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                <title>Vrat - Amrit Vichar</title>
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                <description>Vrat RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुलतानपुर: हाथों में पूजा की थाली, आई रात सुहागों वाली, चांद का दीदार कर सुहागिनों ने तोड़ा व्रत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सुलतानपुर।</strong> दिन भर के इंतजार के बाद रात में पहले चांद फिर अपने पति का दीदार कर सुहागिनों ने करवा चौथ का व्रत पूर्ण किया। माता करवा की पूजा करके पति की लंबी आयु और अटूट प्रेम का आशीर्वाद मांगा। वहीं, इस मौके पर बाजार भी दिन भर गुलजार रहा। करवा चौथ के लिए बुधवार को सुहागिनों ने पति की दीर्घायु के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखा।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2023-11/untitled-20-copy.jpg" alt="Untitled-20 copy" /></p>
<p>शाम को करवा चौथ के व्रत की कथा परिवार के सदस्यों को सुनाई। इसके बाद करवा चौथ का पूजन कर चंद्रमा के निकलने का इंतजार करने लगी। रात आठ बजे के बाद जैसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/415169/sultanpur-pooja-plate-in-hands-married-women-break-their-fast"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-11/untitled-22-copy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुलतानपुर।</strong> दिन भर के इंतजार के बाद रात में पहले चांद फिर अपने पति का दीदार कर सुहागिनों ने करवा चौथ का व्रत पूर्ण किया। माता करवा की पूजा करके पति की लंबी आयु और अटूट प्रेम का आशीर्वाद मांगा। वहीं, इस मौके पर बाजार भी दिन भर गुलजार रहा। करवा चौथ के लिए बुधवार को सुहागिनों ने पति की दीर्घायु के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखा।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2023-11/untitled-20-copy.jpg" alt="Untitled-20 copy"></img></p>
<p>शाम को करवा चौथ के व्रत की कथा परिवार के सदस्यों को सुनाई। इसके बाद करवा चौथ का पूजन कर चंद्रमा के निकलने का इंतजार करने लगी। रात आठ बजे के बाद जैसे ही आसमान में चांद दिखा, महिलाएं पूजा की थाली सजा कर घरों की छत पर पहुंच गईं। जहां पहले चलनी से चांद को निहारा, फिर चलनी की ओट से अपने जीवन साथी के चेहरे का दीदार किया। इसके बाद करवा से चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु की कामना की। फिर पति को घर में बनाए गए पकवान खिलाकर अपने व्रत पूर्ण किया।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2023-11/untitled-21-copy.jpg" alt="Untitled-21 copy"></img></p>
<h5>सेल्फी वाली फोटो खूब हुई वायरल</h5>
<p>करवाचौथ का पर्व सोशल मीडिया पर भी छाया रहा। इस खास दिन को सहेजने के लिए पति-पत्नी ने मोबाइल से सेल्फी भी ली। व्रत को पूरा करने के बाद लोगों ने एक दूसरे को वाट्सएप पर करवा चौथ की शुभकामनाएं दी। तो वहीं फेसबुक पर भी सेल्फी की फोटो अपलोड की गईं। अन्य सोशल साइट्स पर भी फोटोज खूब वायरल की गई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.amritvichar.com/article/415166/real-aunt-had-sacrificed-her-22-month-old-niece-for#gsc.tab=0">गोंडा: संतान की खातिर सगी चाची ने दी थी 22 माह की भतीजी की बलि, दो महिलाओं समेत 4 गिरफ्तार</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>सुल्तानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Nov 2023 20:19:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Sharma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Video: मिशन चंद्रयान-3 के लिए सीमा हैदर ने रखा व्रत, कहा- लैंडिंग तक न कुछ खाऊंगी, न पिऊंगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान से आई सीमा हैदर इन दिनों बेहद सुर्खियां बटोर रही हैं। अब सीमा हैदर ने चंद्रयान-3 की कामयाबी और सेफ लैंडिंग के लिए व्रत रखा है। इस का वीडियो भी सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हो रहा है जिसे सीमा हैदर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया है।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">CM योगी और PM मोदी को राखी भेजने के बाद सीमा हैदर ने चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए रखा व्रत. <a href="https://t.co/fjr6PXMQSH">pic.twitter.com/fjr6PXMQSH</a></p>
— Priya singh (@priyarajputlive) <a href="https://twitter.com/priyarajputlive/status/1694266047531233623?ref_src=twsrc%5Etfw">August 23, 2023</a></blockquote>
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<p>सीमा ने कहा कि वैसे तो मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है लेकिन मैंने चंद्रयान-3 के लिए व्रत रखा है। जब तक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/397641/video-seema-haider-fasted-for-mission-chandrayaan-3-said-i-will"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/2122323-seema-haider.webp" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान से आई सीमा हैदर इन दिनों बेहद सुर्खियां बटोर रही हैं। अब सीमा हैदर ने चंद्रयान-3 की कामयाबी और सेफ लैंडिंग के लिए व्रत रखा है। इस का वीडियो भी सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हो रहा है जिसे सीमा हैदर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया है।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">CM योगी और PM मोदी को राखी भेजने के बाद सीमा हैदर ने चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए रखा व्रत. <a href="https://t.co/fjr6PXMQSH">pic.twitter.com/fjr6PXMQSH</a></p>
— Priya singh (@priyarajputlive) <a href="https://twitter.com/priyarajputlive/status/1694266047531233623?ref_src=twsrc%5Etfw">August 23, 2023</a></blockquote>

