<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.amritvichar.com/category/346663/tech-alert" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Amrit Vichar RSS Feed Generator</generator>
                <title>Tech Alert - Amrit Vichar</title>
                <link>https://www.amritvichar.com/category/346663/rss</link>
                <description>Tech Alert RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ऑनलाइन खरीदारी में ‘डार्क पैटर्न’ पर CCPA का शिकंजा, IndiGo-Zepto समेत 9 प्लेटफॉर्म पर जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[ग्राहकों को गुमराह करने वाले ऑनलाइन तरीकों पर कार्रवाई, ड्रिप प्राइसिंग से लेकर सब्सक्रिप्शन ट्रैप तक पर सख्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590060/ccpa-dark-patterns-action-indigo-zepto-physics-wallah-bookmyshow-fine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/ccpa-.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल सेवाओं के दौरान उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले तरीकों के खिलाफ केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्राधिकरण ने IndiGo, Zepto, Physics Wallah, BookMyShow, FirstCry और SpiceJet समेत नौ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ के इस्तेमाल को लेकर जुर्माना लगाया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राज्यसभा में दिए लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सरकार के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे ऑनलाइन इंटरफेस के इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई गई है, जो उपभोक्ताओं के खरीदारी या सब्सक्रिप्शन से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या है ‘डार्क पैटर्न’?</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">‘डार्क पैटर्न’ ऐसे डिजाइन या ऑनलाइन तरीके हैं, जिनके जरिए यूजर को किसी खास विकल्प को चुनने के लिए प्रभावित किया जाता है। इनमें ड्रिप प्राइसिंग, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग, सब्सक्रिप्शन ट्रैप और भ्रामक प्रॉम्प्ट जैसे तरीके शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CCPA के मुताबिक, इन तरीकों के जरिए उपभोक्ताओं को ऐसे निर्णय लेने की ओर प्रेरित किया जा सकता है, जिन्हें वे सामान्य परिस्थितियों में शायद नहीं लेते।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>Zepto पर 7 लाख रुपये का जुर्माना</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto Marketplace पर CCPA ने 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। नियामक ने पाया कि यूजर्स को शुरुआत में दिखाई गई कीमत के बाद चेकआउट के दौरान अतिरिक्त हैंडलिंग चार्ज और मेंबरशिप फीस जोड़ी जा रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CCPA ने इसे ड्रिप प्राइसिंग और बास्केट स्नीकिंग की श्रेणी में माना। प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद Zepto ने संबंधित तरीकों को बंद कर दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>Physics Wallah पर 5 लाख रुपये की कार्रवाई</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एडटेक प्लेटफॉर्म Physics Wallah पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। CCPA के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर ऐसे संदेश दिखाए जा रहे थे जो यूजर्स को भावनात्मक रूप से प्रभावित करते थे और उन्हें डोनेशन का विकल्प बनाए रखने के लिए प्रेरित करते थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा मुफ्त कोर्स का एक्सेस देने से पहले यूजर्स से निजी जानकारी मांगने की शर्त पर भी नियामक ने आपत्ति जताई। कंपनी ने जुर्माना जमा करने के साथ संबंधित तरीकों को हटा दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>IndiGo के ऐप पर भी बदला गया इंटरफेस</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एयरलाइन IndiGo के मोबाइल ऐप पर भी CCPA ने ‘कन्फर्म शेमिंग’ को लेकर आपत्ति जताई। नियामक ने “नहीं, मैं रिस्क लूंगा” जैसे ऑप्ट-आउट संदेश को उपभोक्ता पर दबाव डालने वाला माना।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्रवाई के बाद एयरलाइन ने यूजर इंटरफेस में बदलाव करते हुए इसे अधिक न्यूट्रल संदेश “नहीं, मैं ट्रिप में कुछ नहीं जोड़ूंगा” से बदल दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>BookMyShow को डोनेशन विकल्प हटाने का निर्देश</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">BookMyShow को उसके BookASmile इनिशिएटिव से जुड़े पहले से चुने गए 1 रुपये के डोनेशन विकल्प को हटाने का निर्देश दिया गया। CCPA ने इस व्यवस्था को ‘बास्केट स्नीकिंग’ की श्रेणी में माना।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इन कंपनियों पर भी लगा जुर्माना</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CCPA की कार्रवाई के तहत FirstCry पर 2 लाख रुपये, कोचिंग प्लेटफॉर्म अनुज जिंदल पर 3 लाख रुपये और PharmEasy, McAfee तथा SpiceJet पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रेगुलेटर के अनुसार, डार्क पैटर्न से जुड़े दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों से अब तक करीब 20 लाख रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ई-कॉमर्स कंपनियों को सेल्फ-ऑडिट का निर्देश</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जून 2025 में CCPA ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को अपनी डिजिटल सेवाओं का सेल्फ-ऑडिट करने का निर्देश दिया था। कंपनियों से अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद संभावित ‘डार्क पैटर्न’ की पहचान कर उन्हें हटाने को कहा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कार्रवाई से साफ है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं के खरीदारी अनुभव और ऑनलाइन विकल्पों को प्रभावित करने वाली डिजाइन रणनीतियों पर नियामक की निगरानी लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/590053/sheikh-hasina-son-sajeeb-wazed-joy-thanks-pm-modi-india-respect"><span class="t-red">शेख हसीना के बेटे ने PM मोदी को कहा धन्यवाद, </span>बोले- ‘भारत ने मेरी मां को पूरा सम्मान दिया’</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/590060/ccpa-dark-patterns-action-indigo-zepto-physics-wallah-bookmyshow-fine</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/590060/ccpa-dark-patterns-action-indigo-zepto-physics-wallah-bookmyshow-fine</guid>
                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:01:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/ccpa-.png"                         length="1151950"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Explainer :  सेफ हार्बर प्रोटेक्शन पर सवालों के बीच झुके जुकरबर्ग, Meta CEO ने भारत के सामने मानी गलती, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[फेसबुक CEO जुकरबर्ग को क्यों मांगनी पड़ी माफी? सेफ हार्बर प्रोटेक्शन, भारत के कानून और सोशल मीडिया की जवाबदेही की पूरी कहानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590014/zuckerberg-questions--safe-harbor--protection-facebook-ceo-admits-error-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/safe-harbor&#039;-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण वाला वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले में केंद्र सरकार और मेटा के बीच विवाद बढ़ गया है। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से इस मामले में बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। समिति ने सवाल उठाया कि अगर देश के प्रधानमंत्री की पोस्ट के साथ ऐसा हो सकता है तो आम यूजर्स की सामग्री की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर मौजूद अन्य आपत्तिजनक सामग्री को लेकर भी चिंता जताई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने कहा कि प्रधानमंत्री की आधिकारिक पोस्ट हटाना गंभीर मामला है।</p>
