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                <title>Health Care - Amrit Vichar</title>
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                <description>Health Care RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्यार या मनोवैज्ञानिक जाल? जब रिश्ते में भरोसे की जगह शुरू हो जाता है इमोशनल कंट्रोल</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया से शुरू हुई प्रेम कहानी ने सिखाया बड़ा सबक—जहां सम्मान, भरोसा और संवेदना न हो, वहां प्यार धीरे-धीरे भावनात्मक शोषण में बदल सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587300/toxic-relationship-emotional-manipulation-gaslighting-love-psychology-hindi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(19).png" alt=""></a><br /><p>प्रेम सिर्फ दिलों का जुड़ाव नहीं होता-यह दो आत्माओं के बीच संवेदना का पुल होता है। पर जब किसी रिश्ते में एक व्यक्ति धीरे-धीरे दूसरे के मन पर नियंत्रण जमाने लगे, तो प्यार की जगह एक मनोवैज्ञानिक खेल शुरू हो जाता है, जहां भावनाएं हथियार बन जाती हैं और सच्चा प्रेम खो जाता है। आरंभिक आकर्षण का जाल-रश्मि और अभय की मुलाकात सोशल मीडिया पर हुई। बातचीत शुरू हुई, फिर धीरे-धीरे एक गहरा जुड़ाव बनने लगा। अभय ने रश्मि को बताया कि वह बहुत खास है, उसे समझने वाली पहली लड़की है। हर सुबह-सुबह गुड मॉर्निंग के मैसेज के साथ कविता भेजना, हर बात में ध्यान देना-रश्मि को लगा यही सच्चा प्यार है। मगर असल में यह ‘भावनात्मक आकर्षण का प्रारंभिक चरण’ था, जिसमें सामने वाला व्यक्ति अपने मीठे व्यवहार से भरोसा जीत लेता है। यही वह समय होता है, जब दिल जुड़ जाता है और दिमाग पीछे रह जाता है।</p>
<h4><strong>धीरे-धीरे नियंत्रण की शुरुआत</strong></h4>
<p>समय बीता और अभय का रवैया बदलने लगा। अब उसके सोशल मीडिया कमेंट्स किसी और की पोस्ट पर दिखने लगे। जब रश्मि ने पूछा, तो जवाब मिला - “अरे तुम बेवजह सोचती हो”, “इतना तो नॉर्मल है, बस दोस्ती है।” यह वही क्षण था, जब रिश्ते में ‘भावनात्मक नियंत्रण’ की शुरुआत हुई। जब कोई व्यक्ति आपकी असुविधा को ‘तुम्हारी सोच की समस्या’ कह देता है, तो असल में वह अपनी गलती छिपा रहा होता है। यह प्रक्रिया ‘गैसलाइटिंग’ कहलाती है यानी किसी को उसके ही एहसासों पर शक करवा देना। </p>
<h4><strong>शिकायत पर पलटवार</strong></h4>
<p>रश्मि ने कई बार कहा कि उसे बुरा लगता है, जब अभय दूसरी लड़कियों के साथ अत्यधिक फ्रेंडली व्यवहार करता है, लेकिन उसकी हर बात का जवाब पलटवार में मिला- “तुम्हें भरोसा ही नहीं है मुझ पर।” “तुम बहुत डॉमिनेट करती हो।” “मेरा दम घुटता है तुम्हारे साथ।” ऐसे जवाब सुनकर रश्मि सोचने लगी कि शायद गलती उसी की है। असल में यह “blame shifting” यानी दोष को दूसरे पर डालने की प्रक्रिया थी। इससे सामने वाला व्यक्ति अपनी जवाबदेही से बच निकलता है और दूसरे को अपराधबोध में डाल देता है।</p>
<h4><strong>सॉरी और फिर वही दोहराव</strong></h4>
<p>हर बार झगड़े के बाद अभय ने “सॉरी” कहा, “मुझसे गलती हो गई” लिखा, और कुछ दिनों तक बहुत ध्यान दिया, लेकिन फिर वही पुराना व्यवहार लौट आया-वही कमेंट्स, वही उपेक्षा, वही असंवेदनशीलता। यह रिश्तों में ‘cyclic manipulation’ का सबसे आम पैटर्न है, जहां एक व्यक्ति गलती करता है, माफी मांगता है और फिर वही गलती दोबारा दोहराता है। इससे रिश्ते का दूसरा पक्ष धीरे-धीरे emotionally drain हो जाता है।</p>
<h4><strong>आत्मग्लानि और भावनात्मक थकान</strong></h4>
<p>कुछ महीनों में रश्मि खुद पर शक करने लगी। उसे लगने लगा कि शायद वह ज्यादा उम्मीद करती है, ज्यादा बोलती है या ज्यादा सोचती है। उसने अपनी भावनाओं को दबाना शुरू कर दिया ताकि झगड़ा न हो। मगर यह दबाव अंदर ही अंदर उसे तोड़ने लगा। वह उस व्यक्ति से दूरी भी नहीं बना पा रही थी, जिसने उसे कमजोर बना दिया था।  इस स्थिति को ‘emotional exhaustion’ कहते हैं, जब व्यक्ति थक जाता है, लेकिन फिर भी रिश्ता छोड़ नहीं पाता, क्योंकि उसने अपने दिल को उस रिश्ते से जोड़ दिया होता है।</p>
<h4><strong>प्रेम या स्वार्थ </strong></h4>
<p>अभय कहता था कि वह रश्मि के बिना नहीं रह सकता, मगर जब-जब उसे किसी और से प्रशंसा मिली, वह तुरंत आकर्षित हो गया। यह दिखाता है कि उसका “प्यार” एक ‘ego boost’ था, न कि सच्चा लगाव। ऐसे लोग दूसरों की भावनाओं का इस्तेमाल करते हैं ताकि खुद को ‘वांछित’ महसूस कर सकें।</p>
<p>वे अपने हर व्यवहार को ‘नॉर्मल’ कहते हैं, जबकि वही काम जब दूसरा करे, तो उन्हें असहजता होती है।</p>
<h4><strong>जब हिलने लगे आत्मसम्मान की नींव</strong></h4>
<p>रश्मि ने अंततः महसूस किया कि वह सिर्फ प्यार नहीं खो रही, बल्कि खुद को भी खोती जा रही है। उसकी नींद गायब हो गई थी, आत्मविश्वास कम हो गया था और सबसे बड़ा नुकसान-वह अब खुद पर भरोसा नहीं कर पा रही थी। ऐसे में उसने एक दिन खुद को बचाने के लिए अभय को ब्लॉक कर दिया। वह जानती थी कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन यही पहला कदम था अपनी आत्म-गरिमा लौटाने का।</p>
<p>समाज क्या कहता है और ऐसे रिश्तों की सच्चाई क्या है-हमारे समाज में अक्सर यही कहा जाता है-“प्यार में सब चलता है”, “थोड़ा सह लो, रिश्ते निभाने पड़ते हैं।” लेकिन हर समझौता “त्याग” नहीं होता। कई बार यह खुद की भावनाओं का शोषण होता है। रिश्ते तभी खूबसूरत होते हैं, जब दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को बराबरी से महत्व दें। जहां सम्मान नहीं वहां प्यार भी धीरे-धीरे अपनी गरिमा खो देता है।</p>
<p>अंत में- प्यार अगर आत्मा से जुड़ता है, तो वह ‘संवेदनशील’ होता है, न कि ‘आरोपों से भरा हुआ’। कभी-कभी किसी को अपने जीवन में ब्लॉक करना नफरत नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की रक्षा का प्रतीक होता है। रश्मि जैसी अनगिनत महिलाएं आज इस अनुभव से गुजर चुकी हैं -उन्होंने सच्चे प्यार की उम्मीद में खुद को खोया और फिर अपनी टूटी भावनाओं से खुद को दोबारा गढ़ा। ध्यान रखें, असली रिश्ते वही हैं, जहां प्यार के साथ सम्मान, संवेदना और सुरक्षा  भी महसूस हो। जहां किसी का सॉरी सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि ‘बदलाव की शुरुआत’ हो।</p>
