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                <title>विदेश - Amrit Vichar</title>
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                <description>विदेश RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> Quad Summit 2026:  दिल्ली में Quad का महासम्मेलन, भारत के निमंत्रण पर आ रहे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बहुप्रतीक्षित बैठक आगामी 26 मई को यहां होगी, जिसमें शामिल होने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि बैठक में मुक्त और खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य पारस्परिक महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचार करेंगे। </p>
<h4 style="text-align:justify;">मेजबानी के लिए तैयार भारत </h4>
<p style="text-align:justify;">वक्तव्य में कहा गया है कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर सुश्री पेनी वोंग, श्री मोतेगी तथा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582810/quad-summit-2026--quad-summit-to-be-held-in-delhi--foreign-ministers-of-the-us--australia--and-japan-to-attend"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(25)16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बहुप्रतीक्षित बैठक आगामी 26 मई को यहां होगी, जिसमें शामिल होने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि बैठक में मुक्त और खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य पारस्परिक महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचार करेंगे। </p>
<h4 style="text-align:justify;">मेजबानी के लिए तैयार भारत </h4>
<p style="text-align:justify;">वक्तव्य में कहा गया है कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर सुश्री पेनी वोंग, श्री मोतेगी तथा श्री रुबियो क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली की आधिकारिक यात्रा करेंगे। मंत्रालय ने कहा है कि सभी सदस्य देश मुक्त और खुले हिन्द-प्रशांत के लिए क्वाड की परिकल्पना के अनुरूप पिछले वर्ष एक जुलाई को वॉशिंगटन में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे। वे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हिंद-प्रशांत पर चर्चा की उम्मीद</h4>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा सदस्य मौजूदा क्वाड पहलों की प्रगति की समीक्षा करेंगे, तथा हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य पारस्परिक महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचार करेंगे। यात्रा के दौरान, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों तथा अमेरिका के विदेश मंत्री के विदेश मंत्री डॉ जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट करने की भी संभावना है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, भारत में अमेरिका के दूतावास ने कहां है कि अमेरिका स्वतंत्र और खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के लिए एकजुटता के साथ खड़ा है। दूतावास ने कहा है कि रबियो की भारत यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, " एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए साथ खड़े हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा को समर्थन देने से लेकर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने तक विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत की आगामी यात्रा क्वाड साझेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।" उल्लेखनीय है कि क्वॉड की बैठक पिछले काफी समय से टलती आ रही थी। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इस बैठक का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582688/stop-preaching-on-kashmir----a-history-stained-by-genocide--india-holds-up-a-mirror-to-pakistan-at-the-unsc"><span class="t-red">कश्मीर पर न दें ज्ञान... नरसंहार से कलंकित इतिहास,  </span>UNSC में भारत ने पाकिस्तान को दिखाया आईना </a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582810/quad-summit-2026--quad-summit-to-be-held-in-delhi--foreign-ministers-of-the-us--australia--and-japan-to-attend</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/582810/quad-summit-2026--quad-summit-to-be-held-in-delhi--foreign-ministers-of-the-us--australia--and-japan-to-attend</guid>
                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:15:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामयिकी : चाबहार बंदरगाह के विकास पर ईरान की उम्मीदें </title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats374.jpg" alt="cats" width="134" height="136" />
<strong>प्रमोद भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p>  </p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ईरान में भारत के सहयोग से निर्माणाधीन चाबहार बंदरगाह को एक सुनहरे दरवाजे और सहयोग का प्रतीक बताते हुए उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह को विकसित करना जारी रहेगा। भारत ही इस क्षेत्र में प्रभावशाली रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के बाद नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में ठहरे थे। यहीं उनकी विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई द्विपक्षीय वार्ता में यह बात निकलकर आई है।</p>
<p>अराघची ने इस बंदरगाह के विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582763/current-affairs--iran-s-hopes-for-the-development-of-chabahar-port"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats373.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats374.jpg" alt="cats" width="134" height="136"></img>
<strong>प्रमोद भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p> </p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ईरान में भारत के सहयोग से निर्माणाधीन चाबहार बंदरगाह को एक सुनहरे दरवाजे और सहयोग का प्रतीक बताते हुए उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह को विकसित करना जारी रहेगा। भारत ही इस क्षेत्र में प्रभावशाली रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के बाद नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में ठहरे थे। यहीं उनकी विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई द्विपक्षीय वार्ता में यह बात निकलकर आई है।</p>
<p>अराघची ने इस बंदरगाह के विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना में सुस्ती आ गई है, लेकिन मुझे विश्वास है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और फिर इस आवागमन मार्ग के रूप में यूरोप तक पहुंचने का सुनहरा दरवाजा साबित होगा। साथ ही यूरोपीय लोगों, मध्य-एशियाई लोगों और अन्य लोगों के लिए हिंद महासागर तक पहुंचने का भी माध्यम बनेगा। यह रणनीतिक दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह है। ईरान और भारत के अलावा अन्य देशों के लोगों के लिए भी यह बंदरगाह उपयोगी साबित होगा। मुझे उम्मीद है कि भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना को पूरा करेगा, ताकि अन्य देश भी इसका लाभ उठा सकें। अराघची ने यहां तक कहा कि भारत ही वह देश है, जो पश्चिम एशिया में शांति के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।</p>
<p>दिल्ली में संपन्न हुए ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के बाद आया अराघची का बयान इस बात का संकेत है कि भारत ही वह देश है, जिससे शांति और समावेशन की उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि इस भू-राजनीतिक क्षेत्र के ईरान समेत लगभग सभी देशों से भारत के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते अराघची के बयान को बढ़ते ऊर्जा और आर्थिक संकट के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक चिंता के रूप में भी देखने की जरूरत है। भारत ने ईरान के साथ चाबहार स्थित शाहिद बेहेस्ती बंदरगाह के संचालन के लिए एक समझौता किया हुआ है। 10 वर्षों के लिए हुए इस समझौते पर दोनों देशों के संधि पत्र पर हस्ताक्षर भी हो चुके थे, परंतु हस्ताक्षर के चंद घंटों बाद भी ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह समझौता खटाई में पड़ा हुआ है।</p>
