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                <description>Tourism RSS Feed</description>
                
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                <title>माल, बाल और पटाल: अल्मोड़ा की अनुपम सांस्कृतिक विरासत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:center;"><span style="color:rgb(224,62,45);">समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पटाल बाजार में घूमते हुए रोमांच का अनुभव होना स्वाभाविक है, क्योंकि न केवल यह बाजार अल्मोड़ा शहर के केंद्र में एक लंबी पहाड़ी चोटी पर स्थित है, बल्कि यहां से हिमालय की शानदार सफेद दमकती चोटियां नजारे को अद्भुत कर देंती हैं। दरअसल, अल्मोड़ा का पटाल बाजार अपनी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कुछ चुनिंदा बाजारों में गिना जाता है। इसकी तुलना अक्सर यूरोपीय देशों के ‘ओल्ड टाउन’ और मध्यकालीन बाजारों से की जाती है। उन अंतर्राष्ट्रीय बाजारों या</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580760/maal--baal-and-patal--the-unique-cultural-heritage-of-almora"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(7)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><span style="color:rgb(224,62,45);">समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पटाल बाजार में घूमते हुए रोमांच का अनुभव होना स्वाभाविक है, क्योंकि न केवल यह बाजार अल्मोड़ा शहर के केंद्र में एक लंबी पहाड़ी चोटी पर स्थित है, बल्कि यहां से हिमालय की शानदार सफेद दमकती चोटियां नजारे को अद्भुत कर देंती हैं। दरअसल, अल्मोड़ा का पटाल बाजार अपनी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कुछ चुनिंदा बाजारों में गिना जाता है। इसकी तुलना अक्सर यूरोपीय देशों के ‘ओल्ड टाउन’ और मध्यकालीन बाजारों से की जाती है। उन अंतर्राष्ट्रीय बाजारों या शहरों के बारे में भी समझ लेते हैं, जहां से मुख्य रूप से पटाल बाजार की तुलना की जाती है। <strong>अजय दयाल, वरिष्ठ पत्रकार</strong></span></p>
<p>माल, बाल और पटाल। हां, इसी नाम से मशहूर है उत्तराखंड का अल्मोड़ा। माल का आशय माल रोड से है, बाल से मतलब बाल मिठाई से और पटाल यानी पटाल बाजार। यहां मैं चर्चा पटाल बाजार की करने जा रहा हूं। इस बाजार में कदम रखते ही दिल-दिमाग मानो तरोताजा हो जाते हों। माहौल इस कदर रोमांचकारी है कि आंखें नहीं झपकती… कि कहीं कुछ देखने को छूट न जाए। यह पारंपरिक कुमाऊंनी शैली के घरों (पटाल यानी पत्थरों की छत) से बना हुआ ऐसा ऐतिहासिक बाजार है जहां ‘सबकुछ’ मिलता है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(7)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (7)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अब आप जानना चाहेंगे कि सबकुछ से क्या आशय है? किसी बाजार का वर्णन करते हुए अकसर हमने सुना हैं वहां सूई से लेकर अलमारी तक मिलती है। मतलब जीवनयापन की छोटी आवश्यकता से लेकर बड़ी जरुरतें तक पूरी होंती हैं। लेकिन पटाला बाजार के बारे में कहना चाहूंगा कि यहां जाखिया और बिच्छू घास से लेकर लेटेस्ट एआई गजेट्स तक मिलते हैं।</p>
<p>बिच्छू घास यानी कंडाली का साग एक पौष्टिक पत्तेदार सब्जी है, जिसे बिच्छू घास के पत्तों से बनाया जाता है। इसे उबालकर और स्थानीय मसालों का तड़का लगाकर तैयार किया जाता है। इन्हीं मसालों में से एक जाखिया है जो उत्तराखंड और भारत- नेपाल के तराई क्षेत्रों में पाया जाता है। यह एक तीखा और कुरकुरा मसाला है जिसका उपयोग कढ़ी, दालों और सब्जियों में तड़का लगाने के लिए किया जाता है।</p>
<p>समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (लगभग 5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पटाल बाजार में घूमते हुए रोमांच का अनुभव होना स्वाभाविक है, क्योंकि न केवल यह बाजार अल्मोड़ा शहर के केंद्र में एक लंबी पहाड़ी चोटी पर स्थित है बल्कि यहां से हिमालय की शानदार सफेद दमकती चोटियां नजारे को अद्भुत कर देंती हैं।</p>
<p>दरअसल, अल्मोड़ा का पटाल बाजार अपनी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण न केवल भारत, बल्कि दुनिया के कुछ चुनिंदा बाजारों में गिना जाता है। इसकी तुलना अक्सर यूरोपीय देशों के 'ओल्ड टाउन' और मध्यकालीन बाजारों से की जाती है। उन अंतरराष्ट्रीय बाजारों या शहरों के बारे में भी समझ लेते हैं जहां से मुख्य रूप से पटाल बाजार की तुलना की जाती है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(8)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (8)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>इनमें से एक स्कॉटलैंड स्थित एडिनबर्ग का रॉयल माइल है। पटाल बाजार और स्कॉटलैंड के इस बाजार में काफी समानताएं हैं। रॉयल माइल भी कोबलस्टोन (पत्थरों) से बनी एक लंबी सड़क है, जिसके दोनों ओर पुरानी इमारतें और छोटी-छोटी गलियां हैं। पटाल बाजार की तरह ही यहां का फर्श भी खास तरह के तराशे हुए पत्थरों (पटालों) से बना है।</p>
<p>दूसरा चेक रिपब्लिक की राजधानी प्राग का ओल्ड टाउन है। ओल्ड टाउन स्क्वायर की गलियों में भी पटाल बाजार जैसा अनुभव होता है। यहां की संकरी गलियां पत्थरों से पक्की की गई हैं। पटाल बाजार की तरह यहां भी कई पीढ़ियों पुरानी दुकानें हैं जो शहर की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं।</p>
<p>इसी क्रम में ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग में गेट्राइडेगास है। गेट्राइडेगास एक मशहूर ऐतिहासिक शॉपिंग स्ट्रीट है। पटाल बाजार की तरह यहां भी पैदल चलने वालों के लिए अलग व्यवस्था है और दुकानों के बाहर लगे पुराने स्टाइल के साइनबोर्ड और वास्तुकला इसे अल्मोड़ा के पारंपरिक स्वरूप के नजदीक लाते हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(12)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (12)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>सच पूछिए तो पहाड़ी पत्थर (पटाल) से बनी पटाल बाजार की सड़क दुनिया की उन चुनिंदा सड़कों में से है जहां बारिश के बाद भी पानी नहीं रुकता और फिसलन कम होती है। देश-विदेश स्थित कई ऐतिहासिक बाजारों की तरह पटाल बाजार में भी गाड़ियों का प्रवेश वर्जित है, जिससे इसका शांत और प्राचीन स्वरूप स्थिर रहता है।</p>