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<p>

</p>
<p>सीमा ने कहा कि वैसे तो मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है लेकिन मैंने चंद्रयान-3 के लिए व्रत रखा है। जब तक चंद्रयान चांद पर सेफ लैंड नहीं होगा, तब तक मैं कुछ भी नहीं खाऊंगी और न ही कुछ पिऊंगी।</p>
<p>वीडियो में सीमा ने कहा कि मैं प्रार्थना कर रही हूं कि हमारे भारत देश का चंद्रयान-3 आज शाम को सफलतापूर्वक चांद पर लैंडिग कर जाए। सीमा ने आगे कहा मैं राधे-कृष्ण भगवान को बहुत मानती हूं। मैं प्रार्थना है कि चंद्रयान-3 को सफलता मिले। </p>
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<p><strong>ये भी पढ़ें- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a class="post-title-lg" style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/397622/do-the-chandrayaan-3-campaign-complete-journey-till-now-to-reach">चंद्रयान-3 अभियान : कर लो चांद मुट्ठी में...चांद तक पहुंचने का अब तक का पूरा सफरनामा</a></span></strong></p>
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<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 15:55:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ashpreet]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरेली: पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ पर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, चांद को देख पूजा की सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[बरेली, अमृत विचार। आज करवाचौथ पर्व पर महिलाओं ने निराहार व्रत रखा है। पति की लंबी उम्र और मंगल कामना से सुहागिनें निर्जला व्रत रख कर रात में चांद को अर्घ्य देकर व्रत सम्पन्न किया। यह भी पढ़ें- बरेली: इंडियन ऑयल के पोर्टल को हैक कर गैस पेमेंट के लाखों रूपयों का गबन करने वाला …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/298733/bareilly-for-the-long-life-of-her-husband-on-karva-chauth-women-kept-a-nirjala-fast-worshiped-after-seeing-the-moon"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/capture-652.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> आज करवाचौथ पर्व पर महिलाओं ने निराहार व्रत रखा है। पति की लंबी उम्र और मंगल कामना से सुहागिनें निर्जला व्रत रख कर रात में चांद को अर्घ्य देकर व्रत सम्पन्न किया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/bareilly-the-accused-arrested-for-embezzling-lakhs-of-gas-payments-by-hacking-the-portal-of-indian-oil/">बरेली: इंडियन ऑयल के पोर्टल को हैक कर गैस पेमेंट के लाखों रूपयों का गबन करने वाला आरोपी गिरफ्तार</a></p>
<p>आज शहर में करवा चौथ की रौनक है इस पर्व को लेकर महिलाओं द्वारा एक सप्ताह से पहले ही तैयारी में जुटे हुए थे। गुरुवार को 16 श्रृंगार से सजकर पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने अपने पति के लिए दिन भर निर्जला उपवास कर लंबी उम्र की दुआ मांगी। महिलाओं ने सात भाई और एक बहन वाली चर्चित करवा चौथ की कहानी सुनी।</p>
<p>महिलाओं ने अपने पति की लम्बी आयु के लिए भगवान से प्रार्थना की। रात में चांद का दीदार करते हुए पति की आरती उतारी। मान्यता है कि इस व्रत से पति की आयु चांद की तरह लंबी होती है। इस पर्व को लेकर आलम यह रहा कि शहर के मॉडल टाउन हरि मंदिर समेत कई जगह महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा अर्चना की।</p>
<p><strong>पुरुषों ने भी रखा करवा चौथ का व्रत</strong><br />
करवा चौथ खासतौर पर महिलाओं के लिए माना जाता है लेकिन शहर के बदलते माहौल में यह व्रत पुरुषों द्वारा भी रखा जा रहा है। शहर में यह व्रत अब पुरुष भी रखने लगे हैं। जो अपनी पत्नियों की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत करने में सिर्फ युवा पीढ़ी ही शामिल नहीं है, बल्कि कई ऐसे पुरुष भी शामिल हैं जो लंबे समय से अपनी पत्नियों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखे है।</p>
<p><strong>युवतियों ने रखा अच्छे वर के लिए करवा चौथ का व्रत</strong><br />
करवा चौथ का व्रत रखने में सिर्फ पुरुष ही नहीं बल्कि ऐसी युवतियां जिनकी अभी शादी नहीं हुई है वे भी पीछे नहीं हैं। जिसमें अविवाहित युवतियां अपने आने वाले जीवन में अच्छे वर की कामना के लिए व्रत रखे। यह परंपरा जिलों में प्रचलित है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं जबकि युवतियां यह व्रत अच्छा वर पाने के लिए रख रही हैं। इस व्रत के लिए वे भी अच्छी तरह तैयार होती हैं बस फर्क यह रहता है कि वे सुहागन वाले श्रृंगार नहीं करती हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/bareilly-iaf-showed-its-glory-in-the-sky-seeing-the-might-people-said-jai-hinds-army/">बरेली: IAF ‍ने आसमान में दिखाया अपना जलवा, पराक्रम देख लोग बोले ‘जय हिंद की सेना’</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 20:35:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपने पति को खुश करने के लिए इन आदतों को अपनाएं, हमेशा बरकरार रहेगा प्यार</title>
                                    <description><![CDATA[आज करवाचौथ है इस पर शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। पति को खुश करने के सजती-संवरती हैं। व्रत के दौरान पत्नि पति के लिए दिन-भर भूखी प्यासी रहती है, और पति भी अपनी उन पर अपनी जान लुटाते हैं। हर महिला यही चाहती है कि उसका पति खुश रहे …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/298415/follow-these-habits-to-please-your-husband-love-will-always-remain-intact"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/bhyyy.jpg" alt=""></a><br /><p>आज करवाचौथ है इस पर शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। पति को खुश करने के सजती-संवरती हैं। व्रत के दौरान पत्नि पति के लिए दिन-भर भूखी प्यासी रहती है, और पति भी अपनी उन पर अपनी जान लुटाते हैं। हर महिला यही चाहती है कि उसका पति खुश रहे और दोनों के बीच हमेशा प्यार बना रहे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/your-home-will-look-more-beautiful-on-diwali-use-these-tips/">दिवाली पर और भी सुंदर दिखेगा आपका घर, करें इन टिप्स का इस्तेमाल…</a></p>
