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                <title>हल्द्वानी - Amrit Vichar</title>
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                <description>हल्द्वानी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Uttrakhand:निर्धारित मानकों पर बेपटरी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों पर ''ब्रेक''</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल ही निर्धारित मानकों पर बेपटरी हो गए। जिला प्रशासन व परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने चार मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों में छापा मारा। किसी का ''बैक गेयर'' काम नहीं कर रहा था तो किसी का ''परमिट'' रामनगर के लिए था लेकिन चल हल्द्वानी में रहा था। इसपर प्रशासन ने तीन स्कूलों के संचालन पर ''ब्रेक'' लगाने के आदेश दिए हैं।</p>
<p><br />नैनीताल डीएम ललित मोहन रयाल के निर्देशानुसार, शुक्रवार को एडीएम प्रशासन विवेक राय और आरटीओ गुरुदेव सिंह ने शहर में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों की औचक जांच की। टीम ने देवभूमि मोटर ड्राइविंग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581409/-brakes--applied-to-motor-driving-training-schools-that-deviate-from-prescribed-standards"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/drive.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल ही निर्धारित मानकों पर बेपटरी हो गए। जिला प्रशासन व परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने चार मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों में छापा मारा। किसी का ''बैक गेयर'' काम नहीं कर रहा था तो किसी का ''परमिट'' रामनगर के लिए था लेकिन चल हल्द्वानी में रहा था। इसपर प्रशासन ने तीन स्कूलों के संचालन पर ''ब्रेक'' लगाने के आदेश दिए हैं।</p>
<p><br />नैनीताल डीएम ललित मोहन रयाल के निर्देशानुसार, शुक्रवार को एडीएम प्रशासन विवेक राय और आरटीओ गुरुदेव सिंह ने शहर में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों की औचक जांच की। टीम ने देवभूमि मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल, जय दुर्गा मोटर ड्राइविंग स्कूलों का निरीक्षण किया। देवभूमि के सिमुलेटर मशीन का बैक गेयर खराब था।</p>
<p>इसी के साथ ही परिवहन विभाग ने दो दिन पूर्व ही पर्वतीय मार्गों पर पृष्ठांकन में अनियमितता पर नोटिस जारी किया था। इसी तरह जय दुर्गा मोटर स्कूल में दो दिन के रिफ्रेशर कोर्स में सर्टिफिकेट जारी करने में गड़बड़ी पकड़ी गई। इसके अलावा इन स्कूलों में ऑनलाइन पोर्टल संचालित नहीं पाए गए।</p>
<p>एक व्यक्ति ने ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर फीस जमा कराने की शिकायत पर जांच की गई। इसमें संबंधित संस्थान का लाइसेंस निरस्त पाया गया तो फीस के नाम पर लिए गए 1100 रुपये भी वापस कराए गए। इसके इतर, निर्मल मोटर ट्रेनिंग स्कूल का पंजीयन रामनगर के लिए हुआ था लेकिन हल्द्वानी में भी ऑफिस खोला हुआ था हालांकि कोई भी ट्रेनी मौके पर नहीं मिला।</p>
<p>नियमानुसार सिर्फ रामनगर में ही काम कर सकता है। इसके बाद टीम ने कुमाऊं मोटर ट्रेनिंग स्कूल का जायजा लिया, जो सभी मानकों पर खरा निकला। इसके बाद एडीएम राय ने जय दुर्गा, देवभूमि और निर्मल मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के संचालन पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। एडीएम ने जनता से अपील करते हुए कहा कि परिवहन विभाग संबंधित कामकाज के लिए सीधे आरटीओ कार्यालय के माध्यम से ही कराएं ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी एवं अनियमितता से बचा जा सके। इस दौरान एसडीएम प्रमोद कुमार, एआरटीओ एके सिंह, तहसीलदार कुलदीप पांडे आदि रहे।</p>
<p><strong>देहरादून भेजी रिपोर्ट, संचालन की अनुमति निरस्त करें या निलंबित</strong><br />आरटीओ गुरुदेव सिंह ने बताया कि तीनों मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। इसी के साथ ही उनकी रिपोर्ट परिवहन मुख्यालय देहरादून भी भेज दी गई है ताकि इन स्कूलों के संचालन के निरस्तीकरण या निलंबन पर निर्णय लिया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:00:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttrakhand:आज और कल कैंची धाम तक नहीं जा पाएंगे पर्यटक वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> हल्द्वानी में पर्यटन सीजन और वीकेंड पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने 9 और 10 मई के लिए विशेष ट्रैफिक एवं डायवर्जन प्लान लागू किया है। यह व्यवस्था सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगी।</p>
<p>प्रशासन के अनुसार इन दो दिनों में पर्यटक अपने निजी वाहनों से कैंची धाम नहीं जा सकेंगे। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को शटल सेवा के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया जाएगा। पुलिस के मुताबिक भीमताल मार्ग से आने वाले वाहनों को विकास भवन पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा, जहां से श्रद्धालुओं को शटल सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581410/tourist-vehicles-will-not-be-able-to-travel-to-kainchi-dham-today-and-tomorrow"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/trf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> हल्द्वानी में पर्यटन सीजन और वीकेंड पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने 9 और 10 मई के लिए विशेष ट्रैफिक एवं डायवर्जन प्लान लागू किया है। यह व्यवस्था सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगी।</p>
<p>प्रशासन के अनुसार इन दो दिनों में पर्यटक अपने निजी वाहनों से कैंची धाम नहीं जा सकेंगे। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को शटल सेवा के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया जाएगा। पुलिस के मुताबिक भीमताल मार्ग से आने वाले वाहनों को विकास भवन पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा, जहां से श्रद्धालुओं को शटल सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं नैनीताल-गेठिया मार्ग से आने वाले वाहनों को भवाली सैनेटोरियम पार्किंग में रोका जाएगा।</p>
<p><strong>टैक्सी और दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर भी रोक</strong><br />वीकेंड के दौरान कैंची धाम क्षेत्र में टैक्सी और दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ऐसे वाहनों को सैनेटोरियम पार्किंग में खड़ा कर यात्रियों को शटल सेवा से भेजा जाएगा। अल्मोड़ा और रानीखेत से हल्द्वानी आने वाले भारी वाहनों को क्वारब और खैरना से रामगढ़-मुक्तेश्वर मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा। हल्द्वानी से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले आवश्यक सेवा वाहनों को निर्धारित रूट से अनुमति मिलेगी, जबकि अन्य भारी वाहनों को भवाली मस्जिद तिराहे से पहले रोका जा सकता है।</p>
