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                <title>टेक्नोलॉजी - Amrit Vichar</title>
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                <description>टेक्नोलॉजी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों पर केंद्र सख्त, मेटा को 7 दिन में जवाब देने का नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[आईटी मंत्रालय ने आपत्तिजनक विज्ञापन और सामग्री हटाने के दिए निर्देश; सुरक्षा उपायों और एल्गोरिदम पर मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586545/india-government-notice-meta-instagram-child-safety-ads"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(42)1.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>डेस्क लखनऊ:</strong> केंद्र सरकार ने इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री एवं पेड विज्ञापनों के मामले में मेटा को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया है। सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी को ऐसे सभी विज्ञापन और सामग्री तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं, जो बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देते हों या ऐसी सामग्री तक पहुंच आसान बनाते हों।</p>
<p>सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने मेटा से इस मामले में सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। नोटिस में पूछा गया है कि ऐसे विज्ञापनों को प्लेटफॉर्म पर कैसे मंजूरी मिली, आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने क्या कार्रवाई की और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कौन-से अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।</p>
<h4><span><strong>आईटी मंत्री के निर्देश के बाद कार्रवाई</strong></span></h4>
<p>यह कार्रवाई केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के उस निर्देश के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को मेटा के प्रतिनिधियों को तलब करने और पूरे मामले की समीक्षा करने को कहा था।</p>
<h4><span><strong>बीबीसी की रिपोर्ट के बाद बढ़ी चिंता</strong></span></h4>
<p>मामला उस रिपोर्ट के बाद चर्चा में आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि इंस्टाग्राम का रिकमेंडेशन एल्गोरिदम बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री वाले कुछ वीडियो और विज्ञापनों को बढ़ावा दे रहा था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ पेड विज्ञापनों के जरिए उपयोगकर्ताओं को बाहरी प्लेटफॉर्म की ओर भेजा जा रहा था, जहां कथित रूप से अवैध सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी।</p>
<h4><span><strong>सरकार ने मांगा जवाबदेही का स्पष्टीकरण</strong></span></h4>
<p>सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि आरोप पेड विज्ञापनों से जुड़े पाए जाते हैं, तो विज्ञापन से राजस्व अर्जित करने वाले मंच की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। मंत्रालय तकनीकी और नियामकीय पहलुओं की समीक्षा करेगा, जबकि कानून के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित एजेंसियां आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं।</p>
<h4><span><strong>ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति</strong></span></h4>
<p>भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री के प्रति उसकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति है। सरकार समय-समय पर ऐसी वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई करती रही है तथा ऑनलाइन मंचों से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसी सामग्री की पहचान कर उसे तुरंत हटाएं और संबंधित एजेंसियों को रिपोर्ट करें।</p>
<h4><span><strong>इस सप्ताह दूसरी बार जांच के दायरे में मेटा</strong></span></h4>
<p>गौरतलब है कि इसी सप्ताह केंद्र सरकार ने मेटा को व्हाट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भी नोटिस भेजा था। सरकार ने इस फीचर से ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और डिजिटल फ्रॉड बढ़ने की आशंका जताते हुए फिलहाल इसे लागू न करने को कहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/586433/pm-fasal-bima-yojana-2026-online-apply-last-date-documents-pmfby"><span class="t-red">PM Fasal Bima Yojana 2026:</span> 31 जुलाई तक कराएं फसल बीमा, जानिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज की स्टेप वाइज डिटेल</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 16:47:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Fasal Bima Yojana 2026: 31 जुलाई तक कराएं फसल बीमा, जानिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज की स्टेप वाइज डिटेल </title>
                                    <description><![CDATA[देशभर में 1 से 31 जुलाई तक मनाया जा रहा है 'फसल बीमा माह', प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को मिलेगा आर्थिक सुरक्षा कवच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586433/pm-fasal-bima-yojana-2026-online-apply-last-date-documents-pmfby"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(1)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार डेस्क लखनऊ:</strong> किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित<strong> </strong>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बनकर सामने आई है। चूंकि खेती काफी हद तक मौसम और वर्षा पर निर्भर करती है, इसलिए अधिक बारिश, बाढ़, ओलावृष्टि, सूखा या कीट प्रकोप जैसी परिस्थितियों में फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में फसल बीमा किसानों को आर्थिक राहत प्रदान करता है।</p>
<p>इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार<strong> </strong>1 जुलाई से 31 जुलाई तक पूरे देश में 'फसल बीमा माह' मना रही है। इस अभियान का मकसद अधिक से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति जागरूक करना और उनका बीमा सुनिश्चित करना है। सरकार किसानों से समय रहते अपनी फसल का बीमा कराने की अपील कर रही है, ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा या अधिसूचित जोखिम की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।</p>
<h5><strong>ऑनलाइन आवेदन कहां करें?</strong></h5>
<p>प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान अपनी फसल का बीमा आधिकारिक पोर्टल <strong><a href="https://www.pmfby.gov.in/">https://www.pmfby.gov.in/</a></strong>, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), बैंक शाखा अथवा अन्य अधिकृत माध्यमों के जरिए करा सकते हैं। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल और आसान बनाया है, जिससे पात्र किसान घर बैठे भी आवेदन कर सकते हैं।</p>
<h5><strong>फसल बीमा के लिए जरूरी दस्तावेज</strong></h5>
<p>आवेदन करते समय सामान्यतः निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होती है—</p>
<ul>
<li>
<p>आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र</p>
</li>
<li>
<p>बैंक पासबुक</p>
</li>
<li>
<p>बैंक खाता संख्या एवं IFSC कोड</p>
</li>
<li>
<p>मोबाइल नंबर</p>
</li>
<li>
<p>भूमि रिकॉर्ड (खसरा, खतौनी, पट्टा आदि)</p>
</li>
<li>
<p>बोई गई फसल का विवरण</p>
</li>
<li>
<p>पासपोर्ट साइज फोटो (यदि आवश्यक हो)</p>
</li>
<li>
<p>किरायेदार किसान होने पर राज्य सरकार के नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया</strong></h5>
<p><strong>स्टेप 1:</strong> आधिकारिक पोर्टल पर जाएं और Farmer Corner में Enroll Now विकल्प चुनें।</p>
<p><strong>स्टेप 2:</strong> पहली बार आवेदन करने वाले किसान राज्य, योजना, सीजन और वर्ष का चयन करें। इसके बाद मोबाइल नंबर को OTP के माध्यम से सत्यापित करें और व्यक्तिगत जानकारी, पता, पहचान पत्र तथा बैंक विवरण भरकर नया पंजीकरण करें।</p>
<p><strong>स्टेप 3:</strong> रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद मोबाइल नंबर और OTP की मदद से लॉगिन करें। कुछ राज्यों, जैसे कर्नाटक और गुजरात, में आवेदन संबंधित राज्य के अलग पोर्टल के माध्यम से किया जाता है।</p>
<p><strong>स्टेप 4:</strong> फसल, भूमि, बैंक और अन्य आवश्यक जानकारी भरें। सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद दर्ज की गई जानकारी की जांच करें।</p>
