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                <title>Kapil Sibal - Amrit Vichar</title>
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                <description>Kapil Sibal RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>केवल सुप्रीम कोर्ट ही ED पर लगा सकता है लगाम, आई-पैक पर छापेमारी को लेकर बोले सिब्बल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>पश्चिम बंगाल के कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा तलाश अभियान चलाने के एक दिन बाद, राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा कि संघवाद केंद्रीय एजेंसी की दया पर निर्भर है और केवल उच्चतम न्यायालय ही जांच एजेंसी पर लगाम लगा सकता है। पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई को लेकर मचे हंगामे के बाद सिब्बल की यह टिप्पणी आई है। </p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान उन स्थलों पर पहुंचकर आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में होने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566941/only-the-supreme-court-can-rein-in-the-ed--says-sibal-on-the-raids-on-i-pac"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/कपिल-सिब्बल.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>पश्चिम बंगाल के कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा तलाश अभियान चलाने के एक दिन बाद, राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा कि संघवाद केंद्रीय एजेंसी की दया पर निर्भर है और केवल उच्चतम न्यायालय ही जांच एजेंसी पर लगाम लगा सकता है। पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई को लेकर मचे हंगामे के बाद सिब्बल की यह टिप्पणी आई है। </p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान उन स्थलों पर पहुंचकर आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संवेदनशील डाटा को जब्त करने की कोशिश कर रही थी। ईडी ने दावा किया कि यह कार्रवाई कथित तौर पर करोड़ों रुपये के कोयला चोरी घोटाले में धनशोधन की जांच का हिस्सा थीं। उसने बनर्जी पर कानूनी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्होंने और राज्य पुलिस ने छापेमारी के दौरान जबरन मौके से ‘‘महत्वपूर्ण सबूत’’ हटा दिए। </p>
<p style="text-align:justify;">सिब्बल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘केवल उच्चतम न्यायालय ही ईडी पर लगाम लगा सकता है। विपक्ष की सत्ता वाले हर विपक्षी राज्य, हर महत्वपूर्ण विपक्षी नेता को निशाना बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में जो हो रहा है वह वाकई चिंताजनक है! वह भी आगामी चुनाव के बीच में।’’ राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘संघवाद ईडी की दया पर निर्भर है!’’</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी के अनुसार, बृहस्पतिवार की सुबह सात बजे से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में केंद्रीय जांच एजेंसी ने साल्ट लेक सेक्टर पांच स्थित ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के कार्यालय और लाउडन स्ट्रीट स्थित जैन के आवास समेत लगभग 10 परिसरों पर छापेमारी की, जिनमें दिल्ली के चार परिसर भी शामिल थे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 13:36:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘क्या 33 बूथ अधिकारियों की मौत होना ठीक है’? सिब्बल ने सरकार पर निशाना साधा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में लगे बूथ अधिकारियों की मौत को लेकर सोमवार को सरकार पर तंज कसा, साथ ही प्रश्न किया कि अगर एक भी कथित ‘‘घुसपैठिया’’ ठीक नहीं तो क्या बूथ अधिकारियों की मौत ठीक है?’’ सिब्बल ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के मृत पाए जाने के एक दिन बाद की है। बीएलओ की मौत के बाद ऐसे आरोप लग रहे हैं कि एसआईआर से जुड़े कार्य-संबंधी दबाव के कारण उसकी मौत हुई।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/565381/%22is-it-okay-for-33-booth-officers-to-die-%22-sibal-slams-the-government"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(8)21.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में लगे बूथ अधिकारियों की मौत को लेकर सोमवार को सरकार पर तंज कसा, साथ ही प्रश्न किया कि अगर एक भी कथित ‘‘घुसपैठिया’’ ठीक नहीं तो क्या बूथ अधिकारियों की मौत ठीक है?’’ सिब्बल ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के मृत पाए जाने के एक दिन बाद की है। बीएलओ की मौत के बाद ऐसे आरोप लग रहे हैं कि एसआईआर से जुड़े कार्य-संबंधी दबाव के कारण उसकी मौत हुई।</p>
<p>सिब्बल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ बंगाल के एक और बीएलओ ने आत्महत्या कर ली। पूरे भारत में कुल संख्या 33 हुई। अगर एक भी कथित 'घुसपैठिए' ठीक नहीं तो क्या 33 बीएलओ का मरना ठीक है।’’</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने कहा था कि सरकार देश से घुसपैठियों को बाहर निकालेगी साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ राजनीतिक दल एसआईआर का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें। पश्चिम बंगाल के रानीबांध ब्लॉक में एक बीएलओ की मौत की घटना सामने आई जहां रविवार सुबह एक स्कूल परिसर से हरधन मंडल का शव बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि उन्हें एक सुसाइड नोट मिला है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंडल एक स्कूल शिक्षक थे और रानीबांध ब्लॉक के राजकाटा क्षेत्र के बूथ नंबर 206 के बीएलओ के रूप में कार्यरत थे।’’</p>
