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                <title>Trending News - Amrit Vichar</title>
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                            <item>
                <title> UP News :  यूपी के 8 शहरों के युवाओं के लिए बड़ी पहल, लखनऊ से बरेली-वाराणसी तक खुलेगा रोजगार का नया रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[IIA और UPSDM के बीच 4 बड़े समझौतों से बदलेगा कौशल विकास का मॉडलउत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को आइआइए के औद्योगिक नेटवर्क से जोड़ा जाए।आइटीआइ और कौशल विकास मिशन के युवाओं को अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की तैयारी, गांव-कस्बों के युवाओं के लिए भी बढ़ेंगे मौके]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590789/itis-and-industries-partnership-in-uttar-pradesh--new-employment-opportunities-for-youth"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/76.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;"> </span></strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong><span><strong> </strong> </span>उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए नौकरी और कौशल विकास को लेकर एक अहम पहल हुई है। खास बात यह है कि इसका पहला चरण सीधे लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमेठी, वाराणसी, एनसीआर और बरेली से शुरू होगा। यहां कौशल प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को उद्योगों से जोड़ने की तैयारी है। मतलब साफ है। युवा प्रशिक्षण लेगा, उद्योगों का अनुभव हासिल करेगा, अप्रेंटिसशिप करेगा और फिर रोजगार के लिए तैयार होगा। इसी कड़ी को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आइआइए) के बीच समझौता हुआ है। यह समझौता आइआइए की 218वीं केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में हुए चार महत्वपूर्ण समझौतों में से एक है। बैठक लखनऊ स्थित आइआइए भवन में हुई, जिसमें 100 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।</span></p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">सबसे पहले इन 8 जगहों के युवाओं को जोड़ने की तैयारी</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">यूपीएसडीएम और आइआइए के बीच हुए समझौते के तहत पहले चरण में लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमेठी, वाराणसी, एनसीआर और बरेली को शामिल किया गया है। यहां यूपीएसडीएम से प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को आइआइए के औद्योगिक नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। उन्हें अप्रेंटिसशिप, रोजगार, उद्योगों में काम का अनुभव, रोजगार मेले और व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। यानी जिस युवा के पास हुनर है, उसे उद्योगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी। </span></p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">आइटीआइ के युवाओं के लिए भी खुलेंगे रास्ते</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग और आइआइए के बीच भी समझौता हुआ। इसके तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आइटीआइ) को आइआइए के चैप्टर नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप, रोजगार, उद्योग भ्रमण, व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञों के व्याख्यान और मार्गदर्शन के अवसर मिलेंगे। आइआइए के रोजगार सेवा पोर्टल के माध्यम से आइटीआइ से प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को सदस्य उद्योगों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने की भी व्यवस्था की जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;"> </span><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">नौकरी ही नहीं,अपना काम शुरू करने का रास्ता भी</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">बैठक में रोजगार के साथ युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। तीसरे समझौते के तहत नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप नेटवर्क और वाधवानी फाउंडेशन के एक्सेलेरेट कार्यक्रम के साथ आइआइए का सहयोग आगे बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य उद्यमिता प्रशिक्षण और नए कारोबार को प्रोत्साहित करना है। वहीं, एएफपीओ डेवलपमेंट काउंसिल और आइआइए के बीच हुए चौथे समझौते के तहत उद्यमिता, ग्रामीण औद्योगिकीकरण, निवेश, नवाचार, किसान उत्पादक संगठनों, कौशल विकास, रोजगार और एमएसएमई विकास को बढ़ावा देने पर काम होगा। इसमें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान के क्रियान्वयन में भी सहयोग किया जाएगा।</span></p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;"> </span><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">प्रमुख सचिव हरिओम बोले- उद्योगों की जरूरत के मुताबिक हो प्रशिक्षण</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;"> </span><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">मुख्य अतिथि हरिओम, आइएएस, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में कौशल विकास के लिए बजट, प्रशिक्षण सुविधाओं और संस्थागत ढांचे को लगातार मजबूत किया है। अब प्राथमिकता कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़कर युवाओं के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रोजगार सुनिश्चित करना है। उन्होंने एमएसएमई से आइटीआइ विद्यार्थियों को इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप के अवसर देने का आह्वान किया। साथ ही प्रशिक्षण के वित्तीय पक्ष में आवश्यक सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों की साझेदारी युवाओं को वास्तविक रोजगार से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।</span></p>
<blockquote class="format2">
<blockquote class="format1">उत्तर प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाने और उन्हें रोजगार व अप्रेंटिसशिप के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। इसके तहत युवाओं को उद्योगों से सीधे जोड़ने के साथ अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। समझौते के तहत रीजनल DPMU और IIA चैप्टर्स के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। युवाओं के लिए मेंटोरशिप, गेस्ट लेक्चर और सॉफ्ट स्किल्स से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे तकनीकी प्रशिक्षण के साथ उद्योगों की कार्यप्रणाली और रोजगार की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें। इस पहल की शुरुआत पहले चरण में लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमेठी, वाराणसी, एनसीआर और बरेली से की जाएगी।     </blockquote>
<blockquote class="format1">      <strong>मिशन निदेशक पुलकित खरे , यूपीएसडीएम </strong></blockquote>
</blockquote>
<p> </p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">हुनर और उद्योग का जुड़ना जरूरी : आइआइए अध्यक्ष</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">आइआइए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने उत्तर प्रदेश सरकार की कौशल विकास पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास एमएसएमई को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने और प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हैं। </span><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका है। आइआइए सरकार के साथ मिलकर कौशल विकास को उद्योगों की मांग, अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप और रोजगार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। दिनेश गोयल ने चारों समझौतों को सरकार, उद्योग और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की साझेदारी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का व्यावहारिक रोडमैप बताया।</span></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/75.jpg" alt="75" width="1280" height="720"></img>