<p>पटाल बाजार में विचरण करते हुए दुकानों से ऊपर बने घरों पर नजरें थम सी गई। यहां के पुराने घरों की खिड़कियों पर की गई नक्काशी यूरोप की विक्टोरियन या मध्यकालीन शैली की नक्काशी के समान जटिल और खूबसूरत हैं। दरअसल, पटाल बाजार का स्वरूप इसे यूरोप के मध्यकालीन 'स्ट्रीट मार्केट्स' की श्रेणी में खड़ा करता है, जहां आधुनिकता और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।</p>
<p>वैसे भी मध्य हिमालय के काषाण पर्वत की पीठ पर बसा प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा अपनी खूबियों के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में खासा मशहूर है। इस शहर की विशिष्टताओं में एक है यहां की पटाल (पत्थर) संस्कृति। ऐसा माना जाता है कि कुमाऊं अंचल में इस कला की शुरआत कत्यूरघाटी से हुआ था, लेकिन अल्मोड़ा शहर ने इस कला को इस तरह स्वीकार किया कि यह शहर पटालों के नाम से मशहूर हो गया।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(10)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (10)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अल्मोड़ा की बाल मिठाई के साथ ही यहां का माल रोड और यहां की पटाल बाजार इस शहर की खास पहचानों में है। पटाल संस्कृति के इस अद्भुत शहर में आज भी जहां नजर पड़ेगी वहां पटाल संस्कृति की कोई ना कोई झलक देखने को मिल जाती है। यहीं कारण है कि अल्मोड़ा में देश-विदेश से लोग घूमने के लिए आते हैं।</p>
<p>इतिहास टटोलें तो पाते हैं कि लगभग बारह सौ साल पहले प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा में एक ऐसी शिल्पकारी जीवंत हुई जिसे हम आज पटाल संस्कृति के नाम से जानते हैं। उस दौर में मुख्य बाजार हो या मोहल्ले मकान की ढालू छत का निर्माण पटालों से किया गया। आंगन में पटाल, प्रवेश मार्ग में पटाल, मकान की खिड़कियों व दरवाजों के ऊपर पटाल, करीब हर जगह पटाल अपनी खूबसूरती बिखेरते थे। मकान और पैदल मार्ग ही नहीं बल्कि प्राचीन मंदिर भी इन पटालों से अछूते नहीं रहे। उस दौर में ही अल्मोड़ा नगर का डेढ़ किमी लंबा आवश्यक वस्तुओं का बाजार भी पटालों से ऐसा पटा कि पटाल बाजार के नाम से प्रसिद्ध हो गया।</p>
<h3><strong>कभी ब्रिटिश हुकूमत बनी गवाह</strong></h3>
<p>सदियों पुरानी पटाल बाजार ब्रिटिश हुकूमत की भी गवाह बनी। चंद राजाओं ने पटालों का भरपूर प्रयोग किया और इस संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया। यही कारण रहा कि पटाल यहां के जनजीवन का अभिन्न अंग बन गए। मकान, पैदल मार्ग, मंदिर, आंगन ही नहीं बल्कि उस दौर में प्राकृतिक जल स्रोतों और नौलों के निर्माण में भी पटालों का ही उपयोग किया जाता रहा।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(11)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (11)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>शनै: शनै: समय बदला और आधुनिकता के दौर में पटालों का स्थान ईंट सीमेंट, रेता, बजरी और सरिया ने ले लिया। फिर भी, अल्मोड़ा में पटाल संस्कृति का दीदार आज भी किया जा सकता है। पटाल संस्कृति की महत्ता इतनी है कि अगर जेहन में पटालों वाले किसी शहर का नाम आए तो वह अल्मोड़ा के अलावा और कोई नहीं हो सकता।</p>
<p>एक वक्त था जबकि अल्मोड़ा के द्वाराहाट, बल्ढोंटी, पेटशाल, सल्ट, गंगोली, क्वारब जैसे अनेक स्थानों पर जंगलों में काफी मात्रा में पटाल पाई जाती थी। वहां से इन्हें खास तकनीक के जरिए लंबी और चौड़ी स्लेटों के रूप में निकाला जाता था। फिर इन्हीं से हर प्रकार का निर्माण कार्य किया जाता था।</p>
<h3><strong>पटाल शिल्पियों का दौर ही निराला था</strong></h3>
<p>पटाल संस्कृति के अस्तित्व में आने के बाद से ही पर्वतीय क्षेत्रों के पटाल शिल्पियों को यहां रोजगार मिला। सदियों तक यहां पटाल शिल्पियों ने अपने हुनर को इन पटालों में तराशा और यहीं कार्य उनकी कई पुश्तों के लिए रोजी रोटी का माध्यम बना। आज भले की पटाल शिल्पियों को आधुनिक तकनीक के कारण अपने इस रोजगार से किनारा करना पड़ा हो लेकिन एक दौर वह भी था कि पटाल शिल्पियों के सामने कोई और टिक नहीं सकता था।</p>
<p>फिलवक्त भले ही क्यों ना निर्माण कार्यों की नई तकनीक सामने आ रही हों। लेकिन पटाल की विशेषताओं का आज भी कोई जवाब नहीं है। एक्सपर्टस बताते हैं कि पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में लकड़ी और पत्थर के मकान काफी उपयुक्त हैं, जिनमें पटाल का खास महत्व रहा है। क्योंकि, पटाल टिकाऊ और मजबूत होने के साथ ही हर मौसम में अनुकूल तासीर देने वाले भी होते हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(13)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (13)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><strong>भूकंप जैसी आपदा में भी अटल हैं पटाल</strong></h3>
<p>इतना ही नहीं, स्वास्थ्य के लिए भी पटाल लाभकारी मानें गए हैं। टूटफूट होने पर पटालों को आसानी से बदला जा सकता है। इसके साथ ही पटाल जल संरक्षण के लिए भी अनुकूल होते हैं। पटालों के जोड़ों से बरसात का पानी पहले धरती में समाता है जिससे भूमि में वाटर-रिचार्ज होता है। पटाल की सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि भूकंप जैसी आपदा में पटाल भवनों को मजबूती भी प्रदान करती है।</p>
<p>नगर के मल्ला जोशी खोला, चीनाखान, तल्ला जोशी खोला, पांडेखोला, दुगालखोला, तल्ला मल्ला दन्या, डुबकिया, चौंसार, कर्नाटकखोला, गुरुरानीखोला, बख्शीखोला आदि मोहल्लों में पुरानी शैली के पटाल के भवन इस संस्कृति को संजो कर रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।</p>
<p>बहरहाल, पहाड़ की अद्भुत पटाल संस्कृति इस कदर निराली है कि आज भी अल्मोड़ा कई क्षेत्रों में पटाल से बने ढाई सौ साल पुराने भवन तमाम संयुक्त परिवारों की एकजुटता के गवाह बने हुए हैं। भले ही नगर का अधिकांश इलाका कंक्रीट के जंगलों सा होता जा रहा हो लेकिन, पटान से बने भवनों का आकर्षण आज भी जस का तस है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(9)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (9)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><strong>बाल मिठाई का इतिहास और विशेषताएं</strong></h3>
