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                <title>NCLT - Amrit Vichar</title>
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                <description>NCLT RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रेरा ने की लोगों से अपील : आईआरपी के माध्यम से दाखिल करें दावे, कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में 129 प्रोजेक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> जनवरी 2024 से अब तक 14 रियल एस्टेट कंपनियों के कुल 129 प्रोजेक्ट राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में स्वीकार किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 97 प्रोजेक्ट अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के हैं। सभी प्रोजेक्ट की सूची रेरा की वेबसाइट पर उपलब्ध है।</p>
<p>दिवाला प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यह प्रोजेक्ट अब एनसीएलटी के विशेष अधिकार क्षेत्र में हैं। इन प्रोजेक्ट में फंसे घर खरीदारों को उप्र रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने फौरन अपने दावे संबंधित इन्सॉल्वेंसी रेजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स (आईआरपी) के माध्यम से जल्द दाखिल करने की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/562246/rera-appeals-to-people-to-file-claims-through-irp--129-projects-in-corporate-insolvency-resolution-process"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/यूपी-रेरा.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार :</strong> जनवरी 2024 से अब तक 14 रियल एस्टेट कंपनियों के कुल 129 प्रोजेक्ट राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में स्वीकार किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 97 प्रोजेक्ट अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के हैं। सभी प्रोजेक्ट की सूची रेरा की वेबसाइट पर उपलब्ध है।</p>
<p>दिवाला प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यह प्रोजेक्ट अब एनसीएलटी के विशेष अधिकार क्षेत्र में हैं। इन प्रोजेक्ट में फंसे घर खरीदारों को उप्र रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने फौरन अपने दावे संबंधित इन्सॉल्वेंसी रेजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स (आईआरपी) के माध्यम से जल्द दाखिल करने की अपील की है। एनसीएलटी ने प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए आईआरपी नियुक्त किया है। इनके माध्यम से खरीदार अपना दावा निर्धारित प्रपत्र जमा करके दाखिल करें। रेरा ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रोजेक्ट के सीआईआरपी में प्रवेश करते ही दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की धारा 14 के तहत मोरटोरियम लागू हो जाता है। मोरटोरियम के दौरान सभी कानूनी, नियामकीय और रिकवरी से जुड़ी कार्यवाही स्थगित हो जाती हैं। रेरा किसी शिकायत, सुनवाई या प्रवर्तन आदेश को आगे नहीं बढ़ा सकता और खरीदारों के सभी अधिकार व शिकायतें आईआरपी के सामने रखी जाती हैं।</p>
<p>दिवालिया में इन कंपनियों के प्रमुख प्रोजेक्ट</p>
<p>कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया यानी सीआईआरपी में प्रमुख 14 रियल एस्टेट कंपनियों में अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के 97 प्रोजेक्ट हैं। सभी प्रोजेक्ट की निगरानी आईपीआर नवनीत गुप्ता द्वारा की जा रही है। इसके अलावा अजनारा रियलटेक के पांच प्रोजेक्ट, सुपरटेक टाउनशिप के चार प्रोजेक्ट, किंडल इन्फ्राहाइट्स का एक प्रोजेक्ट, बीसीसी इंफ्रास्ट्रक्चर के तीन प्रोजेक्ट, मॉर्फियस प्रो डेवलपर्स का एक प्रोजेक्ट, मिस्ट डायरेक्ट सेल्स के तीन प्रोजेक्ट, रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन का एक प्रोजेक्ट, एटीएस हाईट्स का एक प्रोजेक्ट, नोबिलिटी एस्टेट के दो प्रोजेक्ट, वर्धमान इंफ्राडेवलपर्स एक प्रोजेक्ट, निखिल होम्स का एक प्राेजेक्ट, महागुन इंडिया के पांच प्रोजेक्ट व सुपरटेक रियलटर्स के चार प्रोजेक्ट शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/562246/rera-appeals-to-people-to-file-claims-through-irp--129-projects-in-corporate-insolvency-resolution-process</link>