<p>हालांकि पति पत्नि के बीच लड़ाई-झगड़े भी खूब होते हैं, लेकिन ये लड़ाई झगड़े कई बार पारिवरिक कलह का कारण बन जाते हैं। ऐसे में अगर आप अपने पति को हमेशा खुश रखना चाहती हैं तो कुछ बातों का हमेशा ख्याल रखें। आज हम आपको आदतें बताने जा रहे हैं जिसे अपनाकर आप अपने पति को खुश कर सकती हैं।</p>
<p><strong>पति को खुश कैसे रखें</strong><br />
-सबसे पहले पति की पसंद और नापसंद का ख्याल रखें। किसी भी इंसान को अच्छा लगता है अगर कोई उनकी पसंद का ख्याल रखता है। अगर आप ये चाहती हैं कि रिश्ते में हमेशा प्यार बना रहे तो अपने पति की पसंद का ख्याल रखें। इससे लड़ाई-झगड़े कम होंगे।</p>
<p>-पति-पत्नि दोनों ये चाहते हैं कि वो एक दूसरे से ज्यादा उनके माता पिता का ख्याल रखें। लड़का और लड़की दोनों को ही ये बहुत अच्छा लगता है। इसलिए जो लड़कियां अपने सास ससुर की सेवा करती हैं उन्हें पति भी भरपूर प्यार करते हैं। इससे पति के मन में आपके लिए मानसम्मान बढ़ेगा।</p>
<p>-पति पत्नी दोनों को एक दूसरे को सम्मान देना चाहिए। इससे रिश्ते में और ज्यादा प्यार बढ़ता है और पति भी हमेशा खुश रहता है। पति के साथ सम्मानजनक शब्दों का ही इस्तेमाल करें। पति की बात को सुनें और काटें नहीं। भले ही बाद में अपनी प्रतिक्रिया भी दें इससे झगड़े कम होंगे और प्यार बना रहेगा।</p>
<p>-महिलाओं की दूसरों से तुलना करने की आदत होती है। अगर आप चाहती हैं कि रिश्ते में प्यार बना रहे तो अपने पति की तुलना किसी और महिला के पति से न करें। ये चीज आपके पति के दिल को चोट पंहुचा सकती है। इससे रिश्ते में तनाव और लड़ाई झगड़े बढ़ते हैं।</p>
<p>-पति पत्नि की रिश्ता विश्वास का होता है. इसलिए बिना बात के पति पर शक न करें। इससे रिश्ते में दरार आने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप यकीन करेंगी तो पति भी उसे कायम रखने की कोशिश करेगा और एक खास बात मुश्किल वक्त में पति का साथ दें। इससे रिश्ता मजबूत बनेगा।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/karwa-chauth-2022-give-this-beautiful-gift-to-your-wife-on-karwa-chauth-love-will-become-deeper/">Karwa Chauth 2022: करवा चौथ पर पत्नी को दें ये खूबसूरत तोहफा, प्यार हो जाएगा और गहरा</a></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/298415/follow-these-habits-to-please-your-husband-love-will-always-remain-intact</link>
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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 13:38:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शारदीय नवरात्रि: आज होगी मां स्कंदमाता की आराधना, जानिए कैसे मुरादें पूरी करेगा आज का व्रत</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ, अमृत विचार। आज नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के पंचम स्वरूप देवी स्कंदमाता की उपासना से महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है और जीवन खुशहाली से परिपूर्ण रहता है। मां स्कंदमाता का निवास पहाड़ों पर माना जाता है। सिंह पर सवार मां स्कंदमाता …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> आज नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के पंचम स्वरूप देवी स्कंदमाता की उपासना से महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है और जीवन खुशहाली से परिपूर्ण रहता है। मां स्कंदमाता का निवास पहाड़ों पर माना जाता है। सिंह पर सवार मां स्कंदमाता की गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान हैं। देवी की चार भुजाएं हैं जिनमें कमल सुशोभित है और एक हाथ वरदमुद्रा में हैं, देवी स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं इसलिए इनके चारों ओर सूर्य सा तेज दिखाई देता है। इन्हें पद्मासना देवी भी कहते हैं।</p>
<p><strong>मां स्कंदमाता की पूजा</strong><br />
सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद हरे रंग के वस्त्र पहने और देवी को हरी चूड़ी, हरी साड़ी, मेहंदी, सिंदूर, रौली, अक्षत अर्पित करें। इस दिन हरी चुनरी में नारियल रखकर नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भ सम्भवा, ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी” इस मंत्र का 108 बार जाप करें और नारियल को बांधकर हमेशा अपने सिरहाने रखें। इससे सूनी गोद जल्द हरी-भरी हो जाती है अर्थात संतान सुख के योग बनते हैं।</p>
<p><strong>भोग</strong><br />
मान्यता है देवी को पूजा में केले का नेवैद्य लगान से स्वास्थ लाभ मिलता और संतान प्राप्ति होती हैं।</p>
<p><strong>मंत्र</strong><br />
बीज मंत्र – ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:<br />
ध्यान मंत्र – सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।<br />
पूजा मंत्र – या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।</p>
<p><strong>फूल</strong><br />
