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                <title>Tech News - Amrit Vichar</title>
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                <description>Tech News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आर्टेमिस-2 मिशन ने रचा इतिहास: चंद्रमा के सबसे दूर तक पहुंचकर अपोलो-13 का रिकॉर्ड तोड़ा, फार साइड का देखा मनोरम नजारा! </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ह्यूस्टन:</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्री सोमवार रात चंद्रमा के पिछले हिस्से से निकलकर पृथ्वी की ओर रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को देखा, जिसे पहले कभी इतने करीब से नहीं देखा गया था और मानव इतिहास में चंद्रमा के आसपास सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। करीब सात घंटे का यह सफर इस मिशन का सबसे खास हिस्सा रहा। </p>
<p style="text-align:justify;">अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम के बाद पहली बार नासा ने मनुष्यों को फिर से चंद्रमा पर भेजा। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577757/artemis-2-mission-creates-history--breaks-apollo-13-s-record-by-reaching-the-far-side-of-the-moon--shows-spectacular-views-of-the-far-side"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(8)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ह्यूस्टन:</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्री सोमवार रात चंद्रमा के पिछले हिस्से से निकलकर पृथ्वी की ओर रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को देखा, जिसे पहले कभी इतने करीब से नहीं देखा गया था और मानव इतिहास में चंद्रमा के आसपास सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। करीब सात घंटे का यह सफर इस मिशन का सबसे खास हिस्सा रहा। </p>
<p style="text-align:justify;">अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम के बाद पहली बार नासा ने मनुष्यों को फिर से चंद्रमा पर भेजा। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री हैं। इसका लक्ष्य अगले दो साल में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मनुष्य को भेजना है। आर्टेमिस-2 ने अपोलो 13 का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। साल 1970 में अपोलो 13 मिशन में 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय की गई थी, जिसे आर्टेमिस-2 मिशन के तहत पार कर लिया गया है। </p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/AIRNewsHindi/status/2041346465252233354?s=20">https://twitter.com/AIRNewsHindi/status/2041346465252233354?s=20</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन ने कहा, "बिना कोई उपकरण लगाए आंखों से चंद्रमा से जो दिख रहा है, वह रोमांचित करने वाला है। यह अविश्वसनीय है।" उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी को इस रिकॉर्ड को जल्द तोड़ना चाहिए। रिकॉर्ड तोड़ने के तुरंत बाद अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा पर दो नए गड्ढों (क्रेटर) के नाम रखने की अनुमति मांगी। उन्होंने एक का नाम अपने कैप्सूल के नाम पर 'इंटेग्रिटी' और दूसरे का नाम कमांडर रीड वाइजमैन की पत्नी की याद में 'कैरल' रखने का प्रस्ताव दिया, जिनका 2020 में कैंसर से निधन हो गया था। इस दौरान वाइजमैन भावुक हो गए और रो पड़े। सभी चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने एक-दूसरे को गले लगाया। बाद में वाइजमैन ने कहा, "यहां से नजारा बहुत शानदार है।" </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया कि उन्होंने एक ही तस्वीर में चंद्रमा और पृथ्वी दोनों को कैद किया और ह्यूस्टन में वैज्ञानिकों को लगातार जानकारी देते रहे। पायलट विक्टर ग्लोवर ने बताया कि कुछ पहाड़ियां इतनी चमकदार दिख रही थीं, जैसे उन पर बर्फ जमी हो। </p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 10:10:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी में एयरटेल ने किया नेटवर्क का विस्तार,  5जी नेटवर्क से मिलेगी इंटरनेट को सुपरसोनिक स्पीड</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने एक वर्ष में पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4300 से अधिक नई 5जी साइट स्थापित करके अपने नेटवर्क का विस्तार किया है। कंपनी बयान के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी 48 जिलों में यह विस्तार किया गया। प्रतिदिन औसतन 12 नई साइट जोड़ते हुए एयरटेल ने 'हाई-स्पीड कनेक्टिविटी' का तेजी से विस्तार किया। इससे ग्राहकों को काम, शिक्षा, मनोरंजन और डिजिटल भुगतान के लिए निरंतर एवं स्थिर सेवाएं मिलेंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">भारती एयरटेल के पूर्वी उत्तर प्रदेश के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित गुप्ता ने कहा, '' लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, अयोध्या और झांसी सहित</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577696/airtel-expands-network-in-up--5g-network-to-deliver-supersonic-internet-speeds"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/वायरल-तस्वीर-(29)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने एक वर्ष में पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4300 से अधिक नई 5जी साइट स्थापित करके अपने नेटवर्क का विस्तार किया है। कंपनी बयान के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी 48 जिलों में यह विस्तार किया गया। प्रतिदिन औसतन 12 नई साइट जोड़ते हुए एयरटेल ने 'हाई-स्पीड कनेक्टिविटी' का तेजी से विस्तार किया। इससे ग्राहकों को काम, शिक्षा, मनोरंजन और डिजिटल भुगतान के लिए निरंतर एवं स्थिर सेवाएं मिलेंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">भारती एयरटेल के पूर्वी उत्तर प्रदेश के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित गुप्ता ने कहा, '' लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, अयोध्या और झांसी सहित सभी जिलों में ग्राहक इस विस्तारित नेटवर्क का सीधे लाभ उठाएंगे। इससे हाई-स्पीड 5जी सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">इससे शहरी एवं ग्रामीण बाजारों में नागरिकों, छात्रों, सूक्ष्म उद्यमियों और सरकारी संस्थानों की दैनिक डिजिटल जरूरतों को पूरा करने में सुविधा मिलेगी।'' उन्होंने कहा, '' पूर्वी उत्तर प्रदेश एयरटेल के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है और यह विस्तार पूरे क्षेत्र में डिजिटल संपर्क को मजबूत करने को लेकर हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पिछले एक वर्ष में हमने 4,300 से अधिक नई 5जी साइट स्थापित की हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/577693/called-an-ak-47-a--toy-----described-a-grenade-as--perfume---police-personnel-who-gave-a-clean-chit-to-a-terror-suspect-in-bijnor-suspended"><span class="t-red">एके-47 को खिलौना' ...ग्रेनेड को बताया परफ्यूम, </span>बिजनौर में आतंकी को क्लीन चिट देने वाले पुलिसकर्मी निलंबित </a></h5>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577696/airtel-expands-network-in-up--5g-network-to-deliver-supersonic-internet-speeds</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:12:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AI से मिनटों में बनाएं प्रोफेशनल वीडियो, Google अकाउंट वालों को मिल रही ये खास सुविधा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>लखनऊः</strong> Google ने अपने AI-पावर्ड वीडियो टूल Google Vids को अब पूरी तरह खोल दिया है। किसी भी Google अकाउंट वाले व्यक्ति बिना एक पैसा खर्च किए हाई-क्वालिटी वीडियो क्लिप्स बना सकता है। अब घंटों की एडिटिंग या प्रोफेशनल स्किल्स की जरूरत नहीं बस अपनी कल्पना लिखिए या फोटो अपलोड कीजिए, और वीडियो तैयार!</p>
