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                <title>Tansen - Amrit Vichar</title>
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                <description>Tansen RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>6 मई का इतिहासः आज के दिन ही 26/11 के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को सुनाई गई थी फांसी की सजा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय एवं विश्व इतिहास में 06 मई की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार है:-</p>
<p><strong>1529 : </strong>बंगाल के अफगान शासक नसरत शाह को गोगरा नदी के किनारे हुई लड़ाई में बाबर के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा।</p>
<p><strong>1589 : </strong>महान गायक मियां तानसेन का निधन।</p>
<p><strong>1840 :</strong> दुनिया की पहली गोंद लगी डाक टिकट 'पेनी ब्लैक' का ग्रेट ब्रिटेन में उपयोग।</p>
<p><strong>1857 : </strong>ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल नेटिव इंफैंटरी की 34वीं रेजिमेंट को भंग किया। रेजिमेंट के सिपाही मंगल पांडेय ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह किया था।</p>
<p><strong>1861 : </strong>मोतीलाल नेहरू का जन्म।</p>
<p><strong>1910 : </strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536735/history-of-may-6-on-this-day-2611-convicted-terrorist"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/2025-(10)4.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय एवं विश्व इतिहास में 06 मई की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार है:-</p>
<p><strong>1529 : </strong>बंगाल के अफगान शासक नसरत शाह को गोगरा नदी के किनारे हुई लड़ाई में बाबर के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा।</p>
<p><strong>1589 : </strong>महान गायक मियां तानसेन का निधन।</p>
<p><strong>1840 :</strong> दुनिया की पहली गोंद लगी डाक टिकट 'पेनी ब्लैक' का ग्रेट ब्रिटेन में उपयोग।</p>
<p><strong>1857 : </strong>ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल नेटिव इंफैंटरी की 34वीं रेजिमेंट को भंग किया। रेजिमेंट के सिपाही मंगल पांडेय ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह किया था।</p>
<p><strong>1861 : </strong>मोतीलाल नेहरू का जन्म।</p>
<p><strong>1910 : </strong>जॉर्ज पंचम, पिता एडवर्ड सप्तम की मृत्यु के बाद ब्रिटेन के सम्राट बने।</p>
<p><strong>1940 :</strong> जॉन स्टेनबेक को उनके उपन्यास 'द ग्रेप्स ऑफ रैथ' के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला।</p>
<p><strong>1942 : </strong>फिलीपीन में अमेरिकी सेना की अंतिम टुकड़ी ने जापान के समक्ष समर्पण किया।</p>
<p><strong>1944 : </strong>गांधी जी को पुणे के आगा खां पैलेस से रिहा किया गया और यह उनके जीवन की अंतिम जेल यात्रा थी।</p>
<p><strong>1954 : </strong>लंदन के मेडिकल छात्र रोजर बैनिस्टर ने एक मील की दूरी को चार मिनट के भीतर पूरा करने का रिकार्ड बनाया। उन्होंने यह दूरी तीन मिनट 59.9 सेकंड में पूरी की।</p>
<p><strong>1960 : </strong>ब्रिटेन की महारानी की छोटी बहन राजकुमारी मार्गरेट और एंथनी आर्मस्ट्रांग जोन्स का विवाह हुआ।</p>
<p><strong>1976 : </strong>उत्तर पूर्वी इटली में भीषण भूकंप से कम से कम 1000 लोगों की मौत।</p>
<p><strong>1997 : </strong>फ्रांस की क्रिस्टिन जेनिन ध्रुव पर पैदल पहुंचने वाली विश्व की पहली महिला बनी।</p>
<p><strong>2004 : </strong>चीन ने सिक्किम को भारत का अंग माना।</p>
<p><strong>2010 : </strong>मुंबई पर हमला करने वाले आतंकवादियों में से जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी की सजा सुनाई गई।</p>
