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                <title>Tech Alert - Amrit Vichar</title>
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                <description>Tech Alert RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आर्टेमिस-2 मिशन ने रचा इतिहास: चंद्रमा के सबसे दूर तक पहुंचकर अपोलो-13 का रिकॉर्ड तोड़ा, फार साइड का देखा मनोरम नजारा! </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ह्यूस्टन:</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्री सोमवार रात चंद्रमा के पिछले हिस्से से निकलकर पृथ्वी की ओर रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को देखा, जिसे पहले कभी इतने करीब से नहीं देखा गया था और मानव इतिहास में चंद्रमा के आसपास सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। करीब सात घंटे का यह सफर इस मिशन का सबसे खास हिस्सा रहा। </p>
<p style="text-align:justify;">अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम के बाद पहली बार नासा ने मनुष्यों को फिर से चंद्रमा पर भेजा। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577757/artemis-2-mission-creates-history--breaks-apollo-13-s-record-by-reaching-the-far-side-of-the-moon--shows-spectacular-views-of-the-far-side"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(8)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ह्यूस्टन:</strong> अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्री सोमवार रात चंद्रमा के पिछले हिस्से से निकलकर पृथ्वी की ओर रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को देखा, जिसे पहले कभी इतने करीब से नहीं देखा गया था और मानव इतिहास में चंद्रमा के आसपास सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। करीब सात घंटे का यह सफर इस मिशन का सबसे खास हिस्सा रहा। </p>
<p style="text-align:justify;">अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम के बाद पहली बार नासा ने मनुष्यों को फिर से चंद्रमा पर भेजा। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री हैं। इसका लक्ष्य अगले दो साल में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मनुष्य को भेजना है। आर्टेमिस-2 ने अपोलो 13 का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। साल 1970 में अपोलो 13 मिशन में 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय की गई थी, जिसे आर्टेमिस-2 मिशन के तहत पार कर लिया गया है। </p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/AIRNewsHindi/status/2041346465252233354?s=20">https://twitter.com/AIRNewsHindi/status/2041346465252233354?s=20</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन ने कहा, "बिना कोई उपकरण लगाए आंखों से चंद्रमा से जो दिख रहा है, वह रोमांचित करने वाला है। यह अविश्वसनीय है।" उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी को इस रिकॉर्ड को जल्द तोड़ना चाहिए। रिकॉर्ड तोड़ने के तुरंत बाद अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा पर दो नए गड्ढों (क्रेटर) के नाम रखने की अनुमति मांगी। उन्होंने एक का नाम अपने कैप्सूल के नाम पर 'इंटेग्रिटी' और दूसरे का नाम कमांडर रीड वाइजमैन की पत्नी की याद में 'कैरल' रखने का प्रस्ताव दिया, जिनका 2020 में कैंसर से निधन हो गया था। इस दौरान वाइजमैन भावुक हो गए और रो पड़े। सभी चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने एक-दूसरे को गले लगाया। बाद में वाइजमैन ने कहा, "यहां से नजारा बहुत शानदार है।" </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया कि उन्होंने एक ही तस्वीर में चंद्रमा और पृथ्वी दोनों को कैद किया और ह्यूस्टन में वैज्ञानिकों को लगातार जानकारी देते रहे। पायलट विक्टर ग्लोवर ने बताया कि कुछ पहाड़ियां इतनी चमकदार दिख रही थीं, जैसे उन पर बर्फ जमी हो। </p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>Space Mission</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 10:10:17 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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                <title>AI से मिनटों में बनाएं प्रोफेशनल वीडियो, Google अकाउंट वालों को मिल रही ये खास सुविधा</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>लखनऊः</strong> Google ने अपने AI-पावर्ड वीडियो टूल Google Vids को अब पूरी तरह खोल दिया है। किसी भी Google अकाउंट वाले व्यक्ति बिना एक पैसा खर्च किए हाई-क्वालिटी वीडियो क्लिप्स बना सकता है। अब घंटों की एडिटिंग या प्रोफेशनल स्किल्स की जरूरत नहीं बस अपनी कल्पना लिखिए या फोटो अपलोड कीजिए, और वीडियो तैयार!</p>
<h3><strong>AI से वीडियो बनाना अब सुपर आसान</strong></h3>
<p>Google ने अपने लेटेस्ट Veo 3.1 मॉडल को Google Vids में इंटीग्रेट कर दिया है। अब आप साधारण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट लिखकर, या एक फोटो अपलोड करके केवल सेकंडों में शानदार वीडियो क्लिप्स (लगभग 8 सेकंड लंबी) बना सकते हैं।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577509/create-professional-videos-in-minutes-with-ai--google-account-holders-get-this-special-feature"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(61).png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः</strong> Google ने अपने AI-पावर्ड वीडियो टूल Google Vids को अब पूरी तरह खोल दिया है। किसी भी Google अकाउंट वाले व्यक्ति बिना एक पैसा खर्च किए हाई-क्वालिटी वीडियो क्लिप्स बना सकता है। अब घंटों की एडिटिंग या प्रोफेशनल स्किल्स की जरूरत नहीं बस अपनी कल्पना लिखिए या फोटो अपलोड कीजिए, और वीडियो तैयार!</p>
<h3><strong>AI से वीडियो बनाना अब सुपर आसान</strong></h3>
<p>Google ने अपने लेटेस्ट Veo 3.1 मॉडल को Google Vids में इंटीग्रेट कर दिया है। अब आप साधारण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट लिखकर, या एक फोटो अपलोड करके केवल सेकंडों में शानदार वीडियो क्लिप्स (लगभग 8 सेकंड लंबी) बना सकते हैं। हर महीने सामान्य Google अकाउंट यूजर्स को 10 फ्री वीडियो जनरेशन की सुविधा मिलेगी।</p>
<p>यह फीचर खासतौर पर YouTube Shorts, Instagram Reels, छोटे बिजनेस प्रमोशन, ग्रीटिंग वीडियो या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।</p>
<h3><strong>AI से अपना खुद का म्यूजिक भी बनाएं</strong></h3>
<p>वीडियो को और आकर्षक बनाने के लिए Google ने Lyria 3 मॉडल भी जोड़ा है। अब आप अपने वीडियो के मूड के हिसाब से कस्टम बैकग्राउंड म्यूजिक जेनरेट कर सकते हैं। दिवाली ग्रीटिंग हो, ट्रैवल व्लॉग हो या प्रोडक्ट प्रमोशन वीडियो हर तरह के कंटेंट के लिए परफेक्ट म्यूजिक तैयार हो जाएगा। सबसे अच्छी बात: यह म्यूजिक रॉयल्टी-फ्री होगा, इसलिए कॉपीराइट की कोई टेंशन नहीं।</p>
<h3><strong>बिना कैमरे के बोलते AI अवतार</strong></h3>