<h3><strong>AI से वीडियो बनाना अब सुपर आसान</strong></h3>
<p>Google ने अपने लेटेस्ट Veo 3.1 मॉडल को Google Vids में इंटीग्रेट कर दिया है। अब आप साधारण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट लिखकर, या एक फोटो अपलोड करके केवल सेकंडों में शानदार वीडियो क्लिप्स (लगभग 8 सेकंड लंबी) बना सकते हैं।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577509/create-professional-videos-in-minutes-with-ai--google-account-holders-get-this-special-feature"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(61).png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः</strong> Google ने अपने AI-पावर्ड वीडियो टूल Google Vids को अब पूरी तरह खोल दिया है। किसी भी Google अकाउंट वाले व्यक्ति बिना एक पैसा खर्च किए हाई-क्वालिटी वीडियो क्लिप्स बना सकता है। अब घंटों की एडिटिंग या प्रोफेशनल स्किल्स की जरूरत नहीं बस अपनी कल्पना लिखिए या फोटो अपलोड कीजिए, और वीडियो तैयार!</p>
<h3><strong>AI से वीडियो बनाना अब सुपर आसान</strong></h3>
<p>Google ने अपने लेटेस्ट Veo 3.1 मॉडल को Google Vids में इंटीग्रेट कर दिया है। अब आप साधारण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट लिखकर, या एक फोटो अपलोड करके केवल सेकंडों में शानदार वीडियो क्लिप्स (लगभग 8 सेकंड लंबी) बना सकते हैं। हर महीने सामान्य Google अकाउंट यूजर्स को 10 फ्री वीडियो जनरेशन की सुविधा मिलेगी।</p>
<p>यह फीचर खासतौर पर YouTube Shorts, Instagram Reels, छोटे बिजनेस प्रमोशन, ग्रीटिंग वीडियो या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।</p>
<h3><strong>AI से अपना खुद का म्यूजिक भी बनाएं</strong></h3>
<p>वीडियो को और आकर्षक बनाने के लिए Google ने Lyria 3 मॉडल भी जोड़ा है। अब आप अपने वीडियो के मूड के हिसाब से कस्टम बैकग्राउंड म्यूजिक जेनरेट कर सकते हैं। दिवाली ग्रीटिंग हो, ट्रैवल व्लॉग हो या प्रोडक्ट प्रमोशन वीडियो हर तरह के कंटेंट के लिए परफेक्ट म्यूजिक तैयार हो जाएगा। सबसे अच्छी बात: यह म्यूजिक रॉयल्टी-फ्री होगा, इसलिए कॉपीराइट की कोई टेंशन नहीं।</p>
<h3><strong>बिना कैमरे के बोलते AI अवतार</strong></h3>
<p>Google Vids में अब कस्टमाइजेबल AI अवतार का फीचर भी आ गया है। ये डिजिटल कैरेक्टर:<br />- आपकी स्क्रिप्ट पढ़कर बोल सकते हैं,<br />- प्रोडक्ट या ऑब्जेक्ट्स के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं,<br />- और बैकग्राउंड को अपनी जरूरत के मुताबिक बदल सकते हैं।</p>
<p>जो लोग कैमरे के सामने नहीं आना चाहते लेकिन ट्यूटोरियल, एक्सप्लेनर या इंफॉर्मेटिव वीडियो बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह फीचर बेहद उपयोगी है।</p>
<h3><strong>रिकॉर्डिंग और शेयरिंग अब और आसान</strong></h3>
<p>- नए Chrome एक्सटेंशन की मदद से ब्राउजर में सीधे स्क्रीन + वेबकैम रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।<br />- वीडियो तैयार होते ही इसे YouTube पर डायरेक्ट शेयर करें — बिना डाउनलोड किए।<br />- वीडियो डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहता है, जब तक आप उसे पब्लिक न करें।</p>
<h3><strong>भारत के क्रिएटर्स, स्टूडेंट्स और बिजनेस के लिए क्यों खास?</strong></h3>
<p>भारत में शॉर्ट वीडियो कंटेंट का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। यूट्यूबर्स, फ्रीलांसर, छोटे बिजनेस ओनर्स और स्टूडेंट्स अब महंगे सॉफ्टवेयर या कॉम्प्लिकेटेड एडिटिंग टूल्स के बिना प्रोफेशनल लुक वाले वीडियो आसानी से बना सकते हैं।</p>
<p>Google Vids एक फ्री, आसान और पावरफुल टूल बनकर आया है जो क्रिएटिविटी को बढ़ावा देगा और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन को हर किसी की पहुंच में लाएगा। अब सिर्फ Google अकाउंट से लॉगिन करें और vids.google.com या Workspace के जरिए शुरू करें।</p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577509/create-professional-videos-in-minutes-with-ai--google-account-holders-get-this-special-feature</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 16:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओला इलेक्ट्रिक ने रोडस्टर एक्स+ 4.5 kWh के लिए हासिल किया PLI प्रमाणन, स्वदेशी ईवी को बढ़ावा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>ओला इलेक्ट्रिक की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल रोडस्टर एक्स+ (11 किलोवाट व 4.5 केडब्ल्यूएच) को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत पात्रता आकलन आवश्यकताओं के अनुपालन का प्रमाणन मिल गया है। कंपनी ने शुक्रवार को बयान में बताया कि यह अनुपालन प्रमाणन ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (जीएआरसी) ने मोटर वाहन एवं उसके कलपुर्जों से जुड़ी पीएलआई योजना (पीएलआई-ऑटो स्कीम) के तहत जारी किया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बयान के अनुसार, इसके साथ ही रोडस्टर एक्स+ 4.5 केडब्ल्यूएच (किलोवाट प्रति घंटा), रोडस्टर खंड की पहली मोटरसाइकिल बन गई है जिसे पीएलआई प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल खंड में विस्तार की</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577390/ola-electric-secures-pli-certification-for-roadster-x--4-5-kwh--boosting-indigenous-evs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(27)1.