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                <title>Tech Alert - Amrit Vichar</title>
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                <description>Tech Alert RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>UP Government की Blue Dots AI पहल शुरू, युवाओं को स्थानीय भाषा में मिलेगी नौकरी की जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए ''ब्लू डॉट्स एआई'' पहल की शुरुआत की है। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने मुजफ्फरनगर में प्रदेश के पहले संयुक्त सुविधा केंद्र (जेएफसी) का उद्घाटन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कौशल विकास मंत्री ने बताया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवा स्थानीय भाषा में वॉयस कॉल के जरिए नौकरी की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही मोबाइल मैप पर आसपास उपलब्ध रोजगार अवसर भी देख सकेंगे। इससे स्थानीय एमएसएमई और उद्योगों को अपने क्षेत्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585341/up-governments-blue-dots-ai-initiative-started-youth-will-get"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(25)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए ''ब्लू डॉट्स एआई'' पहल की शुरुआत की है। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने मुजफ्फरनगर में प्रदेश के पहले संयुक्त सुविधा केंद्र (जेएफसी) का उद्घाटन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कौशल विकास मंत्री ने बताया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवा स्थानीय भाषा में वॉयस कॉल के जरिए नौकरी की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही मोबाइल मैप पर आसपास उपलब्ध रोजगार अवसर भी देख सकेंगे। इससे स्थानीय एमएसएमई और उद्योगों को अपने क्षेत्र के योग्य अभ्यर्थियों तक आसान पहुंच मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि गाजियाबाद में संचालित पायलट परियोजना के तहत 16 हजार से अधिक रोजगार अवसर और 15 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का पंजीकरण हुआ। अब इस मॉडल का विस्तार प्रदेश के सभी 18 मंडलों में किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/585333/darbhanga-jaipur-amrit-bharat-train-will-pass-through-aishbagh-and-gomti"><span class="t-red">यात्रीगण कृपया ध्यान दें...</span> ऐशबाग और गोमती नगर होकर गुजरेगी दरभंगा-जयपुर अमृत भारत ट्रेन, जानें रूट और टाइमिंग</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>परीक्षा</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:49:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैज्ञानिक फैक्ट : क्यों गिरती है बारिश में आसमान से बिजली</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बरसात का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में आसमानी बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली गिरने से कई लोगों की जान चली जाती है। बादलों की तेज गड़गड़ाहट और चमकती बिजली लोगों के मन में भय पैदा कर देती है। ऐसे में यह जानना रोचक है कि आखिर आसमान में बिजली बनती कैसे है और बादल क्यों गरजते हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों के अनुसार, बारिश वाले बादलों के भीतर पानी की बूंदें, बर्फ के कण और जलवाष्प लगातार एक-दूसरे से टकराते रहते हैं। इन टक्करों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585187/scientific-fact--why-lightning-strikes-from-the-sky-during-rain"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(28)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बरसात का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में आसमानी बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली गिरने से कई लोगों की जान चली जाती है। बादलों की तेज गड़गड़ाहट और चमकती बिजली लोगों के मन में भय पैदा कर देती है। ऐसे में यह जानना रोचक है कि आखिर आसमान में बिजली बनती कैसे है और बादल क्यों गरजते हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों के अनुसार, बारिश वाले बादलों के भीतर पानी की बूंदें, बर्फ के कण और जलवाष्प लगातार एक-दूसरे से टकराते रहते हैं। इन टक्करों और तेज हवाओं के कारण बादलों में विद्युत आवेश (इलेक्ट्रिक चार्ज) उत्पन्न हो जाता है। धीरे-धीरे बादलों के अलग-अलग हिस्सों में धनात्मक (पॉजिटिव) और ऋ णात्मक (नेगेटिव) आवेश जमा होने लगते हैं। जब इन विपरीत आवेशों के बीच अंतर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो उसे संतुलित करने के लिए अचानक विद्युत प्रवाह उत्पन्न होता है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रक्रिया के दौरान बिजली की एक शक्तिशाली चमक पैदा होती है, जिसे हम आसमानी बिजली के रूप में देखते हैं। कई बार यह विद्युत धारा बादलों के बीच ही सीमित रहती है, जबकि कभी-कभी इसका मार्ग धरती तक बन जाता है। ऐसी स्थिति में बिजली जमीन पर गिरती है और भारी नुकसान का कारण बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिजली चमकने के साथ ही उसके आसपास की हवा का तापमान कुछ क्षणों के लिए हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अत्यधिक गर्मी के कारण हवा तेजी से फैलती है और फिर तुरंत सिकुड़ती है। इस अचानक होने वाले विस्तार और संकुचन से शक्तिशाली ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं, जिन्हें हम बादलों की गड़गड़ाहट के रूप में सुनते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि बिजली की चमक पहले क्यों दिखाई देती है और गड़गड़ाहट बाद में क्यों सुनाई देती है। इसका कारण प्रकाश और ध्वनि की गति में अंतर है। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रकाश की गति लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, जबकि ध्वनि की गति सामान्य परिस्थितियों में लगभग 332 मीटर प्रति सेकंड होती है। इसलिए बिजली की चमक हमारी आंखों तक तुरंत पहुंच जाती है, जबकि उसकी आवाज कुछ देर बाद सुनाई देती है। इस प्रकार बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक प्रकृति की एक अद्भुत वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम हैं, जो जितनी आकर्षक दिखाई देती है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 09:00:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टेक जानकारी :  मोबाइल की बढ़ती उम्र  और घटती सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर खरीदारी, सोशल मीडिया से लेकर निजी दस्तावेजों तक, लगभग हर महत्वपूर्ण जानकारी अब मोबाइल में ही मौजूद रहती है। ऐसे में यदि आप चार-पांच साल पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो केवल उसका सही ढंग से चलना पर्याप्त नहीं है। यह जानना भी जरूरी है कि वह सुरक्षा के लिहाज से कितना भरोसेमंद है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, हर स्मार्टफोन की एक निश्चित सॉफ्टवेयर सपोर्ट अवधि होती है। एक समय के बाद मोबाइल निर्माता कंपनियां उस डिवाइस के लिए नए एंड्रॉयड अपडेट और सिक्योरिटी पैच जारी करना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585185/tech-info--the-aging-mobile-and-diminishing-security"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(27)12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर खरीदारी, सोशल मीडिया से लेकर निजी दस्तावेजों तक, लगभग हर महत्वपूर्ण जानकारी अब मोबाइल में ही मौजूद रहती है। ऐसे में यदि आप चार-पांच साल पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो केवल उसका सही ढंग से चलना पर्याप्त नहीं है। यह जानना भी जरूरी है कि वह सुरक्षा के लिहाज से कितना भरोसेमंद है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, हर स्मार्टफोन की एक निश्चित सॉफ्टवेयर सपोर्ट अवधि होती है। एक समय के बाद मोबाइल निर्माता कंपनियां उस डिवाइस के लिए नए एंड्रॉयड अपडेट और सिक्योरिटी पैच जारी करना बंद कर देती हैं। आमतौर पर यह अवधि तीन से पांच वर्ष के बीच होती है। इसके बाद यदि किसी नई सुरक्षा खामी का पता चलता है, तो उसे ठीक करने वाला अपडेट आपके फोन तक नहीं पहुंच पाता। नतीजतन, डिवाइस में मौजूद कमजोरियां स्थायी रूप से बनी रहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पुराने स्मार्टफोन हैकर्स के लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं। वे विभिन्न तकनीकों के जरिए उपयोगकर्ताओं की बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी और अन्य संवेदनशील डेटा तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। खासकर तब, जब फोन में नवीनतम सुरक्षा सुरक्षा उपाय मौजूद न हों।