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                <title>ग्लैमवर्ल्ड - Amrit Vichar</title>
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                            <item>
                <title>बॉक्स ऑफिस पर क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ का नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">क्रिस्टोफर नोलन की बहुचर्चित एपिक फिल्म ‘द ओडिसी’ ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच दिया है। मैट डेमन अभिनीत इस फिल्म ने दुनिया भर में 1.352 बिलियन डॉलर की कमाई कर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली R-रेटेड फिल्म का खिताब अपने नाम कर लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही फिल्म ने 2024 में रिलीज हुई ‘डेडपूल एंड वूल्वरिन’ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है, जिसने दुनियाभर में 1.338 बिलियन डॉलर का कारोबार किया था। ‘द ओडिसी’ का प्रदर्शन खास तौर पर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में शानदार रहा है। फिल्म ने इससे पहले सबसे ज्यादा कमाई करने वाली IMAX रिलीज का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591726/christopher-nolan%E2%80%99s-%E2%80%98the-odyssey%E2%80%99-new-box-office-record"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/christopher-nolan’s.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्रिस्टोफर नोलन की बहुचर्चित एपिक फिल्म ‘द ओडिसी’ ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच दिया है। मैट डेमन अभिनीत इस फिल्म ने दुनिया भर में 1.352 बिलियन डॉलर की कमाई कर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली R-रेटेड फिल्म का खिताब अपने नाम कर लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही फिल्म ने 2024 में रिलीज हुई ‘डेडपूल एंड वूल्वरिन’ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है, जिसने दुनियाभर में 1.338 बिलियन डॉलर का कारोबार किया था। ‘द ओडिसी’ का प्रदर्शन खास तौर पर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में शानदार रहा है। फिल्म ने इससे पहले सबसे ज्यादा कमाई करने वाली IMAX रिलीज का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। इसकी IMAX कमाई करीब 289 मिलियन डॉलर बताई गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रयान रेनॉल्ड्स ने दी बधाई</h3>
<p style="text-align:justify;">‘डेडपूल एंड वूल्वरिन’ के स्टार रयान रेनॉल्ड्स ने भी ‘द ओडिसी’ की इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिल्म की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे शानदार उपलब्धि बताया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत में भी शानदार कमाई</h3>
<p style="text-align:justify;">17 जुलाई को रिलीज हुई ‘द ओडिसी’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 123 मिलियन डॉलर की मजबूत ओपनिंग की थी। इसके बाद उत्तरी अमेरिका में फिल्म की कमाई करीब 516 मिलियन डॉलर और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से 835 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में भी फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। शुरुआती दिनों में फिल्म ने करोड़ों रुपये का कारोबार किया और पहले सप्ताह में इसकी कमाई 90 करोड़ रुपये से अधिक रही। अब तक फिल्म का भारतीय बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करीब 182.60 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">होमर की महाकाव्य कहानी  पर आधारित है फिल्म</h3>
<p style="text-align:justify;">‘द ओडिसी’ की कहानी प्राचीन यूनानी कवि होमर के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘द ओडिसी’ से प्रेरित है। फिल्म में ट्रोजन युद्ध के बाद राजा ओडिसियस की अपने घर लौटने की कठिन और रोमांचक यात्रा को केंद्र में रखा गया है। रास्ते में उसे अनेक चुनौतियों, रहस्यमयी परिस्थितियों और खतरों का सामना करना पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बड़े सितारों से सजी है स्टारकास्ट</h3>
<p style="text-align:justify;">फिल्म में मैट डेमन के साथ टॉम हॉलैंड, ऐनी हैथवे, जेंडाया, रॉबर्ट पैटिनसन, लुपिता न्योंगो, चार्लीज थेरॉन, जॉन बर्नथल, बेनी सफ्डी, जॉन लेगुइज़ामो, हिमेश पटेल और इलियट पेज जैसे कलाकार नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म का निर्माण क्रिस्टोफर नोलन और एमा थॉमस ने सिंकोपी के बैनर तले किया है। यूनिवर्सल पिक्चर्स के साथ मिलकर बनी यह फिल्म नोलन की भव्य सिनेमाई शैली और प्राचीन महाकाव्य की कहानी के मेल के कारण रिलीज से पहले ही चर्चा में थी। अब बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड ने इसकी लोकप्रियता को और मजबूत कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 09:00:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है... </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन का त्योहार आते ही वातावरण में अपने आप मिठास घुल जाती है। सावन की फुहारों के बीच रंग-बिरंगी राखियों से सजे बाजार, मिठाइयों की खुशबू और घरों में होने वाली तैयारियां मन को उत्साह से भर देती हैं, लेकिन इस त्योहार की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसके साथ बचपन की कितनी ही यादें लौट आती हैं। बहन की कलाई में बंधी राखी, भाई की कलाई पर सजा रक्षासूत्र, उपहार को लेकर होने वाली नोकझोंक और फिर साथ बैठकर मिठाई खाना-सब कुछ जैसे किसी पुराने फिल्मी दृश्य की तरह आंखों के सामने तैरने लगता है, जब इन यादों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591725/%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88---%C2%A0"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/sister-has-tied-a-bond-of-love-around-her-brother&#039;s-wrist.