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>ओला इलेक्ट्रिक की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल रोडस्टर एक्स+ (11 किलोवाट व 4.5 केडब्ल्यूएच) को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत पात्रता आकलन आवश्यकताओं के अनुपालन का प्रमाणन मिल गया है। कंपनी ने शुक्रवार को बयान में बताया कि यह अनुपालन प्रमाणन ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (जीएआरसी) ने मोटर वाहन एवं उसके कलपुर्जों से जुड़ी पीएलआई योजना (पीएलआई-ऑटो स्कीम) के तहत जारी किया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बयान के अनुसार, इसके साथ ही रोडस्टर एक्स+ 4.5 केडब्ल्यूएच (किलोवाट प्रति घंटा), रोडस्टर खंड की पहली मोटरसाइकिल बन गई है जिसे पीएलआई प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल खंड में विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(28)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (28)" width="1280" height="720"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ओला इलेक्ट्रिक के प्रवक्ता ने कहा, ''हमारी रोडस्टर एक्स+ 4.5 केडब्ल्यूएच को मिला पीएलआई प्रमाणन स्थानीयकरण को गहराई देने और पूरी तरह स्वदेशी ईवी परिवेश बनाने के हमारे प्रयासों की पुष्टि करता है। रोडस्टर श्रृंखला के माध्यम से हम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को अधिक ग्राहकों के लिए सुलभ बना रहे हैं और इस श्रेणी के विकास का नेतृत्व कर रहे हैं।'' </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कंपनी ने हाल ही में 4680 भारत सेल से संचालित अपनी मोटरसाइकिल रोडस्टर एक्स+ 9.1 केडब्ल्यूएच की कीमत में बड़ी कटौती की थी। गीगाफैक्ट्री में उत्पादन बढ़ने और लागत में कमी आने से इसकी कीमत 1,89,999 रुपये से घटाकर 1,29,999 रुपये कर दी गई है। यह मॉडल सीमित इकाइयों में और निर्धारित खरीद खिड़की के दौरान ही बेचा जाएगा। </div>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:40:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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            <item>
                <title> iPhone User के लिए बड़ा अपडेट : अब एक ही WhatsApp ऐप में चला पाएंगे दो अकाउंट, नए फीचर्स के साथ नया एक्सपीरियंस</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।  </strong>मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप ने कई नई सेवाएं शुक्रवार को पेश कीं। इनके तहत एप्पल आईफोन उपयोगकर्ता अब एक ही फोन पर दो खाते एक साथ चला सकेंगे। इसके अलावा तस्वीर संपादन और संदेश लिखने के लिए नए कृत्रिम मेधा (एआई) उपकरण भी जोड़े गए हैं। कंपनी ने कहा कि 'टू अकाउंट्स, वन फोन' सेवा जो पहले केवल एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध थी अब आईओएस पर भी शुरू की जा रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">व्हाट्सऐप ने अपने 'ब्लॉग पोस्ट' में कहा कि इस 'अपडेट' के बाद उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत एवं कामकाजी बातचीत के लिए दो अलग-अलग फोन रखने की</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576746/major-update-for-iphone-users--now-run-two-whatsapp-accounts-on-a-single-app%E2%80%94a-new-experience-with-new-features"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(6)17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।  </strong>मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप ने कई नई सेवाएं शुक्रवार को पेश कीं। इनके तहत एप्पल आईफोन उपयोगकर्ता अब एक ही फोन पर दो खाते एक साथ चला सकेंगे। इसके अलावा तस्वीर संपादन और संदेश लिखने के लिए नए कृत्रिम मेधा (एआई) उपकरण भी जोड़े गए हैं। कंपनी ने कहा कि 'टू अकाउंट्स, वन फोन' सेवा जो पहले केवल एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध थी अब आईओएस पर भी शुरू की जा रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">व्हाट्सऐप ने अपने 'ब्लॉग पोस्ट' में कहा कि इस 'अपडेट' के बाद उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत एवं कामकाजी बातचीत के लिए दो अलग-अलग फोन रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐप के नीचे वाले 'टैब' में दिखाई देने वाली 'प्रोफाइल' तस्वीर के जरिये उपयोगकर्ता सक्रिय खाते की पहचान कर सकेंगे। जनरेटिव यानी सृजन से जुड़े एआई के बढ़ते उपयोग के बीच व्हाट्सऐप ने मेटा एआई को सीधे 'चैट' में एकीकृत किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">उपयोगकर्ता अब किसी तस्वीर को भेजने से पहले तस्वीर में सुधार कर सकते हैं, अनचाहे तत्व हटा सकते हैं, पृष्ठभूमि बदल सकते हैं या अलग-अलग शैली लागू कर सकते हैं। एआई उपकरण से जुड़ी संभावित सुरक्षा चिंताओं पर कंपनी ने जोर देते हुए कहा कि उपयोगकर्ताओं की चैट ''पूरी तरह निजी'' रहेंगी। कंपनी ने यह भी कहा कि मेटा एआई सेवाएं सभी उपयोगकर्ताओं को तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाएंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ 'क्रॉस-प्लेटफॉर्म चैट ट्रांसफर' भी आसान बना दिया गया है। अब मंच आधिकारिक तौर पर आईओएस से एंड्रॉयड डिवाइस पर चैट हिस्ट्री (तस्वीर व वीडियो सहित) स्थानांतरित करने का समर्थन करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई सेवाओं में 'प्रेडिक्टिव स्टिकर' के सुझाव भी शामिल हैं, जिसके तहत टाइप करते समय किसी इमोजी के स्थान पर सुझाया गया स्टिकर इस्तेमाल किया जा सकेगा। व्हाट्सऐप ने कहा कि ये नई सेवाएं चरणबद्ध तरीके से जारी किए जा रहे हैं और जल्द ही सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होंगे। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/576737/boney-kapoor-attends-jewar-airport-inauguration--says--%22delighted-to-participate-in-the-event--international-film-city-will-soon-take-shape%22"><span class="t-red">जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन में शामिल होने आये बोनी कपूर, </span>बोले- कार्यक्रम में शामिल होकर खुश, जल्द आकार लेगी इंटरनेशनल फिल्म सिटी</a></h5>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 13:15:54 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                <title> एजेंटिक ब्राउजर :  इंटरनेट का नया ‘स्मार्ट सारथी’</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से बस इतना कहें- “अगले महीने मुंबई जाने के लिए सबसे सस्ती फ्लाइट ढूंढकर टिकट बुक कर दो” और आपका ब्राउजर खुद अलग-अलग वेबसाइटों पर जाए, कीमतों की तुलना करे और आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प चुन ले। कुछ समय पहले तक इस तरह की बातें साइंस-फिक्शन जैसी लगती थीं, लेकिन आज की डिजिटल दुनिया में यह तेजी से वास्तविकता बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को “एजेंटिक ब्राउजर” कहा जा रहा है- ऐसे ब्राउजर जो केवल वेबसाइट दिखाते नहीं, बल्कि उपयोगकर्ता की ओर से इंटरनेट पर काम भी कर सकते हैं। अब</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576632/agentic-browser--the-internet%E2%80%99s-new-%E2%80%98smart-companion%E2%80%99"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(29)15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से बस इतना कहें- “अगले महीने मुंबई जाने के लिए सबसे सस्ती फ्लाइट ढूंढकर टिकट बुक कर दो” और आपका ब्राउजर खुद अलग-अलग वेबसाइटों पर जाए, कीमतों की तुलना करे और आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प चुन ले। कुछ समय पहले तक इस तरह की बातें साइंस-फिक्शन जैसी लगती थीं, लेकिन आज की डिजिटल दुनिया में यह तेजी से वास्तविकता बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को “एजेंटिक ब्राउजर” कहा जा रहा है- ऐसे ब्राउजर जो केवल वेबसाइट दिखाते नहीं, बल्कि उपयोगकर्ता की ओर से इंटरनेट पर काम भी कर सकते हैं। अब तक ब्राउजर एकखिड़की की तरह थे, जिनसे हम वेब देखते थे, लेकिन अब वे एक तरह के डिजिटल सहायक या प्रतिनिधि बनने की ओर बढ़ते दिखने लगे हैं। इंटरनेट का अनुभव “खुद खोजने और क्लिक करने” से बदलकर “लक्ष्य बताने और काम करवाने” की दिशा में बढ़ रहा है।- डॉ. शिवम भारद्वाज </p>
