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                <title>Health Care - Amrit Vichar</title>
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                <description>Health Care RSS Feed</description>
                
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                <title>यूपी में संचारी रोग अभियान की शुरुआत:  उप मुख्यमंत्री की अपील, कहा- सफाई रखें, जमा न होने दें कूलर-गमलों में पानी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> प्रदेश में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ बुधवार से एक माह चलने वाला विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू हो गया है। बलरामपुर अस्पताल से उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस अभियान का शुभारंभ किया। इसके साथ ही 10 से 30 अप्रैल तक ‘घर-घर दस्तक अभियान’ भी चलाया जाएगा। जिसमें लोगों को जागरूक कर बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अभियान का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा किकहा कि कूलर, गमलों की प्लेट, टायर, फ्रिज की ट्रे जैसे स्थानों पर पानी जमा न होने दें और घर व</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577284/launch-of-communicable-diseases-campaign-in-up--deputy-chief-minister-appeals%E2%80%94%22maintain-cleanliness--do-not-allow-water-to-stagnate-in-coolers-and-flowerpots%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/वायरल-तस्वीर-(49).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> प्रदेश में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ बुधवार से एक माह चलने वाला विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू हो गया है। बलरामपुर अस्पताल से उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस अभियान का शुभारंभ किया। इसके साथ ही 10 से 30 अप्रैल तक ‘घर-घर दस्तक अभियान’ भी चलाया जाएगा। जिसमें लोगों को जागरूक कर बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अभियान का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा किकहा कि कूलर, गमलों की प्लेट, टायर, फ्रिज की ट्रे जैसे स्थानों पर पानी जमा न होने दें और घर व आसपास सफाई रखें, ताकि मच्छरों के पनपने की संभावना खत्म की जा सके। आमजन से अपील की कि इस अभियान को जनआंदोलन बनाएं और अपने घरों व आसपास जल जमाव न होने दें।उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में 7 जिलों से शुरू हुआ अभियान सभी 75 जनपदों में लागू कर दिया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">व्यापक अभियान में 13 विभाग मिलकर समन्वित रूप से कार्य करेंगे। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग नोडल बनाया गया है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों का असर साफ नजर आ रहा है। वर्ष 2017 में जहां दिमागी बुखार के 4724 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में यह घटकर 694 रह गए। इसी तरह जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले 693 से घटकर मात्र 63 हो गए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">डेंगू जांच के लिए प्रदेशभर में 89 अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं भी सक्रिय कर दी गई हैं। उपमुख्यमंत्री ने जागरूकता रैली, प्रचार वाहनों और फॉगिंग मशीनों को रवाना किया। ‘दस्तक अभियान’ में आशा बहुएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अहम भूमिका निभा रही हैं। ये कार्यकर्ता हर साल तीन चरणों में चार करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचकर लोगों को रोगों से बचाव, त्वरित उपचार, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करती हैं। साथ ही गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पेयजल शुद्धिकरण और मच्छर नियंत्रण से जुड़े उपायों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार अमित कुमार घोष, महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश सरकार डॉ. पवन कुमार अरुण, विशेष सचिव धीरेंद्र सचान, महानिदेशक, परिवार कल्याण डॉ. एच.डी. अग्रवाल, महानिदेशक, प्रशिक्षण डॉ. रंजना खरे, निदेशक, बलरामपुर चिकित्सालय डॉ. कविता आर्य, अपर निदेशक, स्वास्थ्य, लखनऊ डॉ. जीपी गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ डॉ. एनबी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बलरामपुर डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी उपस्थित रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/577281/madrasa-modernization-scheme--22-000-teachers-in-up-to-receive-relief--yogi-government-issues-directives"><span class="t-red">मदरसा आधुनिकीकरण योजना : </span>यूपी में 22 हजार शिक्षकों को मिलेगी राहत, योगी सरकार ने जारी किया निर्देश</a></h5>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 17:31:45 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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            <item>
                <title> KGMU में बदला Yellow Fever Vaccination का शेड्यूल : सोमवार-गुरुवार को ही लगेगा टीका</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में येलो फीवर के टीकाकरण का शेड्यूल बदल दिया गया है। अब यह टीका महीने के दूसरे शनिवार को नहीं लगाया जाएगा। पहले यह टीका सोमवार और गुरुवार के साथ शनिवार को भी लगाया जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टीका विशेष रूप से उन लोगों के लिए जरूरी है, जो येलो फीवर प्रभावित देशों की यात्रा करने जा रहे हैं। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी विदेश यात्रा से कम से कम 10 दिन पहले टीकाकरण जरूर करवा लें, ताकि पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। </p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों के अनुसार येलो</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575402/yellow-fever-vaccination-schedule-revised-at-kgmu--vaccinations-to-be-administered-only-on-mondays-and-thursdays"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(6)9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में येलो फीवर के टीकाकरण का शेड्यूल बदल दिया गया है। अब यह टीका महीने के दूसरे शनिवार को नहीं लगाया जाएगा। पहले यह टीका सोमवार और गुरुवार के साथ शनिवार को भी लगाया जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टीका विशेष रूप से उन लोगों के लिए जरूरी है, जो येलो फीवर प्रभावित देशों की यात्रा करने जा रहे हैं। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी विदेश यात्रा से कम से कम 10 दिन पहले टीकाकरण जरूर करवा लें, ताकि पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। </p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों के अनुसार येलो फीवर एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है। यह बीमारी मुख्य रूप से अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में पाई जाती है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस टीके की केवल एक खुराक ही व्यक्ति को जीवन भर के लिए सुरक्षा प्रदान करती है। समय पर टीकाकरण न केवल व्यक्ति को बीमारी से बचाता है, बल्कि इसके प्रसार को रोकने में भी प्रभावी साबित होता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/575392/%E2%82%B92-000-crore-sanctioned-for-tablet-and-smartphone-distribution--distribution-to-be-conducted-under-the-swami-vivekananda-youth-empowerment-scheme"><span class="t-red">टेबलेट-स्मार्टफोन वितरण को दो हजार करोड़ मंजूर, </span>स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना से होगा वितरण</a></h5>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575402/yellow-fever-vaccination-schedule-revised-at-kgmu--vaccinations-to-be-administered-only-on-mondays-and-thursdays</link>
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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 11:20:54 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम का बदला मिजाज कर रहा बच्चों को बीमार:  जुकाम-खांसी और बुखार के केस बढ़े, डॉक्टरों से जाने बचाव का तरीका</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। दिन में तेज धूप और गर्मी महसूस हो रही है, जबकि सुबह-शाम हल्की ठंड बनी हुई है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव का असर सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही बच्चों को खांसी, जुकाम, वायरल बुखार और पेट संबंधी समस्याओं की चपेट में ला सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान के अनुसार इस समय बच्चों की विशेष देखभाल बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि बच्चों को सादा पानी</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574683/the-changing-weather-is-making-children-sick--cases-of-colds--coughs--and-fevers-are-on-the-rise--learn-how-to-prevent-them-from-doctors"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(29)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। दिन में तेज धूप और गर्मी महसूस हो रही है, जबकि सुबह-शाम हल्की ठंड बनी हुई है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव का असर सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही बच्चों को खांसी, जुकाम, वायरल बुखार और पेट संबंधी समस्याओं की चपेट में ला सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान के अनुसार इस समय बच्चों की विशेष देखभाल बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि बच्चों को सादा पानी पिलाना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी देना चाहिए, जिससे पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है और शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने फिलहाल एसी व कूलर से बचने और बच्चों को फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक तथा बर्फ खाने से परहेज कराने की सलाह दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं भाऊराव देवरस संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष शुक्ला ने बताया कि बच्चों की इम्युनिटी मजबूत रखने के लिए उनके भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, जूस, सूखे मेवे और सलाद शामिल करना चाहिए। घर का ताजा बना भोजन जैसे दाल, चावल, रोटी, सब्जी और दही बच्चों के लिए सबसे बेहतर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बच्चों के विकास के लिए हाई-प्रोटीन डाइट जैसे दालें, अंकुरित चना-मूंग, दूध और दूध से बने पदार्थ देना चाहिए। साथ ही जंक फूड, बाहर की चाट-समोसे और अस्वच्छ भोजन से बचाना जरूरी है। बच्चों को खाने से पहले साबुन-पानी से हाथ धोने की आदत भी जरूर डालनी चाहिए, ताकि मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/574680/consumers-in-line--shops-stock-domestic-gas-cylinders--950-cylinders-being-sold-for-between-1500-2000-rupees"><span class="t-red">लाइन में उपभोक्ता, दुकानों में लगे घरेलू गैस सिलेंडर: </span>950 का सिलेंडर बेच रहे 1500-2000 रुपये के बीच</a></h5>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574683/the-changing-weather-is-making-children-sick--cases-of-colds--coughs--and-fevers-are-on-the-rise--learn-how-to-prevent-them-from-doctors</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/574683/the-changing-weather-is-making-children-sick--cases-of-colds--coughs--and-fevers-are-on-the-rise--learn-how-to-prevent-them-from-doctors</guid>
                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:01:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> विश्व किडनी दिवस आज: प्लास्टिक, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा किडनी रोग, विशेषज्ञों से जाने बचाव के तरीके </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार </strong>: जलवायु परिवर्तन, बढ़ते वायु प्रदूषण और प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग किडनी रोगों का खतरा बढ़ा रहा है। युवा तेजी से बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जागरूकता से इस बीमारी से बचा जा सकता है। इसी उद्देश्य से इस वर्ष विश्व किडनी दिवस की थीम पृथ्वी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों का किडनी स्वास्थ्य पर प्रभाव पर केंद्रित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलाजी के सचिव व एसजीपीजीआई में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574668/world-kidney-day-today--plastic--pollution--and-climate-change-are-increasing-kidney-disease--learn-prevention-methods-from-experts"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(21)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार </strong>: जलवायु परिवर्तन, बढ़ते वायु प्रदूषण और प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग किडनी रोगों का खतरा बढ़ा रहा है। युवा तेजी से बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जागरूकता से इस बीमारी से बचा जा सकता है। इसी उद्देश्य से इस वर्ष विश्व किडनी दिवस की थीम पृथ्वी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों का किडनी स्वास्थ्य पर प्रभाव पर केंद्रित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलाजी के सचिव व एसजीपीजीआई में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं और खून के माध्यम से किडनी तक पहुंच जाते हैं। ये कण किडनी के ऊतकों में जमा होकर सूजन और नुकसान पैदा कर सकते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">नैनो और माइक्रो प्लास्टिक भी मानव शरीर के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं। शोध में पाया गया है कि प्लास्टिक के अत्यंत छोटे कण लाल रक्त कोशिकाओं, मस्तिष्क और किडनी के ऊतकों तक पहुंच सकते हैं। यह नुकसान धीरे-धीरे होता है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ यह गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ती गर्मी भी किडनी के लिए खतरा बन रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">अधिक गर्मी के कारण शरीर में बार-बार हल्की किडनी चोट हो सकती है, जो धीरे-धीरे स्थायी क्षति में बदलकर क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) का रूप ले सकती है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जुड़ी मेटाबोलिक किडनी बीमारी भी तेजी से बढ़ रही है। इस स्थिति में पेशाब में एल्ब्यूमिन का रिसाव होने लगता है और धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता कम होती जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">आधुनिक दवाओं से टल सकती है डायलिसिस</h5>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नारायण के अनुसार कुछ आधुनिक दवाएं जैसे सेमाग्लूटाइड, रेनिन-एंजियोटेंसिन सिस्टम ब्लॉकर्स और नॉन-स्टेरॉयडल मिनरलोकोर्टिकोइड रिसेप्टर एंटागोनिस्ट चिकित्सकीय निगरानी में शुरू करने से किडनी रोग की प्रगति 40 से 70 प्रतिशत तक धीमी की जा सकती है। कई मामलों में इससे डायलिसिस की जरूरत 5 से 10 वर्ष तक टाली जा सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">किडनी ट्रांसप्लांट की भारी कमी</h5>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नारायण के अनुसार देश में हर साल लगभग दो लाख मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है, लेकिन केवल 12 से 15 हजार मरीजों का ही ट्रांसप्लांट हो पाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डायलिसिस की जरूरत पड़े तो घर पर की जाने वाली पेरिटोनियल डायलिसिस एक बेहतर विकल्प हो सकती है। एसजीपीजीआई से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक एक साल के भीतर 111 महिलाओं ने किडनी डोनेट की है, जबकि ऐसा करने वाले पुरुष सिर्फ 16 हैं। इन महिलाओं ने पति, बेटों, बेटियों को किडनी दान की है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">दर्द निवारक दवाओं से बचे</h5>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नारायण प्रसाद का कहना है काम को लेकर लोग तनावग्रस्त हो रहे हैं। सिर दर्द होने पर तत्काल दर्द निवारक दवा ले लेते हैं। शरीर में अन्य पीड़ा होने पर भी दर्द निवारक दवाओं का सेवन अंधाधुंध किया जा रहा है। अत्यधिक दर्द निवारण दवाएं किडनी पर बुरा प्रभाव डालती हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">किडनी रोग से बचाव के लिए ये करें उपाय</h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार जीवनशैली में बदलाव लाकर किडनी रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए शरीर का बीएमआई 25 से कम रखना, रोजाना 500 से 700 कैलोरी कम लेना, सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम करना, प्रतिदिन 0.8 ग्राम प्रति किलोग्राम के हिसाब से प्रोटीन लेना और नमक का सेवन 5 ग्राम से कम रखना जरूरी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">शुरुआती चरण में नहीं दिखते स्पष्ट लक्षण, नियमित जांच जरूरी</h5>
<p style="text-align:justify;">किडनी रोग विशेषज्ञ (होम्योपैथी) डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया किडनी से जुड़ी बीमारियों को अक्सर खामोश रोग कहा जाता है, क्योंकि इसकी शुरुआत में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और कई बार मरीज को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक किडनी काफी प्रभावित नहीं हो जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक चरण में दर्द या कोई विशेष परेशानी महसूस नहीं होती। किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती है, इसलिए शरीर तुरंत कोई बड़ा संकेत नहीं देता और मरीज सामान्य जीवन जीता रहता है। बीमारी बढ़ने पर लक्षण सामने आने लगते हैं। इनमें शरीर में सूजन, अत्यधिक थकान, पेशाब में झाग आना, भूख कम लगना और कमजोरी जैसे संकेत शामिल हैं। कई मामलों में मरीज को इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करने की भी आदत होती है। कई लोगों में किडनी की समस्या का पता नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान ही चलता है। पेशाब और खून की जांच में किडनी की कार्यक्षमता से जुड़े संकेत मिलने पर बीमारी का पता लगाया जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/574663/up-is-becoming-a-startup-hub--youth-entrepreneurship-is-gaining-new-momentum--innovation-is-receiving-institutional-support"><span class="t-red">स्टार्टअप हब बन रहा है यूपी:</span> युवाओं की उद्यमिता को नई रफ्तार, नवाचार को मिल रहा संस्थागत समर्थन</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574668/world-kidney-day-today--plastic--pollution--and-climate-change-are-increasing-kidney-disease--learn-prevention-methods-from-experts</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 12:39:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजीएमयू में खून की कमी से टालने पड़ रहे ऑपरेशन,  प्रशासन ने लोगों से की रक्तदान की अपील</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ब्लड बैंक में खून का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खून की कमी के कारण मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़ रहे हैं। केजीएमयू प्रशासन ने गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए स्वस्थ लोगों से रक्तदान करने की अपील की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संस्थान के ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में पिछले वर्ष तक हर समय 3500 से 4000 यूनिट खून का स्टॉक रहता था। इस समय स्टॉक घटकर लगभग 2000 यूनिट रह गया है। अस्पताल में रोजाना 250 से 300 यूनिट खून मरीजों को चढ़ाया जा रहा है। सबसे ज्यादा</div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574133/operations-are-being-postponed-due-to-blood-shortage-at-kgmu--the-administration-has-appealed-to-the-public-for-blood-donations"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(5)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ब्लड बैंक में खून का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खून की कमी के कारण मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़ रहे हैं। केजीएमयू प्रशासन ने गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए स्वस्थ लोगों से रक्तदान करने की अपील की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्थान के ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में पिछले वर्ष तक हर समय 3500 से 4000 यूनिट खून का स्टॉक रहता था। इस समय स्टॉक घटकर लगभग 2000 यूनिट रह गया है। अस्पताल में रोजाना 250 से 300 यूनिट खून मरीजों को चढ़ाया जा रहा है। सबसे ज्यादा संकट ए और एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप का है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">करीब 20 दिनों से इन दोनों ग्रुपों के खून की भारी कमी है। फिलहाल प्रतिदिन केवल 20 से 30 यूनिट खून ही उपलब्ध हो पा रहा है, जबकि जरूरत 60 से 70 यूनिट की रहती है। खून की कमी के कारण इन ब्लड ग्रुप के मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार हालात ऐसे बन रहे हैं कि ऑपरेशन तक टालने पड़ रहे हैं। तीमारदार जैसे तैसे निजी ब्लड बैंकों से खून की व्यवस्था कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चन्द्रा ने बताया कि जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ए और एबी पॉजिटिव है, वह रक्तदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के रक्तदान से तीन मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इच्छुक लोग केजीएमयू के ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान कर सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि स्वैच्छिक रक्तदान ही इस संकट से निपटने का सबसे बड़ा माध्यम है।</div>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;">अन्य प्रमुख अस्पतालों में ए और एबी पॉजिटिव खून की स्थिति</h5>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोहिया संस्थान के ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुब्रत चंद्रा ने बताया कि संस्थान में 1187 यूनिट खून उपलब्ध है, जिसमें ए और एबी पॉजिटिव ग्रुप का लगभग 350 यूनिट खून है। सभी प्रकार के ब्लड ग्रुप का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बलरामपुर अस्पताल के ब्लड बैंक में कुल 58 यूनिट खून मौजूद है, जिनमें ए पॉजिटिव आठ और एबी पॉजिटिव आठ यूनिट खून है। वहीं, सिविल अस्पताल में एबी पॉजिटिव नौ और ए पॉजिटिव पांच यूनिट खून उपलब्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि उनके ब्लड बैंक में लगभग 90 यूनिट खून है। इसमें ए पॉजिटिव पांच और एबी पॉजिटिव आठ यूनिट खून मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बाकी सभी ब्लड ग्रुप का स्टॉक पर्याप्त है। इच्छुक और स्वस्थ लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आ सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खून की मांग को पूरा करने और स्टॉक बनाए रखने के लिए समय-समय पर विभिन्न अस्पतालों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करके मरीजों की जान बचाने में योगदान दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/574129/employees-will-not-be-able-to-use-electricity-arbitrarily--they-will-have-to-provide-an-accounting--and-if-there-is-no-wasteful-use--they-will-receive-bill-relief"><span class="t-red">मनमाने तरीके से बिजली का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे कर्मचारी: </span>देना होगा हिसाब, फिजूल बर्बादी नहीं तो बिल में राहत भी मिलेगी</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574133/operations-are-being-postponed-due-to-blood-shortage-at-kgmu--the-administration-has-appealed-to-the-public-for-blood-donations</link>
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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:27:14 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बदलते मौसम में बच्चों पर विशेष ध्यान: सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध निमोनिया, दस्त का इलाज, लक्षण दिखने पर तुरंत कराये इलाज </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>बदलते मौसम में बरती जा रही लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। खानपान में गड़बड़ी व सफाई की अनदेखी के चलते डायरिया व निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक डॉ. डी. एच.अग्रवाल का कहना है कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस और जिंक की दवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं तथा बच्चों के लिए आवश्यक जांच एवं उपचार की व्यवस्था है। इसलिए इन दोनों बीमारियों के लक्षण आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने बच्चों को दिखाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन ने</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574024/special-attention-to-children-during-changing-weather--treatment-for-pneumonia-and-diarrhea-available-in-all-government-hospitals--seek-immediate-treatment-if-symptoms-appear"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/untitled-design-(20)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>बदलते मौसम में बरती जा रही लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। खानपान में गड़बड़ी व सफाई की अनदेखी के चलते डायरिया व निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक डॉ. डी. एच.