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                <title>लाइफस्टाइल - Amrit Vichar</title>
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                            <item>
                <title>हर सिगरेट पीने वालों को क्यों नहीं होता कैंसर? कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च में सामने आई बड़ी वजह</title>
                                    <description><![CDATA['नेचर' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, धूम्रपान से होने वाले डीएनए नुकसान पर शरीर की प्रतिक्रिया व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट पर भी निर्भर करती है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इससे धूम्रपान के खतरे कम नहीं हो जाते।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589233/cambridge-university-research-smoking-cancer-genetics-nature-study-hindi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/why-don&#039;t-all-smokers-get-cancer-cambridge-university-research-reveals-a-major-reason..png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> धूम्रपान को फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन हर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को कैंसर नहीं होता। दूसरी ओर, कुछ ऐसे लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी। अब इस सवाल पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने अहम जानकारी दी है।</p><p style="text-align:justify;">प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, किसी व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट (Genetic Makeup) यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि धूम्रपान, तेज धूप या अन्य हानिकारक तत्वों से डीएनए को हुए नुकसान से शरीर किस तरह मुकाबला करेगा।</p><h5 style="text-align:justify;"><span><strong>जेनेटिक्स से प्रभावित होता है कैंसर का जोखिम</strong></span></h5><p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं के मुताबिक, समान जोखिम के बावजूद हर व्यक्ति में कैंसर विकसित होने की संभावना एक जैसी नहीं होती। इसका कारण प्रत्येक व्यक्ति की अलग-अलग आनुवंशिक संरचना है, जो डीएनए में होने वाले बदलावों और शरीर की मरम्मत प्रक्रिया को प्रभावित करती है।</p><p style="text-align:justify;">अध्ययन के वरिष्ठ लेखक ने कहा कि कैंसर केवल संयोग का परिणाम नहीं है। अलग-अलग लोगों में ट्यूमर बनने की प्रक्रिया उनकी आनुवंशिक विशेषताओं से काफी हद तक प्रभावित होती है।</p><h5 style="text-align:justify;"><span><strong>चूहों पर किया गया नियंत्रित अध्ययन</strong></span></h5><p style="text-align:justify;">इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने अलग-अलग आनुवंशिक विशेषताओं वाले चूहों को नियंत्रित वातावरण में रखा। सभी को समान उम्र में कैंसर पैदा करने वाले रसायन डायथाइलनाइट्रोसामाइन (DEN) की बराबर मात्रा दी गई।</p><p style="text-align:justify;">इसके बाद लगभग 600 ट्यूमर के जीनोम का विश्लेषण किया गया। जांच में पाया गया कि सभी चूहों में कैंसर बनने की प्रक्रिया समान नहीं थी। अलग-अलग जेनेटिक बनावट के कारण डीएनए में बदलाव और ट्यूमर के विकसित होने का तरीका भी अलग-अलग रहा।</p><h5 style="text-align:justify;"><span><strong>प्रिसिजन मेडिसिन को मिल सकती है नई दिशा</strong></span></h5><p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से भविष्य में<strong> </strong>प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine) को बढ़ावा मिलेगा। यानी भविष्य में किसी मरीज के इलाज और कैंसर के जोखिम का आकलन उसकी आनुवंशिक प्रोफाइल के आधार पर अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">इससे केवल धूम्रपान का इतिहास ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की जेनेटिक पृष्ठभूमि भी कैंसर के खतरे का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p><h5 style="text-align:justify;"><span><strong>धूम्रपान अब भी सबसे बड़ा खतरा</strong></span></h5><p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस शोध का अर्थ यह नहीं है कि धूम्रपान सुरक्षित है। तंबाकू आज भी फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा और रोका जा सकने वाला कारण माना जाता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन इससे धूम्रपान से होने वाले नुकसान पूरी तरह समाप्त नहीं होते।</p><p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/589165/anti-paper-leak-bill-2026-explained-new-law-fast-track-court-10-crore-fine"><span class="t-red">Explainer: </span>नया एंटी पेपर लीक बिल 2026 क्या है? पुराने कानून से कितना अलग, अब छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पड़ेगा भारी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 12:56:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अकेले हैं तो क्या गम है, सपने पूरे करने का दम है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सोलो-मैक्सिंग आज के महानगरीय जीवन की एक उभरती हुई लाइफस्टाइल है, जो युवा पीढ़ी को व्यक्तिगत खुशी, मानसिक शांति, करियर और आत्म-विकास पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित कर रही है। पश्चिमी देशों से आए इस चलन को देश में भी युवा तेजी से अपना रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इस तरह की लाइफस्टाइल उन्हें शादी जैसे पारंपरिक बंधन या बनावटी रिश्तों और डेटिंग के तनाव से बचाकर आत्मनिर्भरता की ओर ले जाती है। ‘मैक्सिंग’ का अर्थ है किसी चीज को उसकी क्षमता या योग्यता की सीमा तक पहुंचाना या उसे उसकी पूर्ण सीमा तक ले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589044/so-what-if-you-are-alone--you-have-the-drive-to-make-your-dreams-come-true"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/glam-world.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सोलो-मैक्सिंग आज के महानगरीय जीवन की एक उभरती हुई लाइफस्टाइल है, जो युवा पीढ़ी को व्यक्तिगत खुशी, मानसिक शांति, करियर और आत्म-विकास पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित कर रही है। पश्चिमी देशों से आए इस चलन को देश में भी युवा तेजी से अपना रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इस तरह की लाइफस्टाइल उन्हें शादी जैसे पारंपरिक बंधन या बनावटी रिश्तों और डेटिंग के तनाव से बचाकर आत्मनिर्भरता की ओर ले जाती है। ‘मैक्सिंग’ का अर्थ है किसी चीज को उसकी क्षमता या योग्यता की सीमा तक पहुंचाना या उसे उसकी पूर्ण सीमा तक ले जाना। </p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में अब इस शब्द को जीवन के किसी विशेष पहलू को अधिकतम या सर्वोत्तम बनाने का प्रयास करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। दरअसल युवाओं के बीच डेटिंग से बढ़ती थकान और रिश्तों में निराशा के बीच आधुनिक दुनिया में ‘सोलो-मैक्सिंग’ एक नए शब्द के रूप में जुड़ गया है। अकेले रहने की इस महत्वाकांक्षी जीवनशैली को चुनने और उसके जरिए अपनी पूरी क्षमता या सफलता हासिल करने की यह प्रवृत्ति व्यक्तिपरक लाइफस्टाइल को एड्रेस करती है। रिश्तों को लेकर नया दृष्टिकोण विकसित होने के साथ अकेले रहना यानी सोलो-मैक्सिंग बदलती प्राथमिकताओं के प्रतिबिंब के रूप में उभर रहा है, और इसे अपनाने वाले युवा आत्म विकास और स्वतंत्रता को अपने जीवन के केंद्र में रख रहे हैं</p>
<h3 style="text-align:justify;">करियर और निजी जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता</h3>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/glam-world-(1).jpg" alt="Glam World (1)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक सर्वेक्षणों के अनुसार देश के महानगरीय और शहरी क्षेत्रों में अकेले रहने वाले ऐसे युवाओं और युवतियों का प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है, जो अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके चलते सोलो-मैक्सिंग की प्रवृत्ति विशेष रूप से कॉर्पोरेट जगत और मेट्रो शहरों के युवाओं में देखी जा रही है, जहां लोग अपनी आय और व्यक्तिगत लक्ष्यों को अधिकतम करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं</p>
<h3 style="text-align:justify;">मेट्रो शहरों में जीवनयापन की बढ़ती लागत बदल रही माहौल</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत में जहां विवाह और परिवार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी, अब सामाजिक परिवेश में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। विवाह और रोमांस अब खासतौर पर जेन-जी युवाओं की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर नहीं है। इसकी वजह यह है कि महानगरों में जीवनयापन की बढ़ती लागत ने युवाओं को अपने करियर और वित्तीय स्थिरता पर अधिक ध्यान देने के लिए मजबूर कर दिया है। इलके चलते आज की युवा पीढ़ी अब पारंपरिक पारिवारिक या वैवाहिक बंधनों में बंधने के बजाय अपनी शर्तों पर जीवन जीने को ज्यादा महत्व दे रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वतंत्रता भरी जीवनशैली में निवेश ज्यादा फायदेमंद</h3>
<p style="text-align:justify;">बुजुर्गों के लिए अकेलापन जहां कई बार तमाम मुश्किलों के साथ बीमारियों का कारण है, वहीं अकेले रहने के शौकीन युवा इसे एक सोची-समझी और फायदेमंद पसंद के रूप में देख रहे हैं। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब डेटिंग ऐप से ऊब, बढ़ता सामाजिक खर्च और रिश्तों को लेकर बदलती उम्मीदें युवाओं के साथ रहने के नजरिए को प्रभावित कर रही हैं। कई लोगों के लिए स्वतंत्रता अब रिश्तों के बीच का एक अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है, जिसमें निवेश करना ज्यादा सार्थक है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अकेले रहना कोई मजबूरी नहीं शांत और संतुष्ट लाइफ स्टाइल</h3>
<p style="text-align:justify;">गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत शिप्रा के शब्दों में सोलो-मैक्सिंग जीवन के किसी एक पहलू को चरम पर ले जाने का विचार है, जिसमें अकेले रहना एक मजबूरी नहीं बल्कि सक्रिय व्यक्तिगत रणनीति है। मौजूदा दौर में करियर और आर्थिक स्वतंत्रता की चाहत में पेशेवर लक्ष्यों, फ्रीलांसिंग और स्टार्टअप के विकास पर पूरा ध्यान देने के कारण युवा तेजी से इस जीवन शैली को पसंद कर रहे हैं। इसे अपनाकर व्यक्तिगत शौक, फिटनेस और आत्म-खोज जैसे लक्ष्य बिना किसी दबाव के आसानी से पूरे किए जा सकते हैं। विवाह के पारंपरिक बंधन से दूर यह समुद्र की तरह एक शांत और संतुष्ट जीवन चुनने की राह है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अपनी शर्तों पर जीवन का निर्माण करने की आजादी</h3>
<p style="text-align:justify;">सोलो-मैक्सिंग अलगाव को बढ़ावा नहीं देता। इसके बजाय यह उन अनुभवों को प्रोत्साहित करता है, जिनका आनंद स्वतंत्र रूप से लिया जा सकता है, जैसे अकेले यात्रा करना, नई रुचियों को खोजना, साइड बिजनेस शुरू करना और दोस्ती या पारिवारिक संबंधों में अधिक समय देना। यह बताते हुए बेंगलुरू में कार्यरत 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर आयुष बंसल कहते हैं कि इसका उद्देश्य रोमांस के माध्यम से मान्यता प्राप्त करने से हटकर अपनी शर्तों पर एक संपूर्ण जीवन का निर्माण करने जैसा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक तिहाई युवक-युवतियां शादी ही नहीं करना चाहते</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन द्वारा जारी एक रिपोर्ट से जेन-जी युवाओं के बीच पनप रही अकेले रहने की स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अविवाहित युवाओं का अनुपात तेजी से बढ़ रहा है। साल 2011 में अविवाहित युवाओं की संख्या 17.2 फीसदी थी जो 2019 में बढ़कर 23 फीसदी हो गई थी और अब इसके करीब 30 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं 2011 में 20.8 फीसदी युवा ऐसे थे, जो शादी नहीं करना चाहते थे, किंतु 2019 में ऐसे युवाओं की संख्या 26.1 फीसदी हो गई, जो अब बढ़कर 35 फीसदी तक होने की बात कही जा रही है। महिला आबादी के मामले में भी इसी तरह की प्रवृत्ति दर्ज की गई है। कभी शादी न करने की सोच रखने वाली युवतियां 2011 में जहां 13.5 फीसदी थीं, वह 2019 आते-आते 19.9 फीसदी हो गईं, और अब 25 फीसदी से अधिक युवतियां शादी नहीं करने की सोच रखती हैं। इस तरह देश के करीब एक तिहाई युवक-युवतियां शादी ही नहीं करना चाहते हैं। सरकार की ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, शादी न करने वाले युवाओं की सबसे अधिक संख्या जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज की गई है। वहीं केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में ऐसे युवाओं की संख्या कम है, जिन्होंने शादी नहीं की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जिदंगी के साथ सामाजिक  दबाव और अकेलापन </h3>
<p style="text-align:justify;">भारत जैसे देश में जहां शादी को इतना जरूरी माना जाता है कि अगर किसी परिवार में अविवाहित बेटे या बेटी हैं, तो वह दोस्तों, परिवारों और रिश्तेदारों के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। इस विमर्श में एक और महत्वपूर्ण तथ्य है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है, वर्तमान में जैसे-जैसे लड़कियों की शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है वैसे-वैसे वे शादी से विमुख होती जा रही हैं। इसका एक मुख्य कारण है कि शादी के बाद लड़कियों की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है। उनके पहनावे से लेकर उनकी पसंद के खाने तक हर चीज में ससुराल और पति का हस्तक्षेप हो जाती है। यही नहीं एक पारिवारिक सर्वेक्षण के अनुसार 41 फीसदी ससुराल वाले यह चाहत रखते हैं कि उनकी बहू नौकरी तो करे, लेकिन घर की देखरेख भी कुछ उसी तरह करे, जैसे बाकी गृहणियां करती हैं। इसके साथ ही शादी के तीन-चार साल बीतते ही बहू पर बच्चे पैदा करने का दबाव भी थोपना शुरू कर दिया जाता है। उसके दिमाग में इधर-उधर से यह बात डालने का प्रयास शुरू हो जाता है कि मां बने बिना कोई स्त्री पूर्ण नहीं होती, या कि परिवार को आगे बढ़ाने के साथ उन्हें बुढ़ापे में खेलने के लिए एक अदद बच्चे की जरूरत है। इसलिए अपने सपने पूरे करने के साथ अपने बच्चे के बारे में भी सोचें। इस माहौल के चलते ही वह युवतियां जो खुले आसमान में उड़ना चाहती हैं, अपने सपने पूरे करने चाहती हैं, अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीना चाहती हैं, शादी के ख्याल से ही डरने या दूर भागने लगती हैं, और यही विचार उन्हें पेशेवर जिदंगी के दबावों के बीच अकेले रहने के लिए प्रेरित करने लगता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">- मनोज त्रिपाठी, कानपुर।</h4>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 13:59:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Alert : हर 100 में 60 डायबिटीज मरीजों पर दिल का खतरा, हाई BP बढ़ा रहा हार्ट अटैक का जोखिम </title>