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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 11:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NCLT ने CCI के फैसले को रखा बरकरार, Play Store से सभी गोपनीय जानकारी हटाएगा गूगल  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार।</strong> राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLT) ने गूगल प्ले स्टोर की नीति पर पिछले महीने दिए अपने फैसले से गूगल की राजस्व संबंधी जानकारी वाले गोपनीय पत्र के अंशों को हटाने का निर्देश दिया है। NCLT ने 28 मार्च को निष्पक्ष व्यापार नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के उस फैसले को बरकरार रखा था कि कंपनी की ऐप स्टोर ‘बिलिंग’ नीति डेवलपर के लिए अनुचित व प्रतिबंधात्मक थी।<br />  <br /><strong>जुर्माने की राशि घटाकर किया 216 करोड़ </strong></p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इसने जुर्माने की राशि को 936.44 करोड़ रुपये से करीब एक चौथाई घटाकर 216 करोड़ रुपये कर दिया था। अल्फाबेट इंक और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/533905/nclt-upheld-cci-s-decision--google-will-remove-all-confidential-information-from-play-store"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(14)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार।</strong> राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLT) ने गूगल प्ले स्टोर की नीति पर पिछले महीने दिए अपने फैसले से गूगल की राजस्व संबंधी जानकारी वाले गोपनीय पत्र के अंशों को हटाने का निर्देश दिया है। NCLT ने 28 मार्च को निष्पक्ष व्यापार नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के उस फैसले को बरकरार रखा था कि कंपनी की ऐप स्टोर ‘बिलिंग’ नीति डेवलपर के लिए अनुचित व प्रतिबंधात्मक थी।<br /> <br /><strong>जुर्माने की राशि घटाकर किया 216 करोड़ </strong></p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इसने जुर्माने की राशि को 936.44 करोड़ रुपये से करीब एक चौथाई घटाकर 216 करोड़ रुपये कर दिया था। अल्फाबेट इंक और गूगल इंक ने 104 पृष्ठ के आदेश से पैरा 97 से 100 को हटाने के लिए NCLT में आवेदन किया और छह अक्टूबर 2022 का एक पत्र प्रस्तुत किया जो एक गोपनीय दस्तावेज है। यह गोपनीय दस्तावेज उनके द्वारा दी गई राजस्व जानकारी के जवाब में था। इसमें गोपनीय राजस्व आंकड़ों का उल्लेख था। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने भी इस पर गोपनीयता बनाए रखी थी। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अल्फाबेट और गूगल इंक ने गोपनीयता बनाए रखे जाने का किया था अनुरोध</strong> </p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, एनसीएलएटी ने 28 मार्च को अपने फैसले में 97 से 100 में गोपनीय दस्तावेज के अंश उद्धृत किए थे। अल्फाबेट और गूगल इंक ने अनुरोध किया कि गोपनीयता बनाए रखी जानी चाहिए और पैरा 97 से 100 को फैसले के साथ-साथ वेबसाइट तथा प्रमाणित प्रति से भी हटाया जाना चाहिए। एनसीएलएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य बरुण मित्रा की पीठ ने इस पर सहमति जतायी। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, ‘हमें आवेदक की दलील सही प्रतीत होती है। फैसले के पैरा 97 से 100 में छह अक्टूबर 2022 के गोपनीय पत्र का अंश उद्धृत किया गया है, इसलिए गोपनीयता बनाए रखने के लिए, हम आवेदन में की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार करते हैं।’ अल्फाबेट इंक और गूगल इंक की याचिका को स्वीकार करते हुए अपील अधिकरण ने निर्देश दिया, ‘ वेबसाइट से पैरा 97 से 100 को हटा दिया जाए और अब से केवल निर्णय के हटाए गए हिस्से की प्रमाणित प्रति दी जाए।’ </p>
