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                <title>Tourism - Amrit Vichar</title>
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                <description>Tourism RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>UP Tourism: 10 जुलाई तक पूरे हों पर्यटन परियोजनाओं के टेंडर, नवंबर तक शुरू हो निर्माण; मंत्री जयवीर सिंह ने दिए सख्त निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में समयबद्ध परियोजनाओं, 15 दिन में ठेकेदारों के भुगतान, 15 अगस्त तक जिला संस्कृति प्रोत्साहन परिषदों को सक्रिय करने और एकीकृत परियोजना निगरानी डैशबोर्ड के शुभारंभ पर जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586333/up-tourism-projects-tender-deadline-jaiveer-singh-tourism-news-2026"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(32).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि 31 मार्च 2026 तक स्वीकृत सभी परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया 10 जुलाई तक पूरी कर तत्काल निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष को देखते हुए सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता और तय समयसीमा में पूरा करना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही पर संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन मंत्री, पर्यटन भवन में गुरुवार को पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने ठेकेदारों के लंबित भुगतान 15 दिनों के भीतर जारी करने के भी निर्देश दिए। साथ ही कहा कि विभाग ऐसी रणनीति बनाए जिससे प्रदेश में अधिक से अधिक पर्यटक आएं और स्थानीय लोगों को रोजगार व आय के नए अवसर मिलें। उन्होंने ऐतिहासिक स्थलों पर उनके इतिहास से जुड़े शिलालेख, साइनेज और क्यूआर/बारकोड लगाने के निर्देश दिए, ताकि पर्यटकों को स्थलों की जानकारी आसानी से मिल सके। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा, अधिकारी नियमित रूप से फील्ड में जाकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का निरीक्षण करें।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में महानिदेशक पर्यटन वेदपति मिश्र, विशेष सचिव एवं निदेशक मृदुल चौधरी, पर्यटन विकास निगम के एमडी आशीष कुमार, विशेष सचिव संस्कृति संजय सिंह, निदेशक ईको पर्यटन पुष्प कुमार के., पर्यटन सलाहकार जे.पी. सिंह सहित विभागीय अधिकारी एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>15 अगस्त तक जिला संस्कृति प्रोत्साहन परिषदें हों सक्रिय</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने सभी जिलों में स्थापित जिला संस्कृति प्रोत्साहन परिषदों को आवश्यक संसाधनों से लैस कर 15 अगस्त तक पूरी तरह क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने ''परम्परा'' परियोजना के तहत पर्यटन केंद्रों को भारतीय और वैदिक स्थापत्य की झलक के साथ आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने का सुझाव दिया। इसके अलावा पर्यटन स्थलों पर अधिक संख्या में छायादार एवं लंबे पेड़ लगाने की भी बात कही।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जयवीर सिंह ने राजधानी में संस्कृति भवन की स्थापना के लिए शहीद पथ के आसपास उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने हेतु जिलाधिकारी लखनऊ से समन्वय करने के निर्देश दिए। वहीं काकराबाद में प्रस्तावित भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के नए परिसर के लिए छह एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने को कहा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>एकीकृत परियोजना निगरानी डैशबोर्ड का शुभारंभ</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बैठक से पहले पर्यटन मंत्री ने संस्कृति विभाग के एकीकृत परियोजना निगरानी डैशबोर्ड का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इससे परियोजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही, वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a class="post-title" href="https://www.amritvichar.com/article/586332/up-divyang-grant-increase-3000-yogi-adityanath-disability-welfare-news"><span class="t-red">UP News: </span>मानसिक दिव्यांगों को बड़ी राहत, भरण-पोषण अनुदान ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 होगा; सीएम योगी ने दिए अहम निर्देश</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:31:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेलवे का बड़ा फैसला: छपरा-आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस अब चलेगी रोज, लखनऊ समेत इन शहरों के यात्रियों को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[साप्ताहिक से दैनिक हुई 12527/12528 छपरा-आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस। 28 जून से छपरा और 29 जून से आनंद विहार टर्मिनस से प्रतिदिन होगा संचालन, लखनऊ सहित कई प्रमुख स्टेशनों को मिलेगा सीधा लाभ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586016/chhapra-anand-vihar-superfast-express-daily-train-new-schedule-lucknow"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(51)6.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः</strong> रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 12527/12528 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस-छपरा सुपरफास्ट एक्सप्रेस को साप्ताहिक से नियमित (दैनिक) कर दिया है। नए शेड्यूल के अनुसार, यह ट्रेन अब प्रतिदिन संचालित होगी, जिससे उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।</p>
<h4><strong>28 जून से छपरा से रोजाना होगी रवाना</strong></h4>
<p>रेलवे के अनुसार, 28 जून से ट्रेन संख्या 12527 प्रतिदिन रात 8:50 बजे छपरा जंक्शन से रवाना होगी। अगले दिन सुबह 6:20 बजे लखनऊ पहुंचेगी और दोपहर 2:00 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी।</p>
<p>यह ट्रेन बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर और सुलतानपुर होते हुए लखनऊ पहुंचेगी। इसके बाद कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद के रास्ते आनंद विहार टर्मिनस जाएगी।</p>
<h4><strong>29 जून से आनंद विहार से भी प्रतिदिन चलेगी ट्रेन</strong></h4>
<p>वापसी दिशा में 29 जून से ट्रेन संख्या 12528 आनंद विहार टर्मिनस से प्रतिदिन शाम 4:25 बजे रवाना होगी। यह रात 11:10 बजे लखनऊ पहुंचेगी और अगले दिन सुबह 8:25 बजे छपरा जंक्शन पहुंचेगी।</p>
<h4><strong>जनरल, स्लीपर और एसी कोच की सुविधा</strong></h4>
<p>इस सुपरफास्ट एक्सप्रेस में जनरल, स्लीपर और एसी श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे। ट्रेन के दैनिक संचालन से नियमित यात्रियों के साथ-साथ नौकरीपेशा, छात्रों और अन्य यात्रियों को अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/585951/kailash-mansarovar-yatra-mea-advisory-nepal-stranded-indians"><span class="t-red">कैलाश मानसरोवर यात्रा पर विदेश मंत्रालय की बड़ी चेतावनी: </span>बिना परमिट-वीजा नेपाल में फंसे कई भारतीय, जारी हुई जरूरी एडवाइजरी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 11:27:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वाराणसी बना ग्लोबल ट्रैवल का नया गेटवे: काशी से सीधे विदेश जाना हुआ आसान... नागरिक उड्डयन मंत्री ने शुरू की 'ईजी कनेक्ट' सेवा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाराणसी: </strong>उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी अब वैश्विक पर्यटन और हवाई यात्रा के नक्शे पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गेटवे के रूप में उभर चुका है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने गुरुवार को बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे पर एयर इंडिया की अभिनव 'ईजी कनेक्ट' (Easy Connect) सेवा का आधिकारिक उद्घाटन किया।</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहले वाराणसी और आस-पास के क्षेत्रों से विदेश जाने वाले मुसाफिरों को दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में उतरकर अपना सामान बेल्ट से दोबारा कलेक्ट करना पड़ता था। इसके बाद सुरक्षा जांच, इमिग्रेशन और री-चेक-इन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585709/varanasi-has-become-the-new-gateway-of-global-travel-now"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(9)9.png" alt=""></a><br /><p><strong>वाराणसी: </strong>उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी अब वैश्विक पर्यटन और हवाई यात्रा के नक्शे पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गेटवे के रूप में उभर चुका है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने गुरुवार को बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे पर एयर इंडिया की अभिनव 'ईजी कनेक्ट' (Easy Connect) सेवा का आधिकारिक उद्घाटन किया।</p>