<p style="text-align:justify;">जंतर मंतर पर प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जुलाई को एक वीडियो सन्देश जारी किया था।  जिसमें वह छात्रों और 'जेन जेड' को संबोधित करते हुए परीक्षा विवादों और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कर रहे थे, फेसबुक से करीब 5-6 घंटे के लिए हट गया था। बाद में वीडियो को दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया। मेटा ने इस घटना को तकनीकी गड़बड़ी बताया और पोस्ट हटने पर खेद जताया। इसके बाद भारत सरकार ने इस पर मेटा से जवाबदेही मांगी थी। </p>
<h3 style="text-align:justify;">मेटा की वैश्विक टीम ने IT मंत्रालय से की मुलाकात</h3>
<p style="text-align:justify;">मामले को लेकर मेटा की वैश्विक टीम ने बुधवार को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में मेटा के वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन समेत कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। करीब 45 मिनट तक चली बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा हुई। मेटा ने कहा कि प्रधानमंत्री की पोस्ट गलती से हट गई थी और इसके पीछे तकनीकी समस्या थी। कंपनी ने पोस्ट को बहाल करते हुए मामले पर खेद जताया। हालांकि, सरकार और संसदीय समिति का कहना है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्मों को ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ज्यादा मजबूत व्यवस्था बनानी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताया। </p>
<h3 style="text-align:justify;">पहले जानिए क्या है सेफ हार्बर प्रोटेक्शन </h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार IT एक्ट धारा 79 के तहत इंटरमीडियरी कंपनियों को सेफ हार्बर प्रोटेक्शन कानूनी सुरक्षा दी जाती है, जिसके तहत इंटरनेट प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया कंपनियों को उनके यूजर्स द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। यानी अगर कोई यूजर फेसबुक, एक्स (Twitter), यूट्यूब या किसी अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कोई पोस्ट, वीडियो या मैसेज डालता है, तो सामान्य स्थिति में उस कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को अपराधी नहीं माना जाता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहता है Section 79 </h3>
<p style="text-align:justify;">आईटी एक्ट की धारा 79 के अनुसार, कोई इंटरमीडियरी (Intermediary) यानी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा अपलोड किए गए कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं होगा, अगर वह कानून में तय शर्तों का पालन करता है। इंटरमीडियरी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, ऑनलाइन मार्केटप्लेस, सर्च इंजन, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सेफ हार्बर का फायदा</h3>
<p style="text-align:justify;">किसी प्लेटफॉर्म को यह सुरक्षा तभी मिलती है जब वह यूजर द्वारा डाले गए कंटेंट को खुद से नियंत्रित या बदलने का काम न करे। सरकार या अदालत के आदेश पर अवैध कंटेंट हटाए। आईटी नियमों के तहत जरूरी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाए। यूजर सुरक्षा और कानूनों का पालन करे। उदाहरण के लिए अगर मान लीजिये किसी व्यक्ति ने फेसबुक पर कोई आपत्तिजनक पोस्ट डाल दी। तो केवल उस पोस्ट की वजह से फेसबुक पर सीधे मुकदमा नहीं चलेगा। जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होगी जिसने पोस्ट की है। लेकिन अगर फेसबुक को उस कंटेंट के अवैध होने की जानकारी मिलती है और वह कार्रवाई नहीं करता, तो उसे मिली सेफ हार्बर सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अब समझिये क्यों होता है सेफ हार्बर को लेकर विवाद </h3>
<p style="text-align:justify;">अक्सर सोशल मीडिया कंपनियां कहती हैं कि अगर उन्हें यूजर के हर पोस्ट के लिए जिम्मेदार बनाया जाएगा तो इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। वहीं सरकारों का तर्क है कि बड़े प्लेटफॉर्म को गलत सूचना, हिंसा भड़काने वाली सामग्री और गैरकानूनी कंटेंट पर ज्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए। सेफ हार्बर प्रोटेक्शन सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर कंटेंट की सीधी कानूनी जिम्मेदारी से बचाता है, लेकिन आईटी एक्ट और सरकार के नियमों का पालन करना उनके लिए जरूरी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत में बड़ी जिमेदारी </h3>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट कंपनियों को सेफ हार्बर प्रोटेक्शन ने भारत में काम करने के लिए कानूनी सुरक्षा दी है, लेकिन यह सुरक्षा बिना शर्त नहीं है। कानून के पालन में लापरवाही होने पर कंपनियों पर कार्रवाई हो सकती है। भारत सरकार ने IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के जरिए सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारियां बढ़ाई हैं। इन नियमों के तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना, शिकायतों का समाधान करना, कुछ मामलों में कंटेंट हटाना, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करना जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़े : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/589937/zuckerberg-apologizes-pm-modi-facebook-post-removal-3-day-ultimatum"><span class="t-red">फेसबुक पोस्ट हटाने पर PM मोदी से माफी मांगे जुकरबर्ग, </span>संसदीय पैनल ने दिया 3 दिन का अल्टीमेटम</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/590014/zuckerberg-questions--safe-harbor--protection-facebook-ceo-admits-error-india</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/590014/zuckerberg-questions--safe-harbor--protection-facebook-ceo-admits-error-india</guid>
                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 13:45:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/safe-harbor%27-%281%29.jpg"                         length="102260"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ में 311 ऐप की शिकायतों पर सख्ती, अपर नगर आयुक्त ने स्मार्ट सिटी वॉर रूम में जांची निस्तारण की गुणवत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज होने से समाधान तक की प्रक्रिया देखी, अधिकारियों-कर्मचारियों की 311 ऐप से उपस्थिति भी जांची]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590015/lucknow-311-app-complaints-quality-check-smart-city-war-room"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/311-app.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>लखनऊ:</strong> नगर निगम की ओर से नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 311 ऐप पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता अब जांच के दायरे में है। बुधवार को अपर नगर आयुक्त अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने स्मार्ट सिटी स्थित वॉर रूम का निरीक्षण कर शिकायतों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया का जायजा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने विभिन्न माध्यमों से नगर निगम तक पहुंचने वाली शिकायतों के दर्ज होने से लेकर उनके निस्तारण तक की प्रक्रिया को बारीकी से समझा। इस दौरान निस्तारित शिकायतों की गुणवत्ता की भी जांच की गई।</p>