अग्रवाल का कहना है कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस और जिंक की दवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं तथा बच्चों के लिए आवश्यक जांच एवं उपचार की व्यवस्था है। इसलिए इन दोनों बीमारियों के लक्षण आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने बच्चों को दिखाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन ने बताया कि बदलते मौसम में छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे दस्त और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। यदि अभिभावक प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर तुरंत आशा, एएनएम या नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य इकाई से संपर्क करें तो बच्चे को गंभीर स्थिति में जाने से रोका जा सकता है। समय पर ओआरएस, जिंक और आवश्यक दवाओं से अधिकतर मामलों में बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.सलमान खान के अनुसार, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाली मृत्यु का लगभग 15–20 प्रतिशत हिस्सा दस्त और निमोनिया से जुड़ा होता है। अच्छी बात यह है कि ओआरएस, जिंक और समय पर उपचार से दस्त के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों का प्रभावी प्रबंधन संभव है, वहीं निमोनिया की शीघ्र पहचान से जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि दस्त होने पर तुरंत ओआरएस घोल देना प्रारंभ करें तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर 14 दिन तक जिंक की गोली देना सुनिश्चित करें। बार-बार स्तनपान जारी रखें और बच्चे को पर्याप्त तरल पदार्थ दें। निमोनिया के लक्षण दिखते ही देरी न करें। घर पर इलाज करने या झोलाछाप डॉक्टर से दवा लेने से स्थिति बिगड़ सकती है। समय पर इलाज से अधिकतर बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/574022/yogi-government-s-big-move--over-20-000-anganwadi-centers-receive-ecce-kits--children-will-learn-through-play"><span class="t-red">योगी सरकार का बड़ा कदम: </span>20 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को मिली ECCE किट, खेल-खेल में सीखेंगे बच्चे</a></h5>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574024/special-attention-to-children-during-changing-weather--treatment-for-pneumonia-and-diarrhea-available-in-all-government-hospitals--seek-immediate-treatment-if-symptoms-appear</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/574024/special-attention-to-children-during-changing-weather--treatment-for-pneumonia-and-diarrhea-available-in-all-government-hospitals--seek-immediate-treatment-if-symptoms-appear</guid>
                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:06:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>World Lymphedema Day : फाइलेरिया मरीज बने जागरूकता दूत, बीमारी उन्मूलन में निभा रहे अहम भूमिका </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> फाइलेरिया के खात्मे की दिशा में सफलता मिलती तब शुरू हुई, जब फाइलेरिया के मरीज खुद जागरूकता दूत बन गए। विभिन्न जिलों के फाइलेरिया के मरीज अब जागरूकता और समुदाय की भागीदारी के जरिए बीमारी उन्मूलन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व लिंफेडेमा दिवस के अवसर पर प्रदेश फाइलेरिया अधिकारी डॉ. एके चौधरी का कहना है कि 2004 से चल रहे उन्मूलन प्रयासों को मरीजों की सक्रिय भागीदारी से मजबूती मिली है। बाराबंकी के 81 वर्षीय बाबादीन पिछले 15 वर्षों से फाइलेरिया से पीड़ित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब वह अपने अनुभव को जागरूकता संदेश में बदल चुके</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574012/world-lymphedema-day--filaria-patients-become-awareness-ambassadors--playing-a-key-role-in-eradicating-the-disease"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/untitled-design-(4)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> फाइलेरिया के खात्मे की दिशा में सफलता मिलती तब शुरू हुई, जब फाइलेरिया के मरीज खुद जागरूकता दूत बन गए। विभिन्न जिलों के फाइलेरिया के मरीज अब जागरूकता और समुदाय की भागीदारी के जरिए बीमारी उन्मूलन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व लिंफेडेमा दिवस के अवसर पर प्रदेश फाइलेरिया अधिकारी डॉ. एके चौधरी का कहना है कि 2004 से चल रहे उन्मूलन प्रयासों को मरीजों की सक्रिय भागीदारी से मजबूती मिली है। बाराबंकी के 81 वर्षीय बाबादीन पिछले 15 वर्षों से फाइलेरिया से पीड़ित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब वह अपने अनुभव को जागरूकता संदेश में बदल चुके हैं और ग्रामीणों को दवा लेने के लिए प्रेरित करते हैं। इसी तरह, लखनऊ की कमला ने भी 20 वर्षों से प्रभावित होने के बावजूद अब गांव में लोगों को नियमित दवा सेवन के लिए जागरूक कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश के 19 जिलों में 87 ब्लॉकों में सक्रिय सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) - पेशेंट सपोर्ट ग्रुप (पीएसपी) मंच में 1,736 मरीज शामिल हैं। ये मंच फाइलेरिया को लेकर मिथक और डर को दूर कर सामूहिक दवा सेवन और सही देखभाल की दिशा में समुदाय को जोड़ रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/573980/fire-at-a-foam-factory-in-baghpat-caused-losses-worth-lakhs--firefighters-brought-the-fire-under-control-after-a-lot-of-hard-work"><span class="t-red">बागपत की फोम फैक्ट्री में आग से लाखों का नुकसान,</span> कड़ी मशक्कत के बाद फायर फाइटर ने पाया आग पर काबू </a></h5>]]>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574012/world-lymphedema-day--filaria-patients-become-awareness-ambassadors--playing-a-key-role-in-eradicating-the-disease</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 11:10:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>हाईटेक बनेगा लोक बंधु अस्पताल: रेफर नहीं होंगे गंभीर बीमारियों के मरीज,मिलेंगी बेहतर जांच व उपचार सुविधाएं</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>राजधानी में आशियाना क्षेत्र स्थित लोक बंधु राज नारायण संयुक्त चिकित्सालय, का नेत्र विभाग अब अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा। इसके लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ( आईओसीएल) द्वारा कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) योजना के तहत करीब 65 लाख रुपये की लागत से नए अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसआर फंड से अस्पताल को फेको मशीन, फंडस कैमरा, एनडी-यैग लेजर, इंडायरेक्ट ऑप्थाल्मोस्कोप और एलसीडी डिजिटल विजुअल एक्यूटी चार्ट जैसे अत्याधुनिक उपकरण प्राप्त हुए हैं। इनसे मोतियाबिंद ही नहीं, अन्य गंभीर नेत्र रोगों की जांच व इलाज और अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574010/lok-bandhu-hospital-to-be-built-in-a-high-tech-state--patients-with-serious-illnesses-will-not-be-referred--and-will-receive-better-diagnostic-and-treatment-facilities"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/untitled-design-(2)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>राजधानी में आशियाना क्षेत्र स्थित लोक बंधु राज नारायण संयुक्त चिकित्सालय, का नेत्र विभाग अब अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा। इसके लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ( आईओसीएल) द्वारा कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) योजना के तहत करीब 65 लाख रुपये की लागत से नए अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसआर फंड से अस्पताल को फेको मशीन, फंडस कैमरा, एनडी-यैग लेजर, इंडायरेक्ट ऑप्थाल्मोस्कोप और एलसीडी डिजिटल विजुअल एक्यूटी चार्ट जैसे अत्याधुनिक उपकरण प्राप्त हुए हैं। इनसे मोतियाबिंद ही नहीं, अन्य गंभीर नेत्र रोगों की जांच व इलाज और अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। वर्तमान में अस्पताल में फेको विधि से मोतियाबिंद ऑपरेशन निःशुल्क किया जा रहा है ।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि अब लोक बंधु अस्पताल की ओटी, अन्य सरकारी अस्पतालों में सबसे हाईटेक होगी। जिसके बाद उन मरीजों की आंखों का इलाज अस्पताल में नि:शुल्क हो सकेगा, जिन्हें मेडिकल कॉलेज व उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे लखनऊ और आसपास के जिलों के मरीजों को उच्च स्तरीय नेत्र चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी। इसके लिए उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की यह पहल मरीजों के हित में है। जल्द ही ओटी में उपकरण स्थापित होते ही इलाज शुरू हो जाएगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/573980/fire-at-a-foam-factory-in-baghpat-caused-losses-worth-lakhs--firefighters-brought-the-fire-under-control-after-a-lot-of-hard-work"><span class="t-red">बागपत की फोम फैक्ट्री में आग से लाखों का नुकसान,</span> कड़ी मशक्कत के बाद फायर फाइटर ने पाया आग पर काबू </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
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<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 11:01:50 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड हियरिंग डे विशेष: &quot;दुनिया में नौ करोड़ बच्चों को कम सुनाई पड़ता है -कान की बीमारी कैसे बच्चे के सीखने और मानसिक विकास को करती है प्रभावित”</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> हर साल 3 मार्च को दुनिया भर में 'वर्ल्ड हियरिंग डे' मनाया जाता है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की थीम 'फ्रॉम कम्युनिटीज टू क्लासरूम्स' के तहत बच्चों की हियरिंग स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसलिए भी क्योंकि जिन बच्चों को कम सुनाई पड़ता है-वे जिंदगी की रेस में अक्सर पिछड़ने लगते हैं. एक ऐसे समय में जब मेडिकल साइंस में असाध्य रोगों तक के इलाज सफल हो रहे हैं. तब कान की बीमारी भी आसानी से ठीक की जा सकती है. बशर्ते, माता-पिता वक्त पर डॉक्टर को दिखायें. कान या सुनने की</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573884/world-hearing-day-special-90-million-children-in-the-world"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/412.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> हर साल 3 मार्च को दुनिया भर में 'वर्ल्ड हियरिंग डे' मनाया जाता है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की थीम 'फ्रॉम कम्युनिटीज टू क्लासरूम्स' के तहत बच्चों की हियरिंग स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसलिए भी क्योंकि जिन बच्चों को कम सुनाई पड़ता है-वे जिंदगी की रेस में अक्सर पिछड़ने लगते हैं. एक ऐसे समय में जब मेडिकल साइंस में असाध्य रोगों तक के इलाज सफल हो रहे हैं. तब कान की बीमारी भी आसानी से ठीक की जा सकती है. बशर्ते, माता-पिता वक्त पर डॉक्टर को दिखायें. कान या सुनने की क्षमता को बरकरार रखने और इस बीमारी से कैसे बच्चों को बचाए रखें. इस विषय पर रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ईएनटी (ENT) विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और अनुभवी ईएनटी सर्जन डॉ. आदित्य सिंघल ने बच्चों में सुनने की क्षमता और कानों के स्वास्थ्य पर एक पॉडकास्ट में विस्तार से चर्चा की. </p>
<p><strong>बच्चों पर फोकस क्यों जरूरी है?</strong><br />डॉ. आदित्य सिंघल ने बताया कि दुनिया भर में लगभग 9 करोड़ बच्चे सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा, "बच्चों में सुनने की समस्या अक्सर धीरे-धीरे और चुपचाप बढ़ती है। माता-पिता इसे अक्सर बच्चे की शरारत या लापरवाही समझ लेते हैं, जबकि असल में बच्चा सुन नहीं पा रहा होता।"</p>
<p>डॉ. सिंघल के अनुसार, यदि समय रहते जांच न हो, तो इसका असर बच्चे के भाषा विकास, बोलने की क्षमता, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर गंभीर रूप से पड़ता है। राहत की बात यह है कि लगभग 60 प्रतिशत बच्चों में यह समस्या रोकी जा सकती है (Preventable), यदि मवाद आना या कान में पानी जमा होने जैसी बीमारियों का सही समय पर इलाज हो जाए।</p>
<p><strong>मोबाइल और इयरपॉड्स का खतरा</strong><br />आजकल के डिजिटल युग में मोबाइल और इयरपॉड्स के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए डॉ. सिंघल ने '60-60 नियम' का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हेडफोन का इस्तेमाल करते समय वॉल्यूम अधिकतम 60 प्रतिशत रखें और एक बार में 60 मिनट से ज़्यादा इसका प्रयोग न करें। तेज़ आवाज़ सीधे तौर पर कान की अंदरूनी नसों (हेयर सेल्स) को स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है।</p>
<p><strong>शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका</strong><br />शिक्षकों को इस मुहिम का अहम हिस्सा बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि क्लासरूम में अगर कोई बच्चा बार-बार बात दोहराने को कहे या पढ़ाई में अचानक पिछड़ने लगे, तो शिक्षक को तुरंत अलर्ट हो जाना चाहिए। वहीं, अभिभावकों को सलाह दी गई कि यदि बच्चा आवाज़ देने पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" style="width:594px;height:332px;" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/tA0uevugCT4" width="798" height="448" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<p><strong>रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध सुविधाएं</strong><br />डॉ. आदित्य सिंघल ने जानकारी दी कि रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हियरिंग केयर की विस्तृत सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहाँ नवजात शिशुओं के लिए:</p>