<p>अधिकारी के अनुसार, घटनास्थल से मृतक के हस्ताक्षर वाला एक नोट बरामद हुआ जिसमें उसने कथित तौर पर बीएलओ के रूप में काम के दबाव से निपटने में असमर्थ होने का जिक्र किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 14:25:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमले की कोशिश पर बोले CJI- घटना से स्तब्ध हूँ, लेकिन अब यह एक भुला दिया गया अध्याय है </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने एक अधिवक्ता द्वारा उन पर जूता फेंकने की कोशिश मामले में गुरुवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन छह अक्टूबर को अदालती कार्यवाही के दौरान हुई उस घटना से स्तब्ध थे लेकिन अब यह एक भुला दिया गया अध्याय है। उन्होंने एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, "सोमवार को जो हुआ उससे मैं और मेरे विद्वान भाई (न्यायमूर्ति चंद्रन) बहुत स्तब्ध हैं। हमारे लिए यह एक भुला दिया गया अध्याय है।" सॉलिसिटर जनरल तुषार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/555628/cji-on-attempted-attack--shocked-by-the-incident--but-now-it-is-a-forgotten-chapter"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/cji.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने एक अधिवक्ता द्वारा उन पर जूता फेंकने की कोशिश मामले में गुरुवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन छह अक्टूबर को अदालती कार्यवाही के दौरान हुई उस घटना से स्तब्ध थे लेकिन अब यह एक भुला दिया गया अध्याय है। उन्होंने एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, "सोमवार को जो हुआ उससे मैं और मेरे विद्वान भाई (न्यायमूर्ति चंद्रन) बहुत स्तब्ध हैं। हमारे लिए यह एक भुला दिया गया अध्याय है।" सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उस अधिवक्ता के उक्त कृत्य को अक्षम्य बताया और इस मामले में मुख्य न्यायाधीश की उदारता व धैर्य की सराहना की। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में शामिल न्यायमूर्ति उज्जल भुयान ने हालांकि असहमति जताते हुए कहा, "इस पर मेरे अपने विचार हैं। वह (न्यायमूर्ति गवई) मुख्य न्यायाधीश हैं। यह (घटना होना) मज़ाक की बात नहीं है।" न्यायमूर्ति भुयान ने कहा कि यह हमला शीर्ष अदालत का अपमान था और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए थी। </p>
<p>वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (जो अदालत में मौजूद थे) ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से मामले को आगे बढ़ाने और इस प्रकरण पर आगे चर्चा न करने का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई आगे बढ़ाते हुए कहा, "हमारे लिए यह एक भुला दिया गया अध्याय है...।" </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी वनशक्ति मामले में दिए गए फैसले की समीक्षा और संशोधन की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें केंद्र को पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंज़ूरी देने से रोक दिया गया था।</p>
<h5><strong>SC बार एसोसिएशन ने रद्द की अधिवक्ता राकेश किशोर की सदस्यता  </strong></h5>
<p>उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई पर अदालती कार्यवाही के दौरान हमले की कोशिश मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने अधिवक्ता राकेश किशोर की सदस्यता गुरुवार को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी। एसोशिएशन ने उन्हें "गंभीर कदाचार" का दोषी पाया और इस आधार पर उनकी सदस्यता रद्द करने का यह फैसला किया। एससीबीए ने कहा कि अधिवक्ता किशोर का "निंदनीय, अव्यवस्थित और असंयमित व्यवहार" न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला और पेशेवर नैतिकता, शिष्टाचार और शीर्ष अदालत की गरिमा का गंभीर उल्लंघन है।</p>
<p>एससीबीए ने संबंधित एक प्रस्ताव में कहा, "कार्यकारी समिति का मानना है कि उक्त आचरण न्यायिक स्वतंत्रता, अदालती कार्यवाही की पवित्रता और बार तथा बेंच के बीच आपसी सम्मान और विश्वास के दीर्घकालिक संबंध पर सीधा हमला है।" अधिवक्ता किशोर ने अदालत कक्ष के अंदर मुख्य न्यायाधीश पर कोई वस्तु फेंकने का प्रयास किया था।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 18:26:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'मस्जिदों में मंदिरों की तरह चढ़ावा नहीं चढ़ता', कपिल सिब्बल की दलील पर बोले CJI गवई- मैं दरगाह गया हूं पर...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, अमृत विचारः</strong> वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार, 20 मई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी संपत्तियों की पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि मस्जिदों में मंदिरों की तरह चढ़ावा नहीं चढ़ता, बल्कि वक्फ संपत्तियों से प्राप्त आय से मस्जिदों का प्रबंधन होता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने जवाब दिया कि उन्होंने दरगाहों का दौरा किया है और वहां भी चढ़ावा चढ़ते देखा है।</p>
<p>वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर पिछली सुनवाई 15</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/538921/-there-is-no-offering-in-mosques-like-in-temples---cji-gavai-said-on-kapil-sibal-s-argument--i-have-been-to-the-dargah-but"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/2025-(27)8.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली, अमृत विचारः</strong> वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार, 20 मई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी संपत्तियों की पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि मस्जिदों में मंदिरों की तरह चढ़ावा नहीं चढ़ता, बल्कि वक्फ संपत्तियों से प्राप्त आय से मस्जिदों का प्रबंधन होता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने जवाब दिया कि उन्होंने दरगाहों का दौरा किया है और वहां भी चढ़ावा चढ़ते देखा है।</p>