<h5><strong>हर शिकायत का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण हो समाधान</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि आमजन की ओर से दर्ज कराई जाने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही शिकायतों के समाधान की नियमित निगरानी भी होनी चाहिए, ताकि किसी नागरिक को एक ही समस्या के लिए बार-बार शिकायत दर्ज कराने की जरूरत न पड़े।</p>
<h5><strong>सिर्फ शिकायत बंद करना नहीं, समाधान की गुणवत्ता भी जरूरी</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">अपर नगर आयुक्त ने निस्तारित शिकायतों की गुणवत्ता की जांच पर भी जोर दिया। उन्होंने संबंधित व्यवस्था को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि शिकायत का निस्तारण वास्तविक रूप से हो और नागरिक को दोबारा उसी समस्या को लेकर शिकायत न करनी पड़े।</p>
<h5><strong>311 ऐप से अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति जांची</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त ने 311 ऐप के माध्यम से नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति की भी जांच की।</p>
<p>स्मार्ट सिटी वॉर रूम के निरीक्षण के दौरान उन्होंने शिकायतों की निगरानी व्यवस्था और उसके संचालन से जुड़ी प्रक्रिया को भी देखा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/589914/up-e-nagar-seva-house-tax-property-tax-name-transfer-water-sewer-tax"><span class="t-red">लखनऊ समेत यूपी में अब एक ही प्लेटफॉर्म पर जमा होगा हाउस टैक्स, </span>नामांतरण से पानी-सीवर बिल तक का काम होगा ऑनलाइन</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/590015/lucknow-311-app-complaints-quality-check-smart-city-war-room</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/590015/lucknow-311-app-complaints-quality-check-smart-city-war-room</guid>
                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 12:40:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/311-app.png"                         length="1185391"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ समेत यूपी में अब एक ही प्लेटफॉर्म पर जमा होगा हाउस टैक्स, नामांतरण से पानी-सीवर बिल तक का काम होगा ऑनलाइन</title>
                                    <description><![CDATA[ई-नगर सेवा पर करीब डेढ़ महीने में शुरू होगी नई सुविधा; प्रॉपर्टी टैक्स, नामांतरण, पानी-सीवर टैक्स और फायर एनओसी के लिए एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी सेवाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589914/up-e-nagar-seva-house-tax-property-tax-name-transfer-water-sewer-tax"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/tax-payment.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>लखनऊ समेत प्रदेश भर में जल्द ही एक ही जगह हाउस टैक्स जमा होगा। भवन का नामांतरण कराने के साथ पानी व सीवर का टैक्स भी जमा कर सकेंगे। ई-नगर सेवा पर लगभग डेढ़ महीने में यह सुविधा मिलेगी। नगर विकास विभाग की ओर से इसकी तैयारी की जा रही है। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी यही से आवेदन कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की ओर से व्यापारियों को ट्रेड लाइसेंस के लिए वेबसाइट agarsewaup.gov.in पर वन विंडो क्लियरेंस की सुविधा है। आने वाले दिनों में यहां पर लोग पॉपर्टी टैक्स, नामांतरण, पानी और सीवर टैक्स जमा करने के साथ फायर एनओसी भी ले सकेंगे। लखनऊ नगर निगम की वेबसाइट lmc.up.nic.in पर भी यह लिंक मौजूद रहेगा। जिस पर क्लिक करने पर यह सीधे ई नगर सेवा की वेबसाइट पर आवेदक को पहुंचा देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि आम जनता को सुविधा देने के लिए यह इंटीग्रेटेड प्लेटफाॅर्म बनाया गया है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने बताया कि नगर निगम में दर्ज सम्पत्तियों की जानकारी ई नगर सेवा की वेबसाइट पर अपलोड कर रहा है। नगर निगम की करीब 7.68 लाख सम्पत्तियां वेबसाइट पर अपलोड की जा चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/589887/lucknow-lda-app-tree-plants-oxygen-carbon-emission-green-record"><span class="t-red">लखनऊ में अब एप बताएगा पेड़-पौधों ने कितनी बढ़ाई ऑक्सीजन, </span>LDA करेगा हरियाली का डिजिटल हिसाब</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/589893/president-gifts-auction-2026-300-special-gifts-bidding"><span class="t-red">राष्ट्रपति भवन से सीधे आपके घर! </span>जानिए कैसे बोली लगाकर आप भी पा सकते हैं शाही तोहफे?</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/589914/up-e-nagar-seva-house-tax-property-tax-name-transfer-water-sewer-tax</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/589914/up-e-nagar-seva-house-tax-property-tax-name-transfer-water-sewer-tax</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 12:49:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/tax-payment.png"                         length="1328627"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए बड़ी सुविधा: एक कॉल पर मिलेगी खेती की विशेषज्ञ सलाह, शुरू हुआ टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर</title>
                                    <description><![CDATA[आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800 18 04 229 शुरू की है। किसान फसल, बीज, मिट्टी, कीट-रोग, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी समेत कई विषयों पर विशेषज्ञों से सलाह ले सकेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589888/ayodhya-farmer-helpline-toll-free-number-agriculture-expert-advice"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/up-farmers.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुमारगंज/अयोध्या, अमृत विचार: </strong>आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों की सुविधा एवं कृषि संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंगलवार को किसान हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800 18 04 229 का शुभारंभ किया। उद्घाटन के बाद कुलपति ने स्वयं हेल्पलाइन पर किसानों से संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और वैज्ञानिकों के माध्यम से उनके समाधान भी बताए।<br /></p><p style="text-align:justify;">कुलपति ने कहा कि यह हेल्पलाइन किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी। इसके जरिए किसानों को फसल उत्पादन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि अभियांत्रिकी, मृदा परीक्षण, बीज, कीट एवं रोग प्रबंधन सहित कृषि के विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों की वैज्ञानिक सलाह समय पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाना भी है। किसानों को सशक्त एवं समृद्ध बनाने के लिए कृषि तकनीकी सूचना केंद्र (एटिक) को पुनः सक्रिय किया गया है। प्रसार निदेशालय स्थित एटिक भवन का जीर्णोद्धार कर उसे आधुनिक सूचना एवं परामर्श केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां कृषि विशेषज्ञों की नियमित ड्यूटी निर्धारित की गई है, जिससे किसानों को एक ही स्थान पर तकनीकी परामर्श, कृषि योजनाओं की जानकारी तथा वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।