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                <title>जी 7 - Amrit Vichar</title>
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                <title>ताइवान के प्रति जापान की बढ़ती चिंता को देख भड़का चीन, दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग/ टाक्यो। ताइवान के प्रति जिस – जिस देश ने चिंता जताई व ताइवान से किसी भी तरह की नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश की तो उन देशों को चीन की नाराजगी का सामना करना पढ़ रहा है। ताइवान को सपार्ट करने वाले देश को चीन धमकाने से बाज नहीं आ रहा है। ताइवान मुद्दे को …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/261675/seeing-japans-growing-concern-for-taiwan-china-flared-up"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/china-japan-123.png" alt=""></a><br /><p><strong>बीजिंग/ टाक्यो।</strong> ताइवान के प्रति जिस – जिस देश ने चिंता जताई व ताइवान से किसी भी तरह की नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश की तो उन देशों को चीन की नाराजगी का सामना करना पढ़ रहा है। ताइवान को सपार्ट करने वाले देश को चीन धमकाने से बाज नहीं आ रहा है। ताइवान मुद्दे को लेकर जापान के प्रधानमंत्री ने चिंता दिखाई। जिसके बाद चीन जापान पर भड़क गया। चीन ने जापान को धमकाते हुए कहा कि जापान अपनी ऐतिहासिक गलतियां मत दोहराओ ।</p>
<p>ताइवान के मुद्दे पर चीन एक बार फिर से भड़क गया है । इस बार चीन के निशाने पर जापान है। चीनी दूतावास ने एक बयान जारी कर जापान को चेतावनी कि जापान इस मामले में अपनी ऐतिहासिक गलतियों को न दोहराए और न ही संकटमोचक बनने की कोशिश करे। साथ ही चीन ने जापान को नसीहत देते हुए कहा कि वह अपने हितों के लिए पड़ोसी देशों को नुकसान पहुंचाकर भू-राजनीतिक दलदल में न फंसे ।</p>
<p><strong>जापान पर क्यों भड़का है चीन</strong><br />
दरअसल, औद्योगिक देशों का एक समूह जी- 7 ताइवान का समर्थन कर चुका है । जी -7 समूह चीन के उकसावे पूर्ण सैन्य अभ्यास की अलोचना भी की थी । इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका देश के साथ जापान भी शामिल है। इस लिहाज से जापान भी ताइवान का समर्थन कर रहा है और उसने अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी की मेजबानी भी की। जिस वजह से चीन जापान पर चिढ़ा हुआ है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-</strong><a href="https://amritvichar.com/china-is-pressurizing-taiwan-pla-increased-military-exercises/"><strong>ताइवान पर दबाव बना रहा चीन, PLA ने बढ़ाया सैन्य अभ्यास</strong></a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Aug 2022 16:15:00 +0530</pubDate>
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                <title>G-7 और नाटो शिखर सम्मेलन ने रूस और चीन और पश्चिम के बीच खाई और बढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[बर्मिंघम। अभूतपूर्व उथल-पुथल – तीन दशकों में यूरोप में पहला बड़ा युद्ध, दशकों में उच्चतम मुद्रास्फीति दर और तेजी से बिगड़ते वैश्विक खाद्य संकट – की पृष्ठभूमि के बीच पश्चिमी नेताओं ने दो प्रमुख शिखर सम्मेलनों में शिरकत की। जी7 के देश जर्मनी में जमा हुए और नाटो नेता मैड्रिड में एकत्र हुए। दोनों सम्मेलनों …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/241571/g-7-and-nato-summits-widen-the-gap-between-russia-and-china-and-the-west"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/untitled-14.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बर्मिंघम।</strong> अभूतपूर्व उथल-पुथल – तीन दशकों में यूरोप में पहला बड़ा युद्ध, दशकों में उच्चतम मुद्रास्फीति दर और तेजी से बिगड़ते वैश्विक खाद्य संकट – की पृष्ठभूमि के बीच पश्चिमी नेताओं ने दो प्रमुख शिखर सम्मेलनों में शिरकत की। जी7 के देश जर्मनी में जमा हुए और नाटो नेता मैड्रिड में एकत्र हुए। दोनों सम्मेलनों के परिणाम पश्चिमी-प्रभुत्व वाले वैश्विक शासन की सीमाओं और गहन ध्रुवीकरण की ओर इशारा करते हैं।</p>
<p>दोनों शिखर सम्मेलन में यूक्रेन में युद्ध की घटना का बोलबाला था, और दोनों में यूक्रेन के लिए निरंतर समर्थन का वादा किया। लेकिन ऐसी घोषणाओं का प्रत्यक्ष प्रभाव प्रतीकात्मक ही होता है। 27 जून को, जब जी-7 के नेता बवेरिया में एक महल में मिले, रूसी हमले ने मध्य यूक्रेन के क्रेमेनचुक में एक शॉपिंग सेंटर को नष्ट कर दिया, जिसमें कई लोग मारे गए।</p>
