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                <title>कैंपस - Amrit Vichar</title>
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                            <item>
                <title>एआई क्रांति:  रोजगार का अंत या नए अवसरों की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां मशीनें केवल आदेशों का पालन ही नहीं कर रहीं, बल्कि सीख भी रही हैं, निर्णय भी ले रही हैं और कई मामलों में मनुष्यों से अधिक तेजी और सटीकता से कार्य कर रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, कृषि, उद्योग, परिवहन और संचार जैसे लगभग हर क्षेत्र में AI का प्रभाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में एक प्रश्न बार-बार उठता है क्या AI रोजगार का अंत कर देगा, या फिर यह नए अवसरों का द्वार खोलेगा?</p>
<p style="text-align:justify;">AI ने निस्संदेह कार्यक्षमता और उत्पादकता में अभूतपूर्व वृद्धि की है। आज कई ऐसे कार्य,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586276/ai-revolution--end-of-jobs-or-beginning-of-new-opportunities"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/cam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां मशीनें केवल आदेशों का पालन ही नहीं कर रहीं, बल्कि सीख भी रही हैं, निर्णय भी ले रही हैं और कई मामलों में मनुष्यों से अधिक तेजी और सटीकता से कार्य कर रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, कृषि, उद्योग, परिवहन और संचार जैसे लगभग हर क्षेत्र में AI का प्रभाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में एक प्रश्न बार-बार उठता है क्या AI रोजगार का अंत कर देगा, या फिर यह नए अवसरों का द्वार खोलेगा?</p>
<p style="text-align:justify;">AI ने निस्संदेह कार्यक्षमता और उत्पादकता में अभूतपूर्व वृद्धि की है। आज कई ऐसे कार्य, जिन्हें करने में मनुष्यों को घंटों या दिनों का समय लगता था, AI कुछ ही मिनटों में पूरा कर देता है। बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहक सेवाएं चैटबॉट्स के माध्यम से दी जा रही हैं। उद्योगों में स्वचालित मशीनें उत्पादन बढ़ा रही हैं। अस्पतालों में AI रोगों की पहचान और उपचार योजनाओं में सहायता कर रहा है। इससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है तथा कार्य की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन AI के बढ़ते उपयोग ने रोजगार को लेकर चिंताएं भी पैदा की हैं। विशेष रूप से वे नौकरियां जो बार-बार दोहराए जाने वाले कार्यों पर आधारित हैं, उनके प्रभावित होने की संभावना अधिक है। डेटा एंट्री, बेसिक अकाउंटिंग, ग्राहक सहायता और कुछ प्रशासनिक कार्य अब धीरे-धीरे स्वचालित होते जा रहे हैं। इससे कई लोगों के मन में यह डर उत्पन्न हो रहा है कि भविष्य में मशीनें मनुष्यों की जगह ले लेंगी और बेरोजगारी बढ़ जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इतिहास हमें कुछ और ही सिखाता है। जब औद्योगिक क्रांति आई थी, तब भी लोगों को डर था कि मशीनें रोजगार समाप्त कर देंगी। लेकिन हुआ इसके विपरीत। कई पुराने कार्य समाप्त हुए, परंतु उनसे कहीं अधिक नए रोजगार पैदा हुए। कंप्यूटर और इंटरनेट के आगमन के समय भी ऐसी ही आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, लेकिन उन्होंने लाखों नए अवसरों को जन्म दिया। AI के साथ भी यही संभावना दिखाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में AI केवल कुछ नौकरियों को समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि नए प्रकार के रोजगार भी पैदा कर रहा है। AI इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, AI एथिक्स कंसल्टेंट, डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ और कंटेंट रणनीतिकार जैसे अनेक नए पेशे तेजी से उभर रहे हैं। आने वाले वर्षों में ऐसे रोजगारों की मांग और अधिक बढ़ने की संभावना है। विश्व आर्थिक मंच  सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मानती हैं कि AI कुछ पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित करेगा, लेकिन उससे अधिक नए अवसरों का सृजन भी करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">AI की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मनुष्य की रचनात्मकता, संवेदनशीलता और नैतिक निर्णय क्षमता का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता। मशीनें डेटा का विश्लेषण कर सकती हैं, लेकिन सहानुभूति, मानवीय संबंध, नेतृत्व, नैतिक विवेक और रचनात्मक सोच अभी भी मनुष्य की विशिष्ट शक्तियां हैं। इसलिए भविष्य में सफलता उन्हीं लोगों को मिलेगी जो तकनीक के साथ अपनी मानवीय क्षमताओं को भी विकसित करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बदलते परिदृश्य में नए कौशल सीखना  और मौजूदा कौशलों का विकास अत्यंत आवश्यक हो गए हैं। अब केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। नई तकनीकों को सीखना, डिजिटल साक्षरता विकसित करना, समस्या समाधान की क्षमता बढ़ाना और निरंतर ज्ञान अर्जित करना समय की मांग है। जो व्यक्ति सीखना बंद कर देगा, उसके लिए भविष्य की प्रतिस्पर्धा में टिके रहना कठिन होगा। वहीं जो व्यक्ति नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार रहेगा, उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा संस्थानों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों को ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करने होंगे जो विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर सकें। केवल सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक कौशल, नवाचार, आलोचनात्मक चिंतन और तकनीकी दक्षता पर अधिक बल देना होगा। सरकार और उद्योग जगत को भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यबल को नए कौशल प्रदान करने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत जैसे युवा देश के लिए AI एक सुनहरा अवसर सिद्ध हो सकता है। यदि हमारे युवा समय रहते AI और डिजिटल तकनीकों में दक्षता प्राप्त कर लें, तो भारत वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। स्टार्टअप संस्कृति, डिजिटल इंडिया अभियान और बढ़ती तकनीकी जागरूकता इस दिशा में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अंततः यह कहना उचित होगा कि AI को केवल रोजगार समाप्त करने वाली तकनीक के रूप में देखना एक अधूरा दृष्टिकोण है। हर परिवर्तन अपने साथ चुनौतियां लाता है, लेकिन वही परिवर्तन नए अवसर भी पैदा करता है। AI भी इसी सिद्धांत का अनुसरण करता है। यह उन लोगों के लिए चुनौती है जो बदलाव से दूर रहना चाहते हैं, लेकिन उन लोगों के लिए अवसरों का महासागर है जो सीखने, अनुकूलन करने और आगे बढ़ने का साहस रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">AI क्रांति का वास्तविक संदेश यही है कि भविष्य मशीनों का नहीं, बल्कि उन मनुष्यों का होगा जो मशीनों के साथ मिलकर काम करना सीख जाएंगे। इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि AI रोजगार समाप्त करेगा या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हम स्वयं को उस भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं जो हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुका है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">डॉ. अर्चना श्रीवास्तव (लखनऊ)</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 10:00:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जॉब अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<h4>बैंक ऑफ इंडिया</h4>
<p>    पद का नाम -क्रेडिट अधिकारी <br />    कुल रिक्तियां-779<br />    आवेदन की अंतिम तिथि- 20 जुलाई 2026<br />    वेबसाइट- www.bankofindia.bank.in</p>