<p>इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहले वाराणसी और आस-पास के क्षेत्रों से विदेश जाने वाले मुसाफिरों को दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में उतरकर अपना सामान बेल्ट से दोबारा कलेक्ट करना पड़ता था। इसके बाद सुरक्षा जांच, इमिग्रेशन और री-चेक-इन की लंबी कतारों से गुजरना होता था। लेकिन अब 'ईजी कनेक्ट' के तहत यात्री वाराणसी एयरपोर्ट पर ही एक बार में चेक-इन और इमिग्रेशन (आव्रजन) की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे। इसके बाद दिल्ली पहुंचने पर वे बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के सीधे एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट पैसेंजर की तरह अपनी विदेशी उड़ान में सवार हो सकेंगे।</p>
<h4><strong>क्या है 'हब एंड स्पोक' मॉडल?</strong></h4>
<p>केंद्रीय मंत्री के. राम मोहन नायडू ने इस नई व्यवस्था को विमानन क्षेत्र का हब एंड स्पोक (Hub and Spoke) मॉडल बताया। दिल्ली और मुंबई जैसे देश के विशाल एयरपोर्ट 'हब' की भूमिका निभाएंगे। वाराणसी जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों के हवाई अड्डे 'स्पोक' की तरह काम करेंगे, जो इन मुख्य हब के माध्यम से पूरी दुनिया से जुड़ेंगे।</p>
<p>नागरिक उड्डयन मंत्री ने घोषणा की है कि अगले 6 हफ्तों के भीतर देश के 6 और प्रमुख शहरों को इस बेहतरीन मॉडल से जोड़ दिया जाएगा। साथ ही पटना और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी इस सुविधा को शुरू करने की तैयारी है। भविष्य में इंडिगो एयरलाइंस भी मुंबई को अपना मुख्य हब बनाकर ऐसी सेवाएं दे सकती है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 12 साल में नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। यदि हम देश को और मजबूत बनाना चाहते हैं तो भविष्य को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा। यह उसी दिशा में एक शुरुआत है। उन्होंने लोगों से विदेश यात्रा के लिए अधिक से अधिक भारतीय विमान सेवा कंपनियों में सफर करने का आग्रह किया। श्री नायडू ने कहा कि देश में इस समय 30-35 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं जिनमें छह मेट्रो शहरों में हैं। सभी चाहते हैं कि उनके शहर से भी सीधे अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा शुरू हो। हब एवं स्पोक मॉडल इसका समाधान है। </p>
<p>विल्सन ने कहा कि भारत से हर साल 2.6 करोड़ यात्री विदेश यात्रा करते हैं। एयर इंडिया की योजना हब एवं स्पोक मॉडल में शामिल होकर उनमें से ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को अपने साथ जोड़ने की है। </p>
<h4><strong>वाराणसी-दिल्ली उड़ान का शेड्यूल-कनेक्टिंग फ्लाइट्स</strong></h4>
<p>इस ऐतिहासिक शुरुआत के तहत पहली उड़ान संख्या AI1111 सुबह 9:30 बजे वाराणसी से रवाना हुई, जहां केंद्रीय मंत्री ने स्वयं पहले यात्रियों को बोर्डिंग पास सौंपे। नियमित शेड्यूल के अनुसार:</p>
<p><strong>फ्लाइट टाइमिंग: </strong>यह फ्लाइट हर दिन सुबह 9:50 बजे वाराणसी से उड़ान भरेगी और 11:00 बजे दिल्ली लैंड करेगी।</p>
<p><strong>ग्लोबल कनेक्टिविटी: </strong>दिल्ली पहुंचने के अगले 4 घंटों के भीतर यात्रियों को दुनिया के 17 बड़े अंतरराष्ट्रीय शहरों के लिए एयर इंडिया की कनेक्टिंग फ्लाइट्स मिल जाएंगी।</p>
<h4><strong>इन 17 वैश्विक शहरों के लिए मिलेगी डायरेक्ट कनेक्टिंग फ्लाइट</strong></h4>
<p>लंदन हीथ्रो (2 उड़ानें), ज्यूरिख, रोम, मिलान, फ्रैंकफर्ट, वियना, कोपेनहेगन, दुबई, रियाद, सिंगापुर, बैंकॉक, फुकेत, कुआलालंपुर, काठमांडू, कोलंबो, मनीला और हो ची मिन्ह सिटी।</p>
<p><strong>विमानन उद्योग के दिग्गजों ने क्या कहा?</strong></p>
<blockquote class="format1">"यह सिर्फ एक नई फ्लाइट नहीं, बल्कि भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। दशकों से हमारे यात्री विदेशी हब पर निर्भर थे, लेकिन अब भारत खुद एक बड़ा ग्लोबल हब बनने जा रहा है।"- समीर कुमार (नागरिक उड्डयन सचिव)</blockquote>
<blockquote class="format1">"ईजी कनेक्ट उड़ानों से छोटे शहरों के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की भागदौड़ और मानसिक परेशानी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। एयर इंडिया जल्द ही इस सेवा का विस्तार अमृतसर, अहमदाबाद, बड़ौदा, कोच्चि, चेन्नई और विशाखापत्तनम में करने जा रही है।"-कैम्पबेल विल्सन (CEO, एयर इंडिया)</blockquote>
<p>इस गरिमामयी समारोह के दौरान भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के अध्यक्ष विपिन कुमार सिन्हा और उत्तर प्रदेश के एमएसएमई (MSME) राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/585707/shehnai-resonates-in-kashi--cricketer-akashdeep-ties-the-knot-with-akshita--the-fast-bowler-dances-enthusiastically-in-the-wedding-procession"><span class="t-red">काशी में गूंजी शहनाई: </span>क्रिकेटर आकाशदीप ने अक्षिता संग लिए सात फेरे, बारात में जमकर नाचे तेज गेंदबाज</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585709/varanasi-has-become-the-new-gateway-of-global-travel-now</link>
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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:16:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुकरैल में बनेगी देश की पहली नाइट सफारीः 5000 एकड़ का 'ऑक्सीजन हब' ऐसे बना पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>शबाहत हुसैन विजेता, लखनऊ, अमृत विचार: </strong>राजधानी लखनऊ के कुकरैल जंगल में आने वाले दिनों में दुनिया की 5वीं और भारत की पहली नाइट सफारी बनाई जायेगी। सरकार ने बजट में इसके लिए 39 करोड़ रुपये का प्राविधान भी किया लेकिन कुछ पर्यावरण प्रेमियों के सुप्रीम कोर्ट चले जाने से यह मामला रुक गया। अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद काम शुरू होगा। नाइट सफारी तैयार होने के बाद पर्यटकों के लिए लखनऊ में एक ऐसा ठिकाना तैयार होगा जिसमें लोग रात में भी घूम सकेंगे। खतरनाक माने जाने वाले जानवर लोगों को सामने टहलते दिखाई देंगे। मौजूदा समय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585353/the-countrys-first-night-safari-will-be-built-in-kukrail"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(30)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शबाहत हुसैन विजेता, लखनऊ, अमृत विचार: </strong>राजधानी लखनऊ के कुकरैल जंगल में आने वाले दिनों में दुनिया की 5वीं और भारत की पहली नाइट सफारी बनाई जायेगी। सरकार ने बजट में इसके लिए 39 करोड़ रुपये का प्राविधान भी किया लेकिन कुछ पर्यावरण प्रेमियों के सुप्रीम कोर्ट चले जाने से यह मामला रुक गया। अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद काम शुरू होगा। नाइट सफारी तैयार होने के बाद पर्यटकों के लिए लखनऊ में एक ऐसा ठिकाना तैयार होगा जिसमें लोग रात में भी घूम सकेंगे। खतरनाक माने जाने वाले जानवर लोगों को सामने टहलते दिखाई देंगे। मौजूदा समय में कुकरैल के जंगल में नीलगाय और हिरन देखने को मिलते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(30)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (30)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">फारेस्टर विवेक तिवारी ने बताया कि कुकरैल के जंगल में 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी आते हैं। जंगल से होकर गुजरने वाले कुकरैल नाले को फिर से नदी का स्वरूप दिया जा रहा है। पहले यह भी नदी थी लेकिन सीवर का पानी छोड़े जाने के बाद नदी नाले में बदल गई और लोग इसे कुकरैल नाला कहने लगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुकरैल जंगल को पूरी तरह से छोड़ दिया गया प्रकृति पर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्रीय वन अधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि कुकरैल के जंगल और आम जंगल में यह फर्क है कि इस जंगल में बगैर अनुमति के कोई नहीं जा सकता है। बिना अनुमति जंगल में घुसने वाले पर 20 हजार रुपये जुर्माना और दो साल की कैद हो सकती है। कुकरैल जंगल को पूरी तरह से प्रकृति पर छोड़ दिया गया है। प्रकृति जैसा चाहे वैसा उसे बनाए। इस जंगल में कोई सूखा पेड़ भी नहीं काट सकते। घास भी नहीं हटा सकते। यह माना जाता है कि सूखे पेड़ और घास में भी असंख्य जीवाश्म रहते हैं। उन्हें नुक्सान पहुंच सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(31)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (31)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सड़क पर टहलते बंदर न काटते हैं न भागते</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुकरैल का जंगल 5000 एकड़ में फैला हुआ है। इस जंगल में कई तरह की बिल्लियां हैं, खरगोश हैं, मोर, तीतर, बटेर, तरह-तरह की चिडियां, तरह-तरह के सांप और लम्बर तोता, हीरामन तोता तथा टुइयां तोता देखने को मिलता है। बड़ी संख्या में बंदर भी इस जंगल में विचरण करते हुए मिल जाते हैं। जंगल में सड़क पर टहलते बंदर इंसान को देखकर न भागते हैं न झपटते हैं, इंसान को ही उनके लिए रास्ता छोड़कर आगे बढ़ना होता है। वो इस अंदाज में चलते नजर आते हैं कि जैसे उन्हें किसी का कोई डर न हो और वो अपने घर में टहल रहे हों।