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ संकेत यह बताते हैं कि आपका फोन अब जोखिम के दायरे में आ चुका है। यदि लंबे समय से कोई सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिला है, बैंकिंग या यूपीआई ऐप्स ने सपोर्ट बंद कर दिया है या फोन बार-बार हैंग, गर्म अथवा क्रैश होने लगा है, तो यह सतर्क होने का समय है। बैटरी का फूलना या प्रदर्शन में लगातार गिरावट भी डिवाइस की बढ़ती उम्र की ओर इशारा करती है, जो लोग तुरंत नया स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते, वे कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम कम कर सकते हैं। अनजान वेबसाइटों और ऐप्स से दूरी बनाए रखें, मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें और जहां तक संभव हो, पुराने फोन पर बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान संबंधी ऐप्स का उपयोग न करें।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि फोन अब अपडेट प्राप्त नहीं कर रहा है, तो उसे मुख्य डिवाइस की बजाय सेकेंडरी डिवाइस के रूप में इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। ऐसे फोन का उपयोग संगीत सुनने, वीडियो देखने, ऑनलाइन अध्ययन या अन्य सामान्य कार्यों के लिए किया जा सकता है। तकनीक के इस दौर में केवल फोन का चालू रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सुरक्षित होना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए समय-समय पर अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा स्थिति का आकलन करना और जरूरत पड़ने पर उचित निर्णय लेना समझदारी भरा कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585185/tech-info--the-aging-mobile-and-diminishing-security</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सौर तूफानों से पृथ्वी को बचाएगा कृत्रिम आवरण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">जून 2026 के महीने के साइंस पत्रिका में एक चौंकाने वाली स्टडी प्रकाशित हुई है, जिसमें धरती को अंतरिक्ष की ओर से आने वाले तेज विकिरण और सूर्य की सतह पर होने वाले घमाकों की वजह से उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफानों की तीव्रता से बचने के लिए एक एयर-बैग बनाने का प्रस्ताव है। सूरज से होने वाले जोरदार धमाके पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से जब टकराते हैं, तो वे रात के आसमान में सिर्फ ऑरोरा या रोशनी की लकीरें ही नहीं बनाते, बल्कि वे पृथ्वी के निकट परिक्रमा करने वाले कृत्रिम उपग्रह जिनसे मौसम, अंतरिक्ष वेदर, मिलिट्री के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585184/artificial-shield-to-protect-earth-from-solar-storms"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(26)13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जून 2026 के महीने के साइंस पत्रिका में एक चौंकाने वाली स्टडी प्रकाशित हुई है, जिसमें धरती को अंतरिक्ष की ओर से आने वाले तेज विकिरण और सूर्य की सतह पर होने वाले घमाकों की वजह से उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफानों की तीव्रता से बचने के लिए एक एयर-बैग बनाने का प्रस्ताव है। सूरज से होने वाले जोरदार धमाके पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से जब टकराते हैं, तो वे रात के आसमान में सिर्फ ऑरोरा या रोशनी की लकीरें ही नहीं बनाते, बल्कि वे पृथ्वी के निकट परिक्रमा करने वाले कृत्रिम उपग्रह जिनसे मौसम, अंतरिक्ष वेदर, मिलिट्री के लिए जासूसी एवं पृथ्वी के गर्भ में छिपे हुए खनिज, भू-जल, जंगलों और फसलों का घनत्व मापा जाता है। सूर्य से आने वाले तेज आवेशित कणों की विद्युत चुंबकीय शक्ति के कारण विचलित हो सकते हैं या कुछ देर के लिए पृथ्वी केंद्रों से संपर्क तोड़ सकते हैं या बिलकुल नष्ट भी हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पृथ्वी के उपग्रह चांद की परिक्रमा करने वाले अन्वेषण यानों के अलावा सूर्य के निकट भेजे गए सोलर प्रोब्स के इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम को भी अदृश्य विकिरण युक्त सौर-ऊर्जा तूफान खराब कर सकते हैं। सूर्य की सतह पर सक्रिय क्षेत्रों में होने वाले धमाकों से जो कोरोनल मास इजेक्शन या प्लाज्मा तेजी से बाहर निकलता है उसकी विपुल शक्तियुक्त विद्युत चुम्बकीय तूफान पृथ्वी पर बिजली के झटके पैदा करते हैं जिससे बिजली ग्रिड ठप हो जाते। अनुमान है कि ई. सन 1859 के कैरिंगटन इवेंट जैसा, सौर तूफान, जोकि सौ साल में एक बार होने की संभावना होती है, बिजली ग्रिड को ही खरबों रुपए से ज्यादा का नुकसान पहुंचा सकता है। पृथ्वी वासियों के पास बेहतर स्पेस वेदर पूर्वानुमान और पृथ्वी ग्रह एवं अंतरिक्ष के बीच होने वाली अत्यधिक विकिरण गतिविधि से बचाव के लिए टिकाऊ और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी के विकास की जरूरत एक अरसे से महसूस की जाती रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष भौतिकीविदों का एक छोटा सा समूह अब कह रहा कि है कि इंसान को सौर तूफानों के असर को कमजोर करने के लिए अपने बिजली और कम्युनिकेशन सिस्टम्स के बचाव के लिए नई तरह की तकनीक विकसित करनी चाहिए स्पेस वेदर पत्रिका के जून 2026 के अंक में छपी एक स्टडी  -टेरेस्ट्रियल स्पेस वेदर प्रोटेक्शन थ्रू ह्यूमन-प्रोड्यूस्ड मास लोडिंग, के हवाले से साइंस पत्रिका ने लिखा है कि शोधकर्ताओं ने स्टॉर्मवाल जैसा एक दिलचस्प प्रस्ताव दिया है जिसमें कृत्रिम उपग्रहों का एक बेड़ा सौर तूफान के पृथ्वी से टकराने से ठीक पहले अंतरिक्ष में सैकड़ों टन गैसें छोड़ेगा। इस प्रस्ताव के लिए इन वैज्ञानिकों ने मॉडल बनाकर इसे कंप्यूटर द्वारा टेस्ट किया है जिसे सिमुलेशन स्टडी कहते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">बताया गया कि सैटेलाइट्स द्वारा गैसें छोड़ने से बना हुआ यह बनावटी बादल किसी बड़े सौर तूफान की तीव्रता को आधा या उससे भी ज्यादा कम कर सकता है। इससे पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर को एक कवच मिल जह्येगा जो कि कार में लगे एयरबैग सरीखा मानें। यह सूर्य से आने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटकों को बर्दाश्त करके पृथ्वी की रक्षा करेगा। इसमें कितनी मात्रा में गैस लगेगी, कितनी लागत आएगी और गैस प्राप्त करने का स्रोत क्या होगा, जानना भी महत्वपूर्ण है। कोरोनल मास इजेक्शन से पैदा हुए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफान को पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड तक पहुंचने में आम तौर पर एक से तीन दिन लगते हैं। हालांकि बहुत तेजी से होने वाले इजेक्शन पंद्रह करोड़ किलोमीटर का यह सफर सिर्फ 15 से 18 घंटों में भी पूरा कर सकते हैं। क्या इतने समय में पृथ्वी से राकेट दाग कर इसके मैग्नेटिक फील्ड के चारों ओर एक गैसी आवरण बनाना जा सकना संभव होगा। यह विज्ञान कथा सरीखा कथन लगता है जबकि