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                <title>बरेली - Amrit Vichar</title>
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                <description>बरेली RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Bareilly News: ऑनलाइन दवा बिक्री पर भारी डिस्काउंट के खिलाफ प्रदर्शन, बंद का नहीं दिखा असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की बिक्री के खिलाफ दवा व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और भारी डिस्काउंटिंग के खिलाफ देश भर में बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने बंद का आह्वान किया। जिसका बरेली में कोई खास असर नहीं देखने को मिला। हालांकि कुछ संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर जाकर प्रदर्शन जरूर किया।</p>
<p>बुधवार को ऑनलाइन दवा व्यापार और भारी डिस्काउंट के खिलाफ  बरेली रिटेल केमिस्ट वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। संगठन के लोगों ने बताया कि ऑनलाइन दवा व्यापार को बढ़ावा देकर दवा व्यापारियों को परेशान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582580/protest-against-heavy-discounts-on-online-medicine-sales--strike-shows-no-impact"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/protest.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की बिक्री के खिलाफ दवा व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और भारी डिस्काउंटिंग के खिलाफ देश भर में बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने बंद का आह्वान किया। जिसका बरेली में कोई खास असर नहीं देखने को मिला। हालांकि कुछ संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर जाकर प्रदर्शन जरूर किया।</p>
<p>बुधवार को ऑनलाइन दवा व्यापार और भारी डिस्काउंट के खिलाफ  बरेली रिटेल केमिस्ट वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। संगठन के लोगों ने बताया कि ऑनलाइन दवा व्यापार को बढ़ावा देकर दवा व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। लाइसेंस होल्डर अपना परिवार भी नहीं पाल पा रहे हैं। लिहाजा सरकार से मांग है कि कंपटीशन एक्ट 2002 का पालन करते हुए ऑनलाइन दवा व्यापार पर भारी डिस्काउंट को बंद कराया जाए। </p>
<p>दूसरी तरफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ बाजार का भ्रमण किया। उन्होंने पाया कि ज्यादातर दुकानें पूर्व की तरह खुली थी। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि आम जनता और मरीजों को ध्यान में रखते हुए सभी अपनी दुकानें देर रात तक खोलेंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 11:17:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Exclusive News: बरेली के विकास को 1518 करोड़ की रफ्तार, 578 परियोजनाएं बदलेंगी गांव से शहर तक की तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्री, सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के लिए सड़क, पुल और रोड सेफ्टी परियोजनाओं का बड़ा खाका सरकार को सौंप दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582558/a-%E2%82%B91-518-crore-boost-for-bareilly-s-development--578-projects-set-to-transform-the-landscape-from-villages-to-the-city"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/mantri.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> बरेली में अब विकास की राजनीति सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं दिख रही। मंत्री, सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के लिए सड़क, पुल और रोड सेफ्टी परियोजनाओं का बड़ा खाका सरकार को सौंप दिया है। लोक निर्माण विभाग को 1518.75 करोड़ रुपये के 578 प्रस्ताव सौंपे गए हैं, जिनमें गांवों को जोड़ने वाली सड़कें, नए पुल, रोड चौड़ीकरण और हादसे रोकने वाले प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। सबसे ज्यादा जोर कनेक्टिविटी सुधारने पर है, ताकि गांव से शहर तक सफर आसान और तेज हो सके. अब सभी प्रस्ताव डीएम की मंजूरी के बाद शासन को भेजे जाएंगे।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/mantri.jpg" alt="MANTRI" width="1920" height="1080"></img><br />केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद बहेड़ी क्षेत्र से अकेले 196 प्रस्ताव भेजे गए हैं। इनमें 169 नई सड़कें और 22 पुल शामिल हैं। साफ है कि बहेड़ी में कनेक्टिविटी और ग्रामीण रास्तों को लेकर सबसे बड़ा डेवलपमेंट पुश मांगा गया है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/mp.jpg" alt="MP" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>एमपी आर्या ने भी अपने इलाके के लिए बड़ा पैकेज तैयार कराया है। उन्होंने 75 नई सड़कें, तीन चौड़ीकरण, पांच पुल और दो रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट्स की मांग रखी है। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/chatrpal.jpg" alt="CHATRPAL" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>वहीं सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार ने 89 सड़कें और एक पुल का प्रस्ताव देकर ग्रामीण संपर्क मार्गों पर फोकस किया है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/op6.jpg" alt="OP" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा ने 53 नई सड़कें और दो पुल मांगे हैं। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/mantri2.jpg" alt="MANTRI2" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने शहरी ट्रैफिक और सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए आठ पुल और रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया है। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/gu.jpg" alt="GU" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>एमएलसी कुंवर महाराज सिंह ने 31 प्रस्तावों का खाका भेजा है। जबकि बहोरन लाल मौर्य ने अपने क्षेत्र में सात पुल और 44 नई सड़कों की जरूरत बताई है। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/yop1.jpg" alt="YOP" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>बिथरी विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने भी ग्रामीण संपर्क और रोड सेफ्टी पर फोकस करते हुए प्रस्ताव भेजे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 20:29:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पानी में घुला जहर : उत्तराखंड से निकला औद्योगिक वेस्ट गंदी कर रहा यूपी की नदियां, किसान जाएंगे अदालत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रुद्रपुर, अमृत विचार। </strong>उत्तराखंड के औद्योगिक इलाकों से निकलने वाला वेस्ट यूपी की नदियों के लिए घातक साबित हो रहा है। खास तौर से सीमावर्ती जिले बरेली की नदियां इससे ज्यादा प्रभावित हैं। लिहाजा यूपी की नदियों को बचाने का बीड़ा अब प्रदेश के किसानों ने उठाया है। किसानों ने बरेली से सटे जिला उधम सिंह नगर के रुद्रपुर जाकर वहां के प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया। किसानों का कहना है कि अगर 15 दिन में रुद्रपुर के औद्योगिक इलाकों से निकलने वाली गंदगी को रोका नहीं गया और नदियों की सफाई नहीं हुई तो उनके आगे अदालत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582544/industrial-waste-flowing-from-uttarakhand-is-polluting-rivers-in-up--farmers-to-move-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/nadi1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रुद्रपुर, अमृत विचार। </strong>उत्तराखंड के औद्योगिक इलाकों से निकलने वाला वेस्ट यूपी की नदियों के लिए घातक साबित हो रहा है। खास तौर से सीमावर्ती जिले बरेली की नदियां इससे ज्यादा प्रभावित हैं। लिहाजा यूपी की नदियों को बचाने का बीड़ा अब प्रदेश के किसानों ने उठाया है। किसानों ने बरेली से सटे जिला उधम सिंह नगर के रुद्रपुर जाकर वहां के प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया। किसानों का कहना है कि अगर 15 दिन में रुद्रपुर के औद्योगिक इलाकों से निकलने वाली गंदगी को रोका नहीं गया और नदियों की सफाई नहीं हुई तो उनके आगे अदालत जाने के सिवा दूसरा कोई चारा नहीं होगा।</p>
<p><strong>बीमारियों की चपेट में आ रहे लोग</strong><br />दरअसल उत्तराखंड की गंदगी से यूपी की प्रदूषित होती नदियों का मुद्दा उठाते हुए किसान कल्याण समिति बरेली के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंपकर नदियों की सफाई करने का मुद्दा उठाया। समिति के अध्यक्ष जयदीप सिंह बरार कहा कि रुद्रपुर मुख्यालय स्थित सिडकुल कंपनियों से निकलने वाला कचरा और दूषित पानी कल्याणी नदी व बहगुल नदी में जाता है। जिसकी वजह से नदी के करीब रहने वाले लोग संक्रमित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। लिहाजा अगर इसे नहीं रोका गया तो ये स्थिति आमजनमानस के लिए आने वाले वक्त भी और भी ज्यादा खतरनाक हालात पैदा कर देगी।</p>
<p><strong>बर्बाद हो रही किसानों की फसल</strong><br />औद्योगिक वेस्ट ने सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का किया है। नदियों के सहारे खेतों में जाने वाला पानी किसानों की फसल तक बर्बाद कर रहा है। जिसकी वजह से किसान परेशान हैं। आलम ये है कि किसान फसल लगाने से भी कतरा रहे हैं। आरोप लगाया गया कि नमामि गंगे अभियान चलाया। अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये की बर्बादी की गई। बावजूद इसके नदियों की साफ-सफाई दूर की कौड़ी साबित हुई। हालत जस की तस बनी है।</p>
<p><strong>बेजुबान जानवरों पर भी आफत</strong><br />उन्होंने कहा कि गंदा पानी पीकर बेजुबान जानवर मर रहे हैं। जिसका सबसे ज्यादा असर यूपी की नदियों में देखने को मिल रहा है। बरेली यूपी की नदियां प्रदूषित हो चुकी है। लोगों का जीना दूभर हो रहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से कल्याणी, बहगुल पश्चिमी के अलावा सहायक बरौर नदी की व्यापक साफ सफाई करने का मुद्दा उठाया। आगाह किया कि यदि 15 दिन के अंदर निस्तारण नहीं हुआ तो समिति अदालत में याचिका दायर करेगी। इस मौके पर देवेंद्र सिंह, सतेंद्र सिंह, ओमपाल सिंह, सोम पाल सिंह, हरजीत सिंह, अनिकेत सिंह, वेद प्रकाश कश्यप आदि मौजूद रहे।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>रुद्रपुर</category>