<p><strong>OAE और BERA टेस्ट:</strong> (पैदा होने के 1 महीने के भीतर स्क्रीनिंग ज़रूरी)।</p>
<p><strong>कॉक्लियर इम्प्लांट: </strong>गंभीर समस्याओं के लिए आधुनिक सर्जरी।</p>
<p><strong>सरकारी सहयोग:</strong> एडिप (ADIP) योजना के तहत आर्थिक सहायता की प्रक्रिया।</p>
<p><strong>विशेषज्ञ का संदेश: </strong>"एक्ट नाउ सो दैट नो चाइल्ड इज लेफ्ट बिहाइंड (अभी कदम उठाएं ताकि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे)। जल्द पहचान ही बेहतर भविष्य की गारंटी है।"</p>
<p>पॉडकास्ट का संचालन डॉ. इरम शैफाली द्वारा किया गया, जिन्होंने अंत में संदेश दिया कि सुनना ही सीखने की पहली सीढ़ी है और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बच्चा सुन सके और आगे बढ़ सके।</p>]]>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/573884/world-hearing-day-special-90-million-children-in-the-world</link>
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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:04:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Pradeep Kumar]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> असाध्य रोगियों का होगा मुफ्त इलाज: चार बड़े चिकित्सा संस्थानों को मंजूर किये 30 करोड़, सख्त शर्तों के साथ आदेश</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>प्रदेश सरकार ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2025-26 में असाध्य रोगों से ग्रसित मरीजों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 30.11 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति पुनर्विनियोग के माध्यम से चार बड़े चिकित्सा संस्थानों कानपुर, लखनऊ, आगरा और सहारनपुर को दी गई है। शासन ने उपयोगिता प्रमाणपत्र व लाभार्थी सूची अनिवार्य करते हुए सख्त शर्तों के साथ धन खर्च करने का आदेश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सा शिक्षा विभाग विशेष सचिव कृतिका शर्मा की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार यह धनराशि अनुदान संख्या-31 के अंतर्गत 2210–चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य शीर्ष के तहत</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573485/incurable-patients-will-receive-free-treatment--30-crore-rupees-approved-for-four-major-medical-institutions--with-strict-conditions"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(4)20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>प्रदेश सरकार ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2025-26 में असाध्य रोगों से ग्रसित मरीजों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 30.11 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति पुनर्विनियोग के माध्यम से चार बड़े चिकित्सा संस्थानों कानपुर, लखनऊ, आगरा और सहारनपुर को दी गई है। शासन ने उपयोगिता प्रमाणपत्र व लाभार्थी सूची अनिवार्य करते हुए सख्त शर्तों के साथ धन खर्च करने का आदेश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सा शिक्षा विभाग विशेष सचिव कृतिका शर्मा की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार यह धनराशि अनुदान संख्या-31 के अंतर्गत 2210–चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य शीर्ष के तहत “असाध्य रोगों के इलाज हेतु निःशुल्क चिकित्सा सुविधा” मद में स्वीकृत की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह धन केवल निर्धारित मदों में और नियमों के अनुरूप ही व्यय किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शासनादेश में यह भी उल्लेख है कि इससे पूर्व सरोजनी नायडू चिकित्सालय, आगरा; अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज प्रसूति चिकित्सालय, कानपुर; संक्रामक रोग चिकित्सालय, कानपुर तथा मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर आदि के लिए वेतन, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, विद्युत देय और जल प्रभार मदों से पुनर्विनियोग कर धनराशि उपलब्ध कराई गई थी, जिसके उपरांत कुल व्यवस्था को असाध्य रोगियों के उपचार से जोड़ा गया है। कहा गया है कि अगली किश्त तभी जारी होगी, जब उपयोगिता प्रमाणपत्र और लाभार्थियों की सूची शासन को उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">इन संस्थानों को मिली धनराशि</h5>
<p style="text-align:left;">हृदय रोग संस्थान, कानपुर – 19.86 करोड़<br />डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ – 6 करोड़<br />राजकीय मेडिकल कॉलेज, आगरा – 4 करोड़<br />राजकीय मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर – 25 लाख</p>
<h5 style="text-align:left;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/573483/large-consignment-of-liquor-recovered-before-holi--stf-arrested-three-smugglers--they-were-planning-to-send-the-contraband-to-bihar-via-the-ganges-river"><span class="t-red">होली से पहले शराब की बड़ी खेप बरामद : </span>STF ने तीन तस्करों को दबोचा, गंगा नदी के रास्ते बिहार भेजने की थी तैयारी</a></h5>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:15:16 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ती उम्र की चुनौतियों पर गहराई से नजर: उत्तर प्रदेश में LASI सर्वे के लिए 53 रिसर्चर्स तैयार, 30 जिलों में होगा घर-घर जाकर सर्वेक्षण</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, बख्शी का तालाब, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार। </strong>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से देशभर में संचालित “लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (एलएएसआई)” के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में व्यापक सर्वेक्षण की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में लखनऊ जनपद के बख्शी का तालाब क्षेत्र में विभिन्न जिलों से आए 53 युवक एवं युवतियों को शोधकर्ता के रूप में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फील्ड प्रोजेक्ट अधिकारी अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस) की प्रतिनिधि लक्ष्मी पटेल ने बताया कि यह अध्ययन