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                <title>Special Articles - Amrit Vichar</title>
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                            <item>
                <title>दाखिले की दौड़ और बढ़ती फीस का बोझ </title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats289.jpg" alt="cats" width="153" height="191" />
<strong>धनीश शर्मा, लेखक</strong>

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">बारहवीं का रिजल्ट आते ही कॉलेजों में दाखिले की दौड़ शुरू हो जाती है। कोई छात्र इंजीनियर बनने का सपना लेकर आगे बढ़ता है, कोई डॉक्टर बनने की तैयारी में जुट जाता है, तो कोई चार्टेड अकाउंटेंट या यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख करता है। हर छात्र अपने भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद के साथ नए सफर की शुरुआत करता है। बच्चों से ज्यादा चिंता उनके माता-पिता को होती है। आज के समय में बारहवीं के बाद लगभग हर प्रोफेशनल कोर्स की फीस लगातार बढ़ती जा रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">इंजीनियरिंग,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582332/the-race-for-admissions-and-the-burden-of-rising-fees"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/072.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats289.jpg" alt="cats" width="153" height="191"></img>
<strong>धनीश शर्मा, लेखक</strong>

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">बारहवीं का रिजल्ट आते ही कॉलेजों में दाखिले की दौड़ शुरू हो जाती है। कोई छात्र इंजीनियर बनने का सपना लेकर आगे बढ़ता है, कोई डॉक्टर बनने की तैयारी में जुट जाता है, तो कोई चार्टेड अकाउंटेंट या यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख करता है। हर छात्र अपने भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद के साथ नए सफर की शुरुआत करता है। बच्चों से ज्यादा चिंता उनके माता-पिता को होती है। आज के समय में बारहवीं के बाद लगभग हर प्रोफेशनल कोर्स की फीस लगातार बढ़ती जा रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और अन्य कोर्स करने में कई बार 10 से 15 लाख रुपये या उससे भी अधिक खर्च हो जाता है। मध्यम आय वाले परिवार किसी तरह अपनी बचत, कर्ज या शिक्षा ऋण के सहारे इन महंगे कोर्सों की फीस वहन कर पाते हैं। बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए कई माता-पिता अपनी जरूरतों में भी कटौती करने को मजबूर हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कोविड महामारी के बाद शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन क्लास और तकनीकी संसाधनों की जरूरत ने भी अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाला। मोबाइल फोन, लैपटॉप और इंटरनेट जैसी सुविधाएं अब पढ़ाई का हिस्सा बन चुकी हैं। ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले कई परिवारों के लिए इन सुविधाओं का खर्च उठाना मुश्किल साबित हुआ। इससे शिक्षा में असमानता भी बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों की फीस लाखों रुपये तक पहुंच चुकी है। कई छात्र शिक्षा ऋण लेकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी मिलने तक कर्ज का दबाव युवाओं को मानसिक तनाव में डाल देता है। कई बार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण प्रतिभाशाली छात्र अपनी पसंद का कोर्स भी नहीं कर पाते।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण को इस समस्या का प्रमुख कारण माना जा रहा है। आज कई निजी संस्थान शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि कमाई का माध्यम मानने लगे हैं। बड़े-बड़े भवन, एयर कंडीशन क्लासरूम और आधुनिक सुविधाओं का प्रचार कर अभिभावकों को आकर्षित किया जाता है, हालांकि बेहतर सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन इनके नाम पर अत्यधिक फीस वसूली आम परिवारों के लिए परेशानी पैदा कर रही है। कई अभिभावकों का मानना है कि शिक्षा अब धीरे-धीरे केवल संपन्न वर्ग तक सीमित होती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">महंगी शिक्षा का असर केवल आर्थिक स्थिति पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इसका मानसिक प्रभाव भी दिखाई देता है। माता-पिता बच्चों की पढ़ाई के खर्च को लेकर लगातार तनाव में रहते हैं। कई लोग अतिरिक्त नौकरी या ओवरटाइम करने को मजबूर हो जाते हैं। दूसरी ओर छात्र भी परिवार की आर्थिक स्थिति को समझते हुए दबाव महसूस करते हैं। इससे पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए तो निजी संस्थानों पर निर्भरता कम हो सकती है। अच्छी शिक्षा केवल महंगे संस्थानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सरकार द्वारा फीस नियंत्रण, छात्रवृत्ति योजनाओं और गरीब तथा मध्यम वर्ग के छात्रों को आर्थिक सहायता देने जैसे कदमों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता भी जरूरी है, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। यदि शिक्षा लगातार महंगी होती गई तो समाज का एक बड़ा वर्ग इससे प्रभावित होगा। देश की प्रगति तभी संभव है जब हर बच्चे को उसकी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर समान अवसर मिलें।<strong> (ये लेखक के निजी विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
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                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 07:43:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामयिकी : भारत-यूएई व्यापारिक साझेदारी की ऊंची उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/071.jpg" alt="0" width="137" height="142" />
<strong>अरविंद जयतिलक लेखक</strong>

<p>  </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्ते को मिठास से भर दिया है। दोनों देशों ने कई अहम समझौतों पर मुहर लगाकर रिश्ते को नई ऊंचाई दी है। यूएई की कंपनियों द्वारा भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश का एलान किया गया है। यह पहल भारत के विकास के प्रति यूएई की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूत करने पर हामी भरी है। इसके तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग, उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रक्षिक्षण, सैन्य सहयोग, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर विशेष रुप से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582331/current-affairs--the-high-flight-of-the-india-uae-trade-partnership"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/.=3.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/071.jpg" alt="0" width="137" height="142"></img>
<strong>अरविंद जयतिलक लेखक</strong>

<p> </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्ते को मिठास से भर दिया है। दोनों देशों ने कई अहम समझौतों पर मुहर लगाकर रिश्ते को नई ऊंचाई दी है। यूएई की कंपनियों द्वारा भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश का एलान किया गया है। यह पहल भारत के विकास के प्रति यूएई की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूत करने पर हामी भरी है। इसके तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग, उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रक्षिक्षण, सैन्य सहयोग, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर विशेष रुप से सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण और कौशल विकास पर भी समझौते हुए हैं। दोनों देश सुपर कंप्यूटिंग और डिजिटल व्यापार क्षेत्र में भी एक-दूसरे की मदद करेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि वर्ष के प्रारंभ में दोनों देश एफएटीएफ अर्थात फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के फ्रेमवर्क के तहत मनी लान्ड्रिंग विरोधी और आतंकवाद फाइनेंस के तहत सहयोग पर पहले ही सहमति जता चुके हैं। दोनों देश रक्षा, एआई डिजिटल सहयोग, खाद्य सुरक्षा, अंतरिक्ष और निवेश में भी एक-दूसरे से कंधा जोड़े हुए हैं। उम्मीद है कि वर्ष 2032 तक दोनों देशों के साझा कारोबार 200 अरब डॉलर तक पहुंच जाएंगे। आज की तारीख में दोनों देशों के बीच एक सौ अरब डॉलर से अधिक का कारोबार हो रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">यूएई गुजरात के धोलेरा में मेगा निवेश के साथ गिफ्ट सिटी में फर्स्ट आबूधाबी बैंक और डीपी वर्ल्ड का ऑफिस बनाने को तैयार है। गौर करें तो दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते लगातार नई ऊंचाई छू रहे हैं और समय की कसौटी पर खरे हैं। गत वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा के दौरान भी दोनों देश आर्थिक क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल करते हुए अपनी करेंसी रुपये और दरहम में व्यापार समझौता शुरू करने पर सहमत हुए थे। आरबीआई और संयुक्त अरब अमीरात के सेंट्रल बैंक के बीच संपन्न हुए समझौते के तहत दोनों बैंक एक फ्रेमवर्क तैयार करने पर सहमति जाहिर की, जिसमें क्रास-बार्डर ट्रांजैक्शन के लिए लोकल करेंसी का इस्तेमाल होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच बढ़ती प्रगाढ़ता कई मायने में महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक, राजनीतिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक व आर्थिक कारणों से अरब देश सदैव ही भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण  व केंद्र बिंदु रहे हैं। यह क्षेत्र भारत के विदेश नीति के रक्षा संबंधित पहलूओं को प्रभावित करता है और इसी को ध्यान में रख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात से निर्णायक संबंध जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह इसलिए भी आवश्यक है कि इस क्षेत्र में नए क्षेत्रीय कुटनीतिक-आर्थिक संबंध तेजी से बनते-बिगड़ते रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इन परिस्थितियों के बीच संयुक्त अरब अमीरात की भारत से बढ़ती प्रगाढ़ता अति महत्वपूर्ण है। अच्छी बात है कि संयुक्त अरब अमीरात संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन कर चुका है। दोनों देश आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में साथ मिलकर चलने का भी संकल्प ले चुके हैं। फिलहाल भारत को अरब देशों से ऐसे दीर्घकालिक एवं सुसंगत रणनीति के तहत काम करने की जरूरत है, ताकि वह इस क्षेत्र की अपेक्षाएं एवं सरोकार को फलीभूत कर सकें। अच्छी बात यह है कि भारत और यूएई दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण प्रतिरक्षा सहयोग बना हुआ है। जून 2003 में द्विपक्षीय प्रतिरक्षा आदान-प्रदान के लिए संयुक्त प्रतिरक्षा सहयोग समिति यानी ज्वाइंट डिफेंस को-ऑपरेशन कमेटी के गठन के लिए एक मसौदे पर हस्ताक्षर भी किए गए।  (ये लेखक के निजी विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 06:36:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्रिकेट की 'कैश मशीन' की रफ़्तार हो रही धीमी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><em><strong>विज्ञापन पर सख़्ती से टीमों के लिए कमर्शियल पिच पर खुल कर खेलना मुश्किल हो गया है। क्या आईपीएल का आर्थिक स्वर्णकाल स्थिरता के दौर में प्रवेश कर रहा है?</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats288.jpg" alt="cats" width="141" height="179" />