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>घने जंगल में हैं तरह-तरह के पेड़ </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुकरैल के जंगल में अर्जुन, यूकलेपटिस और चिलबिला के पेड़ों की लम्बी कतारें हैं। कुकरैल नदी के दोनों किनारों पर भी अर्जुन और चिलबिला के हजारों पेड़ हैं। शहर में बढ़ते प्रदूषण के दौर में कुकरैल आज भी ऑक्सीजन का सबसे शानदार केंद्र है। घने पेड़ों की तरफ मानसून भी आकर्षित होता है। पेड़ ज्यादा होते हैं तो वन्यजीवों का ठिकाना भी रहता है। पेड़ ज्यादा होते हैं तो स्वास्थ्य का खजाना भी हाजिर रहता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कभी ऊसर जमीन की वजह से तिरस्कृत इलाका था कुकरैल </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ में कुकरैल इलाका ऊसर में गिना जाता था। 1946 में अंग्रेजों ने इस ऊसर जमीन पर जंगल उगाकर दिखाया। ग्राम समाज से यह जमीन लेकर यहां जंगली बबूल लगाये गये। जंगली बबूल से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। जंगली बबूल लगे तो ऊसर जमीन हरियाली से लहलहा उठी।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(33)4.png" alt="MUSKAN DIXIT (33)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुकरैल में अब तरह-तरह के पेड़ों की शानदार नर्सरी </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुकरैल के जंगल में एक हर्बल नर्सरी भी है। इस नर्सरी में घरों में पाई जाने वाली तुलसी, श्यामा तुलसी, रामा तुलसी, हरसिंगार, मीठी नीम, सर्पगंधा, बड़ी इलायची, आंवला, कचनार, अर्जुन, आम, अमरुद, अनार और मौसमी के पेड़ तैयार किये जाते हैं। यहां पर हड़जोड़ अरथी संहरी का पेड़ भी है। यह पेड़ टूटी हुई हड्डी को जोड़ने और नेत्र रोग में लाभकारी होता है। यहां पर शीशम, पापुलर, जामुन और यूकलेपटिस के पौधे भी तैयार किये जाते हैं। बड़ी इलायची का फूल किसी को भी आकर्षित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(32)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (32)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>घड़ियाल और कछुआ प्रजनन केंद्र कुकरैल की ख़ास पहचान </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">घड़ियाल और कछुआ प्रजनन केंद्र के रूप में कुकरैल की ख़ास पहचान है। घड़ियाल और कछुआ प्रजनन केंद्र हालांकि बुन्देलखंड और बहराइच में भी हैं लेकिन कुकरैल केंद्र को नम्बर वन पर गिना जाता है। घड़ियाल प्रजनन केंद्र में एक इंच के घड़ियाल से लेकर विशाल घड़ियाल तक हैं। हर उम्र के घड़ियाल के लिए अलग-अलग तालाब बनाये गए हैं। उन्हें लोहे और शीशे की फैंसिंग से घेरा गया है। घड़ियाल के 60 से 80 दिन के बच्चे चम्बल और गेरुआ नदी में ले जाकर छोड़ दिए जाते हैं। नदियों में घड़ियाल छोड़े जाने से पानी में आक्सीजन की कमी पूरी हो जाती है। कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास और प्रजनन केंद्र 1975 में बनाया गया था। 10 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाया गया यह केंद्र पर्यटकों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र है। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नंबर वन ऐसे ही नहीं, घड़ियालों को यहां सहेजा गया </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुकरैल में घड़ियाल पुनर्वास और प्रजनन केंद्र बनाने की वजह यह थी कि उत्तर प्रदेश की नदियों से घड़ियाल लगभग गायब हो गये थे। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश की नदियों से घड़ियाल लुप्त हो रहे हैं और अब उनकी संख्या 300 के आसपास है। इस रिपोर्ट के बाद भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से उत्तर प्रदेश सरकार ने यह केंद्र शुरू किया। समय के साथ यह केंद्र घड़ियाल प्रजनन के मामले में नम्बर वन बन गया है। घड़ियाल प्रजनन केंद्र के ठीक सामने विशाल तालाब में कछुआ प्रजनन केंद्र है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में संग्रहालय भी आकर्षण का केंद्र</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">संग्रहालय में शेर, भालू, तेंदुआ विभिन्न प्रकार की बिल्लियां और अन्य लुप्तप्राय जानवरों की ममी सजाई गई हैं। संग्रहालय की 1988 से देखरेख करते आ रहे रामसजीवन बताते हैं कि 300 से ज्यादा लोग रोजाना संग्रहालय देखने आते हैं। संग्रहालय के आधे हिस्से में घड़ियाल और आधे में अन्य जानवरों को रखा गया है। संग्रहालय में घुसते ही सामने मुंह फाड़े शेर दिखाई पड़ता है। इस शेर को दिसम्बर 89 में कुकरैल से 400 मीटर की दूरी पर वन विभाग के शिकारियों ने मारा था। यह शेर 20 दिन तक लखनऊ शहर में आतंक का पर्याय बना रहा। यह शेर जंगल से शहरी क्षेत्र में आ गया था और लोगों की नींद हराम हो गई थी। इस संग्रहालय में कई शेर देखने को मिलते हैं। एक बिल्ली भी यहां है। आम बिल्लियों से काफी बड़ी यह बिल्ली भी लोगों के लिए ख़ास आकर्षण है। छोटा सा भालू भी चलते-चलते कदम रोक लेता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सारस और आकर्षक पक्षियों का किलोल खूब भाएगा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुकरैल के जंगल में गड्ढों में भरे पानी में सारस और तरह-तरह के आकर्षक पक्षी पानी में किलोल करते नजर आते हैं। भीषण गर्मी की वजह से ज्यादातर गड्ढों का पानी सूख गया है। इस वजह से पक्षियों की संख्या कम हो गई है लेकिन जहां पानी है वहां पक्षी भी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(34)4.png" alt="MUSKAN DIXIT (34)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुकरैल वन विभाग की प्रयोगशाला है : मोहम्मद अहसन</strong> </h4>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक मोहम्मद अहसन बताते हैं कि कुकरैल वास्तव में एक जंगल नहीं बल्कि वन विभाग की एक शानदार प्रयोगशाला है। विशाल घने जंगल में एक अलग किस्म का सुकून है। उनका कहना है कि कुकरैल जंगल इसलिए ज्यादा ख़ास है क्योंकि यह शहरी क्षेत्र का जंगल है। शहरों में जब कांक्रीट के जंगल उग रहे हैं और सड़कों पर गाडियां बढ़ती जा रही हैं, हर तरफ शोर और धुएं का प्रदूषण है, उसमें इस जंगल में सन्नाटा है। साफ़-सुथरी हवा है। आसमान छूते पेड़ हैं। इस जंगल में बगैर किसी डर के घूमा जा सकता है क्योंकि खतरनाक जंगली जानवर यहां नहीं हैं। कभी-कभी नीलगाय अचानक से सामने आकर खड़ी हो जाती है लेकिन शेर, चीते जैसे जानवर यहां नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन सरकार की नाइट सफारी योजना जमीन पर उतरेगी उस दिन पर्यटकों के लिए उत्तर प्रदेश का यह जंगल सबसे ज्यादा पसंदीदा जंगल बन जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुकरैल नाले से नदी में बदलने की जद्दोजहद </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुकरैल नदी में कुछ साल पहले तक वो लोग नहाने आते थे जिन्हें कुत्ता काट लेता था। ऐसी मान्यता थी कि कुत्ता काटने वाला अगर इस पानी में नहा ले तो वो ठीक हो जाता है, लेकिन वन अधिकारियों का कहना है कि कुत्ता काट ले तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए, इस पानी में ऐसा कुछ नहीं है जो ठीक कर सके। नाले से नदी में बदलने की शुरू हुई कवायद से कुकरैल नाला जिस दिन भी साफ़-सुथरी नदी में बदल गया उस दिन यह इलाका लखनऊ के सबसे शानदार पर्यटन स्थल में बदल जाएगा। यह नाला कभी नदी ही था लेकिन सीवर का पानी गिरते-गिरते कब नदी