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                <title>Deepak Mishra - Amrit Vichar</title>
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                <description>Deepak Mishra RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बंगाल चुनाव में 'प्रबल सत्ता-विरोधी लहर : अलोकप्रियता' का दिखा असर, 35 मंत्रियों में 22 चुनाव हारे </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की भारी हार 'प्रबल सत्ता-विरोधी लहर और अलोकप्रियता' को दर्शाती है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 35 मंत्रियों में से 22 को पराजय का सामना करना पड़ा। सूत्रों ने मंगलवार को चुनाव परिणामों का विश्लेषण करके बताया कि कैबिनेट मंत्रियों में से 63 प्रतिशत मंत्री अपनी सीटें नहीं जीत सके और यह दर्शाता है कि राज्य में शासन करने वाले नेतृत्व को सीधे तौर पर नकार दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सूत्र ने कहा, ''इस हार को और भी महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि हारने वाले मंत्री कद्दावर नेता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580998/impact-of--strong-anti-incumbency-wave-and-unpopularity--evident-in-bengal-elections--22-out-of-35-ministers-lose"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-02/ममताा.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की भारी हार 'प्रबल सत्ता-विरोधी लहर और अलोकप्रियता' को दर्शाती है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 35 मंत्रियों में से 22 को पराजय का सामना करना पड़ा। सूत्रों ने मंगलवार को चुनाव परिणामों का विश्लेषण करके बताया कि कैबिनेट मंत्रियों में से 63 प्रतिशत मंत्री अपनी सीटें नहीं जीत सके और यह दर्शाता है कि राज्य में शासन करने वाले नेतृत्व को सीधे तौर पर नकार दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सूत्र ने कहा, ''इस हार को और भी महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि हारने वाले मंत्री कद्दावर नेता थे जिनके पास महत्वपूर्ण विभाग थे। सूत्रों ने बताया कि मतदाताओं ने महिला एवं बाल विकास, उद्योग, आवास, बिजली, शिक्षा, परिवहन और पिछड़ा वर्ग जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले मंत्रियों को नकार दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हारने वाले टीएमसी के मंत्रियों में भवानीपुर से ममता बनर्जी (मुख्यमंत्री), टॉलीगंज से अरूप बिस्वास (आवास, बिजली), दमदम से ब्रत्य बसु (उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा), दमदम उत्तर से चंद्रिमा भट्टाचार्य (पर्यावरण, वित्त, कार्यक्रम निगरानी), श्यामपुकुर से शशि पांजा (उद्योग, वाणिज्य और उद्यम; महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण), बिधाननगर से सुजीत बोस (अग्नि एवं आपातकालीन सेवा), चंदननगर से इंद्रनील सेन (तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास; पर्यटन) शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य हारने वाले मंत्रियों में सिंगुर से बेचाराम मन्ना (कृषि विपणन), पूर्बस्थली दक्षिण से स्वपन देबनाथ (पशु संसाधन विकास), माल से बुलु चिक बड़ाईक (पिछड़ा वर्ग कल्याण, जनजातीय विकास), दुर्गापुर पूर्व से प्रदीप के मजूमदार (सहकारिता, पंचायत और ग्रामीण विकास); बिनपुर से बिरबाहा हांसदा (वन, स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगार); सबांग से मानस रंजन भुइयां(सिंचाई एवं जलमार्ग, जल संसाधन जांच एवं विकास); आसनसोल उत्तर से मोलॉय घटक (श्रम), मोंटेश्वर से सिद्दीकुल्लाह चौधरी (जन शिक्षा विस्तार और पुस्तकालय सेवाएं)।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनहाटा से उदयन गुहा (उत्तर बंगाल विकास); मनबाजार से संध्यारानी टुडू (पश्चिमांचल उन्नयन मामले); सागर से बंकिम चंद्र हाजरा (सुंदरबन मामले); कृष्णानगर दक्षिण से उज्ज्वल बिस्वास (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और जैव-प्रौद्योगिकी); जंगीपारा से स्नेहाशीष चक्रवर्ती (परिवहन), सालबोनी से श्रीकांत महतो (उपभोक्ता मामले के राज्य मंत्री) और हेमताबाद से सत्यजीत बर्मन (स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री) भी चुनाव हार गए।</p>
<p style="text-align:justify;">टीएमसी के उद्योग, वाणिज्य और उद्यम मंत्री शशि पांजा श्यामपुकुर सीट से भाजपा की पूर्णिमा चक्रवर्ती से 14,600 से अधिक वोटों से हार गए। टीएमसी के पूर्व मंत्री निर्मल माझी गोघाट सीट भाजपा के प्रशांत दिगर से 49,500 से अधिक वोटों के भारी अंतर से हार गए। उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदय गुहा दिनहाटा सीट भाजपा के अजय राय से 17,400 से अधिक वोटों से हार गए।</p>
<p style="text-align:justify;">अल्पसंख्यक समुदाय का प्रमुख चेहरा व मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी को मोंटेस्वर सीट पर भाजपा के सैकत पांजा से 14,700 से अधिक वोटों के भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा। पश्चिम बंगाल के सहकारिता मंत्री प्रदीप मजूमदार दुर्गापुर पूर्व सीट भाजपा के चंद्रशेखर बनर्जी से 30,900 वोटों के अंतर से हार गए।</p>
<p style="text-align:justify;">टीएमसी की वरिष्ठ नेता और पर्यावरण मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य दमदम उत्तर सीट पर भाजपा के सौरव सिकदर से 26,400 से अधिक वोटों के अंतर से हार गईं। भारत के राजनीतिक मानचित्र को पूरी तरह से बदलने वाले एक ऐतिहासिक क्षण के तहत भाजपा ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में 206 सीट जीतकर सत्ता हासिल की।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा ने विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया, टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत किया और राज्य के वैचारिक और राजनीतिक केंद्र को निर्णायक रूप से बदल दिया। यह शानदार जीत केवल चुनावी गणित से कहीं अधिक है, इसने राज्य में लंबे समय से चले आ रहे ममता बनर्जी के प्रभुत्व को करारा झटका देकर क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य को नया रूप दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:46:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मैं इस्तीफा नहीं दूंगी...  पराजय पर बोलीं ममता बनर्जी- चुनाव परिणाम जनता का जनादेश नहीं, बल्कि साजिश का नतीजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद मंगलवार को पद छोड़ने से इनकार कर दिया और दावा किया कि यह चुनाव परिणाम जनता का वास्तविक जनादेश नहीं, बल्कि एक साजिश का नतीजा है। