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                <title>कैंपस - Amrit Vichar</title>
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                <title>बरेली में अब कैमरे से करियर तक का सफर :  Bareilly International University में शुरू हुई फाइन आर्ट्स फैकल्टी</title>
                                    <description><![CDATA[बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने फाइन आर्ट्स के क्षेत्र में कदम बढ़ाया है। मंगलवार को फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स का शुभारंभ हुआ। यहां फोटोग्राफी और फिल्म मेकिंग के कोर्स शुरू किए गए हैं। इसके लिए बीआईयू ने दिल्ली की IIP Academy के साथ सहयोग किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591190/bareilly-international-university-fine-arts-faculty-film-making-photography"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/whatsapp-image-2026-08-18-at-9.15.52-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरेली, अमृत विचार। </strong> मेडिकल की पढ़ाई में ऊंचे मानक और अपनी पहचान बना चुकी बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने अब पढ़ाई का दायरा और बढ़ा दिया है। यूनिवर्सिटी में अब कैमरा, फोटोग्राफी, फिल्म और विजुअल आर्ट की पढ़ाई का रास्ता भी खुल गया है। यानी जिन छात्रों की दिलचस्पी कैमरे के पीछे की दुनिया में है, उनके लिए बरेली में ही सीखने का एक नया विकल्प तैयार हो गया है। मंगलवार को पूजा-अर्चना के साथ बीआईयू में फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स की शुरुआत की गई। इसके साथ ही फोटोग्राफी और फिल्म मेकिंग में प्रशिक्षण के लिए नए कोर्स की शुरुआत भी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">खास बात ये है कि फिल्म मेकिंग और फोटोग्राफी के प्रशिक्षण के लिए बीआईयू ने दिल्ली की IIP Academy के साथ हाथ मिलाया है। यानी बरेली में रहने वाले छात्रों को इन क्षेत्रों में प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए हर बार दिल्ली या मुंबई का रुख नहीं करना पड़ेगा। यूनिवर्सिटी प्रबंधन के मुताबिक, छात्रों को लघु फिल्म बनाने से लेकर बड़े पर्दे पर काम करने तक की बारीकियां सिखाई जाएंगी। विश्वविद्याल प्रबंधन के अनुसार, एफएफए के माध्यम से स्टूडेंट यहां लघु फिल्में और बड़े पर्दे पर काम करने के लिए प्रशिक्षण हासिल कर सकें और फिल्म मेकिंग के क्षेत्र में अपना करियर संवार सकेंगे।</p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/whatsapp-image-2026-08-19-at-12.49.45-am.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-08-19 at 12.49.45 AM" width="1600" height="1066"></img>
फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के शुभारंभ से पहले बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में विधिवत पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।

<h4 style="text-align:justify;"> </h4>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>देश के विकास में भी योगदान : कुलाधिपति डा. केशव अग्रवाल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डा.केशव अग्रवाल ने बताया कि बीआईयू में फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स शुरू करने की पहल न सिर्फ स्टूडेंट्स के जीवन में उन्नति के नए रास्ते खोलेगी, बल्कि बरेली के साथ देश के विकास में भी योगदान देगी। निदेशक डा. वरुण अग्रवाल ने बताया कि बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी मेडिकल जगत में अहम स्थान बना चुकी है। सभी प्रकार के मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कोर्सेज बीआईयू में संचालित हो रहे हैं। स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स शुरू कर रहे हैं, जो आईआईपी एकेडमी दिल्ली के साथ कोलैबोरेशन में स्टार्ट किया गया है। इससे फोटोग्राफी और कल्चरल एक्टिविटीज को बीआईयू कैंपस में बढ़ावा मिलेगा। जो स्टूडेंट्स इन सब एक्टिविटीज में एनरोल और कोर्स करना चाहते हैं, उन्हें हर प्रकार की सुविधा मिलेगी। </p>
<p style="text-align:justify;"> कुलाधिपति डा.केशव अग्रवाल ने  कहा कि सभी जानते हैं कि नया दौर सोशल मीडिया का है। इसमें फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी बहुत ही आवश्यक रोल प्ले करता है। इसी को देखते हुए बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट की शुरूआत की है। बीआईयू ने दिल्ली के जाने-माने फोटोग्राफी इंस्टीट्यूट आईआईपी  के साथ कोलैबोरेशन में कोर्सेज शुरू किए हैं। फैक्ल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के शुभारंभ के अवसर पर हुई पूजा-अर्चना बीआईयू कुलाधिपति डॉ. केशव अग्रवाल, कुलपति डॉ. लता अग्रवाल, प्राधिकुलाधिपति डॉ. अशोक कुमार अग्रवाल, प्रति-कुलपति डॉ. किरण अग्रवाल, निदेशक डॉ. वरुण अग्रवाल, डॉ. अर्जुन अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा, डॉ. चीना गर्ग उपस्थित रहे। </p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer" style="text-align:justify;"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/RBaHsYBL7Mw" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बेहतरीन शोध संस्थान बनाने की दिशा में बड़ा कदम : राजेश गोयल </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आईआईपी एकेडमी के फाउंडर डायरेक्टर राजेश गोयल ने बताया की बीआईयू और आईआईपी का यह कोलैबोरेशन बरेली में बेहतरीन शोध संस्थान बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसमें फोटोग्राफी, फ़िल्म मेकिंग और अन्य कई प्रकार के विजुअलपूरे भारत से स्टूडेंट्स पढ़ाई करने आ रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>प्रशिक्षण लेने वाले स्टूडेंट्स का प्लेसमेंट होगा आसान: सीओओ पार्थो कुनार </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अमृत विचार के सीओओ पार्थो कुनार ने कहा कि बीआईयू में फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स उत्तर भारत के साथ दिल्ली-लखनऊ के बीच पहला ग्लोबल इन्फास्ट्रक्चर वाला कैंपस है। यहां की फैकल्टी प्रोफेशनली ट्रेंड होने के साथ इंडस्ट्री से भी सीधा जुड़ाव रखती है। यही वजह है कि बीआईयू में प्रशिक्षण लेने वाले स्टूडेंट्स को आसानी से अच्छे प्लेसमेंट के अवसर भी प्रदान होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 01:20:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anuj Sharma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉलेज का पहला दिन: घबराहट से आत्मविश्वास तक का यादगार सफर</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल की सीमाओं से निकलकर कॉलेज की नई दुनिया में कदम रखने का अनुभव रहा खास, पहली कक्षा से नए दोस्तों तक हर पल बना यादगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590750/college-first-day-experience-bba-student-tanishka-singh"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/student.png" alt=""></a><br /><p>कॉलेज का पहला दिन जिंदगी के उन दिनों में से एक होता है, जिसे चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। मेरे लिए भी बीबीए छात्रा के रूप में कॉलेज का पहला दिन उत्साह, घबराहट और अनजाने सपनों से भरा हुआ था। स्कूल की चारदीवारी से निकलकर कॉलेज की दुनिया में कदम रखने का एहसास ही कुछ अलग था। </p>
<p>सुबह से ही मन में एक अजीब-सी हलचल थी। नए कपड़े पहनकर, जरूरी सामान से भरा बैग लेकर जब घर से निकली तो मन में बार-बार यही सवाल घूम रहा था कि कॉलेज कैसा होगा, शिक्षक कैसे होंगे और क्या मैं नए दोस्तों के बीच सहज हो पाऊंगी। कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही विद्यार्थियों की भीड़ देखकर मेरी धड़कन थोड़ी तेज हो गई। कोई अपने दोस्तों से मिल रहा था, कोई कक्षा का रास्ता पूछ रहा था तो कोई मोबाइल से तस्वीरें खींच रहा था।</p>