मूल शोध पत्र के 12 पन्नों में दिए गए टेक्निकल विवरण से यह व्यवहारिक और आसान लगता है। इस बारे में इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन के आलावा अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन एन यूरोपियन स्पेस एजेंसी और स्पेस-एक्स जैसी विशेषज्ञ संस्थानों के वैज्ञानिकों की राय मालूम नहीं हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आम तौर पर, पृथ्वी का खुद का चुंबकीय क्षेत्र इस पर जीवन और मानव गतिविधियों की रक्षा के लिए एक ढाल की तरह काम करता है, जो ज्यादातर सौर हवाओं, और सूरज से लगातार निकलने वाले आवेशित कणों के प्रवाह को डेफ्लेक्ट करता है अथवा मोड़ देता है, लेकिन जब जोरदार सौर तूफान आते हैं, तो पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सूरज के चुंबकीय क्षेत्र से जुड़ता है, जिससे यह सुरक्षा कवच में सेंध लगती है। ऐसा होने से ऊर्जा और चार्ज्ड पार्टिकल्स पृथ्वी के मैग्नेटिक वातावरण में तेजी से घुस आते हैं। ये चार्ज्ड पार्टिकल्स कृत्रिम सैटेलाइट के इलेक्ट्रॉनिक्स को खराब कर सकते हैं और स्पेस स्टेशंस में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ ऊर्जा ऊपरी वातावरण में चली जाती है, जिससे वह गर्म हो जाता है और फैल जाता है। इसके कारण पैदा होने वाला खिंचाव सैटेलाइट्स को उनकी कक्षा से ज्यादा तेजी से बाहर खींच कर परिक्रमा पथ से विचलित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h5 style="text-align:justify;">रणबीर सिंह विज्ञान लेखक</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585184/artificial-shield-to-protect-earth-from-solar-storms</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:46:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>WhatsApp ला रहा है नया Privacy Feature! पढ़ते ही गायब हो जाएगा Text Message</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर जल्द ही एक ऐसा फीचर आने वाला है जो यूजर्स की प्राइवेसी को और मजबूत बनाएगा। कंपनी अब टेक्स्ट मैसेज के लिए भी "View Once" फीचर लाने की तैयारी कर रही है। इस फीचर की मदद से भेजा गया मैसेज रिसीवर केवल एक बार पढ़ सकेगा और उसके बाद वह अपने आप चैट से गायब हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp इस फीचर पर तेजी से काम कर रहा है और इसे आने वाले कुछ महीनों में यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>WhatsApp के नए फीचर से क्या</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585072/whatsapp-is-introducing-a-new-privacy-feature--text-messages-will-disappear-immediately-after-being-read--offering-protection-against-scams-as-well"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(69)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर जल्द ही एक ऐसा फीचर आने वाला है जो यूजर्स की प्राइवेसी को और मजबूत बनाएगा। कंपनी अब टेक्स्ट मैसेज के लिए भी "View Once" फीचर लाने की तैयारी कर रही है। इस फीचर की मदद से भेजा गया मैसेज रिसीवर केवल एक बार पढ़ सकेगा और उसके बाद वह अपने आप चैट से गायब हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp इस फीचर पर तेजी से काम कर रहा है और इसे आने वाले कुछ महीनों में यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>WhatsApp के नए फीचर से क्या होगा खास?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल WhatsApp पर फोटो और वीडियो को View Once मोड में भेजने की सुविधा उपलब्ध है। इस विकल्प को चुनने पर मीडिया फाइल केवल एक बार देखी जा सकती है और उसके बाद ऑटोमैटिक डिलीट हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब कंपनी इसी सुविधा को टेक्स्ट मैसेज तक विस्तार देने की तैयारी कर रही है। इसके बाद यूजर्स संवेदनशील या निजी जानकारी वाले संदेशों को भी View Once मोड में भेज सकेंगे, जिससे उनकी गोपनीयता पहले से अधिक सुरक्षित रहेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे करेगा काम View Once Text Message फीचर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, View Once टेक्स्ट मैसेज भेजने के लिए यूजर को Send बटन को कुछ सेकंड तक दबाकर रखना होगा। इसके बाद मैसेज विशेष मोड में भेजा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जब रिसीवर मैसेज खोलेगा, तो वह उसे सिर्फ एक बार ही पढ़ पाएगा। पढ़ने के बाद संदेश स्थायी रूप से हट जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसे मैसेज को कॉपी, फॉरवर्ड या शेयर करने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फीचर व्यक्तिगत चैट के साथ-साथ ग्रुप चैट में भी काम करेगा, हालांकि WhatsApp Channels में इसका सपोर्ट मिलने की संभावना नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कब तक मिलेगा नया अपडेट?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अभी यह फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है और इसे बीटा टेस्टिंग के लिए भी जारी नहीं किया गया है। आमतौर पर WhatsApp पहले नए फीचर्स को बीटा यूजर्स के बीच टेस्ट करता है और फीडबैक मिलने के बाद सभी यूजर्स के लिए रोलआउट करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में View Once Text Message फीचर को सभी यूजर्स तक पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्कैम मैसेज से बचाएगा नया WhatsApp Alert Feature</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्राइवेसी फीचर के अलावा WhatsApp एक नए Scam Alert सिस्टम पर भी काम कर रहा है। यह फीचर अनजान नंबरों से आने वाले संदिग्ध या फर्जी मैसेज की पहचान कर यूजर को चेतावनी देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यूजर को मैसेज सुरक्षित लगता है तो वह बातचीत जारी रख सकता है। वहीं, संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर उसी स्क्रीन से नंबर को Block या Report करने का विकल्प भी मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">WhatsApp के ये दोनों आगामी फीचर्स यूजर्स की सुरक्षा और प्राइवेसी को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/584963/a-new-controversy-has-erupted-amidst-the-neet-paper-leak-row--telegram-s-ceo-has-made-a-major-allegation-against-reliance-and-whatsapp--stating--%22jio-and-meta-are-colluding-to-get-telegram-banned-in-india-%22"><span class="t-red">NEET paper leak controversy: </span>रिलायंस-व्हाट्सऐप पर Telegram के CEO का बड़ा आरोप, कहा- 'जियो और मेटा मिलकर रच रहे साजिश'</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:54:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृत्रिम बुद्धिमत्ता :  मानव सभ्यता के विकास का नया अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">विज्ञान मानव की कल्पनाओं को यथार्थ में बदलता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उस यथार्थ को नई दिशा देती है। मानव इतिहास के विकासक्रम में अनेक वैज्ञानिक  आविष्कारों ने सभ्यता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमता ऐसी ही एक क्रांतिकारी तकनीक रूप में उभरकर सामने आई हैं, जिसने ज्ञान, विज्ञान, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के स्वरूप को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। यह केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि मानव की बौद्धिक क्षमताओं को मशीनों के माध्यम से विस्तारित करने का अभूतपूर्व प्रयास है। जब मानव बुद्धि और मशीन की क्षमता एक साथ कार्य करती है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584507/artificial-intelligence--a-new-chapter-in-the-evolution-of-human-civilization"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(23)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विज्ञान