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई निर्वाचन आयोग से थी, जिसने भाजपा के लिए काम किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580997/mamata-banerjee-on-the-defeat--states-that-the-election-results-are-not-the-people-s-mandate--but-rather-the-outcome-of-a-conspiracy"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats84.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद मंगलवार को पद छोड़ने से इनकार कर दिया और दावा किया कि यह चुनाव परिणाम जनता का वास्तविक जनादेश नहीं, बल्कि एक साजिश का नतीजा है। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई निर्वाचन आयोग से थी, जिसने भाजपा के लिए काम किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है।… मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।'' बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट पर जनादेश को 'लूट' लिया गया और उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''इतिहास में एक काला अध्याय जुड़ गया है।'' तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए 10 सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति के गठन की भी घोषणा की। उन्होंने 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा के आरोपों को निराधार बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">बनर्जी ने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस) के कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ''विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने मुझे फोन करके एकजुटता व्यक्त की। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी मुझसे बात की है।'' बनर्जी ने कहा कि अब उनका ध्यान राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर होगा। भाजपा ने 207 सीट जीतकर 294 सदस्यीय विधानसभा में निर्णायक बहुमत हासिल किया और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:41:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>KMP एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा : जालौन के 4 पुलिसकर्मियों समेत पांच की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जालौन। </strong>उरई कोतवाली में तैनात पांच पुलिसकर्मियों की सोमवार को Haryana के नूह जिले में कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे पर हुए सड़क हादसे में मौत हो गई। मरने वालों में दो दरोगा और तीन सिपाही शामिल हैं। सभी पुलिसकर्मी किसी अपराधी के ठिकाने पर दबिश देने जा रहे थे, तभी उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई। हादसा एक्सप्रेस-वे के धुलावट टोल प्लाजा के पास हुआ। जानकारी के अनुसार, पांचों पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। </p>
<h5><strong>मृतक सभी उरई कोतवाली में तैनात थे</strong></h5>
<p>मृतकों की पहचान जालौन जिले की उरई कोतवाली में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580993/horrific-accident-on-kmp-expressway--five-dead--including-four-police-personnel-from-jalaun"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats83.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जालौन। </strong>उरई कोतवाली में तैनात पांच पुलिसकर्मियों की सोमवार को Haryana के नूह जिले में कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे पर हुए सड़क हादसे में मौत हो गई। मरने वालों में दो दरोगा और तीन सिपाही शामिल हैं। सभी पुलिसकर्मी किसी अपराधी के ठिकाने पर दबिश देने जा रहे थे, तभी उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई। हादसा एक्सप्रेस-वे के धुलावट टोल प्लाजा के पास हुआ। जानकारी के अनुसार, पांचों पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। </p>
<h5><strong>मृतक सभी उरई कोतवाली में तैनात थे</strong></h5>
<p>मृतकों की पहचान जालौन जिले की उरई कोतवाली में तैनात पुलिसकर्मियों के रूप में हुई है। टीम अपराधी को पकड़ने के लिए जा रही थी, उसी दौरान यह हादसा हो गया। सूचना मिलते ही नूह पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>जालौन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:24:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भदोही : लड़कियों को अगवा कर बेचने वाले गिरोह का फरार सदस्य गिरफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> उत्तर प्रदेश के भदोही पुलिस ने लड़कियों का अपहरण कर उनसे सामूहिक बलात्कार करने के बाद उन्हें बेच देने वाले अंतर्राज्यीय संगठित गिरोह के फरार सदस्य को मेरठ से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने मंगलवार को बताया कि ज्ञानपुर थाने में एक महिला ने 15 अक्टूबर की दोपहर बाजार गई उसकी 16 साल की बेटी के वापस नहीं लौटने पर 22 अक्टूबर को अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">त्यागी ने बताया कि विवेचना में सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से भदोही निवासी संतोष यादव, बिजनौर की रहने वाली ऊषा सिंह, मेरठ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580988/bhadohi--absconding-member-of-gang-involved-in-kidnapping-and-selling-girls-arrested"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/arest2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> उत्तर प्रदेश के भदोही पुलिस ने लड़कियों का अपहरण कर उनसे सामूहिक बलात्कार करने के बाद उन्हें बेच देने वाले अंतर्राज्यीय संगठित गिरोह के फरार सदस्य को मेरठ से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने मंगलवार को बताया कि ज्ञानपुर थाने में एक महिला ने 15 अक्टूबर की दोपहर बाजार गई उसकी 16 साल की बेटी के वापस नहीं लौटने पर 22 अक्टूबर को अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">त्यागी ने बताया कि विवेचना में सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से भदोही निवासी संतोष यादव, बिजनौर की रहने वाली ऊषा सिंह, मेरठ के निवासी आकाश गुप्ता और राजस्थान के रहने वाले रोहतास बावरिया के ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा हुआ जो महिलाओं या नाबालिग लड़कियों अपहरण कर उन्हें अलग-अलग जिलों में ले जाकर उनसे सामूहिक बलात्कार करते और फिर उन्हें बेच देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि मामले में चारों को 12 नवम्बर 2025 को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था और उन पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्यवाही की थी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में बंद आकाश गुप्ता जमानत पर बाहर आने के बाद फरार हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि आकाश ने अगवा की गयी नाबालिग लड़की को दो लाख रुपये में ऊषा सिंह से लेकर कई दिन तक उसे अपने पास रखा और वह खुद तथा धन लेकर हवस मिटाने के लिये अन्य लोगों को भी सौंप देता था। त्यागी ने बताया कि आकाश नाबालिग पीड़िता को बेचने की फिराक में था तभी पुलिस ने उसे मुक्त करा लिया था। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आकाश को सोमवार को मेरठ से गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर मंगलवार भदोही लाकर जेल भेज दिया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भदोही</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 16:44:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिचौलियों ने किया शोषण... सम्मान समारोह में बोले सीएम योगी- 'ट्रेड यूनियन वाली सोच' से दूर रहें शिक्षा मित्र, अपनायें सकारात्मक नजरिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर।</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रदेश के 'शिक्षा मित्रों' से 'ट्रेड यूनियन वाली सोच' से दूर रहने और टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने का आह्वान करते हुए उनसे सकारात्मक और रचनात्मक नजरिया अपनाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने 'शिक्षा मित्र सम्मान समारोह' को सम्बोधित करते हुए कहा शिक्षा मित्रों की लंबे समय से लंबित मांगों को उजागर करते हुए कहा कि हालांकि उनकी चिंताएं वास्तविक थीं, लेकिन दृष्टिकोण रचनात्मक होना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''सालों से आपकी मांगें थीं लेकिन उन्हें स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने देने के बजाय अक्सर टकराव के माध्यम से उन्हें पूरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580983/middlemen-exploited-them----speaking-at-a-felicitation-ceremony--cm-yogi-tells--shiksha-mitras---%22steer-clear-of-a--trade-union-mentality--and-adopt-a-positive-outlook-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats82.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर।</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रदेश के 'शिक्षा मित्रों' से 'ट्रेड यूनियन वाली सोच' से दूर रहने और टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने का आह्वान करते हुए उनसे सकारात्मक और रचनात्मक नजरिया अपनाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने 'शिक्षा मित्र सम्मान समारोह' को सम्बोधित करते हुए कहा शिक्षा मित्रों की लंबे समय से लंबित मांगों को उजागर करते हुए कहा कि हालांकि उनकी चिंताएं वास्तविक थीं, लेकिन दृष्टिकोण रचनात्मक होना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''सालों से आपकी मांगें थीं लेकिन उन्हें स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने देने के बजाय अक्सर टकराव के माध्यम से उन्हें पूरा कराने की कोशिश की गई। हमें बातचीत के माध्यम से समाधान की ओर बढ़ना चाहिए।'' यह समारोह राज्य में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत सभी एक लाख 43 लाख शिक्षा मित्रों के मानदेय को प्रतिमाह 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किये जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना करते हुए उनके उन प्रयासों को 'अनियमिततापूर्ण और गैर-कानूनी' करार दिया जिनके तहत उन्होंने उचित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक का दर्जा देने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, ''पिछली सरकारों ने नियमों का उल्लंघन किया और जरूरी नियम बनाए बिना मान्यता देने की कोशिश की। ऐसे मनमाने कार्यों के कारण ही उच्चतम न्यायालय ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया था।''</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/2051575067365298382">https://twitter.com/myogiadityanath/status/2051575067365298382</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अदालत के इस आदेश के बाद पैदा हुए संकट का जिक्र करते हुए कहा, ''हमें एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा। लगभग डेढ़ लाख परिवारों की आजीविका छिनने का खतरा था। उनमें से कई लोगों ने 18-19 साल तक सेवा की थी। जीवन के उस पड़ाव पर वे कहां जाते?'' उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने उनकी सेवाएं समाप्त न करने का फैसला किया और इसके बजाय उनके मानदेय में काफी वृद्धि की।</p>
<p style="text-align:justify;">आदित्यनाथ ने कहा, ''साल 2017 में हमने मानदेय साढ़े तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया। हमारा इरादा हमेशा इसे समय-समय पर और बेहतर बनाने का रहा है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में कुछ बिचौलियों ने शिक्षा मित्रों का शोषण किया था। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा, ''एक शिक्षक का नजरिया हमेशा सकारात्मक होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो इससे समाज को इतना ज्यादा नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। माता-पिता ने जिन बच्चों को आपके भरोसे सौंपा है, उनका भविष्य आपके रवैये पर ही निर्भर करता है।''</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने शिक्षा मित्रों को श्रम संगठनों वाली सोच से दूर रहने की भी सलाह देते हुए कहा कि ऐसे तरीकों से समाज को नुकसान पहुंच सकता है। आदित्यनाथ ने कहा, ''हमारा स्वभाव ट्रेड यूनियन जैसा नहीं हो सकता। हमें हमेशा कुछ अच्छा करने की भावना से काम करना चाहिए। बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी आप पर ही है। हमें ट्रेड यूनियन वाली सोच से दूर रहना चाहिए। इससे समाज को नुकसान ही होगा, जैसा कि पहले भी काफी नुकसान हो चुका है। वहां लोग अक्सर यह कहते हैं कि हमारी मांगें पूरी होनी ही चाहिए, चाहे कोई भी मजबूरी क्यों न हो, जिसका मतलब यह है कि हमारी मांगें देश की कीमत पर भी पूरी होनी चाहिए।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता। सबसे पहले देश आता है, उसके बाद ही हमारा अस्तित्व है। अगर मेरा देश है, तभी हम हैं। जब यह भावना हमारे अंदर होगी, तो देश ही हम सबकी रक्षा करेगा और हमें सुरक्षित रखेगा। अगर हम एक अच्छी पीढ़ी तैयार करेंगे तो हर क्षेत्र में अच्छे लोग ही पैदा होंगे।''