<p>अल्मोड़ा जिला अपनी खूबसूरत पहाड़ियों और ठंडी आबोहवा के लिए मशहूर है, लेकिन इन सबसे अलग है यहां की बाल मिठाई जिसने इसे पूरे भारत में पहचान दिलाई है। बाल मिठाई का उद्भव वर्ष 1856 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ माना जाता है, जिसे जोग लाल साह ने तैयार किया था। उस दौर में अल्मोड़ा ब्रिटिश शासन के अधीन था और यहां बड़ी संख्या में सैनिक तैनात रहते थे। माना जाता है कि इस मिठाई को शुरुआत में सैनिकों के लिए बनाया गया, क्योंकि पहाड़ों में उपलब्ध शुद्ध दूध से तैयार खोया लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता था। धीरे-धीरे इसका अनोखा स्वाद लोगों को भाने लगा और यह आम जनमानस में भी लोकप्रिय हो गई। बाल मिठाई की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>देहरादून</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>अल्मोड़ा</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 13:21:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब ऑनलाइन बुक होंगे कुली: इंडियन रेलवे की अनूठी पहल, ओवरचार्जिंग और मनमाने किराए से मिलेगा छुटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराजः </strong>ट्रेन का सफर तो आरामदायक होता है, लेकिन स्टेशन पर उतरते ही भारी सामान और फिर कुलियों के साथ रेट को लेकर होने वाली 'चिक-चिक' अक्सर सफर का मजा किरकिरा कर देती है। लेकिन अब आपको कुली के लिए न तो भटकना पड़ेगा और न ही मोलभाव करना होगा। उत्तर मध्य रेलवे का प्रयागराज मंडल देश में पहली बार एक ऐसी क्रांतिकारी शुरुआत करने जा रहा है, जो आपकी यात्रा को बेहद आसान बना देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जी हां, अब रेलवे स्टेशनों पर कुली सेवा पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। उत्तर मध्य रेलवे जल्द ही एक अधिकृत ऐप और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580626/porters-will-now-be-booked-online--prayagraj-division-s-first-unique-initiative-in-the-country--will-provide-relief-from-overcharging-and-arbitrary-fares"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराजः </strong>ट्रेन का सफर तो आरामदायक होता है, लेकिन स्टेशन पर उतरते ही भारी सामान और फिर कुलियों के साथ रेट को लेकर होने वाली 'चिक-चिक' अक्सर सफर का मजा किरकिरा कर देती है। लेकिन अब आपको कुली के लिए न तो भटकना पड़ेगा और न ही मोलभाव करना होगा। उत्तर मध्य रेलवे का प्रयागराज मंडल देश में पहली बार एक ऐसी क्रांतिकारी शुरुआत करने जा रहा है, जो आपकी यात्रा को बेहद आसान बना देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जी हां, अब रेलवे स्टेशनों पर कुली सेवा पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। उत्तर मध्य रेलवे जल्द ही एक अधिकृत ऐप और वेबसाइट लॉन्च करने वाला है। </p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कैसे काम करेगी यह व्यवस्था? </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">-यात्री अपनी ट्रेन के आने या जाने के समय के अनुसार कुली को एडवांस में बुक कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">-बुकिंग के समय ही आपको निर्धारित शुल्क (रेट) पता चल जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">-जैसे ही आपकी ट्रेन स्टेशन पहुंचेगी, बुक किया गया कुली तय स्थान पर आपका इंतजार करेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">अक्सर त्योहारों और भीड़ के समय यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें आती हैं। भारी सामान देखकर कई बार कुली दोगुने पैसे मांगते हैं, जिससे यात्रियों और कुलियों के बीच विवाद होता है। इस ऑनलाइन सिस्टम से 'ओवर चार्जिंग' की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में यह सुविधा कुछ प्रमुख स्टेशनों पर मिलेगी। इसमें प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज छिवकी, कानपुर सेंट्रल, मिर्जापुर, इटावा और अलीगढ़ शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीनियर डीसीएम हरिमोहन का कहना है कि इस कदम से न केवल यात्री सुविधाओं में इजाफा होगा, बल्कि कुलियों के काम में भी अनुशासन आएगा। प्रयागराज मंडल के इस सफल ट्रायल के बाद, इसे पूरे देश के अन्य मंडलों में भी लागू करने की योजना है। </p>
<p style="text-align:justify;">यानी अब भारी सूटकेस की चिंता छोड़िए, बस ऐप खोलिए और कुली बुक कीजिए। रेलवे की इस डिजिटल पहल पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 11:06:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य कर्मचारियों की समस्याओं पर मंथन, कैडर पुनर्गठन व वेतन विसंगतियों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देश दिए कि वे प्रतिदिन कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर प्रस्ताव तैयार करें और शासन को भेजें, ताकि समयबद्ध तरीके से निर्णय लिए जा सकें। अगली बैठक शीघ्र आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपर मुख्य सचिव गुरुवार को पैरामेडिकल के छह कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। एनेक्सी भवन में संपन्न बैठक में विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई, साथ ही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579758/discussion-on-the-problems-of-health-workers--cadre-restructuring-and-salary-discrepancies"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देश दिए कि वे प्रतिदिन कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर प्रस्ताव तैयार करें और शासन को भेजें, ताकि समयबद्ध तरीके से निर्णय लिए जा सकें। अगली बैठक शीघ्र आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपर मुख्य सचिव गुरुवार को पैरामेडिकल के छह कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। एनेक्सी भवन में संपन्न बैठक में विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई, साथ ही आश्वासन दिया कि समस्याओं के समाधान के लिए हर 15 दिन में नियमित बैठक कर प्रगति की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक कर्मचारी संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक अस्पतालों का संचालन सुचारु रूप से नहीं हो सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने पैरामेडिकल कर्मचारियों से जुड़ी प्रमुख मांगों को उठाया। इनमें कैडर पुनर्गठन, वेतन विसंगतियों का समाधान, रिक्त पदों पर भर्ती और पदोन्नति, पदनाम परिवर्तन तथा जिला अस्पतालों के मेडिकल कॉलेज में उन्नयन के बाद समाप्त पदों पर कर्मचारियों के समायोजन जैसे मुद्दे शामिल रहे। इसके अलावा संविदा कर्मचारियों को नियमित नियुक्तियों में वेटेज देने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579758/discussion-on-the-problems-of-health-workers--cadre-restructuring-and-salary-discrepancies</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:53:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व