<p><strong>2015 : </strong>भारतीय फिल्म अभिनेता सलमान खान को गैर इरादतन हत्या के लिए पांच साल जेल की सजा। उच्च न्यायालय ने अपील पर उन्हें तत्काल जमानत पर रिहा किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>इतिहास</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/536735/history-of-may-6-on-this-day-2611-convicted-terrorist</link>
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                <pubDate>Tue, 06 May 2025 05:02:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाबर के युद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[बाबर ने तुज़ुक-ए-बाबरी में अपने हालात लिखते हुए भाषा की उस कठिनाई के बारे में लिखा है, जिससे हिंदुस्तान जैसे नए देश में दो-चार होना पड़ा. वह लिखते हैं न हम यहां की बोली बोल सकते हैं और न यहां वाले हमारी भाषा जानते हैं. इसी तरह एक अन्य जगह उन्होंने लिखा है, ‘हमारे आदमियों …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/181675/baburs-war"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-03/maxresdefault.jpg" alt=""></a><br /><p>बाबर ने तुज़ुक-ए-बाबरी में अपने हालात लिखते हुए भाषा की उस कठिनाई के बारे में लिखा है, जिससे हिंदुस्तान जैसे नए देश में दो-चार होना पड़ा. वह लिखते हैं न हम यहां की बोली बोल सकते हैं और न यहां वाले हमारी भाषा जानते हैं. इसी तरह एक अन्य जगह उन्होंने लिखा है, ‘हमारे आदमियों के लिए यहां की भाषा नई है और वे इससे भड़क रहे हैं. बहरहाल, बाबर ने हिंदुस्तानी जीवन के साथ जुड़ाव पैदा करने के लिए जो तरीके अपनाए उनमें भाषा की कठिनाई पर नियंत्रण करना भी शामिल था. यहां तक कि एक समय वह आया कि उनके एक तुर्की शेर का पहला मिसरा स्थानीय भाषा के अंदाज़ में डूबा हुआ नज़र आता है ..</p>
<p><strong>“भुज का न हुआ कुच हवसे मांक ओ मोती’</strong><br />
बाबर का शासन हिंदुस्तान पर सिर्फ 4 वर्ष रहा और 1530 में उनकी मृत्यु हो गई. हुमायूं का शेरशाह के साथ मुकाबला और उनकी असमय मृत्यु ने उन्हें इतना समय नहीं दिया कि वह इस परंपरा को बढ़ाने के सामान उपलब्ध करा पाते. मगर उनके उत्तराधिकारी को जमाने ने यह अवसर अच्छी तरह उपलब्ध करा दिए. अकबर ने लंबे समय तक शासन किया. ख़ास बात यह थी कि अकबर के स्वभाव में प्रकृति ने स्थानीय परंपराओं से लगाव होने की अजीब विशेषता, योग्यता दी थी. उन्होंने अनुवाद का विभाग बनाया और संस्कृत की अहम किताबों का फ़ारसी में अनुवाद कराया. वह हिंदुस्तानी संगीत के भी रसिया थे.</p>
<p>तानसेन उनके समय के बाकमाल और बेमिसाल गायक थे. उन्होंने स्थानीय भाषा के बहुत से शायरों को प्रश्रय दिया. यही नहीं अकबर के समय में राजपूत संस्कृति शाही महल में प्रवेश कर चुकी थी. अकबर के पुत्र जहांगीर की माँ एक राजपूत राजा की पुत्री थीं. अकबर के आदेश से जहांगीर को स्थानीय भाषा की शिक्षा दी गई. जहांगीर अपने वस्त्रों और रूप की वजह से भी राजपूत लगते थे. जहांगीर ने भी नूरजहां से पहले राजपूत खानदान में विवाह किया था और जहांगीर के उत्तराधिकारी शाहजहां का जन्म भी राजपूत रानी के गर्भ से हुआ था. कहा जाता है कि जहांगीर शराब को रामरंगी कहा करते थे और यह फ़ारसी या तुर्की शब्द नहीं.</p>
<p>अकबर के समय में दफ्तर की भाषा फारसी थी, लेकिन देसी भाषाओं के साथ मेलजोल भी बढ़ गया था. आगरा में अधिकतर ब्रज भाषा की साहित्यिक परंपरा को बढ़ावा मिला था. इसलिए अकबर के प्रश्रय में जिस स्थानीय भाषा को प्रसिद्धि मिली वह ब्रज भाषा थी. ब्रज भाषा की कई साहित्यिक परंपराओं का प्रभाव उर्दू शायरी में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है. वजह से कुछ लोगों में यह भ्रम भी पैदा हो गया कि उर्दू ब्रज भाषा से निकली है. शाहजहां के समय में मुगलों की राजधानी आगरा से दिल्ली हो गई.</p>
<p>आगरा की तुलना में दिल्ली खड़ी बोली का क्षेत्र थी, इसलिए यहां की आम बोल-चाल का ठाठ ब्रज भाषा से अलग था. ऐसे में फ़ारसी के बाद जिसे सरकारी भाषा की अहमियत हासिल थी, दिल्ली में लगभग ब्रज भाषा की साहित्यिक परंपरा प्रसिद्ध थी. औरंगज़ेब के बारे में कहा जाता है कि वह कट्टर मुसलमान थे, लेकिन सांस्कृतिक मेलजोल के व्यवहार पर उनको भी नियंत्रण नहीं था.</p>
