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                <title>करियर  - Amrit Vichar</title>
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                <title>करंट अफेयर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">    हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता की लघु यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग अदिपूर्णा (स्टार ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया)’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भागीदारी, व्यापार, निवेश और साझेदारी को मजबूत करने में अपना योगदान प्रदान करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में पुर्तगाल के भारतीय पर्वतारोही चेरिंग चोडेन ने माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर) को , जो यूरोप की सबसे ऊँची चोटी है, आसान फ़तह दिया। यह उपलब्धि उनकी सेवन समित चुनौती यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586952/current-affairs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/untitled-design-(68).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">    हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता की लघु यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग अदिपूर्णा (स्टार ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया)’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भागीदारी, व्यापार, निवेश और साझेदारी को मजबूत करने में अपना योगदान प्रदान करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में पुर्तगाल के भारतीय पर्वतारोही चेरिंग चोडेन ने माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर) को , जो यूरोप की सबसे ऊँची चोटी है, आसान फ़तह दिया। यह उपलब्धि उनकी सेवन समित चुनौती यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण में भारत की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (UNSDSN) द्वारा जारी सतत विकास रिपोर्ट (SDR) 2026 के अनुसार , भारत ने 2025 में 99वें स्थान से 2026 में 94 वें स्थान पर पहुंचकर अपनी रैंकिंग में सुधार किया है , जो रिपोर्ट की शुरुआत के बाद से इसकी सर्वोच्च स्थिति है। फिनलैंड ने वैश्विक स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र द्वारा सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के तहत अपनाए गए 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा <br />में देशों की प्रगति के आधार पर उनका मूल्यांकन करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में भारत एवं इजराइल के मध्य द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA), जिस पर सितंबर 2025 में हस्ताक्षर किए गए थे, 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया। भारत के नए मॉडल निवेश संधि ढाँचे के अंतर्गत निवेश समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला इज़राइल, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन का प्रथम सदस्य देश बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में सहकारिता मंत्रालय का 5 वां स्थापना दिवस 6 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में मनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 09:00:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ayodhya Ram Mandir News : राम मंदिर को मिलेगा CEO, ट्रस्ट देगा आकर्षक वेतन-भत्ते; जानिए आवेदन की अंतिम तारीख और योग्यता</title>
                                    <description><![CDATA[उम्मीदवार का स्नातक होना अनिवार्य, प्रशासन या वित्त क्षेत्र में 20 वर्ष का अनुभव जरूरी, मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वालों को मिलेगी प्राथमिकता, हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587353/ayodhya-ram-mandir-news--the-trust-will-provide-a-salary-and-other-perks-to-the-ceo-appointed-for-the-ram-mandir--applications-have-been-invited-via-email"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/ram-mandir12.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><span>अयोध्या, अमृत विचार। </span></strong>श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक ई-मेल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवार को आकर्षक वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।</p>
<h5><span><strong>20 वर्ष का अनुभव जरूरी</strong></span></h5>
<p>ट्रस्ट की ओर से जारी पात्रता के अनुसार उम्मीदवार का स्नातक होना अनिवार्य है। प्रशासन या वित्तीय क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। मंदिर प्रबंधन, धार्मिक संस्थानों या बड़े सार्वजनिक ट्रस्टों के संचालन का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उम्मीदवार हिंदू धर्म का अनुयायी होना चाहिए।</p>
<h5><span><strong>तीन वर्ष के लिए होगी नियुक्ति</strong></span></h5>
<p>सीईओ की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए की जाएगी। कार्य प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर कार्यकाल आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। आवेदन के साथ अभ्यर्थियों को विस्तृत बायोडाटा, अनुभव प्रमाण-पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भेजने होंगे। चयन प्रक्रिया में साक्षात्कार और पृष्ठभूमि जांच भी शामिल रहेगी।</p>
<h5><span><strong>राम मंदिर प्रशासन की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे CEO</strong></span></h5>
<p>चयनित सीईओ को अयोध्या में पूर्णकालिक रूप से रहना होगा। उनके जिम्मे राम मंदिर के दैनिक प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, रखरखाव, वित्तीय प्रबंधन, धार्मिक आयोजनों और ट्रस्ट की संपत्तियों के संचालन की जिम्मेदारी होगी।</p>
<h5><span><strong>तीन सदस्यीय समिति करेगी चयन</strong></span></h5>