आइआइए के अनेक पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सचिव, उपाध्यक्ष, चैप्टर चेयरमैन और वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया। अंत में आइआइए महिला शाखा की चेयरपर्सन आनंदी अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। 

<p> </p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">यूपी के युवाओं के लिए इस पहल की सबसे बड़ी बात यह है कि कौशल प्रशिक्षण को सीधे उद्योग और रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पहले चरण में शामिल आठ क्षेत्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद युवाओं को इस व्यवस्था से जोड़ने का आधार बन सकते हैं।</span></p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;"> </span><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">बैठक में कौन-कौन मौजूद रहा</span></strong></h4>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:'Nirmala Text', sans-serif;">बैठक में मुख्य अतिथि हरिओम, आइएएस, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार और पुलकित खरे, आइएएस, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मौजूद रहे। आइआइए की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल, महासचिव दीपक बजाज, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अवधेश के. अग्रवाल और इमीडिएट पास्ट प्रेसिडेंट नीरज सिंघल उपस्थित रहे। इसके अलावा आइआइए के अनेक पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सचिव, उपाध्यक्ष, चैप्टर चेयरमैन और वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया। अंत में आइआइए महिला शाखा की चेयरपर्सन आनंदी अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
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                                            <category>वाराणसी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 21:15:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anuj Sharma]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूपी विधानसभा चुनाव 2027: 2.8 करोड़ Gen-Z वोटर तय करेंगे सत्ता का गणित? भाजपा-सपा-बसपा की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[18 से 29 साल के करीब 2.8 करोड़ युवा मतदाता कुल वोटरों का लगभग 21% बताए जा रहे; रोजगार, शिक्षा, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बन सकते हैं बड़े चुनावी मुद्दे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590770/up-election-2027-gen-z-voters-bjp-sp-bsp-youth-vote"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/_up-assembly-elections-2027.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार: </strong>उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरणों के साथ जेन-जी मतदाताओं की भूमिका भी अहम रहने वाली है। 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2.8 करोड़ मतदाता प्रदेश में हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 21 प्रतिशत बताए जा रहे हैं। ऐसे में इस वर्ग के वोट में मामूली बदलाव भी करीबी मुकाबले वाली सीटों पर नतीजे बदल सकता है। भाजपा, सपा और बसपा तीनों ही दल रोजगार, शिक्षा, कौशल और डिजिटल संवाद के जरिए इस युवा वर्ग को साधने की तैयारी में हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के सामने सरकार के काम और युवा नीति को चुनावी मुद्दे में बदलने की चुनौती है। प्रस्तावित युवा नीति में 16 से 35 वर्ष के युवाओं की आकांक्षाओं को शामिल करने, राज्य युवा आयोग, जिलों में यूथ इन्क्यूबेशन सेंटर और छात्रवृत्ति व रोजगार से जुड़े मंच की योजना है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अभ्युदय जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार पर भी जोर है। हालांकि युवाओं के बीच इन घोषणाओं से ज्यादा रोजगार, भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पेपर लीक जैसे मुद्दों का असर अहम रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">सपा रोजगार, बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी स्कूल-कॉलेज के युवाओं के बीच छोटे समूहों में संवाद और डिजिटल माध्यमों से संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है। अखिलेश यादव के युवा चेहरे के साथ पार्टी तकनीक और लैपटॉप से जुड़े अपने पुराने नैरेटिव को रोजगार, कौशल और सस्ती शिक्षा से जोड़ने की कोशिश कर सकती है। चुनौती यह होगी कि जेन-जी को केवल पारंपरिक सामाजिक समीकरणों के विस्तार के बजाय उसकी अलग आकांक्षाओं से जोड़ा जाए।</span></p>
<p style="text-align:justify;">बसपा भी युवा राजनीति को नए सिरे से धार देने की कोशिश में है। आकाश आनंद को अधिक सक्रिय कर पार्टी रोजगार, शिक्षा, पेपर लीक, महिला सुरक्षा और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे उठा रही है। पार्टी के लिए चुनौती युवा चेहरे को अपने पारंपरिक सामाजिक आधार और बूथ संगठन से जोड़ने की है। ऐसा हुआ तो कुछ सीटों पर बसपा मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर भाजपा और सपा दोनों का गणित प्रभावित कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;">जेन-जी पूरी तरह जातीय राजनीति से बाहर हो जाएगी, यह मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन रोजगार, निष्पक्ष परीक्षा, शिक्षा की लागत, कौशल के बाद अवसर और सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे मुद्दे इस वर्ग में साझा चिंता बन रहे हैं। यही कारण है कि 2027 में सवाल केवल यह नहीं होगा कि युवा वोट कितना है, बल्कि यह होगा कि उसमें कितना हिस्सा स्थिर और कितना स्विंग करता है।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जेन-जी पर तीनों दलों की नजर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>भाजपा : </strong>युवा नीति, रोजगार, कौशल और सरकार के काम पर जोर।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सपा : </strong>बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा और डिजिटल संवाद।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>बसपा :</strong> आकाश आनंद के जरिए रोजगार, सम्मान और प्रतिनिधित्व का मुद्दा।</span></p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पांच फीसदी वोट का असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और कई सीटों पर जीत-हार का अंतर कम रहा है। ऐसे में जेन-जी के वोट का छोटा हिस्सा भी एक दल से दूसरे दल की ओर खिसकने पर करीबी सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। 2027 में युवा मतदाता किसी एक दल का स्वाभाविक वोट बैंक बनने के बजाय तीनों प्रमुख दलों के बीच नया चुनावी मैदान बन सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">यह भी पढ़ेंः </span><a href="https://www.amritvichar.com/article/590768/up-women-scheme-50000-yogi-government-akhilesh-yadav-up-election-2027"><span class="t-red">यूपी में महिलाओं के खाते में आएंगे 50 हजार? </span>चुनाव से पहले योगी सरकार की बड़ी योजना पर मंथन, अखिलेश ने किया पलटवार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Election</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 17:44:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूपी में महिलाओं के खाते में आएंगे 50 हजार? चुनाव से पहले योगी सरकार की बड़ी योजना पर मंथन, अखिलेश ने किया पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रस्तावित योजना में 50 लाख महिलाओं को जोड़ने की चर्चा, पहली किस्त में ₹20 हजार देने की बात; अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘एक और जुमला’ और ₹40 हजार से शुरुआत का किया ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590768/up-women-scheme-50000-yogi-government-akhilesh-yadav-up-election-2027"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/yogi--akhilesh.