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                <title>world trade organization - Amrit Vichar</title>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्क और डब्ल्यूटीओ नियम, जानिए...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन सहित अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है, जो अमेरिका से भेजे जाने वाले सामानों पर उच्च आयात शुल्क लगाते हैं। उन्होंने पहले ही इस्पात और एल्यूमीनियम आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है, जो 12 मार्च से लागू होगा। नई शुल्क नीति की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शुल्क के मामले में भारत ‘सबसे ऊपर है।’ चूंकि ये सभी देश वैश्विक व्यापार निकाय विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य हैं, इसलिए अमेरिका के फैसले डब्ल्यूटीओ के सिद्धांतों को चुनौती दे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/522566/know-donald-trumps-counter-duty-and-wto-rules"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-02/pm-modi1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन सहित अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है, जो अमेरिका से भेजे जाने वाले सामानों पर उच्च आयात शुल्क लगाते हैं। उन्होंने पहले ही इस्पात और एल्यूमीनियम आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है, जो 12 मार्च से लागू होगा। नई शुल्क नीति की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शुल्क के मामले में भारत ‘सबसे ऊपर है।’ चूंकि ये सभी देश वैश्विक व्यापार निकाय विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य हैं, इसलिए अमेरिका के फैसले डब्ल्यूटीओ के सिद्धांतों को चुनौती दे सकते हैं।</p>
<p><strong>सवाल- डब्ल्यूटीओ क्या है?</strong><br />जवाब- जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) एक बहुपक्षीय निकाय है जो वैश्विक व्यापार के लिए नियम बनाता है और देशों के बीच विवादों का निपटारा करता है। इसका मुख्य उद्देश्य वस्तुओं के सुचारू, पूर्वानुमानित और मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देना है। भारत और अमेरिका दोनों ही 1995 से इसके सदस्य हैं। इन देशों ने वस्तुओं, सेवाओं और बौद्धिक संपदा के व्यापार को नियंत्रित करने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए नियम और दिशा-निर्देश निर्धारित करते हैं।</p>
<p><strong>सवाल- विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत शुल्क प्रतिबद्धताएं क्या हैं? </strong><br />जवाब- विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख सिद्धांतों में से एक शुल्क बाध्यकारी है, जो वैश्विक व्यापार में पूर्वानुमान और स्थिरता सुनिश्चित करता है। बाध्य शुल्क अधिकतम शुल्क दरें हैं जो एक डब्ल्यूटीओ सदस्य अपनी रियायतों की अनुसूची के तहत प्रतिबद्ध करता है। ये प्रतिबद्धताएं कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं, जिसका अर्थ है कि कोई देश बिना पुनर्वार्ता के इस स्तर से ऊपर शुल्क नहीं लगा सकता है। लागू शुल्क वे वास्तविक शुल्क दरें हैं जो कोई देश आयात पर लगाता है। ये बाध्य दर से कम हो सकते हैं लेकिन डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन किए बिना इससे अधिक नहीं हो सकते।</p>
<p><strong>सवाल- यदि कोई देश निर्धारित शुल्कों से अधिक शुल्क लगाता है तो क्या होगा? </strong><br />जवाब- यदि कोई सदस्य देश अपनी बाध्यता से अधिक शुल्क लगाता है, तो वह जीएटीटी (टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौता) 1994 के अनुच्छेद-2 का उल्लंघन करता है। इसमें कहा गया है कि सदस्यों को अपने अनुसूचियों में सूचीबद्ध शुल्कों या प्रभारों से अधिक शुल्क नहीं लगाना चाहिए और वे कोई अन्य शुल्क या प्रभार नहीं लगा सकते हैं जो उनके अनुसूचियों में निर्दिष्ट नहीं हैं। प्रभावित देश उच्च शुल्कों के खिलाफ डब्ल्यूटीओ विवाद निपटान निकाय (डीएसबी) के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। डीएसबी नियमों के तहत विवाद को हल करने का पहला कदम द्विपक्षीय परामर्श है। यदि परामर्श विफल हो जाता है, तो शिकायतकर्ता देश को डब्ल्यूटीओ से मंजूरी मिलने के बाद जवाबी शुल्क या अन्य व्यापार प्रतिवाद लागू करने की अनुमति दी जा सकती है।</p>
<p><strong>सवाल- क्या डब्ल्यूटीओ का कोई सदस्य अपनी बाध्य शुल्क दरें बढ़ा सकता है? </strong><br />जवाब- हां। लेकिन केवल जीएटीटी के अनुच्छेद-28 (अनुसूचियों में संशोधन) के तहत प्रभावित देशों के साथ बातचीत करके, जहां इसे प्रतिपूरक रियायतें देनी होंगी या विशिष्ट मामलों में सुरक्षा उपायों या राष्ट्रीय सुरक्षा अपवादों जैसे आपातकालीन प्रावधानों को लागू करके। ट्रंप के पिछले शासन के दौरान अमेरिका ने अपने व्यापार अधिनियम की धारा 232 के तहत ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के आधार पर इस्पात पर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम उत्पादों पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया था। इसने घरेलू इस्पात उत्पादन क्षमता के लिए खतरों का हवाला दिया था। हालांकि, डब्ल्यूटीओ ने कई मामलों में इस उपाय के खिलाफ फैसला सुनाया है। भारत ने भी 28 अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी शुल्क लगाया था। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि डब्ल्यूटीओ विवाद समिति ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अपवादों का मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और इन्हें युद्ध या आपात स्थितियों के दौरान वास्तविक सुरक्षा चिंताओं से जोड़ा जाना चाहिए।</p>