<p>बताया गया कि 6 जुलाई को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में सीईओ चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत और सुरेश हावड़े शामिल हैं। समिति साक्षात्कार के बाद तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपेगी। इसके बाद 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में नए सीईओ के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>करियर </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 21:35:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bihar SI Prohibition Exam 2026 : ब्लूटूथ से नकल की कोशिश नाकाम, 38 जिलों के 515 केंद्रों पर हुई परीक्षा, दो बायोमेट्रिक कर्मी भी पकड़े गए</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार मद्य निषेध अवर निरीक्षक भर्ती परीक्षा 2026 राज्य के 38 जिलों के 515 केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। पटना में एक अभ्यर्थी ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़ा गया, जबकि बेगूसराय में दो बायोमेट्रिक कर्मियों को कदाचार के आरोप में हिरासत में लिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/587295/bihar-si-prohibition-exam-2026--attempt-to-cheat-using-bluetooth-foiled--exam-held-at-515-centers-across-38-districts--two-biometric-personnel-also-apprehended"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/0138.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पटना। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की ओर से मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग में अवर निरीक्षक (मद्य निषेध) के 78 पदों पर भर्ती के लिए रविवार को आयोजित प्रारंभिक लिखित परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राज्य के 38 जिलों में बनाए गए 515 परीक्षा केंद्रों पर एक पाली में परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें करीब 55 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई। परीक्षा सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली। आयोग के अनुसार, परीक्षा को निष्पक्ष और कदाचारमुक्त बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>जैमर, CCTV और बायोमेट्रिक निगरानी के बीच परीक्षा</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आयोग ने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर, सीसीटीवी कैमरे, हॉटलाइन वीओआईपी फोन, प्रवेश द्वार पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी, परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट सत्यापन और परीक्षा कक्ष के भीतर भी वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>पटना में ब्लूटूथ डिवाइस के साथ अभ्यर्थी पकड़ा गया</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद पटना के श्री सियाराम सिंह यादव उच्च माध्यमिक विद्यालय, शाहपुर परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़ा गया। उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>बेगूसराय में दो बायोमेट्रिक कर्मी गिरफ्तार</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">वहीं, बेगूसराय के एस.के. महिला कॉलेज परीक्षा केंद्र पर दो बायोमेट्रिक कर्मियों को अभ्यर्थियों को कथित रूप से कदाचार कराने के प्रयास में पकड़ा गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि इन दोनों घटनाओं को छोड़कर राज्य के किसी भी अन्य परीक्षा केंद्र से किसी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>22 जुलाई को होगी ASI (ऑपरेटर) भर्ती परीक्षा</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने अभ्यर्थियों, अभिभावकों, केंद्राधीक्षकों और जिला प्रशासन के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। आयोग ने यह भी बताया कि 22 जुलाई 2026 को बिहार पुलिस रेडियो (वितंतु), पटना में सहायक अवर निरीक्षक (ऑपरेटर) पदों के लिए विज्ञापन संख्या-04/2026 के तहत प्रारंभिक लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा राज्य के 11 जिलों में एक पाली में होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>परीक्षा</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/587295/bihar-si-prohibition-exam-2026--attempt-to-cheat-using-bluetooth-foiled--exam-held-at-515-centers-across-38-districts--two-biometric-personnel-also-apprehended</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 16:03:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैंपस का पहला दिन,   जहां मिली नई दिशा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">जीवन के कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो समय बीतने के बाद भी स्मृतियों में उसी ताजगी के साथ जीवित रहते हैं। कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र के रूप में बिताया गया पहला दिन मेरे जीवन की ऐसी ही अमिट यादों में शामिल है। स्कूल की सीमित दुनिया से निकलकर कॉलेज के खुले और जीवंत माहौल में कदम रखना किसी नए संसार में प्रवेश करने जैसा अनुभव था।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज की भव्य लाल ईंटों वाली इमारत, हरे-भरे परिसर, पुराने पेड़ों की छाया और छात्रों की चहल-पहल ने पहली ही नजर में मन को आकर्षित कर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586950/the-first-day-on-campus%E2%80%94where-i-found-a-new-direction"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(12)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीवन के कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो समय बीतने के बाद भी स्मृतियों में उसी ताजगी के साथ जीवित रहते हैं। कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र के रूप में बिताया गया पहला दिन मेरे जीवन की ऐसी ही अमिट यादों में शामिल है। स्कूल की सीमित दुनिया से निकलकर कॉलेज के खुले और जीवंत माहौल में कदम रखना किसी नए संसार में प्रवेश करने जैसा अनुभव था।