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                <title>व्लादिमीर पुतिन - Amrit Vichar</title>
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                <description>व्लादिमीर पुतिन RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>व्लादिमीर पुतिन ने रूसी बंधकों की रिहाई के लिए हमास का किया शुक्रिया अदा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मॉस्को।</strong> रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हमले के दौरान अगवा किए गए तीन रूसी बंधकों को रिहा करने के लिए फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह हमास का शुक्रिया अदा किया है। समाचार एजेंसी ‘इंटरफैक्स’ की खबर के मुताबिक, पुतिन ने गाजा पट्टी में फरवरी में रिहा किए गए रूसी नागरिक एलेक्जेंडर ट्रूफानोव और उसके परिवार के दो सदस्यों का बुधवार देर रात क्रेमलिन (रूस का राष्ट्रपति कार्यालय) में स्वागत किया। </p>
<p>खबर में पुतिन के हवाले से कहा गया है, यह तथ्य कि आप अब आजाद हैं, फिलिस्तीनी लोगों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ रूस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/533898/vladimir-putin-thanked-hamas-for-the-release-of-russian-hostages"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/व्लादिमीर-पुतिन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मॉस्को।</strong> रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हमले के दौरान अगवा किए गए तीन रूसी बंधकों को रिहा करने के लिए फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह हमास का शुक्रिया अदा किया है। समाचार एजेंसी ‘इंटरफैक्स’ की खबर के मुताबिक, पुतिन ने गाजा पट्टी में फरवरी में रिहा किए गए रूसी नागरिक एलेक्जेंडर ट्रूफानोव और उसके परिवार के दो सदस्यों का बुधवार देर रात क्रेमलिन (रूस का राष्ट्रपति कार्यालय) में स्वागत किया। </p>
<p>खबर में पुतिन के हवाले से कहा गया है, यह तथ्य कि आप अब आजाद हैं, फिलिस्तीनी लोगों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ रूस के कई वर्षों के स्थिर संबंधों का नतीजा है। रूसी राष्ट्रपति ने क्रेमलिन में प्रमुख रब्बी बर्ल लेजर सहित अन्य शीर्ष रूसी यहूदी नेताओं की मौजूदगी में हमास के कब्जे से रिहा किए गए बंधकों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, यहां हम हमास के नेतृत्व और राजनीतिक शाखा के प्रति आभार व्यक्त करना चाहते हैं, जिन्होंने इस मानवीय कार्य को अंजाम देने में हमारी मदद की। इजराइल पर सात अक्टूबर 2023 को हमास के अप्रत्याशित हमले में कम से कम 1,200 लोगों की मौत हो गई थी और 251 अन्य को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजराइल ने गाजा पट्टी में जवाबी कार्रवाई की थी, जिससे दोनों पक्षों के बीच युद्ध छिड़ गया था। </p>
<p>इजराइल-हमास युद्ध में 50 हजार से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। ‘इंटरफैक्स’ की खबर के अनुसार, इजराइल पर हमले के दौरान हमास लड़ाकों ने ट्रूफानोव, उसकी मां एलेना ट्रूफानोवा, दादी इरीना टाटी और मंगेतर सापिर कोहेन को अगवा कर लिया था और उन्हें गाजा पट्टी ले गए थे। खबर में कहा गया है कि हमास के हमले में परिवार के मुखिया विटाली ट्रूफानोव की मौत हो गई थी। इसमें बताया गया है कि एलेना, इरीना और सापिर को 53 दिन बाद रिहा कर दिया गया था।</p>
<p>खबर के मुताबिक, एलेक्जेंडर लगभग 500 दिन तक हमास की कैद में रहा। उसे इजराइल-हमास के बीच हुए युद्ध-विराम समझौते के तहत इस साल 15 फरवरी को रिहा कर दिया गया। खबर के अनुसार, पुतिन ने बाकी बंधकों की रिहाई में मदद देने का वादा किया। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/533852/singapore-formed-the-workforce-to-deal-with-the-influence-of">अमेरिका ने सिंगापुर पर लगाया 10% शुल्क, PM लॉरेंस वोंग ने Tariff के प्रभाव से निपटने के लिए कार्यबल का किया गठन </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 15:35:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगर रूस ने यूक्रेन में 'बेतुका युद्ध' समाप्त नहीं किया तो उस पर शुल्क और प्रतिबंध लगाए जाएंगे, डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में ‘बेतुके युद्ध’ को समाप्त करने को कहा है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को खत्म करे या फिर अत्यधिक शुल्क और आगामी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार रहे। अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में 20 जनवरी को शपथ लेने वाले ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह बात कही।</p>
<p>ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में रूस के राष्ट्रपति पुतिन का नाम लिया और कहा कि उनके एवं पुतिन के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/518016/trump-will-impose-tariffs-and-sanctions-on-russia-if-it"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-01/डोनाल्ड-ट्रंप8.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में ‘बेतुके युद्ध’ को समाप्त करने को कहा है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को खत्म करे या फिर अत्यधिक शुल्क और आगामी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार रहे। अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में 20 जनवरी को शपथ लेने वाले ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह बात कही।</p>
<p>ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में रूस के राष्ट्रपति पुतिन का नाम लिया और कहा कि उनके एवं पुतिन के बीच हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन अब इस ‘‘बेतुके युद्ध’’ को खत्म करने का समय आ गया है।’’ ट्रंप ने कहा कि वह रूस के खिलाफ कुछ कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं और चाहते हैं कि युद्ध में और लोगों की जान नहीं जाए। ट्रंप ने कहा, ‘‘आइए इस युद्ध को खत्म करते हैं, जो मेरे राष्ट्रपति रहते कभी शुरू ही नहीं होता। हम इसे आसान तरीके से या कठिन तरीके से कर सकते हैं और आसान तरीका हमेशा बेहतर होता है। अब ‘‘समझौता करने’’ का समय आ गया है। अब और लोगों की जान नहीं जानी चाहिए।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मैं रूसी लोगों से प्यार करता हूं तथा राष्ट्रपति पुतिन के साथ मेरे हमेशा बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि रूस ने हमें द्वितीय विश्व युद्ध जीतने में मदद की, इस प्रक्रिया में लगभग 60,000,000 लोगों की जान चली गई।’’ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर जल्द संघर्ष विराम समझौता नहीं हुआ, तो उनके पास रूस द्वारा अमेरिका और अन्य भागीदार देशों को बेची जाने वाली किसी भी वस्तु पर शुल्क, कर और प्रतिबंध लगाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होगा।</p>
<p>पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने यूक्रेन में युद्ध के वित्तपोषण को लेकर रूस के राजस्व में कटौती करने के प्रयास के तहत इस महीने की शुरुआत में उसके तेल और ऊर्जा क्षेत्रों सहित विभिन्न रूसी आर्थिक क्षेत्रों पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे। ट्रंप कई महीनों से यूक्रेन में संघर्ष विराम का आह्वान कर रहे हैं और दोनों पक्षों से बातचीत करने का आग्रह कर रहे हैं। रूसी सेना ने 2022 की शुरुआत में यूक्रेन पर हमला किया था और तब से लेकर अब तक करीब तीन साल से जारी लड़ाई में दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान ट्रंप ने बार-बार कहा कि अगर वह राष्ट्रपति चुने गए तो वह रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को एक दिन में सुलझा सकते हैं। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/518011/america-fire-breaks-out-in-another-forest-in-los-angeles">America: लॉस एंजिल्स में लगी भीषण आग में आठ हजार एकड़ क्षेत्र जलकर हुआ नष्ट, 28 लोगों की मौत </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 12:46:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Russia-Ukraine War : सैनिकों की कमी से जूझ रहे रूस को जल्द शांति समझौते की दरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लंदन।</strong> रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शायद यह सोच रहे होंगे कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव जीतकर सत्ता पर थोड़ा पहले आसीन होते तो उनके लिए बेहतर होता। ऐसा होने पर पुतिन संभवत: एक समझौते को स्वीकार कर लेते, जिसके तहत रूस को यूक्रेन का (लगभग अमेरिकी राज्य वर्जीनिया के आकार का) वह महत्वपूर्ण क्षेत्र हासिल हो जाता, जहां रूसी बलों ने बढ़त हासिल की थी, जबकि यूक्रेन तटस्थ रहकर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) या यूरोपीय संघ में शामिल होने की किसी भी योजना को फिलहाल के लिए त्याग देता।</p>