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन का त्योहार आते ही वातावरण में अपने आप मिठास घुल जाती है। सावन की फुहारों के बीच रंग-बिरंगी राखियों से सजे बाजार, मिठाइयों की खुशबू और घरों में होने वाली तैयारियां मन को उत्साह से भर देती हैं, लेकिन इस त्योहार की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसके साथ बचपन की कितनी ही यादें लौट आती हैं। बहन की कलाई में बंधी राखी, भाई की कलाई पर सजा रक्षासूत्र, उपहार को लेकर होने वाली नोकझोंक और फिर साथ बैठकर मिठाई खाना-सब कुछ जैसे किसी पुराने फिल्मी दृश्य की तरह आंखों के सामने तैरने लगता है, जब इन यादों के साथ कोई पुराना फिल्मी गीत कानों में पड़ जाए, तो रक्षाबंधन का रंग और गहरा हो जाता है। हिंदी सिनेमा ने भाई-बहन के रिश्ते को सिर्फ कहानियों में ही नहीं, बल्कि ऐसे गीतों में भी पिरोया है, जो दशकों बाद आज भी त्योहार का हिस्सा बने हुए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’<br /> <br />राखी का सबसे भावुक गीत</h3>
<p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन के गीतों की बात हो और ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। 1959 की फिल्म ‘छोटी बहन’ का यह गीत लता मंगेशकर की आवाज, शंकर-जयकिशन के संगीत और शैलेंद्र के शब्दों से सजा है। गीत में बहन की मासूम उम्मीद और भाई के प्रति उसका स्नेह बेहद सहज ढंग से सामने आता है। इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 67 साल बाद भी रक्षाबंधन आते ही यह गीत रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुनाई देने लगता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘फूलों का तारों का’ : भाई-बहन के रिश्ते की चंचल मिठास</h3>
<p style="text-align:justify;">फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का ‘फूलों का तारों का, सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है’ रक्षाबंधन के मौके पर बजने वाला एक और सदाबहार गीत है। किशोर कुमार की आवाज में यह गीत भाई के अपनी बहन के प्रति प्रेम को बेहद खूबसूरत अंदाज में व्यक्त करता है। गीत की खासियत यह है कि इसमें रिश्ते की गंभीरता के साथ बचपन जैसी शरारत और अपनापन भी महसूस होता है। आज भी भाई अपनी बहन के लिए यह गीत सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और शुभकामना संदेशों में इस्तेमाल करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘मेरे भैया मेरे चंदा’ : बहन के स्नेह की कोमल अभिव्यक्ति</h3>
<p style="text-align:justify;">1965 की फिल्म ‘काजल’ का ‘मेरे भैया मेरे चंदा’ भी भाई-बहन के रिश्ते पर फिल्माए गए यादगार गीतों में शामिल है। आशा भोसले की आवाज में यह गीत बहन के मन में भाई के लिए मौजूद स्नेह और गर्व को सामने लाता है। रक्षाबंधन की भावनाओं को गीतात्मक रूप देने वाले लोकप्रिय गीतों में इसका नाम आज भी लिया जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘बहना ने भाई की कलाई से’ : राखी के धागे की कहानी</h3>
<p style="text-align:justify;">1974 में आई ‘रेशम की डोरी’ का गीत ‘बहना ने भाई की कलाई से’ रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव को सीधे गीत में उतार देता है। धर्मेंद्र और सायरा बानो अभिनीत इस फिल्म का यह गीत राखी के धागे को भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक बनाता है। सुमन कल्याणपुर की आवाज ने इसे विशेष भावुकता दी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘ये राखी बंधन है ऐसा’ : रिश्ते की मजबूती का गीत</h3>
<p style="text-align:justify;">फिल्म ‘बेईमान’ का ‘ये राखी बंधन है ऐसा’ भी उन गीतों में है, जिनके बिना रक्षाबंधन की फिल्मी प्लेलिस्ट अधूरी लगती है। लता मंगेशकर और मुकेश की आवाज में यह गीत भाई-बहन के रिश्ते की स्थायी मजबूती को रेखांकित करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना’ </h3>
<p style="text-align:justify;">1962 की फिल्म ‘अनपढ़’ का ‘रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना’ रक्षाबंधन की खुशियों को अपने नाम की तरह ही रंगीन बना देता है। लता मंगेशकर की आवाज और मदन मोहन का संगीत इस गीत को त्योहार की पारंपरिक खुशी से जोड़ते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘राखी’ से ‘परख’ तक : फिल्मों में बसा राखी का संसार</h3>
<p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन पर आधारित या इस त्योहार को केंद्र में रखने वाले गीतों की सूची काफी लंबी है। ‘राखी’ फिल्म का ‘राखी धागों का’, ‘परख’ का ‘कहते हैं राखी के धागे’, ‘अनजाना’ का ‘हम बहनों को लिए’ और ‘फरिश्ते’ का ‘भाई बहन का प्यार’ जैसे गीत भी भाई-बहन के रिश्ते को अलग-अलग भावों में सामने लाते हैं। यानी हिंदी सिनेमा में राखी सिर्फ एक त्योहार नहीं रही, बल्कि कभी खुशी, कभी विरह, कभी जिम्मेदारी और कभी बचपन की यादों का प्रतीक बनकर पर्दे पर आती रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नई फिल्मों में बदला भाई-बहन का अंदाज</h3>
<p style="text-align:justify;">समय के साथ फिल्मों में भाई-बहन के रिश्ते को दिखाने का अंदाज भी बदला है। अब कहानियां सिर्फ भाई के रक्षक होने और बहन के स्नेह तक सीमित नहीं हैं। भाई-बहन एक-दूसरे के दोस्त, हमराज और मुश्किल समय में सहारा बनने वाले किरदारों के रूप में दिखाई देते हैं। 2022 की फिल्म ‘रक्षा बंधन’ का ‘धागों से बांधा’ इसी बदलती संवेदना का उदाहरण है। यह गीत पारंपरिक राखी के धागे को आधुनिक भावनाओं के साथ जोड़ता है और बताता है कि समय बदल सकता है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता आज भी उतनी ही मजबूत है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रिश्तों को महसूस करने का अवसर</h3>