<strong>संजय श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p style="text-align:justify;">बार्क इंडिया और टैम स्पोर्ट्स की रिपोर्ट कहती है कि आईपीएल की पहले फेज में टीवी रेटिंग्स 19 फीसद घट गई और औसत व्यूवरशिप में 26 फीसद की गिरावट आई। टीवी रेटिंग्स घटने से विज्ञापनदाता कम हुए। मैच के दौरान आने वाले टीवी विज्ञापनों में भी 31 प्रतिशत की कमी आई। पिछले सीजन में 65 से ज्यादा ब्रांड्स आईपीएल के साथ थे, तो इस सीजन में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582330/cricket-s--cash-machine--is-slowing-down"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/070.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><em><strong>विज्ञापन पर सख़्ती से टीमों के लिए कमर्शियल पिच पर खुल कर खेलना मुश्किल हो गया है। क्या आईपीएल का आर्थिक स्वर्णकाल स्थिरता के दौर में प्रवेश कर रहा है?</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats288.jpg" alt="cats" width="141" height="179"></img>
<strong>संजय श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p style="text-align:justify;">बार्क इंडिया और टैम स्पोर्ट्स की रिपोर्ट कहती है कि आईपीएल की पहले फेज में टीवी रेटिंग्स 19 फीसद घट गई और औसत व्यूवरशिप में 26 फीसद की गिरावट आई। टीवी रेटिंग्स घटने से विज्ञापनदाता कम हुए। मैच के दौरान आने वाले टीवी विज्ञापनों में भी 31 प्रतिशत की कमी आई। पिछले सीजन में 65 से ज्यादा ब्रांड्स आईपीएल के साथ थे, तो इस सीजन में 44 रह गए। 44 ब्रांड्स ने नाता तोड़ा और महज 24 नए जुड़े, हालांकि जिओ स्टार का दावा कि आईपीएल की रीच बढ़ कर 110 करोड़ पार हो गई, सच हो सकता है, क्योंकि रीजनल भाषा में कमेंट्री सुनने वालों में 45 फीसद की बढ़ोतरी हुई है, पर मोबाइल पर दर्शक बढ़ने का मतलब प्रतियोगिता या आयोजन का सफल होना या उसकी कुल कमाई, मुनाफा बढ़ना नहीं है। घाटे के इस भय को चमकदार प्रचार के नीचे छिपाना अब कुछ कठिन हो गया है?    </p>
<p style="text-align:justify;">साल 2008 में, 'अंडरडॉग' मानी जाने वाली राजस्थान रॉयल्स ने पहले ही टूर्नामेंट को जीतकर सबको चौंका दिया था। उस समय इंडियन प्रीमियर लीग की वह सबसे कम वैल्यू वाली क्रिकेट टीम थी। टीम के उत्साहित मालिक मनोज बदाले ने 2020 में प्रकाशित अपनी किताब ‘ए न्यू इनिंग्स' में लिखा कि खिलाड़ियों को बधाई देने के लिए जब मैं पिच पर उतरा, तो मेरे साथ आए एक वेंचर कैपिटलिस्ट बिज़नेस पार्टनर ने थोड़ा मज़ाकिया अंदाज़ में कहा था, ‘शायद अब इसे बेचने का समय आ गया है!’ हालांकि, बदाले ने लगभग दो दशकों तक टीम को अपने पास ही रखा, लेकिन अब आईपीएल के पुराने निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफ़ा कमा रहे हैं, क्योंकि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि लीग की कमर्शियल रफ़्तार अब धीमी पड़ने लगी है। </p>
<p style="text-align:justify;">जब बदाले ने लाचलन मुर्डोक और रेड बर्ड कैपिटल पार्टनर के साथ मिलकर आईपीएल की शुरुआती आठ फ्रेंचाइज़ियों में से सबसे सस्ती फ्रेंचाइज़ी को सिर्फ़ 67 मिलियन डॉलर में खरीदा था, तब से लेकर अब तक टीम की वैल्यूएशन में ज़बरदस्त उछाल आया है। मगर अब बदाले भी लगभग 1.65 अरब डॉलर की एक डील में टीम का कंट्रोल, स्टील टाइकून लक्ष्मी मित्तल के परिवार और वैक्सीन अरबपति अदार पूनावाला जैसे लोगों के एक ग्रुप को बेच कर 'माइनॉरिटी शेयरहोल्डर' बन गए। ड्रिंक्स की दिग्गज कंपनी ड्याजिओ जिसने कभी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को अपने सबसे ‘ताक़तवर ब्रांड्स’ में से एक बताया था, उसने भी मार्च में अपनी टीम को 1.8 अरब डॉलर में बेचने पर सहमति जताई। यह डील ब्लैकस्टोन और भारतीय टाइकून कुमार मंगलम बिड़ला जैसे लोगों के एक कंसोर्टियम के साथ हुई ।</p>
<p style="text-align:justify;">जब इंडियन प्रीमियर लीग को शुरुआत में क्रिकेट की परंपरागत आत्मा के विरुद्ध ‘मनोरंजन आधारित प्रयोग’ माना गया, इसको लेकर शुद्धतावादियों के मन में कुछ शंकाएं उभरीं। पुराने क्रिकेट फ़ैन्स को रंगीन कपड़ों, तेज़ म्यूज़िक और खेल के इस आक्रामक अंदाज़ से काफ़ी हैरानी और नाराज़गी तो हुई, लेकिन वे आशंकाएं बहुत जल्द ग़लत साबित हो गईं। आईपीएल ने क्रिकेट की कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था को बदला और इस खेल पर भारत के वैश्विक राजनीतिक दबदबे को मज़बूत किया। </p>
<p style="text-align:justify;">यह बॉलीवुड के तमाशे को अमेरिकी-शैली के खेल प्रचार और ब्रांडिंग के साथ का मिश्रण बना, जिसमें चीयर लीडर्स और स्टेडियम को गुंजा देने वाले साउंडट्रैक भी शामिल हैं। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत की नई उपभोक्ता अर्थव्यवस्था, मनोरंजन उद्योग, डिजिटल स्ट्रीमिंग और कॉरपोरेट पूंजी का सबसे चमकदार संगम बन गया। इंडियन प्रीमियर लीग भारतीय क्रिकेट की ‘कैश मशीन’ बन गई, लेकिन अब संकेत मिलने लगे हैं कि इस सुनहरे मॉडल की रफ्तार धीमी पड़ रही है। प्रसारण और स्ट्रीमिंग अधिकारों की अगली नीलामी को लेकर उत्साह पहले जैसा नहीं दिख रहा, विज्ञापन बाज़ार पर नियामकीय दबाव बढ़ रहा है और लीग की व्यावसायिक संरचना कई नई चुनौतियों का सामना कर रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या आईपीएल का आर्थिक स्वर्णकाल अब स्थिरता के दौर में प्रवेश कर रहा है, या यह केवल अस्थायी मंदी है। हर तेज़ उछाल एक समय के बाद स्थिरता की सीमा तक पहुंचता है। 2008 से 2023-27 के मीडिया अधिकार चक्र तक आईपीएल की कमाई लगभग छह गुना बढ़ी, किंतु अब अनुमान है कि अगली नीलामी लगभग 5.4 अरब डॉलर के आसपास ही ठहर सकती है। इसका कारण केवल बाजार की थकान नहीं, बल्कि वह बदलता डिजिटल परिदृश्य भी है, जिसने पिछले दशक की विस्फोटक वृद्धि को संभव बनाया था। </p>
<p style="text-align:justify;">2022 में रिलायंस समर्थित वायकॉम-18 और डिज्नी स्टार के बीच जो आक्रामक बोली युद्ध हुआ था, उसने कीमतों को असाधारण स्तर तक पहुंचा दिया। अब जब मीडिया कंपनियों के बीच विलय और पुनर्गठन हो चुके हैं, वैसी प्रतिस्पर्धा की संभावना कम दिखती है। अमेजन और नेटफ्लिक्स जैसे वैश्विक मंच अभी भी भारतीय क्रिकेट के प्रसारण अधिकार खरीदने के लिए उतने आक्रामक नहीं हैं, जितनी उम्मीद की जा रही थी। (ये लेखक के निजी विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
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                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 06:27:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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                <title>‘ड्रैगन’ के दबाव में क्यों आए ‘अंकल सैम'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><em><strong>रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होंगे। जो डोनाल्ड ट्रंप को चीन की तरफ से बड़ा जवाब होगा।</strong></em></p>
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<strong>नवीन गुप्ता, बरेली</strong>

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे से वापस जा चुके हैं। इस दौरे से अमेरिका को बड़ी उम्मीदें थीं। ट्रंप को लगा था कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ईरान के विरुद्ध राजी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चीन को रूस से दूर ले जाने की उनकी कोशिश भी नाकामयाब हो गई। रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582329/why-did--uncle-sam--bow-to--the-dragon-s--pressure"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats287.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><em><strong>रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होंगे। जो डोनाल्ड ट्रंप को चीन की तरफ से बड़ा जवाब होगा।</strong></em></p>
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<strong>नवीन गुप्ता, बरेली</strong>

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे से वापस जा चुके हैं। इस दौरे से अमेरिका को बड़ी उम्मीदें थीं। ट्रंप को लगा था कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ईरान के विरुद्ध राजी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चीन को रूस से दूर ले जाने की उनकी कोशिश भी नाकामयाब हो गई। रूस के राष्ट्रपति इसी माह चीन के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होंगे। जो डोनाल्ड ट्रंप को चीन की तरफ से बड़ा जवाब होगा। हां, ट्रंप के इस दौरे से एक बात तो स्पष्ट रूप से साफ हो गई कि अमेरिका अब चीन के आगे न सिर्फ झुकने के लिए तैयार है, बल्कि कुछ मुद्दों पर उसकी हां में हां मिलाने को तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ताइवान की सुरक्षा का मुद्दा। चीन ने ताइवान का साथ देने पर अमेरिकी राष्ट्रपति को आंखें क्या दिखाईं, ट्रंप ने तत्काल बयान दे दिया कि वे ताइवान को आजाद होता नहीं देखना चाहते। उनके इस बयान से चीन तो खुश हो गया, लेकिन अमेरिका के खास दोस्त जापान भी ताइवान के साथ मायूस हुआ है, हालांकि ताइवान के राष्ट्रपति ने अपने चिरपरिचत अंदाज में ट्रंप और जिनपिंग को यह बता दिया कि उन्हें अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका देश पहले से ही संप्रभु राष्ट्र है और रहेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप के दौरे ने पूरी दुनिया को यह बता दिया कि अब अमेरिकी पहल पर गठित किए गए चार देशों के समूह क्वाड का अस्तित्व मिटने वाला है। साथ ही अमेरिका को अब भारत की जरूरत बहुत ज्यादा नहीं रह गई है। पहले अमेरिका चीन को दबाने के लिए भारत की हर स्तर पर सहायता करता था, लेकिन अब उसे प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रहा है, ऐसे में भारत को झुकाने में पूरी ऊर्जा लगाने में जुटा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दौर था तब चीन को अमेरिका अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता था और उसकी सभी सरकारें चीन के खिलाफ भारत को विकल्प के रूप में तैयार करतीं थीं, इसीलिए चीन के मुकाबले अमेरिका भारत को मजबूत आर्थिक ताकत बनाने में मदद कर रहा था। भारत जितना सामरिक और व्यापारिक रूप से मजबूत होता, चीन का दबदबा उतना ही कम होता, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अब अमेरिका की कूटनीति को बदल दिया है। उनका लक्ष्य चीन को नहीं, बल्कि भारत को रोकना है, ताकि वह आर्थिक रूप से समृद्ध राष्ट्र न बन सके और चीन की तरह उसके मुकाबले न खड़ा हो पाए। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी नीति में आए बदलाव को भारत की कूटनीति के लिए किसी झटके से कम नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि अमेरिका अब भी चीन के मुकाबले उसे मजबूत करेगा। अमेरिका ने पहले चीन के लिए अपने बाजार को खोले रखा। उसकी व्यापार नीति का समर्थन किया। परिणाम स्वरूप चीन पूरी दुनिया में व्यापारिक रूप से मजबूत हो गया, तो अमेरिका को समझ में आया कि उसने अपने लिए ही गड्ढा खोद लिया, इसलिए उसने भारत को आगे बढ़ाने की कोशिश की पर अब खुद ही कह रहा है कि वह भारत को प्रतिद्वद्वी के रूप में खड़ा होते हुए नहीं देखना चाहता है। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी नीति को भारत समझ चुका है, इसीलिए वह दुनिया के तमाम देशों और संगठनों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रहा है, लेकिन भारत के लिए एक मुश्किल खड़ी होने जा रही है, वह है अमेरिका और चीन द्वारा जी-2 के रूप में बनाया जा रहा गठजोड़। अमेरिका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र हो या अन्य कोई मंच, जो भी फैसले लेने हों, दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां चीन और अमेरिका ही मिलकर लें। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की इस कोशिश पर निगाह तो पूरी दुनिया की है। अब देखना है कि उनके द्वारा फेंके गए इस जाल में चीन कितना फंसता है, इसीलिए ट्रंप ने टकराव का रास्ता छोड़कर चीन को महाशक्ति के रूप में स्वीकार कर लिया है। वह चाहते हैं कि ईरान के मुद्दे पर चीन पूरी तरह चुप्पी साध ले। चीन और अमेरिका की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए बहुत अच्छा नहीं होगा, क्योंकि चीन तो पहले से ही पाकिस्तान की हर क्षेत्र में मदद कर रहा है और अमेरिका भी पाकिस्तान को शह  दे रहा है। रूस भी धीरे-धीरे पाकिस्तान के करीब जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में भारत के लिए फिलहाल अपनी कूटनीति को और धार देनी होगी। उधर, 19 से 20 मई तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन आ रहे हैं। चीन के साथ रूस कई अहम समझौते करने वाला है। अब देखना यह है कि ट्रंप चीन पर जो प्रभाव छोड़ गए हैं, जी-2 का उनके द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर वे कितना पानी फेर पाते हैं। दोनों देशों के बीच अमेरिका-ईरान तनाव, यूक्रेन युद्ध और ताइवान विवाद जैसे बड़े भू-राजनीतिक मुद्दों पर यहां चर्चा होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि ट्रंप ने खुद ही चीन के दबाव में ताइवान को आजादी का एलान न करने की चेतावनी दे दी है, ऐसे में चीन, रूसी राष्ट्रपति से भी चाहेगा कि वे ताइवान के मुद्दे पर खुलकर उसके साथ बयान दें, ताकि वह भविष्य में ताइवान को अपने में मिला सके। पुतिन का यह दौरा चीन-रूस मैत्री संधि की 25वीं सालगिरह पर होने जा रहा है। ऐसे में पुतिन भी जिनपिंग को खुश करने के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अब बात करें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी वाले समूह क्वाड की, तो अब अमेरिका चीनी दबाव में इसे निष्प्रभावी करने पर उतारू हो गया है। इसका लाभ चीन को मिलेगा, क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसके मुकाबले के लिए यह संगठन मजबूत हो। जापान पर वह पहले से ही आंखें तरेर रहा है और युद्ध की धमकी देता रहा है। रही बात भारत की तो वह पाकिस्तान का साथ देकर उसे कमजोर करने की भरपूर कोशिश कर ही रहा है। देखना होगा कि पुतिन भारत के लिए चीन में कितनी जमीन तैयार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 05:07:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छोटा हूं, पर समझ रखता हूं-मेरी बात भी सुनी जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>मेघा राठी(भोपाल):</strong> भारतीय समाज की संरचना में ‘छोटा’ कहलाना एक सामान्य बात है-चाहे वह सबसे छोटा बेटा हो, नई बहू हो या फिर परिवार में हाल ही में जुड़ा कोई सदस्य। यह शब्द उम्र या अनुभव का परिचायक भर नहीं रहता, बल्कि कई बार इसका अर्थ बन जाता है - कम समझदार, कम अधिकार रखने वाला या किसी निर्णय में भागीदार न समझा जाने वाला व्यक्ति।</p>
<p style="text-align:justify;">“तुम छोटे हो, तुम्हें नहीं समझ आएगा”-क्या यह वाक्य निष्पक्ष है? समाज में अनेक बार ऐसे वाक्य सुनने को मिलते हैं- “बड़े लोग फैसला करेंगे।” “तुम्हारा अनुभव नहीं है, चुप रहो।” “जैसा कहा जाए,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582293/i-am-small-but-i-understand-i-should-also"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(52)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मेघा राठी(भोपाल):</strong> भारतीय समाज की संरचना में ‘छोटा’ कहलाना एक सामान्य बात है-चाहे वह सबसे छोटा बेटा हो, नई बहू हो या फिर परिवार में हाल ही में जुड़ा कोई सदस्य। यह शब्द उम्र या अनुभव का परिचायक भर नहीं रहता, बल्कि कई बार इसका अर्थ बन जाता है - कम समझदार, कम अधिकार रखने वाला या किसी निर्णय में भागीदार न समझा जाने वाला व्यक्ति।</p>
<p style="text-align:justify;">“तुम छोटे हो, तुम्हें नहीं समझ आएगा”-क्या यह वाक्य निष्पक्ष है? समाज में अनेक बार ऐसे वाक्य सुनने को मिलते हैं- “बड़े लोग फैसला करेंगे।” “तुम्हारा अनुभव नहीं है, चुप रहो।” “जैसा कहा जाए, वैसा करो।” इन पंक्तियों के पीछे छिपा नजरिया न केवल किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता और संवेदनाओं की अवहेलना करता है, बल्कि उसके आत्मविश्वास को भी आघात पहुंचाता है। जब ‘छोटे’ की बातों ने बड़ा असर डाला।</p>
<p style="text-align:justify;">नई बहू का सजग सुझाव परिवार में नई बहू ने वृद्ध माता-पिता के लिए घर में एक शांत कोना बनाने का विचार साझा किया, जिससे उन्हें मानसिक सुकून मिल सके, लेकिन उसे यह कहकर टाल दिया गया-“तुम नई हो, इतना मत सोचो।” महीनों बाद, जब माता-पिता मानसिक तनाव से गुजरे, तब वही सुझाव अमल में लाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">छोटे भाई की डिजिटल दृष्टि- एक छोटे भाई ने पारंपरिक पारिवारिक व्यवसाय को डिजिटल माध्यम पर लाने की बात कही। प्रारंभ में उसकी बात को हल्के में लिया गया, परंतु जब व्यापार में गिरावट आई और उसी सुझाव को अपनाया गया, तब व्यवसाय ने नई ऊंचाइयां छू लीं।</p>
<p style="text-align:justify;">बेटी की निश्छल संवेदना- माता-पिता के झगड़ों के बीच एक छोटी उम्र की बेटी ने मां से सहजता से पूछा, “क्या आपने पापा से खुलकर बात की?” -यह प्रश्न रिश्तों की गुत्थी को खोलने की कुंजी बन गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे छोटे बेटे की संकल्पशक्ति- जब परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था और सभी प्रयास निष्फल हो चुके थे, तब सबसे छोटे बेटे ने फ्रीलांसिंग से आय बढ़ाने का सुझाव दिया। उसका विश्वास और नई सोच परिवार को संकट से निकाल लाई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>छोटा होना क्या नहीं होता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह कम समझदारी का प्रमाण नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कम भावनात्मक गहराई का संकेत नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कम अधिकार या सम्मान का कारण नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">‘छोटा’ व्यक्ति नई दृष्टि, संवेदना और निर्भीक विचारों के साथ परिवार को ऐसा मार्ग दिखा सकता है, जो अनुभवों की गठरी से भरे बड़े भी कभी-कभी नहीं देख पाते।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ों की भूमिका- मार्गदर्शक, न कि निर्णायक मात्र<br />सुनिए, टालिए नहीं-छोटों की बातों को सिर्फ उम्र या अनुभव से कमतर न आंकें।</p>
<p style="text-align:justify;">मार्गदर्शन दीजिए, नियंत्रण नहीं- सहयोग करें, पर निर्णय लेने का अवसर भी दें।</p>
<p style="text-align:justify;">साझेदारी बढ़ाइए- ऐसा वातावरण बनाइए, जहां हर सदस्य अपनी बात निडरता से कह सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />परिवार का सौंदर्य तभी पूर्ण होता है, जब हर सदस्य -चाहे वह कितना भी ‘छोटा’ क्यों न हो-सुना जाए, समझा जाए और सम्मानित किया जाए। छोटा होना किसी भी दृष्टि से कमजोरी नहीं, बल्कि नई ऊर्जा, नए विचार और निर्मल भावनाओं का प्रतीक है। आइए, छोटों को केवल पालन-पोषण का विषय न मानें -उन्हें सम्मान, संवाद और विश्वास का भी समान अधिकार दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:58:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Satire: बाइक पर मोबाइल योग! कान-कंधे के बीच फोन दबाकर नया आसन, साइड इफेक्ट की 100% गारंटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="4CTOPBoxLight" style="text-align:justify;" align="center"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>लखनऊः </strong>योगगुरु ने कभी ये सोचा भी नहीं की होगा कि जिस आम पब्लिक को खुले वातावरण मे जमीन पर चद्दर बिछाकर और फिर उस पर बैठकर योग करने की सलाह वह दे रहे हैं</span><span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक दिन वही पब्लिक अपने दम पर एक नई योग मुद्रा की खोज कर लेगी और उसे बिल्कुल नए कलेवर में लोगो के समक्ष प्रस्तुत करेगी। पहले इस नव योग से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें समझ लें। इस योग की न्यूनतम अहर्ता ये है कि आपके पास दो पहिया वाहन हो। </span></span></p>
<p class="4CTOPBoxLight" style="text-align:justify;" align="center"><span><span lang="hi" xml:lang="hi">दो पहिये से मेरा तात्पर्य समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह से कतई नहीं</span></span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582291/satire--mobile-yoga-on-a-bike--a-new-posture--with-your-phone-pressed-between-your-ear-and-shoulder--100--guaranteed-no-side-effects"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(51)1.png" alt=""></a><br /><p class="4CTOPBoxLight" style="text-align:justify;" align="center"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>लखनऊः </strong>योगगुरु ने कभी ये सोचा भी नहीं की होगा कि जिस आम पब्लिक को खुले वातावरण मे जमीन पर चद्दर बिछाकर और फिर उस पर बैठकर योग करने की सलाह वह दे रहे हैं</span><span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक दिन वही पब्लिक अपने दम पर एक नई योग मुद्रा की खोज कर लेगी और उसे बिल्कुल नए कलेवर में लोगो के समक्ष प्रस्तुत करेगी। पहले इस नव योग से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें समझ लें। इस योग की न्यूनतम अहर्ता ये है कि आपके पास दो पहिया वाहन हो। </span></span></p>