</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के कल्याण के क्षेत्र में हुए सुधारों का जिक्र करते हुए कहा, कि एक समय ऐसा भी था, जब स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय या सुरक्षा की कमी के कारण लड़कियां स्कूल नहीं जा पाती थीं लेकिन आज सभी के लिए ये सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अब लगभग एक करोड़ 60 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, जूते, मोज़े और स्वेटर जैसी चीजें दी जा रही हैं। आदित्यनाथ ने कहा, ''हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है। यह माता-पिता, शिक्षकों और समाज की ज़िम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस अधिकार का पूरी तरह से पालन हो।'' </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल बीच में ही छोड़ देने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा, ''जब कोई बच्चा स्कूल छोड़ देता है तो यह सिर्फ उस बच्चे का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का नुकसान होता है। इससे समाज कमजोर होता है और लंबे समय तक चलने वाली चुनौतियां पैदा होती हैं।'' आदित्यनाथ ने 'स्कूल चलो अभियान' की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि इसके पहले चरण में ही 20 लाख से ज्यादा बच्चों ने स्कूल में दाखिला लिया है। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ी संख्या है, क्योंकि दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जिनकी आबादी भी इससे कम है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>गोरखपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:58:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल चुनाव परिणाम : अल्पसंख्यक मतों के बिखराव से TMC को लगा झटका, भाजपा को मिली बढ़त </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल के स्थापित राजनीतिक समीकरणों को उलट देने वाले इस चुनाव में, भाजपा की जीत को यह निर्णायक गति केवल पारंपरिक गढ़ों में ही नहीं मिली, बल्कि मुस्लिम बहुल जिलों में अप्रत्याशित बढ़त से भी मिली है जहां बिखरे हुए अल्पसंख्यक मतों ने खामोशी से उस कहानी को बदल दिया, जो लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में रही थी। </p><p>एक दशक से अधिक समय तक, मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में टीएमसी का दबदबा मुस्लिम मतों के लगभग पूरी तरह एकजुट होने पर आधारित रहा, जो इस क्षेत्र के बड़े हिस्सों में आबादी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580976/bengal-election-results--tmc-hit-by-fragmentation-of-minority-votes--bjp-gains-ground"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats81.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल के स्थापित राजनीतिक समीकरणों को उलट देने वाले इस चुनाव में, भाजपा की जीत को यह निर्णायक गति केवल पारंपरिक गढ़ों में ही नहीं मिली, बल्कि मुस्लिम बहुल जिलों में अप्रत्याशित बढ़त से भी मिली है जहां बिखरे हुए अल्पसंख्यक मतों ने खामोशी से उस कहानी को बदल दिया, जो लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में रही थी। </p><p>एक दशक से अधिक समय तक, मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में टीएमसी का दबदबा मुस्लिम मतों के लगभग पूरी तरह एकजुट होने पर आधारित रहा, जो इस क्षेत्र के बड़े हिस्सों में आबादी का 50 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा है। वाम मोर्चे के 2011 में पतन के बाद बना और 2021 के ध्रुवीकृत चुनाव के दौरान और मजबूत हुआ यह समूह इस बार बिखरता हुआ दिखाई दिया है, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। </p><p>आंकड़े बेहद स्पष्ट कहानी बताते हैं। भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में इन तीन जिलों की 43 विधानसभा सीट में से केवल आठ सीट पर जीत हासिल की थी, जो अब बढ़कर 19 हो गई है। टीएमसी को 2021 में इस क्षेत्र की 35 सीटों पर जीत मिली थी, जो घटकर अब 22 सीट पर आ गई है। बाकी सीट कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और छोटे दलों की झोली में गई हैं, जिनमें हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) भी शामिल है। यह अल्पसंख्यक मतों के बिखराव को दर्शाता है और यह सत्तारूढ़ पार्टी के लिए महंगा साबित हुआ। </p><p>चुनाव से पहले व्यापक रूप से किए गए आकलनों में कहा गया था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से मुस्लिम मतदाता टीएमसी के पक्ष में एकजुट हो जाएंगे, लेकिन परिणाम इसके उलट संकेत देता है। रणनीतिक एकता के बजाय, अल्पसंख्यक वोट कई दलों में बंट गया, जिससे कड़े मुकाबले वाली सीटों पर टीएमसी की बढ़त कमजोर हो गई। </p><p>इस बदलाव का केंद्र रहे मुर्शिदाबाद में स्थिति विशेष रूप से नाटकीय है। यहां मुस्लिम आबादी 66 प्रतिशत से अधिक है, और यह जिला टीएमसी का गढ़ माना जाता था। वर्ष 2021 में पार्टी ने यहां की 22 में से 20 सीट जीती थीं। इस बार उसका प्रदर्शन घटकर नौ सीटों तक सीमित रह गया है, जबकि भाजपा ने भी इतनी ही सीट हासिल की हैं, जो पिछले चुनाव में उसकी केवल दो सीट के मुकाबले लंबी छलांग है। एसआईआर प्रक्रिया के तहत जिले में लगभग 7.8 लाख नाम हटाए गए थे और इसे भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ (सबटेक्स्ट) के रूप में देखा जा रहा है। </p><p>राजनीतिक विश्लेषक बिश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, '' टीएमसी ने तर्क दिया कि नामों को हटाए जाने से उसके समर्थन आधार पर काफी असर पड़ा, वहीं चुनावी आंकड़े संकेत देते हैं कि कांग्रेस, माकपा और एजेयूपी के बीच मतों के बिखराव ने नुकसान को और बढ़ा दिया।'' रानीनगर में, जहां कांग्रेस ने मामूली अंतर से टीएमसी को पीछे छोड़ दिया, वहीं माकपा ने भी उल्लेखनीय वोट प्रतिशत हासिल किया, जिससे मिलकर उस वोट बैंक में सेंध लग गई, जो पहले टीएमसी के पक्ष में एकजुट अल्पसंख्यक वोट माना जाता था। </p><p>डोमकल में माकपा की जीत ने अल्पसंख्यक-बहुल क्षेत्रों में वामपंथी गढ़ों के पुनरुत्थान को और स्पष्ट किया। रेजिनगर और नवादा में एजेयूपी के हुमायूं कबीर ने स्थानीय प्रभाव को निर्णायक जीत में बदल दिया, और पर्याप्त मुस्लिम समर्थन हासिल किया, जो अन्यथा टीएमसी के पक्ष में जा सकता था। राज्य के अन्य हिस्सों में भी कमोबेश यही स्थिति रही।