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                <title>Cooking Recipes - Amrit Vichar</title>
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                <title>नवाबों का शहर और जायके का सफर: लखनऊ का शाही दस्तरख्वान और अवधी पाक-कला की अनूठी विरासत</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखनऊः </strong>लखनऊ के अवधी व्यंजन जगप्रसिद्ध हैं। यहां के नवाबों ने खानपान के बहुत से व्यंजन चलाए हैं। व्यंजन खुशरंग, सुगंधित और स्वादिष्ट होता है, तो उससे पेट ही नहीं भरता, बल्कि लज्जत और स्वाद के उस मापदंड पर खरा उतरता है, जो कोई न कोई संस्कृति शताब्दियों के बाद उत्पन्न करती है। मुगलकाल में अवध प्रांत अपनी समृद्धि के लिए विख्यात था। यहां के नवाब वाजिद अली शाह अपने शाही अंदाज और शान-ओ-शौकत के लिए मशहूर थे। उन्हें लजीज खाने का बेहद शौक था। शाही रसोई में उनके खानसामे तरह-तरह के मुगलई लजीज पकवान बनाया करते थे और वहां</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584153/city-of-nawabs-and-a-journey-of-taste--lucknow-s-royal-dastarkhwan-and-the-unique-heritage-of-awadhi-cuisine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(37)1.png" alt=""></a><br /><div><strong>लखनऊः </strong>लखनऊ के अवधी व्यंजन जगप्रसिद्ध हैं। यहां के नवाबों ने खानपान के बहुत से व्यंजन चलाए हैं। व्यंजन खुशरंग, सुगंधित और स्वादिष्ट होता है, तो उससे पेट ही नहीं भरता, बल्कि लज्जत और स्वाद के उस मापदंड पर खरा उतरता है, जो कोई न कोई संस्कृति शताब्दियों के बाद उत्पन्न करती है। मुगलकाल में अवध प्रांत अपनी समृद्धि के लिए विख्यात था। यहां के नवाब वाजिद अली शाह अपने शाही अंदाज और शान-ओ-शौकत के लिए मशहूर थे। उन्हें लजीज खाने का बेहद शौक था। शाही रसोई में उनके खानसामे तरह-तरह के मुगलई लजीज पकवान बनाया करते थे और वहां ये पारंपरिक पकवान आज भी बेहद पसंद किए जाते हैं। गरम मसालों की खुशबू से भरपूर लज्जतदार अवधी व्यंजन आज पूरी दुनिया में मशहूर हैं। नवाबी दौर में लजीज व्यंजनों की अवधी पाकशैली अपने उरूज पर थी।</div>
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<div><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(39)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (39)" width="1280" height="720"></img></div>
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<div>पाक कला के माहिर अवध के बावर्ची और रकाबदारों ने मसालों के अतिविशिष्ट प्रयोग से अवध की खान पान परंपरा को अद्वितीय लज्जत बख्शी और इसे कला की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अवध के बावर्चीखाने ने जन्म दिया पाक कला की दम पद्धति को, जिसमें व्यंजन कोयले की धीमी आंच पर पकाए जाते थे। पकाते समय भाप पतीली से बाहर न निकले इसके लिए सने हुए आटे की लोई को पतीली के ढक्कन के किनारों पर चिपका दिया जाता था। लखनऊ की बिरयानी का खास स्वाद दम शैली से बिरयानी बनाने के कारण आता है और यही इसे हैदराबादी बिरयानी से अलग भी करता है। अवधी खाने की विशेषता मसालों और अन्य सामग्रियों के एक खास संतुलन से उत्पन्न स्वाद से जानी जाती थी और यह आज भी परंपरा जीवित है।</div>
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<h4><strong>दस्तरख्वान: केवल भोजन नहीं, एक संस्कृति</strong></h4>
<div>महान विद्वान टीएस इलियट के अनुसार, जब किसी सभ्यता का पतन होने को होता है, तो सबसे पहले उसका दस्तरखान उलटता है। दस्तरखान केवल शाही दरबार अमीरों के महलों और रइसों के दरबारों और ड्योढ़ियों तक सीमित नहीं था। सामान्य घरों में भी लखनऊ का दस्तरखान अपनी बेमिसाली के लिए मौजूद था। तबाखीर के फनकारों का एक वर्ग था, जिसने नमकीन और मीठे व्यंजनों की तैयारी और उपलब्धता में अपनी फनकारी के कमाल दिखाए थे। लखनऊ की रीतियों की जानकारी रजबअली बेग सुरूर और अब्दुल हलीम शरर की तहरीरों (रचनाओं) से भी मिलती है, जिसे पंडित रतननाथ ने अपनी पुस्तकों में इंगित किया है। पुस्तकों में इसका प्रत्यक्ष कम, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से संदर्भ और उऋ ण अधिक मिलते है। शायद लखनऊ के दस्तरखाना की खोदई इतिहास, इसकी स्वच्छता, कोमलता व मृदुलता का स्तर इतिहास के बिखरे हुए पृष्ठों में तलाश करने की बात है। इनके मूल्यांकन करने के उपरांत जरूर इसी खोई हुई चीज को प्राप्त करने का पता चल सकता है। इससे कहीं ज्यादा उत्साहवर्धक बात यह है कि बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में भी लखनऊ वालों के मिले-जुले स्मरण में अपने दस्तरखान की अनुपामता और परख की चेतना बाकी है, बावर्चियों और तबाखों के गुजरे हुए फन के उत्तराधिकारी आज भी मौजूद है, जो बहुत कुछ भल जाने के बावजूद भी बहुत कुछ नहीं भूल सके हैं।</div>
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<div><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(40)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (40)" width="1280" height="720"></img></div>