बदबूदार नाले में बदल गई पता ही नहीं चला। जब इसका नाम ही कुकरैल नाला पड़ गया तब जिम्मेदारों की आंख खुली। तब समझ आया कि कुकरैल नदी ही होती तो कुकरैल जंगल में चार चांद लगा देती। कुछ साल से कुकरैल नाले को साफ़ करने और इससे जुड़े नालों को दूसरी ओर मोड़ने का काम शुरू हुआ है, तबसे यह उम्मीद जगी है कि समय लगेगा लेकिन कुकरैल नदी पुनर्जीवित होकर फिर से जीवनदायिनी नदी में बदलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कुकरैल नदी बख्शी के तालाब इलाके के अस्ती गांव के एक कुएं से निकली है। यह नदी लखनऊ की प्रमुख नदी गोमती में आकर मिल जाती है। शहरीकरण बढ़ा तो नदी में नाले गिरने लगे, लोग कचरा फेंकने लगे, जीवन देने वाली नदी कुछ ही दशकों में नाले में बदल गई। यह जाकर गोमती में मिली तो गोमती को पहले से ज्यादा प्रदूषित कर दिया। सरकार ने कुकरैल नदी को पुनर्जीवित करने की योजना तैयार की तो तमाम अतिक्रमण हटाये गए, नालों की टैपिंग की जा रही है, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाये जा रहे हैं, नालों का रुख मोड़ने की पहल हुई। सरकार ने नाले में बदल चुकी नदी को फिर से पुराने स्वरूप में लाने के लिए कमर कस ली तो काम तेज हो गया। समय लगेगा लेकिन उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में राजधानी में गोमती और कुकरैल नाम की दो साफ़ सुथरी नदियां यहां के नागरिकों को जीवन देने का काम करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(31)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (31)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार की योजना कुकरैल नदी को पुनर्जीवित कर यहां भी रिवर फ्रंट बनाने की है। नदी पुनर्जीवित हो जायेगी तो कुकरैल नदी के दोनों किनारों पर टहलने और साइकिल चलाने का एक अलग ही आनंद होगा क्योंकि यहां पार्श्व में कुकरैल जंगल के आसमान छूते पेड़ नजर आएंगे। एक तरफ पेड़ों की हरियाली सुकून देगी तो दूसरी तरफ जंगल से छनकर आती शुद्ध आक्सीजन फेफड़ों को आराम मुहैया करायेगी।<br /><strong>मोहम्मद अहसन, पूर्व प्रमुख वन संरक्षक उत्तर प्रदेश</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सभी फोटो छायाकार राजकुमार वाजपेयी ने क्लिक की हैं</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585353/the-countrys-first-night-safari-will-be-built-in-kukrail</link>
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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 14:07:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या में खुला रामायण वैक्स म्यूजियम, 150 में कीजिए मोम की मूर्तियों के दर्शन, जानें क्या है खासियत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">अयोध्या, </span>अमृत विचार : </strong>दुनिया का पहला रामायण वैक्स (मोम) म्यूजियम लोगों के लिए खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसका लोकार्पण किए जाने के बाद अब यहां की भव्यता हर कोई देख सकेगा। हालांकि म्यूजियम में प्रवेश के लिए शुल्क तय किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति को इसमें प्रवेश के लिए 150 रुपये शुल्क देय होगा। वरिष्ठ नागरिकों को रियायत दी गई है। उन्हें सौ रुपये में प्रवेश दिया जाएगा। पांच वर्ष तक के बच्चों का कोई शुल्क नहीं पड़ेगा। यह म्यूजियम सुबह आठ से शाम आठ बजे तक संचालित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर रामघाट चौराहे</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585344/ramayana-wax-museum-opened-in-ayodhya-visit-the-wax-statues"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(26)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">अयोध्या, </span>अमृत विचार : </strong>दुनिया का पहला रामायण वैक्स (मोम) म्यूजियम लोगों के लिए खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसका लोकार्पण किए जाने के बाद अब यहां की भव्यता हर कोई देख सकेगा। हालांकि म्यूजियम में प्रवेश के लिए शुल्क तय किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति को इसमें प्रवेश के लिए 150 रुपये शुल्क देय होगा। वरिष्ठ नागरिकों को रियायत दी गई है। उन्हें सौ रुपये में प्रवेश दिया जाएगा। पांच वर्ष तक के बच्चों का कोई शुल्क नहीं पड़ेगा। यह म्यूजियम सुबह आठ से शाम आठ बजे तक संचालित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर रामघाट चौराहे के निकट 9850 वर्ग फीट क्षेत्र में फैले इस पूर्णतः एयर कंडीशंड म्यूजियम को बनाने में लगभग आठ से 10 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। नगर निगम के सहयोग से संचालित इस म्यूजियम में श्री राम समेत 50 प्रमुख पात्रों की जीवंत वैक्स प्रतिमाएं प्रदर्शित हैं, जो रामायण की पूरी कथा को जीवंत कर देंगी। इसके अंदर दर्शक जैसे ही कदम रखेंगे, त्रेता युग की महक और राम धुन की मधुर ध्वनि सुनाई पड़ेगी। म्यूजियम का निर्माण साउथ इंडियन वास्तु शैली में किया गया है, जो दक्षिण भारत की पारंपरिक स्थापत्य कला का सुंदर संगम दर्शाता है। हर वैक्स मॉडल की अलग-अलग लाइटिंग की गई है, जो पात्रों को जीवंत बना देती है। दर्शक भगवान राम की मूर्ति के कपड़े, बाल और मुस्कान को छूकर हकीकत महसूस कर सकते हैं। रामलला के बाल रूप की वैक्स मूर्ति के साथ सेल्फी लेने की विशेष व्यवस्था है। बच्चे-बूढ़े सभी यहां आकर बालक राम के साथ फोटो खिंचवाकर यादगार पल संजो सकेंगे। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि अयोध्या के विकास में यह म्यूजियम मील का पत्थर साबित होगा। राम मंदिर बनने के बाद यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यह उनके लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।</span></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">50 पात्रों की लगी हैं मूर्तियां</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस वैश्विक स्तर के म्यूजियम का निर्माण केरल की प्रसिद्ध सुनील वैक्स म्यूजियम कंपनी ने किया है। कंपनी के प्रमुख सुनील ने बताया कि अयोध्या का यह रामायण म्यूजियम अनोखा है। यहां हमने रामायण के 50 पात्रों को इतनी बारीकी से गढ़ा है कि दर्शक खुद को त्रेता युग में महसूस करेंगे। उन्होंने बताया कि यहां भगवान राम के 14 वर्षों से जुड़े संस्मरण देखे जा सकेंगे। मंदिर में लगी रामलला की मूर्ति की तरह यहां भी रामलला का वैक्स में दिखाया गया है। भगवान राम की छह और हनुमान जी की तीन मूर्तियां बनाई गई हैं। अभी उद्घाटन हुआ है इसलिए एक माह तक 150 रुपये चार्ज तय किया गया है। इसके बाद दो सौ कर दिया जाएगा। स्कूली बच्चों के ग्रुप को छूट भी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः  <a class="post-title" href="https://www.amritvichar.com/article/585341/up-governments-blue-dots-ai-initiative-started-youth-will-get"><span class="t-red">UP Government की Blue Dots AI पहल शुरू, </span>युवाओं को स्थानीय भाषा में मिलेगी नौकरी की जानकारी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585344/ramayana-wax-museum-opened-in-ayodhya-visit-the-wax-statues</link>
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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 13:01:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यात्रीगण कृपया ध्यान दें... ऐशबाग और गोमती नगर होकर गुजरेगी दरभंगा-जयपुर अमृत भारत ट्रेन, जानें रूट और टाइमिंग </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः</strong> रेल यात्रियों के लिए राहत की खबर है। दरभंगा से जयपुर के खातीपुरा रेलवे स्टेशन के बीच आधुनिक सुविधाओं से लैस अमृत भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने जा रहा है। इस नई ट्रेन का उद्घाटन रविवार को किया जाएगा। ट्रेन लखनऊ के दो प्रमुख रेलवे स्टेशनों ऐशबाग और गोमतीनगर से होकर गुजरेगी, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार के अनुसार, ट्रेन संख्या 19725/19726 खातीपुरा-दरभंगा-खातीपुरा अमृत भारत एक्सप्रेस में कुल 22 कोच होंगे। इनमें 8 स्लीपर और 11 जनरल कोच शामिल हैं। यह ट्रेन पूरी तरह स्लीपर और सामान्य श्रेणी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585333/darbhanga-jaipur-amrit-bharat-train-will-pass-through-aishbagh-and-gomti"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(20)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः</strong> रेल यात्रियों के लिए राहत की खबर है। दरभंगा से जयपुर के खातीपुरा रेलवे स्टेशन के बीच आधुनिक सुविधाओं से