<h4>IBPS</h4>
<p>    स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स<br />    पद का नाम -IT ऑफिसर, एग्रीकल्चरल फील्ड ऑफिसर, राजभाषा अधिकारी, लॉ ऑफिसर, HR/पर्सनल ऑफिसर, मार्केटिंग ऑफिसर (स्केल I)<br />    कुल पद-745 (अनुमानित)<br />    आवेदन की अंतिम तारीख- 21 जुलाई 2026<br />    वेबसाइट-www.ibps.in</p>
<h4>CSC e-Governance Services India Ltd.</h4>
<p>    पद का नाम-आधार सुपरवाइजर/ऑपरेटर <br />    कुल रिक्तियां-125 (4 राज्यों में)<br />    भर्ती का प्रकार-कॉन्ट्रैक्ट (1 साल)<br />    शामिल राज्य- बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र<br />    आवेदन की अंतिम तिथि-20 अगस्त 2026<br />    वेबसाइट-career.csccloud.in</p>
<h4>EPFO</h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586281/job-alert"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(13)3.jpg" alt=""></a><br /><h4>बैंक ऑफ इंडिया</h4>
<p>    पद का नाम -क्रेडिट अधिकारी <br />    कुल रिक्तियां-779<br />    आवेदन की अंतिम तिथि- 20 जुलाई 2026<br />    वेबसाइट- www.bankofindia.bank.in</p>
<h4>IBPS</h4>
<p>    स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स<br />    पद का नाम -IT ऑफिसर, एग्रीकल्चरल फील्ड ऑफिसर, राजभाषा अधिकारी, लॉ ऑफिसर, HR/पर्सनल ऑफिसर, मार्केटिंग ऑफिसर (स्केल I)<br />    कुल पद-745 (अनुमानित)<br />    आवेदन की अंतिम तारीख- 21 जुलाई 2026<br />    वेबसाइट-www.ibps.in</p>
<h4>CSC e-Governance Services India Ltd.</h4>
<p>    पद का नाम-आधार सुपरवाइजर/ऑपरेटर <br />    कुल रिक्तियां-125 (4 राज्यों में)<br />    भर्ती का प्रकार-कॉन्ट्रैक्ट (1 साल)<br />    शामिल राज्य- बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र<br />    आवेदन की अंतिम तिथि-20 अगस्त 2026<br />    वेबसाइट-career.csccloud.in</p>
<h4>EPFO</h4>
<p>पद का नाम-ऑडिट पद (डिप्टी डायरेक्टर (ऑडिट), असिस्टेंट डायरेक्टर (ऑडिट), असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर, ऑडिटर)<br />पदों की संख्या-74 <br />योग्यता-ग्रेजुएशन<br />आयु सीमा-अधिकतम- 56 वर्ष<br />अंतिम तिथि-14-08-2026<br />नौकरी का प्रकार-डेपुटेशन</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:43:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रेगरेंस एक्सपर्ट बन दें अपने करियर को उड़ान </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अगर आप सोचते हैं कि करियर के विकल्प सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर या आईटी प्रोफेशन तक ही सीमित हैं, तो अब समय बदल चुका है। आज कई ऐसे अनोखे प्रोफेशन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिनमें रचनात्मकता और वैज्ञानिक समझ का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है। ऐसा ही एक दिलचस्प करियर है परफ्यूम टेस्टर (Perfume Tester) या फ्रेगरेंस एक्सपर्ट का। परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ इस क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यदि आपकी सूंघने की क्षमता अच्छी है और खुशबुओं को पहचानने में रुचि रखते हैं, तो यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586274/get-your-career-off-to-a-flying-start-by-becoming-a-fragrance-expert"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/campus.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अगर आप सोचते हैं कि करियर के विकल्प सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर या आईटी प्रोफेशन तक ही सीमित हैं, तो अब समय बदल चुका है। आज कई ऐसे अनोखे प्रोफेशन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिनमें रचनात्मकता और वैज्ञानिक समझ का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है। ऐसा ही एक दिलचस्प करियर है परफ्यूम टेस्टर (Perfume Tester) या फ्रेगरेंस एक्सपर्ट का। परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ इस क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यदि आपकी सूंघने की क्षमता अच्छी है और खुशबुओं को पहचानने में रुचि रखते हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए बेहतरीन करियर साबित हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या होता है परफ्यूम टेस्टर</h4>
<p style="text-align:justify;">परफ्यूम टेस्टर को परफ्यूम इंडस्ट्री में ‘नोज (Nose)’ भी कहा जाता है। यह शब्द फ्रेंच भाषा के 'Nez' से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है 'नाक'। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ विभिन्न प्रकार की खुशबुओं को पहचानने, उनका विश्लेषण करने और उनकी गुणवत्ता का परीक्षण करने का काम करते हैं। इनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य नए परफ्यूम तैयार करने में सही सुगंधों का चयन करना और विभिन्न प्राकृतिक एवं कृत्रिम सुगंधित तत्वों का संतुलित मिश्रण तैयार करना होता है। किसी भी नए फ्रेगरेंस को बाजार में उतारने से पहले उसकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और उपभोक्ताओं की पसंद के अनुसार जांच भी इन्हीं विशेषज्ञों की जिम्मेदारी होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जरूरी कोर्स</h4>
<p style="text-align:justify;">इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए विज्ञान विषय से पढ़ाई करना लाभदायक माना जाता है। उम्मीदवार केमिस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी, कॉस्मेटिक साइंस या परफ्यूम टेक्नोलॉजी जैसे विषयों में डिग्री या डिप्लोमा कर सकते हैं। इन कोर्सों में छात्रों को सुगंध निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया, आवश्यक केमिकल्स, एसेंशियल ऑयल्स, अरोमा कंपाउंड्स, प्रोडक्ट फॉर्मूलेशन और क्वालिटी टेस्टिंग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं। इसके अलावा प्रयोगशाला में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी कराई जाती है, जिससे छात्रों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों को समझने का अवसर मिलता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भारत में कहां कर सकते हैं कोर्स?</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत में भी अब फ्लेवर और फ्रेगरेंस इंडस्ट्री से जुड़े कई संस्थान विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं। प्रमुख संस्थानों में शामिल हैं-</p>
<p style="text-align:justify;">एफएफडीसी ,कन्नौज (उत्तर प्रदेश)</p>
<p style="text-align:justify;">हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय</p>
<p style="text-align:justify;">इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (ICT), मुंबई</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई विश्वविद्यालय</p>
<p style="text-align:justify;">छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर</p>
<p style="text-align:justify;">इनके अलावा कई अन्य संस्थान भी फ्लेवर, फ्रेगरेंस और कॉस्मेटिक साइंस से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाना चाहते हैं तो फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों में परफ्यूमरी की प्रोफेशनल ट्रेनिंग विश्वभर में काफी प्रतिष्ठित मानी जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">करियर स्कोप</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत का परफ्यूम और कॉस्मेटिक बाजार लगातार विस्तार कर रहा है। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आय और पर्सनल ग्रूमिंग के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता के कारण इस उद्योग में फ्रेगरेंस विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन क्षेत्रों में रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध हैं-</p>
