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                <title>साहित्य - Amrit Vichar</title>
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                <title>व्यंग्यः शर्मा जी का अंडरवियर...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">शर्मा और शर्माइन की जुगलबंदी ऐसी थी कि तेरे संग रहा न जाए और तेरे बिन भी रहा न जाए। दिन भर एक दूसरे के ऊपर तुनकना, कोई रूठ जाए तो फिर मनाना और फिर एक हो जाना। उनकी गृहस्थी की गाड़ी कभी दो पहियों के सहारे तो कभी चार पहियों के सहारे खट्टी मीठी चल रही थी। </p>
<p style="text-align:justify;">शर्मा जी ठहरे थोड़ा कंजूस प्रवृति के और शर्माइन ठहरी खुलकर खर्च करने वाली और यही वजह थी दोनों की आपसी नोक झोंक की। अक्सर शर्माइन राजधानी एक्सप्रेस की तरह दौड़ने के चक्कर में अपनी बालकनी में जब साड़ियां सूखने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578462/satire--sharma-ji-s-underwear----beena-nayal--independent-writer"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(41)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शर्मा और शर्माइन की जुगलबंदी ऐसी थी कि तेरे संग रहा न जाए और तेरे बिन भी रहा न जाए। दिन भर एक दूसरे के ऊपर तुनकना, कोई रूठ जाए तो फिर मनाना और फिर एक हो जाना। उनकी गृहस्थी की गाड़ी कभी दो पहियों के सहारे तो कभी चार पहियों के सहारे खट्टी मीठी चल रही थी। </p>
<p style="text-align:justify;">शर्मा जी ठहरे थोड़ा कंजूस प्रवृति के और शर्माइन ठहरी खुलकर खर्च करने वाली और यही वजह थी दोनों की आपसी नोक झोंक की। अक्सर शर्माइन राजधानी एक्सप्रेस की तरह दौड़ने के चक्कर में अपनी बालकनी में जब साड़ियां सूखने के लिए डालती थी, तो चिमटी लगाना भूल जाती थी इसी हड़बड़ी में कई बार साड़ी और दूसरे कपड़े नीचे वाले पड़ोसी की बालकनी मे गिर जाते थे, जिसे लेने के लिए शर्मा जी को अक्सर नीचे जाना पड़ता था। खैर वह भी कोई बात नहीं, परेशानी तो तब होती थी, जब शर्माइन के सूट या साड़ी का कोई जोड़ा आंधी में उड़कर दूर खंबे में लटक जाता था, जिसे पूरा मोहल्ला घूम-घूम कर निहारता था और पूछता था शर्मा जी तुम्हारी पत्नी के कपड़े पैदल चल चलकर कितनी दूरी तय कर लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शर्मा जी द्वारा कपड़े वापस लाने पर शर्माइन बोलती थी अरे यह मेरा नहीं है किसी काम वाली का होगा। शर्मा जी बोलते थे तुम्हारा ही है। वापस क्यों नहीं लेती हो। शर्माइन गुस्से में फट पड़ती कि जब कपड़ा आंधी में उड़कर चला ही गया तो उसे वापस लेने का कोई औचित्य नहीं है। शर्मा जी हम दूसरा ले लेंगे। शर्मा जी बोलते अरे भाग्यवान पैसे क्या पेड़ पर उगते हैं, तो शर्माइन बोली पैसे तो पेड़ पर फिर भी उग जाएंगे क्या इज्जत पेड़ पर उगती है। शर्मा जी शर्माइन के तर्कों के आगे बेबस हो जाते।</p>
<p style="text-align:justify;">खैर एक दिन शर्माइन ने बालकनी में शर्मा जी का अंडरवियर सूखने के लिए डाला, जो चिमटी न लगाए जाने के कारण खो गया। खैर वो शर्मा जी का अंडरवियर ठहरा तो उसकी ढूंढ तो मचनी ही थी। शर्माइन ने कहा अरे दूसरा ले लो, शर्मा जी ने कहा नहीं उसे ही ढूंढना पड़ेगा, पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं। शर्मा जी नीचे पड़ोसन के घर गए और बोले आपकी बालकनी में मेरा अंडरवियर आया है क्या? पड़ोसन बोले शर्मा जी शर्म नहीं आती है आपको, एक तो गलती ऊपर से बेशर्मी। कम से कम मेरे पति के आने का ही इंतजार कर लेते। और आया होता तो मैं क्या दीवार पर नहीं टांग देती? कोई दूसरे का अंडरवियर अपने घर पर रखेगा क्या? </p>
<p style="text-align:justify;">शर्मा जी का अंडरवियर खो चुका था। हद तो तब हो गई, जब एक दिन पड़ोस मे एक बंदर उनका अंडरवियर पहनकर अलग-अलग बिल्डिंग में कूद फांद करने लगा। मोहल्ले भर के लोगों को अब मुफ्त का तमाशा मिल गया, चलते फिरते लगे टोकते, अरे शर्मा जी आज तक तो आपकी पत्नी के कपड़े उड़कर केवल खंबे तक जाते थे और आज तो आपका अंडरवियर बंदर पहने घूम रहा है। ऐसा कीजिए आप इसे वापस ले लीजिए हम मदद करते है। शर्मा जी बोले क्या इसमें लिखा है यह मेरा अंडरवियर है। </p>
<p style="text-align:justify;">शर्मा जी मुंह छुपाते-छुपाते घर तक आ गए और सारा वाक्या अपनी पत्नी को बताया तो पत्नी ने तंज कसा की वापस क्यों नहीं लेकर आए, अगर खंबे से मेरी साड़ी उतारकर ला सकते हैं तो ये क्यों नहीं? शर्मा जी बोले भाग्यवान कुछ तो शर्म करो इज्जत का फालूदा निकालोगी क्या?</p>
<p style="text-align:justify;">खैर यह तो एक वाक्या हुआ। एक दिन शर्मा जी रोजमर्रा की दुकान से जो अंडरवियर लाए वो साइज में दो नंबर कम था। शर्मा जी ने अंडरवियर पहन लिया और अंडरवियर मशीन में धुल गया। पहनने के बाद शर्मा जी को लगा यह तो टाइट है, तो उन्होंने उसे पुराने अंडरवियर से नापा जो 2 इंच छोटा था। शर्मा जी ने शर्माइन को बोला चलो इस अंडरवियर को वापस करने।<br />शर्माइन बोली शर्मा जी अंडरवियर कौन वापिस करता है, वह भी पहना हुआ। शर्मा जी ने बोला हम करेंगे ना वापस। शर्माइन बोली शर्म बाकी है मुझ में। आप चले जाओ मैं नहीं जाऊंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">शर्मा जी की दुकान में गए और बिफरते हुए बोले कि आप लोगों को बेवकूफ बनाते हो। अंडरवियर तो टाइट आया है, जो नंबर बोला था आपने उसे दो नंबर कम दिया है। दुकानदार ने समझदारी दिखाते हुए बिना कुछ कहे, उनको नया अंडरवियर दे दिया। खैर शर्मा की खुशी-खुशी घर वापस आ गए जैसे बहुत बड़ा किला फतह कर लिया हो। शर्माइन को बहुत गुस्सा आया। शर्मा इन बोली न वापस करने वाले को शर्म और न लेने वाले को शर्म। अब बच्चे शर्मा जी और शर्माइन की चिलमपो से बहुत परेशान हो चुके थे। बेटा बोला मम्मी तुम्हारी आदत भी गंदी है दौड़-भाग के चक्कर में कपड़ों में चिमटी नहीं लगती हो, जिससे पूरे मोहल्ले में जगहंसाही होती है और पापा आपकी कंजूसी और सामान वापस करने की आदत से हमारा बाहर जाना मुश्किल हो गया है।  शर्मा और शर्माइन अब एक हो गए और बच्चों पर बरसते हुए बोले तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी मां उत्तर भारतीय बिल्कुल बेफिक्र और मैं दक्षिण भारतीय सोच समझकर चलने वाला और तुम हाइब्रिड बच्चे हो तुम्हें भी हमारे रंग में रंग जाना चाहिए था। तुम उल्टा हमें ही सुना रहे हो। घोर कलयुग है। बच्चे मां-बाप को समझाने लग गए हैं। हम लड़ते नहीं हैं। हम यह तो घर के माहौल को हल्का-फुल्का बनाए रखने के लिए खट्टी-मीठी नोकझोंक है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>- बीना नयाल, स्वतंत्र लेखिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Special</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 05:00:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘तुम बहुत बोल चुके, अब मैं बोलूंगी’... वैदिक काल से आज तक जानें क्या रहा नारी का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वजों ने स्त्री को समाज का संरक्षक माना है। वैदिक काल में महिलाएं मंत्रदृष्टा ऋषि भी थीं। बृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार राजा जनक ने विद्वानों की सभा बुलाई थी। अनेक विद्वान इस गोष्ठी में सम्मिलित थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578325/-you-have-spoken-enough--now-i-will-speak-----know-the-journey-of-women-from-vedic-period-till-today"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(55)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">हृदयनारायण दीक्षित (पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, यूपी)-</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>भारत में नारी की स्थिति सभी कालों में सम्माननीय रही है। पूर्वजों ने स्त्री को समाज का संरक्षक माना है। वैदिक काल में महिलाएं मंत्रदृष्टा ऋषि भी थीं। बृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार राजा जनक ने विद्वानों की सभा बुलाई थी। अनेक विद्वान इस गोष्ठी में सम्मिलित थे। विद्वानों की सभा में गार्गी ने याज्ञवल्क्य से सीधे सवाल पूछे थे। पूछा था, ‘यह संपूर्ण अस्तित्व किस तत्व पर टिका हुआ है?’, ‘सृष्टि किस आधार पर खड़ी है।’ याज्ञवल्क्य ने उत्तर दिया, ‘जल पर।’