<p>कैंपस में प्रवेश करते ही सबसे पहले मेरी नजर कॉलेज की इमारत, पुस्तकालय और आसपास के हरे-भरे वातावरण पर पड़ी। स्कूल की तुलना में यहां सब कुछ अधिक स्वतंत्र और बड़ा लग रहा था। कुछ देर बाद अपनी कक्षा खोजते हुए मैं कमरे तक पहुंची। वहां पहले से कई छात्र-छात्राएं बैठे हुए थे। शुरुआत में मैं थोड़ी संकोच में थी और चुपचाप अपनी सीट पर बैठ गई।</p>
<p>कुछ ही देर में हमारी पहली कक्षा शुरू हुई। शिक्षक ने मुस्कुराते हुए सभी विद्यार्थियों का स्वागत किया और बीबीए पाठ्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेज की पढ़ाई केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह हमें निर्णय लेना, नेतृत्व करना और भविष्य की चुनौतियों का सामना करना भी सिखाती है। उनकी बातें सुनकर मेरे भीतर एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ।</p>
<p>ब्रेक के दौरान मेरी मुलाकात कुछ सहपाठियों से हुई। थोड़ी झिझक के बाद बातचीत शुरू हुई और देखते ही देखते हम एक-दूसरे के नाम और रुचियां जानने लगे। उस दिन घर लौटते समय सुबह वाली घबराहट पूरी तरह गायब हो चुकी थी।</p>
<p>बीबीए छात्रा के रूप में कॉलेज का वह पहला दिन मेरे लिए केवल नए संस्थान में प्रवेश का दिन नहीं था, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ाए गए पहले कदम जैसा था। आज भी उस दिन को याद करती हूं तो चेहरे पर मुस्कान और मन में वही उत्साह लौट आता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-तनिष्का सिंह, छात्रा, बीबीए, SRMSCET बरेली</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>बरेली</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 05:02:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऐसे हुई ‘Account’ शब्द की उत्पत्ति, जानिए गणना से डिजिटल पहचान तक का दिलचस्प सफर</title>
                                    <description><![CDATA[‘Account’ शब्द आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। बैंक अकाउंट से लेकर सोशल मीडिया प्रोफाइल और हिसाब-किताब तक, इसका इस्तेमाल लगभग हर जगह होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस शब्द की शुरुआत कहां से हुई और यह अपने मौजूदा अर्थ तक कैसे पहुंचा?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590749/account-word-origin-history-computare-acont"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/account-word-origin,-word-smith.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">‘अकाउंट’ शब्द आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। बैंक अकाउंट, सोशल मीडिया अकाउंट, हिसाब-किताब या किसी कंपनी का लेखा—हर जगह इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शब्द की जड़ें हजारों साल पुरानी हैं? ‘Account’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के ‘computare’ से मानी जाती है, जिसका अर्थ था—गणना करना या हिसाब लगाना। बाद में लैटिन से यह शब्द पुरानी फ्रांसीसी भाषा में ‘acont’ के रूप में पहुंचा। मध्यकालीन अंग्रेजी में इसका रूप ‘account’ बना और धीरे-धीरे इसका अर्थ किसी चीज का हिसाब, विवरण या रिकॉर्ड हो गया। व्यापार के विस्तार के साथ अकाउंट शब्द का महत्व भी बढ़ता गया। व्यापारी अपने लेन-देन का लिखित रिकॉर्ड रखने लगे और आय-व्यय का पूरा हिसाब तैयार किया जाने लगा। इसी से ‘account’ का संबंध वित्तीय लेखांकन से मजबूत हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">समय के साथ इसका अर्थ केवल पैसों के हिसाब तक सीमित नहीं रहा। किसी घटना का विवरण देना भी ‘to account for’ कहलाने लगा। आधुनिक डिजिटल युग में यही शब्द ऑनलाइन पहचान के लिए भी इस्तेमाल होने लगा—जैसे ई-मेल अकाउंट, बैंक अकाउंट और सोशल मीडिया अकाउंट। इस तरह ‘अकाउंट’शब्द ने गणना से हिसाब और फिर डिजिटल पहचान तक का लंबा सफर तय किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
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                <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 05:00:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुस्तकों से परे एक दृष्टा थे डॉ. एस. आर. रंगनाथन, जिन्होंने पुस्तकालय को बनाया ज्ञान का जीवंत केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[गणित के शिक्षक से ‘पुस्तकालय विज्ञान के जनक’ तक का सफर; रंगनाथन के पांच सूत्र आज ई-लाइब्रेरी, ओपन एक्सेस और डिजिटल शिक्षा के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590748/s-r-ranganathan-father-of-library-science-five-laws-national-librarian-day"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/dr.-s.r.-ranganathan-.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत में जब शिक्षा को केवल अक्षर-ज्ञान और पुस्तकालय को केवल किताबों का गोदाम समझा जाता था, तब एक व्यक्ति ने पुस्तकालय को एक जीवंत, लोकतांत्रिक और सामाजिक संस्था के रूप में परिभाषित किया। अद्भुत मेधा के धनी वह व्यक्ति थे - डॉ. शियाली रामामृत रंगनाथन जिन्हें आज पूरा विश्व ‘पुस्तकालय विज्ञान के जनक’ के रूप में नमन करता है। </p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. रंगनाथन का जीवन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि एक विचार कैसे पूरे राष्ट्र की ज्ञान-संस्कृति को बदल सकता है। यह संयोग ही था कि गणित के प्राध्यापक रहे रंगनाथन 1924 में मद्रास विश्वविद्यालय के प्रथम पुस्तकालयाध्यक्ष बने। यह संयोग भारत के लिए सौभाग्य बन गया। उन्होंने लंदन जाकर पुस्तकालय विज्ञान का गहन अध्ययन किया और लौटकर उसे भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया, जो भारत में पुस्तकालय संस्कृति के सुव्यवस्थित विकास का आधार बना।</p>
<p style="text-align:justify;">पुस्तकालयों को विकसित करने की दिशा में रंगनाथन जी ने पांच प्रमुख सूत्र दिए, जो आज के डिजिटल युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं और पुस्तकालयों की आत्मा हैं -यह सूत्र थे ‘पुस्तकें उपयोग के लिए हैं। प्रत्येक पाठक को उसकी पुस्तक मिले। प्रत्येक पुस्तक को उसका पाठक मिले। पाठक का समय बचाइए तथा पुस्तकालय एक वर्धनशील संस्था है।’</p>
<p style="text-align:justify;">उनके द्वारा कहे गए ये पांच वाक्य केवल नियम नहीं, एक दर्शन हैं। पहला नियम कहता है कि पुस्तकें ताले में बंद रखने के लिए नहीं हैं। दूसरा और तीसरा नियम ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की बात करता है- जाति, धर्म और वर्ग से परे हर पाठक का अधिकार। चौथा नियम पाठक के सम्मान का नियम है और पांचवां नियम दूरदर्शिता का कि पुस्तकालय को समय के साथ बढ़ना, बदलना और तकनीक को अपनाना होगा। आज जब हम ई-लाइब्रेरी, ओपन एक्सेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात करते हैं, तो ये पांचों नियम ही उसका आधार बनते हैं। डॉ. रंगनाथन केवल सिद्धांतकार नहीं थे, वे एक कर्मयोगी निर्माता थे। उन्होंने पुस्तकों के वर्गीकरण के लिए ‘द्विबिंदु वर्गीकरण पद्धति’ (कोलन क्लासिफिकेशन) बनाई, जिसने पुस्तकों को खोजना अत्यंत वैज्ञानिक और सरल बना दिया। ‘क्लासिफाइड कैटलॉग कोड’ के द्वारा उन्होंने पुस्तकों की सूची बनाने की एक मानक पद्धति दी। उनके ही प्रयासों से 1948 में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना हुई और ‘राष्ट्रीय पुस्तकालय नीति’ की नींव पड़ी। वे ही थे, जिन्होंने कहा था कि ‘हर गांव में पुस्तकालय होना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे कुआं होता है।’</p>