लैस अमृत भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने जा रहा है। इस नई ट्रेन का उद्घाटन रविवार को किया जाएगा। ट्रेन लखनऊ के दो प्रमुख रेलवे स्टेशनों ऐशबाग और गोमतीनगर से होकर गुजरेगी, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार के अनुसार, ट्रेन संख्या 19725/19726 खातीपुरा-दरभंगा-खातीपुरा अमृत भारत एक्सप्रेस में कुल 22 कोच होंगे। इनमें 8 स्लीपर और 11 जनरल कोच शामिल हैं। यह ट्रेन पूरी तरह स्लीपर और सामान्य श्रेणी के यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उद्घाटन के दिन 21 जून को विशेष ट्रेन संख्या 09711 खातीपुरा से शाम 4 बजे रवाना होगी। यह ऐशबाग से रात 3:50 बजे और गोमतीनगर से 4:41 बजे होकर अगले दिन शाम दरभंगा पहुंचेगी। नियमित संचालन 22 जून से शुरू होगा। खातीपुरा-दरभंगा एक्सप्रेस (19725) शुक्रवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी। ट्रेन खातीपुरा से रात 10:30 बजे चलकर आगरा, कानपुर, ऐशबाग, गोमतीनगर और गोरखपुर होते हुए तीसरे दिन रात 12:55 बजे दरभंगा पहुंचेगी। वहीं वापसी में दरभंगा-खातीपुरा एक्सप्रेस (19726) रविवार को छोड़कर छह दिन चलेगी और यात्रियों को सुविधाजनक सफर का विकल्प देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:02:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ की 'छतर मंजिल' बनेगी ग्लोबल टूरिज्म हब: नवाबी विरासत के साथ मिलेगा वर्ल्ड क्लास हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी का मजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक छतर मंजिल को विश्वस्तरीय हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने शुक्रवार को छतर मंजिल स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पर्यटन विकास एवं संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और एक्सस्पर्ट के साथ परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की।</span></p>
<p style="text-align:justify;">अपर मुख्य सचिव ने बताया कि छतर मंजिल की मूल वास्तुकला, विरासत और सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखते हुए विश्व स्तरीय हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यह लखनऊ को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585230/chhatar-manzil-of-lucknow-will-become-a-global-tourism-hub"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(84)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक छतर मंजिल को विश्वस्तरीय हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने शुक्रवार को छतर मंजिल स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पर्यटन विकास एवं संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और एक्सस्पर्ट के साथ परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की।</span></p>
<p style="text-align:justify;">अपर मुख्य सचिव ने बताया कि छतर मंजिल की मूल वास्तुकला, विरासत और सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखते हुए विश्व स्तरीय हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यह लखनऊ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">उन्होंने बताया कि प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य ऐसा पर्यटन केंद्र विकसित करना है, जो अवध के इतिहास, स्थापत्य कला, पारंपरिक व्यंजनों, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को एकीकृत रूप में प्रस्तुत कर सके। आगंतुकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं और सांस्कृतिक अनुभव विकसित किए जाएंगे, ताकि इसका उपयोग दीर्घकालिक और सतत रूप से सुनिश्चित किया जा सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:42:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जम्मू जाने वाली ट्रेनों में भारी वेटिंग, दो महीने पहले बुकिंग पर भी नहीं मिल रहा कन्फर्म टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः</strong> गर्मी की छुट्टियों में परिवार के साथ घूमने और मां वैष्णो देवी के दर्शन का सपना देखने वाले हजारों यात्रियों के लिए जम्मू और मुंबई समेत कई प्रमुख रूटों पर ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि दो महीने पहले टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को भी सीट की गारंटी नहीं मिल पा रही है।<br />जम्मू जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में लंबी वेटिंग ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। बेगमपुरा एक्सप्रेस, कोआ-जम्मूतवी एक्सप्रेस, हिमगिरी एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस और अमरनाथ एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में 10 अगस्त तक सीटें फुल हैं। कई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584729/heavy-waiting-lists-on-trains-bound-for-jammu--confirmed-tickets-unavailable-even-with-booking-two-months-in-advance"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(48)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः</strong> गर्मी की छुट्टियों में परिवार के साथ घूमने और मां वैष्णो देवी के दर्शन का सपना देखने वाले हजारों यात्रियों के लिए जम्मू और मुंबई समेत कई प्रमुख रूटों पर ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि दो महीने पहले टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को भी सीट की गारंटी नहीं मिल पा रही है।<br />जम्मू जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में लंबी वेटिंग ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। बेगमपुरा एक्सप्रेस, कोआ-जम्मूतवी एक्सप्रेस, हिमगिरी एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस और अमरनाथ एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में 10 अगस्त तक सीटें फुल हैं। कई ट्रेनों में तो वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गर्मी की छुट्टियों में यात्रा की योजना बना चुके परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई रूट का भी यही हाल है। पुष्पक एक्सप्रेस, गोरखपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस, उद्योग नगरी एक्सप्रेस, कुशीनगर एक्सप्रेस और अवध एक्सप्रेस सहित अधिकांश ट्रेनों में 30 जून तक टिकट उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों का कहना है कि रेलवे की मांग के अनुरूप अतिरिक्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा निराश बच्चे और परिवार हैं, जो पूरे साल गर्मी की छुट्टियों का इंतजार करते हैं। लेकिन टिकट न मिलने के कारण उनकी घूमने-फिरने की योजनाएं अधर में लटक गई हैं। निराला नगर निवासी सर्वेश दीक्षित ने बताया कि उन्होंने जम्मू जाने का प्लान बनाया था और होटल और अन्य बुकिंग तक करा रखी हैं, मगर ट्रेन टिकट न मिलने से पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>दलालों की सक्रियता बढ़ी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">टिकटों की कमी का फायदा दलाल उठा रहे हैं। विकास जायसवाल ने बताया कि उन्हें 26 जून को जम्मू जाना था, टिकट नहीं मिल रहा था। एक दलाल से संपर्क किया उसने थर्ड एसी का टिकट एक हजार रुपये अधिक लेकर दिला दिया। उन्होंने बताया कि दलाल कंफर्म टिकट दिलाने के नाम पर 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं। रेलवे की सख्ती के दावों के बावजूद दलालों की सक्रियता कम होती नजर नहीं आ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 15:14:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Great Nicobar Project  : ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी ने डॉक्यूमेंट्री रिलीज कर सरकार को घेरा, बोले-''रक्षा रणनीति से इसका कोई संबंध नहीं''</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का दायरा 166.10 वर्ग किलोमीटर है। इसमें इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पावर प्लांट और टाउनशिप शामिल है। वर्ष 2035 तक तीन चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट की लागत 72,000 करोड़ से लेकर 92,000 करोड़ के आसपास आंकी जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583939/great-nicobar-project--rahul-gandhi-release-documentary-raise-many-questions"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/andman-nicobar-news-.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार, लखनऊ :</strong> विश्व पर्यावरण दिवस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीप के दौरे की एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज करके, मोदी सरकार के 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार के 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' का रक्षा रणनीति से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि ये इकोलॉजी को बिगाड़ने वाला जरूर है। </p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि, मैं पर्यावरण के अनुकूल संतुलित विकास का पक्षधर हूं। लेकिन यहां का घना जंगल उजाड़ा जाएगा।" 1.5 करोड़ पेड़ काटे जा रहे हैं। मूंगा चट्टानों का नामोनिशान मिटाया जा रहा है। सैनिक और आदिवासी विस्थापित होंगे। इसलिए क्योंकि एक बिजनेसमैन, देश की सबसे महत्वपूर्ण और इकोलॉजिकल भूमि पर होटल और कसीनों बनाना चाहता है।" </p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/rahul-gandhi-in-andaman-nicobar-.jpg" alt="Rahul Gandhi in Andaman Nicobar" width="1280" height="720"></img>