<p>इंडियन पोर्टस ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के बंदरगाह एवं समुद्री संगठन के बीच 13 मई 2016 को समझौता हुआ था। भारत के तबके जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोबाल ने ईरान पहुंचकर अपने समकक्ष के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इंडिया पोर्ट ग्लोबल लिमिटेड को करीब 120 मिलियन डॉलर का निवेश करना था। भारत सरकार की यह संस्था सागरमाला विकास कंपनी की सहायक कंपनी है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक चाबहार स्थित शाहिद बेहिश्ती बंदरगाह को विकसित करने के लिए ही इस कंपनी को अस्तित्व में लाया गया था। </p>
<p>इसका लक्ष्य भूमि से घिरे अफगानिस्तान और मध्य-एशियाई देशों के लिए मार्ग तैयार करना था। यह कंपनी कंटेनरों के संचालन से लेकर वेयरहाउसिंग तक का काम करती है। इंडिया पोर्ट ने इस बंदरगाह का संचालन सबसे पहले साल 2018 के अंत में शुरू किया था। तब ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मानवाधिकार उल्लंघन और चरमपंथी संगठनों को मदद करने के आरोप में अमेरिका ने ईरान पर अनेक व्यापक असर डालने वाले प्रतिबंध लगा दिए थे। 1998 में जब पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किया था तब भी अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे।</p>
<p><strong>(ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 05:42:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन का भयावह कृत्रिम नदी प्रोजेक्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><em><strong>चीन दुनिया के सबसे बड़े जल उठान प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रहा है, जिसका मकसद खुद प्रकृति को चुनौती देना है।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats372.jpg" alt="cats" width="147" height="196" />
रनबीर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार

<p><br />चीन दुनिया के सबसे बड़े जल उठान प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रहा है, जिसका मकसद प्रकृति को चुनौती देना है। पहाड़ों को पार करने वाली हज़ारों किलोमीटर लंबी कृत्रिम नहरों, जलसेतुओं और सुरंगों के ज़रिए, चीन अपने उत्तरी हिस्से में मौजूद सूखे औद्योगिक केंद्रों तक ताज़ा पानी पहुंचाने की योजना बना रहा है। चीन का भूगोल हमेशा से ही एक दोधारी तलवार जैसा रहा है। यांग्त्ज़ी और पीली नदी प्रणालियों ने हज़ारों सालों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582762/china-s-terrifying-artificial-river-project"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats371.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><em><strong>चीन दुनिया के सबसे बड़े जल उठान प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रहा है, जिसका मकसद खुद प्रकृति को चुनौती देना है।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats372.jpg" alt="cats" width="147" height="196"></img>
रनबीर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार

<p><br />चीन दुनिया के सबसे बड़े जल उठान प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रहा है, जिसका मकसद प्रकृति को चुनौती देना है। पहाड़ों को पार करने वाली हज़ारों किलोमीटर लंबी कृत्रिम नहरों, जलसेतुओं और सुरंगों के ज़रिए, चीन अपने उत्तरी हिस्से में मौजूद सूखे औद्योगिक केंद्रों तक ताज़ा पानी पहुंचाने की योजना बना रहा है। चीन का भूगोल हमेशा से ही एक दोधारी तलवार जैसा रहा है। यांग्त्ज़ी और पीली नदी प्रणालियों ने हज़ारों सालों से पूर्वी चीन में मानव सभ्यताओं को सहारा दिया है; इन्होंने उपजाऊ बाढ़ के मैदान दिए हैं और एक विशाल आबादी का भरण-पोषण किया है, हालांकि उत्तरी और सुदूर पश्चिमी इलाके सूखे या पहाड़ी हैं, जिसकी वजह से वे खेती-बाड़ी के लिए कम उपयुक्त हैं। <br />यह भौगोलिक असमानता साफ़ तौर पर दिखाई देती है, क्योंकि चीन की 94% आबादी पूर्वी हिस्से में ही रहती है। बीजिंग और उत्तर के दूसरे शहर लंबे समय से आबादी, खेती और व्यापार के बड़े केंद्र रहे हैं। 20वीं सदी के मध्य में जब चीन की आबादी और दौलत बढ़ी, तो पानी के संसाधन कम पड़ने लगे। बीजिंग जैसे उत्तरी शहर भूजल पर निर्भर थे, जिसका शहरी और औद्योगिक मांग बढ़ने की वजह से ज़रूरत से ज़्यादा दोहन होने लगा। इसके अलावा, पास में ही मौजूद गोबी रेगिस्तान भी लगातार फैलता जा रहा था, जिससे मरुस्थलीकरण के कारण पानी की कमी की समस्या और भी गंभीर होती जा रही थी। </p>
<p>1950 के दशक की शुरुआत में, यह बात साफ़ हो गई थी कि उत्तरी चीन के लिए अपनी बढ़ती आबादी को पर्याप्त पानी पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होगी। साल 1952 में, माओ ज़ेडोंग ने दक्षिण से सूखे उत्तरी इलाकों तक पानी पहुंचाने का प्रस्ताव रखा। इस परिकल्पना को आखिरकार साल 2002 में मंज़ूरी मिली, जिसके बाद 'दक्षिण से उत्तर जल-स्थानांतरण प्रोजेक्ट' की शुरुआत हुई। </p>
<p>इस प्रोजेक्ट का मकसद जलसेतुओं, सुरंगों, जलाशयों और बांधों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना था, जिसके ज़रिए पानी से समृद्ध दक्षिण से पानी की कमी वाले उत्तरी इलाकों तक पानी पहुंचाया जा सके। इस प्रोजेक्ट का 'पूर्वी मार्ग' यांग्त्ज़ी नदी की एक मुख्य शाखा का इस्तेमाल करते हुए यांग्झोऊ के पास से शुरू होता है। यांग्त्ज़ी नदी से पानी को पंप करके 'जिंग-हांग ग्रैंड कैनाल' में डाला जाता है— जो दुनिया की सबसे लंबी कृत्रिम जलधारा है। इसके बाद, यह पानी एक भूमिगत सुरंग से गुज़रते हुए पीली नदी को पार करता है और जलसेतुओं के ज़रिए बीजिंग से सटे शहर तियानजिन तक पहुंचाया जाता है। पूर्वी मार्ग, जो 1,100 किलोमीटर से ज़्यादा लंबा है, से 2013 तक पानी पहुंचाने की उम्मीद थी, लेकिन इसमें देरी हुई; आखिरकार 2017 में पानी पहुंचा, जिससे तियानजिन के 10 मिलियन लोगों को फ़ायदा हुआ।</p>
<p>केंद्रीय मार्ग, जिसमें पहले से कोई इंफ़्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं था, ज़्यादा चुनौतीपूर्ण था। दनजियांगकोऊ जलाशय से शुरू होकर, दनजियांगकोऊ बांध को 15 मीटर ऊंचा किया गया, ताकि पानी बिना किसी पंपिंग स्टेशन के ‘नीचे की ओर’ उत्तर की ओर बह सके। इस निर्माण के लिए 300,000 से ज़्यादा लोगों को विस्थापित करना पड़ा। यह मार्ग, जिसमें शाहे जलसेतु जैसी महत्वपूर्ण संरचनाएं शामिल हैं, 1,200 किलोमीटर से ज़्यादा लंबा है और 2014 में बीजिंग तक पहुंचा। 2030 तक, इससे सालाना 12 क्यूबिक किलोमीटर पानी स्थानांतरित होने की उम्मीद है।</p>
<p>पश्चिमी मार्ग अपनी भारी चुनौतियों के कारण अभी भी योजना चरण में है। इस योजना में यांग्त्ज़ी और पीली नदियों को क़िंगहाई-तिब्बत पठार के रास्ते जोड़ने वाले जलमार्ग और सुरंगें बनाना शामिल है, जो समुद्र तल से तीन से पांच किलोमीटर ऊपर स्थित है। इस मार्ग के लिए इंजीनियरों को पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाना होगा, जिससे यह परियोजना का सबसे कठिन और महत्वाकांक्षी हिस्सा बन जाएगा। 2050 तक पूरा होने का अनुमान है, यह उत्तरी प्रांतों में सालाना 17 क्यूबिक किलोमीटर पानी ला सकता है, जिससे लगभग 100 मिलियन लोगों की ज़रूरतें पूरी होंगी।</p>
<p>ऐसे विशाल प्रोजेक्ट, जिनसे धरती की रचना और जियोफिजिकल गुणों में बड़े परिवर्तन होते हैं, के बारे में कोई भी इंटरनेशनल चर्चा नहीं होती, क्योंकि चीन ने इन 40 सालों में जो मेगा प्रोजेक्ट्स चलाए हैं, उनसे पृथ्वी की चाल भी बदली हैय़ शुक्र है बहुत विशाल परमाणु बम विकसित करने और इनके धमाके करने पर अंकुश लगा है। पृथ्वी अगर मामूली सी भी विचलित होती है, तो हाहाकार मचेगा और मनुष्य का अस्तित्व नष्ट होने में देर नहीं लगेगी।<br />इस परियोजना का उद्देश्य पानी की कमी को दूर करना है, लेकिन इसने पर्यावरण से जुड़ी गंभीर चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं। ये कृत्रिम जलमार्ग नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करते हैं, जिससे 600 नदियां विलुप्त हो गई हैं। औद्योगिक कचरे और सीवेज ने इन जलमार्गों को दूषित कर दिया है, जैसा कि दनजियांगकोऊ जलाशय में देखा गया है, जहां शियान जैसे औद्योगिक शहर हान नदी में कचरा डालते हैं।</p>