<p><strong>सवाल- अमेरिका ने जवाब में क्या किया?</strong><br />जवाब- जीटीआरआई के अनुसार, अमेरिका ने यह तर्क देते हुए डब्ल्यूटीओ के फैसले का पालन करने से इनकार कर दिया कि उसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को निर्धारित करने का संप्रभु अधिकार है। इसने डब्ल्यूटीओ अपीलीय निकाय को भी अवरुद्ध कर दिया है, जिससे अपील समाधान में बाधा आ रही है।</p>
<p><strong>सवाल- भारत जैसे देशों में आयात शुल्क अधिक क्यों है, जबकि अमेरिका जैसे विकसित देशों में शुल्क कम क्यों है? </strong><br />जवाब- भारत जैसे विकासशील देश मुख्य रूप से घरेलू उद्योगों की रक्षा करने, राजस्व उत्पन्न करने और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए उच्च आयात शुल्क बनाए रखते हैं। ये देश अक्सर अपने उभरते क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और व्यापार असंतुलन का प्रबंधन करने के लिए शुल्क पर निर्भर रहते हैं। दूसरी ओर, अमेरिका जैसे विकसित देशों में शुल्क कम हैं, क्योंकि उनके उद्योग पहले से ही वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं, और वे खुले बाजारों से लाभान्वित होते हैं, जो उनके व्यवसायों को न्यूनतम व्यापार बाधाओं के साथ विदेशी उपभोक्ताओं तक पहुंचने की अनुमति देते हैं। जीटीआरआई के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से जब 1995 में डब्ल्यूटीओ की स्थापना हुई थी, तब विकसित राष्ट्र बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के व्यापार-संबंधित पहलुओं (ट्रिप्स), सेवा व्यापार उदारीकरण, तथा कृषि नियमों पर प्रतिबद्धताओं के बदले में विकासशील देशों को उच्च शुल्क बनाए रखने देने पर सहमत हुए थे, जो मुख्य रूप से धनी देशों के पक्ष में थे।</p>
<p><strong>सवाल- विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत विशेष एवं विभेदकारी व्यवहार क्या है? </strong><br />जवाब- डब्ल्यूटीओ के समझौतों में विशेष प्रावधान हैं जो विकासशील देशों को विशेष अधिकार देते हैं और अन्य सदस्यों को उनके साथ अधिक अनुकूल व्यवहार करने की अनुमति देते हैं। उदाहरण के लिए, भारत जैसे विकासशील देश अपने शुल्क और निर्यात सब्सिडी को कम करने के लिए अधिक अमीर देशों की तुलना में अधिक समय ले सकते हैं।</p>
<p><strong>सवाल- क्या भारत को इस्पात और एल्युमीनियम पर 25 प्रतिशत शुल्क तथा डब्ल्यूटीओ में जवाबी शुल्क की धमकी के विरुद्ध लड़ने का अधिकार है? </strong><br />जवाब- क्लैरस लॉ एसोसिएट्स की साझेदार आर.वी. अनुराधा के अनुसार, हां।</p>
<p><strong>सवाल- क्या भारत इस्पात और एल्युमीनियम पर शुल्क के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में विवाद शुरू करेगा? </strong><br />जवाब- अनुराधा ने कहा कि भारत और अमेरिकी सरकारों के बीच व्यापार समझौते के लिए चल रही वर्तमान बातचीत को देखते हुए, व्यावहारिक रूप से यह ‘असंभव’ है कि भारत विश्व व्यापार संगठन में लंबी लड़ाई चाहेगा। उन्होंने कहा, “लेकिन मेरी सलाह यह होगी कि द्विपक्षीय समझौते से जादू की उम्मीद न करें और इस बात पर दृढ़ रहें कि हमारे लिए वास्तव में क्या फायदेमंद होगा। कम से कम, द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के समापन तक, बढ़े हुए इस्पात और एल्युमीनियम शुल्क और जवाबी शुल्क को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। अगर हमें यह नहीं मिलता है, तो हमें जवाबी शुल्क पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है, और डब्ल्यूटीओ विवाद का विकल्प भी खुला रखना चाहिए।</p>
<p><strong>सवाल- भारत को क्या करना चाहिए?</strong><br />जवाब- अनुराधा ने सुझाव दिया कि भारत को डब्ल्यूटीओ के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर संगठन की निरंतर प्रासंगिकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। डब्ल्यूटीओ विवाद समाधान तंत्र के अभाव के कारण लगातार संकटग्रस्त होता जा रहा है। उन्होंने कहा, प्रभावी नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं है, जहां हमारे पास विकासशील देशों के साझा हितों की ताकत है। द्विपक्षीय सौदे केवल शक्ति प्रदर्शन को बढ़ाएंगे।</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढे़ं : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/522555/donald-trump-signed-an-executive-order-to-increase-the-production">डोनाल्ड ट्रंप ने जीवाश्म ईंधन के उत्पादन में वृद्धि को लेकर कार्यकारी आदेश पर किए हस्ताक्षर</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Feb 2025 15:54:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
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                <title>डब्ल्यूटीओ नीतियां </title>
                                    <description><![CDATA[<p>किसानों के निशाने पर विश्व व्यापार संगठन भी है। उनकी मांग है कि सरकार भारत को विश्व व्यापार संगठन और मुक्त व्यापार समझौतों से बाहर निकाले। सोमवार को पंजाब व हरियाणा के किसानों ने राजमार्गों के किनारे कई स्थानों पर ट्रैक्टर खड़े करके प्रदर्शन किया। </p>