<p>इस समय यूक्रेन और रूस दोनों युद्ध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/507559/russia-which-is-facing-shortage-of-soldiers-needs-a-peace"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/रूस.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लंदन।</strong> रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शायद यह सोच रहे होंगे कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव जीतकर सत्ता पर थोड़ा पहले आसीन होते तो उनके लिए बेहतर होता। ऐसा होने पर पुतिन संभवत: एक समझौते को स्वीकार कर लेते, जिसके तहत रूस को यूक्रेन का (लगभग अमेरिकी राज्य वर्जीनिया के आकार का) वह महत्वपूर्ण क्षेत्र हासिल हो जाता, जहां रूसी बलों ने बढ़त हासिल की थी, जबकि यूक्रेन तटस्थ रहकर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) या यूरोपीय संघ में शामिल होने की किसी भी योजना को फिलहाल के लिए त्याग देता।</p>
<p>इस समय यूक्रेन और रूस दोनों युद्ध से थक चुके हैं। रूसी सेना यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ी है, लेकिन रूस युद्ध के लिए सैनिकों की भर्ती को लेकर संघर्ष कर रहा है। हाल में हुए एक खुलासे से इस बात को बल मिला है कि उत्तर कोरिया के सैनिक रूस की तरफ से युद्ध लड़ रहे हैं। रूस ने युद्ध तेज कर दिया है। </p>
<p>यूक्रेन से खबरें मिल रही हैं कि रूस ने युद्ध में पहली बार अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। ऐसे में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि इस समय शांति समझौता करना रूस और यूक्रेन दोनों के हित में होगा। पश्चिमी देशों के आकलन के अनुसार, युद्ध में रूस के लगभग 1,15,000 से 1,60,000 सैनिक मारे गए हैं। इनमें से 90 प्रतिशत सैनिक युद्ध की शुरुआत में मारे गए थे, जबकि 5,00,000 अन्य सैनिक घायल हुए हैं। इन नुकसानों की भरपाई के लिए रूस हर महीने 20,000 नए सैनिकों की भर्ती कर रहा है। रूस में शांतिकाल के दौरान भी सैनिकों की भर्ती आसान नहीं रही है। नए सैनिकों को अक्सर पुराने सैनिकों की ओर से उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। इसलिए कई रूसी युवा सेना में भर्ती होने से कतराते हैं।</p>
<p> रूसी सेना में 17वीं शताब्दी के अंत से नए सैनिकों के उत्पीड़न का चलन रहा है। सोवियत संघ के विघटन के बाद, रूसी मीडिया ने सेना में भयावह स्थितियों को उजागर करते हुए बताया था कि सैनिकों को खराब चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और वे गंभीर कुपोषण से पीड़ित होते हैं। कई रूसियों को यह भी याद होगा कि 1990 के दशक के मध्य में चेचन्या में युद्ध लड़ने के लिए भेजे गए खराब तरीके से प्रशिक्षित सैनिकों के साथ कैसा व्यवहार किया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि रूस सरकार औसत रूसी सैनिक की सुरक्षा और भलाई के बारे में चिंतित नहीं रही है। सेना को गरीबों और वंचितों को फंसाने के लिए एक जाल के रूप में भी देखा जाता है। </p>
<p>रूसी सैनिकों की शहादत को नजरअंदाज कर दिया जाता है और कभी-कभी शवों की पहचान तक नहीं की जाती। अधिकांश नए सैनिक बश्कोर्तोस्तान, चेचन्या, साखा गणराज्य (याकुत्ज़िया) और दागिस्तान जैसे सुदूर पूर्वी गणराज्यों से भर्ती किए जाते हैं। कुल मिलाकर रूसी राजधानी मॉस्को से सैनिकों की भर्ती कम ही होती है, लेकिन मॉस्को के युवा भी सरकार की सख्ती का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>सैकड़ों-हजारों रूसी देश छोड़कर भाग गए हैं, जिससे सरकार को सैनिकों की भर्ती के लिए एक सख्त मसौदा कानून पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस साल एक नवंबर को नया कानून लागू होने के बाद ‘ड्राफ्ट नोटिस’ डाक के बजाय अब ऑनलाइन भेजे जाते हैं। यह नोटिस रूसी व्यक्ति के डिजिटल मेलबॉक्स में पहुंचने के बाद उसके देश छोड़ने पर तुरंत रोक लग जाती है और यदि वह छोड़ने का प्रयास करता है तो उसे कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है। </p>
<p>सबकुछ आजमाने के बाद भी रूस के पास सैनिकों की कमी होती जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने नए सैनिकों को आकर्षित करने के लिए वेतन में वृद्धि की है, जिसकी वजह से सेना में भर्ती होना असैन्य नौकरियों की तुलना में अधिक आकर्षक हो गया है। उत्तर कोरियाई सेना की मदद लेना एक समाधान हो सकता है, लेकिन उत्तर कोरियाई सैनिकों के पास युद्ध का कोई अनुभव नहीं है। उत्तर कोरियाई सैनिक दूसरी तरह की सैन्य रणनीति का उपयोग करते हैं और अधिकांश रूसी भाषा नहीं बोल पाते, जिससे विशिष्ट युद्ध अभियानों के लिए समन्वय करना अधिक कठिन हो जाता है। </p>
<p>ऐसे में पुतिन के लिए बेलारूस से मदद मांगना एक विकल्प हो सकता है, क्योंकि बेलारूस के सैनिक रूसी तौर-तरीकों और अभियानों की अच्छी तरह वाकिफ होते हैं। दूसरी ओर यूक्रेन के लिए भी युद्ध में कुछ खास होता हुआ नहीं दिख रहा। यूक्रेन भी सैनिकों की कमी और अपने क्षेत्रों को होने वाले नुकसानों से जूझ रहा है। लेकिन यह सोचना भी गलत होगा कि पुतिन आखिरकार बातचीत की मेज पर आ रहे हैं। पुतिन के लिए फिलहाल स्थिति थोड़ी सहज हो सकती है, क्योंकि ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान यूक्रेन को अमेरिका की ओर से जरूरत से ज्यादा मदद दिए जाने का विरोध किया था। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें :<a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/507550/arrest-warrant-may-be-issued-against-gautam-adani-and-seven">गौतम अदाणी और सात अन्य के खिलाफ जारी हो सकता गिरफ्तारी वारंट, जानिए पूरा मामला </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 16:55:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल संबंधी नई नीति पर किए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को एक नई परमाणु नीति पर हस्ताक्षर किए, जिसमें घोषणा की गई है कि किसी भी परमाणु शक्ति द्वारा समर्थित देश अगर रूस पर हमला करता है तो इसे उनके देश पर संयुक्त हमला माना जाएगा। पुतिन ने परमाणु निवारक संबंधी नई नीति का अनुमोदन 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन में सैनिकों को भेजने वाले हमले के 1,000वें दिन पर किया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के उस फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने यूक्रेन को अमेरिका द्वारा आपूर्ति की गई लंबी दूरी की मिसाइलों से रूस के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/507057/vladimir-putin-signs-new-policy-on-use-of-nuclear-weapons%C2%A0"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/व्लादिमीर-पुतिन1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को एक नई परमाणु नीति पर हस्ताक्षर किए, जिसमें घोषणा की गई है कि किसी भी परमाणु शक्ति द्वारा समर्थित देश अगर रूस पर हमला करता है तो इसे उनके देश पर संयुक्त हमला माना जाएगा। पुतिन ने परमाणु निवारक संबंधी नई नीति का अनुमोदन 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन में सैनिकों को भेजने वाले हमले के 1,000वें दिन पर किया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के उस फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने यूक्रेन को अमेरिका द्वारा आपूर्ति की गई लंबी दूरी की मिसाइलों से रूस के अंदर लक्ष्यों पर हमला करने की अनुमति दी थी।</p>