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले महिला वोटरों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार महिलाओं के लिए एक बड़ी आर्थिक सहायता योजना शुरू करने पर मंथन कर रही है। हालांकि, योजना को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित योजना के तहत 50 लाख महिलाओं को कुल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का विचार है। चर्चा है कि चुनाव से पहले इसकी पहली किस्त के तौर पर 20 हजार रुपये महिलाओं के बैंक खातों में भेजे जा सकते हैं। इसके बाद सरकार बनने पर 10-10 हजार रुपये की तीन और किस्तें दिए जाने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव से पहले पहली किस्त देने की चर्चा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि सरकार के स्तर पर इस योजना को लेकर मंथन शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश में अगले साल जनवरी-फरवरी के आसपास विधानसभा चुनाव होने की संभावना है और इसी से पहले योजना को लागू करने पर विचार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रस्ताव की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भेजी गई थी। बीजेपी की बिहार में बड़ी जीत के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं को केंद्र में रखकर ऐसी योजना की चर्चा ने सियासी गर्मी बढ़ा दी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अखिलेश यादव ने साधा योगी सरकार पर निशाना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित योजना को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसे ‘बीजेपी का एक और जुमला’ बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार के पास चुनाव जीतने के लिए पैसे के अलावा कुछ नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में महिलाओं को आर्थिक मदद देने की घोषणाएं की गईं, वहां बाद में भुगतान को लेकर आनाकानी हुई और कुछ मामलों में रकम वापस लेने की कार्रवाई भी की गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अखिलेश का जवाबी दांव, बोले- 40 हजार से करेंगे शुरुआत</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए अपनी ओर से भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा, “हम 40000 से करेंगे शुरुआत, जिसमें ‘बढ़ोतरी’ होगी हर साल!”</p>
<p style="text-align:justify;">इस बयान के जरिए सपा अध्यक्ष ने संकेत दिया कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो महिलाओं के लिए 40 हजार रुपये से आर्थिक सहायता की शुरुआत की जाएगी और हर साल इसमें बढ़ोतरी की जाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रक्षाबंधन से पहले योगी सरकार का महिलाओं पर फोकस</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं को लेकर यह सियासी हलचल रक्षाबंधन से पहले और तेज हुई है। इससे पहले योगी सरकार ने प्रदेश में बहनों की सुविधा के लिए छह दिनों तक अतिरिक्त बसें चलाने का निर्देश दिया था। ऐसे में आर्थिक सहायता की प्रस्तावित योजना की चर्चा को भी चुनावी रणनीति के नजरिए से देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, 50 लाख महिलाओं को 50 हजार देने वाली प्रस्तावित योजना को लेकर अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590766/parliament-monsoon-session-2026-lok-sabha-adjourned-amid-uproar"><span class="t-red">संसद का मानसून सत्र हंगामे के बीच खत्म, </span>तय समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई लोकसभा</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Election</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 17:34:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद का मानसून सत्र हंगामे के बीच खत्म, तय समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई लोकसभा</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा की कार्यवाही करीब 11 बजे ही स्थगित; आखिरी दिन पीएम मोदी और अमित शाह भी सदन में पहुंचे, टी कार्यक्रम से कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने बनाई दूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590766/parliament-monsoon-session-2026-lok-sabha-adjourned-amid-uproar"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/lok-sabha.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार को तय कार्यक्रम के मुताबिक समाप्त होनी थी, लेकिन विपक्षी दलों के जोरदार विरोध और नारेबाजी के बीच सदन को निर्धारित समय से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी लोकसभा पहुंचे। 20 जुलाई के बाद पहली बार अमित शाह सदन में नजर आए।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। कुछ देर बाद वंदे मातरम के दौरान सदन में माहौल शांत हुआ, लेकिन इसके तुरंत बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>स्पीकर के टी कार्यक्रम से भी विपक्ष ने बनाई दूरी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सत्र समाप्त होने के बाद संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से आयोजित टी कार्यक्रम में कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के कई विपक्षी दल शामिल नहीं हुए। आम तौर पर सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पूरे सत्र में छाया रहा विरोध और नारेबाजी का मुद्दा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मानसून सत्र के दौरान ज्यादातर समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। विपक्षी दल दिल्ली में हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते रहे। इसके अलावा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा की मांग उठाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी सांसदों की ओर से ‘चंदा किसने लूटा’ और ‘अमित शाह सदन में आओ’ जैसे नारे लगाए गए। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ एनडीए के सांसदों ने झारखंड में हुए लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा और ‘राहुल गांधी जवाब दो’ जैसे नारे लगाए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अमित शाह ने चर्चा के लिए जताई थी तैयारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सत्र के अंतिम दिनों में सरकार की ओर से विपक्ष के उठाए मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई थी। बुधवार को अमित शाह ने भी स्पष्ट किया था कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर चर्चा के लिए समय तय करने का आग्रह किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित शाह ने विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया था। वहीं विपक्ष लगातार सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांगता रहा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सदन के बाहर भी आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और विपक्ष</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सत्र के आखिरी दिनों में संसद परिसर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच नारेबाजी देखने को मिली। एनडीए और विपक्षी सांसद आमने-सामने आ गए। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे लेकर कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि सत्ताधारी दल के नेता ही प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590710/mayawati-fcra-amendment-bill-opposition-gen-z-vote-jpc"><span class="t-red">FCRA बिल पर मायावती का विपक्ष पर बड़ा हमला, </span>बोलीं- ‘Gen-Z वोट के आगे इन्हें कुछ नहीं दिख रहा’</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 17:22:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RailOne ने मचाया धमाल! 4.76 करोड़ डाउनलोड के पार, रोज बुक हो रहे 10 लाख रेल टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[एक ही ऐप में रिजर्वेशन, अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट से लेकर PNR, ट्रेन स्टेटस और फूड ऑर्डर तक की सुविधा; रेलवे के मुताबिक 2 अगस्त 2026 तक रोजाना 10 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590743/railone-app-4-76-crore-downloads-daily-10-lakh-ticket-booking"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/railone.