</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(56)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (56)" width="171" height="96"></img></em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण आ गया है। केंद्रीय मंत्रीपरिषद ने इसे पारित कर दिया है। महिला आरक्षण सामाजिक समता का ऐतिहासिक दस्तावेज है। इससे अथर्ववेद के एक मंत्र की ध्वनि सुनाई पड़ रही है। इस मंत्र में एक स्त्री कहती है, ‘तुम बहुत बोल चुके। अब मैं बोलूंगी।’ भारत में प्राचीन काल से ही स्त्री सम्मान रहा है। महिलाओं की खराब स्थिति का प्रचार करने वाले मिथ्या आरोप लगाते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय समाज में स्त्रियां पुरुष के बराबर सम्मानीय रही हैं। वैदिक काल में भी स्त्री सम्मान था। वैदिक काल की एक प्रतिष्ठित महिला मुदग्लानी रथ पर चढ़कर युद्ध में हिस्सा लेती थीं। युद्ध में उनके वस्त्रों का संचालन वायु देव ने किया था। ऋग्वेद के अनुसार युद्ध में विपशला का पैर कट गया। अश्वनी देवों ने उसे धातु का पैर लगा दिया था। पति और पत्नी को मिलाकर दंपति बनता है। दंपति में नारी की प्रतिष्ठा है। ऋग्वेद में अनेक सूक्तों में स्त्री सम्मान के तत्व हैं। सृष्टि की उत्पत्ति जल से होने का तथ्य चार्ल्स डार्विन ने भी स्वीकार किया है। जल माता का विचार डारविन के बहुत पहले वैदिक काल में ही पुष्ट हो चुका था। ऋग्वेद में ‘आपः मातरम’- जलमाताओं को नमस्कार किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऋग्वेद में अदिति नाम की एक महादेवी हैं। कहा गया है, ‘इस अस्तित्व के सभी तत्व अदिति हैं। अब तक जो कुछ हो गया है और जो कुछ भविष्य में होगा वह सब अदिति है।’ ऋग्वेद का सूक्त पठनीय है। अदितिः द्यौः अदितिः अन्तरिक्षं अदितिः माता सः पिता सः पुत्रः अदितिः विश्वेदेवाः अदितिः पंचजनाः अदितिः जातम जनित्वम-द्युलोक अदिति है, अंतरिक्ष भी अदिति है, माता-पिता-पुत्र सब अदिति हैं, सारे देव अदिति हैं, जो पंचजन सप्तसिंधु में निवास करते हैं, वह सब अदिति हैं। जो कुछ उत्पन्न हुआ है और जो कुछ आगे उत्पन्न होगा, वह सब अदिति है। (ऋग्वेद 1.89.10) यूनानी देवतंत्र में अदिति के समान गूढ़ दार्शनिक अर्थ रखने वाली कोई देवी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाहित होना सम्मानीय था। स्मृतियों में दीर्घकाल तक अविवाहित बने रहने की आलोचना की गई है। विवाह नाम की संस्था का विकास धीरे-धीरे हुआ है। ऋग्वेद के रचनाकाल तक विवाह संस्था का समुचित विकास हो रहा था। स्त्री दासी नहीं है। ऋग्वेद के एक सुंदर मंत्र में नववधू को शुभकामनाएं देते हुए कहा गया है कि ‘यह नववधू दीर्घकाल तक जिए। दीर्घकाल तक काम करे। ससुर और सभी परिजनों पर शासन करे।’ यह भारतीय संस्कृति का प्राचीन तत्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में नारी की स्थिति सभी कालों में सम्माननीय रही है। पूर्वजों ने स्त्री को समाज का संरक्षक माना है। वैदिक काल में महिलाएं मंत्रदृष्टा ऋषि भी थीं। बृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार राजा जनक ने विद्वानों की सभा बुलाई थी। अनेक विद्वान इस गोष्ठी में सम्मिलित थे। विद्वानों की सभा में गार्गी ने याज्ञवल्क्य से सीधे सवाल पूछे थे। पूछा था, ‘यह संपूर्ण अस्तित्व किस तत्व पर टिका हुआ है?’, ‘सृष्टि किस आधार पर खड़ी है।’ याज्ञवल्क्य ने उत्तर दिया, ‘जल पर।’ गार्गी ने उत्तर के बाद पूछा, ‘जल किसमें आधारित हैं?’ फिर पूछा गया, ‘इस अस्तित्व को कौन देवता आधार देते हैं?’ गार्गी ने पूछा, ‘इस विराट अस्तित्व का आधार क्या है?’ याज्ञवल्क्य ने उत्तर दिया ब्रह्म ही सबको धारण करता है। ब्रह्म ही सर्वोच्च हैं। गार्गी ने अगला प्रश्न पूछा, ‘ब्रह्म किस पर आधारित हैं। याज्ञवल्क्य ने कहा, ‘ब्रह्म सर्वोच्च हैं। ब्रह्म ही भिन्न-भिन्न रूपों में प्रकट होते हैं। ब्रह्म का कारण ब्रह्म हैं। ब्रह्म असीम हैं। अनंत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गार्गी की प्रतिभा अद्भुत थी। राम-सीता की जोड़ी में सीता और राम दोनों की विशिष्टता देखी जाती है। कोई बड़ा नहीं। कोई छोटा नहीं। सीता जैसा चरित्र दुनिया के किसी भी देश में नहीं मिलता। शिव-पार्वती में पार्वती प्रथमा हैं और वह सभी अवसरों पर शंकर जी से विभिन्न विषयों पर गहन प्रश्न पूछा करती हैं। कैकई और दशरथ के कथानक में कैकई विचारणीय हैं। भारतीय परंपरा व साहित्य में सर्वत्र स्त्री सम्मान की गूंज है। यत्र नारी अस्तु पूजते रमंते ततदेवता- जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता रहते हैं। नारी माता हैं। अनेक प्रतीकों में स्त्री को मां कहा गया है। माता से बढ़कर दूसरा कोई प्रतीक नहीं है। यहां भारत को भी भारत माता कहा गया है। अथर्ववेद के भूमि सूक्त में पृथ्वी को मां बताया गया है। अधिकांश नदियों को भी हम माता ही कहते हैं। वैदिक काल में यज्ञ की अतिरिक्त प्रतिष्ठा रही है। यज्ञ विधान के अनुसार पूजा में पत्नी की उपस्थिति अनिवार्य है। अथर्ववेद के एक सुंदर मंत्र में ऋषि पत्नी से कहते हैं, ‘तुम ऋक हो। मैं साम (गान) हूं। मैं अंतरिक्ष हूं। तुम पृथ्वी हो।’</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया की प्रत्येक सभ्यता में देवतंत्र है। देवता हैं, देवियां हैं। सामाजिक विकास के क्रम में मिस्र ने प्रकृति की शक्तियों को देवता जाना और माना था। जिस समाज में देवियां होंगी उस समाज में स्त्रियों का सम्मान होगा। देवतंत्र मनुष्य के सपनों का ही विस्तार है। देवियों का आदर स्त्रियों का आदर है, इसी तरह स्त्रियों का आदर देवियों का आदर है। भारत में वैदिक काल का देवतंत्र ध्यान देने योग्य है। भारत में अनेक देवियां हैं। ऋग्वेद में वाणी की अराधना की गई है। देवियों की उपासना करने वाले समाज में स्त्री सम्मान होगा ही। इसी तरह का एक शब्द है रोदसी। रोदसी में माता पृथ्वी और पिता आकाश को संयुक्त रूप में याद किया गया है। (ऋग्वेद 2.11.15) चाहे सोम रस की बात हो या अन्य सभी अनुशासनों में। माता-पिता की जोड़ी में मां प्रथमा हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वैदिक काल में अनेक स्त्रियां वेद मंत्रों की रचयिता या दृष्टा ऋषि भी रही हैं। इनमें लोमसा, लोपामुद्रा, यमी, श्रद्धा, ब्रह्मवादिनी जुहू, सूर्या, इंद्राणी, कच्छीवान की पुत्री घोषा आदि स्त्रियों की प्रतिष्ठा किसी भी विद्वान से कम नहीं थी। पूर्वजों ने मातृ शक्ति को पुरुष जैसा सम्मान दिया है। ऋग्वेद के एक सूक्त में पौलोमी सची द्वारा व्यक्त उद्गार देखने योग्य हैं। वे कहती हैं, ‘मैं ज्ञानवती हूं। मैं मूर्धन्य हूं। मैं तेजस्वी वक्ता हूं। मैं शत्रुओं का विनाश करती हूं। पति मेरे अनुकूल व्यवहार करते हैं। ऐतरेय ब्राह्मण में गंधर्व ग्रहीता कुमारी का विवरण है। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार मैत्रेयी ऋषि याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं। उनकी रुचि ब्रह्म विद्या में थी। याज्ञवल्क्य ने सन्यासी होने का निर्णय लिया। दोनों पत्नियों को बुलाया और बताया कि हमारी संपदा दोनों पत्नियां मिलकर बांट लो। इस पर मैत्रेयी ने कहा, ‘मुझे धन संपदा नहीं चाहिए। आपको जो ज्ञान प्राप्त हो वही मुझे दीजिए।’ कृतार्षिनी ने मीमांसा दर्शन पर ग्रंथ लिखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">वैदिक काल में शिक्षा की उत्तम व्यवस्था थी। इनमें तमाम महिलाएं आचार्य थीं। बच्चों को पढ़ाती थीं। पाणिनी की व्याकरण के अनुसार उपाध्याय की पत्नी को उपाध्यायानी कहा गया है और जो स्त्री स्वयं अध्ययन का कार्य करे उसके लिए उपाध्याय शब्द ठीक होगा। वैदिक काल में संपत्ति पर स्त्रियों का भी अधिकार था। महिलाएं घर की प्रधान थीं।  </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Featured</category>
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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 06:00:04 +0530</pubDate>
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                <title>धनीराम पैंथर मतलब लावारिस शवों के वारिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मैकरावर्टगंज निवासी धनीराम पैंथर के जीवन का एकमात्र लक्ष्य है समाजसेवा। गरीब बेटियों के हाथ पीले कराना, लावारिस शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराने को ही वे अपना धर्म मानते हैं। यही वजह है कि लोग उन्हें लावारिस शवों के वारिस के रूप में जानते हैं। उनके इस पुनीत कार्य में 10 से अधिक युवा भी पूरी शिद्दत से लगे हुए हैं। जैसे ही पोस्टमार्टम में कोई लावारिस शव आता है तो उनके फोन की घंटी बज उठती है। वे भी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं, अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी करने में।  - बृजेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार</p>