<p style="text-align:justify;">-    FMCG कंपनियां<br />-    कॉस्मेटिक ब्रांड्स<br />-    परफ्यूम निर्माण कंपनियां<br />-    फ्लेवर एवं फ्रेगरेंस इंडस्ट्री<br />-    रिसर्च एवं डेवलपमेंट लैब<br />-    क्वालिटी कंट्रोल और टेस्टिंग विभाग<br />-    प्रोडक्ट डेवलपमेंट टीम</p>
<p style="text-align:justify;">अनुभव हासिल करने के बाद कई विशेषज्ञ अपनी खुद की परफ्यूम ब्रांड या फ्रेगरेंस कंसल्टेंसी भी शुरू कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सैलरी और करियर ग्रोथ</h4>
<p style="text-align:justify;">इस क्षेत्र में शुरुआती वेतन अनुभव, संस्थान और कंपनी के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर फ्रेशर्स को 30 हजार से 70 हजार रुपये प्रतिमाह तक का पैकेज मिल सकता है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, विशेषज्ञों की जिम्मेदारियां और आय दोनों में वृद्धि होती है। अनुभवी परफ्यूमर्स की सालाना सैलरी 5 लाख से 9 लाख रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है। यदि किसी अंतरराष्ट्रीय परफ्यूम या लक्जरी कॉस्मेटिक ब्रांड के साथ काम करने का अवसर मिल जाए, तो कमाई का दायरा कई गुना बढ़ सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">किन लोगों के लिए है यह करियर?</h4>
<p style="text-align:justify;">यदि आपको अलग-अलग खुशबुओं को पहचानने में रुचि है, नई सुगंधों के साथ प्रयोग करना पसंद है और केमिस्ट्री में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह प्रोफेशन आपके लिए उपयुक्त हो सकता है। इस क्षेत्र में सफलता के लिए धैर्य, बारीक निरीक्षण क्षमता, रचनात्मक सोच और मजबूत घ्राण शक्ति (Smelling Sense) बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के समय में परफ्यूम टेस्टर सिर्फ एक अनोखा पेशा नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ ऐसा करियर विकल्प बन चुका है, जहां विज्ञान और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिलता है। बढ़ते उद्योग और वैश्विक अवसरों को देखते हुए आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/586274/get-your-career-off-to-a-flying-start-by-becoming-a-fragrance-expert</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या साझा सांस्कृतिक विरासत की ओर लौटने का अवसर है पाकिस्तान में संस्कृत अध्ययन </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों विभिन्न समाचार माध्यमों द्वारा प्रसारित एक समाचार ने कला, साहित्य और इतिहास से जुड़े लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। समाचार था कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित एक विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में संस्कृत अध्ययन को स्थान दिया है। आम जनमानस पर इस खबर का कितना प्रभाव पड़ा, यह कहना कठिन है, किंतु इतिहास, संस्कृति और भारतीय उपमहाद्वीप के साझा अतीत का अध्ययन करने वाले शोधार्थियों के लिए यह निस्संदेह एक महत्वपूर्ण घटना है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदित हो कि देश-विभाजन के बाद पाकिस्तान में संस्कृत का संस्थागत अध्ययन लगभग समाप्त हो गया था। संभवतः अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय तक ही इसका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/586269/is-sanskrit-studies-in-pakistan-an-opportunity-to-return-to-a-shared-cultural-heritage"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/rangoli.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले दिनों विभिन्न समाचार माध्यमों द्वारा प्रसारित एक समाचार ने कला, साहित्य और इतिहास से जुड़े लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। समाचार था कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित एक विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में संस्कृत अध्ययन को स्थान दिया है। आम जनमानस पर इस खबर का कितना प्रभाव पड़ा, यह कहना कठिन है, किंतु इतिहास, संस्कृति और भारतीय उपमहाद्वीप के साझा अतीत का अध्ययन करने वाले शोधार्थियों के लिए यह निस्संदेह एक महत्वपूर्ण घटना है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदित हो कि देश-विभाजन के बाद पाकिस्तान में संस्कृत का संस्थागत अध्ययन लगभग समाप्त हो गया था। संभवतः अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय तक ही इसका सीमित धार्मिक उपयोग रह गया। विभाजन के बाद जिस प्रकार भाषाओं और लिपियों को भी अलग-अलग राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ दिया गया, वह इतिहास की दृष्टि से गंभीर विचार का विषय है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग तीस वर्ष पहले मुझे पहली बार मसूरी जाने का अवसर मिला। जिस परिवार के यहां मेरा आतिथ्य हुआ, वे विभाजन के बाद पाकिस्तान वाले पंजाब से भारत आए थे। मुझे आश्चर्य तब हुआ, जब मैंने देखा कि परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य पूजा तो रामायण से कर रहे थे, किंतु वह रामायण देवनागरी में नहीं, उर्दू लिपि में छपी हुई थी। उन्होंने बताया कि वे देवनागरी पढ़ ही नहीं सकते। मेरे लिए यह पहली बार था, जब मैंने अनुभव किया कि भाषा, धर्म और लिपि का संबंध उतना सीधा नहीं है, जितना आज मान लिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">1994 में जब मैंने एक हिंदी समाचार-पत्र में इलस्ट्रेटर एवं डिजाइनर के रूप में कार्य आरंभ किया, तब उसी संस्थान से प्रकाशित उर्दू पत्रिका के लिए भी चित्र बनाने पड़ते थे। उर्दू पढ़ना न आने के कारण विषय समझने के लिए हमें उर्दू संपादकीय विभाग के सहयोगियों की सहायता लेनी पड़ती थी। किंतु हमारे विभागाध्यक्ष विजय कौल उर्दू सहजता से पढ़ लेते थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि कश्मीर में उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई थी। इससे स्पष्ट होता है कि भाषा और लिपि के बीच, जो विभाजन आज दिखाई देता है, वह अपेक्षाकृत हाल की ऐतिहासिक प्रक्रिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कला-जगत भी इस साझा सांस्कृतिक विरासत के अनेक उदाहरण प्रस्तुत करता है। मेरे व्यक्तिगत परिचितों में दो ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के कला-जगत को निकट से देखा है। पहली हैं नेपाल की वरिष्ठ कलाकार रागिनी उपाध्याय, जो लखनऊ के कला एवं शिल्प महाविद्यालय की पूर्व छात्रा हैं। संयोग से कराची आर्ट्स स्कूल की संस्थापक राबिया जुबेरी भी उसी संस्थान की छात्रा रही थीं। जब दोनों की पहली भेंट कराची में हुई, तो राबिया जुबेरी ने रागिनी उपाध्याय को अपनी छोटी बहन बताते हुए उनका सामान होटल से अपने घर मंगवा लिया। उनका कहना था- “मेरे रहते मेरी बहन होटल में ठहरे, यह मेरे लिए शर्म की बात होगी।”