धरोहर दिवस :  सभ्यता की अमूल्य धरोहरों को संरक्षण की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व विरासत दिवस, वर्ल्ड हेरिटेज डे तथा आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (इंटरनेशनल डे फोर मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स) कहा जाता है। यह दिवस मानवता की साझा सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इन स्थलों का संरक्षण यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन, 1972 के अंतर्गत किया जाता है, जिसे यूनेस्को सदस्य देशों द्वारा स्वीकार किया गया एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता माना जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य विश्वभर के ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक स्थलों, पुरातात्विक अवशेषों, प्राकृतिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579148/civilization-s-priceless-heritage-needs-protection"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/निराश्रित-पशु-का-अंतिम-संस्कार-करातीं-भावना-सक्सेना-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व विरासत दिवस, वर्ल्ड हेरिटेज डे तथा आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (इंटरनेशनल डे फोर मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स) कहा जाता है। यह दिवस मानवता की साझा सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इन स्थलों का संरक्षण यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन, 1972 के अंतर्गत किया जाता है, जिसे यूनेस्को सदस्य देशों द्वारा स्वीकार किया गया एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता माना जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य विश्वभर के ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक स्थलों, पुरातात्विक अवशेषों, प्राकृतिक संपदाओं तथा मानव सभ्यता से जुड़ी अमूल्य विरासतों के संरक्षण के प्रति जनचेतना उत्पन्न करना है। वास्तव में धरोहर केवल पत्थरों से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा, कला, ज्ञान, संघर्ष, इतिहास और सामूहिक पहचान की जीवंत प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%B6%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-(2).jpg" alt="निराश्रित पशु का अंतिम संस्कार करातीं भावना सक्सेना (2)"></img></p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में 10 चयन मानदंड निर्धारित हैं, जिनमें से कम से कम एक को पूरा करना आवश्यक है। इनमें ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक प्रभाव, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता तथा वैज्ञानिक महत्व जैसे पहलू सम्मिलित हैं। विश्व धरोहर मुख्यतः तीन प्रकार की होती है- पहली, सांस्कृतिक धरोहर, जिसमें स्मारक, मंदिर, मस्जिद, चर्च, किले, मूर्तियां, प्राचीन नगर, स्थापत्य कला, भाषा, संगीत, नृत्य और परंपराएं शामिल हैं। दूसरी, प्राकृतिक धरोहर, जिसमें पर्वत, नदियां, समुद्र, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक परिदृश्य आते हैं तथा तीसरी, मिश्रित धरोहर, जिनमें सांस्कृतिक और प्राकृतिक दोनों विशेषताएं विद्यमान होती हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यूनेस्को केवल स्थायी संरचनाओं या प्राकृतिक स्थलों को ही नहीं, बल्कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को भी मान्यता देता है। भारत की योग परंपरा और कुंभ मेला इसके प्रमुख उदाहरण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्तर पर सबसे अधिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों वाला देश इटली है, जिसके बाद चीन का स्थान आता है। भारत भी विश्व धरोहर स्थलों की दृष्टि से अग्रणी देशों में सम्मिलित है। यूनेस्को एक विशेष सूची ‘वर्ल्ड हेरिटेज इन डेंजर’ भी संचालित करता है, जिसमें उन स्थलों को शामिल किया जाता है, जो युद्ध, प्रदूषण, प्राकृतिक आपदा, अतिक्रमण, अत्यधिक पर्यटन, जलवायु परिवर्तन या उपेक्षा के कारण संकट में हों। यदि कोई स्थल संरक्षण मानकों का पालन न करे या उसका मूल स्वरूप गंभीर रूप से बदल जाए, तो उसे सूची से हटाया भी जा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरणस्वरूप ओमान का अरेबियन ओरिक्स अभयारण्य तथा जर्मनी की ड्रेसडेन एल्बे घाटी को सूची से हटाया जा चुका है। यहां यह उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 तक विश्वभर के 196 देशों में लगभग 1,223 विश्व धरोहर स्थल थे, जिनमें 952 सांस्कृतिक, 231 प्राकृतिक और 40 मिश्रित स्थल शामिल हैं। भारत जैसे प्राचीन और बहुसांस्कृतिक देश में इस दिवस का विशेष महत्व है। अप्रैल 2025 तक भारत में 43 विश्व धरोहर स्थल (34 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 2 मिश्रित) तथा 62 स्थल संभावित सूची में सम्मिलित थे। भारत के प्रमुख धरोहर स्थलों में ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, अजंता-एलोरा गुफाएं, एलीफेंटा गुफाएं, खजुराहो समूह, सांची स्तूप, महाबोधि मंदिर, हम्पी, महाबलीपुरम, जंतर-मंतर, कुतुब मीनार, लाल किला, कोणार्क सूर्य मंदिर, नालंदा, भीमबेटका, सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिमी घाट तथा कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष एक विशेष थीम घोषित की जाती है। वर्ष 2026 की थीम है-‘संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया’ रखी गई है। इसका आशय यह है कि युद्ध, संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं के समय केवल भवनों और स्मारकों की ही नहीं, बल्कि जीवित विरासतों-जैसे लोक परंपराएं, सामाजिक ज्ञान, सांस्कृतिक पहचान और समुदाय आधारित परंपराएं की भी त्वरित सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। विश्व धरोहर दिवस केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, बल्कि मानवता की साझा विरासत को सुरक्षित रखने का वैश्विक संकल्प है। यदि हम अपनी धरोहरों की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास, संस्कृति और पहचान से वंचित हो जाएंगी। अतः विकास के साथ-साथ विरासतों के संरक्षण, संवर्द्धन और सम्मान के लिए हमें दृढ़ संकल्पित होकर कार्य करना चाहिए।