<p><strong>स्टेप 5:</strong> योजना के अनुसार देय प्रीमियम का ऑनलाइन भुगतान करें। आवेदन सफल होने पर रसीद और आवेदन संख्या सुरक्षित रख लें।</p>
<h5><strong>आवेदन के बाद क्या करें?</strong></h5>
<p>बीमा आवेदन संख्या को सुरक्षित रखें और समय-समय पर पोर्टल पर आवेदन की स्थिति जांचते रहें। यदि फसल को प्राकृतिक आपदा, बाढ़, ओलावृष्टि, कीट प्रकोप या अन्य अधिसूचित कारणों से नुकसान होता है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर<strong> </strong>कृषि रक्षक पोर्टल अथवा हेल्पलाइन 14447 पर इसकी सूचना अवश्य दें।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/586203/google-india-tourism-ministry-mou-ai-digital-tourism-india"><span class="t-red">Google के साथ मिलकर बदलेगी भारत की पर्यटन तस्वीर! </span>डिजिटल टेक्नोलॉजी और AI से दुनिया तक पहुंचेगा Incredible India</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:01:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>WhatsApp Username Feature : नए फीचर पर सरकार की नजर, फर्जी पहचान और ऑनलाइन ठगी की आशंका पर जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली।</strong> व्हाट्सऐप के प्रस्तावित <strong>'यूजरनेम फीचर'</strong> को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। सरकार इस नए फीचर की समीक्षा कर रही है और इस बात की जांच कर रही है कि कहीं इसका इस्तेमाल फर्जी पहचान बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर ठगी या लोगों को गुमराह करने के लिए तो नहीं किया जा सकता।</p>
<p>सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही व्हाट्सऐप से इस फीचर को लेकर विस्तृत जानकारी मांग सकती है। इसके लिए कंपनी को नोटिस भेजने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार यह जानना चाहती है कि नया फीचर कैसे काम करेगा, इससे जुड़े</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586228/whatsapp-username-feature--government-keeping-an-eye-on-the-new-feature--probe-launched-over-concerns-regarding-fake-identities-and-online-fraud"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/01.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली।</strong> व्हाट्सऐप के प्रस्तावित <strong>'यूजरनेम फीचर'</strong> को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। सरकार इस नए फीचर की समीक्षा कर रही है और इस बात की जांच कर रही है कि कहीं इसका इस्तेमाल फर्जी पहचान बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर ठगी या लोगों को गुमराह करने के लिए तो नहीं किया जा सकता।</p>
<p>सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही व्हाट्सऐप से इस फीचर को लेकर विस्तृत जानकारी मांग सकती है। इसके लिए कंपनी को नोटिस भेजने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार यह जानना चाहती है कि नया फीचर कैसे काम करेगा, इससे जुड़े संभावित जोखिम क्या हैं और कंपनी ने दुरुपयोग रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए हैं। जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां भी इस मामले की पड़ताल कर सकती हैं।</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस फीचर से राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा या आम लोगों के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यदि कंपनी का जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो सरकार इसके लागू होने पर रोक लगाने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर सकती है।</p>
<p>दरअसल, व्हाट्सऐप इस साल के आखिर तक ऐसा फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके तहत उपयोगकर्ता अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल <strong>यूजरनेम</strong> के जरिए चैट कर सकेंगे। कंपनी ने यूजरनेम आरक्षित (रिजर्व) करने की सुविधा शुरू कर दी है, जबकि फीचर को आधिकारिक रूप से बाद में जारी किया जाएगा।</p>
<p>व्हाट्सऐप का कहना है कि इस फीचर का उद्देश्य खासतौर पर समूह चैट और नए लोगों से बातचीत के दौरान उपयोगकर्ताओं की निजता को बेहतर बनाना है, ताकि उन्हें अपना मोबाइल नंबर साझा न करना पड़े।</p>
<p>हालांकि, सरकारी अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता यह है कि कुछ लोग ऐसे यूजरनेम चुन सकते हैं, जो किसी सरकारी विभाग, कंपनी, बैंक या प्रसिद्ध व्यक्ति के नाम से काफी मिलते-जुलते हों। इससे आम उपयोगकर्ता भ्रमित हो सकते हैं और ऑनलाइन ठगी या पहचान की चोरी जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।</p>
<p>भारत में व्हाट्सऐप के करीब <strong>50 करोड़ उपयोगकर्ता</strong> हैं, इसलिए सरकार इस फीचर को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। सोशल मीडिया मंच <strong>एक्स</strong> पर भी कई स्टार्टअप संस्थापकों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी पेशेवरों ने इस फीचर को लेकर सवाल उठाए हैं।</p>
<p>पेटीएम के संस्थापक एवं सीईओ <strong>विजय शेखर शर्मा</strong> ने चेतावनी दी है कि यदि मजबूत सत्यापन व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो एक जैसे दिखने वाले यूजरनेम पहचान की चोरी और साइबर घोटालों का बड़ा कारण बन सकते हैं। वहीं <strong>नॉट डेटिंग</strong> के संस्थापक एवं सीईओ <strong>जसबीर सिंह</strong> ने कहा कि निजता के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूजरनेम सत्यापन की मजबूत व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो धोखेबाज असली कंपनियों, सरकारी एजेंसियों या चर्चित हस्तियों से मिलते-जुलते नाम अपनाकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं।</p>
<h5 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong><span>क्या है WhatsApp का नया Username Feature?</span></strong></h5>
<p>व्हाट्सऐप इस साल के आखिर तक <strong>Username Feature</strong> लॉन्च करने की तैयारी में है। इस फीचर के जरिए उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के माध्यम से चैट कर सकेंगे। कंपनी ने यूजरनेम आरक्षित (रिजर्व) करने की सुविधा शुरू कर दी है, जबकि फीचर को चरणबद्ध तरीके से सभी यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा। सरकार और साइबर विशेषज्ञ फिलहाल इस फीचर के सुरक्षा पहलुओं और संभावित दुरुपयोग की समीक्षा कर रहे हैं।</p>
<h5>Username Feature से होने वाले फायदे</h5>
<ol>
<li>मोबाइल नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा मिलेगी।</li>
<li>समूह चैट और नए लोगों से जुड़ते समय निजता बेहतर होगी।</li>
<li>व्यक्तिगत नंबर सार्वजनिक होने का जोखिम कम हो सकता है।</li>
<li>ऑनलाइन बातचीत को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने का दावा।</li>
</ol>
<h5><strong>Username Feature नुकसान </strong></h5>
<ol>
<li>फर्जी या मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर पहचान की चोरी हो सकती है।</li>
<li>सरकारी एजेंसियों, कंपनियों या मशहूर हस्तियों के नाम से धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है।</li>
<li>साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम के नए तरीके सामने आ सकते हैं।</li>
<li>यूजरनेम सत्यापन की मजबूत व्यवस्था नहीं होने पर आम लोग भ्रमित हो सकते हैं।</li>
<li>सरकार सार्वजनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित असर को लेकर सतर्क है।</li>
</ol>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:03:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Google के साथ मिलकर बदलेगी भारत की पर्यटन तस्वीर! डिजिटल टेक्नोलॉजी और AI से दुनिया तक पहुंचेगा Incredible India</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटन मंत्रालय और Google India के बीच MoU पर हस्ताक्षर, AI, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय पर्यटन स्थलों को मिलेगी वैश्विक पहचान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586203/google-india-tourism-ministry-mou-ai-digital-tourism-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(17).png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> भारत के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और Google India के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी हुई है। इस समझौते के तहत डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा आधारित विश्लेषण और क्षमता निर्माण के माध्यम से देश के पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार को मजबूत किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में पर्यटन मंत्रालय और Google India के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत के पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और पर्यटन अनुभवों को देश-विदेश के यात्रियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><span><strong>AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पर्यटन स्थलों की पहुंच</strong></span></h4>