<p>यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे किसानों ने डब्ल्यूटीओ की नीतियों की आलोचना की और उन्हें ‘किसान विरोधी’ बताया। उन्होंने दावा किया कि डब्ल्यूटीओ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/446526/wto-policies"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-02/डिचो.jpg" alt=""></a><br /><p>किसानों के निशाने पर विश्व व्यापार संगठन भी है। उनकी मांग है कि सरकार भारत को विश्व व्यापार संगठन और मुक्त व्यापार समझौतों से बाहर निकाले। सोमवार को पंजाब व हरियाणा के किसानों ने राजमार्गों के किनारे कई स्थानों पर ट्रैक्टर खड़े करके प्रदर्शन किया। </p>
<p>यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे किसानों ने डब्ल्यूटीओ की नीतियों की आलोचना की और उन्हें ‘किसान विरोधी’ बताया। उन्होंने दावा किया कि डब्ल्यूटीओ की नीतियों के कारण सरकार सभी फसलों पर एमएसपी नहीं दे रही है। </p>
<p>उधर भारत ने डब्ल्यूटीओ के सदस्यों से लंबे समय से लंबित सार्वजनिक खाद्य भंडारण मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह सीधे तौर पर वर्ष 2030 तक ‘शून्य भुखमरी’ के सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने से संबंधित है। खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक भंडारण कार्यक्रम एक नीति माध्यम है जिसके तहत सरकार एमएसपी पर किसानों से चावल और गेहूं जैसी फसलें खरीदती है तथा खाद्यान्न का भंडारण और गरीबों को वितरित करती है। </p>
<p>दरअसल वर्ष 1994 से विश्व व्यापार समझौता कृषि क्षेत्र में लागू हुआ। समझौते का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उत्पाद एवं व्यापार का निजीकरण करना था। डब्ल्यूटीओ का नियम कहता है कि विश्व व्यापार संगठन से जुड़े सदस्य देशों को अपने कृषि उत्पाद को दी जाने वाली घरेलू मदद की मात्रा को सीमित करना चाहिए। जबकि डब्ल्यूटीओ के नियम किसानों की मांग से विपरीत हैं। </p>
<p>गौरतलब है विकसित राष्ट्रों ने अपने किसानों को भारी सहायता जारी रखी। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति किसान 300 डॉलर की सब्सिडी दी जाती है जबकि अमेरिका में यही सब्सिडी प्रति किसान 40,000 डॉलर की मिलती है। इससे विकसित देशों के किसानों की व्यक्तिगत उत्पादन लागत कम हुई और बाजारों में कम कीमत पर अपने उत्पादों को बेचकर भी वे मुनाफे में रहे वहीं हमारे किसान अपनी अत्यधिक कृषि लागत और कम बाजार भाव के कारण ऋणग्रस्त होते गए। </p>
<p>किसानों के आंदोलन करने का  उद्देश्य ही यही है कि उन्हें एमएसपी, फसलों की खरीद और पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को लेकर कानूनी गारंटी दी जाए। सवाल है कि विश्व व्यापार समझौतों के तहत सरकारी खरीद तथा समर्थन मूल्य को कम कर दिए जाने से किसान बेबस और लाचार हो गए। क्या डब्ल्यूटीओ का कृषि समझौता खाद्य सुरक्षा नीति के विरुद्ध होने के साथ ही देश की नीति-निर्धारण की संप्रभुता में हस्तक्षेप भी है।</p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/446270/ethics-of-ai">एआई की नैतिकता</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Feb 2024 01:50:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Moazzam Beg]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-ब्राजील ने डब्ल्यूटीओ में चीनी से संबंधित विवाद सुलझाने के लिए शुरू की बतचीत </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत और ब्राजील ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चीनी से संबंधित व्यापार विवाद को पारस्परिक रूप से सुलझाने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इस विवाद के समाधान के तहत दक्षिण अमेरिकी देश भारत के साथ एथनॉल उत्पादन प्रौद्योगिकी साझा कर सकता है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। ब्राजील दुनिया में गन्ना और एथनॉल का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रौद्योगिकी में भी अग्रणी है। अधिकारी ने कहा, ‘‘विवाद को सुलझाने के हमारे प्रयासों के तहत कुछ दौर की बातचीत हुई है। हमने यहां अंतर-मंत्रालयी बैठकें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/403971/india-brazil-start-talks-in-wto-to-resolve-sugar-related-dispute"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-09/भारत-ब्राजील.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत और ब्राजील ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चीनी से संबंधित व्यापार विवाद को पारस्परिक रूप से सुलझाने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इस विवाद के समाधान के तहत दक्षिण अमेरिकी देश भारत के साथ एथनॉल उत्पादन प्रौद्योगिकी साझा कर सकता है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। ब्राजील दुनिया में गन्ना और एथनॉल का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रौद्योगिकी में भी अग्रणी है। अधिकारी ने कहा, ‘‘विवाद को सुलझाने के हमारे प्रयासों के तहत कुछ दौर की बातचीत हुई है। हमने यहां अंतर-मंत्रालयी बैठकें भी की हैं। </p>