<p><strong>–मेघा राठी, भोपाल... अमृत विचार, लोकदर्पण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 16:26:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Changing Weather :   मौसम के बदलते मिजाज से लोग हो रहे बीमार; ओपीडी में उमड़ी मरीजों की भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[-बारिश, उमस और तेज धूप के बदलते मिजाज ने बढ़ाई परेशानी, चिकित्सक इलाज के साथ बचाव को लेकर कर रहें जागरूक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586754/changing-weather-impact-on-health-viral-fever-and-diarrhea-cases-rise"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(28)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> कभी बारिश, कभी उमस और कभी तेज धूप... मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने लोगों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। शहर में इन दिनों वायरल फीवर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि बच्चों में डायरिया, उल्टी और दस्त की शिकायतें भी बढ़ी हैं। इसका असर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां रोज बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बलरामपुर अस्पताल के फिजिशियन डॉ. विष्णु कुमार ने बताया कि मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। वायरल फीवर आमतौर पर एक सप्ताह तक मरीज को परेशान करता है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, शरीर और जोड़ों में दर्द, गले में खराश, सिरदर्द, खांसी, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और त्वचा पर हल्के धब्बे शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों का अतिरिक्त ध्यान रखने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में वायरल बुखार के साथ-साथ त्वचा रोग के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। अस्पताल के चिकित्सकों को मरीजों के त्वरित उपचार के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वायरल बुखार को सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर डॉक्टर से परामर्श लेकर ही दवा लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों के अनुसार वायरल संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, हाथ मिलाने, छींकने या खांसने के दौरान भी फैल सकता है। ऐसे में बुखार या संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। लोकबंधु, बीआरडी महानगर, ठाकुरगंज अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों के अलावा केजीएमयू और लोहिया संस्थान की ओपीडी में भी वायरल और पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टर इलाज के साथ लोगों को साफ-सफाई, पर्याप्त पानी पीने, संतुलित आहार लेने और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/584460/recruitment-of-3-000-doctors-on-a-contractual-basis-in-up--walk-in-interviews-to-be-held-monthly-in-the-health-department"><span class="t-red">यूपी में संविदा पर 3000 डॉक्टरों की भर्ती, </span>स्वास्थ्य विभाग में हर माह होगा वॉक-इन इंटरव्यू</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/586754/changing-weather-impact-on-health-viral-fever-and-diarrhea-cases-rise</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 15:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly News : ऑयस्टर मशरूम से ऐसा इम्यूनिटी बूस्टर बना रहा रुहेलखंड विश्वविद्यालय, कम कीमत में भरपूर एनर्जी </title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. विजय बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोगों के अंदर प्रोटीन की  ज्यादा कमी देखी जाती है। आम लोगों तक प्रोटीन की पहुंचन आसान बनाने के लिए बाजार में पहले से मौजूद पाउडरों के मुकाबले  इसकी कीमत एक चौथाई रखने का प्रयास है। जो पाउडर तैयार किया है वो 100 प्रतिशत प्राकृतिक और प्रिजर्वेटिव रहित है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584701/bareilly-news-oyster-mushroom--affordable-immunity-booster-being-developed-at-mjp-rohilkhand-university"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/mjpru.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार, बरेली।</strong> वैसे तो बाजार में ऑयस्टर मशरूम से बनने वाले कई तरह के इम्युनिटी बूस्टर पाउडर मौजूद हैं मगर कीमत बहुत ज्यादा होने की वजह से आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) बरेली में पादप विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर ने आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखकर ऑयस्टर मशरूम से सस्ता प्रोटीन पाउडर विकसित करने का दावा किया है। हालांकि जरूरत के मुताबिक इसमें कितनी मात्रा में प्रोटीन व मिनिरल्स हैं, इस पर शोध जारी है।</p>
<p>पादप विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार सिंहाल ने बताया कि मशरूम रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से इंसानों में प्रोटीन की कमी पूरा करने के लिए ऑयस्टर मशरूम प्रोटीन पाउडर तैयार किया गया है। ऑयस्टर मशरूम में 31 से 33 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जो शरीर में प्रोटीन की जरूरत को पूरा करता है। विटामिन ए, बी, सी व डी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक जैसे मिनिल्स की मात्रा इसमें परखने का काम जारी है।</p>
<p> </p>
<h4><strong>100 प्रतिशत प्रकृतिक व प्रिजर्वेटिव रहित</strong></h4>
<p>डॉ. विजय बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोगों के अंदर ज्यादा प्रोटीन की कमी देखी जाती है। लोगों तक यह आसानी से पहुंच सके, इसके लिए बाजार के दूसरे पाउडरों के मुकाबले कीमत एक चौथाई रखने का प्रयास है। जो पाउडर तैयार किया है वो 100 प्रतिशत प्राकृतिक और प्रिजर्वेटिव रहित है। इसमें मशरूम के अलावा दूसरे प्राकृतिक श्रोतों से प्रोटीन मात्रा को संतुलित करने का प्रयास किया गया है।</p>
<p> </p>
<h4><strong>शाकाहारी भी ले सकेंगे विटामिन बी-12</strong></h4>
<p>उन्होंने दावा किया कि विटामिन बी-12 किसी भी आम सब्जी में पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता। ये केवल अंडा या मांस व मछली से लिया जा सकता है। मगर मशरूम केवल एक ऐसी सब्जी है जिसमें विटामिन बी-12 पाया जाता है। विटामिन बी-12 शरीर में ब्लड फॉर्मेशन करता है। ऐसे में इसकी अहमियत को समझा जा सकता है। शाकाहारी लोगों के लिए ये सबसे बेहतर विकल्प साबित होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/584701/bareilly-news-oyster-mushroom--affordable-immunity-booster-being-developed-at-mjp-rohilkhand-university</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 11:36:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ateeq Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> Queen Mary Hospital : क्वीन मेरी अस्पताल आए तो अपना पंखा साथ लाए... वेटिंग रूम में लोट रहे कुत्ते</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> प्रदेश के सबसे बड़े महिला अस्पताल केजीएमयू के क्वीन मेरी अस्पताल में मरीजों को गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। मरीजों को घरों से पंखे और छोटे कूलर लाने पड़ रहे हैं। अस्पताल के ज्यादातर कूलर खराब हैं और पंखे धीमे चलते हैं। अस्पताल में भर्ती ठाकुरगंज की अनामिका ने बताया कि वार्ड में कूलर तो लगा है, लेकिन उसकी हवा नहीं लगती है। पंखे भी पर्याप्त नहीं हैं। गर्मी राहत पाने के लिए अपना पंखा लेकर आई हैं।</p>
<p>फैजुल्लागंज की पूजा ने भी कूलर खराब होने की बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584573/queen-mary-hospital--bring-your-own-fan-if-you-come-to-queen-mary-hospital----two-patients-to-a-bed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/cats254.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> प्रदेश के सबसे बड़े महिला अस्पताल केजीएमयू के क्वीन मेरी अस्पताल में मरीजों को गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। मरीजों को घरों से पंखे और छोटे कूलर लाने पड़ रहे हैं। अस्पताल के ज्यादातर कूलर खराब हैं और पंखे धीमे चलते हैं। अस्पताल में भर्ती ठाकुरगंज की अनामिका ने बताया कि वार्ड में कूलर तो लगा है, लेकिन उसकी हवा नहीं लगती है। पंखे भी पर्याप्त नहीं हैं। गर्मी राहत पाने के लिए अपना पंखा लेकर आई हैं।</p>