<p>इसके अलावा, भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र से होकर गुज़रने वाले पश्चिमी मार्ग का निर्माण भूस्खलन और पर्यावरणीय विनाश का कारण बन सकता है। इस परियोजना की लागत, जिसका अनुमान $62 बिलियन है, में नहरों, जलसेतुओं, बांधों, सुरंगों और अन्य संरचनाओं के विशाल नेटवर्क के रखरखाव का खर्च शामिल नहीं है। <strong>(ये लेखक के निजी विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582762/china-s-terrifying-artificial-river-project</link>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 05:34:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कश्मीर पर न दें ज्ञान... नरसंहार से कलंकित इतिहास,  UNSC में भारत ने पाकिस्तान को दिखाया आईना </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र। </strong>भारत ने पाकिस्तान के नरसंहार के कृत्यों के "लंबे कलंकित" इतिहास की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि देश का अमानवीय आचरण दशकों से अपनी आंतरिक विफलताओं को सीमा के भीतर और बाहर हिंसा के कृत्यों के माध्यम से बाहरी रूप देने के प्रयासों को दर्शाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 'सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा' विषय पर वार्षिक परिचर्चा में भाग लेते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा, "यह विडंबना है कि नरसंहार के कृत्यों के अपने लंबे कलंकित इतिहास वाले पाकिस्तान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582688/stop-preaching-on-kashmir----a-history-stained-by-genocide--india-holds-up-a-mirror-to-pakistan-at-the-unsc"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(14)16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र। </strong>भारत ने पाकिस्तान के नरसंहार के कृत्यों के "लंबे कलंकित" इतिहास की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि देश का अमानवीय आचरण दशकों से अपनी आंतरिक विफलताओं को सीमा के भीतर और बाहर हिंसा के कृत्यों के माध्यम से बाहरी रूप देने के प्रयासों को दर्शाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 'सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा' विषय पर वार्षिक परिचर्चा में भाग लेते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा, "यह विडंबना है कि नरसंहार के कृत्यों के अपने लंबे कलंकित इतिहास वाले पाकिस्तान ने उन मुद्दों का हवाला देना चुना है जो पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले हैं।" पर्वतनेनी की यह टिप्पणी पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने के बाद आई। </p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष की शुरुआत में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए हमलों का मुद्दा उठाते हुए पर्वतनेनी ने कहा, "दुनिया यह नहीं भूली है कि इसी वर्ष मार्च में रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान, शांति, चिंतन और दया के समय में, पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर बर्बर हवाई हमला किया था।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यूएनएएमए (अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन) के अनुसार, "हिंसा के इस कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य में 269 नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए, जबकि इस सुविधा को किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।" </p>
<p style="text-align:justify;">पर्वतनेनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के उच्च सिद्धांतों का समर्थन करते हुए "अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना" पाकिस्तान का "पाखंड" है। यूएनएएमए के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा हवाई हमले तरावीह की नमाज़ समाप्त होने के बाद हुए, जब कई मरीज़ मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। यूएनएएमए के मुताबिक, अफ़गान नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से हुई सशस्त्र हिंसा के कारण 94,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"> ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582673/trump-and-netanyahu-clash--heated-phone-exchange-over-war-with-iran--major-claim-by-us-media"><span class="t-red">आपस में भीड़ें ट्रंप-नेतन्याहू, </span>ईरान युद्ध को लेकर फोन पर तीखी बातचीत; अमेरिकी मीडिया का बड़ा दावा</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582688/stop-preaching-on-kashmir----a-history-stained-by-genocide--india-holds-up-a-mirror-to-pakistan-at-the-unsc</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/582688/stop-preaching-on-kashmir----a-history-stained-by-genocide--india-holds-up-a-mirror-to-pakistan-at-the-unsc</guid>
                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:26:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> आपस में भीड़ें ट्रंप-नेतन्याहू, ईरान युद्ध को लेकर फोन पर तीखी बातचीत; अमेरिकी मीडिया का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के खिलाफ जारी युद्ध की आगे की रणनीति को लेकर फोन पर काफी तीखी बातचीत हुई क्योंकि वाशिंगटन दोबारा सैन्य हमले करने के बजाय समझौते के पक्ष में दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया की खबरों में यह जानकारी दी गई। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी मीडिया संस्थान 'एक्सियोस' ने बुधवार को अपनी खबर में कहा कि मंगलवार को ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू ''बेहद खफा थे''। खबर में कहा गया कि इजराइली प्रधानमंत्री ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करने तथा उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582673/trump-and-netanyahu-clash--heated-phone-exchange-over-war-with-iran--major-claim-by-us-media"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(2)17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के खिलाफ जारी युद्ध की आगे की रणनीति को लेकर फोन पर काफी तीखी बातचीत हुई क्योंकि वाशिंगटन दोबारा सैन्य हमले करने के बजाय समझौते के पक्ष में दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया की खबरों में यह जानकारी दी गई। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी मीडिया संस्थान 'एक्सियोस' ने बुधवार को अपनी खबर में कहा कि मंगलवार को ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू ''बेहद खफा थे''। खबर में कहा गया कि इजराइली प्रधानमंत्री ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करने तथा उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर शासन को कमजोर करने के लिए दोबारा हमले शुरू करने के पक्ष में हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने रविवार को कहा था कि उन्होंने मंगलवार के लिए निर्धारित ईरान पर हमले की योजना को टाल दिया है। उन्होंने कहा कि कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अरब देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया। 'एक्सियोस' की खबर के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कम करने के उद्देश्य से कतर और पाकिस्तान ने अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के सुझावों के साथ एक संशोधित शांति मसौदा तैयार किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">खबर में कहा गया है कि नेतन्याहू को बातचीत की प्रक्रिया को लेकर संशय और उनका मानना है कि ईरान की सैन्य ताकत को और कमजोर करने के लिए युद्ध फिर से शुरू किया जाना चाहिए। वहीं, ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है, लेकिन यदि कोई सहमति नहीं बनती तो वह युद्ध दोबारा शुरू करने के लिए तैयार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बुधवार को 'कोस्ट गार्ड' अकादमी में कहा, "अब सवाल सिर्फ यह है कि क्या हम वहां जा कर इसे पूरी तरह खत्म करेंगे या फिर वे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे। देखते हैं क्या होता है।" </p>