<p style="text-align:justify;">इसने साथ ही निर्देश दिया, ‘निर्णय का संपादित संस्करण वेबसाइट पर साझा किया जाए।’’ एनसीएलएटी ने 28 मार्च के अपने आदेश में दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल को तगड़ा झटका देते गुए कहा था कि गूगल ने बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग किया है और कानून की धारा का उल्लंघन किया है। हालांकि NCLT ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की तरफ से गूगल पर लगाए गए 936.44 करोड़ रुपये के जुर्माने में भारी कटौती कर 216 करोड़ रुपये कर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">NCLT ने कहा था कि चूंकि गूगल ने पहले ही वर्तमान अपील में जुर्माने का 10 प्रतिशत जमा कर दिया है, लिहाजा उसे जुर्माने की शेष राशि आज से 30 दिन के भीतर जमा करनी होगी। इससे पहले 25 अक्टूबर 2022 को प्रतिस्पर्धा आयोग ने गूगल पर अपने प्ले स्टोर से जुड़ी नीतियों के संबंध में अपनी प्रमुख बाजार स्थिति का दुरुपयोग करने के लिए 936.44 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533902/the-wait-for-samsung-galaxy-m56-5g-is-over--the-slim-phone-comes-with-ai-features-and-50mp-camera--know-the-price#gsc.tab=0">Samsung Galaxy M56 5G का इंतजार खत्म, AI फीचर्स और 50MP कैमरा के साथ आया स्लिम फोन, जानें कीमत</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533749/realme-partners-with-optiemus-electronics-to-manufacture-next-generation-aiot-devices-in-india#gsc.tab=0">Realme की Optiemus Electronics के साथ साझेदारी, भारत में अगली पीढ़ी के AIOT उपकरणों का करेगी विनिर्माण </a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/533905/nclt-upheld-cci-s-decision--google-will-remove-all-confidential-information-from-play-store</link>
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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 16:22:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोल्डन जुबली होटल्स की बिक्री पर एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ ईआईएच की याचिका खारिज </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने हैदराबाद स्थित गोल्डन जुबली होटल्स की बिक्री को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ आतिथ्य क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ईआईएच लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने सिंगापुर स्थित इकाई की बोली को अनुमति देते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पहले के फैसले को बरकरार रखा है। </p>
<p>एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के बहुमत के साथ व्यावसायिक फैसले पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘‘इस हालिया फैसले से सीओसी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/511344/eih-s-plea-against-nclt-order-on-sale-of-golden-jubilee-hotels-dismissed"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/cats278.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने हैदराबाद स्थित गोल्डन जुबली होटल्स की बिक्री को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ आतिथ्य क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ईआईएच लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने सिंगापुर स्थित इकाई की बोली को अनुमति देते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पहले के फैसले को बरकरार रखा है। </p>
<p>एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के बहुमत के साथ व्यावसायिक फैसले पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘‘इस हालिया फैसले से सीओसी के वाणिज्यिक विवेक में दृढ़ विश्वास का पता चलता है और इसमें किसी भी न्यायिक हस्तक्षेप की बहुत कम गुंजाइश है।’’ </p>
<p>इससे पहले, एनसीएलटी की हैदराबाद पीठ ने सात फरवरी, 2020 को सिंगापुर स्थित बीआरईपी एशिया-दो इंडियन होल्डिंग कंपनी- दो (एनक्यू) पीटीई की बोलियों को मंजूरी दी थी। इस फैसले को ओबेरॉय समूह की प्रमुख कंपनी ईआईएच ने एनसीएलएटी के समक्ष चुनौती दी थी। ईआईएच गोल्डन जुबली होटल्स का प्रबंधन कर रही थी।  </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a class="post-title" href="https://www.amritvichar.com/article/511326/sardar-patels-thinking-in-the-background-of-ek-bharat-shrestha-bharat">एक भारत-श्रेष्ठ भारत की पृष्ठभूमि में सरदार पटेल की सोच, मुख्यमंत्री ने लौहपुरुष की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/511344/eih-s-plea-against-nclt-order-on-sale-of-golden-jubilee-hotels-dismissed</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 15:15:59 +0530</pubDate>