<p><strong>इन रास्तों से गुजरेंगे वाहन</strong><br />यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक यात्रा मार्गों पर भारी वाहनों के संचालन पर रोक रहेगी। पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले भारी वाहनों को जिले की सीमा पर रोका जाएगा। इनके लिए नंबर-1 बैंड, एचएमटी क्षेत्र, सलड़ी चौकी और अमृतपुर मोड़ पर पार्किंग व्यवस्था की गई है। मैदानी क्षेत्रों से पहाड़ की ओर जाने वाले भारी वाहनों को गोलापार पुराने आरटीओ फिटनेस सेंटर और खेड़ा चौकी के पास रोका जाएगा।इ</p>
<p><strong>हल्द्वानी शहर में पर्यटक वाहनों की एंट्री बंद</strong><br />दो दिनों तक हल्द्वानी शहर में पर्यटक वाहनों के प्रवेश पर भी रोक रहेगी। बरेली रोड से आने वाले वाहनों को तीनपानी फ्लाईओवर, गोलापार रोड और नारिमन तिराहा होते हुए काठगोदाम भेजा जाएगा। रुद्रपुर और पंतनगर से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहनों को पंतनगर तिराहा, लालकुआं और गोलापार मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। वहीं रामनगर और बाजपुर की ओर से आने वाले वाहनों को कालाढूंगी-नैनीताल तिराहे से मंगोली मार्ग की ओर भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>आवश्यक सेवा वाले भारी वाहनों पर भी प्रतिबंध</strong><br />पुलिस ने आवश्यक सेवा वाले भारी वाहनों पर भी दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक प्रतिबंध लगाया है। हालांकि एलपीजी वाहनों को इससे छूट दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों से लौटने वाले पर्यटक वाहनों को नारिमन तिराहा से गोलापार रोड की ओर मोड़ा जाएगा। वहीं शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक भवाली मस्जिद तिराहा और नैनीताल से आने वाले वाहनों को नंबर-1 बैंड और रूसी बाईपास होते हुए मंगोली-कालाढूंगी मार्ग से भेजा जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 09:01:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttrakhand:तीन दिन चढ़ेगा पारा, फिर होगी बारिश, शुक्रवार को हल्द्वानी में दिन भर निकली धूप</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>पश्चिमी विक्षोभ का असर अब कम होने लगा है। शुक्रवार को हल्द्वानी में पूरे दिन धूप रही। हालांकि शाम के समय मौसम सही हो गया। अगले तीन दिन तक पारे में उछाल आएगा।</p>
<p>मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार हल्द्वानी का अधिकतम तापमान 32 डिग्री रहा जो सामान्य से 4.5 डिग्री कम है और न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री रहा जो सामान्य से 2.5 डिग्री कम है। अब अगले तीन दिन तक पारे में उछाल आएगा। 11 मई तक तापमान 35 डिग्री तक पहुंच जाएगा। इसके बाद 12 मई से एक बार फिर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581406/temperatures-to-rise-for-three-days--followed-by-rain--sunshine-prevailed-throughout-the-day-in-haldwani-on-friday"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/tapman.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>पश्चिमी विक्षोभ का असर अब कम होने लगा है। शुक्रवार को हल्द्वानी में पूरे दिन धूप रही। हालांकि शाम के समय मौसम सही हो गया। अगले तीन दिन तक पारे में उछाल आएगा।</p>
<p>मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार हल्द्वानी का अधिकतम तापमान 32 डिग्री रहा जो सामान्य से 4.5 डिग्री कम है और न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री रहा जो सामान्य से 2.5 डिग्री कम है। अब अगले तीन दिन तक पारे में उछाल आएगा। 11 मई तक तापमान 35 डिग्री तक पहुंच जाएगा। इसके बाद 12 मई से एक बार फिर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है।</p>
<p>12 और 13 मई को नैनीताल जिले में भारी बारिश होने का अनुमान है। अगर इसी तरह का मौसम बन गया तो एक बार फिर से गर्मी से राहत मिलेगी। इधर पहाड़ों में हुई बारिश-ओलावृष्टि के बाद मौसम पूरी तरह से ठंडा हो गया है। मुक्तेश्वर में अधिकतम तापमान 16.6 डिग्री रहा जो सामान्य से सात डिग्री कम है और न्यूनतम तामपान 7.4 डिग्री रहा। यह सामान्य से 4 डिग्री कम है। यहां रात के समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 06:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haldwani:जनगणना में तकनीकी सहायता देगा नगर निगम, हेल्प डेस्क शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>नगर निगम में जनगणना को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए हेल्प डेस्क शुरू कर दी गई है। यह हेल्प डेस्क जनगणना में लगे प्रगणकों व सुपरवाइजरों को फील्ड संबंधी व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>चार्ज अधिकारी गणेश भट्ट व गजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि मोबाइल ऐप के माध्यम से डाटा भरने और फील्ड सर्वे के दौरान प्रगणकों व सुपरवाइजरों को कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम की ओर से फील्ड ट्रेनरों को तकनीकी सहायता के लिए नियुक्त किया गया है। </p>
<p>तकनीकी सहयोग के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581227/municipal-corporation-to-provide-technical-assistance-for-census--help-desk-launched"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/jangadhna.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>नगर निगम में जनगणना को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए हेल्प डेस्क शुरू कर दी गई है। यह हेल्प डेस्क जनगणना में लगे प्रगणकों व सुपरवाइजरों को फील्ड संबंधी व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>चार्ज अधिकारी गणेश भट्ट व गजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि मोबाइल ऐप के माध्यम से डाटा भरने और फील्ड सर्वे के दौरान प्रगणकों व सुपरवाइजरों को कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम की ओर से फील्ड ट्रेनरों को तकनीकी सहायता के लिए नियुक्त किया गया है। </p>