<p style="text-align:justify;">बाद में बुधवार को ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान फिलहाल "समझौते और युद्ध के बीच की सीमा" पर खड़े हैं। कनेक्टिकट स्थित कोस्ट गार्ड अकादमी से वाशिंगटन लौटने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "स्थिति बिल्कुल निर्णायक मोड़ पर है। अगर हमें सही जवाब नहीं मिले तो हालात बहुत तेजी से बदल सकते हैं। हम पूरी तरह तैयार हैं। हमें संतोषजनक जवाब चाहिए।"</p>
<p style="text-align:justify;">'सीएनएन' ने एक इजराइली सूत्र के हवाले से अपनी खबर में कहा कि इजराइल सरकार दोबारा सैन्य कार्रवाई चाहती है। साथ ही इस बात को लेकर तल्खी भी बढ़ रही है कि ट्रंप प्रशासन, इजराइल के मुताबिक ''बातचीत को जानबूझकर लंबा खींचने' की ईरान की कूटनीति को जारी रहने दे रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि नेतन्याहू "ईरान के मामले में वही करेंगे, जो मैं चाहूंगा,''। </p>
<p style="text-align:justify;">वहीं ईरान ने पुष्टि की है कि वह संशोधित प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन अब तक उसकी ओर से किसी नरमी के संकेत नहीं मिले हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि बातचीत "ईरान के 14 सूत्रीय प्रस्ताव" के आधार पर जारी है और मध्यस्थता में मदद के लिए पाकिस्तान के गृह मंत्री तेहरान पहुंचे हैं। इस बातचीत की जानकारी रखने वाले एक अमेरिकी सूत्र ने 'एक्सियोस' को बताया कि ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया कि मध्यस्थ ऐसे "आशय पत्र" पर काम कर रहे हैं, जिस पर अमेरिका और ईरान दोनों हस्ताक्षर करेंगे। इसका उद्देश्य औपचारिक रूप से युद्ध समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम व होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसे मुद्दों पर 30 दिनों की वार्ता शुरू करना है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"> ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582614/india-estonia-relations--this-european-country-is-waiting-for-pm-modi--made-a-significant-statement-to-strengthen-bilateral-relations"><span class="t-red">India-Estonia Relations:</span> पीएम मोदी का इंतजार कर रहा है यह यूरोपीय देश, द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए कही बड़ी बात</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582673/trump-and-netanyahu-clash--heated-phone-exchange-over-war-with-iran--major-claim-by-us-media</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/582673/trump-and-netanyahu-clash--heated-phone-exchange-over-war-with-iran--major-claim-by-us-media</guid>
                <pubDate>Thu, 21 May 2026 10:55:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Modi Italy Visit : इटली के राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रोम। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को रोम में इतालवी राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से मुलाकात की। पीएम ने बताया कि इस दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, एआई और सांस्कृतिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को बढ़ाने पर चर्चा की गई। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "मैंने रोम में राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से मुलाकात की। हमने भारत और इटली के बीच मित्रता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिनमें व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">पीएम के अनुसार, एआई, क्रिटिकल मिनरल्स, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्र दोनों देशों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582639/pm-modi-s-visit-to-italy--pm-modi-meets-italian-president--emphasizes-strengthening-bilateral-partnership"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats340.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रोम। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को रोम में इतालवी राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से मुलाकात की। पीएम ने बताया कि इस दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, एआई और सांस्कृतिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को बढ़ाने पर चर्चा की गई। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "मैंने रोम में राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से मुलाकात की। हमने भारत और इटली के बीच मित्रता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिनमें व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।" </p>
<p style="text-align:justify;">पीएम के अनुसार, एआई, क्रिटिकल मिनरल्स, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्र दोनों देशों के लिए सहयोग के अवसर प्रस्तुत कर सकते हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में मौजूद रहे। बैठक से पहले, पीएम मोदी और राष्ट्रपति मत्तारेला ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों दलों के सदस्यों से मुलाकात की। </p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इतालवी राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से भेंट की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली की मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी की पुष्टि की और व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, एआई और संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों में चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भी विचार साझा किए।"इससे पहले मंगलवार को पीएम मोदी ने इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा आयोजित डिनर में भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कुछ तस्वीरें भी साझा कीं और कहा कि बुधवार को वे भारत-इटली दोस्ती को और बढ़ाने पर वार्ता जारी रखने के लिए उत्सुक हैं। दोनों नेताओं ने रोम के प्रसिद्ध कोलोसियम का भी दौरा किया। पीएम मोदी ने लिखा, "रोम पहुंचने पर, प्रधानमंत्री मेलोनी से डिनर पर मुलाकात का अवसर मिला, इसके बाद कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। आज की वार्ता का इंतजार है, जिसमें हम भारत-इटली मित्रता को और सशक्त बनाने पर चर्चा जारी रखेंगे।" मेलोनी ने पीएम मोदी का रोम आगमन पर गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "वेलकम टू रोम, माय फ्रेंड!"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582639/pm-modi-s-visit-to-italy--pm-modi-meets-italian-president--emphasizes-strengthening-bilateral-partnership</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/582639/pm-modi-s-visit-to-italy--pm-modi-meets-italian-president--emphasizes-strengthening-bilateral-partnership</guid>