देवी स्कंदमाता को भी पीले रंग का फूल पसंद है, देवी की पूजा करने से स्वंय भगवान कार्तिकेय की उपासना भी हो जाती है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://amritvichar.com/chhattisgarh-one-young-man-dies-in-elephant-attack-another-critical/">छत्तीसगढ़: हाथी के हमले में एक युवक की मौत, दूसरे की हालत गंभीर</a></strong></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/290699/sharadiya-navratri-mother-skandmata-will-be-worshiped-today-know-how-todays-fast-will-fulfill-her-wishes</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Sep 2022 06:00:09 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>30 अगस्त 2022 को हरतालिका तीज का रखें व्रत, अनिष्ठ से बचने के लिए इन बातों का रहे खास ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[Hartalika Teej 2022,  Fast Rules: 30 अगस्त 2022 को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। महिलाओं के लिये ये दिन बड़ा ही खास दिन माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य का वरदान पाने के लिए ये व्रत बड़े धूमधाम से मनाती हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार दांपत्य जीवन में सुख की कामना के लिए …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/254693/keep-the-fast-of-hartalika-teej-on-30th-august-2022-keep-these-things-in-mind-to-avoid-iniquity"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/capture-1052.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Hartalika Teej 2022,  Fast Rules: </strong>30 अगस्त 2022 को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। महिलाओं के लिये ये दिन बड़ा ही खास दिन माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य का वरदान पाने के लिए ये व्रत बड़े धूमधाम से मनाती हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार दांपत्य जीवन में सुख की कामना के लिए इस दिन शिव जी और मां पार्वती का पूजन किया जाता है। वहीं विवाह योग्य युवलियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए हरतालिका का व्रत रखती है। हरतालिका का व्रत निर्जला रखा जाता है।</p>
<p>इस दिन महिलाएं कठिन उपवास कर रात्रि जागरण करती हैं। मां पार्वती ने भी शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए ये व्रत किया था। धर्म ग्रंथों में हरतालिका तीज व्रत के कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन करने से ही व्रत का पूर्ण फल मिलता है। कथा के अनुसार हरतालिका तीज पर इन 4 काम को करने की मनाही है शास्त्रों में इन्हें इस दिन अशुभ माना गया है।</p>
<p><strong>हरतालिका तीज पर न करें ये 4 काम (Hartalika teej vrat rules)<br />
</strong></p>
<p><strong>सोना वर्जित<br />
</strong>हरियाली तीज व्रत में शास्त्रों के अनुसार महिलाओं का रात्रि जागरण कर शिव-पार्वती की पूजा का विधान है। इस दिन व्रतधारी स्त्रियों का सोना निषेध है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन जो महिलाएं सो जाती हैं वो अगले जन्म में अजगर के रूप में पैदा होती हैं। हरतालिका तीज पर रात में भजन कीर्तन करना चाहिए।</p>
<p><strong>भोजन<br />
</strong>हरतालिका जीत के व्रत निर्जला रखना उत्तम होता है लेकिन महिलाएं इसे अपने सामर्थ्य अनुसार भी रखती हैं। पौराणिक कथा के इसी व्रत में भोजन करने से व्रतधारी अगले जन्म में वानर बनता है।</p>
<p><strong>पानी<br />
</strong>मान्यता है कि हरतालिका तीज पर जो व्रतधारी जल ग्रहण करते हैं वो अगले जन्म में मछली बनते हैं।</p>
<p><strong>व्रत तोड़ा नहीं जाता<br />
</strong>हरतालिका तीज व्रत एक बार शुरू करने के बाद इसे हर साल करना होता है, इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता। किसी कारणवश अगर व्रत न कर पाएं तो इसका उदयापन कर दें या फिर अपने परिवार में किसी दूसरी महिला को ये व्रत देना होता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/haldwani-after-years-keep-the-fast-of-shivratri-in-shiva-gauri-yoga/">हल्द्वानी: सालों बाद शिव-गौरी योग में रखें शिवरात्रि का व्रत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 14:30:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देवशयनी एकादशी का व्रत इस बार 10 जुलाई को, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[देवशयनी एकादशी का व्रत इस बार 10 जुलाई को रखा जाएगा। बता दें ये व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल एकादशी तिथि को रखा जाता है। ऐसा मामना है कि इस तिथि को भगवान श्री नारायण शयन के लिए पाताल लोक चले जाते हैं और वहां 4 माह विश्राम करने के बाद कार्तिक माह की देव …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>देवशयनी एकादशी का व्रत इस बार 10 जुलाई को रखा जाएगा। बता दें ये व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल एकादशी तिथि को रखा जाता है। ऐसा मामना है कि इस तिथि को भगवान श्री नारायण शयन के लिए पाताल लोक चले जाते हैं और वहां 4 माह विश्राम करने के बाद कार्तिक माह की देव उठनी एकादशी को पुनः पृथ्वी लोक वापस आते हैं। चूंकि इस चार माह में भगवान श्री हरी कृष्ण शयन में होते हैं। इसलिए इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं।</p>
<p>मान्यता है कि इन चार महीनों में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से इसका शुभ फल नहीं  प्राप्त होता है। ऐसे में देवशयनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत आदि पर अगले चार मास तक के लिए विराम लग जाता है। वहीं इसके साथ ही इसी दिन से सन्यासी लोगों का चातुर्मास व्रत आरम्भ हो जाता है। साधु-संत, तपस्वी इस दौरान एक ही स्थान पर रहकर तप, साधना, स्वाध्याय व प्रवचन आदि करते हैं। मान्यता है कि इन महीनों में भूमण्डल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर वास करते हैं। इस लिए चातुर्मास के दौरान केवल ब्रज की यात्रा ही की जा सकती है।</p>
<p><strong>देवशयनी</strong> <strong>एकादशी</strong> <strong>की</strong> <strong>तिथि</strong> <strong>और</strong> <strong>मुहूर्त</strong><strong><br />
</strong>आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि शनिवार 9 जुलाई को शाम 4:40 से प्रारंभ होगी।<br />