<p>ब्राजील ने कहा है कि वह हमारे साथ एथनॉल (उत्पादन) प्रौद्योगिकी साझा करेगा। यह एक सकारात्मक बात है।’’ एथनॉल का इस्तेमाल वाहन ईंधन में मिलाने के लिए किया जाता है। गन्ने के साथ-साथ टूटे हुए चावल और अन्य कृषि उपज से निकाले गए एथनॉल के उपयोग से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल उपभोक्ता व आयातक देश को आयात पर अपनी निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी। भारत फिलहाल अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत आयात करता है। साथ ही एथनॉल कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाता है। भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है।</p>
<p>जिनेवा स्थित बहुपक्षीय निकाय में विवाद को सुलझाने के लिए भारत को पारस्परिक रूप से सहमत समाधान (एमएएस) के तहत अपनी ओर से भी कुछ पेशकश करनी होगी। हाल ही में भारत और अमेरिका ने छह व्यापार विवादों को निपटाया है और सातवें मामले को भी समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की है। </p>
<p>इस समाधान के तहत जहां भारत ने सेब और अखरोट जैसे आठ अमेरिकी उत्पादों पर ‘जवाबी’ शुल्क हटा दिया है, वहीं अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगाए बिना भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों को बाजार पहुंच प्रदान कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि भारत डब्ल्यूटीओ में चीनी विवाद में अन्य शिकायतों के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपना रहा है। वर्ष 2019 में ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और ग्वाटेमाला ने भारत को डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र में घसीटा था और आरोप लगाया था भारत द्वारा किसानों को चीनी सब्सिडी वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं है। 14 दिसंबर 2021 को डब्ल्यूटीओ विवाद निपटान पैनल ने फैसला सुनाया कि चीनी क्षेत्र को भारत के समर्थन उपाय वैश्विक व्यापार मानदंडों के अनुरूप नहीं हैं। जनवरी, 2022 में भारत ने डब्ल्यूटीओ के अपीलीय निकाय में पैनल के फैसले के खिलाफ अपील की। अपीलीय निकाय को विवादों के खिलाफ फैसले पारित करने का अंतिम अधिकार है। </p>
<p>हालांकि, अपीलीय निकाय के सदस्यों की नियुक्तियों पर देशों में मतभेद के कारण यह कार्य नहीं कर रहा है। ब्राज़ील दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। डब्ल्यूटीओ के सदस्यों... ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और ग्वाटेमाला ने शिकायत की थी कि गन्ना उत्पादकों को भारत के समर्थन उपाय गन्ना उत्पादन के कुल मूल्य के 10 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर से अधिक हैं। यह कृषि पर डब्ल्यूटीओ समझौते के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा इन देशों ने भारत की कथित निर्यात सब्सिडी पर भी चिंता जताई है। डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुसार, विश्व व्यापार संगठन के किसी भी सदस्य को यदि लगता है कि कोई व्यापार उपाय डब्ल्यूटीओ नियमों के खिलाफ है, तो वह जिनेवा के बहुपक्षीय निकाय में मामला दायर कर सकता है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें : <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/403952/north-korean-leader-kim-jong-un-discussed-arms-cooperation-with-russian-defense-minister-sergei-shoigu">उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong Un ने रूस के रक्षा मंत्री Sergei Shoigu के साथ हथियार सहयोग पर की चर्चा </a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Sep 2023 14:06:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डब्ल्यूटीओ को खुले मन से कृषि सब्सिडी मुद्दे पर विचार करने की जरूरत : निर्मला सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंचियोन (दक्षिण कोरिया)।</strong>  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को खुले मन से खाद्य सब्सिडी के मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है। इसका कारण यह है कि कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं में खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को प्रभावित करता है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के ‘एशिया को पटरी पर लाने का समर्थन करने वाली नीतियां’ विषय पर सेमिनार में सीतारमण ने कहा कि जितनी जल्दी डब्ल्यूटीओ इसका समाधान निकालेगा, दुनिया के लिये उतना अच्छा होगा। </p>
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<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">FM Smt. <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a> also called for WTO to renew focus on</p></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/365892/wto-needs-to-look-at-agriculture-subsidy-issue-with-an"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-05/निर्मला-सीतारमण.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंचियोन (दक्षिण कोरिया)।</strong> वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को खुले मन से खाद्य सब्सिडी के मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है। इसका कारण यह है कि कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं में खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को प्रभावित करता है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के ‘एशिया को पटरी पर लाने का समर्थन करने वाली नीतियां’ विषय पर सेमिनार में सीतारमण ने कहा कि जितनी जल्दी डब्ल्यूटीओ इसका समाधान निकालेगा, दुनिया के लिये उतना अच्छा होगा। </p>