<p>तकनीकी सहयोग के लिए पूरन चंद्र तिवारी, पूरन सिंह बुंग्ला, देवेंद्र सिंह, मीनाक्षी कीर्ति, प्रीति मझगांई, आरती जैन, दीपांकर बृजवासी, कनकलता तिवारी, सुमित पांडे, राजेश जोशी, संजय शर्मा, गौरीशंकर कांडपाल, प्रदीप जोशी व प्रताप सिंह नेगी उपस्थित रहेंगे। नगर निगम कार्यालय स्थित जनगणना अनुभाग में सुबह 10 बजे से सायं 5 बजे तक संपर्क कर तकनीकी सहायता प्राप्त की जा सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/581227/municipal-corporation-to-provide-technical-assistance-for-census--help-desk-launched</link>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:02:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttrakhand:शौकीन खिलाड़ियों के लिए भी स्टेडियम ने खोला दिल, छह माह की फीस और साल भर की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> पुरानी कहावत थी- पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब। लेकिन बदलते वक्त और उत्तराखंड सरकार की नई खेल नीति ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। अब यहां का युवा मैदानों में पसीना बहाकर न केवल अपना भविष्य संवार रहा है, बल्कि देवभूमि का मान भी बढ़ा रहा है।</p>
<p>इसी क्रम में, जिला खेल अधिकारी कार्यालय ने स्थानीय खिलाड़ियों को एक बड़ी सौगात दी है। विभाग ने वार्षिक शुल्क जमा करने की प्रक्रिया को न केवल सरल बनाया है, बल्कि खिलाड़ियों को बड़ी आर्थिक राहत भी दी है।</p>
<p>खेल विभाग द्वारा जारी सूचना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581009/the-stadium-opens-its-doors-to-enthusiasts--six-months--fees--a-full-year-of-facilities"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/st.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> पुरानी कहावत थी- पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब। लेकिन बदलते वक्त और उत्तराखंड सरकार की नई खेल नीति ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। अब यहां का युवा मैदानों में पसीना बहाकर न केवल अपना भविष्य संवार रहा है, बल्कि देवभूमि का मान भी बढ़ा रहा है।</p>
<p>इसी क्रम में, जिला खेल अधिकारी कार्यालय ने स्थानीय खिलाड़ियों को एक बड़ी सौगात दी है। विभाग ने वार्षिक शुल्क जमा करने की प्रक्रिया को न केवल सरल बनाया है, बल्कि खिलाड़ियों को बड़ी आर्थिक राहत भी दी है।</p>
<p>खेल विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यदि कोई शौकिया खिलाड़ी अपना वार्षिक शुल्क एकमुश्त जमा करता है, तो उसे 6 महीने के शुल्क की सीधी छूट दी जाएगी। यानी साल भर की सुविधाओं का लाभ अब आधे साल के प्रभावी शुल्क पर उठाया जा सकेगा।</p>
<p>इस पहल का उद्देश्य जहां खिलाड़ियों पर वित्तीय बोझ कम करना ताकि वे संसाधनों का पूरा लाभ ले सकें वहीं, अधिक से अधिक युवाओं को नियमित अभ्यास और खेल गतिविधियों से जोड़ना भी है। इतना ही नहीं, समय पर शुल्क जमा होने से खेल परिसरों के रख-रखाव और संसाधनों को और बेहतर बनाया जा सकेगा।</p>
<p>ऐसे में उत्तराखंड सरकार की खेल प्रोत्साहन नीतियों के अनुरूप, विभाग का यह कदम जिले में खेल संस्कृति को और मजबूत करेगा। सभी शौकिया खिलाड़ियों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय के भीतर इस योजना का लाभ उठाएं और मैदान की ओर अपने कदम बढ़ाएं।</p>
<p> जिला क्रीड़ाधिकारी निर्मला पंत ने बताया कि हमने यह निर्णय खिलाड़ियों की सुविधा और उनके उत्साहवर्धन को ध्यान में रखते हुए लिया है। एकमुश्त शुल्क पर 6 माह की छूट से आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और वे बिना किसी बाधा के अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 11:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttrakhand:मनमानी पर 10 निजी स्कूलों को प्रशासन ने फिर भेजे नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए एक बार फिर से नोटिस भेजे गए हैं। स्कूलों के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर डीएम ललित मोहन रयाल के निर्देश पर सीईओ जीआर जायसवाल ने शहर के 10 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। </p>
<p>नोटिस पाने वाले स्कूलों में वुडलैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल (हिम्मतपुर तल्ला), डी लैंप पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), दर्पण पब्लिक स्कूल (हरिपुरनायक, कुसुमखेड़ा), इम्युनल पब्लिक स्कूल (मुखानी), हाइलेंडर्स पब्लिक स्कूल (कलावती कॉलोनी), ग्रीन सिटी पब्लिक स्कूल (बरेली रोड), टेंडर फीट पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), एल्केमे स्कूल (कुसुमखेड़ा), जय दुर्गे एजुकेशनल पब्लिक स्कूल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581005/administration-sends-notices-again-to-10-private-schools-over-arbitrary-practices"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/sc1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए एक बार फिर से नोटिस भेजे गए हैं। स्कूलों के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर डीएम ललित मोहन रयाल के निर्देश पर सीईओ जीआर जायसवाल ने शहर के 10 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। </p>
<p>नोटिस पाने वाले स्कूलों में वुडलैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल (हिम्मतपुर तल्ला), डी लैंप पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), दर्पण पब्लिक स्कूल (हरिपुरनायक, कुसुमखेड़ा), इम्युनल पब्लिक स्कूल (मुखानी), हाइलेंडर्स पब्लिक स्कूल (कलावती कॉलोनी), ग्रीन सिटी पब्लिक स्कूल (बरेली रोड), टेंडर फीट पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा), एल्केमे स्कूल (कुसुमखेड़ा), जय दुर्गे एजुकेशनल पब्लिक स्कूल (दमुआढूंगा बंदोबस्ती) और न्यू फेगलैंड पब्लिक स्कूल शामिल हैं। जांच के दौरान पाया गया कि कई स्कूल निर्धारित पाठ्यक्रम से हटकर एनसीईआरटी के अलावा महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। </p>
<p>साथ ही कुछ स्कूलों की ओर से विशेष विक्रेताओं से किताबें और शिक्षण सामग्री खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव बनाने और वेबसाइट पर जरूरी सूचनाएं सार्वजनिक न करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल क्षेत्र के 28 स्कूलों को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। स्कूलों को 15 दिन के भीतर संशोधित बुक लिस्ट जारी कर एनसीईआरटी की किताबें लागू करनी हैं। साथ ही किसी भी दुकान विशेष की बाध्यता समाप्त करने, वेबसाइट पर बुक लिस्ट और फीस स्ट्रक्चर की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने, अतिरिक्त खरीदी गई पुस्तकों के लिए अभिभावकों को रिफंड और एडजस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>आरटीई, सीपीए का होगा अनुपालन</strong><br />कार्रवाई बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (सीपीए) 2019 और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, सुलभ और आर्थिक रूप से न्यायसंगत बनाना है।<br />स्कूलों को दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा।</p>