</p><h5 style="text-align:justify;"><strong>कृषि तकनीकों का व्यापक प्रसार होगा</strong></h5><p style="text-align:justify;">एटिक को सुदृढ़ बनाने और किसान हेल्पलाइन शुरू करने का उद्देश्य किसानों तक विश्वविद्यालय की तकनीकों को सीधे पहुंचाना तथा आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना है। इससे कृषि तकनीकों का व्यापक प्रसार होगा और किसानों को समय पर विशेषज्ञ सलाह मिलने से खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी। निदेशक प्रसार डॉ. रामबटुक सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि कुलपति के प्रयासों से एटिक की व्यवस्थाएं सुदृढ़ हुई हैं और अब किसानों को कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध हो गई है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, वित्त नियंत्रक, वरिष्ठ प्रसार अधिकारी, अभियंता, वैज्ञानिक एवं आसपास के किसान उपस्थित रहे।</p><p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a class="post-title-lg" href="https://www.amritvichar.com/article/589887/lucknow-lda-app-tree-plants-oxygen-carbon-emission-green-record"><span class="t-red">लखनऊ में अब एप बताएगा पेड़-पौधों ने कितनी बढ़ाई ऑक्सीजन, </span>LDA करेगा हरियाली का डिजिटल हिसाब</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/589888/ayodhya-farmer-helpline-toll-free-number-agriculture-expert-advice</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/589888/ayodhya-farmer-helpline-toll-free-number-agriculture-expert-advice</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:26:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/up-farmers.png"                         length="1561852"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ में अब एप बताएगा पेड़-पौधों ने कितनी बढ़ाई ऑक्सीजन, LDA करेगा हरियाली का डिजिटल हिसाब</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ विकास प्राधिकरण अपने पार्कों, ग्रीन बेल्ट, आवासीय योजनाओं, पाथ-वे और डिवाइडर समेत अन्य जगहों पर लगे पेड़-पौधों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगा। प्रस्तावित एप से हरियाली से मिलने वाली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589887/lucknow-lda-app-tree-plants-oxygen-carbon-emission-green-record"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/lda-oxygen.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>लखनऊ विकास प्राधिकरण की हरियाली से शहर को कितनी ऑक्सीजन मिली और कितना कार्बन उत्सर्जन कम हुआ यह सब एक क्लिक में पोर्टल बताएगा। इसके लिए प्राधिकरण एक एप विकसित कर रहा है। जिसमें अपने पार्क, ग्रीन बेल्ट, आवासीय योजनाएं, पाथ-वे, डिवाइडर आदि साइटों पर लगे नये व पुराने पेड़-पौधों की फीडिंग की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एप में इन पेड़-पौधों से मिलने वाली ऑक्सीजन को प्रदर्शित करेगा। पर्यावरण के बचाव में इन पेड़-पौधों से कितना कार्बन उत्सर्जन कम हुआ यह भी पता चलेगा। साथ ही एप से पौधरोपण की मॉनीटरिंग, उनका संरक्षण और गिनती करना आसान होगा। इसे प्राधिकरण के साथ थर्ड पार्टी भी चेक कर सकेगी। पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के लिए यह बड़ा कदम साबित होगा। नई और हाईटेक व्यवस्था शुरू करने का मकसद पर्यावरण में प्राधिकरण का कितना सहयोग है पता करना है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हर साल योजनाओं में लगते लाखों पौधे</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">एलडीए द्वारा पौधरोपण अभियान के दौरान नई व पुरानी योजनाएं, छोटे-बड़े पार्क, फॉरेस्ट सिटी, डिवाइडर, सड़क किनारे लाखों पौधे लगाए जाते हैं। अभियान के अलावा भी प्राधिकरण समय-समय पर लाखों पेड़-पौधे लगाता है। इनके रोपण, संरक्षण, देखरेख में लाखों रुपये खर्च होते हैं। सड़क व हाईवे के विकास में आए सैकड़ों पेड़ न काटकर उनका दूसरी जगह प्रत्यारोपण होता है। अब इन सभी की साइट वार फीडिंग से हकीकत पता चलेगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इन मुख्य साइटाें पर लगे पेड़-पौधे</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">- जनेश्वर मिश्र समेत 40 प्रमुख बड़े पार्क</p>
<p style="text-align:justify;">- सीजी सिटी, अनंत नगर योजना</p>
<p style="text-align:justify;">- उर्मिला, सौमित्र वन, सिटी फारेस्ट</p>
<p style="text-align:justify;">- शहीद पथ व आयुर्वेद पार्क</p>
<p style="text-align:justify;">- विस्तार की आवासीय योजनाएं</p>
<p style="text-align:justify;">- जैव विविधता पार्क</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/589871/article-370-seven-years-jammu-kashmir-changes-5-august-2019"><span class="t-red">Article 370 के 7 साल: </span>जम्मू-कश्मीर में कितना बदला माहौल? जानिए 5 अगस्त 2019 के बाद क्या-क्या बदला</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/589887/lucknow-lda-app-tree-plants-oxygen-carbon-emission-green-record</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/589887/lucknow-lda-app-tree-plants-oxygen-carbon-emission-green-record</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:14:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/lda-oxygen.png"                         length="1621115"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>KGMU की बड़ी उपलब्धि: अब बिना स्क्रीन और विशेषज्ञ के पता चलेगी इंटरनल ब्लीडिंग, डॉक्टरों ने बनाई पोर्टेबल डिवाइस</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क हादसों में घायल मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है तकनीक; एम्बुलेंस, सीएचसी और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक इस्तेमाल की तैयारी, पेट में असामान्य तरल की पहचान में मिलेगी मदद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589552/kgmu-portable-device-internal-bleeding-detection-trauma-care"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(6)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों की जान बचाने की दिशा में केजीएमयू के डॉक्टरों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दुर्घटना के बाद शरीर के अंदर होने वाले रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए डॉक्टरों ने एक पोर्टेबल, स्क्रीन-फ्री और हाथ से संचालित होने वाली डिवाइस विकसित की है। यह तकनीक गोल्डन ऑवर में मरीज की गंभीर स्थिति की पहचान कर समय पर इलाज शुरू करने में मददगार साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस एवं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज सिंह और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिया अग्रवाल ने इस डिवाइस को विकसित किया है। इसका उद्देश्य उन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी आंतरिक रक्तस्राव की पहचान करना है, जहां अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि यह डिवाइस शरीर के अंदर मौजूद तरल पदार्थों की जांच करती है। यदि पेट में खून या किसी असामान्य तरल के जमा होने के संकेत मिलते हैं तो यह तुरंत इसकी जानकारी देती है। इससे डॉक्टरों को बिना समय गंवाए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मरीज के शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव हो रहा है या नहीं।