<p style="text-align:justify;">समझौते के तहत दोनों पक्ष डिजिटल टूल्स, AI, डेटा इनसाइट्स, क्षमता निर्माण और पर्यटकों की डिजिटल सहभागिता बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसके जरिए भारत के ऐतिहासिक, धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों की ऑनलाइन दृश्यता (Visibility) को और अधिक मजबूत किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह सहयोग गैर-वाणिज्यिक (Non-Commercial), गैर-बाध्यकारी (Non-Binding) और गैर-विशिष्ट (Non-Exclusive) होगा तथा इससे किसी भी पक्ष पर कोई वित्तीय दायित्व नहीं आएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><span><strong>'अतुल्य भारत' अभियान को मिलेगा डिजिटल विस्तार</strong></span></h4>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि डिजिटल तकनीक दुनिया भर के लोगों तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों को नए और आकर्षक तरीके से पहुंचाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी<strong> </strong>'अतुल्य भारत' (Incredible India) अभियान को तकनीक आधारित नई दिशा देने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">यह भी पढ़ेंः </span><a href="https://www.amritvichar.com/article/586179/digital-india-11-years-pm-modi-india-digital-transformation-ai"><span class="t-red">Digital India के 11 साल: </span>PM मोदी बोले- दुनिया में भारत को मिली नई पहचान, AI और डिजिटल क्रांति से खुल रहे नए अवसर</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:18:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Digital India के 11 साल: PM मोदी बोले- दुनिया में भारत को मिली नई पहचान, AI और डिजिटल क्रांति से खुल रहे नए अवसर</title>
                                    <description><![CDATA[डिजिटल इंडिया अभियान के 11 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस पहल ने शासन, डिजिटल भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भारत को वैश्विक पहचान दिलाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586179/digital-india-11-years-pm-modi-india-digital-transformation-ai"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(12).png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>नई दिल्ली। </strong>केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'डिजिटल इंडिया' पहल के 11 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के डिजिटल परिवर्तन का महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाया, नागरिकों को सशक्त किया और देश के समग्र विकास को नई दिशा दी है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा संदेश में कहा कि पिछले 11 वर्षों में डिजिटल इंडिया ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उनके अनुसार तकनीक अब केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रभावी शक्ति बन चुकी है।</p>
<h4><strong><span>डिजिटल भुगतान और पारदर्शिता को मिली नई मजबूती</span></strong></h4>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली, लाभार्थियों तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और लगातार मजबूत हो रहे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुलभ बनाया है। इससे करोड़ों नागरिकों तक योजनाओं का लाभ आसान तरीके से पहुंचा है।</p>
<h4><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong><span>गांवों और छोटे शहरों तक पहुंची तकनीकी क्रांति</span></strong></span></h4>
<p>उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया ने नवाचार की संस्कृति को देश के दूर-दराज़ क्षेत्रों, गांवों और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों तक पहुंचाया है। आज इन क्षेत्रों के युवा उद्यमी, स्टार्टअप और इनोवेटर्स वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<h4><strong><span>शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में बढ़ा डिजिटल उपयोग</span></strong></h4>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार इस पहल ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, व्यापार और सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों के उपयोग को मजबूत किया है। इससे आम नागरिकों के लिए सेवाओं की उपलब्धता पहले की तुलना में अधिक आसान और प्रभावी हुई है।</p>
<h4><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong><span>AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर फोकस</span></strong></span></h4>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार की डिजिटल नीति के कारण भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनका कहना है कि इससे भविष्य में विकास, रोजगार और नवाचार के नए अवसर पैदा होंगे।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान विकसित और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बन चुका है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार, डिजिटल लेनदेन और तकनीकी पहुंच में हुई प्रगति ने वैश्विक स्तर पर भारत की नई पहचान बनाई है।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>यह भी पढ़ेंः </strong></span><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/586171/india-us-trade-deal-trump-removes-ban-on-4-indian-companies-sdn-list"><span class="t-red">Trade Deal से पहले भारत को राहत, </span>अमेरिका ने 4 भारतीय कंपनियों से हटाया बैन</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:48:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>WhatsApp Big Privacy Update: अब मोबाइल नंबर नहीं, Username से होगी चैट; जानें कैसे करेगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[WhatsApp ने आधिकारिक तौर पर Username सिस्टम की घोषणा की है। नए फीचर के बाद यूजर्स बिना मोबाइल नंबर साझा किए चैट कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी को और मजबूत बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586108/whatsapp-username-feature-privacy-update-without-phone-number-chat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(11)12.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः </strong>अगर आप WhatsApp पर किसी नए या अनजान व्यक्ति से बातचीत करते समय अपना मोबाइल नंबर साझा करने से बचते हैं, तो जल्द ही आपकी यह चिंता खत्म हो सकती है। WhatsApp ने आधिकारिक तौर पर अपने नए Username सिस्टम की घोषणा कर दी है, जिसके जरिए भविष्य में यूजर्स बिना मोबाइल नंबर बताए भी एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे।</p>
<p>कंपनी के अनुसार, यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को पहले से अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।</p>
<h4><strong>अब मोबाइल नंबर की जगह होगा Username</strong></h4>
<p>WhatsApp के नए सिस्टम में हर यूजर अपने अकाउंट के लिए एक यूनिक Username चुन सकेगा। इसके बाद किसी से चैट शुरू करने के लिए मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी। सामने वाला व्यक्ति केवल Username के जरिए संपर्क कर सकेगा।</p>
<h4><strong>अगले सप्ताह शुरू होगी Username Reservation</strong></h4>
<p>कंपनी के मुताबिक, Username Reservation की शुरुआत अगले सप्ताह से की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इस फीचर को दुनिया भर के यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा और वर्ष के अंत तक इसका व्यापक रोलआउट पूरा करने का लक्ष्य है।</p>
<h4><strong>प्राइवेसी को मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा</strong></h4>