</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरा अनुभव वरिष्ठ चित्रकार एवं कला समीक्षक अशोक भौमिक का है। वर्ष 2004 में कला समीक्षक केशव मलिक की पहल पर पाकिस्तान में भारतीय चित्रकारों की एक सामूहिक प्रदर्शनी आयोजित हुई। अशोक भौमिक बताते हैं कि उस प्रदर्शनी में उनके सभी चित्र न केवल सराहे गए, बल्कि बिक भी गए। यह कला की उस संवादशील शक्ति का प्रमाण है, जो राजनीतिक सीमाओं से कहीं बड़ी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतिहास भी इसी संवाद की पुष्टि करता है। संभवतः बहुत कम लोग जानते होंगे कि पाकिस्तान के विख्यात चित्रकार सादिकैन द्वारा निर्मित दो विशाल भित्तिचित्र आज भी भारत के बनारस और अलीगढ़ में स्थित हैं। प्रसिद्ध चित्रकार एफ. एन. सूज़ा से अपनी एकमात्र मुलाकात के दौरान उन्होंने बताया था कि यूरोप से भारत आते-जाते समय वे प्रायः पाकिस्तान होकर ही यात्रा करते थे, क्योंकि दोनों देशों में उनके इतने मित्र थे कि किसी एक देश को छोड़ना उनके लिए संभव नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि कला-इतिहास की बात करें, तो गंधार मूर्तिकला को समझे बिना मथुरा शैली की पूर्ण व्याख्या संभव नहीं। इसी प्रकार फारसी भाषा और ईरानी सांस्कृतिक प्रभावों की जानकारी के बिना मुगल चित्रकला का गंभीर अध्ययन अधूरा रहेगा। दुर्भाग्य से हमारे कला महाविद्यालयों में मुगल चित्रकला को अक्सर अत्यंत संक्षेप में पढ़ाया जाता है, जबकि वही आगे चलकर राजस्थानी और पहाड़ी लघुचित्र परंपराओं को समझने की आधारभूमि तैयार करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी समकालीन कला का समग्र मूल्यांकन भी इसलिए कठिन हो गया है कि विभाजन ने हमारे सांस्कृतिक संवाद को सीमित कर दिया है। विडंबना यह है कि हम यूरोप और अमेरिका की समकालीन कला के प्रति अधिक उत्सुक दिखाई देते हैं, जबकि अपने साझा सांस्कृतिक भूगोल के कलाकारों और बौद्धिक परंपराओं को जानने का प्रयास अपेक्षाकृत कम करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे समय में यदि पाकिस्तान में संस्कृत अध्ययन की पुनः शुरुआत होती है, तो इसे केवल एक भाषा के अध्ययन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इससे भविष्य में इतिहास, दर्शन, साहित्य, पुरातत्व और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़े अनेक ऐसे स्रोतों पर नया शोध संभव हो सकता है, जो आज भी पुस्तकालयों और अभिलेखागारों में अप्रयुक्त पड़े हैं। इसी प्रकार भारत में भी फारसी, उर्दू और प्राचीन अरबी स्रोतों के अध्ययन को समान महत्व मिलना चाहिए, क्योंकि उपमहाद्वीप का इतिहास इन्हीं बहुभाषिक स्रोतों से निर्मित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">कला, साहित्य और इतिहास का स्वभाव सीमाएं खड़ी करना नहीं, बल्कि संवाद स्थापित करना है। यदि संस्कृत के माध्यम से भारत और पाकिस्तान के बीच अकादमिक और सांस्कृतिक संवाद का एक नया अध्याय आरंभ होता है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। अंततः साझा विरासत को समझना किसी एक राष्ट्र की नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सांस्कृतिक स्मृति को समृद्ध करने का प्रयास है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">सुमन सिंह</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:18:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैंपस का पहला दिन :  नई शुरुआत की यादें</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">जीवन में कुछ दिन ऐसे होते हैं जो हमेशा स्मृतियों में जीवंत बने रहते हैं। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (बीआईएमटी), ग्रेटर नोएडा के कैंपस में मेरा पहला दिन भी ऐसा ही एक यादगार अनुभव रहा। सुबह जब मैं पहली बार संस्थान के भव्य प्रवेश द्वार से भीतर गया तो मन में उत्साह, जिज्ञासा और हल्की-सी घबराहट एक साथ थी। स्कूल और स्नातक जीवन के बाद यह एक नई शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत थी। चारों ओर नए चेहरे, आधुनिक भवन, हरे-भरे परिसर और विद्यार्थियों की चहल-पहल देखकर मन में भविष्य के प्रति अनेक सपने जाग उठे।</p>
<p style="text-align:justify;">ओरिएंटेशन कार्यक्रम में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585715/first-day-on-campus--memories-of-a-new-beginning"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(10)17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीवन में कुछ दिन ऐसे होते हैं जो हमेशा स्मृतियों में जीवंत बने रहते हैं। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (बीआईएमटी), ग्रेटर नोएडा के कैंपस में मेरा पहला दिन भी ऐसा ही एक यादगार अनुभव रहा। सुबह जब मैं पहली बार संस्थान के भव्य प्रवेश द्वार से भीतर गया तो मन में उत्साह, जिज्ञासा और हल्की-सी घबराहट एक साथ थी। स्कूल और स्नातक जीवन के बाद यह एक नई शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत थी। चारों ओर नए चेहरे, आधुनिक भवन, हरे-भरे परिसर और विद्यार्थियों की चहल-पहल देखकर मन में भविष्य के प्रति अनेक सपने जाग उठे।</p>
<p style="text-align:justify;">ओरिएंटेशन कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने संस्थान की परंपराओं, शैक्षणिक गतिविधियों और प्रबंधन शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उनकी बातें सुनकर आत्मविश्वास बढ़ा और यह महसूस हुआ कि मैं एक ऐसे संस्थान का हिस्सा बना हूं जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले दिन की सबसे खास याद नए मित्रों से हुई मुलाकात है। अलग-अलग राज्यों और पृष्ठभूमियों से आए विद्यार्थियों के साथ परिचय हुआ। बातचीत के दौरान हम सभी की समान भावनाएं सामने आईं-नई जगह को लेकर उत्साह और भविष्य को लेकर उम्मीदें। कुछ ही घंटों में कई नए दोस्त बन गए, जिनके साथ बिताए गए पल आज भी मुस्कान दे जाते हैं। कैंपस का भ्रमण भी बेहद रोचक रहा। पुस्तकालय, कक्षाएं, सभागार और अन्य सुविधाएं देखकर लगा कि यह स्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की एक प्रयोगशाला है। आज जब उस पहले दिन को याद करता हूं तो वह केवल एक शुरुआत नहीं, बल्कि सपनों को आकार देने की दिशा में उठाया गया पहला महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होता है। कैंपस में बिताया गया मेरा पहला दिन हमेशा मेरी सबसे सुंदर और प्रेरणादायक स्मृतियों में शामिल रहेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;">अथर्व चौबे</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:00:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्ज्वल भविष्य की नई राह रोबोटिक्स इंजीनियरिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन के तेजी से बढ़ते दौर में तकनीकी शिक्षा का परिदृश्य भी बदल रहा है। एक समय था, जब इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने वाले अधिकांश छात्रों की पहली पसंद कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (सीएसई) हुआ करती थी, लेकिन अब नई तकनीकों के विकास ने कई नए विकल्प सामने ला दिए हैं। इनमें रोबोटिक्स इंजीनियरिंग सबसे तेजी से उभरती हुई शाखाओं में शामिल है। उद्योगों में स्मार्ट मशीनों और स्वचालित प्रणालियों की बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र को युवाओं के लिए आकर्षक करियर विकल्प बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585714/robotics-engineering--a-new-path-to-a-bright-future"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(8)17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन के तेजी से बढ़ते दौर में तकनीकी शिक्षा का परिदृश्य भी बदल रहा है। एक समय था, जब इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने वाले अधिकांश छात्रों की पहली पसंद कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (सीएसई) हुआ करती थी, लेकिन अब नई तकनीकों के विकास ने कई नए विकल्प सामने ला दिए हैं। इनमें रोबोटिक्स इंजीनियरिंग सबसे तेजी से उभरती हुई शाखाओं में शामिल है। उद्योगों में स्मार्ट मशीनों और स्वचालित प्रणालियों की बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र को युवाओं के लिए आकर्षक करियर विकल्प बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में रोबोटिक्स इंजीनियरों की जरूरत और भी तेजी से बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(9)17.jpg" alt="Untitled design (9)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">रोबोटिक्स इंजीनियरिंग एक मल्टीडिसिप्लिनरी क्षेत्र है, जिसमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और प्रोग्रामिंग