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                        url="https://www.amritvichar.com/media/2024-12/cats278.jpg"                         length="142456"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समयसीमा में चूक, लोगों की कमी दिवाला समाधान कार्यवाही के लिए चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> इस साल राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और अपीलीय न्यायाधिकरण में कर्मचारियों की कमी के कारण दिवाला कानून के तहत अधिकांश विवादित परिसंपत्तियों के समाधान में समयसीमा की चूक हुई। इस बीच एयरलाइन कंपनियों को भी दिवाला प्रावधानों में राहत मांगते देखा गया, हालांकि उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली।</p>
<p>जैसे-जैसे दिवाला और ऋण अक्षमता संहिता (आईबीसी) की समयसीमा उनकी तय सीमा से आगे बढ़ी, समाधान प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों की संपत्ति मूल्य में गिरावट देखी गई। भारतीय दिवाला और ऋण अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2016 में लागू होने के बाद से इस साल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/430922/missing-deadlines--lack-of-people-pose-challenges-to-insolvency-resolution-proceedings"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/351.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> इस साल राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और अपीलीय न्यायाधिकरण में कर्मचारियों की कमी के कारण दिवाला कानून के तहत अधिकांश विवादित परिसंपत्तियों के समाधान में समयसीमा की चूक हुई। इस बीच एयरलाइन कंपनियों को भी दिवाला प्रावधानों में राहत मांगते देखा गया, हालांकि उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली।</p>
<p>जैसे-जैसे दिवाला और ऋण अक्षमता संहिता (आईबीसी) की समयसीमा उनकी तय सीमा से आगे बढ़ी, समाधान प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों की संपत्ति मूल्य में गिरावट देखी गई। भारतीय दिवाला और ऋण अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2016 में लागू होने के बाद से इस साल सितंबर तक लेनदारों को आईबीसी के तहत समाधान के माध्यम से 3.16 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई है।</p>
<p>अगले साल एनसीएलटी और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के फ्यूचर रिटेल, गो फर्स्ट और रिलायंस कैपिटल सहित महत्वपूर्ण कॉरपोरेट दिवाला समाधान (सीआईआरपी) को पूरा करने की उम्मीद है। नवीनतम आंकड़ों से पता चला है कि इस समय चल रहीं 67 प्रतिशत दिवाला समाधान प्रक्रियाएं 270 दिन की समयसीमा से चूक गईं।</p>
<p>जून तिमाही में, वित्तीय ऋणदाताओं के लिए समाधान में लगने वाला औसत समय तीन साल के उच्चतम 643 दिनों पर पहुंच गया। सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर अनिमेष बिष्ट ने कहा कि जून-सितंबर, 2023 के लिए आईबीबीआई तिमाही न्यूजलेटर के अनुसार सीआईआरपी समाधान योजनाओं का औसत समय परिचालन ऋणदाताओं के लिए 662 दिन और वित्तीय ऋणदाताओं के लिए 659 दिन तक बढ़ गया है, जो आईबीसी द्वारा निर्धारित 270 दिन की सीमा से अधिक है।</p>
<p>वर्तमान में, एनसीएलटी में 63 सदस्यों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 55 सदस्य हैं। अगस्त 2023 में सरकार ने 17 नए सदस्यों की नियुक्ति की थी। आईबीसी के लागू होने के बाद से सितंबर 2023 तक 7,058 मामले शुरू किए गए। 2,000 से अधिक सीआईआरपी मामले चल रहे हैं।</p>
<p>विमानन क्षेत्र ने इस साल दिवाला परिवेश तंत्र को काफी उलझाए रखा। इस दौरान आईबीबीआई ने अब बंद हो चुकी गो फर्स्ट पर संकट के मद्देनजर पट्टे पर विमान के संबंध में मानदंडों में संशोधन भी किया।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-<span style="color:rgb(0,0,0);"> </span></strong><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/430920/horrific-road-accident-in-tamil-nadu--uncontrolled-truck-rams-into-tea-shop--five-killed--19-injured">तमिलनाडु में भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित ट्रक चाय की दुकान में घुसा, पांच की मौत, 19 लोग घायल</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/430922/missing-deadlines--lack-of-people-pose-challenges-to-insolvency-resolution-proceedings</link>
