कि यहां शिकायतें तो दर्ज की जाती हैं, लेकिन उनके समाधान के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टाफ की भारी कमी के कारण बिजली संबंधी समस्याओं का समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। लगातार फॉल्ट और ट्रिपिंग की घटनाओं ने क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। उपभोक्ताओं के अनुसार कई इलाकों में घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से लोगों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी केवल औचक निरीक्षण और चेकिंग अभियानों में व्यस्त हैं, जबकि जमीनी स्तर पर बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमराई हुई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582866/power-crisis-deepens-in-bareilly--electricity-and-water-supply-cut-off-for-three-days--angry-residents-block-roads--traffic-restored-after-arduous-efforts-by-police</link>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 21:43:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानपुर : गरीब परिवार की बेटियों के हाथ पीले करेगी योगी सरकार, तैयारी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कानपुर नगर में बड़े स्तर पर सामूहिक विवाह समारोह की तैयारी शुरू हो गई है। इस सिलसिले में शुक्रवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में योजना की तैयारियों, आवेदन प्रक्रिया, सत्यापन एवं आयोजन व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामूहिक विवाह समारोह को गरिमापूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य तरीके से आयोजित किया जाए तथा पात्र परिवारों को समय से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए। बैठक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582864/kanpur--the-yogi-government-to-arrange-marriages-for-daughters-from-poor-families--preparations-underway"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कानपुर नगर में बड़े स्तर पर सामूहिक विवाह समारोह की तैयारी शुरू हो गई है। इस सिलसिले में शुक्रवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में योजना की तैयारियों, आवेदन प्रक्रिया, सत्यापन एवं आयोजन व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामूहिक विवाह समारोह को गरिमापूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य तरीके से आयोजित किया जाए तथा पात्र परिवारों को समय से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद को 1534 विवाहों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके सापेक्ष अब तक 542 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 509 आवेदन ग्रामीण क्षेत्रों तथा 33 आवेदन शहरी क्षेत्रों से मिले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवेदन पत्रों का सत्यापन समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। योजना के तहत प्रति जोड़ा एक लाख रुपये व्यय निर्धारित किया गया है। इसमें 60 हजार रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे कन्या के बैंक खाते में भेजे जाएंगे। इसके अतिरिक्त 25 हजार रुपये मूल्य की वैवाहिक उपहार सामग्री प्रदान की जाएगी, जबकि भोजन, पंडाल, फर्नीचर, पेयजल, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था जैसी व्यवस्थाओं पर 15 हजार रुपये प्रति जोड़ा खर्च किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">योजना के अंतर्गत नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें साड़ी, वस्त्र, चांदी की पायल और बिछिया, डिनर सेट, कुकर, कढ़ाही, ट्रॉली बैग, वैनिटी किट, सीलिंग फैन, आयरन प्रेस, कूल केज, कंबल, गद्दा, तकिया एवं बेडशीट सहित अन्य सामग्री शामिल होगी। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">कन्या के अभिभावक उत्तर प्रदेश के मूल निवासी तथा वर भारत का मूल निवासी होना अनिवार्य है। विवाह की तिथि पर कन्या की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा वर की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी सहायता साबित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा सभी आवेदन समयबद्ध तरीके से सत्यापित किए जाएं। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जैन, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम सदर अनुभव सिंह, सभी खंड विकास अधिकारी एवं नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे, जबकि समाज कल्याण अधिकारी बीरपाल बैठक में उपस्थित रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 21:19:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kanpur News: मंत्री कपिल देव ने किया आईटीआई कानपुर का निरीक्षण, प्रशिक्षण को लेकर दिए ये अहम निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने शुक्रवार को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) कानपुर का निरीक्षण कर प्रशिक्षण व्यवस्थाओं, संसाधनों और निर्माण कार्यों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने संस्थान में संचालित विभिन्न व्यवसायों एवं प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से संवाद कर उनके कौशल विकास, प्रशिक्षण अनुभव तथा भविष्य की रोजगार संभावनाओं की जानकारी ली। मंत्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582863/kanpur-news--minister-kapil-dev-inspects-iti-kanpur--issues-key-directives-regarding-training"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats416.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने शुक्रवार को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) कानपुर का निरीक्षण कर प्रशिक्षण व्यवस्थाओं, संसाधनों और निर्माण कार्यों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने संस्थान में संचालित विभिन्न व्यवसायों एवं प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से संवाद कर उनके कौशल विकास, प्रशिक्षण अनुभव तथा भविष्य की रोजगार संभावनाओं की जानकारी ली। मंत्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कौशल विकास संस्थानों का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगारपरक और व्यवहारिक ज्ञान प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संस्थान में मौजूद समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनका स्थलीय निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र समाधान के निर्देश दिए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रशिक्षार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण वातावरण, आधुनिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। अग्रवाल ने संस्थान परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों से संबंधित अभिलेखों एवं पत्रावलियों का भी अवलोकन किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए सभी प्रशिक्षण संस्थानों को अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने की आवश्यकता है। निरीक्षण के दौरान संयुक्त निदेशक आर.के. मौर्य, प्रधानाचार्य हरीश मिश्रा, प्रधानाचार्य मयंक मिश्रा, मीडिया प्रभारी अजय कुमार द्विवेदी, संदीप कुमार, मोहित श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582863/kanpur-news--minister-kapil-dev-inspects-iti-kanpur--issues-key-directives-regarding-training</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/582863/kanpur-news--minister-kapil-dev-inspects-iti-kanpur--issues-key-directives-regarding-training</guid>