                                    <description><![CDATA[कानपुर के एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे का संयोजन हार्ट अटैक का खतरा 50-60 फीसदी तक बढ़ा सकता है। डॉक्टरों ने समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव से बचने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587780/health-alert--60-out-of-100-diabetes-patients-at-risk-of-heart-disease--high-blood-pressure-increasing-the-risk-of-heart-attack"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/345.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>कानपुर।</strong> अगर आप डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और मोटापे से एक साथ जूझ रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खतरनाक कॉम्बिनेशन हार्ट अटैक और अन्य गंभीर हृदय रोगों का जोखिम 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। कई मामलों में मरीज सामान्य दिखाई देता है, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचने के बावजूद जान बचाना मुश्किल हो जाता है।</p>
<h5><strong><span>एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान में रोज पहुंच रहे हजार मरीज</span></strong></h5>
<p>रावतपुर स्थित एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1,000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे से पीड़ित मरीजों की है। संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि हर 100 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त मरीजों में से 50 से 60 फीसदी में हृदय रोग की समस्या पाई जा रही है।</p>
<h5><strong><span>कैसे बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा?</span></strong></h5>
<p>डॉ. शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत कमजोर होने लगती है। इससे धमनियों में वसा जमा होती है और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में हृदय को सामान्य से अधिक दबाव के साथ रक्त पंप करना पड़ता है। इससे धमनियां कठोर होने लगती हैं और हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।</p>
<h5><strong><span>मोटापा भी बना बड़ा जोखिम</span></strong></h5>
<p>संस्थान के अनुसार, 30 से 40 फीसदी मोटापे से ग्रस्त मरीजों में भी हृदय संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। विशेष रूप से पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है और कोलेस्ट्रॉल का संतुलन बिगाड़ देती है, जिससे हृदय रोग का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।</p>
<h5><strong><span>समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव जरूरी</span></strong></h5>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, संतुलित खानपान और हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों की पहचान बेहद जरूरी है। साथ ही अनावश्यक तनाव से बचना भी दिल को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<h5><strong><span>हार्ट अटैक से बचाव के लिए डॉक्टरों की सलाह</span></strong></h5>
<ul>
<li>तनाव से दूर रहें और मानसिक संतुलन बनाए रखें।</li>
<li>भोजन में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर शामिल करें।</li>
<li>नमक और चीनी का सेवन सीमित रखें।</li>
<li>रोज कम से कम 30 मिनट या सप्ताह में 150 मिनट पैदल चलें।</li>
<li>वजन नियंत्रित रखने के लिए योग या हल्की एक्सरसाइज करें।</li>
<li>पर्याप्त और नियमित नींद लें।</li>
<li>जरूरत से ज्यादा भारी व्यायाम से बचें।</li>
<li>सकारात्मक और खुशहाल माहौल में रहने की कोशिश करें।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587780/health-alert--60-out-of-100-diabetes-patients-at-risk-of-heart-disease--high-blood-pressure-increasing-the-risk-of-heart-attack</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 21:11:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>A Diamond is Forever.... क्या ‘डायमंड इज फॉरएवर’ का जादू अब खत्म हो रहा है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">साल 1947 में एक विज्ञापन पंक्ति ने दुनिया की सोच बदल दी थी- “A Diamond is Forever”। यह केवल एक स्लोगन नहीं था, बल्कि एक ऐसा विचार था, जिसने प्रेम, विवाह और सामाजिक प्रतिष्ठा को एक छोटे से चमकदार पत्थर से जोड़ दिया। अमेरिकी कंपनी डी बीयर्स ने इस अभियान के जरिए हीरे को सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि ‘अनंत प्रेम का प्रतीक’ बना दिया। करीब आठ दशक बाद सवाल यह है कि क्या यह विचार आज भी उतना ही प्रभावी है, खासकर भारत की जेन-जी (Gen-Z) और युवा पीढ़ी के बीच?</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में विवाह और आभूषणों का संबंध सदियों पुराना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587389/diamonds-are-forever----is-the-magic-of--diamonds-are-forever--fading"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/a-diamonds-are-forever.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">साल 1947 में एक विज्ञापन पंक्ति ने दुनिया की सोच बदल दी थी- “A Diamond is Forever”। यह केवल एक स्लोगन नहीं था, बल्कि एक ऐसा विचार था, जिसने प्रेम, विवाह और सामाजिक प्रतिष्ठा को एक छोटे से चमकदार पत्थर से जोड़ दिया। अमेरिकी कंपनी डी बीयर्स ने इस अभियान के जरिए हीरे को सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि ‘अनंत प्रेम का प्रतीक’ बना दिया। करीब आठ दशक बाद सवाल यह है कि क्या यह विचार आज भी उतना ही प्रभावी है, खासकर भारत की जेन-जी (Gen-Z) और युवा पीढ़ी के बीच?</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में विवाह और आभूषणों का संबंध सदियों पुराना है, लेकिन यहां सोने का महत्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं रहा। सोना भावनात्मक सुरक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक निवेश तीनों का प्रतीक रहा है। यही कारण है कि जब किसी भारतीय परिवार में बेटी की शादी होती है, तो सोने के गहनों को भविष्य की सुरक्षा के रूप में भी देखा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज स्थिति दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। सोने की कीमतें लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इसके साथ मेकिंग चार्ज और जीएसटी ने आभूषण खरीदना और महंगा बना दिया है। ऐसे में एक वर्ग मानता है कि हीरे की ओर रुझान बढ़ना चाहिए, लेकिन वास्तविकता इसके उलट दिखाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/a-diamonds-are-forever-(1).jpg" alt="A Diamonds Are Forever (1)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;">क्यों बदल रही है युवाओं की पसंद</h4>
<p style="text-align:justify;">उत्तर भारत के शहरों- लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गुरुग्राम, देहरादून और चंडीगढ़ में रहने वाली नई पीढ़ी अपने माता-पिता से अलग सोच रखती है। उनके लिए महंगे गहनों से ज्यादा महत्व अनुभवों का है। वे विदेश यात्रा, नई कार, स्टार्टअप में निवेश, फिटनेस, गैजेट्स या डिजिटल संपत्तियों पर खर्च करना अधिक पसंद करते हैं। विवाह भी अब केवल सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पसंद और साझेदारी का विषय बनता जा रहा है। यही कारण है कि ‘दो महीने की सैलरी का हीरा’ जैसी अवधारणा, उन्हें आकर्षित नहीं करती।</p>
<h4 style="text-align:justify;">निवेश की कसौटी पर कमजोर पड़ता हीरा</h4>
<p style="text-align:justify;">सोने और हीरे के बीच सबसे बड़ा अंतर निवेश मूल्य का है। सोना खरीदते ही उसकी बाजार कीमत लगभग स्पष्ट रहती है और जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से बेचा जा सकता है। दूसरी ओर हीरे का पुनर्विक्रय मूल्य (Resale Value) अक्सर खरीदार की अपेक्षाओं से काफी कम निकलता है। युवा उपभोक्ता इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में पहले से कहीं अधिक जागरूक हैं। वे यूट्यूब वीडियो देखते हैं, ऑनलाइन तुलना करते हैं और यह समझते हैं कि हीरा भावनात्मक संपत्ति तो हो सकता है, लेकिन वित्तीय निवेश नहीं। यही वजह है कि कई युवा अब प्राकृतिक हीरों के बजाय लैब-ग्रोउन डायमंड की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं, जो दिखने में लगभग समान, लेकिन कीमत में काफी सस्ते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रिश्तों की नई परिभाषा</h4>
<p style="text-align:justify;">1947 की दुनिया और 2026 का भारत एक जैसे नहीं हैं। तब स्थायी नौकरी, स्थायी विवाह और स्थायी जीवनशैली का दौर था। आज करियर बदलते हैं, शहर बदलते हैं, जीवनशैली बदलती है और रिश्तों की परिभाषाएं भी बदल रही हैं। नई पीढ़ी प्रेम को किसी महंगे प्रतीक से नहीं, बल्कि साझा अनुभवों, सम्मान और समानता से जोड़कर देखती है। उनके लिए ‘फॉरएवर’ का अर्थ किसी अंगूठी से अधिक रिश्ते की गुणवत्ता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या सोना फिर बनेगा विजेता?</h4>
<p style="text-align:justify;">सोने की बढ़ती कीमतें निश्चित रूप से उपभोक्ताओं पर दबाव डाल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय मानसिकता में सोने का स्थान मजबूत बना हुआ है। ग्रामीण भारत से लेकर महानगरों तक, सोना अभी भी आर्थिक सुरक्षा का पर्याय है। संभव है कि आने वाले वर्षों में भारी और पारंपरिक गहनों की जगह हल्के डिजाइन, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और लैब-ग्रोउन डायमंड जैसे विकल्प लोकप्रिय हों, लेकिन भावनात्मक और निवेश दोनों दृष्टि से सोने की चुनौती हीरे के लिए अभी भी बड़ी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">--- पार्थो कुनार, सीओओ,  अमृत विचार</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Fashion and Trends</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 13:05:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश में भीग गए जूते? इन आसान हैक्स से मिनटों में करें ड्राई, बदबू और फंगल इंफेक्शन से भी मिलेगा बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश के मौसम में गीले फुटवियर बन सकते हैं बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण की वजह। जानिए महिलाओं के जूते, फ्लैट्स, सैंडल और स्नीकर्स को सुरक्षित तरीके से सुखाने के आसान घरेलू उपाय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587302/rain-wet-shoes-dry-hacks-monsoon-footwear-care-tips"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(20).png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">बारिश का मौसम राहत और हरियाली लेकर आता है, लेकिन इसके साथ कई रोजमर्रा की परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। सबसे आम समस्या है जूते, स्नीकर्स, फ्लैट्स, सैंडल या जूतियों का भीग जाना। ऑफिस, कॉलेज या बाजार जाते समय अचानक हुई बारिश में फुटवियर पूरी तरह गीले हो जाते हैं। यदि इन्हें लंबे समय तक गीला ही पहना जाए, तो पैरों में दुर्गंध, फंगल संक्रमण और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं गलत तरीके से सुखाने पर फुटवियर का आकार बिगड़ सकता है और उनकी उम्र भी कम हो सकती है। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय आपके पसंदीदा फुटवियर को जल्दी और सुरक्षित तरीके से सुखाने में मदद कर सकते हैं।</p><h3><span><strong>अखबार या टिश्यू पेपर से तेजी से सोखें नमी</strong></span></h3><p>यदि आपके जूते या स्नीकर्स पूरी तरह भीग गए हैं, तो सबसे पहले उनमें मौजूद अतिरिक्त पानी निकाल दें। इसके बाद अंदर अखबार या मोटा टिश्यू पेपर भर दें। अखबार नमी को तेजी से सोखने के साथ फुटवियर का आकार भी बनाए रखता है। एक-दो घंटे बाद गीला अखबार बदल दें और जरूरत पड़ने पर यही प्रक्रिया दोहराएं। बेहतर परिणाम के लिए फुटवियर को धूप में रखने के बजाय हवादार जगह पर रखें, क्योंकि तेज धूप या अधिक गर्मी से गोंद कमजोर हो सकती है और रंग भी फीका पड़ सकता है।</p><h3><span><strong>पंखे और सूखे तौलिए की मदद लें</strong></span></h3><p>फुटवियर सुखाने का एक और आसान तरीका सूखे तौलिए और पंखे की हवा का इस्तेमाल है। पहले सूखे तौलिए से बाहर का पानी अच्छी तरह पोंछ लें। यदि स्पोर्ट्स शूज या स्नीकर्स हैं, तो उनके फीते और इनसोल निकाल दें। इसके बाद उन्हें पंखे के सामने रखें ताकि हवा अंदर तक पहुंच सके और नमी जल्दी निकल जाए। यह तरीका कैनवास शूज, फ्लैट्स और रोजमर्रा के फुटवियर के लिए काफी प्रभावी माना जाता है।</p><h3><span><strong>इन गलतियों से बचना जरूरी</strong></span></h3><p>जूते जल्दी सुखाने के लिए उन्हें हीटर, आग या हेयर ड्रायर की तेज गर्म हवा के सामने न रखें। इससे चमड़ा फट सकता है, गोंद ढीली हो सकती है और रंग खराब हो सकता है। हमेशा सामान्य तापमान या प्राकृतिक हवा में ही सुखाना बेहतर रहता है। यदि सूखने के बाद बदबू महसूस हो, तो थोड़ा-सा बेकिंग सोडा अंदर डालकर कुछ घंटे बाद साफ कर दें। इससे दुर्गंध कम करने में मदद मिल सकती है।</p><h3><span><strong>बरसात में फुटवियर की सही देखभाल</strong></span></h3><p>मानसून के दौरान थोड़ी-सी सावधानी आपके फुटवियर की गुणवत्ता और उम्र दोनों बढ़ा सकती है। सही तरीके से सुखाने और नियमित सफाई करने से न केवल जूते लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं, बल्कि पैरों को संक्रमण और दुर्गंध जैसी समस्याओं से भी बचाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Fashion and Trends</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587302/rain-wet-shoes-dry-hacks-monsoon-footwear-care-tips</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 16:32:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्यार या मनोवैज्ञानिक जाल? जब रिश्ते में भरोसे की जगह शुरू हो जाता है इमोशनल कंट्रोल</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया से शुरू हुई प्रेम कहानी ने सिखाया बड़ा सबक—जहां सम्मान, भरोसा और संवेदना न हो, वहां प्यार धीरे-धीरे भावनात्मक शोषण में बदल सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587300/toxic-relationship-emotional-manipulation-gaslighting-love-psychology-hindi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(19).png" alt=""></a><br /><p>प्रेम सिर्फ दिलों का जुड़ाव नहीं होता-यह दो आत्माओं के बीच संवेदना का पुल होता है। पर जब किसी रिश्ते में एक व्यक्ति धीरे-धीरे दूसरे के मन पर नियंत्रण जमाने लगे, तो प्यार की जगह एक मनोवैज्ञानिक खेल शुरू हो जाता है, जहां भावनाएं हथियार बन जाती हैं और सच्चा प्रेम खो जाता है। आरंभिक आकर्षण का जाल-रश्मि और अभय की मुलाकात सोशल मीडिया पर हुई। बातचीत शुरू हुई, फिर धीरे-धीरे एक गहरा जुड़ाव बनने लगा। अभय ने रश्मि को बताया कि वह बहुत खास है, उसे समझने वाली पहली लड़की है। हर सुबह-सुबह गुड मॉर्निंग के मैसेज के साथ कविता भेजना, हर बात में ध्यान देना-रश्मि को लगा यही सच्चा प्यार है। मगर असल में यह ‘भावनात्मक आकर्षण का प्रारंभिक चरण’ था, जिसमें सामने वाला व्यक्ति अपने मीठे व्यवहार से भरोसा जीत लेता है। यही वह समय होता है, जब दिल जुड़ जाता है और दिमाग पीछे रह जाता है।</p>