<p>Google Vids में अब कस्टमाइजेबल AI अवतार का फीचर भी आ गया है। ये डिजिटल कैरेक्टर:<br />- आपकी स्क्रिप्ट पढ़कर बोल सकते हैं,<br />- प्रोडक्ट या ऑब्जेक्ट्स के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं,<br />- और बैकग्राउंड को अपनी जरूरत के मुताबिक बदल सकते हैं।</p>
<p>जो लोग कैमरे के सामने नहीं आना चाहते लेकिन ट्यूटोरियल, एक्सप्लेनर या इंफॉर्मेटिव वीडियो बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह फीचर बेहद उपयोगी है।</p>
<h3><strong>रिकॉर्डिंग और शेयरिंग अब और आसान</strong></h3>
<p>- नए Chrome एक्सटेंशन की मदद से ब्राउजर में सीधे स्क्रीन + वेबकैम रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।<br />- वीडियो तैयार होते ही इसे YouTube पर डायरेक्ट शेयर करें — बिना डाउनलोड किए।<br />- वीडियो डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहता है, जब तक आप उसे पब्लिक न करें।</p>
<h3><strong>भारत के क्रिएटर्स, स्टूडेंट्स और बिजनेस के लिए क्यों खास?</strong></h3>
<p>भारत में शॉर्ट वीडियो कंटेंट का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। यूट्यूबर्स, फ्रीलांसर, छोटे बिजनेस ओनर्स और स्टूडेंट्स अब महंगे सॉफ्टवेयर या कॉम्प्लिकेटेड एडिटिंग टूल्स के बिना प्रोफेशनल लुक वाले वीडियो आसानी से बना सकते हैं।</p>
<p>Google Vids एक फ्री, आसान और पावरफुल टूल बनकर आया है जो क्रिएटिविटी को बढ़ावा देगा और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन को हर किसी की पहुंच में लाएगा। अब सिर्फ Google अकाउंट से लॉगिन करें और vids.google.com या Workspace के जरिए शुरू करें।</p>]]>
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                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 16:55:41 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>ओला इलेक्ट्रिक ने रोडस्टर एक्स+ 4.5 kWh के लिए हासिल किया PLI प्रमाणन, स्वदेशी ईवी को बढ़ावा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>ओला इलेक्ट्रिक की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल रोडस्टर एक्स+ (11 किलोवाट व 4.5 केडब्ल्यूएच) को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत पात्रता आकलन आवश्यकताओं के अनुपालन का प्रमाणन मिल गया है। कंपनी ने शुक्रवार को बयान में बताया कि यह अनुपालन प्रमाणन ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (जीएआरसी) ने मोटर वाहन एवं उसके कलपुर्जों से जुड़ी पीएलआई योजना (पीएलआई-ऑटो स्कीम) के तहत जारी किया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बयान के अनुसार, इसके साथ ही रोडस्टर एक्स+ 4.5 केडब्ल्यूएच (किलोवाट प्रति घंटा), रोडस्टर खंड की पहली मोटरसाइकिल बन गई है जिसे पीएलआई प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल खंड में विस्तार की</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577390/ola-electric-secures-pli-certification-for-roadster-x--4-5-kwh--boosting-indigenous-evs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(27)1.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>ओला इलेक्ट्रिक की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल रोडस्टर एक्स+ (11 किलोवाट व 4.5 केडब्ल्यूएच) को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत पात्रता आकलन आवश्यकताओं के अनुपालन का प्रमाणन मिल गया है। कंपनी ने शुक्रवार को बयान में बताया कि यह अनुपालन प्रमाणन ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (जीएआरसी) ने मोटर वाहन एवं उसके कलपुर्जों से जुड़ी पीएलआई योजना (पीएलआई-ऑटो स्कीम) के तहत जारी किया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बयान के अनुसार, इसके साथ ही रोडस्टर एक्स+ 4.5 केडब्ल्यूएच (किलोवाट प्रति घंटा), रोडस्टर खंड की पहली मोटरसाइकिल बन गई है जिसे पीएलआई प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल खंड में विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(28)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (28)" width="1280" height="720"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ओला इलेक्ट्रिक के प्रवक्ता ने कहा, ''हमारी रोडस्टर एक्स+ 4.5 केडब्ल्यूएच को मिला पीएलआई प्रमाणन स्थानीयकरण को गहराई देने और पूरी तरह स्वदेशी ईवी परिवेश बनाने के हमारे प्रयासों की पुष्टि करता है। रोडस्टर श्रृंखला के माध्यम से हम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को अधिक ग्राहकों के लिए सुलभ बना रहे हैं और इस श्रेणी के विकास का नेतृत्व कर रहे हैं।'' </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कंपनी ने हाल ही में 4680 भारत सेल से संचालित अपनी मोटरसाइकिल रोडस्टर एक्स+ 9.1 केडब्ल्यूएच की कीमत में बड़ी कटौती की थी। गीगाफैक्ट्री में उत्पादन बढ़ने और लागत में कमी आने से इसकी कीमत 1,89,999 रुपये से घटाकर 1,29,999 रुपये कर दी गई है। यह मॉडल सीमित इकाइयों में और निर्धारित खरीद खिड़की के दौरान ही बेचा जाएगा। </div>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:40:31 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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                            </item>
            <item>
                <title> एजेंटिक ब्राउजर :  इंटरनेट का नया ‘स्मार्ट सारथी’</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से बस इतना कहें- “अगले महीने मुंबई जाने के लिए सबसे सस्ती फ्लाइट ढूंढकर टिकट बुक कर दो” और आपका ब्राउजर खुद अलग-अलग वेबसाइटों पर जाए, कीमतों की तुलना करे और आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प चुन ले। कुछ समय पहले तक इस तरह की बातें साइंस-फिक्शन जैसी लगती थीं, लेकिन आज की डिजिटल दुनिया में यह तेजी से वास्तविकता बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को “एजेंटिक ब्राउजर” कहा जा रहा है- ऐसे ब्राउजर जो केवल वेबसाइट दिखाते नहीं, बल्कि उपयोगकर्ता की ओर से इंटरनेट पर काम भी कर सकते हैं। अब</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576632/agentic-browser--the-internet%E2%80%99s-new-%E2%80%98smart-companion%E2%80%99"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(29)15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कल्पना कीजिए कि आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से बस इतना कहें- “अगले महीने मुंबई जाने के लिए सबसे सस्ती फ्लाइट ढूंढकर टिकट बुक कर दो” और आपका ब्राउजर खुद अलग-अलग वेबसाइटों पर जाए, कीमतों की तुलना करे और आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प चुन ले। कुछ समय पहले तक इस तरह की बातें साइंस-फिक्शन जैसी लगती थीं, लेकिन आज की डिजिटल दुनिया में यह तेजी से वास्तविकता बन रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक को “एजेंटिक ब्राउजर” कहा जा रहा है- ऐसे ब्राउजर जो केवल वेबसाइट दिखाते नहीं, बल्कि उपयोगकर्ता की ओर से इंटरनेट पर काम भी कर सकते हैं। अब तक ब्राउजर एकखिड़की की तरह थे, जिनसे हम वेब देखते थे, लेकिन अब वे एक तरह के डिजिटल सहायक या प्रतिनिधि बनने की ओर बढ़ते दिखने लगे हैं। इंटरनेट का अनुभव “खुद खोजने और क्लिक करने” से बदलकर “लक्ष्य बताने और काम करवाने” की दिशा में बढ़ रहा है।- डॉ. शिवम भारद्वाज </p>