<p>फैजुल्लागंज की पूजा ने भी कूलर खराब होने की बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि पीआरओ ऑफिस में शिकायत की थी, इसके बावजूद कूलर ठीक नहीं कराया गया। भरावन कला की पूजा ने बताया कि हाईरिस्क प्रेग्नेंसी होने की वजह से ढ़ाई माह से भर्ती हैं। गर्मी से हालत खराब है। शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं हुई तो घर से पंखा मंगाया है।</p>
<h5><strong>अस्पताल की वेटिंग रूम में लोट रहे कुत्ते</strong></h5>
<p>क्वीन अस्पताल में तीमारदारों के लिए बने रैन बसेरे में आवारा कुत्ते लेटे रहते हैं। तीमारदार जमीन पर जहां चादर बिछाकर सोते हैं, वहीं बगल में आवारा कुत्ते आकर लेट जाते हैं। इससे तीमारदारों को कुत्तों के काटने के साथ संक्रमण का डर भी रहता है।</p>
<h5><strong>यूनिट छह के शौचालय की अंदर से सिटकनी खराब</strong></h5>
<p>क्वीन मेरी अस्पताल के यूनिट छह के शौचालय की सिटकनी टूटी हुई। जिसकी वजह से यह गेट अंदर से नहीं बंद होता है। ऐसे में जब एक मरीज शौचालय जाती तो दूसरी महिला मरीज को उसकी पहरेदारी करनी पड़ रही हैं। दुबग्गा से आई मरीज विमला ने बताया कि इसकी शिकायत पीआरओ की जा चुकी है पर यह ठीक नहीं हुआ।</p>
<h5><strong>एक बेड पर दो मरीज का हो रहा है इलाज</strong></h5>
<p>क्वीनमेरी अस्पताल प्रदेश का इकलौता रेफरल अस्पताल है यही वजह कि यहां हमेशा मरीजों का दबाव रहता है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन इस भीषण गर्मी में एक बेड पर दो दो मरीजों को भर्ती कर इलाज कर रहा जिससे इन मरीजों में सक्रमण और टांके पकने जैसी शिकायतें आ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/584573/queen-mary-hospital--bring-your-own-fan-if-you-come-to-queen-mary-hospital----two-patients-to-a-bed</link>
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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:56:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> यूपी में संविदा पर 3000 डॉक्टरों की भर्ती,  स्वास्थ्य विभाग में हर माह होगा वॉक-इन इंटरव्यू</title>
                                    <description><![CDATA[विशेषज्ञों को मिलेगा तीन लाख मानदेय, एमबीबीएस को एक लाख]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584460/recruitment-of-3-000-doctors-on-a-contractual-basis-in-up--walk-in-interviews-to-be-held-monthly-in-the-health-department"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(5)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>प्रदेश में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने संविदा पर डॉक्टरों की नियुक्ति का दायरा बढ़ा दिया है। अब एक हजार के बजाय 3000 डॉक्टरों की संविदा पर भर्ती की जाएगी। इसके लिए वर्ष में दो बार रिक्त पदों का विज्ञापन जारी होगा, जबकि नियुक्ति प्रक्रिया पूरे वर्ष चलाने के लिए प्रत्येक माह वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे।</p><h4 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी दूर करने को नई व्यवस्था</h4><p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष के निर्देश पर नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत प्रत्येक वर्ष पहली मई और पहली नवंबर को जनपदवार रिक्त पदों का विवरण पोर्टल पर जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति प्रत्येक माह की 15 तारीख को वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित करेगी। यदि किसी पद के लिए केवल एक ही आवेदन प्राप्त होता है, तब भी इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी की जाएगी।</p><h4 style="text-align:justify;">एमबीबीएस डॉक्टर को एक लाख, विशेषज्ञ को 2.5 लाख रुपये मानदेय</h4><p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के तहत संविदा पर नियुक्त एमबीबीएस चिकित्सकों को एक लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। वहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित किया गया है। इतना ही नहीं, संविदा चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की तर्ज पर मानदेय वृद्धि का लाभ भी मिलेगा। उनके मानदेय में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।</p><h4 style="text-align:justify;">बुंदेलखंड में सेवा देने पर मिलेगा अतिरिक्त लाभ</h4><p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग ने दुर्गम और चिकित्सक-विहीन क्षेत्रों में विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन भी दिया है। यदि विशेषज्ञ चिकित्सक बुंदेलखंड क्षेत्र, आकांक्षी जिलों या आकांक्षी ब्लॉकों में सेवाएं देते हैं तो उनका मानदेय बढ़ाकर तीन लाख रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा।</p><h5 style="text-align:justify;"><br />ये भी पढ़ें  :  </h5><h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/584459/jaunpur--clash-involving-sticks-and-clubs-breaks-out-between-two-groups-over-tying-up-a-buffalo--one-person-dies-in-the-altercation--four-accused-apprehended"><span class="t-red">जौनपुर : </span>भैंस बांधने को लेकर दो पक्षों में चले लाठी-डंडे, मारपीट में एक की मौत, चार आरोपी दबोचे</a></h5><p style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/584460/recruitment-of-3-000-doctors-on-a-contractual-basis-in-up--walk-in-interviews-to-be-held-monthly-in-the-health-department</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:21:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजीएमयू न्यूज़ :  दवा घोटाले में एक और डॉक्टर पर गिरेगी गाज, फेफड़ों के रोगों की होगी सटीक पहचान </title>
                                    <description><![CDATA[-मृत मरीजों के नाम पर दवाओं की मांग और बिलों पर हस्ताक्षर को लेकर नोडल अधिकारी से फिर होगी पूछताछ
- इस तकनीक को शुरू करने वाला केजीएमयू का चेस्ट मेडिसिन विभाग प्रदेश का पहला विभाग बन गया है