<p style="text-align:justify;">मृत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/553167/dhaniram-panther-means-the-heir-of-unclaimed-bodies"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(21)13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मैकरावर्टगंज निवासी धनीराम पैंथर के जीवन का एकमात्र लक्ष्य है समाजसेवा। गरीब बेटियों के हाथ पीले कराना, लावारिस शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराने को ही वे अपना धर्म मानते हैं। यही वजह है कि लोग उन्हें लावारिस शवों के वारिस के रूप में जानते हैं। उनके इस पुनीत कार्य में 10 से अधिक युवा भी पूरी शिद्दत से लगे हुए हैं। जैसे ही पोस्टमार्टम में कोई लावारिस शव आता है तो उनके फोन की घंटी बज उठती है। वे भी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं, अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी करने में।  - बृजेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार</p>
<p style="text-align:justify;">मृत व्यक्ति का धर्म पता चलने पर वे उसी की रीतियों के अनुसार अंतिम संस्कार भी कराते हैं ताकि किसी तरह का विवाद न हो। समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने उनका नाम पद्मश्री अवार्ड 2026 के लिए केंद्र सरकार को भेजा है। उन्हें विभिन्न संस्थाओं से अब तक ढेरों पुरस्कार मिल चुके हैं। बात 2009 की है। धनीराम पैंथर गंगा पुल पार कर अक्सर शुक्लागंज जाया करते थे।  उन्होंने कई बार देखा कि पुलिसकर्मी लावारिस शवों को पुल से गंगा में फेंक रहे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">कई बार शव पुल की रेलिंग में ही लटक गए। आने-जाने वाले भी बदबू से परेशान हुए। इससे धनीराम पैंथर का मन द्रवित हुआ और उन्होंने यह निर्णय लिया कि किसी भी शव को वे लावारिस नहीं रहने देंगे। इसके बाद उन्होंने सीएमओ, पुलिस अधिकारियों और जिलाधिकारी से मुलाकत की। शवों के अंतिम संस्कार का जिम्मा उठाने का निर्णय लिया। जब उन्होंने अभियान शुरू किया तो उन्हें लोगों के ताने भी सुनने पड़े, लेकिन पैंथर ने इसकी परवाह नहीं की। क्योंकि उन्होंने मन में इंसानियत और मानवता को बचाने का जिम्मा उठाने का संकल्प जो ले लिया था। अब तक वे तीन हजार से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। शवों के संस्कार के लिए उन्होंने 10 लोगों की टीम बनाई है। </p>
<p style="text-align:justify;">शव को ले जाने के लिए संस्था के पास लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया और इस पैसे से ही उन्होंने तीन शव वाहन खरीदे। वह शवों को जलाने के लिए लकड़ी, कफन आदि भी लोगों के सहयोग से ही लाते हैं। अब तो पैंथर ने मरणोपरांत देहदान का संकल्प भी ले लिया। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि उनकी मृत देह पर छात्र रिचर्स कर सकें और डॉक्टर बनकर लोगों का जीवन बचा सकें। उनकी प्रेरणा से सौ से अधिक लोगों ने देहदान का संकल्प लिया। कोरोना काल में तो उन्होंने एक दिन 109 शवों का अंतिम संस्कार किया था। </p>
<p style="text-align:justify;">बेहद  साधारण परिवार में जन्में धनीराम पैंथर 19 साल की उम्र में ही समाज सेवा में जुड़ गए थे। धनीराम पैंथर सर्वधर्म सभा के राष्ट्रीय सचिव भी हैं, जो समाज में हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए पैगाम देने का काम भी करते हैं। वह कहते हैं कि अंतिम श्वास तक लावारिस शवों के वारिस के रूप में काम करेंगे। वे गरीब बेटियों का विवाह भी कराते हैं। इसके लिए सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन भी करते हैं। इस कार्य में उन्होंने कई उद्यमी, कारोबारी भी मदद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 14:18:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नानी और आम का पेड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नानी शब्द सुनते ही मन में प्यार व अपनेपन की याद आ जाती है। हर किसी नानी को ऐसे ही देखा जाता है, जिसकी प्यार और ममता की छांव में हम बड़े हुए। नानी का घर यानी प्यार और परंपराओं की यादें। नानी की रसोई से आने वाली मसालों की सुखद महक, मिठाइयों की मिठास, चटपटे अचार और तरह-तरह के पापड़। उनकी हंसी की आवाज, उनकी ढेर सारी कहानियां, प्यार से जिद्द करके थोड़ा और  खिलाना।</p>
<p style="text-align:justify;">नानी को हर कोई उनकी बाहरी सुंदरता से नहीं देखता, बल्कि  हम सभी अपनी-अपनी नानी को प्यार व ममता की मूर्ति के रूप में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/553165/nani-and-the-mango-tree"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(20)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नानी शब्द सुनते ही मन में प्यार व अपनेपन की याद आ जाती है। हर किसी नानी को ऐसे ही देखा जाता है, जिसकी प्यार और ममता की छांव में हम बड़े हुए। नानी का घर यानी प्यार और परंपराओं की यादें। नानी की रसोई से आने वाली मसालों की सुखद महक, मिठाइयों की मिठास, चटपटे अचार और तरह-तरह के पापड़। उनकी हंसी की आवाज, उनकी ढेर सारी कहानियां, प्यार से जिद्द करके थोड़ा और  खिलाना।</p>
<p style="text-align:justify;">नानी को हर कोई उनकी बाहरी सुंदरता से नहीं देखता, बल्कि  हम सभी अपनी-अपनी नानी को प्यार व ममता की मूर्ति के रूप में ही देखते हैं। उनके गुणों व उनके स्नेह और दुलार के लिए चाहते हैं। मेरी नानी बहुत ही प्यारी और गुणों की खान थीं। अभी कुछ समय पहले ही वो चल बसीं। सब कुछ कितना सूनाकर गई। अब नानी का घर वो घर न रहा। सब ओर उदासी व खालीपन था। रह गईं तो बस उनकी यादें। मैं नानी के बगीचे में खड़ी थीं। तभी मेरी नजर उनके रोपे हुए आम के पेड़ पर पड़ी। यादों का पिटारा सा खुल गया। पेड़ फलों से लदा था। नानी ने कैसे बताया था कि उन्होंने खुद से आम की एक गुठली बोई थी फिर कैसे उसमें कल्ला फूट गया था, तो उनकी खुशी का ठिकाना न था कैसे बच्चों की तरह खुशी से चहक उठी थीं। वो निश्छल और सरल। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने फिर उस पूरी तन्मयता से नन्हें पौधे की देखभाल की, बिल्कुल जैसे की एक मां अपने बच्चे की करती है। उनकी मेहनत रंग लाई और देखते ही देखते वो नन्हा पौधा बड़ा होने लगा। नानी उसको समय पर खाद-पानी देती। फिर कुछ ही वर्षों में वो एक पेड़ बन गया। फिर एक गर्मी उस पर बुआर आ गई। अब तो नानी बेसब्री के साथ आम के फलों के पनपने का इंतजार करने लगीं। उसमें नन्हीं-नन्हीं अमिया आते ही नानी ने हमको फोन करके बताया। उनकी आवाज में कितनी उमंग थी। कैसे खुशी से चहक रही थीं। उनके लिए तो जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि सी थी। कुछ ही दिनों में नानी का आम का पेड़ फलों से लद गया। </p>
<p style="text-align:justify;">नानी ने हमें पेटी भर कर अमिया भिजवाई, नन्हीं- नन्हीं हरी-हरी ताजी अमिया देखकर मन खुशी से खिलखिला उठा, उन छोटी-छोटी अमियों को हाथ में लेना कितना सुखद एहसास था। यह अमिया बाजार की खरीदी अमियों से कुछ अलग थीं। इनमें नानी का अपनापन छिपा था। मम्मी ने उन अमियों का आचार डाला, कुछ का मीठा मुरब्बा और बची हुई अमियों का वो रोज आम पन्ना बनाती थी, ज्येष्ठ की गर्मी में मानो अमृतपान।</p>
<p style="text-align:justify;">नानी ने अपने सभी रिश्तेदारों व आस-पड़ोसियों को खूब अमिया बांटी। मुझे नानी की यह सबको अपना बना लेनी की आदत खास पसंद थी। फिर कुछ समय बाद पेड़ के आम पक गए। इतने मीठे और रसीले आम मैने पहले कभी न खाए थे। उनकी मिठास कुछ और ही थी। नानी अपने आम के पेड़ की खूब निगरानी करतीं। मोहल्ले के शैतान बच्चे जो पत्थर मार-मार कर उनके आम तोड़ना चाहते नानी उनकी खूब डांट लगातीं।</p>
<p style="text-align:justify;">नानी ने इसके माध्यम से हमें एक दार्शनिक शिक्षा भी दे डाली। वह बोली “देखो एक गुठली के त्याग से इतना बड़ा वृक्ष बना और इतने सारे आम आए। इस वृक्ष ने सबको अपने आम खिलाए। उसी प्रकार हम भी अपने प्रेम व त्याग से सबका भला करें और प्रेम बांटे।”</p>