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                <pubDate>Sat, 30 Dec 2023 13:52:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ashpreet]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NCLT ने जी, सोनी के विलय पर अपना फैसला रखा सुरक्षित </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई। </strong>राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज और कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट (पहले सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया) के विलय पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।</p>
<p>एच वी सुब्बा राव और मधु सिन्हा की एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताने वाले कर्जदाताओं की दलीलों को सुनने के बाद सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इन कर्जदाताओं में एक्सिस फाइनेंस, जेसी फ्लॉवर एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी, आईडीबीआई बैंक, आईमैक्स कॉर्प और आईडीबीआई ट्रस्टीशिप शामिल हैं।</p>
<p>दिसंबर, 2021 में जी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स ने अपने कारोबार का विलय करने पर सहमति जताई थी। दोनों मीडिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/385731/nclt-reserves-its-verdict-on-zee-sony-merger"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/cac3f06510214f6c621d0ee251b313a6.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई। </strong>राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज और कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट (पहले सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया) के विलय पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।</p>
<p>एच वी सुब्बा राव और मधु सिन्हा की एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताने वाले कर्जदाताओं की दलीलों को सुनने के बाद सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इन कर्जदाताओं में एक्सिस फाइनेंस, जेसी फ्लॉवर एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी, आईडीबीआई बैंक, आईमैक्स कॉर्प और आईडीबीआई ट्रस्टीशिप शामिल हैं।</p>
<p>दिसंबर, 2021 में जी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स ने अपने कारोबार का विलय करने पर सहमति जताई थी। दोनों मीडिया घरानों ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, बीएसई, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और अन्य क्षेत्रीय नियामकों से अनुमति प्राप्त करने के बाद विलय की मंजूरी के लिए न्यायाधिकरण से संपर्क किया था।</p>
<p>एस्सेल समूह के कई ऋणदाताओं द्वारा योजना में प्रतिस्पर्धा नहीं करने का प्रावधान जोड़ने को लेकर आपत्ति जताने के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जेडईईएल) के वकील जनक द्वारकादास ने कहा कि जेडईईएल और सोनी के बीच व्यवस्था को 99.97 प्रतिशत शेयरधारकों के अलावा बीएसई, एनएसई और सीसीआई जैसे नियामकों ने मंजूरी दे दी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आपत्ति जता रहे लेनदारों के दावों का कुल मूल्य 1,259 करोड़ रुपये है। जी की कुल सार्वजनिक शेयरधारिता 96.01 प्रतिशत है, जिसमें से 70 प्रतिशत सार्वजनिक संस्थानों के पास है। लगभग 25.88 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक गैर-संस्थानों के पास है, जबकि प्रवर्तकों के पास सिर्फ 3.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है।</p>
<p>एनएसई और बीएसई ने एनसीएलटी की मुंबई पीठ को एस्सेल समूह की इकाइयों के दो आदेशों के बारे में सूचित किया, जिनमें प्रवर्तकों ने सूचीबद्ध इकाइयों के कोष को अपनी सहायक इकाइयों के लाभ के लिए स्थानांतरित किया है।</p>