का समन्वय होता है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ ऐसे रोबोट और स्वचालित सिस्टम विकसित करते हैं, जो कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ जटिल कार्यों को पूरा कर सकें। छात्रों को रोबोट डिजाइन, सेंसर तकनीक, कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमेशन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज रोबोट्स केवल विज्ञान कथाओं या फिल्मों का हिस्सा नहीं रह गए हैं। मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में उत्पादन बढ़ाने, अस्पतालों में सर्जरी और मरीजों की निगरानी, कृषि क्षेत्र में फसल प्रबंधन, रक्षा क्षेत्र में निगरानी तथा अंतरिक्ष अनुसंधान में रोबोट्स का व्यापक उपयोग हो रहा है। भारत में भी ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियां रोबोटिक्स आधारित तकनीकों को तेजी से अपना रही हैं। इससे इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एआई और ऑटोमेशन ने बढ़ाई संभावनाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के विस्तार ने रोबोटिक्स इंजीनियरिंग को नई ऊंचाई दी है। आधुनिक रोबोट केवल निर्देशों का पालन नहीं करते, बल्कि डेटा का विश्लेषण कर निर्णय लेने में भी सक्षम हो रहे हैं। इंडस्ट्री 4.0 के दौर में स्मार्ट फैक्ट्री, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और एआई आधारित मशीनें उत्पादन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में कंपनियों को ऐसे इंजीनियरों की आवश्यकता है, जो इन तकनीकों को विकसित और संचालित कर सकें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पढ़ाई में क्या-क्या सीखते हैं छात्र</h4>
<p style="text-align:justify;">रोबोटिक्स इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में रोबोट डिजाइन, एम्बेडेड सिस्टम, कंप्यूटर विजन, मशीन लर्निंग, कंट्रोल सिस्टम, माइक्रोकंट्रोलर, सेंसर टेक्नोलॉजी और रोबोटिक प्रोग्रामिंग जैसे विषय शामिल होते हैं। छात्रों को प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा के माध्यम से वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने का अवसर भी मिलता है। कई संस्थान छात्रों को इंडस्ट्री इंटर्नशिप और रिसर्च प्रोजेक्ट्स से भी जोड़ते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">करियर की बेहतर संभावनाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र रोबोटिक्स इंजीनियर, ऑटोमेशन इंजीनियर, एआई स्पेशलिस्ट, रिसर्च इंजीनियर, कंट्रोल सिस्टम इंजीनियर, ड्रोन डेवलपर और प्रोडक्ट डिजाइनर जैसी भूमिकाओं में काम कर सकते हैं। भारत में शुरुआती स्तर पर अच्छे वेतन पैकेज मिलने की संभावना रहती है, जबकि अनुभव और विशेषज्ञता के साथ आय में तेजी से वृद्धि होती है। वैश्विक स्तर पर भी रोबोटिक्स विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">छात्रों के लिए है बेहतर विकल्प</h4>
<p style="text-align:justify;">जिन छात्रों की रुचि नई तकनीकों, मशीनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रोग्रामिंग में है, उनके लिए रोबोटिक्स इंजीनियरिंग एक उत्कृष्ट विकल्प साबित हो सकती है। यह शाखा केवल नौकरी के अवसर ही नहीं देती, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाएं उपलब्ध कराती है। भविष्य में स्मार्ट मशीनों और एआई आधारित प्रणालियों का विस्तार जिस गति से हो रहा है, उसे देखते हुए रोबोटिक्स इंजीनियरिंग तकनीकी शिक्षा की सबसे संभावनाशील शाखाओं में से एक बनकर उभर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585714/robotics-engineering--a-new-path-to-a-bright-future</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोटिस बोर्ड :  इग्नू में प्रवेश प्रारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">शाजहांपुर के स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय में स्थित इग्नू अध्ययन केन्द्र के समन्वयक डॉ. प्रभात शुक्ला ने बताया कि जुलाई 2026 सत्र के लिए ओडीएल तथा ऑनलाइन मोड में संचालित 328 से अधिक शैक्षिक कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 15 जुलाई 2026 तक इग्नू की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। डॉ. प्रभात शुक्ला ने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व एबीसी आईडी बनाना आवश्यक है। इसके उपरांत डीईबी, आईडी बनाकर समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण किया जा सकता है। अभ्यर्थी अपनी ई-मेल आईडी एवं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585713/notice-board--admissions-open-at-ignou"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(7)18.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शाजहांपुर के स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय में स्थित इग्नू अध्ययन केन्द्र के समन्वयक डॉ. प्रभात शुक्ला ने बताया कि जुलाई 2026 सत्र के लिए ओडीएल तथा ऑनलाइन मोड में संचालित 328 से अधिक शैक्षिक कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 15 जुलाई 2026 तक इग्नू की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। डॉ. प्रभात शुक्ला ने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व एबीसी आईडी बनाना आवश्यक है। इसके उपरांत डीईबी, आईडी बनाकर समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण किया जा सकता है। अभ्यर्थी अपनी ई-मेल आईडी एवं मोबाइल नंबर के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन पूर्ण कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 09:24:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>BSNL JTO Recruitment 2026: बीएसएनएल में जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के पदों पर बंपर भर्ती, फ्रेशर्स को भी मिलेगा मौका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर (JTO) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 100 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। खास बात यह है कि इस भर्ती में अनुभवी उम्मीदवारों के साथ-साथ फ्रेशर्स भी आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इच्छुक उम्मीदवार BSNL की आधिकारिक वेबसाइट <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://bsnlregistration.ibtexamination.com/bsnl_02.html">externalexam.bsnl.co.in</a> </span>के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया जारी है और अंतिम तिथि नजदीक है, इसलिए पात्र अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>  BSNL JTO Recruitment 2026: महत्वपूर्ण जानकारी</strong></h4>
<table style="border-collapse:collapse;width:99.9346%;height:504.844px;" border="1"><colgroup><col style="width:49.9281%;" /><col style="width:49.9281%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;"><strong>विवरण</strong></td></tr></tbody></table>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585829/bsnl-jto-recruitment-2026-100-posts-apply-online"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(20)8.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर (JTO) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 100 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। खास बात यह है कि इस भर्ती में अनुभवी उम्मीदवारों के साथ-साथ फ्रेशर्स भी आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इच्छुक उम्मीदवार BSNL की आधिकारिक वेबसाइट <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://bsnlregistration.ibtexamination.com/bsnl_02.html">externalexam.bsnl.co.in</a> </span>के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया जारी है और अंतिम तिथि नजदीक है, इसलिए पात्र अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> BSNL JTO Recruitment 2026: महत्वपूर्ण जानकारी</strong></h4>