<p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन इसलिए भी खास है कि यह सिर्फ कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से महसूस करने का अवसर है। इस मौके पर कहीं से ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ या ‘फूलों का तारों का’ की धुन सुनाई देती है, तो लगता है जैसे समय कुछ पल के लिए ठहर गया हो। पुराने घर, बचपन की शरारतें, भाई-बहन की नोकझोंक और परिवार के साथ बिताए वे दिन—सब कुछ एक साथ लौट आता है। शायद इसी वजह से रक्षाबंधन आते ही कुछ गीत मन में खुद-ब-खुद गुनगुनाने लगते हैं और पूरा माहौल यादों, रिश्तों और खुशियों से भर उठता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 10:00:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्षाबंधन पर बोतल के ढक्कन से बनाएं खूबसूरत मेहंदी डिजाइन </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन का त्योहार आते ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। नए कपड़े, राखी और मिठाइयों के साथ हाथों में मेहंदी भी इस पर्व की खूबसूरती बढ़ाती है, लेकिन अगर आपको मेहंदी लगाना नहीं आता, तो इस बार पार्लर जाने की जरूरत नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">घर में पड़ी प्लास्टिक की बोतल का एक छोटा-सा ढक्कन आपकी मदद कर सकता है। यह आसान तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिन्हें गोल डिजाइन बनाने में परेशानी होती है। ढक्कन की मदद से हथेली पर एकदम सही गोल घेरा बनाया जा सकता है, जिसके आसपास मनचाहा पैटर्न तैयार किया जा सकता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591729/create-beautiful-mehndi-designs-bottle-cap-raksha-bandhan"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/create-beautiful-mehndi-designs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रक्षाबंधन का त्योहार आते ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। नए कपड़े, राखी और मिठाइयों के साथ हाथों में मेहंदी भी इस पर्व की खूबसूरती बढ़ाती है, लेकिन अगर आपको मेहंदी लगाना नहीं आता, तो इस बार पार्लर जाने की जरूरत नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">घर में पड़ी प्लास्टिक की बोतल का एक छोटा-सा ढक्कन आपकी मदद कर सकता है। यह आसान तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिन्हें गोल डिजाइन बनाने में परेशानी होती है। ढक्कन की मदद से हथेली पर एकदम सही गोल घेरा बनाया जा सकता है, जिसके आसपास मनचाहा पैटर्न तैयार किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे करें शुरुआत : सबसे पहले एक साफ प्लास्टिक बोतल का ढक्कन लें। इसके गोल किनारे पर मेहंदी की पतली परत लगाएं और इसे हथेली पर हल्के हाथ से दबाकर तुरंत हटा लें। इससे हाथ पर एक साफ गोल निशान बन जाएगा। ध्यान रखें कि ढक्कन को ज्यादा जोर से न दबाएं, ताकि मेहंदी फैले नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब इस घेरे के बीच में छोटा फूल, स्पाइरल या डॉट बनाएं। इसके बाद किनारों पर छोटी-छोटी बूंदें लगाकर टूथपिक या कॉटन बड की मदद से उन्हें हल्का खींचें। इससे पंखुड़ियों जैसा सुंदर पैटर्न तैयार हो जाएगा। इसके बाद गोल घेरे के चारों ओर पत्तियां, बेल, कैरी, जाली या छोटे फूल बनाए जा सकते हैं। उंगलियों पर भी छोटी बेल या डॉट्स की डिजाइन बनाकर पूरे हाथ को आकर्षक लुक दिया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन डिजाइनों को करें ट्राई</h3>
<p style="text-align:justify;">ढक्कन से बने बेस पर कमल मंडला, सनबर्स्ट, मोर स्टाइल और लीफ बॉर्डर जैसे डिजाइन बनाए जा सकते हैं। कमल मंडला पारंपरिक लुक देता है, जबकि मोर और पत्तियों वाले पैटर्न हाथों को खास आकर्षण देते हैं। थोड़ी-सी कल्पना और इस आसान हैक की मदद से रक्षाबंधन पर घर बैठे खूबसूरत मेहंदी डिजाइन तैयार की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>Fashion and Trends</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 10:00:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिल्म समीक्षा : भावुक और यादगार वापसी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">2007 में रिलीज हुई आवारापन बॉक्स ऑफिस पर भले बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई थी, लेकिन समय के साथ इमरान हाशमी का किरदार शिवम पंडित और फिल्म का संगीत दर्शकों के बीच खास पहचान बना चुका है। 19 साल बाद आई आवारापन 2 उसी भावनात्मक दुनिया को आगे बढ़ाती है। फिल्म की कहानी शिवम से शुरू होती है, जो अपने पुराने प्यार को खोने के बाद अकेलेपन में जी रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन उसे एक लावारिस बच्ची मिलती है, जिसका नाम वह अपनी पुरानी प्रेमिका के नाम पर आलिया रखता है। जब बच्ची मानव तस्करी करने वाले गिरोह के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591721/film-review-emotional-memorable-comeback"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/film-review.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">2007 में रिलीज हुई आवारापन बॉक्स ऑफिस पर भले बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई थी, लेकिन समय के साथ इमरान हाशमी का किरदार शिवम पंडित और फिल्म का संगीत दर्शकों के बीच खास पहचान बना चुका है। 19 साल बाद आई आवारापन 2 उसी भावनात्मक दुनिया को आगे बढ़ाती है। फिल्म की कहानी शिवम से शुरू होती है, जो अपने पुराने प्यार को खोने के बाद अकेलेपन में जी रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन उसे एक लावारिस बच्ची मिलती है, जिसका नाम वह अपनी पुरानी प्रेमिका के नाम पर आलिया रखता है। जब बच्ची मानव तस्करी करने वाले गिरोह के हाथों पहुंच जाती है, तो शिवम उसे बचाने के लिए फिर अपराध की दुनिया में लौटता है। उसकी तलाश उसे बैंकॉक तक ले जाती है। </p>