<p>इनमें प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) का पुनीत गोयनका के खिलाफ जारी आदेश भी शामिल है। सैट ने गोयनका के किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में निदेशक स्तर का पद लेने की रोक लगाई है। सैट ने सेबी के उस आदेश को उचित ठहराया था जिसमें जी एंटरटेनमेंट के प्रवर्तकों सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर किसी सार्वजनिक सूचीबद्ध कंपनी में निदेशक मंडल स्तर का पद लेने की एक साल की रोक लगाई गई थी।</p>
<p>विलय का विरोध करने वाले ऋणदाताओं का कहना है कि इस आदेश का प्रक्रिया में सीधा असर पड़ेगा। योजना का एक आंतरिक हिस्सा गोयनका को विलय के बाद अस्तित्व में आने वाली इकाई का प्रबंध निदेशक नियुक्त करना है। उन्होंने कहा कि गोयनका के इस तरह का पद लेने पर रोक है, ऐसे में विलय योजना आगे नहीं बढ़ सकती। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-<span style="color:rgb(224,62,45);"> <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/385705/traffic-stopped-due-to-incessant-rains--jammu-to-amarnath-yatra-postponed-for-the-fourth-consecutive-day">लगातार बारिश से यातायात बंद, जम्मू से अमरनाथ यात्रा लगातार चौथे दिन स्थगित</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/385731/nclt-reserves-its-verdict-on-zee-sony-merger</link>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 12:11:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ashpreet]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NCLT ने बीते वित्त वर्ष 180 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी, 51,424 करोड़ रुपये की प्राप्ति </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने वित्त वर्ष 2022-23 में 180 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी है। इससे दबाव वाली संपत्तियों से कुल प्राप्ति 51,424 करोड़ रुपये रही। जहां तक ऋणदाताओं को प्राप्ति की बात है, तो वित्त वर्ष 2018-19 के बाद यह दूसरी सर्वाधिक वसूली है। </p>
<p>उस समय 77 दिवाला समाधान प्रक्रियाओं से कुल वसूली 1.11 लाख करोड़ की रही थी। इनमें एस्सार स्टील और मोनेट इस्पात जैसे बड़े मामले भी शामिल थे। इससे वित्त वर्ष 2022-23 में कर्ज में दबीं फर्मों के लेनदारों को 31 मार्च, 2023 को समाप्त वर्ष के लिए 1,42,543 करोड़ रुपये के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/375314/nclt-approved-180-resolution-plans-in-the-last-financial-year"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-06/untitled-design-(10)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने वित्त वर्ष 2022-23 में 180 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी है। इससे दबाव वाली संपत्तियों से कुल प्राप्ति 51,424 करोड़ रुपये रही। जहां तक ऋणदाताओं को प्राप्ति की बात है, तो वित्त वर्ष 2018-19 के बाद यह दूसरी सर्वाधिक वसूली है। </p>
<p>उस समय 77 दिवाला समाधान प्रक्रियाओं से कुल वसूली 1.11 लाख करोड़ की रही थी। इनमें एस्सार स्टील और मोनेट इस्पात जैसे बड़े मामले भी शामिल थे। इससे वित्त वर्ष 2022-23 में कर्ज में दबीं फर्मों के लेनदारों को 31 मार्च, 2023 को समाप्त वर्ष के लिए 1,42,543 करोड़ रुपये के कुल स्वीकृत दावों का 36 प्रतिशत प्राप्त करने में मदद मिली है। </p>
<p>वित्त वर्ष 2022-23 में एनसीएलटी ने कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) की शुरुआत के लिए ऋणदाताओं से 1,255 आवेदन स्वीकार किए। यह भी 2019 के बाद सबसे ऊंची संख्या है। एनसीएलटी ने वित्त वर्ष 2021-22 में 147 समाधान योजनाओं, 2020-21 में 121 समाधान योजनाओं और 2019-20 में 134 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी थी। आंकड़ों के अनुसार, एनसीएलटी ने वित्त वर्ष 2022-23 तक 678 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी थी और ऋणदाताओं को 2.86 लाख करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई थी। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <span style="color:rgb(186,55,42);"><a style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/375244/india-deserves-direct-flights-to-more-foreign-destinations--air-india-ceo">भारत अधिक विदेशी गंतव्यों के लिए सीधी उड़ानों का हकदार: एयर इंडिया सीईओ</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/375314/nclt-approved-180-resolution-plans-in-the-last-financial-year</link>