मानव की कल्पनाओं को यथार्थ में बदलता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उस यथार्थ को नई दिशा देती है। मानव इतिहास के विकासक्रम में अनेक वैज्ञानिक  आविष्कारों ने सभ्यता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमता ऐसी ही एक क्रांतिकारी तकनीक रूप में उभरकर सामने आई हैं, जिसने ज्ञान, विज्ञान, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के स्वरूप को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। यह केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि मानव की बौद्धिक क्षमताओं को मशीनों के माध्यम से विस्तारित करने का अभूतपूर्व प्रयास है। जब मानव बुद्धि और मशीन की क्षमता एक साथ कार्य करती है, तब प्रगति की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग शिक्षा, चिकित्सा, कृषि तथा उद्योग जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कार्यों की गति दक्षता और सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चिकित्सा में यह रोगों के निदान में सहायता करती हैं, जबकि शिक्षा में विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सीखने का अवसर प्रदान करती है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता तथा रोजगार उपयोग नैतिकता और उत्तरदायित्व के संबंधी चुनौतीयां भी जुड़ी हैं। इसलिए इसका उपयोग नैतिकता और उत्तरदायित्व के साथ किया जाना आवश्यक है। तकनीक की वास्तविक सफलता उसकी शक्ति में नहीं, बल्कि उसके उत्तरदायी में निहित होती हैं। अंततः कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव सभ्यता के विकास का एक नया अध्याय है। यदि इसका विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग किया जाए, तो यह मानव जीवन को अधिक समृद्ध, सुविधाजनक और उन्नत बना सकती हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धि का विकल्प  नहीं, बल्कि उसकी क्षमता का विस्तार है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">भक्ति पांडे, छात्रा</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/584507/artificial-intelligence--a-new-chapter-in-the-evolution-of-human-civilization</link>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:00:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET paper leak controversy: रिलायंस-व्हाट्सऐप पर Telegram के CEO का बड़ा आरोप, कहा- 'जियो और मेटा मिलकर रच रहे साजिश'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>संदेश ऐप टेलीग्राम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पावेल ड्यूरोव ने आरोप लगाया कि रिलायंस समूह ने व्हाट्सऐप के साथ मिलकर भारत में ऐप पर प्रतिबंध के लिए शायद पैरवी की है। मेटा प्लेटफॉर्म्स की रिलायंस में आंशिक हिस्सेदारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिलायंस ने भारत के बाहर (जिसमें संयुक्त अरब अमीरात शामिल है) लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए टेलीग्राम की पहुंच में बाधा डाली है। दूरसंचार क्षेत्र के एक वरिष्ठ सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर इन आरोपों को ''फर्जी खबर'' करार दिया और कहा कि ड्यूरोव ने रिलायंस कम्युनिकेशंस तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584963/a-new-controversy-has-erupted-amidst-the-neet-paper-leak-row--telegram-s-ceo-has-made-a-major-allegation-against-reliance-and-whatsapp--stating--%22jio-and-meta-are-colluding-to-get-telegram-banned-in-india-%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(23)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>संदेश ऐप टेलीग्राम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पावेल ड्यूरोव ने आरोप लगाया कि रिलायंस समूह ने व्हाट्सऐप के साथ मिलकर भारत में ऐप पर प्रतिबंध के लिए शायद पैरवी की है। मेटा प्लेटफॉर्म्स की रिलायंस में आंशिक हिस्सेदारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिलायंस ने भारत के बाहर (जिसमें संयुक्त अरब अमीरात शामिल है) लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए टेलीग्राम की पहुंच में बाधा डाली है। दूरसंचार क्षेत्र के एक वरिष्ठ सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर इन आरोपों को ''फर्जी खबर'' करार दिया और कहा कि ड्यूरोव ने रिलायंस कम्युनिकेशंस तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बीच भ्रम पैदा कर दिया है। </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पावेल ड्यूरोव ने क्या आरोप लगाए?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पावेल ड्यूरोव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''भारतीय दूरसंचार कंपनी रिलायंस 'बीजीपी हाईजैकिंग' नामक एक संदिग्ध तरीके से भारत के बाहर (संयुक्त अरब अमीरात सहित) लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए टेलीग्राम की पहुंच में बाधा डाल रही है। यह जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है, क्योंकि रिलायंस ने कई शिकायतों को नजरअंदाज किया है। यह प्रतिस्पर्धी युद्ध का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि रिलायंस में मेटा की आंशिक हिस्सेदारी है जो व्हाट्सऐप की मूल कंपनी है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">मेटा की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की डिजिटल इकाई जियो में मामूली हिस्सेदारी है। वहीं समुद्र के भीतर केबल का संचालन एक अन्य समूह कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस करती है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज का हिस्सा नहीं है। ड्यूरोव ने कहा कि नेटवर्क संचालकों को रिलायंस (एएस18101) से आने वाली अनधिकृत बीजीपी घोषणाओं को अस्वीकार करने की सलाह दी जाती है, ताकि 'रूट हाईजैकिंग' को रोका जा सके तथा उपयोगकर्ताओं के लिए स्थिर इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित की जा सके। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ''वैश्विक इंटरनेट मार्ग का इस तरह दुरुपयोग चिंताजनक है। मुझे आश्चर्य नहीं होगा यदि रिलायंस/व्हाट्सऐप भारत में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने के हालिया प्रयासों के पीछे भी हों।'' </p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नीट पेपर लीक और भारत सरकार का कड़ा एक्शन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने नीट-यूजी पुनर्परीक्षा का पेपर लीक होने से रोकने के उद्देश्य से गूगल और एप्पल को 22 जून तक टेलीग्राम ऐप को अपने ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित यह परीक्षा देशभर के स्नातक चिकित्सा संस्थानों में प्रवेश के लिए होती है। एजेंसी ने तीन मई को आयोजित पिछली परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बीच रद्द कर दिया था। इसके अलावा, अलग निर्देश में टेलीग्राम से 30 जून तक भारत में पहले से भेजे गए संदेशों के संपादन की सुविधा बंद करने को कहा गया है ताकि 'पेपर लीक' से जुड़े मामलों में साक्ष्यों के दुरुपयोग को रोका जा सके। उद्योग सूत्र ने कहा कि ड्यूरोव के बयान से स्पष्ट है कि जिस कंपनी की बात हो रही है वह आरकॉम है। </p>
<p style="text-align:justify;">सूत्र ने कहा, ''मेटा से जुड़े जो आरोप वह लगा रहे हैं, वे पूरी तरह अलग कंपनी (जियो) से संबंधित हैं। ये अलग-अलग इकाइयां हैं। मेटा, जियो में केवल अल्पांश निवेशक है और उसके दैनिक संचालन या प्रबंधन में उसकी कोई भूमिका नहीं है। दोनों को मिलाकर देखना या तो क्षेत्र की समझ की कमी को दर्शाता है या जानबूझकर भ्रामक जानकारी फैलाने का प्रयास है।'' इस संबंध में टेलीग्राम, आरकॉम, जियो, मेटा और व्हाट्सऐप को भेजे गए ईमेल का कोई तत्काल जवाब नहीं मिला। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/584860/telegram-blocked-in-the-country-ahead-of-the-neet-exam--access-will-not-be-possible"><span class="t-red">NEET UG 2026 Re-Exam से पहले देश में टेलीग्राम पर रोक,</span> नहीं कर सकेंगे एक्सिस</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