-<span style="color:rgb(186,55,42);">सुनील कुमार महला</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 12:33:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व स्तरीय योग-वेलनेस सेंटर की रफ्तार तेज: स्टेकहोल्डर मीटिंग में निवेशकों ने दिए अहम सुझाव, 150 एकड़ में बनेगा मेगा प्रोजेक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>उप्र. के बागपत में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर को धरातल पर उतारने की तैयारियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को लखनऊ स्थित पर्यटन भवन में आयोजित ‘स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ में सरकार, निवेशकों और विशेषज्ञों ने इस मेगा प्रोजेक्ट के विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में ईशा फाउंडेशन सहित देश के प्रमुख योग, नेचुरोपैथी और वेलनेस संस्थानों के 20 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने सुझाव साझा किए। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट ‘जनता का और जनता के लिए’ समर्पित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान निवेशकों और विशेषज्ञों ने राज्य सरकार की पर्यटन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579107/world-class-yoga-and-wellness-center-accelerates--investors-offer-valuable-suggestions-at-stakeholder-meeting--mega-project-to-be-built-on-150-acres"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(86)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>उप्र. के बागपत में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर को धरातल पर उतारने की तैयारियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को लखनऊ स्थित पर्यटन भवन में आयोजित ‘स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन’ में सरकार, निवेशकों और विशेषज्ञों ने इस मेगा प्रोजेक्ट के विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में ईशा फाउंडेशन सहित देश के प्रमुख योग, नेचुरोपैथी और वेलनेस संस्थानों के 20 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने सुझाव साझा किए। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट ‘जनता का और जनता के लिए’ समर्पित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान निवेशकों और विशेषज्ञों ने राज्य सरकार की पर्यटन नीति, रियायतों और जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने सभी प्रश्नों का जवाब देते हुए निवेशकों को नीतिगत प्रावधानों और सुविधाओं की जानकारी दी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>योग, आयुर्वेद और आधुनिक सुविधाओं का होगा संगम</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बागपत के हरिया खेड़ा गांव में 150 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बनने वाला यह वेलनेस सेंटर आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का संगम होगा। परियोजना में 2,000-3,000 क्षमता का योग हॉल, ओपन योग एरीना, ध्यान केंद्र, 200 बेड का अस्पताल और 1,500 बेड की डॉर्मिटरी विकसित की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा कैंपस में कॉटेज, भोजनालय, रेस्टोरेंट, कैफे, एम्फीथिएटर, ध्यान उद्यान और वॉकिंग ट्रैक जैसी सुविधाएं भी होंगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सोलर ऊर्जा और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>मेरठ</category>
                                            <category>बागपत</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579107/world-class-yoga-and-wellness-center-accelerates--investors-offer-valuable-suggestions-at-stakeholder-meeting--mega-project-to-be-built-on-150-acres</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 10:48:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आजमगढ़ को पर्यटन हब बनाने की बड़ी पहल: योगी सरकार ने 617 लाख रुपये स्वीकृत किए, 11 प्राचीन धार्मिक स्थलों का होगा विकास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>राज्य सरकार ने आजमगढ़ में पर्यटन विकास को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत 617 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। यह राशि 889.77 लाख रुपये की कुल स्वीकृत 11 परियोजनाओं के सापेक्ष जारी की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इन परियोजनाओं के तहत सगड़ी, मुबारकपुर, लालगंज, सदर, निजामाबाद, फूलपुर, पवई, दीदारगंज और गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में स्थित प्राचीन धार्मिक स्थलों का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सगड़ी के साल्हेपुर स्थित शिव मंदिर, मुबारकपुर के कठियांव गांव के हनुमान मंदिर, लालगंज के ब्रह्म बाबा स्थल और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579105/major-initiative-to-make-azamgarh-a-tourism-hub--yogi-government-approved-rs-617-lakh--11-ancient-religious-sites-will-be-developed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(84)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>राज्य सरकार ने आजमगढ़ में पर्यटन विकास को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत 617 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। यह राशि 889.77 लाख रुपये की कुल स्वीकृत 11 परियोजनाओं के सापेक्ष जारी की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इन परियोजनाओं के तहत सगड़ी, मुबारकपुर, लालगंज, सदर, निजामाबाद, फूलपुर, पवई, दीदारगंज और गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में स्थित प्राचीन धार्मिक स्थलों का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सगड़ी के साल्हेपुर स्थित शिव मंदिर, मुबारकपुर के कठियांव गांव के हनुमान मंदिर, लालगंज के ब्रह्म बाबा स्थल और सदर क्षेत्र के दुर्वासा ऋषि आश्रम सहित कई प्रमुख स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा दत्तात्रेय आश्रम, गढ़वा हनुमान मंदिर, बधवा महादेव पातालपुरी मंदिर और तेजवर बाबा मंदिर जैसे स्थलों को भी विकसित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>आजमगढ़</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579105/major-initiative-to-make-azamgarh-a-tourism-hub--yogi-government-approved-rs-617-lakh--11-ancient-religious-sites-will-be-developed</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 10:34:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Summer Special Train: गर्मियों की छुट्टियों से पहले भारतीय रेलवे का गिफ्ट, लखनऊ होकर चलेंगी साप्ताहिक दो समर स्पेशल ट्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने यात्रियों की सुविधा के लिए सुलतानपुर और वाराणसी से लोकमान्य तिलक टर्मिनल (मुंबई) के लिए दो समर स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। दोनों साप्ताहिक ट्रेनें लखनऊ होकर गुजरेंगी।