<p class="4CTOPBoxLight" style="text-align:justify;" align="center"><span><span lang="hi" xml:lang="hi">दो पहिये से मेरा तात्पर्य समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह से कतई नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटर साइकिल से है। मोटर साइकिल कोई भी हो सकती है</span>- <span lang="hi" xml:lang="hi">हीरो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">होंडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बजाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुलेट से लेकर स्कूटी तक। इस योग में पुरुष और महिलाओं दोनों की बराबर की भागीदारी हो सकती है। योग का ये आसन जमीन से दो तीन फुट ऊपर होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर आसीन हो इसे अंजाम दिया जाता है। इसके लिए कोई निश्चित टाइमिंग भी नहीं होगी। अनुलोम विलोम की तर्ज पर इसे कभी भी किया जा सकता है। </span></span></p>
<p class="4CTOPBoxLight" style="text-align:justify;" align="center"><span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस योग की शुरुआत तब होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब आप अपनी बाइक पर सवार हो कही जा रहे हों और उसी वक्त आपकी जेब में रखा एंड्राइड फोन बज उठे। अब आपको करना ये होता है कि पहले तो हैंडल से एक हाथ छोड़कर आपको पैंट की किसी जेब से रखा अपना मोबाइल निकालना होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर दाहिने कंधे को थोड़ा ऊपर उचकाकर और गर्दन को दाई तरह नीचे की ओर लगभग</span> 45 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री पर मोड़ कर कान व कंधे के बीच मोबाइल को फसाना होता है और इस तरह से आप द्वारा जिस योग की शुरुआत होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे सरल शब्दों में मोबाइल योग कहते है। यदि फोन पर कोई आत्मीय जन हो और वार्ता लंबी करनी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही क्रम आप दाएं भाग को आराम देने के उद्देश्य से बाएं कंधे व बाएं कान के बीच मोबाइल दबाकर जितनी बार चाहे दोहरा सकते हैं।</span> </span></p>
<p class="textmatter" style="text-align:justify;" align="left"><span lang="hi" xml:lang="hi">बस एक गौर करने वाली बात ये है कि योग गुरु के प्रचलित योग के सभी आसनों में जहां साइड इफेक्ट की कोई गुंजाइश नहीं है</span><span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं इस योग में साइड इफेक्ट का भरपूर खतरा बना रहता है। इसीलिए इसको करने के दौरान आपको कुछ सावधानियां विशेष तौर पर बरतनी होती है</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">कंधे और कान के बीच की पकड़ जरा भी कमजोर न पड़ने पाए और न ही आपका ध्यान सामने सड़क पर आ रहने वाहनों पर से पल भर के लिए भी हटना चाहिए। क्योंकि इन दोनों परिस्थितियों में आप जरा सा चूके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आर्थिक क्षति के साथ साथ शारीरिक क्षति होने की शत प्रतिशत गारंटी है। इस योग के करते समय यदि आपकी मोबाइल क्षतिग्रस्त हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दो</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">चार दिन मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर की दौड़ लगाकर इसे दुरुस्त कराया जा सकता है। परंतु इस योग के दौरान यदि कभी शरीर का कोई अंग</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">भंग होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दुबारा आप अपनी बाइक पर बैठकर ये योग करने लायक रहेंगे या फिर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये आपके वाहन की गति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क की तत्कालीन स्थिति व जीवन के संचित कर्मों पर निर्भर करेगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:47:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लधुकथा :  मां का इंतजार... हर ट्रेन में खोजता रहा अबोध बालक, मगर मां अब इस दुनिया में नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>कल किसी रिश्तेदार को छोड़ने रेलवे स्टेशन जाना हुआ। वहां कुछ बच्चे आपस में लड़-झगड़ रहे थे। तभी रेलवे पुलिस ने डांटते हुए हुए उन बच्चों को वहां से भगाना शुरू कर दिया- “चलो, चलो… सब यहां से भागो।”</p>
<p style="text-align:justify;">बाकी बच्चे तो डरकर भाग गए, मगर एक दुबला-पतला मासूम बालक वहीं प्लेटफॉर्म के कोने में बैठा रहा। पुलिस वाले ने उसे भी डांटकर भगाना चाहा, पर वह भोली आंखों से उनकी ओर देखकर बोला- “मैं नहीं जाऊंगा… मैं अपनी मां का इंतजार कर रहा हूं।” पुलिस वाले ने हैरानी से पूछा, “कहां है तुम्हारी मां?” बच्चे ने मासूमियत से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582290/short-story--waiting-for-his-mother----an-innocent-child-searches-for-her-in-every-train--but-her-mother-is-no-longer-in-this-world"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(50)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>कल किसी रिश्तेदार को छोड़ने रेलवे स्टेशन जाना हुआ। वहां कुछ बच्चे आपस में लड़-झगड़ रहे थे। तभी रेलवे पुलिस ने डांटते हुए हुए उन बच्चों को वहां से भगाना शुरू कर दिया- “चलो, चलो… सब यहां से भागो।”</p>
<p style="text-align:justify;">बाकी बच्चे तो डरकर भाग गए, मगर एक दुबला-पतला मासूम बालक वहीं प्लेटफॉर्म के कोने में बैठा रहा। पुलिस वाले ने उसे भी डांटकर भगाना चाहा, पर वह भोली आंखों से उनकी ओर देखकर बोला- “मैं नहीं जाऊंगा… मैं अपनी मां का इंतजार कर रहा हूं।” पुलिस वाले ने हैरानी से पूछा, “कहां है तुम्हारी मां?” बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया- “बाबूजी ने कहा है कि मां गांव गई है, ट्रेन से वापस आएगी। मैं रोज यहां उसे लेने आता हूं।” उसकी बातें सुनकर आसपास खड़े लोगों की आंखें नम हो गईं। वह अबोध बालक, जिसने बचपन से अपनी मां का चेहरा तक नहीं देखा था, आज भी उसी उम्मीद में स्टेशन पर बैठा था। उसे क्या पता था कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है। दुनियादारी, झूठ और मजबूरियों से अनजान वह मासूम, हर आती-जाती ट्रेन में अपनी मां को खोज रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:42:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लधुकथा : गंगा आरती में मोबाइल vs मन की लड़ाई: वृद्धा की बात ने बदल दी रिया की आस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="textmatter" style="text-indent:0cm;text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>लखनऊः </strong>रिया जल्दी</span><span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">जल्दी दशाश्वमेध घाट की ओर बढ़ रही थी। आज उसे देर हो गई थी। गंगा आरती का समय हुआ जा रहा था। वह तो रोज की तरह समय से ही निकल रही थी मगर आज उसकी पांच वर्षीय छोटी बेटी मिनी ने एन मौके पर फरमान जारी कर दिया कि उसके लिए आलू की सब्जी बनाई जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौकी की सब्जी वह नहीं खाएगी। अब उसको गुस्सा तो बहुत आया कि उसे देर हो जाएगी मगर बच्ची का मन पूरा न करती तो कौन सा उसको सुकून मिलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तो आरती में भी उसका मन</span></span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582288/short-story--mobile-vs-mind-battle-at-ganga-aarti--old-woman-s-words-change-riya-s-faith"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(49).png" alt=""></a><br /><p class="textmatter" style="text-indent:0cm;text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>लखनऊः </strong>रिया जल्दी</span><span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">जल्दी दशाश्वमेध घाट की ओर बढ़ रही थी। आज उसे देर हो गई थी। गंगा आरती का समय हुआ जा रहा था। वह तो रोज की तरह समय से ही निकल रही थी मगर आज उसकी पांच वर्षीय छोटी बेटी मिनी ने एन मौके पर फरमान जारी कर दिया कि उसके लिए आलू की सब्जी बनाई जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौकी की सब्जी वह नहीं खाएगी। अब उसको गुस्सा तो बहुत आया कि उसे देर हो जाएगी मगर बच्ची का मन पूरा न करती तो कौन सा उसको सुकून मिलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तो आरती में भी उसका मन न लगता। उसने मिनी को सब्जी बनाकर दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर वह चैन से गंगा आरती के लिए चली।</span></span></p>
<p class="textmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दो साल से जब से रिया के पति का तबादला वाराणसी हुआ है</span><span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब से गंगा आरती में शामिल होना जैसे उसका नियम सा हो गया है। उसे इतना सुकून मिलता है यहां मानो पूरे दिन की थकान निकल जाती है उसकी और वह फिर से रिचार्ज हो जाती है। एक नई सुबह के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतस के सारे संताप मिट जाते हैं। इतना स्वर्गीय अनुभव है यहां की आरती का। धूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कपूर से सारा वातावरण महक जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी सुगंधित वायु कैसे उसकी सांसों को तरो ताजा कर देती है। एक साथ</span> 11 <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवादारों का शंख फूंकना मानो पूरा वातावरण ओम की ध्वनि से गुंजायमान हो गया हो और उसे शंखनाद से तो मानो उसके मस्तिष्क के सारे तनाव ही मिट जाते हों।</span> </span></p>
<p class="textmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर धूप धुएं से आरती ऐसा लगता है मानो पूरा वातावरण में बादल मंडरा रहे हो। यह दृश्य कितना अद्भुत होता है। मंत्रो का उच्चारण और फिर बाद में मां गंगा के लिए भजनों द्वारा मां का गुणगान सब कुछ कितना सुखद व आत्मा को तृप्त करने वाला एहसास होता है।</span><span> </span></p>