<p>WhatsApp ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया है कि इस फीचर का मुख्य उद्देश्य यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा बढ़ाना है।</p>
<p>इस सिस्टम में कोई सार्वजनिक Username डायरेक्टरी उपलब्ध नहीं होगी। यानी कोई भी व्यक्ति केवल नाम खोजकर आपका अकाउंट नहीं ढूंढ सकेगा। किसी को आपसे संपर्क करने के लिए आपका सही Username पता होना जरूरी होगा।</p>
<p>इसके अलावा जब कोई पहली बार आपसे चैट करेगा, तब उसे आपका मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा।</p>
<h4><strong>'Username Key' फीचर पर भी चल रहा काम</strong></h4>
<p>WhatsApp एक अतिरिक्त सुरक्षा फीचर Optional Username Key पर भी काम कर रहा है। यदि यूजर इस विकल्प को सक्रिय करता है, तो केवल Username जानना पर्याप्त नहीं होगा। सामने वाले के पास निर्धारित 'Key' होने पर ही वह मैसेज भेज सकेगा।</p>
<p>यह फीचर यूजर्स को अनचाहे संदेशों और संभावित स्पैम से अतिरिक्त सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।</p>
<h4><strong>Instagram और Facebook Username भी कर सकेंगे रिजर्व</strong></h4>
<p>WhatsApp ने बताया है कि कंटेंट क्रिएटर्स, छोटे व्यवसाय और विभिन्न संस्थाएं अपने मौजूदा Instagram या Facebook Username को WhatsApp पर भी रिजर्व कर सकेंगी।</p>
<p>यदि कोई पसंदीदा Username पहले से उपलब्ध नहीं होगा, तो WhatsApp का Username Generator टूल उससे मिलते-जुलते वैकल्पिक सुझाव भी देगा।</p>
<h4><strong>ऐसे सेट कर सकेंगे WhatsApp Username</strong></h4>
<p>जब यह फीचर आपके अकाउंट में उपलब्ध हो जाए, तब इसे इन आसान चरणों में सक्रिय किया जा सकेगा—</p>
<p>-WhatsApp को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें।<br />-Settings में जाएं।<br />-Account विकल्प खोलें।<br />-Username विकल्प पर टैप करें।<br />-उपलब्ध Username चुनकर उसे सेव कर दें।</p>
<p>फिलहाल यह फीचर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुआ है और इसे चरणबद्ध तरीके से रोल आउट किया जाएगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/585985/digital-stress-mental-health-ayurveda-digital-detox-screen-time"><span class="t-red">Digital Stress से कैसे बचाएगा आयुर्वेद? </span>जानिए मानसिक तनाव, अनिद्रा और स्क्रीन टाइम का प्राकृतिक समाधान</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/586108/whatsapp-username-feature-privacy-update-without-phone-number-chat</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:35:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएसआईआर-सीडीआरआर की दवाओं ने दी जिंदगियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)  के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई) देश की अग्रणी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में से है, जो औषधि खोज और विकास के क्षेत्र में दशकों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश की आजादी के तुरंत बाद 1951 में स्थापित इस संस्थान का उद्देश्य देश को दवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। लखनऊ के गोमती नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक छत्तर मंजिल से शुरू हुआ यह संस्थान अब जानकीपुरम एक्सटेंशन के आधुनिक परिसर में कार्यरत है, जहां विरासत और अत्याधुनिक विज्ञान का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां की प्रयोगशाला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585837/csir-cdrr-medicines-saved-lives"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(58)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)  के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई) देश की अग्रणी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में से है, जो औषधि खोज और विकास के क्षेत्र में दशकों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश की आजादी के तुरंत बाद 1951 में स्थापित इस संस्थान का उद्देश्य देश को दवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। लखनऊ के गोमती नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक छत्तर मंजिल से शुरू हुआ यह संस्थान अब जानकीपुरम एक्सटेंशन के आधुनिक परिसर में कार्यरत है, जहां विरासत और अत्याधुनिक विज्ञान का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां की प्रयोगशाला में रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, औषधि विज्ञान, चिकित्सक और डेटा के वैज्ञानिक मिलकर प्रयोगशाला में विकसित खोजों को सस्ती और प्रभावी दवाओं में बदलते हैं।   -मार्कण्डेय पाण्डेय, लखनऊ</p>
<h4 style="text-align:justify;">इन क्षेत्रों में कार्य करती है प्रयोगशाला</h4>
<p style="text-align:justify;">    औषधि संश्लेषण<br />    प्री-क्लिनिकल परीक्षण<br />    क्लिनिकल उपयोग<br />    प्रजनन स्वास्थ्य<br />    चयापचय रोग<br />    संक्रामक रोग<br />     तंत्रिका विज्ञान<br />    कैंसर और उपोष्ण उष्णकटिबंधीय रोग</p>
<h4 style="text-align:justify;">सहेली और छाया का हुआ प्रयोगशाला में जन्म</h4>
<p style="text-align:justify;">सीएसआईआर-सीडीआरआई की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है ऑरमेलॉक्सिफीन (सेंटक्रोमैन) जो दुनिया की पहली गैर स्टेरॉयडल मौखिक गर्भनिरोधक गोली है, जिसे इस प्रयोगशाला में स्वदेशी औषधि के तौर पर विकसित किया गया। इसे सहेली नाम से बाजार में उतारा गया, जबकि सरकारी परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत छाया के रूप में वितरित यह दवा लाखों भारतीय महिलाओं को सुरक्षित, सस्ती और हार्मोन-मुक्त गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध कराती है। सप्ताह में केवल एक बार ली जाने वाली यह गोली पारंपरिक हार्मोनल गोलियों से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाती है। इस ऐतिहासिक खोज का श्रेय डॉ. नित्यानंद को दिया जाता है, जिन्होंने भारत में आधुनिक औषधि रसायन विज्ञान की नींव रखी।</p>
<p style="text-align:justify;">1960 के दशक में जब पूरी दुनिया हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियों पर काम कर रही थी, तब एक अलग सवाल उठा कि क्या बिना हार्मोन के गर्भधारण रोका जा सकता है। सीमित फंडिंग, अस्पष्ट नियामक रास्ते के बीच समाधान निकालना चुनौतीपूर्ण था। सैकड़ों यौगिक बनाए गए, अस्वीकार भी हुए और वर्षों तक पशु व मानव परीक्षण चलते रहे। लगातार प्रयासों के बाद सेंटक्रोमैन एक ऐसे अणु के रूप में सामने आया, जो एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स को चयनात्मक रूप से नियंत्रित करता है। यह ओव्यूलेशन या मासिक धर्म को प्रभावित किए बिना गर्भधारण को रोकता है। यही विशेषता इसे सुरक्षित, दीर्घकालिक और सप्ताह में एक बार ली जाने वाली दवा बनाती है। क्लिनिकल परीक्षणों ने इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा को सिद्ध किया और यह प्रयोगशाला की खोज से जन स्वास्थ्य की दवा बन गई। 1990 के दशक की शुरुआत में सहेली को मंजूरी मिली और बाद में इसे राष्ट्रीय परिवार-नियोजन कार्यक्रम में शामिल किया गया। आज भी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में छाया के रूप में यह दवा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मलेरिया के खिलाफ लड़ी जंग</h4>
<p style="text-align:justify;">सीएसआईआर-सीडीआरआई का योगदान केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। आर्टीईथर, जिसे ई-माल नाम से जाना जाता है, गंभीर और सेरेब्रल मलेरिया के इलाज में उपयोगी एक तेज असर करने वाली दवा है। यह आर्टेमिसिनिन का अर्ध-संश्लेषित रूप है, जिसे विशेष रूप से दवा-प्रतिरोधी मलेरिया के लिए विकसित किया गया। मलेरिया-प्रभावित क्षेत्रों में यह एक प्रभावी और किफायती उपचार विकल्प के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">डाल्जबोन: जब हर्बल विज्ञान बना सहारा</h4>
<p style="text-align:justify;">सीएसआईआर-सीडीआरआई ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए डाल्जबोन नामक हर्बल बोन-हीलिंग उत्पाद भी विकसित किया। यह प्राकृतिक पौधों से प्राप्त यौगिकों पर आधारित है और हड्डियों की मजबूती व पुनर्निर्माण में सहायक है। यह उत्पाद फार्मांजा हर्बल प्राईवेट लिमिटेड को लाइसेंस किया गया और बाजार में उपलब्ध है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अन्य खोजें</h4>
<p style="text-align:justify;">सीएसआईआर-सीडीआरआई की कई अन्य खोजें जो लोगों के जीवन का हिस्सा हैं</p>