<h5 style="text-align:justify;">क्लिक से उद्देश्य तक: ब्राउजिंग का नया मॉडल</h5>
<p style="text-align:justify;">अब तक हम Chrome, MozillaFirefox, Safari, Edge जैसे ब्राउजर का इस्तेमाल मुख्यतः वेबसाइट देखने के लिए करते रहे हैं। कोई जानकारी चाहिए तो सर्च करना पड़ता है, कई लिंक खोलने पड़ते हैं और ज़रूरी फॉर्म या भुगतान जैसी प्रक्रियाएं खुद पूरी करनी पड़ती हैं। एजेंटिक ब्राउजर इस पूरी प्रक्रिया को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें लगे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित एजेंट उपयोगकर्ता के उद्देश्य को समझते हैं और फिर उसी के आधार पर इंटरनेट पर काम करते हैं। वे वेबसाइट खोलते हैं, जानकारी इकट्ठा करते हैं, तुलना करते हैं और कई बार पूरी प्रक्रिया भी पूरी कर देते हैं। सरल शब्दों में कहें तो इंटरनेट का अनुभव अब केवल जानकारी खोजने तक सीमित नहीं रह रहा, बल्कि डिजिटल काम करवाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">रोजमर्रा के काम कैसे बदलेंगे </h5>
<p style="text-align:justify;">अभी इंटरनेट पर किसी साधारण काम के लिए भी उपयोगकर्ता को कई चरणों से गुजरना पड़ता है। वेबसाइट ढूंढना, अलग-अलग विकल्प देखना, जानकारी पढ़ना और फिर निर्णय लेना। एजेंटिक ब्राउजर इंटरनेट पर बिखरे हुए कामों को एक क्रम में जोड़कर इस पूरी प्रक्रिया को सरल और संगठित बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई उपयोगकर्ता ब्राउजर से कहे कि “मुझे 2000 रुपये से कम कीमत के नीले रंग के रनिंग शूज चाहिए जिनकी रेटिंग चार स्टार से ऊपर हो,” तो एजेंटिक ब्राउज़र अलग-अलग ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर जाकर विकल्प खोज सकता है और सबसे उपयुक्त उत्पाद सामने रख सकता है। इसी तरह यात्रा की योजना बनाते समय यह विभिन्न एयरलाइन और होटल वेबसाइटों से जानकारी लेकर कीमतों और सुविधाओं की तुलना कर सकता है।किसी लंबी रिपोर्ट या शोधपत्र को पढ़ने के बजाय ब्राउज़र उसका सार और मुख्य बिंदु तैयार कर सकता है। सरकारी सेवाओं या ऑनलाइन प्रक्रियाओं में भी यह तकनीक मददगार हो सकती है—जैसे ट्रेन टिकट बुक करना, बिल जमा करना या किसी आवेदन की प्रक्रिया पूरी करना, जिनमें अक्सर कई चरण होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यह प्रवृत्ति आगे बढ़ती है, तो इंटरनेट का अनुभव भी बदल सकता है। उपयोगकर्ता हर क्लिक खुद करने के बजाय केवल अपना लक्ष्य बताएगा और ब्राउज़र उस तक पहुँचने के लिए जरूरी डिजिटल प्रक्रियाओं को क्रमबद्ध कर देगा। इस तरह वेब धीरे-धीरे केवल वेबसाइटों का संग्रह नहीं रहेगा, बल्कि एक ऐसेडिजिटल कार्य-परिसरमें बदल सकता है जहाँ खोज, विश्लेषण और कार्रवाई एक ही जगह पर संभव हों।</p>
<h5 style="text-align:justify;">तकनीकी कंपनियों के बीच नई दौड़</h5>
<p style="text-align:justify;">    एजेंटिक ब्राउजर ने टेक कंपनियों के बीच एक नई होड़ छेड़ दी है। ब्राउजर अब केवल इंटरफेस नहीं, बल्कि एक्जीक्यूशन लेयर बन रहा है, जो आपकी डिजिटल पहचान के नाम पर फैसले ले सकता है और लेन-देन भी कर सकता है।<br />    कुछ साल पहले तक ब्राउज़र बाज़ार में क्रोम, मोजिला फायर फॉक्स, सफारी और एज जैसे नाम ही हावी थे, अब हर दिग्गज कंपनी चाहती है कि इंटरनेट पर उपयोगकर्ता जो भी करे, उसका पहला और आखिरी साथी वही ब्राउजर हो। ओपेन एआई का चैट-जीपीटी एटलस एड्रेस बार की जगह एआई को बैठाकर ब्राउजर की पारंपरिक परिभाषा बदल देता है। यह एजेंट मोड में खुद वेबसाइटों पर जाकर जानकारी जुटा सकता है, तुलना कर सकता है और कई मामलों में फॉर्म भरने व बुकिंग तक की प्रक्रिया संभाल सकता है। गूगल क्रोम अपने उपयोगकर्ताओं तक जेमिनी आधारित आटो ब्राउज के जरिए यह दिखाना चाहता है कि वही पुराना ब्राउजर अब नए दिमाग के साथ लौट आया है, जहां सारांश, शोध और डेटा विश्लेषण सब कुछ ब्राउजर के भीतर होता है।<br />    इसी दौड़ में Perplexity का Comet भी है। एआई नेटिव यह ब्राउजर Comet Assistant के माध्यम से अलग-अलग वेबसाइटों के बीच नेविगेट कर जानकारी इकट्ठा करता है, कई स्रोतों से डेटा जोड़कर सुझाव देता है और हाल के अपडेट्स के बाद उपयोगकर्ता की अनुमति लेकर कुछ बहुचरणीय ऑनलाइन प्रक्रियाओं को भी अपने आप व्यवस्थित कर सकता है। Microsoft Edge का Copilot Mode Windows, Office और क्लाउड सेवाओं को जोड़कर ब्राउजर को पूरे डिजिटल कार्यप्रवाह का सहायक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।<br />    Opera Neon और The Browser Company का Dia जैसे नए खिलाड़ी पूरी तरह एआई संचालित इंटरफेस, ऑटोमेटेड टैब मैनेजमेंट और संदर्भ आधारित नेविगेशन जैसे प्रयोगों के जरिए इस दौड़ को और तेज कर रहे हैं। चेहरे भले अलग-अलग हों, लक्ष्य एक ही है। आपके रोजमर्रा के डिजिटल कामों की रस्सियां अपने हाथ में लेना।</p>
<h5 style="text-align:justify;">भारत के लिए इसका महत्व</h5>
<p style="text-align:justify;">भारत जैसे देश में एजेंटिक ब्राउज़र का महत्व और भी बढ़ सकता है। यहाँ करोड़ों लोग इंटरनेट का उपयोग तो करते हैं, लेकिन जटिल वेबसाइटों और ऑनलाइन प्रक्रियाओं से अक्सर घबराते हैं।यदि ब्राउज़र उपयोगकर्ता की भाषा में बातचीत कर सके और उसके लिए आवश्यक काम कर सके, तो यह डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ बना सकता है। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में बातचीत करने वाले एजेंटिक ब्राउज़र उन लोगों के लिए इंटरनेट को आसान बना सकते हैं जो अभी तकनीकी रूप से बहुत सहज नहीं हैं।छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए यह तकनीक एक तरह काडिजिटल साथीबन सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">सुविधा के साथ चुनौतियां भी</h5>