<p class="textmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज उसे देर हो गई है</span><span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सारी जगह तो घिर ही चुकी होगी। पीछे सीढ़ियों पर भी उसे बैठने की जगह मिलेगी या नहीं। यही सोचकर वह व्यथित हो रही थी। वह घाट पर पहुंचती है कि शंखनाद शुरू हो गया था। निर्धारित पुजारी आरती के लिए अपने</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">अपने उच्च आसनों पर खड़े हो गए थे। आरती के दर्शन के लिए सैकड़ों लोग एकत्रित हो गए थे। पैर रखने के लिए तिल भर जगह न थी। सभी गंगा आरती के अद्भुत दृश्य को देखने के लिए आतुर थे। रिया भी सीढ़ियों पर ही टिक गई। तभी एक लगभग</span> 70-75 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय बुजुर्ग महिला उसके पास आकर बैठने लगी। उसने उनको देखकर कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">अरे माताजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आप आगे बैठिए न</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यहां से तो कुछ भी नहीं दिखेगा। किसी से कह दीजिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपकी उम्र का लिहाज करके आपको जगह दे देंगे।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोग उन्हें देखकर उठने भी लगे। वह वृद्धा बोली</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">अरे बेटा</span>! <span lang="hi" xml:lang="hi">आगे पीछे बैठना तो सब मन का वहम है। गंगा आरती को तो मन में महसूस किया जाता है। मन में श्रद्धा हो तो इस पूरे देवीय वातावरण में ही गंगा मां का आशीर्वाद बरस रहा है। वाराणसी की पावन भूमि तो साक्षात स्वर्ग ही है। यह तो फोटो और सेल्फी लेने वालों की होड़ हो गई है कि आगे से अच्छी फोटो आएगी और सबको दिखाएंगे। इन्होंने तो गंगा आरती जैसे पवन कार्यक्रम को भी दिखावे की वस्तु बना दिया है अगर आगे पीछे वाले सभी लोग शांति से बैठकर आंखें मूंदकर महसूस करें तो एक</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">एक पल आनंदित हो जाए।</span>”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इधर</span><span>-</span><span lang="hi" xml:lang="hi">उधर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नजरें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दौड़ाई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पाया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सचमुच</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊंचे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">करके</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फोटो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यस्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वृद्धा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बातों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेरित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">होकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंखें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मूंदकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लगाया</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एहसास</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हुआ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मानो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गंगा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गोद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बैठी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गंगा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सैर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मां</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आशीर्वाद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बरस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अद्वितीय</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुभव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हुआ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गंगा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरती</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाहरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंखों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंखों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देखना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शुरू</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अलौकिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आनंद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्राप्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">होने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582288/short-story--mobile-vs-mind-battle-at-ganga-aarti--old-woman-s-words-change-riya-s-faith</link>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:37:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>कहानीः खुशियों के हत्यारे... अनवर कभी नहीं लौटेगा शाजिया की टूट गई दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>शौहर के बिना छोटे-छोटे बच्चों को लेकर एक सुंदर और जवान औरत के अकेले रहने में होंने वाली मुश्किलों के बारे में तो कोई शाजिया से पूछे। बेचारी शाजिया पिछले पांच सालों से सिकंदरपुर में अकेले ही रह रही है। उसका शौहर अनवर साल-दो साल में मुश्किल से एक बार परदेस से वापस सिकंदरपुर आ पाता है। मगर जब वह आता है, तो शाजिया के लिए ढेरों कपड़े, गहने, प्रसाधन का सामान आदि लाता है। इसके अतिरिक्त अपने बच्चों के लिए खूब बढ़िया डिजाइन के कपड़े और बैटरी -चालित खिलौने लेकर आता है। उन दिनों शाजिया और उसके छोटे-छोटे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582286/story--killers-of-happiness----anwar-will-never-return--shazia-s-world-is-shattered"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(48)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>शौहर के बिना छोटे-छोटे बच्चों को लेकर एक सुंदर और जवान औरत के अकेले रहने में होंने वाली मुश्किलों के बारे में तो कोई शाजिया से पूछे। बेचारी शाजिया पिछले पांच सालों से सिकंदरपुर में अकेले ही रह रही है। उसका शौहर अनवर साल-दो साल में मुश्किल से एक बार परदेस से वापस सिकंदरपुर आ पाता है। मगर जब वह आता है, तो शाजिया के लिए ढेरों कपड़े, गहने, प्रसाधन का सामान आदि लाता है। इसके अतिरिक्त अपने बच्चों के लिए खूब बढ़िया डिजाइन के कपड़े और बैटरी -चालित खिलौने लेकर आता है। उन दिनों शाजिया और उसके छोटे-छोटे बच्चों की खुशी देखने लायक होती है। ऐसा लगता है मानो जमाने भर की खुशियां शाजिया के आंगन में इकट्ठा हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अनवर एक-डेढ़ महीना अपने परिवार के साथ गुजारकर धन कमाने के लिए वापस परदेस लौट जाता है। उसे विदा करते समय शाजिया और उसके बच्चों का दुख हृदय विदारक होता है। अनवर के आने के बाद से ही शाजिया सुबह उठते और रात को अनवर के साथ सोते समय अनवर के साथ जीने के लिए बचे हुए दिन गिनना शुरू कर देती है और जब यह संख्या सिमट कर एक अंक में आ जाती है, तो शाजिया की आंखें बगावत पर उतर आती हैं और आंसुओं से शाजिया के गालों को तर-ब-तर करने लगती हैं। उसका फूल-सा चेहरा कुम्हलाने लगता है। वह अक्सर अपनी बेटी सलमा और बेटे साजिद को भी बताने लगती है कि अब तुम्हारे अब्बू के परदेस जाने में कुल इतने दिन शेष बचे हैं। पता नहीं अपने मासूम बच्चों को यह बताकर वह उन्हें उनके अब्बू से निकट भविष्य में होने वाली जुदाई के प्रति आगाह करती है अथवा अपना दु:ख कम करने के लिए वह ऐसा करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनवर के परदेस जाते ही गांव के कई मनचले शाजिया से हमदर्दी दिखाने और उससे रिश्ता जोड़कर नजदीक आने का प्रयास करने लगते हैं। मगर शाजिया उनकी बदनीयती को भली-भांति समझती है और इसीलिए उन्हें किसी प्रकार की मदद लेना तो दूर, उनको अपने पास तक नहीं फटकने देती है। </p>
<p style="text-align:justify;">शाजिया से निकाह के बाद पहली बार जब अनवर रोजी-रोटी के चक्कर में अपनी नवविवाहिता खूबसूरत पत्नी को अपनी बूढ़ी मां के सहारे छोड़ कर परदेस गया था, तो शाजिया प्रेगनेंट थी। इस हालत में शाजिया को छोड़कर जाने का उसका मन तो नहीं था, परंतु मजबूरी में उसे जाना ही पड़ा। पैतृक संपत्ति के नाम पर कुल दो बीघा खेत ही उसके पास था, जिसे गिरवीं रखकर उसने कैंसर से जूझ रहे अपने अब्बा का इलाज कराया था, फिर भी उनको मौत से बचा नहीं सका था। गांव में एक दिन काम मिलता तो दो-दिन खाली बैठना पड़ता। ऐसी विकट परिस्थिति में अनवर के खालू ने उसे अपने साथ परदेस चलकर कमाने का प्रस्ताव दिया था और किराए की रकम भी कर्ज के रूप में देने का प्रस्ताव दिया था, जिसे अनवर ठुकरा नहीं सका और शाजिया को रोता-बिलखता छोड़कर अपने खालू के साथ परदेस कमाने चला गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अनवर परदेस में रहकर नियमित रूप से हर महीने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा घर भेजता रहा। उसने अपनी मां और शाजिया दोनों को हिदायत दी थी कि रुपये संभालकर खर्च करें और कुछ रुपये हर महीने बचाकर रखें ताकि जल्दी से जल्दी  अपना खेत साहूकार से वापस लिया जा सके। इस बीच उसे खबर मिली कि शाजिया ने बेटी को जन्म दिया है, तो उसका मन अपनी औलाद को देखने के लिए तड़प उठा। मगर सिकंदरपुर जाने के लिए किराए में खर्च होने वाली बड़ी रकम का ध्यान करके उसने अपना सिकंदरपुर जाना मुल्तवी कर दिया और टेलीफोन पर अपनी अम्मी से बेटी के रंग-रूप के विषय में जानकारी हासिल करके तसल्ली कर ली। उसने अपनी अम्मी से कहा कि शाजिया अगर राजी हो तो बेटी का नाम सलमा रखना।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुनकर अनवर की अम्मी बोली -“नाम तो बहुत अच्छा सोचा तुमने। शाजिया को भी इंशाअल्लाह यह नाम पसंद आएगा।”</p>