-वितरण के बजाय एक्सपायरी के हवाले की गईं दवाएं, सरकारी धन की बर्बादी पर जांच के आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584211/kgmu-news--another-doctor-to-face-action-in-the-medicine-scam--precise-diagnosis-of-lung-diseases-to-be-enabled--a-dumping-ground-for-medicines%E2%80%94medicines-worth-lakhs-discarded-in-the-open"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(33)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले में सोमवार को एक और डॉक्टर पर गाज गिर सकती है। जांच समिति ने शनिवार को विभाग के दवा नोडल अधिकारी डॉ. विवेक सिंह से घंटों पूछताछ की थी। पूछताछ का केंद्र वे इंडेंट और बिल रहे, जिन पर ऐसे मरीजों के नाम दर्ज थे, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी थी। समिति ने सवाल किया कि मृत मरीजों के नाम पर दवाओं की मांग कैसे जारी हुई और उन दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर किस आधार पर किए गए। </p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, डॉ. विवेक सिंह इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जांच समिति के अध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने बताया कि सोमवार को डॉ. विवेक सिंह से दोबारा पूछताछ की जाएगी। यदि वे संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है। जांच में अब तक सामने आया है कि यूरोलॉजी विभाग में कई ऐसे मरीजों के नाम पर दवाओं का इंडेंट जारी किया गया, जिनकी मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। रिकॉर्ड में उन्हें भर्ती दिखाकर दवाएं मंगाई गईं और संबंधित बिल भी तैयार किए गए। इतना ही नहीं, इन दस्तावेजों पर विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षर भी पाए गए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दवाएं आखिर गईं कहां</h4>
<p style="text-align:justify;">जांच समिति अब इस बात की तह तक पहुंचने में जुटी है कि मृत मरीजों के नाम पर मंगाई गई दवाओं का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और उन्हें किस तरह खपाया गया। समिति ने रिकॉर्ड की जांच के दौरान ऐसे कई संदिग्ध मामलों की पहचान की है, जिनमें प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अंतरिम रिपोर्ट सौंपी, जांच अंतिम चरण में</h4>
<p style="text-align:justify;">डॉ. केके सिंह ने बताया कि मामले से संबंधित अंतरिम रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है, हालांकि कई बिंदुओं की जांच अभी जारी है। सोमवार को जांच पूरी करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समिति सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन पड़ताल कर रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">केजीएमयू में अत्याधुनिक तकनीक से फेफड़ों के रोगों की होगी सटीक पहचान</h4>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू के चेस्ट मेडिसिन विभाग ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों की जांच गाइडेड रेडियल एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) तकनीक से शुरू कर दी है। ये सुविधा देने वाला चेस्ट मेडिसिन विभाग प्रदेश का पहला विभाग बन गया है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) चेस्ट मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि यह उपलब्धि केवल एक नई तकनीक की शुरुआत नहीं, बल्कि बेहतर मरीज सेवाओं और सटीक उपचार के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के जरिए फेफड़ों की बीमारियों का निदान पहले की तुलना में अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विभाग के डॉ. दर्शन बजाज ने बताया कि सी-आर्म गाइडेड रेडियल ईबीयूएस तकनीक फेफड़ों के भीतर मौजूद छोटी, गहराई में स्थित गांठों और संदिग्ध घावों की सटीक पहचान करने में सक्षम है। इसके माध्यम से बायोप्सी भी अधिक सटीकता से की जा सकती है, जिससे मरीजों को समय पर सही निदान और उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में विकिरण (रेडिएशन) का उपयोग होता है, जिसके चलते सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। विभाग द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए थायरॉयड शील्ड, विशेष हेडगियर सहित अन्य उन्नत सुरक्षा उपकरण भी शामिल किए जाएंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर समेत कई गंभीर फेफड़ा रोगों की शुरुआती और सटीक पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे मरीजों को कम समय में बेहतर जांच और उपचार की सुविधा मिल सकेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">केजीएमयू में दवाओं का कबाड़खाना, लाखों की दवाएं खुले में फेंकी गईं</h4>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(32)4.jpg" alt="Untitled design (32)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू में मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली लाखों रुपये की दवाएं लिंब सेंटर स्थित एचआरएफ स्टोर के बाहर फेंक दी गईं। करीब पांच लाख रुपये मूल्य की इन दवाओं में कई ऐसी हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट इसी महीने पूरी हो जाएगी। एक इंजेक्शन की कीमत 1800 और विटामिन की 15 टेबलेट की कीमत 1200 रुपये के करीब है।</p>
<p style="text-align:justify;">किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के लिंब सेंटर में हाल ही में एचआरएफ का नया स्टोर बनाया गया है। इस स्टोर के बाहर बड़ी मात्रा में इंजेक्शन, विटामिन और पोषण संबंधी दवाएं पड़ी मिलीं। इन दवाओं को न तो सुरक्षित तरीके से रखा गया और न ही निस्तारण के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार एचआरएफ और संबंधित चिकित्सकों के बीच समन्वय के अभाव में दवाओं का समय पर उपयोग नहीं किया जा सका। इससे बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायरी होने के करीब पहुंच गईं हैं। आरोप है कि वितरण की व्यवस्था करने के बजाय दवाओं को स्टोर से बाहर कर दिया गया, जिससे लाखों रुपये का सरकारी धन बर्बाद हो गया। एक ओर मरीजों को कई बार जरूरी दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्टोर में रखी दवाएं बिना उपयोग के नष्ट हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ये दवा स्टोर के बाहर फेंकी गई</h4>
<p style="text-align:justify;">- क्यूओग्रेस कैप्सूल्स बैच नंबर- पीकेएनएचएम- 11 उत्पादन तिथि जुलाई 2024, एक्सपायर तिथि जून 2026</p>
<p style="text-align:justify;">-अमीनो एसिड इंजेक्शन बैच एलपी 2405 उत्पादन तिथि अगस्त 2024 एक्सपायर जून 2026</p>
<p style="text-align:justify;">-क्लोटिन इंजेक्शन बैच वी 627104,उत्पादन तिथि जुलाई 2024 एक्सपायर तिथि जून 2026</p>
<p style="text-align:justify;">-मैग्टम नोवो इंजेक्शन बैच- बैच24180529, उत्पादन तिथि जून 2024, समाप्ति तिथि जून 2026</p>
<p style="text-align:justify;">-नोक्साविट-10 बैच एएमटी-6399</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/584091/up-connection-to-mohali-blast--terrorist-arrested-from-deoband--joint-operation-by-punjab-stf-and-up-ats"><span class="t-red">मोहाली ब्लास्ट का यूपी कनेक्शन? </span>पंजाब STF और UP ATS की संयुक्त कार्रवाई में देवबंद से आंतकी गिरफ्तार, पूछताछ जा</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/584211/kgmu-news--another-doctor-to-face-action-in-the-medicine-scam--precise-diagnosis-of-lung-diseases-to-be-enabled--a-dumping-ground-for-medicines%E2%80%94medicines-worth-lakhs-discarded-in-the-open</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजीएमयू  न्यूज़ :  दीक्षांत में आएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वार्डों में गर्मी का कहर, लारी कार्डियोलॉजी में स्टेंट घोटाले की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) का 2026 का दीक्षांत समारोह 13 जुलाई को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल होंगे। </p>