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज की भव्य लाल ईंटों वाली इमारत, हरे-भरे परिसर, पुराने पेड़ों की छाया और छात्रों की चहल-पहल ने पहली ही नजर में मन को आकर्षित कर लिया। प्रवेश द्वार से भीतर जाते समय मन में उत्साह भी था और हल्की-सी घबराहट भी। हर ओर नए चेहरे थे, नई आवाजें थीं और नए सपनों की चमक दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले दिन परिचयात्मक कक्षाओं का आयोजन हुआ। प्राध्यापकों ने केवल पाठ्यक्रम की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि कॉलेज जीवन के मूल्यों, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उनके शब्दों ने यह एहसास कराया कि कॉलेज केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि सोच, नेतृत्व और सामाजिक समझ विकसित करने की पाठशाला भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज परिसर में घूमते हुए वरिष्ठ छात्रों से मुलाकात हुई। उनसे बातचीत के दौरान पहली बार छात्र राजनीति की सक्रिय दुनिया से परिचय मिला। परिसर में विभिन्न छात्र संगठनों की गतिविधियां, छात्रों के बीच होने वाली चर्चाएं और कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने का वातावरण मेरे लिए बिल्कुल नया था। धीरे-धीरे यह समझ बनने लगी कि छात्र राजनीति केवल चुनाव तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने, उनके अधिकारों की आवाज बनने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। </p>
<p style="text-align:justify;">समय के साथ मेरा जुड़ाव भी कॉलेज की छात्र राजनीति से बढ़ता गया। छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी, साथियों के बीच संवाद और विभिन्न आयोजनों में जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला। इस प्रक्रिया ने आत्मविश्वास बढ़ाया, लोगों से संवाद करने की कला सिखाई और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो महसूस होता है कि क्राइस्ट चर्च कॉलेज का वह पहला दिन केवल एक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत नहीं था, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व और सामाजिक चेतना की दिशा में उठाया गया पहला सशक्त कदम था। वही दिन आगे चलकर जीवन के अनेक निर्णयों और अनुभवों की मजबूत नींव बना, जिसकी स्मृतियां आज भी उतनी ही प्रेरणादायक हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><br />अभिनव तिवारी कानपुर</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/586950/the-first-day-on-campus%E2%80%94where-i-found-a-new-direction</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:00:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  वर्ड स्मिथ :  ऐसे बना गवर्नमेंट शब्द </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">‘गवर्नमेंट’ (Government) शब्द की जड़ें प्राचीन ग्रीक भाषा में मिलती हैं। यह ग्रीक शब्द kybernan से विकसित हुआ, जिसका अर्थ था—"जहाज चलाना", ‘दिशा देना’ या ‘मार्गदर्शन करना’। बाद में यह शब्द लैटिन में gubernare और फिर पुरानी फ़्रांसीसी में governer के रूप में प्रचलित हुआ, जिसका अर्थ था ‘शासन करना’ या ‘प्रशासन चलाना’। इसी से अंग्रेज़ी का शब्द Government बना।</p>
<p style="text-align:justify;">इस शब्द की यात्रा केवल भाषाई परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि शासन की अवधारणा के विकास को भी दर्शाती है। जिस प्रकार एक कुशल नाविक जहाज को सही दिशा में ले जाता है, उसी तरह सरकार का दायित्व समाज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586948/word-smith--how-the-word--government--originated"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(11)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">‘गवर्नमेंट’ (Government) शब्द की जड़ें प्राचीन ग्रीक भाषा में मिलती हैं। यह ग्रीक शब्द kybernan से विकसित हुआ, जिसका अर्थ था—"जहाज चलाना", ‘दिशा देना’ या ‘मार्गदर्शन करना’। बाद में यह शब्द लैटिन में gubernare और फिर पुरानी फ़्रांसीसी में governer के रूप में प्रचलित हुआ, जिसका अर्थ था ‘शासन करना’ या ‘प्रशासन चलाना’। इसी से अंग्रेज़ी का शब्द Government बना।</p>
<p style="text-align:justify;">इस शब्द की यात्रा केवल भाषाई परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि शासन की अवधारणा के विकास को भी दर्शाती है। जिस प्रकार एक कुशल नाविक जहाज को सही दिशा में ले जाता है, उसी तरह सरकार का दायित्व समाज और राष्ट्र को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना माना गया। इसलिए 'गवर्नमेंट' का मूल भाव केवल सत्ता चलाना नहीं, बल्कि मार्गदर्शन, व्यवस्था बनाए रखना और जनहित में प्रशासन करना है। आज दुनिया की लगभग सभी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में यह शब्द शासन और प्रशासन की केंद्रीय संस्था का प्रतीक बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/586948/word-smith--how-the-word--government--originated</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 12:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए जरूरी करियर स्किल्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अंडरग्रेजुएशन सिर्फ डिग्री हासिल करने का चरण नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और करियर की मजबूत नींव रखने का समय भी है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल अच्छे अंक सफलता की गारंटी नहीं देते, बल्कि कम्युनिकेशन, टाइम मैनेजमेंट, प्रॉब्लम सॉल्विंग और नई तकनीकों को सीखने की क्षमता जैसी स्किल्स भी उतनी ही जरूरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज जीवन में विकसित की गई ये योग्यताएं छात्रों को पढ़ाई, इंटर्नशिप, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के अवसरों में बढ़त दिलाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो छात्र अकादमिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करते हैं, वे बदलती पेशेवर दुनिया की चुनौतियों का बेहतर ढंग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586945/essential-career-skills-for-undergraduate-students"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(10)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंडरग्रेजुएशन सिर्फ डिग्री हासिल करने का चरण नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और करियर की मजबूत नींव रखने का समय भी है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल अच्छे अंक सफलता की गारंटी नहीं देते, बल्कि कम्युनिकेशन, टाइम मैनेजमेंट, प्रॉब्लम