<p style="text-align:justify;">फिर कुछ रुककर वह बोलीं- “ मगर यह तो बता कि तेरी बेटी अब्बू-अब्बू कहकर जो गला फाड़ती है, उससे क्या कहूं?”<br />यह सुनकर अनवर की आंखें छलछला आईं और उसने कांपती आवाज में जवाब दिया -“अल्लाह ने चाहा तो जल्दी ही आऊंगा अम्मी।” फिर टेलीफोन काट दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">दो महीने बाद ही अनवर को अपनी मां के इंतकाल की खबर शाजिया से मिली मगर यह खबर सुनकर भी उसे किराये की रकम जोड़कर वापस लौटने में एक साल लग गया। इसके बाद जब अनवर एक महीने के बाद वापस परदेस के लिए निकला तो एक और संतान का बीज बो गया था। शाजिया ने हिम्मत करके अकेले ही अपना समय काटा और गर्भ का समय पूर्ण होने पर अपने मायके वालों की मदद से बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम अनवर ने साजिद रखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">शाजिया ने घर खर्च में कटौती करके धीरे-धीरे इतनी रकम जोड़ ली थी कि साहूकार के पास गिरवी रखा अपना खेत छुड़ा सके और अनवर के परदेस से लौटते ही उसने अपना खेत वापस छुड़ा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">शाजिया ने अनवर को इस बात के लिए राजी करने की भरपूर कोशिश की कि अब अनवर कमाने के लिए परदेश न जाए और यहीं रहकर अपना खेत संभाले और खाली समय में कोई और काम-धंधा पकड़ लें। मगर अनवर शाजिया को यह समझाकर वापस परदेस चला गया कि एक-दो साल परदेस में रहकर कुछ रकम और बचा ले ताकि उस रकम से यहां आकर कोई दुकान खोल सके। इसके बाद वह कभी परदेस नहीं जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अनवर के जाने के बाद शाजिया ने महसूस किया कि उसके पांव फिर भारी हो गए हैं। उसने यह सूचना फोन करके अनवर को दी और जल्दी से जल्दी वापस लौटने का आग्रह किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके कुछ दिन बाद ही उसने सुना कि जिस इलाके में अनवर कमाने गया है, वहां लड़ाई शुरू हो गई है। शाजिया ने घबड़ाकर अनवर को फोन लगाया मगर उससे संपर्क नहीं हो सका। वह परेशान हो गई। अनवर का हाल-चाल न मिलने के कारण उसको एक एक दिन काटना मुश्किल हो गया। इधर उसके बैंक खाते में रुपये भी नहीं आए। इससे उसकी चिंता और भी बढ़ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अचानक एक दिन उसे सरकारी कर्मचारियों से खबर मिली कि तेल रिफाइनरी पर मिसाइल गिरने से रिफाइनरी में आग लग गई, जिसमें अनवर सहित तीन भारतीय कामगारों की मृत्यु हो गई है। वहां स्थित भारतीय दूतावास उनके मृत शरीर वापस भारत लाने का प्रयास कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुनकर शाजिया बेहोश हो गई। गांव के लोग यह समाचार सुनकर अनवर के दरवाजे पर इकट्ठा होने लगे। वे सब आपस में बातें कर रहे थे कि युद्ध तो ईरान और इजरायल में हो रहा है तथा अमेरिका इजरायल की मदद कर रहा है। यूएई में तो कोई युद्ध नहीं हो रहा है, फिर वहां पर मिसाइल से हमला क्यों? वहां मौजूद सभी लोगों अपने अपने ढंग से ट्रंप, नेतन्याहू और मुज्तबा खामेनेई को कोस रहे थे और देश में हो रही डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की किल्लत तथा बढ़ती मंहगाई को लेकर इन नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। सबकी जुबान पर एक ही बात थी कि ये सब हत्यारे हैं। इन्होंने दुनियाभर में रह रहे गरीबों की जिंदगी में मंहगाई का जहर घोल दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">किशोर वय के बच्चे जो इन लोगों का वार्तालाप सुन रहे थे, उन्होंने कुछ दूर हटकर समवेत स्वर में चिल्लाना शुरू कर दिया:- साजिद, सलमा के अब्बू हो गए खुदा को प्यारे हैं। नेतेन्याहू ट्रंप मुज्तबा सब उनके हत्यारे हैं।। काश उनकी आवाज इन अहंकार में डूबे नेताओं तक पहुंच पाती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:31:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>World Hypertension Day: हाइपरटेंशन इस ‘साइलेंट किलर’ को किया जा सकता है नियंत्रित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>विवेक शुक्ला, कानपुरः </strong>विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में हर तीन में से एक वयस्क उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर) से प्रभावित है। उच्च रक्तचाप का अनियंत्रित रहना कालांतर में दिल का दौरा (हार्ट अटैक), स्ट्रोक, हृदय विफलता (हार्ट फेल्योर), किडनी या गुर्दे की क्षति और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को बुलावा देता है। अनेक मामलों में उच्च रक्तचाप की समस्या का पता ही नहीं चल पाता। इस कारण इस बीमारी को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2026 की थीम है- ‘कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टुगेदर।’ इसका आशय है कि उच्च रक्तचाप को मिलकर नियंत्रित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582284/world-hypertension-day--hypertension--this--silent-killer---can-be-controlled"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(45)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>विवेक शुक्ला, कानपुरः </strong>विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में हर तीन में से एक वयस्क उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर) से प्रभावित है। उच्च रक्तचाप का अनियंत्रित रहना कालांतर में दिल का दौरा (हार्ट अटैक), स्ट्रोक, हृदय विफलता (हार्ट फेल्योर), किडनी या गुर्दे की क्षति और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को बुलावा देता है। अनेक मामलों में उच्च रक्तचाप की समस्या का पता ही नहीं चल पाता। इस कारण इस बीमारी को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2026 की थीम है- ‘कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टुगेदर।’ इसका आशय है कि उच्च रक्तचाप को मिलकर नियंत्रित करें। असल में यह थीम उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) को नियंत्रित करने या उसके प्रबंधन में सामुदायिक प्रयास, समुचित जांच और स्वस्थ जीवन शैली पर जोर देती है। यदि किसी व्यक्ति का रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) 140/90 से ऊपर चला जाता है तो उसे सहज मेडिकल भाषा में उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन कहा जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है हाई ब्लड प्रेशर की समस्या </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">हृदय रक्त की पंपिंग करता है। पंपिंग की इस प्रक्रिया के तहत रक्त का धमनियों (आर्टिरीज) की दीवारों में जो प्रवाह होता है, उसे रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) कहते हैं। दिनभर में काम के दबाव या तनाव का समुचित प्रबंधन न कर पाने के कारण या फिर अन्य नकारात्मक या चिंताजनक कारणों के चलते आपका रक्त चाप सामान्य से अधिक बढ़ सकता है या फिर उच्च (हाई) हो सकता है। उस मेडिकल कंडीशन को हम उच्च रक्त चाप (हाई ब्लड प्रेशर) कहते हैं, जिसमें हृदय से शरीर के समस्त भागों को शुद्ध रक्त पहुंचाने वाली धमनियों (आर्टिरीज) में कई कारणों से दबाव बढ़ जाता है। धमनियों में दबाव बढ़ जाने के परिणामस्वरूप हृदय को अपने क्रियाकलाप यानी रक्त को पंप करने में सामान्य स्थिति से परे कहीं अधिक श्रम करना पड़ता है। यह स्थिति दिल की सेहत के लिए अत्यंत नुकसानदेह है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(45)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (45)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सिस्टोलिक व डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">किसी व्यक्ति के रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) का आकलन दो प्रकार से किया जाता है, जिन्हें सहज भाषा में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। रक्त की पंपिंग करते समय दिल संकुचित होता है, जिसे सिस्टोल कहा जाता है। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर की स्थिति में हृदय को रक्त की पंपिंग करने के लिए अधिक श्रम करना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप धमनियों पर दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति को सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। वहीं दिल की एक धड़कन के बाद दूसरी धड़कन के शुरू होने के पहले धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को डायस्टोलिक  ब्लड प्रेशर कहा जाता है।<br /> <br />ब्लड प्रेशर को मिलीमीटर एचजी में मापा जाता है। मिली मीटर एचजी रक्तचाप को मापने की एक यूनिट है। यह यूनिट रक्त पर पड़ने वाले दबाव की उपयुक्त जानकारी देती है। मिसाल के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का रक्त चाप 140/ 90 है, तो इसमें उच्च रीडिंग 140 सिस्टोलिक रक्त चाप और 90 डायस्टोलिक रक्त चाप से संबंधित है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप कितना हो</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सामान्य और सहज परिस्थितियों के अंतर्गत एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त चाप की उच्चतम रीडिंग (सिस्टोलिक) आम तौर पर लगभग 120 एमएम एचजी और निचली रीडिंग (डायस्टोलिक ) लगभग 80 एमएम एचजी मानी जाती है। एक बड़ी संख्या में हृदयरोग विशेषज्ञों का मानना है कि रक्तचाप की सिस्टोलिक रीडिंग 110 से 140 के अंदर है, तो यह स्थिति चिंताजनक नहीं है। इसी तरह निचली डायस्टोलिक रीडिंग 70 से 90 के बीच है, तो यह स्थिति लगभग चिंताजनक नहीं है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति के रक्त चाप की उच्चतम रीडिंग अक्सर या लगातार या अनेक बार ब्लड प्रेशर मापक उपकरणों से मापने के बाद 140 के ऊपर हो और निचली रीडिंग अक्सर या लगातार 90 पर या इससे  अधिक हो, तो इस स्थिति को उच्च रक्त चाप या (हाई ब्लड प्रेशर) कहा जाता है। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या हैं उच्च रक्त चाप की स्टेज </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उच्च रक्तचाप की स्थिति को समझने के लिए इसकी  स्टेज को जानना आवश्यक है....<br />-    उच्च रक्तचाप पूर्व की स्टेज- सिस्टोलिक 120 से 139<br />-    उच्च रक्तचाप पूर्व की स्टेज-डायस्टोलिक 80 से 89<br />-    उच्च रक्त चाप स्टेज 1 सिस्टोलिक- 140 से 159 <br />-    उच्च रक्त चाप  स्टेज 1 डायस्टोलिक 90 से 99 <br />-    उच्च रक्त चाप स्टेज 2 सिस्टोलिक 160 से अधिक<br />-    उच्च रक्त चाप स्टेज 2 डायस्टोलिक 100 से अधिक</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे लक्षणों पर हो जाएं सचेत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">- उच्च रक्त चाप से पीड़ित व्यक्तियों को आमतौर पर घबराहट महसूस हो सकती है।<br />- दिल की धड़कन का अनियमित हो जाना।<br />- सिर में भारीपन या तेज सिरदर्द।<br />- सीने में भारीपन व दर्द महसूस हो सकता है।<br />- सांस लेने में असहज महसूस करना।<br />- कुछ लोगों को उच्च रक्तचाप की स्थिति में आंखों से धुंधला दिखाई पड़ता है।<br />- पैरों में सुन्नपन की समस्या भी कुछ लोगों को हो सकती है। <br />- छोटी-छोटी बातों पर तेज गुस्सा आना।<br />- कई बार अनेक मामलों में हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण नजर नहीं भी आ सकते हैं। इसलिए उच्च रक्त चाप को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(47)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (47)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हाई ब्लड प्रेशर के कारण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उच्च रक्त चाप के अनेकानेक कारण हैं, लेकिन उन कारणों में कुछ प्रमुख कारण ये हैं....</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>तनावपूर्ण और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने भी तनावपूर्ण जीवनशैली को उच्च रक्त चाप का एक प्रमुख कारण माना है। सच तो यह है कि आज युवा वर्ग से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग विभिन्न सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और अन्य कारणों से तनावग्रस्त हैं, जो व्यक्ति तनाव को नियंत्रित करने की विधियों पर सफलतापूर्वक अमल नहीं कर पाता, उसके दिमाग पर तनाव हावी हो जाता है, जो कालांतर में उच्च रक्तचाप का कारण बनता है। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कोरोनरी आर्टरी डिजीज और अन्य समस्याएं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जो लोग विभिन्न प्रकार के हृदय रोगों जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय धमनी रोग) और हार्ट वाल्व से संबंधित समस्याओं आदि से ग्रस्त हैं, उनमें उच्च रक्तचाप की समस्या कई जटिलताएं उत्पन्न कर सकती है। जिन लोगों को अतीत में दिल का दौरा पड़ चुका है, उन्हें हाई ब्लड को नियंत्रित करने के प्रति काफी सचेत रहने की जरूरत है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>शारीरिक श्रम से कतराना और मोटापा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जो लोग शारीरिक श्रम, व्यायाम और खेलों में भाग नहीं लेते, उनमें उच्च रक्तचाप से ग्रस्त होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही जो लोग आलस्यवश किसी भी तरह का व्यायाम नहीं करते और जो अत्यधिक चिकनाई युक्त आहार ग्रहण करते हैं, उनमें मोटापे से ग्रस्त होने की आशंका आम व्यक्तियों की तुलना में दोगुनी होती है। ऐसे व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त हो जाते हैं। मोटापा कालांतर में हाई ब्लड प्रेशर और अन्य हृदय रोगों का कारण बन सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>डायबिटीज की समस्या  </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जो लोग डायबिटीज के साथ जिंदगी जी रहे हैं और जिनकी ब्लड शुगर ज्यादातर नियंत्रित नहीं रहती, उनमें हाई ब्लड प्रेशर होने की आशंका आम व्यक्ति की तुलना में कहीं ज्यादा होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>किडनी से संबंधित समस्याएं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जो लोग किडनी या गुर्दों से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर जटिलताएं उत्पन्न कर सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नमकीन खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">नमकीन व अत्यधिक चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप की समस्या को बढ़ा सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>धूम्रपान और शराब का सेवन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">किसी भी चीज की अधिकता सेहत के लिए नुकसानदेह होती है। शराब और धूम्रपान के कारण कालांतर में रक्त नलिकाओं को क्षति पहुंचती है। इसलिए धूम्रपान और शराब से परहेज करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे करें उच्च रक्त चाप का प्रबंधन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उच्च रक्तचाप को जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन करके और डॉक्टर द्वारा बताई गईं दवाओं के सेवन से नियंत्रित किया जा सकता है। जीवनशैली के अंतर्गत सकारात्मक सोच और विचार, स्वास्थ्यकर खानपान, व्यायाम और पर्याप्त नींद( लगभग 6 से 8 घंटे की गहरी नींद ) को शामिल किया जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सकारात्मक सोच का महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तनाव का हृदय की धड़कनों के अनियमित होने से सीधा संबंध है। इसलिए जहां तक हो सके, सकारात्मक सोच के जरिए तनाव का प्रबंधन करें। ऐसा करने से आपके दिमाग में नकारात्मक विचार कम हो जाते हैं और हाई ब्लड प्रेशर और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त होने का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>वजन पर नियंत्रण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बढ़े हुए वजन को नियंत्रित कर लिया जाए, तो इससे बढ़े हुए रक्तचाप को कम कर सकते हैं।<br />उच्च रक्तचाप के नियंत्रण में सहायक पोटेशियम<br />पोटेशियम एक प्रमुख मिनरल है, जो दिल और किडनी की सेहत के लिए लाभप्रद माना जाता है। शरीर में पोटेशियम की कमी से दिल की धड़कन में अनियमितता और हृदय की कार्यप्रणाली से संबंधित समस्या उत्पन्न हो सकती है। यह मिनरल उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक है। टमाटर, पालक, बींस,आलू, केला, अंगूर और इससे निर्मित ड्राई फ्रूट्स किशमिश और मुनक्का में पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।<br /><strong>-डॉ. प्रवीण कहाले, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:09:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>1857 की क्रांति का गौरवशाली केंद्र बरेली: खान बहादुर खान से दामोदर स्वरूप तक के शहीद</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रमेश च‍ंद्र, वरिष्ठ पत्रकार: </strong>यह विद्रोह नहीं, बल्कि बरेली की धरती पर रह रहे उन भारतीयों के दिलों की आवाज थी, जिन्होंने यह ठान लिया था कि ब्रिटेन के जुल्म ढा रहे ‘गोरों’ को देश से खदेड़ भगाना है। उनका जुल्म अब नहीं सहना है। आखिरकार इस जुनून के साथ अंग्रेजों से भिड़कर ये क्रांतिकारी शहीद हो गए। इस बात का ध्यान करते हुए कि भविष्य में आने वाली पीढ़ी जरूर इस भारत को आजादी दिलाएगी और हुआ भी यही। इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बदौलत वर्ष 1947 में हमारा देश आजाद हुआ। देश भर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582279/bareilly-the-glorious-center-of-the-revolution-of-1857-martyrs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(37)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रमेश च‍ंद्र, वरिष्ठ पत्रकार: </strong>यह विद्रोह नहीं, बल्कि बरेली की धरती पर रह रहे उन भारतीयों के दिलों की आवाज थी, जिन्होंने यह ठान लिया था कि ब्रिटेन के जुल्म ढा रहे ‘गोरों’ को देश से खदेड़ भगाना है। उनका जुल्म अब नहीं सहना है। आखिरकार इस जुनून के साथ अंग्रेजों से भिड़कर ये क्रांतिकारी शहीद हो गए। इस बात का ध्यान करते हुए कि भविष्य में आने वाली पीढ़ी जरूर इस भारत को आजादी दिलाएगी और हुआ भी यही। इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बदौलत वर्ष 1947 में हमारा देश आजाद हुआ। देश भर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ बरेली के ये स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों से टक्कर में पीछे नहीं रहे, बल्कि आगे बढ़-चढ़कर भागीदारी की।</p>
<p style="text-align:justify;">बरेली के मंडलायुक्त कार्यालय परिसर में लगभग सवा सौ साल पुराना बरगद का वह पेड़ आज भी मौजूद है, जो बरेली के उन शहीदों की याद दिला रहा है। जुल्म का विरोध करने पर बरेली के क्रांतिकारियों को इसी पेड़ पर फांसी पर लटका दिया था। यह ऐतिहासिक बरगद अब 1857 की क्रांति का मूक गवाह है, जो वर्तमान पीढ़ी को जुल्म के खिलाफ खड़े होने का संदेश भी दे रहा है। स्वतंत्रता दिवस का दिन 15 अगस्त हो या फिर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस। आजादी दिलाने में शहीद हुए इन वीरों को यहां के लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं। सौ वर्ष से ज्यादा पुराने पेड़ों को सहेज कर रखने की राज्य सरकार की नीति के तहत इस पुराने पेड़ को भी संरक्षित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(38)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (38)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ये थे बरेली के प्रमुख क्रांतिकारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली में आजादी की लड़ाई के और भी विरासत मौजूद हैं, जो यहां के लोगों को उस समय की याद दिलाते हैं। यहां के क्रांतिकारियों में खान बहादुर खान रोहिल्ला, दामोदर स्वरूप सेठ, पृथ्वी राज सिंह व जनरल बख्त खान प्रमुख हैं। इन्होंने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। जनरल बख्त खान दिल्ली में विद्रोही सेना के कमांडर-इन-चीफ थे। पहले वह ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना (आर्टिलरी) में बतौर सूबेदार कार्य किया था। बाद में इसे छोड़कर वे बरेली से क्रांतिकारियों का नेतृत्व करते हुए दिल्ली पहुंचे थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बांस बरेली के सरदार थे दामोदर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली के सेठ दामोदर स्वरूप पंडित राम प्रसाद बिस्मिल से लेकर चन्द्रशेखर आजाद तक के क्रांतिकारी आंदोलनों में शामिल रहे। यही वजह थी कि वर्ष 1930 में बरेली की गलियों में एक ही नारा गूंजता था-‘बांस बरेली का सरदार, सेठ दामोदर जिंदाबाद।’ दामोदर के पास 21 फरवरी 1915 के विद्रोह की जिम्मेदारी थी। 1857 की तरह तख्ता पलट की योजना थी, पर इसका भंडाफोड़ होने के बाद उन्हें सात साल की सजा हुई। बेड़ियां पहनकर पूरा समय काल कोठरी में बिताया। काकोरी के निकट नौ अगस्त 1925 में पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में 10 क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूट लिया, जिसके बाद सेठजी को गिरफ्तार कर लिया गया और 18 महीने तक मुकदमा चलने के दौरान उनको जेल में रखा गया। 1930 से कांग्रेस से जुड़कर 1942 तक कई बार जेल यात्राएं कीं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(39)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (39)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चुन्ना मियां ने पेश की थी हिंदू-मुस्लिम एकता का उदाहरण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सेठ फजलुर्रहमान (चुन्ना मियां) ने बरेली में लक्ष्मी नारायण मंदिर बनवाकर हिंदू-मुस्लिम एकता का उदाहरण पेश किया था। बरेली में सेठ फजलुर्रहमान उर्फ चुन्ना मियां ने अमन और सौहार्द का पैगाम देने के लिए शहर के कटरा मानराय में वर्ष 1960 में लक्ष्मी नारायण का मंदिर स्थापित किया था। उन्होंने मंदिर को जमीन देने के साथ ही इस निर्माण खुद कराया। चुन्ना मियां के मंदिर का उद्घाटन 16 मई 1960 को देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने किया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विद्रोह के जरिए खान बहादुर खान ने स्थापित की थी स्वतंत्र सत्ता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">खान बहादुर खान रोहिल्ला ने विद्रोह के जरिए यहां एक स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी। यह वह नाम था, जिसे सुनकर अंग्रेजों की रूह कांप जाया करती थी। उन्होंने कई अंग्रेजी अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया था। अंग्रेजों को खदेड़कर 31 मई 1857 को रोहिलखंड को मुक्त कराया था और अंग्रेजी हुकूमत के समय बरेली में 10 महीने पांच दिन तक समानांतर सरकार चलाई थी। उन्होंने अन्य क्रांतिकारी शोभा राम को वजीरे आजम घोषित किया था। पर अंग्रेजों ने फिर से बरेली पर कब्जा कर लिया था। 