<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.amritvichar.com/category/150118/jyotish" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Amrit Vichar RSS Feed Generator</generator>
                <title>Jyotish - Amrit Vichar</title>
                <link>https://www.amritvichar.com/category/150118/rss</link>
                <description>Jyotish RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Mahashivratri 2026:  15 फरवरी को जागरण और चार पहर पूजा से मिलेगा पापों से मुक्ति का वरदान, शिव-शक्ति मिलन का पावन पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हिन्दू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 15 फरवरी रविवार को है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पावन पर्व भगवान शिवजी को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव के भक्त उनकी कृपा पाने के लिए उनकी विधि-विधान के साथ पूजा आराधना करते हैं। इस दिन रात्रि पूजन भी किया जाता है, लेकिन इससे महत्वपूर्ण चार पहर की पूजा होती है। मान्यता है कि चार पहर की पूजा करने से व्यक्ति जीवन के पापों से मुक्त हो जाता है तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570675/mahashivratri-2026--a-vigil-and-four-hour-worship-on-february-15th-will-grant-the-blessing-of-freedom-from-sins--a-sacred-festival-celebrating-the-union-of-shiva-and-shakti"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(81).png" alt=""></a><br /><p>हिन्दू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 15 फरवरी रविवार को है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पावन पर्व भगवान शिवजी को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव के भक्त उनकी कृपा पाने के लिए उनकी विधि-विधान के साथ पूजा आराधना करते हैं। इस दिन रात्रि पूजन भी किया जाता है, लेकिन इससे महत्वपूर्ण चार पहर की पूजा होती है। मान्यता है कि चार पहर की पूजा करने से व्यक्ति जीवन के पापों से मुक्त हो जाता है तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा संध्या काल से शुरू होकर अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त तक की जाती है। सामान्य गृहस्थ को महाशिवरात्रि के दिन शुभ और मनोकामना पूर्ति के लिए सुबह और संध्या काल में शिव की आराधना करनी चाहिए।</p>
<h3><strong>समग्रता के प्रतीक शिव</strong></h3>
<p>भगवान शिव का व्यक्तित्व एवं स्वरूप समग्रता का प्रतीक है यह उनके जीवन का वह दर्शन प्रदान करता है, जो मनुष्य को उसके व्यक्तित्व के उच्चतम शिखर तक ले जाता है। भगवान शिव का यह चरित्र मानवीय जीवन के उच्चतम आदर्शों की पराकाष्ठा है। महादेव गृहस्थ भी हैं और वीतरागी आदियोगी भी, उनका यह गुण संदेश देता है कि योग के मार्ग पर चलने के लिए  ईश्वर की भक्ति के लिए संसार त्याग आवश्यक नहीं है। त्याग तो स्वयं की दुष्प्रवृत्तियों का, आसत्ति व अहंकार का करना चाहिए ताकि अंतःकरण को योग के अनुकूल बनाया जा सके। कैलाशवासी भगवान शिव एक ओर तो परम पवित्र हिमालय में तपस्या में लीन रहते हैं, तो दूसरी ओर भूतगणों के साथ श्मशान में निवास करते भी माने जाते हैं। इसका व्यावहारिक आशय यह है कि पवित्र और श्रेष्ठ के संपर्क में रहना श्रेयकर है, किंतु घृणित और पापी किसी को नहीं समझा जाना चाहिए। सब परमात्मा की ही संतान हैं एवं वे स्वयं सबको बराबर स्नेह करते हैं। शिव यहां सम्यक दृष्टि व मैत्री की शिक्षा देते हैं।</p>
<p>पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवजी पहली बार प्रकट हुए थे। शिव का प्राकट्य ज्योतिर्लिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में था। ऐसा शिवलिंग जिसका न तो आदि था और न अंत। बताया जाता है कि शिवलिंग का पता लगाने के लिए ब्रह्माजी हंस के रूप में शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग को देखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। वह शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग तक पहुंच ही नहीं पाए। दूसरी ओर भगवान विष्णु भी वराह का रूप लेकर शिवलिंग के आधार ढूंढ रहे थे, लेकिन उन्हें भी आधार नहीं मिला।</p>
<h3><strong>शिव और शक्ति मिलन</strong></h3>
<p>महाशिवरात्रि को पूरी रात शिवभक्त अपने आराध्य के लिए जागरण करते हैं। शिवभक्त इस दिन शिवजी की शादी का उत्सव मनाते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि को शिवजी के साथ शक्ति की शादी हुई थी। इसी दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। शिव जो वैरागी थी, वह गृहस्थ बन गए। माना जाता है कि शिवरात्रि के 15 दिन पश्चात होली का त्योहार मनाने के पीछे एक कारण यह भी है। इसलिए महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों एवं भगवान शिव के उपासकों का एक मुख्य त्योहार है। मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान शिव की सेवा में दान-पुण्य करने व शिव उपासना से उपासक को मोक्ष मिलता है। शिवरात्रि के पर्व पर जागरण का विशेष महत्व है। पौराणिक कथा है कि एक बार पार्वतीजी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, ‘ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?’ उत्तर में शिवजी ने पार्वती को ‘महाशिवरात्रि’ के व्रत का उपाय बताया। चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं। अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम शुभफलदायी कहा गया है। वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है, परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव भी इस समय तक उत्तरायण में आ चुके होते हैं तथा ऋ तु परिवर्तन का यह समय अत्यंत शुभ कहा गया है।</p>
<h3><strong>पूजा से शांत होते हैं कुंडली के दोष</strong></h3>
<p>महाशिवरात्रि में शिवलिंग की पूजा करने से जन्मकुंडली के नवग्रह दोष तो शांत होते हैं विशेष करके चंद्रजनित दोष जैसे मानसिक अशान्ति, मां के सुख और स्वास्थ्य में कमी, मित्रों से संबंध, मकान-वाहन के सुख में विलम्ब, हृदयरोग, नेत्र विकार, चर्म-कुष्ट रोग, नजला-जुकाम, स्वांस रोग, कफ-निमोनिया संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है और समाज में मान प्रतिष्ठा बढती है। सुहागिन महिलाओं को इसदिन मां पार्वती को श्रृंगार हेतु मेंहदी चढ़ानी चाहिए और पुरुषों को पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराकर बेलपत्र पर अष्टगंध, कुमकुम अथवा चंदन से राम-राम लिखकर ‘ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय’ कहते हुए शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए। साथ ही भांग, धतूरा और मंदार पुष्प तथा गंगाजल भी अर्पित हुए काल हरो हर, कष्ट हरो हर, दुःख हरो, दारिद्रय हरो, नमामि शंकर भजामि शंकर शंकर शंभो तव शरणं। मंत्र से प्रार्थना करनी चाहिए।</p>
<p><strong>वैदिक विभूषण ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/570675/mahashivratri-2026--a-vigil-and-four-hour-worship-on-february-15th-will-grant-the-blessing-of-freedom-from-sins--a-sacred-festival-celebrating-the-union-of-shiva-and-shakti</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/570675/mahashivratri-2026--a-vigil-and-four-hour-worship-on-february-15th-will-grant-the-blessing-of-freedom-from-sins--a-sacred-festival-celebrating-the-union-of-shiva-and-shakti</guid>
                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 13:07:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-02/muskan-dixit-%2881%29.png"                         length="1172887"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिश्ते में ब्रेकअप और ग्रहों का प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">लव अफेयर में ब्रेकअप सिर्फ “किस्मत खराब” होने से नहीं होता, ज्योतिष की भाषा में यह ग्रहों, भावों और चल रही दशा-महादशा का परिणाम होता है। कुंडली में प्रेम (5 वां भाव) और संबंध/साथी (7वां भाव) जब दबाव में आते हैं, तभी अच्छे‑भले रिश्ते भी धीरे‑धीरे या अचानक टूट जाते हैं।- आचार्य मधुरेंद्र पांडेय, वास्तु विशेषज्ञ</p>
<h5 style="text-align:justify;">प्रेम और रिश्ते के मुख्य भाव</h5>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिष में लव अफेयर को सीधे‑सीधे दो भाव संचालित करते हैं, 5 वां और 7 वां। 5 वां भाव आकर्षण, रोमैंटिक फीलिंग, प्रस्ताव, पहली मुलाकात और दिल की धड़कनें दिखाता है, जबकि 7 वां भाव प्रतिबद्धता, पार्टनर की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/563726/breakup-in-relationships-and-the-influence-of-planets"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/untitled-design-(54)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लव अफेयर में ब्रेकअप सिर्फ “किस्मत खराब” होने से नहीं होता, ज्योतिष की भाषा में यह ग्रहों, भावों और चल रही दशा-महादशा का परिणाम होता है। कुंडली में प्रेम (5 वां भाव) और संबंध/साथी (7वां भाव) जब दबाव में आते हैं, तभी अच्छे‑भले रिश्ते भी धीरे‑धीरे या अचानक टूट जाते हैं।- आचार्य मधुरेंद्र पांडेय, वास्तु विशेषज्ञ</p>
<h5 style="text-align:justify;">प्रेम और रिश्ते के मुख्य भाव</h5>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिष में लव अफेयर को सीधे‑सीधे दो भाव संचालित करते हैं, 5 वां और 7 वां। 5 वां भाव आकर्षण, रोमैंटिक फीलिंग, प्रस्ताव, पहली मुलाकात और दिल की धड़कनें दिखाता है, जबकि 7 वां भाव प्रतिबद्धता, पार्टनर की स्थिरता और लंबे समय की संगति को दर्शाता है। जब 5 वें भाव या उसके स्वामी पर अशुभ ग्रहों का दबाव हो, तो प्यार शुरू तो होता है, पर शादी तक टिक नहीं पाता और बीच में ही ब्रेकअप हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">7 वां भाव और उसका स्वामी रिश्ते की गहराई, भरोसा, समझौते की क्षमता और शादी की संभावना बताते हैं। यदि 7 वां भाव, उसका स्वामी या शुक्र/चंद्र अशुभ प्रभाव में हों, तो या तो सही साथी नहीं मिलता, या मिलकर भी संबंध में स्थिरता नहीं आ पाती।</p>
<h5 style="text-align:justify;">कौन‑कौन से ग्रह ब्रेकअप कराते हैं</h5>