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<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">FM Smt. <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a> also called for WTO to renew focus on trade in agricultural products,recognising that subsidies will be essential for <a href="https://twitter.com/hashtag/DevelopingEconomies?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#DevelopingEconomies</a> as they attempt to recover from the effects of the <a href="https://twitter.com/hashtag/COVID19?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#COVID19</a> pandemic. <a href="https://twitter.com/IndiainROK?ref_src=twsrc%5Etfw">@IndiainROK</a><br />(9/11) <a href="https://t.co/jkDTOcnMgz">pic.twitter.com/jkDTOcnMgz</a></p>
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) <a href="https://twitter.com/FinMinIndia/status/1653700772599853057?ref_src=twsrc%5Etfw">May 3, 2023</a></blockquote>

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<p>उन्होंने कहा, विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के बाद से कृषि उत्पादों के निर्यात के संबंध में एक शिकायत रही है। यह शिकायत आमतौर पर व्यापार में वैश्विक दक्षिण और उभरते बाजारों की आवाज को विकसित देशों के बराबर नहीं सुने जाने को लेकर है। वैश्विक दक्षिण से आशय अपेक्षाकृत कम विकसित देशों से है। इसमें एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में कृषि और गरीब किसानों के लिये सब्सिडी को ध्यान नहीं दिया जाता था। कोविड और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में खाद्य और उर्वरक सुरक्षा महत्वपूर्ण हो गई है। वित्त मंत्री ने कहा, हम सभी को खुले दिमाग से डब्ल्यूटीओ में फिर से खाद्य और उर्वरक सुरक्षा के बारे में बात करनी होगी। </p>
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<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Union Finance Minister Smt. <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a>, Governor for India in <a href="https://twitter.com/ADB_HQ?ref_src=twsrc%5Etfw">@ADB_HQ</a>, participated as a panelist in the Governors' Seminar on the theme 'Policies to Support Asia's Rebound', held as part of 56th <a href="https://twitter.com/hashtag/ADBAnnualMeeting?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#ADBAnnualMeeting</a>, in Incheon, South Korea, today. <a href="https://twitter.com/IndiainROK?ref_src=twsrc%5Etfw">@IndiainROK</a><br />(1/11) <a href="https://t.co/CZafyuTSpT">pic.twitter.com/CZafyuTSpT</a></p>
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) <a href="https://twitter.com/FinMinIndia/status/1653700687933607940?ref_src=twsrc%5Etfw">May 3, 2023</a></blockquote>

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<p>सीतारमण ने कहा, विकासशील देशों की तुलना में विकसित देशों में खाद्य सुरक्षा बेहतर है। व्यापार समझौते एकतरफा हुए हैं, जिनका समाधान खोजना होगा। वैश्विक व्यापार नियमों के तहत डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों का खाद्य सब्सिडी बिल 1986-88 के संदर्भ मूल्य के आधार पर उत्पादन मूल्य का 10 प्रतिशत की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Finance Minister Smt. <a href="https://twitter.com/nsitharaman?ref_src=twsrc%5Etfw">@nsitharaman</a> highlighted that India's focus on <a href="https://twitter.com/hashtag/MSMEs?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MSMEs</a> and ensuring <a href="https://twitter.com/hashtag/FoodSecurity?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#FoodSecurity</a> has been instrumental in Indian economy's successful recovery out of the <a href="https://twitter.com/hashtag/COVID19?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#COVID19</a> Pandemic. <a href="https://twitter.com/IndiainROK?ref_src=twsrc%5Etfw">@IndiainROK</a><br />(4/11) <a href="https://t.co/dMTIVixqrJ">pic.twitter.com/dMTIVixqrJ</a></p>
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) <a href="https://twitter.com/FinMinIndia/status/1653700736872771585?ref_src=twsrc%5Etfw">May 3, 2023</a></blockquote>