                                            <category>उधम सिंह नगर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 18:22:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: कागज पर वजूद की लकीर खोज रही किला नदी, अब मानवाधिकार अयोग हुआ सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> जमीन की भूख एक अरसे से नदियों का वजूद निगलने पर आमादा है। इस पर निजाम ये कि सराकारी कागज पर भी इनके वजूद की लकीर जिम्मेदारान को ढूंढे नहीं मिल रही और इसका फायदा जमीनों के सौदागर अपनी तिजोरियों को हलक तक भरने में उठा रहे हैं। मगर राहत की बात ये कि अब मानवाधिकारी आयोग जैसी संस्थाओं की नींद टूटने लगी है। लिहाजा आयोग ने अफसरान से अब अपना वजूद खत्म होने के मुहाने पर पहुंचीं किला नदी को लेकर रिपोर्ट तलब की है।</p>
<p><strong>आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट</strong><br />बता दें कि किला नदी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582503/the-kila-river-searches-for-traces-of-its-existence-on-paper--the-human-rights-commission-finally-wakes-from-its-slumber"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/manva.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> जमीन की भूख एक अरसे से नदियों का वजूद निगलने पर आमादा है। इस पर निजाम ये कि सराकारी कागज पर भी इनके वजूद की लकीर जिम्मेदारान को ढूंढे नहीं मिल रही और इसका फायदा जमीनों के सौदागर अपनी तिजोरियों को हलक तक भरने में उठा रहे हैं। मगर राहत की बात ये कि अब मानवाधिकारी आयोग जैसी संस्थाओं की नींद टूटने लगी है। लिहाजा आयोग ने अफसरान से अब अपना वजूद खत्म होने के मुहाने पर पहुंचीं किला नदी को लेकर रिपोर्ट तलब की है।</p>
<p><strong>आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट</strong><br />बता दें कि किला नदी के वजूद पर मंडरा रहे खतरे का मामला अब मानवाधिकार आयोग की दहलीज पर पहुंच गया है। रसूखदार कॉलोनाइजरों और भूमाफियाओं की ओर से नदी की जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त और धड़ल्ले से किए गए पक्के निर्माणों को लेकर आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल विस्तृत आख्या तलब की है, जिससे संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है।</p>
<p><strong>इन गांवों में संकरा नाला बनी नदी</strong><br />दरअसल, तहसील सदर की राजस्व टीम की ओर से की गई पैमाइश और सीमांकन में सुर्खा छावनी, वाकरनगर, सुंदरासी, महेशपुर अटरिया और रहपुरा चौधरी सहित करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में नदी का स्वरूप सिमटकर संकरे नाले जैसा हो चुका है। हद तो यह है कि सरकारी कागजों में सैदपुर हाकिंस और सुर्खा छावनी जैसे क्षेत्रों में नदी का कोई रिकॉर्ड ही दर्ज नहीं है, जबकि वहां जलधारा मौजूद है। इसी का फायदा उठाकर स्वालेनगर नवदिया और जसौली जैसे इलाकों में नदी की बेशकीमती भूमि पर आलीशान मकान, बाउंड्रीवॉल और व्यावसायिक ढांचे खड़े कर दिए गए।</p>
<p><strong>यहां नदी पर हुआ पक्का निर्माण</strong><br />जांच रिपोर्ट में गाटा संख्या 391 और 886-887 जैसी जमीनों पर खुलेआम पक्का अवैध निर्माण पाया गया, लेकिन रसूखदारों को बचाने के लिए रिपोर्ट में उनके नाम अज्ञात लिख दिए गए। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि भूमाफिया और जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत के कारण ही सालों से यह खेल चल रहा था। अब मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिशासी अभियंता राजीव कुमार राठी ने संपत्ति विभाग से पूरी रिपोर्ट संकलित की है, जिसे जल्द ही जिला प्रशासन को सौंप दिया जाएगा</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 14:43:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: पांच दिन बाद भी बिजली ने नहीं दिए दर्शन...गर्मी के कहर से तिलमिला उठा आंवला</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>आंवला, अमृत विचार।</strong> 13 मई को आई भीषण आंधी का असर ग्रामीण इलाकों की बिजली व्यवस्था पर अब तक दिखाई दे रहा है। तेज हवाओं में कई बिजली पोल टूट गए और जगह-जगह तार क्षतिग्रस्त हो गए थे। बिजली विभाग ने तीन दिन तक लगातार मरम्मत कार्य कर अधिकांश लाइनों को चालू करने का दावा किया, लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में अब भी बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। भीषण गर्मी में हो रही लगातार कटौती ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।</p><p>सेंधा, मोतीपुरा, पथरी, मोहम्मदपुर पथरा, सेंधी, दलीपुर, टांडा, कल्लिया, आसपुर और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582516/even-after-five-days--electricity-remains-elusive----aonla-reels-under-the-fury-of-the-scorching-heat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/garmi1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>आंवला, अमृत विचार।