<p>औरंगज़ेब को देसी भाषा पर महारत प्राप्तह थी. एक बार राजकुमार मुहम्मद आजम ने औरंगजेब को ख़ास प्रकार के आम उपहार में भेजे और यह फरमाइश की कि उन आमों के नाम बताएं. औरंगजेब ने उन आमों के नाम सुधा रस और रसना बिलास सुझाए. दारा शिकोह के बारे में कौन नहीं जानता कि वह भक्ति-दर्शन में रुचि रखते थे. उन्होंने उपनिषद का अनुवाद फारसी में खुद किया था.</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/mohenjo-daro-the-largest-city-of-the-indus-valley-civilization/">सिंधु घाटी की सभ्यता का सबसे बड़ा नगर मोहन-जोदड़ो</a></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इतिहास</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Mar 2022 13:46:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तानसेन और कालिदास पुरस्कारों की सम्मान राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की हुई घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले साल से राष्ट्रीय तानसेन और कालिदास पुरस्कारों की सम्मान राशि दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की घोषणा की है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित ये पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रसिद्ध कलाकारों को दिये जाते हैं। चौहान ने रविवार रात को ग्वालियर में केंद्रीय …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/152185/announcement-to-increase-the-honorarium-of-tansen-and-kalidas-awards-to-rs-5-lakh"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-12/taansen.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भोपाल।</strong> मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले साल से राष्ट्रीय तानसेन और कालिदास पुरस्कारों की सम्मान राशि दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की घोषणा की है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित ये पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रसिद्ध कलाकारों को दिये जाते हैं।</p>
<p>चौहान ने रविवार रात को ग्वालियर में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर की मौजूदगी में 97 वें तानसेन समारोह को संबोधित करते हुए सम्मान निधि बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की घोषणा की। इस अवसर पर प्रसिद्ध सितार वादक पंडित कार्तिक कुमार (मुंबई) को वर्ष 2013 और प्रसिद्ध घटम वादक पं. विक्कू विनायकरम को वर्ष 2014 के राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से पुरस्कृत किया।</p>
<p>पुरस्कार के तहत दो लाख रुपये नकद, प्रशस्तिपत्र और शॉल एवं श्रीफल देकर दोनों कलाकारों को सम्मानित किया गया। चौहान ने कहा कि महान संगीत मनीषी तानसेन की याद में आयोजित होने वाले तानसेन समारोह का शताब्दी समारोह वर्ष 2024 में धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जायेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने संस्कृति मंत्री को अभी से इसकी तैयारियां करने के लिये कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि तानसेन समारोह की तरह ही प्रदेश सरकार उस दौर के समकालीन संगीतकार बैजू बावरा के सम्मान में भी समारोह का आयोजन करेगी। उन्होंने संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव को समारोह के आयोजन की तिथि सहित योजना तैयार करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/obc-reservation-center-requests-court-to-withdraw-order-passed-in-mp-case/">ओबीसी आरक्षण: केंद्र ने मप्र मामले में पारित आदेश वापस लेने का न्यायालय से किया अनुरोध</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/152185/announcement-to-increase-the-honorarium-of-tansen-and-kalidas-awards-to-rs-5-lakh</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Dec 2021 17:02:36 +0530</pubDate>
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