<table style="border-collapse:collapse;width:99.9346%;height:504.844px;" border="1"><colgroup><col style="width:49.9281%;" /><col style="width:49.9281%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;"><strong>विवरण</strong></td>
<td style="height:45.8949px;text-align:center;"><strong>जानकारी</strong></td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">संगठन</td>
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL)</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">पद</td>
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर (JTO)</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">कुल पद</td>
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">100</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">आवेदन का माध्यम</td>
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">ऑनलाइन</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">आधिकारिक वेबसाइट</td>
<td style="height:45.8949px;text-align:center;"><a href="https://bsnlregistration.ibtexamination.com/bsnl_02.html">externalexam.bsnl.co.in</a></td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">आवेदन की अंतिम तिथि</td>
<td style="height:45.8949px;text-align:center;">3 जुलाई 2026</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">फीस जमा करने की अंतिम तिथि</td>
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">3 जुलाई 2026</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">आयु सीमा</td>
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">20 से 30 वर्ष</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">वेतन  </td>
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">₹16,400 से ₹40,500 (पे-स्केल के अनुसार)</td>
</tr>
<tr style="height:45.8949px;">
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">चयन प्रक्रिया</td>
<td style="text-align:center;height:45.8949px;">लिखित परीक्षा</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> कौन कर सकता है आवेदन?</strong></h4>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> शैक्षणिक योग्यता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बीई/बीटेक या समकक्ष डिग्री टेलीकम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेडियो, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिकल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी या इंस्ट्रूमेंटेशन विषय में होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक्स), एमएससी (कंप्यूटर साइंस) और एमटेक डिग्रीधारक उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> आयु सीमा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आवेदन करने वाले उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> चयन प्रक्रिया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। भर्ती में किसी प्रकार का पूर्व कार्य अनुभव अनिवार्य नहीं है, इसलिए फ्रेशर्स भी इसमें आवेदन कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> BSNL JTO Recruitment 2026: आवेदन कैसे करें?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आवेदन करने के लिए उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li> सबसे पहले [www.externalexam.bsnl.co.in](http://www.externalexam.bsnl.co.in) पर जाएं।</li>
<li>मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की मदद से रजिस्ट्रेशन पूरा करें।</li>
<li>ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद लॉगिन करें।</li>
<li> आवेदन पत्र में मांगी गई सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरें।</li>
<li>अपनी पसंद के अनुसार 21 सर्किलों में से वरीयता (Preference) चुनें।</li>
<li> पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।</li>
<li> 10वीं, 12वीं, डिग्री, आरक्षण प्रमाणपत्र (यदि लागू हो) सहित सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।</li>
<li> अपनी श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क का भुगतान करें।</li>
<li> आवेदन सबमिट करने के बाद भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आवेदन शुल्क</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अनारक्षित/OBC/EWS: ₹2000<br />SC/ST/PwBD: ₹1000</p>
<p style="text-align:justify;">उम्मीदवार भर्ती से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए BSNL की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन देख सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>BSNL JTO Recruitment 2026 Notification PDF- </strong></h4>
<p><strong><a href="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/131894753.pdf">https://www.amritvichar.com/media/2026-06/131894753.pdf</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ेंः <a href="https://www.amritvichar.com/article/585800/ncert-class-9-book-sir-election-commission-new-chapter"><span class="t-red">NCERT की क्लास 9 की बुक में SIR और चुनाव आयोग पर नया चैप्टर, </span>जानिए छात्रों को क्या पढ़ाया जाएगा</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>परीक्षा</category>
                                            <category>रिजल्ट्स</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585829/bsnl-jto-recruitment-2026-100-posts-apply-online</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/585829/bsnl-jto-recruitment-2026-100-posts-apply-online</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:46:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> वर्ड स्मिथ : ‘माउस’ शब्द की उत्पत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज कंप्यूटर का उपयोग लगभग हर क्षेत्र में किया जाता है और कंप्यूटर चलाने के लिए माउस एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘माउस’ शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई और इसे यह नाम क्यों दिया गया। ‘माउस’ शब्द अंग्रेजी भाषा में चूहे के लिए प्रयोग किया जाता है। इसकी जड़ें लैटिन भाषा के शब्द ‘मुस’ (Mus) में मिलती हैं, जिसका अर्थ भी चूहा ही होता है। समय के साथ यह शब्द पुरानी अंग्रेजी के ‘मूस’ (Mūs) से होते हुए आधुनिक अंग्रेजी के ‘माउस’ (Mouse) में परिवर्तित हो गया।<br />  <br />कंप्यूटर माउस का विकास 1960 के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585710/word-smith--origin-of-the-word-%E2%80%98mouse%E2%80%99"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(5)18.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज कंप्यूटर का उपयोग लगभग हर क्षेत्र में किया जाता है और कंप्यूटर चलाने के लिए माउस एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘माउस’ शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई और इसे यह नाम क्यों दिया गया। ‘माउस’ शब्द अंग्रेजी भाषा में चूहे के लिए प्रयोग किया जाता है। इसकी जड़ें लैटिन भाषा के शब्द ‘मुस’ (Mus) में मिलती हैं, जिसका अर्थ भी चूहा ही होता है। समय के साथ यह शब्द पुरानी अंग्रेजी के ‘मूस’ (Mūs) से होते हुए आधुनिक अंग्रेजी के ‘माउस’ (Mouse) में परिवर्तित हो गया।<br /> <br />कंप्यूटर माउस का विकास 1960 के दशक में अमेरिकी वैज्ञानिक डगलस एंगेलबार्ट और उनकी टीम ने किया था। जब इस उपकरण का प्रारंभिक मॉडल बनाया गया, तब उसका आकार कुछ हद तक चूहे जैसा दिखाई देता था। इसके पीछे निकली तार चूहे की पूंछ जैसी लगती थी। इसी कारण इसे अनौपचारिक रूप से ‘माउस’ कहा जाने लगा। बाद में यही नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। आज वायरलेस माउस में तार नहीं होती, फिर भी यह उपकरण अपने ऐतिहासिक नाम ‘माउस’ से ही दुनियाभर में जाना जाता है। यह तकनीक और भाषा के रोचक मेल का एक सुंदर उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585710/word-smith--origin-of-the-word-%E2%80%98mouse%E2%80%99</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:00:53 +0530</pubDate>