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय रेलवे की डिजिटल सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने वाला RailOne ऐप तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल जुलाई में लॉन्च हुए इस इंटीग्रेटेड रेलवे ऐप ने डाउनलोड के मामले में 4.76 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। रेलवे के मुताबिक, 2 अगस्त 2026 तक RailOne के जरिए रोजाना करीब 10 लाख ऑनलाइन टिकट बुक किए जा रहे थे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रोजाना 10 लाख टिकटों की बुकिंग</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रेल मंत्रालय की ओर से 12 अगस्त को जारी जानकारी के अनुसार, RailOne के जरिए प्रतिदिन बुक होने वाले टिकटों में करीब 2.9 लाख रिजर्व्ड टिकट और 7.24 लाख अनरिजर्व्ड टिकट शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐप की खासियत यह है कि यात्रियों को रेलवे की अलग-अलग सेवाओं के लिए कई ऐप का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें सिंगल साइन-ऑन सुविधा दी गई है, जिससे कई रेलवे सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म से एक्सेस किया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रिजर्वेशन से प्लेटफॉर्म टिकट तक, एक ऐप में कई सुविधाएं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">RailOne के जरिए यात्री ऑनलाइन रिजर्व्ड टिकट, UTS अनरिजर्व्ड टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा ऐप में PNR स्टेटस, ट्रेन रनिंग स्टेटस, RailMadad और यात्रा के दौरान फूड ऑर्डर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यात्री इसमें Rail Wallet भी जोड़ सकते हैं। इससे टिकट बुकिंग के दौरान भुगतान की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने में मदद मिलती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ऑनलाइन टिकट बुकिंग का बढ़ा चलन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन रिजर्व टिकट बुकिंग में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। 2013-14 में करीब 49 फीसदी रिजर्व टिकट ऑनलाइन बुक होते थे, जबकि अब यह आंकड़ा करीब 89 फीसदी पहुंच गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनरिजर्व्ड टिकटों की बुकिंग में भी मोबाइल ऐप का इस्तेमाल बढ़ा है। रेलवे के अनुसार, वर्तमान में करीब 39 फीसदी अनरिजर्व्ड टिकट ऐप के जरिए बुक किए जा रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>RailOne के 4.76 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रेल मंत्रालय के मुताबिक, RailOne ऐप को अब तक 4.76 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। लॉन्च के करीब एक साल के भीतर यह आंकड़ा ऐप की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नई IRCTC वेबसाइट भी जल्द होगी लॉन्च</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रेलवे टिकट बुकिंग को और सुविधाजनक बनाने की दिशा में नई IRCTC वेबसाइट का बीटा वर्जन पिछले महीने लॉन्च किया गया है। इसका फाइनल और स्टेबल वर्जन जल्द जारी किए जाने की तैयारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई वेबसाइट के यूजर इंटरफेस में बदलाव किया गया है। साथ ही रेलवे अपनी बैंडविड्थ बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, ताकि पीक टाइम में एक साथ बड़ी संख्या में यात्री टिकट बुक कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590439/-epfo-alert-fake-link-uan-aadhaar-bank-account-safety-tips"><span class="t-red">EPFO Alert: </span>एक फर्जी लिंक खाली कर सकता है बैंक अकाउंट! UAN-Aadhaar बचाने के लिए अपनाएं ये 6 तरीके</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:30:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लाल किला हमले के लिए AQIS जिम्मेदार, दक्षिण एशिया में आतंकी खतरे पर अलर्ट, UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी निगरानी टीम की नई रिपोर्ट में नवंबर 2025 के दिल्ली लाल किला हमले के लिए अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में AQIS के नेटवर्क, ISIS-K और दक्षिण एशिया में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों पर भी चिंता जताई गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590720/un-report-aqis-responsible-red-fort-delhi-terror-attack-2025"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/red-fort-un-report.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले इलाके में हुए आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में बड़ा दावा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति को सौंपी गई विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी दल की 38वीं रिपोर्ट के मुताबिक, अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) को लाल किले पर हुए हमले के लिए आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों और उसके क्षेत्रीय नेटवर्क को लेकर भी चिंता जताई गई है। सुरक्षा परिषद की संबंधित निगरानी व्यवस्था का काम अल-कायदा और ISIS से जुड़े समूहों से पैदा होने वाले बदलते खतरों का आकलन करना है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>लाल किले के पास कार में हुआ था विस्फोट</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले इलाके में एक भीषण विस्फोट हुआ था। यह धमाका लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास ट्रैफिक सिग्नल पर धीमी गति से चल रही एक कार में हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस हमले में करीब 15 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अब संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम की रिपोर्ट में इस हमले के लिए AQIS को जिम्मेदार ठहराए जाने की बात सामने आई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>AQIS ने बनाया साजो-सामान और वित्तीय नेटवर्क</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, AQIS ने खुद को एक बिखरे हुए समूह से क्षेत्रीय आतंकी संगठन के रूप में विकसित करना जारी रखा है। संगठन ने अपने अभियानों के लिए साजो-सामान और वित्तीय नेटवर्क स्थापित किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि AQIS बड़े समूहों के बजाय छोटे और अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय विकेंद्रीकृत इकाइयों के रूप में काम करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश में भी AQIS की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठन वहां की परिस्थितियों का फायदा उठाकर अपने समूह स्थापित करने की कोशिश कर सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ISIS-K की गतिविधियों पर भी नजर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत-खुरासान (ISIL-K) की गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की सूची में ISIL-K को एक अलग प्रतिबंधित इकाई के रूप में दर्ज किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, अल-कायदा और ISIS से जुड़े समूह लंबे समय से रासायनिक और जैविक हथियारों में रुचि दिखाते रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इनसे जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को पार करने में उन्हें अब तक सफलता नहीं मिली है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव पर UN की चिंता</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा-पार हमलों के कारण दक्षिण एशिया में बने क्षेत्रीय तनाव का भी जिक्र किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने आशंका जताई है कि संघर्ष की परिस्थितियां आतंकी संगठनों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती हैं और इससे क्षेत्र के सामने अतिरिक्त सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान से पैदा होने वाला आतंकी खतरा लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है। वहां सक्रिय कई आतंकवादी संगठन पड़ोसी देशों और मध्य एशियाई क्षेत्र के लिए लगातार सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत समेत क्षेत्रीय देशों के लिए क्यों अहम है रिपोर्ट?