</strong> 13 मई को आई भीषण आंधी का असर ग्रामीण इलाकों की बिजली व्यवस्था पर अब तक दिखाई दे रहा है। तेज हवाओं में कई बिजली पोल टूट गए और जगह-जगह तार क्षतिग्रस्त हो गए थे। बिजली विभाग ने तीन दिन तक लगातार मरम्मत कार्य कर अधिकांश लाइनों को चालू करने का दावा किया, लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में अब भी बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। भीषण गर्मी में हो रही लगातार कटौती ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।</p><p>सेंधा, मोतीपुरा, पथरी, मोहम्मदपुर पथरा, सेंधी, दलीपुर, टांडा, कल्लिया, आसपुर और करूआताल समेत दर्जनों गांवों के लोग बिजली संकट से परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कुछ मिनट के लिए आती है और फिर घंटों गायब हो जाती है। कई बार पूरे दिन सप्लाई नहीं मिलती। गर्मी और उमस के बीच लोग रातभर जागने को मजबूर हैं। बिजली न मिलने से इनवर्टर और बैटरियां भी चार्ज नहीं हो पा रहीं, जिससे पंखे और जरूरी उपकरण बंद पड़े हैं।</p><p>ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद विभागीय अधिकारी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे। बिजली संकट के चलते पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि सरकार गांवों में बेहतर बिजली व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हालात इसके विपरीत हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान कर निर्बाध बिजली आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है। वहीं, विद्युत विभाग के एसडीओ से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 13:05:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly News:  4 हजार की नौकरी के लिए लगी लंबी कतार, PHD डिग्रीधारक भी शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>बेरोजगारी के इस दौर में एक अदद नौकरी की चाहत युवाओं से क्या कुछ नहीं कराती, इसकी एक बानगी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में देखने को मिल रही है। इस भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों के सामने आवेदकों की फाइलें आईं, तो वे हैरान रह गए। महज चार हजार रुपये प्रति माह के मानदेय वाले इस पद के लिए फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे कठिन विषयों से एमएससी पास और पीएचडी की उच्च डिग्री हासिल कर चुकी महिलाओं ने भी दावेदारी की है।</p>
<p><strong>अब पहुंचे 5 हजार आवेदन</strong><br />अधिकारी बताते हैं कि विभाग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582474/earned-a-phd-but-found-no-employment--joined-the-queue-for-a-job-paying-four-thousand"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/vichar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>बेरोजगारी के इस दौर में एक अदद नौकरी की चाहत युवाओं से क्या कुछ नहीं कराती, इसकी एक बानगी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में देखने को मिल रही है। इस भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों के सामने आवेदकों की फाइलें आईं, तो वे हैरान रह गए। महज चार हजार रुपये प्रति माह के मानदेय वाले इस पद के लिए फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे कठिन विषयों से एमएससी पास और पीएचडी की उच्च डिग्री हासिल कर चुकी महिलाओं ने भी दावेदारी की है।</p>
<p><strong>अब पहुंचे 5 हजार आवेदन</strong><br />अधिकारी बताते हैं कि विभाग की ओर से इस पद के लिए निर्धारित की गई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता केवल इंटरमीडिएट है। अंतिम चयन चूंकि परास्नातक तक के अंकों की मेरिट के आधार पर होना है, इसलिए उच्च डिग्रीधारी महिलाओं ने भी आवेदन किया है। जिले में आंगनबाड़ी सहायिकाओं के 705 पदों को भरने के लिए करीब पांच हजार आवेदन आ चुके हैं, जिनकी छंटनी में अधिकारी जुटे हैं। कॅरियर काउंसलर नवनीत शुक्ला कहते हैं कि इतनी बड़ी डिग्रियों के बाद भी महज चार हजार रुपये प्रति माह के पद पर आवेदन करना, रोजगार के गंभीर संकट को बयां करता है। प्राइवेट सेक्टर में छंटनी का लगातार बना रहने वाला डर और तय समय से ज्यादा काम के बदले कम वेतन मिलना भी इसके पीछे की मुख्य वजह है।</p>
<p><strong>इस बार फूंक-फूंक कर रखे जा रहे कदम</strong><br />आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और विवादों से मुक्त रखने के लिए सीडीओ देवयानी ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। पिछली भर्ती में सामने आईं अनियमितताओं और गड़बड़ियों को देखते हुए इस बार आवेदनों और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच करने के लिए तीन कमेटियों का गठन किया गया है। कमेटियों की निगरानी में एक-एक दस्तावेज को परखा जा रहा है, ताकि मेरिट सूची निष्पक्ष बने और किसी भी प्रकार की मैन्युअल गड़बड़ी या पक्षपात की गुंजाइश न रहे।</p>