<p style="text-align:justify;">ब्रेकअप के मामले में ज्यादातर बार कुछ ग्रह बार‑बार सामने आते हैं- शुक्र, मंगल, शनि, राहु, केतु और सूर्य। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शुक्र :  </strong>प्यार, आकर्षण, मोहब्बत की भाषा, सेंसुअलिटी और रिलेशनशिप की क्वालिटी का कारक है, कमजोर या पीड़ित शुक्र अक्सर प्रेम‑विफलता देता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मंगल :</strong> जोश, क्रोध, अहंकार, शारीरिक ऊर्जा और लड़ाई‑झगड़े का ग्रह है, 5 वें या 7 वें भाव से जुड़कर अनबन और टकराव बढ़ाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शनि : </strong>दूरी, देरी, बोझ, जिम्मेदारी और ठंडापन लाता है, भावनाओं पर बर्फ डाल देता है, जिससे पार्टनर को उपेक्षा महसूस होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>राहु : </strong>भ्रम, जुनून, ओब्सेशन और भ्रमित फैसले देता है, गलत व्यक्ति पर फोकस करवा सकता है या अवास्तविक उम्मीदें पैदा करता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>केतु : </strong>विरक्ति, अचानक दूरी, कट‑ऑफ और बोरियत दिखाता है, एक समय बाद व्यक्ति को लगता है कि अब “कनेक्शन नहीं बचा।”</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सूर्य : </strong>अलगाव, ईगो और “मैं” की भावना बढ़ाता है, कई बार सूर्य की दशा या उसका 5 वें/7 वें भाव पर प्रभाव संबंध को अलगाव की ओर धकेल देता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">मुख्य ग्रहयोग </h5>
<p style="text-align:justify;">कुछ विशिष्ट योग ऐसे हैं, जिनके चलते अच्छे रिश्ते भी टूटने लगते हैं। शुक्र पर शनि या राहु की कड़ी दृष्टि/संयोग: भावनात्मक ठंडापन, शक, गलतफहमियां और भरोसे की कमी ला सकता है, जिससे धीरे‑धीरे दूरी और ब्रेकअप बनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्र का 6, 8 या 12 वें भाव में होना : 6वां भाव झगड़े और कोर्ट‑कचहरी, 8 वां भाव गहरी उलझन, धोखा या छुपी बातों और 12 वां भाव दूरी, त्याग या परदेसीपन का संकेत देता है, जिससे प्रेम जीवन में संघर्ष और टूटन बढ़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">5 वें भाव या उसके स्वामी पर राहु-केतु, शनि या मंगल का दबाव, प्यार शुरू हो भी जाए, तो किसी न किसी वजह से रिश्ता बीच में टूट जाता है, खासकर तब जब शादी की बात आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगल-शुक्र का तीखा मेल और साथ में राहु/केतु : बहुत तेज आकर्षण, फिजिकल पास्शन और ईगो क्लैश, जो शुरुआत में रोमांचक लगता है, पर बाद में थकान और झगड़े में बदल जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">5 वां, 7 वां, 6 वां, 8 वां, 12 वां भाव ज्यादातर लव‑ब्रेकअप में यही पांच भाव सक्रिय पाए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>5 वां भाव:</strong> प्रेम की शुरुआत, क्रश, प्रपोज़ल, डेटिंग और दिल की खुशियां, इसकी कमजोरी से रिश्ते का “आरंभ” तो होता है, पर “अंजाम” अच्छा नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>7 वां भाव: </strong>पार्टनर, लिव‑इन, विवाह, सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया रिश्ता, इस पर चोट या पाप ग्रह का प्रभाव रिश्ते की नींव हिला देता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>6 वां भाव: </strong>विवाद, झगड़े, कोर्ट‑केस, ईगो बैटल, 6 वें भाव से जुड़ी दशा चलने पर छोटी बात भी केस या अलगाव तक जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>8 वां भाव : </strong>गुप्त संबंध, धोखा, अचानक घटनाएं, मानसिक दुख, इस भाव की सक्रियता में रिलेशन में रहस्यों का खुलासा, धोखे का एहसास या अचानक ब्रेकअप संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>12 वां भाव : </strong>दूरी, विदेश, अस्पताल, अकेलापन और त्याग, कई बार 12 वें भाव के प्रभाव से पार्टनर दूर देश चला जाता है, व्यस्त हो जाता है या मानसिक रूप से कट जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">बार‑बार ब्रेकअप होने के कारण</h5>
<p style="text-align:justify;">कुछ कुंडलियां ऐसी होती हैं, जहां एक रिश्ता नहीं, कई रिश्ते टूटते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">5 वें और 7 वें दोनों भाव/स्वामी पर एक साथ पाप ग्रहों का बार‑बार प्रभाव होना, जैसे राहु, केतु, शनि, मंगल की दृष्टि या <br />संयोग। शुक्र और चंद्र दोनों कमजोर या पीड़ित हों, तो व्यक्ति या तो खुद भावनात्मक रूप से स्थिर नहीं होता या गलत लोगों को आकर्षित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहु के प्रभाव से व्यक्ति को आकर्षण बहुत तेजी से होता है, पर जब वास्तविकता सामने आती है, तो मोह भंग होने में देर नहीं लगती।</p>
<p style="text-align:justify;">चल रही दशा – भुक्ति ऐसे ग्रहों की हो, जो अलगाव, दूरी या संघर्ष के कारक हैं, जैसे सूर्य, शनि, राहु, 6 वें/8 वें/12 वें भाव के स्वामी आदि।</p>
<h5 style="text-align:justify;">कब होता है ब्रेकअप - दशा और गोचर</h5>
<p style="text-align:justify;">कुंडली में योग बनने के बाद वास्तविक ब्रेकअप अक्सर दशा और गोचर के समय होता है। जब 6 वां, 8 वां या 12 वां भाव सक्रिय दशा में आ जाए या उनके स्वामी की महादशा/अंतर्दशा चले, तो संबंध में तनाव बढ़कर टूटन तक जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहु‑केतु, शनि या सूर्य का गोचर 5 वें/7 वें भाव, उनके स्वामी या शुक्र-चंद्र पर आ जाए, तो वह समय विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। परंपरा में ऐसे समय में मंत्र, दान, व्रत, पूजा और ज्योतिषीय उपायों की भी सलाह दी जाती है ताकि मन शांत रहे और निर्णय जल्दबाजी में न लिए जाएं। हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए असली, सटीक उपाय तो वही होता है, जो 5 वें, 7 वें भाव, शुक्र, चंद्र, राहु केतु, शनि और चल रही दशा को देखकर दिया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/563726/breakup-in-relationships-and-the-influence-of-planets</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/563726/breakup-in-relationships-and-the-influence-of-planets</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 10:00:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2025-12/untitled-design-%2854%291.jpg"                         length="102821"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Panch Parva 2025: दिवाली, भाईदूज...आज से पंच दिवसीय त्योहारों का शुभ संयोग, पूजन विधि व मुहूर्त, जाने हर दिन क्यों है खास </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>दीपावली पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। चन्द्रमा कन्या राशि में हस्त नक्षत्र, शुक्र और चन्द्रमा कन्या राशि में,गुरु उच्च राशि कर्क में स्थित यह संयोग अत्यंत शुभ व धन-समृद्धि प्रदायक माने गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दीपावली पूजन विधि और उपाय: सायंकाल शुभ लग्न में भगवान गणेश, माता लक्ष्मी व कुबेर का पूजन करें। स्थापना के लिए शुभ वस्तुएः दक्षिणावर्ती शंख,श्री यंत्र, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सफेद कोड़ियां, लघु नारियल (श्रीफल), ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पाठ और मंत्र धनवृद्धि के लिए लक्ष्मी कुबेर मंत्र, लक्ष्मी श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लक्ष्मी पूजन- शुभ</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/556760/panch-parva-2025--diwali--bhai-dooj----the-auspicious-combination-of-five-day-festivals-begins-today--worship-method-and-auspicious-time--know-why-each-day-is-special"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/untitled-design---2025-10-20t082546.019.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>दीपावली पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। चन्द्रमा कन्या राशि में हस्त नक्षत्र, शुक्र और चन्द्रमा कन्या राशि में,गुरु उच्च राशि कर्क में स्थित यह संयोग अत्यंत शुभ व धन-समृद्धि प्रदायक माने गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दीपावली पूजन विधि और उपाय: सायंकाल शुभ लग्न में भगवान गणेश, माता लक्ष्मी व कुबेर का पूजन करें। स्थापना के लिए शुभ वस्तुएः दक्षिणावर्ती शंख,श्री यंत्र, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सफेद कोड़ियां, लघु नारियल (श्रीफल), ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पाठ और मंत्र धनवृद्धि के लिए लक्ष्मी कुबेर मंत्र, लक्ष्मी श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लक्ष्मी पूजन- शुभ मुहूर्त</strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">सर्वोत्तम काल</h4>
<p style="text-align:justify;">वृषभ लग्न सायं 07:08 बजे – 09:03 बजे घर में लक्ष्मी पूजन शुभ समय</p>
<p style="text-align:justify;">महानिशिथ काल रात्रि 11:26 बजे – 12:16 बजे</p>
<h4 style="text-align:justify;">काली पूजा एवं तंत्र साधना श्रेष्ठ</h4>
<p style="text-align:justify;">सिंह लग्न-रात्रि 01:26 बजे – 03:41 बजे (21 अक्टूबर) साधना व सिद्धि के लिए उपयोगी</p>
<p style="text-align:justify;">गोवर्धन पूजा - बुधवार को प्रातः श्रीकृष्ण, गायों व बैलों का पूजन करें। विविध पकवानों का भोग लगाएं। राजा बलि व भगवान विष्णु का पूजन करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">समय विवरण</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रातः 06:10 </strong>– 08:26 गोवर्धन पूजा श्रेष्ठ मुहूर्त</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संध्या 03:15</strong> – 05:31 अन्नकूट शुभ समय</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भाई दूज व चित्रगुप्त पूजन </strong>- 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष महत्व: भाई दूज भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है। इसके साथ ही चित्रगुप्त पूजन भी इसी दिन है। कायस्थ समाज की ओर से कुलदेवता पूजन किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक परंपराएं: बहन द्वारा भाई को तिलक कर, भोजन कराना, भाई द्वारा उपहार दिया जाना।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भाई दूज तिलक मुहूर्तः दोपहर 01:13 बजे</strong> – 03:28 बजे तक</p>
<h4 style="text-align:justify;">तिथि विवरण (संक्षेप में):</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>पर्व तिथि विशेषता</strong></p>