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">AQIS और ISIL-K जैसे संगठनों की गतिविधियों पर संयुक्त राष्ट्र की निगरानी दक्षिण एशिया में आतंकवाद के बदलते स्वरूप को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र की 1267 व्यवस्था के तहत प्रतिबंधित व्यक्तियों और संगठनों पर लक्षित प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। मौजूदा सूची में सैकड़ों व्यक्ति और संस्थाएं शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590527/india-us-navy-eod-exercise-kochi-2026-joint-training"><span class="t-red">India-US Navy Exercise:</span> कोच्चि में भारतीय-अमेरिकी नौसेना का बड़ा संयुक्त अभ्यास, EOD टीमों की बढ़ेगी ताकत</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 12:15:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सतरिख के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में 24 छात्राएं बीमार! कई हुईं बेहोश, अस्पताल में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[बाराबंकी के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्राओं को सांस लेने में परेशानी और घबराहट की शिकायत हुई। देखते ही देखते करीब 24 छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई और कई बेहोश हो गईं। स्कूल स्टाफ ने सभी को अस्पताल पहुंचाया, कारण अभी स्पष्ट नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590719/barabanki-satrikh-girls-inter-college-24-students-fell-ill-many-unconscious"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/barabanki-news-(2).png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>बाराबंकीः</strong> सतरिख स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पढ़ाई के दौरान करीब दो दर्जन से अधिक छात्राओं की अचानक तबीयत खराब हो गई। कई छात्राओं ने सांस लेने में परेशानी और घबराहट की शिकायत की। इसके बाद कुछ छात्राएं बेहोश हो गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्राओं की हालत बिगड़ते ही स्कूल स्टाफ ने तत्काल मदद के लिए एंबुलेंस बुलाई। इसके अलावा अन्य वाहनों की सहायता से भी छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही छात्राओं के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अस्पताल में छात्राओं की जांच और उपचार जारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल पहुंची छात्राओं की चिकित्सकों ने जांच शुरू की। मेडिकल टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आवश्यक उपचार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ने का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। सांस लेने में परेशानी और घबराहट जैसे लक्षणों को देखते हुए चिकित्सक आवश्यक जांच कर रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को दी गई सूचना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी दी गई है। छात्राओं की तबीयत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर एक साथ इतनी छात्राओं की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल स्कूल और अस्पताल प्रशासन की प्राथमिकता छात्राओं को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a class="post-title-lg" href="https://www.amritvichar.com/article/590715/hardoi-shahabad-woman-threat-marriage-stopped-court-order-fir"><span class="t-red">Hardoi news:</span> शादी रुकवाई दी, अब सांसे रोक देने की दे रहा धमकी! कोर्ट की सुनवाई के बाद पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>बाराबंकी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 11:56:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SEBI नियमों की अनदेखी, फिर भी नहीं कटी रेटिंग! CAG रिपोर्ट में CPSE पर बड़ा सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कैग की कॉरपोरेट गवर्नेंस समीक्षा में सामने आया कि SEBI से जुड़े नियमों का अनुपालन नहीं करने वाले कई केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के MoU स्कोर में प्रशासनिक मंत्रालयों और DPE ने अंक नहीं काटे। रिपोर्ट में बोर्ड में स्वतंत्र और महिला निदेशकों की कमी भी सामने आई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590716/cag-report-cpse-sebi-compliance-mou-score-dpe-corporate-governance"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/cag--report.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) के कॉरपोरेट कामकाज को लेकर महत्वपूर्ण कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासनिक मंत्रालयों और सार्वजनिक उद्यम विभाग (Department of Public Enterprises) ने कॉरपोरेट मामलों से संबंधित भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों का अनुपालन नहीं होने के बावजूद कई CPSE (Central Public Sector Undertakings) के MoU स्कोर में अंक नहीं काटे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैग ने कॉरपोरेट गवर्नेंस की समीक्षा के दौरान 65 ऐसे CPSE को शामिल किया, जिनके शेयर या बॉन्ड शेयर बाजारों में सूचीबद्ध थे। इसके अलावा 36 CPSE, जिनमें चार सांविधिक निगम भी शामिल हैं, के बॉन्ड या ऋणपत्र 31 मार्च 2024 तक शेयर बाजारों में सूचीबद्ध थे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>49 CPSE में स्वतंत्र निदेशकों की कमी</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 के दौरान 49 CPSE में निदेशक मंडल में आवश्यक संख्या में स्वतंत्र निदेशक मौजूद नहीं थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सात CPSE में पूरे वित्त वर्ष या उसके कुछ हिस्से के दौरान गैर-कार्यकारी निदेशकों की संख्या बोर्ड की कुल सदस्य संख्या के 50 प्रतिशत से कम रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे संबंधित कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों के अनुपालन पर सवाल उठे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सात CPSE में एक भी महिला निदेशक नहीं</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैग की समीक्षा में बोर्ड में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी कमी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, सात CPSE के निदेशक मंडल में कोई महिला निदेशक नहीं थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं, शीर्ष 1000 सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल 16 CPSE में 2023-24 के पूरे या कुछ हिस्से के दौरान कोई महिला स्वतंत्र निदेशक भी नहीं थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>65 सूचीबद्ध CPSE की हुई समीक्षा</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैग की कॉरपोरेट कामकाज संबंधी समीक्षा में कुल 65 ऐसे CPSE शामिल किए गए, जिनके शेयर या बॉन्ड शेयर बाजारों में सूचीबद्ध थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त 36 CPSE के बॉन्ड या ऋणपत्र भी 31 मार्च 2024 तक शेयर बाजारों में सूचीबद्ध थे। इन संस्थानों में चार सांविधिक निगम शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में सूचीबद्ध CPSE में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियमों के अनुपालन की स्थिति का परीक्षण किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या होता है MoU स्कोर?</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">MoU स्कोर सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) की ओर से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्रदर्शन मूल्यांकन मानक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैग की रिपोर्ट में इस बात पर सवाल उठाया गया है कि SEBI से जुड़े कॉरपोरेट गवर्नेंस नियमों के अनुपालन में कमियां होने के बावजूद संबंधित CPSE के MoU स्कोर में अंक नहीं काटे गए।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में सामने आए ये आंकड़े सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में बोर्ड संरचना, स्वतंत्र निदेशकों और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े अनुपालन पर ध्यान केंद्रित करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590705/nhai-new-ambulance-rules-fine-highway-accident-response-time"><span class="t-red">NHAI New Rules :</span> हाईवे पर एंबुलेंस की देरी पड़ेगी भारी, हर मिनट पर 5 हजार जुर्माना; जानें नए नियम</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 11:22:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी को एके शर्मा की चुनौती- हिंदी में 'विश्वविद्यालय' लिखकर दिखाइए, फिर पप्पू कहना छोड़ दूंगा</title>