<p>रूस पर कोई भी बड़ा हवाई हमला परमाणु प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है। ऐसे में इस नीति पर हस्ताक्षर पुतिन के पश्चिमी देशों को पीछे हटने को मजबूर करने के लिए रूस के परमाणु शस्त्रागार का उपयोग करने के संकेत को दर्शाता है। यह पूछे जाने पर कि क्या नयी नीति अमेरिका द्वारा मिसाइल उपयोग के संबंध में यूक्रेन पर प्रतिबंधों में ढील देने के निर्णय के बाद जानबूझकर जारी की गई तो, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि दस्तावेज को ‘‘समयबद्ध तरीके’’ से प्रकाशित किया गया है और पुतिन ने सरकार को इस वर्ष के शुरू में इसे अद्यतन करने का निर्देश दिया था ताकि यह ‘‘वर्तमान स्थिति के अनुरूप’’ हो। </p>
<p>पुतिन ने सितंबर में परमाणु नीति में बदलावों की पहली बार घोषणा की थी, तब उन्होंने प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा करने वाली बैठक की अध्यक्षता की थी। दस्तावेज के नए संस्करण में कहा गया है कि किसी गैर-परमाणु शक्ति द्वारा ‘‘परमाणु शक्ति संपन्न देश की भागीदारी या समर्थन’’ के साथ उनके देश के खिलाफ किए गए हमले को ‘‘रूसी संघ पर उनके संयुक्त हमले’’ के रूप में देखा जाएगा। इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस तरह के हमले की प्रतिक्रिया में परमाणु हथियारों का आवश्यक तौर से इस्मेताल होगा या नहीं। </p>
<p>हालांकि, इसमें नीति के पिछले संस्करण की तुलना में परमाणु हथियारों के उपयोग की शर्तों को अधिक विस्तार से बताया गया है तथा कहा गया है कि इनका उपयोग बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों, विमानों, ड्रोन और हवाई हमले वाले अन्य हथियारों से होने वाले बड़े हवाई हमले की स्थिति में किया जा सकता है। नयी नीति में कहा गया है कि यदि रूस या उसके सहयोगियों के क्षेत्र को लक्ष्य करके बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने बारे में विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है रतो रूस अपने परमाणु शस्त्रागार का उपयोग कर सकता है। </p>
<p>संशोधित नीति में यह परिकल्पना की गई है कि रूस अपने सहयोगी बेलारूस के खिलाफ हमले के जवाब में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। लगभग 30 वर्षों से बेलारूस पर शासन कर रहे राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको रूसी सब्सिडी और समर्थन पर निर्भर रहे हैं। उन्होंने रूस को यूक्रेन में सेना भेजने के लिए अपने देश के क्षेत्र का उपयोग करने दिया और क्रेमलिन को बेलारूस में अपने कुछ सामरिक परमाणु हथियार तैनात करने की अनुमति दी है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/507050/pakistan-court-frames-charges-against-shah-mehmood-qureshi-and-others%C2%A0">शाह महमूद कुरैशी व अन्य लोगों के खिलाफ पाकिस्तान की अदालत ने तय किए आरोप </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 17:08:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप-व्लादिमीर पुतिन ने फोन पर की बात, यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के मुद्दे पर हुई चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की और यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। रविवार को एक मीडिया रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। हाल में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रंप ने 70 से ज्यादा विश्व नेताओं से बात की है। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शामिल हैं। </p>
<p>‘वाशिंगटन पोस्ट’ की एक विशेष रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘दोनों नेताओं ने यूरोप महाद्वीप में शांति के लक्ष्य को लेकर चर्चा की और ट्रंप ने यूक्रेन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/505330/trump-putin-spoke-on-phone-discussed-the-issue-of-ending-the"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/ट्रंप-पुतिन-ने-की-फोन-पर-बात.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की और यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। रविवार को एक मीडिया रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। हाल में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रंप ने 70 से ज्यादा विश्व नेताओं से बात की है। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शामिल हैं। </p>
<p>‘वाशिंगटन पोस्ट’ की एक विशेष रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘दोनों नेताओं ने यूरोप महाद्वीप में शांति के लक्ष्य को लेकर चर्चा की और ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध के शीघ्र समाधान पर चर्चा करने के लिए आगामी बातचीत में शामिल होने में अपनी रुचि व्यक्त की।’’ अखबार ने कहा, ‘‘पुतिन के साथ ट्रंप की फोन पर हुई बातचीत से अवगत एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ट्रंप संभवतः रूस के आक्रमण के कारण यूक्रेन में फिर किसी नए संकट के साथ व्हाइट हाउस (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय एवं आवास) में जाना नहीं चाहते हैं।’’ ट्रंप 20 जनवरी 2025 को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने वाले हैं। यूक्रेन को ट्रंप-पुतिन की फोन पर हुई बातचीत के बारे में सूचित कर दिया गया है।</p>
<p> ‘वाशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने रिजॉर्ट से पुतिन के साथ यह बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत से अवगत व्यक्ति ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि ट्रंप ने इस बातचीत के दौरान रूसी राष्ट्रपति को यूक्रेन में युद्ध को और नहीं बढ़ाने की सलाह दी तथा उन्हें यूरोप में वाशिंगटन की बड़ी सैन्य उपस्थिति की याद दिलाई।’’ </p>
<p>इस बीच, ट्रंप के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि वह नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य विश्व नेताओं के बीच निजी स्तर पर हुई बातचीत के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। चेउंग ने कहा, ‘‘नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐतिहासिक चुनाव में निर्णायक जीत हासिल की है और दुनिया भर के नेता जानते हैं कि अमेरिका विश्व मंच पर वर्चस्व हासिल करेगा। यही कारण है कि नेताओं ने 45वें और 47वें राष्ट्रपति के साथ मजबूत संबंध विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, क्योंकि वह वैश्विक शांति और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करते हैं।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/505329/terrorist-attack-on-pakistani-border--five-iranian-security-personnel-killed">पाकिस्तानी सीमा पर आतंकवादी हमला, ईरान के पांच सुरक्षाकर्मियों की मौत </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Nov 2024 11:23:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत को बताया 'महान देश', कहा- दोनों देशों का एक-दूसरे पर गहरा विश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार है क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था वर्तमान में किसी भी अन्य देश की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। सोचि में ‘वल्दाई डिस्कशन क्लब’ के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए पुतिन ने बृहस्पतिवार को यह भी कहा कि भारत के साथ रूस सभी दिशाओं में संबंध विकसित कर रहा है और द्विपक्षीय संबंधों में एक-दूसरे पर दोनों देशों का गहरा विश्वास है। </p>
<p>उन्होंने कहा, डेढ़ अरब की आबादी, दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज प्रगति, प्राचीन संस्कृति और भविष्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/504821/russian-president-vladimir-putin-called-india-a-great-country-and"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/व्लादिमीर-पुतिन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि भारत वैश्विक महाशक्तियों की सूची में शामिल होने का हकदार है क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था वर्तमान में किसी भी अन्य देश की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। सोचि में ‘वल्दाई डिस्कशन क्लब’ के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए पुतिन ने बृहस्पतिवार को यह भी कहा कि भारत के साथ रूस सभी दिशाओं में संबंध विकसित कर रहा है और द्विपक्षीय संबंधों में एक-दूसरे पर दोनों देशों का गहरा विश्वास है। </p>