<p style="text-align:justify;">    जॉइंट फ्रेश - ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए पालक-आधारित फॉर्मूलेशन<br />    बेकोसाइड्स एक्सट्रैक्ट - ब्राह्मी से प्राप्त स्मृतिवर्धक उत्पाद<br />    कॉन्सैप - गर्भनिरोधक स्पर्मिसाइड क्रीम<br />    गुग्गुलिपिड - कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण के लिए हर्बल दवा<br />    सेंटप्रोपाज़ीन, सेंटब्यूटिनडोल, सेंटब्यूक्रिडीन<br />    सीएसआईआर-सीडीआरआई में विकसित प्रारंभिक स्मॉल-मॉलिक्यूल दवाएं</p>
<h4 style="text-align:justify;">दुनिया को पहली बार प्रयोगशाला ने दिया</h4>
<p style="text-align:justify;">    पहली गैर-स्टेरॉयडल मौखिक गर्भनिरोधक सहेली<br />    पूरी तरह भारत में खोजी, विकसित और निर्मित दवा<br />    महिलाओं के लिए एक भरोसेमंद और सशक्त स्वास्थ्य समाधान</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585837/csir-cdrr-medicines-saved-lives</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 11:00:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या गोद में लैपटॉप रखकर काम करते हैं? जानिए कैसे बढ़ सकता है त्वचा, रीढ़ और आंखों की समस्याओं का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[वर्क फ्रॉम होम की आदत बन सकती है सेहत के लिए नुकसानदेह, विशेषज्ञों ने बताया सही पोश्चर और सुरक्षित तरीके से काम करने का तरीका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585988/laptop-on-lap-side-effects-health-risks-work-from-home-tips"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(44)7.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः </strong>वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल लाइफस्टाइल के बढ़ते चलन ने लोगों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आज बड़ी संख्या में लोग घर के सोफे, बिस्तर या कुर्सी पर बैठकर घंटों लैपटॉप पर काम करते हैं। सुविधा और आराम के लिए कई लोग लैपटॉप को सीधे अपनी गोद में रख लेते हैं। पहली नजर में यह तरीका आसान और आरामदायक लगता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत लंबे समय में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">त्वचा पर पड़ सकता है  बुरा असर</span></strong></h4>
<p>लैपटॉप लंबे समय तक चलने पर काफी गर्म हो जाता है, जब इसे सीधे गोद या पैरों पर रखा जाता है, तो उसकी गर्मी त्वचा तक लगातार पहुंचती रहती है। इससे त्वचा पर लालपन, जलन या खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से ‘टोस्टेड स्किन सिंड्रोम’ जैसी स्थिति भी विकसित हो सकती है। इस स्थिति में त्वचा पर जालीनुमा भूरे या काले निशान बनने लगते हैं, जिन्हें ठीक होने में काफी समय लग सकता है।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">गर्दन, पीठ और कंधों में बढ़ सकता है दर्द</span></strong></h4>
<p>गोद में लैपटॉप रखने पर स्क्रीन सामान्य से काफी नीचे होती है। ऐसे में स्क्रीन देखने के लिए व्यक्ति को लगातार गर्दन झुकानी पड़ती है। लंबे समय तक इस स्थिति में बैठे रहने से गर्दन, कंधों और पीठ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे यह दर्द स्थायी रूप ले सकता है और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। गलत पोश्चर के कारण थकान और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(45)6.png" alt="MUSKAN DIXIT (45)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">हाथों और कलाई पर दबाव</span></strong></h4>
<p>जब लैपटॉप गोद में रखा होता है, तो कीबोर्ड और टचपैड का इस्तेमाल स्वाभाविक स्थिति में नहीं हो पाता। इससे हाथों और कलाई को असहज कोण पर रखना पड़ता है। लगातार इसी मुद्रा में टाइपिंग करने से कलाई में दर्द, उंगलियों में अकड़न और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा करने से रिपीटिटिव स्ट्रेन इंजरी (RSI) जैसी परेशानी भी हो सकती है।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर भी बरतें सावधानी</span></strong></h4>
<p>लैपटॉप की गर्मी और उसे लंबे समय तक गोद में रखने को लेकर पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी कई शोध किए गए हैं। कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि लगातार अधिक तापमान के संपर्क में रहने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन विशेषज्ञ एहतियात के तौर पर लैपटॉप को सीधे गोद में रखने से बचने की सलाह देते हैं।</p>
<h4><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">आंखों और मानसिक थकान  की भी समस्या</span></strong></h4>
<p>गोद में लैपटॉप रखकर काम करने पर स्क्रीन और आंखों के बीच की दूरी भी अक्सर सही नहीं रहती। इससे आंखों में जलन, सूखापन, सिरदर्द और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार बिना ब्रेक के काम करने से मानसिक थकान और एकाग्रता में भी कमी आ सकती है।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>कैसे करें सुरक्षित तरीके से काम</strong></span></h4>
<p>-  यदि आपको लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करना है, तो सही कार्यस्थल बनाना सबसे अच्छा विकल्प है। हमेशा मेज और कुर्सी का उपयोग करें ताकि आपकी स्क्रीन आंखों के बराबर ऊंचाई पर रहे। यदि डेस्क उपलब्ध न हो तो लैपटॉप स्टैंड, कुशन ट्रे या लैप डेस्क का इस्तेमाल करें, जिससे लैपटॉप की गर्मी सीधे शरीर तक न पहुंचे।</p>
<p>- हर 30 से 40 मिनट के बाद कुछ मिनट का ब्रेक जरूर लें। इस दौरान थोड़ा टहलें, शरीर को स्ट्रेच करें और आंखों को आराम दें। बैठने की मुद्रा समय-समय पर बदलते रहें और कंधों को सीधा रखें। यदि संभव हो तो अलग कीबोर्ड और माउस का उपयोग करें, जिससे हाथों और कलाई पर कम दबाव पड़े।</p>
<p>- लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना भले ही सुविधाजनक लगे, लेकिन यह आदत त्वचा, मांसपेशियों, रीढ़, कलाई और आंखों सहित शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है। थोड़ी-सी सावधानी, सही बैठने की आदत और नियमित ब्रेक लेकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। बेहतर होगा कि काम के दौरान अपने आराम के साथ-साथ स्वास्थ्य को भी समान महत्व दें, क्योंकि स्वस्थ शरीर ही बेहतर कार्यक्षमता की सबसे बड़ी कुंजी है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार लैपटॉप से निकलने वाली गर्मी, गलत बैठने की मुद्रा और लगातार एक ही स्थिति में काम करना शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए यदि आप रोजाना कई घंटे लैपटॉप पर काम करते हैं, तो सही तरीके से बैठना और उचित उपकरणों का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a class="post-title-lg" href="https://www.amritvichar.com/article/585985/digital-stress-mental-health-ayurveda-digital-detox-screen-time"><span class="t-red">Digital Stress से कैसे बचाएगा आयुर्वेद? </span>जानिए मानसिक तनाव, अनिद्रा और स्क्रीन टाइम का प्राकृतिक समाधान</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585988/laptop-on-lap-side-effects-health-risks-work-from-home-tips</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:17:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> Digital Stress से कैसे बचाएगा आयुर्वेद? जानिए मानसिक तनाव, अनिद्रा और स्क्रीन टाइम का प्राकृतिक समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेलीः </strong>इक्कीसवीं सदी को तकनीकी क्रांति और डिजिटल युग का दौर कहा जाता है। आज स्मार्टफोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल कार्यप्रणालियां हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। तकनीक ने जीवन को पहले की अपेक्षा अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक बनाया है। अब जानकारी प्राप्त करने, लोगों से जुड़ने, व्यवसाय चलाने और शिक्षा प्राप्त करने के लिए भौतिक सीमाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन जहां तकनीक ने अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं उसने मानव जीवन में कुछ नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। इनमें मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585985/digital-stress-mental-health-ayurveda-digital-detox-screen-time"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(42)7.png" alt=""></a><br /><p><strong>बरेलीः </strong>इक्कीसवीं सदी को तकनीकी क्रांति और डिजिटल युग का दौर कहा जाता है। आज स्मार्टफोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल कार्यप्रणालियां हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। तकनीक ने जीवन को पहले की अपेक्षा अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक बनाया है। अब जानकारी प्राप्त करने, लोगों से जुड़ने, व्यवसाय चलाने और शिक्षा प्राप्त करने के लिए भौतिक सीमाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन जहां तकनीक ने अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं उसने मानव जीवन में कुछ नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। इनमें मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।</p>