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                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-%285%2918.jpg"                         length="47373"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जॉब अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<h3 style="text-align:left;">स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI</h3>
<p style="text-align:left;">पद का नाम-प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO)<br />कुल रिक्तियां-1500<br />आयु सीमा-21 से 30 वर्ष (01.04.2026 तक)<br />शैक्षिक योग्यता-किसी भी विषय में ग्रेजुएशन <br />चयन प्रक्रिया-प्रीलिम्स →मेन्स, साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू<br />आवेदन आखिरी तारीख- 8-07-2026</p>
<h4 style="text-align:left;">रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB)</h4>
<p style="text-align:left;">पद का नाम- सेक्शन कंट्रोलर<br />कुल पद-119 पद<br />आयु सीमा-20 - 33 वर्ष<br />शैक्षिक योग्यता- किसी भी विषय में ग्रेजुएट डिग्री<br />आवेदन शुरू होने की तारीख-15-07-2026 (संभावित)<br />आवेदन की अंतिम तारीख-14-08-2026<br />वेबसाइट- <a href="https://www.rrbcdg.gov.in/">www.rrbcdg.gov.in/</a></p>
<h4 style="text-align:left;">न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लि.</h4>
<p style="text-align:left;">पद का नाम- अप्रेंटिस<br />कुल रिक्तियां-550<br />स्टाइपेंड    ₹-12,300 प्रति माह<br />ट्रेनिंग की अवधि-12 महीने<br />आवेदन की आखिरी तारीख- 6 जुलाई,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585716/job-alert"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(7)17.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:left;">स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI</h3>
<p style="text-align:left;">पद का नाम-प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO)<br />कुल रिक्तियां-1500<br />आयु सीमा-21 से 30 वर्ष (01.04.2026 तक)<br />शैक्षिक योग्यता-किसी भी विषय में ग्रेजुएशन <br />चयन प्रक्रिया-प्रीलिम्स →मेन्स, साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू<br />आवेदन आखिरी तारीख- 8-07-2026</p>
<h4 style="text-align:left;">रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB)</h4>
<p style="text-align:left;">पद का नाम- सेक्शन कंट्रोलर<br />कुल पद-119 पद<br />आयु सीमा-20 - 33 वर्ष<br />शैक्षिक योग्यता- किसी भी विषय में ग्रेजुएट डिग्री<br />आवेदन शुरू होने की तारीख-15-07-2026 (संभावित)<br />आवेदन की अंतिम तारीख-14-08-2026<br />वेबसाइट- <a href="https://www.rrbcdg.gov.in/">www.rrbcdg.gov.in/</a></p>
<h4 style="text-align:left;">न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लि.</h4>
<p style="text-align:left;">पद का नाम- अप्रेंटिस<br />कुल रिक्तियां-550<br />स्टाइपेंड    ₹-12,300 प्रति माह<br />ट्रेनिंग की अवधि-12 महीने<br />आवेदन की आखिरी तारीख- 6 जुलाई, 2026<br />वेबसाइट-<a href="https://www.newindia.co.in">www.newindia.co.in</a></p>
<p style="text-align:left;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>जॉब्स</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:36:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक शोध का केंद्र अवध विवि की श्रीराम शोध पीठ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीराम शोध पीठ राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी आभा बिखेर रही है। इस शोध पीठ से न केवल 156 देश सीधे जुड़े हैं, बल्कि श्रीराम से जुड़े 251 महत्वपूर्ण ग्रंथ शोध पीठ की शोभा बढ़ा रहे हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीराम शोध पीठ भारतीय ज्ञान परंपरा, कला, संस्कृति और रामायणीय दर्शन के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरा है।    </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(1)19.jpg" alt="Untitled design (1)" width="625" height="351" />       </p>
<p style="text-align:justify;">श्रीराम शोध पीठ स्थापना 25 फरवरी, 2001 को तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री के मार्गदर्शन में की गई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585708/awadh-university-s-shri-ram-research-chair--a-hub-for-global-research"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(2)19.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीराम शोध पीठ राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी आभा बिखेर रही है। इस शोध पीठ से न केवल 156 देश सीधे जुड़े हैं, बल्कि श्रीराम से जुड़े 251 महत्वपूर्ण ग्रंथ शोध पीठ की शोभा बढ़ा रहे हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीराम शोध पीठ भारतीय ज्ञान परंपरा, कला, संस्कृति और रामायणीय दर्शन के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरा है।    </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(1)19.jpg" alt="Untitled design (1)" width="625" height="351"></img>    </p>
<p style="text-align:justify;">श्रीराम शोध पीठ स्थापना 25 फरवरी, 2001 को तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री के मार्गदर्शन में की गई थी। स्थापना के बाद से यह केंद्र निरंतर श्रीराम के जीवन-दर्शन, भारतीय कला-शैलियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं शोध में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। श्रीराम शोध पीठ में चित्रित भित्ति चित्रों के माध्यम से भारतीय कला की विविध परंपराओं का सजीव एवं ऐतिहासिक चित्रण किया गया है। इनमें गुरुकुल शिक्षा-दीक्षा की परंपरा, ईरानी शैली का विस्तृत प्रदर्शन, मेवाड़ शैली में बाल चरित्र, तंजौर शैली में राम दरबार तथा मुगल शैली में ताड़का वध एवं सीता स्वयंवर जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का प्रभावशाली कलात्मक निरूपण शामिल है। इसके साथ ही हनुमान जी द्वारा श्रीराम को मुद्रिका प्रदान करने तथा लंका दहन जैसे प्रसंगों को भारतीय इतिहास और कला के संदर्भ में अत्यंत जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस शोध पीठ में भगवान श्रीराम से संबंधित लगभग 251 ग्रंथ संरक्षित हैं, जो विभिन्न भाषाओं, धर्म साहित्य, दर्शन एवं संस्कृति पर शोध के लिए आधारित हैं। ये शोधार्थियों के लिए अध्ययन एवं अनुसंधान का सशक्त आधार प्रदान करते हैं। अब तक अनेक शोधार्थी इस केंद्र से जुड़कर रामकथा, भारतीय संस्कृति एवं कला इतिहास पर अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुके हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों के संदर्भ में भी श्रीराम का चरित्र अत्यंत </h4>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(3)18.jpg" alt="Untitled design (3)" width="555" height="312"></img></p>