<h4><strong>धीरे-धीरे नियंत्रण की शुरुआत</strong></h4>
<p>समय बीता और अभय का रवैया बदलने लगा। अब उसके सोशल मीडिया कमेंट्स किसी और की पोस्ट पर दिखने लगे। जब रश्मि ने पूछा, तो जवाब मिला - “अरे तुम बेवजह सोचती हो”, “इतना तो नॉर्मल है, बस दोस्ती है।” यह वही क्षण था, जब रिश्ते में ‘भावनात्मक नियंत्रण’ की शुरुआत हुई। जब कोई व्यक्ति आपकी असुविधा को ‘तुम्हारी सोच की समस्या’ कह देता है, तो असल में वह अपनी गलती छिपा रहा होता है। यह प्रक्रिया ‘गैसलाइटिंग’ कहलाती है यानी किसी को उसके ही एहसासों पर शक करवा देना। </p>
<h4><strong>शिकायत पर पलटवार</strong></h4>
<p>रश्मि ने कई बार कहा कि उसे बुरा लगता है, जब अभय दूसरी लड़कियों के साथ अत्यधिक फ्रेंडली व्यवहार करता है, लेकिन उसकी हर बात का जवाब पलटवार में मिला- “तुम्हें भरोसा ही नहीं है मुझ पर।” “तुम बहुत डॉमिनेट करती हो।” “मेरा दम घुटता है तुम्हारे साथ।” ऐसे जवाब सुनकर रश्मि सोचने लगी कि शायद गलती उसी की है। असल में यह “blame shifting” यानी दोष को दूसरे पर डालने की प्रक्रिया थी। इससे सामने वाला व्यक्ति अपनी जवाबदेही से बच निकलता है और दूसरे को अपराधबोध में डाल देता है।</p>
<h4><strong>सॉरी और फिर वही दोहराव</strong></h4>
<p>हर बार झगड़े के बाद अभय ने “सॉरी” कहा, “मुझसे गलती हो गई” लिखा, और कुछ दिनों तक बहुत ध्यान दिया, लेकिन फिर वही पुराना व्यवहार लौट आया-वही कमेंट्स, वही उपेक्षा, वही असंवेदनशीलता। यह रिश्तों में ‘cyclic manipulation’ का सबसे आम पैटर्न है, जहां एक व्यक्ति गलती करता है, माफी मांगता है और फिर वही गलती दोबारा दोहराता है। इससे रिश्ते का दूसरा पक्ष धीरे-धीरे emotionally drain हो जाता है।</p>
<h4><strong>आत्मग्लानि और भावनात्मक थकान</strong></h4>
<p>कुछ महीनों में रश्मि खुद पर शक करने लगी। उसे लगने लगा कि शायद वह ज्यादा उम्मीद करती है, ज्यादा बोलती है या ज्यादा सोचती है। उसने अपनी भावनाओं को दबाना शुरू कर दिया ताकि झगड़ा न हो। मगर यह दबाव अंदर ही अंदर उसे तोड़ने लगा। वह उस व्यक्ति से दूरी भी नहीं बना पा रही थी, जिसने उसे कमजोर बना दिया था।  इस स्थिति को ‘emotional exhaustion’ कहते हैं, जब व्यक्ति थक जाता है, लेकिन फिर भी रिश्ता छोड़ नहीं पाता, क्योंकि उसने अपने दिल को उस रिश्ते से जोड़ दिया होता है।</p>
<h4><strong>प्रेम या स्वार्थ </strong></h4>
<p>अभय कहता था कि वह रश्मि के बिना नहीं रह सकता, मगर जब-जब उसे किसी और से प्रशंसा मिली, वह तुरंत आकर्षित हो गया। यह दिखाता है कि उसका “प्यार” एक ‘ego boost’ था, न कि सच्चा लगाव। ऐसे लोग दूसरों की भावनाओं का इस्तेमाल करते हैं ताकि खुद को ‘वांछित’ महसूस कर सकें।</p>
<p>वे अपने हर व्यवहार को ‘नॉर्मल’ कहते हैं, जबकि वही काम जब दूसरा करे, तो उन्हें असहजता होती है।</p>
<h4><strong>जब हिलने लगे आत्मसम्मान की नींव</strong></h4>
<p>रश्मि ने अंततः महसूस किया कि वह सिर्फ प्यार नहीं खो रही, बल्कि खुद को भी खोती जा रही है। उसकी नींद गायब हो गई थी, आत्मविश्वास कम हो गया था और सबसे बड़ा नुकसान-वह अब खुद पर भरोसा नहीं कर पा रही थी। ऐसे में उसने एक दिन खुद को बचाने के लिए अभय को ब्लॉक कर दिया। वह जानती थी कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन यही पहला कदम था अपनी आत्म-गरिमा लौटाने का।</p>
<p>समाज क्या कहता है और ऐसे रिश्तों की सच्चाई क्या है-हमारे समाज में अक्सर यही कहा जाता है-“प्यार में सब चलता है”, “थोड़ा सह लो, रिश्ते निभाने पड़ते हैं।” लेकिन हर समझौता “त्याग” नहीं होता। कई बार यह खुद की भावनाओं का शोषण होता है। रिश्ते तभी खूबसूरत होते हैं, जब दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को बराबरी से महत्व दें। जहां सम्मान नहीं वहां प्यार भी धीरे-धीरे अपनी गरिमा खो देता है।</p>
<p>अंत में- प्यार अगर आत्मा से जुड़ता है, तो वह ‘संवेदनशील’ होता है, न कि ‘आरोपों से भरा हुआ’। कभी-कभी किसी को अपने जीवन में ब्लॉक करना नफरत नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की रक्षा का प्रतीक होता है। रश्मि जैसी अनगिनत महिलाएं आज इस अनुभव से गुजर चुकी हैं -उन्होंने सच्चे प्यार की उम्मीद में खुद को खोया और फिर अपनी टूटी भावनाओं से खुद को दोबारा गढ़ा। ध्यान रखें, असली रिश्ते वही हैं, जहां प्यार के साथ सम्मान, संवेदना और सुरक्षा  भी महसूस हो। जहां किसी का सॉरी सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि ‘बदलाव की शुरुआत’ हो।</p>
<p><strong>–मेघा राठी, भोपाल... अमृत विचार, लोकदर्पण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 16:26:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Women's Health: क्या डार्क चॉकलेट सच में महिलाओं की सेहत के लिए फायदेमंद है? जानिए फायदे, सही मात्रा और जरूरी सावधानियां</title>
                                    <description><![CDATA[<div>चॉकलेट का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। बच्चे हों या बड़े, लगभग हर उम्र के लोग इसे पसंद करते हैं। खासकर महिलाओं में चॉकलेट खाने का चलन अधिक देखा जाता है। तनाव, उदासी या मीठा खाने की इच्छा होने पर अक्सर लोग चॉकलेट का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या हर चॉकलेट स्वास्थ्य के लिए समान रूप से फायदेमंद होती है? विशेषज्ञों के अनुसार, सही प्रकार की चॉकलेट का सीमित मात्रा में सेवन न केवल स्वाद का आनंद देता है, बल्कि महिलाओं की सेहत को भी कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है।</div>
<div> </div>
<h4><strong>डार्क</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587296/dark-chocolate-benefits-for-women-health-periods-heart-weight-management"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(17).png" alt=""></a><br /><div>चॉकलेट का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। बच्चे हों या बड़े, लगभग हर उम्र के लोग इसे पसंद करते हैं। खासकर महिलाओं में चॉकलेट खाने का चलन अधिक देखा जाता है। तनाव, उदासी या मीठा खाने की इच्छा होने पर अक्सर लोग चॉकलेट का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या हर चॉकलेट स्वास्थ्य के लिए समान रूप से फायदेमंद होती है? विशेषज्ञों के अनुसार, सही प्रकार की चॉकलेट का सीमित मात्रा में सेवन न केवल स्वाद का आनंद देता है, बल्कि महिलाओं की सेहत को भी कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है।</div>
<div> </div>
<h4><strong>डार्क चॉकलेट क्यों है बेहतर</strong></h4>
<div>डार्क चॉकलेट में कोको की मात्रा अधिक होती है। यही कारण है कि इसमें फ्लेवोनॉयड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में सूजन कम करने, हृदय को स्वस्थ रखने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इसी वजह से इसे अन्य चॉकलेट की तुलना में अधिक पौष्टिक माना जाता है। </div>
<div> </div>
<h4><strong>महामारी के दौरान मिल सकती है राहत</strong></h4>
<div>कई महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है। ऐसे समय में सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन लाभदायक हो सकता है। माना जाता है कि यह शरीर में ऐसे हार्मोन के स्राव को बढ़ावा देती है, जो मन को बेहतर महसूस कराने में मदद करते हैं।</div>
<div> </div>
<h4><strong>मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत</strong></h4>
<div>डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। यह महत्वपूर्ण खनिज मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद करता है। जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन की समस्या रहती है, उनके लिए सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट फायदेमंद हो सकती है।</div>
<div> </div>
<h4><strong>दिल की सेहत के लिए क्यों मानी जाती है अच्छी</strong></h4>
<div>कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी कुछ सहायता मिल सकती है। हालांकि हृदय रोगों से बचाव के लिए केवल डार्क चॉकलेट पर निर्भर रहना उचित नहीं है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</div>
<div> </div>
<h4><strong>क्या वजन घटाने में मदद करती है डार्क चॉकलेट</strong></h4>
<div>अक्सर यह माना जाता है कि डार्क चॉकलेट वजन कम करने में मदद करती है। वास्तव में ऐसा तभी संभव है, जब इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए और पूरा आहार संतुलित हो। डार्क चॉकलेट में फाइबर अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण कुछ समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है, जिससे बार-बार स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है, लेकिन अधिक मात्रा में खाने पर इसमें मौजूद कैलोरी वजन बढ़ाने का कारण भी बन सकती है।</div>
<div> </div>
<h4><strong>महिलाओं के अलग-अलग चरणों में लाभ</strong></h4>
<div>महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव जीवन के विभिन्न चरणों में होते रहते हैं। किशोरावस्था, प्रजनन आयु, गर्भावस्था के बाद का समय और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के दौरान शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताएं बदल जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार के साथ सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन कुछ महिलाओं के लिए ऊर्जा बनाए रखने, मूड को बेहतर करने और थकान कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि यह किसी भी पोषक तत्व का विकल्प नहीं है।</div>
<div> </div>
<h4><strong>मिल्क चॉकलेट से जुड़ी सावधानियां</strong></h4>
<div>मिल्क चॉकलेट स्वादिष्ट जरूर होती है, लेकिन इसमें शुगर और सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है, जबकि कोको अपेक्षाकृत कम होता है। यदि इसका नियमित और अधिक मात्रा में सेवन किया जाए, तो वजन बढ़ने, ब्लड शुगर बढ़ने और दांतों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।</div>
<div> </div>
<h4><strong>आखिर कौन-सी चॉकलेट है बेहतर</strong></h4>
<div>यदि महिलाओं की सेहत की बात करें, तो सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट अधिक लाभकारी मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, फ्लेवोनॉयड्स और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं। हालांकि किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।</div>
<div> </div>
<h4><strong>कितनी मात्रा में खाएं?</strong></h4>
<div>विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 20 से 30 ग्राम डार्क चॉकलेट का सेवन पर्याप्त माना जाता है। बेहतर होगा कि ऐसी चॉकलेट चुनें, जिसमें 70 प्रतिशत या उससे अधिक कोको मौजूद हो।</div>
<div> </div>
<h4><strong>किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी</strong></h4>
<div>हालांकि डार्क चॉकलेट सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती। यदि किसी महिला को डायबिटीज, किडनी की बीमारी, माइग्रेन या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>डार्क और मिल्क चॉकलेट दोनों का अपना अलग स्वाद और लोकप्रियता है, लेकिन यदि स्वास्थ्य के नजरिए से तुलना की जाए तो सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट अधिक बेहतर विकल्प मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, फ्लेवोनॉयड्स, मैग्नीशियम और अन्य खनिज महिलाओं के स्वास्थ्य को कई तरह से लाभ पहुंचा सकते हैं। हालांकि इसका लाभ तभी मिलता है, जब इसे संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए। दूसरी ओर, मिल्क चॉकलेट का कभी-कभार सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है, लेकिन इसमें अधिक चीनी और वसा होने के कारण इसे नियमित रूप से अधिक मात्रा में खाना उचित नहीं माना जाता। याद रखें, अच्छी सेहत का आधार केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली है।</div>
<div> </div>
<div><strong>-अमृत विचार, लोकदर्पण</strong></div>
<div> </div>