<p style="text-align:justify;">इमरान हाशमी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका चेहरा, खामोशी, दर्द और अंदाज एक बार फिर शिवम पंडित की याद दिलाता है। दिशा पाटनी ने भी प्रभावी अभिनय किया है, जबकि पूरन गब्बी और शबाना आजमी अपने किरदारों में असर छोड़ते हैं। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका नॉस्टेल्जिया और संगीत है। ‘तो फिर आओ’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता पुराना’ जैसे पुराने गीतों के नए संस्करण कहानी के भावनात्मक माहौल को मजबूत करते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">नए गाने भी फिल्म की दुनिया के अनुरूप हैं। हालांकि कहानी कुछ जगह अनुमानित लगती है और दूसरे हिस्से में रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती है। कुछ किरदारों को और गहराई दी जा सकती थी। कुल मिलाकर, आवारापन 2 परफेक्ट सीक्वल नहीं है, लेकिन इमरान हाशमी और शिवम पंडित के पुराने प्रशंसकों के लिए यह 19 साल बाद की भावुक और यादगार वापसी जरूर है।<br />  </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 10:00:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जिंदगी का सफर:  मंदाकिनी, फिल्मों से अध्यात्म की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कुछ चेहरे पर्दे पर आते हैं और कुछ ही समय में दर्शकों की यादों का हिस्सा बन जाते हैं। यासमीन जोसेफ भी ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्हें दुनिया ने बाद में मंदाकिनी के नाम से पहचाना। मेरठ में 30 जुलाई 1963 को जन्मीं यासमीन ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तो शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि एक फिल्म उनकी जिंदगी को इतनी तेजी से बदल देगी।</p><p style="text-align:justify;">बचपन से ही अभिनय की दुनिया उन्हें आकर्षित करती थी। मुंबई पहुंचकर उन्होंने फिल्मों में काम पाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्हें कई बार असफलता और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591723/life-s-journey-mandakini-films-spirituality"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/journey-of-life.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कुछ चेहरे पर्दे पर आते हैं और कुछ ही समय में दर्शकों की यादों का हिस्सा बन जाते हैं। यासमीन जोसेफ भी ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्हें दुनिया ने बाद में मंदाकिनी के नाम से पहचाना। मेरठ में 30 जुलाई 1963 को जन्मीं यासमीन ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तो शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि एक फिल्म उनकी जिंदगी को इतनी तेजी से बदल देगी।</p><p style="text-align:justify;">बचपन से ही अभिनय की दुनिया उन्हें आकर्षित करती थी। मुंबई पहुंचकर उन्होंने फिल्मों में काम पाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्हें कई बार असफलता और रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब लगातार कोशिशों के बावजूद उन्हें फिल्मों में मौका नहीं मिल पा रहा था, लेकिन यासमीन ने हार नहीं मानी। यही जिद आगे चलकर उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बनी।</p><p style="text-align:justify;">करीब 22 वर्ष की उम्र में उनकी मुलाकात फिल्मकार राज कपूर से हुई। राज कपूर ने उनका स्क्रीन टेस्ट लिया और उनकी प्रतिभा व व्यक्तित्व से प्रभावित होकर, उन्हें अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म राम तेरी गंगा मैली में मुख्य भूमिका के लिए चुना। इसी दौरान यासमीन जोसेफ को नया स्क्रीन नाम मिला- मंदाकिनी।</p><p style="text-align:justify;">वर्ष 1985 में रिलीज हुई राम तेरी गंगा मैली ने मंदाकिनी को रातों-रात स्टार बना दिया। राजीव कपूर के साथ उनकी जोड़ी और फिल्म में निभाया गया ‘गंगा’ का किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। फिल्म के कुछ दृश्यों ने उस दौर में जबरदस्त चर्चा और विवाद भी पैदा किया। देखते ही देखते मंदाकिनी 1980 के दशक के चर्चित चेहरों में शामिल हो गईं।</p><p style="text-align:justify;">इसके बाद उन्होंने डांस डांस, कमांडो, प्यार के नाम कुर्बान, प्यार करके देखो और तेजाब जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि उनकी पहली फिल्म जैसी सफलता दोबारा नहीं मिल सकी। धीरे-धीरे फिल्मों की संख्या कम होती गई और 1996 की जोरदार के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया से दूरी बना ली।</p><p style="text-align:justify;">मंदाकिनी की जिंदगी का एक और महत्वपूर्ण अध्याय उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा है। वर्ष 1990 में उन्होंने डॉ. काग्युर टी. रिनपोचे ठाकुर से विवाह किया, जो पूर्व बौद्ध भिक्षु रहे हैं। इसके बाद उनका जीवन ग्लैमर की चकाचौंध से दूर आध्यात्म और परिवार की ओर बढ़ा।</p><p style="text-align:justify;">फिल्मों से दूर होने के बाद मंदाकिनी ने तिब्बती योग और ध्यान से जुड़ा काम शुरू किया। कभी बड़े पर्दे पर अपनी खूबसूरती और अभिनय से सुर्खियां बटोरने वाली मंदाकिनी ने बाद के जीवन में शांति और आध्यात्म को अधिक महत्व दिया। यासमीन जोसेफ से मंदाकिनी बनने और फिर फिल्मी दुनिया से दूर अपनी अलग पहचान बनाने तक का यह सफर बताता है कि जिंदगी हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलती। कभी संघर्ष, कभी शोहरत और कभी विवाद इन सबके बीच इंसान अपने लिए एक नया रास्ता भी चुन सकता है। मंदाकिनी की कहानी इसी बदलाव, धैर्य और नए जीवन की तलाश की कहानी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 09:00:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘टॉक्सिक’ की एडवांस बुकिंग में यश का जलवा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">रॉकिंग स्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की रिलीज का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू होते ही दर्शकों के बीच इसका क्रेज देखने को मिल रहा है। निर्माताओं ने बुकिंग के साथ एक विशेष वीडियो भी जारी किया है, जिसमें यश, निर्देशक गीतू मोहनदास और फिल्म की पूरी स्टारकास्ट नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत, हुमा कुरैशी, अक्षय ओबेरॉय और सुदेव नायर फिल्म को लेकर अपने अनुभव साझा करते हैं। कलाकारों ने फिल्म की अलग दुनिया, अनोखी कहानी और गीतू मोहनदास के निर्देशन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/591720/yash-shines-advance-bookings%E2%80%98toxic%E2%80%99"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/yash’s-star-power-shines.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रॉकिंग स्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की रिलीज का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू होते ही दर्शकों के बीच इसका क्रेज देखने को मिल रहा है। निर्माताओं ने बुकिंग के साथ एक विशेष वीडियो भी जारी किया है, जिसमें यश, निर्देशक गीतू मोहनदास और फिल्म की पूरी स्टारकास्ट नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत, हुमा कुरैशी, अक्षय ओबेरॉय और सुदेव नायर फिल्म को लेकर अपने अनुभव साझा करते हैं। कलाकारों ने फिल्म की अलग दुनिया, अनोखी कहानी और गीतू मोहनदास के निर्देशन की खासियतों पर बात की है। वीडियो से फिल्म की रिलीज को लेकर कलाकारों का उत्साह भी साफ दिखाई देता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यश की स्टार पावर का इम्तिहान</h3>