<p>वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर पिछली सुनवाई 15 मई को हुई थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की पीठ ने केंद्र सरकार को 19 मई तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। 20 मई 2025 को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल ने दलील दी कि यह नया कानून वक्फ संपत्तियों को "हड़पने" का प्रयास है। उन्होंने आपत्ति जताई कि सरकार के साथ विवाद में सरकार ही अंतिम फैसला लेगी, जो अन्यायपूर्ण है। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि मस्जिदों में मंदिरों की तरह चढ़ावा नहीं चढ़ता, बल्कि वक्फ संपत्तियों से प्राप्त आय से ही मस्जिदों का प्रबंधन किया जाता है।</p>
<p>कपिल सिब्बल की दलील पर मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने टोकते हुए कहा, "मैं दरगाह गया हूं, वहां चढ़ावा चढ़ता है।" इस पर सिब्बल ने जवाब दिया कि दरगाह में चढ़ावा चढ़ता है, लेकिन दरगाह और मस्जिद अलग-अलग हैं। उन्होंने वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण पर आपत्ति जताई और कहा कि 100-200 साल पुरानी वक्फ संपत्तियों के दस्तावेज कहां से लाए जाएंगे। इस पर सीजेआई गवई ने उनसे सवाल किया कि क्या पहले के वक्फ कानून में पंजीकरण का प्रावधान नहीं था।</p>
<p>कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई को बताया कि वक्फ कानून में पहले भी पंजीकरण का प्रावधान था, लेकिन इसका परिणाम यह नहीं था कि गैर-पंजीकृत संपत्ति को वक्फ नहीं माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले की व्यवस्था में अधिक से अधिक यह था कि पंजीकरण न कराने वाले मुतवल्ली को हटाया जा सकता था, लेकिन नए कानून में गैर-पंजीकृत संपत्ति को ही वक्फ नहीं माना जाएगा। CJI गवई ने उनकी इस आपत्ति को नोट किया।</p>
<p>कपिल सिब्बल ने वक्फ-बाय-यूजर के पंजीकरण को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसी संपत्तियों के लिए दस्तावेज जमा करना मुश्किल है, क्योंकि जिसने संपत्ति वक्फ की, उसका उपयोगकर्ता (यूजर) कागजात उपलब्ध नहीं करा पाएगा। उनकी इस दलील पर मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने कहा कि 1954 के बाद से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था।</p>
<p>कपिल सिब्बल ने बताया कि 1904 और 1958 के पुरातात्विक स्मारक अधिनियमों में प्रावधान है कि अगर वक्फ संपत्ति प्राचीन है, तो सरकार ने उसका संरक्षण किया जाता है। इसमें मालिकाना हक का हस्तांतरण नहीं होता और धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होतीं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेः <a href="https://www.amritvichar.com/article/538910/rahul-gandhi-claims--karnataka-government-has-fulfilled-all-its-promises-in-two-years--says--look-at-bjp-and-pm-modi">राहुल गांधी का दावाः दो साल में कर्नाटक में सरकार ने पूरे किए सभी वादे, कहा- देखें भाजपा और पीएम मोदी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/538921/-there-is-no-offering-in-mosques-like-in-temples---cji-gavai-said-on-kapil-sibal-s-argument--i-have-been-to-the-dargah-but</link>
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                <pubDate>Tue, 20 May 2025 16:04:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Waqf Amendment Act: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही SG मेहता और सिब्बल के बीच छिड़ी बहस, कहा- बात सिर्फ तीन सवालों तक रहे सीमित</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, अमृत विचारः </strong>वक्फ संशोधन एक्ट पर मंगलवार, 20 मई 2025 को सुनवाई शुरू होते ही केंद्र और याचिकाकर्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। केंद्र का कहना है कि पिछली सुनवाई में तीन मुद्दों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, फिर याचिकाकर्ता ने अन्य मुद्दे क्यों उठाए। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता का तर्क है कि कोई ऐसी पाबंदी नहीं थी कि अन्य मुद्दे नहीं उठाए जा सकते। इन मुद्दों में ‘अदालत द्वारा वक्फ, वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाई डीड’ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने का अधिकार भी शामिल है। </p>
<p>भारत के प्रधान न्यायाधीश बी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/538899/waqf-amendment-act--as-soon-as-the-hearing-started-in-the-supreme-court--a-debate-broke-out-between-sg-mehta-and-sibal--saying-that-the-matter-should-be-limited-to-three-questions-only"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/supreme-court-4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली, अमृत विचारः </strong>वक्फ संशोधन एक्ट पर मंगलवार, 20 मई 2025 को सुनवाई शुरू होते ही केंद्र और याचिकाकर्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। केंद्र का कहना है कि पिछली सुनवाई में तीन मुद्दों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, फिर याचिकाकर्ता ने अन्य मुद्दे क्यों उठाए। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता का तर्क है कि कोई ऐसी पाबंदी नहीं थी कि अन्य मुद्दे नहीं उठाए जा सकते। इन मुद्दों में ‘अदालत द्वारा वक्फ, वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाई डीड’ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने का अधिकार भी शामिल है। </p>