</p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी ने बताया कि दोनों ट्रेनों में थर्ड एसी इकोनॉमी श्रेणी के 14 और सामान्य के चार कोच होंगे। यह व्यवस्था यात्रियों को आरामदायक सफर और किफायती विकल्प उपलब्ध कराएगी।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">ट्रेन नंबर 04212 सुलतानपुर से 20 मई से 15 जुलाई तक प्रत्येक बुधवार को सुबह 4:00 बजे रवाना होगी। यह सुबह 6:20 बजे लखनऊ पहुंचेगी और कानपुर, उरई, झांसी,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578131/summer-special-train--a-gift-from-indian-railways-ahead-of-the-summer-holidays--two-weekly-summer-special-trains-will-run-via-lucknow"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/ट्रेन4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने यात्रियों की सुविधा के लिए सुलतानपुर और वाराणसी से लोकमान्य तिलक टर्मिनल (मुंबई) के लिए दो समर स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। दोनों साप्ताहिक ट्रेनें लखनऊ होकर गुजरेंगी।</p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी ने बताया कि दोनों ट्रेनों में थर्ड एसी इकोनॉमी श्रेणी के 14 और सामान्य के चार कोच होंगे। यह व्यवस्था यात्रियों को आरामदायक सफर और किफायती विकल्प उपलब्ध कराएगी।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">ट्रेन नंबर 04212 सुलतानपुर से 20 मई से 15 जुलाई तक प्रत्येक बुधवार को सुबह 4:00 बजे रवाना होगी। यह सुबह 6:20 बजे लखनऊ पहुंचेगी और कानपुर, उरई, झांसी, बीना, रानी कमलापति, इटारसी, खंडवा, भुसावल, पाचोरा, चालिसगांव, नासिक रोड, कल्याण, ठाणे होते हुए दूसरे दिन दोपहर 12:20 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनल पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 04211 21 मई से 16 जुलाई तक प्रत्येक गुरुवार को दोपहर 2:35 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनल से चलेगी। लखनऊ रात 8:50 बजे और सुलतानपुर रात 11:00 बजे पहुंचेगी।</span></p>
<p>ट्रेन नंबर 04226 वाराणसी से 21 मई से 09 जुलाई तक प्रत्येक गुरुवार को रात 1:35 बजे रवाना होगी। जौनपुर और सुलतानपुर होते हुए सुबह 6:20 बजे लखनऊ पहुंचेगी और कानपुर, उरई, झांसी, बीना, इटारसी, भुसावल, चालिसगांव, नासिक, कल्याण, ठाणे होते हुए अगले दिन दोपहर 12:20 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनल पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन नंबर 04225 22 मई से 10 जुलाई तक प्रत्येक शुक्रवार को दोपहर 2:35 बजे एलटीटी से चलेगी। लखनऊ रात 8:50 बजे और वाराणसी रात 2:05 बजे पहुंचेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>वाराणसी</category>
                                            <category>सुल्तानपुर</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578131/summer-special-train--a-gift-from-indian-railways-ahead-of-the-summer-holidays--two-weekly-summer-special-trains-will-run-via-lucknow</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:43:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यात्रीगण कृपया ध्यान दें... अब आसान होगी इन जगाहों की ट्रिप, मिलेगी समर स्पेशल ट्रेनों की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है। ये ट्रेनें पुणे-गोरखपुर और गोरखपुर-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (मुम्बई) मार्ग पर 01 अप्रैल से 01 मई 2026 तक प्रतिदिन 30 फेरों के लिए चलेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पुणे-लखनऊ-गोरखपुर ग्रीष्मकालीन विशेष</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">01415 पुणे-गोरखपुर विशेष, यह ट्रेन 01 से 30 अप्रैल तक प्रतिदिन पुणे से सुबह 06:50 बजे प्रस्थान करेगी। दौंड, अहिल्यानगर, कोपरगांव, मनमाड, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, झांसी, उरई, कानपुर, लखनऊ, गोण्डा, बस्ती होते हुए गोरखपुर 16:00 बजे पहुंचेगी। 01416 गोरखपुर विशेष वापसी में 02 अप्रैल से 01 मई तक गोरखपुर से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575944/passengers-please-note----travel-to-these-places-will-now-be-easier--with-the-facility-of-summer-special-trains-available"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(37)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है। ये ट्रेनें पुणे-गोरखपुर और गोरखपुर-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (मुम्बई) मार्ग पर 01 अप्रैल से 01 मई 2026 तक प्रतिदिन 30 फेरों के लिए चलेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पुणे-लखनऊ-गोरखपुर ग्रीष्मकालीन विशेष</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">01415 पुणे-गोरखपुर विशेष, यह ट्रेन 01 से 30 अप्रैल तक प्रतिदिन पुणे से सुबह 06:50 बजे प्रस्थान करेगी। दौंड, अहिल्यानगर, कोपरगांव, मनमाड, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, झांसी, उरई, कानपुर, लखनऊ, गोण्डा, बस्ती होते हुए गोरखपुर 16:00 बजे पहुंचेगी। 