</p><p> मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना और बीरभूम इन पांच जिलों में कुल 85 विधानसभा सीटें हैं, जो किसी भी राज्यव्यापी चुनाव परिणाम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यहां भाजपा के प्रदर्शन ने न केवल उसकी सीटों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि उन क्षेत्रों में उसकी पहुंच की धारणा को भी बदल दिया है, जिन्हें पहले चुनावी रूप से उसके लिए पहुंच से बाहर माना जाता था। </p><p>वहीं, टीएमसी के लिए यह जनादेश एक चेतावनी है कि उसका सबसे भरोसेमंद समर्थन आधार अब एकजुट नहीं रहा है। ऐसा नहीं है कि यह गिरावट अभी पूरी तरह समान है या अपरिवर्तनीय नहीं है, लेकिन यह इतना गहरा जरूर है कि इसने चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति मुर्मू से मिले राघव चड्ढा : AAP पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, कहा- पंजाब सरकार कर रही मशीनरी का दुरुपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर ''प्रतिशोध की राजनीति'' करने और राज्यसभा में हाल में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों को निशाना बनाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। राघव चड्ढा ने तीन अन्य सांसदों के साथ मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और एक ज्ञापन प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने आप से बाहर निकलने के बाद उनके खिलाफ उत्पीड़न और ''राजनीतिक रूप से प्रेरित'' कार्रवाई का आरोप लगाया। </p>
<p style="text-align:justify;">राघव चड्ढा ने बैठक के बाद यहां पत्रकारों से कहा,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580973/raghav-chadha-meets-president-murmu--alleges-harassment-by-aap--says-punjab-government-is-misusing-state-machinery"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats80.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर ''प्रतिशोध की राजनीति'' करने और राज्यसभा में हाल में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों को निशाना बनाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। राघव चड्ढा ने तीन अन्य सांसदों के साथ मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और एक ज्ञापन प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने आप से बाहर निकलने के बाद उनके खिलाफ उत्पीड़न और ''राजनीतिक रूप से प्रेरित'' कार्रवाई का आरोप लगाया। </p>
<p style="text-align:justify;">राघव चड्ढा ने बैठक के बाद यहां पत्रकारों से कहा, ''आम आदमी पार्टी से असहमति जताने का अपना संवैधानिक अधिकार प्रयोग करने वाले सभी सांसदों, जिन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया, उनके संबंध में तथा इन सभी घटनाओं व घटनाक्रमों को आज राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। मैं आम आदमी पार्टी को यह भी बताना चाहता हूं कि जब तक हम आज्ञाकारी रहे, हमें संस्कारी माना गया। जैसे ही हमने पार्टी छोड़ी, हमें भ्रष्ट करार दे दिया गया।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए कई पूर्व आप सांसदों को राज्य एजेंसियों द्वारा धमकाया और दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, ''आम आदमी पार्टी, जो दूसरों पर बदले की राजनीति का आरोप लगाती है, आज खुद खतरनाक प्रतिशोध की राजनीति में लिप्त है। 24 अप्रैल को जब हम आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तब से हमारे सांसदों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें परेशान किया जा रहा है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">चड्ढा ने कुछ विशेष उदाहरण देते हुए दावा किया कि पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह पर हमला किया गया है, जबकि उद्योगपति एवं सांसद राजेंद्र गुप्ता के व्यावसायिक कार्यों में कथित तौर पर बाधा डाली गई है। उन्होंने कहा, ''हमने 24 अप्रैल, 2026 को आम आदमी पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। तब से हमारे सांसदों को परेशान किया जा रहा है। सबसे पहले, विश्व कप विजेता क्रिकेटर हरभजन सिंह के घर के बाहर 'गद्दार' लिखा गया। </p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब पुलिस की मदद से उनके आवास पर कथित तौर पर पत्थर फेंके गए और उनके परिवार को निशाना बनाकर अपमानजनक नारे लगाए गए।'' उन्होंने कहा, ''हमारे साथी राजेंद्र गुप्ता, जो पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित हैं और पंजाब के मालवा क्षेत्र में एक बड़ी फैक्टरी चलाते हैं जिससे लगभग 30,000 लोगों को आजीविका मिलती है, उनकी फैक्टरी को निशाना बनाया गया। पंजाब सरकार ने कथित तौर पर उनकी पानी की आपूर्ति काट दी और प्रदूषण बोर्ड ने फैक्टरी को बंद करने की कार्रवाई शुरू करने के लिए छापे मारे।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि सांसद संदीप पाठक के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, जिन्हें उन्होंने ''दुर्भावनापूर्ण और मनगढ़ंत'' बताया। चड्ढा ने कहा, ''ये प्राथमिकी और नोटिस इतने बेबुनियाद हैं कि कागज पर लिखे होने के भी लायक नहीं हैं। न्यायपालिका इन्हें खारिज कर देगी।'' उन्होंने आप के नेतृत्व वाली सरकार को चेतावनी दी कि ऐसे कार्यों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''राजनीतिक प्रतिशोध के लिए सतर्कता विभाग, प्रदूषण बोर्ड और पुलिस का इस्तेमाल करना एक खतरनाक खेल है। आपने भले ही इसकी शुरुआत की हो, लेकिन इसका अंत अच्छा नहीं होगा। इसे रोकना होगा।'' चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि ''मनगढ़ंत मामलों'' के जरिए उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है और दावा किया कि उन्हें बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया अभियान चलाए जा रहे हैं। पंजाब सरकार के अधिकारियों से अपील करते हुए उन्होंने उनसे राजनीतिक दबाव में काम न करने का आग्रह किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''मैं अधिकारियों से कहना चाहता हूं कि आप सम्मानित अधिकारी हैं। तबादलों या निलंबन की धमकियों के आगे न झुकें। कानून के अनुसार और राष्ट्रहित में कार्य करें।'' राज्यसभा सदस्य ने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि महात्मा गांधी के आदर्शों का आह्वान करने वाले अब सरकारी तंत्र का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं। चड्ढा ने कहा, ''पंजाब की जनता को यह जानना चाहिए कि उनकी सरकार का इस्तेमाल राजनीतिक हिसाब-किताब निपटाने के लिए कैसे किया जा रहा है।'' </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/580973/raghav-chadha-meets-president-murmu--alleges-harassment-by-aap--says-punjab-government-is-misusing-state-machinery</link>