                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:12:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>India-Estonia Relations: पीएम मोदी का इंतजार कर रहा है यह यूरोपीय देश, द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए कही बड़ी बात</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ताल्लिन्न। </strong>एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस त्साहकना ने भारत और एस्टोनिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के लिए भारत से और अधिक उच्च स्तरीय यात्राओं का आह्वान किया और कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस उत्तरी यूरोपीय देश का दौरा करते हैं तो एस्टोनिया को ''बहुत खुशी' होगी। त्साहकना ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि एस्टोनिया 2027 में यूक्रेन पुनर्निर्माण सम्मेलन का आयोजन कर रहा है और उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत भी युद्धग्रस्त देश यूक्रेन की पुनर्निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा, ''भारत एस्टोनिया का एक बहुत अहम साझेदार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582614/india-estonia-relations--this-european-country-is-waiting-for-pm-modi--made-a-significant-statement-to-strengthen-bilateral-relations"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(20)15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ताल्लिन्न। </strong>एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस त्साहकना ने भारत और एस्टोनिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के लिए भारत से और अधिक उच्च स्तरीय यात्राओं का आह्वान किया और कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस उत्तरी यूरोपीय देश का दौरा करते हैं तो एस्टोनिया को ''बहुत खुशी' होगी। त्साहकना ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि एस्टोनिया 2027 में यूक्रेन पुनर्निर्माण सम्मेलन का आयोजन कर रहा है और उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत भी युद्धग्रस्त देश यूक्रेन की पुनर्निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने कहा, ''भारत एस्टोनिया का एक बहुत अहम साझेदार है। हमारे स्तर बिल्कुल अलग हैं, एस्टोनिया की जनसंख्या 13 लाख है जबकि भारत की जनसंख्या 14 अरब है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। हमारे राष्ट्रपति (अलार कारिस) फरवरी में एआई शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत में थे। व्यापारिक दृष्टि से हमारे द्विपक्षीय संबंध मजबूत हो रहे हैं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''चाहे रक्षा उद्योग हो, आईटी हो या एआई , एस्टोनिया निवेश के लिए एकदम सही जगह है। हमारे पास ई-रेजिडेंसी कार्यक्रम है जिसके माध्यम से भारतीय कंपनियां और लोग निवासी बन सकते हैं और हमारे शानदार स्टार्टअप वातावरण का हिस्सा बन सकते हैं।'' त्साहकना ने कहा, "मैं भारत की आर्थिक वृद्धि और आर्थिक विकास पर भारतीय सरकार के नेतृत्व को देख रहा हूं। ये ऐसा है जिसमें हमारी कंपनियां बहुत रुचि रखती हैं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या संबंधों को मजबूत करने के लिए और अधिक उच्च स्तरीय दौरों की आवश्यकता है और क्या प्रधानमंत्री मोदी भविष्य में एस्टोनिया का दौरा कर सकते हैं, तो त्साहकना ने कहा कि उनका देश ऐसे दौरे का गर्मजोशी से स्वागत करेगा। उन्होंने कहा, ''अगर प्रधानमंत्री मोदी एस्टोनिया आते हैं तो हमारे देश को बहुत खुशी होगी। हम उनका हार्दिक स्वागत करेंगे और विदेश मंत्री (एस. जयशंकर) का भी स्वागत है। </p>
<p style="text-align:justify;">एस्टोनिया में जितने अधिक उच्च स्तरीय दौरे होंगे, उतना ही अच्छा होगा।'' अब तक भारत से किसी भी प्रधानमंत्री ने एस्टोनिया का दौरा नहीं किया है। त्साहकना ने बताया कि एस्टोनिया 2027 में यूक्रेन पुनर्निर्माण सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें विश्व के नेता, दानदाता और निजी कंपनियां शिकरकत करेंगी। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के मार्शल प्लान के बाद यूक्रेन का पुनर्निर्माण यूरोप की सबसे बड़ी परियोजना होगी और मुझे उम्मीद है कि भारत भी इसमें शामिल होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">त्साहकना की ये टिप्पणियां राष्ट्रपति कारिस की भारत यात्रा के कुछ सप्ताह बाद आई हैं। कारिस 16 से 20 फरवरी तक एआई इम्पैक्ट सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत गए थे। इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी से हुई थी। मोदी ने 11 फरवरी, 2025 को पेरिस में आयोजित एआई एक्शन सम्मेलन के दौरान भी कारिस से मुलाकात की थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582601/bangladesh--diplomat-s-body-found-in-indian-high-commission-premises-in-chittagong--initial-investigation-suggests-heart-attack"><span class="t-red">बांग्लादेश : </span>चटगांव में भारतीय उच्चायोग परिसर में मिला राजनयिक का शव, शुरुआती जांच में हार्ट अटैक की आशंका</a></h5>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582614/india-estonia-relations--this-european-country-is-waiting-for-pm-modi--made-a-significant-statement-to-strengthen-bilateral-relations</link>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 15:30:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Modi Italy Visit: &quot;उपहार के लिए धन्यवाद&quot; ... 'मेलोडी' टॉफी को लेकर मेलोनी ने जताया पीएम मोदी का आभार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रोम।</strong> इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 'मेलोडी' टॉफी भेंट किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। इस हल्के-फुल्के पल ने सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं से जुड़े चर्चित 'मेलोडी' शब्द को फिर से चर्चा में ला दिया। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह कहती सुनाई दे रही हैं, "प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए एक बहुत ही अच्छी टॉफी लेकर आए हैं-मेलोडी।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, "उपहार के लिए धन्यवाद।" बुधवार को अपलोड किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी भी नजर आते हैं और मेलोनी के 'मेलोडी' टॉफी के जिक्र पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582607/pm-modi-s-italy-visit--%22thank-you-for-the-gift%22----meloni-expresses-gratitude-to-pm-modi-for--melody--toffees"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats334.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रोम।</strong> इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 'मेलोडी' टॉफी भेंट किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। इस हल्के-फुल्के पल ने सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं से जुड़े चर्चित 'मेलोडी' शब्द को फिर से चर्चा में ला दिया। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह कहती सुनाई दे रही हैं, "प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए एक बहुत ही अच्छी टॉफी लेकर आए हैं-मेलोडी।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, "उपहार के लिए धन्यवाद।" बुधवार को अपलोड किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी भी नजर आते हैं और मेलोनी के 'मेलोडी' टॉफी के जिक्र पर हंसते दिखाई देते हैं। मोदी और मेलोनी के नामों के संयोजन के तौर पर 'मेलोडी' हैशटैग पहली बार इटली की प्रधानमंत्री ने 2023 में दुबई में आयोजित कॉप-28 सम्मेलन के दौरान गढ़ा था। इसके बाद दोनों नेताओं की वैश्विक मंचों पर हुई गर्मजोशी भरी मुलाकातों के बीच यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। </p>
<p style="text-align:justify;">मेलोनी ने उस समय भी सोशल मीडिया पर मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए 'मेलोडी' हैशटैग के साथ लिखा था, "कॉप-28 में अच्छे दोस्त।" प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार को रोम पहुंचे। वह इटली की प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यहां आए हैं, जहां दोनों नेता व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 14:29:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बांग्लादेश : चटगांव में भारतीय उच्चायोग परिसर में मिला राजनयिक का शव, शुरुआती जांच में हार्ट अटैक की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका। </strong>बांग्लादेश के चटगांव में स्थित भारतीय उच्चायोग के परिसर में मंगलवार को भारत के एक राजनयिक का शव मिला। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि मृत अधिकारी की पहचान नरेन धर के रूप में हुई है, जो भारतीय उच्चायोग में सहायक प्रोटोकॉल अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। ढाका पुलिस के प्रवक्ता अमीनूर राशिद ने संवाददाताओं से कहा, "हमें बताया गया है कि मृतक अधिकारी का नाम नरेन धर है, जो मिशन में सहायक प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।" </p>