<p><strong>उच्च शिक्षित महिलाओं की संख्या ज्यादा</strong><br />जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती के आवेदन पत्रों की जांच में उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं की बड़ी संख्या सामने आई है। चूंकि अंतिम चयन सूची इंटरमीडिएट से परास्नातक तक के शैक्षणिक अंकों की मेरिट के आधार पर तैयार होनी है, इसलिए स्क्रूटनी प्रक्रिया में हर एक दस्तावेज को बेहद बारीकी से परखा जा रहा है, ताकि कोई गड़बड़ी न हो।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>करियर </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:19:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्मार्ट दिखेंगे गांव: बरेली की 57 ग्राम पंचायतें बनेंगी हाईटेक, ये बुनियादी सुविधाएं कराएंगी शहर जैसा अहसास</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> अब आने वाले दिनों बरेली के गांव बुनियादी सुविधाओ से महरूम नहीं रहेंगे। क्योंकि तेजी से स्मार्ट होते बरेली शहर के बाद यहां की ग्राम पंचायतों की संवारने का बीड़ा सरकार ने उठाया है। अधिकारियों की माने तो प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत शहर की 57 ग्राम पंचायतों को चमकाने की तैयारी है। यानी आने वाले वक्त में जिले की किसी ग्राम पंचायत में जाते वक्त शहर जैसी सुविधाओं का अहसास करें तो हैरानी की बात नहीं होगी।</p>
<p><strong>हर गांव को 20 लाख का बजट मंजूर</strong><br />विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ग्राम पंचायतों को चमकाने की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582461/57-gram-panchayats-in-bareilly-to-become-high-tech--these-basic-amenities-will-provide-a-city-like-experience"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/yojna.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> अब आने वाले दिनों बरेली के गांव बुनियादी सुविधाओ से महरूम नहीं रहेंगे। क्योंकि तेजी से स्मार्ट होते बरेली शहर के बाद यहां की ग्राम पंचायतों की संवारने का बीड़ा सरकार ने उठाया है। अधिकारियों की माने तो प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत शहर की 57 ग्राम पंचायतों को चमकाने की तैयारी है। यानी आने वाले वक्त में जिले की किसी ग्राम पंचायत में जाते वक्त शहर जैसी सुविधाओं का अहसास करें तो हैरानी की बात नहीं होगी।</p>
<p><strong>हर गांव को 20 लाख का बजट मंजूर</strong><br />विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ग्राम पंचायतों को चमकाने की तैयारी के लिए बजट भी मंजूर हो गया है। बस अब तैयारी इस योजना को जमीन पर उतारने की है।  इन चुनिंदा गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास करने के लिए प्रति ग्राम पंचायत 20 लाख रुपये का विशेष बजट स्वीकृत किया गया है। लिहाजा अगले चरण में तेजी के साथ विकास का खाका तैयार कर उसके मुताबिक ही योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।</p>
<p><strong>ग्रामीणों का बदलेगा लाइफ स्टाइल</strong><br />जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांश शेखर ने बताया कि सभी संबंधित ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों के स्तर से एक सप्ताह के अंदर विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली इस विकास योजना की समीक्षा के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से सीधे ग्राम पंचायतों को फंड ट्रांसफर कर दिया जाएगा। योजना का मकसद ग्रामीण इलाकों में लोगों के लाइफ स्टाइल को बेहतर बनाना है। </p>
<p><strong>विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को तरजीह</strong><br />ग्रामीणों इलाकों में कूड़ा निस्तारण एक बड़ी समस्या है। लिहाजा विकास कार्यों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने को तरजीह दी गई है। जिससे ग्रामीण इलाकों में कूड़ा निस्तारण प्रभावी तरीके से किया जा सके। मकसद यही है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिले। यही वजह है कि लिक्विड वेस्ट प्लांट लगाने की भी तैयारी है। जिससे गंदे पानी को ट्रीटेड वॉटर में तब्दील किया जा सके। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर गंदा और केमिकल युक्त पानी रिसाइकिल हो सके। </p>
<p><strong>शिक्षण संस्थानों की सुधरेगी हालत</strong><br />योजना के तहत ग्रामीण इलाकों के शिक्षण संस्थानों के विकास का भी खास ख्याल रखा गया है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आधुनिक शौचालय, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर लाइट, आरसीसी की छोटी पुलिया, नए आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन और साफ पानी के लिए नए बोरवेल आदि का निर्माण कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बजट मिलते ही निर्माण कार्य तेज गति से शुरू करा दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>ब्लॉकवार चयनित ग्राम पंचायतें</strong><br />सबसे ज्यादा नवाबगंज ब्लॉक के 10 गांवों को शामिल किया गया है। इसके अलावा