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                <title>विदेश - Amrit Vichar</title>
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                <description>विदेश RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नेपाल त्रासदी में 300 भारतीय लापता,  कर्नाटक ने जारी किया Google Form, केरल सरकार नागरिकों से कर रही संपर्क</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में आई त्रासदी के बाद 300 भारतीयों के लापता होने की खबर है। कर्नाटक सरकार ने जानकारी जुटाने के लिए Google Form जारी किया है, जबकि केरल सरकार अपने नागरिकों से संपर्क कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/592024/300-indians-missing-nepal-tragedy-karnataka-releases-google-form"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/300-indians-missing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू।</strong> नेपाल में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 177 हो गई है और इस त्रासदी में 300 भारतीय पर्यटकों समेत सैंकड़ों लोग लापता हैं जिनकी तलाश युद्धस्तर पर जारी है। बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद 12 और शव बरामद किए गए, जिससे मृतक संख्या बढ़कर 177 हो गई। करीब 580 पर्यटकों समेत 800 से अधिक लोग लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने एक बयान में कहा कि बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के कुछ हिस्सों में बाढ़ आने के बाद से 826 लोग लापता हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">एनडीआरआरएमए के आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में सुरक्षा बलों के 85 जवान, विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों में काम करने वाले 162 कर्मचारी तथा 579 पर्यटक शामिल हैं। हिमालयी देश नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई। इस बीच, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' ने बृहस्पतिवार को बताया कि चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी तीन लोगों की मौत हुई है और 588 लोग लापता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, रसुवा में दो, नुवाकोट में 12, धादिंग में 27, चितवन में 69, गोरखा में 20, तनहूं में नौ, नवलपरासी पूर्व में 32 और नवलपरासी पश्चिम में छह लोगों की मौत हुई है। जंगल सफारी के लिए प्रसिद्ध प्रमुख पर्यटन स्थल चितवन उन कई इलाकों में शामिल है, जहां बाढ़ का पानी बढ़ने के बीच हाई अलर्ट जारी किया गया है। हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के बहाव में रुकावट पैदा होने के बाद यह बाढ़ आई और सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी स्थित तिमुरे इलाके में बाढ़ का कहर टूटा। </p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि अचानक आई बाढ़ में लापता बताए जा रहे हजारों लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक शामिल हैं। खनाल ने यह भी पुष्टि की कि रसुवा क्षेत्र में हुई इस त्रासदी में 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोगों का अभी पता नहीं चल पाया है। खनाल ने कहा, ''हजारों परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं...हम अब भी आपदा के पूरे स्वरूप का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए बृहस्पतिवार को नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका का दौरा किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लम्साल भी उनके साथ थे। टीम सड़क मार्ग से काठमांडू से बिदुर के लिए रवाना हुई, जो बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक है। बुधवार को रसुवा में भोटेकोशी नदी का पानी बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ था और उसके बाद से शाह बचाव एवं राहत कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के 4 पर्यटक </h3>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र प्रशासन नेपाल के रासुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक आयी बाढ़ के बाद पड़ोसी देश में फंसे राज्य के लोगों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। संबंधित अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने महाराष्ट्र के निवासियों का ठौर-ठिकाना और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिये हैं। विभाग जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। प्रशासन ने कहा कि अब तक महाराष्ट्र के चार पर्यटकों के साथ संपर्क स्थापित किया जा चुका है। इनमें से दो मुंबई एवं दो पुणे के रहने वाले हैं। सभी की स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">असम CM हिमंत शर्मा ने जताई चिंता</h3>
<p style="text-align:justify;">असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर चिंता जताई । उन्होंने कहा कि असम इस मुश्किल घड़ी में पड़ोसी देश के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। बुधवार को नेपाल में आई भीषण बाढ़ में कई लोग, सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक लापता हो गए हैं। इसे हाल के वर्षों में देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">शर्मा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और इससे हुई जनहानि व लोगों की परेशानियों को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं।'' मुख्यमंत्री ने सभी लोगों की सुरक्षा और स्थिति के जल्द सामान्य होने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा, ''इस कठिन समय में असम की जनता नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ी है। हमारी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है और जो इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।''</p>
<h3 style="text-align:justify;">कर्नाटक सरकार ने गूगल फॉर्म भरकर जानकारी देने को कहा </h3>
<p style="text-align:justify;">कर्नाटक सरकार ने नेपाल और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) में अचानक आई बाढ़ तथा सीमा क्षेत्र और आसपास के इलाकों में उत्पन्न अन्य व्यवधानों के कारण फंसे राज्य के लोगों की जानकारी मांगी है। राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह फंसे लोगों का ब्योरा जुटा रहा है ताकि बचाव, सुरक्षित निकासी और अन्य जरूरी सहायता के लिए समन्वय किया जा सके। </p>
<p style="text-align:justify;">विभाग ने कहा, ''फंसे हुए लोगों, उनके परिजनों और यात्रा संचालकों से अनुरोध है कि वे गूगल फॉर्म के जरिए जानकारी उपलब्ध कराएं।'' विभाग ने कहा कि इस जानकारी के आधार पर राज्य सरकार विदेश मंत्रालय, नेपाल में भारतीय दूतावास और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर सकेगी। मदद चाहने वाले लोगों से राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के 1070 या 080-22253707 नंबर पर संपर्क करने को कहा गया है। गूगल फॉर्म पर कर्नाटक सरकार के राजस्व विभाग के राहत आयुक्त, सचिव मनोज कुमार मीणा (आईएएस) के हस्ताक्षर हैं। </p>
<h3 style="text-align:justify;">केरलम के 37 पर्यटक फंसे </h3>
<p style="text-align:justify;">पय्यन्नूर विधायक वी. कुन्हीकृष्णन ने कहा है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के 37 लोग बाढ़ के कारण नेपाल में फंसे हुए हैं। कुन्हीकृष्णन ने बुधवार रात फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने इस मामले को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के संज्ञान में लाया है और पर्यटकों के वर्तमान स्थान का ब्योरा तथा फोन नंबर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विधायक ने कहा कि यह जानकारी पर्यटकों के परिवार के सदस्यों को दे दी गई है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि सभी 37 लोग सुरक्षित हैं।उन्होंने कहा, "हमारी यात्रा पर गए सभी लोगों से बात हुई है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ के बाद केरलम सरकार ने बुधवार रात नेपाल में फंसे पर्यटकों को वापस लाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप शुरू किया। मुख्यमंत्री सतीशन ने केरलम के मुख्य सचिव को विदेश मंत्रालय और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के साथ करीबी समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया, ताकि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकाला जा सके। केरलम सरकार ने नेपाल में फंसे पर्यटकों और राज्य में उनके परिजनों के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने हेतु हेल्पलाइन नंबर 9447111844 और 9747132147 भी जारी किए हैं। </p>
<h3 style="text-align:justify;">बाढ़ प्रभावित सीमावर्ती इलाकों का CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण </h3>
<p style="text-align:justify;">नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बृहस्पतिवार को बगहा, वाल्मीकि नगर, बेतिया और मोतिहारी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी नेपाल से गंडक नदी के रास्ते बाढ़ का पानी बुधवार को बिहार में प्रवेश कर वाल्मीकि नगर बैराज तक पहुंच गया था, जिसके बाद जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए और पूरे राज्य में सतर्कता बरती गई। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "नेपाल में आई बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मैंने बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों बगहा, वाल्मीकि नगर, बेतिया और मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वेक्षण किया। साथ ही संभावित प्रभाव, आवश्यक एहतियाती उपायों, सुरक्षा तथा राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "संबंधित अधिकारियों को पूरी तत्परता और मुस्तैदी के साथ सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।" </p>