<p style="text-align:justify;">हर नई तकनीक की तरह एजेंटिक ब्राउज़र के साथ भी कुछ चिंताएँ जुड़ी हुई हैं।सबसे बड़ा सवालडेटा गोपनीयताका है। क्योंकि ब्राउज़र उपयोगकर्ता की ओर से काम करेगा, उसे उसकी पसंद, व्यवहार और कई बार संवेदनशील जानकारी तक पहुँच हो सकती है। इसलिए सुरक्षा और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">जितना अधिक अधिकार हम ब्राउज़र एजेंट को देंगे, उतनी ही गहरी हमारी निर्भरता और जोखिम दोनों होंगे। चूँकि ये एजेंट हमारी पहचान के नाम पर वेबसाइटों पर कार्रवाई करते हैं, गलत कॉन्फ़िगरेशन या साइबर हमले की स्थिति में आर्थिक धोखाधड़ी, डेटा चोरी और “स्वचालित” दुरुपयोग की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एजेंटिक ब्राउज़र यदि स्कैमर्स के नियंत्रण में आ गये तो बड़े पैमाने पर ठगी के उपकरण भी बन सकते हैं; खासकर प्रॉम्प्ट इंजेक्शन, मेमोरी मैनिप्युलेशन और क्रॉस सेशन अटैक जैसे बड़े खतरे दरकिनार नहीं किए जा सकते। इसके अलावा यह भी सवाल उठता है कि क्या हम धीरे-धीरे इतनी स्वचालित तकनीक पर निर्भर हो जाएंगे कि खुद जानकारी खोजने की आदत कम हो जाएगी। भारत के संदर्भ में एजेंटिक ब्राउज़र का उभार एक नई नीतिगत चुनौती भी प्रस्तुत करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम 2023 अभी पूरी तरह लागू हो रहा है, और एजेंटिक ब्राउज़र जैसी तकनीक इसकी सीमाओं को परीक्षण में डालेगी। जब कोई एआई ब्राउज़र उपयोगकर्ता की ओर से स्वचालित रूप से फॉर्म भरता है, सेवाएँ बुक करता है और डेटा साझा करता है, तो "सहमति" (consent) की अवधारणा धुंधली हो जाती है। DPDP अधिनियम के अंतर्गत डेटा फिड्यूशरी की जवाबदेही स्पष्ट है, लेकिन एजेंटिक ब्राउज़र इस जवाबदेही की श्रृंखला को जटिल बनाते हैं। भारतीय नीति–निर्माताओं को इस तकनीक के व्यापक प्रसार से पहले स्पष्ट नियामक ढाँचा तैयार करना होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">भविष्य की दिशा</h5>
<p style="text-align:justify;">यह स्पष्ट है कि ब्राउज़र तकनीक एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस प्रकार सर्च इंजन ने वेब को व्यवस्थित किया और स्मार्टफोन ने इंटरनेट को हर व्यक्ति की जेब तक पहुँचाया, उसी प्रकार एजेंटिक ब्राउज़र इंटरनेट को अधिक बुद्धिमान और अधिक स्वचालित अनुभव में बदल सकते हैं। भविष्य में ब्राउज़र केवल वेबसाइट देखने का माध्यम नहीं रहेंगे, बल्कि वे ऐसे प्लेटफ़ॉर्म बनेंगे जहाँ खोज, विश्लेषण, संवाद और निर्णय–सहायता एक ही स्थान पर उपलब्ध हों,<br />लेकिन इस परिवर्तन की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीकी कंपनियाँ, नीति–निर्माता और उपयोगकर्ता मिलकर इस नई तकनीक को किस प्रकार आकार देते हैं। क्योंकि इंटरनेट का अगला इंटरफेस निश्चित रूप से एजेंटिक होगा पर यह अभी तय होना बाकी है कि वह उपयोगकर्ता को अधिक स्वतंत्र बनाएगा या डिजिटल दुनिया के नए द्वारपाल तैयार करेगा।</p>]]>
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                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 14:22:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                <title>एआई और हिंदी :  रोजगार के नए क्षितिज</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति की संवाहक और प्रगति का आधार होती है। आज जब दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के दौर से गुजर रही है, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने मानव जीवन के हर पहलू को स्पर्श किया है। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा होने के नाते, हिंदी के लिए यह समय एक ऐतिहासिक मोड़ है। अक्सर यह कहा जाता है कि तकनीक भाषाओं को मिटा देगी, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">एआई ने हिंदी के लिए संभावनाओं के वे द्वार खोल दिए हैं, जो पहले बंद थे। आज हिंदी केवल</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575716/ai-and-hindi--new-horizons-for-employment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(31)9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति की संवाहक और प्रगति का आधार होती है। आज जब दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के दौर से गुजर रही है, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने मानव जीवन के हर पहलू को स्पर्श किया है। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा होने के नाते, हिंदी के लिए यह समय एक ऐतिहासिक मोड़ है। अक्सर यह कहा जाता है कि तकनीक भाषाओं को मिटा देगी, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">एआई ने हिंदी के लिए संभावनाओं के वे द्वार खोल दिए हैं, जो पहले बंद थे। आज हिंदी केवल साहित्य या बोलचाल तक सीमित नहीं है,  यह डेटा, कोडिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था की भाषा बन रही है। एक हिंदी भाषी व्यक्ति तकनीक के इस युग में न केवल प्रासंगिक रह सकता है, बल्कि एआई को अपना हथियार बनाकर वैश्विक बाजार में रोजगार के नए और आकर्षक अवसर पैदा कर सकता है। -प्रो.मीना यादव हिंदी विभाग, बरेली कॉलेज बरेली</p>
<h5 style="text-align:justify;">हिंदी और एआई का संगम  </h5>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी) वह तकनीक है, जिसने मशीनों को हिंदी व्याकरण, मुहावरे और शब्दावली समझने की शक्ति दी है। आज गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपन एआई (चैटजीपीटी) जैसी कंपनियां हिंदी डेटा पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। हिंदी का विशाल डेटा सेट तैयार करना और उसे मशीनों के लिए सुलभ बनाना आज एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन चुका है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">एआई के माध्यम से हिंदी में उभरते रोजगार के क्षेत्र</h5>
<p style="text-align:justify;">एआई ने हिंदी को सॉफ्ट स्किल से बदलकर एक तकनीकी स्किल में तब्दील कर दिया है। इसके अंतर्गत रोजगार के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">भाषा डेटा वैज्ञानिक और एनोटेटर </h5>
<p style="text-align:justify;">एआई मॉडल को सिखाने के लिए सटीक हिंदी डेटा की आवश्यकता होती है। हिंदी वाक्यों को व्याकरण के साथ टैग करना और भावनाओं की पहचान करना आज एक बड़ा करियर विकल्प है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग</h5>
<p style="text-align:justify;">एआई टूल्स से सही काम करवाने की कला। विज्ञापन एजेंसियां और कंटेंट हाउस ऐसे विशेषज्ञों को खोज रहे हैं, जो एआई का उपयोग कर कम समय में सटीक हिंदी विज्ञापन, स्क्रिप्ट या रिपोर्ट तैयार कर सकें।</p>
<h5 style="text-align:justify;">वॉयस टेक्नोलॉजी और स्पीच रिकग्निशन</h5>
<p style="text-align:justify;">एलेक्सा और सिरी जैसे असिस्टेंट के लिए हिंदी वॉयस देना, उच्चारण सुधारना और मशीन को स्थानीय बोलियों का लहजा समझाना।</p>
<h5 style="text-align:justify;">चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट डेवलपर</h5>
<p style="text-align:justify;">बैंकिंग, ई-कॉमर्स और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हिंदी में बातचीत करने वाले चैटबॉट्स की स्क्रिप्ट लिखना और उन्हें सांस्कृतिक रूप से सही बनाना।</p>
<h5 style="text-align:justify;">अनुवाद और स्थानीयकरण 2.0</h5>
<p style="text-align:justify;">अब केवल अनुवाद नहीं, बल्कि ‘मशीन ट्रांसलेशन पोस्ट-एडिटिंग’ (MTPE) का दौर है। एआई द्वारा अनुवादित सामग्री की जांच करना और उसे मानवीय संवेदनाएं देना एक उच्च-भुगतान वाला कार्य बन गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">तकनीकी कौशल और चुनौतियां</h5>
<p style="text-align:justify;">हिंदी को रोजगारपरक बनाने के लिए केवल भाषा का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। युवाओं को ChatGPT, Gemini और Canva AI जैसे टूल्स का कुशल उपयोग सीखना होगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;">एआई हिंदी भाषा के लिए कोई चुनौती नहीं, बल्कि एक अवसर</h5>