                <pubDate>Fri, 22 May 2026 21:13:19 +0530</pubDate>
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                <title>Kanpur News: समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे एमएसएमई योजनाओं का लाभ, कानपुर बोले भूपेन्द्र चौधरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने शुक्रवार को उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, कानपुर में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर एमएसएमई योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और रोजगार सृजन को गति देने पर जोर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, ओडीओपी मार्जिन मनी योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना सहित विभिन्न रोजगारपरक एवं उद्यम प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, ओडीओपी सामान्य सुविधा केंद्र तथा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582862/kanpur-news--benefits-of-msme-schemes-must-reach-the-last-person-in-society-%E2%80%94-bhupendra-chaudhary-in-kanpur"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats415.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने शुक्रवार को उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, कानपुर में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर एमएसएमई योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और रोजगार सृजन को गति देने पर जोर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, ओडीओपी मार्जिन मनी योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना सहित विभिन्न रोजगारपरक एवं उद्यम प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, ओडीओपी सामान्य सुविधा केंद्र तथा प्लेज योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। चौधरी ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर विकसित किए जाएं। साथ ही रोजगारपरक योजनाओं में बैंकिंग स्तर पर आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने तथा अधिकतम रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक में उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 की उपलब्धियों, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों एवं बजटीय प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही प्रस्तावित "सरदार वल्लभभाई पटेल औद्योगिक एवं एम्प्लायमेंट जोन" तथा "एक जनपद एक व्यंजन" योजना की प्रगति की जानकारी भी साझा की गई। बैठक का समापन आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर सदस्य विधान परिषद संतोष सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 21:06:35 +0530</pubDate>
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                <title>Kanpur News: कानपुर में 1600 GST घोटाले का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड फिरोज को पुलिस ने किया गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>कानपुर के श्याम नगर क्षेत्र में फरवरी माह में हुई डकैती की घटना के अनावरण के दौरान पुलिस जांच में एक बड़े जीएसटी फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार इस मामले में लगभग 1600 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले के तथ्य सामने आए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस उपायुक्त पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर मामले में मुकदमा दर्ज कराने में कठिनाइयां आ रही थीं, लेकिन पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई करते हुए घटना का सफल अनावरण किया गया। जांच के दौरान महफूज नामक व्यक्ति का नाम सामने आया, जिसके माध्यम से बड़े पैमाने पर जीएसटी फ्रॉड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582861/kanpur-news--%E2%82%B91-600-crore-gst-scam-unearthed-in-kanpur--mastermind-firoz-arrested-by-police"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats414.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>कानपुर के श्याम नगर क्षेत्र में फरवरी माह में हुई डकैती की घटना के अनावरण के दौरान पुलिस जांच में एक बड़े जीएसटी फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार इस मामले में लगभग 1600 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले के तथ्य सामने आए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस उपायुक्त पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर मामले में मुकदमा दर्ज कराने में कठिनाइयां आ रही थीं, लेकिन पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई करते हुए घटना का सफल अनावरण किया गया। जांच के दौरान महफूज नामक व्यक्ति का नाम सामने आया, जिसके माध्यम से बड़े पैमाने पर जीएसटी फ्रॉड का खुलासा हुआ। </p>
<p style="text-align:justify;">जांच में पता चला कि गिरोह मुख्य रूप से स्लॉटरिंग के लिए जाने वाली भैंसों तथा स्क्रैप कारोबार से संबंधित फर्जी फर्म बनाकर बोगस बिलिंग और फर्जी इनवॉइस तैयार करता था। इन गतिविधियों के जरिए राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई जा रही थी। पुलिस ने इस प्रकरण में फिरोज खान नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो स्वयं को जीएसटी अधिवक्ता बताता था। </p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार फिरोज खान फर्जी फर्मों के संचालन, जीएसटी पंजीकरण, बोगस बिल तैयार कराने तथा जीएसटी लाभ के दुरुपयोग में अहम भूमिका निभा रहा था और पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। अभियुक्त फिरोज खान के खिलाफ कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। जांच में नूर आलम, संजीव दीक्षित तथा अन्य सहयोगियों की संलिप्तता भी सामने आई है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है और मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 20:59:48 +0530</pubDate>
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