<p>उन्होंने कहा, डेढ़ अरब की आबादी, दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज प्रगति, प्राचीन संस्कृति और भविष्य में विकास की बहुत अच्छी संभावनाओं की वजह से भारत को नि:संदेह महाशक्तियों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। भारत को महान देश बताते हुए पुतिन ने कहा, ‘‘हम भारत के साथ सभी दिशाओं में संबंध विकसित कर रहे हैं। भारत एक महान देश है, अब जनसंख्या के मामले में सबसे बड़ा देश है जहां की आबादी 1.5 अरब है और साथ ही जहां हर साल आबादी में एक करोड़ की वृद्धि होती है।</p>
<p> उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक प्रगति में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। रूसी समाचार एजेंसी तास ने पुतिन के हवाले से कहा, ‘‘हमारे संबंध कहाँ और किस गति से विकसित होंगे, इसका हमारा दृष्टिकोण आज की वास्तविकताओं पर आधारित है। हमारा सहयोग हर साल कई गुना बढ़ रहा है।’’ पुतिन ने कहा कि सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में भारत तथा रूस के बीच संपर्क विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, देखिए कितने प्रकार के रूसी सैन्य उपकरण भारतीय सशस्त्र बलों की सेवा में हैं। इस रिश्ते में काफी हद तक विश्वास है। हम भारत को केवल अपने हथियार नहीं बेचते हैं; हम उन्हें संयुक्त रूप से डिजाइन भी करते हैं।’’ पुतिन ने उदाहरण के तौर पर ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल परियोजना का उल्लेख किया। </p>
<p>उन्होंने कहा, वास्तव में, हमने इसे (मिसाइल) तीन वातावरणों में उपयोग के लिए उपयुक्त बनाया है - हवा में, समुद्र में और जमीन पर। भारत के सुरक्षा लाभ के लिए संचालित ये परियोजनाएं जारी हैं।" रूसी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘यह व्यापक रूप से ज्ञात है और किसी को भी इससे कोई समस्या नहीं है, लेकिन ये परियोजनाएं उच्च स्तर के आपसी विश्वास और सहयोग को प्रदर्शित करती हैं। इसलिए हम निकट भविष्य में यह जारी रखेंगे और मुझे उम्मीद है कि दूर भविष्य में भी हम ऐसा करना जारी रखेंगे। एजेंसी के अनुससार, पुतिन ने भारत और चीन के बीच सीमा पर कुछ कठिनाइयों को स्वीकार किया। हालाँकि, उन्होंने कहा कि अपने राष्ट्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बुद्धिमान और सक्षम लोग समझौते की तलाश में हैं और अंततः उसे पा लेंगे। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/504816/indian-americans-said-donald-trump-is-a-strong-leader-the">भारतीय अमेरिकियों ने कहा-डोनाल्ड ट्रंप एक मजबूत नेता हैं, देश को मजबूत नेतृत्व की जरूरत</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Nov 2024 14:48:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस के राष्ट्रपति पुतिन बोले- हम यूक्रेन से बातचीत के लिए तैयार, भारत-चीन और ब्राजील कर सकते हैं मध्यस्थता</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>व्लादिवोस्तोक। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यूक्रेन के साथ रूस की संभावित शांति वार्ता में चीन, भारत और ब्राजील मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। पुतिन ने ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम में कहा कि हालांकि, हमारा प्रमुख उद्देश्य यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र को कब्जे में लेना है। रूसी सेना धीरे-धीरे कुर्स्क से यूक्रेनी सेना को पीछे खदेड़ रही है। </p>
<p>रूसी समाचार एजेंसी ने पुतिन के हवाले से अपनी खबर में कहा, ‘‘हम अपने मित्रों और साझेदारों का सम्मान करते हैं। हम इस संघर्ष से जुड़े सभी मुद्दों को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/490350/russia-will-increase-goods-traffic-through-northern-sea-route-putin%C2%A0"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-09/रूस-के-राष्ट्रपति-पुतिन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>व्लादिवोस्तोक। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यूक्रेन के साथ रूस की संभावित शांति वार्ता में चीन, भारत और ब्राजील मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। पुतिन ने ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम में कहा कि हालांकि, हमारा प्रमुख उद्देश्य यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र को कब्जे में लेना है। रूसी सेना धीरे-धीरे कुर्स्क से यूक्रेनी सेना को पीछे खदेड़ रही है। </p>
<p>रूसी समाचार एजेंसी ने पुतिन के हवाले से अपनी खबर में कहा, ‘‘हम अपने मित्रों और साझेदारों का सम्मान करते हैं। हम इस संघर्ष से जुड़े सभी मुद्दों को ईमानदारी से सुलझाना चाहते हैं, मुख्य रूप से चीन, ब्राजील और भारत। मैं इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में रहता हू।’’ </p>
<p>रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने इजवेस्तिया दैनिक को बताया कि भारत इस मुद्दे पर वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए मदद कर सकता है। मोदी और पुतिन के बीच ‘‘रचनात्मक और मैत्रीपूर्ण संबंधों’’ को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ‘‘इस संघर्ष में शामिल लोगों से प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि वह पुतिन, जेलेंस्की और अमेरिकियों के साथ स्वतंत्र रूप से संवाद करते हैं।’’ </p>
<p>पेस्कोव ने कहा, ‘‘इससे भारत को वैश्विक मामलों में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का एक बड़ा मौका मिलता है और अमेरिका तथा यूक्रेन को अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति का इस्तेमाल करने और शांतिपूर्ण समाधान के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।’’ उन्होंने हालांकि कहा कि इस मुद्दे पर मध्यस्थता करने की मोदी की ‘‘कोई विशेष योजना नहीं’’ है। मोदी ने 23 अगस्त को यूक्रेन का दौरा किया था, जहां उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से कहा था कि यूक्रेन और रूस को बिना समय बर्बाद किए युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता करनी चाहिए तथा भारत क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए ‘‘सक्रिय भूमिका’’ निभाने को तैयार है। </p>
<p><strong>रूस उत्तरी समुद्री मार्ग से बढ़ाएगा माल यातायात</strong><br />रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि रूस उत्तरी समुद्री मार्ग पर कार्गो यातायात बढ़ाना जारी रखेगा। पूर्वी आर्थिक मंच (ईईएफ) के पूर्ण सत्र के दौरान पुतिन ने कहा,  हम उत्तरी समुद्री मार्ग के माध्यम से कार्गो यातायात में वृद्धि जारी रखेंगे, जिसमें आर्कटिक जमा के सक्रिय विकास, पारगमन को बढ़ाकर पश्चिम से पूर्व की ओर कार्गो को पुनर्निर्देशित करना शामिल है। पुतिन ने कहा कि देश उत्तरी समुद्री मार्ग की सीमाओं के भीतर रूसी बंदरगाहों की क्षमता भी बढ़ाना जारी रखेगा।</p>
<p>पुतिन ने कहा  दो साल पहले उत्तरी समुद्री मार्ग पर कैबोटेज यात्राएं शुरू की गई थीं, आज इस योजना में उत्तर-पश्चिम, आर्कटिक और सुदूर पूर्व में 14 बंदरगाह हैं। मैं यह बताना चाहूंगा कि पिछले साल के अंत तक रूसी बंदरगाहों की क्षमता उत्तरी समुद्री मार्ग की सीमाओं के भीतर 40 मिलियन टन से अधिक हो गया, हमारा मानना ​​है कि यह सिर्फ शुरुआत है और हम उनकी क्षमताओं को बढ़ाना, कार्गो ट्रांसशिपमेंट का आधुनिकीकरण करना और छोटी और लंबी दूरी की रेलवे पहुंच का विस्तार करना जारी रखेंगे।</p>