<p><strong>Disclaimer:</strong> यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। यदि आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैं या उपचार ले रहे हैं, तो अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Beauty Tips</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 16:10:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Gas &amp; Acidity Alert: बार-बार गैस और एसिडिटी को न करें नजरअंदाज, जानिए कारण, आयुर्वेदिक उपाय और बचाव के आसान तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[गलत खान-पान, तनाव और अनियमित दिनचर्या बना रही पाचन तंत्र को कमजोर, आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली से मिल सकता है स्थायी समाधान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587294/gas-acidity-causes-ayurvedic-treatment-home-remedies-digestion-health-tips"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(15).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरेलीः </strong>स्वस्थ शरीर का आधार स्वस्थ पाचन तंत्र है। यदि हमारा पाचन तंत्र सही प्रकार से कार्य करता है, तो शरीर को पर्याप्त ऊर्जा, पोषण और रोगों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है। किंतु वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, असंतुलित भोजन, मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या तथा फास्ट फूड के बढ़ते चलन के कारण पाचन संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें पेट में गैस, एसिडिटी, अपच, कब्ज तथा पेट फूलने की समस्या सबसे सामान्य है। आज लगभग प्रत्येक आयु वर्ग का व्यक्ति किसी न किसी समय इन समस्याओं का सामना करता है। कई लोग इसे सामान्य मानकर बार-बार एंटासिड दवाओं का सेवन कर लेते हैं, जबकि यह केवल अस्थायी राहत देती है। यदि बार-बार गैस और एसिडिटी होती रहे, तो यह पेट के अल्सर, गैस्ट्रो-इसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD), गैस्ट्राइटिस तथा अन्य गंभीर रोगों का संकेत भी हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद में कहा गया है कि सभी रोगों की उत्पत्ति का मूल कारण जठराग्नि का असंतुलन है। जब भोजन उचित प्रकार से नहीं पचता, तब शरीर में “आंव” नामक विषैले तत्व का निर्माण होता है, जो अनेक रोगों की जड़ माना गया है। इसलिए आयुर्वेद केवल रोग का उपचार नहीं करता, बल्कि पाचन शक्ति को मजबूत बनाकर रोग के मूल कारण को समाप्त करने का प्रयास करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गैस और एसिडिटी क्या है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गैस और एसिडिटी दो अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन अक्सर दोनों एक साथ दिखाई देती हैं। गैस तब बनती है, जब भोजन का पाचन पूर्ण रूप से नहीं हो पाता और आंतों में गैस का अत्यधिक निर्माण होने लगता है। इसके कारण पेट फूलना, डकार आना, पेट में दर्द तथा भारीपन महसूस होता है। दूसरी ओर एसिडिटी वह स्थिति है, जिसमें पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक अम्ल आवश्यकता से अधिक मात्रा में बनने लगता है या भोजन नली में ऊपर की ओर आने लगता है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकारें, गले में जलन और मुंह में खट्टापन महसूस होता है। आयुर्वेद में इस रोग को मुख्य रूप से अम्लपित्त कहा गया है। जब पित्त दोष बढ़ जाता है तथा जठराग्नि विकृत हो जाती है, तब अम्लपित्त उत्पन्न होता है। यदि इसके कारणों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह रोग धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण कर सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सबसे बड़ा कारण गलत खान-पान </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आज अधिकांश लोग स्वाद के लिए भोजन करते हैं, स्वास्थ्य के लिए नहीं। अधिक तेल, मसाले, मिर्च, तला भोजन, फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड, पैकेट बंद स्नैक्स, बेकरी उत्पाद तथा अत्यधिक मिठाइयों का सेवन पेट में अम्ल के निर्माण को बढ़ाता है। इन खाद्य पदार्थों को पचाने में अधिक समय लगता है, जिससे भोजन पेट में अधिक देर तक रहता है और गैस बनने लगती है। इसके अतिरिक्त अत्यधिक मसाले पेट की अंदरूनी परत को भी प्रभावित करते हैं, जिससे जलन और एसिडिटी की समस्या उत्पन्न होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan--(15).png" alt="MUSKAN  (15)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अनियमित भोजन और गलत दिनचर्या</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">व्यस्त जीवनशैली के कारण कई लोग नाश्ता छोड़ देते हैं, दोपहर का भोजन देर से करते हैं या रात में बहुत देर से खाना खाते हैं। लंबे समय तक भूखे रहने पर पेट में बनने वाला अम्ल भोजन के अभाव में पेट की अंदरूनी सतह को प्रभावित करने लगता है। वहीं देर रात भारी भोजन करने पर पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और गैस तथा एसिडिटी की संभावना बढ़ जाती है। बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में अस्वास्थ्यकर स्नैक्स खाना भी पाचन तंत्र पर अतिरिक्त भार डालता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चाय, कॉफी और कैफीन का  अधिक सेवन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई लोग दिन की शुरुआत चाय से करते हैं और पूरे दिन में चार से छह कप चाय या कॉफी पी लेते हैं। कैफीन पेट में अम्ल स्राव को बढ़ाता है, जिससे एसिडिटी होने की संभावना बढ़ जाती है। खाली पेट चाय या कॉफी पीना विशेष रूप से हानिकारक माना जाता है, क्योंकि इससे पेट की श्लेष्मा परत प्रभावित होती है। इसी प्रकार तथाकथित एनर्जी ड्रिंक कोल्ड ड्रिंक और कार्बोनेटेड पेय भी गैस बनने की समस्या को बढ़ाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>धूम्रपान और शराब का प्रभाव</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">धूम्रपान तथा शराब दोनों ही पाचन तंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। निकोटिन भोजन नली और पेट के बीच स्थित वाल्व को कमजोर कर देता है, जिससे पेट का अम्ल ऊपर आने लगता है। वहीं शराब पेट की अंदरूनी परत में सूजन उत्पन्न करती है तथा अम्ल के निर्माण को बढ़ाती है। लंबे समय तक इनका सेवन गैस्ट्राइटिस, अल्सर तथा लीवर संबंधी रोगों का कारण भी बन सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मानसिक तनाव और पाचन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान समय में तनाव, चिंता और अवसाद केवल मानसिक समस्याएं नहीं रह गई हैं, बल्कि ये पाचन तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। जब व्यक्ति तनाव में होता है, तब शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगते हैं। ये हार्मोन पाचन क्रिया को अत्यधिक प्रभावित करते हैं, जिससे भोजन ठीक प्रकार से नहीं पचता। परिणामस्वरूप गैस, एसिडिटी, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध पाचन स्वास्थ्य से माना जाता है। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कम पानी पीना और फाइबर की कमी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">शरीर में पर्याप्त पानी न होने पर पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। भोजन अच्छी तरह नहीं पचता और कब्ज की समस्या उत्पन्न होने लगती है। कब्ज स्वयं गैस बनने का प्रमुख कारण है। इसी प्रकार यदि भोजन में फल, हरी सब्जियां, सलाद, अंकुरित अनाज तथा साबुत अनाज कम हों, तो शरीर को पर्याप्त फाइबर नहीं मिल पाता। फाइबर आंतों की गति को सामान्य बनाए रखता है और पाचन को बेहतर बनाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गैस और एसिडिटी के प्रमुख लक्षण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गैस और एसिडिटी के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। सामान्यतः सीने में जलन, खट्टी डकारें, पेट फूलना, पेट दर्द, भारीपन, भूख कम लगना, मुंह का स्वाद खराब होना, गले में जलन, बार-बार डकार आना, कब्ज तथा कभी-कभी मतली की शिकायत होती है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ वजन कम होना, खून की उल्टी, काला मल या भोजन निगलने में कठिनाई हो, तो इसे गंभीर संकेत मानकर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आयुर्वेदिक दृष्टिकोण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद के अनुसार गैस और एसिडिटी मुख्यतः पित्त एवं वात दोष के असंतुलन का परिणाम हैं। जब व्यक्ति विरुद्ध आहार, अत्यधिक तीखा भोजन, अनियमित भोजन, देर रात जागना, क्रोध, चिंता तथा तनाव जैसी आदतों का पालन करता है, तब जठराग्नि विकृत हो जाती है। इससे भोजन पूरी तरह नहीं पचता और “आंव” का निर्माण होता है। यही आंव धीरे-धीरे अनेक रोगों का कारण बनता है। आयुर्वेद उपचार में केवल औषधियों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि आहार-विहार, दिनचर्या, योग तथा मानसिक संतुलन को भी समान महत्व देता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आयुर्वेदिक घरेलू उपाय</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सौंफ, अजवाइन, जीरा, धनिया, आंवला, नारियल पानी और छाछ जैसे प्राकृतिक पदार्थ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में अत्यंत उपयोगी माने जाते हैं। भोजन के बाद सौंफ चबाने से पाचन सुधरता है। अजवाइन और काला नमक गैस कम करने में सहायक हैं। जीरे का पानी पाचन शक्ति बढ़ाता है। आंवला पित्त को शांत करता है, जबकि छाछ आंतों के लिए लाभकारी जीवाणुओं की वृद्धि में सहायक होती है। हालांकि यदि समस्या बार-बार हो रही हो, तो केवल घरेलू उपचारों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>योग और प्राणायाम की भूमिका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">योग केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है। वज्रासन भोजन के बाद किया जाने वाला सबसे प्रभावी आसन माना जाता है। इसके अतिरिक्त पवनमुक्तासन, मंडूकासन, भुजंगासन, मकरासन तथा अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति (विशेषज्ञ की देखरेख में) पाचन शक्ति को बढ़ाने तथा गैस और एसिडिटी को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भोजन के तुरंत बाद लेटने की आदत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बहुत से लोग भोजन करते ही आराम करने या सोने चले जाते हैं। इससे भोजन का पाचन धीमा हो जाता है और पेट का अम्ल ऊपर भोजन नली में आने लगता है। यही कारण है कि भोजन के बाद सीने में जलन और खट्टी डकारें आती हैं। विशेषज्ञ भोजन के कम से कम दो से तीन घंटे बाद सोने की सलाह देते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">दर्द निवारक दवाएं, कुछ एंटीबायोटिक्स, आयरन की गोलियां, स्टेरॉयड तथा अन्य कुछ औषधियां पेट की अंदरूनी परत को प्रभावित कर सकती हैं। यदि इनका लंबे समय तक सेवन किया जाए, तो एसिडिटी, गैस्ट्राइटिस तथा अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए चिकित्सकीय सलाह के बिना लंबे समय तक ऐसी दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। ज्यादा दिनों तक प्रयुक्त होने पर एसिडिटी की सभी दवाएं वास्तव में एसिडिटी बढ़ाने लगती हैं और शरीर भी एसिड से लड़ने की प्राकृतिक ताकत को खत्म कर देती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बचाव ही सबसे अच्छा उपचार</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गैस और एसिडिटी से बचने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाना अत्यंत आवश्यक है। समय पर भोजन करना, भोजन को अच्छी तरह चबाना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित व्यायाम करना, तनाव कम करना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना तथा पर्याप्त नींद लेना ऐसी आदतें हैं जो पाचन तंत्र को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखती हैं। भोजन के तुरंत बाद लेटने के बजाय कुछ देर टहलना भी अत्यंत लाभकारी होता है। पेट में गैस और एसिडिटी आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी सबसे सामान्य समस्याओं में से हैं, लेकिन इन्हें सामान्य समझकर अनदेखा करना उचित नहीं है। यह शरीर का संकेत है कि हमारी भोजन शैली, दिनचर्या या मानसिक स्थिति में सुधार की आवश्यकता है। यदि समय रहते उचित आहार-विहार, नियमित योग, तनाव प्रबंधन तथा आयुर्वेद के सिद्धांतों को अपनाया जाए तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। स्वस्थ पाचन ही स्वस्थ जीवन की पहचान है, इसलिए दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली को संतुलित बनाना ही सबसे प्रभावी और स्थायी समाधान है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, बरेली की भूमिका, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है। रोगों का स्थायी समाधान केवल औषधियों तक सीमित नहीं है, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली, नियमित योग एवं आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाने से ही संभव है। इसी उद्देश्य से संस्थान समय-समय पर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, निःशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श शिविर, योग एवं जीवनशैली संबंधी कार्यशालाओं तथा जनहित व्याख्यानों का आयोजन करता है, जहां आमजन को पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक उपायों की जानकारी दी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">संस्थान के कायचिकित्सा, पंचकर्म, योग चिकित्सा तथा अन्य आयुर्वेदिक विभागों में अनुभवी चिकित्सकों द्वारा रोगियों की प्रकृति, दोषों की अवस्था एवं रोग की गंभीरता का सम्यक मूल्यांकन कर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। आवश्यकता अनुसार आयुर्वेदिक औषधियों, पंचकर्म चिकित्सा, आहार-विहार परामर्श तथा योगाभ्यास के माध्यम से रोग के मूल कारण को दूर करने का प्रयास किया जाता है। लक्ष्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्” के आयुर्वेदिक सिद्धांत को व्यवहार में लाकर समाज को स्वस्थ एवं रोगमुक्त बनाने में सक्रिय योगदान देना है। </p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, सेक्टर-7, रामगंगा नगर योजना, डोहरा रोड, बरेली, उत्तर प्रदेश +91 8077808309</strong></li>
</ul>