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:50:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार, कहा- जनहित याचिका अब निजी हित याचिका बन गई है..</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर टिप्पणी करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि जनहित याचिका (पीआईएल) अब 'निजी (प्राइवेट) हित याचिका', 'प्रचार (पब्लिसिटी) हित याचिका', 'पैसा हित याचिका' और 'राजनीतिक (पॉलिटिकल) हित याचिका' बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने उस वक्त की जब वे केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580971/in-the-sabarimala-case--the-supreme-court-rebuked-the-petitioner--stating--%22public-interest-litigation-has-now-become-private-interest-litigation-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/सुप्रीम-कोर्ट-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर टिप्पणी करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि जनहित याचिका (पीआईएल) अब 'निजी (प्राइवेट) हित याचिका', 'प्रचार (पब्लिसिटी) हित याचिका', 'पैसा हित याचिका' और 'राजनीतिक (पॉलिटिकल) हित याचिका' बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने उस वक्त की जब वे केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली 'इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन' की 2006 की जनहित याचिका के उद्देश्य पर सवाल उठाया। 'इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन' का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता रवि प्रकाश गुप्ता ने दलील दी कि जनहित याचिका जून 2006 में प्रकाशित चार समाचार पत्रों के लेखों पर आधारित थी।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस पर प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जनहित याचिका को सीधे खारिज कर देना चाहिए था। पीठ ने कहा, ''यह लेख जनहित याचिका दायर करने का आधार कैसे देता है? जनहित याचिकाएं दायर करवाने के लिए लेख लिखवाना आसान है।'' न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ''हम उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में आम जनता के लिए जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते रहे हैं, न कि अखबारों में छपे लेखों के लिए।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''जनहित याचिका अब निजी हित याचिका, प्रचार हित याचिका, पैसा हित याचिका और राजनीतिक हित याचिका बन गई है। इन सभी को जनहित याचिका कहा जाता है, लेकिन हम केवल वास्तविक और प्रामाणिक जनहित याचिकाओं पर ही सुनवाई करते हैं।'' उन्होंने यह भी बताया कि प्रधान न्यायाधीश को हर दिन सैकड़ों पत्र प्राप्त होते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सवाल किया कि तो क्या इन सभी पत्रों को जनहित याचिकाओं में बदला जा सकता है। मामले में सुनवाई जारी है। सितंबर 2018 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने चार अनुपात एक के बहुमत से फैसला सुनाते हुए शबरिमला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था। पीठ ने फैसला सुनाया था कि सदियों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा अवैध और असंवैधानिक है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:29:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरदोई : फंदे से लटकते मिले चचेरे भाई-बहन, खुदकुशी की आशंका, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>हरदोई।</strong> हरदोई जिले के शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक युवक और नाबालिग लड़की के शव एक पेड़ पर फांसी के फंदे से लटकते पाये गये। ग्रामीणों के मुताबिक दोनों चचेरे भाई-बहन थे और उनके बीच प्रेम संबंध थे। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के बबुरही गांव में रवि कुशवाहा (25) नामक युवक और उसकी 16 वर्षीय चचेरी बहन के शव गन्ने के खेत में पेड़ पर लगे फांसी के फंदे से लटकते पाये गये। </p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेजा है। मौके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580968/hardoi--cousin-found-hanging--suicide-suspected%E2%80%94know-the-full-story"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/महिला-सुसाइड.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हरदोई।</strong> हरदोई जिले के शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक युवक और नाबालिग लड़की के शव एक पेड़ पर फांसी के फंदे से लटकते पाये गये। ग्रामीणों के मुताबिक दोनों चचेरे भाई-बहन थे और उनके बीच प्रेम संबंध थे। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के बबुरही गांव में रवि कुशवाहा (25) नामक युवक और उसकी 16 वर्षीय चचेरी बहन के शव गन्ने के खेत में पेड़ पर लगे फांसी के फंदे से लटकते पाये गये। </p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेजा है। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>हरदोई</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:19:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP Politics: यूपी चुनाव में लागू हो महिला आरक्षण, भाजपा सरकार करे ऐलान, अखिलेश यादव ने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार से वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए महिलाओं का आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर की गई एक पोस्ट में भाजपा को चुनौती दी कि या तो वह उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए महिला आरक्षण लागू करें या फिर खुले तौर पर स्वीकार करे कि वह महिलाओं के हितों के खिलाफ है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने पोस्ट में कहा, "पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) की मांग है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580963/up-politics--women-s-reservation-should-be-implemented-in-up-elections--bjp-government-must-make-the-announcement%E2%80%94akhilesh-yadav-demands"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/अखिलेश-यादव-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार से वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए महिलाओं का आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर की गई एक पोस्ट में भाजपा को चुनौती दी कि या तो वह उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए महिला आरक्षण लागू करें या फिर खुले तौर पर स्वीकार करे कि वह महिलाओं के हितों के खिलाफ है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने पोस्ट में कहा, "पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) की मांग है कि जो 'महिला आरक्षण' समस्त विपक्ष ने मिलकर संसद में सहर्ष पास किया है उसे 2027 के उप्र विधानसभा चुनाव में लागू करने की घोषणा भाजपा सरकार तत्काल करे या कह दे कि पुरुषवादी भाजपाई और उनके सामंती संगी-साथी महिलाओं को आरक्षण के खिलाफ हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा, "जब तक यह घोषणा नहीं होगी तब तक हम यह बात हर हफ़्ते जगह-जगह उठाते रहेंगे।