                                    <description><![CDATA[नोएडा में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने राहुल गांधी पर छात्रों को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने IIT और IIM का फुल फॉर्म हिंदी में लिखने और खेत में मक्के-गन्ने के बीच अंतर बताने की चुनौती दी। साथ ही यूपी में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर भी बात की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590712/ak-sharma-rahul-gandhi-hindi-challenge-pappu-smart-meter-up"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/ak-sharma.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल डेस्क:</strong> उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें हिंदी में ‘University’ लिखकर दिखाने की चुनौती दी। शर्मा ने कहा कि अगर राहुल गांधी ऐसा कर देते हैं तो वह उन्हें ‘पप्पू’ कहना बंद कर देंगे। नोएडा में आयोजित ‘इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो’ और ‘बायोएनर्जी और टेक्नोलॉजी पर तीसरे इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन’ में पहुंचे शर्मा ने यह बयान दिया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी सामने आया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राहुल गांधी पर छात्रों को भ्रमित करने का आरोप</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एके शर्मा ने राहुल गांधी पर छात्रों को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह IIT और IIM का फुल फॉर्म हिंदी में भी नहीं बता या लिख सकते। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वह इनका पूरा नाम हिंदी में लिखकर बताएं, अंग्रेजी या इटैलियन में नहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शर्मा ने कहा कि अगर राहुल गांधी यह चुनौती पूरी कर देते हैं तो वह उन्हें ‘पप्पू’ कहना बंद कर देंगे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मक्के और गन्ने के खेत को लेकर भी चुनौती</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऊर्जा मंत्री ने राहुल गांधी को एक और चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें किसी खेत में ले जाकर मक्के और गन्ने के खेत के बीच अंतर बताने को कहा जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शर्मा ने दावा किया कि अगर राहुल गांधी ऐसा कर लेते हैं तो वह उनके कहे अनुसार करने को तैयार हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>स्मार्ट मीटर को लेकर क्या बोले एके शर्मा?</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी के अलावा एके शर्मा ने उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र और स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर भी बात की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर स्मार्टफोन की तरह एक अच्छा तकनीकी इनोवेशन है। उनके मुताबिक यह पारदर्शी और वैज्ञानिक उपकरण है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसके बारे में समझाने के लिए समय की जरूरत है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/lp1q3gc98gl2s3be.mp4" controls=""></video>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जागरूकता बढ़ाने के बाद बड़े पैमाने पर लगेंगे स्मार्ट मीटर</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शर्मा ने कहा कि राज्य में उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की तकनीक, उसके काम करने के तरीके और फायदे के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इसी वजह से आगे स्मार्ट मीटर लगाने का काम कुछ समय के लिए रोका गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊर्जा मंत्री के अनुसार, उपभोक्ताओं को तकनीक को समझाने और जागरूकता बढ़ाने के बाद स्मार्ट मीटर लगाने का काम बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590710/mayawati-fcra-amendment-bill-opposition-gen-z-vote-jpc"><span class="t-red">FCRA बिल पर मायावती का विपक्ष पर बड़ा हमला, </span>बोलीं- ‘Gen-Z वोट के आगे इन्हें कुछ नहीं दिख रहा’</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:54:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>FCRA बिल पर मायावती का विपक्ष पर बड़ा हमला, बोलीं- ‘Gen-Z वोट के आगे इन्हें कुछ नहीं दिख रहा’</title>
                                    <description><![CDATA[FCRA संशोधन बिल को JPC भेजे जाने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और महत्वपूर्ण मुद्दों को राजनीतिक स्वार्थ में पीछे करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590710/mayawati-fcra-amendment-bill-opposition-gen-z-vote-jpc"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/bsp-supremo-mayawati.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> FCRA संशोधन बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी तनातनी के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए हैं। बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे जाने के बाद मायावती ने कहा कि विपक्ष को संसद चलने देना चाहिए था, ताकि विधेयक की कमियों पर सदन में चर्चा हो सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने बयान में कहा कि सरकार FCRA संशोधन बिल को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए अन्य विधेयकों की तरह जल्द पारित कराना चाहती थी। हालांकि, विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच संसद में प्रारंभिक चर्चा के बिना ही इसे JPC को भेज दिया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>FCRA बिल पर सत्ता और विपक्ष दोनों पर निशाना</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल FCRA संशोधन बिल को सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार इसे विदेशी फंडिंग के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए नियमों में कड़े बदलाव की बात कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मायावती के मुताबिक, इससे यह संकेत मिलता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस विधेयक को राजनीतिक मुद्दा ज्यादा बना दिया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/Mayawati/status/2087740129528234476?s=20">https://twitter.com/Mayawati/status/2087740129528234476?s=20</a></blockquote>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">

</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>‘विपक्ष संसद चलने देता तो कमियां देश के सामने आतीं’</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मायावती ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विधेयक सदन में पेश किया जा रहा था, तब विपक्ष को संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए थी। इससे बिल की कमियों को सदन में उजागर करने का अवसर मिलता और पूरा देश उन्हें जान सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की कार्यवाही बाधित होने के कारण सरकार को कई अन्य विधेयकों को तेजी से पारित कराने का फायदा मिला है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>‘अंदरूनी मिलीभगत या Gen-Z वोट का स्वार्थ?’