<p style="text-align:justify;">अफसोस आज नानी नहीं हैं। रह गईं तो बस उनकी यादें, शिक्षाएं और यह आम का पेड़। आम के पेड़ को देखकर नानीं की यादे और भी प्रखर हो जाती हैं। नानी तो नहीं हैं, पर पेड़ के रूप में लगता है मानो नानी अब भी हमारे बीच हैं। अब तो यह “आम का पेड़” आम उनकी ‘स्मृति प्रतीक’ है।लेखिका-श्रुति सुकुमार </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 14:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण, हजार स्तंभ मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">तेलंगाना के वरंगल के पास हनमकोंडा शहर में स्थित श्री रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर (हजार स्तंभ मंदिर) स्थापित है। हनमकोंडा पहाड़ी के आधार पर काकतीय शासन के दौरान बना यह मंदिर वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे वेई स्तंबाला गुड़ी (हजार स्तंभ मंदिर) के रूप में जाना जाता है। संभवतः काकतीय राजा रुद्र देव (1162-63 सीई) द्वारा बनाई गई सबसे प्रारंभिक संरचना है। न केवल भक्तों के बल्कि हर इतिहास उत्साही और वास्तुकला प्रेमियों के लिए शानदार जगह है। यह मंदिर दर्शाता है कि काकतीय लोग एक उत्कृष्ट वास्तुकार थे। </p>
<p style="text-align:justify;">हजार स्तंभ मंदिर तीन देवताओं को समर्पित है। यहां  प्रत्येक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/553164/a-masterpiece-of-architecture--the-thousand-pillar-temple"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(19)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तेलंगाना के वरंगल के पास हनमकोंडा शहर में स्थित श्री रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर (हजार स्तंभ मंदिर) स्थापित है। हनमकोंडा पहाड़ी के आधार पर काकतीय शासन के दौरान बना यह मंदिर वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे वेई स्तंबाला गुड़ी (हजार स्तंभ मंदिर) के रूप में जाना जाता है। संभवतः काकतीय राजा रुद्र देव (1162-63 सीई) द्वारा बनाई गई सबसे प्रारंभिक संरचना है। न केवल भक्तों के बल्कि हर इतिहास उत्साही और वास्तुकला प्रेमियों के लिए शानदार जगह है। यह मंदिर दर्शाता है कि काकतीय लोग एक उत्कृष्ट वास्तुकार थे। </p>
<p style="text-align:justify;">हजार स्तंभ मंदिर तीन देवताओं को समर्पित है। यहां  प्रत्येक पीठासीन देवता के लिए तीन अलग-अलग मंदिर हैं,। हजार स्तंभ मंदिर के चौथी तरफ एक मंच पर भगवान शिव के पवित्र बैल नंदी की एक सुंदर नक्काशीदार मूर्ति है। एक ही पत्थर से उकेरी गई नंदी की मूर्ति बीते युगों की कलात्मक सुंदरता की झलक प्रस्तुत करती है। मूर्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर है,  जो नंदी की अन्य मूर्तियों से अलग है,  जिनका मुख आमतौर पर पश्चिम की ओर होता है। इस मंदिर की यात्रा कर मैं खुद को धन्य मानता हूं और चाहूंगा कि यहां हर कोई एक बार जरूर आए।-अध्यात्म त्रिवेदी, एडवोकेट</p>
<h5 style="text-align:justify;">बेसर शैली में स्थापित है मंदिर</h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-09/untitled-design-(18)10.jpg" alt="Untitled design (18)" width="1920" height="1080"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर अर्ध-सपाट छत के साथ एक तारे के आकार के जगती (चबूतरे) पर स्थित है। स्तंभों का एक शानदार हॉल, जिसे कल्याण मंडप के नाम से जाना जाता है। मंदिर के दक्षिण में संरेखण में स्थित है। स्तंभ शिलालेख के अनुसार रुद्र देव-प्रथम (1158-1195 सीई) के समय में पूरा होने का संकेत मिलता है। कहा जाता है कि इसके निर्माण में लगभग 72 साल लगे थे। यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और सूर्य को समर्पित है। श्री रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर का निर्माण चालुक्य मंदिरों की स्थापत्य शैली अर्थात बेसर शैली में किया गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">राजा रुद्रदेव के नाम पर रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर</h5>
<p style="text-align:justify;">कहा जाता है कि इसका नाम राजा रुद्रदेव के नाम पर रखा गया है और इसलिए इसे श्री रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही प्रवेश द्वार के दोनों ओर हाथियों की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियां आपका स्वागत करती हैं। मंदिर की छत और बाहरी दीवारों पर की गई नक्काशी भी उतनी ही आकर्षक है। समय के साथ, 132 स्तंभों वाले कल्याण मंडप की संरचनात्मक स्थिरता विभिन्न कारकों के कारण कमजोर हो गई। तुगलक वंश के आक्रमण के दौरान 1000 स्तंभ मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा। इस मंदिर को मुगल साम्राज्य ने अपने आक्रमण के दौरान नष्ट कर दिया था। बाद में इसे भारतीय पुरातत्व सर्वे द्वारा 2004 में पुनर्निर्मित किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;">1000 नक्काशीदार खंभे</h5>
<p style="text-align:justify;">जैसा कि नाम से ही पता चलता है, इस मंदिर में 1000 बेहतरीन नक्काशीदार खंभे हैं, जो मंदिर की पूरी दीवार में दृढ़ता के साथ लगाए गए हैं। इसकी चट्टान से बनी हाथी की मूर्ति, नंदी (भगवान शिव का दिव्य वाहन) की विशाल मूर्ति, जटिल नक्काशी आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। हजार स्तंभ मंदिर की आध्यात्मिक आभा इस अनुभव को और भी समृद्ध बनाती है। इसका एक दिलचस्प पहलू यह है कि यहां तीसरे देवता भगवान ब्रह्मा नहीं हैं, जिन्हें त्रिदेवों (भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा) में से एक माना जाता है। यहां भगवान सूर्य को तीसरे देवता के रूप में पूजा जाता है। त्रिकुटालयम कहे जाने वाले इस मंदिर के तीन मुख्य देवता भगवान शिव, विष्णु और सूर्य हैं। हजार स्तंभ मंदिर की पूरी संरचना बेसर शैली के मुख्य लक्षण तारे के आकार में है। जटिल नक्काशीदार खंभे मंदिर की संरचना का भाग हैं, जबकि मनोरम मूर्तियां दीवारों में उत्कृष्टता से जोड़ी गई हैं। यहां बगीचे में विभिन्न छोटे-छोटे शिव लिंग भी देखे जा सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">मंदिर जाने के लिए रास्ता</h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-09/untitled-design-(17)9.jpg" alt="Untitled design (17)" width="1920" height="1080"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर जाने के लिए आप हैदराबाद हवाई अड्डे से वरंगल तक ट्रेन या कार से यात्रा कर सकते हैं। यात्रा का समय परिवहन के साधन के आधार पर लगभग 2.5 से 5 घंटे तक हो सकता है। यह स्थल वरंगल और हनमकोंडा शहर के बीच वरंगल रेलवे स्टेशन से लगभग छह किमी दूर है। स्टेशन से, पर्यटक ऑटो रिक्शा, टैक्सी अथवा नियमित रूप से चलने वाली सिटी बसों से यात्रा कर सकते हैं। निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा हैदराबाद का राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 160 किमी दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 14:09:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>24 वर्ष की महिला के गर्भाशय से निकाले, 41 फाइब्रॉइड, अब बन सकती मां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अपने मेडिकल करियर में यूं तो कई ऑपरेशन किए, जिनमें से कई जटिल ऑपरेशन भी शामिल हैं, लेकिन कानपुर की एक 24 वर्षीय महिला का जब ऑपरेशन किया तो वह क्षण कभी न भूलने वाला है। क्योंकि बांझपन की समस्या से जूझ रही महिला के गर्भाशय में 10-20 नहीं, बल्कि छोटे व बड़े मिलाकर 41 फाइब्रॉइड एक-एक कर निकाले, जिसमें सबसे बड़ा 6 गुणा 5 सेंटीमीटर का था। यह ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इसमे न सिर्फ महिला की जान बचाई गई, बल्कि वह भविष्य में मां बन सके, इसलिए काफी कोशिश करनी पड़ी। मेहनत के बाद उसकी बच्चेदानी भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/553163/41-fibroids-removed-from-the-uterus-of-a-24-year-old-woman--now-she-can-become-a-mother"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(16)11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अपने मेडिकल करियर में यूं तो कई ऑपरेशन किए, जिनमें से कई जटिल ऑपरेशन भी शामिल हैं, लेकिन कानपुर की एक 24 वर्षीय महिला का जब ऑपरेशन किया तो वह क्षण कभी न भूलने वाला है। क्योंकि बांझपन की समस्या से जूझ रही महिला के गर्भाशय में 10-20 नहीं, बल्कि छोटे व बड़े मिलाकर 41 फाइब्रॉइड एक-एक कर निकाले, जिसमें सबसे बड़ा 6 गुणा 5 सेंटीमीटर का था। यह ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इसमे न सिर्फ महिला की जान बचाई गई, बल्कि वह भविष्य में मां बन सके, इसलिए काफी कोशिश करनी पड़ी। मेहनत के बाद उसकी बच्चेदानी भी सुरक्षित की, जिससे वह भविष्य में अब मां बनने का सुख भी प्राप्त कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर के यशोदा नगर निवासी 24 वर्षीय महिला मल्टीपल फाइब्रॉइड की समस्या से करीब एक साल से पीड़ित थी, जिस कारण महिला के पेट में तेज दर्द और भारी मासिक रक्तस्राव होने की समस्या थी। इस वजह से महिला के शरीर में खून की काफी कमी होने के साथ ही उसे बांझपन की समस्या से भी जूझना पड़ रहा था। बीमारी के कारण महिला की दिनचर्या और जीवनशैली भी प्रभावित हो गई थी। परिजनों ने उसका कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। एक डॉक्टर ने तो बच्चेदानी निकालने तक की भी बात कह दी थी। ऐसे में महिला व परिजन काफी चिंतित रहने लगे थे। </p>