<h5 style="text-align:justify;">क्लिक से उद्देश्य तक: ब्राउजिंग का नया मॉडल</h5>
<p style="text-align:justify;">अब तक हम Chrome, MozillaFirefox, Safari, Edge जैसे ब्राउजर का इस्तेमाल मुख्यतः वेबसाइट देखने के लिए करते रहे हैं। कोई जानकारी चाहिए तो सर्च करना पड़ता है, कई लिंक खोलने पड़ते हैं और ज़रूरी फॉर्म या भुगतान जैसी प्रक्रियाएं खुद पूरी करनी पड़ती हैं। एजेंटिक ब्राउजर इस पूरी प्रक्रिया को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें लगे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित एजेंट उपयोगकर्ता के उद्देश्य को समझते हैं और फिर उसी के आधार पर इंटरनेट पर काम करते हैं। वे वेबसाइट खोलते हैं, जानकारी इकट्ठा करते हैं, तुलना करते हैं और कई बार पूरी प्रक्रिया भी पूरी कर देते हैं। सरल शब्दों में कहें तो इंटरनेट का अनुभव अब केवल जानकारी खोजने तक सीमित नहीं रह रहा, बल्कि डिजिटल काम करवाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">रोजमर्रा के काम कैसे बदलेंगे </h5>
<p style="text-align:justify;">अभी इंटरनेट पर किसी साधारण काम के लिए भी उपयोगकर्ता को कई चरणों से गुजरना पड़ता है। वेबसाइट ढूंढना, अलग-अलग विकल्प देखना, जानकारी पढ़ना और फिर निर्णय लेना। एजेंटिक ब्राउजर इंटरनेट पर बिखरे हुए कामों को एक क्रम में जोड़कर इस पूरी प्रक्रिया को सरल और संगठित बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई उपयोगकर्ता ब्राउजर से कहे कि “मुझे 2000 रुपये से कम कीमत के नीले रंग के रनिंग शूज चाहिए जिनकी रेटिंग चार स्टार से ऊपर हो,” तो एजेंटिक ब्राउज़र अलग-अलग ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर जाकर विकल्प खोज सकता है और सबसे उपयुक्त उत्पाद सामने रख सकता है। इसी तरह यात्रा की योजना बनाते समय यह विभिन्न एयरलाइन और होटल वेबसाइटों से जानकारी लेकर कीमतों और सुविधाओं की तुलना कर सकता है।किसी लंबी रिपोर्ट या शोधपत्र को पढ़ने के बजाय ब्राउज़र उसका सार और मुख्य बिंदु तैयार कर सकता है। सरकारी सेवाओं या ऑनलाइन प्रक्रियाओं में भी यह तकनीक मददगार हो सकती है—जैसे ट्रेन टिकट बुक करना, बिल जमा करना या किसी आवेदन की प्रक्रिया पूरी करना, जिनमें अक्सर कई चरण होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यह प्रवृत्ति आगे बढ़ती है, तो इंटरनेट का अनुभव भी बदल सकता है। उपयोगकर्ता हर क्लिक खुद करने के बजाय केवल अपना लक्ष्य बताएगा और ब्राउज़र उस तक पहुँचने के लिए जरूरी डिजिटल प्रक्रियाओं को क्रमबद्ध कर देगा। इस तरह वेब धीरे-धीरे केवल वेबसाइटों का संग्रह नहीं रहेगा, बल्कि एक ऐसेडिजिटल कार्य-परिसरमें बदल सकता है जहाँ खोज, विश्लेषण और कार्रवाई एक ही जगह पर संभव हों।</p>
<h5 style="text-align:justify;">तकनीकी कंपनियों के बीच नई दौड़</h5>
<p style="text-align:justify;">    एजेंटिक ब्राउजर ने टेक कंपनियों के बीच एक नई होड़ छेड़ दी है। ब्राउजर अब केवल इंटरफेस नहीं, बल्कि एक्जीक्यूशन लेयर बन रहा है, जो आपकी डिजिटल पहचान के नाम पर फैसले ले सकता है और लेन-देन भी कर सकता है।<br />    कुछ साल पहले तक ब्राउज़र बाज़ार में क्रोम, मोजिला फायर फॉक्स, सफारी और एज जैसे नाम ही हावी थे, अब हर दिग्गज कंपनी चाहती है कि इंटरनेट पर उपयोगकर्ता जो भी करे, उसका पहला और आखिरी साथी वही ब्राउजर हो। ओपेन एआई का चैट-जीपीटी एटलस एड्रेस बार की जगह एआई को बैठाकर ब्राउजर की पारंपरिक परिभाषा बदल देता है। यह एजेंट मोड में खुद वेबसाइटों पर जाकर जानकारी जुटा सकता है, तुलना कर सकता है और कई मामलों में फॉर्म भरने व बुकिंग तक की प्रक्रिया संभाल सकता है। गूगल क्रोम अपने उपयोगकर्ताओं तक जेमिनी आधारित आटो ब्राउज के जरिए यह दिखाना चाहता है कि वही पुराना ब्राउजर अब नए दिमाग के साथ लौट आया है, जहां सारांश, शोध और डेटा विश्लेषण सब कुछ ब्राउजर के भीतर होता है।<br />    इसी दौड़ में Perplexity का Comet भी है। एआई नेटिव यह ब्राउजर Comet Assistant के माध्यम से अलग-अलग वेबसाइटों के बीच नेविगेट कर जानकारी इकट्ठा करता है, कई स्रोतों से डेटा जोड़कर सुझाव देता है और हाल के अपडेट्स के बाद उपयोगकर्ता की अनुमति लेकर कुछ बहुचरणीय ऑनलाइन प्रक्रियाओं को भी अपने आप व्यवस्थित कर सकता है। Microsoft Edge का Copilot Mode Windows, Office और क्लाउड सेवाओं को जोड़कर ब्राउजर को पूरे डिजिटल कार्यप्रवाह का सहायक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।<br />    Opera Neon और The Browser Company का Dia जैसे नए खिलाड़ी पूरी तरह एआई संचालित इंटरफेस, ऑटोमेटेड टैब मैनेजमेंट और संदर्भ आधारित नेविगेशन जैसे प्रयोगों के जरिए इस दौड़ को और तेज कर रहे हैं। चेहरे भले अलग-अलग हों, लक्ष्य एक ही है। आपके रोजमर्रा के डिजिटल कामों की रस्सियां अपने हाथ में लेना।</p>
<h5 style="text-align:justify;">भारत के लिए इसका महत्व</h5>
<p style="text-align:justify;">भारत जैसे देश में एजेंटिक ब्राउज़र का महत्व और भी बढ़ सकता है। यहाँ करोड़ों लोग इंटरनेट का उपयोग तो करते हैं, लेकिन जटिल वेबसाइटों और ऑनलाइन प्रक्रियाओं से अक्सर घबराते हैं।यदि ब्राउज़र उपयोगकर्ता की भाषा में बातचीत कर सके और उसके लिए आवश्यक काम कर सके, तो यह डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ बना सकता है। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में बातचीत करने वाले एजेंटिक ब्राउज़र उन लोगों के लिए इंटरनेट को आसान बना सकते हैं जो अभी तकनीकी रूप से बहुत सहज नहीं हैं।छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए यह तकनीक एक तरह काडिजिटल साथीबन सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">सुविधा के साथ चुनौतियां भी</h5>
<p style="text-align:justify;">हर नई तकनीक की तरह एजेंटिक ब्राउज़र के साथ भी कुछ चिंताएँ जुड़ी हुई हैं।सबसे बड़ा सवालडेटा गोपनीयताका है। क्योंकि ब्राउज़र उपयोगकर्ता की ओर से काम करेगा, उसे उसकी पसंद, व्यवहार और कई बार संवेदनशील जानकारी तक पहुँच हो सकती है। इसलिए सुरक्षा और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">जितना अधिक अधिकार हम ब्राउज़र एजेंट को देंगे, उतनी ही गहरी हमारी निर्भरता और जोखिम दोनों होंगे। चूँकि ये एजेंट हमारी पहचान के नाम पर वेबसाइटों पर कार्रवाई करते हैं, गलत कॉन्फ़िगरेशन या साइबर हमले की स्थिति में आर्थिक धोखाधड़ी, डेटा चोरी और “स्वचालित” दुरुपयोग की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एजेंटिक ब्राउज़र यदि स्कैमर्स के नियंत्रण में आ गये तो बड़े पैमाने पर ठगी के उपकरण भी बन सकते हैं; खासकर प्रॉम्प्ट इंजेक्शन, मेमोरी मैनिप्युलेशन और क्रॉस सेशन अटैक जैसे बड़े खतरे दरकिनार नहीं किए जा सकते। इसके अलावा यह भी सवाल उठता है कि क्या हम धीरे-धीरे इतनी स्वचालित तकनीक पर निर्भर हो जाएंगे कि खुद जानकारी खोजने की आदत कम हो जाएगी। भारत के संदर्भ में एजेंटिक ब्राउज़र का उभार एक नई नीतिगत चुनौती भी प्रस्तुत करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम 2023 अभी पूरी तरह लागू हो रहा है, और एजेंटिक ब्राउज़र जैसी तकनीक इसकी सीमाओं को परीक्षण में डालेगी। जब कोई एआई ब्राउज़र उपयोगकर्ता की ओर से स्वचालित रूप से फॉर्म भरता है, सेवाएँ बुक करता है और डेटा साझा करता है, तो "सहमति" (consent) की अवधारणा धुंधली हो जाती है। DPDP अधिनियम के अंतर्गत डेटा फिड्यूशरी की जवाबदेही स्पष्ट है, लेकिन एजेंटिक ब्राउज़र इस जवाबदेही की श्रृंखला को जटिल बनाते हैं। भारतीय नीति–निर्माताओं को इस तकनीक के व्यापक प्रसार से पहले स्पष्ट नियामक ढाँचा तैयार करना होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">भविष्य की दिशा</h5>