<p>और नाटो ने जैसे ही अपनी नई रणनीतिक अवधारणा में रूस को “सहयोगी सुरक्षा और यूरो-अटलांटिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष खतरा” करार दिया, रूसी सेना ने पूर्वी यूक्रेन में अपने आक्रमण को और तेज कर दिया और यूक्रेन भर में आबादी वाले क्षेत्रों को तबाह कर देने के अपने अभियान का विस्तार किया।। यह उम्मीद करना अवास्तविक होगा कि शिखर सम्मेलन की घोषणाओं और प्रतिज्ञाओं से दुनिया में मौजूद गहरे संकटों का तत्काल और स्थायी समाधान हो जाने वाला है। लेकिन जी-7 और नाटो दोनों बैठकों से जो समस्या सामने आई है, वह और गहरी है।</p>
<p><strong>एक ‘न्यायसंगत दुनिया’</strong><br />
जर्मन जी7 प्रेसीडेंसी ने जनवरी 2022 में “एक समान दुनिया की ओर प्रगति” को अपने उद्देश्य के रूप में अपनाया। यह यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से पहले था, जिसने इस तरह के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कोई सार्थक प्रगति करना असंभव बना दिया। यहां तक ​​​​कि जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पूरा करना तो छोड़िए उन्हें कम करने या उनसे पीछे हटने तक की नौबत आ गई है, ऐसे में वैश्विक खाद्य संकट की बदतरीन हालत दुनिया के सबसे अमीर लोकतंत्रों के नेताओं की समझ से परे लगती है।</p>
<p>यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त 4.5 अरब डॉलर के वित्त पोषण की घोषणा के बावजूद है, जिसने इस वर्ष अब तक जी7 प्रतिबद्धताओं को 14 अरब से अधिक कर दिया गया है। अधिक तात्कालिक चुनौतियों की बात करें, जैसे कि जीवन की लागत का संकट, जी7 नेताओं के पास इस के लिए कुछ प्रभावी प्रतिक्रियाएँ हैं। यह मुख्य रूप से नहीं बल्कि आंशिक रूप से है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक संकट के प्रमुख चालक पश्चिमी क्लब के देशों के नियंत्रण से बाहर की चीज है। वे यूक्रेन में पुतिन के युद्ध, यूक्रेनी खाद्य निर्यात की उसकी नाकाबंदी और यूरोपीय संघ में गैस के प्रवाह में कमी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं। युद्ध के इन गैर-सैन्य उपकरणों के नकारात्मक प्रभाव केवल समय के साथ ही बढ़ेंगे, खासकर जब सर्दी आएगी।</p>
<p><strong>चीन का सामना</strong><br />
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की जी7 से निरंतर अनुपस्थिति आश्चर्य की बात नहीं हो सकती, यह देखते हुए कि राजनीतिक रूप से, जी7 के लोकतांत्रिक देशों और एक कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शासित देश में बहुत कम समानता है। लेकिन चीन के साथ वास्तव में अधिक सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण का कोई संकेत नहीं था – बल्कि जी 7 नेताओं के वक्तव्य में चीन पर निर्देशित आलोचनाओं और मांगों की एक सूची थी। यह भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। और विकासशील देशों में चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के लिए 600 अरब अमेरिकी डॉलर की साझेदारी की घोषणा से एक विश्वसनीय विकल्प के बजाय हताशा की बू आती है।</p>
<p>पिछले साल के जी7 शिखर सम्मेलन में घोषित अपने असफल पूर्ववर्ती, बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड पार्टनरशिप की तुलना में साझेदारी काफी कम महत्वाकांक्षी है। शायद अपनी छवि में वैश्विक शासन को मॉडल करने के लिए जी7 की सीमाओं के बारे में सबसे अधिक बताना अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की भविष्य की दिशा पर शिखर सम्मेलन में आमंत्रित अन्य देशों के साथ एक समझौते पर पहुंचने में विफलता थी। अगर कोई उम्मीद थी कि जी7 और यूरोपीय संघ अर्जेंटीना, भारत, इंडोनेशिया, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नष्ट करने के रूसी और चीनी प्रयासों के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाने के लिए मनाएंगे, तो इसमें कुछ खास हुआ नहीं। यह एक बार भी यूक्रेन में युद्ध का उल्लेख करने में विफल रहा।</p>
<p><strong> विभाजित दुनिया</strong><br />
समृद्ध उदार लोकतंत्रों के एक छोटे समूह और शेष विश्व के बीच यह बढ़ता हुआ विभाजन मैड्रिड में नाटो शिखर सम्मेलन में भी स्पष्ट था, हालांकि एक अलग तरीके से। नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने अपने शुरुआती बयान में पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह शिखर सम्मेलन “नाटो को एक अधिक खतरनाक और प्रतिस्पर्धी दुनिया में मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेगा जहां रूस और चीन जैसे सत्तावादी शासन नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को खुले तौर पर चुनौती दे रहे हैं।”</p>