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<h4><strong>लखनऊ का प्रसिद्ध रोटी बाजार</strong></h4>
<div>रोटियों में शीरमाल, कुल्चा, रूमाली की मांग सबसे ज्यादा होती है, अन्य तरह की रोटियों की मांग मोहर्रम और रमजान में बढ़ जाती है। आर्डर तैयार करने में कारीगरों को 12 घंटों के बजाय 18 घंटे या उससे अधिक काम करना पड़ता है। क्योंकि रमजान के महीने में बिक्री का समय दिन में न होकर देर शाम से पूरी रात चलता है यानी शाम चार बजे से सुबह चार बजे तक। इस इलाके में बनने वाली तमाम रोटियों में से सर्वाधिक बिक्री शीरमाल की ही होती है। केसरी रंग वाली शीरमाल मैदे, दूध व घी से बनती है, जो बहुत ही खास्ता और सुस्वादु होती है। तंदूर में पकाने के बाद इन पर खुशबू के लिए घी लगाया जाता है। शीरमाल ‘कबाब’ और कोरमे की लज्जत बढ़ाती है। शीरमाल का वजन के हासिब से रेट तय होता है यानी 110 ग्राम से 200 ग्राम की शीरमाल 4 से 7 रुपये प्रति पीस बिकती है। इस गली के बाहर ही कई नामी होटल हैं, जहां स्पेशल शीरमाल तैयार की जाती है। विशेषज्ञ के अनुसार शाही खाने में गिनी जाने वाली बाकरखानी रोटी अमीरों के दस्तरखान की बहुत ही विशिष्ट रोटी थी। इसमें मेवे और मलाई का मिश्रण होता है। ये नाश्ते में चाय का आनंद बढ़ा देती है। कारीगर बताते हैं कि बाकरखानी और ताफतान की मांग अब कम ही हो चली है। नान की मांग आम दिनों में कम रहती है। लोग शादी-ब्याह या खास अवसर पर आर्डर देकर नान बनवाते हैं। नान को नर्म व स्वादष्टि बनाने के लिए मैदे में दूध, दही, घी और रवा मिलाया जाता है। एक उक्ति के अनुसार लखनऊ के व्यंजन विशेषज्ञों ने ही परतदार पराठे की खोज की है, जिसको तंदूरी परांठा भी कहा जाता है। इन पराठों को तंदूर में तैयार किया जाता है। पराठे नर्म रहे इसलिए इन्हें पानी की छीटें देकर उस पर घी से तर किया जाता है। ईरान से आई रोटी यानी कुलचा पर स्थानीय प्रभाव रहता है। इसी तरह लखनऊ वालों ने भी कुलचे में विशेष प्रयोग किए। कुलचा नाहरी के विशेषज्ञ कारीगर हाजी जुबैर अहमद के अनुसार कुलचा अवधी व्यंजनों में शामिल खास रोटी है, जिसका साथ नाहरी बिना अधूरा है। लखनऊ के गिलामी कुलचे यानी दो भाग वाले कुलचे उनके परदादा ने तैयार किए। कुलचे रिच डाइट में आते हैं और जुबैर साहब के अनुसार अच्छी खुराक वाला आदमी भी तीन से अधिक नहीं खा सकता है। कुलचे गर्म खाने में ही मजा है यानी तंदूर से निकले और परोसा जाए।</div>
<div><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(44)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (44)" width="1280" height="720"></img></div>
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<h4><strong>ईरान से लखनऊ तक कुलचे का सफर</strong></h4>
<div>कुलचा ईरान और अफगानिस्तान से आया था और हिंदुस्तान में हर जगह फैल गया था। लखनऊ वालों में भी कुलचे में विशेष प्रयोग किए और उसका तिकोना आकार सुनिश्चित किया। इसके अंदर परत पैदा किए और इस प्रकार इसको नहारी से जोड़ा। लखनऊ का कुलचा पूरे हिंदुस्तान में अपनी व्यक्तिगत पहचान रखता है। इसकी लज्जत और नफरासत बेमिसाल हैं। नहारी भी अपने विशेष मसालों और उनक समिश्रण से भिन्न स्वाद रखती है, जो अन्य स्थानों की नहरी में नहीं मिलती। लखनऊ की नहारी अपने विशेष मसालों और गोश्त की बेटियों से तैयार होती है। लखनऊ के दस्तरखान ने कोरमा और चपाती की नफासत और लताफत को आसमान तक पहुंचा दिया था। चपाती का बारीक, नरम और लाल चित्तीदार होना जरूरी शर्त थे। निपुण बावर्ची पावभर आटे की सोलह चपातियां तवे से उतार लेते थे, जो ठंडी होने पर भी नर्म रहती थी। इनका जोड़ कोरमा था, जो बेहतरीन गोश्त से तैयार किया जाता था। कोरमा में तैयारी के बाद भी शोरबा बिल्कुल नहीं होता था। इसके विशेष मसालें, गोश्त के गुण और घी के तार के कारण कोरमा अधिक स्वादिष्ट होता था। रस पैदा करने में धीमी आंच में पकने का भी दखल था और बालाई-बादाम और घी के तार को भी। लखनवी दस्तरखान पर शोरबादार सालन भी नजर आता है। उनका स्वाद अलग शान रखता है। कोरमें मंे हल्दी नहीं पड़ती थी। सालनों के मसाले मंे हल्दी शामिल थी। दरबारों से ज्यादा आम घरों मंे सालन का चलन था। फिर भी तरकारीदार सालन सब पसंद नहीं किए जाते थे। तली अरुई और तले आलू के सालन का विशेष महत्व था। उनके पकाने में बड़ी निपुणता और देख-रेख से काम लिया जाता था। कीमा, कोफता और कबाब खासोआम के दस्तरखान की शोभा होते थे। मात्रा में पिसे हुए चावल कम मात्रा में डालकर इस प्रकार पकाया जाता है कि वह मिलकर एक हो जाए और ठंडा होने पर जम सके।</div>
<div><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(43)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (43)" width="1280" height="720"></img></div>
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<h4><strong>फिरनी और बालाई: मिठास का लखनवी अंदाज</strong></h4>