<p style="text-align:justify;">राशिद के मुताबिक, धर का शव मंगलवार तड़के भारतीय उच्चायोग के पुराने वीजा केंद्र भवन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582601/bangladesh--diplomat-s-body-found-in-indian-high-commission-premises-in-chittagong--initial-investigation-suggests-heart-attack"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(16)14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका। </strong>बांग्लादेश के चटगांव में स्थित भारतीय उच्चायोग के परिसर में मंगलवार को भारत के एक राजनयिक का शव मिला। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि मृत अधिकारी की पहचान नरेन धर के रूप में हुई है, जो भारतीय उच्चायोग में सहायक प्रोटोकॉल अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। ढाका पुलिस के प्रवक्ता अमीनूर राशिद ने संवाददाताओं से कहा, "हमें बताया गया है कि मृतक अधिकारी का नाम नरेन धर है, जो मिशन में सहायक प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।" </p>
<p style="text-align:justify;">राशिद के मुताबिक, धर का शव मंगलवार तड़के भारतीय उच्चायोग के पुराने वीजा केंद्र भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित एक बाथरूम के दरवाजे के सामने मिला। ढाका में स्थित भारतीय उच्चायोग या चटगांव स्थित सहायक उच्चायोग ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं की है।</p>
<p style="text-align:justify;">राशिद ने कहा कि कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि धर की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई होगी। उन्होंने कहा, "हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत के कारण की पुष्टि होगी।" पुलिस के मुताबिक, धर चंडीगढ़ के रहने वाले थे और उनकी उम्र 35 से 40 साल के बीच थी। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582595/south-korea-visit--defense-minister-rajnath-singh-makes-a-major-statement-in-seoul--discusses-bilateral-relations"><span class="t-red">दक्षिण कोरिया यात्रा :</span>सियोल पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई खास चर्चा</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582601/bangladesh--diplomat-s-body-found-in-indian-high-commission-premises-in-chittagong--initial-investigation-suggests-heart-attack</link>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 13:50:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण कोरिया यात्रा :सियोल पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई खास चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>भारत और दक्षिण कोरिया ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण में मंगलवार को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री के साथ बैठक के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री के साथ उनकी बैठक अत्यंत सफल रही और इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, साइबर सहयोग और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर किये। </p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582595/south-korea-visit--defense-minister-rajnath-singh-makes-a-major-statement-in-seoul--discusses-bilateral-relations"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(14)15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>भारत और दक्षिण कोरिया ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण में मंगलवार को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री के साथ बैठक के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री के साथ उनकी बैठक अत्यंत सफल रही और इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, साइबर सहयोग और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर किये। </p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "सियोल में मेरे दक्षिण कोरियाई समकक्ष आह्न ग्यु बैक के साथ उत्कृष्ट बैठक हुई। हमने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और तकनीकी सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता के साथ भारत-कोरिया गणराज्य रक्षा, रक्षा उद्योग और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सफल बैठक रही, क्योंकि भारत और कोरिया ने रक्षा साइबर सहयोग को बढ़ावा देने, भारत के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय और कोरिया गणराज्य के कोरिया राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच तथा संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना सहयोग से संबंधित समझौतों का आदान-प्रदान किया, जिससे हमारी साझेदारी और अधिक मजबूत तथा बहुआयामी बनी। रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की अपेक्षा है। राजनाथ सिंह ने कोरिया में वीर सैनिकों के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि भी अर्पित की। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, " कोरिया के राष्ट्रीय समाधि स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने अपने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस, समर्पण और देशभक्ति की भावना सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। भारत, कोरिया गणराज्य के वीरों की विरासत का सम्मान करने में उसके साथ एकजुटता से खड़ा है। " इससे पहले सोल पहुंचने पर श्री सिंह ने कहा था कि उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत-कोरिया रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582588/pm-modi-italy-visit--pm-modi-arrives-in-rome-to-hold-bilateral-talks-with-italian-prime-minister-meloni--in-a-joint-article--india-italy-relations-are-described-as-%22strategic-%22"><span class="t-red">PM Modi Italy Visit: </span>पीएम मोदी करेंगे इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता, संयुक्त लेख में भारत-इटली संबंधों को बताया 'रणनीतिक'</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/582595/south-korea-visit--defense-minister-rajnath-singh-makes-a-major-statement-in-seoul--discusses-bilateral-relations</link>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 13:27:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Modi Italy Visit:  पीएम मोदी करेंगे इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता, संयुक्त लेख में भारत-इटली संबंधों को बताया 'रणनीतिक'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>रोम।</strong> पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार रात यहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इटली की अपनी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इससे पहले श्री मोदी का यहां पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उनके सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बाद में होटल पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी का द्विपक्षीय वार्ता से पहले राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से भी मिलने का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा,''इटली के रोम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582588/pm-modi-italy-visit--pm-modi-arrives-in-rome-to-hold-bilateral-talks-with-italian-prime-minister-meloni--in-a-joint-article--india-italy-relations-are-described-as-%22strategic-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(8)15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रोम।</strong> पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार रात यहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इटली की अपनी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इससे पहले श्री मोदी का यहां पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उनके सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बाद में होटल पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी का द्विपक्षीय वार्ता से पहले राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से भी मिलने का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा,''इटली के रोम पहुँचा। मैं राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करूँगा तथा उनके साथ चर्चा करूँगा। यह यात्रा भारत-इटली सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी, इसमें विशेष रूप से भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर ध्यान दिया जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 की भी समीक्षा की जाएगी। मैं खाद्य और कृषि संगठन के मुख्यालय का भी दौरा करूँगा और बहुपक्षवाद तथा वैश्विक खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करूँगा।'' मेलोनी ने मंगलवार रात प्रधानमंत्री के सम्मान में रात्रि भोज का आयोजन किया। श्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें विपक्षीय वार्ता का उत्सुकता से इंतजार है।</p>