<h4><strong>डिजिटल युग और बदलती जीवनशैली</strong></h4>
<p>पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल उपकरणों का उपयोग अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। सुबह उठते ही मोबाइल फोन देखने की आदत से लेकर रात में सोने तक सोशल मीडिया, समाचार, वीडियो और संदेशों का सिलसिला चलता रहता है। कार्यस्थलों पर भी अधिकांश कार्य कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से किए जाते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो गया है। इस निरंतर डिजिटल संपर्क ने जीवन की गति को तेज कर दिया है, लेकिन इसके साथ मानसिक विश्राम का समय कम होता जा रहा है। व्यक्ति शारीरिक रूप से भले ही आराम की स्थिति में हो, लेकिन उसका मस्तिष्क लगातार सक्रिय रहता है। परिणामस्वरूप मन को शांति नहीं मिल पाती और तनाव धीरे-धीरे स्थायी रूप लेने लगता है। यही कारण है कि आज कम आयु के लोगों में भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।</p>
<p>आज अधिकांश लोग दिन का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों के साथ बिताते हैं। लगातार सूचनाओं की बौछार, सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा, कार्यस्थल का दबाव और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन की कमी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। ऐसे समय में आयुर्वेद का समग्र दृष्टिकोण मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा और तनाव प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित एक संपूर्ण जीवन पद्धति है।</p>
<h4><strong>मानसिक तनाव की बढ़ती समस्या</strong></h4>
<p>मानसिक तनाव जीवन की सामान्य परिस्थितियों के प्रति शरीर और मन की प्रतिक्रिया है। सीमित मात्रा में तनाव व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित कर सकता है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहता है, तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है।</p>
<p>डिजिटल युग में तनाव के अनेक स्रोत हैं। सोशल मीडिया पर दूसरों की उपलब्धियों को देखकर स्वयं की तुलना करना, हर समय उपलब्ध रहने का दबाव, नौकरी और व्यवसाय की प्रतिस्पर्धा, ऑनलाइन बैठकों की अधिकता, बच्चों और युवाओं में परीक्षा संबंधी दबाव तथा भविष्य की अनिश्चितताएं मानसिक तनाव को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं। लगातार तनाव की स्थिति में व्यक्ति को सिरदर्द, थकान, अनिद्रा, भूख में कमी या वृद्धि, एकाग्रता में कमी, क्रोध, चिंता और उदासी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति अवसाद और अन्य मानसिक विकारों का रूप ले सकती है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/muskan-dixit-(42)7.png" alt="MUSKAN DIXIT (42)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य की अवधारणा आयुर्वेद स्वास्थ्य को केवल शारीरिक स्तर तक सीमित नहीं मानता। चरक संहिता और अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में मन को स्वास्थ्य का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति वह है, जिसके दोष, धातु, मल और अग्नि संतुलित हों तथा जिसकी आत्मा, इंद्रियां और मन प्रसन्न अवस्था में हों। आयुर्वेद मन को शरीर का नियंत्रक मानता है। मन की शांति और स्थिरता व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। यदि मन असंतुलित हो जाए, तो शरीर भी विभिन्न रोगों का शिकार होने लगता है। इसलिए आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण मानता है।</p>
<h4><strong>सत्व, रज और तम: मन के तीन आधार</strong></h4>
<p>- आयुर्वेद और भारतीय दर्शन के अनुसार मन तीन गुणों-सत्व, रज और तम से प्रभावित होता है।</p>
<p>- सत्व मन की शुद्धता, संतुलन, ज्ञान, धैर्य और सकारात्मकता का प्रतीक है। जब सत्व की प्रधानता होती है, तो व्यक्ति शांत, प्रसन्न और विवेकशील रहता है।</p>
<p>- रज गति, महत्वाकांक्षा, उत्तेजना और इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी अधिकता व्यक्ति को बेचैन, क्रोधित और अस्थिर बनाती है।</p>
<p>- तम आलस्य, अज्ञान, भ्रम और निष्क्रियता का प्रतीक है। तम की वृद्धि से व्यक्ति में उदासीनता और नकारात्मकता बढ़ती है।</p>
<p>- डिजिटल युग में लगातार उत्तेजनात्मक सामग्री, सूचनाओं की अधिकता और प्रतिस्पर्धा के कारण रज और तम की वृद्धि होने लगती है। इससे मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। आयुर्वेद का उद्देश्य सत्व गुण को बढ़ाना और मन को संतुलित बनाना है।</p>
<h4><strong>सूचना की अधिकता और मस्तिष्क पर प्रभाव</strong></h4>
<p>डिजिटल युग में व्यक्ति प्रतिदिन हजारों सूचनाओं के संपर्क में आता है। समाचार, सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, विज्ञापन और संदेशों की निरंतर धारा मस्तिष्क को लगातार सक्रिय बनाए रखती है। इस स्थिति को “इन्फॉर्मेशन ओवरलोड” कहा जाता है। जब मस्तिष्क को पर्याप्त विश्राम नहीं मिलता, तब निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है, स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है और मानसिक थकान बढ़ जाती है। आयुर्वेद के अनुसार मन को भी विश्राम और पोषण की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिए सकारात्मक विचार, ध्यान और मानसिक शांति आवश्यक हैं।</p>
<h4><strong>योग, प्राणायाम और ध्यान की भूमिका</strong></h4>
<p>मानसिक तनाव के प्रबंधन में योग और ध्यान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।</p>
<p>प्राणायाम के माध्यम से श्वास को नियंत्रित करके मन को स्थिर किया जा सकता है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, नाड़ी शोधन और उज्जायी प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करने में विशेष रूप से उपयोगी माने जाते हैं।</p>
<p>ध्यान मन को वर्तमान क्षण में केंद्रित करना सिखाता है। नियमित ध्यान करने से चिंता कम होती है, भावनात्मक संतुलन बढ़ता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। आज अनेक वैज्ञानिक अध्ययनों ने भी यह सिद्ध किया है कि ध्यान और योग मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में प्रभावी हैं।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>वात दोष और मानसिक तनाव का संबंध</strong></span></h4>
<p>आयुर्वेद के अनुसार मानसिक तनाव का गहरा संबंध वात दोष से है। वात शरीर और मन की गति तथा संचार को नियंत्रित करता है। अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना, अत्यधिक चिंता करना, भोजन छोड़ना, लगातार यात्रा करना तथा अत्यधिक मानसिक कार्य वात को बढ़ाते हैं।</p>
<p>जब वात असंतुलित होता है, तब व्यक्ति में चिंता, भय, घबराहट, अनिद्रा, बेचैनी और मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वर्तमान डिजिटल जीवनशैली वात वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न करती है। इसलिए आयुर्वेद मानसिक तनाव के प्रबंधन में वात संतुलन पर विशेष बल देता है।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>निद्रा का महत्व और डिजिटल जीवन</strong></span></h4>
<p>आयुर्वेद ने निद्रा को जीवन के तीन प्रमुख स्तंभों में स्थान दिया है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन आज देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग सामान्य बात हो गई है।</p>
<p>डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है। इससे नींद आने में देरी होती है और नींद की गुणवत्ता भी कम हो जाती है। लगातार नींद की कमी से तनाव हार्मोन बढ़ते हैं, एकाग्रता घटती है और मानसिक संतुलन प्रभावित होता है।</p>