<p><strong>-अमृत विचार, लोकदर्पण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587294/gas-acidity-causes-ayurvedic-treatment-home-remedies-digestion-health-tips</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 16:01:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लखनऊ की चिकनकारी का दर्द: दुनिया पहन रही करोड़ों का हुनर, कारीगरों के हिस्से अब भी गरीबी और संघर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[GI टैग, ग्लोबल पहचान और सेलिब्रिटी फैशन के बावजूद बिचौलियों के जाल में फंसे कारीगर, 36 पारंपरिक टांकों में अब बचे सिर्फ 5-6, मशीनों से बढ़ा असली चिकन पर संकट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587290/lucknow-chikankari-artisans-struggle-gi-tag-handmade-embroidery-crisis"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(10).png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः </strong>नजाकत-नफासत और अदा तमाम रंग बिखेरता हुआ लखनऊ का चिकन अपने आप में ही मुकम्मल है। हर आमों खास को लखनऊ का चिकन लुभाता है। यही वजह कि आज लखनऊ का चिकन दुनियाभर में शान बन चुका है। यहां आने वाला सेलिब्रिटी एक बार पुराने लखनऊ की तंग गलियों में जाकर चिकन जरूर खरीदता है। तमाम नामी-गिरामी परिवारों की शादियों और इंटरनेशनल आवार्ड शो में चिकन जलवा बिखेर रहा है, लेकिन इस चिकन की चकाचौंध वाली रोशनी के बीच एक काला सच यह भी कि इसको चमकाने वाले हुनरमंद अपने घरों में बेबसी और लचारी की जिंदगी बसर कर रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक उंगलियां चलाने के बाद इनके हाथों में बस चंद रुपये ही आते है, जिससे इनका न परिवार चल पा रहा है और न ही पेट भर रहा है। यही वजह कि अब लखनऊ का असली चिकन अपनी पहचान खोता जा रहा है और बाहरी मशीनी चिकन धड़ल्ले से बजारों में उतारा जा रहा है। ऐसा ही हाल रहा तो लखनऊ का चिकन आज जो पूरी दुनिया की शान बना हुआ है, वह किसी म्यूजियम में देखने को मिलेगा।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan--(10).png" alt="MUSKAN  (10)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>लकड़ी पर डिजाइन उकेरने वाले हाथों की कहानी</strong></h4>
<p>चिकन की असली शुरुआत होती है लकड़ी के एक उस ठप्पे से जिससे तरह-तरह के डिजाइन उकेरे जाते हैं। जिसे ‘सांचा’ या ‘ब्लॉक’ कहा जाता है। इन सांचों को बनाने वाले कारीगरों को स्थानीय भाषा में ‘भातकार’ कहा जाता है। लखनऊ के मलिहाबाद में एक छोटी सी दुकान में बैठे 54 वर्षीय रमेश कुमार पिछले चार दशकों से यही काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे डिजाइन पूरी दुनिया में नहीं मिलेगे जैसे हम उकेरते हैं। हम रात-रात भर जागकर लकड़ी पर ‘मुर्री’, ‘फंदा’ और ‘कील-कंगन’ के डिजाइन उकेरते हैं। अब बाजार में कंप्यूटर और लेजर कटिंग की मशीनें आ गई हैं। लोग सस्ते के चक्कर में चीनी और मशीन के ठप्पे ला रहे हैं, लेकिन जो सफाई और गहराई हमारे हाथ से तराशे गए शीशम के सांचे में है, वो मशीन कभी नहीं दे सकती। इसके बाद भी हमें हमारी मेहनत का दाम नहीं मिल रहा है। एक सांचे के मुश्किल से सौ से डेढ़ सौ रुपये मिलते हैं। यही वजह कि अब यह काम करने वाले धीरे-धीरे घटते जा रहा है, जहां पहले यहां सैकड़ों लोग यह काम करते थे, अब बस कुछ गिने-चुने लोग ही बचे हैं।</p>
<p>लखनऊ के हजरतगंज की दूधिया रोशनी से नहाए चमचमाते शोरूम। शीशम और कांच के आलीशान काउंटरों पर करीने से सजे चिकन के वो कुर्ते, साड़ियां और लहंगे, जिन्हें देखकर देश-दुनिया से आए रईस और मुसाफिर अपनी जेबें ढीली करने में जरा भी संकोच नहीं करते। शोरूम का सेल्समैन बड़े अदब से मुस्कुराते हुए कपड़े पर हाथ फेरता है और कहता है मैडम, प्योर लखनवी चिकन है, एकदम नफासत और नजाकत का नमूना। दाम सिर्फ 25 हजार रुपये। ग्राहक बिना मोल-तोल किए क्रेडिट कार्ड स्वाइप करता है और मखमली बैग में उस ‘नजाकत’ को समेटकर अपनी महंगी गाड़ी में बैठकर रवाना हो जाता है, लेकिन इस रईसी, इस चमक-दमक और नफासत के इस मुकम्मल जलवे के पीछे का कड़वा सच देखना हो, तो हजरतगंज की चौड़ी सड़कों से निकलकर पुराने लखनऊ के चौक, वजीरगंज, डालीगंज या सआदतगंज की उन बदबूदार, संकरी और घुटन भरी गलियों में जाना होगा, जहां सूरज की रोशनी भी दाखिल होने से पहले सौ बार सोचती है। चिकनकारी सिर्फ सुई और धागे का खेल नहीं है। यह सात अलग-अलग स्तरों से गुजरने वाला एक बेहद पेचीदा और थका देने वाला सफर है। इस सफर में जितने हाथ लगते हैं, उतने ही दर्द और उतने ही शोषण की कहानियां इस कपड़े के एक-एक टांके में दफन हो जाती हैं। आइए, आज लखनऊ की इस ऐतिहासिक विरासत की परत-दर-परत पड़ताल करते हैं और मिलते हैं, उन किरदारों से जिनसे लखनवी चिकन की पहचान है, लेकिन उनकी अपनी पहचान बस उनको इस हुनर के बदले मिलने वाले चंद सिक्के हैं, जो वह बामुश्किल दिन-रात मेहनत करके कमाते हैं।</p>
<h4><strong>सरकारी हौदे मिलें तो निखरे चिकन</strong></h4>
<p>महिलाएं जब कढ़ाई पूरी कर लेती हैं, तो वह कपड़ा बिल्कुल मैला, पसीने की गंध और नील के दागों से भरा होता है। उसे बाजार में बेचने लायक बनाने का जिम्मा गोमती नदी के किनारों पर या फैक्ट्रियों में काम करने वाले धोबियों का होता है। हुसैनाबाद के पास घाट पर दोपहर की चिलचिलाती धूप में 48 वर्षीय इमरान धोबी चिकन के भारी कपड़ों को लकड़ी के पट्टे पर पटक-पटक कर धो रहे हैं। उन्होंने बताया कि चिकन के कपड़ों की धुलाई कोई आम धुलाई नहीं है। इस कपड़े को साफ करने के लिए हमें भट्टी सुलगानी पड़ती है। सीप के पाउडर, रीठे और ब्लीच के साथ इन कपड़ों को घंटों उबाला जाता है। उसके बाद ठंडे पानी में निकालकर इन्हें लकड़ी के थाप से कूटा जाता है ताकि कढ़ाई के टांके अपनी सही जगह पर बैठ जाएं और धागा पक्का हो जाए। हम भले चिकन को संवारने का काम करते हैं, लेकिन सरकार हम लोगों पर ध्यान नहीं देती है। हम लोग चाहते हैं कि सरकार हमें सरकारी हौदे बनाकर दे दे, तो हमारा काम आसान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी हम जमीन में गड्ढ़ा खोदकर, उसमें कपड़े धोने का काम करते हैं।</p>
<h4><strong>कड़क स्टार्च और फिनिशिंग का जादू</strong></h4>
<p>धुलाई के बाद कपड़ा पूरी तरह सिकुड़ जाता है। इसे वापस अपनी सही शेप में लाने और कड़क बनाने का काम चरकगर करते हैं। चरक यानी स्टार्च या मांड लगाना और फिर उसे भारी-भरकम कोयले वाली प्रेस से सीधा करना। चौक के एक छोटे से केबिन में काम करने वाले 36 वर्षीय अकरम बताते हैं चिकन के कपड़े पर सामान्य प्रेस नहीं चलती। हमें रोलर प्रेस या भारी कोयले वाली इस्त्री का इस्तेमाल करना पड़ता है। कपड़े को एक बड़े लकड़ी के फ्रेम पर कसकर बांधा जाता है, जिसे अखाड़ा कहते हैं। फिर उस पर स्टार्च छिड़क कर फिनिशिंग दी जाती है। जरा सी लापरवाही से अगर कपड़ा जल गया, तो पूरे सूट के पैसे हमारी जेब से जाते हैं। हमें एक पीस की फिनिशिंग के 5 से 10 रुपये मिलते हैं। </p>
<h4><strong>लखनऊ के शोरुम में धूल खा रहा है चिकन</strong></h4>
<p>अमीनाबाद में चिकन के शोरुम मालिक ने बताया कि असली चिकन का काम धीरे-धीरे अपनी चमक खोता जा रहा है। इसकी जगह नकली चिकन ने ले ली है, जिसकी वजह से व्यापार को भारी नुकसान हो रहा है। हमें एक सिंपल चिकन के पीस को बनवाने में पांच सौ हजार रुपए का खर्चा आता है, जबकि नकली चिकन इतनी रुपए में कस्टमर के हाथ में सीधे पहुंच रहा है। यही वजह कि लोग असली चिकन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। कपड़ा हमारा होता है, धागा हमारा होता है, डिजाइन हम तय करते हैं। शोरूम का लाखों रुपया किराया है, हर महीने बिजली का बिल आता है, स्टाफ की सैलरी है और सबसे बड़ी बात, यह माल तुरंत नहीं बिकता। कभी-कभी एक डिजाइनर लहंगा छह-छह महीने शोरूम में टंगा रहता है। हमारा पैसा डंप रहता है। हम कारीगरों को उनके काम के हिसाब से तुरंत कैश पैसा दे देते हैं। </p>
<h4><strong>बिचौलिए खा जाते हैं मेहनत का पैसा</strong></h4>
<p>इस पूरी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी त्रासदी हैं ठेकेदार या बिचौलिए। ये वो लोग होते हैं, जो सीधे शोरूम के मालिकों से थोक में ऑर्डर उठाते हैं। चूंकि रजिया बेगम या रमेश कुमार जैसे कारीगरों की सीधे बड़े शोरूम्स तक पहुंच नहीं होती, इसलिए ये बिचौलिए बीच में आकर मलाई खाते हैं। सरकार ने चिकनकारी को बढ़ावा देने के लिए जीआई टैग भी दिया है। कागजों पर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी कई बड़ी और लुभावनी योजनाएं चल रही हैं। कारीगरों को लोन देने, सीधे बाजार उपलब्ध कराने के वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि पुराने लखनऊ की तंग गलियों में पहुंचने से पहले ही ये योजनाएं दम तोड़ देती हैं। अवध के जिस जायके, लिबास और तहजीब पर पूरा लखनऊ इतराता है, उसकी चमक को दुनियाभर में जिंदा रखने वाली ये उंगलियां इतनी बेरंग और लाचार क्यों हैं? बड़े-बड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डिजाइनर इन महिलाओं के बनाए हुनर को दिल्ली और मुंबई के ‘लक्जरी फैशन वीक’ में रैंप पर ले जाकर लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। लखनवी चिकनकारी आज सात समंदर पार भारत का नाम रोशन कर रही है, लेकिन इन चिकन को चमकाने वाली उंगलियों को उनका जायज हक, उनकी सही मजदूरी नहीं मिल रही है। यही वजह है कि आज लखनवी असली चिकन अपनी रंगत खोता जा रहा है और बजार में धड़ल्ले से मशीनरी चिकन बेचा जा रहा है।</p>
<h4><strong>नीले हाथ, मामूली कमाई</strong></h4>
<p>लकड़ी का सांचा जब बनकर तैयार हो जाता है, तब बारी आती है थान के थान कपड़ों पर डिजाइन उतारने की। इसे ‘छपाई’ या ‘छपैया’ कहा जाता है। सआदतगंज के एक टूटे हुए कारखाने में 30 वर्षीय मोहम्मद आरिफ नील और गोंद के गाढ़े मिक्चर में लकड़ी के ठप्पे को डुबोते हैं और पूरी ताकत से कपड़े पर थाप मारते हैं। खट-खट की यह आवाज इस कारखाने की पहचान है। आरिफ के हाथ कोहनी तक नीले हो चुके हैं, उन्होंने बताया कि दिनभर में सैकड़ों मीटर कपड़े पर झुककर थाप मारनी पड़ती है। शाम तक कलाई सुन्न हो जाती है और फेफड़ों में नील की महक बस जाती है। एक थान छापने के हमें 30 से 40 रुपये मिलते हैं। दिन भर में 400-500 रुपये कमा लेते हैं, लेकिन इस धूल और केमिकल के बीच काम करने से फेफड़े जवाब दे रहे हैं। हमने पढ़ाई लिखाई नहीं कि तो यह कर रहे, लेकिन बच्चों को इस काम में नहीं लगाएगें उनको पढ़ा लिखाकर अफसर बनाएगें।</p>
<h4><strong>सुई-धागे से जादू और  जिंदगी का अंधेरा</strong></h4>
<p>छपाई के बाद कपड़ा उन उंगलियों के पास जाता है, जिन्हें इस पूरी इंडस्ट्री की असली रूह कहा जाता है यानी पुराने लखनऊ के घरों में बैठी महिला कारीगर। वजीरगंज की एक तंग गलियों में चिकन का काम करने वाली रजियाबेगम ने बताया कि एक कुर्ते पर ‘उलटी बखिया’ और ‘जाली’ का बारीक काम करने में मुझे और मेरी बड़ी बेटी को 10 दिन लगते हैं। इसके बदले हमें 250 रुपये मिले हैं। शोरूम में इसी कुर्ते को कीमत हजारों में है। वहीं फैजुल्लागंज की रहने वाली कहकशां ने बताया कि वह सेवा चिकन सेंटर में काम करती हैं, उन्हें तीन हजार रुपए महीना मिलता है। पैसा बढ़ाने को कहा तो निकाल दिया। अब वह अपना घर में लाकर चिकन का काम करती हैं, लेकिन 25 रुपये रोज से ज्यादा का काम नहीं हो पाता है। मुसाहिब गंज की आफरीन ने बताया कि उनकी भाभी-अम्मी सभी लोग चिकन का काम करते हैं। पापा बढ़ई का काम करते हैं, उनकी कमाई से गुजारा नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से हम उनकी मदद के लिए घर पर ही यह काम करते हैं, लेकिन हम तीनों लोग मिलकर भी एक चार से पांच सौ का कुर्ता हफ्ते भर में नहीं बना पाते हैं। </p>
<h4><strong>इंटरनेशनल ब्रांड्स कर रहे हैं शोषण </strong></h4>
<p>आज देश के बड़े-बड़े डिजाइनर्स और विदेश के लग्जरी ब्रांड्स अपने रेंप शो और शादियों के करोड़ों के लहंगों में इस चिकनकारी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ब्रांड्स विदेशों में एक-एक चिकन का जोड़ा 5 लाख से 10 लाख में बेचते हैं और अपनी वेबसाइट पर ‘सस्टेनेबल फैशन और कारीगरों की मदद का ठप्पा लगाते हैं, लेकिन जब यही ऑर्डर पुराने लखनऊ के ठेकेदारों के जरिए इन औरतों तक पहुंचता है, तो उनके हिस्से में 500 रुपये भी नहीं आते।</p>
<h4><strong>36 से 4-5 तक सिमट गए चिकन के टांके </strong></h4>
<p>चिकनकारी की असली जान इसके पारंपरिक टांके हैं। शुरुआती दौर में लखनवी चिकनकारी में कुल 36 प्रकार के टांके हुआ करते थे। हर टांके का अपना एक मिजाज और अपनी एक बनावट होती थी। इन 36 टांकों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता था उभरे हुए टांके जैसे मुर्री चावल के दाने जैसी कढ़ाई और फंदा बाजरे के दाने जैसी।</p>
<p>सपाट टांके जैसे ताली, कंगन, पेचनी और बखिया कपड़े के उल्टी तरफ से की जाने वाली कढ़ाई, जो सीधी तरफ शैडो इफेक्ट देती है। जालीदार काम, जिसमें कपड़े के धागों को बिना काटे, सुई से अलग करके बेहद महीन और पारदर्शी जाली बनाई जाती है। चिकन के लिए पद्म श्री पा चुकी नसीम बानों बतााती हैं कि आज उन 36 टांकों में से मुश्किल से 5 या 6 टांके ही बाजार में जिंदा बचे हैं। आज का ज्यादातर काम महज बखिया, फंदा, तेपची, जाली और मुर्री तक सिमटकर रह गया है। बाकी के 30 टांके जैसे कील, कंगन, बलदा, धनिया पट्टी, मखमली, सिधौर, घसपट्टी, बनारसी टांके लगभग खत्म हो गए हैं। इन टांकों को जानने वाले उंगलियों पर गिनने लायक बुजुर्ग ही बचे हैं। बाजार में अब किसी के पास सब्र नहीं है। 36 टांकों वाला एक शुद्ध पारंपरिक कुर्ता बनने में 3 से 6 महीने का समय लगता है। ठेकेदार और शोरूम मालिक कारीगर को उतना वक्त और उतनी मजदूरी देने को तैयार नहीं हैं। उन्हें हर हफ्ते नया स्टॉक चाहिए। नतीजा यह हुआ कि कारीगरों ने भी मेहनत और समय बचाने के लिए उन मुश्किल टांकों को बनाना छोड़ दिया, जो ज्यादा वक्त लेते थे। अब सिर्फ वही टांके चलाए जा रहे हैं, जो जल्दी बनते हैं और दूर से देखने में भारी लगते हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan--(11).png" alt="MUSKAN  (11)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>बदलते दौर में खोता जा रहा है असली चिकन</strong></h4>
<p>चिकनकारी का इतिहास मुगल काल विशेषकर नूरजहां के दौर से जुड़ा है, लेकिन तब के चिकन और आज के चिकन में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है। पहले चिकनकारी सिर्फ सफेद मलमल या सूती कपड़ों पर सफेद सूती धागे से ही की जाती थी। उसे ही असली ‘नफासत’ माना जाता था, लेकिन आज बाजार की मांग और कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ ने इसका स्वरूप बदल दिया है। आज मलमल की जगह जॉर्जेट, शिफॉन, सिल्क और क्रेप जैसे सिंथेटिक कपड़ों ने ले ली है। सफेद धागे की जगह रंग-बिरंगे रेशमी और सिंथेटिक धागों का इस्तेमाल होने लगा है। इतना ही नहीं, कढ़ाई को भारी लुक देने के लिए अब उसमें जरी, गोटा-पत्ती, मुकेश और मोतियों का घालमेल कर दिया गया है, जिसकी चकाचौंध में चिकन कहीं खोता जा रहा है। </p>
<h4><strong>चिकनकारी को मिला चुका है जीआई टैग</strong></h4>
<p>लखनऊ की चिकनकारी को साल 2008 में ही जीआई टैग मिल चुका है। इसका कानूनी मतलब यह है कि लखनऊ और इसके आस-पास के तय जिलों के बाहर बने चिकन के कपड़े को ‘लखनवी चिकन’ कहकर नहीं बेचा जा सकता। बाहर के मशीनी चिकन को लखनवी चिकन लिखना या बेचना अपराध है, इसके बावजूद लखनऊ के बजारों में नकली माल सरेआम लखनवी चिकन के नाम पर बेचा जा रहा है।</p>