<p style="text-align:justify;">‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी की शानदार सफलता के बाद यश की बड़े पर्दे पर वापसी का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। केजीएफ: चैप्टर 2 की जबरदस्त कमाई ने उन्हें पैन-इंडिया सिनेमा के बड़े सितारों में स्थापित किया। अब ‘टॉक्सिक’ के जरिए वह बिल्कुल नई दुनिया और नए किरदार के साथ दर्शकों के सामने आ रहे हैं। फिल्म की खास बात यह है कि इसे किसी स्थापित फ्रेंचाइजी या सिनेमैटिक यूनिवर्स का सहारा नहीं मिला है। इसके बावजूद एडवांस बुकिंग को मिल रही शुरुआती प्रतिक्रिया यश की लोकप्रियता और उनके प्रति दर्शकों के भरोसे को दिखाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अलग अंदाज में पेश होगी ‘टॉक्सिक’</h3>
<p style="text-align:justify;">गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपने अलग विषय, भव्य विजुअल और अनूठी सिनेमाई शैली को लेकर चर्चा में है। फिल्म को कन्नड़ और अंग्रेजी में शूट किया गया है और हिंदी, तमिल, तेलुगु व मलयालम में भी रिलीज किया जाएगा। ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ 26 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में दस्तक देगी। अब देखना होगा कि यश की स्टार पावर और फिल्म की नई दुनिया बॉक्स ऑफिस पर कितना बड़ा असर डालती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 17:38:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुई-धागा इयररिंग्स से पाएं एलिगेंट लुक </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ज्वेलरी में इन दिनों सुई-धागा इयररिंग्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इनकी खासियत है कि ये देखने में बेहद आकर्षक होने के साथ पारंपरिक और मॉडर्न, दोनों तरह के आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं। हालांकि सही ड्रेस और हेयरस्टाइल के साथ इन्हें पहनना जरूरी है, तभी इनका खूबसूरत असर नजर आता है। अगर आप भी सुई-धागा इयररिंग्स पहनने की तैयारी कर रही हैं, तो इन स्टाइलिंग टिप्स को जरूर आजमाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनारकली सूट के साथ खूबसूरत तालमेल</h3>
<p style="text-align:justify;">अनारकली सूट और सुई-धागा इयररिंग्स का कॉम्बिनेशन बेहद ग्रेसफुल लगता है। खासतौर पर किसी त्योहार, पारिवारिक समारोह या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590493/achieve-an-elegant-look-with--needle-and-thread---pull-through--earrings"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/_sui-dhaga.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ज्वेलरी में इन दिनों सुई-धागा इयररिंग्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इनकी खासियत है कि ये देखने में बेहद आकर्षक होने के साथ पारंपरिक और मॉडर्न, दोनों तरह के आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं। हालांकि सही ड्रेस और हेयरस्टाइल के साथ इन्हें पहनना जरूरी है, तभी इनका खूबसूरत असर नजर आता है। अगर आप भी सुई-धागा इयररिंग्स पहनने की तैयारी कर रही हैं, तो इन स्टाइलिंग टिप्स को जरूर आजमाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनारकली सूट के साथ खूबसूरत तालमेल</h3>
<p style="text-align:justify;">अनारकली सूट और सुई-धागा इयररिंग्स का कॉम्बिनेशन बेहद ग्रेसफुल लगता है। खासतौर पर किसी त्योहार, पारिवारिक समारोह या पार्टी में यह जोड़ी आपके लुक को निखार सकती है। अगर अनारकली पर कढ़ाई या वर्क ज्यादा है, तो हल्के और सटल डिजाइन वाले इयररिंग्स चुनें। वहीं सादा अनारकली हो तो थोड़े आकर्षक सुई-धागा इयररिंग्स आपके लुक में चार चांद लगा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हैवी साड़ी के साथ दिखेंगी और भी खास</h3>
<p style="text-align:justify;">सुई-धागा इयररिंग्स को हैवी साड़ियों के साथ भी आसानी से कैरी किया जा सकता है। बनारसी, कांजीवरम या अन्य पारंपरिक साड़ियों के साथ ये इयररिंग्स खूबसूरत और शाही अंदाज देते हैं। अगर साड़ी में पहले से काफी हैवी वर्क है, तो इयररिंग्स का डिजाइन बहुत ज्यादा भारी न रखें। बालों में हाई पोनीटेल या स्लीक हेयरस्टाइल के साथ यह लुक और ज्यादा निखर सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इंडो-वेस्टर्न लुक में लगाएं मॉडर्न ट्विस्ट</h3>
<p style="text-align:justify;">सुई-धागा इयररिंग्स की खूबी यह भी है कि इन्हें केवल भारतीय परिधानों तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। शर्ट-स्कर्ट, क्रॉप टॉप, पलाजो या किसी दूसरे इंडो-वेस्टर्न आउटफिट के साथ भी इन्हें स्टाइल किया जा सकता है। पार्टी या कैजुअल गेट-टुगेदर के लिए यह कॉम्बिनेशन आपको स्टाइलिश और अलग अंदाज देगा। ऐसे लुक के साथ मिनिमल मेकअप और सटल हेयरस्टाइल रखें, ताकि पूरा ध्यान इयररिंग्स पर बना रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सादगी में छिपा है स्टाइल का राज</h3>