<p style="text-align:justify;"> उन्होंने कहा,''रोम पहुँचने पर रात्रिभोज के दौरान प्रधानमंत्री मेलोनी से मिलने का अवसर मिला, जिसके बाद प्रतिष्ठित कोलोसियम का भ्रमण किया। हमने विभिन्न विषयों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। आज होने वाली हमारी वार्ताओं की प्रतीक्षा है, जहाँ हम भारत-इटली मैत्री को और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा आगे बढ़ाएँगे।'' इटली की प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद श्री मोदी देर शाम स्वदेश रवाना हो जाएंगे। वह 15 मई को पांच देशों की छह दिन की यात्रा पर रवाना हुए थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भारत-इटली संबंध विशेष रणनीतिक साझेदारी के नए दौर में : मोदी और मेलोनी </h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा है कि भारत व इटली के संबंध अब एक निर्णायक चरण में पहुंच चुके हैं और सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं। भारतीय और इतालवी मीडिया के लिए दोनों नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से लिखे गए लेख में कहा गया कि ऐसे समय में, जब पूरी दुनिया की व्यवस्था बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर लगातार संवाद से आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी इस समय पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण के तहत इटली में हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेताओं ने कहा कि द्विपक्षीय संबंध अब एक नए और अधिक व्यापक स्तर पर पहुंच रहे हैं, जिसमें दोनों देशों की आर्थिक ताकत, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों वर्षों पुरानी सभ्यतागत विरासत शामिल है। उन्होंने कहा, "भारत और इटली के संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी से विस्तार हुआ है। यह संबंध केवल सौहार्दपूर्ण मित्रता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मूल्यों तथा भविष्य के साझा दृष्टिकोण पर आधारित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और इटली के बीच सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि देश कितनी क्षमता से नवाचार करें, ऊर्जा परिवर्तन का प्रबंधन करें और अपनी रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करें। इसी उद्देश्य से दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा विविध बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और दोनों देशों की पूरक शक्तियों का बेहतर उपयोग हो सके। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "हम इटली की डिजाइन क्षमता, बेहतरीन विनिर्माण कौशल और विश्वस्तरीय सुपर कंप्यूटर तकनीक, जो उसे एक औद्योगिक महाशक्ति बनाती है को भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़े पैमाने की क्षमता, नवाचार और 100 से अधिक यूनिकॉर्न तथा दो लाख स्टार्ट-अप वाले उद्यमी इकोसिस्टम के साथ जोडकर एक शक्तिशाली तालमेल बनाना चाहते हैं।'' नेताओं ने कहा कि यह केवल दो अर्थव्यवस्थाओं का साधारण मेल नहीं है, बल्कि ऐसा साझा मूल्य निर्माण है जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और अधिक मजबूत बनाती हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों दिशाओं में व्यापार और निवेश बढ़ाने का रास्ता खोलता है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य 2029 तक भारत और इटली के बीच व्यापार को 20 अरब यूरो से आगे ले जाना है। इसमें रक्षा एवं एयरोस्पेस, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पुर्जे, रसायन, दवाइयां, वस्त्र, कृषि-खाद्य क्षेत्र और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहेगा।'' </p>
<p style="text-align:justify;">लेख में मोदी और इटली गणराज्य मंत्रिपरिषद की अध्यक्ष मेलोनी ने कहा कि ''मेड इन इटली'' हमेशा से दुनिया भर में उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है, और आज इसका स्वाभाविक तालमेल ''मेक इन इंडिया'' पहल के उच्च गुणवत्ता वाले लक्ष्यों के साथ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इसी संदर्भ में, भारत के लिए उत्पादन में इतालवी कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय उद्योगों की बढ़ती मौजूदगी, जिसकी संख्या अब दोनों पक्षों में मिलाकर 1000 से अधिक हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि ये आपूर्ति शृंखलाओं के एकीकरण को और मजबूत करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेताओं ने कहा कि तकनीकी नवाचार हमारी साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार है और आने वाले दशकों में दुनिया एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजरेगी, जिसमें कृत्रिम मेधा (एआई) क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में तेज प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता नवाचार तंत्र और कुशल पेशेवरों की बड़ी संख्या, तथा इटली की उन्नत औद्योगिक क्षमता इन क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग को स्वाभाविक और रणनीतिक बनाती है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "हमारे विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के बीच बढ़ती साझेदारी इसे और मजबूती देगी। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पहले ही बड़ी संख्या में देशों, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में स्वीकार्यता प्राप्त कर रही है।" नेताओं ने कहा कि एआई आज हमारे समाज व वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल रहा है तथा इटली और भारत लंबे समय से इस दिशा में सहयोग कर रहे हैं, ताकि एआई का विकास जिम्मेदार और मानव-केंद्रित हो। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत और इटली एआई को समावेशी विकास के एक प्रभावशाली साधन के रूप में भी देखते हैं, विशेष रूप से 'ग्लोबल साउथ' के लिए जहां डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सुलभ बहुभाषी प्रौद्योगिकियां विभाजन को बढ़ाने के बजाय उसे कम कर सकती हैं। उन्होंने कहा, "भारत के मानव दृष्टिकोण यानी तकनीक के केंद्र में मानव को रखने की सोच और इटली की मानव-केंद्रित 'एल्गोर-एथिक्स' की अवधारणा, जो उसकी मानवतावादी परंपरा पर आधारित है, पर आगे बढ़ते हुए हमारी साझेदारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सामाजिक सशक्तीकरण का माध्यम बने।" </p>
<p style="text-align:justify;">मोदी और मेलोनी ने कहा कि उनका दृष्टिकोण भारत की विशाल डिजिटल क्षमता को इटली की नैतिक और औद्योगिक विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि तकनीक मानव गरिमा की सेवा कर सके। उन्होंने कहा कि सुरक्षित डिजिटल सहयोग, दक्षता विकास और मजबूत साइबर अवसंरचना में श्रेष्ठ अनुभवों को साझा कर दोनों देश ऐसा खुला, भरोसेमंद और समानतापूर्ण डिजिटल वातावरण बनाना चाहते हैं, जहां प्रत्येक राष्ट्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि यही दृष्टिकोण इटली की जी7 अध्यक्षता और 2026 में नयी दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' के निष्कर्षों का मुख्य आधार है। </p>