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर पहुंचे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी। फोटो-क्रेडिट साभार कांग्रेस एक्स हैंडल

<p> </p>
<p>16 मिनट की डॉक्यमेंट्री में राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीप की अहमियत पर जोर देते हुए ये समझाने का प्रयास किया हैकि वह देश की पारिस्थितकी (Ecology) तंत्र के लिए क्यों बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) का खुला उल्लंघन हो रहा है। </p>
<h4><strong>कोई रक्षा रणनीति नहीं  </strong></h4>
<p><br />राहुल गांधी का तर्क है कि 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' कोई रक्षा रणनीति नहीं है। आईएनएस बाज (INS Baaz) का विस्तार कीजिए-हम सरकार को समर्थन करेंगे। नौसेना पांच साल से विस्तार की मांग उठा रही है, लेकिन उसे नजरंदाज किया गया। न तो ट्रांशिपमेंट पोर्ट के लिए है, क्योंकि केरल में पहले ही मेनलैंड पर पोर्ट बन रहा है। </p>
<h4><strong>पर्यावरण की भारी तबाही</strong></h4>
<p>राहुल गांधी के मुताबिक, इस परियोजना में लगभग 1.5 करोड़ पेड़ काटे जाएंगे। कोरल रीफ (मूंगा चट्टानें) नक्शे से मिटा दी जाएंगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश का हर युवा इस बात को बखूबी समझता है कि चंद पैसों के मुनाफे के लिए हमारी अनमोल प्रकृति को नष्ट नहीं किया जा सकता है।</p>
<h4><br /><strong>क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट </strong></h4>
<p><br />अंडमान और निकोबार द्वीप के लिए केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट बनाया है। लागत 72,000 करोड़ से 92,000 करोड़ के बीच है। इसका उद्देश्य ये है कि हिंद-प्रशांत (Indo Pacific) क्षेत्र में भारत की समुद्री रक्षा रणनीति मजबूत की जा सके। </p>
<h4><strong>166.10 वर्ग किलोमीटर है क्षेत्र </strong></h4>
<p><br />ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट वर्ष 2025 से 2035 तक, तीन चरणों में पूरा किया जाना है। यह परियोजना 166.10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। इसमें 130.75 वर्ग किलोमीटर वन भूमि यानी वन क्षेत्र है और 35.35 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि। यहां चरणबद्ध तरीके से बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। </p>
<h4><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/nicobar-.jpg" alt="Nicobar" width="1280" height="720"></img></h4>
<h4><br /><strong>1-इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल </strong></h4>
<h5><br />ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में 14.2 मिलिन टीईयू की क्षमता वाला एक इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (आईसीटीटी) बनाया जाएगा। </h5>
<h5><br />2-ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा। हर घंटे करीब 4000 यात्रियों की क्षमता वाला एयरपोर्ट होगा। </h5>
<h5>3-ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 450 एमवीए का आधुनिक पावर प्लांट बनेगा। हाइब्रिड बिजली प्लांट, जो प्राकृतिक गैस और सौर ऊर्जा पर आधारित होगा। </h5>
<h5>4-ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में आधुनिक टाउनशिप का प्लान है। व्यवस्थित तरीके से यहां नगरीय विकास की संरचना की जाएगी। जिसका दायरा करीब 16,610 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा। इस तरह दक्षिण एशिया में भारत अपनी आर्थिक और सामरिक रणनीति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। </h5>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/583939/great-nicobar-project--rahul-gandhi-release-documentary-raise-many-questions</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:41:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ateeq Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Environment Day: फिरोजाबाद का रपड़ी बना ईको टूरिज्म का नया मॉडल, 3.47 करोड़ रुपये से विकसित होंगी नई सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर फिरोजाबाद का रपड़ी ईको टूरिज्म केंद्र पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के संतुलित मॉडल के रूप में चर्चा हो रही है। प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए यहां पर्यटकों के लिए आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य सरकार 3.47 करोड़ रुपये की लागत से नई विकास परियोजनाओं पर कार्य कर रही है, जिससे यह स्थल परिवारों और प्रकृति प्रेमियों के लिए और आकर्षक बनेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">परियोजना के तहत आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर, बच्चों के लिए नेचर लर्निंग जोन, सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम, नए पाथवे, प्रवेश द्वार, बलुआ पत्थर से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583930/world-environment-day--firozabad-s-rapdi-has-become-a-new-model-for-eco-tourism--with-%E2%82%B93-47-crore-to-develop-new-facilities--promoting-tourism-along-with-environmental-protection"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(68).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर फिरोजाबाद का रपड़ी ईको टूरिज्म केंद्र पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के संतुलित मॉडल के रूप में चर्चा हो रही है। प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए यहां पर्यटकों के लिए आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य सरकार 3.47 करोड़ रुपये की लागत से नई विकास परियोजनाओं पर कार्य कर रही है, जिससे यह स्थल परिवारों और प्रकृति प्रेमियों के लिए और आकर्षक बनेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">परियोजना के तहत आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर, बच्चों के लिए नेचर लर्निंग जोन, सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम, नए पाथवे, प्रवेश द्वार, बलुआ पत्थर से बने बैठने के स्थान, उन्नत साइनेज और आकर्षक लैंडस्केपिंग विकसित की जा रही है। आगंतुकों को जैव विविधता से जोड़ने के लिए मगरमच्छ, डॉल्फिन, कछुआ, लकड़बग्घा और भारतीय अजगर जैसे वन्यजीवों की वास्तविक आकार की प्रतिकृतियां भी स्थापित की जाएंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>प्रकृति के अनुरूप विकास पर विशेष जोर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि रपड़ी संरक्षण आधारित पर्यटन विकास का उभरता हुआ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसा मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिसमें पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है। यहां कम प्रभाव वाले आधारभूत ढांचे, सौर ऊर्जा और प्रकृति आधारित गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोजगार और जागरूकता को भी मिलेगा बढ़ावा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि रपड़ी परियोजना दर्शाती है कि किसी प्राकृतिक स्थल का विकास उसकी पारिस्थितिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए भी किया जा सकता है। प्रदेश के अन्य ईको टूरिज्म स्थलों पर भी इसी तरह के संरक्षण आधारित मॉडल लागू किए जा रहे हैं, जिससे जैव विविधता संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>आगरा</category>