<p>आयुर्वेद के अनुसार रात में समय पर सोना और सुबह ब्रह्ममुहूर्त में जागना मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह दिनचर्या मन को शांत रखने और तनाव को कम करने में सहायक होती है।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>युवाओं और बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती</strong></span></h4>
<p>आज बच्चों और युवाओं में स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन गेम, सोशल मीडिया और इंटरनेट की लत उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन, सामाजिक दूरी और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। आयुर्वेद संतुलित दिनचर्या, नियमित खेलकूद, योग, पर्याप्त नींद और पौष्टिक आहार पर बल देता है। यदि बचपन से ही इन आदतों को विकसित किया जाए, तो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याओं को रोका जा सकता है।</p>
<h4><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>डिजिटल डिटॉक्स आधुनिक आवश्यकता</strong></span></h4>
<p>आज मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए डिजिटल डिटॉक्स की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। इसका अर्थ है कुछ समय के लिए डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाकर स्वयं, परिवार और प्रकृति के साथ समय बिताना। प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल से दूर रहना, भोजन के दौरान स्क्रीन का उपयोग न करना, सोने से पहले डिजिटल उपकरणों को बंद कर देना तथा सप्ताह में कुछ समय सोशल मीडिया से दूरी बनाना मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक हो सकता है। डिजिटल डिटॉक्स केवल तकनीक से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि मन को पुनः संतुलित करने और वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ने का एक प्रयास है।</p>
<p>रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, बरेली आयुर्वेद, योग और स्वस्थ जीवनशैली के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा समय-समय पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर, योग प्रशिक्षण कार्यक्रम, जन-जागरूकता अभियान तथा परामर्श सेवाएं लोगों को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। आयुर्वेद के सिद्धांतों को व्यावहारिक जीवन में अपनाने का संदेश देकर संस्थान तनावमुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल युग मानव सभ्यता के लिए एक वरदान है, लेकिन इसका विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। तकनीक का अत्यधिक और अनियंत्रित प्रयोग मानसिक तनाव, चिंता और अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि वास्तविक स्वास्थ्य शरीर, मन और आत्मा के संतुलन में निहित है। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त निद्रा, सात्त्विक आहार, योग, प्राणायाम, ध्यान और डिजिटल उपकरणों का संतुलित उपयोग मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के प्रभावी उपाय हैं। यदि आधुनिक जीवन की सुविधाओं के साथ आयुर्वेदिक जीवनशैली को अपनाया जाए, तो व्यक्ति डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करते हुए भी मानसिक शांति, संतुलन और समग्र स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता है। यही आयुर्वेद का मूल संदेश है- स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर और स्वस्थ समाज।</p>
<p>- रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली, सेक्टर-7, रामगंगा नगर योजना, डोहरा रोड, बरेली, उत्तर प्रदेश +91 8077808309</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585985/digital-stress-mental-health-ayurveda-digital-detox-screen-time</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:02:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO ने रचा नया कीर्तिमान: सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का हाई थ्रस्ट हॉट टेस्ट सफल, अंतरिक्ष मिशनों को मिलेगी नई ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>चेन्नई: </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (PHTA) का अब तक के सबसे अधिक थ्रस्ट लेवल पर सफल हॉट टेस्ट पूरा कर लिया है। इसरो के अनुसार, यह परीक्षण 24 जून 2026 को तमिलनाडु स्थित महेंद्रगिरि के इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में 175 टन थ्रस्ट लेवल पर किया गया।</p>
<p>इसरो ने बताया कि पीएचटीए के साथ किया गया यह आठवां हॉट टेस्ट था। पावर हेड टेस्ट आर्टिकल में थ्रस्ट चैंबर को छोड़कर इंजन के सभी प्रमुख सिस्टम शामिल होते हैं। इस परीक्षण का उद्देश्य प्री-बर्नर इग्निशन के बाद दबाव में होने वाली बढ़ोतरी का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585890/-isro-semi-cryogenic-engine-hot-test-175-ton-thrust-lvm3-upgrade"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(43)5.png" alt=""></a><br /><p><strong>चेन्नई: </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (PHTA) का अब तक के सबसे अधिक थ्रस्ट लेवल पर सफल हॉट टेस्ट पूरा कर लिया है। इसरो के अनुसार, यह परीक्षण 24 जून 2026 को तमिलनाडु स्थित महेंद्रगिरि के इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में 175 टन थ्रस्ट लेवल पर किया गया।</p>
<p>इसरो ने बताया कि पीएचटीए के साथ किया गया यह आठवां हॉट टेस्ट था। पावर हेड टेस्ट आर्टिकल में थ्रस्ट चैंबर को छोड़कर इंजन के सभी प्रमुख सिस्टम शामिल होते हैं। इस परीक्षण का उद्देश्य प्री-बर्नर इग्निशन के बाद दबाव में होने वाली बढ़ोतरी का अध्ययन करना और अधिक थ्रस्ट लेवल पर इंजन की स्थिर कार्यक्षमता का प्रदर्शन करना था।</p>
<h4><strong>पहले से अधिक थ्रस्ट लेवल पर हुआ सफल परीक्षण</strong></h4>
<p>इससे पहले पीएचटीए के हॉट टेस्ट 94 टन (47 प्रतिशत) और 120 टन (60 प्रतिशत) थ्रस्ट लेवल पर किए जा चुके थे। इस बार पहली बार इसे 175 टन (88 प्रतिशत) थ्रस्ट लेवल पर सफलतापूर्वक संचालित किया गया। परीक्षण के दौरान मुख्य टर्बोपंप ने 400 और 500 बार आउटलेट प्रेशर पर भी सफल संचालन का प्रदर्शन किया।</p>
<p>इसरो के मुताबिक, परीक्षण के दौरान इंजन के सभी पैरामीटर अपेक्षा के अनुरूप रहे और पूरा टेस्ट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।</p>
<h4><strong>200 टन थ्रस्ट क्षमता की दिशा में बड़ा कदम</strong></h4>
<p>इस सफल परीक्षण से इसरो को 200 टन (100 प्रतिशत) थ्रस्ट लेवल पर इंजन पावर हेड की स्थिर कार्यक्षमता का भरोसा मिला है। साथ ही, यह उपलब्धि स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।</p>
<h4><strong>LVM3 की क्षमता बढ़ाने पर फोकस</strong></h4>
<p>इसरो 2000 केएन-क्लास SE2000 इंजन से संचालित सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज (SC120) विकसित कर रहा है, जिसे भविष्य में एलवीएम-3 (LVM3) लॉन्च व्हीकल के मौजूदा L110 कोर स्टेज की जगह इस्तेमाल किया जाएगा।</p>
<p>इस रणनीतिक अपग्रेड से एलवीएम-3 की पेलोड क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि और मिशनों की ऑपरेशनल दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है। सेमी-क्रायोजेनिक प्रणाली स्वच्छ और गैर-विषाक्त प्रणोदकों का उपयोग करती है, जिससे पारंपरिक प्रणोदन प्रणालियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन मिलता है।</p>
<p>इसरो का मानना है कि अपग्रेड किए गए क्रायोजेनिक अपर स्टेज के साथ सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम का संयोजन एलवीएम-3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने की दिशा में उसके दीर्घकालिक रोडमैप का महत्वपूर्ण चरण साबित होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/585836/can-4g-phone-be-upgraded-to-5g-know-reason-and-difference-between-4g-5g"><span class="t-red">4G फोन में मिल सकती है 5G स्पीड? </span>जानिए क्या पुराने स्मार्टफोन को 5G में अपग्रेड करना संभव है</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585890/-isro-semi-cryogenic-engine-hot-test-175-ton-thrust-lvm3-upgrade</link>