<p>भारत के प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ से केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आग्रह किया कि वह पहले की पीठ द्वारा निर्धारित कार्यवाही तक ही सीमित रहें। विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘न्यायालय ने तीन मुद्दे चिन्हित किए थे। हमने इन तीन मुद्दों पर अपना जवाब दाखिल किया था। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की लिखित दलीलें अब कई अन्य मुद्दों तक चली गई हैं। मैंने इन तीन मुद्दों के जवाब में अपना हलफनामा दाखिल किया है। मेरा अनुरोध है कि इसे केवल तीन मुद्दों तक ही सीमित रखा जाए।’’</p>
<p>वक्फ अधिनियम, 2025 के प्रावधानों को चुनौती देने वाले लोगों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा अभिषेक सिंघवी ने इन दलीलों का विरोध किया कि अलग-अलग हिस्सों में सुनवाई नहीं हो सकती। एक मुद्दा ‘अदालत द्वारा वक्फ, वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाई डीड’ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने के अधिकार का है। याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाया गया दूसरा मुद्दा राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना से संबंधित है, जहां उनका तर्क है कि पदेन सदस्यों को छोड़कर केवल मुसलमानों को ही इसमें काम करना चाहिए। तीसरा मुद्दा एक प्रावधान से संबंधित है, जिसमें कहा गया है कि जब कलेक्टर यह पता लगाने के लिए जांच करते हैं कि संपत्ति सरकारी भूमि है या नहीं, तो वक्फ संपत्ति को वक्फ नहीं माना जाएगा। सुनवाई जारी है।</p>
<p>सिब्बल ने दलीलें पेश करना शुरू किया और मामले की पृष्ठभूमि का उल्लेख किया। गत 17 अप्रैल को, केंद्र ने शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया था कि वह 5 मई तक न तो ‘वक्फ बाई यूजर’ समेत वक्फ संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करेगा, न ही केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति करेगा। केंद्र ने केंद्रीय वक्फ परिषदों और बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने की अनुमति देने वाले प्रावधान पर रोक लगाने के अलावा ‘वक्फ बाई यूजर’ सहित वक्फ संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित करने के शीर्ष अदालत के प्रस्ताव का विरोध किया था।</p>
<p>गत 25 अप्रैल को, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने संशोधित वक्फ अधिनियम, 2025 का बचाव करते हुए 1,332 पन्नों का प्रारंभिक हलफनामा दायर किया था और ‘संसद द्वारा पारित संवैधानिकता की धारणा वाले कानून’ पर अदालत द्वारा किसी भी तरह की ‘पूर्ण रोक’ का विरोध किया था। केंद्र ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को पिछले महीने अधिसूचित किया था, जिसके बाद इसे 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई थी। इस विधेयक को लोकसभा में 288 सदस्यों के मत से पारित किया गया, जबकि 232 सांसद इसके खिलाफ थे। राज्यसभा में इसके पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 सदस्यों ने मतदान किया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेः <a href="https://www.amritvichar.com/article/538865/deputy-cm-hits-back-at-akhilesh-yadav--says-on-dna----how-much-should-i-remind-you--i-will-get-the-thesis-written-and-send-it-to-you">डिप्टी सीएम का अखिलेश यादव पर पलटवार, DNA पर कहा... कितना याद दिलाऊ? थीसिस लिखवाकर भिजवा दूंगा</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/538899/waqf-amendment-act--as-soon-as-the-hearing-started-in-the-supreme-court--a-debate-broke-out-between-sg-mehta-and-sibal--saying-that-the-matter-should-be-limited-to-three-questions-only</link>
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                <pubDate>Tue, 20 May 2025 13:04:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहलगामव आतंकी हमला: कपिल सिब्बल ने की पीएम मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग, कहा- हम सरकार के साथ..</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाकर पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित करने तथा दुनिया को यह संदेश देने का आग्रह किया कि देश एकजुट है। सिब्बल ने सरकार को सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न महत्वपूर्ण देशों में भेजने का भी सुझाव दिया, ताकि पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके। </p>
<p>पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुझाव दिया कि अमेरिका की तरह भारत को भी पाकिस्तान के साथ व्यापार करने वाले सभी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/535160/pahalgam-terror-attack--kapil-sibal-demands-pm-modi-to-call-a-special-session-of-parliament--said--we-are-with-the-government-"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/कपिल.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाकर पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित करने तथा दुनिया को यह संदेश देने का आग्रह किया कि देश एकजुट है। सिब्बल ने सरकार को सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न महत्वपूर्ण देशों में भेजने का भी सुझाव दिया, ताकि पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके। </p>