<p><strong>आदेश न मानने पर होगी मान्यता रद्द</strong><br />हल्द्वानी। डीएम के निर्देश पर ब्लॉक स्तर पर संयुक्त जांच समितियां गठित की गई हैं, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। निर्धारित समयसीमा में आदेशों का पालन न करने पर संबंधित स्कूलों की मान्यता निलंबित या निरस्त करने सहित विधिक कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है और किसी भी तरह की अवहेलना पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 10:09:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ-हल्द्वानी प्रस्तावित गोमती एक्सप्रेसवे के जल्द निर्माण की मांग, मुख्यमंत्री योगी से मिला पर्वतीय महासभा का प्रतिनिधिमंडल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>भारतीय पर्वतीय समाज के हितों एवं समग्र विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय पर्वतीय महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लोक भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय विकास, सांस्कृतिक संरक्षण एवं बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा करते हुए विभिन्न मांगों से संबंधित पत्र एवं ज्ञापन सौंपे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने आगामी पंचम वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह आयोजन पर्वतीय संस्कृति, लोक कला और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580969/demanding-the-early-construction-of-the-proposed-lucknow-haldwani-gomti-expressway--a-delegation-from-the-parvatiya-mahasabha-met-with-chief-minister-yogi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(33)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>भारतीय पर्वतीय समाज के हितों एवं समग्र विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय पर्वतीय महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लोक भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय विकास, सांस्कृतिक संरक्षण एवं बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा करते हुए विभिन्न मांगों से संबंधित पत्र एवं ज्ञापन सौंपे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने आगामी पंचम वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह आयोजन पर्वतीय संस्कृति, लोक कला और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलेगा।<br />महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुपम सिंह भंडारी ने लखनऊ-हल्द्वानी प्रस्तावित गोमती एक्सप्रेसवे के जल्दी निर्माण के लिए आवेदन दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">इस लगभग 300 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में कमी आएगी और पर्यटन, व्यापार व क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। साथ ही नंदग्राम (गाजियाबाद) स्थित उत्तराखंड भवन के संचालन एवं प्रबंधन को लेकर भी ज्ञापन दिया, जिसमें संयुक्त प्रबंधन समिति के गठन एवं पारदर्शी बुकिंग व्यवस्था की मांग की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने सभी प्रस्तावों को जनहित एवं पर्वतीय समाज के उत्थान से जुड़ा बताते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का अनुरोध किया। इस अवसर पर पान सिंह भंडारी, दया कृष्ण डालाकोटी, दिनेश उप्रेती सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी विषयों को गंभीरता से सुना और आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/580966/the-high-court-in-uttar-pradesh-has-taken-a-strong-stance-on-traffic-chaos-around-schools--expressing-displeasure-over-the-indifference-of-officials-and-school-management"><span class="t-red">यूपी में स्कूलों के आसपास ट्रैफिक अव्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त,</span> अधिकारियों-स्कूल प्रबंधन की उदासीनता पर जताई नाराजगी</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/580969/demanding-the-early-construction-of-the-proposed-lucknow-haldwani-gomti-expressway--a-delegation-from-the-parvatiya-mahasabha-met-with-chief-minister-yogi</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/580969/demanding-the-early-construction-of-the-proposed-lucknow-haldwani-gomti-expressway--a-delegation-from-the-parvatiya-mahasabha-met-with-chief-minister-yogi</guid>
                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:21:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttrakhand:मूसलाधार बारिश से 30 डिग्री तक पहुंच गया मई में पारा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>मई माह जो अपनी प्रचंड गर्मी के लिए जाना जाता है, उस माह में मूसलाधार बारिश हो रही है। पारे में गिरावट आ रही है। हल्द्वानी में रविवार को रात और दोपहर दो बार बारिश हुई है।</p>
<p>मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने रविवार को नैनीताल जिले में भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया था। अनुमान सही साबित हुआ। रविवार की रात्रि जमकर बारिश हुई और मौसम पूरी तरह से सुहावना हो गया तो वहीं पूर्वान्ह के समय पूरे शहर में काली घटा छा गई। दोपहर के समय शाम जैसा नजारा हो गया। लोगों को अपने वाहनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580806/torrential-rains-caused-the-mercury-to-drop-to-30-degrees-in-may"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/barish.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>मई माह जो अपनी प्रचंड गर्मी के लिए जाना जाता है, उस माह में मूसलाधार बारिश हो रही है। पारे में गिरावट आ रही है। हल्द्वानी में रविवार को रात और दोपहर दो बार बारिश हुई है।</p>
<p>मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने रविवार को नैनीताल जिले में भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया था। अनुमान सही साबित हुआ। रविवार की रात्रि जमकर बारिश हुई और मौसम पूरी तरह से सुहावना हो गया तो वहीं पूर्वान्ह के समय पूरे शहर में काली घटा छा गई। दोपहर के समय शाम जैसा नजारा हो गया। लोगों को अपने वाहनों की लाइट ऑन करनी पड़ी। इसके बाद करीब एक घंटे तक मूसलाधार बारिश होती रही। दोपहर के समय ही बाजार में सन्नाटा पसर गया। </p>
<p>अधिकतम तापमान में काफी गिरावट आई। हल्द्वानी में एक ही दिन में करीब 40 मिमी बारिश हुई है। रविवार को हल्द्वानी में पारा 30.6 डिग्री रहा जो सामान्य से छह डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 15 डिग्री दर्ज किया गया है। शहर में एक सप्ताह पहले पारा 40 डिग्री को पार कर गया था। मौसम विज्ञान केंद्र ने सोमवार को भी नैनीताल जिले में भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया है। यही नहीं मंगलवार और बुधवार को यलो अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही नौ मई तक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहने का अनुमान है।</p>