<h4 style="text-align:justify;">राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी मेधावियों को सम्मानित</h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में मेधावी छात्रों को पदक प्रदान करेंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">13 जुलाई को होगा समारोह</h4>
<p style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रशासन ने समारोह की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दौरान विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584021/kgmu-news--sweltering-heat-plagues-wards--probe-into-stent-scam-at-lari-cardiology-intensifies--cancer-diagnosis-made-without-biopsy"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(6)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) का 2026 का दीक्षांत समारोह 13 जुलाई को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल होंगे। </p>
<h4 style="text-align:justify;">राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी मेधावियों को सम्मानित</h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में मेधावी छात्रों को पदक प्रदान करेंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">13 जुलाई को होगा समारोह</h4>
<p style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रशासन ने समारोह की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दौरान विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि इस वर्ष 25 मेधावियों को हीवेट मेडल, चांसलर मेडल समेत विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पहली बार पीजी छात्रों को नहीं मिलेंगे पदक</h4>
<p style="text-align:justify;">इस बार पहली बार स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के मेधावी छात्रों को पदक नहीं मिल सकेंगे। विश्वविद्यालय के अनुसार पीजी परीक्षाएं समय पर न होने से मेधावियों का चयन नहीं हो पाया। इसके चलते पीजी छात्र पदकों की दौड़ से बाहर हो गए हैं, जिससे उनमें निराशा देखी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में वार्डों की नियमित निगरानी न होने का खामियाजा भर्ती मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच मरीजों के लिए पर्याप्त राहत के इंतजाम नहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि कई मरीज हाथ के पंखों और निजी टेबल फैन के सहारे दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। यूरोलॉजी विभाग में अव्यवस्थाओं को लेकर किसी तीमारदार ने वीडियो बनाकर वायरल करा नराजगी जताई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पुराने पंखे नहीं दे पा रहे राहत, डॉक्टरों के कमरों में एसी तो मरीज बेहाल</h4>
<p style="text-align:justify;">यूरोलॉजी विभाग के वार्डों में लगे पुराने पंखे गर्मी से राहत देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि कई पंखे वर्षों पुराने हैं और उनकी हवा भी पर्याप्त नहीं है। नतीजतन मरीज उमस और गर्मी से परेशान हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजन हाथ के पंखों से हवा कर उन्हें राहत पहुंचाने की कोशिश करते नजर आते हैं। कुछ मरीजों ने अपनी सुविधा के लिए बेड के पास निजी टेबल फैन तक लगा रखे हैं। इसके बावजूद गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तीमारदारों ने वीडियो वायरल कर जताई नाराजगी</h4>
<p style="text-align:justify;">तीमारदारों का आरोप है कि एक ओर मरीज गर्मी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और कर्मचारियों के कमरों में एयर कंडीशनर की सुविधा उपलब्ध है। उनका कहना है कि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन केजीएमयू में इन निर्देशों का पालन धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। मरीजों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से वार्डों में बेहतर पंखे, कूलर व अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि भर्ती मरीजों को राहत मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि वार्डों की स्थिति का निरीक्षण कराया जाएगा। जहां भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें दूर किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मरीजों को</p>
<h4 style="text-align:justify;"> केजीएमयू लारी कार्डियोलॉजी में स्टेंट घोटाले की जांच तेज</h4>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी विभाग में कथित अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है, जहां करीब 15 मरीजों को अलग-अलग समय पर पांच-पांच स्टेंट लगाए जाने के आरोपों की जांच तेज कर दी गई है। मामले को गंभीर मानते हुए गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने विभाग से पिछले एक वर्ष के दौरान हुई सभी एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयुष्मान भारत योजना में अनियमितताओं के शक पर पांच सदस्यीय समिति ने तलब किया पूरा रिकॉर्ड, एंजियोप्लास्टी से लेकर स्टेंट प्रत्यारोपण तक की गहन जांच शुरू। जांच का दायरा बढ़ाते हुए समिति ने यह भी जानकारी मांगी है कि आयुष्मान भारत योजना सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत कितने मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई और किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में एक ही मरीज को बार-बार स्टेंट लगाने की आवश्यकता पड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक आरोपों के अनुसार, कुछ मरीजों को बार-बार भर्ती कर अलग-अलग अवसरों पर स्टेंट लगाए गए, जबकि कई मामलों में मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और आवश्यक दस्तावेजों के समुचित रिकॉर्ड दर्ज करने में लापरवाही बरती गई। इससे आयुष्मान योजना के तहत वित्तीय अनियमितता और ‘स्टेंट के नाम पर सेंधमारी’ की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, रिकॉर्ड प्राप्त होने के बाद समिति प्रत्येक मरीज की फाइल, एंजियोग्राफी रिपोर्ट, एंजियोप्लास्टी रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी। यह भी आंका जाएगा कि जिन मरीजों को अधिक संख्या में स्टेंट लगाए गए, क्या वे चिकित्सकीय रूप से आवश्यक थे या उपचार तय मानकों के विपरीत किया गया। समिति ने यह भी संकेत दिए हैं कि जांच में बाहरी विशेषज्ञों और दूसरे संस्थानों के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकती है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उपचार प्रक्रिया चिकित्सकीय दृष्टि से उचित थी या नहीं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बिना बायोप्सी कर दिया कैंसर घोषित, कागजों पर चढ़ा दी लाखों की दवाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में सामने आए कथित दवा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हैरान करने वाले तथ्य उजागर हो रहे हैं। जांच में ऐसे कई मामलों का पता चला है, जिनमें मरीजों को बायोप्सी, पैट-सीटी स्कैन, एमआरआई और कैंसर स्टेजिंग जैसी अनिवार्य जांचों के बिना ही कैंसर रोगी घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, रिकॉर्ड में इन मरीजों को लाखों रुपये कीमत की इम्यूनोथेरेपी और अन्य महंगी दवाओं की डोज भी दर्शा दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग के कथित दवा घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे, कई मरीजों की फाइलों में कैंसर पुष्टि के जरूरी दस्तावेज गायब</p>