<br />उन्होंने बताया कि यह उपकरण बिजली और बैटरी दोनों से संचालित किया जा सकता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामान्य प्रशिक्षण के बाद एम्बुलेंस चालक, पैरामेडिक्स और आपातकालीन स्वास्थ्यकर्मी भी इसका उपयोग कर सकेंगे। इसके संचालन के लिए न तो स्क्रीन की जरूरत होगी और न ही किसी विशेष विशेषज्ञ ऑपरेटर की। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसानी से किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. प्रेमराज सिंह ने कहा कि बाहरी चोटों से होने वाला रक्तस्राव दिखाई दे जाता है, लेकिन शरीर के अंदर होने वाली ब्लीडिंग का समय पर पता न चलने से मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। यह डिवाइस गंभीर मरीजों की जल्द पहचान कर उन्हें समय रहते उच्च स्तरीय ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाने में मदद करेगी। साथ ही इलाज के दौरान रक्तस्राव की स्थिति पर नजर रखने में भी उपयोगी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. अमिया अग्रवाल ने बताया कि अभी तक पेट के अंदर रक्तस्राव का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की जाती थी, जिसके लिए मशीन और प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट की आवश्यकता होती है। नई डिवाइस में इस तरह की विशेषज्ञता की जरूरत नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इस स्वदेशी तकनीक के डिजाइन का पेटेंट आवेदन किया जा चुका है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद यह डिवाइस देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकती है और सड़क हादसों में घायल हजारों मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/589473/vande-bharat-live-heart-transport-surat-ahmedabad-green-corridor"><span class="t-red">एक दिल... और उसके साथ दौड़ती रही कई जिंदगियांः </span>Vande Bharat से पहली बार सूरत से अहमदाबाद पहुंचा ‘जिंदा दिल’, ग्रीन कॉरिडोर ने बचाई उम्मीद</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/589552/kgmu-portable-device-internal-bleeding-detection-trauma-care</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/589552/kgmu-portable-device-internal-bleeding-detection-trauma-care</guid>
                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 13:32:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-%286%295.jpg"                         length="106647"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एआई कैमरों को अंधा कर देंगे जादुई कपड़े </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">जैसे-जैसे दुनिया के तमाम देशों में सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर चेहरे की पहचान तकनीक (फेशियल रिकग्निशन टेक्नालॉजी) को लागू किया जा रहा है, कथित रूप से इस तकनीक को धोखा देने वाले परिधानों की मांग और बिक्री भी बढ़ रही है। बढ़ती निगरानी और डेटा गोपनीयता की चिंताओं ने इस विशेष फैशन तकनीक को जन्म दिया है। इसी कारण डिजाइनरों की नई पीढ़ी का कहना है कि गोपनीयता अगला बड़ा फैशन ट्रेंड बन सकती है। इस संभावना को भांपते हुए ही कई प्रमुख परिधान कंपनियों ने अपने कपड़ों में ‘एडवर्सरियल पैटर्न’ को शामिल करना शुरू कर दिया है। इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589440/-magic--clothing-to-blind-ai-cameras"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/yureka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जैसे-जैसे दुनिया के तमाम देशों में सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर चेहरे की पहचान तकनीक (फेशियल रिकग्निशन टेक्नालॉजी) को लागू किया जा रहा है, कथित रूप से इस तकनीक को धोखा देने वाले परिधानों की मांग और बिक्री भी बढ़ रही है। बढ़ती निगरानी और डेटा गोपनीयता की चिंताओं ने इस विशेष फैशन तकनीक को जन्म दिया है। इसी कारण डिजाइनरों की नई पीढ़ी का कहना है कि गोपनीयता अगला बड़ा फैशन ट्रेंड बन सकती है। इस संभावना को भांपते हुए ही कई प्रमुख परिधान कंपनियों ने अपने कपड़ों में ‘एडवर्सरियल पैटर्न’ को शामिल करना शुरू कर दिया है। इस पैटर्न में आकृतियों, रंगों और दोहराए जाने वाले ज्यातिमिय रेखांकन को इस तरह डिजाइन किया जाता है, जिन्हें कंप्यूटर विजन सिस्टम में कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए जाना जाता है।                                     </p>
<p style="text-align:justify;">चेहरे की पहचान तकनीक को धोखा देने वाले परिधानों को ‘एंटी-सर्विलांस वियरेबल्स’ कहा जाता है। इस तरह के विरोधी परिधान मुख्य रूप से दो सिद्धांतों पहचान को छिपाने या सिस्टम को भ्रमित करने पर काम करते हैं। ऐसे कपड़ों पर कंप्यूटर जनित ऐसे जटिल प्रिंट या चेहरे के भ्रम पैदा करने वाले पैटर्न जैसे एडवरसैरियल पैच आदि होते हैं, जिन्हें देखकर एआई एल्गोरिदम भ्रमित हो जाता है। सिस्टम को लगता है कि कपड़े पर कई सारे लोग मौजूद हैं, इसके चलते वह वास्तविक व्यक्ति की पहचान नहीं कर पाता है। चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे नाक, आंख और होंठों के बीच की दूरी को मापते हैं। ऐसे में चेहरे की पहचान तकनीक को धोखा देने वाले परिधान इस ज्यामिति को ही बदल देते हैं। इसी तरह कुछ विशेष प्रकार की हुडी, मास्क या चश्मों में इन्फ्रारेड  एलईडी लाइट्स लगी होती हैं। ये रोशनी इंसानी आंखों को दिखाई नहीं देती, लेकिन सुरक्षा कैमरों के सेंसर को अंधा कर देती हैं, जिससे चेहरे की जगह केवल एक चमकीला धब्बा दिखाई देता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जल्दी ही मुख्य धारा में आ सकते अदृश्य सुरक्षा परिधान </h3>
<p style="text-align:justify;">डिजाइनरों का कहना है कि कंप्यूटिंग में हुई प्रगति ने चेहरे की पहचान तकनीक को धोखा देने वाले पैटर्न को व्यावसायिक रूप से उपयोगी कपड़ों में शामिल करना आसान बना दिया है। जल्दी ही प्रमुख ब्रांड स्मार्ट, आकर्षक स्टाइल को अदृश्य सुरक्षा के साथ जोड़ सकते हैं। कपड़ों के एक प्रमुख ब्रांड के संस्थापक का मानना है कि ‘विरोधी वस्त्र’ कुछ ही समय में मुख्यधारा में आ सकते हैं। समाज में लोगों के बीच ‘निगरानी विरोधी भावनाएं इतनी व्यापक हैं कि अगर कोई एक सेलिब्रिटी ऐसे किसी परिधान को किसी हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में पहन ले, तो इस तरह के फैशन को लोकप्रिय होने में देर नहीं लगेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चेहरे की पहचान करने वाले एल्गोरिदम को करते भ्रमित</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार, पहचान तकनीक को धोखा वाले पैटर्न की प्रभावशीलता निगरानी प्रणाली और उसके उपयोग की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। ब्रिटेन में क्रिएटिव एआई, फैशन और डिजिटल संस्कृति की वरिष्ठ लेक्चरर डॉ. जेनिफर बेल के अनुसार एंटी-फेशियल रिकग्निशन डिजाइन वाले कपड़े अब आसानी से बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं और इन्हें एक लक्षित वर्ग को जमकर बेचा जा रहा है। इस तरह "बढ़ती जागरूकता और कीमतों में कमी एक वास्तविक सांस्कृतिक बदलाव की ओर ले जाने वाले निर्णायक मोड़ का संकेत दे रही है।" </p>