<p>पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुझाव दिया कि अमेरिका की तरह भारत को भी पाकिस्तान के साथ व्यापार करने वाले सभी प्रमुख देशों को यह बताना चाहिए कि यदि वे पाकिस्तान के साथ व्यापार करते हैं तो हमारे साथ काराबोर न करें। उन्होंने कहा, “1972 में जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा था कि ‘हम भारत को हजार घाव देकर खून से लथपथ कर देंगे।” </p>
<p>सिब्बल ने कहा, “2001 में संसद पर आतंकी हमला हुआ, 2002 में कालूचक नरसंहार हुआ, 2005 में भारतीय विज्ञान संस्थान पर हमला हुआ, जुलाई 2006 में मुंबई में ट्रेन में बम विस्फोट हुआ, 2008 में मुंबई में हमला हुआ, 2016 में पठानकोट एयरबेस हमला हुआ, 2016 में उरी आतंकी हमला हुआ और 2019 में पुलवामा आत्मघाती बम विस्फोट हुआ...., यह सिलसिला जारी है।” </p>
<p>राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य ने कहा, “ मैं इस संदर्भ में प्रधानमंत्री को सुझाव देना चाहता हूं कि वह संसद का विशेष सत्र बुलाएं और इस पर चर्चा कराएं। देश आपके साथ खड़ा है। विपक्ष आपके साथ है क्योंकि यह भारत की संप्रभुता पर हमला है।” </p>
<p>सिब्बल ने कहा कि संसद द्वारा सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए ताकि दुनिया के सामने राष्ट्र की यह भावना व्यक्त की जा सके कि हर कोई सरकार के साथ खड़ा है, देश एकजुट है तथा इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त नहीं करेगा। सिब्बल ने सत्तारूढ़ और विपक्षी सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों को अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे देशों में भेजने का भी आह्वान किया, ताकि “राजनयिक दबाव” बनाया जा सके।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Apr 2025 14:12:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति किसी पार्टी के प्रवक्ता नहीं हो सकते: धनखड़ की टिप्पणी पर सिब्बल ने दी प्रतिक्रिया </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणियों की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह ‘‘असंवैधानिक’’ है और राज्यसभा के किसी सभापति को कभी भी इस तरह का ‘‘राजनीतिक बयान’’ देते नहीं देखा गया था। सिब्बल ने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच समान दूरी बनाए रखते हैं और वे ‘‘पार्टी प्रवक्ता’’ नहीं हो सकते। </p>
<p>उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी बीच में होती है। वह सदन के अध्यक्ष होते हैं, किसी एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534118/lok-sabha-speaker-and-rajya-sabha-chairman-cannot-be-spokespersons-of-any-party--sibal-reacts-to-dhankhar-s-remarks"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/कपिल-सिब्बल.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणियों की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह ‘‘असंवैधानिक’’ है और राज्यसभा के किसी सभापति को कभी भी इस तरह का ‘‘राजनीतिक बयान’’ देते नहीं देखा गया था। सिब्बल ने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच समान दूरी बनाए रखते हैं और वे ‘‘पार्टी प्रवक्ता’’ नहीं हो सकते। </p>
<p>उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी बीच में होती है। वह सदन के अध्यक्ष होते हैं, किसी एक पार्टी के अध्यक्ष नहीं। वे भी वोट नहीं करते हैं, वे केवल तब वोट करते हैं जब बराबरी होती है। उच्च सदन के साथ भी यही बात है। आप विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच समान दूरी पर हैं।’’ </p>
<p>सिब्बल का कहना था, ‘‘आप जो कुछ भी कहते हैं वह समान दूरी बनाए रखने वाली होनी चाहिए। कोई भी वक्ता किसी पार्टी का प्रवक्ता नहीं हो सकता। मैं यह नहीं कहता कि वह (धनखड़) हैं, लेकिन सैद्धांतिक रूप में कोई भी अध्यक्ष किसी भी पार्टी का प्रवक्ता नहीं हो सकता। अगर ऐसा लगता है तो आसन की गरिमा कम हो जाती है।’’ </p>
<p>राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने राष्ट्रपति के निर्णय लेने के लिए न्यायपालिका द्वारा समयसीमा निर्धारित करने और ‘सुपर संसद’ के रूप में कार्य करने को लेकर बृहस्पतिवार को सवाल उठाते हुए कहा था कि उच्चतम न्यायालय लोकतांत्रिक ताकतों पर ‘परमाणु मिसाइल’ नहीं दाग सकता।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 17:25:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यायपालिका में भ्रष्टाचार: कपिल सिब्बल बोले- खुलेआम बहुसंख्यकवाद का समर्थन कर रहें न्यायाधीश </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>न्यायिक प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास कम होने का दावा करते हुए राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा है कि विकल्प तभी मिल सकते हैं जब सरकार और न्यायपालिका दोनों यह स्वीकार करें कि न्यायाधीशों की नियुक्ति सहित मौजूदा प्रणालियां कारगर नहीं रह गई हैं। सिब्बल ने एक न्यूज एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार में न्यायिक प्रणाली की ‘‘खामियों’’ के बारे में बात की। </p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किस तरह जिला और सत्र न्यायालयों द्वारा ज्यादातर मामलों में जमानत नहीं दी जा रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने पिछले साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/529279/kapil-sibal-claims--people-s-faith-in-the-judicial-system-is-decreasing"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/कपिल.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>न्यायिक प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास कम होने का दावा करते हुए राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा है कि विकल्प तभी मिल सकते हैं जब सरकार और न्यायपालिका दोनों यह स्वीकार करें कि न्यायाधीशों की नियुक्ति सहित मौजूदा प्रणालियां कारगर नहीं रह गई हैं। सिब्बल ने एक न्यूज एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार में न्यायिक प्रणाली की ‘‘खामियों’’ के बारे में बात की। </p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किस तरह जिला और सत्र न्यायालयों द्वारा ज्यादातर मामलों में जमानत नहीं दी जा रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने पिछले साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान के मुद्दे का भी हवाला दिया।</p>
