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                <title>आदि गुरु शंकराचार्य - Amrit Vichar</title>
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                <description>आदि गुरु शंकराचार्य RSS Feed</description>
                
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                <title>आदि गुरु शंकराचार्य की तपस्थली है उत्तराखंड का जोशीमठ</title>
                                    <description><![CDATA[जोशीमठ, अमृत विचार। गढ़वाल मंडल के चमोली जिले के पेनखंडा परगने में स्थित है खूबसूरत कस्बा जोशीमठ। जिसका पौराणिक नाम ज्योतिर्मठ बताया जाता है। जोशीमठ कर्णप्रयाग बद्रीनाथ मार्ग पर बद्रीनाथ से 30 किमी पहले और कर्णप्रयाग से 72 किमी की दूरी पर मौजूद है। यहां से बदरीनाथ, विष्णुप्रयाग, नीति-माणा, हेमकुण्ड साहिब और फूलों की घाटी, …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/191267/joshimath-of-uttarakhand-is-the-penance-place-of-adi-guru-shankaracharya"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-03/1462121564_joshimath_2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जोशीमठ, अमृत विचार।</strong> गढ़वाल मंडल के चमोली जिले के पेनखंडा परगने में स्थित है खूबसूरत कस्बा जोशीमठ। जिसका पौराणिक नाम ज्योतिर्मठ बताया जाता है। जोशीमठ कर्णप्रयाग बद्रीनाथ मार्ग पर बद्रीनाथ से 30 किमी पहले और कर्णप्रयाग से 72 किमी की दूरी पर मौजूद है। यहां से बदरीनाथ, विष्णुप्रयाग, नीति-माणा, हेमकुण्ड साहिब और फूलों की घाटी, औली के अलावा कई अन्य धार्मिक व पर्यटन स्थलों की ओर रास्ता जाता है।</p> <p><img class="wp-image-388250 alignleft" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-03/images-12-1-e1648123173266.jpg" alt="" width="322" height="200"></img>ऐसी मान्यता है कि जोशीमठ आदि शंकराचार्य की तपस्थली रही है। अनुमान है कि 815 ई. में यहीं पर आदि शंकराचार्य ने एक शहतूत के पेड़ के नीचे साधना कर ज्ञान प्राप्ति की थी और इसीलिए इस जगह का नाम ज्योतिर्मठ पड़ा जो बाद में धीरे-धीरे आम बोलचाल की भाषा में जोशीमठ हो गया। बद्रीनाथ धाम और भारत के तीन छोरों पर मठों की स्थापना करने से पहले शंकराचार्य ने जोशीमठ में ही पहला मठ स्थापित किया था। यहीं पर शंकराचार्य ने सनातन धर्म के महत्वपूर्ण धर्मग्रन्थ शंकर भाष्य की रचना भी की थी।</p> <p>यहां आज भी 36 मीटर की गोलाई वाला 2400 साल पुराना वह शहतूत का पेड़ है जिसके नीचे शंकराचार्य ने साधना की थी, इसी पेड़ के पास शंकराचार्य की वह गुफा भी मौजूद है जहां उन्होंने तप किया था। इस गुफा को ज्योतिरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।</p> <p><img class="size-medium wp-image-388259 alignright" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-03/timthumb-1-300x206.jpg" alt="" width="300" height="206"></img></p> <p> </p> <p>जोशीमठ में विष्णु भगवान को समर्पित एक लोकप्रिय मंदिर है। इसके अतिरिक्त नरसिंह, वासुदेव, नवदुर्गा आदि के मंदिर भी यहां पर मौजूद हैं। मान्यता है कि जोशीमठ के नरसिंह मंदिर की पूजा-अर्चना किये बगैर बद्रीनाथ की यात्रा अधूरी ही रह जाती है। इस मंदिर में भगवन नरसिंह की काले पत्थर से बनी मूर्ति भी है।</p> <p><img class="wp-image-388256 alignleft" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-03/narsingh-temple-joshimath-300x169.jpg" alt="" width="343" height="193"></img></p> <p>ऐसी मान्यता भी प्रचलित है कि इस मूर्ति का बांया हाथ कोहने के पास से लगतार क्षीण होता जाता है, जब यह गिर जायेगा तो नर और नारायण पर्वतों के आपस में मिल जाने से बद्रीनाथ का रास्ता बंद हो जायेगा। तब भगवान बद्रीनाथ की पूजा भविष्यबद्री में हुआ करेगी। शीतकाल में भगवान बद्रीनाथ की मूर्ति इसी मंदिर में प्रतिष्ठित कर दी जाती है। जोशीमठ कभी कत्यूरी शासकों की राजधानी रह चुकी है, तब इसे कीर्तिपुर के नाम से जाना जाता था. कत्यूरी शासक ललितशूर के ताम्रपत्र में इसे इसी नाम से लिखा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 17:34:30 +0530</pubDate>