<p style="text-align:justify;">यह स्पष्ट है कि ब्राउज़र तकनीक एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस प्रकार सर्च इंजन ने वेब को व्यवस्थित किया और स्मार्टफोन ने इंटरनेट को हर व्यक्ति की जेब तक पहुँचाया, उसी प्रकार एजेंटिक ब्राउज़र इंटरनेट को अधिक बुद्धिमान और अधिक स्वचालित अनुभव में बदल सकते हैं। भविष्य में ब्राउज़र केवल वेबसाइट देखने का माध्यम नहीं रहेंगे, बल्कि वे ऐसे प्लेटफ़ॉर्म बनेंगे जहाँ खोज, विश्लेषण, संवाद और निर्णय–सहायता एक ही स्थान पर उपलब्ध हों,<br />लेकिन इस परिवर्तन की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीकी कंपनियाँ, नीति–निर्माता और उपयोगकर्ता मिलकर इस नई तकनीक को किस प्रकार आकार देते हैं। क्योंकि इंटरनेट का अगला इंटरफेस निश्चित रूप से एजेंटिक होगा पर यह अभी तय होना बाकी है कि वह उपयोगकर्ता को अधिक स्वतंत्र बनाएगा या डिजिटल दुनिया के नए द्वारपाल तैयार करेगा।</p>]]>
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                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 14:22:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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            <item>
                <title>2035 तक भारत सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर: 300 अरब डॉलर बाजार, 60% बढ़ेगा लोकल प्रोडक्शन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई), मोटर वाहन क्षेत्र और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">लेखा एवं परामर्श कंपनी डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 'टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों का आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 प्रतिशत से अधिक</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575639/india-to-be-self-reliant-in-semiconductors-by-2035---300-billion-market--local-production-to-grow-by-60"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(65)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई), मोटर वाहन क्षेत्र और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">लेखा एवं परामर्श कंपनी डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 'टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों का आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 प्रतिशत से अधिक मांग को पूरा कर सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 45-50 अरब डॉलर के बीच आंका गया है। पिछले तीन वर्ष में इसकी वार्षिक वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत रही है। एआई, मोटर वाहन, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के दम पर बाजार 2030 तक 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन, मोटर वाहन, कंप्यूटिंग व डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र 2035 तक देश की कुल सेमीकंडक्टर मांग का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनेंगे। अब तक इस क्षेत्र में 10 स्वीकृत परियोजनाओं के जरिये 19 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया है। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, अगले पांच वर्ष में इस उद्योग में 50 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आने का अनुमान है जबकि 2030 से 2035 के बीच 75-80 अरब डॉलर का निवेश और हो सकता है जिससे पूरे परिवेश का विस्तार होगा। इस विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा। 2035 तक इस क्षेत्र में करीब 20 लाख नौकरियां उत्पन्न होने का अनुमान है जिनमें 30 प्रतिशत विनिर्माण, 30 प्रतिशत डिजाइन सेवाओं और 40 प्रतिशत अन्य मूल्य श्रृंखला गतिविधियों में होंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में हालांकि आगाह किया गया है कि इस प्रगति को बनाए रखने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी होगा। इसके लिए नीतिगत ढांचे को समयबद्ध प्रोत्साहन योजना से आगे बढ़ाकर स्थायी राष्ट्रीय कार्यक्रम में बदलने और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। </p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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            <item>
                <title>खोज:  ऐसे हुआ फ्रिज  का आविष्कार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">रेफ्रिजरेटर का आविष्कार एक लंबी वैज्ञानिक यात्रा का परिणाम है, जिसमें कई आविष्कारकों का योगदान रहा है। भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कृत्रिम शीतलन तकनीक विकसित करने के प्रयास सदियों से होते रहे हैं। इस दिशा में पहला महत्वपूर्ण प्रयोग 1748 में स्कॉटलैंड के प्रोफेसर और चिकित्सक विलियम कुलेन ने किया। उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि किसी तरल को तेजी से वाष्पीकृत करने पर शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है। यद्यपि उनके प्रयोग का तत्काल व्यावहारिक उपयोग नहीं हो सका, फिर भी इसने आगे के शोध की नींव रखी। </p>
<p style="text-align:justify;">19 वीं शताब्दी में कई वैज्ञानिकों और आविष्कारकों</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574782/discovery--how-the-refrigerator-was-invented"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(3)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रेफ्रिजरेटर का आविष्कार एक लंबी वैज्ञानिक यात्रा का परिणाम है, जिसमें कई आविष्कारकों का योगदान रहा है। भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कृत्रिम शीतलन तकनीक विकसित करने के प्रयास सदियों से होते रहे हैं। इस दिशा में पहला महत्वपूर्ण प्रयोग 1748 में स्कॉटलैंड के प्रोफेसर और चिकित्सक विलियम कुलेन ने किया। उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि किसी तरल को तेजी से वाष्पीकृत करने पर शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है। यद्यपि उनके प्रयोग का तत्काल व्यावहारिक उपयोग नहीं हो सका, फिर भी इसने आगे के शोध की नींव रखी। </p>