<p style="text-align:justify;">आज जब हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में पुस्तकालयों को ‘लर्निंग हब’ बनाने की बात कर रहे हैं, तो हमें समझना होगा कि रंगनाथन ने यह स्वप्न सौ वर्ष पहले ही देख लिया था। जरूरत यह है कि इस सपने को साकार करते हुए निरंतरता दी जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह तकनीक-समृद्ध समय है, पर चिंता का विषय भी है कि डिजिटल क्रांति के शोर में हमारे सार्वजनिक पुस्तकालय कहीं-न-कहीं उपेक्षित हो रहे हैं। कई शहरों में पुस्तकालय भवन तो हैं, पर नई पुस्तकें नहीं हैं, पुस्तकालयाध्यक्ष नहीं हैं, इंटरनेट नहीं है। युवा पीढ़ी गूगल पर सर्च तो करती है, पर शोध करने, संदर्भ जांचने और गहन-पठन की आदत लगभग खोती जा रही है। ऐसे समय में रंगनाथन जी को याद करना जरूरी हो जाता है। विशेषकर पठन-संस्कृति के विकास के संदर्भ में। इसके लिए हमें अपने पुस्तकालयों को निरंतर समृद्ध और जीवंत करना होगा। हर स्कूल, हर तहसील और हर ग्राम पंचायत का पुस्तकालय वाई-फाई, अच्छी पुस्तकों, प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष और बुजुर्गों-बच्चों के लिए सुरक्षित और समृद्ध पठन-स्थल से युक्त हो, यह हम सबकी प्राथमिकताओं में होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. रंगनाथन कहते थे- “पुस्तकालय केवल कमरा भर नहीं, वह समाज का हृदय है। जिस समाज के पुस्तकालय जीवित हैं, उस समाज का भविष्य भी जीवित है।” एस. आर. रंगनाथन जी का जन्मदिन 12 अगस्त को भारत में ‘राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि केवल इमारतें बनाने से देश नहीं बनता, बल्कि सक्रिय पाठक बनाने तथा पठन-संस्कृति के विकास से देश बनता है। पुस्तकालय क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रंगनाथन जी को वर्ष 1957 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। पुस्तकालय विज्ञान को एक आधुनिक एवं गतिशील विषय के रूप में परिवर्तित करने के कारण भारत ही नहीं, पूरे विश्व में उन्हें सदैव याद किया जाता रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>- डॉ. अवनीश यादव, प्रान्तीय शिक्षा सेवा संवर्ग, उ०प्र०</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 06:59:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Current Affairs: केरल नाम परिवर्तन से लेकर मिथिला मखाना निर्यात तक, जानें 7 महत्वपूर्ण घटनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[केरल के नाम परिवर्तन विधेयक से लेकर बंगाल की खाड़ी में ओजोन की असामान्य सांद्रता तक, BRICS संस्कृति बैठक, मिथिला मखाना निर्यात और भारत-अमेरिका नौसेना अभ्यास समेत जानें आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590751/current-affairs-kerala-know-7-important-events-from-name-change"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/current-affairs.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">- हाल ही में लोक सभा ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को पारित किया हुआ। प्रस्तावित नाम परिवर्तन को संविधान के अनुच्छेद 3 से जोड़ा गया है, जो मौजूदा राज्य के नाम में परिवर्तन की प्रक्रिया निर्धारित करता है। मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ के नाम से जाना जाता है, जबकि संविधान की पहली अनुसूची में इसका नाम ‘केरल’ दर्ज है।</p>
<p style="text-align:justify;">- हाल ही में वैज्ञानिकों ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर वायुमंडल की ऊपरी परत में ओजोन की असामान्य रूप से उच्च सांद्रता का पता लगाया। यह अप्रत्याशित खोज शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद कर रही है कि वायु धाराएं समताप मंडल के माध्यम से ओजोन का परिवहन किस प्रकार करती हैं। यह अध्ययन NetRAD-ASMA अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत किया गया, जो एक राष्ट्रव्यापी वैज्ञानिक कार्यक्रम है और इसमें भारत के विभिन्न शोध संस्थानों ने भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">- हाल ही में भोपाल में 11 वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें भोपाल घोषणा को अपनाया गया। इसमें ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग, रचनात्मक उद्योगों तथा जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने के लिए एक रूपरेखा निर्धारित की गई है। बैठक में 14 देशों-10 ब्रिक्स सदस्य देशों और 4 साझेदार देशों ने भाग लिया। इसमें कुल 55 प्रतिनिधि शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">- हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छिंदवाड़ा से 6 माह की अवधि वाले ‘जन विश्वास अभियान’ का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य प्रशासन और नागरिकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को मजबूत करना, शिकायतों का समयबद्ध निवारण सुनिश्चित करना तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार करना है। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्यक्ष संवाद को मजबूत करना, शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना, सरकारी योजनाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त करना तथा प्रशासनिक जवाबदेही को बढ़ाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">- हाल ही में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने बिहार से ऑस्ट्रेलिया के लिए जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना की पहली वाणिज्यिक समुद्री खेप भेजने में सहायता की। इस खेप में 18 मीट्रिक टन मखाना शामिल था। भारत के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है।</p>
<p style="text-align:justify;">- हाल ही में कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के मध्य विस्फोटक आयुध निस्तारण अभ्यास 2026 का शुभारंभ हुआ। 5 दिवसीय द्विपक्षीय अभ्यास है, जो 14 अगस्त, 2026 तक चलेगा। अभ्यास में विषय विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान, क्रॉस-ट्रेनिंग, उपकरणों का प्रदर्शन तथा परिदृश्य-आधारित व्यावहारिक अभ्यास शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारतीय एवं अमेरिकी नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता में सुधार तथा पेशेवर सहयोग को सुदृढ़ करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">- हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया। पुस्तक में रामनाथ कोविंद के जीवन-प्रवास, संघर्षों, सार्वजनिक जीवन के अनुभवों तथा राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को प्रस्तुत किया गया है।</p>
<h3 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><span><strong>एक नजर में महत्वपूर्ण तथ्य</strong></span></h3>
<div class="group TyagGW_tableContainer">
<div class="TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit">
<table>
<thead>
<tr>
<th style="text-align:center;">घटना</th>
<th style="text-align:center;">महत्वपूर्ण तथ्य</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;">केरल नाम परिवर्तन</td>
<td style="text-align:center;">केरलम, अनुच्छेद 3</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;">ओजोन अध्ययन</td>
<td style="text-align:center;">उत्तरी बंगाल की खाड़ी, NetRAD-ASMA</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;">BRICS संस्कृति बैठक</td>
<td style="text-align:center;">भोपाल, भोपाल घोषणा</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;">जन विश्वास अभियान</td>
<td style="text-align:center;">मध्य प्रदेश, 6 महीने</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;">मिथिला मखाना</td>
<td style="text-align:center;">बिहार से ऑस्ट्रेलिया, 18 MT</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;">EOD अभ्यास 2026</td>