आलमपुर जाफराबाद और फरीदपुर ब्लॉक से सात-सात, बहेड़ी और रामनगर ब्लॉक से पांच-पांच, भोजीपुरा, बिथरी, दमखोदा और भदपुरा ब्लॉक से चार-चार, भुता और मझगवां ब्लॉक से तीन-तीन, जबकि मीरगंज ब्लॉक से एक ग्राम पंचायत का चयन हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:29:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: ई-बस के बाद जिलाधिकारी बाइक पर सवार, कलेक्ट्रेट से कार्यालय तक पहुंचे </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> जिलाधिकारी अविनाश सिंह इन दिनों प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील पर ईंधन बचाने का संदेश दे रहे हैं। दो दिन पहले वह ई-बस में बैठकर समधान दिवस में पहुंचे थे। अब सोमवार को बाइक पर बैठकर कमिश्नर कलेक्ट्रेट से अपने आवास तक पहुंचे।  </p>
<p>दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नो व्हीकल डे मनाने का आह्वान किया है। लिहाजा जिलाधिकारी अविनाश सिंह लगातार ईंधन बचाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दे रहे हैं। एक बार फिर उनका सादगी भरा अंदाज देखने को मिला। कमिश्नर की बैठक में शामिल होने के बाद वह बाइक पर सवार हुए और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582414/after-the-e-bus--the-district-magistrate-rode-a-bike-to-reach-his-office-from-the-collectorate"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/dm3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> जिलाधिकारी अविनाश सिंह इन दिनों प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील पर ईंधन बचाने का संदेश दे रहे हैं। दो दिन पहले वह ई-बस में बैठकर समधान दिवस में पहुंचे थे। अब सोमवार को बाइक पर बैठकर कमिश्नर कलेक्ट्रेट से अपने आवास तक पहुंचे।  </p>
<p>दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नो व्हीकल डे मनाने का आह्वान किया है। लिहाजा जिलाधिकारी अविनाश सिंह लगातार ईंधन बचाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दे रहे हैं। एक बार फिर उनका सादगी भरा अंदाज देखने को मिला। कमिश्नर की बैठक में शामिल होने के बाद वह बाइक पर सवार हुए और कलेक्ट्रेट कार्यालय से अपने आवास तक पहुंचे। डीएम को जिसने भी बाइक पर सफर करते देखा उनकी तारीफ करते नहीं थका। दूसरे अधिकारी और कर्मचारी भी उनका ये अंदाज देखकर हैरान रह गए।</p>
<p>जिलाधिकारी ने कहा कि ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के मकसद से सभी अधिकारी और कर्मचारी आगे आएं। उनसे उम्मीद की जाती है कि वह देशहित के इस काम में अपना सहयोग जरूर देंगे। इसके अलावा उन्होंने सप्ताह में दो दिन सोमवार और शनिवार को नो व्हीकल डे के रूप में मनाने की अपील लोगों से की। इन दिनों में में अपने निजी या सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582414/after-the-e-bus--the-district-magistrate-rode-a-bike-to-reach-his-office-from-the-collectorate</link>
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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 18:25:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: चौंका रहे निगम के आंकड़े...शहर में सिर्फ दो सौ पालतू कुत्ते</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> शहर में हर दूसरी गली और पॉश सोसायटियों में पिटबुल, जर्मन शेफर्ड जैसी आक्रामक नस्लों के हजारों कुत्ते पाले जा रहे हैं, लेकिन नगर निगम में पालतू कुत्तों के पंजीकरण के आंकड़े चौकाने वाले हैं। पूरे शहर में सिर्फ दो सौ पालतू कुत्ते हैं। नियमों को ताक पर रखकर लोग बड़ी संख्या में घरों में कुत्तों को पाल रहे हैं, मगर इनका पंजीकरण नहीं करा रहे हैं। आक्रामक नस्ल के कुत्ते लोगों पर हमलावर हो रहे हैं।</p>
<p>सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों की बढ़ती फौज को रोकने के लिए करोड़ों का बजट फूंककर नदौसी में बना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582379/municipal-figures-raise-eyebrows----only-200-pet-dogs-in-the-city"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/dog1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> शहर में हर दूसरी गली और पॉश सोसायटियों में पिटबुल, जर्मन शेफर्ड जैसी आक्रामक नस्लों के हजारों कुत्ते पाले जा रहे हैं, लेकिन नगर निगम में पालतू कुत्तों के पंजीकरण के आंकड़े चौकाने वाले हैं। पूरे शहर में सिर्फ दो सौ पालतू कुत्ते हैं। नियमों को ताक पर रखकर लोग बड़ी संख्या में घरों में कुत्तों को पाल रहे हैं, मगर इनका पंजीकरण नहीं करा रहे हैं। आक्रामक नस्ल के कुत्ते लोगों पर हमलावर हो रहे हैं।</p>
<p>सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों की बढ़ती फौज को रोकने के लिए करोड़ों का बजट फूंककर नदौसी में बना एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर शो-पीस बनकर रह गया है। आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण नहीं हो रहा है। आवारा कुत्तों के आतंक के चलते शाम ढलते ही बच्चों और बुजुर्गों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। निगम तब तक नहीं जागता जब तक कोई बड़ी घटना न हो जाए। हालांकि, इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब निगम जल्द पॉश कॉलोनियों में चेकिंग अभियान चलाने की बात कह रहा है।</p>