<p style="text-align:justify;">यूरोप की एक प्रमुख परिधान कंपनी का दावा है कि उसके द्वारा विकसित डिजाइनों में बड़े-बड़े प्रिंट, असममित कट और स्ट्रीटवियर से प्रेरित सिल्हूट का इस्तेमाल किया गया है, ताकि चेहरे की पहचान करने वाले एल्गोरिदम को भ्रमित किया जा सके। कंपनी का कहना है कहा कि उसके अर्बन घोस्ट कोट के हुड में एलईडी लगी हैं जो इन्फ्रारेड प्रकाश उत्सर्जित करती हैं और नाइट-विजन सर्विलांस कैमरों को चकाचौंध कर देती हैं। इसी तरह एक अमेरिकन कंपनी का कहना है कि उनके डिजाइन इस तथ्य पर आधारित हैं कि चेहरे की पहचान प्रणाली तब गड़बड़ा जाती है, जब वह एक साथ कई चेहरे देखती हैं। उसके बनाए पैटर्न चेहरा पहचान प्रणाली के साथ खेलते हैं, एल्गोरिदम को भ्रमित करते हैं और पहचान पकड़ना काफी मुश्किल बना देते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फैशन और सुरक्षा के बीच छिड़ेगा दिलचस्प मुकाबला</h3>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यह तकनीक अपनी सीमाओं के बावजूद डिजिटल युग में निजी स्वतंत्रता और प्राइवेसी बनाए रखने का एक अनोखा माध्यम बन रही है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि कई देशों में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने या पहचान छिपाने वाले परिधानों को लेकर कड़े कानून हैं। लेकिन जैसे-जैसे एआई तकनीक उन्नत हो रही है, वह इन परिधानों के बावजूद थर्मल स्कैनिंग और चाल ढाल से भी इंसान को पहचानने में सक्षम हो रही है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि यह तकनीक फैशन और सुरक्षा के बीच एक दिलचस्प मुकाबले जैसी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">-मनोज त्रिपाठी, कानपुर</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/589440/-magic--clothing-to-blind-ai-cameras</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/589440/-magic--clothing-to-blind-ai-cameras</guid>
                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:24:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/yureka.jpg"                         length="141141"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> खोज :  ऐसे हुआ हेलमेट का आविष्कार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">राइडर हेलमेट का विकास मोटरसाइकिल चालकों की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण आविष्कारों में माना जाता है। 19 वीं शताब्दी के अंत में मोटरसाइकिलों की लोकप्रियता और गति बढ़ने के साथ सिर की सुरक्षा की आवश्यकता महसूस हुई। 1914 में ब्रिटिश न्यूरोसर्जन डॉ. एरिक गार्डनर ने सिर की चोटों पर अध्ययन करते हुए ऐसा सुरक्षात्मक हेलमेट विकसित करने का विचार प्रस्तुत किया, जो टक्कर के प्रभाव को कम कर सके। उन्होंने कैनवस और शेल की परतों से बना प्रारंभिक हेलमेट तैयार कर ब्रिटिश सेना को परीक्षण के लिए दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रथम विश्व युद्ध के दौरान टी. ई. लॉरेंस (अरब के लॉरेंस)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587858/discovery--how-the-helmet-was-invented"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(51)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राइडर हेलमेट का विकास मोटरसाइकिल चालकों की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण आविष्कारों में माना जाता है। 19 वीं शताब्दी के अंत में मोटरसाइकिलों की लोकप्रियता और गति बढ़ने के साथ सिर की सुरक्षा की आवश्यकता महसूस हुई। 1914 में ब्रिटिश न्यूरोसर्जन डॉ. एरिक गार्डनर ने सिर की चोटों पर अध्ययन करते हुए ऐसा सुरक्षात्मक हेलमेट विकसित करने का विचार प्रस्तुत किया, जो टक्कर के प्रभाव को कम कर सके। उन्होंने कैनवस और शेल की परतों से बना प्रारंभिक हेलमेट तैयार कर ब्रिटिश सेना को परीक्षण के लिए दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रथम विश्व युद्ध के दौरान टी. ई. लॉरेंस (अरब के लॉरेंस) ने भी सैन्य मोटरसाइकिल सवारों के लिए हेलमेट के उपयोग का समर्थन किया। इसके बाद हेलमेट का प्रयोग धीरे-धीरे व्यापक होता गया। वर्ष 1957 में स्थापित स्नेल मेमोरियल फाउंडेशन ने हेलमेट के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक विकसित किए, जिससे इनके निर्माण और गुणवत्ता में लगातार सुधार हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के आधुनिक हेलमेट पॉलीकार्बोनेट, कंपोजिट फाइबर और ईपीएस फोम जैसी उन्नत सामग्रियों से बनाए जाते हैं। इनमें बेहतर प्रभाव-प्रतिरोध, वेंटिलेशन, वाइज़र और आरामदायक फिटिंग जैसी सुविधाएँ होती हैं। वर्तमान समय में हेलमेट केवल कानूनी आवश्यकता नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा का सबसे प्रभावी साधन है, जिसने दुनियाभर में असंख्य लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<h4>आविष्कारक के बारे में </h4>
<p style="text-align:justify;">टी. ई. लॉरेंस (थॉमस एडवर्ड लॉरेंस) का जन्म 16 अगस्त 1888 को वेल्स के ट्रेमाडोग में हुआ था। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास की शिक्षा प्राप्त की और मध्य-पूर्व की संस्कृति, इतिहास तथा पुरातत्व में गहरी रुचि विकसित की। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने अरब विद्रोह में ब्रिटिश सेना के सलाहकार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण वे "अरब के लॉरेंस" के नाम से प्रसिद्ध हुए। वे अत्यंत सादगीपूर्ण और अनुशासित जीवन जीते थे। युद्ध के बाद उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Seven Pillars of Wisdom लिखी। 1935 में मोटरसाइकिल दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट लगने से 46 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु ने मोटरसाइकिल चालकों के लिए हेलमेट के महत्व को विश्वभर में रेखांकित किया।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587858/discovery--how-the-helmet-was-invented</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/587858/discovery--how-the-helmet-was-invented</guid>
                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 10:00:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/untitled-design-%2851%291.jpg"                         length="90386"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO का बड़ा प्लान: इस वित्त वर्ष में होंगे 7 स्पेस लॉन्च, अगले दो महीने में उड़ान भरेगा अगला मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[स्काईरूट के ऐतिहासिक ‘विक्रम-1’ ऑर्बिटल लॉन्च के बाद ISRO प्रमुख वी. नारायणन का ऐलान, गगनयान समेत कई अहम मिशनों की तैयारी अंतिम चरण में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/588014/isro-seven-launches-this-financial-year-next-mission-in-two-months"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/isro.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): </strong>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चालू वित्त वर्ष के लिए अंतरिक्ष मिशनों की रफ्तार तेज करने की तैयारी कर ली है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शनिवार को बताया कि एजेंसी ने इस वित्त वर्ष में कम से कम सात प्रक्षेपण (लॉन्च) करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि अगला अंतरिक्ष मिशन अगले दो महीनों के भीतर लॉन्च किया जाएगा।</p>
<p>यह घोषणा निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘विक्रम-1’ रॉकेट के सफल पहले ऑर्बिटल प्रक्षेपण के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में की गई। नारायणन ने बताया कि इसरो के दो उपग्रह पूरी तरह तैयार हैं, जबकि पांच से छह अन्य उपग्रह एकीकरण (इंटीग्रेशन) के अंतिम चरण में हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आगामी मिशनों में गगनयान मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत पहला बिना चालक दल (अनक्रूड) वाला मिशन भी शामिल है। इसके अलावा तय कार्यक्रम के अनुसार अन्य उपग्रहों का भी प्रक्षेपण किया जाएगा।</p>