सॉल्विंग और नई तकनीकों को सीखने की क्षमता जैसी स्किल्स भी उतनी ही जरूरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज जीवन में विकसित की गई ये योग्यताएं छात्रों को पढ़ाई, इंटर्नशिप, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के अवसरों में बढ़त दिलाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो छात्र अकादमिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करते हैं, वे बदलती पेशेवर दुनिया की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">स्किल्स डेवलप करना बनाएं प्राथमिकता</h4>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज की पढ़ाई का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं होना चाहिए। यह समय नई-नई क्षमताओं को विकसित करने का भी है। छात्रों को पढ़ाई के साथ वाद-विवाद, सेमिनार, प्रेजेंटेशन, क्रिएटिव राइटिंग, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्तित्व में निखार आता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजमर्रा की दिनचर्या में पढ़ाई और स्किल डेवलपमेंट दोनों के लिए संतुलित समय तय करें। उदाहरण के तौर पर, पढ़ाई के साथ प्रतिदिन कुछ समय रिसर्च, नई तकनीक सीखने या किसी ऑनलाइन कोर्स के लिए भी निकालें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल</h4>
<p style="text-align:justify;">आज के समय में अपनी बात स्पष्ट, सटीक और आत्मविश्वास के साथ रखना एक महत्वपूर्ण योग्यता है। कॉलेज में प्रोफेसरों से संवाद, प्रोजेक्ट प्रस्तुत करना, ग्रुप डिस्कशन में हिस्सा लेना या इंटरव्यू देना—हर जगह प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल की जरूरत पड़ती है। अच्छी संवाद क्षमता न केवल आपकी सोच को बेहतर ढंग से सामने लाती है, बल्कि दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव भी छोड़ती है। यही कारण है कि कई बार यह कौशल केवल अच्छे अंकों से भी अधिक उपयोगी साबित होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अच्छी कम्युनिकेशन स्किल के फायदे</h4>
<p style="text-align:justify;">-    एक्टिव लिसनिंग यानी ध्यानपूर्वक सुनने की क्षमता विकसित होती है।<br />-    स्पष्ट और प्रभावी लेखन शैली बेहतर होती है।<br />-    बॉडी लैंग्वेज और प्रेजेंटेशन स्किल्स में सुधार आता है।<br />-    टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है।<br />-    आत्मविश्वास बढ़ता है और इंटरव्यू में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रॉब्लम सॉल्विंग और डिसीजन मेकिंग स्किल्स</h4>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ किताबों का ज्ञान आज के समय में पर्याप्त नहीं माना जाता। छात्रों में समस्याओं का विश्लेषण करने, तार्किक सोच विकसित करने और सही समय पर उचित निर्णय लेने की क्षमता भी होनी चाहिए। कॉलेज के दौरान मिलने वाले प्रोजेक्ट, केस स्टडी और समूह गतिविधियां इन कौशलों को विकसित करने का अच्छा अवसर देती हैं। निजी कंपनियां भी ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं, जो कठिन परिस्थितियों में समाधान खोजने और जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हों।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रखें</h4>
<p style="text-align:justify;">तकनीक और रोजगार बाजार तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में छात्रों के लिए नई तकनीकों, डिजिटल टूल्स और उद्योग से जुड़े ट्रेंड्स की जानकारी रखना जरूरी है। यदि आप आईटी, डेटा, डिजाइन, डिजिटल मार्केटिंग या किसी अन्य क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो पढ़ाई के साथ उससे संबंधित स्किल भी सीखना शुरू करें। ऑनलाइन कोर्स, वेबिनार और सर्टिफिकेट प्रोग्राम इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं। लगातार सीखने की आदत भविष्य में बेहतर अवसरों के द्वार खोलती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नेटवर्किंग की आदत विकसित करें</h4>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज जीवन में बनाए गए संबंध आगे चलकर करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों, सीनियर्स, सहपाठियों और पूर्व छात्रों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना फायदेमंद होता है। मजबूत नेटवर्किंग से इंटर्नशिप, रिसर्च प्रोजेक्ट, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी और नौकरी के अवसरों तक पहुंच आसान हो जाती है। इसलिए केवल कक्षा तक सीमित रहने के बजाय विभिन्न शैक्षणिक और पेशेवर आयोजनों में भी भाग लें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">टाइम मैनेजमेंट सीखें</h4>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज जीवन में पढ़ाई, असाइनमेंट, परीक्षा की तैयारी, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। इसके लिए समय का सही प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। दैनिक और साप्ताहिक लक्ष्य तय करें, प्राथमिकताओं के अनुसार काम करें और अनावश्यक समय बर्बाद करने से बचें। टाइम मैनेजमेंट की यह आदत आगे चलकर नौकरी और पेशेवर जीवन में भी आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पैसों का सही प्रबंधन भी जरूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज के समय से ही वित्तीय अनुशासन सीखना भविष्य के लिए लाभदायक होता है। कमाई, बचत, खर्च और निवेश की बुनियादी समझ हर छात्र को होनी चाहिए। बजट बनाकर खर्च करना, अनावश्यक खर्चों से बचना और छोटी-छोटी बचत की आदत विकसित करना आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में पहला कदम है। वित्तीय जागरूकता भविष्य में बेहतर निर्णय लेने में भी मदद करती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन</h4>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज जीवन में पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता और भविष्य की चिंता स्वाभाविक है। ऐसे में तनाव को सकारात्मक तरीके से संभालना और अपनी भावनाओं को समझना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, परिवार और दोस्तों से संवाद तथा सकारात्मक सोच मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखते हैं। अपनी गलतियों से सीखना, आलोचना को स्वीकार करना और चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना करना भी व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/586945/essential-career-skills-for-undergraduate-students</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:00:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP TET 2026 Answer Key: क्या आपके उत्तर सही हैं? प्रोविजनल आंसर-की जारी, 14 जुलाई तक दर्ज कर सकते हैं आपत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने यूपी-टीईटी 2026 की प्रोविजनल उत्तरकुंजी जारी कर दी है। 