<h4><strong>ऐसे पहचाने, असली और नकली लखनवी चिकन </strong></h4>
<p>कपड़े को उल्टा करें। अगर पीछे धागों की गांठें, उलझे हुए धागे और उबड़-खाबड़ टांके दिखें, तो वह असली है। अगर पीछे का हिस्सा भी बिल्कुल साफ, सपाट और परफेक्ट दिखे, तो वह मशीनी है। असली हाथ के चिकन में ‘मुर्री’ और ‘फंदा’ जैसे टांके कपड़े पर चावल या बाजरे के दाने की तरह उभरे हुए महसूस होते हैं। मशीनी चिकन बिल्कुल सपाट होता है, छूने पर उभार गायब रहता है। असली चिकन में कपड़े के धागों को बिना काटे, सुई से अलग करके जाली बनाई जाती है। नकली मशीनी चिकन में कपड़े को लेजर से काटकर या छेद करके गोल जाली बनाई जाती है, जो एकदम परफेक्ट और खोखली दिखती है। असली चिकन पर कढ़ाई के नीचे या कोनों पर हल्के नीले रंग के छपाई के निशान दिख जाते हैं, जो धोने पर छूटते हैं। मशीन वाले चिकन में ऐसे कोई निशान नहीं होते। हाथ का काम कभी एकदम परफेक्ट नहीं हो सकता, उसमें इंसानी कमियां और धागों की गांठें साफ दिखेंगी। वही उसकी असली पहचान है।</p>
<h4><strong>अंबानी से हॉलीवुड तक लखनवी चिकन का जलवा</strong></h4>
<p>करोड़पतियों और सेलिब्रिटीज की शादियों व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर लखनवी चिकनकारी हमेशा शान और प्रतिष्ठा का प्रतीक रही है। भारत की सबसे चर्चित शादियों में से एक, ईशा अंबानी की शादी में उन्होंने मशहूर डिजाइनर अबू जानी-संदीप खोसला द्वारा तैयार किया गया विशेष लखनवी चिकनकारी लहंगा पहना, जिस पर हाथ की बारीक कढ़ाई, मूकैश और जरी का काम था। इसे तैयार करने में लखनऊ के कारीगरों को कई महीने लगे और यह लहंगा देश-विदेश की मीडिया में खूब चर्चित रहा।</p>
<p>हाल ही में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की भव्य शादी में भी लखनवी चिकनकारी का जलवा देखने को मिला। राधिका मर्चेंट से लेकर नीता अंबानी तक ने प्री-वेडिंग और मुख्य समारोहों में चिकनकारी व मूकैश के काम वाले विशेष परिधान पहने, जिनकी कढ़ाई पुराने लखनऊ के कारीगरों ने की थी।</p>
<p>साल 2018 में सोनम कपूर ने अपनी मेहंदी और संगीत समारोह के लिए ऑफ-व्हाइट लखनवी चिकनकारी लहंगा चुना। इस पर महीन कढ़ाई पूरी करने में चुनिंदा कारीगरों को लगभग दो वर्ष लगे थे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लखनवी चिकनकारी ने भारत की पहचान मजबूत की है। साल 2012 में ऐश्वर्या राय बच्चन ने कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर सफेद-सुनहरी लखनवी चिकनकारी साड़ी पहनकर वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित किया। वहीं पॉप स्टार बियॉन्से ने कोल्डप्ले के चर्चित म्यूजिक वीडियो में लखनवी चिकनकारी पर आधारित परिधान पहना। अप्रैल 2023 में गीगी हदीद ने नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन समारोह में सफेद-सुनहरे रंग की लखनवी चिकनकारी पोशाक पहनकर इस भारतीय हस्तकला को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan--(12).png" alt="MUSKAN  (12)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong>अंधेरे में उम्मीद की किरण पद्मश्री नसीम बानो का संघर्ष </strong></h4>
<p>ऐसा नहीं है कि इस घुटन भरे माहौल में सबने घुटने टेक दिए हैं। इसी चौक की गलियों से एक ऐसी आवाज भी निकली, जिसने इस हुनर की तकदीर और तस्वीर दोनों को बदलने की जिद ठानी। हम बात कर रहे हैं पद्मश्री नसीमा बानो की। नसीमा बानो सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि लखनऊ की हजारों महिला चिकन कारीगरों के लिए एक आंदोलन का नाम है।</p>
<p>एक बेहद रूढ़िवादी माहौल से निकलकर, जहां औरतों का घर से बाहर निकलना भी गुनाह माना जाता था, नसीमा बानो ने सुई-धागे को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने ठेकेदारों और बिचौलियों के उस क्रूर चक्रव्यूह को सीधे चुनौती दी, जो औरतों की मेहनत कौड़ियों के भाव खरीदते थे। उन्होंने महिलाओं को एकजुट किया, उन्हें सीधे बाजार से जोड़ा और कढ़ाई की बारीकियों को सिखाकर उन्हें उनके काम का सही दाम दिलवाया। उनके इसी बेमिसाल योगदान और चिकनकारी को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दिलाने के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से नवाजा। आज भी नसीमा बानो नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए एक ढाल बनकर खड़ी हैं। उनका मानना है कि हुनर किसी की जागीर नहीं है और न ही यह लाचारी का नाम है। अगर औरतें अपनी उंगलियों का मोल समझना शुरू कर दें और बिचौलियों के आगे झुकना बंद कर दें, तो किसी शोरूम मालिक की मजाल नहीं कि वो कलाकारों का शोषण कर सके। हमें अपनी विरासत को बचाना भी है और अपनी अगली पीढ़ी को उसका हक दिलाना भी है। उन्होंने बताया कि हम कलाकार लोग हैं हमारी कला को सरकार ने समझा और सराहा यह अच्छी बात है, लेकिन हम कलाकारों को आम लोगों से अलग करने के लिए सरकार को हमें सहूलियतें भी देनी चाहिए। हम कलाकार होते हुए भी बसों और अस्पतालों में धक्के खाते हैं। अगर सरकार हम कलाकारों का इलाज फ्री कर दे, तो हम कलाकारों का मान और बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह का सब्र इस कला को सीखने और करने के लिए चाहिए मौजूदा समय की पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी में वह सब्र नहीं बचा है। यही वजह कि लखनऊ का चिकन धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है। अगर समय रहते युवाओं को इस कला के लिए प्रेरित नहीं किया गया, तो लखनवी चिकन की जगह मशीनरी चिकन बहुत जल्दी ले लेगा अैर लखनवी चिकन सिर्फ म्यूजिम की शान बनकर रह जाएगा।</p>
<p><strong>-दरख्शां कदीर सिद्दीकी, लखनऊ, अमृत विचार लोक दर्पण</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/587287/meta-muse-image-ai-launch-photo-generator-privacy-controversy"><span class="t-red">Meta का नया AI टूल ‘Muse Image’ लॉन्च,</span> टेक्स्ट से बनाएगा शानदार तस्वीरें; प्राइवेसी विवाद के बाद फीचर भी हटाया</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587290/lucknow-chikankari-artisans-struggle-gi-tag-handmade-embroidery-crisis</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 15:47:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Alert: स्मार्टफोन और विज्ञापनों ने युवाओं को बनाया जुए का शिकार, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन, ऑनलाइन बेटिंग और जुए के बढ़ते विज्ञापनों के कारण युवाओं में कम उम्र में जुए की लत का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। अध्ययन में सरकार से कड़े नियमन और परिवारों से बच्चों को जागरूक करने की अपील की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587095/youth-gambling-addiction-online-betting-study-warning-parents-awareness"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(29)5.png" alt=""></a><br /><p><strong>डिजिटल डेस्क:</strong> युवाओं में कम उम्र में जुए की बढ़ती लत को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। मोनाश यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ चार्ल्स लिविंगस्टोन द्वारा साझा किए गए अध्ययन के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी, पोकर मशीनों और जुए के बढ़ते विज्ञापनों ने युवाओं को पहले की तुलना में अधिक जोखिम में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को जुआ उद्योग पर सख्त नियमन लागू करने के साथ-साथ परिवारों को भी बच्चों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना होगा।</p><h4><strong>18 से 34 वर्ष के युवाओं में अधिक खतरा</strong></h4><p>अध्ययन के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में आठ प्रतिशत से अधिक वयस्क किसी न किसी रूप में जुए के दुष्प्रभावों का सामना कर रहे हैं, जबकि लगभग एक प्रतिशत वयस्क अत्यधिक जोखिम वाले स्तर पर जुआ खेलते हैं। विशेष रूप से 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में जुए की लत का खतरा अधिक पाया गया है।</p><p>विशेषज्ञों का कहना है कि जो युवा नियमित रूप से पोकर मशीन (पोकी) या ऑनलाइन सट्टेबाजी में शामिल होते हैं, उनमें से लगभग 90 प्रतिशत को आर्थिक नुकसान, रिश्तों में तनाव और अन्य गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p><h4><strong>मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर</strong></h4><p>अध्ययन में बताया गया है कि जुए की लत केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहती। इससे अपराधबोध, शर्म, तनाव, अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। शोध में जुए और आत्महत्या के बढ़ते जोखिम के बीच भी संबंध का उल्लेख किया गया है।</p><h4><strong>परिवार और समाज भी होते हैं प्रभावित</strong></h4><p>विशेषज्ञों के अनुसार, जुए का असर केवल जुआ खेलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव परिवार, जीवनसाथी, बच्चों, दोस्तों और कार्यस्थल तक पहुंचता है। अध्ययन में माता-पिता की जुए की लत को पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, बच्चों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार जैसी समस्याओं से भी जोड़ा गया है।</p><h4><strong>स्मार्टफोन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने बढ़ाया जोखिम</strong></h4><p>शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मार्टफोन और ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के कारण अब युवा घर बैठे आसानी से जुआ खेल सकते हैं। कई मामलों में परिवार को इसकी जानकारी भी नहीं होती। किशोरावस्था में मस्तिष्क के विकास के दौरान जोखिम लेने की प्रवृत्ति अधिक होने से इस उम्र में जुए की लत लगने की संभावना बढ़ जाती है।</p><h4><strong>विज्ञापनों और डिजिटल डेटा पर भी चिंता</strong></h4><p>अध्ययन में कहा गया है कि जुआ कंपनियां उपयोगकर्ताओं के व्यवहार से जुड़ा डेटा एकत्र कर लक्षित विज्ञापन दिखाती हैं, जिससे लोगों को दोबारा जुआ खेलने के लिए प्रेरित किया जाता है। विशेषज्ञों ने जुए के विज्ञापनों पर कड़े प्रतिबंध और उद्योग के लिए अधिक प्रभावी नियामक व्यवस्था की आवश्यकता बताई है।</p><h4><strong>इलाज संभव, लेकिन लोग नहीं लेते मदद</strong></h4><p>विशेषज्ञों ने बताया कि कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी उपचार पद्धतियां जुए की लत से बाहर निकलने में प्रभावी साबित हो सकती हैं। हालांकि, सामाजिक कलंक और शर्म के कारण अधिकांश लोग समय पर उपचार नहीं कराते।</p><h4><strong>माता-पिता के लिए विशेषज्ञों की सलाह</strong><br /></h4><p>बच्चों से खेलों को मनोरंजन के रूप में देखने की बात करें, जुए को खेल का हिस्सा न मानें।<br />रात 8:30 बजे के बाद खेल प्रसारण देखने से बचें, क्योंकि इस समय जुए के विज्ञापन प्रसारित हो सकते हैं।<br />बच्चों के मोबाइल और अन्य उपकरणों में जुआ वेबसाइटों और भुगतान विकल्पों को ब्लॉक करने वाले डिजिटल टूल्स का उपयोग करें।</p><p><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">यह भी पढ़ेंः</span> <a href="https://www.amritvichar.com/article/586646/good-news--great-news-for-agniveers----now--75--of-the-soldiers-instead-of-25--will-get-permanent-jobs--find-out-the-plans-of-the-three-armed-forces"><span class="t-red">Good News :</span> अग्निवीरों के लिए खुशखबरी... 25% नहीं अब 75% जवानों को मिल सकती है स्थायी नौकरी ! तीनों सेनाओं बना रही है भविष्य की योजना</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 14:01:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Monsoon Health Tips: मानसून में इन आसान आदतों से रहें स्वस्थ, डेंगू-मलेरिया समेत कई बीमारियों से मिलेगा बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश के मौसम में दूषित पानी, मच्छरों और संक्रमण से बढ़ता है खतरा, विशेषज्ञों ने बताए सुरक्षित आहार, स्वच्छता और इम्यूनिटी बढ़ाने के आसान उपाय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586559/monsoon-health-tips-dengue-malaria-prevention-rainy-season-health-hindi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(47).png" alt=""></a><br /><p>बारिश की पहली फुहार, जहां तपती गर्मी से राहत देती है, वहीं यह मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। चारों ओर फैली हरियाली, ठंडी हवाएं और सुहाना मौसम मन को भले ही आनंदित कर दें, लेकिन वातावरण में बढ़ी नमी, जलभराव और गंदगी बैक्टीरिया, वायरस तथा मच्छरों के तेजी से पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर देते हैं। यही कारण है कि मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल फीवर, टाइफाइड, डायरिया, हैजा और फंगल संक्रमण जैसी बीमारियों के मामलों में अचानक वृद्धि देखने को मिलती है।</p>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में होने वाली अधिकांश बीमारियां हमारी छोटी-छोटी लापरवाहियों का परिणाम होती हैं। यदि समय रहते कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए, तो इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में किन बातों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>सुरक्षित पानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा</strong></span></h4>
<p>मानसून में बारिश के कारण पेयजल स्रोत दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है। कई बार सीवर का पानी पाइपलाइन में मिल जाता है, जिससे पानी में बैक्टीरिया और वायरस प्रवेश कर जाते हैं। यही दूषित पानी डायरिया, टाइफाइड, हैजा और पेट के संक्रमण जैसी बीमारियों की वजह बनता है। इस मौसम में हमेशा उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या विश्वसनीय पैक्ड पानी ही पीना चाहिए। यदि घर में पानी स्टोर करते हैं, तो उसे ढककर रखें और बर्तनों की नियमित सफाई करें। बाहर यात्रा करते समय अनजान स्रोत का पानी पीने से बचें।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan-dixit-(47).png" alt="MUSKAN DIXIT (47)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">स्ट्रीट फूड का स्वाद पड़ सकता है महंगा</span></strong></h4>
<p>- बरसात में खुले में बिकने वाला खाना जल्दी खराब हो जाता है। नमी और गंदगी के कारण उस पर मक्खियां बैठती हैं और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। चाट, गोलगप्पे, कटे हुए फल, खुली मिठाइयां और बिना ढके खाद्य पदार्थ फूड पॉइजनिंग का बड़ा कारण बन सकते हैं।</p>