<p style="text-align:justify;">जांच अधिकारियों के अनुसार, मरीजों की फाइलों की पड़ताल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें एक से दो लाख रुपये तक कीमत वाली दवाएं जारी की गईं, जबकि कैंसर की पुष्टि करने वाली बायोप्सी रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी कैंसर का उपचार शुरू करने से पहले बायोप्सी के माध्यम से रोग की पुष्टि करना अनिवार्य चिकित्सा प्रक्रिया है। इसके बाद सीटी स्कैन, एमआरआई और स्टेजिंग के जरिए बीमारी की स्थिति और उपचार की दिशा तय की जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सिर्फ ओपीडी पर्चे के सहारे जारी हुईं महंगी दवाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">जांच में कई फाइलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में केवल ओपीडी पर्चे और सीमित दस्तावेजों के आधार पर मरीजों को कैंसर पीड़ित दर्शाकर महंगी दवाएं जारी कर दी गईं। इससे असाध्य रोग योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली उच्च मूल्य की दवाओं के संभावित दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हर दस्तावेज का हो रहा मिलान</h4>
<p style="text-align:justify;">जांच टीम अब मरीजों के उपचार से जुड़े प्रत्येक दस्तावेज की बारीकी से जांच कर रही है। बायोप्सी रिपोर्ट, रेडियोलॉजिकल जांच, कैंसर स्टेजिंग रिपोर्ट और दवा वितरण रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर भी है कि जिन मरीजों के नाम पर दवाएं निर्गत की गईं, उन्हें वास्तव में दवाएं दी गईं या नहीं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बढ़ता जा रहा जांच का दायरा</h4>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई अन्य संदिग्ध मामलों की भी पहचान हुई है। ऐसे में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, बल्कि मरीजों के जीवन से खिलवाड़ के गंभीर आरोपों का रूप ले सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/584019/rabi-lamichhane-visits-ram-lalla-with-his-wife--says-india-nepal-relations-are-bound-by-shared-culture--civilization--and-traditions"><span class="t-red">रबी लामिछाने ने पत्नी संग किए रामलला के दर्शन,</span> कहा-भारत-नेपाल के संबंध साझा संस्कृति, सभ्यता और परंपराएं जोड़ने वाले</a></h5>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/584021/kgmu-news--sweltering-heat-plagues-wards--probe-into-stent-scam-at-lari-cardiology-intensifies--cancer-diagnosis-made-without-biopsy</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/584021/kgmu-news--sweltering-heat-plagues-wards--probe-into-stent-scam-at-lari-cardiology-intensifies--cancer-diagnosis-made-without-biopsy</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 11:36:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World no Tobacco Day: तंबाकू आपको कूल नहीं, अपनी लत का गुलाम बनाता है-डॉ. अर्जुन अग्रवाल</title>
                                    <description><![CDATA[ अमृत विचार ने रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट, बरेली के निदेशक एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने तंबाकू, गुटखा और ई-सिगरेट के बढ़ते चलन और इससे होने वाले जानलेवा नुकसानों को लेकर विस्तृत बातचीत की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583464/tobacco-doesn-t-make-you-cool--it-makes-you-a-slave-to-your-addiction-%E2%80%94-dr--arjun-agarwal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/tob.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली।</strong><em>अमृत विचार</em><strong> </strong><em>ने रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट, बरेली के निदेशक एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने तंबाकू, गुटखा और ई-सिगरेट के बढ़ते चलन और इससे होने वाले जानलेवा नुकसानों को लेकर विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस सीधी बातचीत के मुख्य अंश...</em></p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qikLcZs5p8s" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<p><strong>क्या तंबाकू सच में कैंसर का सबसे बड़ा कारण है?</strong><br />बिल्कुल, इसमें कोई संदेह नहीं है। तंबाकू का सेवन मुंह, जीभ, गला, फेफड़े, भोजन नली, पेट, अग्नाशय (पैनक्रियाज), किडनी, मूत्राशय और गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) सहित कई तरह के कैंसर का जोखिम अत्यधिक बढ़ा देता है। हमारे देश और विशेषकर उत्तर प्रदेश में गुटखा, खैनी, जर्दा और पान मसाला का बढ़ता सेवन एक बेहद गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।</p>
<p><strong>गुटखा और खैनी, सिगरेट से कम खतरनाक हैं?</strong><br />यह समाज में फैला सबसे बड़ा भ्रम है। चबाने वाला तंबाकू सीधे मुंह की अंदरूनी परत (म्यूकोसा) के संपर्क में रहता है। इससे मुंह के अंदर सफेद या लाल पैच (दाग) बनना, मुंह का कम खुलना (फाइब्रोसिस), लगातार जलन, छाले होना और आगे चलकर यही लक्षण मुंह के कैंसर में बदल जाते हैं।</p>
<p><strong>मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?</strong><br />कुछ प्रमुख संकेतों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। मुंह में कोई भी ऐसा छाला जो तीन सप्ताह से अधिक समय में भी ठीक न हो। मुंह के भीतर सफेद या लाल रंग के दाग-धब्बे पड़ना। गाल या जीभ पर किसी तरह की गांठ का महसूस होना। मुंह खोलने, चबाने या कुछ भी निगलने में कठिनाई होना।आवाज में अचानक बदलाव आना या गर्दन में कोई गांठ उभरना प्रारंभिक संकेत माने जा सकते हैं।</p>
<p><strong>युवा पीढ़ी के लिए आपका सबसे बड़ा संदेश क्या है?</strong><br />युवा यह बात गांठ बांध लें कि तंबाकू आपको ‘कूल’ नहीं बनाता, बल्कि आपको अपने नियंत्रण में ले लेता है। जो चीज़ आपको बार-बार अपनी ओर खींचती है, वह असल में आपसे आपकी स्वतंत्रता और आपका अनमोल जीवन छीन रही है। नशे के इस दिखावे से दूर रहें।</p>
<p><strong>क्या सालों से तंबाकू खा रहा व्यक्ति यदि इसे छोड़ता है, तो सच में कोई फायदा होता है?</strong><br />शत-प्रतिशत फायदा होता है। तंबाकू छोड़ने के तुरंत बाद शरीर में रिकवरी शुरू हो जाती है। समय के साथ पुरानी खांसी ठीक होती है, सांस लेने में आसानी होती है, स्वाद और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। हृदय और फेफड़ों का स्वास्थ्य बेहतर होने से भविष्य  में होने वाली जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना कम हो जाता है।</p>
<p><strong>क्या ‘कभी-कभी’ या बहुत कम मात्रा में तंबाकू लेना सुरक्षित है? </strong><br />चिकित्सा विज्ञान में तंबाकू का कोई भी स्तर सुरक्षित नहीं माना गया है। ‘कभी-कभी’ का शौक ही धीरे-धीरे आदत बनता है और फिर वही आदत गंभीर लत का रूप ले लेती है। चूंकि इसका नुकसान शरीर को धीरे-धीरे होता है, इसलिए शुरुआती दौर में इसके घातक प्रभाव दिखाई नहीं देते।</p>