<p style="text-align:justify;">एआई हिंदी भाषा के लिए कोई चुनौती नहीं, बल्कि एक अवसर है। यह भाषा और तकनीक के बीच की उस खाई को पाट रहा है, जिसने दशकों से हिंदी भाषियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रखा था। आज एक अनुवादक, लेखक या शिक्षक एआई की मदद से अपनी कार्यक्षमता को दस गुना बढ़ा सकता है। इस बदलाव का लाभ उठाने के लिए हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी। हमें हिंदी के प्रति भावुकता के साथ-साथ तकनीकी दक्षता को भी अपनाना होगा। यदि हम अपनी भाषाई जड़ों को मजबूती से थामे रखकर एआई जैसे आधुनिक उपकरणों का सही तालमेल बिठा लेते हैं, तो हिंदी न केवल भारत की अस्मिता बनी रहेगी, बल्कि आने वाले समय में दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार प्रदाता भाषा के रूप में भी स्थापित होगी। भविष्य उनका है, जो भाषा की गरिमा और तकनीक की गति, दोनों को साथ लेकर चलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:00:41 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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                <title>2035 तक भारत सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर: 300 अरब डॉलर बाजार, 60% बढ़ेगा लोकल प्रोडक्शन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई), मोटर वाहन क्षेत्र और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">लेखा एवं परामर्श कंपनी डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 'टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों का आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 प्रतिशत से अधिक</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575639/india-to-be-self-reliant-in-semiconductors-by-2035---300-billion-market--local-production-to-grow-by-60"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(65)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई), मोटर वाहन क्षेत्र और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">लेखा एवं परामर्श कंपनी डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 'टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों का आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 प्रतिशत से अधिक मांग को पूरा कर सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 45-50 अरब डॉलर के बीच आंका गया है। पिछले तीन वर्ष में इसकी वार्षिक वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत रही है। एआई, मोटर वाहन, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के दम पर बाजार 2030 तक 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन, मोटर वाहन, कंप्यूटिंग व डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र 2035 तक देश की कुल सेमीकंडक्टर मांग का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनेंगे। अब तक इस क्षेत्र में 10 स्वीकृत परियोजनाओं के जरिये 19 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया है। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, अगले पांच वर्ष में इस उद्योग में 50 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आने का अनुमान है जबकि 2030 से 2035 के बीच 75-80 अरब डॉलर का निवेश और हो सकता है जिससे पूरे परिवेश का विस्तार होगा। इस विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा। 2035 तक इस क्षेत्र में करीब 20 लाख नौकरियां उत्पन्न होने का अनुमान है जिनमें 30 प्रतिशत विनिर्माण, 30 प्रतिशत डिजाइन सेवाओं और 40 प्रतिशत अन्य मूल्य श्रृंखला गतिविधियों में होंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में हालांकि आगाह किया गया है कि इस प्रगति को बनाए रखने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी होगा। इसके लिए नीतिगत ढांचे को समयबद्ध प्रोत्साहन योजना से आगे बढ़ाकर स्थायी राष्ट्रीय कार्यक्रम में बदलने और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। </p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>WhatsApp लाया 'पेरेंट-मैनेज्ड अकाउंट्स',  13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्राइवेसी होगी और सख्त, अभिभावकों का होगा कंट्रोंल  </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>मेटा के स्वामित्व वाले संदेश मंच व्हाट्सएप ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक नियंत्रित खाते शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत अभिभावकों की कड़ी निगरानी में छोटे बच्चों को इस मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। यह कदम संदेश मंच की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब तक इस मंच के उपयोग के लिए न्यूनतम आयु सीमा 13 वर्ष (कुछ क्षेत्रों में इससे अधिक) रखी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हाट्सएप ने अपने 'ब्लॉग' में कहा, '' परिवारों व विशेषज्ञों से मिले सुझावों के आधार पर अभिभावक-नियंत्रित खातों</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574691/whatsapp-introduces--parent-managed-accounts---privacy-will-be-more-stringent-for-children-under-13--with-parents-in-control"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(35)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>मेटा के स्वामित्व वाले संदेश मंच व्हाट्सएप ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावक नियंत्रित खाते शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत अभिभावकों की कड़ी निगरानी में छोटे बच्चों को इस मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। यह कदम संदेश मंच की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब तक इस मंच के उपयोग के लिए न्यूनतम आयु सीमा 13 वर्ष (कुछ क्षेत्रों में इससे अधिक) रखी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हाट्सएप ने अपने 'ब्लॉग' में कहा, '' परिवारों व विशेषज्ञों से मिले सुझावों के आधार पर अभिभावक-नियंत्रित खातों की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसके तहत माता-पिता या अभिभावक छोटे बच्चों के लिए व्हाट्सएप खाता बना सकेंगे और उनके उपयोग को केवल संदेश भेजने तथा कॉल करने तक सीमित कर सकेंगे।''</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, अभिभावक बच्चों की संपर्क सूची नियंत्रित कर सकेंगे। हालांकि संदेशों की सामग्री 'एंड टू एंड एन्क्रिप्शन' से सुरक्षित रहेगी। नई नियंत्रण व्यवस्था और अन्य 'सेटिंग' को अभिभावक 'पिन' के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा और केवल माता-पिता ही गोपनीयता संबंधी 'सेटिंग' को देख या बदल सकेंगे। कंपनी ने बताया कि यह सुविधा फिलहाल चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/574649/mumbai--maharashtra-legislative-assembly-evacuated-ahead-of-session-after-bomb-threat"><span class="t-red">मुंबई : </span>महाराष्ट्र विधान भवन को बम से उड़ाने की धमकी, सत्र से पहले कराया गया खाली </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574691/whatsapp-introduces--parent-managed-accounts---privacy-will-be-more-stringent-for-children-under-13--with-parents-in-control</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/574691/whatsapp-introduces--parent-managed-accounts---privacy-will-be-more-stringent-for-children-under-13--with-parents-in-control</guid>