<p>- घर का ताजा, गर्म और संतुलित भोजन इस मौसम में सबसे सुरक्षित माना जाता है। यदि बाहर खाना जरूरी हो, तो केवल साफ-सुथरे और भरोसेमंद स्थान का ही चुनाव करें।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>व्यक्तिगत स्वच्छता को बनाएं आदत</strong></span></h4>
<p>- बरसात के मौसम में त्वचा लंबे समय तक नम रहने के कारण फंगल इंफेक्शन, खुजली और बैक्टीरियल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों में देर तक रहना संक्रमण को बढ़ावा देता है।</p>
<p>-  रोज स्नान करें, भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें और हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। पैरों की उंगलियों, बगल और त्वचा की सिलवटों को साफ और सूखा रखें। बच्चों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>मजबूत इम्यूनिटी ही असली ढाल</strong></span></h4>
<p>बरसात के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में संक्रमण जल्दी शरीर को अपनी चपेट में ले लेता है। आहार में विटामिन-सी युक्त फल, मौसमी सब्जियां, दालें, अंकुरित अनाज और प्रोटीन युक्त भोजन शामिल करें। हल्दी, अदरक, तुलसी, काली मिर्च और लहसुन जैसे प्राकृतिक तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">मच्छरों से बचाव में न करें लापरवाही</span></strong></h4>
<p>मानसून के दौरान डेंगू और मलेरिया का सबसे बड़ा कारण घर और आसपास जमा पानी होता है। कूलर, गमले, टायर, छत और खुले बर्तनों में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख स्थान बन जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित बदलें, पानी की टंकियों को ढककर रखें, मच्छरदानी का उपयोग करें और आवश्यकता पड़ने पर मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट लगाएं। सुबह और शाम पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी लाभदायक है।</p>
<h4><strong>क्या करें</strong></h4>
<ol>
<li> उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।</li>
<li> घर का ताजा और गर्म भोजन करें।</li>
<li>  हाथों को साबुन से बार-बार धोएं।</li>
<li> रोज स्नान करें और गीले कपड़े तुरंत बदलें।</li>
<li> विटामिन-सी और प्रोटीन युक्त भोजन लें।</li>
<li> घर के आसपास पानी जमा न होने दें।</li>
<li> मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें।</li>
<li> बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं।</li>
</ol>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan-dixit-(48).png" alt="MUSKAN DIXIT (48)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>क्या न करें</strong></span></h4>
<ol>
<li> खुले में मिलने वाला भोजन न खाएं।</li>
<li> गंदा या बिना फिल्टर पानी न पिएं।</li>
<li> बारिश में भीगने के बाद देर तक गीले कपड़े न पहनें।</li>
<li> बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।</li>
<li> कूलर या गमलों में पानी जमा न रहने दें</li>
<li> बच्चों को गंदे पानी में खेलने न दें।</li>
<li> मच्छरों के काटने को नजरअंदाज न करें।</li>
</ol>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>मजबूत इम्यूनिटी ही असली ढाल</strong></span></h4>
<p>बरसात के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में संक्रमण जल्दी शरीर को अपनी चपेट में ले लेता है। आहार में विटामिन-सी युक्त फल, मौसमी सब्जियां, दालें, अंकुरित अनाज और प्रोटीन युक्त भोजन शामिल करें। हल्दी, अदरक, तुलसी, काली मिर्च और लहसुन जैसे प्राकृतिक तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">मच्छरों से बचाव में न करें लापरवाही</span></strong></h4>
<p>मानसून के दौरान डेंगू और मलेरिया का सबसे बड़ा कारण घर और आसपास जमा पानी होता है। कूलर, गमले, टायर, छत और खुले बर्तनों में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख स्थान बन जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित बदलें, पानी की टंकियों को ढककर रखें, मच्छरदानी का उपयोग करें और आवश्यकता पड़ने पर मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट लगाएं। सुबह और शाम पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी लाभदायक है।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज</span></strong></h4>
<ol>
<li> लगातार तेज बुखार</li>
<li> शरीर और जोड़ों में तेज दर्द</li>
<li> उल्टी या दस्त</li>
<li> त्वचा पर लाल चकत्ते</li>
<li> अत्यधिक कमजोरी</li>
<li> सांस लेने में तकलीफ</li>
<li> प्लेटलेट्स कम होने के संकेत</li>
<li> पेशाब कम आना</li>
</ol>
<p>ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>उचित आहार-विहार का पालन</strong></span></h4>
<p>आयुर्वेद में वर्षा ऋतु को अत्यंत संवेदनशील माना गया है। इस समय शरीर की जठराग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर हो जाती है तथा वात दोष का प्रकोप बढ़ता है। यदि इस ऋतु में उचित आहार-विहार का पालन न किया जाए, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है और व्यक्ति विभिन्न रोगों की चपेट में आ सकता है। इसलिए आयुर्वेद में ‘निदान परिवर्जन’ को सबसे श्रेष्ठ उपचार माना गया है।</p>
<p>दिनचर्या का पालन: समय पर सोना-जागना, नियमित योग, प्राणायाम तथा हल्का व्यायाम करना शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। पर्याप्त नींद लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर बनी रहती है।</p>
<p>उचित आहार (पथ्य आहार): वर्षा ऋतु में हल्का, ताजा, गर्म तथा सुपाच्य भोजन करना चाहिए। मूंग की दाल, पुराना चावल, हरी सब्जियां, सूप तथा दलिया लाभदायक माने गए हैं। बासी भोजन, तले-भुने पदार्थ, अधिक ठंडी चीजें तथा दूषित भोजन से बचना चाहिए।</p>
<p>वर्षा ऋतु का आनंद तभी लिया जा सकता है, जब हम अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। आयुर्वेद संतुलित आहार, स्वच्छता, उचित दिनचर्या और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल देता है। इन उपायों को अपनाकर डेंगू, मलेरिया तथा अन्य वर्षाजनित रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।<strong> ----- डॉ. स्वाति तिवारी, चिकित्सक, वाराणसी</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/586523/soil-health-human-health-prof-himanshu-pathak-nbri-lucknow-agriculture-news"><span class="t-red">'मिट्टी स्वस्थ तो इंसान स्वस्थ': </span>प्रो. हिमांशु पाठक बोले- Soil Health बिगड़ी तो Nutrition और Health दोनों होंगे प्रभावित</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Special</category>
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                                            <category>प्रयागराज</category>
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                                            <category>अमरोहा</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 08:00:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>एक्सपायर मेकअप को न फेंकें, इन आसान घरेलू हैक्स से करें स्मार्ट इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[एक्सपायर कॉस्मेटिक्स त्वचा पर दोबारा इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं, लेकिन घर की सफाई और रखरखाव के कई कामों में ये बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586565/expired-makeup-hacks-beauty-products-reuse-home-cleaning-tips"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(55).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ड्रेसिंग टेबल पर रखे ब्यूटी प्रोडक्ट्स हर महिला की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा होते हैं, लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि व्यस्त दिनचर्या के बीच किसी लिपस्टिक, टोनर, मॉइस्चराइजर या परफ्यूम की एक्सपायरी डेट निकल जाती है और हम उसे बिना सोचे-समझे कूड़ेदान में फेंक देते हैं। जबकि हकीकत यह है कि एक्सपायर होने के बाद भी कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स घर के छोटे-छोटे कामों में बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।</p>
<p class="BriefBoxmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बेशक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूटी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्ट्स</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चेहरे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">या</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">दोबारा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करना</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">माना</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इन्हें</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोग</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">शामिल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करके</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">न</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पैसे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">बचा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सकती</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">अनावश्यक</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">वेस्ट</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सकती</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आइए</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जानते</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पांच</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आसान</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कारगर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूटी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हैक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मेकअप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्ट्स</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोगिता</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नया</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">दे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सकते</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं।</span></p>
<p class="BriefBoxmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan-dixit-(57).png" alt="MUSKAN DIXIT (57)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<h4 class="BriefBoxHead" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पुराने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मेकअप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रश</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करें</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">गैजेट्स</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई</span></strong></h4>
<p class="MsoNoSpacing" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मेकअप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रश</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चेहरे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लायक</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">न</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">न</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फेंक।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इनके</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मुलायम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिसल्स</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लैपटॉप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कीबोर्ड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीवी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">डैशबोर्ड</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नाजुक</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जगहों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">धूल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हटाने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लिए</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतरीन</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होते</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं।</span></p>
<h4 class="Subhead-20" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परफ्यूम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">बने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रूम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रेशनर</span></strong></h4>
<p class="BriefBoxmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आपका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परफ्यूम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खुशबू</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बरकरार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कमरे</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अलमारी</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्दों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">या</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुशन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हल्के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्प्रे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूप</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">किया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सकता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताजगी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहेगी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परफ्यूम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बेकार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाएगा।</span></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>टोनर से चमकाएं शीशे</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अगर आपका फेस टोनर एक्सपायर हो गया है, तो उसे फेंकने की बजाय शीशे साफ करने में इस्तेमाल करें। अधिकांश टोनर में मौजूद अल्कोहल कांच की सतह पर लगे हल्के दाग और धूल हटाने में मदद करता है। कॉटन पैड या माइक्रोफाइबर कपड़े पर थोड़ा-सा टोनर डालें और ड्रेसिंग टेबल, बाथरूम या खिड़की के शीशों को साफ करें। कुछ ही मिनटों में शीशे चमक उठेंगे।</p>