एकादशी तिथि का समापन रविवार 10 जुलाई को दोपहर 2:14 पर होगा।<br />
उदया तिथि के आधार पर देवशयनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/jagannath-rath-yatra-lord-jagannath-reached-gundicha-temple-cm-patnaik-also-pulled-the-chariot/">जगन्नाथ रथ यात्रा: गुंडिचा मंदिर पहुंचे भगवान जगन्नाथ, CM पटनायक ने भी खींचा रथ, दर्शन पाकर लाखों भक्त हुए निहाल</a></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/242583/devshayani-ekadashi-fasting-this-time-on-july-10-know-auspicious-time-and-importance</link>
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                <pubDate>Sun, 03 Jul 2022 11:51:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाराबंकी: महिलाओं ने रखा वट सावित्री का व्रत, बरगद और पीपल की फेरी लगाकर की पूजा-अर्चना</title>
                                    <description><![CDATA[बाराबंकी। जेष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या (बरगदही अमावस्या) और सोमवती अमावस्या के अद्भुत संयोग पर जिले में जगह-जगह बड़ी संख्या में महिलाओं ने बरगद और पीपल की फेरी लगाकर पूजा अर्चना की। सुखद वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रविवार को वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष व सोमवारी अमावस्या का …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/224703/barabanki-women-kept-the-fast-of-vat-savitri-worshiped-by-circling-banyan-and-peepal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-05/amrit-vichar-2022-05-30t091911.032.jpg" alt=""></a><br /><p>बाराबंकी। जेष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या (बरगदही अमावस्या) और सोमवती अमावस्या के अद्भुत संयोग पर जिले में जगह-जगह बड़ी संख्या में महिलाओं ने बरगद और पीपल की फेरी लगाकर पूजा अर्चना की।</p>
<p>सुखद वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रविवार को वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष व सोमवारी अमावस्या का व्रत रख बरगद वृक्ष की विधिवत पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>कोरोनावायरस के चलते पिछले 2 वर्षों से महिलाएं घरों में ही इस पूजा को करती थी। लेकिन इस बार महिलाओं में इस त्यौहार को लेकर खासा उत्साह दिख रहा है। महिलाओं ने पूजा में सर्वप्रथम जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल व धूप चढ़ाया। किसी ने वटवृक्ष के तने पर 7 से 13 फेरी और पीपल वृक्ष के तने पर 113 बार कच्चे सूत से परिक्रमा कर पूजा का फल प्राप्त किया।</p>
<p><strong>बरगद और पीपल के नीचे पूजा का विधान</strong></p>
<p>सनातन धर्म को मानने वाली महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट दूर हो जाते हैं। और वह दीर्घायु प्राप्त करता है।</p>
<p>दांपत्य जीवन में आने वाले नाना प्रकार के कष्ट भी इस व्रत को रखने से दूर हो जाते हैं। इस व्रत को रखने वाली सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष 7 से 13 परिक्रमा और पीपल की 113 फेरी लगाकर विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं।</p>
<p><strong>किशोरियां भी करती हैं पूजा</strong></p>
<p>अविवाहित युवतियां भी अपने भावी जीवन को सुखद बनाने के लिए इसकी पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री व्रत व सोमवती अमावस्या का व्रत रखने वाली युवतियों को उनके मनवांछित वर व सफल वैवाहिक जीवन की कामना पूरी होती है।</p>
<p>जिन युवतियों का विवाह किन्ही कारणों से रुक जाता है। इस व्रत रखने से उनके विवाह में आने वाली प्रत्येक रुकावट को दूर कर मनवांछित वर प्रदान करता है।</p>
<p><strong>सावित्री-सत्यवान की कथा का विशेष महत्व</strong></p>
<p>ज्योतिषाचार्य पंडित विमल बताते हैं कि इस दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विशेष महत्व है। श्रद्धा पूर्वक कथा सुनने वाले लोगों के मनवांछित फलों की पूर्ति भगवान हरि स्वयं करते हैं।</p>
<p>सती सावित्री देवी ने इसी दिन यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी। इस बार आज के दिन  नक्षत्रों का अच्छा संयोग बना है।जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने सुबह 7:12 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग में वटवृक्ष  की फेरी लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>पढ़ें- <a href="https://amritvichar.com/varanasi-know-the-time-of-worship-of-vat-savitri-wish-will-be-fulfilled/">वाराणसी: जानें वट सावित्री की पूजा-अचर्ना का समय, पूरी होगी मनोकामना</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बाराबंकी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 May 2022 09:25:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीष्म पितामह ने बाणों की शैय्या पर 58 दिन तक लेटे रहने के बाद त्यागी थी अपनी देह, इस तिथि पर होती है ये खास पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[महाभारत युद्ध में बाणों की शैय्या पर 58 दिन तक लेटे रहने के बाद पितामह भीष्म ने माघ शुक्ल अष्टमी के दिन अपनी देह त्यागी थी। इसलिए इस अष्टमी को भीष्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। आज वो पावन दिन है। भीष्माष्टमी पितामह भीष्म के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/170617/bhishma-pitamah-had-renounced-his-body-after-lying-on-the-bed-of-arrows-for-58-days-this-special-worship-is-done-on-this-date"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-02/bhishm.jpg" alt=""></a><br /><p>महाभारत युद्ध में बाणों की शैय्या पर 58 दिन तक लेटे रहने के बाद पितामह भीष्म ने माघ शुक्ल अष्टमी के दिन अपनी देह त्यागी थी। इसलिए इस अष्टमी को भीष्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। आज वो पावन दिन है। भीष्माष्टमी पितामह भीष्म के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन उनके निमित्त श्राद्ध-तर्पण आदि किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि गंगा-पुत्र भीष्म के निमित्त जो भी भीष्म अष्टमी का व्रत, पूजा और तर्पण करता है, उसे वीर और सत्ववादी पुत्र की प्राप्ति होती है।</p>