<p style="text-align:justify;">सुई-धागा इयररिंग्स खुद में एक स्टेटमेंट एक्सेसरी हैं, इसलिए इनके साथ जरूरत से ज्यादा ज्वेलरी पहनने से बचना बेहतर है। नेकपीस या हैवी ब्रेसलेट की जगह केवल इयररिंग्स को ही लुक का फोकस बनाएं। सही आउटफिट, संतुलित मेकअप और उपयुक्त हेयरस्टाइल के साथ सुई-धागा इयररिंग्स आपके पूरे व्यक्तित्व को एलिगेंट और आकर्षक बना सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Fashion and Trends</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 09:00:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जिंदगी का सफर : 17 की उम्र में मिस इंडिया, फिर ‘हीरो’ बनकर छाईं मीनाक्षी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बॉलीवुड की 80 और 90 के दशक की खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में मीनाक्षी शेषाद्रि का नाम खास तौर पर लिया जाता है। अपनी शानदार अदाकारी, खूबसूरत मुस्कान और बेहतरीन डांस के दम पर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई। हालांकि फिल्मी दुनिया से दूर होने के बाद भी उनका नृत्य से रिश्ता आज तक कायम है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी शेषाद्रि का जन्म 16 नवंबर 1963 को सिंदरी, बिहार (अब झारखंड) में हुआ था। उनका मूल नाम शशिकला शेषाद्रि बताया है। बचपन से ही कला में रुचि रखने वाली मीनाक्षी ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथक और ओडिसी जैसे शास्त्रीय नृत्यों का प्रशिक्षण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590491/lifes-journey-meenakshi-became-miss-india-again-as-a-hero"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/_meenakshi-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बॉलीवुड की 80 और 90 के दशक की खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में मीनाक्षी शेषाद्रि का नाम खास तौर पर लिया जाता है। अपनी शानदार अदाकारी, खूबसूरत मुस्कान और बेहतरीन डांस के दम पर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई। हालांकि फिल्मी दुनिया से दूर होने के बाद भी उनका नृत्य से रिश्ता आज तक कायम है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी शेषाद्रि का जन्म 16 नवंबर 1963 को सिंदरी, बिहार (अब झारखंड) में हुआ था। उनका मूल नाम शशिकला शेषाद्रि बताया है। बचपन से ही कला में रुचि रखने वाली मीनाक्षी ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथक और ओडिसी जैसे शास्त्रीय नृत्यों का प्रशिक्षण लिया। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने वर्ष 1981 में मिस इंडिया का खिताब जीतकर सुर्खियां बटोरीं। इसी वर्ष उन्होंने जापान के टोक्यो में आयोजित मिस इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी ने फिल्मों में कदम फिल्म ‘पेंटर बाबू’ से रखा, लेकिन उन्हें असली पहचान सुभाष घई की फिल्म ‘हीरो’ से मिली। जैकी श्रॉफ के साथ आई यह फिल्म जबरदस्त हिट रही और मीनाक्षी रातोंरात स्टार बन गईं। इसके बाद उन्होंने राजेश खन्ना के साथ ‘आवाज’ जैसी फिल्मों में काम किया। कुछ फिल्में सफल रहीं तो कई बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर सकीं। वर्ष 1985 में अनिल कपूर के साथ ‘मेरी जंग’ ने उनके करियर को एक बार फिर मजबूती दी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी ने अमिताभ बच्चन के साथ ‘शहंशाह’ में भी काम किया, जो बड़ी हिट साबित हुई। इसके बाद दोनों ‘तूफान’, ‘गंगा जमुना सरस्वती’ और ‘अकेला’ जैसी फिल्मों में नजर आए। उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती, ऋ षि कपूर, सनी देओल और विनोद खन्ना जैसे कई बड़े सितारों के साथ भी काम किया। देव आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सच्चे का बोल-बाला’ भी उनके करियर का हिस्सा रही। मीनाक्षी की निजी जिंदगी भी अक्सर चर्चा में रही। उनका नाम कई फिल्मी सितारों के साथ जोड़ा गया। हालांकि वर्ष 1995 में उन्होंने इन्वेस्टमेंट बैंकर हरीश मैसूर से शादी कर ली। दोनों के दो बच्चे हैं। वर्ष 1996 में रिलीज हुई ‘घातक’ उनकी आखिरी फिल्मों में शामिल रही। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में बसने का फैसला किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका में शुरुआती दौर उनके लिए आसान नहीं था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि भारत-केंद्रित माहौल से निकलकर अमेरिका की जिंदगी में ढलना उनके लिए काफी अलग अनुभव था। हालांकि समय के साथ उन्होंने वहां अपनी नई दुनिया बना ली।</p>
<p style="text-align:justify;">आज मीनाक्षी अमेरिका में डांस स्कूल चलाती हैं और बच्चों को कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी सिखाती हैं। वह खुद को अभिनेत्री से ज्यादा डांसर मानती हैं। खास बात यह है कि मीनाक्षी सिर्फ डांस और एक्टिंग में ही माहिर नहीं हैं, बल्कि उन्होंने फिल्मों के लिए अपनी आवाज भी दी है। ‘क्षत्रिय’ के लिए उन्होंने गीत गाया था। इस तरह बॉलीवुड की यह खूबसूरत अभिनेत्री आज भी अपनी कला के जरिए लोगों से जुड़ी हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 09:00:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिल्म समीक्षा :  सामाजिक पूर्वाग्रहों की कहानी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">‘खेजड़ी’ एक संवेदनशील सामाजिक ड्रामा है, जो ग्रामीण भारत में किन्नर पहचान और उससे जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को बेहद मार्मिकता के साथ सामने लाती है। रोहित द्विवेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2018 में आई थी और अब 2026 में Stage OTT पर उपलब्ध है। फिल्म व्यक्तिगत त्रासदी के जरिए उस समाज पर सवाल उठाती है, जो अनजानी पहचान और भिन्नता को स्वीकार करने के बजाय उससे डरता है। कहानी खेजड़ी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक किन्नर बच्ची है। उसके पिता, जो आयुर्वेदिक वैद्य हैं, समाज की क्रूरता से उसे बचाने के लिए उसे घर की चारदीवारी में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590490/film-review--a-story-of-social-prejudices"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/_a-story-of-social-prejudices.