<p>ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम मंगलवार को शुरू हुआ और शुक्रवार तक चलेगा। इसकी मेजबानी रूस के प्रशांत तट के शहर व्लादिवोस्तोक में सुदूर पूर्वी संघीय विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही है। स्पूतनिक ईईएफ 2024 का सामान्य सूचना भागीदार है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/490346/girls-of-the-community-will-be-inspired-by-my-story">Pakistan : समुदाय की लड़कियां मेरी कहानी से प्रेरित होंगी, सिंध की पहली हिंदू महिला पुलिस अधिकारी ने जताई उम्मीद </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 14:49:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम देशों के साथ कैदियों की अदला-बदली पर की है 'बड़ी डील', डोनाल्ड ट्रंप ने किया स्वीकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के साथ कैदियों की अदला-बदली पर एक 'बड़ा समझौता' किया है। अमेरिका, रूस, जर्मनी और अन्य पश्चिमी देशों ने गुरुवार को 24 कैदियों की अदला-बदली के लिए एक समझौता किया है, जो शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से कैदियों की सबसे बड़ी अदला बदली समझौतों में से एक है। </p>
<p>ट्रंप ने जॉर्जिया के अटलांटा में एक अभियान कार्यक्रम में कहा, वैसे, मैं व्लादिमीर पुतिन को एक और बड़ा सौदा करने के लिए बधाई देना चाहता हूं। साथ ही उन्होंने कैदियों की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/484196/vladimir-putin-has-made-a-big-deal-on-the-exchange"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-08/डोनाल्ड-ट्रंप1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong>अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के साथ कैदियों की अदला-बदली पर एक 'बड़ा समझौता' किया है। अमेरिका, रूस, जर्मनी और अन्य पश्चिमी देशों ने गुरुवार को 24 कैदियों की अदला-बदली के लिए एक समझौता किया है, जो शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से कैदियों की सबसे बड़ी अदला बदली समझौतों में से एक है। </p>
<p>ट्रंप ने जॉर्जिया के अटलांटा में एक अभियान कार्यक्रम में कहा, वैसे, मैं व्लादिमीर पुतिन को एक और बड़ा सौदा करने के लिए बधाई देना चाहता हूं। साथ ही उन्होंने कैदियों की अदला-बदली की परिस्थितियों पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि इस सौदे में वर्तमान अमेरिकी प्रशासन की ओर से “भयानक” गलतियाँ है। इससे पहले  ट्रंप ने यह समझौता करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन की आलोचना की और इसके तथ्यों और रूस को नकद भुगतान की संभावना के बारे में सवाल पूछे। </p>
<p>रूस की संघीय सुरक्षा सेवा ने गुरुवार को पुष्टि की कि कई नाटो देशों में हिरासत में लिए गए आठ रूसी घर लौट आए हैं। उन्हें लेकर एक विमान गुरुवार देर रात अंकारा से मॉस्को के वनुकोवो-2 हवाई अड्डे पर पहुंचा, जहां  पुतिन ने उनका स्वागत किया। बदले में रूस ने 16 लोगों को रिहा कर दिया है, जिनमें सात रूसी और पांच जर्मन नागरिक शामिल हैं।</p>
<p> एक रूसी खुफिया सूत्र ने गुरुवार को बताया कि घर लौटने वाले रूसियों की सूची में आर्टेम डुल्टसेव, अन्ना डुल्टसेवा, पावेल रूबत्सोव, वादिम कोनोशचेनोक, मिखाइल मिकुशिन, रोमन सेलेज़नेव, व्लादिस्लाव क्लाइशिन और कई नाबालिग बच्चे शामिल हैं। सूत्र ने बताया कि जर्मनी में आजीवन कारावास की सजा काट रहे रूसी नागरिक वादिम सोकोलोव, जिसे क्रासिकोव के नाम से भी जाना जाता है, भी स्वदेश लौट आया। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/484187/myanmars-largest-party-seeks-russias-support-in-fight-against-terrorism%C2%A0">म्यांमार की सबसे बड़ी पार्टी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में रूस से मांगा समर्थन </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Aug 2024 14:53:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Modi Russia Visit : रूस दौरे से पहले पीएम मोदी बोले- भारत शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र के लिए सहयोगात्मक भूमिका निभाना चाहता है </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> यूक्रेन में संघर्ष के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर वार्ता के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र के लिए सहयोगात्मक भूमिका निभाना चाहता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को में 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को होने वाली वार्ता से पहले आज रात भारतीय प्रधानमंत्री के लिए निजी रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की शुरुआत के बाद से यह भारतीय प्रधानमंत्री की रुस की पहली यात्रा है। यह, 2019 के बाद से मोदी की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/479078/draft-add-yourpm-modi-russia-visit-pm-modi-said-before"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/pm-modi-russia-visit1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> यूक्रेन में संघर्ष के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर वार्ता के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र के लिए सहयोगात्मक भूमिका निभाना चाहता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को में 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को होने वाली वार्ता से पहले आज रात भारतीय प्रधानमंत्री के लिए निजी रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की शुरुआत के बाद से यह भारतीय प्रधानमंत्री की रुस की पहली यात्रा है। यह, 2019 के बाद से मोदी की रूस की पहली और अपने तीसरे कार्यकाल की पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा भी है।</p>
<p> नौ जुलाई को रूस में अपनी यात्रा पूरी करने के बाद मोदी ऑस्ट्रिया के लिए रवाना होंगे। यह, 40 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ऑस्ट्रिया यात्रा होगी। मोदी और पुतिन मंगलवार को 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहित विविध क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने के तरीकों पर विचार-विमर्श करेंगे। मोदी ने एक बयान में कहा, ''भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पिछले 10 वर्षों में और बढ़ी है, जिसमें ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और लोगों से लोगों का संपर्क आदि क्षेत्र शामिल हैं।’’ </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Over the next three days, will be in Russia and Austria. These visits will be a wonderful opportunity to deepen ties with these nations, with whom India has time tested friendship. I also look forward to interacting with the Indian community living in these countries.…</p>
— Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/1810178614702260335?ref_src=twsrc%5Etfw">July 8, 2024</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘मैं, मेरे मित्र राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मामलों पर दृष्टिकोण साझा करने को लेकर आशान्वित हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम शांतिपूर्ण एवं स्थिर क्षेत्र के लिए सहायोगात्मक भूमिका निभाना चाहते हैं।’’ भारत, रूस के साथ अपनी ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ का पुरजोर बचाव करता रहा है और यूक्रेन संघर्ष के बावजूद उसने संबंधों में गति बनाए रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा उन्हें रूस में जीवंत भारतीय समुदाय से मिलने का अवसर भी प्रदान करेगी। </p>