<p>स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘विक्रम-1’ मिशन की सफलता पर खुशी जताते हुए इसरो प्रमुख ने कंपनी की युवा टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम के सदस्यों की औसत आयु करीब 28 वर्ष है और उन्होंने अपने पहले ही ऑर्बिटल मिशन को सफल बनाकर भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नया इतिहास रचा है।</p>
<p>वी. नारायणन ने कहा कि यह उपलब्धि केवल निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की सफलता नहीं, बल्कि ‘भारत 2047’ के विजन को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम भी है। उल्लेखनीय है कि स्काईरूट एयरोस्पेस के दोनों सह-संस्थापक पवन कुमार चांदना और नागा भरत डाका पहले इसरो में वैज्ञानिक रह चुके हैं।</p>
<p>बाद में बातचीत में नारायणन ने कहा कि स्काईरूट की सफलता देखकर इसरो को वैसा ही गर्व महसूस हो रहा है, जैसा माता-पिता अपने बच्चों की सफलता पर महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे भारतीय अंतरिक्ष समुदाय के लिए गर्व का विषय है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/587965/indias-first-private-rocket-vikram-1-takes-off-from-sriharikota"><span class="t-red">भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च, </span>श्रीहरिकोटा से भरी उड़ान... अंतरिक्ष में रचा गया नया इतिहास</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/588014/isro-seven-launches-this-financial-year-next-mission-in-two-months</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/588014/isro-seven-launches-this-financial-year-next-mission-in-two-months</guid>
                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 17:44:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/isro.png"                         length="1231160"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'बॉस स्कैम' से अलर्ट! AI डीपफेक वॉयस और वीडियो कॉल से मिनटों में खाली हो सकता है कंपनी का खाता, सेबी ने जारी की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की चेतावनी के बाद सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों और विनियमित संस्थाओं को सतर्क रहने की सलाह दी। ठग AI आधारित डीपफेक वॉयस, वीडियो कॉल और फर्जी ई-मेल के जरिए कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587980/boss-scam-sebi-alert-deepfake-voice-video-call-ai-cyber-fraud-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(31)3.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>कानपुर।</strong> भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने देश की सभी विनियमित संस्थाओं और सूचीबद्ध कंपनियों को तेजी से बढ़ रहे नए साइबर फ्रॉड 'बॉस स्कैम' को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। यह चेतावनी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा इस प्रकार के मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी मिलने के बाद जारी की गई है।</p>
<h4><strong><span>AI की मदद से CEO और MD बनकर देते हैं फर्जी निर्देश</span></strong></h4>
<p>सेबी के अनुसार, 'बॉस स्कैम' एक नया साइबर धोखाधड़ी का तरीका है, जिसमें साइबर अपराधी कंपनी के सीईओ, एमडी या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग करते हैं। वे कर्मचारियों, विशेष रूप से फाइनेंस टीम, को फर्जी ई-मेल, व्हाट्सऐप संदेश और AI आधारित डीपफेक वॉयस एवं वीडियो कॉल के जरिए तत्काल धनराशि ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं।</p>
<p>भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के मुताबिक, ठग AI जनरेटेड वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो का उपयोग कर कर्मचारियों का भरोसा जीतते हैं और उन्हें वित्तीय लेनदेन के लिए भ्रमित करते हैं।</p>
<h4><strong><span>गोपनीयता और तत्काल भुगतान का बनाते हैं दबाव</span></strong></h4>
<p>इस साइबर फ्रॉड में अपराधी कर्मचारियों से कहते हैं कि मामला अत्यंत गोपनीय है और किसी बड़े व्यावसायिक नुकसान से बचने के लिए तुरंत भुगतान करना जरूरी है। ऐसे मामलों में धनराशि कथित तौर पर म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती है।</p>
<h4><strong><span>ZIP फाइल के जरिए भी फैलाया जा रहा मैलवेयर</span></strong></h4>
<p>सेबी ने यह भी बताया कि ठगी के एक अन्य तरीके में कर्मचारियों को ZIP फाइल भेजी जाती है। इसे डाउनलोड या इंस्टॉल करते ही सिस्टम में मैलवेयर सक्रिय हो जाता है, जिससे व्हाट्सएप वेब और अन्य सिस्टम पर अपराधियों का नियंत्रण हो सकता है। इसके बाद वे फर्जी निर्देश देकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan--(31)3.png" alt="MUSKAN  (31)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4><strong><span>सेबी की सलाह: भुगतान से पहले करें पुष्टि</span></strong></h4>
<p>सेबी ने कंपनियों और कर्मचारियों से अपील की है कि केवल व्हाट्सऐप, ई-मेल या सोशल मीडिया पर मिले निर्देशों के आधार पर कोई भी भुगतान न करें। किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि संबंधित वरिष्ठ अधिकारी से फोन पर सीधे बातचीत कर अवश्य करें।</p>
<p>साथ ही किसी भी संदिग्ध फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें और अनावश्यक व्हाट्सएप वेब सेशन को तुरंत लॉग आउट करें। यदि साइबर धोखाधड़ी की आशंका हो या घटना हो जाए तो इसकी सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर तत्काल दें।</p>
<p>वित्तीय सलाहकार राजीव सिंह ने भी कंपनियों और कर्मचारियों से साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने की अपील की है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/587965/indias-first-private-rocket-vikram-1-takes-off-from-sriharikota"><span class="t-red">भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च, </span>श्रीहरिकोटा से भरी उड़ान... अंतरिक्ष में रचा गया नया इतिहास</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587980/boss-scam-sebi-alert-deepfake-voice-video-call-ai-cyber-fraud-india</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/587980/boss-scam-sebi-alert-deepfake-voice-video-call-ai-cyber-fraud-india</guid>