<div>फिरनी मिट्टी के प्यालों में सोंधेपन और लताफत की वजह से लखनवी इच्छा की पूरी तरह तस्दीक करती थी और गली-कूचों व बाजारों में बालाई की तरह सामान्यतौर पर मिलती थी। यह परंपरा अब भी है और बालाई व फीरनी की कद्रदानी में लखनऊ वाले सबसे आगे हैं। लखनऊ में मिठाइयों, मुरब्बों और हलुवों की तैयारी पर पूरा प्रभाव डाला। यही बर्फी, कलाकंद, गुलाबजामुन, इमरी, जलेबी, नुक्ती और लड्डू जैसी सामान्य मिठाइयों की लज्जत, रंगत और स्वाद का मापदंड कारीगर हलवाइयों ने ऐसा उठाया कि समस्त अवध, बल्कि उत्तर भारत के दक्षिण तक उनके नाम की तूती बोलने लगी। इन विशेषज्ञों की बड़ी संख्या लखनऊ से निकलकर देश में फैली और लखनऊ का नाम रोशन किया। इन मिठाइयों की तरह मुरब्बा सब्जी भी लखनऊ में महत्व रखती थी। लखनऊ जब चरमोत्कर्ष दौर में था, तब बावर्चिचों, दबाखों, मुरब्बासाजों के घराने, मुहल्ले और क्षेत्र ख्याति रखते थे। वह अपने खानदानी फन व पेशे के विकास पर पूरा ध्यान देते थे। साथ ही नई-नई विधियों की खोज से काम लेकर हर एक को प्रभावित करते थे। मुरब्बासाजी के क्षेत्र में सेव, बही, आंवला जैसे मुरब्बों को दिलों-दिमाग की ताजगी और पाचनशक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता था। सब्जियों और तरकारियों के पकाने में लखनऊ के विशेषज्ञ बावर्चिचों ने अपने फन में निपुणता से काम लिया। हर एक तरकारी को अनेक ढंग से पकाने की विधि, सब्जियों के पकवाने में एक नया स्वाद पैदा किया। हामिद अली खां बैरिस्टर ने इस शताब्दी के पहले दशक में अपने एक माहिर बावर्ची का उल्लेख किया है, जो केवल भिंडी की सब्जी को अस्सी विभिन्न तरीकों से पकाता था और हर हांडी का स्वाद अलग होता था।</div>
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<h4><strong>मिठाइयों और मुरब्बों की समृद्ध विरासत</strong></h4>
<div>लखनऊ का दस्तरखान सैकड़ों किस्म के नमकीन और मीठे खाने से सुसज्जित था। दास्ताने अमीर हमजा, तिल्समें होशरुबा और दूसरी दास्तानों में पकवानों के सैकड़ों नाम मिलते है हर व्यंजन की अनेक किस्मों की ओर इशारा मिलता है। लेकिन ओरिजनल अवधी खाने की खुश्बू से अभी भी लोग उतने ही दूर है जितनी दूर अवध का दौर गुजर चुका है। ढेर सारी रिसर्च और गुजरे वक्त की बहुत सी किताबों को खंगालने के साथ-साथ ही ढेारों एक्सपटर्स से बाचतीत की है। क्या है, अवधी खाना? ज्यादातर लोग अवधी खाना का मुगलई खाना के इर्द-गिर्द की चीज मानते है। लेकिन यह बिल्कुल गलत है। दरअसल ईरानी और अवधी कायस्थों के बावर्चीखाना से मिलकर निकली खाने की खुशबू को अवधी दस्तरख्वान कहा जाता है। अवधी खाना मुगलई खानों की तुलना में इस्तेमाल कम किया जाता है। जिससे इसेहजम करना आसान होता है और यह जल्दी हजम होने वाले खानों में शुमार किया जाता है। अवधी खानों में ड्राई-फ्रूट, जाफरान, जड़ी बूटियां, लहसुन, अदरक, काली मिर्च, प्याज, छोटी और बड़ी इलायची, का इस्तेमाल होता है। अवधी खाने की खास बात यह होती है कि इसमें मसाले नहीं,बल्कि मसालों के जूस को डाला जाता है। अवधी खाने शोरवेदार होता है और इसमे पोटली बना कर अदरक-लहसुर आदि डाला जाता है। यही नहीं, खाना बनाते समय मलाई और दूध का भी इस्तेमाल किया जाता है।</div>
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<div><strong>तले आलू का सालन- </strong>तले आलू का सालन अवध की बहुत ही मशहूर डिश है। इसे बड़ी महफिलों और बड़े आयोजनों में बनाया जाता है। इसको बनाने में ख्याल यह रखना चाहिए कि जो आलूम खरीदे गये है वे साइज में बड़े हों। आलू को दो टुकड़ों में काट दिया जाता है। और उसको सरसों के तेल में तला जाता है। सबसे बड़ी कला आलूओं को तलना है। हल्की आंच पर आलू कोतब तक तलें,जब तक वह हल्के सुर्ख न हो जाएं। हल्के हाथ से तले जिससे आलू न टूटे, न जले, आलू के सालन की खूबसूरती इसकी लालिमा लिए रंगत और आलुओं का ठोस होना है। उसके बाद गोश्त को अच्छी तरह से धोकर, मसालों में पकाया जाता है। नहारी में ग्रेवी गाढ़ी होती है,तो तले आलू के सालन में पतली। पतला सालन बना कर आलू उसमें डाल दिये जाते है। मसाले सभी नहारी वाले ही पड़ते है, लेकिन यह पोटली वाले नहीं होते। तले आलू का सालन गर्म-गर्म खाया जाए और कोशिश करें कि इसे लखनवी खमीरी रोटी के साथ खाएं।</div>
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<div><strong>अरहर की दाल-</strong> 21 वीं सदी में अरहर की दाल पानी में बनाई जाती है, लेकिन दौरे अवध में अरहर की दाल दूध के साथ बनाई जाती थी। दाल को धोकर हल्की आंच पर पतीली में चढ़ा दिया जाता था। उसमें इतना दूध डाला जाता था, जितने में दाल डूब जाए। दाल को पकने में कम से कम चार घंटे लगते। हां, आप भी ट्राई करें तो बीच-बीच में इसमें मलाई डालना मत भूलिये। क्या क्या जरूरी है ? मसाले, अदरक, लहसुन, प्याज, नमक-मिर्च स्वादानुसार, हल्की सी सफेद मिर्च, हल्की सी कली और लाल मिर्च, भुना जीरा, हल्का सा गरम मसाला, खुशबू के मसाले, इलायची, जावित्री और लौंग।</div>