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                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:13:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब हर कंप्यूटर बनेगा एआई का पावर हाउस </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">एआई चिप्स के क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई में नया मोर्चा खुल गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के दौर में दिग्गज अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी एनवीडिया ने घोषणा की है कि उसकी ‘सुपरचिप’ आरटीएक्स स्पार्क इसी साल लॉन्च कर दी जाएगी। यह चिप कंप्यूटर के इस्तेमाल का तरीका बदल देगी। इस चिप को लगाने के बाद कंप्यूटर के इस्तेमाल में माउस और की-बोर्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिप आने वाले वर्षों में एआई को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। इस तरह आरटीएक्स स्पार्क सिर्फ एक नई चिप नहीं है,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584506/now--every-computer-will-become-an-ai-powerhouse"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(22)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एआई चिप्स के क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई में नया मोर्चा खुल गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के दौर में दिग्गज अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी एनवीडिया ने घोषणा की है कि उसकी ‘सुपरचिप’ आरटीएक्स स्पार्क इसी साल लॉन्च कर दी जाएगी। यह चिप कंप्यूटर के इस्तेमाल का तरीका बदल देगी। इस चिप को लगाने के बाद कंप्यूटर के इस्तेमाल में माउस और की-बोर्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिप आने वाले वर्षों में एआई को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। इस तरह आरटीएक्स स्पार्क सिर्फ एक नई चिप नहीं है, बल्कि “पर्सनल एआई कंप्यूटिंग” की शुरुआत है। जिस तरह स्मार्टफोन ने संचार की दुनिया बदली थी, उसी तरह यह तकनीक कंप्यूटर को एक पर्सनल एआई सहायक में बदल देगी। इसे आईफोन, चैटजीपीटी और डीपसीक के आगमन की तरह ही देखा जा रहा है, जिसके चलते भविष्य में तेज, स्मार्ट और अधिक सक्षम कंप्यूटरों की नई पीढ़ी इसी तरह की चिप्स पर आधारित होंगी। माना जा रहा है कि डेल, लेनोवो, आसुस और एचपी सहित अन्य कंप्यूटर निर्माता कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज सॉफ्टवेयर के साथ इस सुपर चिप का उपयोग करेंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कंप्यूटर बन जाएगा आपका पर्सनल असिस्टेंट </h4>
<p style="text-align:justify;">अभी तक आप कंप्यूटर में ऐप खोलते थे और माउस-कीबोर्ड से टाइप या क्लिक करते थे। लेकिन इस सुपरचिप के साथ आपके कंप्यूटर में पर्सनल एआई असिस्टेंट होंगे। आप बस बोलकर या लिखकर अपना काम बताएंगे और कंप्यूटर आपके निर्देश के अनुसार खुद ही सारे काम  जैसे निर्णय लेना या टास्क पूरा करना आदि करेगा। कंपनी का कहना है कि वह सृजन और गेमिंग के लिए पर्सनल कंप्यूटर को पूरी तरह से नया रूप देगी। चिप के जरिए इसमें एक स्वायत्त एआई एजेंट होगा, एक ऐसा एजेंट जो आपकी मदद करेगा, जो आपको समझता होगा, यहां तक कि आप उससे बात कर सकेंगे। वह आपको देख सकेगा। आप उससे फाइलें पढ़ने, शोध में मदद करने के लिए कह सकेंगे। वह और भी बहुत कुछ कर सकने में सक्षम होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्लाउड सर्वर या बड़े डाटा सेंटरों पर निर्भरता के बिना चलेगा एआई मॉडल</h4>
<p style="text-align:justify;">आरटीएक्स स्पार्क को खासतौर पर ऐसे कंप्यूटरों के लिए तैयार किया गया है जो सीधे अपने सिस्टम में एआई मॉडल चला सकें। अभी तक जटिल एआई कार्यों के लिए क्लाउड सर्वर या बड़े डाटा सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन इस नई तकनीक की मदद से कई काम लोकल मशीन पर ही किए जा सकेंगे। इसके लिए आरटीएक्स स्पार्क में एनवीडिया की उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) और एआई प्रोसेसिंग तकनीक का संयोजन किया गया है। यह चिप बड़े पैमाने पर डाटा को तेजी से प्रोसेस कर सकती है। इसके जरिए टेक्स्ट तैयार करना, तस्वीर बनाना, वीडियो एडिटिंग, कोडिंग, थ्री-डी डिजाइनिंग और वैज्ञानिक गणनाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">छात्रों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, कंटेंट क्रिएटर्स, व गेम डेवलपर्स को बड़ा लाभ</h4>
<p style="text-align:justify;">इस सुपर चिप से सबसे बड़ा फायदा गति और दक्षता का होगा। एआई आधारित कार्यों में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। क्लाउड पर निर्भरता घटने से इंटरनेट की जरूरत भी कम पड़ेगी और संवेदनशील डाटा स्थानीय कंप्यूटर में ही सुरक्षित रखा जा सकेगा। छात्र, शोधकर्ता, इंजीनियरों कंटेंट क्रिएटर्स, फिल्म निर्माता और गेम डेवलपर्स को इसका विशेष लाभ मिलेगा। छोटे व्यवसाय भी महंगे सर्वरों पर खर्च किए बिना उन्नत एआई टूल्स का उपयोग कर सकेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इस साल के अंत तक बाजार में प्रमुख ब्रांड्स उतार देंगे लैपटाप </h4>
<p style="text-align:justify;">एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग का कहना है कि एनवीडिया और माइक्रोसॉफ्ट के बीच तीन साल के सहयोग के बाद तैयार आरटीएक्स स्पार्क चिप एआई युग के लिए "पीसी को फिर से परिभाषित" करेगी। यह एआई सुपरचिप का अनावरण किया है। यह चिप 1 पेटाफ्लॉप तक की एआई परफॉरमेंस देती है और इसमें 128GB तक की यूनिफाइड मेमोरी है। यह बिना क्लाउड या डेटा सेंटर पर निर्भर रहे, 120-बिलियन पैरामीटर वाले एआई मॉडल को सीधे आपके लैपटॉप पर चलाने में सक्षम है।  हार्डवेयर के मामले में यह एक आर्म आधारित सीपीयू और ब्लैकवेल  आर्किटेक्चर पर आधारित आरटीएक्स  जीपीयू का कॉम्बिनेशन है। एनवीडिया के अनुसार, आरटीएक्स स्पार्क चिप वाले लैपटॉप और छोटे डेस्कटॉप कंप्यूटर प्रमुख ब्रांड्स जैसे डेल, एचपी और लेनोवो द्वारा इस साल के अंत तक बाजार में उतार दिए जाएंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सुपर चिप की ताकत से हल्के और पतले भी बने रहेंगे कंप्यूटर </h4>
<p style="text-align:justify;">ताइवान की मीडियाटेक की मदद से विकसित, माइक्रोप्रोसेसर और ग्राफिक्स चिप के संयोजन से बना यह सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय रूप से एआई एजेंटों को चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस चिप की अत्यधिक ताकत के कारण कंप्यूटर पतले और हल्के भी बने रहेंगे।