01416 गोरखपुर विशेष वापसी में 02 अप्रैल से 01 मई तक गोरखपुर से शाम 17:30 बजे प्रस्थान कर बस्ती, गोण्डा, लखनऊ, कानपुर, उरई, झांसी, बीना, रानी कमलापति, इटारसी, खंडवा, भुसावल, मनमाड, कोपरगांव, अहिल्यानगर और दौंड होते हुए हडपसर सुबह 03:15 बजे पहुंचेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर-लखनऊ-मुम्बई ट्रेन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">01079 छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (मुम्बई)-गोरखपुर ट्रेन 01 से 30 अप्रैलतक मुम्बई से रात 22:30 बजे प्रस्थान करेगी। दादर, थाणे, कल्याण, नासिक रोड, मनमाड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, भोपाल, बीना, झांसी, उरई, कानपुर, लखनऊ, गोण्डा, बस्ती और खलीलाबाद होते हुए गोरखपुर सुबह 10:00 बजे पहुंचेगी। वापसी में गोरखपुर से दोपहर 14:30 बजे प्रस्थान करेगी। ये ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेनें यात्रियों के लिए तेज़ और सुविधाजनक यात्रा देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575944/passengers-please-note----travel-to-these-places-will-now-be-easier--with-the-facility-of-summer-special-trains-available</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 13:58:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री योगी 17 मार्च को कैलाश यात्रियों को करेंगे सम्मानित, समिति ने बढ़ते खर्च पर सरकार से मांगा 1.5 लाख तक अनुदान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>वर्ष 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा पूर्ण करने वाले प्रदेश के यात्रियों काे 17 मार्च को शाम 3 बजे लोकभवन सभागार में सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यात्रियों को सम्मानित करने के साथ एक लाख रुपये अनुदान भी देंगे।</p>
<p>कैलाश मानसरोवर सेवा समिति लखनऊ के अध्यक्ष केके सिंह ने और सचिव आरएस भदौरिया ने बताया कि वर्ष 2025 में लिपूलेख मार्ग से यात्रा का खर्च लगभग 2.31 लाख रुपये तथा नाथुला मार्ग से लगभग 3.35 लाख रुपये रहा। बढ़ते खर्च को देखते हुए समिति ने प्रदेश सरकार से अनुदान राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574780/chief-minister-yogi-will-honor-kailash-pilgrims-on-march-17--the-committee-has-requested-a-grant-of-up-to-rs-1-5-lakh-from-the-government-to-address-rising-expenses"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(63)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>वर्ष 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा पूर्ण करने वाले प्रदेश के यात्रियों काे 17 मार्च को शाम 3 बजे लोकभवन सभागार में सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यात्रियों को सम्मानित करने के साथ एक लाख रुपये अनुदान भी देंगे।</p>
<p>कैलाश मानसरोवर सेवा समिति लखनऊ के अध्यक्ष केके सिंह ने और सचिव आरएस भदौरिया ने बताया कि वर्ष 2025 में लिपूलेख मार्ग से यात्रा का खर्च लगभग 2.31 लाख रुपये तथा नाथुला मार्ग से लगभग 3.35 लाख रुपये रहा। बढ़ते खर्च को देखते हुए समिति ने प्रदेश सरकार से अनुदान राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने का अनुरोध किया है।</p>
<p>समिति के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी के अनुसार 2025 के सभी कैलाश यात्रियों को 17 मार्च को सुबह 11 बजे विधानसभा के सामने स्थित लोक भवन पर रिपोर्ट करना होगा। अधिक जानकारी के लिए समिति अध्यक्ष केके सिंह से संपर्क किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574780/chief-minister-yogi-will-honor-kailash-pilgrims-on-march-17--the-committee-has-requested-a-grant-of-up-to-rs-1-5-lakh-from-the-government-to-address-rising-expenses</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/574780/chief-minister-yogi-will-honor-kailash-pilgrims-on-march-17--the-committee-has-requested-a-grant-of-up-to-rs-1-5-lakh-from-the-government-to-address-rising-expenses</guid>
                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 10:59:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ से रांची समेत कई शहरों के लिए चलेंगी नई सीधी ट्रेनें, PM मोदी करेंगे उद्घाटन, अब यात्रा होगी आसान और तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>प्रधानमंत्री के 14 मार्च को प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान रेलवे देशभर में कई नई परियोजनाओं की सौगात देने जा रहा है। इसी क्रम में पुरुलिया से आनंद विहार (दिल्ली) के बीच नई ट्रेन सेवा की शुरुआत की जायेगी, जिससे लखनऊ के यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है।</p>
<p>यह ट्रेन पुरुलिया से शुरू होकर रामगढ़, रांची, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, रोहतास, कैमूर, चंदौली, वाराणसी, अयोध्या, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद होते हुए आनंद विहार पहुंचेगी। इस ट्रेन के शुरू होने से पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश के यात्रियों को दिल्ली तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। अब तक लखनऊ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574532/new-direct-trains-will-run-from-lucknow-to-ranchi-and-other-cities--pm-modi-will-inaugurate-them--making-travel-easier-and-faster"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/ट्रेन3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>प्रधानमंत्री के 14 मार्च को प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान रेलवे देशभर में कई नई परियोजनाओं की सौगात देने जा रहा है। इसी क्रम में पुरुलिया से आनंद विहार (दिल्ली) के बीच नई ट्रेन सेवा की शुरुआत की जायेगी, जिससे लखनऊ के यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है।</p>
<p>यह ट्रेन पुरुलिया से शुरू होकर रामगढ़, रांची, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, रोहतास, कैमूर, चंदौली, वाराणसी, अयोध्या, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद होते हुए आनंद विहार पहुंचेगी। इस ट्रेन के शुरू होने से पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश के यात्रियों को दिल्ली तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। अब तक लखनऊ से रांची जाने के लिए यात्रियों को सीधे ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उन्हें नीलांचल एक्सप्रेस से पहले टाटानगर तक यात्रा करनी पड़ती थी और वहां से ट्रेन बदलकर रांची जाना पड़ता था। इसी तरह पलामू, गढ़वा, रोहतास, कैमूर और चंदौली के लिए भी यात्रियों को वाराणसी या फिर मुगलसराय जंक्शन पर ट्रेन बदलनी पड़ती थी। नई पुरुलिया–आनंद विहार ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद इन सभी स्टेशनों के लिए लखनऊ से सीधी यात्रा संभव हो सकेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और सफर अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 09:20:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश बनेगा एडवेंचर टूरिज्म का नया हबः रोमांचक खेलों के लिए बुलंद इरादे, निवेशकों को मिलेगी भारी सब्सिडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः</strong> उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में