<p>इनमें एक नई रणनीतिक अवधारणा को अपनाना, अगले साल तक हर स्थिति के लिए एकदम तैयार सैनिकों की वर्तमान संख्या को 40,000 से बढ़ाकर 300,000 करना और फिनलैंड तथा स्वीडन को गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण शामिल है। स्टोल्टेनबर्ग ने भले ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात से इनकार किया कि एशिया-प्रशांत में नाटो समकक्ष बनाने की कोई चर्चा हुई थी। लेकिन नाटो के सदस्यों की अधिक वैश्विक रक्षा और प्रतिरोध स्वरूप की महत्वाकांक्षा आमंत्रित भागीदार देशों की सूची से स्पष्ट है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। मैड्रिड शिखर सम्मेलन घोषणा के अनुसार, उनकी भागीदारी “साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में हमारे सहयोग के मूल्य को प्रदर्शित करती है”।</p>
<p>कुल मिलाकर देखा जाए तो वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने में जी7 की घटती क्षमता और शीत युद्ध जैसी स्थिति में नाटो के सदस्यों का पीछे हटना अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में एक मूलभूत परिवर्तन का संकेत देता है। शीत युद्ध के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाली एकध्रुवीयता का भ्रम दूर हो सकता है, लेकिन इसे बहु-ध्रुवीय दुनिया द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जाएगा। भविष्य को त्रिध्रुवीय बनाने का रूस का अंतिम प्रयास यूक्रेन के युद्ध के मैदानों में ठप हो रहा है, सभी संकेत हैं कि दुनिया भर के देशों को यह तय करना होगा कि वे एक नए द्विध्रुवीय भविष्य में चीन या अमेरिका के साथ होंगे या नहीं। जी7 और नाटो शिखर सम्मेलन ऐसे पहले संकेत हो सकते हैं कि केवल अल्पसंख्यक ही बाद वाला विकल्प चुनेंगे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/russian-missiles-hit-residential-buildings-in-odessa/">Russia Ukraine War: रूसी मिसाइलों ने ओदेसा में रिहायशी इमारतों पर किया हमला</a></strong></p>
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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 15:50:30 +0530</pubDate>
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                <title>संवेदनशील समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मनी में जी-7 देशों की बैठक ‘समानता आधारित दुनिया की ओर बढ़ो’, नीति वाक्य के इर्द-गिर्द चर्चाओं के साथ संपन्न हुई। संयोग ही है कि जिस वक्त जी-7 के मंच से भावी दुनिया के लिए बड़ी घोषणाएं हो रही थीं, उसी समय अमेरिका और मेक्सिको की सीमा पर टेक्सास प्रांत के सेंट एंटोनियो इलाके में …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/240829/sensitive-issue"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-06/g2.jpg" alt=""></a><br /><p>जर्मनी में जी-7 देशों की बैठक ‘समानता आधारित दुनिया की ओर बढ़ो’, नीति वाक्य के इर्द-गिर्द चर्चाओं के साथ संपन्न हुई। संयोग ही है कि जिस वक्त जी-7 के मंच से भावी दुनिया के लिए बड़ी घोषणाएं हो रही थीं, उसी समय अमेरिका और मेक्सिको की सीमा पर टेक्सास प्रांत के सेंट एंटोनियो इलाके में एक लावारिस ट्रक में 46 लाशें मिलीं और जो लोग जिंदा बचे हुए थे, वो भीषण गर्मी के कारण गंभीर अवस्था में मिले।</p>
<p>इस घटना से मानव तस्करी एक भयंकर त्रासदी के रूप में देखने मिली है। मानव तस्करी विश्व में एक गंभीर व संवेदनशील समस्या बनकर उभर रही है। मादक पदार्थों व हथियारों की तस्करी के बाद मानव तस्करी दुनिया में सबसे बड़ा संगठित अपराध है। अमेरिका में अवैध प्रवेश के ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहे हैं। कुछ माह पहले भारत के गुजरात के डिंगुचा गांव का पूरा परिवार इस तरह डूब गया था। उसने कनाडा की सीमा को अवैध रूप से तोड़ने की कोशिश की और पूरी तरह से ठंड में जम गया। डिंगुचा के एक अन्य परिवार की भी ऐसी ही स्थिति थी, लेकिन समय पर इलाज से वह बच गया।</p>
<p>संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में मानव तस्करी बड़े पैमाने पर है, और मानव तस्कर बड़ी मात्रा में धन उगाहने के लिए अमानवीय साधनों का उपयोग करते हैं। गौरतलब है कि हिंसक संघर्षों, टकरावों, आपदाओं, जलवायु व्यवधानों और अन्य त्रासदियों के कारण, विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अपनी जमीन, घर और परिजनों को छोड़कर जान के खतरे उठाकर कोई इंसान दूसरे देश जाता है, तो उसका मतलब यही है कि उसके अपने देश में उसे जीवन की आस दिखाई नहीं दे रही है।</p>