<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अगले तीन दिन मैं रूस और ऑस्ट्रिया में रहूंगा। ये दौरे इन देशों के साथ संबंधों को गहरा करने का एक शानदार अवसर होंगे, जिनके साथ भारत की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है।’’ रूस के साथ अपनी मजबूत दोस्ती को इंगित करते हुए भारत ने अभी तक यूक्रेन पर मास्को के आक्रमण की निंदा नहीं की है। भारत यह कहता रहा है कि संकट को कूटनीति और बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। रूस में अपनी यात्रा पूरी करने के बाद मोदी ऑस्ट्रिया के लिए रवाना होंगे। यह, विगत 40 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की वहां की पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रिया को भारत का 'दृढ़ और विश्वसनीय साझेदार' बताया और कहा कि इस दौरे पर उन्हें राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वान डेर बेलन और चांसलर कार्ल नेहमर से मिलने का अवसर मिलेगा। </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘ऑस्ट्रिया हमारा दृढ़ और विश्वसनीय भागीदार है और हम लोकतंत्र और बहुलवाद के आदर्शों को साझा करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ''पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। मैं नवाचार, प्रौद्योगिकी और सतत विकास के नए और उभरते क्षेत्रों में हमारी साझेदारी को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अपनी चर्चाओं को लेकर आशान्वित हूं।’’ मोदी ने कहा कि वह दोनों पक्षों की कारोबारी हस्तियों के साथ विचारों के आदान-प्रदान को लेकर आशान्वित हैं ताकि परस्पर लाभकारी व्यापार एवं निवेश अवसरों की संभावना तलाशी जा सके। उन्होंने कहा, ''मैं ऑस्ट्रिया में भारतीय समुदाय से भी बातचीत करुंगा, जो अपने पेशेवर रूख और आचरण के लिए जाने जाते हैं।’’ </p>
<p>मोदी की मॉस्को यात्रा से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि एजेंडा ‘व्यापक’ होगा। भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी में सर्वोच्च संस्थागत संवाद तंत्र है। वार्षिक शिखर सम्मेलन बारी-बारी से भारत और रूस में आयोजित किए जाते हैं। पिछला शिखर सम्मेलन 6 दिसंबर, 2021 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।</p>
<p>राष्ट्रपति पुतिन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने ‘शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए भारत-रूस साझेदारी’ नामक एक संयुक्त बयान के अलावा 28 समझौता ज्ञापनों और समझौतों पर मुहर लगाई थी। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने आखिरी बार 16 सितंबर, 2022 को उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय वार्ता की थी। </p>
<p>इस दौरान मोदी ने यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने के लिए पुतिन पर दबाव डालते हुए कहा था, ‘‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’’ फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से, मोदी ने पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ टेलीफोन पर कई बार बातचीत की है। भारत और रूस में अभी तक बारी-बारी से 21 वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं। आखिरी शिखर सम्मेलन छह दिसंबर 2021 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे। जी-7 देशों द्वारा मूल्य सीमा तय किए जाने तथा कई पश्चिमी देशों में खरीद को लेकर बढ़ती बेचैनी के बावजूद भारत द्वारा रूस से सस्ते दाम पर कच्चे तेल के आयात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/479076/pakistans-former-foreign-minister-shah-mehmood-qureshi-has-now-been">Pakistan : पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को अब लाहौर की कोट लखपत जेल में किया गया स्थानांतरित, अदालत में होंगे पेश </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 16:49:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूक्रेन में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की कोई आवश्यकता नहीं लेकिन विकल्प खुले हैं : व्लादिमीर पुतिन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उन्हें यूक्रेन के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि यूक्रेन की मदद कर रहे पश्चिमी देश सोचते हैं कि मॉस्को ऐसा कभी नहीं करेगा तो यह उनकी गलती है। पुतिन ने यह संदेश ऐसे समय में दिया है जब यूक्रेनी सैन्य बलों को उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी देश मदद पहुंचाने के लिए कदम उठा रहे हैं। पुतिन ने इन नाटो सदस्यों को स्पष्ट संदेश दिया कि यूक्रेन को सैन्य सहायता मुहैया कराने पर उनका रूस के साथ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/478643/there-is-no-need-to-use-nuclear-weapons-in-ukraine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/व्लादिमीर-पुतिन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मॉस्को। </strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उन्हें यूक्रेन के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि यूक्रेन की मदद कर रहे पश्चिमी देश सोचते हैं कि मॉस्को ऐसा कभी नहीं करेगा तो यह उनकी गलती है। पुतिन ने यह संदेश ऐसे समय में दिया है जब यूक्रेनी सैन्य बलों को उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी देश मदद पहुंचाने के लिए कदम उठा रहे हैं। पुतिन ने इन नाटो सदस्यों को स्पष्ट संदेश दिया कि यूक्रेन को सैन्य सहायता मुहैया कराने पर उनका रूस के साथ संघर्ष हो सकता है जो परमाणु संघर्ष में बदल सकता है। </p>
<p>मॉस्को ने हाल में दक्षिणी रूस में सहयोगी बेलारूस के साथ मिलकर अपने परमाणु हथियार संबंधी सामरिक तैयारी के लिए अभ्यास किया। पश्चिमी देश यूक्रेन में नाटो सैनिकों की तैनाती और रूसी क्षेत्र में सीमित हमलों के लिए उसे लंबी दूरी के हथियारों का उपयोग करने की अनुमति देने पर विचार कर रहे हैं। रूस ने अपने सैन्य अभ्यास को पश्चिमी देशों के इसी कदम की प्रतिक्रिया बताया। </p>
<p>पुतिन ने यूक्रेन में 24 फरवरी 2022 को हमला शुरू किया था और इसके बाद से वह युद्ध में पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप को हतोत्साहित करने के लिए रूस की परमाणु ताकत का कई बार जिक्र कर चुके हैं। पुतिन ने रूस की हालिया सैन्य सफलताओं के बीच कहा कि मॉस्को को यूक्रेन में जीत के लिए परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं है लेकिन, यूरोप में खासकर छोटे देशों समेत नाटो के सदस्यों के प्रतिनिधियों को यह अंदाजा होना चाहिए कि वह किसके साथ खेल रहे हैं।</p>
<p> उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रूस उन पर हमला करता है तो अमेरिकी सुरक्षा पर भरोसा करना उनकी गलती हो सकती है। पुतिन ने कहा, लगातार तनाव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यदि यूरोप में ये गंभीर परिणाम होते हैं, तो सामरिक हथियारों के मामले में हमारी क्षमता को देखते हुए अमेरिका क्या कदम उठाएगा ? कहना मुश्किल है। क्या वे वैश्विक संघर्ष चाहते हैं?</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/478633/reformist-pezeshkian-wins-presidential-election-in-iran">ईरान की सत्ता में बड़ा उलटफेर, सुधारवादी मसूद पेजेश्कियान जीते राष्ट्रपति चुनाव</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 12:32:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
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                <title>रूसी राष्ट्रपति चुनाव : विपक्ष पर नकेल कसने के बावजूद Vladimir Putin चाहते हैं लोग उन्हें वोट दें? </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलचेस्टर (यूके)।</strong> रूस में इस सप्ताह राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग निश्चित रूप से व्लादिमीर पुतिन निर्णायक रूप से छह साल के अगले कार्यकाल के लिए जीत हासिल करेंगे। जब वह ऐसा करेंगे, तो यह उन्हें जोसेफ स्टालिन के बाद सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाला नेता बना देगा।</p>
<p>अग्रिम मतदान से संकेत मिलता है कि वह 75% वोट अर्जित करेंगे और उन्हें बहुत कम या कोई सार्थक विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनके तीन मुख्य विरोधियों में से प्रत्येक को 5% या उससे कम मतदान का संकेत मिला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/450351/vladimir-putin-elected-russian-president-despite-cracking-down-on-opposition"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-03/vladimir-putin.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलचेस्टर (यूके)।</strong> रूस में इस सप्ताह राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग निश्चित रूप से व्लादिमीर पुतिन निर्णायक रूप से छह साल के अगले कार्यकाल के लिए जीत हासिल करेंगे। जब वह ऐसा करेंगे, तो यह उन्हें जोसेफ स्टालिन के बाद सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाला नेता बना देगा।</p>