<p><strong>मई की बारिश से राहत, लेकिन बीमारियों का खतरा बढ़ा</strong><br />मई की भीषण गर्मी के दौरान मूसलाधार प्री-मानसून बारिश ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दी है लेकिन नमी बढ़ने से कई तरह की बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है।विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद वातावरण में बढ़ी आर्द्रता बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करती है। शहर के कई इलाकों में जलभराव के कारण मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने पानी जमा न होने देने की सलाह दी है। </p>
<p>इसके अलावा दूषित पानी और भोजन के कारण टाइफाइड, हैजा, डायरिया और हेपेटाइटिस-ए जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी का कहना है कि इस मौसम में उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए और बाहर के खाने से बचना चाहिए। अचानक बदलते मौसम का असर श्वसन तंत्र पर भी पड़ता है। वायरल बुखार, फ्लू, खांसी-जुकाम और एलर्जी के मामले बढ़ने लगते हैं। वहीं नमी के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं, खासकर फंगल इन्फेक्शन, भी आम हो जाती हैं। बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. केएस दत्ताल ने कहा कहा कि बारिश थमने पर तापमान में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहकर साफ-सफाई, खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का विशेष ध्यान रखना होगा।</p>
<p><strong>नैनीताल में दोपहर में बारिश ने मचाई अफरा तफरी</strong><br />सरोवर नगरी में रविवार दोपहर में हुई तेज बारिश में अफरा तफरी मच गई। करीब एक घंटे की बारिश में तेज हवाओं के साथ ओले भी बरसे हैं। सोमवार से पुनः एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। नगर में मौसम का मिजाज सुबह से ही बदला हुआ था। घने बादल छाए हुए थे। अपराह्न 12 बजे काले बादलों ने आसमान को घेर लिया और करीब एक बजे तेज हवाओं के साथ वर्षा शुरू हो गई और ओले भी बरसने शुरु हो गए। इस लोग सिर छिपाने के लिए छत तलाशने लगे। विभिन्न नगरों से सैर पर पहुंचे सैलानियों में भगदड़ मच गई और उनकी खूब फजीहत हो गई। करीब दो बजे बारिश रुकने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली और मौसम पूरी तरह साफ हो गया। साथ ही धूप निकलने से ठंड से भी राहत मिली। इधर मौसम विभाग देहरादून के मौसम वैज्ञानिक डा रोहित थपलियाल के अनुसार सोमवार से एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। लिहाजा तापमान में गिरावट बनी रहेगी। अंधड़ और गरज के साथ बिजली गिरने की संभावना रहेगी। हल्की से मध्यम बारिश के आसार रहेगी। जीआईसी मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अधिकतम 24 व न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 08:03:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Uttrakhand:पर्यटन सीजन में सख्त ट्रैफिक प्लान, सुबह 6 बजे से सड़कों पर उतरेगी पुलिस फोर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> पर्यटन सीजन की शुरुआत और पहले वीकेंड पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने यातायात को सुगम बनाने के लिए व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है। एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।</p>
<p>एसएसपी ने निर्देश दिए हैं कि सभी थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मी सुबह 6 बजे से ही अपने-अपने निर्धारित चौराहों और जाम वाले स्थानों (बॉटल नेक) पर तैनात रहेंगे। ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही को अक्षम्य माना जाएगा। सभी राजपत्रित अधिकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580785/strict-traffic-plan-for-the-tourist-season--police-force-to-hit-the-streets-starting-at-6-am"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/trs.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> पर्यटन सीजन की शुरुआत और पहले वीकेंड पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने यातायात को सुगम बनाने के लिए व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है। एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।</p>
<p>एसएसपी ने निर्देश दिए हैं कि सभी थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मी सुबह 6 बजे से ही अपने-अपने निर्धारित चौराहों और जाम वाले स्थानों (बॉटल नेक) पर तैनात रहेंगे। ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही को अक्षम्य माना जाएगा। सभी राजपत्रित अधिकारी खुद सड़कों पर उतरकर यातायात व्यवस्था का संचालन कराएंगे।</p>
<p>जिले में लागू नए डायवर्जन प्लान को सख्ती से लागू किया जाएगा। भारी वाहनों को निर्धारित समय और स्थान पर ही रोका जाएगा, जिससे छोटे वाहनों की आवाजाही सुचारू बनी रहे। किसी भी आकस्मिक जाम या बाधा से तुरंत निपटने के लिए मोबाइल पुलिस टीम लगातार पेट्रोलिंग करेगी। एसएसपी ने कहा कि पर्यटन सीजन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और निर्धारित डायवर्जन रूट पर ही चलें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 15:41:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Uttrakhand:अच्छा दिखने के साथ स्वस्थ रहने के भी मूलमंत्र को साध रहे युवा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नरेन्द्र देव, हल्द्वानी।</strong> बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया के प्रभाव और फिटनेस के बढ़ते ट्रेंड के बीच युवाओं में अब केवल अच्छा दिखने ही नहीं, बल्कि अंदर से स्वस्थ रहने की सोच भी तेजी से विकसित हो रही है। यही वजह है कि आजकल 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवा बड़ी संख्या में सही डाइट को लेकर जागरूक हो रहे हैं और विशेषज्ञों से परामर्श ले रहे हैं। हल्द्वानी में भी ऐसे युवाओं की कमी नहीं।</p>
<p>मेडिकल कॉलेज के डाइटिशियन विभाग के अनुसार पहले जहां युवा केवल बीमारी के समय ही डाइट सलाह लेते थे, वहीं अब वे अपनी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580780/young-people-are-mastering-the-twin-mantras-of-staying-healthy-while-also-looking-good"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/hld.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नरेन्द्र देव, हल्द्वानी।</strong> बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया के प्रभाव और फिटनेस के बढ़ते ट्रेंड के बीच युवाओं में अब केवल अच्छा दिखने ही नहीं, बल्कि अंदर से स्वस्थ रहने की सोच भी तेजी से विकसित हो रही है। यही वजह है कि आजकल 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवा बड़ी संख्या में सही डाइट को लेकर जागरूक हो रहे हैं और विशेषज्ञों से परामर्श ले रहे हैं। हल्द्वानी में भी ऐसे युवाओं की कमी नहीं।</p>