<p style="text-align:justify;">प्रेरणादायक श्रीराम शोध पीठ के समन्वयक प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने बताया कि कुलपति के प्रयासों से श्रीराम शोध पीठ न केवल भारतीय संस्कृति और कला का संरक्षक केंद्र बनेगा, बल्कि यह आधुनिक जीवन मूल्यों को भारतीय दर्शन से जोड़ने वाला एक सशक्त अकादमिक मंच भी बनाने का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। श्रीराम शोध पीठ का लक्ष्य यह भी है कि देश-विदेश की शैक्षिक संस्थाओं से संबद्ध नई-नई विधाओं को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।ॉ</p>
<h4 style="text-align:justify;">कुलपति के नेतृत्व में मिल रहा है शोध पीठ को नया आयाम</h4>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(4)18.jpg" alt="Untitled design (4)" width="546" height="307"></img></p>
<p style="text-align:justify;">कुलपति डॉ. बिजेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में श्रीराम शोध पीठ को और अधिक सुदृढ़ एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य इसे एक अंतर्राष्ट्रीय शोध केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिससे श्रीराम के जीवन-दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा का व्यापक वैश्विक प्रसार सुनिश्चित हो सके। कुलपति ने ‘अमृत विचार’ को बताया कि भगवान श्रीराम की वास्तविक प्रासंगिकता किसी एक युग, काल या धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका जीवन समस्त मानव जाति के लिए एक शाश्वत मार्गदर्शक है। आज के आधुनिक एवं तनावपूर्ण समय में, जब व्यक्ति छोटी-छोटी परिस्थितियों में भी धैर्य खो देता है, तब श्रीराम का ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ स्वरूप आत्म-अनुशासन और भावनात्मक संतुलन का आदर्श प्रस्तुत करता है। उनका ‘रामराज्य’ केवल एक धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि एक आदर्श कल्याणकारी राज्य का प्रतीक है, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और कल्याण सुनिश्चित किया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पीठ का विदेशों में महत्व</h4>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design20.jpg" alt="Untitled design" width="570" height="320"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भगवान राम और रामायण की महिमा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी गहरी जड़ें हैं। यहां दुनिया के 156 से अधिक प्रमुख देशों की लोक-संस्कृति, इतिहास, कला और दैनिक जीवन में भगवान राम की स्पष्ट और जीवंत उपस्थिति मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">थाईलैंड रामायण को ‘रामकियेन’ कहा जाता है, जो वहां का राष्ट्रीय ग्रंथ है। थाईलैंड की प्राचीन राजधानी का नाम ‘अयुथ्या’था, जो अयोध्या पर आधारित है। यहां के राजाओं को ‘राम’ की उपाधि दी जाती है (जैसे वर्तमान राजा राम दशम हैं)।</p>
<p style="text-align:justify;">इंडोनेशिया: दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इस देश में रामकथा रग-रग में बसी है। यहां की रामायण को ‘काकाविन रामायण’ कहा जाता है। यहां के मुस्लिम कलाकार आज भी पूरी श्रद्धा से रामलीला (वायंग या शैडो पपेट्री) का मंचन करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कंबोडिया: यहां रामायण को ‘रीमकर’ के नाम से जाना जाता है। विश्व के सबसे बड़े मंदिर परिसर ‘अंकोरवाट’ की दीवारों पर रामकथा के प्रसंग बहुत ही खूबसूरती से उकेरे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लाओस: इस देश का नाम ही भगवान राम के पुत्र ‘लव’ के नाम पर माना जाता है। यहां रामायण को ‘फरा लक फरा राम’ कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मलेशिया: यहां की लोककथाओं में रामायण ‘हिकायत सेरी राम’ के रूप में जीवित है। यहां आज भी प्रशासनिक और सांस्कृतिक स्तर पर रामकथा के प्रतीकों (जैसे ‘श्री पादुका’) का सम्मान किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">म्यांमार (बर्मा): यहां रामकथा को ‘यामा जादॉ’ कहा जाता है, जिसे वहां की बौद्ध परंपराओं के साथ जोड़कर बड़े आदर से देखा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस: यहां के मरानाओ समुदाय में ‘महाराडिया लवना’ नाम की लोककथा प्रचलित है, जो सीधे तौर पर रामकथा का ही रूपांतरण है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">- प्रस्तुति-कमर अब्बास, अयोध्या</h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:11:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करंट अफेयर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">    हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और उनके आश्रितों के लिए मुख्यमंत्री की कैशलेस चिकित्सा योजना हेतु एक समर्पित पंजीकरण पोर्टल शुरू किया है। इसके अंतर्गत कवरेज राशि ₹5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च राजकीय सम्मान “द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस, फर्स्ट क्लास” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत व स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों तथा सहयोग को सुदृढ़ बनाने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान की मान्यता स्वरूप प्रदान किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585026/current-affairs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(14)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">    हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और उनके आश्रितों के लिए मुख्यमंत्री की कैशलेस चिकित्सा योजना हेतु एक समर्पित पंजीकरण पोर्टल शुरू किया है। इसके अंतर्गत कवरेज राशि ₹5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष है।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च राजकीय सम्मान “द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस, फर्स्ट क्लास” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत व स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों तथा सहयोग को सुदृढ़ बनाने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान की मान्यता स्वरूप प्रदान किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">    हाल ही में सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में “अगथियार - द यूनिफायर” (Agatthiyar- The Unifier) पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक महर्षि अगथियार की स्थायी विरासत तथा भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता को सुदृढ़ करने में उनकी भूमिका को रेखांकित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">   हाल ही में असम के चार पारंपरिक उत्पादों को भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक (GI) रजिस्ट्री द्वारा भौगोलिक संकेतक टैग प्रदान किया गया। इससे राज्य की स्वदेशी शिल्प परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है। इसी के साथ असम में नाबार्ड द्वारा समर्थित GI-प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के निकट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित ‘लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल’ (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया। इस परियोजना के लिए एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट को नोडल प्रयोगशाला के रूप में नामित किया गया था।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>कैंपस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 09:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
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