<p> हालांकि, सिब्बल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास पर कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने इस मुद्दे पर कहा, ‘‘इस मामले से निपटने के लिए एक आंतरिक प्रक्रिया है। अब, तथ्यों के अभाव में मुझे नहीं लगता कि इस देश के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में मुझे इस पर टिप्पणी करनी चाहिए।’’ </p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या वह न्यायिक प्रणाली के बारे में चिंतित हैं, सिब्बल ने कहा, ‘‘पिछले कई वर्षों से न्यायपालिका के बारे में विभिन्न पहलुओं पर चिंताएं रही हैं, एक चिंता भ्रष्टाचार के बारे में है, और भ्रष्टाचार के कई अर्थ हैं। एक अर्थ यह है कि कोई न्यायाधीश किसी आर्थिक लाभ के कारण निर्णय देता है। भ्रष्टाचार का दूसरा रूप अपने पद की शपथ के विपरीत काम करना है, जो यह है कि वह बिना किसी भय या पक्षपात के निर्णय देगा।’’<br /> <br />उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक उदाहरण देता हूं, जिला न्यायालय और सत्र न्यायालय में शायद ही कोई न्यायाधीश हो जो जमानत दे सके। अब ऐसा तो नहीं हो सकता कि हर मामले में मजिस्ट्रेट न्यायालय या सत्र न्यायालय को जमानत खारिज करनी पड़े। 90-95 प्रतिशत मामलों में जमानत खारिज हो जाती है।’’ </p>
<p>सिब्बल ने कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि व्यवस्था में कुछ ‘‘गड़बड़’’ है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने पूछा कि क्या न्यायाधीश को डर है कि यदि उन्होंने जमानत दे दी तो इसका उनके करियर पर असर होगा? सिब्बल ने कहा कि तीसरा रूप यह है कि न्यायाधीश अब खुलेआम बहुसंख्यकवाद का समर्थन कर रहे हैं और राजनीतिक रुख अपना रहे हैं।</p>
<p> उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में एक न्यायाधीश थे जो खुलेआम एक राजनीतिक पार्टी के विचारों का समर्थन कर रहे थे और फिर उन्होंने इस्तीफा दे दिया तथा उस विशेष पार्टी में शामिल हो गए। एक न्यायाधीश ऐसे भी थे जिन्होंने खुलेआम कहा कि ‘हां मैं आरएसएस से जुड़ा हूं’।’’ </p>
<p>सिब्बल ने कहा, ‘‘हमारे सामने न्यायमूर्ति शेखर (यादव) हैं जिन्होंने कहा कि भारत में ‘बहुसंख्यक संस्कृति कायम रहनी चाहिए और केवल एक हिंदू ही भारत को विश्वगुरु बना सकता है’। उन्होंने न्यायाधीश के रूप में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कुछ बहुत ही अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।’’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/529196/cbi-filed-a-closure-report-in-sushant-singh-rajput-s-death-case--gave-a-clean-chit-to-rhea--#gsc.tab=0">सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में CBI ने लगाई क्लोजर रिपोर्ट, रिया को दी क्लीन चिट ...</a></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/529279/kapil-sibal-claims--people-s-faith-in-the-judicial-system-is-decreasing</link>
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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 14:55:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सदन में समान अवसर नहीं देने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा, जानिए ऐसा क्यों बोले सिब्बल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> विपक्ष द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाने की मांग किए जाने के बीच राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बृहस्पतिवार को कहा कि इतिहास उन लोगों को कभी माफ नहीं करेगा जिन्होंने सदन की कार्यवाही में समान अवसर नहीं दिया। </p>
<p>कांग्रेस की अगुवाई में पहली बार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों ने मंगलवार को राज्यसभा में धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए एक नोटिस पेश किया। नोटिस में धनखड़ पर संसद के उच्च सदन के सभापति के रूप में अपनी भूमिका में ‘‘अत्यंत पक्षपाती’’ होने का आरोप लगाया गया है। </p>
<p>सिब्बल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/510800/history-will-never-forgive-those-who-do-not-provide-equal-opportunities-in-the-house--know-why-sibal-said-so"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/कपिल-सिब्बल.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> विपक्ष द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाने की मांग किए जाने के बीच राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बृहस्पतिवार को कहा कि इतिहास उन लोगों को कभी माफ नहीं करेगा जिन्होंने सदन की कार्यवाही में समान अवसर नहीं दिया। </p>