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें वह समाजवादी पार्टी पर संसद में महिला आरक्षण को रोकने का इल्जाम लगा रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव की यह मांग उनकी पार्टी की व्यापक 'पीडीए' रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंकों को मजबूत करने का मंसूबा है। साल 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन प्रक्रिया के बाद 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को 'लागू करने' के लिए लोकसभा सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 किया जाना था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जानी थीं। इस सिलसिले में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पिछली 17 अप्रैल को संसद में पारित नहीं हो सका था। उसके बाद से भाजपा लगातार विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:03:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 मई का इतिहास : संगीत के जादूगर नौशाद ने दुनिया को कहा अलविदा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> इतिहास के पन्‍नों में पांच मई के नाम कई महत्‍वपूर्ण घटनाएं दर्ज हैं, जिनमें नेपोलियन और नौशाद अली का दुनिया को अलविदा कहना शामिल है। इस दिन दुनिया में कदम रखने वाले प्रमुख लोगों की बात करें, तो जर्मन अर्थशास्त्री और महान विचारक कार्ल मार्क्स का जन्म पांच मई को ही हुआ था और सिख गुरू अमरदास जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। वह सिखों के तीसरे गुरु थे। देश दुनिया के इतिहास में पांच मई की तारीख पर दर्ज कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है : </p>
<p>1479: सिखों के तीसरे गुरु अमरदास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580958/history-of-may-5--the-wizard-of-music--naushad--bids-farewell-to-the-world"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/इतिहा1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> इतिहास के पन्‍नों में पांच मई के नाम कई महत्‍वपूर्ण घटनाएं दर्ज हैं, जिनमें नेपोलियन और नौशाद अली का दुनिया को अलविदा कहना शामिल है। इस दिन दुनिया में कदम रखने वाले प्रमुख लोगों की बात करें, तो जर्मन अर्थशास्त्री और महान विचारक कार्ल मार्क्स का जन्म पांच मई को ही हुआ था और सिख गुरू अमरदास जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। वह सिखों के तीसरे गुरु थे। देश दुनिया के इतिहास में पांच मई की तारीख पर दर्ज कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है : </p>
<p>1479: सिखों के तीसरे गुरु अमरदास जी का जन्म। <br />1818: महान विचारक, इतिहासकार और जाने-माने जर्मन अर्थशास्त्री कार्ल मार्क्स का जन्म। <br />1821 : चर्च के वर्चस्व को तोड़ने को विज्ञान और बहुसंस्कृति की ओर मोड़ने वाले नेपोलियन का निधन। <br />1916 : भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का जन्म। <br />1961 : अमेरिका के पहले अंतरिक्ष यात्री कमांडर ऐलन शेपर्ड अपने अंतरिक्ष यान से अटलांटिक महासागर में उतरे। उन्हें एक हेलीकाप्टर ने पानी से बाहर निकाला और शेपर्ड ने अपनी इस यात्रा को 'शानदार सैर' करार दिया। <br />1980 : लंदन में स्थित ईरानी दूतावास को कुछ हमलावरों के कब्जे से आज़ाद कराया गया। ब्रिटिश एसएएस कमांडो ने पांच ईरानी बंदूकधारियों को मार डाला और एक को हिरासत में लेकर इस नाटक का अंत किया। <br />1984 : फू दोरजी ऑक्सीजन के बिना माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाले पहले भारतीय बने। <br />2005 : ब्रिटेन में लेबर पार्टी के नेता टोनी ब्लेयर ने तीसरी बार प्रधानमंत्री का पद संभाला। <br />2006 : संगीतकार नौशाद अली ने दुनिया को अलविदा कहा। <br />2009 : पाकिस्तान की स्वात घाटी को तालिबान उग्रवादियों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को देखते हुए इलाके के हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। <br />2010 : उच्चतम न्यायालय ने संदिग्ध अपराधियों पर किए जाने वाले नार्को एनालिसिस, ब्रेन मैपिंग अथवा पॉलीग्राफ टेस्ट जैसी जांच को अस्वीकार कर दिया और इसे निजी स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया। <br />2017 : इसरो ने दक्षिण एशिया उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया।<br />2018 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कोयले की दो खदानें धसकने से 18 लोगों की मौत <br />2023 : ओलम्पिक चैम्पियन नीरज चोपड़ा ने दोहा में संपन्न प्रतिष्ठित दोहा डायमंड लीड प्रतियोगिता में पुरुषों की भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में 88.67 मीटर दूर भाला फेंक कर जीत हासिल की। <br />2025 : दक्षिण-पश्चिमी चीन में तूफान के कारण पर्यटकों की चार नौकाएं पलटीं, नौ लोगों की मौत। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इतिहास</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 13:54:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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                <title>मौसम का दोष अकेले जलवायु परिवर्तन पर मत मढ़ो!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><em><strong>गर्मी का घातक रूप हमारी खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहा है। 'थर्मल शॉक' के कारण गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के दाने दूध भरने की अवस्था में ही सूख रहे हैं।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/08.jpg" alt="0" width="194" height="213" />