<p>मुंह पट्टी व पट्टा बांधने का नियम कागजों तक सीमित<br />नियमों के मुताबिक पालतू कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों, जैसे पार्कों, लिफ्ट या सड़कों पर ले जाते समय उनके मुंह पर मजल (मुंहपट्टी) लगाना और उन्हें मजबूत लीश (पट्टा) से बांधकर रखना अनिवार्य है। इसके अलावा, डॉग ओनर की यह जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक जगहों को गंदा न होने दें। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। शहर के पार्कों और सोसायटियों में लोग बिना किसी सुरक्षा के कुत्तों को खुलेआम टहलाते हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों में डर बना रहता है।</p>
<p>पिटबुल, रोटवीलर जैसी 23 खूंखार नस्लों पर है प्रतिबंध<br />देशभर में बढ़ रहे जानलेवा हमलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिटबुल, रोटवीलर, टेरियर, वोल्फ डॉग और मस्टिफ जैसी 23 आक्रामक विदेशी नस्लों के कुत्तों के आयात, बिक्री और ब्रीडिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया हुआ है। गाइडलाइंस के अनुसार इन प्रतिबंधित नस्लों के जो कुत्ते पहले से घरों में पाले जा रहे हैं, उनकी भी तुरंत नसबंदी (स्टरलाइजेशन) कराना अनिवार्य है, ताकि उनकी आबादी आगे न बढ़े। बावजूद शौक के चक्कर में लोग दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।</p>
<p>नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि निगम जल्द ही पॉश कॉलोनियों और सोसायटियों में चेकिंग अभियान शुरू करने जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर बिना मुंहपट्टी (मजल) और पट्टे के कुत्ते टहलाने वाले मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 16:04:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: पांच इंजीनियरों पर गिर चुकी गाज, मगर कार्यदायी संस्था पर अब तक नरमी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> सरदारनगर में 3.62 करोड़ रुपये की लागत से बना ओवरहेड टैंक ढहने के मामले में भले ही जल निगम ग्रामीण की एक्सईएन कुमकुम गंगवार, दो सहायक अभियंता दो और जेई को सस्पेंड कर दिया गया हो, लेकिन इस पूरी घटना में सबसे बड़ा सवाल कार्यदायी संस्था ''''एनसीसी लिमिटेड'''' को लेकर उठ रहा है। बिना सॉइल टेस्टिंग के बलुई मिट्टी पर टैंक खड़ा करने वाली इस हैदराबाद की कंपनी के खिलाफ अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। कंपनी को केवल नोटिस का झुनझुना थमा दिया गया है।</p>
<p>दरअसल,''''हर घर नल योजना'''' के तहत साल 2019 से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582376/the-axe-has-fallen-on-five-engineers--yet-the-executing-agency-continues-to-be-treated-with-leniency"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/tank1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> सरदारनगर में 3.62 करोड़ रुपये की लागत से बना ओवरहेड टैंक ढहने के मामले में भले ही जल निगम ग्रामीण की एक्सईएन कुमकुम गंगवार, दो सहायक अभियंता दो और जेई को सस्पेंड कर दिया गया हो, लेकिन इस पूरी घटना में सबसे बड़ा सवाल कार्यदायी संस्था ''''एनसीसी लिमिटेड'''' को लेकर उठ रहा है। बिना सॉइल टेस्टिंग के बलुई मिट्टी पर टैंक खड़ा करने वाली इस हैदराबाद की कंपनी के खिलाफ अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। कंपनी को केवल नोटिस का झुनझुना थमा दिया गया है।</p>
<p>दरअसल,''''हर घर नल योजना'''' के तहत साल 2019 से इस परियोजना का जिम्मा लेने वाली कंपनी एनसीसी ने जिले के 1801 गांवों में पाइपलाइन बिछाने और करीब 877 ओवरहेड टैंक बनाने का ठेका ले रखा है। 75 फीसदी काम पूरा होने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन सरदारनगर की घटना ने इस पूरे प्रोजेक्ट की साख पर सवाल खड़ा कर दिया है। डर इस बात को लेकर है जब एक टैंक बिना बारिश झेले धराशायी हो गया, तो कंपनी की ओर से बनाए जा रहे बाकी 800 से अधिक टैंक सुरक्षित हो सकते हैं। </p>
<p>इधर, सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही में चार ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए और कई बाल-बाल बचे, फिर भी कंपनी पर शिकंजा नहीं कसा गया। जल शक्ति मंत्री के निर्देश पर महकमे ने छोटे-बड़े अफसरों को तो सस्पेंड कर दिया, मगर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने से हाथ पीछे खींचे जा रहे हैं। प्रशासन के स्तर से केवल जिले में कंपनी की ओर से बनाए गए सभी ओवरहेड टैंक की जांच कराने की बात कही जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 15:04:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: पुराने बस अड्डे पर बनेगा चार्जिंग स्टेशन, बेड़े में शामिल होंगी 25 ई-बसें</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में परिवहन निगम ने कदम बढ़ा दिए हैं। पुराने बस अड्डे पर ई-बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही परिवहन निगम के बेड़े में जल्द ही 25 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी।</p>