24 फरवरी 1860 को बरेली की पुरानी कोतवाली में इन्हें फांसी दी गई थी, जबकि अन्य 257 क्रांतिकारियों को मंडलायुक्त कार्यालय परिसर में बरगद के पेड़ पर फांसी दी गई। आज यहां पर अमर शहीद स्तंभ मौजूद हैं। यह स्मारक आज भी शहीदों के संघर्ष व बलिदान को जीवंत बनाए हुए है। खान बहादुर खान रूहेलखंड के द्वितीय नवाब हाफिज रहमत खान के पौत्र थे। वह रोहेला शासकों के वंशज थे। जनता में उनका सम्मान व प्रभाव था। यही वजह थी कि उन्होंने क्रांति के लिए विद्रोह का नेतृत्व किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(40)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (40)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फरीदपुर का बुधौली गांव था क्रांतिकारियों की शरण स्थली</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली के फरीदपुर का बुधौली गांव क्रांतिकारियों की शरण स्थली बन गया था। महात्मा गांधी के अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन के आह्वान पर इस गांव के निवासी पृथ्वीराज सिंह ने अंग्रेजों से लोहा ले लिया था। उनके साथ इस गांव के सभी लोग खड़े थे। जब इसकी जानकारी अंग्रेजों को हुई, तो उनकी सेना ने इस गांव को चारो ओर से घेर लिया, पर यह घेराबंदी गांव के लोगों के हौंसले को तोड़ नहीं पाई थी। पृथ्वीराज की पत्नी शीला देवी महिला कांग्रेस की कमांडर थीं। ब्रिटिश हुकूमत ने पति-पत्नी को नजरबंद कर दिया था। पर इससे रिहाई के बाद उनके नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने अपना विद्रोह जारी रखा।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(38)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (38)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>398 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने किया सर्वस्व न्यौछावर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली के 398 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। ये वे दीवाने थे, जिन्होंने न केवल अंग्रेजों से लोहा लिया, बल्कि देश की आजादी के बाद बरेली के पुनर्निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई। जिला प्रशासन के रिकॉर्ड में 398 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का इतिहास दर्ज है, जिन्होंने विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया और लंबे समय तक जेल में समय बिताया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सेनानी बने थे राजनेता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इन 398 सेनानियों में से 20 से अधिक ऐसे थे, जिन्होंने बाद में लोकसभा, विधानसभा, जिला परिषद और नगर पालिका बरेली के चेयरमैन/सदस्य के रूप में काम किया और बरेली की समृद्धि में योगदान दिया। यह 398 का आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड पर आधारित है, जबकि कई गुमनाम सेनानियों ने भी इस लड़ाई में अपना योगदान दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जान बचाकर नैनीताल भाग गए थे अंग्रेजी अफसर</p>
<p style="text-align:justify;">31 मई 1857 को बरेली के क्रांतिकारियों ने विद्रोह किया, तो अंग्रेजी अफसर जान बचाकर नैनीताल भाग गए थे। 7 मई 1858 को अंग्रेजी अफसरों ने फिर से बरेली पर कब्जा कर लिया था। इसी के बाद 257 क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया गया था। अंग्रेजों ने विद्रोह को दबाने के लिए प्रशासन और सख्त कर दिया था। फिर भी बरेली के लोगों ने लंबे समय तक संघर्ष जारी रखा था। यह दर्शाता है कि बरेली के लोगों ने केवल विद्रोह नहीं, बल्कि एक संगठित शासन की कोशिश की थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(41)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (41)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>1936 को हुआ था कांग्रेस का सम्मेलन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1936 में बरेली में कांग्रेस का सम्मेलन हुआ था। इसकी अध्यक्षता आचार्य नरेंद्र देव ने की थी। जवाहर लाल नेहरू, एमएन राय और रफी अहमद किदवई जैसे नेता इस सम्मेलन में शामिल हुए थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आजादी के लिए लड़ने वाला साहसी केंद्र</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली केवल ऐतिहासिक व व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि आजादी के लिए लड़ने वाला साहसी केंद्र था। यहां के लोगों ने अपने अधिकारों व स्वतंत्रता के लिए, जो बलिदान दिया, वह आज भी इतिहास में अमर है। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम बरेली के इतिहास का गौरवशाली अध्याय है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे हुई थी बरेली में विद्रोह की शुरुआत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली में विद्रोह अचानक नहीं थी, बल्कि कई कारणों से बरेली समेत पूरे उत्तर भारत में अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा था। वजह यह थी कि धार्मिक व सामाजिक मामलों में हस्तक्षेप हो रहा था। अत्यधिक कर व आर्थिक शोषण हो रहा था। भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव हो रहा था। इन सभी कारणों ने 1857 के विद्रोह की नींव तैयार की थी। मेरठ से शुरू हुई क्रांति बरेली भी पहुंच गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बरेली के सेंट्रल जेल में बंद हुए थे सेनानी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली की ऐतिहासिक सेंट्रल जेल (केंद्रीय कारागार) 1848 में स्थापित हुई थी और यहां स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों की बंदी स्थली रही है। पंडित जवाहर लाल नेहरू को 31 मार्च 1945 को अहमदनगर फोर्ट जेल से बरेली सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। वह यहां लगभग 6 महीने (10 जून 1945 तक) बंद रहे थे। जेल के दस्तावेजों में वे कैदी नंबर 582 के रूप में दर्ज थे। जिस बैरक में नेहरू जी को रखा गया था, उसे अब ‘नेहरू बैरक’ के नाम से जाना जाता है और उस जगह का संरक्षण किया जाता है। स्वतंत्रता सेनानी और प्रमुख समाजवादी नेता आचार्य नरेंद्र देव भी पंडित नेहरू के साथ बरेली जेल में बंद थे। उनका नाम कैदी नंबर 583 के रूप में दर्ज था। बरेली सेंट्रल जेल में काकोरी ट्रेन एक्शन (काकोरी कांड) के क्रांतिकारियों को भी कैद करके रखा गया था। नेहरू के साथ-साथ इस जेल में कुल 592 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को कैद किया गया था। इस जेल में बंद कैदियों के लिए ‘नेहरू बैरक’ एक प्रेरणा का केंद्र है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पुराने बरेली कॉलेज में बनी थी विद्रोह की योजना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटिश हुकूमत ने 1837 में देश में चार कॉलेज मुम्बई, कोलकाता, अजमेर व बरेली में खोले थे। इसी बरेली कॉलेज के छात्रों ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजा दिया था। कॉलेज के छात्रों ने कॉलेज के प्रिंसपल डॉ. कारलोस बक को मौत के घाट उतार दिया था। छात्रों ने 110 दिन की हड़ताल की, पर कॉलेज के सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों को जुबली पार्क में पढ़ाया था और आजादी के लिए आंदोलन जारी रखा। बाद में इसी आंदोलन की बागडोर रुहेला सरदार खान बहादुर खान ने संभाल ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:39:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोमाता से ‘जीन क्रांति’ की तैयारी: गोबर-गोमूत्र से बनेगी सुपर खाद, IIT कानपुर की तकनीक से 15 गुना असरदार ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>प्रदेश में गो संरक्षण को वैज्ञानिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। दावा है कि यह खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी और इसे तैयार करने में समय भी 10 गुना कम लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के शोधार्थियों ने विकसित किया है। सरकार इसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582261/preparing-for-a--gene-revolution--using-cow-dung-and-urine--super-fertilizer--15-times-more-effective-organic-fertilizer-using-iit-kanpur-technology"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(26)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>प्रदेश में गो संरक्षण को वैज्ञानिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। दावा है कि यह खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी और इसे तैयार करने में समय भी 10 गुना कम लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के शोधार्थियों ने विकसित किया है। सरकार इसे प्राकृतिक खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के एकीकृत मॉडल के रूप में लागू करने की तैयारी में है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आईआईटी कानपुर की खोज से तैयार होगी ‘सुपर खाद’</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन और माइक्रोबियल आइसोलेशन तकनीक का उपयोग करते हुए गोबर और गोमूत्र आधारित उर्वरक विकसित किया है। इस तकनीक से तैयार खाद में पोषक तत्वों की क्षमता लगभग पांच गुना अधिक बताई जा रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल एक किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक तैयार किया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कम मात्रा, ज्यादा असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नई तकनीक से तैयार खाद की 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा ही पर्याप्त होगी। यह पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में काफी कम है, जिससे किसानों की परिवहन और श्रम लागत घटेगी। इस उत्पाद को इंडियान काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के 40 से अधिक गुणवत्ता मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित किए जाने का दावा किया गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गोशालाएं बनेंगी ‘वेस्ट टू वेल्थ’ केंद्र, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार इस तकनीक के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम कर रही है। गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद और बायोगैस का उत्पादन होगा। इससे गोशालाएं केवल संरक्षण केंद्र न रहकर आय सृजन का माध्यम बनेंगी। सरकार का मानना है कि यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएगी और कृषि अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन में मददगार साबित होगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>महिला समूहों को मिलेगा रोजगार</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस परियोजना में स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय किसानों को जोड़ा जाएगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, उत्पादन और वितरण से जोड़कर नए रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर सफल रहा, तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तकनीक का अग्रणी केंद्र बन सकता है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।<br /><strong>श्याम बिहारी गुप्त, अध्यक्ष गो सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:38:58 +0530</pubDate>
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