                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:51:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा में गरमाया मुद्दा: रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद? राघव चड्ढा ने उठाई आम आदमी की आवाज, मांगा सख्त नियम</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> मोबाइल फोन का रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल भी बंद किये जाने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठा और मोबाइल ऑपरेटरों की इस मनमानी पर रोक लगाये जाने तथा इनकमिंग कॉल की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गयी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इनकमिंग कॉल बंद करने का अधिकार किसने दिया? </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोबाइल फोन आजकल लोगोंं की जीवनरेखा बन चुका है लेकिन मोबाइल ऑपरेटर रिचार्ज खत्म होने के साथ ही इनकमिंग कॉल भी बंद करते हैं जिससे फोन ठप हो जाता है। उन्होंने कहा कि</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574590/a-heated-debate-erupted-in-the-rajya-sabha--will-incoming-calls-stop-once-your-recharge-is-exhausted--raghav-chadha-spoke-out-for-the-common-man--demanding-stricter-rules"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(30)4.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> मोबाइल फोन का रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल भी बंद किये जाने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठा और मोबाइल ऑपरेटरों की इस मनमानी पर रोक लगाये जाने तथा इनकमिंग कॉल की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गयी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इनकमिंग कॉल बंद करने का अधिकार किसने दिया? </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोबाइल फोन आजकल लोगोंं की जीवनरेखा बन चुका है लेकिन मोबाइल ऑपरेटर रिचार्ज खत्म होने के साथ ही इनकमिंग कॉल भी बंद करते हैं जिससे फोन ठप हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से संचार के अधिकार को बंद करना जैसा है। उन्होंने मांग की कि सरकार को मोबाइल ऑपरेटरों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए अंतिम रिचार्ज के बाद तीन साल तक इनकमिंग की सुविधा देने , केवल इनकमिंग कॉल के लिए सस्ता प्लान लाने , और बंद हो चुके सिम के नम्बर को तीन साल तक किसी और को आवंटित नहीं के लिए विशेष नियम बनाने चाहिए। सदस्य ने महीने के नाम पर केवल 28 दिन के रिचार्ज की व्यवस्था को भी बंद करने तथा इसे तीस दिन करने की मांग की। भाजपा के दिनेश शर्मा ने माता पिता के निधन पर निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को सवैतनिक शोक अवकाश दिये जाने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कनाड़ा आदि देशों में इस तरह का अवकाश दिया जाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में माता पिता की सेवा को सर्वोपरि तथा अंतिम संस्कार करने को अनिवार्य धर्म बताया गया है। उन्होंने इसे संविधान के तहत मौलिक अधिकार बताते हुए कर्मचारी को अर्जित अवकाश से अलग अवकाश दिये जाने की मांग की। आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार मित्तल ने विदेश ले जाने के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी का मामला उठाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>संविधान पाठ्यक्रम अनिवार्य करना चाहिए- रामजी लाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में भारत के हजारों लोग बंधक का जीवन जी रहे हैं। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए स्थायी ग्लोबल प्रोटोकाल बनाये जाने की मांग की। समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन ने स्कूली पाठ्यक्रम में संविधान को अनिवार्य विषय के रूप में पढाये जाने की मांग की। कांग्रेस के नीरज डांगी ने मैदानों में रैलियों तथा अन्य कार्यक्रमों में अस्थायी ढांचों के निर्माण पर होने वाले भारी भरकम खर्च पर रोक लगाने के लिए इनमें स्थायी संरचना बनाये जाने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इससे सरकारी धन की बचत होगी और कार्यक्रमों का प्रबंधन भी अच्छा रहेगा। यह जगह जनहित के सभी सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में काम में लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नीतिगत योजना के तहत बहुउद्देशीय स्थल बनाये जाने चाहिए जिससे कि संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सके। अन्ना द्रमुक के तंबी दुरै ने राजधानी के सरदार पटेल मार्ग पर जाम का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस सड़क पर होटलों ने अतिक्रमण किया हुआ है जिसे हटाकर इस सड़क को चौड़ा किये जाने की जरूरत है। बीजू जनता दल की सुलता देव ने स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढाये जाने की मांग की। <span></span></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574590/a-heated-debate-erupted-in-the-rajya-sabha--will-incoming-calls-stop-once-your-recharge-is-exhausted--raghav-chadha-spoke-out-for-the-common-man--demanding-stricter-rules</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 13:39:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ में महिलाओं की नई उड़ान... ‘वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म’ का यूपी चैप्टर लॉन्च</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को महिला उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए लखनऊ में वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म का उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर शुरू किया गया। नीति आयोग की इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत और एकीकृत मंच तैयार करना है, जिससे उन्हें व्यवसाय के विस्तार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, संसाधन और नेटवर्किंग उपलब्ध हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रसिद्ध महिला उद्यमी और समृद्धि क्रिएशन की संस्थापक सुष्मिता दत्ता ने यूपी स्टेट चैप्टर का उद्घाटन किया। गोमती नगर के विभूति खंड स्थित रोहतास समिट बिल्डिंग में यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड के अंतर्गत</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574316/new-flight-for-women-in-lucknow----up-chapter-of--women-entrepreneurship-platform--launched"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(46).