<p>अमेरिका और मेक्सिको की सीमा पर जो त्रासदी घटी है, वह कभी सीरिया या लीबिया से यूरोप आने के प्रयास में लगे लोगों के साथ घटती है और अब ऐसी ही त्रासदी यूक्रेन के लोगों के साथ भी हो रही है। शरणार्थी मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (यूएनएचसीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व भर में इस वर्ष मई महीने में विस्थापितों की संख्या ने 10 करोड़ के आंकड़े को छू लिया।</p>
<p>बड़े पैमाने पर विस्थापन के लिए खाद्य असुरक्षा, जलवायु संकट, यूक्रेन में युद्ध और अफ़्रीका से अफगानिस्तान तक अन्य आपात परिस्थितियों को मुख्य वजह बताया गया है। इस गंभीर व संवेदनशील समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एक साथ आकर मानव त्रासदी से निपटने, हिंसक टकरावों को सुलझाने और स्थाई समाधान ढूंढने के लिए कार्रवाई करनी होगी।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://amritvichar.com/need-for-effective-policy/">प्रभावी नीति की जरूरत</a></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 01:50:19 +0530</pubDate>
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                <title>बढ़ता वर्चस्व</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/239627/growing-dominance"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-06/capture-1496.jpg" alt=""></a><br /><p>वैश्विक माहौल में विगत एक वर्ष में काफी महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। इन दिनों जर्मनी में जी-7 देशों का शिखर सम्मेलन चल रहा है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को चलते चार माह से ज्यादा का समय हो चुका है। जी-7 समूह ने रूस पर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने सोमवार को कहा कि रूस की ऊर्जा कमाई पर अंकुश लगाने के मकसद से रूसी तेल पर कीमत की सीमा को आगे बढ़ाने के लिए जी-7 देश एक समझौते की घोषणा करने वाले हैं।</p>
<p>यह कदम यूक्रेन का समर्थन करने के एक संयुक्त प्रयास का हिस्सा है, जिसमें रूसी सामानों पर शुल्क बढ़ाना और युद्ध का समर्थन करने वाले सैकड़ों रूसी अधिकारियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाना शामिल है। साथ ही सम्मेलन में की गई प्रारंभिक घोषणाओं में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील देशों को छह खरब डॉलर की ढांचागत सहायता शामिल है। इसे चीन की बैल्ट एंड रोड- योजना के प्रति पश्चिमी देशों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। चीन पर यह आरोप रहा है कि वह खरबों डॉलर की बैल्ट एंड रोड योजना के माध्यम से कम आय वाले देशों को मंहगे ऋणों के जाल में फंसा रहा है।</p>
<p>जी-7 दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है। जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। पहले यह छह देशों का समूह था। जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी। इस बैठक में वैश्विक आर्थिक संकट के संभावित संसाधनों पर विचार किया गया था। फिर इस समूह में कनाडा शामिल हो गया और इस समूह के सदस्यों की संख्या सात हो गई। हालांकि भारत इस समूह का सदस्य नहीं है।</p>
<p>परंतु चीन की लगातार विकराल होती चुनौती का प्रभावी तोड़ निकालने के लिए विकसित औद्योगिक देशों को अपना दायरा विस्तृत करने की ज़रूरत महसूस हो रही है। ऐसी कवायद में भारत प्रमुख साझीदार के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में विशेष रुप से आमंत्रित हैं। जी-7 के साथ बढ़ती भारत की सक्रियता ने पश्चिम के साथ पहले से ही बढ़ती उसकी सहभागिता को एक नया क्षितिज दिया है।</p>
<p>भारत भी उन देशों के साथ रिश्तों की पींगें बढ़ा रहा है। यही कारण है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पश्चिम के साथ भारत की प्रगाढ़ता फिलहाल सबसे उच्च स्तर पर है। जी-7 में भारत की मौजूदगी, उसकी अंतर्निहित शक्ति के लिए किसी अनुपम उपहार से कम नहीं है। उसकी इस अंतर्निहित शक्ति को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 02:00:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जी-7 के नेताओं ने जेलेंस्की से की वार्ता, यूक्रेन के लिए मदद, रूस के खिलाफ नई पाबंदियों की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[एल्माउ (जर्मनी)। दुनिया की सात बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के नेताओं ने सोमवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ वीडियो लिंक के जरिए बातचीत की और यूक्रेन के पुनर्निर्माण में मदद के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए रूसी तेल के मूल्यों पर अंकुश लगाने, रूस के सामान पर शुल्क बढ़ाने तथा नयी पाबंदियां लगाने …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/239409/g-7-leaders-talk-to-zelensky-help-for-ukraine-preparing-for-new-sanctions-against-russia"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-06/volodymyr-zelenskyy-3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>एल्माउ (जर्मनी)।