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                <title>देहरादून: आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी पहुंची श्री नृसिंह मंदिर,  फूलवर्षा से स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[देहरादून, अमृत विचार। आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी के श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचते ही सोमवार को औपचारिक रूप से वर्ष 2021 की श्री बदरीनाथ धाम यात्रा का समापन हो गया है। अब छह महीने श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ एवं श्री योग बदरी पांडुकेश्वर में शीतकालीन पूजाएं संपन्न होंगी। आदि गुरू शंकराचार्य जी की …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/136781/sri-narsingh-temple-reached-the-holy-throne-of-adi-guru-shankaracharya-welcomed-with-flowers"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/17-k-e1637588891944.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>देहरादून, अमृत विचार।</strong> आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी के श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचते ही सोमवार को औपचारिक रूप से वर्ष 2021 की श्री बदरीनाथ धाम यात्रा का समापन हो गया है।</p>
<p>अब छह महीने श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ एवं श्री योग बदरी पांडुकेश्वर में शीतकालीन पूजाएं संपन्न होंगी। आदि गुरू शंकराचार्य जी की गद्दी प्रात: कालीन पूजा-अर्चना, प्रसाद अर्पण के बाद श्री योगध्यान बदरी पांडुकेश्वर से रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी एवं धर्माचार्यों , श्रद्धालुओं सहित श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ प्रस्थान किया।</p>
<p>आदिगुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के स्थान-स्थान पर स्वागत हुआ। श्रद्धालुओं ने फूलवर्षा की ग्रैफ केंप में कर्नल मनीष कपिल की अगुवाई में आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी तथा रावल जी का स्वागत किया। इस अवसर पर धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने अधिकारियों-जवानों को संबोधित किया तथा सड़क निर्माण हेतु उनकी प्रशंसा की। इसके पश्चात आदि गुरु की पवित्र गद्दी श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंची जहां श्रद्धालुओं ने गद्दी की आगवानी की तथा फूलवर्षा कर स्वागत किया। श्री नृसिंह मंदिर परिसर में श्री गणेश पूजा तथा देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना आव्हान हुआ। इसके पश्चात प्रसाद वितरण हुआ।</p>
<p>बता दें कि 20 नवंबर को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद हो गए थे। 21 नवंबर को रावल जी सहित श्री उद्धव जी, श्री कुबेर जी की डोली और आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी पांडुकेश्वर पहुंची। पांच नवंबर को श्री गंगोत्री धाम के कपाट बंद हुए तथा छह नवंबर को श्री केदारनाथ धाम एवं श्री यमुनोत्री धाम के कपाट बंद हुए।</p>
<p>जिलाधिकारी उत्तरकाशी मयूर दीक्षित तथा जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल ने बताया कि जिलों में शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि श्री केदारनाथ धाम की शीतकालीन पूजा पंच केदार गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ तथा तीर्थ पुरोहितों से मिली जानकारी के मुताबिक श्री यमुनोत्री धाम की शीतकालीन पूजा खरसाली(खुशीमठ),श्री गंगोत्री धाम की शीतकालीन पूजा मुखबा ( मुखीमठ )में पहले ही शुरू हो गई है।</p>
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                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>देहरादून</category>
                                            <category>बदरीनाथ</category>
                                            <category>पौड़ी गढ़वाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Nov 2021 19:18:21 +0530</pubDate>
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