<h3 style="text-align:justify;">गंडक में जलस्तर हुआ कम </h3>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, गंडक नदी के जलस्तर में गिरावट आने और वाल्मीकि नगर स्थित गंडक बैराज से पानी छोड़े जाने की मात्रा कम होने के कारण बृहस्पतिवार को बाढ़ की आशंका थोड़ी कम हुई। पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर बैराज से जलप्रवाह बुधवार रात 11 बजे के 1.50 लाख क्यूसेक से घटकर बृहस्पतिवार सुबह 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। जल संसाधन विभाग ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा, "वाल्मीकि नगर स्थित गंडक बैराज से जलप्रवाह बुधवार रात 11 बजे 1.50 लाख क्यूसेक के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, जिसके बाद जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">44 जवान, 28 नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल के 13 कर्मियों से संपर्क नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के आंकड़ों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ में करीब 826 लोग लापता हैं। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सेना के कम से कम 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल के 13 कर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी तरह विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों में काम करने वाले करीब 162 लोग भी लापता हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के बाद 579 पर्यटकों, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, का पता नहीं चल पाया है। इनमें से ज्यादातर तिब्बत में कैलाश मानसरोवर और नेपाल के बागमती प्रांत में गोसाईंकुंड जाने के रास्ते में थे। बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 73 लोग घायल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें रसुवा के 43, नुवाकोट के 27 और धादिंग के तीन लोग शामिल हैं। उनका काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। बाढ़ में मुख्य रूप से मध्य नेपाल में मोटर वाहन गुजरने योग्य 35 पुल, 45 झूला पुल और 40 किलोमीटर पक्की सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">नेपाल-चीन सीमा के पास नदी का बहाव रुका </h3>
<p style="text-align:justify;">एनडीआरआरएमए के अनुसार, रसुवा के तिमुरे इलाके में फंसे 123 लोगों को बचाया गया, जिनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">समाचार पोर्टल 'माई रिपब्लिका' के अनुसार, आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक आकलन है कि हिमस्खलन से नेपाल-चीन सीमा के पास नदी का बहाव रुक गया, जिसके कारण यह बाढ़ आई। आकलन के अनुसार त्रिशुली नदी में आई बाढ़ का कारण ऊपरी धारा में हिमस्खलन का सैलाब आने से ल्हेंदे नदी का मार्ग अवरुद्ध होना था। </p>
<p style="text-align:justify;">'माई रिपब्लिका' की बृहस्पतिवार की खबर के अनुसार, आपदा विशेषज्ञ बसंत राज अधिकारी का भी कहना है कि हिमस्खलन की वजह से ल्हेंदे नदी का बहाव रुक गया और बाढ़ आ गई। कुछ स्थानों पर कीचड़ और चट्टानों के जमा होने से सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि अन्य जगहों पर बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए यातायात रोक दिया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">काठमांडू के नागढुंगा से मुगलिंग तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह काठमांडू को देश के अन्य जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख राजमार्ग है। इसी तरह इलाम जिले के मेची राजमार्ग, कावरे के बीपी राजमार्ग, मकवानपुर के कांती लोकपथ, रसुवा और नुवाकोट के राष्ट्रीय राजमार्ग, धादिंग के पृथ्वी राजमार्ग तथा चितवन और रुकुम वेस्ट में जाजरकोट-डोल्पा सड़क खंड को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात रोक दिया गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/592021/-catastrophe-glacier-collapse-warning-second-major-flood"><span class="t-red">ग्लेशियर टूटने से महाप्रलय, </span>दूसरी बड़ी बाढ़ की चेतावनी; ICIMOD वैज्ञानिकों ने बताई नेपाल की विनाशकारी त्रासदी की पूरी सचाई</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 15:24:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nepal Flood :  जलप्रलय से 177 की मौत; बढ़ सकता है आंकड़ा; क्या चीन रोक सकता था ये तबाही; जानें क्या बोले पूर्व नेपाली NDRRMA प्रमुख </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू। </strong>नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी में अचानक आयी बाढ़ में कम से कम 177 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि करीब 400 लोग लापता हैं। इनमें सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। बाढ़ ने तीन जिलों में बड़े पैमाने पर निजी और सरकारी संपत्ति को तबाह कर दिया और इसे हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक माना जा रहा है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">भोटेकोशी नदी में अचानक आया था पानी</h3>
<p style="text-align:justify;">बताया गया है कि भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के प्रवाह को हिमस्खलन से अवरुद्ध होने के बाद अचानक पानी का भारी दबाव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591997/nepal-floods-162-dead-death-rise-could-china-prevented-devastation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/flood.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू। </strong>नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी में अचानक आयी बाढ़ में कम से कम 177 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि करीब 400 लोग लापता हैं। इनमें सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। बाढ़ ने तीन जिलों में बड़े पैमाने पर निजी और सरकारी संपत्ति को तबाह कर दिया और इसे हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक माना जा रहा है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">भोटेकोशी नदी में अचानक आया था पानी</h3>
<p style="text-align:justify;">बताया गया है कि भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के प्रवाह को हिमस्खलन से अवरुद्ध होने के बाद अचानक पानी का भारी दबाव बना और बाढ़ ने सबसे पहले चीन की सीमा से लगे रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लिया। सैकड़ों लोगों की आबादी वाला यह इलाका देखते ही देखते बह गया और इसके बाद बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ गया। क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण लोगों को किसी बड़ी बाढ़ की आशंका नहीं थी और वे रोजमर्रा के काम में लगे थे। </p>
<h3 style="text-align:justify;">एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ में 9 जलविद्युत परियोजनाएं और नौ वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं तबाह हो गयी हैं। इसके अलावा 19 मोटर योग्य पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गये हैं। निजी और सरकारी संपत्ति को हुए कुल नुकसान का अभी आकलन नहीं हो सका है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">बाढ़ की चपेट में 200 KM तक के इलाके </h3>
<p style="text-align:justify;">नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका-7 के अध्यक्ष रवींद्र नेपाल ने बताया कि सोले से अक्करे बाजार तक सैकड़ों मकान बाढ़ में नष्ट हो गये हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों तक पहुंच गये, लेकिन बड़ी संख्या में बुजुर्ग और बच्चे अभी लापता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय निवासी गोकरण अधिकारी ने बताया कि उनके गांव में लगभग कुछ भी नहीं बचा है और अधिकांश परिचित लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं। आपदा के बाद समय पर चेतावनी नहीं मिलने को लेकर भी सवाल उठे हैं। रसुवा जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार उन्हें तिब्बत से उत्पन्न बाढ़ के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी। </p>
<h3 style="text-align:justify;">नदी में बर्फ व चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीमा पार आपदा की तत्काल सूचना उपलब्ध होती तो जान-माल का नुकसान कम किया जा सकता था। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर प्रारंभिक तौर पर बताया कि रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व, तिब्बत में हिमस्खलन के कारण ल्हेंदे नदी में मलबे के साथ बाढ़ आयी।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व एनडीआरआरएमए प्रमुख अनिल पोखरेल ने कहा कि नेपाल और चीन के बीच ऐसी आपदाओं के लिए सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल आपदा के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे समय रहते जान बचायी जा सके। </p>