<td style="text-align:center;">भारत-अमेरिका नौसेना, कोच्चि</td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;">रामनाथ कोविंद की आत्मकथा</td>
<td style="text-align:center;"><em>Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles</em></td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 16:12:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदेशी विश्वविद्यालयों की भारत में दस्तक: अवसर बड़ा या नई चुनौती? जानिए भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर क्या होगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा के नए विकल्प मिल सकते हैं, लेकिन फीस, गुणवत्ता, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण को लेकर कई सवाल भी सामने हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590746/foreign-universities-in-india-opportunity-or-challenge-for-higher-education"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/foreign-universities-in-india.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करना भारतीय युवाओं के लिए केवल एक सपना नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य का पर्याय माना जाता था। लाखों छात्र हर वर्ष अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य विकसित देशों की ओर रुख करते रहे हैं। इसके पीछे केवल बेहतर डिग्री नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक शोध संस्कृति और वैश्विक अवसरों की तलाश रही है। अब पहली बार तस्वीर बदल रही है। दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय स्वयं भारत की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव केवल परिसरों का स्थानांतरण नहीं, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने का जो सपना देखा था, वह अब धीरे-धीरे जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 2023 में बनाए गए नियमों के बाद विश्व के प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भारत में अपने परिसर स्थापित करने का मार्ग खुला। वर्ष 2026-27 तक 13 विदेशी विश्वविद्यालय भारत में शिक्षण कार्य प्रारम्भ कर चुके हैं, जबकि अनेक अन्य विश्वविद्यालय मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और गुजरात के GIFT सिटी जैसे केंद्रों में अपने परिसरों की स्थापना की तैयारी कर रहे हैं। यह संकेत है कि वैश्विक शिक्षा अब भारत को केवल छात्र भेजने वाला देश नहीं, बल्कि शिक्षा का उभरता हुआ गंतव्य भी मानने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की जनसांख्यिकीय स्थिति इस परिवर्तन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। देश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 4.3 करोड़ से अधिक है, जो विश्व में सबसे बड़ी छात्र आबादियों में से एक है। इसके बावजूद गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की उपलब्धता सीमित है। दूसरी ओर, 13 लाख से अधिक भारतीय विद्यार्थी आज विदेशों में अध्ययन कर रहे हैं और भारतीय परिवार इस पर हर वर्ष अनुमानतः 60 से 70 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च करते हैं। यदि इन छात्रों का एक बड़ा वर्ग भारत में ही विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सके, तो इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि प्रतिभा का पलायन भी कम हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि विदेशी विश्वविद्यालयों का आगमन केवल शिक्षा तक सीमित घटना नहीं है। यह भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार का भी अवसर है। जहां ऐसे विश्वविद्यालय स्थापित होंगे, वहां शोध संस्थान, नवाचार केंद्र, स्टार्टअप, तकनीकी कंपनियां और उच्च कौशल वाले रोजगार विकसित होने की संभावना बढ़ेगी। आधुनिक विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहते, वे अपने आसपास एक संपूर्ण आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं। भारत यदि आने वाले वर्षों में ज्ञान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करना चाहता है, तो ऐसे संस्थानों की भूमिका निर्णायक हो सकती है, लेकिन इस परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय विश्वविद्यालयों पर पड़ेगा। वर्षों से उच्च शिक्षा व्यवस्था पाठ्यक्रमों के धीमे अद्यतन, सीमित शोध, उद्योगों से कमजोर जुड़ाव और प्रशासनिक जटिलताओं जैसी समस्याओं से जूझ रही है। विदेशी विश्वविद्यालयों की उपस्थिति भारतीय संस्थानों के लिए चुनौती भी होगी और प्रेरणा भी। अब गुणवत्ता, शोध, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा केवल आदर्श नहीं रहेंगे, बल्कि अस्तित्व की शर्त बनेंगे। यह प्रतिस्पर्धा यदि सकारात्मक रही, तो भारतीय विश्वविद्यालय भी अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार करने को बाध्य होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण प्रश्न हमारी सांस्कृतिक पहचान का भी है। क्या विदेशी विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा व्यवस्था को पश्चिमी रंग में रंग देंगे? यह चिंता स्वाभाविक है, लेकिन इसका उत्तर नकारात्मक नहीं होना चाहिए। भारत की शिक्षा परंपरा सदैव संवाद और समन्वय की रही है। प्राचीन नालंदा और तक्षशिला में विश्व के अनेक देशों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। भारतीय ज्ञान परंपरा कभी भी बाहरी विचारों से भयभीत नहीं हुई, उसने उन्हें आत्मसात कर अपनी विशिष्टता बनाए रखी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बौद्धिक विरासत को पाठ्यक्रमों में उचित स्थान</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत की बौद्धिक विरासत को अपने पाठ्यक्रमों में उचित स्थान दें। यदि प्रबंधन की शिक्षा में हार्वर्ड के केस स्टडी के साथ कौटिल्य के अर्थशास्त्र का अध्ययन हो, यदि पर्यावरण विज्ञान में आधुनिक जलवायु नीतियों के साथ भारतीय पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को भी महत्व मिले और यदि सार्वजनिक नीति के विद्यार्थियों को गांधी, अम्बेडकर और विवेकानंद के विचारों से भी परिचित कराया जाए, तभी यह वैश्वीकरण भारतीय संदर्भ में सार्थक सिद्ध होगा। अंतर्राष्ट्रीयकरण का अर्थ भारतीयता का विस्थापन नहीं, बल्कि उसका विस्तार होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी कुछ गंभीर चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सबसे बड़ी चिंता इन विश्वविद्यालयों की फीस को लेकर है। यद्यपि भारत में पढ़ाई करने से विदेश जाने की तुलना में रहने और यात्रा का खर्च कम होगा, लेकिन शिक्षण शुल्क अभी भी अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भारी हो सकता है। यदि वैश्विक शिक्षा केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित रह गई, तो उच्च शिक्षा में असमानता और गहरी हो सकती है। इसलिए छात्रवृत्तियां, आय-आधारित शुल्क व्यवस्था, शिक्षा ऋण और उद्योगों की भागीदारी जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गुणवत्ता की चुनौती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत स्थित परिसर तभी सफल माने जाएंगे, जब वे वही शैक्षणिक स्तर, वही शोध संस्कृति और वही डिग्री गुणवत्ता प्रदान करें, जिसके लिए उनका मूल परिसर विश्वभर में प्रतिष्ठित है। केवल प्रसिद्ध नामों वाले, लेकिन कमजोर गुणवत्ता वाले परिसरों को भारत में स्थान नहीं मिलना चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की जिम्मेदारी होगी कि वह नियमित मूल्यांकन, पारदर्शी प्रत्यायन और कठोर गुणवत्ता मानकों के माध्यम से इस व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखे।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे अधिक आशा अनुसंधान के क्षेत्र से है। भारत वैश्विक वैज्ञानिक शोध प्रकाशनों में लगभग 5 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि अनुसंधान एवं विकास पर कुल व्यय अभी भी जीडीपी का लगभग 0.6-0.7 प्रतिशत है। विदेशी विश्वविद्यालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा, वित्तीय प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य विज्ञान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और उद्योग आधारित नवाचार को नई गति दे सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो भारत केवल ज्ञान का उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ज्ञान निर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक उत्कृष्टता और भारतीयता में संतुलन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">वास्तविक प्रश्न यह नहीं है कि भारत में कितने विदेशी विश्वविद्यालय आएंगे। असली प्रश्न यह है कि वे भारत को कितना बदल पाएंगे और भारत उन्हें कितना भारतीय बना पाएगा। यदि यह प्रक्रिया केवल विदेशी डिग्रियों का विस्तार बनकर रह गई, तो इसका प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन यदि यह भारतीय विश्वविद्यालयों में सुधार, अनुसंधान संस्कृति के विकास, नवाचार को बढ़ावा और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार का माध्यम बनी, तो यह स्वतंत्र भारत की उच्च शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय सिद्ध हो सकती है। भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसे वैश्विक उत्कृष्टता और भारतीय आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करना है। यदि यह संतुलन सफलतापूर्वक स्थापित हो गया, तो आने वाले वर्षों में भारतीय विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि संभव है कि विश्व के विद्यार्थी ज्ञान की खोज में भारत आएं। यही वह परिवर्तन होगा, जो भारत को केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश नहीं, बल्कि विश्व की अग्रणी ज्ञान महाशक्ति भी बनाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ. एस. के. द्विवेदी, सहायक आचार्य </strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:49:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करेंट अफेयर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">-हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">-हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता (ANSFs) योजना को 36,441 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत प्रतिभाओं की प्रारंभिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590057/current-affairs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/_current-affairs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">-हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">-हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता (ANSFs) योजना को 36,441 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत प्रतिभाओं की प्रारंभिक पहचान एवं विद्यालयी शिक्षा के साथ खेलों के एकीकरण के लिए खेलो इंडिया फीडर स्कूल (KIFS) तथा खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय (KIUV) स्थापित किए जाएंगे खिलाड़ियों के विकास हेतु इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (E-KIA) नामक नई श्रेणी शुरू की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">-हाल ही में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर समग्र पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। राष्ट्रमंडल खेलों में ऑस्ट्रेलिया 171 पदकों (70 स्वर्ण, 45 रजत, 56 कांस्य) के साथ शीर्ष पर रहा। इंग्लैंड 110 पदकों (29 स्वर्ण, 45 रजत, 36 कांस्य) के साथ दूसरे तथा कनाडा 62 पदकों (19 स्वर्ण, 20 रजत, 23 कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">-हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के मैसूरु में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र ‘विवेक स्मारक’ का उद्घाटन किया। इस केंद्र की स्थापना युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के आधार पर राष्ट्रसेवा, सामाजिक कल्याण तथा नेतृत्व के लिए प्रेरित करने हेतु की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">-हाल ही में महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने राज्यभर के स्कूल परिसरों के भीतर तथा स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में अधिक वसा, अधिक चीनी एवं गहरे तेल में तले हुए खाद्य पदार्थों  की बिक्री, वितरण तथा विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना तथा अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के उपभोग को कम करना है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 10:00:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोटिस बोर्ड  :  एलएलएम अगस्त के अंतिम सप्ताह में प्रवेश परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 हेतु एलएल.एम. पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जाएगी। विधि अध्ययन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर आदित्य सिंह एवं प्रभारी डॉ जयशंकर ओझा ने बताया कि एलएल.एम. पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (एलएल.बी.) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवेश के लिए सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए विधि स्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक, जबकि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम K45 प्रतिशत अंक निर्धारित किए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590055/notice-board-llm-entrance-exam-last-week-august"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/notice-board.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 हेतु एलएल.एम. पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जाएगी। विधि अध्ययन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर आदित्य सिंह एवं प्रभारी डॉ जयशंकर ओझा ने बताया कि एलएल.एम. पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (एलएल.बी.) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवेश के लिए सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए विधि स्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक, जबकि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम K45 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। विश्वविद्यालय ने इच्छुक अभ्यर्थियों से समय रहते समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण कर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करने तथा प्रवेश परीक्षा की तैयारी प्रारंभ करने का आग्रह किया है। प्रवेश परीक्षा की तिथि, समय एवं अन्य विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट एवं सूचना माध्यमों के द्वारा शीघ्र जारी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/590055/notice-board-llm-entrance-exam-last-week-august</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 16:38:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कैंपस का पहला दिन :  आत्मविश्वास की नई उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">जीवन में कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो समय बीत जाने के बाद भी स्मृतियों में वैसे ही ताजा बने रहते हैं। मेरे लिए बीएससी की छात्रा के रूप में कॉलेज का पहला दिन भी ऐसा ही एक अविस्मरणीय अनुभव था। स्कूल की सीमित दुनिया से निकलकर कॉलेज के विशाल और स्वतंत्र वातावरण में कदम रखना मेरे जीवन का एक नया अध्याय था। मन में उत्साह भी था, जिज्ञासा भी और हल्की-सी घबराहट भी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह जब मैं कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंची, तो उसकी भव्य इमारत, हरे-भरे परिसर और विद्यार्थियों की चहल-पहल देखकर मन रोमांचित हो उठा। ऐसा लग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590054/first-day-of-campus-new-flight-of-confidence"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/first-day-on-campus.