<p><strong>क्या आजकल युवाओं में बढ़ रहा वेपिंग या ई-सिगरेट का चलन एक सुरक्षित विकल्प है?</strong><br />कतई नहीं। तंबाकू कंपनियाँ नए उत्पादों को आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक पैकेजिंग और आक्रामक ऑनलाइन प्रमोशन के ज़रिए पेश कर विशेष रूप से युवाओं को टारगेट कर रही हैं। इसमें मौजूद निकोटीन अत्यधिक एडिक्टिव (लत लगाने वाला) होता है। इसे ‘हानिरहित फैशन’ समझना बहुत बड़ी भूल और बेहद खतरनाक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/583464/tobacco-doesn-t-make-you-cool--it-makes-you-a-slave-to-your-addiction-%E2%80%94-dr--arjun-agarwal</link>
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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 12:13:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World no Tobacco Day: तंबाकू की आदत स्वाद नहीं, जीवन को निगलती बीमारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट बरेली के  निदेशक  एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने तंबाकू का सेवन करने वालों के विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर अपना संदेश दिया। उन्होंने तंबाकू के खतरे बताते हुए लोगों से इसका सेवन छोड़ने की अपील की है।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"></div>
<p>वह बताते हैं कि  हर दिन अस्पताल में हम ऐसे अनगिनत मरीजों को देखते हैं, जिनकी जानलेवा बीमारी की शुरुआत एक बेहद छोटी और आम सी आदत से हुई थी-चाहे वह गुटखा हो, खैनी, बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला या फिर आजकल का आधुनिक वेपिंग (ई-सिगरेट)। शुरुआत में यह सिर्फ कभी-कभी के शौक या मनोरंजन से शुरू होता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583467/the-tobacco-habit--not-a-taste--but-a-disease-that-swallows-life"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/tob1.jpg" alt=""></a><br /><p>रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट बरेली के  निदेशक  एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने तंबाकू का सेवन करने वालों के विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर अपना संदेश दिया। उन्होंने तंबाकू के खतरे बताते हुए लोगों से इसका सेवन छोड़ने की अपील की है।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qikLcZs5p8s" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<p>वह बताते हैं कि  हर दिन अस्पताल में हम ऐसे अनगिनत मरीजों को देखते हैं, जिनकी जानलेवा बीमारी की शुरुआत एक बेहद छोटी और आम सी आदत से हुई थी-चाहे वह गुटखा हो, खैनी, बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला या फिर आजकल का आधुनिक वेपिंग (ई-सिगरेट)। शुरुआत में यह सिर्फ कभी-कभी के शौक या मनोरंजन से शुरू होता है, फिर धीरे-धीरे रोज़मर्रा की आदत बनती है, और अंततः एक ऐसी भयानक लत का रूप ले  लेती है जो पूरे जीवन को कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों और गहरे आर्थिक संकट के दलदल में धकेल देती है। </p>
<p>तंबाकू केवल उस व्यक्ति को ही नहीं मारता जो इसका सेवन करता है, बल्कि यह हंसते-खेलते पूरे परिवार को उजाड़ देता है। बच्चे अपने पिता का साया खो देते हैं, पत्नी अपने पति को खो देती है, और बूढ़े माता-पिता अपनी आँखों के सामने अपने जवान बेटे को तिल-तिल कर बीमारी में दम तोड़ते हुए देखते हैं। चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से सबसे दुखद बात यह है कि तंबाकू से होने वाली ये अधिकांश बीमारियां शत-प्रतिशत रोकी जा सकती हैं, बशर्ते समय पर कदम उठाया जाए। </p>
<p>विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर मेरी आप सभी से विनम्र अपील है कि तंबाकू को स्टाइल स्टेटमेंट, तनाव कम करने का जरिया या एक सामाजिक आदत मानना पूरी तरह बंद कीजिए। यह कोई फैशन नहीं, बल्कि एक धीमा ज़हर और जानलेवा नशा है। अच्छी बात यह है कि इससे बाहर निकलने के लिए आज हर तरह की चिकित्सकीय और मानसिक मदद उपलब्ध है।</p>
<p>आज ही एक दृढ़ संकल्प लें अपने लिए न सही, अपने उस परिवार के लिए जो आपसे बेहद प्यार करता है... तंबाकू को हमेशा के लिए छोड़ दें!</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/583467/the-tobacco-habit--not-a-taste--but-a-disease-that-swallows-life</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/583467/the-tobacco-habit--not-a-taste--but-a-disease-that-swallows-life</guid>
                <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World no Tobacco Day: सावधान! सिगरेट का कश न लगाने वालों को भी निगल रहा है कैंसर</title>
                                    <description><![CDATA[पैसिव स्मोकिंग (नॉन-स्मोकर्स का धुएं के संपर्क में आना) बेहद जानलेवा है और इसके वैज्ञानिक प्रमाण बेहद डराने वाले हैं। जो लोग खुद सिगरेट-बीड़ी नहीं पीते, लेकिन धूम्रपान करने वालों के साथ रहते हैं, वे भी सीधे तौर पर कैंसर की ओर बढ़ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583465/caution--cancer-is-claiming-even-those-who-never-take-a-puff-of-a-cigarette"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/passive.jpg" alt=""></a><br /><p>पैसिव स्मोकिंग (नॉन-स्मोकर्स का धुएं के संपर्क में आना) बेहद जानलेवा है और इसके वैज्ञानिक प्रमाण बेहद डराने वाले हैं। जो लोग खुद सिगरेट-बीड़ी नहीं पीते, लेकिन धूम्रपान करने वालों के साथ रहते हैं, वे भी सीधे तौर पर कैंसर की ओर बढ़ रहे हैं।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/qikLcZs5p8s" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<p><strong>7,000 से अधिक रसायन और 69 कार्सिनोजेन्स</strong><br />विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय कैंसर शोध संस्थानों के अनुसार, बीड़ी-सिगरेट से निकलने वाले धुएँ में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं। इनमें से कम से कम 69 रसायन सीधे तौर पर कैंसर पैदा करने वाले (कार्सिनोजेन्स) पाए गए हैं, जिनमें आर्सेनिक, बेंजीन और फॉर्मलाडेहाइड शामिल हैं।</p>