<h3 style="text-align:justify;">चीन सांझा करेगा मौसम से जुड़ी अपडेट  </h3>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ के बाद नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग और चीन के मौसम प्रशासन के अधिकारियों के बीच बुधवार को ऑनलाइन बैठक हुई। इसके बाद चीन ने सहमति जताई कि अपनी ओर पानी का स्तर बढ़ने पर वह नेपाल को तत्काल सूचना देगा। नेपाल और चीन ने 2019 में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपात प्रतिक्रिया में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। इसमें सूचना साझा करने, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, प्रशिक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण परियोजनाओं समेत नौ क्षेत्रों में सहयोग का प्रावधान है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/591914/-floods-nepal-rushing-waters-tibet-wash-hydropower-plant"><span class="t-red">नेपाल में बाढ़ से बढ़ी बिहार की मुसीबत: </span>तिब्बत से आए तेज पानी में हाईड्रोपावर प्लांट बहा, गंडक-बूढ़ी गंडक को लेकर अलर्ट</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/591997/nepal-floods-162-dead-death-rise-could-china-prevented-devastation</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 10:28:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में कुदरत का कहर! तिब्बत सीमा से आई सैलाब की लहर ने मचाई तबाही, 46 की मौत; 105 भारतीयों समेत 500 लापता</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटे कोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड से भारी तबाही हुई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 46 लोगों की मौत हो चुकी है और 384 यात्रियों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय और 37 एनआरआई शामिल हैं, जिनमें कई कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591980/nepal-flash-flood-bhote-koshi-46-dead-105-indians-missing"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/nepal0.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>काठमांडू।</strong> तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई जिसमें 46 लोगों की मौत हो गई और 105 भारतीयों समेत करीब 500 लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। इसके बाद बाढ़ धादिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों तक फैल गई, जिससे कम से कम चार स्थायी पुल और कुछ अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गए।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/fnqeiku7rx1n0h_d.mp4" controls=""></video>
<p>प्रारंभिक अध्ययन रिपोर्टों के अनुसार, उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यह बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अस्थिर पहाड़ी चट्टानों के खिसकने से आई। यह स्थान तिब्बत-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि चट्टान खिसकने और नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण तिमुरे में भोटेकोशी के रास्ते भीषण बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक फैल गया। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न जिलों में आई बाढ़ में कम से कम 46 लोगों की मौत हुई है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC.jpg" alt="नेपाल बाढ़"></img></p>
<h5><strong>कैलाश मानसरोवर जा रहे 105 भारतीय लापता</strong></h5>
<p>नेपाल के गृह मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि इनमें धादिंग में छह, नुवाकोट में तीन और रसुवा में एक व्यक्ति की मौत हुई है। करीब 400 लापता लोगों में कम से कम 105 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रतिनिधि सभा में विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर नेपाल की सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी लापता हैं। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में हुई बारिश के कारण नहीं आई थी। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग (एनडीआरआरएमए) ने दोपहर में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि चीनी पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, नदी के अवरुद्ध होने के स्थान पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह नहीं निकला है इसलिए भोटे कोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में खतरा अभी बना हुआ है। प्रभाग ने लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/AHindinews/status/2092620615123644536">https://twitter.com/AHindinews/status/2092620615123644536</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>बाद में दिन में एनडीआरआरएमए ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नदी के अवरुद्ध स्थल पर बनी झील अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है, इसलिए भोटेकोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में खतरा बना हुआ है। लोगों से अगली सूचना जारी होने तक नदी से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने का आग्रह किया जाता है।'' बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित रसुवा है, जो काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में तिब्बत सीमा के पास स्थित है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे वीडियो में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में भारी पैमाने पर तबाही नजर आ रही है।</p>
<p>इस कथित वीडियो में तेज बहाव के साथ एक विशाल लहर को दो मंजिला इमारत के ऊपर से गुजरते और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहाते हुए देखा जा सकता है। कई लोगों को पहले पानी के आने की आवाज सुनकर भागते हुए देखा गया, लेकिन कुछ ही सेकेंड में वे अचानक आई बाढ़ के बाद जमा हुए कीचड़ और मलबे में दब गए। सोशल मीडिया पर भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे स्थित बस्तियों में हुई तबाही की तस्वीरें और वीडियो छाए रहे।</p>
<p>नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद करीब 400 लोग लापता हैं, जिनमें कम से कम 105 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। इनमें से अधिकतर भारतीय तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) के अनुसार, रसुवा में आई बाढ़ के कारण कुल 384 यात्री लापता हुए हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं। एनटीबी ने एक बयान में बताया कि भारतीयों और एनआरआई के अलावा लापता पर्यटक अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के हैं। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्री थे।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/cats204.jpg" alt="cats" width="1280" height="720"></img></p>
<h5><strong>भारतीय दूतावास ने जारी किए आपातकालीन नंबर</strong></h5>
<p>भारतीय दूतावास ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और जानकारी के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। भारतीय दूतावास ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि वह बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के बचाव और राहत के लिए नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। दूतावास ने कहा कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय में बचाव और राहत प्रयासों को और मजबूत किया जा रहा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी सहायता के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर जारी किया है। 'द काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क को बहा ले गयी। अखबार ने सड़क विभाग के उप महानिदेशक एवं प्रवक्ता शुभराज न्यौपाने के हवाले से बताया कि बाढ़ के पानी ने कई स्थानों पर सड़क को नष्ट कर दिया और कई कंक्रीट के पुल भी बह गए।</p>
<p>नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने एक बयान में रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगली सूचना तक अत्यधिक सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की। रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ भयावह थी और दो बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने कहा कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान बह गया। हाल ही में बनाया गया एक पुल भी नष्ट हो गया। यह स्थान तिब्बत और चीन से जुड़े नेपाल के व्यापारिक यातायात को नियंत्रित करता है।</p>
<h5><strong>प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह अध्यक्षता में हुई आपात बैठक</strong></h5>
<p>इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और निर्माणाधीन पांच परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। 'द काठमांडू पोस्ट' ने उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चामेली गुरूंग के हवाले से बताया कि स्याफ्रूबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/gh7xolonw55rp6oy.mp4" controls=""></video>
<h5><strong>बाढ़ के बाद नेपाल सेना ने चलाया बचाव अभियान</strong></h5>
<p>सेना के एक बयान के अनुसार, नेपाल की सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए। रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि नेपाल सेना ने त्रिशूली में सैन्य प्रशिक्षण केंद्र नंबर-1 में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया है, जहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। सेना के एक बयान के अनुसार, आपातकालीन चिकित्सा बचाव दल से लैस एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर भी भेजा गया।  सुरक्षा बलों ने बाढ़ के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे 80 से अधिक लोगों को बचाया।</p>
<p>नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया कि तिमुरे स्थित क्षेत्र पुलिस कार्यालय, स्याफ्रूबेसी पुलिस चौकी और रसुवागढ़ी पुलिस चौकी भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की ने बताया कि बाढ़ के बाद रसुवा से सशस्त्र पुलिस बल के चार जवान लापता हैं। बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए पांच ड्रोन तैनात किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में तीन प्रशिक्षित खोजी कुत्ते भी भेजे गए हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में बाढ़ से हुई जनहानि और संपत्ति के नुकसान पर दुख जताया। पिछले साल भी भोटेकोशी में दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी जिनसे रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।</p>