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को महिला उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए लखनऊ में वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म का उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर शुरू किया गया। नीति आयोग की इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत और एकीकृत मंच तैयार करना है, जिससे उन्हें व्यवसाय के विस्तार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, संसाधन और नेटवर्किंग उपलब्ध हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रसिद्ध महिला उद्यमी और समृद्धि क्रिएशन की संस्थापक सुष्मिता दत्ता ने यूपी स्टेट चैप्टर का उद्घाटन किया। गोमती नगर के विभूति खंड स्थित रोहतास समिट बिल्डिंग में यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड के अंतर्गत इस स्टेट चैप्टर का कार्यालय स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से प्रदेश की महिला उद्यमियों को मेंटरशिप, वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव, नियामकीय सहयोग और नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे अपने उद्यम को मजबूत कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग की वीमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म पहल देशभर में महिला उद्यमियों के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके जरिए स्टार्टअप और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़ी महिलाओं को मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। राज्य सरकार की औद्योगिक नीति, स्टार्टअप नीति तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं ने प्रदेश में महिला उद्यमिता के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। ऐसे में लखनऊ में स्टेट चैप्टर स्थापित होना प्रदेश की महिला उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 10:29:36 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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                <title>यूपी में डिजिटल क्रांति की नई लहरः ‘प्रोजेक्ट गंगा’ से 20 लाख घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, 10 हजार उद्यमी और 50% महिलाएं बनेंगी डिजिटल योद्धा</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत सोमवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश और वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड (ओआईएल) के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे।</p>
<p>राजधानी के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में इस एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह,</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574315/a-new-wave-of-digital-revolution-in-uttar-pradesh---project-ganga--will-provide-high-speed-broadband-to-2-million-homes--create-10-000-entrepreneurs--and-50--women-will-become-digital-warriors"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(45).png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत सोमवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश और वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड (ओआईएल) के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे।</p>
<p>राजधानी के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में इस एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, हिंदुजा ग्रुप के प्रतिनिधि तथा परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना है। इस पहल के तहत न्याय पंचायत स्तर पर 8 हजार से 10 हजार स्थानीय उद्यमियों को डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) के रूप में विकसित किया जाएगा। ये उद्यमी अपने-अपने क्षेत्रों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराएंगे, जिससे गांवों में इंटरनेट की पहुंच तेज, सुलभ और भरोसेमंद बन सकेगी।</p>
<p>परियोजना के तहत अगले दो से तीन वर्षों में प्रदेश के 20 लाख से अधिक घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाओं, टेलीमेडिसिन और ई-कॉमर्स जैसी सुविधाओं को भी नई गति मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना के अंतर्गत चयनित डिजिटल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, नेटवर्क निर्माण और आधुनिक तकनीकी संसाधनों से सशक्त किया जाएगा, ताकि वे अपने क्षेत्रों में मजबूत डिजिटल नेटवर्क विकसित कर सकें।</p>
<h3><strong>50 प्रतिशत महिलाएं होगीं डिजिटल सेवा प्रदाता</strong></h3>
<p>इस परियोजना की एक विशेषता यह भी है कि डिजिटल सेवा प्रदाताओं में लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और महिलाएं डिजिटल सेवाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी। यह पहल गांवों में नारी शक्ति को तकनीक और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है।</p>]]>
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                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 10:21:11 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Muskan Dixit]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>इंटरनेट का आविष्कार </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज इंटरनेट हमारे दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। जानकारी प्राप्त करना, ई-मेल भेजना, वीडियो देखना, ऑनलाइन खरीदारी करना या दुनियाभर के लोगों से जुड़ना- ये सब इंटरनेट की बदौलत संभव हुआ है, लेकिन इसका विकास एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि कई वैज्ञानिकों और दशकों के शोध का परिणाम है। इंटरनेट की शुरुआत 1960 के दशक में हुई। उस समय अमेरिका में शीत युद्ध का दौर था और अमेरिकी रक्षा विभाग चाहता था कि ऐसा संचार तंत्र बनाया जाए, जो किसी आपात स्थिति या हमले की स्थिति में भी काम करता रहे। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी उद्देश्य से अमेरिकी रक्षा</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574046/invention-of-the-internet"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(6).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज इंटरनेट हमारे दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। जानकारी प्राप्त करना, ई-मेल भेजना, वीडियो देखना, ऑनलाइन खरीदारी करना या दुनियाभर के लोगों से जुड़ना- ये सब इंटरनेट की बदौलत संभव हुआ है, लेकिन इसका विकास एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि कई वैज्ञानिकों और दशकों के शोध का परिणाम है। इंटरनेट की शुरुआत 1960 के दशक में हुई। उस समय अमेरिका में शीत युद्ध का दौर था और अमेरिकी रक्षा विभाग चाहता था कि ऐसा संचार तंत्र बनाया जाए, जो किसी आपात स्थिति या हमले की स्थिति में भी काम करता रहे। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी उद्देश्य से अमेरिकी रक्षा विभाग की संस्था ARPA (Advanced Research Projects Agency) ने एक परियोजना शुरू की, जिसे ARPANET कहा गया। 1969 में ARPANET के माध्यम से पहली बार दो कंप्यूटरों को आपस में जोड़ा गया। पहला नेटवर्क कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजेलिस (UCLA) और स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के कंप्यूटरों के बीच स्थापित हुआ। इसी घटना को इंटरनेट के जन्म की शुरुआत माना जाता है। इंटरनेट किसी एक व्यक्ति का आविष्कार नहीं है, बल्कि कई वैज्ञानिकों के योगदान का परिणाम है। फिर भी दो वैज्ञानिकों को इंटरनेट का प्रमुख जनक माना जाता है विंटन सर्फ और बॉब कान। </p>