<p style="text-align:justify;">दीपावली 20 अक्टूबर लक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन</p>
<p style="text-align:justify;">गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर अन्नकूट महोत्सव, श्रीकृष्ण पूजन</p>
<p style="text-align:justify;">भाई दूज / चित्रगुप्त पूजन 23 अक्टूबर तिलक, भाई-बहन पर्व, कायस्थ पूजन- वृषभ और सिंह लग्न को पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : </strong></p>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/556759/major-action-against-adulterators-during-the-festive-season-in-uttar-pradesh--adulterated-goods-worth-rs-8-crore-seized--campaign-launched-on-the-instructions-of-cm-yogi"><span class="t-red">यूपी में त्योहारों पर मिलावटखोरों के बड़ा एक्शन:</span> 8 करोड़ मूल्य की मिलावटी सामग्री जब्त, सीएम योगी के निर्देश पर चलाया गया अभियान </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>दीपावली</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/556760/panch-parva-2025--diwali--bhai-dooj----the-auspicious-combination-of-five-day-festivals-begins-today--worship-method-and-auspicious-time--know-why-each-day-is-special</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/556760/panch-parva-2025--diwali--bhai-dooj----the-auspicious-combination-of-five-day-festivals-begins-today--worship-method-and-auspicious-time--know-why-each-day-is-special</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Oct 2025 08:27:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/untitled-design---2025-10-20t082546.019.jpg"                         length="177916"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dhanteras Shubh Muhurat 2025: धनतेरस में खरीदारी के लिए 1 घंटे का शुभ मुहूर्त, ज्योतिषाचार्यों के अनुसार धन और स्वास्थ से जुड़ा है पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या, अमृत विचार।</strong> धनतेरस का पर्व इस वर्ष दो दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 मिनट पर कार्तिक माह के त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो रही है जो 19 अक्टूबर को दोपहर 1:51 मिनट तक रहेगी। इस बार धनतेरस पर खरीदारी के लिए 18 अक्टूबर को शाम 7:16 मिनट से 8 :20 मिनट के बीच एक घंटा चार मिनट का शुभ मुहूर्त पड़ रहा है। इस दौरान सोना-चांदी के जेवर, सामान, बर्तन व अन्य धातुओं के समान को खरीदना बेहद शुभ माना गया है। वहीं त्रयोदशी तिथि पर व्रत रहने वाले लोग 19 अक्टूबर को ब्रह्म</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/556266/dhanteras-shubh-muhurat-2025--a-one-hour-auspicious-time-for-shopping-on-dhanteras--according-to-astrologers--the-festival-is-associated-with-wealth-and-health"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/untitled-design-(3)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या, अमृत विचार।</strong> धनतेरस का पर्व इस वर्ष दो दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 मिनट पर कार्तिक माह के त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो रही है जो 19 अक्टूबर को दोपहर 1:51 मिनट तक रहेगी। इस बार धनतेरस पर खरीदारी के लिए 18 अक्टूबर को शाम 7:16 मिनट से 8 :20 मिनट के बीच एक घंटा चार मिनट का शुभ मुहूर्त पड़ रहा है। इस दौरान सोना-चांदी के जेवर, सामान, बर्तन व अन्य धातुओं के समान को खरीदना बेहद शुभ माना गया है। वहीं त्रयोदशी तिथि पर व्रत रहने वाले लोग 19 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त को मान रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्तिक माह में धनतेरस का भी विशेष महत्व माना जाता है। सनातन धर्मावलंबियों के पर्वों में दीपावली का एक प्रमुख स्थान है। जिसके प्रथम चरण में धनतेरस का पर्व धार्मिकता से ओतप्रोत होते हुए सामाजिक और व्यवसायिक वातावरण को भी लाभकारी और उल्लासमय बना देता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह पर्व धन और स्वास्थ से जुड़ा है। इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा और आराधना से स्थापित वातावरण में खरीदारी करने से धन और उस वस्तु में 13 गुना वृद्धि होती है।वहीं भगवान धनवंतरी की उपासना से स्वास्थ में 13 गुना लाभ मिलता है।इसलिए इस दिन 13 की संख्या शुभ मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कहावत आज भी प्रचलित है कि ''''पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया'''' इसलिए दीपावली में सबसे पहले धनतेरस को महत्व दिया जाता है। जो भारतीय संस्कृति के हिसाब से बिल्कुल अनुकूल है। धनतेरस के दिन विशेष मुहूर्त को देख कर ही खरीदारी की जाती है। ज्योतिषाचार्य करुणा निधान बताते हैं कि 18 अक्टूबर को दोपहर में अभिजीत मुहूर्त पर धनतेरस प्रारंभ हो रहा है। जिसमें राहुकाल को छोड़कर किसी भी समय खरीदारी की जा सकती है लेकिन एक घंटे के बीच का जो समय है वह सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने बताया कि धनतेरस को मुख्य रूप से 18 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                            <category>शुभकामना संदेश</category>
                                            <category>दीपावली</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/556266/dhanteras-shubh-muhurat-2025--a-one-hour-auspicious-time-for-shopping-on-dhanteras--according-to-astrologers--the-festival-is-associated-with-wealth-and-health</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/556266/dhanteras-shubh-muhurat-2025--a-one-hour-auspicious-time-for-shopping-on-dhanteras--according-to-astrologers--the-festival-is-associated-with-wealth-and-health</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 12:09:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/untitled-design-%283%297.jpg"                         length="161180"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>7 या 8 आखिर किस दिन से शुरू हो रहा पितृ पक्ष,  तर्पण-श्राद्ध के साथ करें पूर्वजों को याद, जानिए किन चीजों से करना होगा परहेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>जौनपुर। </strong>उत्तरप्रदेश में जौनपुर जिले के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश चन्द्र शुक्ल ने शनिवार को कहा कि आश्विन के कृष्ण पक्ष में पूर्वजों के पूजन का पर्व पितृ पक्ष 07 सितंबर रविवार से शुरू होगा। पितृ पक्ष में लोग तर्पण कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ ही पितृ ऋण से मुक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। पूर्वजों का पूजन भी तिथि के अनुसार किया जाता है, इसी दिन तर्पण और श्राद्ध करना चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोग सभी दिवसों में पितृ को जल देने की मान्यता का निर्वहन करते हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक रविवार 07 सितंबर को प्रथम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/552417/on-which-day-is-pitru-paksha-starting--7-or-8--remember-your-ancestors-with-tarpan-and-shraddha--know-which-things-you-should-avoid"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(27)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जौनपुर। </strong>उत्तरप्रदेश में जौनपुर जिले के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश चन्द्र शुक्ल ने शनिवार को कहा कि आश्विन के कृष्ण पक्ष में पूर्वजों के पूजन का पर्व पितृ पक्ष 07 सितंबर रविवार से शुरू होगा। पितृ पक्ष में लोग तर्पण कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ ही पितृ ऋण से मुक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। पूर्वजों का पूजन भी तिथि के अनुसार किया जाता है, इसी दिन तर्पण और श्राद्ध करना चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोग सभी दिवसों में पितृ को जल देने की मान्यता का निर्वहन करते हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक रविवार 07 सितंबर को प्रथम श्राद्ध है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाएगा जिनका प्रथमा के दिन निधन हुआ हो। इसकेब 08 सितम्बर को द्वितीया है, इस दिन द्वितीया का श्राद्ध लोग करेंगे। उन्होंने कहा कि तर्पण और श्राद्ध मध्याह्न में करना चाहिए, इस समय ही पूर्वज आते हैं ऐसी मान्यता शास्त्रों में है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के पितृपक्ष में श्रध्दा से किये गया श्राध्द का फल परिवारीजनों को मिलता है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस बार 21 सितम्बर रविवार को पितृ विसर्जन पड़ रहा है और उस दिन सभी लोग जिनके पूर्वजों की मृत्यु का समय नहीं मालूम है, वे लोग भी अपने पूर्वजों को श्रद्धा के साथ श्राद्ध कर सकते हैं और करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यता है कि हमारे पूर्वज पितृ पक्ष शुरू होते ही हर रोज पृथ्वी पर आ जाते हैं और सूर्यास्त तक इस प्रतीक्षा में रहते हैं कि हमारे कुल खानदान का कोई न कोई व्यक्ति मुझे कुछ न कुछ खाने-पीने अथवा पूजा पाठ की सामग्री अवश्य अर्पित करेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">सूर्यास्त के पूर्व तक वे प्रतीक्षा करते हैं, जिन लोगों के घरों से पूर्वजों को कुछ न कुछ मिल जाता है, वह तो आशीर्वाद देकर चले जाते हैं और जिन लोगों के घरों से कुछ नहीं मिलता तो पूर्वज पहले रोते हैं और इस आंसू को पीकर इस प्रत्याशा के साथ वापस जाते हैं कि हो सकता है कि कल मेरे खानदान के लोग मुझे कुछ जरूर अर्पित करेंगे, इतने पर भी पूर्वज अपने खानदान वालों की भलाई ही चाहते हैं उन्हें श्राप नहीं देते। इस समय जिले में गया जाने वालों की लाइन लगी हुई है लोग अपने पूर्वजों को तर्पण करने व पिंडदान देने के लिए जा रहे हैं और वहां पर विधि विधान से श्रद्धा के साथ श्राद्ध करके वापस भी आएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : <a href="https://www.amritvichar.com/article/552397/flood-water-reached-half-a-dozen-villages-in-up--saryu-in-spate-in-basti--water-level-crossed-the-danger-mark">यूपी के आधा दर्जन गांव में पंहुचा बाढ़ का पानी: बस्ती में उफान पर सरयू, खतरे के निशान को पार कर गया जलस्तर </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>जौनपुर</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/552417/on-which-day-is-pitru-paksha-starting--7-or-8--remember-your-ancestors-with-tarpan-and-shraddha--know-which-things-you-should-avoid</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/552417/on-which-day-is-pitru-paksha-starting--7-or-8--remember-your-ancestors-with-tarpan-and-shraddha--know-which-things-you-should-avoid</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 15:17:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2025-09/untitled-design-%2827%294.jpg"                         length="142974"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Holi 2025 : इन लकी कलर्स के साथ मनाये होली, चमक जाएगी आपकी किस्मत  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार। </strong>होली भारतीय संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम है। रंगो का त्यौहार हर किसी के जीवन में हर्षोल्लास लाता है। वही होली के रंग हर किसी के जीवन में एक अलग महत्व रखते है। इस दिन लोग अपने बैर-भाव भूलकर खुशिया मनाते है। ज्योतिष शास्त्र की माने तो रंगो का सही प्रयोग करने से आपकी कुंडली में कई दोष दूर हो सकते है। इसके अनुसार इस दिन अपनी राशि वाले रंगो का प्रयोग करने से आपकी किस्मत चमक जाती है।</p>
<p><strong>तो आईये जानते है कि किस राशि के लिए कौन-सा रंग सबसे अच्छा माना जाता है-</strong></p>
<p><strong>मेष राशि</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/527397/holi-2025--celebrate-holi-with-these-lucky-colors--your-luck-will-shine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/election-campa.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार। </strong>होली भारतीय संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम है। रंगो का त्यौहार हर किसी के जीवन में हर्षोल्लास लाता है। वही होली के रंग हर किसी के जीवन में एक अलग महत्व रखते है। इस दिन लोग अपने बैर-भाव भूलकर खुशिया मनाते है। ज्योतिष शास्त्र की माने तो रंगो का सही प्रयोग करने से आपकी कुंडली में कई दोष दूर हो सकते है। इसके अनुसार इस दिन अपनी राशि वाले रंगो का प्रयोग करने से आपकी किस्मत चमक जाती है।</p>
<p><strong>तो आईये जानते है कि किस राशि के लिए कौन-सा रंग सबसे अच्छा माना जाता है-</strong></p>
<p><strong>मेष राशि और वृश्चिक राशि-</strong>इस राशि के स्वामी मंगलदेव हैं। मंगल का रंग लाल है लाल रंग से होली खेलना शुभ होगा।</p>
<p><strong>वृषभ राशि और तुला राशि-</strong> इन राशियो के स्वामी शुक्रदेव हैं<strong>। </strong>इस राशि के लोग होली खेलने में पीले, गुलाबी एवं आसमानी रंग का प्रयोग करें।</p>
<p><strong>मिथुन राशि और कन्या राशि-</strong>इस राशि के स्वामी बुधदेव हैं। इस राशि के लोग हरे रंग से होली उत्सव मनाएं। इससे इन्हें मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>कर्क राशि-</strong>इस राशि के स्वामी चंद्रमा हैं। इस राशि के लोगों के लिए लकी कलर केसरिया, हल्का गुलाबी और सफेद होता है।</p>
<p><strong>सिंह राशि - </strong>सूर्यदेव इस राशि के स्वामी हैं। वहीं, इस राशि वालों का लकी कलर केसरिया और लाल होता है।</p>
<p><strong>धनु राशि और मीन राशि-</strong> इस राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इस राशि वालों का लकी कलर पीला है।</p>
<p><strong>मकर राशि कुंभ राशि- </strong>इस राशि के स्वामी शनिदेव हैं। इस राशि के लोगों को नीले, सिल्वर व सफेद रंग से होली खेलना शुभ रहेगा।</p>
<p>होली का त्यौहार खुशाली का प्रतिक है यह युवाओ बच्चो और बुजुर्गो में अलग तरह का उत्साह भर देता है। वहीं, दूसरी ओर हिन्दू धर्म में इसे संतोष, सकारात्मकता और समृद्धि के स्रोत के रूप में भी देखा जाता है।  होली से एक दिन पहले होलिका दहन की जाती है और दूसरे दिन सुबह को लोग बड़े ही मजे के साथ एक दूसरे को रंग लगाकर इसका आंनद लेते है। </p>
<p> </p>
<p><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/527076/holi-2025-do-not-blow-this-color-in-holi-make#gsc.tab=0">यह भी पढ़ें</a><a href="https://www.amritvichar.com/article/527082/is-plane-waste-left-in-the-open--how-does-the-airplane-toilet-system-work#gsc.tab=0"> क्या खुले में छोड़ दिया जाता है प्लेन का कचरा, कैसे काम करता है हवाई जहाज़ का टॉयलेट सिस्टम? </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/527397/holi-2025--celebrate-holi-with-these-lucky-colors--your-luck-will-shine</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/527397/holi-2025--celebrate-holi-with-these-lucky-colors--your-luck-will-shine</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 11:55:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2025-03/election-campa.jpg"                         length="400331"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: अक्षय तृतीया: चंद्रमा उच्च राशि वृषभ, सूर्य मेष व शनि कुंभ में रहकर देंगे फल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> चिरंजीवी तिथि अक्षय तृतीया का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। इस तिथि में मांगलिक कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म और त्रेता, कल्पादि युगादि की शुरुआत हुई थी। साथ ही इसे धनतेरस के रूप में मनाये जाने की परंपरा भी है।</p>
<p>शुक्रवार को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि वैदिक पंचाग के अनुसार बैसाख शुक्ल पक्ष की तृतीया ही अक्षय तृतीया कहलाती है। तृतीया तिथि  10 मई शुक्रवार की प्रातः 4:57 बजे से शुरू होगी जो 11 मई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/464329/haldwani-akshaya-tritiya-moon-will-be-in-exalted-sign-taurus"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-05/akshaya-tritiya-2024-1715062144872.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> चिरंजीवी तिथि अक्षय तृतीया का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। इस तिथि में मांगलिक कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म और त्रेता, कल्पादि युगादि की शुरुआत हुई थी। साथ ही इसे धनतेरस के रूप में मनाये जाने की परंपरा भी है।</p>
<p>शुक्रवार को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि वैदिक पंचाग के अनुसार बैसाख शुक्ल पक्ष की तृतीया ही अक्षय तृतीया कहलाती है। तृतीया तिथि  10 मई शुक्रवार की प्रातः 4:57 बजे से शुरू होगी जो 11 मई की रात्रि 2: 50 बजे तक विद्यमान रहेगी। इस दिन प्रातः काल 10:45 बजे तक रोहिणी नक्षत्र और इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रहेगा।</p>
<p>बताया कि  चन्द्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में, सूर्य मेष राशि में और शनिदेव कुंभ राशि में रहते हुए फल प्रदान करेंगे। इन सभी संयोगों के अतिरिक्त सुकर्मा, गजकेसरी और शश योग बन रहे हैं। ताराप्रसाद दिव्य पंचागम् के रचनाकार व ज्योतिषाचार्य डॉ. रमेशचंद्र जोशी ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन वैवाहिक  कार्यक्रम के लिये ग्रह, नक्षत्र, नाड़ी आदि का दोष नहीं माना जाता है।</p>
<p>बताया कि इस तिथि को अबूझ मुहूर्त मानकर विवाह भी किये जाते हैं। इस दिन सोना-चांदी खरीदने के साथ ही पीतल के बर्तन, चने की दाल, जौ, मिट्टी का घड़ा और सेंधा नमक आदि खरीदना शुभ माना जाता है।  मत्स्य  पुराण के अनुसार लक्ष्मी पूजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज, गन्ना, हाथ के पंखे, घड़ा, दही, सत्तू, खरबूजा, पानी आदि का दान करना अत्यंत लाभदायक रहता है।  </p>
<p><span style="color:rgb(248,6,6);"><strong>शुभ मूहुर्त</strong></span><br />प्रातःकाल 5:48 बजे दोपहर 12:24 बजे तक पूजा का मूहुर्त रहेगा। अभिजीति मुहूर्त में पूजा करना चाहें तो प्रातः 11:50 बजे से 12:44 बजे तक कर सकते हैं। दोनों शुभ नक्षत्रों में खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है।  साथ ही चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में, सूर्य मेष राशि में और  शनिदेव कुंभ राशि में रहते हुये फल प्रदान करेंगे। ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी का पूजन श्रद्धा पूर्वक करने से उत्तम फल मिलता है। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के पूजन का विधान है ।  </p>
<p><span style="color:rgb(248,6,6);"><strong>पूजा विधि</strong></span><br /> प्रातः काल घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र पहनकर अपने मंदिर की सफाई  करें और एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर गंगा जल से पवित्र करें। इसके बाद भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी के चित्र या मूर्ति का शुद्धोपचार कर  इसके समक्ष घी का दीपक और धूप बत्ती जलाएं। भगवान गणेश का ध्यान करते हुये भगवान विष्णु, महालक्ष्मी को रोली, कुमकुम, फूल, नैवेद्य, मेवा, पान, सुपारी और  फल अर्पित करें और पूजन कर आरती करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/464329/haldwani-akshaya-tritiya-moon-will-be-in-exalted-sign-taurus</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/464329/haldwani-akshaya-tritiya-moon-will-be-in-exalted-sign-taurus</guid>