<p style="text-align:justify;">19 वीं शताब्दी में कई वैज्ञानिकों और आविष्कारकों ने इस तकनीक को आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप आधुनिक यांत्रिक प्रशीतन प्रणाली का विकास संभव हुआ। 1834 में अमेरिकी आविष्कारक जैकब पर्किन्स ने पहला वाष्प-संपीड़न आधारित प्रशीतन उपकरण बनाया। बाद में जर्मन वैज्ञानिक कार्ल वॉन लिंडे ने गैसों को द्रवीकृत करने की प्रभावी विधि विकसित की, जिसने प्रशीतन तकनीक को नई दिशा दी। </p>
<p style="text-align:justify;">20 वीं शताब्दी की शुरुआत तक प्रशीतन तकनीक में इतनी प्रगति हो चुकी थी कि इसका उपयोग उद्योगों में होने लगा, विशेषकर शराब बनाने और मांस प्रसंस्करण कारखानों में। 1913 में अमेरिकी फ्रेड डब्ल्यू. वुल्फ ने पहला घरेलू इलेक्ट्रिक रेफ्रिजरेटर बनाया। इसके बाद 1918 में विलियम सी. ड्यूरेंट ने सेल्फ-कंटेन्ड कंप्रेसर वाला रेफ्रिजरेटर पेश किया, जिससे घरेलू रेफ्रिजरेटरों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ। प्रारंभिक दौर में इनकी कीमत काफी अधिक होने के कारण इन्हें विलासिता की वस्तु माना जाता था, लेकिन 1930 के दशक में सुरक्षित रेफ्रिजरेंट फ्रियोन के विकास के बाद घरेलू रेफ्रिजरेटर तेजी से लोकप्रिय हो गए।</p>
<h5 style="text-align:justify;">वैज्ञानिक के बारे में</h5>
<p style="text-align:justify;">फ्रेड डब्ल्यू. वुल्फ अमेरिका के एक आविष्कारक और इंजीनियर थे, उनका जन्म 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था। बचपन से ही उन्हें यांत्रिक उपकरणों और नई तकनीकों में गहरी रुचि थी। उस समय दुनिया तेजी से औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रही थी और इसी वातावरण ने उनके भीतर प्रयोग और आविष्कार की प्रवृत्ति को मजबूत किया। उनका यह आविष्कार आधुनिक रेफ्रिजरेटर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। बाद के वर्षों में अन्य वैज्ञानिकों और कंपनियों ने इसी तकनीक को और विकसित किया, जिससे आज के उन्नत रेफ्रिजरेटर संभव हो पाए।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 11:00:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                            </item>
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                <title> वैज्ञानिक फैक्ट:गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती हीलियम</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">हीलियम प्रकृति का एक अत्यंत रोचक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तत्व है। सामान्य परिस्थितियों में यह एक हल्की और निष्क्रिय गैस के रूप में जानी जाती है, लेकिन अत्यधिक कम तापमान पर इसके गुण आश्चर्यजनक रूप से बदल जाते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चला है कि जब तरल हीलियम को उसके क्वथनांक, लगभग –460 डिग्री फारेनहाइट (लगभग –268.9 डिग्री सेल्सियस) से कुछ ही डिग्री कम तापमान तक ठंडा किया जाता है, तो यह एक विशेष अवस्था में पहुंच जाता है जिसे अतितरल (Superfluid) कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अतितरल अवस्था में हीलियम का व्यवहार सामान्य द्रवों से बिल्कुल अलग हो</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574778/scientific-fact--helium-defies-gravity"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(1)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हीलियम प्रकृति का एक अत्यंत रोचक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तत्व है। सामान्य परिस्थितियों में यह एक हल्की और निष्क्रिय गैस के रूप में जानी जाती है, लेकिन अत्यधिक कम तापमान पर इसके गुण आश्चर्यजनक रूप से बदल जाते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चला है कि जब तरल हीलियम को उसके क्वथनांक, लगभग –460 डिग्री फारेनहाइट (लगभग –268.9 डिग्री सेल्सियस) से कुछ ही डिग्री कम तापमान तक ठंडा किया जाता है, तो यह एक विशेष अवस्था में पहुंच जाता है जिसे अतितरल (Superfluid) कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अतितरल अवस्था में हीलियम का व्यवहार सामान्य द्रवों से बिल्कुल अलग हो जाता है। इस अवस्था में वह बिना किसी घर्षण के प्रवाहित हो सकता है। यही कारण है कि यह किसी पात्र में डाले जाने पर केवल नीचे नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे गिलास या बर्तन की भीतरी दीवारों पर चढ़कर ऊपर की ओर बढ़ने लगता है और किनारों से बाहर बह भी सकता है। देखने वाले को ऐसा लगता है मानो यह गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कार्य कर रहा हो। इसके अतिरिक्त अतितरल हीलियम की एक और अद्भुत विशेषता यह है कि वह अत्यंत सूक्ष्म दरारों या अणु-आकार की पतली जगहों से भी रिस सकता है। सामान्य द्रव जिन दरारों से नहीं गुजर पाते, हीलियम उनसे आसानी से निकल जाता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में इसे संभालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इन अद्भुत गुणों के कारण हीलियम का उपयोग अत्यंत निम्न तापमान वाले वैज्ञानिक प्रयोगों, क्वांटम भौतिकी के अध्ययन और शक्तिशाली चुंबकों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। हीलियम के बारे में एक और रोचक तथ्य यह है कि यह ब्रह्मांड में हाइड्रोजन के बाद दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला तत्व है। सूर्य और अन्य तारों में इसकी बड़ी मात्रा मौजूद है। पृथ्वी पर भी यह प्राकृतिक गैस के कुछ स्रोतों में पाया जाता है और इसका उपयोग गुब्बारों, मौसम संबंधी उपकरणों तथा विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि हीलियम को आमतौर पर सुरक्षित गैस माना जाता है, फिर भी इसका अनुचित उपयोग खतरनाक हो सकता है। ‘इंजरी प्रिवेंशन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति हीलियम को सीधे गुब्बारे से अंदर खींचता है, तो यह शरीर के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। ऐसा करने पर कुछ क्षणों के लिए आवाज़ तीखी और पतली हो जाती है, क्योंकि हीलियम हवा की तुलना में हल्की होती है और ध्वनि की गति को बदल देती है। लेकिन यह मज़ाक कभी-कभी जोखिम भरा भी हो सकता है, क्योंकि हीलियम ऑक्सीजन की जगह ले सकती है और इससे सांस लेने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए, भले ही जन्मदिन की पार्टी में हीलियम भरे गुब्बारों से आवाज़ बदलकर सुनना लोगों को मनोरंजक लगे, फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से उनसे दूरी बनाए रखना ही समझदारी है। हीलियम का वास्तविक महत्व उसके वैज्ञानिक गुणों और प्रयोगों में है, जो हमें प्रकृति के अद्भुत रहस्यों को समझने में मदद करते हैं।</p>]]>