<p>इस दिन एकोदिष्ट श्राद्ध भी किया जाता है, अर्थात् जिनके पिता नहीं हैं वो एकोदिष्ट श्राद्ध करते हैं। वैसे कहा जाता है इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए सभी को एकोदिष्ट श्राद्ध करना चाहिए। भीष्म पितामह कोई साधारण पुरुष नहीं थे। वे मनुष्य रूप से साक्षात देवता वसु थे। उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। अर्थात् जब तक वे न चाहें काल उन्हें स्पर्श भी नहीं कर सकता।</p>
<p>महाभारत युद्ध में जब उनका शरीर बाणों से पूरी तरह छलनी हो गया था फिर भी उनके प्राण नहीं निकले। वे बाणों की शैय्या पर 58 दिन लेटे रहे, मात्र इसलिए किउस समय सूर्य दक्षिणायन चल रहा था। शास्त्र कहते हैं सूर्य के उत्तरायण में मृत्यु होने पर मनुष्य को सद्गति प्राप्त होती है और वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। इसलिए पितामह ने सूर्य की मकर संक्राति से प्रारंभ हुए उत्तरायण की प्रतीक्षा की।</p>
<p><strong>मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी का दिन</strong><br />
सूर्य के उत्तरायण होने पर युधिष्ठिर, सगे-संबंधी , ऋषि आदि पितामह के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा सूर्य के उत्तरायण होने के पश्चात माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी का दिन आ गया है, अब मैं अपनी देह त्याग रहा हूं। इतना कहते हुए पितामह ने अपना शरीर छोड़ दिया। मार्गशीर्ष शुक्ल 14 से प्रारंभ होकर महाभारत का युद्ध कुल 18 दिन चला था जिसमें दसवें दिन भीष्म पितामह अर्जुन के तीरों से घायल होकर शर शैय्या पर लेट गए थे। इसके बाद उन्होंने 58 दिनों तक शर शैय्या पर लेटे रहने के बाद माघ शुक्ल अष्टमी को अपने प्राण त्यागे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े-</strong></p>
<p class="post-title"><a href="https://amritvichar.com/people-of-every-religion-come-to-attend-these-five-shrines-of-uttarakhand-every-prayer-is-fulfilled/">उत्तराखंड की इन पांच मजारों पर हाजिरी लगाने आते हैं हर धर्म के लोग, पूरी होती है हर दुआ</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/170617/bhishma-pitamah-had-renounced-his-body-after-lying-on-the-bed-of-arrows-for-58-days-this-special-worship-is-done-on-this-date</link>
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                <pubDate>Tue, 08 Feb 2022 14:00:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New year 2022: नए साल के पहले दिन करें भगवान शिव की पूजा, बन रहा है विशेष संयोग</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दो साल से कोरोना ने सभी को कुछ ऐसे दर्द दिए हैं जिन्हें शायद ही कभी भुलाया जा सकता है। अब आने वाले नए  साल में कुछ अच्छा होने की उम्मीद बनीं हुई है। अगर ऐसे में नए साल 1 जनवरी, 2022 की शुरूआत शिव अराधना से हो तो बात ही क्या है। साल …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/152579/new-year-2022-worship-lord-shiva-on-the-first-day-of-the-new-year-special-coincidence-is-being-made"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-12/shivratri.jpg" alt=""></a><br /><p>पिछले दो साल से कोरोना ने सभी को कुछ ऐसे दर्द दिए हैं जिन्हें शायद ही कभी भुलाया जा सकता है। अब आने वाले नए  साल में कुछ अच्छा होने की उम्मीद बनीं हुई है। अगर ऐसे में नए साल 1 जनवरी, 2022 की शुरूआत शिव अराधना से हो तो बात ही क्या है। साल के पहले ही दिन भगवान भोलेनाथ के पूजन का विशेष संयोग मासिक शिवरात्रि के रुप में बन रहा है।</p>
<p>हर मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथिको मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। नए साल में (1 जनवरी 2022) शनिवार के दिन पौष मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा।</p>
<p><strong>मासिक शिवरात्रि का पूजा मुहूर्त</strong><br />
चतुर्दशी की तिथि का आरंभ- 1 जनवरी 2022 को प्रात: 7 बजकर 17 मिनट पर होगा।<br />
चतुर्दशी की तिथि का समापन- 2 जनवरी 2022, रविवार को प्रात: 3 बजकर 41 मिनट तक.<br />
मासिक शिवरात्रि (01 जनवरी 2022, शनिवार) की पूजा का शुभ मुहूर्त- रात 11 बजकर 58 मिनट से देर रात 12 बजकर 52 मिनट तक है।</p>
<p><strong>मासिक शिवरात्रि मंत्र</strong><br />
व्रत के दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप करना काफी शुभ माना जाता है.</p>
<p><strong>मासिक शिवरात्रि व्रत विधि</strong><br />
मासिक शिवरात्रि की पूजा आधी रात को की जाती है जिसे निशिता काल भी कहा जाता है. इसकी शुरुआत भगवान शिव की मूर्ति या शिव लिंग के अभिषेक करने से होती है। भक्त गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, सिंदूर, हल्दी पाउडर, गुलाब जल और बेल के पत्ते चढ़ाते हैं। इसके बाद शिव आरती या भजन गाए जाते हैं और शंख बजाया जाता है. इसके बाद भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं। शिवरात्रि व्रत पूरे दिन रखा जाता है और अगले दिन पारण किया जाता है।</p>
<p><strong>मासिक शिवरात्रि व्रत का महत्व </strong><br />
मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखने का भी विधान है। इस व्रत को करने के कुछ नियम हैं, जिनका ध्यान रखना चाहिए. इस व्रत की शुरुआत भी सूर्योदय से पहले होती है। शिव भक्त अगर मासिक शिवरात्रि व्रत शुरू करना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत महाशिवरात्रि के दिन से करें। इसके साथ ही आप साल भर की मासिक शिवरात्रियों पर उपवास और पूजन कर सकते हैं।</p>