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीवन में कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो समय बीत जाने के बाद भी स्मृतियों में वैसे ही ताजा बने रहते हैं। मेरे लिए बीएससी की छात्रा के रूप में कॉलेज का पहला दिन भी ऐसा ही एक अविस्मरणीय अनुभव था। स्कूल की सीमित दुनिया से निकलकर कॉलेज के विशाल और स्वतंत्र वातावरण में कदम रखना मेरे जीवन का एक नया अध्याय था। मन में उत्साह भी था, जिज्ञासा भी और हल्की-सी घबराहट भी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह जब मैं कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंची, तो उसकी भव्य इमारत, हरे-भरे परिसर और विद्यार्थियों की चहल-पहल देखकर मन रोमांचित हो उठा। ऐसा लग रहा था मानो मैं अपने सपनों की दुनिया में प्रवेश कर रही हूं। चारों ओर नए चेहरे थे। कोई अपने दोस्तों के साथ हंस-बोल रहा था, तो कोई मेरी ही तरह संकोच में इधर-उधर देख रहा था। मैं भी अपने मन की धड़कनों को संभालते हुए प्रवेश द्वार से भीतर चली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ही देर में परिचय सत्र शुरू हुआ। हमारी कक्षा में आए अध्यापकों ने मुस्कुराते हुए हमारा स्वागत किया और कॉलेज के नियमों, पढ़ाई के तरीके तथा अनुशासन के बारे में विस्तार से बताया। स्कूल की तरह यहां हर बात पर निगरानी नहीं थी, बल्कि स्वयं जिम्मेदार बनकर सीखने की प्रेरणा दी जा रही थी। तभी मुझे पहली बार महसूस हुआ कि कॉलेज केवल डिग्री हासिल करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को संवारने की एक कार्यशाला भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरी बगल में बैठी एक छात्रा से बातचीत शुरू हुई। कुछ ही मिनटों में औपचारिक परिचय सहज मित्रता में बदलने लगा। हम दोनों ने अपनी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में बातें कीं। उस दिन बने कुछ परिचय आगे चलकर जीवनभर की यादगार दोस्ती में बदल गए। आज भी उन शुरुआती मुलाकातों को याद करती हूं तो चेहरे पर अनायास मुस्कान आ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहली बार विज्ञान प्रयोगशाला देखने का अनुभव भी बेहद रोमांचक था। चमचमाते उपकरण, रसायनों की शीशियां और व्यवस्थित प्रयोगशाला देखकर मन में वैज्ञानिक बनने के सपने और मजबूत हो गए। ऐसा लगा कि अब किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को अपनी आंखों के सामने सच होते देखने का अवसर मिलेगा। उस क्षण पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान की खोज का सुंदर सफर प्रतीत हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनभर की हलचल के बाद जब मैं घर लौटी, तो मन में एक अलग ही आत्मविश्वास था। सुबह जो घबराहट थी, उसकी जगह अब नई उम्मीदों और उत्साह ने ले ली थी। मुझे महसूस हुआ कि जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव शुरू हो चुका है, जहां हर दिन कुछ नया सीखने, स्वयं को पहचानने और अपने सपनों को आकार देने का अवसर मिलेगा। आज  मैं बीएससी के छठे सेमेस्टर में हूं। छात्रा के रूप में कॉलेज का वह पहला दिन याद आता है तो मन उसी उत्साह से भर उठता है। वह दिन केवल एक नई कक्षा की शुरुआत नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और नए सपनों की ओर बढ़ाया गया पहला सशक्त कदम था। </p>
<h5 style="text-align:justify;">रितिका सिंह, छात्रा बीएससी, एसएस विश्वविद्यालय, शाहजहांपुर </h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 08:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एग्रीकल्चर डिग्री के बाद सरकारी सेक्टर में करियर की अपार संभावनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कृषि आज केवल खेतों तक सीमित विषय नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक, बैंकिंग, ग्रामीण विकास, कृषि अनुसंधान और सरकारी योजनाओं के विस्तार ने इस क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं। यही वजह है कि बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी एग्रीकल्चर करने वाले युवाओं के लिए सरकारी क्षेत्र में करियर की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यदि सही दिशा में तैयारी की जाए तो बैंक, अनुसंधान संस्थान, कृषि विभाग और सार्वजनिक उपक्रमों में प्रतिष्ठित पद हासिल किए जा सकते हैं। अच्छी सैलरी, नौकरी की सुरक्षा, पदोन्नति के अवसर और किसानों के साथ सीधे जुड़कर देश के विकास में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590051/immense-career-opportunities-government-sector-agriculture-degree"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/agriculture-degree-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कृषि आज केवल खेतों तक सीमित विषय नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक, बैंकिंग, ग्रामीण विकास, कृषि अनुसंधान और सरकारी योजनाओं के विस्तार ने इस क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं। यही वजह है कि बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी एग्रीकल्चर करने वाले युवाओं के लिए सरकारी क्षेत्र में करियर की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यदि सही दिशा में तैयारी की जाए तो बैंक, अनुसंधान संस्थान, कृषि विभाग और सार्वजनिक उपक्रमों में प्रतिष्ठित पद हासिल किए जा सकते हैं। अच्छी सैलरी, नौकरी की सुरक्षा, पदोन्नति के अवसर और किसानों के साथ सीधे जुड़कर देश के विकास में योगदान देने का अवसर इस क्षेत्र को और भी आकर्षक बनाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बैंकिंग सेक्टर में एएफओ का शानदार विकल्प</h3>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/agriculture-degree.jpg" alt="agriculture degree" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">कृषि स्नातकों के लिए बैंकिंग क्षेत्र सबसे लोकप्रिय करियर विकल्पों में से एक है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सिलेक्शन (आईबीपीएस) द्वारा आयोजित एग्रीकल्चर फील्ड ऑफिसर (एएफओ) भर्ती के माध्यम से विभिन्न सरकारी बैंकों में नियुक्ति की जाती है। इस पद पर कार्यरत अधिकारी किसानों को कृषि ऋण, फसल बीमा, सरकारी योजनाओं और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने का काम करते हैं। बेहतर वेतन, नियमित पदोन्नति और स्थिर करियर के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा की तैयारी करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नाबार्ड में अधिकारी बनने का अवसर</h3>
<p style="text-align:justify;">यदि आप कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नीति निर्माण और वित्तीय योजनाओं से जुड़ना चाहते हैं, तो नाबार्ड का ग्रेड ए अधिकारी का बेहतरीन विकल्प है। इस पद पर चयनित अधिकारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि वित्त, सहकारी संस्थाओं और विकास परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालते हैं। आकर्षक वेतन, भत्ते और उत्कृष्ट करियर ग्रोथ इसे कृषि क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों में शामिल करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राज्य कृषि विभाग में एडीओ और एएओ</h3>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/agriculture-degree-(2).jpg" alt="agriculture degree (2)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">लगभग सभी राज्य सरकारें समय-समय पर एग्रीकल्चर डेवलेपमेंट ऑफिसर (एडीओ) और एसिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर (एएओ) के पदों पर भर्ती करती हैं। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना, उन्नत कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार करना, फसलों की गुणवत्ता सुधारने में मार्गदर्शन देना और कृषि विकास कार्यक्रमों की निगरानी करना होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह एक उत्कृष्ट विकल्प माना जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ICAR और ASRB के माध्यम से रिसर्च में करियर</h3>