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<p>भारत ने स्थायी समधान के तौर पर खाद्य सब्सिडी सीमा के आकलन के फॉर्मूले में संशोधन जैसे उपाय करने को कहा है। साथ ही 2013 के बाद शुरू कार्यक्रमों को शांति उपबंध के तहत शामिल करने को कहा है। डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश इंडोनेशिया के बाली में दिसंबर, 2013 में हुई बैठक में अंतरिम उपाय के तहत एक व्यवस्था बनाने पर सहमत हुए थे, जिसे शांति उपबंध कहा जाता है। साथ ही मामले के स्थायी समाधान को लेकर बातचीत की प्रतिबद्धता जताई थी। शांति उपबंध के तहत डब्ल्यूटीओ सदस्य देश विकासशील देशों की तरफ से सब्सिडी सीमा के उल्लंघन को चुनौती नहीं देने पर सहमत हुए। यह उपबंध मामले के स्थायी समाधान तक बना रहेगा। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें :  <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/365819/another-woman-who-accused-donald-trump-of-sexual-assault-testifies">America : एक और महिला ने डोनाल्ड ट्रंप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप, ज्यूरी के सामने दी गवाही</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 May 2023 16:32:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत चाहता है कि डब्ल्यूटीओ और प्रगतिशील बने, भिन्न राय को महत्व दे : सीतारमण </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन। </strong>भारत की ऐसी आकांक्षा है कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और प्रगतिशील बने तथा भिन्न राय रखने वाले देशों को भी महत्व दे। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि जो देश अलग राय रखते हैं, डब्ल्यूटीओ को उन्हें अपनी बात रखने के पूरे मौके देना चाहिए। सीतारमण ने अमेरिका के विचार समूह ‘पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स’ में कहा, मैं चाहती हूं कि डब्ल्यूटीओ और अधिक प्रगतिशील बने, सभी देशों की बात सुने और सभी के प्रति निष्पक्ष रहे। </p>
<p>उन्होंने आगे कहा, वर्ष 2014 से 2017 के बीच भारत की वाणिज्य मंत्री रहने के दौरान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/359484/india-wants-wto-to-be-more-progressive-give-importance-to"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/union-finance-minister.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन। </strong>भारत की ऐसी आकांक्षा है कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और प्रगतिशील बने तथा भिन्न राय रखने वाले देशों को भी महत्व दे। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि जो देश अलग राय रखते हैं, डब्ल्यूटीओ को उन्हें अपनी बात रखने के पूरे मौके देना चाहिए। सीतारमण ने अमेरिका के विचार समूह ‘पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स’ में कहा, मैं चाहती हूं कि डब्ल्यूटीओ और अधिक प्रगतिशील बने, सभी देशों की बात सुने और सभी के प्रति निष्पक्ष रहे। </p>
<p>उन्होंने आगे कहा, वर्ष 2014 से 2017 के बीच भारत की वाणिज्य मंत्री रहने के दौरान मैंने डब्ल्यूटीओ के साथ कुछ वक्त बिताया। इससे उन देशों की राय सुनने का अधिक मौका मिला जो कुछ अलग कहना चाहते थे। वित्त मंत्री ने कहा, अमेरिका की वाणिज्य मंत्री कैथरीन तई के शब्दों को याद करना उपयोगी होगा, जो उन्होंने हाल में कहे थे। परंपरागत व्यापार के तौर-तरीके वास्तव में क्या हैं, बाजार का उदारीकरण सही मायनों में क्या है? शुल्क में कटौती के लिहाज से इसका मतलब क्या होगा?</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, यह वह समय है जब देश इस बात पर विचार कर रहे हैं कि बाजार का उदारीकरण किस हद तक होना चाहिए। अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर लागत के लिहाज से इसके दुष्प्रभाव पड़े हैं और अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने भी ठीक यही कहा था। जो उन्होंने महसूस किया, वही मैंने 2014 और 2015 में महसूस किया था। हालांकि मेरी बात को वैश्विक मीडिया में यह जगह नहीं मिली थी। कई कम विकसित देश जिन्हें वैश्विक दक्षिण देश (लातिन अमेरिका, अफ्रीका, एशिया और ओशेनिया) कहा जाता है, वे भी यही मानते हैं।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा, यह वास्तव में क्या है? उदारीकरण की हद क्या है? शुल्क कटौती कितनी होनी चाहिए? भारत कम विकसित देशों यानी 'वैश्विक दक्षिण' के लिए यह कर रहा है। भारत की सबसे कम विकसित देशों के लिए कोटा मुक्त, शुल्क मुक्त व्यापार नीति है। इसलिए ये देश जो आकांक्षी हैं लेकिन कम आय वर्ग वाले हैं वे भारत को इन पाबंदियों के बिना निर्यात कर सकते हैं।</p>
<p><strong>भारत का ध्यान अब लोगों को कुशल बनाने, डिजिटलीकरण पर है : सीतारमण </strong><br />वॉशिंगटन। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के सारे लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के अपने लक्ष्य को भारत ने लगभग पा लिया है और अब ध्यान उन्हें कुशल बनाने और डिजिटलीकरण पर है जिससे जीवनयापन में सुगमता तथा पारदर्शिता आ सके। सीतारमण ने अमेरिका के विचार समूह ‘पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स’ में कहा कि सरकार गरीब लोगों को मूलभूत सुविधाएं देकर सशक्त बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘‘बुनियादी सुविधाएं देने के लिहाज से हमने अपने लक्ष्य को लगभग प्राप्त कर लिया है।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि भारत सरकार देश के गरीबों को अनेक सुविधाएं देना चाहती हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि उन्हें रहने के लिए पक्के घर दिए जाएं, पाइप के जरिए पेयजल उन तक पहुंचे, बिजली हो, अच्छी सड़कें हो...