                <pubDate>Tue, 07 May 2024 20:06:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2024-05/akshaya-tritiya-2024-1715062144872.jpg"                         length="56712"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: नव संवत्सर 2081:  कैसे रहेगा यह वर्ष जानिए...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>भारतीय नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। ब्रह्म पुराण में मान्‍यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि बनी इसलिए यही वो दिन है जब से भारत वर्ष की काल गणना की जाती है। हेमाद्रि के ब्रह्म पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने पृथ्वी की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन की थी।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>संवत का नाम 'पिंगल' </strong></span><br />चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 अप्रैल दिन मंगलवार को है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग में नव विक्रम संवत्सर-2081 और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/456013/know-how-haldwani-nav-samvatsar-2081-will-be-this-year"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-04/capture22.png" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>भारतीय नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। ब्रह्म पुराण में मान्‍यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि बनी इसलिए यही वो दिन है जब से भारत वर्ष की काल गणना की जाती है। हेमाद्रि के ब्रह्म पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने पृथ्वी की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन की थी।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>संवत का नाम 'पिंगल' </strong></span><br />चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 अप्रैल दिन मंगलवार को है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग में नव विक्रम संवत्सर-2081 और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी। इस बार शुरू हो रहे संवत का नाम 'पिंगल' है। इस साल ग्रह मंडल का राजा 'मंगल' और मंत्री 'शनि' होंगे। ज्योतिष विज्ञानियों के मुताबिक, इनके असर से कई क्षेत्रों में परेशानियां बढ़ेंगी, लेकिन रियल एस्टेट, सिनेमा, रंगमंच, शिक्षा व्यवस्था, नारी शक्ति और अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। ऑटोमोबाइल, तकनीक, दूरसंचार, कंप्यूटर, रोबॉटिक्स और AI के लिहाज से भी यह नया साल शुभ होगा।</p>
<p><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">इस वर्ष गर्मी करेगी परेशान</span></strong><br />ज्योतिषाचार्य कैलाश पांडे ने बताया कि नवसंवत्सर के प्रवेश की लगन 'धनु' होने से गुरु पंचम त्रिकोण में मित्र राशि में है। इससे सत्ता में बैठे व्यक्ति की बुद्धिमत्ता से परिस्थितियों का समाधान निकलेगा। इसके साथ भारत की सैन्य ताकत बढ़ेगी। वहीं, राजनीतिक उथल-पुथल रहेगी। तूफान, भूकंप, प्राकृतिक आपदा से जन-धन की हानि की आशंका है। इसके साथ पृथ्वी का तापमान बढ़ेगा। झुलसा देने वाली गर्म हवाओं से पशु-पक्षी, फल-फूल, वनस्पतियों को नुकसान होगा।</p>
<p>नए संवत्सर 2081 में ग्रह मंडल का राजा 'मंगल' और मंत्री 'शनि' है। ग्रह मंडल में सस्येश मंगल, धान्येश चंद्र, रसेश गुरु, नीरसेश मंगल, मेघेष शनि, फलेश शुक्र, धनेश मंगल और दुर्गेश शनि भी होंगे। इनमें सात स्थानों पर क्रूर ग्रहों का अधिकार होगा और बाकी तीन स्थान सौम्य ग्रह को मिले हैं। राजा सहित कुल चार विभाग अकेले मंगल के अधीन हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल और शनि दोनों बहुत प्रचंड हैं। इससे मंगल के कारण 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली स्थिति बनेगी। वहीं, शनि के कारण 'अपनी करनी की सजा' भी पाएंगे।</p>
<p>भारतीय ज्योतिष के अनुसार हर साल नया वर्ष जिस दिन शुरू होता है, उसी के आधार पर उस साल का कोई ग्रह राजा होता है। पूरे साल इस ग्रह का मानव जीवन पर असर पड़ता है। अब संवत 2081 की शुरुआत हो रही है, इस संवत के राजा मंगल ग्रह हैं। मंगल ग्रहों के सेनापति और पराक्रम, साहस, सेना प्रशासन, सिद्धांत के कारक हैं। इसलिए हिंदू नव वर्ष में अग्रेसिव घटनाएं घट सकती हैं। इसके चलते नया साल काफी उथल पुथल वाला रहेगा और कड़ा प्रशासन देखने को मिलेगा। साथ ही देश दुनिया में हैरान करने वाली घटनाएं होंगी।</p>
<p>जगलग्न के अनुसार लग्न को शनि पंचम भाव में गुरु सूर्य के साथ देखता है। भारत के पड़ोसियों, खाड़ी देशों और संयुक्त राज्य अमेरिका के किसी भी प्रांत में प्राकृतिक आपदाओं से सार्वजनिक संपत्ति की हानि होगी। चतुर्थ भाव में बुध नीच का शुक्र उच्च राहु के साथ भारत में कुछ स्थानों पर आतंकवादी घटनाओं से क्षति होगी। सूर्य पंचम भाव में है और शनि की अशुभ दृष्टि के कारण विश्व का राजनीतिक वातावरण संघर्षपूर्ण रहेगा. मुद्रा अवमूल्यन के कारण यूरोपीय देशों को आर्थिक मंदी का अनुभव होगा अधिकांश यूरोपीय देश भारत और उसके पड़ोसी देशों में व्यापार बढ़ाने की होड़ में शामिल होंगे।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>कैसा रहेगा आपकी राशि के अनुसार यह वर्ष</strong></span><br />1– मेष राशि – पूर्व निर्धारित कार्य पूर्ण होंगे। व्यापार सुचारू रूप से चलेगा। व्यापार में लाभ प्राप्त करेंगे। आकस्मिक धन लाभ होने की संभावना। भौतिक सुख सुविधाओं में धन खर्च होगा। दांपत्य जीवन सुखमय बीतेगा। भाई बंधुओ से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। संतति के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रह सकती है। माता-पिता से सहयोग प्राप्त करेंगे। नौकरी पेशा वर्ग के लिए सामान्य समय है। स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। विद्यार्थी वर्ग के लिए समय शुभ है। कला के क्षेत्र में रुझान बढ़ेगा। रोजगार हेतु प्रयासरत जातकों को सफलता प्राप्त होगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। मानसिक तनाव की स्थिति बनी रहेगी। यात्राएं सफल रहेगी। लाभ हेतु शिव जी को जल अर्पित करें हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें गाय को गुड और रोटी खिलाएं।</p>
<p>2– वृषभ राशि – व्यापार में सामान्य लाभ होगा। आय की अपेक्षा व्यय अधिक होंगे। नया वाहन खरीदने हेतु शुभ समय है। विद्यार्थी वर्ग का शिक्षा के प्रति रूझान बढ़ेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करेंगे। नौकरी पेशा वर्ग को सहकर्मियों के उदासीन व्यवहार के कारण तनाव रह सकता है। पारिवारिक जीवन सामान्य रहेगा। प्रेम प्रसंग मधुर रहेंगे। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा व यात्राएं सफल रहेगी। लाभ हेतु सरस्वती उपासना अधिक करें। तनाव कम करने हेतु शिव जी को जल अर्पित करें। ॐ सोम सोमाय नमः का प्रतिदिन 108 बार जाप करें।</p>
<p>3– मिथुन राशि – व्यापार में सामान्य लाभ प्राप्त करेंगे। नए व्यापार में निवेश करने से बचें। आकस्मिक धन खर्च होने के योग बन रहे हैं। विदेश गमन के योग चल रहे हैं। भाई–बंधुओ, मित्रों से विशेष सहयोग प्राप्त करेंगे। माता-पिता के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। प्रेम प्रसंग मधुर रहेंगे। दांपत्य जीवन सुखमय बीतेगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए समय शुभ है। अविवाहित जातकों का विवाह संपन्न हो सकता है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। यात्राएं कष्टकारी रहेगी। लंबी यात्रा करने से बचें। लाभ हेतु सूर्य को जल अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।</p>
<p>4– कर्क राशि – शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा। व्यापार में मंदी व शिथिलता रहेगी। संचित धन को सोच समझकर खर्च करें आर्थिक संकट रह सकता है। माता-पिता व कुटुंब जनों से सहयोग प्राप्त करेंगे। संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त होगा। रोजगार हेतु प्रयासरत जातकों को सफलता मिल सकती है। दांपत्य जीवन सामान्य रहेगा। प्रेम प्रसंग मधुर रहेंगे। नौकरी पेशा वर्ग के लिए समय सामान्य है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। मानसिक तनाव व चोट लगने की संभावना। अतः वाहन सावधानी से चलाएं। शनिवार को लंबी यात्रा करने से बचें। लाभ हेतु सूर्य को जल अर्पित करें। शिव आराधना अधिक करें। शनिवार को पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं व दीपक प्रज्वलित करें। </p>
<p>5– सिंह राशि – व्यापार में उतार-चढ़ाव रहेंगे। नए व्यापार में निवेश करने से बचें। कुटुंब में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है क्रोध पर नियंत्रण रखें वाणी संयमित रखें।  दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। नौकरी पेशा वर्ग को अपना कार्य गंभीरता से करना चाहिए अन्यथा सहकर्मियों के साथ विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विद्यार्थी वर्ग शिक्षा के प्रति उदासीन रहेंगे। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। मानसिक तनाव रहेगा। धार्मिक यात्राएं हो सकती हैं। लाभ हेतु सूर्य को जल अर्पित करें मानसिक शांति हेतु ॐ सोम सोमाय नमः का प्रतिदिन 108 बार जाप करें।</p>
<p>6– कन्या राशि – व्यापार स्थिर रहेगा तथा धन लाभ होगा। कुटुंब का उत्तम सुख प्राप्त होगा। निसंतान दंपतियों को संतति प्राप्त होने के योग बन रहे हैं। दांपत्य जीवन सुखमय बीतेगा। प्रेम प्रसंग मधुर रहेंगे। विद्यार्थी वर्ग के लिए समय शुभ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करेंगे। भूमि भवन क्रय विक्रय से धन लाभ होने की संभावना। नौकरी पेशा वर्ग के लिए समय शुभ है। पदोन्नति व स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य नरम गरम बना रहेगा। धार्मिक यात्राएं सफल रहेगी। लाभ हेतु सूर्य को जल अर्पित करें। गाय को चारा खिलाएं भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।</p>
<p>7– तुला राशि – व्यापार में सामान्य लाभ प्राप्त होगा। नए व्यापार में पूंजी निवेश करने से पूर्व विचार करें। पारिवारिक जीवन तनावपूर्ण रहेगा। सामाजिक स्तर पर अपयश प्राप्त हो सकता है अतः दूसरों के विवाद में पड़ने से बचें। प्रवास गमन के योग चल रहे हैं। दांपत्य जीवन में उतार चढ़ाव रहेंगे। प्रेम संबंधों में परस्पर आकर्षण बड़ेगा। धर्म के प्रति रुचि बढ़ेगी। धर्मस्थल की यात्राएं संभव है। नौकरी पेशावर वर्ग के लिए समय सामान्य है। विद्यार्थी वर्ग शिक्षा के प्रति उदासीन रहेंगे। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। लाभ हेतु शिव आराधना करें। देवी सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना करें।</p>