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<div><strong>शेफ एडवाइज- </strong>अरहर की दाल बनाते समय टोंड मिल्क का इस्तेमाल करें, तो बेहतर है। अगर ऐसा संभव नहीं है, तो दूध में पानी मिला लें। दाल-दूध पी लेती है, इसलिए बीच-बीच में हल्के हाथ से चलाते रहें। हां पतीली पर ढका ढक्कन पूरा न हटाएं, बस उतना ही हटाएं, जितने से कफगीर (उबाल) पतीली में चली जाए। मलाई का इस्तेमाल करेंगे, तो दाल सोंधी बनेगी और टेस्टी होगी। एक बात का ख्याल रहे कि दाल को सर्व करते समय बघार असली घी और लहसुन का लगाएं। पतीली में इतना दूध हो कि दाल उसमें पूरी तरह से डूब जाए।</div>
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<div><strong>ताफतान- </strong>मैदे में खमीर पैदा करके हल्की मिठास के साथ बनाई जाती है। ताफतान यह अफगानी रोटी है। किसी जमाने में लखनऊ में इसका बहुत चलन था। इसे मैदे से बनाया जाता है। मैदे में खमीर पैदा करके हल्की मिठा के साथ बनाया जाता है। इसे घी में गूंधा जाता है और तंदूर में बनाया जाता है।</div>
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<div>शीरमाल की रोचक कहानी- शीरमाल की शुरुआत गाजीउद्दीन हैदर के जमाने में हुई थी। नवाब गाजीउद्दीन हैदर ने रोटियों का कंपटीशन करवाया था। उसी कंपटीशन में शीरमाल अपने अस्तित्व में आई। शीरमाल में शीर का मतलब दूध और माल का मतलब घी। इन दोनों चीजों को मैदे में अच्छी तरह से गूंधा जाता है और गूंधे हुए मैदे से बनी रोटी को शीरमाल कहते हैं। सबसे पहले मैदे और दूध को घी में गूंध लिया जाता है। फिर अलग-अलग पेड़ों (लोईया) में बांट दिया जाता है। फिर कच्ची घास से बनी हुई कपड़े की गद्दी पर इस पेड़े को फैला दिया जाता है। उसके बाद तंदूर में लगाया जाता है और उस पर दूध या फिर जाफरान का छिड़काव होता है, जिसने भी शीरमाल को खाया है, वह यह बात जानता होगा कि शीरमाल के ऊपरी हिस्से में एक हल्का सा कट लगा होता है। इस कटे हुए हिस्से की भी अपनी पुरानी कहावत है। नवाब साहब ने जब कंपटीशन के बाद रोटियों को चखा और शीरमाल को पहला प्राइज मिला, तो जिस हिस्से को काटकर छोड़ा था उसकी याद में आज भी शीरमाल में यह कट लगाया जाता है।</div>
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<h4><strong>इतिहास के झरोखे से</strong></h4>
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<div>अवध के दौर का यह ऐसा किस्सा है, जिसकी चर्चा लगभग सभी जगह होती है। नवाब आसिफुद्दौला को अरहर की दाल बहुत पसंद थी। खासा (वह जगह जहां खाना बनता है) में इस दाल को पकाने के लिए स्पेशल कुक हुआ करता था। बाबा काजमी किताबों के हवाले से बताते हैं कि नवाब साहब को सर्व की जाने वाली दाल के बघार में, सोने की गिन्नी बुझा दी जाती थी और नवाब साहब उस दाल को चमचे से खा लिया करते थे। किस्सा यह है कि बावर्ची को दाल बनाने के लिए एडवांस में 200 गिन्नियां दी जा चुकी थीं। जैसा कि होता है किसी ने नवाब साहब के कान में यह बात डाल दी कि बावर्ची गिन्नी अपने पास रख लेता है, उसे खाने में नहीं डालता। नवाब साहब ने यह बात जब बावर्ची से पूछी, तो बावर्ची को गुस्सा आ गया और उसने एक करिश्मा नवाब साहब के सामने किया। थाल में बुझाई जा चुकी गिन्नियां रखी थीं। नवाब साहब ने जैसे ही उन गिन्नियों में एक गिन्नी को छुआ, वह बुरादा बन गई। नवाब साहब समझ गए कि असलियत क्या है? लेकिन इस घटना के बाद उस बावर्ची ने शाही बावर्ची खाना छोड़ दिया और नवाब साहब ने अरहर की दाल को।</div>
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<h4><strong>बावर्ची और तबाखों की फनकारी</strong></h4>
<div>लखनऊ के माहिर बावर्चियों एवं तबाखों की सबसे बड़ी विशेषता एवं पहचान (अनुपमता) है। पकाने की विधि, मसालों का चयन और उनके प्रयोग में एक विशेष अनुपात का ध्यान आज भी लखनऊ के दस्तरखानों की अलग पहचान है। बुजुर्ग पीढ़ी की बेगमों, महिलाओं और घरवालियों को दुनिया से बिदा होते हुए देखा है, जो अपने हाथ से हांडी पकाने को अपना परम कर्तव्य समझती थीं। खाने को स्वादिष्ट एवं मजेदार बनाने के गुर जानती थी। उनकी रुचि नफासत और लताफत को नित्य प्रति के पकवान में भी बरकरार रखता था। हमारी नानियों, दादियों और माताओं तक अपनी संस्कृति की परंपरा जीवित रही। किसी के पकाए हुए खाने में लज्जत, स्वाद और मृदुलता न हो, तो बड़ी-बूढ़ियां किस घृणित स्वर से कहती थीं कि- “छछुंदर मारी थी कि हाथ में जायका ही नहीं।” </div>
<div> </div>
<div>अरब व गैरअरब से लेकर भारत तक तंदूर की गर्म बाजारी शताब्दियों से चली आ रही है। तंदूरी रोटी, नान खमीर की परंपरा शताब्दियों से चली आ रही है। ऐसी ही रोटियां यहां के एक पुराने बाजार में आज भी मिलती हैं, बल्कि ये बाजार रोटियों का बाजार ही है। अकबरी गेट से नक्खास चौकी के पीछे तक यह बाजार है, जहां फुटकर व सैकड़े के हिसाब से शीरमाल, नान, खमीरी रोटी, रूमाली रोटी, कुल्चा जैसी कई अन्य तरह की रोटियां मिल जाएंगी। पुराने लखनऊ के इस रोटी बाजार में विभिन्न प्रकार की रोटियों की लगभग 15 दुकानें हैं, जहां सुबह नौ से रात नौ बजे तक गर्म रोटी खरीदी जा सकती है। कई पुराने नामी होटल भी इस गली के पास हैं, जहां अपनी मनपसंद रोटी के साथ मांसाहारी व्यंजन भी मिलते हैं।</div>