आरटीएक्स स्पार्क का उद्देश्य पारंपरिक ऐप केंद्रित पीसी को एक वास्तविक उपयोगी एजेंटिक एआई पर्सनल कंप्यूटर में बदलना है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह हर घर में मौजूद होगा। आरटीएक्स स्पार्क के आने से इंटेल, एएमडी और क्वालकॉम जैसी चिप कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। साथ ही, केवल क्लाउड आधारित एआई सेवाएं देने वाली कंपनियों को भी नई रणनीति बनानी पड़ सकती है, क्योंकि अधिकतर उपयोगकर्ता तमाम एआई कार्य सीधे अपने कंप्यूटर पर करना पसंद कर सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">-मनोज त्रिपाठी, कानपुर </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 10:00:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टेक जानकारी:  घर बैठे पेन कार्ड में फोटो करें अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">यदि आपके पेन कार्ड पर लगी तस्वीर पुरानी, धुंधली या वर्तमान स्वरूप से मेल नहीं खाती है, तो भविष्य में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में पहचान सत्यापन के दौरान फोटो का मिलान किया जाता है। यदि कार्ड पर लगी तस्वीर और आपकी मौजूदा पहचान में काफी अंतर है, तो KYC, खाता संचालन या अन्य जरूरी कार्यों में बाधा आ सकती है। इसलिए समय-समय पर पेन कार्ड में फोटो अपडेट कराना एक आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात यह है कि अब फोटो बदलवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583972/tech-info--update-the-photo-on-your-pan-card-from-the-comfort-of-your-home"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(33)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यदि आपके पेन कार्ड पर लगी तस्वीर पुरानी, धुंधली या वर्तमान स्वरूप से मेल नहीं खाती है, तो भविष्य में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में पहचान सत्यापन के दौरान फोटो का मिलान किया जाता है। यदि कार्ड पर लगी तस्वीर और आपकी मौजूदा पहचान में काफी अंतर है, तो KYC, खाता संचालन या अन्य जरूरी कार्यों में बाधा आ सकती है। इसलिए समय-समय पर पेन कार्ड में फोटो अपडेट कराना एक आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात यह है कि अब फोटो बदलवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। यह काम ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे आसानी से किया जा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए सबसे पहले NSDL या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पेन करेक्शन/अपडेट के विकल्प का चयन करना होता है। इसके बाद भारतीय नागरिकों के लिए निर्धारित Form 49A भरना पड़ता है। आवेदन करते समय Photo Mismatch या फोटो सुधार से संबंधित विकल्प का चयन करना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फॉर्म भरते समय पेन नंबर, नाम, जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत जानकारी सही-सही दर्ज करनी चाहिए। इसके बाद हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करनी होती है। साथ ही पहचान प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या अन्य मान्य दस्तावेजों की स्कैन कॉपी भी जमा करनी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होता है। वर्तमान में इसके लिए लगभग 91 रुपये के साथ लागू जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है। </p>
<p style="text-align:justify;">आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बाद आवेदक को 15 अंकों का Acknowledgment Number प्राप्त होता है। इस नंबर की मदद से आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। कुछ मामलों में हस्ताक्षरित आवेदन पत्र और दस्तावेजों की प्रतियां डाक के माध्यम से भी भेजनी पड़ सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 13:00:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूर्य के आगोश में समा जाएगी एक दिन हमारी धरती</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सूर्य की महिमा अपरंपार है, जिसने धरती को सुनहरी किरणों से सींचा, जीवन दिया, हरा-भरा बनाया। मगर एक दिन यही सूरज हमारी धरती को निगल जाएगा। यह ब्रह्मांड का नियम है, जो भी यहां आया है, एक दिन चला जाएगा। ब्रह्मांड के कुदरत का भी यही नियम है। हमारी धरती भी इस नियम से बाहर नहीं, जो अरबों साल बाद सूर्य की लपटों में समा जाएगी।</p><p style="text-align:justify;">सूरज हमारे सौर मंडल का मुखिया है, जिसके साथ ग्रहों का जन्म हुआ और उपग्रह, धूमकेतु, क्षुद्र ग्रह और तमाम छोटे बड़े पिंड हैं, जो सूर्य के साथ जन्मे हैं। हमारे सौर मंडल जैसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583947/one-day--our-earth-will-be-engulfed-by-the-sun"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(15)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सूर्य की महिमा अपरंपार है, जिसने धरती को सुनहरी किरणों से सींचा, जीवन दिया, हरा-भरा बनाया। मगर एक दिन यही सूरज हमारी धरती को निगल जाएगा। यह ब्रह्मांड का नियम है, जो भी यहां आया है, एक दिन चला जाएगा। ब्रह्मांड के कुदरत का भी यही नियम है। हमारी धरती भी इस नियम से बाहर नहीं, जो अरबों साल बाद सूर्य की लपटों में समा जाएगी।</p><p style="text-align:justify;">सूरज हमारे सौर मंडल का मुखिया है, जिसके साथ ग्रहों का जन्म हुआ और उपग्रह, धूमकेतु, क्षुद्र ग्रह और तमाम छोटे बड़े पिंड हैं, जो सूर्य के साथ जन्मे हैं। हमारे सौर मंडल जैसे अनगिनत सौर मंडल ब्रह्मांड में जन्मे हैं, जिनमें न जाने कितने ही खत्म हो चुके हैं। </p><p style="text-align:justify;">प्रत्येक सौर मंडल के खात्मे का कारण अंततः उसका मुखिया तारा यानी सूर्य ही बनता है और उसी तरह हमारी धरती के साथ सौर मंडल के सभी ग्रह और पिंड समाप्त हो जाएंगे। सूर्य की ग्रेविटी यानी सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति उन्हें अपने आगोश में समा लेगी। मगर राहत की बात यह है कि, यह समय अभी कुछ समय बाद नहीं बल्कि लंबे समय बाद आएगा।</p><p style="text-align:justify;">अनुमान है कि, यह घटना आज से लगभग 5 से 7.5  अरब वर्ष बाद तब होगी, जब सूर्य का फैलना शुरू हो जाएगा यानी उसका आकार बढ़ने लगेगा। उसमें मौजूद हाइड्रोजन गैस खत्म होने लगेगी। हाइड्रोजन ही सूर्य का ईंधन है। सूर्य विशाल आकार लेकर एक दानव का रूप धारण कर लेगा और यही से सूर्य के करीबी दूसरे ग्रहों का अंत भी शुरू हो जाएगा। सबसे पहले बुध ग्रह खत्म होगा, उसके बाद शुक्र ग्रह की बारी आएगी और उसके बाद पृथ्वी का समाप्त होना शुरू हो जाएगा। </p><p style="text-align:justify;">सूर्य की महाग्रेविटी में पृथ्वी का समाना शुरू हो जाएगा और एक दिन पृथ्वी पूरी तरह नष्ट होकर सूर्य के आगोश में समा जाएगी। तब सूर्य पूरी तरह एक दानव बन चुका होगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में लाल दानव (रेड जाइंट) नाम दिया गया है।</p><p style="text-align:justify;">यह तय है कि सूर्य एक दिन पृथ्वी को निगल जाएगा, लेकिन यह समय आने में लंबा समय लगेगा। हमारे पृथ्वी की उम्र 4.6 अरब साल की हो चुकी है और हमारे सौर मंडल की उम्र करीब 12.5 अरब साल मानी जाती है। यह माना जाता है कि लगभग सात अरब वर्ष बाद सूर्य का लाल दानव बनने की प्रक्रिया शुरू होने लगेगी। दरअसल, सूर्य का जीवन किसी तारे के खत्म होने के बाद शुरू हुआ, जिसकी गैस और धूल से सूर्य बनने की प्रक्रिया शुरू हुई। </p><p style="text-align:justify;">इसके केंद्र में गैस और धूल का भंडार जमा हो गया और गर्म होना शुरू हो गया। इस प्रक्रिया में सूर्य के कोर का तापमान इतना ज्यादा बढ़ गया कि उसमें परमाणु संलयन की प्रक्रिया शुरू हो गई और सूर्य पूर्णतः अस्तित्व में आ गया। हाइड्रोजन के साथ हीलियम के कारण चमकना शुरू किया और पूरे सौर मंडल को रोशन करने लगा। सूर्य निर्माण प्रक्रिया में बची धूल से ग्रह बन गए। यह प्रक्रिया गुरुत्वाकर्षण के कारण शुरू हुई। छोटे पत्थर आपस में जुड़कर बड़े पिंड बन गए, जिनमें हमारी पृथ्वी भी शामिल है।</p><h4 style="text-align:justify;">सतत जारी रहेगा ग्रह और तारों के नष्ट होने का सफर</h4><p style="text-align:justify;">आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे कहते हैं कि ग्रह और तारों के नष्ट होने का क्रम सतत जारी रहेगा। यह ब्रह्मांड के कुदरत का नियम है, जो यहां आया है, उसका खत्म होना निश्चित है। कोई जल्दी खत्म हो जाता है तो कुछ अरबों वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। आकाश गंगाओं, ग्रह नक्षत्रों का जीवन अरबों वर्ष चलता है। ग्रहों का जीवन उसका अपना तारा लील जाता है। पृथ्वी का अंत भी सूर्य खत्म कर जाएगा। यह सभी तारों के ग्रहों के साथ होता है।