<p>बरेली डिपो के एआरएम संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि चार्जिंग स्टेशन तैयार होने के बाद ई-बसों का संचालन सुचारु रूप से किया जा सकेगा। इससे डीजल बसों पर निर्भरता कम होगी और शहर में प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। ई-बसों के संचालन से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582375/a-charging-station-will-be-built-at-the-old-bus-stand--and-25-e-buses-will-be-added-to-the-fleet"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/rd.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong>शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में परिवहन निगम ने कदम बढ़ा दिए हैं। पुराने बस अड्डे पर ई-बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही परिवहन निगम के बेड़े में जल्द ही 25 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी।</p>
<p>बरेली डिपो के एआरएम संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि चार्जिंग स्टेशन तैयार होने के बाद ई-बसों का संचालन सुचारु रूप से किया जा सकेगा। इससे डीजल बसों पर निर्भरता कम होगी और शहर में प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। ई-बसों के संचालन से यात्रियों को भी बेहतर, आरामदायक और आधुनिक परिवहन सुविधा मिल सकेगी। </p>
<p>चार्जिंग स्टेशन पर एक साथ कई बसों को चार्ज करने की व्यवस्था की जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर ई-बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। नगर निगम का दावा है कि इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी मजबूत होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 14:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: नदी किनारे गांवों की सुरक्षा के लिए 11.65 करोड़ मंजूर, रामगंगा और किच्छा किनारे होगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> मानसून के दौरान रामगंगा, किच्छा और बहगुल नदियों के उफान से होने वाले कटान और फसलों की बर्बादी को रोकने के लिए शासन ने बड़ी राहत दी है। विभाग के प्रस्ताव पर चार बड़ी परियोजनाओं के लिए 11.65 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति देने के साथ तत्काल काम शुरू कराने के लिए 10.11 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया है। बाढ़ खंड के अभियंताओं को मानसून से पहले सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>शासन से रामगंगा नदी के बाएं किनारे पर स्थित ग्राम गौतारा, पिथुपुरा और मुर्शिदाबाद आदि को बाढ़ व कटान से बचाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582362/%E2%82%B911-65-crore-sanctioned-for-the-protection-of-villages-along-riverbanks--work-to-be-undertaken-along-the-ramganga-and-kichha-rivers"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/ramganga.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> मानसून के दौरान रामगंगा, किच्छा और बहगुल नदियों के उफान से होने वाले कटान और फसलों की बर्बादी को रोकने के लिए शासन ने बड़ी राहत दी है। विभाग के प्रस्ताव पर चार बड़ी परियोजनाओं के लिए 11.65 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति देने के साथ तत्काल काम शुरू कराने के लिए 10.11 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया है। बाढ़ खंड के अभियंताओं को मानसून से पहले सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>शासन से रामगंगा नदी के बाएं किनारे पर स्थित ग्राम गौतारा, पिथुपुरा और मुर्शिदाबाद आदि को बाढ़ व कटान से बचाने के लिए 3.61 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति मिली है, इसके लिए 2.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नाबार्ड पोषित मद के अंतर्गत रामगंगा नदी के दाएं किनारे पर बसे गुर्जर गौटिया, धिमरपुर तथा बेहरा आदि गांवों को सुरक्षित करने के लिए 3.50 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है। 3.36 करोड़ की धनराशि जारी कर दी गई है।</p>
<p>वहीं, किच्छा नदी के दाएं किनारे पर स्थित बकौली, बहुदनपुर और नवायत आदि गांवों को बाढ़ की चपेट में आने से बचाने के लिए 3.25 करोड़ की परियोजना स्वीकृत हुई है। 3.06 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा पूर्वी बहगुल नदी के दाएं किनारे पर बसे खाताकिशनपुर, गौटिया, टिसुआ आदि गांवों के लिए शासन से 1.29 करोड़ की योजना स्वीकृत कर 1.24 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अमित किशोर ने बताया कि कुछ कार्यों के लिए बजट पहले ही मिल चुका था, जिनका पर काम वर्तमान में चल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 13:07:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>

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