<p>अग्रिम मतदान से संकेत मिलता है कि वह 75% वोट अर्जित करेंगे और उन्हें बहुत कम या कोई सार्थक विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनके तीन मुख्य विरोधियों में से प्रत्येक को 5% या उससे कम मतदान का संकेत मिला है, जबकि किसी भी उम्मीदवार ने महत्वपूर्ण समर्थन आकर्षित करने की संभावना के बारे में सोचा - या जो यूक्रेन में युद्ध का जोरदार विरोध करने के लिए अभियान का उपयोग करेगा, उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, कैद कर लिया गया है या मार दिया गया है।</p>
<p>पुतिन के लिए जीत का स्पष्ट रास्ता होने के बावजूद, क्रेमलिन ने कथित तौर पर चुनावों की अगुवाई में प्रचार पर एक अरब यूरो से अधिक खर्च किया। इस बजट का अधिकांश भाग राष्ट्रवाद, एकता और पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए इन्फोटेनमेंट को आवंटित किया गया था। लेकिन तकरीबन 200 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाले युद्ध के बीच में एक सरकार को एक दिखावटी चुनाव में इतना प्रयास करने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? पुतिन शायद ईरान जैसे अन्य तानाशाही शासनों के समान नुकसान से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जहां हाल के संसदीय चुनावों में 41% का रिकॉर्ड कम मतदान हुआ, जो 1979 की क्रांति के बाद से सबसे कम है, जो इस्लामी शासन के प्रति व्यापक मोहभंग को दर्शाता है। वेनेज़ुएला के लिए भी यही कहा जा सकता है, जिसने 2020 के संसदीय चुनावों में 31% मतदान दर्ज किया। </p>
<p>पुतिन निश्चित रूप से अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी एलेक्सी नवलनी की मौत के मद्देनजर अवैधता की किसी भी धारणा या बड़े विरोध वोट से बचने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी चुनाव कराने की जहमत क्यों उठाई जाए? शोध से पता चला है कि जहां चुनाव अल्पावधि में तानाशाही के लिए कुछ जोखिम पैदा कर सकते हैं, वहीं वे निरंकुशता को लम्बा खींचने में भी मदद कर सकते हैं। उनकी वैधता पर सभी सवालों के बावजूद, उन्हें अक्सर इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि विजेता को वैधता की एक डिग्री मिल सके - घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर - और इससे शासन को अपनी लोकप्रियता पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में भी मदद मिलती है। लेकिन ऐसा लगता है कि पुतिन अपने शासन की लोकप्रियता को प्रदर्शित करने की सामान्य निरंकुश परियोजना से परे जा रहे हैं। </p>
<p>उनके शासन के 24 वर्षों में, चुनाव रूसियों के लिए शासन के प्रति अपनी वफादारी प्रदर्शित करने का एक अवसर बन गए हैं। वे एक सैन्य परेड के समान एक तमाशा हैं, और रूस पर पुतिन की नई अधिनायकवादी पकड़ का संकेत देते हैं। यद्यपि अधिनायकवाद बढ़ रहा है, आज केवल कुछ ही शासनों को अधिनायकवादी माना जाता है - उनमें से, उत्तर कोरिया किम परिवार राजवंश द्वारा संचालित एकदलीय राज्य के साथ सबसे आगे है। अधिनायकवादी शासन को बनाए रखने के लिए जनता को शासन का प्रबल समर्थक बनने के लिए संगठित करने के लिए राज्य द्वारा बहुत अधिक प्रयास की आवश्यकता होती है। अधिकांश अधिनायकवादी शासन अपने लोगों पर लगातार जासूसी करने के लिए बड़ी मात्रा में संसाधनों का उपभोग करते हैं। </p>
<p>सत्तावादी शासन प्रचार और कुछ हद तक निगरानी और दमन का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन अधिकांश भाग के लिए, निरंकुश शासन एक उदासीन और आत्मसंतुष्ट जनता को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं जो कुछ करने के लिए तैयार नहीं है। पुतिन असहमति जताने वालों से कैसे निपटते हैं लेकिन 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस में चीजें बदल गई हैं। आक्रमण शुरू करने के एक महीने के भीतर, पुतिन उन लोगों के खिलाफ चेतावनी जारी कर रहे थे जो उनके युद्ध उद्देश्यों का समर्थन नहीं करते थे।</p>
<p>पुतिन ने कहा, "कोई भी लोग, और विशेष रूप से रूसी लोग, हमेशा सच्चे देशभक्तों को गद्दारों से अलग करने में सक्षम होंगे, और उन्हें एक गंदगी की तरह उगल देंगे जो गलती से उनके मुंह में चली गई।" जैसे-जैसे युद्ध तीसरे वर्ष में पहुँच रहा है, पुतिन को पता है कि उन्हें लड़ने के लिए और अधिक रूसियों को बुलाने की आवश्यकता हो सकती है। </p>
<p>परिणामस्वरूप, "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध" (द्वितीय विश्व युद्ध) के साथ समानता को मजबूत करने के लिए पूरे रूसी समाज में प्रचार तेज कर दिया गया है। देशभक्ति की शिक्षा भी यूक्रेनी राज्य के प्रति अवमानना ​​पैदा करने के लिए बनाई गई है और छात्रों और शिक्षकों को युद्ध के किसी भी विरोध की निंदा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। राज्य पर निर्भर सार्वजनिक कर्मचारियों को यूक्रेन विरोधी रैलियों में भाग लेने के लिए कहा गया है। नागरिकों को युद्ध का विरोध करने वाले पड़ोसियों के बारे में सूचित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। </p>
<p>रूस मध्यम दर्जे की असहमति को बर्दाश्त करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। और सज़ाएं भी बदल गई हैं. विरोध करने या शासन की आलोचना करने पर जुर्माने का सामना करने के बजाय, इन "अपराधियों" को अब जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी। फरवरी में रूसी मानवाधिकार कार्यकर्ता ओलेग ओरलोव के यह दावा करने के बाद कि रूस अधिनायकवादी बन गया है, उन्हें ढाई साल जेल की सजा सुनाई गई थी। जेल की सज़ाएं न केवल आम हो गई हैं, बल्कि लंबी भी हो गई हैं। कार्यकर्ता और पत्रकार व्लादिमीर कारा-मुर्ज़ा को 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की निंदा करने के लिए 25 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। </p>
<p>पुलिस की छापेमारी भी आम हो गई है। अतीत में, शासन के केवल उल्लेखनीय आलोचक ही गिरफ्तारी का सामना कर सकते थे। आज असहमति व्यक्त करने वाले किसी भी नागरिक को प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के कुछ सप्ताह बाद, ड्यूमा ने यूक्रेन में युद्ध को "विशेष अभियान" के अलावा किसी अन्य चीज़ के रूप में संदर्भित करने के लिए कानून पारित किया - जिसमें दोषी पाए गए लोगों को 15 साल की जेल की सजा दी गई। निस्संदेह, आक्रमण के बाद से, रूस ने अपने नागरिकों से केवल सहमति ही नहीं, बल्कि सक्रिय समर्थन की भी मांग की है।</p>
<p>आगामी चुनाव होने के कारण अब राजनीति से दूर रहना और इसमें रुचि न लेना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यहां तक ​​कि यूक्रेन के कब्जे वाले हिस्सों को भी (सशस्त्र लोगों द्वारा) वोट देने के लिए दृढ़ता से प्रोत्साहित किया जा रहा है। पुतिन भारी जीत हासिल करना चाहते हैं और इन चुनाव की योजना उनकी "लोकप्रियता" का समन्वित और बेतुका प्रदर्शन करने के लिए तैयार की गई है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/450332/us-congress-committee-will-investigate-rigging-in-pakistan-elections-assistant">पाकिस्तान चुनाव में धांधली की जांच करेगी अमेरिकी कांग्रेस समिति, सहायक विदेश डोनाल्ड लू की होगी गवाही</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Mar 2024 14:34:30 +0530</pubDate>
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                <title>रूसी अभी भी व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन में युद्ध का समर्थन क्यों करते हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कैलगरी (कनाडा)। </strong>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की है कि वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने का इरादा रखते हैं। पुतिन का रूसी राष्ट्रपति के रूप में पांचवां कार्यकाल जीतना लगभग तय है। यह खबर थोड़ी हैरान करने वाली है। पुतिन ने 24 वर्षों तक रूस का नेतृत्व किया है और सर्वेक्षणों से पता चलता है कि यूक्रेन में रूस के चल रहे सैन्य अभियान ने उनके लिए समर्थन बढ़ाया है। </p>