</p><h5 style="text-align:justify;">प्रस्तुति-बबलू चंद्रा, नैनीताल</h5><p style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:32:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खोज :  ऐसे हुआ ग्रामोफोन का आविष्कार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज संगीत सुनना बेहद आसान है, लेकिन एक समय ऐसा था जब किसी गायक की आवाज़ को रिकॉर्ड करके दोबारा सुन पाना असंभव माना जाता था। इस असंभव कार्य को संभव बनाने का श्रेय महान अमेरिकी आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन को जाता है। उन्होंने 1877 में फोनोग्राफ (Phonograph) का आविष्कार किया, जो ध्वनि को रिकॉर्ड और पुनः सुनाने वाला पहला सफल उपकरण था।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आधुनिक ग्रामोफोन का विकास बाद में हुआ। वर्ष 1887 में जर्मन मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक एमिल बर्लिनर ने ग्रामोफ़ोन का आविष्कार किया। उन्होंने एडिसन के फोनोग्राफ में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। फोनोग्राफ में ध्वनि को बेलनाकार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583967/discovery--how-the-gramophone-was-invented"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(32)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज संगीत सुनना बेहद आसान है, लेकिन एक समय ऐसा था जब किसी गायक की आवाज़ को रिकॉर्ड करके दोबारा सुन पाना असंभव माना जाता था। इस असंभव कार्य को संभव बनाने का श्रेय महान अमेरिकी आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन को जाता है। उन्होंने 1877 में फोनोग्राफ (Phonograph) का आविष्कार किया, जो ध्वनि को रिकॉर्ड और पुनः सुनाने वाला पहला सफल उपकरण था।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आधुनिक ग्रामोफोन का विकास बाद में हुआ। वर्ष 1887 में जर्मन मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक एमिल बर्लिनर ने ग्रामोफ़ोन का आविष्कार किया। उन्होंने एडिसन के फोनोग्राफ में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। फोनोग्राफ में ध्वनि को बेलनाकार (Cylinder) सतह पर रिकॉर्ड किया जाता था, जबकि बर्लिनर ने सपाट गोल डिस्क (Record) का उपयोग किया। यही तकनीक आगे चलकर रिकॉर्ड प्लेयर और आधुनिक संगीत उद्योग की नींव बनी। </p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामोफ़ोन का कार्य सिद्धांत काफी रोचक था। जब कोई व्यक्ति एक बड़े हॉर्न (भोंपू जैसी संरचना) में बोलता या गाता था, तो उसकी आवाज़ से उत्पन्न ध्वनि तरंगें एक पतली झिल्ली को कंपन कराती थीं। यह कंपन एक सुई तक पहुँचता था, जो घूमती हुई डिस्क पर बारीक खांचे (Grooves) बना देती थी। बाद में जब उसी डिस्क को चलाया जाता, तो सुई उन खांचों के अनुसार कंपन करती और वही ध्वनि फिर से सुनाई देने लगती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामोफ़ोन ने मनोरंजन की दुनिया में क्रांति ला दी। पहली बार लोगों को घर बैठे संगीत, भाषण और नाटक सुनने का अवसर मिला। 20वीं सदी की शुरुआत में यह दुनिया भर में लोकप्रिय हो गया। भारत में भी ग्रामोफ़ोन का आगमन ब्रिटिश काल में हुआ और इससे शास्त्रीय संगीत, लोकगीत तथा नाट्य प्रस्तुतियों के संरक्षण में बड़ी सहायता मिली। समय के साथ ग्रामोफ़ोन की जगह रेडियो, टेप रिकॉर्डर, सीडी प्लेयर और फिर डिजिटल संगीत प्रणालियों ने ले ली, लेकिन ध्वनि रिकॉर्डिंग तकनीक के इतिहास में ग्रामोफ़ोन का स्थान आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आविष्कार मानव सभ्यता के उन महान नवाचारों में गिना जाता है, जिसने संगीत और संचार की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वैज्ञानिक के बारे में</h4>
<p style="text-align:justify;">थॉमस अल्वा एडिसन का जन्म 11 फ़रवरी 1847 को मिलान में हुआ था। उनका बचपन आर्थिक संघर्षों के बीच बीता। वे औपचारिक शिक्षा में अधिक समय तक नहीं पढ़ सके और उनकी माता ने घर पर ही उनकी शिक्षा का दायित्व संभाला। एडिसन को कम उम्र से ही प्रयोग करने का शौक था। उन्होंने दो विवाह किए। उनकी पहली पत्नी का नाम मैरी स्टिलवेल तथा दूसरी पत्नी का नाम मीना मिलर था। उनके छह बच्चे थे। अत्यधिक श्रवण-दोष (कम सुनाई देना) के बावजूद उन्होंने जीवनभर अनुसंधान और आविष्कारों में स्वयं को समर्पित रखा। 18 अक्टूबर 1931 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके आविष्कार आज भी दुनिया को प्रेरित करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 17:18:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंटरनेट स्पीड को सौ गुणा करेगी नई माइक्रोचिप  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक इनोवेटिव ऑप्टिकल माइक्रोचिप  बनाया है, जिसका आकार उंगली के सिरे जितना है। स्टैनफोर्ड की छोटी सी चिप  इंटरनेट को 100 गुना तेज़ बना सकती है और वह भी कम बिजली खर्च करके। इस माइक्रोचिप (मेमोरी चिप या ग्राफ़िक प्रोसेसिंग यूनिट) के बाजार में उपलब्ध होने से हाई स्पीड डाटा कम्युनिकेशन के लिए एक बेहतर एम्प्लिफ़िएर के तौर पर इस नयी चिप से डाटा ट्रान्सफर की स्पीड 100 गुना बढ़ जाएगी, ऐसा तजुर्बों ने दिखाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एम्पलीफायर चिप एक इंटीग्रेटेड सर्किट होता है जो इलेक्ट्रिक सिग्नल की पावर, वोल्टेज या करंट को बढ़ाता है। यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583944/new-microchip-to-boost-internet-speed-a-hundredfold"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(14)4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक इनोवेटिव ऑप्टिकल माइक्रोचिप  बनाया है, जिसका आकार उंगली के सिरे जितना है। स्टैनफोर्ड की छोटी सी चिप  इंटरनेट को 100 गुना तेज़ बना सकती है और वह भी कम बिजली खर्च करके। इस माइक्रोचिप (मेमोरी चिप या ग्राफ़िक प्रोसेसिंग यूनिट) के बाजार में उपलब्ध होने से हाई स्पीड डाटा कम्युनिकेशन के लिए एक बेहतर एम्प्लिफ़िएर के तौर पर इस नयी चिप से डाटा ट्रान्सफर की स्पीड 100 गुना बढ़ जाएगी, ऐसा तजुर्बों ने दिखाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एम्पलीफायर चिप एक इंटीग्रेटेड सर्किट होता है जो इलेक्ट्रिक सिग्नल की पावर, वोल्टेज या करंट को बढ़ाता है। यह एक कमज़ोर इनपुट सिग्नल को एक मज़बूत आउटपुट सिग्नल में एम्पलीफाई करता है और जो स्पीकर्स, सेंसर्स, एंटेना या अन्य डिवाइस को चला सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">इंटीग्रेटेड सर्किट्स का ग्लोबल बाज़ार</h5>
<p style="text-align:justify;">एम्पलीफायर चिप का मुख्य काम आने वाले सिग्नल को बिना ज़्यादा बिगाड़े एम्पलीफाई करना होता है। यह काम ट्रांजिस्टर्स के इस्तेमाल से किया जाता है, जो करंट के बहाव को कंट्रोल करते हैं। इस प्रक्रिया में एक कम-लेवल का इनपुट सिग्नल लेना, ट्रांजिस्टर्स का इस्तेमाल करके सिग्नल को एम्पलीफाई और मॉड्युलेट करना और फिर आउटपुट को ओरिजिनल सिग्नल के एक बड़े रूप में बढ़ाना शामिल है। इसमें सिग्नल का आकार और फ्रीक्वेंसी वही रहती है, लेकिन वोल्टेज या करंट ज़्यादा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एम्पलीफायर चिप्स आज के इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत ज़रूरी हिस्से हैं, जो ऑडियो सिस्टम, टेलीकम्युनिकेशन और कई दूसरी जगहों पर अहम भूमिका निभाते हैं। इनका इस्तेमाल लगभग हर उस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में होता है, जिसे हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं, जैसेकि स्मार्टफोन और टेलीविज़न से लेकर मेडिकल उपकरणों और इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम तक में। एम्पलीफायर इंटीग्रेटेड सर्किट्स का ग्लोबल बाज़ार लगातार बढ़ रहा है। सन 2024 में यह ₹40 करोड़ तक पहुंच गया, जिसकी मुख्य वजह कारों, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और 5 जी व इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसी नई टेक्नोलॉजी की बढ़ती माँग है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या कहती है रिपोर्ट</h4>