<p>मेडिकल कॉलेज के डाइटिशियन विभाग के अनुसार पहले जहां युवा केवल बीमारी के समय ही डाइट सलाह लेते थे, वहीं अब वे अपनी दिनचर्या को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से डाइट प्लान तैयार करवा रहे हैं। खासतौर पर जिम जाने वाले युवाओं में यह ट्रेंड ज्यादा देखने को मिल रहा है। वे मसल्स गेन, फैट लॉस और बॉडी टोनिंग के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का संतुलन समझते हुए प्रोफेशनल गाइडेंस ले रहे हैं।</p>
<p>वहीं, युवतियों में फिटनेस के साथ-साथ स्किन और हेयर हेल्थ को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। वे ऐसे डाइट प्लान को प्राथमिकता दे रही हैं, जो वजन नियंत्रित रखने के साथ त्वचा को निखारने और बालों को मजबूत बनाने में मदद करे। दूसरी ओर, कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या से परेशान युवक भी अब खान-पान में सुधार को अहम मानते हुए विशेषज्ञों की शरण ले रहे हैं।</p>
<p>बुरी आदतों से दूरी बना हेल्दी लाइफस्टाइल अपना रहे<br />यह तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। एक ओर जहां फास्ट फूड, जंक फूड, शराब और सिगरेट का आकर्षण अभी भी युवाओं को अपनी ओर खींच रहा है, वहीं बड़ी संख्या में युवा इन आदतों से दूरी बनाकर हेल्दी लाइफस्टाइल अपना रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है, जो आने वाले समय में युवाओं के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को सुनिश्चित करेगा।</p>
<p>-15–25 आयु वर्ग के युवाओं में डाइट अवेयरनेस में तेजी<br />-जिम कल्चर के साथ डाइट प्लान की मांग बढ़ी<br />-स्किन और हेयर हेल्थ के लिए भी ले रहे सलाह<br />-जंक फूड से दूरी बनाकर हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर रुझान</p>
<p> मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी की  डाइटिशियन आशा सिंह ने बताया कि साल 2006 से मैं मेडिकल कॉलेज में बतौर डाइटिशियन सेवा दे रही हूं। कोविड के बाद से अचानक लोगों में सही डाइट लेने का चलन बढ़ा है। इनमें भारी संख्या में युवा भी शामिल हैं। अब तक किशोर भी सलाह लेने आते हैं कि मोटापे से बचने के लिए क्या खाना चाहिए। यह अच्छा है क्योंकि अगर कम उम्र से ही लोग सही डाइट लेने लगेंगे तो मोटापा, कोलेस्ट्रॉल, डायबटीज, बीपी जैसी बीमारियों से बचे रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 15:21:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>माल, बाल और पटाल: अल्मोड़ा की अनुपम सांस्कृतिक विरासत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:center;"><span style="color:rgb(224,62,45);">समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पटाल बाजार में घूमते हुए रोमांच का अनुभव होना स्वाभाविक है, क्योंकि न केवल यह बाजार अल्मोड़ा शहर के केंद्र में एक लंबी पहाड़ी चोटी पर स्थित है, बल्कि यहां से हिमालय की शानदार सफेद दमकती चोटियां नजारे को अद्भुत कर देंती हैं। दरअसल, अल्मोड़ा का पटाल बाजार अपनी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कुछ चुनिंदा बाजारों में गिना जाता है। इसकी तुलना अक्सर यूरोपीय देशों के ‘ओल्ड टाउन’ और मध्यकालीन बाजारों से की जाती है। उन अंतर्राष्ट्रीय बाजारों या</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580760/maal--baal-and-patal--the-unique-cultural-heritage-of-almora"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit-(7)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><span style="color:rgb(224,62,45);">समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पटाल बाजार में घूमते हुए रोमांच का अनुभव होना स्वाभाविक है, क्योंकि न केवल यह बाजार अल्मोड़ा शहर के केंद्र में एक लंबी पहाड़ी चोटी पर स्थित है, बल्कि यहां से हिमालय की शानदार सफेद दमकती चोटियां नजारे को अद्भुत कर देंती हैं। दरअसल, अल्मोड़ा का पटाल बाजार अपनी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कुछ चुनिंदा बाजारों में गिना जाता है। इसकी तुलना अक्सर यूरोपीय देशों के ‘ओल्ड टाउन’ और मध्यकालीन बाजारों से की जाती है। उन अंतर्राष्ट्रीय बाजारों या शहरों के बारे में भी समझ लेते हैं, जहां से मुख्य रूप से पटाल बाजार की तुलना की जाती है। <strong>अजय दयाल, वरिष्ठ पत्रकार</strong></span></p>
<p>माल, बाल और पटाल। हां, इसी नाम से मशहूर है उत्तराखंड का अल्मोड़ा। माल का आशय माल रोड से है, बाल से मतलब बाल मिठाई से और पटाल यानी पटाल बाजार। यहां मैं चर्चा पटाल बाजार की करने जा रहा हूं। इस बाजार में कदम रखते ही दिल-दिमाग मानो तरोताजा हो जाते हों। माहौल इस कदर रोमांचकारी है कि आंखें नहीं झपकती… कि कहीं कुछ देखने को छूट न जाए। यह पारंपरिक कुमाऊंनी शैली के घरों (पटाल यानी पत्थरों की छत) से बना हुआ ऐसा ऐतिहासिक बाजार है जहां ‘सबकुछ’ मिलता है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(7)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (7)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अब आप जानना चाहेंगे कि सबकुछ से क्या आशय है? किसी बाजार का वर्णन करते हुए अकसर हमने सुना हैं वहां सूई से लेकर अलमारी तक मिलती है। मतलब जीवनयापन की छोटी आवश्यकता से लेकर बड़ी जरुरतें तक पूरी होंती हैं। लेकिन पटाला बाजार के बारे में कहना चाहूंगा कि यहां जाखिया और बिच्छू घास से लेकर लेटेस्ट एआई गजेट्स तक मिलते हैं।</p>
<p>बिच्छू घास यानी कंडाली का साग एक पौष्टिक पत्तेदार सब्जी है, जिसे बिच्छू घास के पत्तों से बनाया जाता है। इसे उबालकर और स्थानीय मसालों का तड़का लगाकर तैयार किया जाता है। इन्हीं मसालों में से एक जाखिया है जो उत्तराखंड और भारत- नेपाल के तराई क्षेत्रों में पाया जाता है। यह एक तीखा और कुरकुरा मसाला है जिसका उपयोग कढ़ी, दालों और सब्जियों में तड़का लगाने के लिए किया जाता है।</p>
<p>समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (लगभग 5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पटाल बाजार में घूमते हुए रोमांच का अनुभव होना स्वाभाविक है, क्योंकि न केवल यह बाजार अल्मोड़ा शहर के केंद्र में एक लंबी पहाड़ी चोटी पर स्थित है बल्कि यहां से हिमालय की शानदार सफेद दमकती चोटियां नजारे को अद्भुत कर देंती हैं।</p>