<div><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(41)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (41)" width="1280" height="720"></img></div>
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<h4><strong>पुलाव की ईजाद और नवाबी रसोई</strong></h4>
<div>दूध के अंदर मसाले डालकर झोल तैयार किया जाता है। यकनी मसालों का दूध और पसरे हुए चावलों को तीन स्टेप में दम किया जाता है। अवध एक ऐसी जगह है, जहां पुलाव की ईजाद हुई। पुलाव और बिरयानी में फर्क है। यह दोनों डिशेज देखने में भले ही लगभग एक जैसी लगती हों, लेकिन स्वाद में बिल्कुल अलग होती है। दिखने मंें नफीस और खूबसूरत चीज है। बिरयानी में मसाले आदि सामने ही दिखाई दे जाएंगे, जबकि पुलाव में मसाला का फ्लेवर मिलेगा। मसालों की रंगत नही दिखाई देगी,जबकि स्वाद मिलेंगे। लखनवी पुलाव की शुरुआत नवाब आसिफद्दौला के जमाने में की गई, उस समय का फेमस बावर्ची सज्जू की यह ईजाद है, जब बड़ा इमामबाड़ा बन रहा था। उस समय जरूरत ऐसे खाने की थी, जो बल्क मेंे तैयार हो जाए और नवाब भी खा सकें। नवाब अपने किसी खास डिश को बनवाना नहीं चाहते थे। इसमें गोश्त की मसालों के साथ भुनाई की जाती है। दूध के अंदर मसाले डालकर खोल तैयार किया जाता है। मसालों का दूध और पसारे हुए चावल तीन स्टेप में पुलाव को दम किया जाता है। सबसे पहले गोश्त के साथ यकनी होती है। फिर दूसरे स्टेप में मसालेदार दूध डालना होता है। तीसरा स्टेप पसरे हुए चावल को यकनी और दूध के ऊपर डालकर आटे से ढक्कन को सील कर दिया जाता है और दम के लिए रखा दिया जाता है। दम का मतलब हल्की आग में पकाना।</div>
<div> </div>
<div>अवधी मसालों का विज्ञान तकरीबन 42 तरह के मसाले पड़ते हैं। मुख्य रूप से इलायची, जावित्री, जायफल, तेजपत्ता, छोटी इलायची, कालीमिर्च, लाल मिर्च, खड़ा नमक, संदल बुरादा, बालझड़ इसी तरह के मसाले होते है और होती है।</div>
<div> </div>
<div>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(38)1.png" alt="सुरेन्द्र अग्निहोत्री" width="1280" height="720"></img>
सुरेन्द्र अग्निहोत्री, लखनऊ

</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>Cooking Recipes</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/584153/city-of-nawabs-and-a-journey-of-taste--lucknow-s-royal-dastarkhwan-and-the-unique-heritage-of-awadhi-cuisine</link>
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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 15:53:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Diwali 2025:गोल्ड मिठाई 65 हजार रुपये किलो, 2 हजार में बीजों की मिठाइयां,  दीपावली पर बाजार में मिठाई, हैम्पर्स और बेकरी आइटम की धूम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचारः </strong>प्रकाश पर्व दीपावली मिठास का एहसास भी कराता है। बधाई के साथ मिठाई न हो तो त्योहार ही फीका है। समय के साथ मिठाइयों के प्रकार भी बदल गए हैं। मिठाइयों के अलावा, चाकलेट, बेकरी, ड्राई फ्रूट, नमकीन जैसे पैक का चलन बढ़ गया है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(66)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (66)" width="1200" height="720" /></span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"> कुछ लोग हेल्दी मिठाइयों का चयन करते हैं तो कुछ बेकरी आइटम के स्वाद का मजा लेते हैं। गिफ्ट हैम्पर की मांग है। बाजार में बीजों और ड्राईफ्रूट्स से बनी मिठाइयां दो हजार रुपये किलो हैं तो स्वर्ण भस्म और पिश्ता वाली मिठाई की कीमत 65 हजार रुपये किलो है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(61)2.png" alt="MUSKAN DIXIT (61)" width="1200" height="720" /></span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">सप्रू मार्ग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/556587/diwali-2025--gold-sweets-cost-%E2%82%B965-000-per-kg--seed-sweets-for-%E2%82%B92-000--sweets--hampers-and-bakery-items-are-a-rage-in-the-market-this-diwali"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/muskan-dixit-(59)2.png" alt=""></a><br /><p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचारः </strong>प्रकाश पर्व दीपावली मिठास का एहसास भी कराता है। बधाई के साथ मिठाई न हो तो त्योहार ही फीका है। समय के साथ मिठाइयों के प्रकार भी बदल गए हैं। मिठाइयों के अलावा, चाकलेट, बेकरी, ड्राई फ्रूट, नमकीन जैसे पैक का चलन बढ़ गया है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(66)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (66)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"> कुछ लोग हेल्दी मिठाइयों का चयन करते हैं तो कुछ बेकरी आइटम के स्वाद का मजा