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">‘खेजड़ी’ एक संवेदनशील सामाजिक ड्रामा है, जो ग्रामीण भारत में किन्नर पहचान और उससे जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को बेहद मार्मिकता के साथ सामने लाती है। रोहित द्विवेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2018 में आई थी और अब 2026 में Stage OTT पर उपलब्ध है। फिल्म व्यक्तिगत त्रासदी के जरिए उस समाज पर सवाल उठाती है, जो अनजानी पहचान और भिन्नता को स्वीकार करने के बजाय उससे डरता है। कहानी खेजड़ी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक किन्नर बच्ची है। उसके पिता, जो आयुर्वेदिक वैद्य हैं, समाज की क्रूरता से उसे बचाने के लिए उसे घर की चारदीवारी में छिपाकर रखते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव वालों से उसकी पहचान छिपाने के लिए पिता उसके मनहूस होने की अफवाह फैला देते हैं। किताबों और जड़ी-बूटियों के बीच बड़ी होती खेजड़ी बाहरी दुनिया को जानने के लिए उत्सुक रहती है, लेकिन जब उसे सामाजिक सच्चाई का सामना होता है तो उसकी दुनिया पूरी तरह बदल जाती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत आशीष शर्मा का अभिनय है। उन्होंने पारंपरिक नायक की छवि से अलग हटकर खेजड़ी के किरदार में मासूमियत, पीड़ा और आंतरिक मजबूती को बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी बॉडी लैंग्वेज और आंखों के भाव किरदार के भीतर चल रहे संघर्ष को बखूबी व्यक्त करते हैं। रोहित द्विवेदी का निर्देशन कहानी की संवेदनशीलता को बनाए रखता है। रेगिस्तान का सन्नाटा, बंद घर का वातावरण और प्रकाश-छाया का इस्तेमाल खेजड़ी के अकेलेपन को गहराई देता है। पटकथा बिना उपदेश दिए लैंगिक रूढ़ियों और सामाजिक पाखंड पर सवाल उठाती है। ‘खेजड़ी’ मनोरंजन से आगे बढ़कर पहचान, सम्मान और इंसान के अपने तरीके से जीने के अधिकार की कहानी है। गंभीर और लीक से हटकर सिनेमा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह एक विचारोत्तेजक फिल्म है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;">-समीक्षक-प्रदीप शर्मा</h5>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:02:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिल्म समीक्षा :  ऑपरेशन सफेद सागर,  कारगिल की जंग  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कारगिल युद्ध पर आधारित नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ युद्ध को केवल गोलियों और बमों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि रणनीति, कूटनीति और सैनिकों के भावनात्मक संघर्ष को भी सामने लाती है। सीरीज के शो रनर और पूर्व वायुसेना अधिकारी कुशल श्रीवास्तव हैं, जिससे सैन्य अभियानों की प्रस्तुति में वास्तविकता का पुट दिखाई देता है। कहानी 1990 के दशक के उत्तरार्ध से शुरू होती है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता के साथ परमाणु तनाव भी मौजूद था। इसके बाद सीरीज कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ और उससे शुरू हुए युद्ध की ओर बढ़ती है। </p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक घटनाक्रम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/590489/film-review--operation-safed-sagar--the-kargil-war"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-08/operation-safed-sagar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कारगिल युद्ध पर आधारित नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ युद्ध को केवल गोलियों और बमों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि रणनीति, कूटनीति और सैनिकों के भावनात्मक संघर्ष को भी सामने लाती है। सीरीज के शो रनर और पूर्व वायुसेना अधिकारी कुशल श्रीवास्तव हैं, जिससे सैन्य अभियानों की प्रस्तुति में वास्तविकता का पुट दिखाई देता है। कहानी 1990 के दशक के उत्तरार्ध से शुरू होती है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता के साथ परमाणु तनाव भी मौजूद था। इसके बाद सीरीज कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ और उससे शुरू हुए युद्ध की ओर बढ़ती है। </p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक घटनाक्रम और सैन्य फैसलों को भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विनय पाठक ने नवाज शरीफ और मनु ऋषि चड्ढा ने परवेज मुशर्रफ की भूमिका में प्रभाव छोड़ा है। भारतीय पक्ष में सिद्धार्थ स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा और जिमी शेरगिल बीएस धनोआ की भूमिका में नजर आते हैं। दोनों कलाकार सैनिकों के तनाव और जज्बे को प्रभावी ढंग से सामने लाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसके हवाई युद्ध के दृश्य हैं। इन्हें अनावश्यक रूप से ग्लैमराइज करने के बजाय तकनीकी बारीकियों, टीमवर्क और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में अभियानों की चुनौतियों पर ध्यान दिया गया है। जहां लक्ष्य ने कारगिल युद्ध को जमीन से देखा था, वहीं ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ उसी संघर्ष को आसमान से देखने का अवसर देती है। गंभीर विषय, प्रभावी अभिनय और संयमित प्रस्तुति इसे युद्ध आधारित सीरीज पसंद करने वालों के लिए देखने लायक बनाती है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">-समीक्षक- नरीज</h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:00:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए अंदाज में लौट रहा है ज्ञान का मंच</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमिताभ बच्चन का लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) अपने 18 वें सीजन के साथ वापसी कर रहा है। शो की शूटिंग 1 अगस्त 2026 से मुंबई की फिल्म सिटी में शुरू होगी, जबकि इसके 10 अगस्त से प्रसारित होने की संभावना है। लंबे समय से दर्शक इस नए सीजन का इंतजार कर रहे थे। इस बार शो की थीम “इस बार... सोचना पड़ेगा” रखी गई है। नए सीजन में केवल सामान्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि सही विश्लेषण और तार्किक सोच पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। प्रतियोगियों को जवाब देने से पहले प्रश्न को अच्छी तरह समझने और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589059/the-platform-of-knowledge-is-returning-in-a-new-style"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/glam-world-(6).