<p>कांग्रेस की अगुवाई में पहली बार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों ने मंगलवार को राज्यसभा में धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए एक नोटिस पेश किया। नोटिस में धनखड़ पर संसद के उच्च सदन के सभापति के रूप में अपनी भूमिका में ‘‘अत्यंत पक्षपाती’’ होने का आरोप लगाया गया है। </p>
<p>सिब्बल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जगदीप धनखड़। राज्यसभा के 60 सदस्यों ने उन्हें हटाने के लिए नोटिस दिया। अभूतपूर्व। लोकतंत्र की जननी के लिए दुखद दिन।’’ राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘इतिहास उन लोगों को कभी माफ नहीं करेगा जिन्होंने सदन के कामकाज में समान अवसर नहीं दिया।’’ </p>
<p>अगर धनखड़ को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव लाया जाता है, तो विपक्षी दलों को इसे पारित कराने के लिए बहुमत की आवश्यकता होगी, लेकिन 243 सदस्यीय सदन में उनके पास अपेक्षित संख्या नहीं है। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने जोर देकर कहा है कि यह ‘‘संसदीय लोकतंत्र के लिए लड़ने का एक मजबूत संदेश’’ है। </p>
<p>विपक्षी दलों ने कहा कि राज्यसभा के सभापति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनसे गैर-पक्षपाती आचरण की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इसके बजाय उन्होंने ‘‘अपने वर्तमान पद की प्रतिष्ठा को घटाकर इसे सिर्फ वर्तमान सरकार के प्रवक्ता तक सीमित कर दिया है।’’ </p>
<p>विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता जयराम रमेश और नसीर हुसैन ने मंगलवार को कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), आम आदमी पार्टी (आप), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), समाजवादी पार्टी (सपा) सहित 60 विपक्षी सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस राज्यसभा के महासचिव पी़. सी. मोदी को सौंपा। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://www.amritvichar.com/article/510788/up--naushad-ahmed-became-dubey----people-of-muslim-community-in-jaunpur-are-adopting-hindu-surnames--making-this-big-claim#gsc.tab=0">UP: नौशाद अहमद बने दुबे... जौनपुर में मुस्लिम समुदाय के लोग अपना रहे हिंदू उपनाम, कर रहे यह बड़ा दावा</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/510800/history-will-never-forgive-those-who-do-not-provide-equal-opportunities-in-the-house--know-why-sibal-said-so</link>
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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 10:12:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कपिल सिब्बल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, 1066 मिले वोट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) का अध्यक्ष चुना गया। एससीबीए के चुनाव बृहस्पतिवार को हुए थे। सिब्बल के अलावा, वरिष्ठ अधिवक्ता - आदिश सी. अग्रवाल, प्रदीप कुमार राय, प्रिया हिंगोरानी, त्रिपुरारी रे और नीरज श्रीवास्तव एससीबीए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे। </p>
<p>सिब्बल को 1066 वोट मिले, जबकि राय को 650 से ज्यादा वोट मिले। हार्वर्ड लॉ स्कूल से स्नातक सिब्बल 1989-90 के दौरान भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल थे। उन्हें 1983 में वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया था। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/466663/kapil-sibal-became-president-of-supreme-court-bar-association-got"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-05/+65+65841.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) का अध्यक्ष चुना गया। एससीबीए के चुनाव बृहस्पतिवार को हुए थे। सिब्बल के अलावा, वरिष्ठ अधिवक्ता - आदिश सी. अग्रवाल, प्रदीप कुमार राय, प्रिया हिंगोरानी, त्रिपुरारी रे और नीरज श्रीवास्तव एससीबीए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे। </p>
<p>सिब्बल को 1066 वोट मिले, जबकि राय को 650 से ज्यादा वोट मिले। हार्वर्ड लॉ स्कूल से स्नातक सिब्बल 1989-90 के दौरान भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल थे। उन्हें 1983 में वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया था। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में मंत्री रहे सिब्बल ने 1995 और 2002 के बीच तीन बार एससीबीए अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था।</p>
<p> इस बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुने जाने को उदारवादी और लोकतांत्रिक ताकतों की जीत करार देते हुए कहा कि यह देश में बहुत जल्द होने जा रहे बड़े परिवर्तन का ‘‘ट्रेलर’’ है। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/466634/jds-mla-hd-revanna-gets-interim-bail-in-sexual-harassment">JDS विधायक एच डी रेवन्ना को यौन उत्पीड़न मामले में मिली अंतरिम जमानत </a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 22:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'आप' की महारैली को संबोधित कर सकते हैं राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं पर नियंत्रण से जुड़े केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) की महारैल को संबोधित कर सकते हैं। पार्टी के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, आप की दिल्ली इकाई के प्रमुख व मंत्री गोपाल राय और पार्टी सांसद संजय सिंह इस रैली को संबोधित करेंगे। पदाधिकारी ने कहा, सिब्बल को संवैधानिक विशेषज्ञ के रूप में रैली को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्हें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/377323/rajya-sabha-member-kapil-sibal-can-address-aaps-rally"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-06/कसि.