<p></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/4ol_ikedwomn9mut.mp4" controls=""></video>
<h5><strong>इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ एकजुटता से खड़ा है भारत: राष्ट्रपति मुर्मू </strong></h5>
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही के मद्देनजर अपने नेपाली समकक्ष रामचंद्र पौडेल और पड़ोसी देश के लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ एकजुटता से खड़ा है। मध्य नेपाल के कई जिले बुधवार को तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए जिससे कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई तथा 105 भारतीयों समेत करीब 500 लोग लापता हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 46 शव बरामद किए गए हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि भारत इस आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए नेपाल सरकार के राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग करने को तैयार है।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा, ''मैं आज अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही को लेकर नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और नेपाल के लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। हम इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं।'' अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आने से तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। इसके बाद बाढ़ ने धादिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों को भी अपनी चपेट में ले लिया तथा कम से कम चार स्थायी एवं कुछ अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गए। लापता लोगों में कम से कम 105 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। इनमें से अधिकतर तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:- <a href="https://www.amritvichar.com/article/591914/-floods-nepal-rushing-waters-tibet-wash-hydropower-plant"><span class="t-red">नेपाल में बाढ़ से बढ़ी बिहार की मुसीबत: </span>तिब्बत से आए तेज पानी में हाईड्रोपावर प्लांट बहा, गंडक-बूढ़ी गंडक को लेकर अलर्ट</a></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/591980/nepal-flash-flood-bhote-koshi-46-dead-105-indians-missing</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 20:03:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Chandra Mani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल बाढ़ पर प्रधानमंत्री मोदी ने बलेंद्र शाह से की बात,  बोले- हर मुश्किल घड़ी में साथ खड़ा है भारत</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल स्थित रासुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाढ़ से प्रभावित नेपाल के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात कर भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक पोस्ट में कहा ," प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591970/modi-balendra-shah-flood-talk"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/नई-फोटो-पीएम-मोदी-और-पीएम-बालेंद्र-शाह.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>नेपाल स्थित रासुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाढ़ से प्रभावित नेपाल के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात कर भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक पोस्ट में कहा ," प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भारत की जनता नेपाल में अपने बहनों और भाइयों के साथ एकजुटता से खड़ी है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की टीमें बचाव और राहत प्रयासों के लिए समन्वय कर रही हैं। उन्होंने कहा ,"भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत प्रयासों के लिए निकटता से समन्वय कर रही हैं।" नेपाल-चीन सीमा के पास बुधवार को भूस्खलन और भयानक बाढ़ की घटना में कम से कम 384 पर्यटक और यात्री लापता बताये गये हैं, जबकि आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस घटना से आसपास भारी तबाही हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/591941/142-indian-tourists-missing-in-flash-floods-in-nepal#gsc.tab=0"> नेपाल : अचानक आई बाढ़ में 100 से अधिक भारतीय पर्यटक लापता, पर्यटन बोर्ड ने दी जानकारी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/591970/modi-balendra-shah-flood-talk</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/591970/modi-balendra-shah-flood-talk</guid>
                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:19:46 +0530</pubDate>
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                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9.jpg"                         length="82322"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल : अचानक आई बाढ़ में 100 से अधिक भारतीय पर्यटक लापता, पर्यटन बोर्ड ने दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>नेपाल और तिब्बत की लगती सीमा पर रसुवा में अचानक आई भीषण बाढ़ में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, बताया जा रहा है कि इस बाढ़ में कई गांव बह गए हैं, जिसके कारण नेपाल के कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो करीब 142 भारतीय समेत 291 विदेशी नागरिकों के बाढ़ के बाद कोई जानकारी सामने नहीं आई है, यानी की वह लापता हो गये हैं, इसके अलावा  93 नेपाली नागरिकों के भी लापता होने की भी खबर है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नेपाल के पर्यटन बोर्ड की तरफ से जारी</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591941/142-indian-tourists-missing-in-flash-floods-in-nepal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/बाढ़-की-नई-फोटो.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>नेपाल और तिब्बत की लगती सीमा पर रसुवा में अचानक आई भीषण बाढ़ में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, बताया जा रहा है कि इस बाढ़ में कई गांव बह गए हैं, जिसके कारण नेपाल के कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो करीब 142 भारतीय समेत 291 विदेशी नागरिकों के बाढ़ के बाद कोई जानकारी सामने नहीं आई है, यानी की वह लापता हो गये हैं, इसके अलावा  93 नेपाली नागरिकों के भी लापता होने की भी खबर है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नेपाल के पर्यटन बोर्ड की तरफ से जारी आंकड़ें</strong></p>
<p style="text-align:justify;">वहीं नेपाल के पर्यटन बोर्ड की तरफ से जारी आंकड़ों की मानें रसुवा जिले में बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे भोटे कोशी नदी में आई अचानक विनाशकारी बाढ़ के बाद भारी तबाही हुई है, इस आपदा में अब तक अलग-अलग टूर एजेंसियों के माध्यम से यात्रा कर रहे कुल 384 पर्यटक लापता हो गए है, लापता लोगों में 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली मूल के निवासी शामिल हैं, बोर्ड की तरफ से कहा गया है कि लापता विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय पर्यटकों की है। टूर एजेंसियों से प्राप्त प्रारंभिक रिकॉर्ड के अनुसार, लापता भारतीयों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच चुका है। सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के कुल 71 लापता यात्रियों में से 59 भारतीय नागरिक हैं। लीफ हॉलिडे के 55 यात्रियों में से 46 भारतीय नागरिक हैं, हिमालयन ग्लेशियर के लापता 52 यात्रियों में से 37 प्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इसके अलावा लापता विदेशियों में अमेरिका 3, मलेशिया 17, यूके 12, ऑस्ट्रेलिया 1, नीदरलैंड्स 1 और दक्षिण अफ्रीका 4 के नागरिक भी शामिल हैं।<strong><br /></strong></p>
<p><strong>आपातकालीन सहायता नंबर जारी</strong></p>
<p>नेपाल सरकार ने प्रभावितों और उनके परिजनों की मदद के लिए तत्काल हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।</p>
<p>टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर: 1234 </p>
<p>हॉटलाइन नंबर: 1144 </p>
<p>टूरिस्ट पुलिस: +977-9851289445 </p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-decoration:underline;color:rgb(224,62,45);"><strong><a style="color:rgb(224,62,45);text-decoration:underline;" href="https://ntb.gov.np/en/latest-travel-updates">यदि आप नेपाल बाढ़ या लापता पर्यटकों से जुड़ी कोई विशेष जानकारी चाहते हैं, तो कृपया यहां क्लिक करें</a></strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="text-decoration:underline;color:rgb(224,62,45);"><strong><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1.jpg" alt="नेपाल पर्यटन बोर्ड"></img></strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया दुख</strong></p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया है, उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से हुई क्षति अत्यंत चिंताजनक है। भगवान पशुपतिनाथ से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना है। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश के जनपद महराजगंज और कुशीनगर में गंडक एवं नारायणी नदियों के जलस्तर में वृद्धि तथा बाढ़ की संभावना के दृष्टिगत स्थानीय प्रशासन को पूर्ण सतर्कता बरतने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/myogiadityanath/status/2092558463566262737">https://twitter.com/myogiadityanath/status/2092558463566262737</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सीमावर्ती बस्तियों में भारी तबाही</strong></p>