<p>दरअसल, अल्मोड़ा का पटाल बाजार अपनी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण न केवल भारत, बल्कि दुनिया के कुछ चुनिंदा बाजारों में गिना जाता है। इसकी तुलना अक्सर यूरोपीय देशों के 'ओल्ड टाउन' और मध्यकालीन बाजारों से की जाती है। उन अंतरराष्ट्रीय बाजारों या शहरों के बारे में भी समझ लेते हैं जहां से मुख्य रूप से पटाल बाजार की तुलना की जाती है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(8)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (8)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>इनमें से एक स्कॉटलैंड स्थित एडिनबर्ग का रॉयल माइल है। पटाल बाजार और स्कॉटलैंड के इस बाजार में काफी समानताएं हैं। रॉयल माइल भी कोबलस्टोन (पत्थरों) से बनी एक लंबी सड़क है, जिसके दोनों ओर पुरानी इमारतें और छोटी-छोटी गलियां हैं। पटाल बाजार की तरह ही यहां का फर्श भी खास तरह के तराशे हुए पत्थरों (पटालों) से बना है।</p>
<p>दूसरा चेक रिपब्लिक की राजधानी प्राग का ओल्ड टाउन है। ओल्ड टाउन स्क्वायर की गलियों में भी पटाल बाजार जैसा अनुभव होता है। यहां की संकरी गलियां पत्थरों से पक्की की गई हैं। पटाल बाजार की तरह यहां भी कई पीढ़ियों पुरानी दुकानें हैं जो शहर की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं।</p>
<p>इसी क्रम में ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग में गेट्राइडेगास है। गेट्राइडेगास एक मशहूर ऐतिहासिक शॉपिंग स्ट्रीट है। पटाल बाजार की तरह यहां भी पैदल चलने वालों के लिए अलग व्यवस्था है और दुकानों के बाहर लगे पुराने स्टाइल के साइनबोर्ड और वास्तुकला इसे अल्मोड़ा के पारंपरिक स्वरूप के नजदीक लाते हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(12)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (12)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>सच पूछिए तो पहाड़ी पत्थर (पटाल) से बनी पटाल बाजार की सड़क दुनिया की उन चुनिंदा सड़कों में से है जहां बारिश के बाद भी पानी नहीं रुकता और फिसलन कम होती है। देश-विदेश स्थित कई ऐतिहासिक बाजारों की तरह पटाल बाजार में भी गाड़ियों का प्रवेश वर्जित है, जिससे इसका शांत और प्राचीन स्वरूप स्थिर रहता है।</p>
<p>पटाल बाजार में विचरण करते हुए दुकानों से ऊपर बने घरों पर नजरें थम सी गई। यहां के पुराने घरों की खिड़कियों पर की गई नक्काशी यूरोप की विक्टोरियन या मध्यकालीन शैली की नक्काशी के समान जटिल और खूबसूरत हैं। दरअसल, पटाल बाजार का स्वरूप इसे यूरोप के मध्यकालीन 'स्ट्रीट मार्केट्स' की श्रेणी में खड़ा करता है, जहां आधुनिकता और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।</p>
<p>वैसे भी मध्य हिमालय के काषाण पर्वत की पीठ पर बसा प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा अपनी खूबियों के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में खासा मशहूर है। इस शहर की विशिष्टताओं में एक है यहां की पटाल (पत्थर) संस्कृति। ऐसा माना जाता है कि कुमाऊं अंचल में इस कला की शुरआत कत्यूरघाटी से हुआ था, लेकिन अल्मोड़ा शहर ने इस कला को इस तरह स्वीकार किया कि यह शहर पटालों के नाम से मशहूर हो गया।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(10)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (10)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>अल्मोड़ा की बाल मिठाई के साथ ही यहां का माल रोड और यहां की पटाल बाजार इस शहर की खास पहचानों में है। पटाल संस्कृति के इस अद्भुत शहर में आज भी जहां नजर पड़ेगी वहां पटाल संस्कृति की कोई ना कोई झलक देखने को मिल जाती है। यहीं कारण है कि अल्मोड़ा में देश-विदेश से लोग घूमने के लिए आते हैं।</p>
<p>इतिहास टटोलें तो पाते हैं कि लगभग बारह सौ साल पहले प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा में एक ऐसी शिल्पकारी जीवंत हुई जिसे हम आज पटाल संस्कृति के नाम से जानते हैं। उस दौर में मुख्य बाजार हो या मोहल्ले मकान की ढालू छत का निर्माण पटालों से किया गया। आंगन में पटाल, प्रवेश मार्ग में पटाल, मकान की खिड़कियों व दरवाजों के ऊपर पटाल, करीब हर जगह पटाल अपनी खूबसूरती बिखेरते थे। मकान और पैदल मार्ग ही नहीं बल्कि प्राचीन मंदिर भी इन पटालों से अछूते नहीं रहे। उस दौर में ही अल्मोड़ा नगर का डेढ़ किमी लंबा आवश्यक वस्तुओं का बाजार भी पटालों से ऐसा पटा कि पटाल बाजार के नाम से प्रसिद्ध हो गया।</p>
<h3><strong>कभी ब्रिटिश हुकूमत बनी गवाह</strong></h3>
<p>सदियों पुरानी पटाल बाजार ब्रिटिश हुकूमत की भी गवाह बनी। चंद राजाओं ने पटालों का भरपूर प्रयोग किया और इस संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया। यही कारण रहा कि पटाल यहां के जनजीवन का अभिन्न अंग बन गए। मकान, पैदल मार्ग, मंदिर, आंगन ही नहीं बल्कि उस दौर में प्राकृतिक जल स्रोतों और नौलों के निर्माण में भी पटालों का ही उपयोग किया जाता रहा।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(11)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (11)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>शनै: शनै: समय बदला और आधुनिकता के दौर में पटालों का स्थान ईंट सीमेंट, रेता, बजरी और सरिया ने ले लिया। फिर भी, अल्मोड़ा में पटाल संस्कृति का दीदार आज भी किया जा सकता है। पटाल संस्कृति की महत्ता इतनी है कि अगर जेहन में पटालों वाले किसी शहर का नाम आए तो वह अल्मोड़ा के अलावा और कोई नहीं हो सकता।</p>
<p>एक वक्त था जबकि अल्मोड़ा के द्वाराहाट, बल्ढोंटी, पेटशाल, सल्ट, गंगोली, क्वारब जैसे अनेक स्थानों पर जंगलों में काफी मात्रा में पटाल पाई जाती थी। वहां से इन्हें खास तकनीक के जरिए लंबी और चौड़ी स्लेटों के रूप में निकाला जाता था। फिर इन्हीं से हर प्रकार का निर्माण कार्य किया जाता था।</p>
<h3><strong>पटाल शिल्पियों का दौर ही निराला था</strong></h3>
<p>पटाल संस्कृति के अस्तित्व में आने के बाद से ही पर्वतीय क्षेत्रों के पटाल शिल्पियों को यहां रोजगार मिला। सदियों तक यहां पटाल शिल्पियों ने अपने हुनर को इन पटालों में तराशा और यहीं कार्य उनकी कई पुश्तों के लिए रोजी रोटी का माध्यम बना। आज भले की पटाल शिल्पियों को आधुनिक तकनीक के कारण अपने इस रोजगार से किनारा करना पड़ा हो लेकिन एक दौर वह भी था कि पटाल शिल्पियों के सामने कोई और टिक नहीं सकता था।</p>
<p>फिलवक्त भले ही क्यों ना निर्माण कार्यों की नई तकनीक सामने आ रही हों। लेकिन पटाल की विशेषताओं का आज भी कोई जवाब नहीं है। एक्सपर्टस बताते हैं कि पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में लकड़ी और पत्थर के मकान काफी उपयुक्त हैं, जिनमें पटाल का खास महत्व रहा है। क्योंकि, पटाल टिकाऊ और मजबूत होने के साथ ही हर मौसम में अनुकूल तासीर देने वाले भी होते हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(13)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (13)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><strong>भूकंप जैसी आपदा में भी अटल हैं पटाल</strong></h3>