</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मायावती ने अपने बयान में विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि संसद न चलने देने की स्थिति से या तो अंदरूनी मिलीभगत का संकेत मिलता है या फिर विपक्ष को Gen-Z के वोटों का स्वार्थ इतना दिखाई दे रहा है कि देश के दूसरे मुद्दे पीछे छूट गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में Gen-Z की समस्याओं को प्राथमिकता देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ जनहित से जुड़े दूसरे मुद्दों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा उठाने की मांग</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मायावती ने विपक्ष से अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी संसद में उठाने की बात कही। उनका कहना है कि इस विषय पर संसद में चर्चा होना जरूरी है, लेकिन विपक्ष ने इसे अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते पीछे कर दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>‘जनता सत्ता-विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई से सचेत रहे’</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने बयान के अंत में मायावती ने कहा कि देश की जनता को संसद सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को लेकर सचेत रहना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने लोगों से बहुजन समाज पार्टी से जुड़ने की अपील करते हुए पार्टी को अंबेडकरवादी बताते हुए ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों और सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590667/kiren-rijiju-opposition-parliament-discussion-monsoon-session-2026"><span class="t-red">संसद में घमासान के बीच रीजीजू का विपक्ष पर बड़ा हमला, </span>बोले- ‘चर्चा से भागता विपक्ष पहली बार देखा’</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
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                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:40:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Weather Alert: 18 अगस्त तक भारी बारिश! मुंबई में 7 मौतें, हिमाचल में 313 सड़कें बंद</title>
                                    <description><![CDATA[देश के कई हिस्सों में मानसून का असर बेहद गंभीर हो गया है। मुंबई के घाटकोपर में भूस्खलन से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि हिमाचल प्रदेश में 313 सड़कें बंद हैं। ओडिशा में रेड अलर्ट और उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में बाढ़, जलभराव व भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590707/imd-weather-alert-18-august-heavy-rain-mumbai-himachal-odisha-landslide"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/coa-weather-alert-2.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल डेस्कः</strong> देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश अब आफत बनती जा रही है। मुंबई से हिमाचल प्रदेश और ओडिशा से जम्मू-कश्मीर तक भारी बारिश, भूस्खलन, जलभराव और सड़कें बंद होने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मुंबई के घाटकोपर में पहाड़ी का मलबा तीन मकानों पर गिरने से सात लोगों की मौत हो गई। वहीं हिमाचल प्रदेश में बारिश और भूस्खलन के कारण 313 सड़कें बंद हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 30 जून से अब तक बारिश और मौसम से जुड़ी आपदाओं में 75 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 911 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इस बीच 18 अगस्त तक जारी मौसम चेतावनियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मुंबई के घाटकोपर में भूस्खलन से सात मौतें</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुंबई के घाटकोपर इलाके की गौसिया चॉल में बुधवार तड़के करीब 3:45 बजे भूस्खलन की घटना हुई। पहाड़ी का एक हिस्सा और मलबा तीन मकानों पर जा गिरा। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां तीन बच्चों समेत छह लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं रमेश यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे में सात लोग घायल हुए हैं और उनका उपचार जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुंबई की मेयर रीतू तावड़े ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हिमाचल प्रदेश में 313 सड़कें बंद, 75 लोगों की मौत</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में 313 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा 65 पेयजल योजनाएं और 112 ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिलावार स्थिति की बात करें तो मंडी में सबसे ज्यादा 117 सड़कें बंद हैं। चंबा में 74, कुल्लू में 60, शिमला में 36 और सिरमौर में 13 सड़कें बंद बताई गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार के मुताबिक, 30 जून से अब तक बारिश और मौसम संबंधी आपदाओं में 75 लोगों की मौत हो चुकी है। इस दौरान 911 करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>18 अगस्त तक मौसम को लेकर क्या चेतावनी?</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। 17 अगस्त तक बारिश की चेतावनी और 18 अगस्त तक मौसम संबंधी अपडेट जारी रहने की बात सामने आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क बाधित होने और आवागमन प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खासकर उन इलाकों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है, जहां पहले से सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था प्रभावित है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ओडिशा में बालासोर और भद्रक के लिए रेड अलर्ट</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के चलते बारिश तेज होने की संभावना है। बालासोर और भद्रक में गुरुवार सुबह भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों जिलों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने का अनुमान है। वहीं जाजपुर, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, अंगुल, क्योंझर, मयूरभंज और ढेंकनाल में अत्यधिक बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। आंधी और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जम्मू-कश्मीर में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, कठुआ और पुलवामा में भारी बारिश के कारण हालात प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बनी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किश्तवाड़ में सड़क का एक हिस्सा बहने से गुलाबगढ़-मचैल मार्ग प्रभावित हुआ। कठुआ में भूस्खलन के कारण बनी-बसोहली मार्ग का टिकरी मोड़ बंद हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलवामा के अवंतिपोरा में श्रीनगर-अनंतनाग मार्ग पर जलभराव के बाद यातायात रोकना पड़ा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>उत्तराखंड में मद्महेश्वर यात्रा अस्थायी रूप से बंद</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उत्तराखंड में भी बारिश और भूस्खलन का असर दिखाई दे रहा है। मौसम की स्थिति को देखते हुए मद्महेश्वर यात्रा सात अगस्त से अस्थायी रूप से रोक दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के बीच यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राजस्थान में भी भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्थान में मानसून सक्रिय बना हुआ है और कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई है। चित्तौड़गढ़ के बासी में 227 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उदयपुर में उदय सागर बांध का जलस्तर 21 फीट से ऊपर पहुंचने के बाद दो गेट एक-एक फुट खोले गए। वहीं कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की मुकुंदरा सुरंग में करीब एक फुट पानी भर गया, जिसके चलते सुरंग को बंद करना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जयपुर समेत कई शहरों में जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने गुरुवार को राजस्थान के सभी जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्यों बढ़ी चिंता?</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के कई हिस्सों में एक साथ बारिश, भूस्खलन, जलभराव और तेज हवाओं का असर दिखाई दे रहा है। खासकर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और मुंबई जैसे पहाड़ी या संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन का खतरा लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">ओडिशा में रेड अलर्ट और राजस्थान समेत कई राज्यों में येलो-ऑरेंज अलर्ट के बीच अगले कुछ दिनों में मौसम पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना और अनावश्यक यात्रा से बचना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590584/the-crisis-is-deepening-from-the-himalayas-to-the-pole">हिमालय से ध्रुव तक गहरा रहा संकट, आखिर कब जागेंगे हम</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>देहरादून</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:02:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओ. सी. गांगुली: भारतीय कला इतिहास का वो ‘मौन पुरोधा’, जिसे हिंदी समाज ने भुला दिया</title>