<p style="text-align:justify;">उत्तरी नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने सीमावर्ती बस्तियों में भारी तबाही मचाई और निचले इलाकों के कई जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। बताया जा रहा है कि पानी तिब्बत की ओर से आया। नेपाल की सेना ने एक बयान में बताया कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और समीपवर्ती स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी नुकसान हुआ तथा वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बिहार में बढ़ी चिंता</strong></p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल की नदियों में बाढ़ के चलते भारतीय क्षेत्र की नदियों पर देखने को मिलता है। वही अब बिहार में बहने वाली गंडक नदी के जलस्तर को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रशासन नदी के आसपास के इलाकों में नजर बनाए रखा है। बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर भी स्थानीय स्तर पर निगरानी में रखा जाना महत्वपूर्ण है। इस खतरे की संभावना के बाद गंडक नदी में जलप्रवाह बढ़ने की आशंका को देखते हुए पश्चिम चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीतामढ़ी, शिवहर समेत अन्य संवेदनशील जिलों को भी लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बिहार में हाई अलर्ट पर प्रशासन </strong></p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुलों, पुलियों तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर कड़ी निगरानी रखने और स्थानीय लोगों को समय रहते अलर्ट रखने के निर्देश दिए। इस बीच, जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों को गंडक बैराज के सभी गेट संचालित करने तथा उपलब्ध जलप्रवाह के सुरक्षित और प्रभावी प्रबंधन के लिए संबंधित नहरों में पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 16:15:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में बाढ़ से बढ़ी बिहार की मुसीबत: तिब्बत से आए तेज पानी में हाईड्रोपावर प्लांट बहा, गंडक-बूढ़ी गंडक को लेकर अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू। </strong>उत्तरी नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने सीमावर्ती बस्तियों में भारी तबाही मचाई और निचले इलाकों के कई जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। </p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पानी तिब्बत की ओर से आया। नेपाल की सेना ने एक बयान में बताया कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और समीपवर्ती स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी नुकसान हुआ तथा वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। </p>
<h3 style="text-align:justify;">बिहार में बढ़ी चिंता</h3>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591914/-floods-nepal-rushing-waters-tibet-wash-hydropower-plant"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/floods-nepal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू। </strong>उत्तरी नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने सीमावर्ती बस्तियों में भारी तबाही मचाई और निचले इलाकों के कई जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। </p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पानी तिब्बत की ओर से आया। नेपाल की सेना ने एक बयान में बताया कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और समीपवर्ती स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी नुकसान हुआ तथा वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। </p>
<h3 style="text-align:justify;">बिहार में बढ़ी चिंता</h3>
<p style="text-align:justify;">नेपाल की नदियों में बाढ़ के चलते भारतीय क्षेत्र की नदियों पर देखने को मिलता है। वही अब बिहार में बहने वाली गंडक नदी के जलस्तर को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रशासन नदी के आसपास के इलाकों में नजर बनाए रखा है। बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर भी स्थानीय स्तर पर निगरानी में रखा जाना महत्वपूर्ण है। इस खतरे की संभावना के बाद गंडक नदी में जलप्रवाह बढ़ने की आशंका को देखते हुए पश्चिम चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीतामढ़ी, शिवहर समेत अन्य संवेदनशील जिलों को भी लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">बिहार में हाई अलर्ट पर प्रशासन </h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुलों, पुलियों तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर कड़ी निगरानी रखने और स्थानीय लोगों को समय रहते अलर्ट रखने के निर्देश दिए। इस बीच, जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों को गंडक बैराज के सभी गेट संचालित करने तथा उपलब्ध जलप्रवाह के सुरक्षित और प्रभावी प्रबंधन के लिए संबंधित नहरों में पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों को तटबंधों तथा अन्य जल प्रबंधन संरचनाओं की चौबीसों घंटे निगरानी करने और किसी भी संभावित खतरे की तत्काल सूचना देने को कहा गया है। मुख्य सचिव अमृत ने बताया कि एहतियाती कदम के तौर पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के अतिरिक्त संसाधनों को जुटाया जा रहा है। एक एनडीआरएफ टीम को गोपालगंज भेजने के निर्देश दिए गये हैं, जबकि दूसरी टीम को मुजफ्फरपुर में स्टैंडबाय पर रखा जाएगा। बेतिया में भी करीब दो घंटे के भीतर एनडीआरएफ टीम की आवाजाही और तैनाती सुनिश्चित करने की कार्रवाई की जा रही है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">तिब्बत से आया सैलाब </h3>
<p style="text-align:justify;">रसुवा जिला काठमांडू के उत्तर-पूर्व में स्थित है और तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा के नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगले आदेश तक अत्यधिक सर्तक रहने और सुरक्षा उपाय करने की अपील की है। </p>
<p style="text-align:justify;">रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से अधिक था और दोनों बस्तियों को काफी नुकसान हुआ है। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान पानी में बह गए। हाल में बनाया गया एक पुल भी बह गया। </p>
<h2 style="text-align:justify;">सेना ने संभाला मोर्चा</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि भीषण बाढ़ को देखते हुए बचाव और राहत अभियान तेज करने के लिए रसुवा और आसपास के इलाकों में नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बाढ़ के बाद की स्थिति पर चर्चा करने और उससे निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा रही है। </p>
<h2 style="text-align:justify;">त्रिशूली में बढ़ा जलस्तर</h2>
<p style="text-align:justify;">नेपाल सेना ने त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। सेना ने एक बयान में बताया कि आपातकालीन चिकित्सा बचाव दल से लैस एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर रवाना किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, नेपाल सेना ने कहा कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं हुआ है और नुकसान से संबंधित आंकड़े जुटाने का काम जारी है। ठीक एक साल पहले भोटेकोशी में आई बाढ़ में भारी तबाही हुई थी और रसुवा में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में हुई बारिश के कारण नहीं आई है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/591808/india-china-resolve-border-dispute-major-meeting-ajit-doval-wang-yi"><span class="t-red">भारत-चीन मिलकर सुलझाएंगे सीमा विवाद, </span>अजित डोभाल और वांग यी की बड़ी मीटिंग; जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/591914/-floods-nepal-rushing-waters-tibet-wash-hydropower-plant</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 13:47:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश से लेकर विदेश तक छाया योगी सरकार का निपुण मॉडल, गाजियाबाद पहुंचे पांच देशों के प्रतिनिधि</title>
                                    <description><![CDATA[केन्या, ब्राजील, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और सेनेगल के करीब 70 प्रतिनिधियों ने गाजियाबाद के 11 परिषदीय स्कूलों का किया दौरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591849/yogi-government-nipun-model-five-countries-delegation-ghaziabad"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/yogi-government&#039;s-nipun-model--(1).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा और बच्चों की सीखने की क्षमता मजबूत करने के प्रयास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अध्ययन का विषय बन रहे हैं। निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) सुधारों को समझने के लिए केन्या, ब्राजील, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और सेनेगल के करीब 70 वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों का दल गाजियाबाद पहुंचा।</p>