सिर्फ गांव तक ही नहीं बल्कि गांवों की गलियों तक भी अच्छी सड़कें हों जो नजदीकी राजमार्ग से जोड़ी जा सकें, अच्छी परिवहन सुविधा तक पहुंच हो, वित्तीय समावेशन हो जिससे घर के प्रत्येक सदस्य का बैंक में खाता खुले और उन्हें हर लाभ सीधे उनके खाते में मिल सके।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इस लिहाज से हम परिपूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि अब ध्यान लोगों को कुशल बनाने पर है। उन्होंने कहा, ‘‘अब हम लोगों को कुशल बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। कौशल केंद्र अब देशभर में हैं। कौशल का स्तर हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। इससे व्यापारों और निजी क्षेत्र के उद्यमियों को भी जोड़ा जा रहा है ताकि जो लोग प्रशिक्षण पा रहे हैं और व्यवसाय जिस तरह के प्रशिक्षित लोग चाहते हैं उनके बीच संपर्क बन सके।’’ सीतारमण ने कहा कि भारत का डिजिटलीकरण का कार्यक्रम भी तेजी से चल रहा है, इसके दायरे में स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय लेनदेन आ गए हैं। अब हम अन्य क्षेत्रों का डिजिटलीकरण भी करना चाहते हैं जिससे जीवनयापन में आसानी हो और अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ सके।</p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन के लिए कोष उपलब्ध नहीं कराया गया: सीतारमण </strong><br />वाशिंगटन। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जलवायु उद्देश्यों हासिल करने के लिए धन उपलब्ध नहीं कराने को लेकर पश्चिम देशों की खिंचाई करते हुए कहा कि भारत स्व-वित्त के जरिए जलवायु परिवर्तन की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी लड़ाई में भारत बेहद महत्वाकांक्षी तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>सीतारमण ने सोमवार को कहा,  हमने सीओपी21 और फिर सीओपी26 में जो प्रतिबद्धताएं की उस पर तय मापदंडों के तहत काम कर रहे हैं, जिन पर यूएनएफसीसीसी (जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन) में सभी सहमत हुए थे। इसलिए हम राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रतिबद्धताओं के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। मुझे यह बताते हुए काफी खुशी हो रही है कि भारत ने पेरिस में की गई अपनी सीओपी21 प्रतिबद्धताओं को बड़े पैमाने पर अपने स्वयं के धन से पूरा किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा,  कोष (जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए) है, लेकिन उपलब्ध नहीं है। वादा किया गया, लेकिन इसका वितरण नहीं किया गया। हम जिस एक अरब की बात करते आए हैं, उस पर कुछ नहीं हुआ। यह कुछ ऐसा हो सकता है जिसके बारे में कई देश बोलना चाहेंगे और मैं इसे अपनी सूची में रखूंगी। सीतारमण ने कहा कि मौजूदा चिंता यह है कि प्रति व्यक्ति उत्सर्जन क्या है जिसके बारे में बात की जा रही है, जो वास्तव में कुछ देशों को नुकसान पहुंचा रहा है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ये भी पढ़ें :  <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/359467/those-who-blame-india-on-minority-issues-do-not-know">VIDEO : 'मुस्लिम अगर भारत में खुश नहीं तो Pakistan से ज्यादा आबादी क्यों...? US में निर्मला सीतारमण ने दुनिया को दिखाया आईना</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Apr 2023 11:58:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhawna]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्यापार विकृत करने के तरीकों के लिए भारत को डब्ल्यूटीओ में जिम्मेदार ठहराएं बाइडेन : अमेरिकी सांसद</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से आग्रह किया है कि वह ‘‘व्यापार को विकृत करने वाले भारत के खतरनाक तरीकों’’ को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूएचओ) में उसके साथ विचार-विमर्श का एक औपचारिक अनुरोध दाखिल करें। बाइडेन को लिखे पत्र में 12 सांसदों ने कहा कि विश्व व्यापार …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/242047/biden-to-hold-india-accountable-at-wto-for-ways-of-distorting-trade"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/joe-biden.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से आग्रह किया है कि वह ‘‘व्यापार को विकृत करने वाले भारत के खतरनाक तरीकों’’ को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूएचओ) में उसके साथ विचार-विमर्श का एक औपचारिक अनुरोध दाखिल करें। बाइडेन को लिखे पत्र में 12 सांसदों ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के वर्तमान नियम सरकारों को वस्तु उत्पादन के मूल्य के 10 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की अनुमति देते हैं, लेकिन भारत सरकार चावल और गेहूं सहित कई वस्तुओं के उत्पादन के आधे से अधिक मूल्य पर सब्सिडी देना जारी रखे हुए है।</p>