</strong> दुनिया की सात बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के नेताओं ने सोमवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ वीडियो लिंक के जरिए बातचीत की और यूक्रेन के पुनर्निर्माण में मदद के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए रूसी तेल के मूल्यों पर अंकुश लगाने, रूस के सामान पर शुल्क बढ़ाने तथा नयी पाबंदियां लगाने के इरादे जताए। अमेरिका भी रूस के खिलाफ जंग में मदद के लिए यूक्रेन को सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली देने की घोषणा करने वाला है। इसके साथ, जी-7 के नेता रूस के खिलाफ कुछ नई पाबंदियों की घोषणा कर सकते हैं।</p>
<p>वहीं, जेलेंस्की ने चिंता जताई है कि पश्चिमी देश युद्ध लंबा चलने के कारण थक चुके हैं। जी-7 के तीन दिवसीय सम्मेलन में रूस के तेल के मूल्यों को नियंत्रित करने तथा रूसी अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने वाली पाबंदियों को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है। जी-7 के वित्त मंत्री इन मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। अमेरिका ने रूस से आयातित 570 किस्म के उत्पादों पर नए शुल्क लगाने की भी घोषणा की है। इसके साथ ही, रूस की रक्षा आपूर्ति को निशाना बनाने के लिए अन्य पाबंदियां भी लगाई जाने वाली हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन नॉर्वे में विकसित एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम ‘नासाम्स’ की खरीद की घोषणा कर सकते हैं।</p>
<p>अमेरिका व्हाइट हाउस समेत अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए ‘नासाम्स’ प्रणाली का इस्तेमाल करता है। बाइडन यूक्रेन सरकार को अपने खर्चों के लिए 7.5 अरब डॉलर प्रदान करने की प्रतिबद्धता की भी घोषणा करेंगे। यह यूक्रेन को दिए जाने वाले 40 अरब डॉलर के हथियार और आर्थिक पैकेज के तहत होगा। बाइडन ने इस संबंध में एक कानून पर पिछले महीने हस्ताक्षर किए थे।</p>
<p>जी-7 के नेताओं ने यूक्रेन पर ध्यान के साथ तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के सोमवार के सत्र की शुरुआत की। बाद में, उनके साथ पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों-भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और अर्जेंटीना के नेता भी जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और अन्य मुद्दों पर चर्चा में जुड़ेंगे। शिखर सम्मेलन के मेजबान जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने कहा कि यूक्रेन के बारे में जी-7 देशों की नीतियां काफी हद तक एक समान हैं और उन्हें मजबूत तथा सावधान रहने की जरूरत है। बाइडन ने रविवार को कहा, ‘‘हमें एक साथ रहना होगा, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शुरू से ही यह उम्मीद थी कि किसी तरह नाटो और जी-7 में फूट पड़ जाएगी लेकिन वह नहीं हुआ और हम यह नहीं होने देंगे।’’</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/g-7-countries-will-beat-chinas-bri-will-make-a-600-billion-budget/">चीन के जवाब में जी-7 लेकर आया 600 अरब डॉलर की ढांचागत निवेश योजना</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 18:15:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Russia-Ukraine War: G7 देशों ने लिया यूक्रेन को 24 अरब डॉलर की सहायता प्रदान करने का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[कीव। जी 7 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों ने कहा है कि उन्होंने यूक्रेन को इस साल 24 अरब डॉलर की सहायता देने का संकल्प लिया है। जी 7 ने एक बयान में कहा, “जी 7 देशों के वित्त मंत्रियों के 14 फरवरी के बयान के आधार पर हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/205319/g7-countries-pledge-to-provide-24-billion-in-aid-to-ukraine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-04/untitled-1-12.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कीव।</strong> जी 7 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों ने कहा है कि उन्होंने यूक्रेन को इस साल 24 अरब डॉलर की सहायता देने का संकल्प लिया है। जी 7 ने एक बयान में कहा, “जी 7 देशों के वित्त मंत्रियों के 14 फरवरी के बयान के आधार पर हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर 2022 और उससे आगे के लिए 24 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की अतिरिक्त सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया है।”</p>