                                            <category>फिरोजाबाद</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/583930/world-environment-day--firozabad-s-rapdi-has-become-a-new-model-for-eco-tourism--with-%E2%82%B93-47-crore-to-develop-new-facilities--promoting-tourism-along-with-environmental-protection</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 12:34:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिलुआताल बनेगा ईको टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स का नया केंद्र, 20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित पर्यटन परियोजना का CM ने किया लोकार्पण</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ/गोरखपुर, अमृत विचार:</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को चिलुआताल पर्यटन विकास परियोजना का लोकार्पण करते हुए कहा कि आगामी चरणों में चिलुआताल को रामगढ़ताल की तर्ज पर ईको टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और उन्हें पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित परियोजना को जनता को समर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के दौर में ताल-पोखरों पर अवैध कब्जे होते थे और वे गंदगी व</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583731/chiluataal-to-become-a-new-hub-for-eco-tourism-and-water-sports--cm-inaugurates-tourism-project-developed-at-a-cost-of-over-rs-20-crore"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(16)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ/गोरखपुर, अमृत विचार:</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को चिलुआताल पर्यटन विकास परियोजना का लोकार्पण करते हुए कहा कि आगामी चरणों में चिलुआताल को रामगढ़ताल की तर्ज पर ईको टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और उन्हें पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित परियोजना को जनता को समर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के दौर में ताल-पोखरों पर अवैध कब्जे होते थे और वे गंदगी व अपराध के केंद्र बन जाते थे। वर्तमान सरकार ऐसे जलाशयों को संरक्षित कर उन्हें जन उपयोग और पर्यटन विकास से जोड़ रही है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(17)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (17)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि चिलुआताल का प्राकृतिक स्वरूप इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। इसका पानी पूरी तरह प्राकृतिक स्रोतों से आता है, जबकि रामगढ़ताल में ट्रीटमेंट के बाद पानी छोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि चिलुआताल का शांत और स्वच्छ वातावरण इसे पर्यटन के लिए बेहद उपयुक्त बनाता है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से चिलुआताल में फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे 20 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में भी मददगार होगी।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(18)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (18)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>वाटर स्पोर्ट्स की अपार संभावनाएं</strong></h4>
<p>सीएम योगी ने कहा कि रामगढ़ताल की तरह चिलुआताल में भी वाटर स्पोर्ट्स के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। हाल ही में रामगढ़ताल में राष्ट्रीय जूनियर रोइंग चैंपियनशिप का सफल आयोजन हुआ था। भविष्य में चिलुआताल को भी साहसिक और जल क्रीड़ा गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।</p>
<h4><strong>स्वच्छता और पौधरोपण अभियान का आह्वान</strong></h4>
<p>मुख्यमंत्री ने 5 जून से 21 जून तक स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और योग शिविर आयोजित करने का आह्वान किया। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रामगढ़ताल और चिलुआताल के किनारे व्यापक पौधरोपण करने को कहा। साथ ही गोरखपुर को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ शहर बनाने का संकल्प लेने की अपील की।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(19)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (19)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>भजन संध्या स्थल का भी लिया जायजा</strong></h4>
<p>लोकार्पण से पूर्व मुख्यमंत्री ने चिलुआताल के समीप निर्माणाधीन भजन संध्या स्थल का निरीक्षण किया। लगभग 12.95 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घाट परिसर में हरिशंकरी का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>गोरखपुर</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 10:40:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> नदी जो पत्थरों पर करती है अनोखी चित्रकारी... बांदा का शजर पत्थर दुनिया को दे रहा है प्रकृति का जादू</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कानपुरः </strong>मध्य प्रदेश का पन्ना जिला अगर हीरों के लिए मशहूर है, तो उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड का बांदा जिला शजर पत्थर के प्राकृतिक खजाने के लिए प्रसिद्ध है। यहां केन नदी में पाए जाने वाले इस दुर्लभ और कीमती रत्न से एक से बढ़कर एक गहने और सजावटी सामान बनाए जाते हैं। ‘शजर’ पर्शियन शब्द है, जिसका अर्थ पेड़ होता है। यह नाम इस पत्थर को इसी कारण मिला, क्योंकि इसमें पेड़ जैसी प्राकृतिक आकृतियां बनी होती हैं। अपनी अनूठी प्राकृतिक तस्वीरों के कारण ही इसे पहचाना भी जाता है।</p>
<p>शजर पत्थर लाखों साल पुराने जीवाश्मों से बना होता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582990/the-river-that-paints-unique-paintings-on-stones----banda-s-shajar-stone-is-giving-the-world-the-magic-of-nature"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(24)6.png" alt=""></a><br /><p><strong>कानपुरः </strong>मध्य प्रदेश का पन्ना जिला अगर हीरों के लिए मशहूर है, तो उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड का बांदा जिला शजर पत्थर के प्राकृतिक खजाने के लिए प्रसिद्ध है। यहां केन नदी में पाए जाने वाले इस दुर्लभ और कीमती रत्न से एक से बढ़कर एक गहने और सजावटी सामान बनाए जाते हैं। ‘शजर’ पर्शियन शब्द है, जिसका अर्थ पेड़ होता है। यह नाम इस पत्थर को इसी कारण मिला, क्योंकि इसमें पेड़ जैसी प्राकृतिक आकृतियां बनी होती हैं। अपनी अनूठी प्राकृतिक तस्वीरों के कारण ही इसे पहचाना भी जाता है।</p>
<p>शजर पत्थर लाखों साल पुराने जीवाश्मों से बना होता है। इसका निर्माण कैपिलरी एक्शन प्रक्रिया से होता है, जिसमें पिघला हुआ खनिज पत्थर की दो कठोर पर्तों के बीच ठंडा होकर फैलता है। इससे पत्थर में कुदरती तौर पर पेड़, पत्तियां, मोर, चंद्रमा, फूल या मानव आकृतियां बन जाती हैं। शजर पत्थर, एक प्रकार का सेमी-प्रेशियस पत्थर है। कुछ लोग इसे हकीक पत्थर का ही एक प्रकार भी मानते हैं, जबकि अंग्रेजी में इसे ‘डेंड्रिटिक एगेट’ नाम से पुकारा जाता है। आमतौर पर यह पत्थर सफेद, भूरे, काले और हल्के गुलाबी रंगों में मिलता है। केन नदी की तलहटी में पाए जाने वाले शजर पत्थर की विशेषता इसमें दिखाई देने वाले पेड़-पौधों जैसे प्राकृतिक चित्र होते हैं, जो इन्हें अन्य पत्थरों से अलग बनाते हैं। ये चित्र पत्थर में पाए जाने वाले खनिजों के कारण प्राकृतिक रूप से बनते हैं, इसी कारण इन्हें प्राकृतिक कला भी कहा जाता है। वास्तव में शजर पत्थर शिल्प कला प्रकृति और हुनर का वह अद्भुत संगम है, जिसमें एक नदी अपने पत्थरों पर खुद चित्रकारी करती है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(25)6.png" alt="MUSKAN DIXIT (25)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>17 वीं सदी में शजर की खूबियों को दुनियाभर ने पहचाना</strong></h4>
<p>ऐसा माना जाता है कि केन नदी में शजर पत्थर हमेशा से पाए जाते थे, लेकिन इनकी असल पहचान 17 वीं शताब्दी में तब हुई, जब अरब से आए लोगों ने इन पत्थरों की खूबियां पहचानी। वह लोग शजर पत्थर में बनी आकृतियां देखकर आश्चर्यचकित रह गए। पत्थर पर प्राकृतिक रूप से पेड़, पत्तियां और अलग-अलग तरह की आकृतियां देखकर उन्होंने इसका नाम ‘शजर’ रख दिया। शजर का मतलब पर्शियन में पेड़ होता है। मुगल शासनकाल में शजर पत्थर की अहमियत काफी बढ़ गई। मुगलों के समय में इस कला को बहुत प्रोत्साहन मिला। शजर पत्थर का इस्तेमाल राजदरबार में कीमती वस्तुएं बनाने और सजावट के लिए किया जाने लगा।  एक समय में ईरान, मिस्त्र, अफगानिस्तान जैसे देशों में शजर पत्थर की खासी मांग थी। इसका मुख्य कारण इसका अद्भुत स्वरूप था। वहां इस पत्थर को पवित्र और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।</p>