<p>सांसदों ने पत्र में आरोप लगाया है कि भारत की ओर से ‘‘नियमों का पालन नहीं किए जाने’’ और बाइडन प्रशासन की ओर से ‘‘प्रवर्तन की कमी’’ ने चावल और गेहूं की कीमतों एवं उत्पादन को कम करके और अमेरिकी उत्पादकों को अनुपातहीन नुकसान की स्थिति में डालकर वैश्विक कृषि उत्पादन और व्यापार माध्यमों को नया रूप दिया है। पत्र में कहा गया है, ‘‘भारत के ये तरीके वैश्विक स्तर पर खतरनाक रूप से व्यापार को विकृत कर रहे हैं और अमेरिकी किसानों और पशुपालकों को प्रभावित कर रहे हैं।’’ पत्र सांसद ट्रेसी मान और रिक क्रॉफर्ड की अगुवाई में लिखा गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रशासन से डब्ल्यूटीओ में भारत के साथ विचार-विमर्श के लिए औपचारिक अनुरोध करने और अन्य डब्ल्यूटीओ सदस्यों के ऐसे घरेलू समर्थन कार्यक्रमों की निगरानी जारी रखने का आग्रह करते हैं जो व्यापार के निष्पक्ष तरीकों को नुकसान पहुंचाते हैं।’’ भारत ने डब्ल्यूटीओ में अपने रुख का बचाव किया है। दुनिया भर के कई देशों और संगठनों ने अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारत के अडिग रुख की सराहना की है।</p>
<p><strong>गर्भपात के लिए यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा करेगी अमेरिकी सरकार</strong><br />
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि संघीय सरकार गर्भपात के लिए यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। बीबीसी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। बाइडेन ने यह घोषणा गत जून में लाखों अमेरिकी महिलाओं द्वारा गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को खोने के बाद की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने डेमोक्रेटिक प्रांतों के गवर्नर्स के साथ आभासी बैठक को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि कुछ प्रांत उन महिलाओं को गिरफ्तार करने का प्रयास करेंगे, जो गर्भपात के लिए दूसरे प्रांतों में गयी है। उन्होंने जोर दिया कि संघीय सरकार ऐसी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 13:01:19 +0530</pubDate>
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                <title>भारत ने कोविड पैकेज पर विचार के लिए डब्ल्यूटीओ की आपात बैठक बुलाने की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारत ने दुनिया के विभिन्न देशें में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के प्रस्तावित पैकेज पर विचार के लिए इसी महीने जिनेवा में डब्ल्यूटीओ की आम परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। इस पैकेज में पेटेंट से छूट का प्रस्ताव भी शामिल है। …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/155297/india-sought-to-convene-an-emergency-meeting-of-the-wto-to-consider-the-covid-package"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-01/wto1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत ने दुनिया के विभिन्न देशें में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के प्रस्तावित पैकेज पर विचार के लिए इसी महीने जिनेवा में डब्ल्यूटीओ की आम परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। इस पैकेज में पेटेंट से छूट का प्रस्ताव भी शामिल है।</p>
<p>डब्ल्यूटीओ की आम परिषद संगठन का निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय है। संगठन के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने को लेकर इसकी बैठक नियमित तौर पर होती रहती है। इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि (राजदूत या उसके समकक्ष) होते हैं और इसके पास दो साल पर होने वाले मंत्री स्तरीय सम्मेलन की तरफ से काम करने का अधिकार है।</p>
<p>भारत ने महामारी से निपटने में मदद के लिये बौद्धिक संपदा अधिकार से संबंधित व्यापार पहलुओं (ट्रिप्स) पर कोई प्रगति नहीं होने को लेकर नाखुशी जताते हुए इस प्रस्ताव को डब्ल्यूटीओ के प्रस्तावित पैकेज में शामिल करने का आह्वान किया है। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अक्टूबर, 2020 में पहला प्रस्ताव देते हुए कहा था कि कोविड-19 महामारी की रोकथाम और इलाज में मदद को लेकर सभी डब्ल्यूटीओ सदस्यों को ट्रिप्स समझौते के कुछ प्रावधानों के क्रियान्वयन से छूट मिलनी चाहिए।</p>
<p>इस साल मई में संशोधित प्रस्ताव दिया गया। बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार पहलुओं पर करार जनवरी, 1995 में लागू हुआ था। यह बौद्धिक संपदा अधिकार कॉपीराइट, औद्योगिक डिजाइन, पेटेंट और अघोषित सूचना या व्यापार से संबंधित गोपनीय सूचना के संरक्षण से संबंधित बहुपक्षीय समझौता है।</p>
<p>एक अधिकारी ने कहा कि हमने कोविड-19 महामारी से निपटने को लेकर पेटेंट में छूट समेत डब्ल्यूटीओ के पैकेज पर विचार को लेकर आम परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। डब्ल्यूटीओ यह बैठक 10 जनवरी से शुरू कर सकता है। हमने तुरंत बैठक बुलाने का सुझाव दिया है।</p>
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<p class="post-title"><a href="https://amritvichar.com/after-the-charge-sheet-of-lakhimpur-kheri-case-priyanka-gandhi-targeted-pm-modi-saying-he-is-on-the-post-of-protector-but-standing-with-the-eater/">लखीमपुर खीरी मामले की चार्जशीट के बाद प्रियंका गांधी ने PM मोदी पर साधा निशाना, कहा- वे रक्षक के पद पर हैं, लेकिन भक्षक के साथ खड़े हैं</a></p>
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                <pubDate>Mon, 03 Jan 2022 15:43:25 +0530</pubDate>
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