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं पर नियंत्रण से जुड़े केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) की महारैल को संबोधित कर सकते हैं। पार्टी के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, आप की दिल्ली इकाई के प्रमुख व मंत्री गोपाल राय और पार्टी सांसद संजय सिंह इस रैली को संबोधित करेंगे। पदाधिकारी ने कहा, सिब्बल को संवैधानिक विशेषज्ञ के रूप में रैली को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्हें दिल्ली की संवैधानिक स्थिति के बारे में बेहतर समझ है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने 19 मई को जारी अध्यादेश के जरिये राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण की स्थापना की थी, जिसके माध्यम से उसने सेवाओं से संबंधित मामलों पर कार्यकारी नियंत्रण वापस अपने हाथ में ले लिया था।</p>
<p>यह अध्यादेश 11 मई के उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद जारी किया गया था, जिसके तहत शीर्ष अदालत ने पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से संबंधित मामलों को छोड़कर दिल्ली सरकार को सेवा से संबंधित सभी मामलों में कार्यकारी नियंत्रण प्रदान किया था। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें :<span style="color:rgb(224,62,45);"> </span></strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/377319/amit-shah-will-address-the-election-bugle-rally-in-odisha"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">अमित शाह ओडिशा में 17 जून को फुंकने आ रहे चुनावी बिगुल, जनसभा को करेंगे संबोधित</span></strong></a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jun 2023 11:10:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिब्बल ने ओडिशा रेल हादसे को लेकर केंद्र पर साधा निशाना, कहा- कोई जवाबदेही नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने ओडिशा में शुक्रवार को हुए भीषण रेल हादसे को लेकर रविवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रेलवे और संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे बड़े मंत्रालयों को एक मंत्री नहीं संभाल सकता, जैसा कि अश्विनी वैष्णव कर रहे हैं। </p>
<p>ओडिशा के बालासोर जिले में बाहानगा स्टेशन के पास शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और बेंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के पटरी से उतरने और एक मालगाड़ी से टकराने के कारण हुए भीषण रेल हादसे में कम से कम 288 यात्रियों की मौत हुई है और 1,100 से अधिक यात्री घायल हो गए।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/375291/sibal-targeted-the-center-regarding-the-odisha-train-accident-%E2%80%93"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-06/untitled-design-(7)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने ओडिशा में शुक्रवार को हुए भीषण रेल हादसे को लेकर रविवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रेलवे और संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे बड़े मंत्रालयों को एक मंत्री नहीं संभाल सकता, जैसा कि अश्विनी वैष्णव कर रहे हैं। </p>
<p>ओडिशा के बालासोर जिले में बाहानगा स्टेशन के पास शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और बेंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के पटरी से उतरने और एक मालगाड़ी से टकराने के कारण हुए भीषण रेल हादसे में कम से कम 288 यात्रियों की मौत हुई है और 1,100 से अधिक यात्री घायल हो गए। सिब्बल ने एक ट्वीट में कहा, “अश्विनी वैष्णव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री और रेल मंत्री। रेल बजट नहीं। कोई जवाबदेही नहीं। इतने बड़े मंत्रालयों को एक मंत्री नहीं संभाल सकता। बुलेट ट्रेन। वंदे भारत। खास लोगों को सुविधाएं दो, आम जनों को छोड़ दो! आपदा को दावत देने का तरीका!” </p>
<p>उन्होंने एक अन्य ट्वीट में दावा किया, “हादसे-(ट्रेन के) पटरी से उतरने की कुल घटनाएं : 257 (2017-18); 526 (2018-19); 399 (2019-20)...कारण : कैग के अनुसार, 1) पटरियों की मरम्मत (167); 2) ट्रैक निर्माण पैमानों की अनदेखी (149); 3) चालक की लापरवाही (144)। 2017 से 2022 तक सुरक्षा के लिए आवंटित एक लाख करोड़ रुपये में से रेलवे हर साल 5,000 करोड़ रुपये भी देने में नाकाम रहा।” </p>
<p>केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की पहली और दूसरी सरकार में मंत्री रहे सिब्बल पिछले साल मई में कांग्रेस से अलग हो गए थे। वह समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन से राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए थे। उन्होंने हाल में गैर-चुनावी मंच ‘इंसाफ’ की स्थापना की थी। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <span style="color:rgb(186,55,42);"><a class="post-title-lg" style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/375272/how-did-the-horrific-train-accident-happen-in-odisha-railway-ashwini-vaishnav">कैसे हुआ ओडिशा में भीषण ट्रेन हादसा? रेल मंत्री ने दी बड़ी जानकारी</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/375291/sibal-targeted-the-center-regarding-the-odisha-train-accident-%E2%80%93</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2023 13:56:18 +0530</pubDate>
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