<p><strong>जनमत सर्वेक्षण</strong><br />सितंबर में, रूसी सर्वेक्षणकर्ता लेवाडा सेंटर ने यूक्रेन में युद्ध के प्रति रूसी दृष्टिकोण का एक सर्वेक्षण किया। जब पूछा गया कि क्या वे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/425554/why-do-russians-still-support-vladimir-putin-and-the-war-in-ukraine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/व्लादिमीर-पुतिन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कैलगरी (कनाडा)। </strong>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की है कि वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने का इरादा रखते हैं। पुतिन का रूसी राष्ट्रपति के रूप में पांचवां कार्यकाल जीतना लगभग तय है। यह खबर थोड़ी हैरान करने वाली है। पुतिन ने 24 वर्षों तक रूस का नेतृत्व किया है और सर्वेक्षणों से पता चलता है कि यूक्रेन में रूस के चल रहे सैन्य अभियान ने उनके लिए समर्थन बढ़ाया है। </p>
<p><strong>जनमत सर्वेक्षण</strong><br />सितंबर में, रूसी सर्वेक्षणकर्ता लेवाडा सेंटर ने यूक्रेन में युद्ध के प्रति रूसी दृष्टिकोण का एक सर्वेक्षण किया। जब पूछा गया कि क्या वे यूक्रेन में रूसी सेना की कार्रवाई का समर्थन करते हैं, तो 73 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ‘‘हां’’ या ‘‘निश्चित रूप से हां’’ कहा। फरवरी 2022 में, रूस के आक्रमण के महीने में, यह संख्या 68 प्रतिशत थी। कुछ लोगों को रूस से आने वाले सर्वेक्षणों पर संदेह हो सकता है, लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ये आंकड़े एक ऐसे संगठन से हैं जिसे रूसी सरकार द्वारा ‘‘विदेशी एजेंट’’ माना गया है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सर्वेक्षण कौन करवाता है - डेटा से पता चलता है कि अधिकांश रूसी युद्ध के प्रयासों का समर्थन करते हैं। लेवाडा के अनुसार, साथ ही, पुतिन की व्यक्तिगत अनुमोदन रेटिंग ऊंची बनी हुई है, जो कुछ समय से लगभग 80 प्रतिशत पर चल रही है। रूस के पब्लिक ओपिनियन फाउंडेशन के एक हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि लगभग 78 प्रतिशत रूसी पुतिन के काम को मान्यता देते हैं। </p>
<p>हालाँकि, 2022 के अंत में युद्ध और पुतिन दोनों के समर्थन में गिरावट आई। 2022 के अंत में, रूसी सरकार ने यूक्रेनी युद्धक्षेत्र सफलताओं के जवाब में सशस्त्र बलों के लिए रिजर्व की एक बड़ी लामबंदी शुरू की, पहले कीव के पास और फिर खारखिव के पास। इसके चलते कई युवाओं को सेना में भर्ती होने से बचने के लिए देश छोड़ना पड़ा। रूसी सेनाएं भी खेरसॉन में निप्रो नदी के पश्चिमी तट पर अपनी पकड़ से पीछे हट गईं।</p>
<p>रूसियों के बीच स्थिति को लेकर बेचैनी उस अवधि के दौरान मतदान संख्या में परिलक्षित हुई थी, और जब मैंने अक्टूबर 2022 में मॉस्को और मरमंस्क का दौरा किया तो यह जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा था। युद्ध या पुतिन के सार्वजनिक विरोध के प्रति रूसी सरकार की शून्य सहिष्णुता का निस्संदेह बेहतर मतदान पर कुछ असर पड़ा है। यूक्रेन के ग्रीष्मकालीन जवाबी हमले में रूस की हार ने भी निश्चित रूप से रूसी आत्मविश्वास को बढ़ाया। इसके अलावा, यूक्रेन में मारे गए रूसी सैनिकों की संख्या एक गुप्त रहस्य बनी हुई है। हालाँकि, जैसा कि मैंने नवंबर 2023 में मॉस्को और रियाज़ान दोनों में बिताए समय के दौरान पाया, विशेष रूप से कई पुराने रूसी - जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से - युद्ध और उनके राष्ट्रपति दोनों के लिए वास्तविक समर्थन व्यक्त करते हैं। </p>
<p><strong>क्यों? रूस की युद्ध कथा का समर्थन करना</strong><br />इस प्रश्न का उत्तर आंशिक रूप से रूसी सरकार की नीतियों और युद्ध पर पश्चिमी प्रतिक्रियाओं के संयोजन में निहित है। कई रूसी निस्संदेह युद्ध के कारणों को समझाने वाली सरकारी कहानी को स्वीकार करते हैं। वे कारण वही नहीं हैं जो फरवरी 2022 में थे, बल्कि कुछ बड़े और अधिक अस्तित्वगत कारणों में बदल गए हैं। फरवरी 2022 में, डोनबास में रूसी पहचान करने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और पूर्व सोवियत क्षेत्र में नाटो के अगले अतिक्रमण को रोकने के औचित्य के साथ रूस ने यूक्रेन के साथ युद्ध किया। पूर्वी यूक्रेन का ‘‘डी-नाज़ीफिकेशन’’ भी इन्हीं उद्देश्यों से जुड़ा था। पूर्वी यूक्रेन में जातीय रूसियों के अधिकारों की रक्षा करना स्पष्ट रूप से कुछ हद तक युद्ध की शुरुआत में रूसी आबादी के साथ प्रतिध्वनित हुआ। हालाँकि, नाटो के विस्तार का खतरा शायद उस समय युद्ध के लिए उतना शक्तिशाली तर्क नहीं था, जितना कि हालिया विचार कि एक पाखंडी पश्चिम रूसी राजनीतिक और आर्थिक शक्ति को ‘‘रद्द’’ करने के लिए तैयार है। पैसा निश्चित रूप से समर्थन बनाए रखने में एक भूमिका निभाता है। </p>
<p>रूसी सरकार ने मनोबल बनाए रखने के लिए सैन्य बलों के वेतन में वृद्धि की है। पिछले सितंबर तक, सेना में भर्ती होने वालों को दिया जाने वाला न्यूनतम मासिक वेतन राष्ट्रीय औसत से तीन गुना था। जून में, सरकार ने घोषणा की कि वह सैन्य वेतन में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि करेगी। पश्चिमी पाखंड रूस के हाथों में खेलता है अपने कार्यों के माध्यम से, पश्चिमी शक्तियों ने रूसी सरकार के लिए पश्चिमी पाखंड की ओर इशारा करना आसान बना दिया है। गाजा में इजरायल के युद्ध के लिए अटूट पश्चिमी समर्थन ने इस बात को और उजागर किया है कि विशेष रूप से अमेरिका के अपने दोस्तों के लिए एक नियम है, और अपने दुश्मनों के लिए दूसरे नियम हैं।</p>
<p>अमेरिका समर्थित इजराइल यूक्रेन में रूसी सेनाओं द्वारा किए गए किसी भी कार्य से कहीं अधिक दर पर नागरिकों का कत्लेआम कर रहा है। और जबकि पश्चिमी अधिकारी नागरिकों पर रूसी हमलों की निंदा करने में तत्पर थे, इज़राइल के कार्यों की निंदा मौन या नगण्य रही है। इसके अलावा, रूस को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से अलग-थलग करने के पश्चिमी प्रयासों ने रूसी सरकार की यह कहानी बना दी है कि पश्चिम रूस को रद्द करने पर आमादा है। साथ ही, कुछ पश्चिमी सरकारों की भूलों ने रूस के लिए यह कहानी बेचना आसान बना दिया है कि वह यूक्रेन में फासीवाद से लड़ रहा है। कनाडाई संसद में हाल ही में यारोस्लाव हुंका की पराजय रूसी सरकार के लिए एक प्रचार उपहार थी। अज़ोव बटालियन जैसे फासीवादी संबंधों वाली यूक्रेनी इकाइयों का पश्चिमी उत्सव केवल मामले को बदतर बनाता है। </p>
<p><strong>नए आर्थिक संबंध</strong><br />रूसी अर्थव्यवस्था को दुनिया से अलग-थलग करने के उद्देश्य से लगाए गए अभूतपूर्व पश्चिमी प्रतिबंध यूक्रेन में रूसी कार्रवाई को बदलने में सफल नहीं हुए हैं। इसके बजाय, ऐसा प्रतीत होता है कि पश्चिम के साथ बढ़ती दुश्मनी ने रूस को चीन और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंधों को गहरा करने के लिए प्रेरित किया है। युद्ध की शुरुआत में, पुतिन ने रूस की ‘‘खुद को पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराने’’ की क्षमता का बखान किया। जबकि मुद्रास्फीति अधिक है, रूसी भंडार भरे हुए हैं और बेरोजगारी कम है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हाल ही में 2024 के लिए रूस के आर्थिक विकास के पूर्वानुमान को कम कर दिया है, लेकिन यह पूर्वानुमान अभी भी कनाडा, फ्रांस, इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के अनुकूल है। पश्चिम में रुचिकर हो या न हो, प्रतिबंधों का विरोध करने और यूक्रेनी नाटो समर्थित जवाबी हमले से लड़ने की रूस की क्षमता ने युद्ध और पुतिन के लिए जनता का समर्थन बढ़ाने में योगदान दिया है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/425552/former-secretary-general-ban-ki-moon-honored-with-diwali-power-of-one">पूर्व महासचिव Ban Ki-moon और तीन राजनयिक संयुक्त राष्ट्र में 'दिवाली पावर ऑफ वन' पुरस्कार से सम्मानित </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 13:35:30 +0530</pubDate>
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