<h4 class="BriefBoxHead" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्लींजर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">करें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मेकअप</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रश</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डीप</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्लीनिंग</span></strong></h4>
<p class="BriefBoxmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फेस</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">क्लींजर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायरी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">गई</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">परेशान</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जरूरत</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मेकअप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रश</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूटी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पंज</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लिए</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">किया</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सकता</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">गुनगुने</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">क्लींजर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलाकर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रश</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">डुबोएं</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हल्के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हाथों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करें।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जमे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हुए</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मेकअप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कण</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आसानी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">निकल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जाएंगे।</span></p>
<h4 class="BriefBoxHead" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मॉइस्चराइजर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लौटाएगा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लेदर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चमक</span></strong></h4>
<p class="BriefBoxmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉइस्चराइजर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लिए</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चमड़े</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सामान</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लिए</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोगी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सकता</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">बैग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेल्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वॉलेट</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">या</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लेदर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्नीचर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मुलायम</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कपड़े</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मदद</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">हल्का</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">सा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉइस्चराइजर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लगाकर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पोंछें।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">धूल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होगी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लेदर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चमक</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">वापस</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">आ</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">जाएगी।</span></p>
<p class="BriefBoxmatter" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan-dixit-(56).png" alt="MUSKAN DIXIT (56)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<h4 class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करें</span></strong></h4>
<p class="BriefBoxHead" style="margin-left:8.5pt;text-indent:-8.5pt;text-align:justify;"><span lang="en-gb" style="font-size:8pt;font-family:Wingdings;color:#ed1e34;" xml:lang="en-gb">n<span> </span></span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">एक्सपायर</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">प्रोडक्ट्स</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">केवल</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">घरेलू</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">कामों</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">करें।</span></p>
<p class="BriefBoxHead" style="margin-left:8.5pt;text-indent:-8.5pt;text-align:justify;"><span lang="en-gb" style="font-size:8pt;font-family:Wingdings;color:#ed1e34;" xml:lang="en-gb">n<span> </span></span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">मेकअप</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">ब्रश</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">इलेक्ट्रॉनिक</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">सामान</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">सफाई</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">इनका</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">उपयोग</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">करें।</span></p>
<p class="BriefBoxHead" style="margin-left:8.5pt;text-indent:-8.5pt;text-align:justify;"><span lang="en-gb" style="font-size:8pt;font-family:Wingdings;color:#ed1e34;" xml:lang="en-gb">n<span> </span></span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">पहले</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">उत्पाद</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">गंध</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">स्थिति</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">एक</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">बार</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">जरूर</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">जांच</span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;font-family:'Four C Laxman';" xml:lang="hi">लें।</span></p>
<h4 class="BriefBoxHead" style="margin-left:8.5pt;text-indent:-8.5pt;text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">न</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करें</span></strong></h4>
<p class="BriefBoxmatter" style="margin-left:8.5pt;text-indent:-8.5pt;text-align:justify;"><span lang="en-gb" style="font-size:8pt;font-family:Wingdings;color:#ed1e34;" xml:lang="en-gb">n<span> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉस्मेटिक्स</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चेहरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंखों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">या</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">होंठों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">दोबारा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">न</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लगाएं।</span></p>
<p class="BriefBoxmatter" style="margin-left:8.5pt;text-indent:-8.5pt;text-align:justify;"><span lang="en-gb" style="font-size:8pt;font-family:Wingdings;color:#ed1e34;" xml:lang="en-gb">n<span> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">बदबूदार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फफूंद</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">लगे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">या</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रंग</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">बदल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">चुके</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्ट्स</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रूप</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">न</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">करें।</span></p>
<p class="BriefBoxmatter" style="margin-left:8.5pt;text-indent:-8.5pt;text-align:justify;"><span lang="en-gb" style="font-size:8pt;font-family:Wingdings;color:#ed1e34;" xml:lang="en-gb">n<span> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">की</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">पहुंच</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्ट्स</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">दूर</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">रखें।</span></p>
<h4 class="Subhead-20" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूटी</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">टिप</span></strong></h4>
<p class="textmatter" style="text-indent:0cm;text-align:justify;" align="left"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेकअप</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्ट्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खरीदते</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डेट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जरूर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देखें।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पादों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">होता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पैक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खरीदना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्पाद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहते</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाते</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पैसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बेकार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाते।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्ट्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मतलब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमेशा</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बेकार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">होता।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समझदारी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">किया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाए</span><span>, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रखरखाव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">काम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आसान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सकते</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इतना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रखें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सपायर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कॉस्मेटिक्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">त्वचा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लगाने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बचें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उपयोग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सीमित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रखें।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आप</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पैसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बचाएंगी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनावश्यक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कचरे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बचाने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">योगदान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देंगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 18:01:52 +0530</pubDate>
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