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमिताभ बच्चन का लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) अपने 18 वें सीजन के साथ वापसी कर रहा है। शो की शूटिंग 1 अगस्त 2026 से मुंबई की फिल्म सिटी में शुरू होगी, जबकि इसके 10 अगस्त से प्रसारित होने की संभावना है। लंबे समय से दर्शक इस नए सीजन का इंतजार कर रहे थे। इस बार शो की थीम “इस बार... सोचना पड़ेगा” रखी गई है। नए सीजन में केवल सामान्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि सही विश्लेषण और तार्किक सोच पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। प्रतियोगियों को जवाब देने से पहले प्रश्न को अच्छी तरह समझने और सोच-समझकर निर्णय लेने का संदेश दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन द्वारा जारी नए प्रोमो में अमिताभ बच्चन गोल्फ खेलते नजर आते हैं। प्रोमो के जरिए यह संदेश दिया गया है कि जीवन की तरह हर सवाल में भी जल्दबाजी के बजाय धैर्य और समझदारी जरूरी है। अमिताभ बताते हैं कि पहला जवाब हमेशा सही नहीं होता, इसलिए फैसला सोच-विचार कर लेना चाहिए। नई थीम और बदले हुए अंदाज के साथ KBC-18 एक बार फिर ज्ञान और मनोरंजन का शानदार संगम लेकर दर्शकों के बीच आने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/589059/the-platform-of-knowledge-is-returning-in-a-new-style</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 10:00:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
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                <title>जिंदगी का सफर : परवीन बाबी, शोहरत और तन्हाई से भरी एक अधूरी दास्तान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की चर्चित अभिनेत्री परवीन बाबी उन सितारों में शुमार हैं, जिन्होंने 1970 और 1980 के दशक में अपनी ग्लैमरस छवि और बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया। आधुनिक सोच, आत्मविश्वास और स्टाइलिश व्यक्तित्व के कारण उन्होंने बॉलीवुड की पारंपरिक नायिका की छवि को नई पहचान दी। 4 अप्रैल 1954 को गुजरात के जूनागढ़ में जन्मी परवीन बाबी एक प्रतिष्ठित परिवार से थीं। उनके पिता मोहम्मद बाबी जूनागढ़ के नवाब थे और उनका संबंध बाबी राजवंश से था। परवीन ने अपनी स्कूली शिक्षा अहमदाबाद के माउंट कार्मेल हाई स्कूल से पूरी की और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/589052/life-s-journey--parveen-babi--an-incomplete-story-filled-with-fame-and-loneliness"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-07/glam-world-(5).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की चर्चित अभिनेत्री परवीन बाबी उन सितारों में शुमार हैं, जिन्होंने 1970 और 1980 के दशक में अपनी ग्लैमरस छवि और बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया। आधुनिक सोच, आत्मविश्वास और स्टाइलिश व्यक्तित्व के कारण उन्होंने बॉलीवुड की पारंपरिक नायिका की छवि को नई पहचान दी। 4 अप्रैल 1954 को गुजरात के जूनागढ़ में जन्मी परवीन बाबी एक प्रतिष्ठित परिवार से थीं। उनके पिता मोहम्मद बाबी जूनागढ़ के नवाब थे और उनका संबंध बाबी राजवंश से था। परवीन ने अपनी स्कूली शिक्षा अहमदाबाद के माउंट कार्मेल हाई स्कूल से पूरी की और बाद में अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई की।</p><p style="text-align:justify;">परवीन बाबी ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1972 में मॉडलिंग से की। इसके बाद 1973 में फिल्म 'चरित्र' से बॉलीवुड में कदम रखा, लेकिन यह फिल्म सफल नहीं हो सकी। असली पहचान उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ आई फिल्म 'मजबूर' से मिली, जिसने उनके अभिनय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई सफल फिल्मों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई।</p><p style="text-align:justify;">अपने फिल्मी सफर में परवीन ने अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, धर्मेंद्र और फिरोज खान जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम किया। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से पसंद की गई और दोनों ने आठ फिल्मों में साथ अभिनय किया। 'दीवार', 'अमर अकबर एंथनी', 'नमक हलाल', 'शान', 'क्रांति' और 'मजबूर' जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।</p><p style="text-align:justify;">परवीन बाबी ने सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि फैशन और आधुनिक भारतीय महिला की नई छवि गढ़ने में भी अहम भूमिका निभाई। वर्ष 1976 में वह प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन के कवर पर जगह पाने वाली पहली बॉलीवुड अभिनेत्री बनीं। जीनत अमान के साथ उनका नाम उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है जिन्होंने हिंदी सिनेमा की नायिका को पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर एक नया आयाम दिया। वह अपने दौर की सबसे अधिक पारिश्रमिक लेने वाली अभिनेत्रियों में भी शामिल थीं।</p><p style="text-align:justify;">निजी जीवन में परवीन बाबी का नाम अभिनेता डैनी डेंजोंगपा, कबीर बेदी और फिल्मकार महेश भट्ट के साथ जुड़ा। हालांकि, कोई भी रिश्ता स्थायी नहीं बन सका। शोहरत और सफलता के शिखर पर पहुंचने वाली यह अभिनेत्री अंततः गहरी तन्हाई का शिकार हो गईं। 22 जनवरी 2005 को मुंबई स्थित उनके फ्लैट से उनका शव बरामद हुआ। बताया गया कि उनका निधन दो दिन पहले ही हो चुका था। परवीन बाबी की जिंदगी आज भी बॉलीवुड की सबसे चर्चित और भावुक कहानियों में गिनी जाती है।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>ग्लैमवर्ल्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:20:52 +0530</pubDate>
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