<p style="text-align:justify;">तभी परिजन आखिरी उम्मीद से उसे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध हैलट अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति विभाग लेकर आए। यहां पर ओपीडी में देखने के साथ ही उसकी पूरी केस हिस्ट्री ली। सबसे पहले शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन का इंजेक्शन लगाया। इसके बाद कुछ जांचे कराई। हीमोग्लोबिन की मात्रा शरीर में सही होने के बाद डॉ.रश्मि यादव, डॉ.दीप्ति, डॉ.अंजलि समेत टीम के साथ मिलकर महिला को फाइब्रॉइड के लिए मायोमेक्टमी किया गया। करीब डेढ़ घंटे चले ऑपरेशन के दौरान छोटे व बड़े 41 फाइब्रॉइड निकाले, जिसमे सबसे बड़ा 6 गुणा 5 सेंटीमीटर का था। साथ ही यह भी ख्याल रखा कि महिला दोबारा इससे पीड़ित न हो सके। </p>
<p style="text-align:justify;">यह ऑपरेशन काफी उच्च जोखिम का था। ऑपरेशन के दौरान ज्यादा रक्तस्त्राव होने से हाइस्टेरेक्टमी का भी खतरा था। सुविधापूर्वक व कठिनाइयों को पार करते हुए महिला की जान बचाई गई है। साथ ही उसकी बच्चेदानी भी नहीं निकाली पड़ी। क्योंकि मायोमेक्टोमी गर्भाशय फाइब्रॉइड को हटाने के लिए की जाने वाली सर्जरी है। गर्भाशय फाइब्रॉइड ऊतक की गैर कैंसरयुक्त वृद्धि है, जो गर्भाशय में विकसित होती है। मायोमेक्टोमी गर्भाशय को बरकरार रखती है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए प्रक्रिया के बाद भी महिला गर्भवती हो सकती है। जब महिला की केस हिस्ट्री को जाना और जरूरी जांचें कराई तो सोच में पड़ गई थी। क्योंकि एक दो नहीं बल्कि 41 फाइब्रॉइड होना चिंता की बात थी। ऑपरेशन काफी जटिल था। इस केस ने काफी उलझन में डाल दिया था, क्योंकि मेरे लिए न सिर्फ मरीज की जान बचाना जरूरी था, बल्कि वह भविष्य में मातृत्व सुख की प्राप्ति कर सके यह भी आवश्यक था। इसलिए काफी चिंतन मनन और टीम में शामिल चिकित्सक डॉ.रश्मि यादव, डॉ.दीप्ति, डॉ.अंजलि के साथ सलाह मशविरा भी किया। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया। अंतत: हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति में कामयाब हुए। मरीज का जीवन भी बच गया और उसके गर्भाशय को भी बचाने में हमें कामयाबी मिली। यह हमारी टीम की बहुत ही बड़ी उपलब्धि रही। ऑपरेशन सफल होने के बाद तो हर किसी के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी, क्योंकि यह कोई छोटी- मोटी सफलता नहीं थी। ऐसे मामले बहुत ही कभी- कभी आते हैं जो हमें ऑपरेशन से पहले चिंता में डाल देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Health Care</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 13:59:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सफारी, सन्नाटा और सरप्राइज...जंगल की गोद में बाघ और हाथियों की धरती पर अद्भुत सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिमी घाट की सुरम्य पहाड़ियों में बसा बांदीपुर दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित  प्रकृति प्रेमियों और रोमांच चाहने वालों के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल है। हरे-भरे जंगलों, कल-कल करती नदियों और नीरवता बढ़ाते प्राकृतिक दृश्यों से घिरे इस सुरम्य व सुंदर रमणीक स्थल पर पहुंचकर आप आज की भागदौड़ भरी जिंदगी की कशमकश कुछ देर के लिए भूलकर यहीं के हो जाएंगे। यह देश का बाघ आरक्षित राष्ट्रीय उद्यान है। यहां बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, तेंदुआ और गौर जैसे जीवों तथा तमाम दुर्लभ पक्षियों के साथ अजगर, किंग कोबरा और मगरमच्छ पाए जाते हैं।     </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बांदीपुर पहुंचने के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/552402/safari--silence-and-surprise----an-amazing-journey-in-the-lap-of-the-jungle-in-the-land-of-tigers-and-elephants"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-09/untitled-design-(16)5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिमी घाट की सुरम्य पहाड़ियों में बसा बांदीपुर दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित  प्रकृति प्रेमियों और रोमांच चाहने वालों के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल है। हरे-भरे जंगलों, कल-कल करती नदियों और नीरवता बढ़ाते प्राकृतिक दृश्यों से घिरे इस सुरम्य व सुंदर रमणीक स्थल पर पहुंचकर आप आज की भागदौड़ भरी जिंदगी की कशमकश कुछ देर के लिए भूलकर यहीं के हो जाएंगे। यह देश का बाघ आरक्षित राष्ट्रीय उद्यान है। यहां बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, तेंदुआ और गौर जैसे जीवों तथा तमाम दुर्लभ पक्षियों के साथ अजगर, किंग कोबरा और मगरमच्छ पाए जाते हैं।     </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बांदीपुर पहुंचने के लिए हमने अपनी यात्रा कार द्वारा मैसूर से शुरू की। करीब 82 किलोमीटर की यात्रा दो घंटे में पूरी करके हम बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान के गेट थे। बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान को देश के सबसे सुंदर और बेहतर प्रबंधित राष्ट्रीय उद्यानों में गिना जाता है। कर्नाटक में मैसूर-ऊटी राजमार्ग पर विशाल पश्चिमी घाट के सुरम्य परिवेश में स्थित यह नीलगिरि रिजर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके उत्तर-पश्चिम में कर्नाटक का राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान (नागरहोल), दक्षिण में तमिलनाडु का मुदुमलाई वन्यजीव अभयारण्य और दक्षिण-पश्चिम में केरल का वायनाड वन्यजीव अभयारण्य है। बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 872.24 वर्ग किमी है। यह आंशिक रूप से चामराजनगर जिले के गुंडलुपेट तालुका और आंशिक रूप से मैसूर जिले के एचडीकोटे और नंजनगुड तालुका में आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;">कभी यह राजाओं का था शिकारगाह बाघों व हाथियों का प्रजनन स्थल</h5>
<div style="text-align:justify;">कभी यह उद्यान राजा-महाराजाओं का शिकारगाह था। बाद में आसपास के आरक्षित वन क्षेत्रों को इसमें शामिल कर दिया गया और इसका नाम बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान रखा गया। यह राष्ट्रीय उद्यान बाघों और हाथियों का प्रजनन स्थल था, इसलिए इन्हें बचाने के लिए इस अभयारण्य को देश भर के 30 अभयारण्यों में चिह्नित किया गया। बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान बाघ, हाथी, भालू और भारतीय गौर जैसे अनोखे और तमाम लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों का घर है। यह प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है। नीलगिरी की तलहटी में बसे बांदीपुर का बाघों से पुराना नाता है। यह लुप्तप्राय एशियाई जंगली हाथियों का अंतिम आश्रय स्थल है। इस राष्ट्रीय उद्यान में सुस्त भालू, गौर, भारतीय रॉक अजगर, सियार, मगर और चार सींग वाले मृग जैसी कई अन्य लुप्तप्राय प्रजातियां देखने को मिलती हैं। यहां सांभर, चूहा हिरण, चीतल, सुस्त भालू और उड़ने वाली दुर्लभ छिपकली भी पाई जाती है। पक्षियों की 200 से ज्यादा प्रजातियां और वनस्पतियों की विविधता यहां का आकर्षण और बढ़ाती है। बांदीपुर में सागौन, शीशम, चंदन, भारतीय लॉरेल और कीनो के पेड़, विशाल गुच्छेदार बांस सहित कई प्रकार की इमारती लकड़ियों के पेड़ भी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;">प्रकृति की अद्भुत दुनिया में वन्य जीवों के घर देखने को सफारी</h5>