<p style="text-align:justify;">23 से 27 अगस्त तक चल रहे पीयर-लर्निंग इमर्शन कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल ने गाजियाबाद के नगर, राजापुर, लोनी और मुरादनगर ब्लॉकों के 11 परिषदीय विद्यालयों का दौरा किया। प्रतिनिधियों ने कक्षाओं में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) और राज्य संसाधन समूह के अधिकारियों से संवाद कर जमीनी स्तर पर हो रहे बदलावों को समझा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नीति से कक्षा तक की प्रक्रिया देखी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने जाना कि निपुण भारत मिशन के तहत तैयार नीतियों और एफएलएन सुधारों को कक्षा स्तर पर किस तरह लागू किया जा रहा है। शिक्षण सामग्री, शिक्षक सहयोग, बच्चों के आकलन और सीखने के परिणामों पर भी जानकारी ली गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>शिक्षा विभाग के साथ तकनीकी चर्चा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विद्यालयों के दौरे के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी चर्चा हुई। इसमें गाजियाबाद के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और राज्य संसाधन समूह के सदस्य शामिल हुए। चर्चा में पाठ्यक्रम, अध्ययन उद्देश्यों, संरचित शिक्षण-अधिगम सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शन एवं मेंटरिंग, आकलन और आंकड़ों के उपयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। सुधारों को बड़े स्तर पर लागू करने में मिडिल टीयर की भूमिका पर भी चर्चा की गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अंतरराष्ट्रीय साझा सीख का मंच बना दौरा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम का उद्देश्य निपुण भारत मिशन के तहत एफएलएन सुधारों को समझना और विभिन्न देशों के अनुभव साझा करना है। प्रतिनिधियों ने कक्षा शिक्षण का प्रत्यक्ष अवलोकन कर भारत के अनुभवों को समझा।</p>
<p style="text-align:justify;">लाइटहाउस इंडिया इमर्शन कार्यक्रम की मेजबानी सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन कर रहा है। सेंट्रो लेमन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन सहयोगी हैं, जबकि ग्लोबल स्कूल फोरम, ऑप्टिमा और गेट्स फाउंडेशन इसका वित्तपोषण कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/591817/up-government-jobs-2026-yogi-1-lakh-more-appointments"><span class="t-red">UP में 1 लाख सरकारी नौकरियों का बड़ा ऐलान,</span> CM योगी बोले- अगले 6 महीने में मिलेंगे नियुक्ति-पत्र</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>मेरठ</category>
                                            <category>गाजियाबाद</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/591849/yogi-government-nipun-model-five-countries-delegation-ghaziabad</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 18:11:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-चीन मिलकर सुलझाएंगे सीमा विवाद,  अजित डोभाल और वांग यी की बड़ी मीटिंग; जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग।</strong> राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों में सुधार को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की। यह वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत की संभावित यात्रा को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर मतभेद प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता के लिए निर्धारित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591808/india-china-resolve-border-dispute-major-meeting-ajit-doval-wang-yi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/meeting-between-ajit-doval-and-wang-yi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीजिंग।</strong> राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों में सुधार को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की। यह वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत की संभावित यात्रा को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर मतभेद प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता के लिए निर्धारित विशेष प्रतिनिधि हैं। यह व्यवस्था वर्ष 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद के व्यापक समाधान के लिए स्थापित की गई थी। </p>
<h3 style="text-align:justify;">चीन के उपराष्ट्रपति हान से मिले डोभाल</h3>
<p style="text-align:justify;">वार्ता से पहले सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। भारतीय दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के बीच हुई बातचीत में सीमा क्षेत्रों में शांति व स्थिरता मजबूत करने तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। </p>
<p style="text-align:justify;">डोभाल की चीन के उपराष्ट्रपति के साथ यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25 वें दौर की वार्ता से पहले हुई। दूतावास ने बताया कि  डोभाल और उपराष्ट्रपति हान ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप, सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता को मजबूत करने तथा आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की। डोभाल चीन के विदेश मंत्री और सीमा मामलों चर्चा के लिए पर चीन के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ वार्ता के लिए चीन की यात्रा पर हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गलवान घाटी विवाद के बाद से तनाव पूर्ण माहौल  </h3>
<p style="text-align:justify;">साल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दिल्ली और बीजिंग के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों ने संबंधों को स्थिर करने के लिए कदम उठाए हैं। विशेष प्रतिनिधि स्तरीय वार्ता की इस व्यवस्था से सीमा विवाद को हल करने में सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी इसे विभिन्न मुद्दों पर बार-बार उभरने वाले तनाव से निपटने के लिए एक उपयोगी माध्यम मानते हैं। </p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत आने के सवाल को किया था दरकिनार </h3>
<p style="text-align:justify;">चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की घोषणा की। लेकिन जब उनसे शी चिनफिंग की भारत यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया। शी की भारत यात्रा के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात का अवसर मिल सकता है। इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़ी पहलों पर चर्चा कर सकते हैं। </p>
<h3 style="text-align:justify;">SCO 2025 में मिले थे शी और मोदी </h3>
<p style="text-align:justify;">मोदी और शी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी। विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के बारे में लिन ने कहा कि डोभाल और वांग सीमा विवाद के साथ-साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी गहन चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता सीमा विवाद पर चीन और भारत के बीच बातचीत का "मुख्य माध्यम" है। </p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, यह दोनों देशों के बीच साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। लिन ने कहा कि पिछले साल अगस्त में चीन और भारत के बीच 24वें दौर की वार्ता हुई थी जिसमें दोनों पक्षों ने सीमा विवाद पर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श किया था। उन्होंने कहा कि इस दौर की वार्ता में भी दोनों पक्ष सीमा विवाद पर गहन संवाद जारी रखेंगे और दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी साझा समझ की भावना के अनुरूप सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों तथा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने पर की चर्चा </h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी</p>
<h5 style="text-align:justify;"><br />ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/591788/indian-students-losing-interest-us-colleges--15--drop-undergraduate-admissions"><span class="t-red">अमेरिकी कॉलेजों से भारतीय छात्रों का मोह भंग, </span>UG एडमिशन में 15% की गिरावट; सामने आई ये बड़ी वजह </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/591808/india-china-resolve-border-dispute-major-meeting-ajit-doval-wang-yi</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 15:22:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी कॉलेजों से भारतीय छात्रों का मोह भंग,   UG एडमिशन में 15% की गिरावट; सामने आई ये बड़ी वजह </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> आव्रजन नीतियों में सख्ती के बीच अमेरिका के कॉलेजों में दाखिले के इच्छुक भारतीय छात्रों की संख्या 2025-26 में उससे पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। एक गैर-लाभकारी संगठन की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। एक हजार से अधिक शिक्षण संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'कॉमन ऐप' द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदनों की कुल संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन एक मार्च तक अंतरराष्ट्रीय आवेदकों की संख्या में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है जो अब तक की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591788/indian-students-losing-interest-us-colleges--15--drop-undergraduate-admissions"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/indian-students-losing-interest-in-us-colleges.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> आव्रजन नीतियों में सख्ती के बीच अमेरिका के कॉलेजों में दाखिले के इच्छुक भारतीय छात्रों की संख्या 2025-26 में उससे पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। एक गैर-लाभकारी संगठन की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। एक हजार से अधिक शिक्षण संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'कॉमन ऐप' द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदनों की कुल संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन एक मार्च तक अंतरराष्ट्रीय आवेदकों की संख्या में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">दाखिले घटने की सामने आई ये वजह</h3>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में बताया गया कि भारत से आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। अमेरिका में पढ़ाई के लिए आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में सबसे अधिक संख्या भारत से होती है। इससे पहले, शिक्षाविदों के एक संगठन की रिपोर्ट में कहा गया था कि कड़े वीजा नियमों और नीतिगत अनिश्चितता के कारण 2026 के आगामी सत्र में अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिले में करीब 1.1 लाख की कमी आने की आशंका है। </p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसा क्यों हो रहा है ? </h3>