<p>माना जाता है कि इस व्रत को रखने से भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण कर देते हैं, साथ ही सभी कष्टों को दूर कर देते हैं। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि को रात्रि जागरण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। वहीं विवाह के लिए इस दिन अविवाहित युवतियां भी सच्चे मन से इस व्रत का पालन करती हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/stealing-in-this-shaktipeeth-gives-virtue-due-to-the-boon-of-mother-chudamani-the-king-got-the-sons-gem/">इस शक्तिपीठ में चोरी करने से मिलता है ‘पुण्य’, माँ चूड़ामणि के वरदान से राजा को हुई थी पुत्र रत्न की प्राप्ति</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/152579/new-year-2022-worship-lord-shiva-on-the-first-day-of-the-new-year-special-coincidence-is-being-made</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/152579/new-year-2022-worship-lord-shiva-on-the-first-day-of-the-new-year-special-coincidence-is-being-made</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Dec 2021 13:31:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छठ: आज अस्तागामी सूर्य को देंगे अर्घ्य, जानें पूजा-विधि, मंत्र और मुहूर्त</title>
                                    <description><![CDATA[चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा में आज तीसरे दिन अस्तागामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। छठ पर्व में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा होती है। शाम के समय ढ़लते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के बाद कल सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित कर व्रती अपने व्रत का पारण करेंगे।  छठ का व्रत …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/131925/chhath-today-arghya-will-be-offered-to-the-setting-sun-know-the-method-of-worship-mantra-and-muhurta"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/chath-surya.jpg" alt=""></a><br /><p>चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा में आज तीसरे दिन अस्तागामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। छठ पर्व में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा होती है। शाम के समय ढ़लते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के बाद कल सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित कर व्रती अपने व्रत का पारण करेंगे।  छठ का व्रत महिलाएं और पुरूष दोनों ही श्रृद्धा से करते हैं। यह व्रत माताएं अपनी संतान के सुख-समृद्धि, अरोग्यता और लंबी आयु की कामना के लिए रखा है।</p>
<p><strong>छठ पूजा के लिए सामग्री</strong><br />
प्रसाद रखने के लिए बांस की दो तीन बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास, नए वस्त्र साड़ी-कुर्ता पजामा, चावल, लाल सिंदूर, धूप और बड़ा दीपक, पानी वाला नारियल, गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो, सुथनी और शकरकंदी, हल्दी और अदरक का पौधा हरा हो तो अच्छा, नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू, जिसे टाब भी कहते हैं, शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, कुमकुम, चन्दन, मिठाई।</p>
<p><strong>अस्तागामी सूर्य को अर्घ्य और पूजा-विधि<br />
</strong>कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन घर में पवित्रता के साथ कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें ठेकुआ खासतौर पर प्रसिद्ध है। सूर्यास्त से पहले सारे पकवानों को बांस की टोकरी में भड़कर निकट घाट पर ले जाया जाता है। एक मान्यता यह भी है कि छठ पूजा में सबसे पहले नई फसल का प्रसाद चढ़ाया जाता है।</p>
<p>इसलिए प्रसाद के रूप में गन्ना फल अर्पण किया जाता है। घाट 4-5 गन्नों को खड़ा कर बांधा जाता है और इसके नीचे दीप जलाये जाते हैं। व्रत करने वाले सारे स्त्री और पुरुष जल में स्नान कर इन डालों को अपने हाथों में उठाकर षष्ठी माता और भगवान सूर्य को अर्ध्य देते हैं। सूर्यास्त के पश्चात सब अपने घर लौट आते हैं।</p>
<p>अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल सप्तमी को सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में फिर डालों में पकवान, नारियल और फलदान रख नदी के तट पर सारे वर्ती जमा होते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद छठ व्रत की कथा सुनी जाती है और कथा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रती अपना व्रत तोड़ते हैं।</p>
<p><strong>सूर्य मंत्र</strong><br />
ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।<br />
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।<br />
ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।</p>
<p><strong>उगते सूर्य को अर्घ्य</strong><br />
छठ पूजा के चौथे दिन पानी में खड़े होकर उगते यानी उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसे उषा अर्घ्य या पारण दिवस भी कहते हैं। अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं सात या ग्यारह बार परिक्रमा करती हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है। 36 घंटे का व्रत अर्घ्य देकर ही तोड़ा जाता है। व्रत की समाप्ति सुबह अर्घ्य के बाद संपन्न मानी जाती है।</p>
<p><strong>ऐसे करें प्रसाद ग्रहण </strong><br />