<p>8– वृश्चिक राशि – व्यापार में यथावत लाभ प्राप्त करेंगे। नए व्यापार में निवेश करने हेतु समय अनुकूल नहीं है। नया वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। पारिवारिक जीवन में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। किसी भी कारणवस घर परिवार से दूर रहने की संभावना। संतान से विरोध पैदा हो सकता है। क्रोध पर नियंत्रण रखें वाणी संयमित रखें। भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न हो सकता है। नौकरी पेशावर अपने कार्य के प्रति गंभीर रहे। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां, दुर्घटना होने की संभावना व वाहन भय बना रहेगा। लंबी यात्रा करने से बचें। लाभ हेतु हनुमान चालीसा बजरंग बाण का पाठ करें मंगलवार को सुंदरकांड अवश्य पढ़ें। गाय को गुड लगाकर रोटी खिलाएं। पीपल के वृक्ष पर शनिवार को दीपक प्रज्वलित करें। </p>
<p>9– धनु राशि– व्यापार में लाभ प्राप्त करेंगे। मन प्रसन्न रहेगा। संतान सुख प्राप्त होगा। व्यापार में अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। राजकीय सेवाओं के पूर्ण योग बन रहे हैं। सामाजिक यश प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे। कुटुंब जनों का सहयोग प्राप्त होगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त होगा। नौकरी पेशा वर्ग के लिए समय शुभ है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। यात्राएं सफल रहेगी। लाभ हेतु विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करें।</p>
<p>10– मकर राशि – व्यापार में उतार-चढ़ाव रहेंगे जिसके कारण आर्थिक पक्ष कमजोर रह सकता है। भाग्योदय में बाधा उत्पन्न होगी। निरर्थक भाग दौड़ बनी रहेगी। कुटुंब जनों का सहयोग प्राप्त करेंगे। संतान सुख प्राप्त हो सकता है। आय की अपेक्षा व्यय अधिक होगा। नौकरी में तनाव की स्थिति रहेगी। प्रवास गमन के योग। दांपत्य जीवन सुखमय बीतेगा। प्रेम प्रसंग मधुर होंगे। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। मानसिक तनाव की स्थिति रहेगी। वाहन सावधानी से चलाएं। लाभ हेतु हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिवार को शनि मंदिर में चार मुखी दीपक प्रज्वलित करें।  बुजुर्गों का सम्मान करें।</p>
<p>11– कुंभ राशि – कभी उत्साह कभी निराशा रहेगी। व्यापार में सामान्य लाभ होगा। क्रोध अधिक रहेगा। अपयश के भागी बन सकते हैं। दूरस्थ यात्रा कष्टदायक होगी। आकस्मिक दुर्घटना घटित हो सकती है अतः स्वयं वाहन संचालित ना करें। कुटुंब जनों व भाई बंधुओ का सहयोग बना रहेगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए समय शुभ है शिक्षा में नए आयाम स्थापित करेंगे। रोजगार के लिए प्रयासरत जातकों को नौकरी प्राप्त होने के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। लाभ हेतु बजरंग बाण का प्रतिदिन पाठ करें। शनिवार को पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं व सरसों के तेल से दीपक प्रज्वलित करें। </p>
<p>12– मीन राशि – सामाजिक यश प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यापार में लाभ प्राप्त करेंगे। संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त होगा। दांपत्य जीवन का विशेष सुख प्राप्त करेंगे। प्रेम प्रसंग मधुर रहेंगे। राजकीय सेवाएं विशेष लाभ देगी। दीर्घकालीन न्यायालय संबंधी मामलों में विजय प्राप्त करेंगे। नौकरी पेशा वर्ग के लिए समय शुभ है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। चर्म रोग, उदर रोग व वाहन दुर्घटना होने की संभावना। शनिवार को लंबी यात्रा करने से बचें। लाभ हेतु विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। शिवजी को जल अर्पित करें। शनिवार को शनि मंदिर में चार मुखी दीपक जलाएं। जरूरतमंदों की सहायता करें, गाय को चारा दान करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/456013/know-how-haldwani-nav-samvatsar-2081-will-be-this-year</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/456013/know-how-haldwani-nav-samvatsar-2081-will-be-this-year</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Apr 2024 17:15:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2024-04/capture22.png"                         length="501626"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संतान प्राप्ति के लिए अपनाएं यह उपाय, निश्चित तौर पर मिलेगा संतान सुख</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार। </strong>बच्चे को जन्म देना दांपत्य के लिए सबसे खास पलों में से एक होता है। हालांकि, कई बार कुछ जोड़ों को अपने लिए यह खुशी प्राप्त करना कठिन लगता है क्योंकि उन्हें गर्भधारण करने में कठिनाई होती है। समस्या चाहे जो भी हो, जब आपके जीवन में बच्चा नही होता है, तो यह परिवार के सभी सदस्यों को समान रूप से प्रभावित करता है। इसके अलावा, कभी-कभी दवा भी गर्भधारण में मदद नहीं करती है। बल्कि जोड़ों की परेशानी में इजाफा करती है। हालांकि, ऐसे मामलों में ज्योतिष आपके बचाव में आ सकता है। वहीं आपके लिए कुछ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/383605/follow-this-remedy-to-get-a-child-you-will-definitely"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/jyotish-upay-to-conceive_large_1653_84.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार। </strong>बच्चे को जन्म देना दांपत्य के लिए सबसे खास पलों में से एक होता है। हालांकि, कई बार कुछ जोड़ों को अपने लिए यह खुशी प्राप्त करना कठिन लगता है क्योंकि उन्हें गर्भधारण करने में कठिनाई होती है। समस्या चाहे जो भी हो, जब आपके जीवन में बच्चा नही होता है, तो यह परिवार के सभी सदस्यों को समान रूप से प्रभावित करता है। इसके अलावा, कभी-कभी दवा भी गर्भधारण में मदद नहीं करती है। बल्कि जोड़ों की परेशानी में इजाफा करती है। हालांकि, ऐसे मामलों में ज्योतिष आपके बचाव में आ सकता है। वहीं आपके लिए कुछ उपाय लेकर आ रहे हैं उम्मीद है इन्हें अपनाने से पुयदा होगा। </p>
<p>बाल ज्योतिष ज्योतिष का पंचम भाव वह है जिसे ज्योतिषी गर्भावस्था से संबंधित सभी सवालों के जवाब देने के लिए देखते हैं। कुंडली में पंचम भाव संतान और उससे संबंधित कारक तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। यदि किसी व्यक्ति के पंचम भाव में ग्रहों की सकारात्मक युति हो, तो यह बच्चे के जन्म के लिए सकारात्मक परिदृश्य सुनिश्चित करने में मदद करता है। साथ ही, गर्भावस्था और इससे जुड़े पहलुओं का आनंद लेने के लिए पंचम भाव के स्वामी को जातक की कुंडली में सकारात्मक रूप से स्थापित करने की आवश्यकता होती है।</p>
<p>पांचवें भाव के साथ, बच्चे के जन्म की भविष्यवाणी करने के लिए जिन अन्य भावों को भी देखा जाता है, वह है दूसरा भाव (परिवार के लिए भाव) और 11 वां भाव (बच्चों के माध्यम से लाभ और इच्छाओं की पूर्ति के लिए)। हम नौवें भाव को भी देखते हैं क्योंकि यह केवल एक सूत्रधार के रूप में कार्य करता है। इन भावों और इनके स्वामी के साथ-साथ बृहस्पति ग्रह को भी संतान प्राप्ति का मुख्य कारक माना जाता है। ज्योतिष में बृहस्पति को दाता ग्रह के रूप में माना जाता है, और इसलिए जातक पर इसका आशीर्वाद बच्चे के जन्म के लिए आवश्यक है।इसके अलावा नवम भाव के स्वामी की स्थिति का भी लग्न कुंडली के माध्यम से विश्लेषण किया जाता है ताकि दंपत्ति के लिए प्रसव की संभावनाओं की जांच की जा सके। </p>
<p>यदि आपकी कुण्डली में ये भाव या बृहस्पति अशुभ योगों से प्रभावित हैं, तो संतान के जन्म और गर्भधारण में देरी की संभावना उत्पन्न हो सकती है।उदाहरण के लिए, यदि शनि जो देरी का कारण बनता है, उपरोक्त किसी भी घर या ग्रह को प्रभावित कर रहा है, तो आपको अपने बच्चे के जन्म की प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। </p>
<p>वास्तव में, कई बार शनि के दुष्प्रभाव जातक के लिए संतान प्राप्ति के आशीर्वाद को अवरुद्ध कर सकते हैं। शनि के अलावा, अशुभ राहु, केतु और मंगल भी संतान के जन्म में बाधाओं के निर्माता हैं। राहु और केतु संतान से संबंधित नकारात्मक कर्मों का संकेत देते हैं। राहु सर्प दोष और प्रजनन क्षमता में कमी का संकेत देता है। राहु बृहस्पति को प्रभावित कर पितृ दोष भी बनाता है जिससे संतान सुख की प्राप्ति में परेशानी होती है।</p>
<p>इन ग्रहों के अलावा छठे, आठवें और द्वादश की भूमिका भी प्रमुख है। ऐसे में यदि गुरु यानि बृहस्पति नीच या कमजोर हो, तो दंपति के लिए अपने लिए संतान पैदा करना लगभग असंभव हो जाता है। क्योंकि पंचम भाव संचित कर्मों का भी प्रतिनिधित्व करता है, ऐसे में इस भाव को देखकर संतान से संबंधित सुख या दुख की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।बच्चा होने में निराशा के कारणों का उल्लेख करने के बाद, हमने आपके लिए बच्चे के जन्म के रास्ते में आने वाली नकारात्मकताओं या बाधाओं से लड़ने के उपाय भी बताए हैं। यहां प्रसव के लिए कुछ ज्योतिषीय उपाय दिए गए हैं जो दंपति को गर्भ धारण करने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p><strong>संतान प्राप्ति के लिए ज्योतिषीय उपाय</strong><br />कुंडली में कमजोर गुरु न केवल संतान के जन्म में बाधा डालता है बल्कि गर्भावस्था के दौरान संकट भी लाता है, तो ऐसे में बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि आप इसकी पूजा करें। बृहस्पति को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम उपाय गुरुवार के दिन गुड़ का दान करना है। इसके अलावा आप अपनी कुंडली में बृहस्पति ग्रह को मजबूत और अनुकूल बनाने के लिए नीचे दिए गए किसी भी मंत्र का उच्चारण भी कर सकते हैं। </p>
<p><em>देवानां च ऋषिणां च गुरुं काञ्चनसननिभम्। </em><br /><em>भूतं बुद्धिं त्रिलोकेशं तं नममि बृहस्पतिम्।।</em><br /><em>ॐ ग्रां घरं ग्रौं सः गुरवे नमः। </em><br /><em>ह्रीं गुरवे नमः। बृं बृहस्पतये नमः।</em></p>
<p><strong>नवग्रह पूजा</strong><br />संतान प्राप्ति का दूसरा उपाय ज्योतिष में नवग्रहों या नौ ग्रहों की पूजा करना है। ज्योतिष में नौ ग्रह हमारे जीवन और बच्चे के जन्म सहित इसके विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए यदि आप सभी नौ ग्रहों को ज्योतिष सामग्री में रखने में सक्षम हैं, तो वे न केवल आपको गर्भ धारण करने में मदद कर सकते हैं। बल्कि आपके जीवन की अन्य विभिन्न संभावनाओं को भी बेहतर बना सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ग्रह शांति में हैं, आप घर या मंदिर में हवन और अभिषेक से कर सकते हैं।हवन करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों का मुकाबला किया जा सकता है, जिससे उन्हें सकारात्मकता के साथ लाया जा सकता है, जो आपको शुभ फल देगा।</p>