लेते हैं। गिफ्ट हैम्पर की मांग है। बाजार में बीजों और ड्राईफ्रूट्स से बनी मिठाइयां दो हजार रुपये किलो हैं तो स्वर्ण भस्म और पिश्ता वाली मिठाई की कीमत 65 हजार रुपये किलो है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(61)2.png" alt="MUSKAN DIXIT (61)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">सप्रू मार्ग स्थित मिठाई के कारोबारी सुमित ने बताया कि सूरजमुखी बीज वाली मिठाई, ब्लूबेरी और कद्दू बीज की बर्फी, गुड़ से बनी मिठाइयां खूब पसंद की जा रही हैं। इनकी कीमत दो हजार रुपये प्रति किलो तक है। स्वर्ण भस्म, पिस्ता और चिलगोजा से बनी ''गोल्ड मिठाई'' भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहीं है जिनकी कीमत 65 हजार रुपये प्रति किलो तक है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(62)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (62)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<h4><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">गिफ्ट पैकिंग की रेंज</span></strong></h4>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">मिठाई और बेकरी गिफ्ट पैक की कीमत 200 रुपये से शुरू होकर 21 हजार रुपये तक है। ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्प चुन रहे हैं। 350 से अधिक गिफ्टिंग विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। मिठाईयों की दुकानों पर बटरकप बंगला मैकरॉन, केक, इंडियन मिठाई व कॉर्पोरेट हैम्पर, कुकीज, बिस्किट और चॉकलेट गिफ्ट पैक, प्रीमियम मिठाई और हैम्पर रेंज उपलब्ध है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(63)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (63)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<h4><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">बेकरी उत्पादों के साथ मोटे अनाज के बिस्किट भी</span></strong></h4>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">बेकरी उत्पादों की मांग में 30–40 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। बेकरी मालिक बताते हैं कि सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते बेकरी गिफ्टिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। दुकान पर मिलेट्स बिस्किट, प्रीमियम कुकीज और सॉल्टी सरप्राइज जैसे हेल्दी गिफ्ट आइटम्स खूब पसंद किए जा रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(64)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (64)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<h4><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">पारंपरिक मिठाइयों का भी जलवा बरकरार</span></strong></h4>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">मिठाई विशेषता कीमत (प्रति किलो)</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">काजू बर्फी प्रीमियम ड्रायफ्रूट बेस 1,400 से शुरू</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">बादाम/पिस्ता बर्फी शुद्ध घी व मेवा से बनी 3,000 –4,000 रुपये</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनवी मलाई गिलौरी 700 से 900 रुपये</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-10/muskan-dixit-(65)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (65)" width="1280" height="720"></img></span></p>
<h4><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">ट्रेंडिंग हैम्पर में क्या है शामिल</span></strong></h4>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-इम्पोर्टेड चॉकलेट</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">-ड्रायफ्रूट (काजू, बादाम, चिलगोजा)</span></p>
<p><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">-मैकरॉन और प्रीमियम कुकीज</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>फोटो गैलरी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Cooking Recipes</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/556587/diwali-2025--gold-sweets-cost-%E2%82%B965-000-per-kg--seed-sweets-for-%E2%82%B92-000--sweets--hampers-and-bakery-items-are-a-rage-in-the-market-this-diwali</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Oct 2025 10:50:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘नया उत्तर प्रदेश’ देखने की अपील.. विश्व पर्यटन दिवस की सीएम ने दी बधाई, बताया मानवता को जोड़ने वाला उत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों और पर्यटकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘विश्व पर्यटन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। पर्यटन, संस्कृतियों का साक्षात्कार और मानवता को जोड़ने वाला उत्सव है।” </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-09/untitled-design-(7)21.jpg" alt="Untitled design (7)" width="1200" height="1080" /></p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “अपनी बहुरंगी संस्कृति, आध्यात्मिक धरोहर और ‘अतिथि देवो भवः’ के शाश्वत संदेश के साथ उत्तर प्रदेश विश्व को आमंत्रित कर रहा है... आइए, ‘नया उत्तर प्रदेश’ देखिए!’’ उन्होंने इस पोस्ट के साथ दो मिनट से अधिक का एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें अयोध्या धाम, ब्रज तीर्थ,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/554544/appeal-to-see--new-uttar-pradesh----cm-congratulates-world-tourism-day--calls-it-a-festival-that-unites-humanity"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(6)20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों और पर्यटकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘विश्व पर्यटन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। पर्यटन, संस्कृतियों का साक्षात्कार और मानवता को जोड़ने वाला उत्सव है।” </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-09/untitled-design-(7)21.jpg" alt="Untitled design (7)" width="1920" height="1080"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “अपनी बहुरंगी संस्कृति, आध्यात्मिक धरोहर और ‘अतिथि देवो भवः’ के शाश्वत संदेश के साथ उत्तर प्रदेश विश्व को आमंत्रित कर रहा है... आइए, ‘नया उत्तर प्रदेश’ देखिए!’’ उन्होंने इस पोस्ट के साथ दो मिनट से अधिक का एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें अयोध्या धाम, ब्रज तीर्थ, प्रयागराज कुंभ और प्रदेश के अन्य भव्य पर्यटन स्थलों को दर्शाया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में मुख्यमंत्री ने पर्यटन के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया और विकास के साथ विरासत को जोड़ते हुए प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख करते हुए एक बार फिर सभी को विश्व पर्यटन दिवस की शुभकामनाएं दीं। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े :  <a href="https://www.amritvichar.com/article/554538/the-seventh-day-of-the-gomti-book-festival-was-filled-with-stories--poetry-and-music----the-audience-was-mesmerized-by-the-mushaira-during-the-cultural-evening">कहानी, शायरी और संगीत से सजा गोमती पुस्तक महोत्सव का सातवां दिन...सांस्कृतिक शाम में मुशायरे से श्रोता मंत्रमुग्ध </a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Cooking Recipes</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>रंगोली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/554544/appeal-to-see--new-uttar-pradesh----cm-congratulates-world-tourism-day--calls-it-a-festival-that-unites-humanity</link>
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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 12:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आइए पीते हैं 'शीर-खुरमा' वाली चाय</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>देश में कोई ही ऐसा बंदा होगा जो चाय नहीं पीता हो, दुनिया में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा पीने वाली अगर कोई चीज है तो वह चाय ही है। चाय के लिए कई बार चाय लवर्स की दीवानगी इतनी बढ़ जाती है कि वो लोग चाय के लिए रात-दिन भी नहीं देखते। </p>
<p>चाय के शौकीनों के लिए इसका प्यार इतना ज्यादा होता है कि वो तरह-तरह की चाय ट्राई किया करते हैं। चॉक्लेट चाय, मासाला चाय, इलायची चाय, टर्किश चाय आदि, लेकिन जिस चाय के बारे में हम बात करने वाले हैं वह कुछ और नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/492170/lets-drink-sheer-korma-tea-people-are-requested-not-to-put"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-09/सावन-2024---2024-09-14t154340.476.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>देश में कोई ही ऐसा बंदा होगा जो चाय नहीं पीता हो, दुनिया में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा पीने वाली अगर कोई चीज है तो वह चाय ही है। चाय के लिए कई बार चाय लवर्स की दीवानगी इतनी बढ़ जाती है कि वो लोग चाय के लिए रात-दिन भी नहीं देखते। </p>
<p>चाय के शौकीनों के लिए इसका प्यार इतना ज्यादा होता है कि वो तरह-तरह की चाय ट्राई किया करते हैं। चॉक्लेट चाय, मासाला चाय, इलायची चाय, टर्किश चाय आदि, लेकिन जिस चाय के बारे में हम बात करने वाले हैं वह कुछ और नहीं बल्की शीर-खुरमा वाली चाय है। जी हां सोशल मीडिया पर यह वीडियो काफी तेजी से ट्रेंड हो रहा है</p>
<p>यूं तो चाय के साथ तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट होते रहते हैं। इसकी शुरुआत इसलिए हुई थी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों में इसका क्रेज फैलाया जा सके, लेकिन कई बार लोग कुछ ऐसा कर देते हैं। जो समझ ही नहीं आता कि चाय पी जाए या फिर हमेशा के लिए छोड़ दी जाए। एक ऐसा ही वीडियो इन दिनों लोगों के बीच खूब वायरल हो रहा है। जहां एक शख्स ने ‘शीर-खुरमा’ की ही चाय बना दी। </p>