<p style="text-align:justify;">जिन विद्यार्थियों की रुचि अनुसंधान और वैज्ञानिक कार्यों में है, उनके लिए Indian Council of Agricultural Research (ICAR) तथा Agricultural Scientists Recruitment Board (ASRB) शानदार अवसर प्रदान करते हैं। इन संस्थानों में वैज्ञानिक बनने के लिए सामान्यतः एमएससी एग्रीकल्चर या पीएचडी की आवश्यकता होती है। यहां नई कृषि तकनीकों का विकास, उन्नत बीजों पर शोध, फसल उत्पादन बढ़ाने और कृषि संबंधी नई चुनौतियों के समाधान पर कार्य किया जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एफसीआई, एनएससी और अन्य सरकारी संस्थानों में अवसर</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि स्नातकों के लिए फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई), नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन तथा विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय कृषि संस्थानों में भी नियमित रूप से भर्तियां निकलती रहती हैं। यहां टेक्निकल ऑफिसर, क्वालिटी कंट्रोलर, सीड ऑफिसर और अन्य तकनीकी पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं। इन नौकरियों में तकनीकी ज्ञान के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाने का अवसर मिलता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तैयारी की सही रणनीति</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकारी नौकरी का लक्ष्य रखने वाले विद्यार्थियों को ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। वैंक एएफओ, नाबार्ड, राज्य लोक सेवा आयोग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सिलेबस का अध्ययन करें। कृषि विषयों की मजबूत समझ के साथ सामान्य ज्ञान, करेंट अफेयर्स, रीजनिंग और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट करते रहें। लगातार अभ्यास और मॉक टेस्ट सफलता की संभावना को काफी बढ़ा देते हैं।</p>
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<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/590051/immense-career-opportunities-government-sector-agriculture-degree</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:00:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जॉब अलर्ट :  एनजीईएल भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">    पद के नाम- सहायक अभियंता - RE (संपत्ति प्रबंधन/ऑपरेशन एवं रखरखाव), उप महाप्रबंधक - RE<br />    कुल पद- 114 (100 सहायक अभियंता + 14 उप महाप्रबंधक)<br />    नौकरी का स्थान- भारत भर में स्थित एनजीईएल कॉर्पोरेट/स्टेशन/साइट/क्लस्टर/संयुक्त उद्यम और सहायक कंपनियां<br />    वर्ग- नवीकरणीय ऊर्जा (सौर/पवन) - केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां<br />    वेबसाइट  -  <a href="https://www.ngel.in">www.ngel.in</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी)</h3>
<p style="text-align:justify;">    पद का नाम-सुपर स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर, स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर और मेडिकल ऑफिसर<br />    पदों की संख्या-282 पोस्ट<br />    नौकरी का प्रकार-केंद्र सरकार की नौकरियां<br />    विभाग-भारत सरकार का गृह मंत्रालय<br />    योग्यता-एमबीबीएस / स्नातकोत्तर चिकित्सा डिग्री / सुपर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590059/job-alert--ngel-recruitment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(13)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">    पद के नाम- सहायक अभियंता - RE (संपत्ति प्रबंधन/ऑपरेशन एवं रखरखाव), उप महाप्रबंधक - RE<br />    कुल पद- 114 (100 सहायक अभियंता + 14 उप महाप्रबंधक)<br />    नौकरी का स्थान- भारत भर में स्थित एनजीईएल कॉर्पोरेट/स्टेशन/साइट/क्लस्टर/संयुक्त उद्यम और सहायक कंपनियां<br />    वर्ग- नवीकरणीय ऊर्जा (सौर/पवन) - केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां<br />    वेबसाइट  -  <a href="https://www.ngel.in">www.ngel.in</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी)</h3>
<p style="text-align:justify;">    पद का नाम-सुपर स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर, स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर और मेडिकल ऑफिसर<br />    पदों की संख्या-282 पोस्ट<br />    नौकरी का प्रकार-केंद्र सरकार की नौकरियां<br />    विभाग-भारत सरकार का गृह मंत्रालय<br />    योग्यता-एमबीबीएस / स्नातकोत्तर चिकित्सा डिग्री / सुपर स्पेशियलिटी योग्यता<br />    ऑनलाइन आवेदन करने की प्रारंभ तिथि -10/08/2026<br />    आवेदन की अंतिम तिथि-08/09/2026<br />    संक्षिप्त सूचना-आईटीबीपी चिकित्सा अधिकारी भर्ती 2026<br />    वेबसाइट-<a href="https://recruitment.itbpolice.nic.in">https://recruitment.itbpolice.nic.in</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">ओएनजीसी</h3>
<p style="text-align:justify;">    पद का नाम-चिकित्सा अधिकारी, विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी – होम्योपैथी<br />    कुल रिक्तियां-24 पद<br />    नौकरी का प्रकार-निश्चित अवधि के आधार पर<br />    एप्लिकेशन मोड-ऑनलाइन पंजीकरण<br />    चयन प्रक्रिया-योग्यता का महत्व और साक्षात्कार<br />    नौकरी का स्थान-ओएनजीसी के विभिन्न स्थान<br />    संविदा अवधि-30/06/2028 </p>
<h3 style="text-align:justify;">पीडीसीसी बैंक शिपई भर्ती पुणे</h3>
<p style="text-align:justify;">    पद का नाम-शिपई (चपरासी)<br />    कुल रिक्तियां-289<br />    भर्ती मोड-सरलसेवा भर्ती (प्रत्यक्ष सेवा भर्ती), केवल पुणे जिले के मूल निवासियों के लिए खुली है।<br />    आयु सीमा-18 से 38 वर्ष<br />    शैक्षणिक योग्यता-एचएससी (12वीं) उत्तीर्ण या समकक्ष डिप्लोमा<br />    एप्लिकेशन मोड-केवल ऑनलाइन<br />    आवेदन की अंतिम तिथि-10/08/2026, रात 11:59<br />    आवेदन शुल्क-1,650 रुपये/- (साथ ही 18% जीएसटी और सेवा शुल्क)<br />    चयन प्रक्रिया-ऑफलाइन लिखित परीक्षा (70 अंक) → दस्तावेज़ सत्यापन → साक्षात्कार (30 अंक)<br />    वेबसाइटें-<a href="https://www.pdcc.bank.in/careers">www.pdcc.bank.in/careers</a> और <a href="https://www.punedccbank.com">https://www.punedccbank.com</a></p>
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                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 08:00:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुद्ध पर्यावरण की जिम्मेदारी निभा रहा अवध विवि का पर्यावरण विभाग </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय का 1994 में स्थापित पर्यावरण विज्ञान विभाग आधुनिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत् विकास के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। विभाग में स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र, रेडॉन जियो स्टेशन तथा स्वचालित मौसम शोध केंद्र शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को उच्च स्तरीय अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़े अयोध्या जनपद एवं विश्वविद्यालय परिसर की पर्यावरणीय गुणवत्ता के वैज्ञानिक मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अयोध्या और देवीपाटन मंडल के कार्य क्षेत्र में पर्यावरण शुद्धता के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/clean-environment-(1).jpg" alt="Clean Environment (1)" width="1200" height="720" /></p>