<h5><strong>क्वीन विक्टोरिया ले गई थीं शजर मुस्लिम देशों में भी खासी मांग</strong></h5>
<p>देश में जिस समय ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन था, उस समय ब्रिटेन की महारानी क्वीन विक्टोरिया के लिए दिल्ली के दरबार में एक नुमाइश लगाई गई थी। इसमें रानी विक्टोरिया को शजर पत्थर इतना ज्यादा पसंद आया था कि वह इसे अपने साथ ब्रिटेन ले गईं। दुनियाभर में खासकर मुस्लिम देशों में शजर पत्थर की खासी मांग रहती है। मुसलमानों के बीच इस पत्थर का विशेष महत्व है। वह इसे कुदरत का नायाब तोहफा मानते हैं और इस पर कुरान की आयतें तक लिखवाते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि मक्का जाने वाले हज यात्री इस पत्थर को अपने साथ लेकर जाते हैं। इसी तरह कुछ लोगों की आस्था है कि इस पत्थर को पहनने से बीमारियां दूर भागती हैं।</p>
<h4><strong>इंसानों की तरह कोई दो पत्थर एक जैसे नहीं होते</strong></h4>
<p>शजर पत्थर पूरी दुनिया में सिर्फ तीन स्थानों पर पाया जाता है। भारत में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अलावा मोन्ताना, ब्राजील तथा रूस में इसकी उपलब्धता मिलती है। इन पत्थरों की खास बात यह है कि ये खुद अपनी चित्रकारी करते हैं, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस तरह दुनिया में कोई दो इंसान तमाम मानकों पर एक जैसे नहीं होते हैं, उसी तरह कोई भी दो शजर पत्थर एक तरह के नहीं होते।</p>
<h4><strong>मान्यता और वैज्ञानिक तथ्य</strong> </h4>
<p>ऐसी मान्यता है कि शजर पत्थर पर आकृतियां उस समय उभरती हैं, जब शरद पूर्णिमा की रात में चंद्रमा की किरणें इस पत्थर पर पड़ती हैं। ऐसे में पत्थरों और किरणों के बीच में जो भी आकृति आती है, वही इन पत्थरों पर उभर जाती है। हालांकि वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक शजर पत्थर पर उभरने वाली प्राकृतिक आकृति वास्तव में फंगस ग्रोथ होती है। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(28)4.png" alt="MUSKAN DIXIT (28)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>हस्तशिल्प की अनूठी पहचान</strong></h4>
<p>केन नदी में मिलने वाला शजर पत्थर न केवल बांदा क्षेत्र की संस्कृति का प्रतिबिंब है, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की अनूठी पहचान है। यह पत्थर अपनी शिल्प कला, ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पूरी दुनिया में विशिष्ट स्थान रखता है। शजर पत्थर शिल्प स्थानीय कारीगरों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है। बांदा और उसके आसपास के शिल्पकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस कला को जीवित रखे हुए हैं। वह इस पत्थर से खूबसूरत आभूषणों को तैयार करते हैं, जो न केवल देखने में आकर्षक होते हैं, बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी रखते हैं। शजर पत्थर की उपलब्धता यहां के कारीगरों की आजीविका का साधन होने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास में भी योगदान कर रही है। सरकार ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत यहां के इस अद्वितीय शिल्प को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए खासी पहल की है, जिससे स्थानीय कारीगरों की माली हालत में सुधार आने के साथ उनकी कला को भविष्य की पीढ़ियों के लिए  संरक्षित और सुरक्षित करने में मदद मिली है।</p>
<h4><strong>विरासत को सहेजने जैसा है, इन्हें पसंद करना</strong></h4>
<p>बांदा के हुनरमंद शिल्पकारों द्वारा तराशा गया शजर पत्थर अब जीआई टैग प्राप्त उत्पाद होने के साथ प्रदेश के हस्तशिल्प परिपथ का गौरव भी है। जब कोई इन नायाब पत्थरों को अपनी पसंद बनाता है, तो एक प्रकार से वह वैश्विक विरासत को भी सहेजता है। प्रकृति के उपहार जैसा यह पत्थर मानव जाति के लिए भौगोलिक मूल्य वाला एक भूवैज्ञानिक आश्चर्य भी है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(26)6.png" alt="MUSKAN DIXIT (26)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>मेहनत और धैर्य से भरी शिल्प निर्माण की प्रक्रिया</strong></h4>
<p>शजर पत्थर शिल्प की प्रक्रिया काफी मेहनत  और धैर्य से भरी होती है। इसके कई चरणों में तैयार किया जाता है। सबसे पहले केन नदी से पत्थर एकत्र किए जाते हैं। इसके बाद इन पत्थरों को आवश्यक आकार में काटा और तराशा जाता है। अगली प्रक्रिया पॉलिशिंग की होती है, जिसमें पत्थरों को चमकाया जाता है। इसी दौरान पत्थरों पर नक्काशी या उनकी प्राकृतिक डिजाइन को उभारने का काम किया जाता है।</p>
<h4><strong>कौन से बनते हैं उत्पाद</strong></h4>
<p>गहनों में हार, अंगूठी, झुमके, बाली और कंगन के साथ सजावटी सामान में फूलदान, पेपरवेट, मूर्तियां व तस्वीरों के फ्रेम, शिवलिंग, मंदिर आदि बनते हैं। </p>
<h4><strong>पर्यावरण मित्र उत्पाद</strong></h4>
<p>यह शिल्प बांदा के हजारों शिल्पकारों के लिए रोजगार का साधन है। यह क्षेत्रीय संस्कृति और परंपरा को संरक्षित रखता है। प्राकृतिक पत्थरों से बनाए गए उत्पाद पर्यावरण के लिए हानिरहित होते हैं। शजर पत्थर शिल्प अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी अपना स्थान बना चुका है।</p>
<h4><strong>आधुनिक तकनीक प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की जरूरत</strong></h4>
<p>वर्तमान में शजर पत्थर शिल्प को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। केन नदी में पत्थरों की उपलब्धता सीमित होने से कच्चे माल की कमी हो रही है। शिल्पकारों के पास आधुनिक उपकरणों के साथ तकनीक की कमी है। छोटे शिल्पकारों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में अक्सर कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए शिल्पकारों का कहना है कि सरकार को इस कला के प्रोत्साहन के लिए योजना बनानी चाहिए। आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए। शजर पत्थर शिल्प को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनियां आयोजित करने के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाना चाहिए। शजर पत्थर को तराशने वाले कारीगरों का कहना है कि सरकार से पर्याप्त सुविधाएं, बाजार व वित्तीय मदद मिलने से शजर आभूषणों का सौंदर्य चमकने में देर नहीं लगेगी। शजर पत्थर शिल्प देश की अप्रतिम धरोहर है। यह केवल एक कला नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, और मानव श्रम का अद्भुत संगम है। अगर इसे सही दिशा और समर्थन मिले, तो इसमें कोई शक नहीं कि यह शिल्प अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ख्याति अर्जित कर सकता है। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(27)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (27)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>कमान और सिलिकान से कटान  घिसाई के बाद चमकाने का काम</strong></h4>
<p>शजर पत्थर को तराशने का काम कुशल कारीगरों द्वारा परंपरागत तरीके से किया जाता है। इसके लिए धनुष की आकृति वाली लकड़ी में स्टील का तार बंधा जाता है, जिसे कमान कहते हैं। शजर पत्थर को लकड़ी के स्टैंड में रखकर कमान और सिलिकान कार्बाइड पाउडर की मदद से दो से चार सेंटीमीटर की पतली पट्टिकाओं में काटा जाता है। इसके बाद ग्राइंडर से घिसकर चिकना करने के बाद जब इस पर पालिश की जाती है, तो प्राकृतिक तस्वीरें जैसे पेड़, शाखाएं, पत्तियां, त्रिशूल, ऊंट व बत्तख आदि की आकृति उभरकर सामने आ जाती है और पत्थर को देखने से ऐसा लगता है कि जैसे कैमरे से फोटो खींचे गए हो। शजर पत्थर से बने आभूषण और सजावटी सामान की कीमत 300 से लेकर 25,000 रुपये तक होती है। </p>
<p class="MsoNoSpacing"><span style="font-size:18pt;">-</span><span lang="hi" style="font-size:18pt;" xml:lang="hi">मनोज</span><span lang="hi" style="font-size:18pt;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:18pt;" xml:lang="hi">त्रिपाठी</span><span style="font-size:18pt;">, </span><span lang="hi" style="font-size:18pt;" xml:lang="hi">कानपुर।</span><span lang="hi" style="font-size:18pt;" xml:lang="hi"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>बांदा</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Fashion and Trends</category>
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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:40:03 +0530</pubDate>
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