<blockquote class="instagram-media"><strong><a href="https://www.instagram.com/reel/C_m555SJ7tY/?utm_source=ig_web_button_share_sheet">https://www.instagram.com/reel/C_m555SJ7tY/?utm_source=ig_web_button_share_sheet</a></strong></blockquote>
<p>

</p>
<p>ये वायरल वीडियो अमृतसर का है, जहां पर सिर्फ एक कप चाय की कीमत 100 रुपये की है। 100 रुपये कीमत सुन कर हैरान हो गए होंगे ना, क्योंकि सामान्य तौर पर चाय की कीमत 100 रुपये नहीं होती है। कीमत अधिक होने पर अंदाजा लगाया जाता है कि शायद बहुत ही जबरदस्त चाय होगी। बता दें इस चाय में सिर्फ चाय पत्ती, दूध और चीनी नहीं पड़ता है, बल्कि चायवाला बादाम, गुलाब की पंखुड़ियां, मक्खन और इलायची डालकर तैयार करता है। इस चाय की सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात यह है कि इसमें चायपत्ति ही नहीं पड़ती है।</p>
<p>यह वीडियो इंस्टाग्राम पर फूड व्लॉगर सुकृत जैन ने शेयर किया है। जिसे 18 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं और कमेंट करके अपने-अपने एक्सपीरिएंस शेयर कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि इसको चाय क्यों बोलते हैं...बादाम शेक घोषित क्यों नहीं कर देते हैं।’ वहीं दूसरे ने लिखा कि यह क्या जहर बना दिए हो बे।’ एक अन्य ने लिखा कि थोड़ा सा पेट्रोल भी डाल देते तो मजा ही आ जाता।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेः <a title="Hindi Diwas 2024: स्टेटस सिंबल पर फिट नहीं पुरानी हिन्दी, अब हिन्दुस्तानी भाषा का है चलन" href="https://www.amritvichar.com/article/492135/hindi-diwas-2024">Hindi Diwas 2024: स्टेटस सिंबल पर फिट नहीं पुरानी हिन्दी, अब हिन्दुस्तानी भाषा का है चलन</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Cooking Recipes</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Sep 2024 15:45:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>कैरेमल पॉपकॉर्न की जगह बनाएं उसका हेल्दी विकल्प  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> मूवी थिएटर में मिलने वाले पॉपकॉर्न बच्चों से लेकर बूढ़े लगभग सबको पसंद होते हैं। कभी-कभी घर में भी हमें कैरेमल पॉपकॉर्न खाने का मन करता है। लेकिन विधि नहीं पता होती है। आज हम आपको बताएंगे की मूवी थिएटर वाले कैरेमल पॉपकॉर्न से भी हेल्दी विकल्प के बारे में। ये तरीका बहुत ही आसान और फास्ट है। घर में बनाई हुई ये रेसेपी बाजार के पॉपकॉर्न से कई गुना ज्यादा हेल्दी और टेस्टी है। </p>
<p>ये रेसेपी का नाम है जैगराइजड मखाने। घर में सुपरहेल्दी जैगराइजड मखाने बनाने के लिए आपको मात्र दो सामग्री चाहिए होगी। एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/391364/make-a-healthy-substitute-for-caramel-popcorn"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/hq720.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> मूवी थिएटर में मिलने वाले पॉपकॉर्न बच्चों से लेकर बूढ़े लगभग सबको पसंद होते हैं। कभी-कभी घर में भी हमें कैरेमल पॉपकॉर्न खाने का मन करता है। लेकिन विधि नहीं पता होती है। आज हम आपको बताएंगे की मूवी थिएटर वाले कैरेमल पॉपकॉर्न से भी हेल्दी विकल्प के बारे में। ये तरीका बहुत ही आसान और फास्ट है। घर में बनाई हुई ये रेसेपी बाजार के पॉपकॉर्न से कई गुना ज्यादा हेल्दी और टेस्टी है। </p>
<p>ये रेसेपी का नाम है जैगराइजड मखाने। घर में सुपरहेल्दी जैगराइजड मखाने बनाने के लिए आपको मात्र दो सामग्री चाहिए होगी। एक मखाना और दूसरा गुड़। तो सबसे पहले धीमी आंच में 1 चमच घी लेना है। फिर जब घी गरम हो जाए तो उसमें 25 ग्राम मखाने डाल दीजिए। एक मीन के लिए भूनिए फिर उसमें 2 चमच गुड़ का पाउडर डाल दीजिए। फिर जब वो अच्छे से पिघल कर उसमें घुल जाए तो उसको कढ़ाई से बाहर निकाल लीजिए। </p>
<p>इसको आप शाम की चाय के साथ स्नैक्स में ले सकते हैं या फिर ऑफिस में भी पैक करके ले जा सकते हैं। जितना चाहें आप इसे इन्जॉय बिना किसी गिलट के और बच्चों को भी दूध के साथ दे सकते हैं।    </p>
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<h6 class="tag_h1 node_title"><span style="color:rgb(224,62,45);background-color:rgb(255,255,255);"><strong>यह भी पढ़ें: हल्द्वानी: 2 साल से हैंडपंप खराब, बारिश का पानी पीने को मजबूर लोग</strong></span></h6>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>Cooking Recipes</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/391364/make-a-healthy-substitute-for-caramel-popcorn</link>
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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2023 18:28:31 +0530</pubDate>
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