<p>यह पूजा संतान के जन्म में आने वाली बाधाओं को भी दूर करती है।अन्य सभी चीजों के अलावा, कुंडली में राहु और केतु की स्थिति संतान प्राप्ति में प्रमुख संकेतक बाधाओं में से एक है। राहु और केतु आपके कर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं और उसी के आधार पर आपको पुरस्कृत करते हैं। हालाँकि, यह तथ्य कि आपके अतीत को बदला नहीं जा सकता है। इसलिए आप केवल राहु और केतु को प्रसन्न करने के लिए कुछ पूजा करके ही इसे सुधार सकते हैं। और यदि आप राहु और केतु को प्रसन्न करने में सक्षम हैं, तो ये अशुभ ग्रह भी सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।</p>
<p>राहु के बुरे प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें:ॐ भ्रां भ्रीं भौं सः राहवे नमःअर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम्। सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रमंम।।केतु के बुरे प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें</p>
<p><em>ॐ स्त्राँ शब्दं स्त्रौं सः केतवे नमःपलाशपुष्पसंशं तारकाग्रहमस्तकम्। रंध्रं रौरद्राण्विकं घोरं तं केतुं प्रंमाम्इम्।।</em></p>
<p>संतान प्राप्ति के लिए भगवान की पूजा विधिबांझपन के लिए उपर्युक्त ज्योतिषीय उपायों के अलावा, कुछ ईश्वर-पूजा अनुष्ठान भी हैं, जो एक नवजात शिशु को घर में जल्दी लाने में मदद करने के लिए एक जातक कर सकता है। सच्चे दिल से नियमित रूप से भगवान की पूजा करने से आपकी अधिकांश समस्याओं को हल करने में मदद मिल सकती है और गर्भ धारण न कर पाना उनमें से एक है। ऐसा कहने के बाद संतान प्राप्ति के लिए  इन पूजा अनुष्ठानों का पालन करें। </p>
<p><strong>श्री कृष्ण की पूजा करें</strong><br />कृष्ण की पूजा करने से संतान प्राप्ति में आने वाली कोई भी समस्या दूर हो जाती है और आपको संतान प्राप्ति में मदद मिल सकती है।दंपति एक साथ संतान गोपाल पूजा करने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके अलावा, यदि आप अपने परिवार के सदस्यों को अनुष्ठान में शामिल करते हैं, तो यह आपके लिए अद्भुत काम करेगा।संतान गोपाल मंत्र - ओम श्रीं ह्रीं क्लीन ग्लैम देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगतपते देहि में तन्यं कृष्ण त्वमहं शरणं गठ - का जप करने से भी मदद मिलती है।</p>
<p>स्कंद माता पूजा बच्चे के जन्म के लिए एक और महत्वपूर्ण पूजा है। अपनी गोद में भगवान कार्तिक के साथ एक शेर पर सवार, स्कंद माता अपने भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाने और उन्हें बच्चों के साथ आशीर्वाद देने के लिए जानी जाती है। इनकी आराधना करने से मातृत्व सुख की प्राप्ति होती है। स्कंद माता की कृपा पाने के लिए करें इस मंत्र का जाप - सिन्गता नित्यं पद्मश्रित करद्वय। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्वी..</p>
<p><strong>संतान प्राप्ति के लिए वास्तु उपाय</strong></p>
<p>पितृ दोष भी दंपत्ति में बांझपन का कारण हो सकता है। जिस तरह से आप अपने घर पर अन्य अनुष्ठान करते हैं, उसका भी आपके माता-पिता बनने की संभावना पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसलिए जब भी आप पूजा करें, तो सुनिश्चित करें कि इसमें कोई बाधा नहीं है। खासकर अगर आपने पितरों का अंतिम संस्कार सही तरीके से नहीं किया है तो संतान संबंधी परेशानी हो सकती है। इससे बनने वाले पितृ दोष को दूर करने के लिए आपको पितरों का श्राद्ध विधिपूर्वक करना चाहिए। इन अनुष्ठानों को करने से संतान के जन्म से संबंधित बाधाएं और बाधाएं दूर हो जाएंगी।</p>
<p><strong>संतान प्राप्ति के लिए वास्तु उपाय</strong><br />घर में सबसे महत्वपूर्ण बेडरूम हमेशा होना चाहिए दक्षिण पश्चिम दिशा। यह दिशा युगल के बीच रोमांस को बढ़ावा देगी और प्रजनन क्षमता को दूर करने में मदद करेगी।दक्षिण दिशा में सिर करके सोएं।यदि आपके घर में बगीचा या पौधे की जगह है, तो सुनिश्चित करें कि आप अपने यार्ड और बगीचे की दक्षिण-पश्चिम दिशा में फल उगाएं।यदि आप बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप अपने घर में किसी भी तरह का निर्माण या नवीनीकरण का काम शुरू न करें। सकारात्मक माहौल के लिए अपने मुख्य द्वार को साफ रखें। बिस्तर के नीचे से सभी प्रकार की गंदगी को हटा दें। इस जगह को साफ सुथरा रखें। यह भी सुनिश्चित करें कि घर का प्रवेश द्वार अव्यवस्था मुक्त हो। हो सके तो दरवाजे पर फव्वारा रखें।</p>
<p>अपने बेडरूम के पश्चिमी कोने को सजाएं, बच्चे के जन्म के लिए एक और ज्योतिषीय युक्ति यह होगी कि आप अपने शयनकक्ष में हाथियों की एक जोड़ी की सूंड के साथ एक तस्वीर रखें। नियमित रूप से और विशेष रूप से गर्भ धारण करने की कोशिश करते समय, सुनिश्चित करें कि आप बेडरूम में ताजे फूल रखें। दर्पण, यदि कोई हो, को बेडरूम से हटा देना चाहिए, भले ही आप गर्भ धारण करने की कोशिश नहीं कर रहे हों। यदि आप अपने शयनकक्ष में अनार की तस्वीर लगा दें तो आपकी प्रजनन क्षमता में वृद्धि हो सकती है।</p>
<p>बेडरूम में पानी या फव्वारे दिखाने वाली तस्वीरें लगाने से बचें। यह अजीब लग सकता है, लेकिन गर्भावस्था के लिए एक और वास्तु टिप यह सुनिश्चित करना है कि आप अपने बेडरूम में कोई इनडोर प्लांट न लगाएं। वास्तु में बच्चों के लिए एक खास जगह होती है- घर की पश्चिम दिशा। इसलिए इस दिशा में क्रिस्टल लटकाने से संतान प्राप्ति में मदद मिलती है।अपने बेडरूम को हल्के रंग से पेंट करें।</p>
<p>कला का कोई भी रूप जो हिंसा को दर्शाता है उसे घर में नहीं रखना चाहिए और विशेष रूप से शयन कक्ष में नहीं रखना चाहिए। अपने बेडरूम में रोज क्वार्ट्ज स्टोन लगाएं। गर्भावस्था के लिए एक और वास्तु युक्ति यह होगी कि पत्नी हमेशा पति के बाईं ओर सोए।यदि आपके बेडरूम में अटैच्ड टॉयलेट है तो सुनिश्चित करें कि जब वह उपयोग में न हो तो आप उसका दरवाजा कसकर बंद कर दें। बच्चे के जन्म के लिए क्रिस्टल / रत्न धारण करें लेकिन एक बार ज्योतिषी से पूछ लें। </p>
<p>रूद्राक्ष का उपयोग गर्भावस्था को प्रोत्साहित करने और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसे प्यार का प्रतीक माना जाता है, जो सभी भावनाओं और भावनाओं को बढ़ावा दे सकता है और आशावाद और आत्मविश्वास को भी बढ़ावा देता है। गर्भ गौरी रुद्राक्ष गर्भ गौरी रुद्राक्ष मां गौरी और उनके पुत्र श्री गणेश का प्रतिनिधित्व करता है। गौरी शंकर रुद्राक्ष की तरह गर्भ गौरी रुद्राक्ष के भी दो भाग हैं। पहला भाग दूसरे से छोटा है। बड़े आकार का रुद्राक्ष माता गौर यानि पार्वती को दर्शाता है जबकि छोटे आकार का रुद्राक्ष भगवान गणेश को दर्शाता है। यह उन महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है जो गर्भपात से डरती हैं और जो मातृत्व का सुख पाने के लिए बेचैन रहती हैं।</p>
<p>जीवन में संतान का सुख पाने के लिए आपको गर्भ गौरी रुद्राक्ष को उसके गले में धारण करना चाहिए। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार गर्भ गौरी रुद्राक्ष बहुत ही शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जाओं का स्रोत है। जो महिलाएं गर्भ धारण करने में असमर्थ हैं या जिन्हें गर्भपात का डर है, वे गर्भ गौरी रुद्राक्ष धारण कर सकती हैं।.वही रुद्राक्ष मां और बच्चे के बीच के बंधन को बढ़ाने में भी उपयोगी है। एक बार जब आप गर्भ गौरी रुद्राक्ष को अपने स्थान पर स्थापित कर लेते हैं, तो उसका सर्वोत्तम लाभ पाने के लिए ओम नमः शिवाय का 108 बार जाप करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/383605/follow-this-remedy-to-get-a-child-you-will-definitely</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/383605/follow-this-remedy-to-get-a-child-you-will-definitely</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 16:23:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2023-07/jyotish-upay-to-conceive_large_1653_84.jpeg"                         length="54638"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Palmistry: क्या आपके हाथ में भी है M का निशान, जानिए क्या लिखा है आपके भाग्य में?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> यूं तो आपके हाथ की हर एक रेखा कुछ ना कुछ कहती है। मगर क्या आपने जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा, भाग्य रेखा और हृदय रेखा से बनने वाले M पर गौर किया है। अगर इन चारों रेखाओं के संजोग से आपके हाथ में M की आकृति बनती है तो ये अनेक विशेषताएं आपके बारे में बताती है और आपके जीवन में सफलता का संकेत भी देती है। जिन जातकों के हाथ में M का निशान होता हे, वे धन-दौलत, शोहरत के मामले में बेहद लकी होते हैं। </p>
<p>- हथेली में M का निशान हो तो व्‍यक्ति पैदाइशी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/371477/palmistry-do-you-have-m-mark-on-your-hand-know"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-05/rekha3_2882065-m.webp" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> यूं तो आपके हाथ की हर एक रेखा कुछ ना कुछ कहती है। मगर क्या आपने जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा, भाग्य रेखा और हृदय रेखा से बनने वाले M पर गौर किया है। अगर इन चारों रेखाओं के संजोग से आपके हाथ में M की आकृति बनती है तो ये अनेक विशेषताएं आपके बारे में बताती है और आपके जीवन में सफलता का संकेत भी देती है। जिन जातकों के हाथ में M का निशान होता हे, वे धन-दौलत, शोहरत के मामले में बेहद लकी होते हैं। </p>
<p>- हथेली में M का निशान हो तो व्‍यक्ति पैदाइशी लीडर होता है। उसमें आगे आकर जिम्‍मेदारियां लेने का गुण होता है, जो उसे जीवन में बहुत आगे ले जाता है। </p>
<p>- हाथ में M का निशान हो और बाकी ग्रह भी अच्‍छे हों तो जातक के राजनीति में ऊंचे पद पर पहुंचने की संभावना होती है। </p>
<p>- जिन लोगों के हाथ में M का निशान होता है, वे काफी विचारशील और अच्‍छी कल्‍पनाशक्ति वाले होते हैं. ऐसे जातक अच्‍छे लेखक, विचारक, कलाकार, वक्‍ता, साहित्‍यकार बनते हैं। </p>
<p>- हथेली में M का निशान हो तो उस व्‍यक्ति के पास कभी पैसे की कमी नहीं होती है. वो 40 की उम्र के बाद खूब सफल होते हैं और अपार धन-दौलत के मालिक बनते हैं। </p>
<p>- हथेली में M का निशान होना व्‍यक्ति को लाइफ पार्टनर के मामले में भी लकी बनाता है. ऐसे जातक का जीवनसाथी उसे बेइंतहां प्‍यार करता है और उनकी आपस में खूब बनती है। </p>