<p>यूक्रेन को 2014-2021 में अमेरिका से 60 अरब डॉलर से अधिक की सहायता मिली थी। देशों ने यूक्रेन के लिए सहायता को और बढ़ाने पर भी तत्परता व्यक्त की। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन में डोनेट्स्क और लुहान्स्क गणराज्यों का समर्थन करने के लिए अपना सैन्य अभियान शुरू किया है। पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों ने यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियान की कड़ी निंदा करते हुए इसे हमला करार दिया है और मॉस्को के खिलाफ कठोर प्रतिबंध लगाये हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/moradabads-name-is-recorded-in-the-pages-of-the-past-this-dreadful-history-of-the-hailstorm-of-1888/">अतीत के पन्ने : मुरादाबाद के नाम दर्ज है 1888 की ओलावृष्टि का यह खौफनाक इतिहास</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Apr 2022 13:30:58 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रिटेन करेगा जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन। जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों का शिखर सम्मेलन 10 से 12 दिसंबर तक लिवरपूल में होगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, विदेश मंत्री लिज ट्रस 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान और यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों का स्वागत करेंगी। इस साल जी-7 बैठक की अध्यक्षता ब्रिटेन के …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/136653/britain-to-host-g-7-foreign-ministers-meeting"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/g7-summit_.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लंदन।</strong> जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों का शिखर सम्मेलन 10 से 12 दिसंबर तक लिवरपूल में होगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, विदेश मंत्री लिज ट्रस 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान और यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों का स्वागत करेंगी।</p>
<p>इस साल जी-7 बैठक की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास है। यह जी-7 विदेश मंत्रियों की इस साल की दूसरी निजी बैठक होगी। बैठक में दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) देश भी शामिल होंगे, जिसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की ओर ब्रिटेन के झुकाव के रूप में भी देखा जा सकता है। बयान में कहा गया, शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्वास्थ्य और मानवाधिकार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।</p>
<p>ट्रस ने कहा कि अगले महीने लिवरपूल में होने वाली यह बैठक दुनिया के सामने लिवरपूल को लाने का एक अच्छा मौका है। इसकी मदद से ब्रिटिश संस्कृति, वाणिज्य और रचनात्मकता को पेश किया जा सकेगा।</p>
<p>विदेश मंत्री ने बताया कि मैं इस बैठक में अपने समकक्षों से इस बात पर चर्चा करूंगी कि किस तरह से हम विश्व स्तर पर अपने बीच अधिक बेहतर आर्थिक, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा संबंध बना पाएंगे और किस तरह से समान विचारधारा वाले देशों को साथ में काम करने के लिए प्रोत्साहित कर एक मजबूत स्थिति हासिल कर सकेंगे। बैठक में मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे आसियान के सदस्य देशों के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़े-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/i-firmly-believe-that-there-is-great-potential-for-further-cooperation-with-india-un-peacekeeping-chief/">मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत के साथ और सहयोग की बहुत संभावना है: संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा प्रमुख </a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Nov 2021 15:47:29 +0530</pubDate>
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