<strong>पंकज चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p><br />भारत में मौसम का बदलता मिजाज और बैसाख के महीने में जेठ जैसी तपिश का अहसास होना, अब केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक गहरे पारिस्थितिक संकट की चेतावनी है। अक्सर भीषण गर्मी और लू के लिए अल नीनो या वैश्विक जलवायु परिवर्तन को दोष देकर हम अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह संकट काफी हद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580911/don-t-pin-the-blame-for-the-weather-solely-on-climate-change"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats75.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><em><strong>गर्मी का घातक रूप हमारी खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहा है। 'थर्मल शॉक' के कारण गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के दाने दूध भरने की अवस्था में ही सूख रहे हैं।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/08.jpg" alt="0" width="194" height="213"></img>
<strong>पंकज चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p><br />भारत में मौसम का बदलता मिजाज और बैसाख के महीने में जेठ जैसी तपिश का अहसास होना, अब केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक गहरे पारिस्थितिक संकट की चेतावनी है। अक्सर भीषण गर्मी और लू के लिए अल नीनो या वैश्विक जलवायु परिवर्तन को दोष देकर हम अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह संकट काफी हद तक मानव-निर्मित है। आज हम जिस भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं, वह वैश्विक वायुमंडलीय बदलावों और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण के प्रति बरती गई नीतिगत लापरवाही का एक मिला-जुला परिणाम है। </p>
<p>जब हम अपनी विकास योजनाओं के नाम पर हज़ारों हेक्टेयर प्राथमिक जंगलों, पहाड़ियों और जल निकायों को नष्ट करते हैं, तो हम अनजाने में उन प्राकृतिक 'कूलिंग एजेंटों' को खत्म कर देते हैं, जो इस तपिश के खिलाफ हमारी एकमात्र सुरक्षा थे। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में, जहां तापमान अब नियमित रूप से 48°C के स्तर को छूने लगा है, यह स्पष्ट है कि हमारी विकास की भूख ने धरती के प्राकृतिक थर्मोस्टेट को बिगाड़ दिया है।</p>
<p>इस मानव-निर्मित गर्मी की सबसे प्रत्यक्ष और क्रूर मार उन मजदूरों और सड़क किनारे काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ती है, जो इस ढांचे का निर्माण कर रहे हैं। भारत के करोड़ों निर्माण श्रमिक, रेहड़ी-पटरी वाले और गिग-इकोनॉमी के कर्मचारी इस गर्मी को केवल एक आंकड़े के रूप में नहीं, बल्कि एक शारीरिक हमले के रूप में महसूस करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, गर्मी के कारण भारत को 2030 तक अपने कुल कामकाजी घंटों का 5.8% हिस्सा खोना पड़ सकता है, जो लगभग 3.4 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर है। </p>
<p>बांदा जैसे शहरों में, कंक्रीट और कोलतार की सड़कें गर्मी को सोखकर रात में भी उसे वापस छोड़ती हैं, जिससे 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव पैदा होता है और स्थानीय तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में 5°C से 7°C तक अधिक बना रहता है। नीतिगत स्तर पर मजदूरों के लिए 'छाया का अधिकार' या लू के दौरान काम के घंटों में बदलाव जैसे नियम केवल कागजों तक सीमित हैं, जो हमारे विकास के उस अंधेपन को दर्शाते हैं, जहां श्रम को एक जैविक इकाई के बजाय केवल एक मशीन समझा जाता है।</p>
<p>गर्मी का यह घातक रूप हमारी खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहा है। 'थर्मल शॉक' के कारण गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के दाने दूध भरने की अवस्था में ही सूख रहे हैं, जिससे पैदावार में 15% से 25% तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। मिट्टी की नमी खत्म होने से उपजाऊ जमीन अब मरुस्थल में बदल रही है, फिर भी हमारी नीतियां सूखे क्षेत्रों में अधिक पानी चाहने वाली फसलों को बढ़ावा दे रही हैं। इसी तरह, जंगलों के विखंडन और अवैध खनन ने वन्यजीवों के लिए भोजन का संकट पैदा कर दिया है। </p>
<p>छतरपुर और पन्ना टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाकों में, खनन के कारण प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप जंगली जानवरों का बस्तियों की ओर आना 40% तक बढ़ गया है। यह केवल मानव-पशु संघर्ष नहीं है, बल्कि उस पारिस्थितिक सुरक्षा चक्र का टूटना है, जो इंसानों और जानवरों को एक साथ सुरक्षित रखता था।</p>
<p>वर्तमान 'हीट एक्शन प्लान' (एचएपी) की सबसे बड़ी विफलता यह है कि वे केवल शहरों में मौतों को रोकने पर केंद्रित हैं, जबकि जमीन, जल और मिट्टी के गिरते स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं। अब समय आ गया है कि नीतिगत स्तर पर 'वन हेल्थ' के दृष्टिकोण को अपनाया जाए, जहां मिट्टी की नमी, पशुधन का स्वास्थ्य और वन्यजीवों का संरक्षण एक ही इकाई के रूप में देखा जाए। हमें केवल वृक्षारोपण की रस्म अदायगी से ऊपर उठकर बुंदेलखंड के चंदेलकालीन तालाबों जैसे पारंपरिक जल-प्रबंधन तंत्र को पुनर्जीवित करना होगा। ये तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं थे, बल्कि वे स्थानीय पारिस्थितिकी को ठंडा रखने के विकेंद्रीकृत साधन थे। नीति निर्माताओं को यह समझना होगा कि राजमार्गों के लिए काटे गए पेड़ केवल लकड़ी नहीं थे, बल्कि वे उस सूक्ष्म-जलवायु का हिस्सा थे, जो फसलों को झुलसने से बचाती थी।</p>
<p>हमें विकास की अपनी परिभाषा को बदलना होगा। बुंदेलखंड में पत्थर खनन के लिए काटी गई हर पहाड़ी और उत्तराखंड में कंक्रीट के विस्तार के लिए नष्ट की गई हरियाली हमारे भविष्य की ठंडी हवाओं को रोक रही है। आर्थिक लाभ की तुलना में गर्मी के कारण होने वाला स्वास्थ्य और कृषि का नुकसान कहीं अधिक है। भविष्य की नीतियों की सफलता अब इस जवाबदेही पर टिकी है कि हम बुनियादी ढांचे के निर्माण में 'ग्रीन इंजीनियरिंग' को कितनी प्राथमिकता देते हैं और पर्यावरण नियमों की अनदेखी को कब बंद करते हैं।</p>
<p>हमें यह स्वीकार करना होगा कि पर्यावरण का संरक्षण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है। तभी हम इस मानव-निर्मित भट्टी से बाहर निकल पाएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसी धरती दे पाएंगे जो केवल झुलसती नहीं, बल्कि जीवन भी प्रदान करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 07:06:54 +0530</pubDate>
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