<p style="text-align:justify;">यह छोटा सा डिवाइस, बिजली की खपत को काफी हद तक कम करके, हाई-स्पीड डेटा कम्युनिकेशन के तरीके को बदल सकता है। पारंपरिक एम्पलीफायर आमतौर पर बड़े होते हैं और ज़्यादा बिजली खर्च करते हैं, लेकिन यह नई चिप अलग है। इसमें एक रेसिंग ट्रैक जैसा रेज़ोनेटर लगा है जो रोशनी को रीसायकल करता है, जिससे सिग्नल की ताकत 100 गुना बढ़ जाती है, और बिजली भी बहुत कम खर्च होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगली पीढ़ी की क्वांटम और क्लासिकल फोटोनिक्स के लिए इस नयी चिप का बेहद महत्त्व है। 1950 आदि दशक में माइक्रो चिप और इंटीग्रेटेड सर्किट्स की ईजाद करने वाले जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस के बाद के सत्तर साल के अरसे में इस टेक्नोलॉजी में हर दो साल में जो परिवर्तन हुए उनसे गॉर्डोन मूर की भविष्यवाणी सही साबित हुयी।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटेल के सह-संस्थापक और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के एक अग्रणी व्यक्ति, गॉर्डन मूर को मुख्य रूप से उनकी उस भविष्यवाणी के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक माइक्रोचिप पर ट्रांजिस्टरों की संख्या हर दो साल में दोगुनी हो जाएगी। इसे मूर का नियम कहा गया जो सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत रही है। मूर की दूरदृष्टि आधुनिक कंप्यूटिंग के विकास और पर्सनल कंप्यूटर क्रांति के उदय में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई है। कंप्यूटिंग क्षमता और कार्यक्षमता में अपेक्षित वृद्धि के लिए यह आज भी एक मानक है। </p>
<p style="text-align:justify;">स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस तरक्की से एडवांस्ड फोटोनिक्स के लिए दरवाज़े खुल गए हैं, जिससे यह स्मार्टफोन और रिमोट सेंसर जैसे पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाले गैजेट्स में भी इस्तेमाल हो सकेगा। फाइबर-ऑप्टिक जैसी क्वालिटी वाले सिग्नल के लिए ज़रूरी टेक्नोलॉजी का आकार छोटा करके, शोधकर्ताओं ने बड़े टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम को छोटे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से सफलतापूर्वक जोड़ दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे भविष्य में तेज और ज्यादा असरदार ग्लोबल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इस चिप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रोशनी के सिग्नल को 100 गुना तक बढ़ा सकती है और वह भी सिर्फ कुछ सौ मिलीवॉट बिजली खर्च करके। पहले, ऑप्टिकल एम्पलीफायर को बहुत ज्यादा बिजली और जगह की जरूरत होती थी, जिसकी वजह से वे सिर्फ बड़े डेटा सेंटर या समुद्र के नीचे बिछी केबलों तक ही सीमित थे, लेकिन यह नया डिवाइस इस पूरी स्थिति को बदल देता है। </p>
<p style="text-align:justify;">लिथियम नायोबेट की एक पतली परत पर बना यह डिवाइस, ‘रेजोनेंट’ आर्किटेक्चर नाम की एक खास तकनीक का इस्तेमाल करता है। रोशनी चिप पर बने एक बहुत छोटे से ट्रैक पर हजारों बार चक्कर लगाती है। इस प्रक्रिया से स्टिम्युलेटेड एमिशन के ज़रिए रोशनी की तीव्रता बढ़ जाती है, ठीक वैसे ही जैसे लेजर काम करती है, लेकिन कम्युनिकेशन सिग्नल के मामले में यह तकनीक बिजली की बहुत ज्यादा बचत करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लिथियम, नायोबियम और ऑक्सीजन से बना हुआ लिथियम नायोबेट एक बहुमुखी सिंथेटिक क्रिस्टल है, जिसका उपयोग ऑप्टिक्स, फोटोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में इसकी मजबूत नॉन-लीनियर, पीजोइलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रो-ऑप्टिक विशेषताओं के कारण किया जाता है। अगली पीढ़ी की ऑप्टिकल चिप्स के लिए लिथियम नायोबेट मुख्य सामग्री बन सकती है। शोधकर्ताओं ने लिथियम नायोबेट नाम की सामग्री पर काम किया। </p>
<p style="text-align:justify;"> यह सामग्री रासायनिक रूप से स्थिर है, इसका गलनांक 1250°C से अधिक होता है और यह तापमान में होने वाले बदलावों के बावजूद अपना प्रदर्शन बनाए रखती है। ऑप्टिक्स की दुनिया में यह सामग्री इसलिए लोकप्रिय है, क्योंकि जब इस पर बिजली प्रवाहित की जाती है, तो यह रोशनी का रास्ता बदल सकती है। स्टैनफोर्ड की टीम ने थिन-फिल्म-ऑन-इंसुलेटर नाम की एक नई तकनीक विकसित की, इस तकनीक की मदद से वे रोशनी को पहले से कहीं ज़्यादा असरदार तरीके से एक जगह रोक पाने में कामयाब रहे। रोशनी को इस तरह मज़बूती से एक जगह रोकने की वजह से ही, वे एम्पलीफायर को उंगली के सिरे जितना छोटा बनाने के बाद भी, उसे उतना ही असरदार बनाए रखने में सफल रहे। इन चिप्स को आम कंप्यूटर मदरबोर्ड और मोबाइल डिवाइस पर लगाने के लिए एम्पलीफायर का आकार छोटा करना बहुत जरूरी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">डिफेंस कम्युनिकेशन में सहायक</h5>
<p style="text-align:justify;">6-जी नेटवर्क बनाने में कम-पावर वाली चिप्स की जरूरत है। यह भूमिका शायद यह नई चिप टेक्नोलॉजी बेहतर तरीके से अदा कर पाएगी। यह चिप सिर्फ इंटरनेट की स्पीड ही नहीं बढ़ाती, बल्कि इसे बहुत कम पावर की भी जरूरत होती है। थिन-फिल्म लिथियम नायोबेट क्वांटम कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स के लिए बहुत तेज मॉड्यूलेटर और इंटीग्रेटेड फोटोनिक सर्किट्स को संभव बनाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है डिफेंस कम्युनिकेशन, हमलवार ड्रोंस और सेल फोंस के लिए इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कमाल कर सकता है। यह सेल फोन की बैटरी लाइफ को ही काफी बढ़ा देगा। यह बात ऊर्जा उत्पादन करने वाले कंपनियों के लिए अहम बात होगेई। ट्रांसमिशन के दौरान पैदा होने वाली गर्मी को कम करना भविष्य के 6-जी नेटवर्क और LiDAR अर्थात लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग, जैसी सेल्फ़-ड्राइविंग कारों में लगे सेंसर के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि यह चिप बैटरी से भी चल सकती है, इसलिए यह ड्रोन या सैटेलाइट को ज़्यादा वज़न बढ़ाए बिना या ज़्यादा पावर इस्तेमाल किए बिना बहुत सारा डेटा भेजने में मदद कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे अंतरिक्ष की खोज और दूर से पर्यावरण की निगरानी करने वाले सरकारी प्रोजेक्ट्स में मदद मिलेगी। लूपिंग रेजोनेटर रोशनी के इंटरैक्शन की लंबाई बढ़ाते हैं जो छोटे एम्पलीफायर में गेन-सैचुरेशन जैसी आम समस्या को हल करता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों ने एक लूपिंग रेजोनेटर का इस्तेमाल किया, जो बड़ी हो रही चिप के बिना ही रोशनी के ‘इंटरैक्शन की लंबाई’ को बड़ी होशियारी से बढ़ा देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोशनी सिर्फ़ एक बार गुजरने के बजाय, गेन मीडियम से कई बार गुज़रती है। इससे वह कम पावर वाले पंप सोर्स से ज्यादा फोटॉन इकट्ठा कर पाती है, जिससे आउटपुट बेहतर होता है और वह आम ‘शोर’ कम हो जाता है, जो अक्सर तेज कम्युनिकेशन में सिग्नलों में रुकावट डालता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">- रणबीर सिंह, विज्ञान लेखक  </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                            <category>Knowledge</category>
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                                            <category>यूरेका</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:33:16 +0530</pubDate>
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