<p style="text-align:justify;">नेताओं ने कहा कि एआई को इंसानों की ओर से इंसानों के लिए बनाई गई तकनीक मानने का अर्थ यह स्पष्ट करना है कि तकनीक न तो मनुष्य की जगह ले सकती है और न ही उसके मूल अधिकारों को कमजोर कर सकती है और इसका उपयोग जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने के लिए भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "तेजी से परस्पर जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा के प्रति हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।" मोदी और मेलोनी ने कहा कि भारत-इटली सहयोग अंतरिक्ष क्षेत्र तक भी फैला हुआ है। </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष अन्वेषण और उपग्रह प्रौद्योगिकी में भारत की उल्लेखनीय प्रगति तथा इटली की अंतरिक्ष अभियांत्रिकी क्षमता नयी पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इटली और भारत रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गो की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।'' </p>
<p style="text-align:justify;">नेताओं ने कहा कि ऊर्जा भी साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है और विविध ऊर्जा स्रोतों की ओर वैश्विक बदलाव के लिए नवाचार, निवेश और सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "भारत और इटली नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर हाइड्रोजन तकनीक, तथा स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत बुनियादी ढांचे तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं।'' दोनों नेताओं ने कहा कि भौतिक, डिजिटल और मानवीय संपर्क वह सूत्र है जो दोनों देशों को जोड़ता है। भारत और इटली वैश्विक अर्थव्यवस्था के दो महत्वपूर्ण केंद्रों — हिंद-प्रशांत और भूमध्यसागरीय क्षेत्र — के मध्य स्थित हैं। अब इन क्षेत्रों को अलग-अलग नहीं, बल्कि आपस में जुड़े हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वास्तव में अब "हिंद-भूमध्य क्षेत्र" जैसी अवधारणा उभर रही है, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, आंकड़ों और विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण गलियारा बनती जा रही है और हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ती है। उन्होंने कहा, "इसी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र में हमारा संबंध स्वाभाविक रूप से एक विशेष रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित होता है। ऐसी साझेदारी, जो दो महाद्वीपों को जोड़ती है और नयी वैश्विक परिस्थितियों को आकार देती है।'' दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा एक ऐसी परिकल्पना है, जिसका उद्देश्य आधुनिक परिवहन एवं अवसंरचना, डिजिटल नेटवर्क, ऊर्जा प्रणालियों और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के माध्यम से क्षेत्रों को जोड़ना है। </p>
<p style="text-align:justify;">भारत और इटली अन्य साझेदारों के साथ मिलकर इस दृष्टि को वास्तविकता में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, "हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के गहरे संबंधों और लंबे सांस्कृतिक जुड़ाव के आधार पर कर सकते हैं।'' मोदी और मेलोनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में "धर्म" की अवधारणा उस जिम्मेदारी का बोध कराती है, जो हमारे कार्यों का मार्गदर्शन करती है, जबकि "वसुधैव कुटुम्बकम्" अर्थात 'पूरी दुनिया एक परिवार है' सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग और भी अधिक प्रासंगिक लगता है। उन्होंने कहा कि ये मूल्य इटली की मानवतावादी परंपरा से भी मेल खाते हैं. जिसकी जड़ें पुनर्जागरण काल में हैं। यह परंपरा हर व्यक्ति की गरिमा और संस्कृति की उस शक्ति पर जोर देती है, जो समाजों और लोगों को एकजुट कर सकती है। दोनों नेताओं ने कहा, "इसलिए हमारी साझा दृष्टि का उद्देश्य लोगों को केंद्र में रखते हुए भारत-इटली साझेदारी को मजबूत, आधुनिक और भविष्य उन्मुख आधार प्रदान करना है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><br />ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582583/g-7-meeting--world-leaders-will-gather-in-france--president-emmanuel-macron-has-invited-pm-modi"><span class="t-red">G-7 Meeting : </span>फ्रांस जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी को दिया है न्योता</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 12:08:35 +0530</pubDate>
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                <title>G-7 Meeting :  फ्रांस जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी को दिया है न्योता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार और अपराध के खिलाफ लड़ाई पर चर्चा करने के लिए 15 से 17 जून तक फ्रांस में होने वाली जी-7 बैठक में भाग लेंगे। अमेरिकी मीडिया संस्थानट एक्सियोस की रिपोर्ट से यह जानकारी प्राप्त हुई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में आयोजित जी-7 बैठक, ट्रंप के 80वें जन्मदिन के एक दिन बाद होने वाली है। उनका जन्मदिन व्हाइट हाउस के लॉन में विशेष रूप से निर्मित यूएफसी 'केजफाइट्स' के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस ने व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि जी-7 की बैठक में कोई वास्तविक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582583/g-7-meeting--world-leaders-will-gather-in-france--president-emmanuel-macron-has-invited-pm-modi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(4)16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार और अपराध के खिलाफ लड़ाई पर चर्चा करने के लिए 15 से 17 जून तक फ्रांस में होने वाली जी-7 बैठक में भाग लेंगे। अमेरिकी मीडिया संस्थानट एक्सियोस की रिपोर्ट से यह जानकारी प्राप्त हुई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में आयोजित जी-7 बैठक, ट्रंप के 80वें जन्मदिन के एक दिन बाद होने वाली है। उनका जन्मदिन व्हाइट हाउस के लॉन में विशेष रूप से निर्मित यूएफसी 'केजफाइट्स' के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक्सियोस ने व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि जी-7 की बैठक में कोई वास्तविक हस्ताक्षरित समझौता नहीं होगा, बल्कि इसका उद्देश्य आम सहमति बनाना है जिस पर भविष्य के समझौते आधारित हो सकें। एक्सियोस ने कहा कि हालांकि एजेंडे में ईरान का मुद्दा शामिल होने की संभावना है, लेकिन ट्रंप द्वारा व्यापार के बारे में अधिक बात करने की उम्मीद है, विशेष रूप से अमेरिकी सहायता को ऐसे व्यापार से जोड़ने के बारे में जो "निवेशक और प्राप्तकर्ता दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी हो।" </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप के अमेरिका में विकसित एआई उपकरणों को अपनाने को बढ़ावा देने, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं पर चीन की पकड़ को कम करने पर सहमति जताने, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध आप्रवासन से लड़ने, अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देने, नियामक बाधाओं को कम करने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने - विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन के उत्पादन पर बोलने की उम्मीद है। मैक्रों ने फरवरी में अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी फ्रेंच एल्प्स में स्थित एवियन-लेस-बैंस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><br />ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/582533/vietnam-visit--bilateral-talks-between-defense-minister-rajnath-singh-and-defense-minister-general-phan--major-resolution-on-indo-pacific-security"><span class="t-red">वियतनाम यात्रा :</span> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री जनरल फान के बीच द्विपक्षीय वार्ता, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर बड़ा संकल्प</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 11:29:10 +0530</pubDate>
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