2, 3 और 4 जुलाई को आयोजित परीक्षा के अभ्यर्थी अब आधिकारिक वेबसाइट पर मास्टर सेट का मिलान कर 14 जुलाई 2026 तक केवल ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586959/draft-add-your-titleup-tet-2026-answer-key-out-are"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/muskan-dixit-(24)3.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) 2026 की प्रोविजनल उत्तरकुंजी जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मास्टर सेट की आंसर-की का मिलान कर सकते हैं। यदि किसी प्रश्न या उत्तर पर आपत्ति है तो उसे 14 जुलाई 2026 की रात 12 बजे तक ऑनलाइन दर्ज कराया जा सकता है।</p>
<h4><strong>2, 3 और 4 जुलाई को हुई थी परीक्षा</strong></h4>
<p class="isSelectedEnd">आयोग के अध्यक्ष<strong> </strong>डॉ. प्रशांत कुमार के अनुसार, यूपी-टीईटी 2026 का आयोजन 2 और 3 जुलाई को प्रतिदिन दो-दो पालियों में तथा 4 जुलाई को प्रथम पाली में किया गया था। अब इन परीक्षाओं के मास्टर सेट की प्रोविजनल उत्तरकुंजी अभ्यर्थियों के अवलोकन के लिए आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है।</p>
<h4><strong>ऐसे करें उत्तरों का मिलान</strong></h4>
<p class="isSelectedEnd">अभ्यर्थियों को आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध ऑनलाइन लिंक के माध्यम से लॉगिन करना होगा। इसके लिए अपना अनुक्रमांक (Roll Number) और जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। लॉगिन के बाद अभ्यर्थी मास्टर सेट की उत्तरकुंजी देख सकेंगे और यदि किसी उत्तर पर आपत्ति हो तो निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।</p>
<h4><strong>केवल ऑनलाइन स्वीकार होंगी आपत्तियां</strong></h4>
<p class="isSelectedEnd">आयोग ने स्पष्ट किया है कि आपत्तियां सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार की जाएंगी। ई-मेल, डाक अथवा किसी अन्य ऑफलाइन माध्यम से भेजे गए आवेदन पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया और आवश्यक दिशा-निर्देश भी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं।</p>
<h4><strong>अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी</strong></h4>
<ul>
<li><strong>परीक्षा तिथि:</strong> 2, 3 और 4 जुलाई 2026</li>
<li><strong>प्रोविजनल उत्तरकुंजी जारी:</strong> 8 जुलाई 2026</li>
<li><strong>आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि:</strong> 14 जुलाई 2026 (रात 12:00 बजे)</li>
<li><strong>आपत्ति दर्ज करने का माध्यम:</strong> केवल ऑनलाइन</li>
<li><strong>आधिकारिक वेबसाइट:</strong> upessc.up.gov.in</li>
</ul>
<p>आयोग ने अभ्यर्थियों से निर्धारित समयसीमा के भीतर ही आपत्तियां दर्ज कराने की अपील की है। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><em><strong>यह भी पढ़ेंः </strong></em></span><em><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/586956/lucknow-childrens-palace-school-fee-hike-nagar-nigam-school-fees-700-rupees"><span class="t-red">Lucknow News: </span>एक फैसले ने बढ़ाई सैकड़ों परिवारों की चिंता! नगर निगम के इस स्कूल में फीस 250 से सीधे 700 रुपये, अभिभावक परेशान</a></strong></em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/586959/draft-add-your-titleup-tet-2026-answer-key-out-are</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:21:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जॉब अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<h4>इंडियन ओवरसीज बैंक</h4>
<p>    पद का नाम- प्रशिक्षु<br />    कुल रिक्तियां-750<br />    अंतिम तिथि-20.07.2026<br />    वर्ग-बैंक अप्रेंटिस<br />    वेबसाइट- <a href="https://www.iob.bank.in">www.iob.bank.in</a></p>
<h4>रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ</h4>
<p>    पद का नाम-अधिनियम प्रशिक्षु<br />    पदों की संख्या-1,853<br />    आयु सीमा-15 से 24 वर्ष<br />    आवेदन की अंतिम तिथि-07.08.2026<br />    वेबसाइट-<a href="https://www.rrcpryj.org">www.rrcpryj.org</a></p>
<h4>कर्मचारी राज्य बीमा निगम- बरेली</h4>
<p>    पद का नाम- पूर्णकालिक/अंशकालिक<br />    पदों की संख्या-4<br />    योग्यता-एमबीबीएस और पीजी डिग्री या समकक्ष योग्यता के साथ अनुभव।<br />    आयु सीमा- 69 वर्ष<br /> नौकरी का प्रकार- अनुबंध</p>
<p>  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586954/job-alert"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(13)3.jpg" alt=""></a><br /><h4>इंडियन ओवरसीज बैंक</h4>
<p>    पद का नाम- प्रशिक्षु<br />    कुल रिक्तियां-750<br />    अंतिम तिथि-20.07.2026<br />    वर्ग-बैंक अप्रेंटिस<br />    वेबसाइट- <a href="https://www.iob.bank.in">www.iob.bank.in</a></p>
<h4>रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ</h4>
<p>    पद का नाम-अधिनियम प्रशिक्षु<br />    पदों की संख्या-1,853<br />    आयु सीमा-15 से 24 वर्ष<br />    आवेदन की अंतिम तिथि-07.08.2026<br />    वेबसाइट-<a href="https://www.rrcpryj.org">www.rrcpryj.org</a></p>
<h4>कर्मचारी राज्य बीमा निगम- बरेली</h4>