भारत सरकार द्वारा समर्थित है। प्रदेश में सर्वे कार्य का संचालन मार्केट एक्सेल डाटा मैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड के</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573367/an-in-depth-look-at-the-challenges-of-aging--53-researchers-prepare-for-lasi-survey-in-uttar-pradesh--door-to-door-survey-in-30-districts"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(62)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, बख्शी का तालाब, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार। </strong>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से देशभर में संचालित “लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (एलएएसआई)” के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में व्यापक सर्वेक्षण की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में लखनऊ जनपद के बख्शी का तालाब क्षेत्र में विभिन्न जिलों से आए 53 युवक एवं युवतियों को शोधकर्ता के रूप में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फील्ड प्रोजेक्ट अधिकारी अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस) की प्रतिनिधि लक्ष्मी पटेल ने बताया कि यह अध्ययन भारत सरकार द्वारा समर्थित है। प्रदेश में सर्वे कार्य का संचालन मार्केट एक्सेल डाटा मैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कराया जा रहा है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ती आयु के साथ होने वाले सामाजिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी परिवर्तनों की सटीक जानकारी एकत्र करना है, ताकि भविष्य की नीतियों एवं योजनाओं को जनआवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सके।</span></p>
<p style="text-align:left;">उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 फरवरी से प्रारंभ होकर 2 मार्च तक चलेगा। प्रशिक्षण के दौरान शोधकर्ताओं को सर्वे की प्रक्रिया, प्रश्नावली के उपयोग, डिजिटल माध्यम से आंकड़ा संकलन तथा व्यवहारिक संवाद कौशल का विशेष अभ्यास कराया जा रहा है।अध्ययन के अंतर्गत लखनऊ, हरदोई, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखीमपुर सहित प्रदेश के कुल 30 जनपदों में सर्वेक्षण किया जाएगा। गुरुवार को प्रशिक्षण प्राप्त कर रही टीम फील्ड अभ्यास के लिए बीकेटी क्षेत्र के टिकारी एवं भौली गांवों में घर-घर जाकर सर्वे का अभ्यास करेगी।इस अध्ययन से प्राप्त आंकड़े केंद्र सरकार को वरिष्ठ नागरिकों एवं बढ़ती आयु वर्ग की आवश्यकताओं को समझने में सहायता प्रदान करेंगे। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा आर्थिक सहयोग कार्यक्रमों की प्रभावी रूपरेखा तैयार करने में यह अध्ययन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।रीराइट अट्रैरक्टिव हैडिंग</p>]]>
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                                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 09:22:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>लोकबंधु अस्पताल में बनेगा 50 बेड का ट्रॉमा सेंटर,  सड़क हादसा पीड़ितों को मिलेगा मुफ्त कैशलेस इलाज</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>कानपुर रोड स्थित लोकबंधु अस्पताल में घायलों के बेहतर उपचार के लिए 50 बेड का अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज दिया है और शीघ्र मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई है। वर्तमान में अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं संचालित हैं, लेकिन ट्रॉमा सेंटर बनने से सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर हादसों में घायल मरीजों को त्वरित व विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित सेंटर में आईसीयू और वेंटिलेटर के साथ मेजर व माइनर ऑपरेशन थिएटर स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 24 घंटे सीटी स्कैन, एक्स-रे</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/572800/a-50-bed-trauma-center-will-be-built-at-lokbandhu-hospital--providing-free--cashless-treatment-to-road-accident-victims"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/untitled-design-(1)15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>कानपुर रोड स्थित लोकबंधु अस्पताल में घायलों के बेहतर उपचार के लिए 50 बेड का अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज दिया है और शीघ्र मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई है। वर्तमान में अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं संचालित हैं, लेकिन ट्रॉमा सेंटर बनने से सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर हादसों में घायल मरीजों को त्वरित व विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित सेंटर में आईसीयू और वेंटिलेटर के साथ मेजर व माइनर ऑपरेशन थिएटर स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 24 घंटे सीटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी।प्रदेश सरकार ट्रॉमा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि गोल्डन ऑवर में मरीजों को समुचित इलाज मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार की ‘कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम-2025’ के तहत सड़क हादसों में घायल मरीजों को मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। ट्रॉमा सेंटर के लिए दो विकल्प प्रस्तावित हैं, मौजूदा इमरजेंसी ब्लॉक का उन्नयन या अस्पताल परिसर में खाली भूमि पर नया भवन निर्माण। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/572797/up-model-echoes-at-ai-impact-summit--technology-based-learning-model-in-government-schools-praised"><span class="t-red">एआई इम्पैक्ट समिट में यूपी मॉडल की गूंज: </span>सरकारी स्कूलों में तकनीक आधारित लर्निंग मॉडल की सराहना</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/572800/a-50-bed-trauma-center-will-be-built-at-lokbandhu-hospital--providing-free--cashless-treatment-to-road-accident-victims</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/572800/a-50-bed-trauma-center-will-be-built-at-lokbandhu-hospital--providing-free--cashless-treatment-to-road-accident-victims</guid>
                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 11:07:35 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

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