<div style="text-align:justify;">उद्यान के द्वार से भीतर प्रवेश करते ही हमें घने जंगलों, लुढ़कती पहाड़ियों और विशाल घास के मैदानों के साथ एक अद्भुत दुनिया के दर्शन हुए। पक्षियों की चहचहाहट, बंदरों की खों-खों  और पत्तों की सरसराहट से प्राकृतिक वन्य जीवन जीवंत हो उठा। जंगली फूलों की खुशबू हवा के साथ बहकर स्वर्ग जैसा अहसास दिला रही थी। बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान वनस्पतियों और जीवों की एक समृद्ध विविधता का घर है, जिसमें बाघ, हाथी, तेंदुए, हिरण, जंगली सूअर और पक्षियों की कई प्रजातियां शामिल हैं। यहां के जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए उद्यान में सफारी की सुविधा उपलब्ध है। हमने वन विभाग द्वारा संचालित मिनी-बस सफारी की यात्रा रेंज कार्यालय से शुरू की। यहां से बस सफारी सुबह 6.15 से 9 बजे और दोपहर 2.15 से शाम 5 बजे के बीच चलती है। शुल्क 350 रुपये प्रति व्यक्ति है। जीप सफारी का किराया तीन हजार रुपये प्रति व्यक्ति है। जीप सफारी सुबह 6.15 से 8 बजे, सुबह 8 से 9.45 बजे, दोपहर 2.30 से 4.30 बजे और शाम 4.30 से 6.30 बजे के बीच संचालित होती है। पूर्व में चलने वाली हाथी सफारी अब यहां बंद की जा चुकी है। जीप और मिनी बस सफारी का समय भी मौसम और सुरक्षा कारणों से बदलता रहता है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;">ट्रैकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, रिवर  राफ्टिंग और जिप-लाइनिंग</h5>
<div style="text-align:justify;">बांदीपुर में ट्रैकिंग की सुविधा खासतौर पर युवाओं के लिए साहसिक गतिविधियां प्रदान करती है। इस रोमांचक यात्रा में आप नीलगिरी के ऊबड़-खाबड़ इलाकों में ट्रेकिंग कर सकते हैं या रॉक क्लाइम्बिंग, रिवर राफ्टिंग और जिप-लाइनिंग जैसी साहसिक गतिविधियों का भी आनंद उठा सकते हैं। </div>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;">आदिवासी गांवों की परंपराएं और रीति-रिवाजों को नजदीक से देखें</h5>
<div style="text-align:justify;">प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। यह उद्यान कई आदिवासी गांवों से घिरा हुआ है। हर एक गांव की अपनी अनूठी परंपराएं और रीति-रिवाज हैं। आपको इन गांवों में घूमते समय ऐसा लगेगा जैसे एक या दो शताब्दी पीछे चले गए हैं। आदिवासों गांवों का भ्रमण समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव दिलाता है। यहां लोगों की जीवन शैली बहुत करीब से देखी जा सकती है। हालांकि समय की कमी से हम इस अनूठे अवसर को बहुत थोड़े समय के लिए कार से ही देख पाए। लेकिन बांदीपुर घूमने के दौरान आसपास के आदिवासी गांवों में लोगों के रीति-रिवाजों और परंपराओं के बारे में जरूर काफी जानकारी हासिल की। -राजपुरुष</div>
<div style="text-align:justify;">
<h5> </h5>
<h5>अविश्वसनीय! सावधान! यहां मिलते अलग-अलग रंग की आंखों वाले तेंदुए</h5>
<p>इस तेंदुए की आंखें आपको सम्मोहित कर देंगी। बांदीपुर टाइगर रिजर्व में भारत में अपनी तरह के पहले दो अलग-अलग रंग की आंखों वाले तेंदुए भी हैं। एक आंख नीली-हरी तो दूसरी भूरी। यह एक जेनेटिक विशेषता हेटेरोक्रोमिया है,   जिसके कारण तेंदुए की दोनों आंखों का रंग अलग-अलग होता है।</p>
<p> </p>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 09:20:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'दुनिया भारत के ज्ञान का सम्मान करती है', यूनेस्को द्वारा 'गीता और नाट्यशास्त्र' को सम्मान मिलने पर बोले गृहमंत्री अमित शाह </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार। </strong>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ में शामिल किए जाने की सराहना की तथा कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपने सांस्कृतिक ज्ञान को वैश्विक कल्याण के केंद्र में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। शाह ने यह भी कहा कि दुनिया भारत के ज्ञान का सम्मान करती है। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://c.ndtvimg.com/2025-04/hug0904_-amit-shah_625x300_18_April_25.jpg" alt="Latest and Breaking News on NDTV" /></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘गीता और नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में शामिल किए जाने के भव्य अवसर पर प्रत्येक भारतीय को बधाई।’</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534135/-the-world-respects-india-s-knowledge---said-home-minister-amit-shah-on--gita-and-natya-shastra--being-honoured-by-unesco"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(14)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार। </strong>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ में शामिल किए जाने की सराहना की तथा कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपने सांस्कृतिक ज्ञान को वैश्विक कल्याण के केंद्र में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। शाह ने यह भी कहा कि दुनिया भारत के ज्ञान का सम्मान करती है। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://c.ndtvimg.com/2025-04/hug0904_-amit-shah_625x300_18_April_25.jpg" alt="Latest and Breaking News on NDTV"></img></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘गीता और नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में शामिल किए जाने के भव्य अवसर पर प्रत्येक भारतीय को बधाई।’ गृह मंत्री ने कहा कि धर्मग्रंथ भारत के प्राचीन ज्ञान को दर्शाते हैं, जिन्होंने अनादि काल से मानवता को विश्व को बेहतर बनाने तथा जीवन को अधिक सुंदर बनाने का प्रकाश दिखाया है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने अपने सांस्कृतिक ज्ञान को वैश्विक कल्याण के केंद्र में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। यह इन प्रयासों को एक बड़ी मान्यता है।’’ भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां उन 74 नए दस्तावेजी धरोहर संग्रहों का हिस्सा हैं, जिन्हें यूनेस्को के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ में शामिल किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस रजिस्टर में मानवता की दस्तावेजी विरासत के रूप में पुस्तकें, पांडुलिपियां, मानचित्र, फोटोग्राफ, ध्वनि या वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। संबंधित उपलब्धि 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br /><strong>ये भी पढ़े : <a href="https://www.amritvichar.com/article/534091/good-friday-2025--what-is-good-friday--why-is-it-celebrated-today--know#gsc.tab=0">Good Friday 2025: क्या है गुड फ्राइडे, क्यों मनाया जाता है इसे आज, जानिए </a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>इतिहास</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 18:59:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UNESCO के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ में शामिल हुई भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां, विरासत दिवस पर भारत को मिली उपलब्धि  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार ।</strong> आज विश्व विरासत दिवस पर भारत की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां उन 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रहों का हिस्सा हैं जिन्हें यूनेस्को के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ यानि 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस ऐलान के साथ ही भारत की 14 अमूल्य कृतियां अब इस अंतरराष्ट्रीय सूची का हिस्सा बन चुकी हैं. यूनेस्को के अनुसार, 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों की वैज्ञानिक क्रांति, इतिहास में महिलाओं के योगदान और बहुपक्षवाद की प्रमुख</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534072/india-achieved-the-manuscripts-of-bhagavad-geeta-natyashastra-on-heritage"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(9)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार ।</strong> आज विश्व विरासत दिवस पर भारत की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां उन 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रहों का हिस्सा हैं जिन्हें यूनेस्को के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ यानि 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस ऐलान के साथ ही भारत की 14 अमूल्य कृतियां अब इस अंतरराष्ट्रीय सूची का हिस्सा बन चुकी हैं. यूनेस्को के अनुसार, 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों की वैज्ञानिक क्रांति, इतिहास में महिलाओं के योगदान और बहुपक्षवाद की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रविष्टियां रजिस्टर में शामिल की गईं। </p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाहिर की खुशी</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इसे ‘दुनिया भर में हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘गीता और नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में शामिल किया जाना हमारे शाश्वत ज्ञान और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से सभ्यता और चेतना को पोषित किया है। उनकी अंतर्दृष्टि दुनिया को प्रेरित करती रहती है।’ </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/narendramodi/status/1913094867074294034">https://twitter.com/narendramodi/status/1913094867074294034</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">नाट्यशास्त्र को कलाओं का एक मौलिक ग्रन्थ माना जाता है। यूनेस्को ने 17 अप्रैल को अपने विश्व स्मृति रजिस्टर में 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रह जोड़े, जिससे कुल अंकित संग्रहों की संख्या 570 हो गई है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी कहा कि यह भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि यह भारत की शाश्वत मेधा और कलात्मक प्रतिभा का सम्मान है। </p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/gssjodhpur/status/1913072671144690045">https://twitter.com/gssjodhpur/status/1913072671144690045</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;"><br /><strong>ये भी पढ़े : </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533873/nehru-manzil-sealed-in-lucknow--ed-took-action--know-what-congress-said#gsc.tab=0">लखनऊ में नेहरू मंजिल सील, ED ने की कार्रवाई, जानिये कांग्रेस ने क्या कहा...</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533832/maha-kumbh-of-sports-will-be-organized-in-lucknow--defense-minister-rajnath-singh-will-inaugurate-it-in-kd-singh-babu-stadium#gsc.tab=0">लखनऊ में आयोजित होगा खेलों का महाकुंभ, KD सिंह बाबू स्टेडियम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/534072/india-achieved-the-manuscripts-of-bhagavad-geeta-natyashastra-on-heritage</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/534072/india-achieved-the-manuscripts-of-bhagavad-geeta-natyashastra-on-heritage</guid>
                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 14:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Heritage Day 2025: आज मनाया जा रहा है विश्व विरासत दिवस, इस मौके पर यूपी करा रहा हेरिटेज वॉक, जान लीजिए पूरा प्रोसेस  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार | </strong>दुनियाभर में मौजूद ऐतिहसिक, प्राकृर्तिक और सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित आज का ये दिन विश्व धरोहर दिवस के नाम से सेलिब्रेट किया जाता है | हर साल की तरह 18 अप्रैल के दिन इसे मनाया जाता है | बता दे कि विश्व भर में ऐसे कई धरोहर है जिन्हें आज की पीढ़ी, इससे पहले और हमारे पूर्वजो के समय पर भी मौजूद थी और इनकी रक्षा करना इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए अस्तित्व में ज़िंदा रखना बेहद जरुरी है |  इसी कारण इस दिवस की महत्ता और भी बढ़ जाती है |</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम बात करें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534046/world-heritage-day-2025--world-heritage-day-is-being-celebrated-today--on-this-occasion-up-is-organizing-heritage-walk--know-the-complete-process"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(6)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार | </strong>दुनियाभर में मौजूद ऐतिहसिक, प्राकृर्तिक और सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित आज का ये दिन विश्व धरोहर दिवस के नाम से सेलिब्रेट किया जाता है | हर साल की तरह 18 अप्रैल के दिन इसे मनाया जाता है | बता दे कि विश्व भर में ऐसे कई धरोहर है जिन्हें आज की पीढ़ी, इससे पहले और हमारे पूर्वजो के समय पर भी मौजूद थी और इनकी रक्षा करना इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए अस्तित्व में ज़िंदा रखना बेहद जरुरी है |  इसी कारण इस दिवस की महत्ता और भी बढ़ जाती है |</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम बात करें प्राचीनतम धरोहरों में से एक ताजमहल, कुतुबमीनार, हम्पी ये सभी हमारी पहचान है और पर्यटन, सांस्कृतिक शिक्षा का आधार भी है | बहुत सारे देश इन धरोहरों को संभालने में आर्थिक स्तर पर अपनी विशेष भूमिका निभाते हैं |     </p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>आखिर विश्व धरोहर दिवस की जरूरत क्यों पड़ी जानिए इसका इतिहास क्या कहता है ?</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">इसका उद्भव साल 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स ICOMOS<br />ने अलग देशों में धरोहर की जागरूकता के लिए एक खास दिन को रखने का विचार दिया था और अगले साल ही UNESCO द्वारा प्रस्ताव को 22वीं जनरल कॉन्फ्रेंस में पारित कर दिया तब से ही हर साल इस दिन को मनाये जाने लगा |</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>विश्व धरोहर दिवस की थीम </strong></h6>
<p style="text-align:justify;">विश्व धरोहर दिवस को मानाने के के लिए हर साल इसकी थीम चुनी जाती है | और इस साल आपदा और संघर्ष प्रतिरोधी विरासत (Heritage under Threat from Disasters and Conflicts) इसकी थीम रखी गयी है | इसका अर्थ प्राकृर्तिक आपदाओं से इन धरोहरों को बचाने के लिए एक कदम, तैयारी और इनसे सीख लेना है |</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>यूपी में आयोजित होगा हेरिटेज वॉक </strong></h6>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन मंत्री की ओर से बताया गया कि 18 अप्रैल को UPSTDC की ओर से अपटूअर्स ट्रैवल डिवीजन द्वारा हेरिटेज वॉक का आयोजन किया जाएगा | जिसमें विशेष रूप से प्रतिभागी ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी साझा करेंगे | भ्रमण के दौरान पर्यटक प्रदेश की समृद्ध विरासत और ऐतिहासिक धरोहर से रूबरू होंगे | उन्हें स्थानीय लोक कला, व्यंजन, संस्कृति और हस्तशिल्प का भी लुफ्त उठाएंगे | इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जन जन तक पहुंचाना है |</p>
<p style="text-align:justify;">इस हेरिटेज वॉक के लिए विशेष पैकेज तैयार किये गए है इसमें प्रतिभागी को ट्रांसपोर्ट प्रवेश शुल्क नाश्ता गाइड सेवा इत्यादि सुविधाएं प्रदान की जाएगी | इसका समय ढाई बजे से ३ बजे के बीच होगा | इसके पैकेज शुल्क इस प्रकार है - </p>
<p style="text-align:justify;">आगरा- 899 रुपए प्रति पर्यटक, <br />वाराणसी- 475 रुपए प्रति पर्यटक, <br />झांसी- 850 रुपए प्रति पर्यटक, <br />प्रयागराज- 500 रुपए प्रति पर्यटक, <br />लखनऊ- 800 रुपए</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी बुकिंग के लिए आपको इसकी वेबसाइट UPSTDC <a href="https://www.upstdc.co.in">www.upstdc.co.in</a>से कर सकेंगे | </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े :</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533873/nehru-manzil-sealed-in-lucknow--ed-took-action--know-what-congress-said#gsc.tab=0">लखनऊ में नेहरू मंजिल सील, ED ने की कार्रवाई, जानिये कांग्रेस ने क्या कहा...</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533832/maha-kumbh-of-sports-will-be-organized-in-lucknow--defense-minister-rajnath-singh-will-inaugurate-it-in-kd-singh-babu-stadium#gsc.tab=0">लखनऊ में आयोजित होगा खेलों का महाकुंभ, KD सिंह बाबू स्टेडियम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/534046/world-heritage-day-2025--world-heritage-day-is-being-celebrated-today--on-this-occasion-up-is-organizing-heritage-walk--know-the-complete-process</link>