छठ पर्व के दौरान नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इस दिन सिर्फ प्रसाद बनाते समय ही नहीं बल्कि खाते समय भी नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जब खरना के दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति प्रसाद रखता है तो घर के सभी सदस्य शांत रहते हैं और कोई शोर नहीं करते। ऐसा माना जाता है कि शोर होने के बाद व्रती प्रसाद खाना बंद कर देता है। ऐसा भी कहा जाता है कि व्रत करने वाला व्यक्ति ही सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करता है उसके बाद ही घर के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।</p>
<p><strong>छठ पूजा अर्घ्य समय और शुभ मुहूर्त</strong><br />
10 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय :17:30:16<br />
11 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय :06:40:10</p>
<p><strong>यह भी पढ़े-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/know-why-chhath-mayya-and-sun-god-worship-is-done-in-chhath-read-mythology/">जानिए छठ में क्यों की जाती है छठी मईया और सूर्य भगवान पूजा, पढ़े पौराणिक कथा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/131925/chhath-today-arghya-will-be-offered-to-the-setting-sun-know-the-method-of-worship-mantra-and-muhurta</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/131925/chhath-today-arghya-will-be-offered-to-the-setting-sun-know-the-method-of-worship-mantra-and-muhurta</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Nov 2021 09:30:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खरना: आज प्रसाद ग्रहण करने के बाद शुरू होगा छठ का निर्जल उपवास, जानें विधि</title>
                                    <description><![CDATA[आज छठ पर्व के दूसरे दिन खरना किया जाता है। खरना में व्रती इसमें दिनभर व्रत रखकर रात में प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना में गुड़ और चावल की खीर बनाकर भोग लगाया जाता है। इस प्रसाद का खास महत्व इसलिए होता है क्योंकि खरना का प्रसाद आम की लकड़ी और मिट्टी के चूल्हे बनता …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/131575/kharna-chhaths-waterless-fast-will-start-after-accepting-the-prasad-today-know-the-method"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/kharna.jpg" alt=""></a><br /><p>आज छठ पर्व के दूसरे दिन खरना किया जाता है। खरना में व्रती इसमें दिनभर व्रत रखकर रात में प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना में गुड़ और चावल की खीर बनाकर भोग लगाया जाता है। इस प्रसाद का खास महत्व इसलिए होता है क्योंकि खरना का प्रसाद आम की लकड़ी और मिट्टी के चूल्हे बनता है।</p>
<p>इस दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत करने वाला व्यक्ति डूबते सूर्य को अर्घ्य और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करता है। यह व्रत 36 घंटे का होता है। इसमें शुद्धिकरण केवल तन न होकर बल्कि मन का भी होता है।</p>
<p><strong>प्रसाद </strong><br />
खरना प्रसाद बनाने में ही नहीं बल्कि ग्रहण करते समय भी नियम का ध्यान रखना होता है। खरना के दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति प्रसाद ग्रहण करता है, तो घर के सभी सदस्य शांत रहते हैं और कोई शोर नहीं करता, क्योंकि शोर होने के बाद व्रती प्रसाद खाना बंद कर देता है। व्रत करने वाला सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करता है, उसके बाद ही घर के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।</p>
<p><strong>इन नियमों करें पालन</strong><br />
छठ पूजा के व्रत की शुरुआत करते समय ध्यान रखें कि प्रसाद बनाते समय भी आप पवित्र हों। प्रसाद बनाते समय बीच में कुछ न खाएं।सूर्य भगवान को अर्ध्य देने वाला पात्र तांबे या पीतल का हो। व्रत रख रही महिलाएं फर्श पर दरी या चादर बिछाकर सोएं। छठ पूजा का प्रसाद चूल्हे पर बनाएं और इसे ऐसी जगह पर बनाएं जहां रोजाना का खाना न बनता हो। छठ पूजा के दौरान घर में झगड़ा न करें। वरना छठी माता नाराज हो सकती हैं। सूर्य को अर्ध्य दिए बिना कुछ नहीं खाएं-पिएं।</p>
<p><strong>कैसे करें घाट पर पूजा</strong><br />
कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन घर में पवित्रता के साथ कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें ठेकुआ खासतौर पर प्रसिद्ध है। सूर्यास्त से पहले सारे पकवानों को बांस की टोकरी में भड़कर निकट घाट पर ले जाया जाता है। एक मान्यता यह भी है कि छठ पूजा में सबसे पहले नई फसल का प्रसाद चढ़ाया जाता है।</p>
<p>इसलिए प्रसाद के रूप में गन्ना फल अर्पण किया जाता है। घाट 4-5 गन्नों को खड़ा कर बांधा जाता है और इसके नीचे दीप जलाये जाते हैं। व्रत करने वाले सारे स्त्री और पुरुष जल में स्नान कर इन डालों को अपने हाथों में उठाकर षष्ठी माता और भगवान सूर्य को अर्ध्य देते हैं। सूर्यास्त के पश्चात सब अपने घर लौट आते हैं।</p>
<p>अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल सप्तमी को सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में फिर डालों में पकवान, नारियल और फलदान रख नदी के तट पर सारे वर्ती जमा होते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद छठ व्रत की कथा सुनी जाती है और कथा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रती अपना व्रत तोड़ते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़े-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/know-why-chhath-mayya-and-sun-god-worship-is-done-in-chhath-read-mythology/">जानिए छठ में क्यों की जाती है छठी मईया और सूर्य भगवान पूजा, पढ़े पौराणिक कथा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/131575/kharna-chhaths-waterless-fast-will-start-after-accepting-the-prasad-today-know-the-method</link>
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                <pubDate>Tue, 09 Nov 2021 13:13:01 +0530</pubDate>
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