पर्यटन को नया आयाम देने की दिशा में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। गर्मियों के मौसम में बढ़ती पर्यटन रुचि को देखते हुए पर्यटन विभाग ने उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के तहत साहसिक पर्यटन परियोजनाओं में निवेश के लिए उद्यमियों, संस्थाओं और निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य में पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसे रोमांचक अनुभवों से भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देकर प्रदेश की भौगोलिक और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574492/uttar-pradesh-to-become-a-new-hub-for-adventure-tourism--strong-commitment-to-adventure-sports--investors-to-receive-substantial-subsidies"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(28)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः</strong> उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में पर्यटन को नया आयाम देने की दिशा में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। गर्मियों के मौसम में बढ़ती पर्यटन रुचि को देखते हुए पर्यटन विभाग ने उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के तहत साहसिक पर्यटन परियोजनाओं में निवेश के लिए उद्यमियों, संस्थाओं और निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य में पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसे रोमांचक अनुभवों से भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देकर प्रदेश की भौगोलिक और प्राकृतिक विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी और उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी एडवेंचर टूरिज्म गंतव्यों में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग ने इस योजना को तीन प्रमुख श्रेणियों भूमि आधारित, जल आधारित और वायु आधारित एडवेंचर टूरिज्म में विभाजित किया है। भूमि आधारित गतिविधियों में एटीवी टूर, बंजी जंपिंग, साइकिलिंग टूर, जीप सफारी और मोटरसाइकिल टूर शामिल होंगे। वहीं जल आधारित गतिविधियों के तहत कयाकिंग, राफ्टिंग, रिवर क्रूज़िंग और आधुनिक वाटर स्पोर्ट्स सेंटर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा एयर आधारित गतिविधियों में हॉट एयर बैलूनिंग, पैराग्लाइडिंग और स्काईडाइविंग जैसी साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन नीति-2022 के तहत निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया गया है। नीति के अनुसार विभिन्न निवेश श्रेणियों में 10 लाख रुपये से लेकर 500 करोड़ रुपये से अधिक तक के निवेश पर 10 से 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क में छूट और भूमि परिवर्तन एवं विकास शुल्क में भी पूर्ण छूट का प्रावधान है। अनुसूचित जाति-जनजाति और महिला उद्यमियों को अतिरिक्त 5 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने कहा कि एडवेंचर टूरिज्म की यह पहल प्रदेश को पारंपरिक पर्यटन से आगे ले जाकर अनुभव आधारित पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 14:49:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक ''बोधि यात्रा'' की पहली पसंद बना यूपी, बौद्ध सर्किट लिख रहा नया अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार :</strong> उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2025 में बौद्ध आस्था के वैश्विक केंद्र के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश के बौद्ध सर्किट में गत वर्ष 2025 में करीब 82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.40 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल रहे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इनबाउंड टूरिज्म में यह खासी वृद्धि है और दुनिया भर के श्रद्धालु ‘बोधि यात्रा’ के लिए उत्तर प्रदेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">उन्होंने रविवार को बताया कि प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों कुशीनगर, सारनाथ, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, संकिसा और कौशांबी में वर्ष दर वर्ष पर्यटकों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/572958/up-becomes-the-first-choice-for-the-global-%22bodhi-yatra%22--buddhist-circuit-is-writing-a-new-chapter"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(29)8.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार :</strong> उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2025 में बौद्ध आस्था के वैश्विक केंद्र के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश के बौद्ध सर्किट में गत वर्ष 2025 में करीब 82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.40 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल रहे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इनबाउंड टूरिज्म में यह खासी वृद्धि है और दुनिया भर के श्रद्धालु ‘बोधि यात्रा’ के लिए उत्तर प्रदेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">उन्होंने रविवार को बताया कि प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों कुशीनगर, सारनाथ, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, संकिसा और कौशांबी में वर्ष दर वर्ष पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2024 में 61 लाख, 2023 में 47 लाख और 2022 में 22.40 लाख पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया था। विशेष रूप से कुशीनगर विदेशी श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनकर उभरा है। वर्ष 2025 में यहां 2.90 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक पहुंचे, जबकि 2024 में 2.51 लाख और 2023 में 2.14 लाख विदेशी आगंतुक आए थे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">पर्यटन मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की बहुआयामी रणनीति, फैम ट्रिप और बौद्ध बहुल देशों के साथ बढ़ते संपर्क के कारण पर्यटन को नई गति मिली है। केंद्र सरकार द्वारा सारनाथ को प्रमुख पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा से भी बौद्ध पर्यटन को और बल मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 09:24:56 +0530</pubDate>
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