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                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 08:00:41 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                <title>ह्यूमैनॉइड रोबोट्स:  विज्ञान की कल्पना से हकीकत तक</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">कृत्रिम बुद्धि के तेजी से बढ़ते विकास ने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक नया अध्याय खोल दिया है। अब मशीनें केवल आदेश मानने वाले उपकरण नहीं रहीं, बल्कि वे समझने, प्रतिक्रिया देने और संवाद करने की क्षमता भी विकसित कर रही हैं। हाल ही में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो 2026 में प्रस्तुत ह्यूमैनॉइड रोबोट्स ने यह दिखा दिया कि भविष्य की दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है। मानव की तरह दिखने वाले और कृत्रिम बुद्धि से संचालित ये रोबोट आपस में स्वतंत्र रूप से बातचीत कर सकते हैं, कई भाषाओं को समझ सकते हैं और मनुष्यों की भावनाओं</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574777/humanoid-robots--from-science-fiction-to-reality"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कृत्रिम बुद्धि के तेजी से बढ़ते विकास ने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक नया अध्याय खोल दिया है। अब मशीनें केवल आदेश मानने वाले उपकरण नहीं रहीं, बल्कि वे समझने, प्रतिक्रिया देने और संवाद करने की क्षमता भी विकसित कर रही हैं। हाल ही में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो 2026 में प्रस्तुत ह्यूमैनॉइड रोबोट्स ने यह दिखा दिया कि भविष्य की दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है। मानव की तरह दिखने वाले और कृत्रिम बुद्धि से संचालित ये रोबोट आपस में स्वतंत्र रूप से बातचीत कर सकते हैं, कई भाषाओं को समझ सकते हैं और मनुष्यों की भावनाओं को भी पहचान सकते हैं। यह प्रयोग केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं की एक झलक भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब कृत्रिम बुद्धि से संचालित ह्यूमैनॉइड रोबोट्स अर्थात् मानव के समान दिखाई पड़ने वाले और कृत्रिम बुद्धि से युक्त यंत्र के विकास ने एक नई दिशा पकड़ ली है। ये रोबोट अब केवल आदेशों का पालन करने वाली मशीनें भर नहीं रह गए हैं, बल्कि वे स्वयं संवाद करने और परिस्थितियों को समझने की क्षमता भी प्राप्त कर रहे हैं। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो 2026 के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्रैंकफर्ट में आयोजित एक प्रदर्शन में रियलबॉटिक्स कंपनी के दो ह्यूमैनॉइड रोबोट्स के बीच हुई बातचीत ने वैज्ञानिक जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। </p>
<p style="text-align:justify;">Aria और David नाम के इन दोनों रोबोट्स ने लगभग दो घंटे तक एक-दूसरे से निरंतर बातचीत की। इस पूरी बातचीत में न तो किसी पूर्व-लिखित स्क्रिप्ट का उपयोग किया गया था और न ही किसी मनुष्य का हस्तक्षेप था। दोनों रोबोट्स ने अपने कृत्रिम बुद्धि तंत्र के आधार पर स्वयं ही संवाद किया। इस बातचीत की एक विशेषता यह भी थी कि उन्होंने केवल अंग्रेजी में ही नहीं, बल्कि स्पेनिश, फ्रेंच और जर्मन भाषाओं में भी संवाद किया। यह दर्शाता है कि आधुनिक कृत्रिम बुद्धि प्रणालियां भाषा को केवल शब्दों के रूप में नहीं, बल्कि विचारों और अर्थों के रूप में भी समझने लगी हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रदर्शन में एक तीसरे रोबोट ने मनुष्यों के साथ भी संवाद किया। यह रोबोट सामने खड़े व्यक्ति की पहचान कर सकता था, उसकी गतिविधियों को ट्रैक कर सकता था और उसकी आवाज तथा चेहरे के भावों से उसकी भावनाओं का अनुमान लगा सकता था। विशेष बात यह थी कि इन रोबोट्स ने बातचीत के लिए इंटरनेट का सहारा नहीं लिया। उनके भीतर स्थापित कृत्रिम बुद्धि प्रणाली और स्थानीय डेटा ही इस संवाद का आधार थे। </p>
<p style="text-align:justify;">इसका अर्थ यह है कि अब ऐसे रोबोट विकसित किए जा रहे हैं, जो स्वतंत्र रूप से सोचने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार के प्रयोगों का महत्व केवल इतना नहीं है कि रोबोट आपस में बातचीत कर लेते हैं। असल महत्व इस बात का है कि ऐसे प्रयोग आगे आने वाले बड़े आविष्कारों की आधारशिला रखते हैं। विज्ञान के इतिहास में हम देखते हैं कि छोटे-छोटे प्रयोग और खोजें ही आगे चलकर बड़े परिवर्तन का कारण बनती हैं। कम्प्यूटर का आरंभ भी एक सीमित प्रयोग के रूप में हुआ था, लेकिन आज वही तकनीक पूरी दुनिया के जीवन को बदल चुकी है। मुझे एक प्रसिद्ध घटना याद आती है। बिजली के आविष्कार के बाद जब थॉमस अल्वा एडिसन एक बल्ब जलाने का प्रदर्शन कर रहे थे, तब एक महिला ने उनसे पूछा- “यह सब तो ठीक है, पर इसका लाभ क्या है?” इस पर एडिसन ने मुस्कराते हुए कहा-“मैडम, जब कोई बच्चा जन्म लेता है, तो उसका तत्काल लाभ क्या होता है?” इस उत्तर में एक गहरी सच्चाई छिपी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी नई खोज अपने प्रारंभिक रूप में अधूरी और सीमित दिखाई दे सकती है, लेकिन समय, श्रम और निवेश के साथ वही खोज भविष्य की बड़ी उपयोगी तकनीक बन जाती है। आज ह्यूमैनॉइड रोबोट्स के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। अभी वे प्रयोगशालाओं और प्रदर्शनियों तक सीमित दिखाई देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनके उपयोग के नए क्षेत्र खुलते जा रहे हैं। महान वैज्ञानिक और विज्ञान कथा लेखक आइजक एसीमोव ने अपनी प्रसिद्ध ‘रोबोट्स’ और ‘फाउंडेशन’ श्रृंखला में जिस प्रकार के उन्नत रोबोट्स की कल्पना की थी, वह आज धीरे-धीरे वास्तविकता की ओर बढ़ती प्रतीत होती है।<strong> -डॉ. राजीव अग्रवाल</strong></p>]]>
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                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574777/humanoid-robots--from-science-fiction-to-reality</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 11:00:21 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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            <item>
                <title>WhatsApp लाया 'पेरेंट-मैनेज्ड अकाउंट्स',  13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्राइवेसी होगी और सख्त, अभिभावकों का होगा कंट्रोंल  </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>मेटा के स्वामित्व वाले संदेश मंच व्हाट्सएप ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक नियंत्रित खाते शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत अभिभावकों की कड़ी निगरानी में छोटे बच्चों को इस मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। यह कदम संदेश मंच की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब तक इस मंच के उपयोग के लिए न्यूनतम आयु सीमा 13 वर्ष (कुछ क्षेत्रों में इससे अधिक) रखी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हाट्सएप ने अपने 'ब्लॉग' में कहा, '' परिवारों व विशेषज्ञों से मिले सुझावों के आधार पर अभिभावक-नियंत्रित खातों</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574691/whatsapp-introduces--parent-managed-accounts---privacy-will-be-more-stringent-for-children-under-13--with-parents-in-control"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(35)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>मेटा के स्वामित्व वाले संदेश मंच व्हाट्सएप ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक नियंत्रित खाते शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत अभिभावकों की कड़ी निगरानी में छोटे बच्चों को इस मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। यह कदम संदेश मंच की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब तक इस मंच के उपयोग के लिए न्यूनतम आयु सीमा 13 वर्ष (कुछ क्षेत्रों में इससे अधिक) रखी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हाट्सएप ने अपने 'ब्लॉग' में कहा, '' परिवारों व विशेषज्ञों से मिले सुझावों के आधार पर अभिभावक-नियंत्रित खातों की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसके तहत माता-पिता या अभिभावक छोटे बच्चों के लिए व्हाट्सएप खाता बना सकेंगे और उनके उपयोग को केवल संदेश भेजने तथा कॉल करने तक सीमित कर सकेंगे।''