<p>इतना ही नहीं, स्वास्थ्य के लिए भी पटाल लाभकारी मानें गए हैं। टूटफूट होने पर पटालों को आसानी से बदला जा सकता है। इसके साथ ही पटाल जल संरक्षण के लिए भी अनुकूल होते हैं। पटालों के जोड़ों से बरसात का पानी पहले धरती में समाता है जिससे भूमि में वाटर-रिचार्ज होता है। पटाल की सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि भूकंप जैसी आपदा में पटाल भवनों को मजबूती भी प्रदान करती है।</p>
<p>नगर के मल्ला जोशी खोला, चीनाखान, तल्ला जोशी खोला, पांडेखोला, दुगालखोला, तल्ला मल्ला दन्या, डुबकिया, चौंसार, कर्नाटकखोला, गुरुरानीखोला, बख्शीखोला आदि मोहल्लों में पुरानी शैली के पटाल के भवन इस संस्कृति को संजो कर रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।</p>
<p>बहरहाल, पहाड़ की अद्भुत पटाल संस्कृति इस कदर निराली है कि आज भी अल्मोड़ा कई क्षेत्रों में पटाल से बने ढाई सौ साल पुराने भवन तमाम संयुक्त परिवारों की एकजुटता के गवाह बने हुए हैं। भले ही नगर का अधिकांश इलाका कंक्रीट के जंगलों सा होता जा रहा हो लेकिन, पटान से बने भवनों का आकर्षण आज भी जस का तस है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/muskan-dixit-(9)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (9)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><strong>बाल मिठाई का इतिहास और विशेषताएं</strong></h3>
<p>अल्मोड़ा जिला अपनी खूबसूरत पहाड़ियों और ठंडी आबोहवा के लिए मशहूर है, लेकिन इन सबसे अलग है यहां की बाल मिठाई जिसने इसे पूरे भारत में पहचान दिलाई है। बाल मिठाई का उद्भव वर्ष 1856 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ माना जाता है, जिसे जोग लाल साह ने तैयार किया था। उस दौर में अल्मोड़ा ब्रिटिश शासन के अधीन था और यहां बड़ी संख्या में सैनिक तैनात रहते थे। माना जाता है कि इस मिठाई को शुरुआत में सैनिकों के लिए बनाया गया, क्योंकि पहाड़ों में उपलब्ध शुद्ध दूध से तैयार खोया लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता था। धीरे-धीरे इसका अनोखा स्वाद लोगों को भाने लगा और यह आम जनमानस में भी लोकप्रिय हो गई। बाल मिठाई की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>देहरादून</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                            <category>अल्मोड़ा</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 13:21:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>Uttrakhand:जंगल में बुझ सके वन्यजीवों की प्यास, टैंकरों से भरे जा रहे नौले और तालाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> मानव वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच लगातार बढ़ रहे तापमान से जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोत नौले, गधेरे, तालाब सूख गए हैं या सूखने की कगार पर हैं। ऐसे में वन्यजीव प्यास बुझाने को जंगलों से बाहर निकलेंगे और टकराव होगा। इसकी रोकथाम के लिए जंगलात ने वाटर टैंकर्स से प्राकृतिक स्रोतों में पानी भर रहा है।</p>
<p>हल्द्वानी वन डिवीजन के अंतर्गत नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य है। वर्ष 2012 में बना और 269 वर्ग किमी में फैले अभ्यारण्य के जंगल नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जिलों तक फैले हुए हैं। इस अभ्यारण्य के जंगलों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580702/to-quench-the-thirst-of-wildlife-in-the-forest--natural-springs-and-ponds-are-being-replenished-using-tankers"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/el1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> मानव वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच लगातार बढ़ रहे तापमान से जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोत नौले, गधेरे, तालाब सूख गए हैं या सूखने की कगार पर हैं। ऐसे में वन्यजीव प्यास बुझाने को जंगलों से बाहर निकलेंगे और टकराव होगा। इसकी रोकथाम के लिए जंगलात ने वाटर टैंकर्स से प्राकृतिक स्रोतों में पानी भर रहा है।</p>
<p>हल्द्वानी वन डिवीजन के अंतर्गत नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य है। वर्ष 2012 में बना और 269 वर्ग किमी में फैले अभ्यारण्य के जंगल नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जिलों तक फैले हुए हैं। इस अभ्यारण्य के जंगलों में नंधौर, सूखी आदि नदियां हैं। इनमें सैकड़ों प्राकृतिक बड़े-छोटे जलस्रोत हैं। गर्मी में ये जल स्रोत सूख जाते हैं। इस बार बारिश की कमी और लगातार तापमान बढ़ने से मई से पूर्व ही जल स्रोत सूखने लगे हैं। </p>
<p>अभ्यारण्य में बाघ, तेंदुए, भालू समेत वन्यजीवों की दर्जनों प्रजातियां हैं। यदि जल स्रोत सूख जाते हैं तो ये वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए जंगलों से बाहर निकल सकते हैं जिससे सीधे तौर पर मानव वन्यजीव टकराव का खतरा बढ़ेगा। जो कि वन्यजीव और मानव दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है। इसकी रोकथाम के लिए वन विभाग ने नंधौर अभ्यारण्य में वाटर होल्स बनाने के साथ ही प्राकृतिक जलस्रोतों में वाटर टैंकर्स से नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है। जब वन्यजीवों को जंगल में ही पानी मिलेगा तो आबादी की ओर रुख नहीं करेंगे और संघर्ष की घटनाएं कम होंगी।</p>
<p>वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल में शिकार होने वाले और शिकार करने वाले शिकारी जानवर होते हैं। अमूमन शिकार होने वाले वन्यजीव जैसे चीतल, सांभर, हिरन वगैरह जलाशयों के पास ही रहते हैं। ऐसे में शिकारी वन्यजीव भी इन जल स्रोतों के पास डेरा डालते हैं क्योंकि उनकी भूख और प्यास शांत हो जाती है। यदि जल स्राेत सूखे होंगे तो शिकार व शिकारी दोनों ही किस्म के वन्यजीवों का संघर्ष बढ़ जाएगा।</p>
<p>डीएफओ  हल्द्वानी वन डिवीजन कुंदन कुमार ने बताया कि जंगलों में वन विभाग के बनाए गए और प्राकृतिक जल स्रोतों में वाटर टैंकर्स से पानी भरा जा रहा है। इसके अतिरिक्त वन कर्मियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी बीटों में जल स्रोतों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखें तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल पानी की आपूर्ति करें। इसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए त्वरित कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:23:22 +0530</pubDate>
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