<p>    पद का नाम- पूर्णकालिक/अंशकालिक<br />    पदों की संख्या-4<br />    योग्यता-एमबीबीएस और पीजी डिग्री या समकक्ष योग्यता के साथ अनुभव।<br />    आयु सीमा- 69 वर्ष<br /> नौकरी का प्रकार- अनुबंध</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:00:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुरातात्विक धरोहरों को समेटे अवध विश्वविद्यालय का संग्रहालय </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कौशल संग्रहालय की स्थापना विश्वविद्यालय परिसर में सन् 1998 में उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग चार के आदेश के तहत पुरातात्विक संग्रहालय के रूप में की गई थी। अवध क्षेत्र की प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों को समेटे संग्रहालय में कल तीन गैलरी और दो सुसज्जित बरामदे हैं। संग्रहालय की पहली गैलरी में क्षेत्रीय सर्वेक्षण अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर और आसपास के जनपदों के पुरातन स्थलों से प्राप्त कल अवशेषों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें छठवीं शताब्दी की भगवान ऋ षभदेव की प्राचीन प्रतिमा के साथ नवीं शताब्दी के उमा महेश, 10 वीं और 11 वीं शताब्दी के सूर्य,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586944/awadh-university-museum--a-repository-of-archaeological-heritage"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/untitled-design-(9)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कौशल संग्रहालय की स्थापना विश्वविद्यालय परिसर में सन् 1998 में उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग चार के आदेश के तहत पुरातात्विक संग्रहालय के रूप में की गई थी। अवध क्षेत्र की प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों को समेटे संग्रहालय में कल तीन गैलरी और दो सुसज्जित बरामदे हैं। संग्रहालय की पहली गैलरी में क्षेत्रीय सर्वेक्षण अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर और आसपास के जनपदों के पुरातन स्थलों से प्राप्त कल अवशेषों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें छठवीं शताब्दी की भगवान ऋ षभदेव की प्राचीन प्रतिमा के साथ नवीं शताब्दी के उमा महेश, 10 वीं और 11 वीं शताब्दी के सूर्य, विष्णु, गणेश, कुबेर आदि के साथ 17 वीं शताब्दी के हनुमान की प्रतिमा प्रदर्शित है। इस संग्रहालय में लगभग 50 हजार वर्ष पूर्व का हस्त कुठार (हैंड एक्स) भी संरक्षित है।</p><p style="text-align:justify;">संग्रहालय की वीथिका में सिंधु सभ्यता व खरोठी लिपि भी प्रागैतिहासिक काल का सूक्ष्म पाषाण उपकरण (माइक्रो लिथ) के साथ इसी वीथिका में सिंधु सभ्यता की लिपि के साथ ब्राह्मी तथा खरोष्ठी लिपि के पैनल प्रदर्शित किए गए हैं। इसी गैलरी में भगवान ऋ षभ देव की काष्ठ प्रतिमा प्रदर्शित है। दूसरी अनुकृति वीथिका गैलरी राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली तथा राजकीय संग्रहालय लखनऊ के प्रमुख अवशेषों के मॉडल प्रदर्शित किए गए है। यह गैलरी इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में भारतीय कला विषयक महत्वपूर्ण प्रतिमाओं को संजोए है। इसमें हड़प्पा मोहनजोदड़ो से प्राप्त पुराअवशेषों, जिसमें नृत्य की मुद्रा में बालिका, पुरोहित प्रतिमा तथा सेलखड़ी (चूना पत्थर) से बनी मोहरों के मॉडल और साथ में सिंधु घाटी सभ्यता के अनेक पुरावशेषों को प्रदर्शित किया गया है। राज्य संग्रहालय लखनऊ से प्राप्त विष्णु, शिवा ओलीकितेश्वर तथा कुबेर की प्राचीन प्रतिमाएं प्रदर्शित हैं। </p><h4 style="text-align:justify;">मौर्य, शुंग और कुषाण काल के बर्तनों के अवशेष बढ़ा रहे हैं शोभा </h4><p style="text-align:justify;">संग्रहालय के वीथिका सहायक डॉ. देशराज उपाध्याय ने बताया कि तीसरी गैलरी में सर्वेक्षण से प्राप्त मृणमय (टेराकोटा) की मूर्तियों तथा प्राचीन मिट्टी के बर्तनों के अवशेष हैं, जो क्रमशः मौर्य काल, शुंगकाल, कुषाण काल एवं गुप्त काल से संबंधित है। यह अवशेष अंबेडकर नगर के सुरूरपुर, अयोध्या, विरायता सुल्तानपुर तथा रेहट बीकापुर के पुरास्थलों से प्राप्त हुए हैं। </p><p style="text-align:justify;">कौशल संग्रहालय के सभी अवशेष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोध ग्रंथ में प्रकाशित हो चुके हैं। भारत की प्रतिष्ठित शोध ग्रंथ इंडियन जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजी 2018 में प्रकाशित किया गया हैं। संग्रहालय में प्रदेश जनपद अन्य राज्यों के बड़ी संख्या में शोध छात्र एवं संस्थाएं पुरातात्विक तत्वों को जानने के लिए कौशल संग्रहालय का शैक्षिक भ्रमण करते हैं। इतिहास एवं पुरातत्व विभाग कि यह धरोहर अपनी प्राचीन विरासत को संजोए हुए हैं। </p><h4 style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के लिए कृत संकल्पित </h4><p style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कौशल संग्रहालय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए संरक्षित एवं प्रासंगिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह संग्रहालय गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और अवध क्षेत्र की जीवंत विरासत का जीवंत दस्तावेज है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर मध्यकाल तक की अमूल्य धरोहरों को अपने भीतर समेटे यह संग्रहालय शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं के लिए ज्ञान का एक अनमोल केंद्र है। इस ऐतिहासिक अनमोल धरोहर को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से और अधिक संरक्षित, सुसज्जित  तथा प्रासंगिक बनाया जाएगा। इस संग्रहालय को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने और वैश्विक शोध के मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हम चाहते हैं कि देश-विदेश के शोधार्थी यहां आएं और अवध की इस छिपी हुई पुरातात्विक संपदा से पूरी दुनिया परिचित हो सके। समन्वयक डॉ. राजेश कुमार सिंह ने अयोध्या की इस विरासत को संजोने का संकल्प लिया है।<br /></p><p style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ड स्मिथ :  ऐसे बना टाउन शब्द</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज हम जिस ‘टाउन’ शब्द का प्रयोग किसी कस्बे या छोटे शहर के लिए करते हैं, उसकी अपनी एक लंबी और दिलचस्प यात्रा रही है। यह शब्द अंग्रेज़ी भाषा में अचानक नहीं आया, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन अंग्रेज़ी के 'tūn' (टून) शब्द में मिलती हैं। उस समय tūn का अर्थ किसी बड़े नगर से नहीं, बल्कि बाड़ या दीवार से घिरे हुए खेत, आवास या छोटे निवास-स्थल से था। उस दौर में लोग सुरक्षा के लिए अपने घरों और पशुओं को घेराबंदी के भीतर रखते थे, इसलिए ऐसे स्थानों को tūn कहा जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">समय के साथ आबादी बढ़ी, छोटे-छोटे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586279/word-smith--how-the-word-town-was-formed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/ammtr.