<p style="text-align:justify;">'नाफ्सा' (एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल एजुकेटर्स) और शोध संस्था 'जेबी इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या अनुमानित 11.69 लाख थी। इस वर्ष यह संख्या घटकर 10.57 लाख रह जाने का अनुमान है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में भारत के 3.63 लाख से अधिक छात्रों ने अमेरिका के विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में अमेरिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था में 41.77 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया था, जबकि 2026-27 में यह योगदान घटकर 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। जुलाई में अमेरिकी सरकार ने नए नियम अधिसूचित किए हैं। इनके तहत छात्र और 'विजिटर' वीजा के लिए पारंपरिक रूप से तय की जाने वाली 'प्रवास अवधि' को समाप्त कर अधिकतम चार वर्ष की अवधि निर्धारित की गई थी। </p>
<h3 style="text-align:justify;">अमेरिका क्यों नहीं जा रहे भारतीय छात्र?</h3>
<p style="text-align:justify;">यह अवधि आमतौर पर किसी शैक्षणिक पाठ्यक्रम की सामान्य अवधि के अनुरूप है। इसके अलावा, अमेरिका उन विदेशी छात्रों पर एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने पर भी विचार कर रहा है, जो स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने के लिए वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) कार्यक्रम का लाभ लेना चाहते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/591706/us-ambassador-s--no-questions--claim--foreign-ministry--full-story"><span class="t-red">अमेरिकी राजदूत के ‘No Questions’ दावे पर घमासान, </span>विदेश मंत्रालय ने बताई पूरी कहानी</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/591788/indian-students-losing-interest-us-colleges--15--drop-undergraduate-admissions</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 12:59:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPI के 10 साल: 1.78 करोड़ से 24 हजार करोड़ पार हुआ ट्रांजैक्शन, भारत के डिजिटल पेमेंट की बदल गई तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[25 अगस्त 2016 को शुरू हुआ UPI आज भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है। FY 2025-26 में इसके जरिए 24,161.69 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू 314.23 लाख करोड़ रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591760/upi-10-years-24161-crore-transactions-314-lakh-crore-digital-payment-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/10-years-of-upi-(4).png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल डेस्क लखनऊ: </strong>एक दशक पहले भारत ने सिर्फ एक नया पेमेंट सिस्टम शुरू नहीं किया था, बल्कि डिजिटल भुगतान की ऐसी व्यवस्था की नींव रखी, जिसने आम लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों तक के पैसे के लेनदेन का तरीका बदल दिया। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने 10 साल की यात्रा में अभूतपूर्व विस्तार हासिल किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/10-years-of-upi-(2).png" alt="10 years of UPI (2)" width="1280" height="720"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, FY 2016-17 में UPI के जरिए करीब 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। FY 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,161.69 करोड़ हो गया। यानी एक दशक में सालाना ट्रांजैक्शन वॉल्यूम करीब 13,500 गुना बढ़ा। वहीं, लेनदेन की कुल वैल्यू FY 2016-17 के करीब 0.07 लाख करोड़ से बढ़कर FY 2025-26 में 314.23 लाख करोड़ हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/finance-ministry.jpg" alt="finance ministry" width="604" height="239"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>10 साल में कैसे बदली डिजिटल पेमेंट की तस्वीर?</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय निगरानी में शुरू किया था। इसके जरिए अलग-अलग बैंकों के खातों के बीच मोबाइल से तुरंत पैसे भेजना और लेना आसान हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धीरे-धीरे QR कोड आधारित भुगतान, दुकानों पर डिजिटल पेमेंट और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच तत्काल रकम ट्रांसफर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/finance-ministry.jpg-1.jpg" alt="finance ministry.jpg 1" width="595" height="222"></img>
UPI Annual Transaction Volume in Crore (Till 31st July 2026) (Source: Finance Ministry)

<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज UPI का इस्तेमाल सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे कारोबारियों तक बड़े पैमाने पर हो रहा है। QR कोड के जरिए एक छोटा दुकानदार भी डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकता है और ग्राहक से सीधे भुगतान हासिल कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/10-years-of-upi-(1).png" alt="10 years of UPI (1)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>FY 2025-26 में 314.23 लाख करोड़ का लेनदेन</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">UPI की मौजूदा पहुंच को इसके लेनदेन के आंकड़ों से समझा जा सकता है। FY 2025-26 में UPI पर 24,161.69 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। इनकी कुल वैल्यू ₹314.23 लाख करोड़ रही। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरान रोजाना औसतन करीब 66 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि देश में डिजिटल भुगतान के लिए UPI किस स्तर तक लोगों की पसंद बन चुका है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>55.49 करोड़ यूजर्स और 6.5 करोड़ व्यापारी जुड़े</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जून 2026 तक UPI प्लेटफॉर्म पर 55.49 करोड़ से ज्यादा यूजर्स जुड़े थे। वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक UPI करीब 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवाएं दे रहा है। एक ही प्लेटफॉर्म पर 731 बैंक जुड़े हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसका मतलब है कि UPI अब केवल पैसे भेजने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि भारत के बड़े डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बन चुका है।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/finance-ministry.jpg-2.jpg" alt="finance ministry.jpg 2" width="604" height="299"></img>
An infographic showing the rise of the number of banks Live on UPI over the years (Source: Finance Ministry)

<h5 style="text-align:justify;"><strong>दुकानदार से लेकर परिवार तक, बदली भुगतान की आदत</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">UPI की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल इसके बड़े-बड़े आंकड़े नहीं हैं। इसने डिजिटल भुगतान को आम जिंदगी में बेहद आसान बनाया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एक स्ट्रीट वेंडर QR कोड लगाकर डिजिटल पेमेंट स्वीकार कर सकता है। छोटा कारोबारी बिना नकदी के ग्राहक से भुगतान ले सकता है। वहीं परिवार का कोई सदस्य देश के दूसरे हिस्से में मौजूद रिश्तेदार को कुछ सेकंड में पैसे भेज सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यानी जिस डिजिटल तकनीक को कभी जटिल माना जाता था, वह अब चाय की दुकान, सब्जी बाजार, किराना स्टोर से लेकर बड़े कारोबार तक रोजमर्रा के भुगतान का हिस्सा बन चुकी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>P2M भुगतान में UPI का बड़ा रोल</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">UPI के आंकड़े बताते हैं कि इसका इस्तेमाल बड़ी संख्या में छोटे और रोजमर्रा के भुगतानों के लिए किया जाता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का करीब 63 प्रतिशत हिस्सा हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 71 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। इससे पता चलता है कि UPI एक तरफ छोटे खुदरा भुगतान का बड़ा माध्यम है, तो दूसरी तरफ लोगों के बीच अपेक्षाकृत बड़े फंड ट्रांसफर के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/10-years-of-upi.png" alt="10 years of UPI" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>दुनिया के रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में भारत की बड़ी हिस्सेदारी</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">UPI की सफलता अब भारत तक सीमित नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में दुनिया के रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत रही। सरकार इसे लेनदेन की संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यानी भारत ने डिजिटल पेमेंट के मामले में सिर्फ घरेलू स्तर पर विस्तार नहीं किया, बल्कि UPI को वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण डिजिटल पेमेंट मॉडल के रूप में स्थापित किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/10-years-of-upi-(3).png" alt="10 years of UPI (3)" width="1280" height="720"></img></p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>11 देशों तक पहुंचा भारत का UPI</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">Made-in-India UPI अब विदेशों में भी इस्तेमाल हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, UPI सेवाएं 11 विदेशी देशों में उपलब्ध हैं। इनमें भूटान, सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, कतर, ग्रीस और कंबोडिया समेत अन्य देश शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस अंतरराष्ट्रीय विस्तार से भारतीय यात्रियों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी सीमा पार डिजिटल भुगतान की सुविधा बढ़ी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>UPI सिर्फ तकनीक नहीं, वित्तीय समावेशन का जरिया</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">UPI की 10 साल की यात्रा को केवल ट्रांजैक्शन के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। इसकी बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने डिजिटल पेमेंट को समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए भुगतान करने की सुविधा ने छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद की है। इसी वजह से UPI को भारत के Digital Public Infrastructure (DPI) के महत्वपूर्ण स्तंभों में गिना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">10 साल में UPI की कहानी यह दिखाती है कि जब तकनीक को सरल बनाकर बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाया जाता है, तो वह सिर्फ भुगतान का तरीका नहीं बदलती, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में लोगों की भागीदारी का तरीका भी बदल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a class="post-title-lg" href="https://www.amritvichar.com/article/591755/sugar-price-hike-modi-government-changes-raw-sugar-import-trq-rules"><span class="t-red">चीनी की कीमतों में उछाल के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला, </span>कच्ची चीनी के इम्पोर्ट के नियम बदले</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a class="post-title" href="https://www.amritvichar.com/article/591730/itr-filing-last-date-31-august-2026-income-tax-department-alert"><span class="t-red">31 अगस्त से पहले ITR दाखिल करें: </span>आयकर विभाग ने गैर-ऑडिट करदाताओं को किया अलर्ट, जानें कौन-सा फॉर्म आपके लिए</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 11:09:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Malaysia से पकड़े गए 3 भारतीय गैंगस्टर, भारत लाकर पुलिस ने किया गिरफ्तार; Bambiha Gang से जुड़े हैं आरोपी</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई में मलेशिया से तीन फरार आरोपियों को भारत लाया गया। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2026 में अब तक 51 कुख्यात अपराधियों को विदेश से वापस लाने में मदद की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591711/malaysia-three-indian-gangsters-bambiha-gang-arrested-brought-to-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/malaysia-indian-gangsters.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली: </strong>भारतीय एजेंसियों ने मलेशिया में कार्रवाई कर तीन फरार भारतीय गैंगस्टरों को पकड़ने के बाद भारत वापस लाया है। भारत पहुंचने पर तीनों को पुलिस हिरासत में सौंप दिया गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों की पहचान जसप्रीत सिंह उर्फ बहबल, अजय सिंह और पवनदीप सिंह के रूप में हुई है। तीनों के कथित तौर पर बंबीहा गैंग से जुड़े होने और कई गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल होने की बात कही गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सुरक्षित भारत’ के विजन के तहत भारतीय एजेंसियां विदेशों में छिपे कुख्यात अपराधियों को भारत वापस लाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं। मंत्रालय के मुताबिक, 2026 में अब तक 51 कुख्यात अपराधियों को भारत वापस लाने में मदद की गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मलेशिया से भारत लाकर पंजाब पुलिस को सौंपा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के डीजीपी के मुताबिक, तीनों आरोपियों को मलेशिया से निर्वासित किए जाने के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्हें जांच के लिए पंजाब लाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपियों में जसप्रीत सिंह उर्फ बहबल फरीदकोट का रहने वाला बताया गया है, जबकि अजय सिंह और पवनदीप सिंह राजस्थान के श्रीगंगानगर के निवासी बताए गए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हत्या, वसूली और विस्फोटक से जुड़े आरोप</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी दविंदर बंबीहा गैंग से जुड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं। इनके खिलाफ हत्या, जबरन वसूली, सीमा पार हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, विस्फोटक पदार्थों की आपूर्ति समेत कई गंभीर आरोप बताए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन पर लुधियाना में हैंड ग्रेनेड हमले की कथित साजिश और नाकाम कोशिश से जुड़े होने का भी आरोप है। पुलिस ने इस मामले के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने की बात भी कही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कई महीनों से चल रही थी निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (खुफिया) अमित प्रसाद के अनुसार, इन भगोड़े आरोपियों का निर्वासन और गिरफ्तारी खुफिया एजेंसियों की लगातार कार्रवाई का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यह अभियान पिछले कई महीनों से चल रहा था और इस दौरान विदेशों में मौजूद भगोड़े अपराधियों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पंजाब डीजीपी ने दिया था सख्त संदेश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">19 अगस्त को पंजाब के डीजीपी ने कहा था कि पंजाब पुलिस अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि भगोड़े अपराधी दुनिया में कहीं भी छिपे हों, उन्हें तलाश कर कानून के दायरे में लाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 17:10:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राजदूत के ‘No Questions’ दावे पर घमासान,  विदेश मंत्रालय ने बताई पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में हुई बैठक से पहले मीडिया से बातचीत नहीं करने के भारत के अनुरोध संबंधी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान के मद्देनजर सरकारी सूत्रों ने सोमवार को कहा कि नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर पहले से चर्चा करना सामान्य प्रक्रिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हाल में कहा कि ट्रंप और मोदी की फ्रांस में बैठक से पहले नयी दिल्ली ने अमेरिकी पक्ष से कहा था कि भारत बैठक के बाद मीडिया से बातचीत नहीं चाहता। मोदी और ट्रंप ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591706/us-ambassador-s--no-questions--claim--foreign-ministry--full-story"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/us-ambassador&#039;s-‘no-questions’.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में हुई बैठक से पहले मीडिया से बातचीत नहीं करने के भारत के अनुरोध संबंधी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान के मद्देनजर सरकारी सूत्रों ने सोमवार को कहा कि नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर पहले से चर्चा करना सामान्य प्रक्रिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हाल में कहा कि ट्रंप और मोदी की फ्रांस में बैठक से पहले नयी दिल्ली ने अमेरिकी पक्ष से कहा था कि भारत बैठक के बाद मीडिया से बातचीत नहीं चाहता। मोदी और ट्रंप ने 17 जून को फ्रांस में जी7 (सात देशों के समूह) शिखर सम्मेलन से इतर बातचीत की थी। </p>
<p style="text-align:justify;">गोर ने 'इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम' में कहा कि विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी पक्ष से कहा था कि भारत बैठक के बाद दोनों नेताओं की मीडिया से बातचीत नहीं चाहता। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि ट्रंप इस अनुरोध को भूल गए और मोदी के साथ बैठक के बाद करीब 45 मिनट तक चली मीडिया वार्ता के दौरान उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए। </p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों ने कहा कि नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहले उनकी व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा होना सामान्य बात है। एक सूत्र ने कहा, ''किसी भी अति विशिष्ट व्यक्ति (वीवीआईपी) की यात्रा से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा करना सामान्य प्रक्रिया है।'' सूत्र ने कहा, ''इसी सिलसिले में भारतीय पक्ष ने ऐसी यात्राओं को लेकर अपनी सामान्य प्रक्रिया से अवगत कराया था।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/591466/indian-youth-accused--money-mule---us-court-arrested-canada"><span class="t-red">भारतीय युवक पर मनी म्यूल का आरोप, </span>अमेरिकी अदालत ने धोखाधड़ी में कनाडा से किया अरेस्ट</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 16:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>

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