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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 13:21:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले प्रख्यात सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक   </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार। </strong>प्रख्यात रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। उनके कार्यालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित पटनायक ने बुधवार को यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात की। </p>
<p>उन्होंने अपने आधिकारिक ‘एक्स हैंडल’ से मुलाकात की तस्वीर साझा करते पोस्ट किया, ‘प्रसिद्ध भारतीय रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।’ राष्ट्रपति कार्यालय ने इस महीने की शुरुआत में पटनायक द्वारा ब्रिटेन में बनाई गई भगवान गणेश की रेत की मूर्ति की तस्वीर भी साझा की। </p>
<p>पटनायक पहले भारतीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/533925/eminent-sand-artist-sudarshan-patnaik-met-president-draupadi-murmu"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(17)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार। </strong>प्रख्यात रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। उनके कार्यालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित पटनायक ने बुधवार को यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात की। </p>
<p>उन्होंने अपने आधिकारिक ‘एक्स हैंडल’ से मुलाकात की तस्वीर साझा करते पोस्ट किया, ‘प्रसिद्ध भारतीय रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।’ राष्ट्रपति कार्यालय ने इस महीने की शुरुआत में पटनायक द्वारा ब्रिटेन में बनाई गई भगवान गणेश की रेत की मूर्ति की तस्वीर भी साझा की। </p>
<p>पटनायक पहले भारतीय हैं जिन्हें दक्षिणी इंग्लैंड के डोरसेट काउंटी के वेमाउथ में आयोजित सैंडवर्ल्ड 2025 अंतरराष्ट्रीय ‘सैंड आर्ट फेस्टिवल’ के दौरान इस क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘फ्रेड डारिंगटन सैंड मास्टर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।</p>
<p>ओडिशा के इस सैंड आर्टिस्ट ने अपनी कला के माध्यम से HIV, AIDS, global warming, आतंकवाद को रोकने, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, Covid-19 और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक मुद्दों पर कलाकृति से जागरूकता पैदा की है। वह पूरी के समुद्र तट पर एक रेत कला विद्यालय भी चलाते हैं।</p>
<p><br /><strong>ये भी पढ़े :  </strong></p>
<p><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533873/nehru-manzil-sealed-in-lucknow--ed-took-action--know-what-congress-said#gsc.tab=0">लखनऊ में नेहरू मंजिल सील, ED ने की कार्रवाई, जानिये कांग्रेस ने क्या कहा...</a></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/533925/eminent-sand-artist-sudarshan-patnaik-met-president-draupadi-murmu</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/533925/eminent-sand-artist-sudarshan-patnaik-met-president-draupadi-murmu</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 17:20:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ambedkar Jayanti: कनिका भवन: जहां डॉ. आंबेडकर ने लिखा था भारत का संविधान  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार | </strong>मध्य दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित कनिका भवन वह बंगला है, जिसमें बाबासाहेब बीआर आंबेडकर ने भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में रहते हुए संविधान का प्रारूप लिखा था। इस भवन को मूल रूप से ओडिशा में कनिका की तत्कालीन रियासत के नाम पर रखा गया था। इंडिया गेट के निकट इस ऐतिहासिक इमारत ‘कनिका हाउस’ का पता अब एक, हार्डिंग एवेन्यू से बदलकर एक, तिलक मार्ग है। वर्ष 1891 में आज ही के दिन (14 अप्रैल) जन्मे आंबेडकर ने बहुत संघर्षपूर्ण जीवन जिया और दलित समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी। </p>
<p><strong>विधि</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/533400/ambedkar-jayanti--kanika-bhawan--where-dr--ambedkar-wrote-the-constitution-of-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(7)2.png" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार | </strong>मध्य दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित कनिका भवन वह बंगला है, जिसमें बाबासाहेब बीआर आंबेडकर ने भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में रहते हुए संविधान का प्रारूप लिखा था। इस भवन को मूल रूप से ओडिशा में कनिका की तत्कालीन रियासत के नाम पर रखा गया था। इंडिया गेट के निकट इस ऐतिहासिक इमारत ‘कनिका हाउस’ का पता अब एक, हार्डिंग एवेन्यू से बदलकर एक, तिलक मार्ग है। वर्ष 1891 में आज ही के दिन (14 अप्रैल) जन्मे आंबेडकर ने बहुत संघर्षपूर्ण जीवन जिया और दलित समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी। </p>
<p><strong>विधि विशेषज्ञ और संविधान निर्माता के रूप में जाने जाते हैं आंबेडकर</strong></p>
<p>आंबेडकर भारत के पहले कानून मंत्री बने और 1947 से 1951 तक कैबिनेट में सेवा की। संविधान सभा के लगभग तीन वर्ष की अवधि तक किए गए विचार-विमर्श के बाद संविधान स्वीकृत किया गया। देश में 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ, जो भारत गणराज्य के जन्म का प्रतीक है। आंबेडकर विधि विशेषज्ञ और संविधान निर्माता के रूप में जाने जाते हैं तथा देश भर में बड़ी संख्या में लोगों, विशेष रूप से दलित समुदाय द्वारा इन्हें पूजा जाता है। संविधान सभा की पहली बैठक नौ दिसंबर, 1946 को पुराने संसद भवन के भव्य केंद्रीय कक्ष में हुई थी। सभा ने 26 नवंबर, 1949 को संविधान को स्वीकृत किया था। </p>
<p><strong>दिल्ली में अन्य रियासतों द्वारा निर्मित आलीशान भवनों में शामिल हैं कनिका पैलेस</strong></p>
<p>कानून मंत्री के रूप में आंबेडकर कनिका भवन में रहे, जिसका नाम तत्कालीन कनिका रियासत के नाम पर रखा गया था। इस रियासत के पिछले शासकों द्वारा निर्मित एक भव्य कनिका पैलेस आज भी ओडिशा (पहले उड़ीसा) के केंद्रपाड़ा जिले में स्थित है। इंडिया गेट परिसर क्षेत्र में कनिका भवन के पड़ोस में स्थित हैदराबाद हाउस, बड़ौदा हाउस, पटियाला हाउस, जयपुर हाउस, कोटा हाउस, धौलपुर हाउस और बीकानेर हाउस, दिल्ली में अन्य रियासतों द्वारा निर्मित आलीशान भवनों में शामिल हैं, जो बहुत लोकप्रिय हैं। नया रंगरूप मिलने से पहले तक कनिका भवन और आंबेडकर की कहानी लोगों के बीच कुछ खास प्रसिद्ध नहीं थी। </p>
<p>एक, तिलक मार्ग स्थित बंगले को जो चीज अलग बनाती है, वह है इसका आकर्षक डिजाइन। ‘आर्ट डेको’, एक वास्तुशिल्प शैली है जो अक्सर राजधानी शहर से जुड़ी हुई नहीं होती। हालांकि पुरानी दिल्ली और लुटियंस दिल्ली में भी में इसके कई नमूने हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट के अनुसार, आर्किटेक्ट कार्ल माल्टे वॉन हेंज द्वारा डिजाइन किया गया कनिका भवन 1930 के दशक में बनाया गया था। </p>
<p>‘डेको इन दिल्ली’ ने 1930 के दशक के अंत में ‘द मॉडर्न हाउस इन इंडिया’ में प्रकाशित कनिका भवन की एक पुरानी तस्वीर भी साझा की। कनिका भवन के ठेकेदार ‘सरदार साहब सरदार रणजीत सिंह’ का नाम भी इस पोस्ट में लिखा है। पोस्ट में लिखा है, “ये आलीशान घर राजधानी में ‘आर्ट डेको’ के शुरुआती निशानों को दर्शाता है।” आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के मुद्दे पर 1951 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार से इस्तीफा दे दिया और हार्डिंग एवेन्यू स्थित यह आकर्षक भवन खाली कर दिया।</p>
<p>कनिका भवन बाद में भारत में पोलैंड के राजदूत का निवास बन गया और यह आज भी अपना आकर्षण बनाए हुए है। कनिका भवन छोड़ने के बाद आंबेडकर सिविल लाइंस इलाके में 26, अलीपुर रोड पर एक दूसरे घर में चले गए, जहां वे 1956 में अपनी मृत्यु तक रहे। हालांकि सिविल लाइन्स स्थित आंबेडकर का मूल निवास अब अस्तित्व में नहीं है लेकिन उस स्थान पर उनके सम्मान में एक राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया है। </p>
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                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 18:03:33 +0530</pubDate>
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