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज हम जिस ‘टाउन’ शब्द का प्रयोग किसी कस्बे या छोटे शहर के लिए करते हैं, उसकी अपनी एक लंबी और दिलचस्प यात्रा रही है। यह शब्द अंग्रेज़ी भाषा में अचानक नहीं आया, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन अंग्रेज़ी के 'tūn' (टून) शब्द में मिलती हैं। उस समय tūn का अर्थ किसी बड़े नगर से नहीं, बल्कि बाड़ या दीवार से घिरे हुए खेत, आवास या छोटे निवास-स्थल से था। उस दौर में लोग सुरक्षा के लिए अपने घरों और पशुओं को घेराबंदी के भीतर रखते थे, इसलिए ऐसे स्थानों को tūn कहा जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">समय के साथ आबादी बढ़ी, छोटे-छोटे निवास-स्थल विकसित होकर गांव और फिर व्यवस्थित बस्तियों में बदलने लगे। इसी बदलाव के साथ tūn का अर्थ भी बदलता गया और मध्यकालीन अंग्रेज़ी में यह शब्द Town बन गया। अब इसका प्रयोग गांव से बड़ी, लेकिन शहर से छोटी बस्ती के लिए होने लगा। भाषाविदों का मानना है कि Town का संबंध जर्मन भाषा के Zaun शब्द से भी है, जिसका अर्थ बाड़ या घेरा होता है। </p>
<p style="text-align:justify;">यह समानता बताती है कि यूरोप की कई प्राचीन भाषाओं में सुरक्षित और घिरे हुए निवास-स्थल की अवधारणा एक जैसी थी। भारत में अंग्रेज़ी शासन के दौरान टाउन शब्द प्रचलन में आया। आज टाउन एरिया, टाउन हॉल और टाउनशिप जैसे शब्द प्रशासन, नगर नियोजन और दैनिक बोलचाल का हिस्सा बन चुके हैं। इस प्रकार, एक साधारण-सा शब्द अपने भीतर मानव सभ्यता, सुरक्षा और बस्तियों के विकास का रोचक इतिहास समेटे हुए है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 09:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करंट अफेयर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">    हाल ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए सुमन रोडमैप 2030 का शुभारंभ किया। इस रूपरेखा का उद्देश्य 2030 तक मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना है। साथ ही नवजात और शिशु मृत्यु दर को कम करना और रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को शून्य करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने सेशेल्स के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस समारोह के दौरान माहे के विक्टोरिया में मॉरीशस के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586280/current-affairs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/pm-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">    हाल ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए सुमन रोडमैप 2030 का शुभारंभ किया। इस रूपरेखा का उद्देश्य 2030 तक मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना है। साथ ही नवजात और शिशु मृत्यु दर को कम करना और रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को शून्य करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने सेशेल्स के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस समारोह के दौरान माहे के विक्टोरिया में मॉरीशस के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में लीडरशिप के लिए सेशेल्स के सबसे बड़े सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू हॉरिजन’ से सम्मानित किया <br />गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में भारतीय वायुसेना में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के तहत एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 51 वें वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ (वीसीएएस) का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने एयर मार्शल नागेश कपूर का स्थान लिया, जो लगभग चार दशकों की सेवा के बाद 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"> हाल ही में भारत नवीनतम AI-Economy Readiness Index में वैश्विक स्तर पर 13 वें स्थान पर रहा तथा सभी निम्न-मध्यम आय वाले देशों में प्रथम स्थान प्राप्त किया।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 09:00:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Good News : अग्निवीरों के लिए खुशखबरी... 25% नहीं अब 75% जवानों को मिल सकती है स्थायी नौकरी ! तीनों सेनाओं बना रही है भविष्य की योजना</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>डिजिटल डेस्क।</strong> वर्ष 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना (अग्निवीर योजना) में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब तक चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से केवल 25 फीसदी को ही स्थायी नियुक्ति (रिटेंशन) मिलती थी, लेकिन अब तीनों सेनाओं-थलसेना, नौसेना और वायुसेना-ने इस सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो बड़ी संख्या में अग्निवीरों को स्थायी सेवा का अवसर मिलेगा, जिससे सेना को प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों की उपलब्धता बढ़ेगी।</p>
<h5><strong>क्या है अग्निवीर योजना?</strong></h5>
<p>केंद्र सरकार ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586646/good-news--great-news-for-agniveers----now--75--of-the-soldiers-instead-of-25--will-get-permanent-jobs--find-out-the-plans-of-the-three-armed-forces"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/0113.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>डिजिटल डेस्क।</strong> वर्ष 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना (अग्निवीर योजना) में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब तक चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से केवल 25 फीसदी को ही स्थायी नियुक्ति (रिटेंशन) मिलती थी, लेकिन अब तीनों सेनाओं-थलसेना, नौसेना और वायुसेना-ने इस सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो बड़ी संख्या में अग्निवीरों को स्थायी सेवा का अवसर मिलेगा, जिससे सेना को प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों की उपलब्धता बढ़ेगी।</p>