<p>- हाथ में M का निशान हो तो व्‍यक्ति चुनौतियों से डरता नहीं है, बल्कि उनका डरकर सामना करता है. इन जातकों को जीवन में संघर्ष भी करना पड़े तो ये उसे पार करके ऊंचाइयों पर पहुंच ही जाते हैं। </p>
<div class="pbwidget w-l543 postdisplay_title h1">
<div class="pbwidget-body">
<h6 class="tag_h1 node_title"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/371473/haridwar-news-car-rammed-into-truck-one-killed-three-in#gsc.tab=0">यह भी पढ़ें: Haridwar News : ट्रक में जा घुसी कार, एक की मौत, तीन की हालत गंभीर</a></strong></span></h6>
</div>
</div>
<div class="pbwidget w-6h4y postdisplay_subtitle h3">
<div class="pbwidget-body">
<h3 class="tag_h3 node_subtitle"> </h3>
</div>
</div>
<div class="r-zbr7 post-meta pt-1pb-1 pl-2 pr-2">
<div>
<div class="row">
<div class="d-md-block col-md-6">
<div>
<div class="pbwidget w-ckx7 postdisplay_author"> </div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/371477/palmistry-do-you-have-m-mark-on-your-hand-know</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/371477/palmistry-do-you-have-m-mark-on-your-hand-know</guid>
                <pubDate>Mon, 22 May 2023 11:54:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2023-05/rekha3_2882065-m.webp"                         length="21098"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: शनि की साढ़ेसाती और ढैया...किस राशि पर कैसा रहेगा प्रभाव, जानिए पूरा हाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>शनि देव को ग्रहों में न्यायाधीश की संज्ञा दी गई है, और हर कोई अपनी राशि में शनि देव की स्थिति को लेकर जिज्ञासा से भरा रहता है। वहीं इस वर्ष शनि देव किस पर होंगे मेहरबान और कैसे किया जा सकता है इन्हें खुश... बता रहीं हैं हल्द्वानी निवासी ज्योतिषाचार्या मंजू जोशी।</p>
<p>तो चलिए साझा करत हैं आपसे पूरी जानकारी,  तो सबसे पहले आपको बता दें कि कि इस वर्ष 2023 में शनि देव कुंभ राशि में भ्रमण करेंगे। मकर कुंभ मीन राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा तथा कर्क वृश्चिक राशि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/337373/haldwani-saturns-half-and-a-half-and-half-and-a-half-zodiac-signs-know-how-it"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/why-shani-dev-walk-slow.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>शनि देव को ग्रहों में न्यायाधीश की संज्ञा दी गई है, और हर कोई अपनी राशि में शनि देव की स्थिति को लेकर जिज्ञासा से भरा रहता है। वहीं इस वर्ष शनि देव किस पर होंगे मेहरबान और कैसे किया जा सकता है इन्हें खुश... बता रहीं हैं हल्द्वानी निवासी ज्योतिषाचार्या मंजू जोशी।</p>
<p>तो चलिए साझा करत हैं आपसे पूरी जानकारी,  तो सबसे पहले आपको बता दें कि कि इस वर्ष 2023 में शनि देव कुंभ राशि में भ्रमण करेंगे। मकर कुंभ मीन राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा तथा कर्क वृश्चिक राशि के जातकों पर शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा। </p>
<p>मीन राशि में शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण चल रहा है इसमें मानसिक तनाव अधिक रहता है। कुंभ राशि में साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है जिसे अत्यधिक कष्टकारी माना गया है एवं मकर राशि के जातकों पर शनि के अंतिम चरण का प्रभाव रहेगा जो कि सामान्य रहता है केवल चोट लगने की संभावना रहती है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है एवं कर्मफल दाता शनि भी कहा गया है। शनि की साढ़ेसाती से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। सत्कर्म करते हुए जीवन यापन करें।  जिस प्रकार न्यायाधीश के समक्ष हाथ नहीं जोड़ें जाते ठीक उसी प्रकार शनिदेव के सम्मुख भी हाथ पीछे की ओर बांधकर नतमस्तक होकर प्रणाम करने का विधान है।</p>
<p><strong>शनि शांति के उपाय</strong><br />सर्वप्रथम जैसे हमने बताया कि शनि को कर्म फल दाता कहा गया है इसलिए कोई भी अनुचित कार्य करने से बचें। शनि की ढैया एवं साढ़ेसाती के नकारात्मक प्रभाव को कम करने हेतु हर शनिवार को शनि देव मंदिर में सरसों के तेल से दीपक प्रज्वलित करें। पीपल के वृक्ष के मूल पर तिल डालकर जल अर्पित करें एवं प्रदोष काल में दीपदान करें। बंदरों को गुड़ व चना खिलाएं। हनुमान चालीसा का प्रतिदिन सायंकाल पाठ करें। मंगलवार एवं शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करें। काले घोड़े की नाल या नाव के कांटे की अंगूठी मध्यमा उंगली में शनिवार को धारण करें। जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न वस्त्र एवं सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा दें।शनिदेव के सम्मुख सम्पूर्ण भाव से जाने-अनजाने में किए गए दुष्कर्म हेतु क्षमा प्रार्थना करें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/337373/haldwani-saturns-half-and-a-half-and-half-and-a-half-zodiac-signs-know-how-it</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/337373/haldwani-saturns-half-and-a-half-and-half-and-a-half-zodiac-signs-know-how-it</guid>
                <pubDate>Fri, 27 Jan 2023 12:49:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2023-01/why-shani-dev-walk-slow.jpg"                         length="95371"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Udham Singh Nagar: तंत्र- मंत्र के बहाने महिला से दुष्कर्म करने वाला आरोपी तांत्रिक गिरफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>उधम सिंह नगर, अमृत विचार।</strong> उत्तराखंड के उधम सिंह नगर थाने में तंत्र मंत्र द्वारा इलाज के बहाने महिला से दुष्कर्म करने वाले तांत्रिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामला जसपुर कोतवाली का है। महिला ने थाने में आरोपी तांत्रिक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। महिला ने पुलिस को बताया कि कुछ दिनों से वह पारिवारिक कलह के कारण काफी परेशान चल रही थी। उसे किसी ने तांत्रिक के बारे में जानकारी दी।</p>
<h5>महिला का आरोप- तंत्र मंत्र से हल कर देगा समस्या</h5>
<p>महिला ने तांत्रिक से संपर्क किया ताकि उसकी समस्या का समाधान हो सके। महिला का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/335782/udham-singh-nagar--tantrik-arrested-for-raping-a-woman-on-the-pretext-of-tantra-mantra"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/house-no.-1971-samta-ashram-gali,-rampur-road-haldwani,-distt.-nainital-(10).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उधम सिंह नगर, अमृत विचार।</strong> उत्तराखंड के उधम सिंह नगर थाने में तंत्र मंत्र द्वारा इलाज के बहाने महिला से दुष्कर्म करने वाले तांत्रिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामला जसपुर कोतवाली का है। महिला ने थाने में आरोपी तांत्रिक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। महिला ने पुलिस को बताया कि कुछ दिनों से वह पारिवारिक कलह के कारण काफी परेशान चल रही थी। उसे किसी ने तांत्रिक के बारे में जानकारी दी।</p>
<h5>महिला का आरोप- तंत्र मंत्र से हल कर देगा समस्या</h5>
<p>महिला ने तांत्रिक से संपर्क किया ताकि उसकी समस्या का समाधान हो सके। महिला का आरोप है कि तांत्रिक ने उसे भरोसा दिलाया था कि वह उसकी समस्या तंत्र मंत्र से हल कर देगा। फिर उसने महिला को अपने पास बुलाया। तांत्रिक के बताए पते पर महिला भी जा पहुंची। वहां मौका पाकर तांत्रिक ने उसके साथ दुष्कर्म किया।</p>
<h5>दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया</h5>
<p>इसके बाद जब पीड़िता ने घर पहुंचकर इस बारे में परिवार वालों को बताया तो गुस्से में सभी तांत्रिक के पास पहुंचे। लेकिन वह मौके से फरार था। महिला ने जयपुर थाने में जाकर तांत्रिक के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज करके फरार तांत्रिक की तलाश शुरू कर दी। इसके बाद जल्द ही पुलिस ने तांत्रिक को ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया। </p>
<h5>तलाश में लगी थीं पुलिस की कई टीमें</h5>
<p>उधर, काशीपुर के एसपी अभय प्रताप सिंह ने बताया कि महिला ने तांत्रिक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। हमने तांत्रिक की तलाश में कई पुलिस टीमों को लगाया था। जल्द ही तांत्रिक को ढूंढ निकाला गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है, फिलहाल उससे पूछताछ जारी है।</p>
<div class="pbwidget w-l543 postdisplay_title h1">
<div class="pbwidget-body">
<h6 class="tag_h1 node_title"><span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/335772/joshimath-crisis--blast-in-joshimath-disaster--minister-satpal-called-the-cm-and-asked-him-to-stop-the-work#gsc.tab=0">यह भी पढ़ें- Joshimath Crisis: जोशीमठ आपदा में ब्लास्ट, मंत्री सतपाल ने सीएम को कॉल करके काम रुकवाने को कहा - Amrit Vichar</a></span></h6>
</div>
</div>
<div class="r-zbr7 post-meta pt-1pb-1 pl-2 pr-2">
<div>
<div class="row">
<div class="d-md-block col-md-6">
<div>
<div class="pbwidget w-ckx7 postdisplay_author"> </div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>उधम सिंह नगर</category>
                                            <category>Crime</category>
                                            <category>Jyotish</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/335782/udham-singh-nagar--tantrik-arrested-for-raping-a-woman-on-the-pretext-of-tantra-mantra</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/335782/udham-singh-nagar--tantrik-arrested-for-raping-a-woman-on-the-pretext-of-tantra-mantra</guid>
                <pubDate>Sat, 21 Jan 2023 16:56:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2023-01/house-no.-1971-samta-ashram-gali%2C-rampur-road-haldwani%2C-distt.-nainital-%2810%29.jpg"                         length="149661"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        