<p style="text-align:justify;">1970 के दशक में इन दोनों वैज्ञानिकों ने मिलकर TCP/IP (Transmission Control Protocol / Internet Protocol) नामक संचार प्रणाली विकसित की। यही तकनीक विभिन्न कंप्यूटर नेटवर्कों को आपस में जोड़ने का आधार बनी। 1 जनवरी 1983 को ARPANET ने आधिकारिक रूप से TCP/IP को अपनाया और यहीं से आधुनिक इंटरनेट की वास्तविक शुरुआत मानी जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">वैज्ञानिक के बारे में</h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%B2-%E0%A4%A4%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B0-(5).jpg" alt="वायरल तस्वीर (5)"></img></p>
<p style="text-align:justify;">विंटन सर्फ का जन्म 23 जून 1943 को अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य के न्यू हेवन में हुआ था। बचपन से ही उन्हें गणित व विज्ञान में गहरी रुचि थी। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी की। सर्फ बचपन से आंशिक रूप से श्रवण बाधित थे, इसलिए उन्होंने संचार तकनीक के महत्व को बहुत करीब से महसूस किया। उन्होंने इंटरनेट के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्हें अक्सर “इंटरनेट का जनक” कहा जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">वहीं बॉब कान का जन्म 23 दिसंबर 1938 को न्यूयॉर्क, अमेरिका में हुआ। उन्होंने सिटी कॉलेज ऑफ न्यूयॉर्क से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और प्रिंसटन विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की। उन्हें बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार तकनीक में रुचि थी। वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने नेटवर्किंग तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>]]>
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                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 10:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anjali Singh]]>
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            <item>
                <title>Holi Special: अब WhatsApp पर बनाएं अपना पर्सनल होली स्टिकर! फोटो, सेल्फी या AI मैजिक से चैट में बरसाएं रंग</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ : </strong>इस होली पर सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि अपनी चैट्स को भी रंगीन और मजेदार बना सकते हैं। जी हां WhatsApp ने अब यूजर्स को ऐप के अंदर ही कस्टम स्टिकर बनाने की शानदार सुविधा दे दी है। अब "हैप्पी होली" टाइप करने की बजाय आप अपना नाम, सेल्फी, मजेदार डायलॉग या होली वाली मस्ती से भरे स्टिकर खुद क्रिएट करके भेज सकते हैं। सबसे अच्छी बात है की इसके लिए कोई थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1. अपनी फोटो से बनाएं यूनिक होली स्टिकर</strong><br />    <br />- किसी भी चैट में स्टिकर आइकन पर टैप करें</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573656/holi-special--now-create-your-own-personal-holi-stickers-on-whatsapp--add-color-to-your-chat-with-photos--selfies--or-ai-magic"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(44)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ : </strong>इस होली पर सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि अपनी चैट्स को भी रंगीन और मजेदार बना सकते हैं। जी हां WhatsApp ने अब यूजर्स को ऐप के अंदर ही कस्टम स्टिकर बनाने की शानदार सुविधा दे दी है। अब "हैप्पी होली" टाइप करने की बजाय आप अपना नाम, सेल्फी, मजेदार डायलॉग या होली वाली मस्ती से भरे स्टिकर खुद क्रिएट करके भेज सकते हैं। सबसे अच्छी बात है की इसके लिए कोई थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1. अपनी फोटो से बनाएं यूनिक होली स्टिकर</strong><br />  <br />- किसी भी चैट में स्टिकर आइकन पर टैप करें  <br />- ऊपर दाईं ओर '+' या 'Create' बटन चुनें  <br />- गैलरी से होली वाली फोटो सिलेक्ट करें या कैमरा से नई सेल्फी क्लिक करें  </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>फोटो चुनने के बाद:  </strong></p>
<p style="text-align:justify;">- अपना नाम, "भाई होली मुबारक" जैसे टेक्स्ट जोड़ें  <br />- रंग-बिरंगे इमोजी, दिल, पिचकारी, गुलाल के स्टिकर लगाएं  <br />- ड्रॉइंग टूल से गुलाल, पानी की बौछार या कुछ भी क्रिएटिव ड्रा करें  </p>
<p style="text-align:justify;">स्टिकर तैयार होते ही उसे सीधे चैट में भेजें या अपने स्टिकर पैक में सेव कर लें। अगली बार बस एक टैप में अपने क्रिएट किए हुए स्टीकर पर क्लिक करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2. AI मैजिक से बनाएं मनचाहा स्टिकर (फोटो न हो तो भी चलेगा)  </strong></p>
<p style="text-align:justify;">- स्टिकर सेक्शन में 'Generate with AI' या 'Create with AI' चुनें  <br />- बस एक छोटा-सा प्रॉम्प्ट टाइप करें, जैसे:  <br />  - "होली पर दोस्तों के साथ पिचकारी मारते लड़के-लड़कियां"  <br />  - "गुलाल लगाए मस्ती में नाचती लड़की"  <br />  - "रंगों से सना भाई-बहन की होली सेलिब्रेशन"  </p>
<p style="text-align:justify;">कुछ सेकंड में AI आपके डिस्क्रिप्शन पर आधारित 4-8 अलग-अलग स्टिकर जेनरेट कर देगा। पसंद आए तो चुनें, एडिट करें और इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>3. पूरा स्टिकर पैक बनाकर दोस्तों को गिफ्ट करें </strong><br /> <br />कई स्टिकर बनाने के बाद उन्हें एक पैक में ऑर्गनाइज कर लें।  <br />- पैक का नाम रखें जैसे "Muskan Ki Holi Masti" या "Holi 2026 Vibes"  <br />- पैक को डायरेक्ट शेयर करें या ग्रुप में भेजकर सबको डाउनलोड करने दें  </p>
<p style="text-align:justify;">यह फीचर एंड्रॉयड और iOS दोनों पर एकदम आसान है। बस इंटरफेस में मामूली सा फर्क हो सकता है। तो ये होली कुछ खास तरह से अपने पसंदीदा लोगों को विश करें।</p>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:42:10 +0530</pubDate>
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