                                    <description><![CDATA[कला इतिहासकार, संपादक और दस्तावेज़कार ओ. सी. गांगुली ने भारतीय कला को व्यवस्थित अध्ययन की मजबूत जमीन दी, फिर भी हिंदी भाषी समाज में उनका नाम आज तक सीमित दायरे में ही जाना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590653/oc-ganguly-indian-art-history-forgotten-pioneer-rupam-journal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/o.-c.-gangoly.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय आधुनिक कला के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जिनके बिना इस इतिहास की कल्पना अधूरी है, किंतु विडंबना यह है कि वे स्वयं इतिहास के हाशिए पर चले गए। ओ. सी. गांगुली (1881–1974) ऐसा ही एक नाम है। आनंद कुमारस्वामी, ई. बी. हैवेल और पर्सी ब्राउन की तरह उन्होंने भी भारतीय कला के इतिहास-लेखन, दस्तावेज़ीकरण और वैचारिक स्थापना में असाधारण योगदान दिया, किंतु हिंदी भाषी समाज में उनका नाम आज भी लगभग अपरिचित है। कला इतिहास के विद्यार्थियों तक के बीच उनकी पहचान सीमित है, जबकि आधुनिक भारतीय कला के आरंभिक बौद्धिक ढाँचे के निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही।</p>
<p style="text-align:justify;">ओर्धेन्द्र कुमार गांगुली का जन्म बंगाल में हुआ। वे ऐसे समय में सक्रिय हुए जब भारत में कला को लेकर एक नए राष्ट्रीय विमर्श का उदय हो रहा था। एक ओर औपनिवेशिक कला शिक्षा यूरोपीय अकादमिक यथार्थवाद को आदर्श मान रही थी, तो दूसरी ओर ई. बी. हैवेल और अबनीन्द्रनाथ ठाकुर भारतीय कला की स्वायत्त पहचान स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे। गांगुली इसी वैचारिक वातावरण में विकसित हुए। वे स्वयं चित्रकार के रूप में नहीं, बल्कि कला इतिहासकार, आलोचक, संपादक, संग्रहकर्ता और दस्तावेज़कार के रूप में अधिक प्रसिद्ध हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">उनका सबसे बड़ा योगदान भारतीय कला को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने का था। उन्होंने केवल कलाकृतियों का सौंदर्य-विवेचन नहीं किया, बल्कि उनके इतिहास, कलाकारों, शैलीगत विकास और सांस्कृतिक संदर्भों को भी गंभीरता से समझने का प्रयास किया। भारतीय लघुचित्र परंपराओं, विशेषकर मुगल, राजस्थानी और पहाड़ी चित्रकला, पर उनके अध्ययन ने उस समय की कला-चर्चा को नई दिशा दी। आज जब भारतीय कला इतिहास इन परंपराओं को स्वाभाविक रूप से स्वीकार करता है, तब यह याद रखना चाहिए कि एक समय इन्हें गंभीर अध्ययन का विषय बनाने का श्रेय कुछ गिने-चुने विद्वानों को जाता है, जिनमें ओ. सी. गांगुली प्रमुख थे। उनकी दूसरी महत्वपूर्ण भूमिका इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएण्टल आर्ट से जुड़ी थी। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में यह संस्था भारतीय कला के पुनर्जागरण का प्रमुख केंद्र थी। यहीं से भारतीय कला को औपनिवेशिक दृष्टि से अलग देखने की वैचारिक प्रक्रिया मजबूत हुई। गांगुली इस संस्था के सक्रिय कार्यकर्ता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने उसके प्रकाशनों और बौद्धिक गतिविधियों को भी दिशा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">कला-पत्रिका ‘रूपम’ का उल्लेख किए बिना उनके योगदान की चर्चा अधूरी रहेगी। रूपम केवल एक पत्रिका नहीं थी, वह भारतीय कला इतिहास के लिए एक दस्तावेज़ थी। इसमें प्रकाशित शोध-लेख, कलाकारों के परिचय, दुर्लभ चित्रों के पुनर्मुद्रण और कला-विमर्श ने भारतीय कला लेखन को एक गंभीर शैक्षणिक आधार प्रदान किया। उस समय जब कला पर नियमित लेखन की परंपरा विकसित ही हो रही थी, रूपम ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराया।</p>
<p style="text-align:justify;">गांगुली ने अबनीन्द्रनाथ ठाकुर सहित अनेक कलाकारों पर मोनोग्राफ लिखे। यह उस समय की एक नई विधा थी। उन्होंने कलाकारों को केवल जीवनी के स्तर पर प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उनके कलादर्शन और रचनात्मक प्रक्रिया का विश्लेषण किया। आज कलाकारों पर मोनोग्राफ सामान्य बात लगती है, किंतु भारत में इसकी आरंभिक परंपरा विकसित करने वालों में गांगुली अग्रणी थे। फिर प्रश्न उठता है कि इतना महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व हिंदी भाषी समाज की स्मृति से लगभग अनुपस्थित क्यों है?</p>
<p style="text-align:justify;">इसके कई कारण हैं, जिनमें पहला कारण भाषा है। गांगुली का अधिकांश लेखन अंग्रेजी में था। उनका बौद्धिक संसार बंगाल और अंग्रेजी भाषा के बीच निर्मित हुआ। उनकी पुस्तकों और लेखों का हिंदी में व्यवस्थित अनुवाद कभी नहीं हुआ। परिणामस्वरूप हिंदी के पाठकों तक उनका विचार ही नहीं पहुँच पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरा कारण हिंदी में कला लेखन की सीमित परंपरा है। बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में हिंदी क्षेत्र में कला पर व्यवस्थित आलोचनात्मक लेखन लगभग नहीं के बराबर था। साहित्यिक पत्रिकाओं में कला पर कभी-कभार लेख अवश्य प्रकाशित होते थे, किंतु कला इतिहास और कला आलोचना का स्वतंत्र अनुशासन विकसित नहीं हो पाया। इस कारण गांगुली जैसे विद्वानों के कार्य पर चर्चा का आधार ही नहीं बन सका।</p>
<p style="text-align:justify;">तीसरा कारण कला शिक्षा का क्षेत्रीय असंतुलन है। आधुनिक भारतीय कला का प्रारंभिक नेतृत्व बंगाल, बंबई और मद्रास के हाथों में रहा। हिंदी क्षेत्र के कला महाविद्यालय अपेक्षाकृत बाद में सक्रिय हुए और लंबे समय तक बंगाल की शैक्षिक एवं वैचारिक परंपरा का अनुसरण करते रहे। विडंबना यह है कि उन्होंने उस परंपरा को अपनाया, किंतु उसके प्रमुख विचारकों का व्यवस्थित अध्ययन नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">चौथा कारण संस्थागत विस्मृति है। भारत के अधिकांश कला महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों ने अपने बौद्धिक स्रोतों का अभिलेखीकरण नहीं किया। परिणामस्वरूप कला इतिहास केवल कुछ प्रसिद्ध कलाकारों तक सीमित होता गया, जबकि इतिहासकारों, संपादकों, संग्रहकर्ताओं और कला-आलोचकों का योगदान धीरे-धीरे ओझल हो गया। गांगुली भी इसी विस्मृति के शिकार हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">आज जब भारतीय कला इतिहास का पुनर्पाठ हो रहा है, तब ओ. सी. गांगुली को केवल बंगाल स्कूल के समर्थक के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय कला इतिहास के संस्थापक इतिहासकारों में एक के रूप में देखने की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय कला के लिए वह बौद्धिक आधार तैयार किया, जिस पर आगे चलकर अनेक विद्वानों ने अपना कार्य निर्मित किया। यदि आनंद कुमारस्वामी ने भारतीय कला को वैश्विक बौद्धिक प्रतिष्ठा दिलाई, तो ओ. सी. गांगुली ने उसके दस्तावेज़ीकरण, आलोचनात्मक अध्ययन और संस्थागत विमर्श को मजबूत आधार प्रदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">हिंदी जगत के लिए अब समय आ गया है कि वह अपने कला-विमर्श का पुनर्मूल्यांकन करे। केवल कलाकारों का नहीं, बल्कि उन इतिहासकारों, संपादकों और आलोचकों का भी पुनर्पाठ आवश्यक है जिन्होंने भारतीय कला की बौद्धिक संरचना निर्मित की। ओ. सी. गांगुली का पुनर्स्मरण केवल एक भूले हुए विद्वान को श्रद्धांजलि देना नहीं होगा, बल्कि भारतीय कला इतिहास की उस उपेक्षित परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित करना होगा, जिसके बिना आधुनिक भारतीय कला की कहानी अधूरी रह जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>- सुमन कुमार सिंह</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 07:12:15 +0530</pubDate>
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