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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:31:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>4G फोन में मिल सकती है 5G स्पीड? जानिए क्या पुराने स्मार्टफोन को 5G में अपग्रेड करना संभव है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>4G to 5G Upgrade: </strong>भारत में BSNL को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां 5G सेवा उपलब्ध करा रही हैं। देश के कई शहरों और क्षेत्रों में यूजर्स हाई-स्पीड 5G नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, इस सुविधा का लाभ केवल 5G सपोर्ट वाले स्मार्टफोन पर ही मिलता है। जिन लोगों के पास 4G फोन है, वे 5G नेटवर्क वाले क्षेत्र में होने के बावजूद 5G स्पीड का अनुभव नहीं कर सकते। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 4G फोन को अपग्रेड करके 5G बनाया जा सकता है? आइए जानते हैं इसका जवाब।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या 4G फोन को 5G</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585836/can-4g-phone-be-upgraded-to-5g-know-reason-and-difference-between-4g-5g"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(22)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>4G to 5G Upgrade: </strong>भारत में BSNL को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां 5G सेवा उपलब्ध करा रही हैं। देश के कई शहरों और क्षेत्रों में यूजर्स हाई-स्पीड 5G नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, इस सुविधा का लाभ केवल 5G सपोर्ट वाले स्मार्टफोन पर ही मिलता है। जिन लोगों के पास 4G फोन है, वे 5G नेटवर्क वाले क्षेत्र में होने के बावजूद 5G स्पीड का अनुभव नहीं कर सकते। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 4G फोन को अपग्रेड करके 5G बनाया जा सकता है? आइए जानते हैं इसका जवाब।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या 4G फोन को 5G में बदला जा सकता है?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">तकनीकी रूप से देखा जाए तो 4G फोन के कई हार्डवेयर पार्ट्स बदलकर उसे 5G के अनुरूप बनाने की कल्पना की जा सकती है, लेकिन वास्तविकता में ऐसा संभव नहीं है। स्मार्टफोन मॉड्यूलर डिवाइस नहीं होते, इसलिए उनके प्रमुख हार्डवेयर को बदलकर 5G सपोर्ट जोड़ना व्यावहारिक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही वजह है कि किसी भी 4G स्मार्टफोन को 5G फोन में कन्वर्ट नहीं किया जा सकता। यदि आप 5G नेटवर्क की हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा का लाभ लेना चाहते हैं, तो इसके लिए 5G सपोर्ट वाला नया स्मार्टफोन ही एकमात्र विकल्प है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>4G फोन में 5G स्पीड क्यों नहीं मिलती?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">5G नेटवर्क पर काम करने के लिए स्मार्टफोन में 5G मॉडम, 5G सपोर्टेड एंटीना और अन्य विशेष हार्डवेयर का होना जरूरी होता है। ये सभी कंपोनेंट्स सामान्य 4G फोन में मौजूद नहीं होते।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, 5G नेटवर्क अलग फ्रीक्वेंसी बैंड पर संचालित होता है। 4G फोन में इस फ्रीक्वेंसी को पहचानने और प्रोसेस करने के लिए आवश्यक हार्डवेयर नहीं होता, इसलिए वह 5G डेटा सिग्नल को रिसीव नहीं कर पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि केवल 5G रिचार्ज प्लान कराने से 4G फोन में 5G स्पीड नहीं मिल सकती। इसके लिए 5G सपोर्ट वाला डिवाइस होना अनिवार्य है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फिर 5G नेटवर्क वाले क्षेत्र में 4G फोन कैसे काम करता है?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब क्षेत्र में 5G नेटवर्क मौजूद है, तब भी 4G फोन सामान्य रूप से कैसे चलता है। इसका कारण यह है कि फिलहाल टेलीकॉम कंपनियां 4G और 5G दोनों नेटवर्क बैंड का एक साथ इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसे में 4G फोन उपलब्ध 4G नेटवर्क से कनेक्ट होकर अपनी सेवाएं जारी रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, यदि नेटवर्क पूरी तरह एक्सक्लूसिव 5G हो, तो 4G फोन उस नेटवर्क पर काम नहीं कर पाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>4G और 5G नेटवर्क में क्या है अंतर?</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">4G और 5G तकनीक के बीच सबसे बड़ा अंतर स्पीड, लेटेंसी और नेटवर्क क्षमता का है।</li>
<li style="text-align:justify;">5G नेटवर्क पर 4G की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक इंटरनेट स्पीड मिलती है।</li>
<li style="text-align:justify;">4G नेटवर्क में लेटेंसी लगभग 50 से 100 मिलीसेकंड (ms) होती है, जबकि 5G में यह घटकर करीब 1 मिलीसेकंड (ms) रह जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">नेटवर्क क्षमता के मामले में भी 5G अधिक सक्षम है और एक साथ 4G की तुलना में ज्यादा स्मार्ट डिवाइस को सपोर्ट कर सकता है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/585829/bsnl-jto-recruitment-2026-100-posts-apply-online"><span class="t-red">BSNL JTO Recruitment 2026: </span>बीएसएनएल में जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के पदों पर बंपर भर्ती, फ्रेशर्स को भी मिलेगा मौका</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585836/can-4g-phone-be-upgraded-to-5g-know-reason-and-difference-between-4g-5g</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:45:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPI AutoPay का नया कमाल! NPCI ला रहा एक ही ऐप में सभी ऑटोमैटिक पेमेंट्स का ऑप्शन, अब आसान होगा मैनेजमेंट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊः </strong>UPI यूजर्स के लिए जल्द ही एक बड़ी सुविधा आने वाली है। NPCI (National Payments Corporation of India) ऐसा नया फीचर लॉन्च करने जा रहा है, जिसमें PhonePe, Google Pay, Paytm समेत सभी UPI ऐप्स के ऑटोमैटिक पेमेंट्स (रिकरिंग पेमेंट्स) एक ही जगह दिखेंगे।</p>
<p>इस नए फीचर के बाद यूजर्स को अलग-अलग ऐप्स खोलकर अपनी सब्सक्रिप्शन, बिल पेमेंट या ई-मैंडेट चेक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। OTT प्लेटफॉर्म्स, बिजली-गैस बिल, लोन EMI जैसी सभी ऑटो डेबिट ट्रांजैक्शन एक ही ऐप में दिखाई देंगी और आसानी से मैनेज की जा सकेंगी।</p>
<h4><strong>क्यों ला रहा है NPCI यह फीचर?</strong></h4>
<p>फिलहाल यूजर्स</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585664/npci-is-bringing-the-new-wonder-of-upi-autopay-the"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(6)10.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः </strong>UPI यूजर्स के लिए जल्द ही एक बड़ी सुविधा आने वाली है। NPCI (National Payments Corporation of India) ऐसा नया फीचर लॉन्च करने जा रहा है, जिसमें PhonePe, Google Pay, Paytm समेत सभी UPI ऐप्स के ऑटोमैटिक पेमेंट्स (रिकरिंग पेमेंट्स) एक ही जगह दिखेंगे।</p>
<p>इस नए फीचर के बाद यूजर्स को अलग-अलग ऐप्स खोलकर अपनी सब्सक्रिप्शन, बिल पेमेंट या ई-मैंडेट चेक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। OTT प्लेटफॉर्म्स, बिजली-गैस बिल, लोन EMI जैसी सभी ऑटो डेबिट ट्रांजैक्शन एक ही ऐप में दिखाई देंगी और आसानी से मैनेज की जा सकेंगी।</p>
<h4><strong>क्यों ला रहा है NPCI यह फीचर?</strong></h4>
<p>फिलहाल यूजर्स को हर UPI ऐप में अलग-अलग जाकर अपने ऑटो पेमेंट्स देखने और मैनेज करने पड़ते हैं। NPCI अब एक यूनिफाइड इंटरफेस तैयार कर रहा है, जो सभी UPI ऐप्स में उपलब्ध होगा। इससे यूजर्स को बेहतर ट्रैकिंग और कंट्रोल मिलेगा।</p>
<h4><strong>AutoPay में तेजी से बढ़ रहा है यूज</strong></h4>
<p>UPI का AutoPay फीचर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में टॉप 10 बैंकों ने 1.6 बिलियन ई-मैंडेट ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा है। </p>
<p>हालांकि ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ रिजेक्शन की समस्या भी बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, देश के सबसे बड़े बैंक SBI में केवल 30% ऑटो पेमेंट्स ही सफल हो पाते हैं, जबकि 70% ट्रांजैक्शन रिजेक्ट हो जाते हैं। ज्यादातर मामलों में अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस न होने की वजह से ऐसा होता है, जिसके कारण यूजर्स को पेनाल्टी भी भरनी पड़ती है।</p>
<p>नए फीचर से यूजर्स अपने सभी ऑटो पेमेंट्स को एक जगह देख सकेंगे, बैलेंस चेक कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर आसानी से मैनेज या कैंसल भी कर सकेंगे। इससे रिजेक्शन दर में काफी कमी आने की उम्मीद है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:44:08 +0530</pubDate>
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