<p style="text-align:justify;">विभाग में महत्वपूर्ण शोध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590048/awadh-university-s-department-environment-clean-environment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/awadh-university&#039;s.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय का 1994 में स्थापित पर्यावरण विज्ञान विभाग आधुनिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत् विकास के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। विभाग में स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र, रेडॉन जियो स्टेशन तथा स्वचालित मौसम शोध केंद्र शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को उच्च स्तरीय अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़े अयोध्या जनपद एवं विश्वविद्यालय परिसर की पर्यावरणीय गुणवत्ता के वैज्ञानिक मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अयोध्या और देवीपाटन मंडल के कार्य क्षेत्र में पर्यावरण शुद्धता के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-08/clean-environment-(1).jpg" alt="Clean Environment (1)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">विभाग में महत्वपूर्ण शोध परियोजना डॉ. विनोद कुमार चौधरी के नेतृत्व में वायु परिवेशी गुणवत्ता निगरानी की दो परियोजना एक अयोध्या मंडल और दूसरी परियोजना में अयोध्या, श्रावस्ती, गोंडा, बहराइच और अंबेडकर नगर जिले शामिल है। ये शोध परियोजनाएं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वार्षिक रूप से पोषित हैं। केंद्र सरकार द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंसेज रिसर्च (आईसीएसएसआर) की दो वर्षीय शोध परियोजना अयोध्या में परिवेशी वायु गुणवत्ता का समेकित आंकलन एवं स्वास्थ्य जोखिम विश्लेषण पर 16 लाख की परियोजना जारी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वायु गुणवत्ता निगरानी प्रयोगशाला बनी अनुसंधान का प्रमुख केंद्र</h3>
<p style="text-align:justify;">विभाग में स्थापित वायु गुणवत्ता अनुश्रवण प्रयोगशाला में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), पीएम₁₀ (PM₁₀) सहित विभिन्न वायु प्रदूषकों का नियमित विश्लेषण किया जाता है। कई वर्षों से विश्वविद्यालय परिसर एवं अयोध्या नगर की वायु गुणवत्ता का निरंतर अध्ययन कर रहा है। इन अध्ययनों से प्राप्त आंकड़े पर्यावरणीय शोध, नीति निर्माण तथा जनस्वास्थ्य संबंधी अध्ययनों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। उच्च-स्तरीय एयर सैंपलर्स की सहायता से PM₂.₅, PM₁₀ तथा अन्य वायुमंडलीय प्रदूषकों की सटीक निगरानी एवं विश्लेषण किया जाएगा। ये उपकरण विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, पर्यावरणीय मूल्यांकन तथा फील्ड-आधारित अध्ययन के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। </p>
<h4 style="text-align:justify;">रेडॉन जियो स्टेशन एवं स्वचालित मौसम केंद्र से सुदृढ़ हुआ वैज्ञानिक अनुसंधान</h4>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण विज्ञान विभाग में स्थापित रेडान जियो स्टेशन भूगर्भीय गतिविधियों एवं रेडॉन गैस के स्तर की सतत निगरानी करता है। इसके साथ ही विभाग परिसर में स्थापित आटोमैटिक वेदर स्टेशन तापमान, आर्द्रता, वर्षा, पवन की दिशा एवं गति सहित विभिन्न मौसमीय मानकों का स्वचालित रिकॉर्ड तैयार करता है। इन दोनों आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों पर उच्च स्तरीय अनुसंधान को नई दिशा मिल रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आधुनिक प्रयोगशालाओं से शोधार्थियों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं</h3>
<p style="text-align:justify;">विभाग की सरयू प्रयोगशाला एवं अन्य अनुसंधान प्रयोगशालाएं आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित हैं। यहां पर्यावरण प्रदूषण, जल गुणवत्ता, मृदा, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन तथा पारिस्थितिकी से संबंधित विषयों पर स्नातकोत्तर एवं शोध स्तर के विद्यार्थी नियमित अनुसंधान कर रहे हैं। विभाग में शोध एवं प्रयोगात्मक शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">युवाओं के लिए रोजगार एवं शोध के नए </h3>
<p style="text-align:justify;">विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद चौधरी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण एवं वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा युवाओं के लिए रोजगार, प्रशिक्षण एवं शोध के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभाग में वायु गुणवत्ता निगरानी, जल एवं मृदा विश्लेषण, पर्यावरणीय डेटा प्रबंधन, जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग, प्रयोगशाला संचालन तथा पर्यावरणीय परियोजनाओं के क्षेत्र में योग्य अभ्यर्थियों के लिए समय-समय पर विभिन्न पदों पर नियुक्तियां एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ बनाना तथा युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं तकनीकी कार्यों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। यहां कार्यरत विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षुओं एवं शोधार्थियों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में कार्य करने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता एवं रोजगार क्षमता में वृद्धि होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वायु गुणवत्ता निगरानी प्रयोगशाला के विद्यार्थियों को मिली उत्कृष्ट प्लेसमेंट</h3>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण विज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित वायु गुणवत्ता निगरानी प्रयोगशाला के विद्यार्थियों ने इस वर्ष रोजगार एवं प्लेसमेंट के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। विभाग द्वारा विद्यार्थियों को वायु प्रदूषण निगरानी, पर्यावरणीय विश्लेषण, उपकरण संचालन, डेटा विश्लेषण, अनुसंधान तथा फील्ड मॉनिटरिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे वे उद्योगों एवं अनुसंधान संस्थानों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बन रहे हैं। चयनित विद्यार्थियों को फील्ड साइंटिस्ट, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग एग्जीक्यूटिव, रिसर्च एसोसिएट तथा ईएचएस से संबंधित पदों पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">परियोजनाओं से न केवल स्टीक आकलन, बल्कि वैज्ञानिक रणनीति में भी मदद</h4>
<p style="text-align:justify;">कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह बताते हैं कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) द्वारा वित्तपोषित ये शोध परियोजनाएं न केवल अयोध्या एवं आसपास के जनपदों की पर्यावरणीय स्थिति का सटीक आकलन करेंगी, बल्कि नीति-निर्धारकों को स्वास्थ्य जोखिम कम करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक रणनीति बनाने में भी मदद करेंगी। विश्वविद्यालय उच्चस्तरीय अनुसंधानों को बढ़ावा देने और समाजोपयोगी वैज्ञानिक पहलों को पूर्ण सहयोग देने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"> - प्रस्तुति - कमर अब्बास</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 16:17:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
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