                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 13:44:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan--%2831%293.png"                         length="748915"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के निजी स्पेस मिशन का सबसे बड़ा इम्तिहान! आज विक्रम-1 की लॉन्चिंग से रचेगी इतिहास, पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[आज यानी की 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा से होगा स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' का प्रक्षेपण, सफल रहा मिशन तो पहली बार कोई भारतीय निजी कंपनी सैटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587891/vikram-1-launch-mission-aagman-skyroot-aerospace-private-space-history-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan--(47)1.png" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल डेस्कः</strong> भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 18 जुलाई यानी की आज का दिन बेहद ही खास है। हैदराबाद की स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से लॉन्च करने जा रही है। इस मिशन का नाम 'आगमन' रखा गया है। अगर यह लॉन्च सफल रहता है तो पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी का विकसित रॉकेट सैटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में स्थापित करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मिशन केवल स्काईरूट के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के पूरे निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। वर्ष 2020 में सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद यह सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं</strong></h4>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रक्षेपण से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव है। उन्होंने लिखा कि आज सुबह 11:30 बजे स्काईरूट एयरोस्पेस भारत के पहले निजी तौर पर विकसित कक्षीय प्रक्षेपण यान 'विक्रम-1' का पहला लॉन्च करेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि चार चरणों वाला यह रॉकेट तेज और आवश्यकता के अनुरूप लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने इसे भारत के युवाओं की प्रतिभा, संकल्प और उद्यमशीलता की भावना का शानदार उदाहरण बताते हुए मिशन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/narendramodi/status/2078306459893563667?s=20">https://twitter.com/narendramodi/status/2078306459893563667?s=20</a></blockquote>
<p>

</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span>2022 के बाद अब पहला ऑर्बिटल मिशन</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्काईरूट एयरोस्पेस ने वर्ष 2022 में विक्रम-एस नाम का सब-ऑर्बिटल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। हालांकि वह मिशन केवल परीक्षण उड़ान थी। इस बार विक्रम-1 का लक्ष्य कई ग्राहकों के छोटे सैटेलाइट को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर ऊंची लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करना है। यह कंपनी के तीन विकासात्मक ऑर्बिटल मिशनों में पहला मिशन होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span>कार्बन कंपोजिट तकनीक से बना है विक्रम-1</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विक्रम-1 की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट संरचना से निर्मित होना है। स्काईरूट के सीईओ पवन कुमार चंदाना के अनुसार, यह दुनिया का पहला ऐसा ऑर्बिटल रॉकेट है जो पूरी तरह कार्बन कंपोजिट से तैयार किया गया है। यह सामग्री स्टील की तुलना में लगभग पांच गुना हल्की होती है, जिससे रॉकेट का वजन कम और प्रदर्शन बेहतर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रॉकेट में तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है। इसकी क्षमता 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में पहुंचाने की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span>सिर्फ सैटेलाइट नहीं, भारत के तीन महान वैज्ञानिकों को भी देगा श्रद्धांजलि</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विक्रम-1 मिशन को खास बनाने वाली एक अनोखी पहल भी है। इस रॉकेट के साथ भारत के तीन महान वैज्ञानिकों की माइक्रो मूर्तियां भी अंतरिक्ष भेजी जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें शामिल हैं—</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>डॉ. सी.वी. रमन – भारत के पहले विज्ञान नोबेल पुरस्कार विजेता।</p>
</li>
<li>
<p>डॉ. विक्रम साराभाई – भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक।</p>
</li>
<li>
<p>डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम – भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इन मूर्तियों का आकार मात्र 800 माइक्रोन (0.8 मिलीमीटर) है, यानी ये चावल के एक दाने से भी छोटी हैं और इन्हें सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span>तेलंगाना के माइक्रो आर्टिस्ट ने बनाया अनोखा संग्रह</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इन सूक्ष्म मूर्तियों को तेलंगाना के वारंगल निवासी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के माइक्रो आर्टिस्ट अजय कुमार मत्तेवाड़ा ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर 2023 में काम शुरू हुआ और तीनों मूर्तियों को तैयार करने में 140 घंटे से अधिक समय लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके निर्माण में स्टेनलेस स्टील, शुद्ध चांदी, 24 कैरेट सोना, सिरेमिक पाउडर और कार्बन फाइबर का उपयोग किया गया। बाद में इन्हें 18 कैरेट सोने से बने एक छोटे रॉकेट मॉडल के भीतर स्थापित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अजय ने इसे अपने 40 वर्षों के कला जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताते हुए कहा कि उनकी बनाई कलाकृति अब अंतरिक्ष के इतिहास का हिस्सा बनने जा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span>चार चरणों वाला आधुनिक लॉन्च व्हीकल</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विक्रम-1 एक चार-स्टेज लॉन्च व्हीकल है। इसके पहले तीन चरणों में ठोस ईंधन (Solid Fuel) का उपयोग किया गया है, जबकि चौथे चरण में पुनः चालू किए जा सकने वाला लिक्विड इंजन लगाया गया है। यह तकनीक सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में अधिक सटीकता से स्थापित करने में मदद करती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span>कैसे हुई स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरुआत?</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2018 में इसरो के पूर्व इंजीनियर पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। वर्ष 2020 में निजी स्पेस सेक्टर को अनुमति मिलने के बाद कंपनी ने ऑर्बिटल रॉकेट विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया और अब विक्रम-1 उसी प्रयास का सबसे बड़ा परिणाम है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span>लॉन्च की तैयारियां पूरी</span></strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार रॉकेट को लॉन्च पैड पर पूरी तरह इंटीग्रेट किया जा चुका है। सभी ग्राउंड सिस्टम, टेलीमेट्री, ट्रैकिंग रडार और तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के सह-संस्थापक एवं सीओओ नागा भरत डाका ने कहा कि लगभग आठ वर्षों की मेहनत अब अपने सबसे महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच चुकी है। उनका लक्ष्य भारत से दुनिया के लिए भरोसेमंद और किफायती लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/587885/vikram-1-mission-aagman-pm-modi-handwritten-postcard-space-launch"><span class="t-red">अंतरिक्ष में PM मोदी के Handwritten letter के साथ जाएंगी तीन महान वैज्ञानिकों की मूर्तियां, </span>विक्रम-1 के साथ इतिहास रचेगा 'मिशन आगमन'</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587891/vikram-1-launch-mission-aagman-skyroot-aerospace-private-space-history-india</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/587891/vikram-1-launch-mission-aagman-skyroot-aerospace-private-space-history-india</guid>
                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 08:00:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-07/muskan--%2847%291.png"                         length="1416413"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        