<h5><strong>क्या है अग्निवीर योजना?</strong></h5>
<p>केंद्र सरकार ने जून 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं की भर्ती थलसेना, नौसेना और वायुसेना में चार वर्ष के लिए की जाती है। इन युवाओं को 'अग्निवीर' कहा जाता है।</p>
<h5><strong>चार साल की सेवा पूरी होने के बाद मौजूदा व्यवस्था के अनुसार...</strong></h5>
<ul>
<li>केवल 25 फीसदी अग्निवीरों को मेरिट, मेडिकल फिटनेस और सेना की आवश्यकता के आधार पर स्थायी नियुक्ति मिलती है।</li>
<li>चयनित जवान आगे कम से कम 15 वर्ष तक सेना में सेवा देते हैं।</li>
<li>उनकी मासिक तनख्वाह लगभग 40 हजार से 60 हजार रुपये तक हो सकती है।</li>
<li>शेष 75 फीसदी अग्निवीरों को लगभग 11.71 लाख रुपये का 'सेवा निधि पैकेज' दिया जाता है, जिसमें सरकार और अग्निवीर दोनों का योगदान शामिल होता है।</li>
</ul>
<p>इस योजना का उद्देश्य सेना की औसत आयु कम करना, पेंशन पर होने वाला खर्च घटाना और आधुनिक हथियारों व तकनीक पर अधिक निवेश करना था।</p>
<h5><strong>अब क्या बदलाव प्रस्तावित है?</strong></h5>
<p>मौजूदा नियम के अनुसार प्रत्येक बैच में अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को ही स्थायी सेवा दी जा सकती है। अब तीनों सेनाओं ने अपनी-अपनी जरूरतों के अनुसार इस सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है।</p>
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<div class="group TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit">
<table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)">
<thead>
<tr>
<th class="last:pe-10">सेना</th>
<th class="last:pe-10">प्रस्तावित रिटेंशन</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>नौसेना</td>
<td>75% तक</td>
</tr>
<tr>
<td>थलसेना</td>
<td>50% तक</td>
</tr>
<tr>
<td>वायुसेना</td>
<td>50% तक</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>
<p>हालांकि यह प्रस्ताव अभी अंतिम रूप में स्वीकृत नहीं हुआ है और रक्षा मंत्रालय स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।</p>
<h5><strong>रिटेंशन बढ़ाने की मांग क्यों उठी?</strong></h5>
<h5><strong>1. चार साल में पूरी विशेषज्ञता हासिल करना मुश्किल</strong></h5>
<p>सेना का मानना है कि कई तकनीकी पदों पर किसी जवान को पूरी तरह दक्ष बनने में तीन से चार वर्ष या उससे अधिक समय लग जाता है। विशेष रूप से नौसेना में कई तकनीकी शाखाओं में प्रशिक्षण की अवधि लंबी होती है। ऐसे में चार साल बाद प्रशिक्षित जवानों का बाहर हो जाना प्रशिक्षण संसाधनों का पूरा लाभ नहीं मिलने जैसा है।</p>
<h5><strong>2. आधुनिक तकनीक और हथियारों की चुनौती</strong></h5>
<p>ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीनों सेनाओं में नई तकनीकों, आधुनिक हथियारों और उन्नत प्लेटफॉर्म का तेजी से इस्तेमाल बढ़ा है। इन प्रणालियों पर दक्षता हासिल करने के लिए लंबी अवधि का प्रशिक्षण जरूरी माना जा रहा है। इसलिए सेना प्रशिक्षित अग्निवीरों को अधिक समय तक अपने साथ रखना चाहती है।</p>
<h5><strong>3. ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव</strong></h5>
<p>ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अग्निवीरों के प्रदर्शन को सकारात्मक माना गया। साथ ही सेना ने यह भी महसूस किया कि लगातार फील्ड अनुभव और लंबे समय तक सेवा देने वाले जवान कठिन परिस्थितियों में अधिक प्रभावी साबित होते हैं। इसी अनुभव के आधार पर रिटेंशन बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई।</p>
<h5><strong>4. जवानों की कमी पूरी करने की जरूरत</strong></h5>
<p>सेना में हर वर्ष बड़ी संख्या में जवान सेवानिवृत्त होते हैं। वर्तमान में करीब 1.8 लाख जवानों की कमी बताई जा रही है, जिसे अगले दो वर्षों में पूरा करने की योजना है। ऐसे में अधिक प्रशिक्षित अग्निवीरों को स्थायी सेवा देना इस कमी को दूर करने में मददगार हो सकता है।</p>
<h5><strong>अगर मंजूरी नहीं मिली तो क्या होगा?</strong></h5>
<p>यदि सरकार रिटेंशन की सीमा नहीं बढ़ाती है, तब भी सेना विशेष इकाइयों में अधिक अनुभवी अग्निवीरों को तैनात करने की रणनीति अपना सकती है। उदाहरण के तौर पर भैरव बटालियन जैसी विशेषीकृत यूनिटों में अधिक संख्या में रिटेन्ड अग्निवीर रखे जा सकते हैं, जबकि सामान्य इन्फैंट्री इकाइयों में नए अग्निवीरों की नियुक्ति जारी रह सकती है। इससे कुल रिटेंशन 25 फीसदी रहने के बावजूद महत्वपूर्ण इकाइयों में अनुभवी जवान उपलब्ध रहेंगे।</p>
<h5><strong>अग्निवीरों के लिए और क्या बदलाव संभव?</strong></h5>
<p>रिटेंशन बढ़ाने के अलावा सरकार दो अन्य प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है—</p>
<ul>
<li>ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को आजीवन आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।</li>
<li>सेवा के दौरान दिव्यांग होने वाले अग्निवीरों को आजीवन मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करना।</li>
</ul>
<p>इन प्रस्तावों का उद्देश्य अग्निपथ योजना को लेकर उठाई गई प्रमुख चिंताओं का समाधान करना माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>संभावित बदलाव का क्या होगा असर?</strong></h5>
<p>यदि रिटेंशन बढ़ाया जाता है तो इसके कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं—</p>
<ul>
<li>सेना को अधिक अनुभवी और प्रशिक्षित जवान मिलेंगे।</li>
<li>बड़ी संख्या में अग्निवीरों को स्थायी रोजगार और लंबी सेवा का अवसर मिलेगा।</li>
<li>अधिक स्थायी नियुक्तियों के कारण सरकार पर भविष्य में पेंशन का वित्तीय भार बढ़ सकता है।</li>
<li>स्थायी रिटेंशन बढ़ने से नई भर्ती के लिए उपलब्ध पदों की संख्या प्रभावित हो सकती है। हालांकि सेना अगले वर्ष लगभग 90 हजार नई भर्तियां करने की योजना पर काम कर रही है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 17:21:13 +0530</pubDate>
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