</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, अभिभावक बच्चों की संपर्क सूची नियंत्रित कर सकेंगे। हालांकि संदेशों की सामग्री 'एंड टू एंड एन्क्रिप्शन' से सुरक्षित रहेगी। नई नियंत्रण व्यवस्था और अन्य 'सेटिंग' को अभिभावक 'पिन' के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा और केवल माता-पिता ही गोपनीयता संबंधी 'सेटिंग' को देख या बदल सकेंगे। कंपनी ने बताया कि यह सुविधा फिलहाल चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/574649/mumbai--maharashtra-legislative-assembly-evacuated-ahead-of-session-after-bomb-threat"><span class="t-red">मुंबई : </span>महाराष्ट्र विधान भवन को बम से उड़ाने की धमकी, सत्र से पहले कराया गया खाली </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574691/whatsapp-introduces--parent-managed-accounts---privacy-will-be-more-stringent-for-children-under-13--with-parents-in-control</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:51:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा में गरमाया मुद्दा: रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद? राघव चड्ढा ने उठाई आम आदमी की आवाज, मांगा सख्त नियम</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> मोबाइल फोन का रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल भी बंद किये जाने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठा और मोबाइल ऑपरेटरों की इस मनमानी पर रोक लगाये जाने तथा इनकमिंग कॉल की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गयी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इनकमिंग कॉल बंद करने का अधिकार किसने दिया? </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोबाइल फोन आजकल लोगोंं की जीवनरेखा बन चुका है लेकिन मोबाइल ऑपरेटर रिचार्ज खत्म होने के साथ ही इनकमिंग कॉल भी बंद करते हैं जिससे फोन ठप हो जाता है। उन्होंने कहा कि</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574590/a-heated-debate-erupted-in-the-rajya-sabha--will-incoming-calls-stop-once-your-recharge-is-exhausted--raghav-chadha-spoke-out-for-the-common-man--demanding-stricter-rules"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(30)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> मोबाइल फोन का रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल भी बंद किये जाने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठा और मोबाइल ऑपरेटरों की इस मनमानी पर रोक लगाये जाने तथा इनकमिंग कॉल की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गयी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इनकमिंग कॉल बंद करने का अधिकार किसने दिया? </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोबाइल फोन आजकल लोगोंं की जीवनरेखा बन चुका है लेकिन मोबाइल ऑपरेटर रिचार्ज खत्म होने के साथ ही इनकमिंग कॉल भी बंद करते हैं जिससे फोन ठप हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से संचार के अधिकार को बंद करना जैसा है। उन्होंने मांग की कि सरकार को मोबाइल ऑपरेटरों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए अंतिम रिचार्ज के बाद तीन साल तक इनकमिंग की सुविधा देने , केवल इनकमिंग कॉल के लिए सस्ता प्लान लाने , और बंद हो चुके सिम के नम्बर को तीन साल तक किसी और को आवंटित नहीं के लिए विशेष नियम बनाने चाहिए। सदस्य ने महीने के नाम पर केवल 28 दिन के रिचार्ज की व्यवस्था को भी बंद करने तथा इसे तीस दिन करने की मांग की। भाजपा के दिनेश शर्मा ने माता पिता के निधन पर निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को सवैतनिक शोक अवकाश दिये जाने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कनाड़ा आदि देशों में इस तरह का अवकाश दिया जाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में माता पिता की सेवा को सर्वोपरि तथा अंतिम संस्कार करने को अनिवार्य धर्म बताया गया है। उन्होंने इसे संविधान के तहत मौलिक अधिकार बताते हुए कर्मचारी को अर्जित अवकाश से अलग अवकाश दिये जाने की मांग की। आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार मित्तल ने विदेश ले जाने के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी का मामला उठाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>संविधान पाठ्यक्रम अनिवार्य करना चाहिए- रामजी लाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में भारत के हजारों लोग बंधक का जीवन जी रहे हैं। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए स्थायी ग्लोबल प्रोटोकाल बनाये जाने की मांग की। समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन ने स्कूली पाठ्यक्रम में संविधान को अनिवार्य विषय के रूप में पढाये जाने की मांग की। कांग्रेस के नीरज डांगी ने मैदानों में रैलियों तथा अन्य कार्यक्रमों में अस्थायी ढांचों के निर्माण पर होने वाले भारी भरकम खर्च पर रोक लगाने के लिए इनमें स्थायी संरचना बनाये जाने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इससे सरकारी धन की बचत होगी और कार्यक्रमों का प्रबंधन भी अच्छा रहेगा। यह जगह जनहित के सभी सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में काम में लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नीतिगत योजना के तहत बहुउद्देशीय स्थल बनाये जाने चाहिए जिससे कि संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सके। अन्ना द्रमुक के तंबी दुरै ने राजधानी के सरदार पटेल मार्ग पर जाम का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस सड़क पर होटलों ने अतिक्रमण किया हुआ है जिसे हटाकर इस सड़क को चौड़ा किये जाने की जरूरत है। बीजू जनता दल की सुलता देव ने स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढाये जाने की मांग की। <span></span></p>]]>
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                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574590/a-heated-debate-erupted-in-the-rajya-sabha--will-incoming-calls-stop-once-your-recharge-is-exhausted--raghav-chadha-spoke-out-for-the-common-man--demanding-stricter-rules</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 13:39:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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