<p><strong>भारत में हर साल 2 लाख मौतें</strong><br />भारतीय चिकित्सा अनुसंधानों और स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 2 लाख लोग खुद धूम्रपान न करने के बावजूद सिर्फ दूसरों के धुएं के कारण होने वाली बीमारियों से दम तोड़ देते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:04:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  KGMU परिसर की मजारें 'लावारिस' घोषित,  नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर चलेगा बुलडोजर </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार : </strong>राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रशासन ने बड़ी कार्यवाही करते हुए परिसर के अंदर बनी मजार को लावारिस घोषित कर दिया है और उसे ध्वस्त करने के आदेश भी दिए है। बता दें कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से यह कहा गया है कि उसने जिम्मेदार पक्ष को नोटिस जारी किया था। ताकि वे अपना मालिकाना हक जता सके।     </p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू परिसर में बनी मजारों को लावारिस घोषित कर दी गई हैं। लगातार नोटिस जारी होने के बावजूद किसी भी पक्ष द्वारा मालिकाना हक का वैध दस्तावेज न देने के बाद प्रशासन ने मजार को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583327/shrines-on-kgmu-campus-declared--unclaimed---bulldozers-to-roll-if-no-response-received-to-notice"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(94).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार : </strong>राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रशासन ने बड़ी कार्यवाही करते हुए परिसर के अंदर बनी मजार को लावारिस घोषित कर दिया है और उसे ध्वस्त करने के आदेश भी दिए है। बता दें कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से यह कहा गया है कि उसने जिम्मेदार पक्ष को नोटिस जारी किया था। ताकि वे अपना मालिकाना हक जता सके।     </p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू परिसर में बनी मजारों को लावारिस घोषित कर दी गई हैं। लगातार नोटिस जारी होने के बावजूद किसी भी पक्ष द्वारा मालिकाना हक का वैध दस्तावेज न देने के बाद प्रशासन ने मजार को लावारिस घोषित कर दिया है। अब मजार को ध्वस्त करने के बजाए शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए जिला व पुलिस प्रशासन से अनुमति मांगी गई है। अवैध रूप से परिसर में छह मजारें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें क्वीनमेरी, रेस्पीरेटरी मेडिसिन, आर्थोपैडिक्स, ट्रॉमा सेंटर, नेत्र रोग विभाग, गांधी वार्ड के निकट समेत अन्य स्थानों पर मजारे हैं। इन मजारों को हटाने के लिए केजीएमयू प्रशासन लंबे समय से कार्रवाई कर रहा है। केजीएमयू प्रशासन ने जिम्मेदार पक्षों को नोटिस जारी कर मालिकाना हक का दावा पेश करने के लिए 15 दिनों का समय दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अतिरिक्त समय मिलने के बाद भी किसी संस्था या व्यक्ति ने कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किया। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने यूनिवर्सिटी कुलसचिव को रिपोर्ट सौंपकर बुलडोजर कार्रवाई की संस्तुति भेजी है। पुलिस बल और प्रशासनिक उपलब्धता मिलते ही इस अवैध निर्माण को हटा दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि शुक्रवार को अवैध रूप से निर्मित मजार को लावारिस घोषित कर दिया गया है। मजारों को शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए स्थानों को चिह्नित किया जाएगा। इससे पहले जिला प्रशासन व पुलिस को सूचना भेजी गई है। मजार हटने से परिसर से अतिक्रमण हटेगा। इससे अवागमन की राह आसान होगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/583324/major-tragedy-in-hamirpur--six-laborers-dead--several-trapped-after-slab-of-under-construction-bridge-collapses"><span class="t-red">हमीरपुर में बड़ा हादसा: </span>निर्माणाधीन पुल की स्लैब ढहने से छह मजदूरों की मौत, कई दबे ; सीएम योगी ने जताया हादसे पर दुःख</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:45:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> नई आयुष नीति से प्रदेश बनेगा अंतरराष्ट्रीय वेलनेस डेस्टिनेशन, सीएम योगी ने दिए जल्द लागू करने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[-मुख्यमंत्री ने ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को जल्द लागू करने के दिए निर्देश
-मिर्जापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडलों में खुलेंगे एकीकृत आयुष महाविद्यालय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583068/new-ayush-policy-to-transform-the-state-into-an-international-wellness-destination--cm-yogi-directs-speedy-implementation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(19)19.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को जल्द लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल उपचार आधारित व्यवस्था तक सीमित न रखकर आयुष, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के समन्वय से नई पहचान दी जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आयुष वेलनेस सेक्टर से जोड़कर बड़ा पर्यटन और रोजगार मॉडल तैयार किया जा सकता है। वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 3,953 आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 225 योग वेलनेस सेंटर और 19 आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आयुष सेवाओं का विस्तार गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत तरीके से किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने मिर्जापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडलों में एकीकृत आयुष महाविद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। इन संस्थानों को आधुनिक आयुष चिकित्सा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पीपीपी मॉडल पर बनेंगे आधुनिक वेलनेस सेंटर</h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार पीपीपी मॉडल के जरिए आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र और आयुष कॉलेजों के उन्नयन की दिशा में काम करेगी। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल हेल्थ सेवाएं और अनुसंधान गतिविधियां भी संचालित होंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">निवेशकों को मिलेगा प्रोत्साहन और सिंगल विंडो सुविधा</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित नीति में निवेश आधारित सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट और रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए त्वरित स्वीकृतियां देने और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ओपीडी सेवाओं और शोध गतिविधियों पर जोर</h4>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने आयुष संस्थानों में ओपीडी सेवाओं को बेहतर बनाने, दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। साथ ही महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर में शोध और नवाचार गतिविधियों को गति देने तथा स्थायी फैकल्टी नियुक्ति जल्द पूरी करने को कहा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/583045/cm-yogi-s-message-to-children--in-a-letter--he-wrote%E2%80%94-cultivate-new-interests-during-summer-vacations--spend-time-with-grandparents"><span class="t-red">सीएम योगी का बच्चों के नाम संदेश, </span>पाती में लिखा -'गर्मी की छुट्टियों में नई रुचियां, दादा-दादी के साथ बिताएं समय'</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/583068/new-ayush-policy-to-transform-the-state-into-an-international-wellness-destination--cm-yogi-directs-speedy-implementation</link>
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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 13:36:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
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