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                <pubDate>Sun, 04 Jun 2023 15:11:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishal Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Noida Supertech Twin Towers Demolition: पलक झपकते ही जमींदोज हुई करप्शन की बहुमंजिला इमारत</title>
                                    <description><![CDATA[नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा का सेक्टर-93 A, ये जगह आजाद भारत के इतिहास की कई बड़ी घटनाओं का गवाह बनी। यहां रविवार को 32 मंजिल की दो बहुमंजिला या 103 मीटर ऊंचे ट्विन टावर (T-16 और T-17 (Apex और Ceyane) ) को ही नहीं ढहाया गया, बल्कि देश में आसमान की बुलंदियों तक पहुंचे …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/272317/noida-supertech-twin-towers-demolished-multi-storey-buildings-of-corruption-uttar-pradesh"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/whatsapp-image-2022-08-28-at-2.45.43-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नोएडा।</strong> उत्तर प्रदेश के नोएडा का सेक्टर-93 A, ये जगह आजाद भारत के इतिहास की कई बड़ी घटनाओं का गवाह बनी। यहां रविवार को 32 मंजिल की दो बहुमंजिला या 103 मीटर ऊंचे ट्विन टावर (T-16 और T-17 (Apex और Ceyane) ) को ही नहीं ढहाया गया, बल्कि देश में आसमान की बुलंदियों तक पहुंचे भ्रष्टाचार को भी जमींदोज किया गया। सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराने के बाद आस-पास के क्षेत्र में धूल के बादल छा गए।</p> <p>सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराने के बाद आस पास जमे धूल को स्थिर करने के लिए पानी को स्प्रे करने के लिए एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। नोएडा पुलिस आयुक्त आलोक सिंह ने कहा कि पूरे प्लान के साथ काम किया गया और टावर को गिराया गया। सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम थे जिस कारण से सब कुछ सही से हुआ। हम अवशेष और बचे हुए विस्फोटकों का आकलन करने के लिए साइट पर जा रहे हैं यदि वे वहां छोड़े गए हैं।</p> <p>नोएडा की CEO रितु माहेश्वरी ने कहा कि आस-पास की हाउसिंग सोसाइटियों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। अभी कुछ मलबा सड़क की तरफ आया है। हमें एक घंटे में स्थिति का बेहतर अंदाजा हो जाएगा।</p> <blockquote class="twitter-tweet"> <p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Following the orders of the apex court, today the Supertech twin towers located in Sector 93A in Noida were demolished after ensuring stringent safety protocols. <a href="https://twitter.com/hashtag/TwinTowers?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#TwinTowers</a> <a href="https://t.co/4N8Ujz96XT">pic.twitter.com/4N8Ujz96XT</a></p> <p>— Pankaj Singh (@PankajSinghBJP) <a href="https://twitter.com/PankajSinghBJP/status/1563814966548787201?ref_src=twsrc%5Etfw">August 28, 2022</a></p></blockquote> <p></p> <div class="news-card-content news-right-box"> <div> <p>नोएडा (उत्तर प्रदेश) में सुपरटेक के 318-फीट और 338-फीट ऊंचाई वाले ट्विन टावर को 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रविवार को ढहा दिया गया। 32 व 29 मंज़िला ट्विन टावर को धमाका कर ढहाने के लिए करीब 3,700 किलोग्राम विस्फोटक इस्तेमाल किया गया। दोनों टावर के निर्माण में अग्नि सुरक्षा नियमों समेत कई मानदंडों का उल्लंघन मिला था। विध्वंस के बाद प्रदूषण स्तर की निगरानी के लिए विध्वंस स्थल पर स्पेशल डस्ट मशीन लगाई गई।</p> </div> </div> <p>ट्विन टावरों पर सुपरटेक ने कहा कि SC ने तकनीकी आधार पर निर्माण को संतोषजनक नहीं पाया और तदनुसार दोनों टावर को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। हम सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं, इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p> <p>सुपरटेक ने नोएडा में अपने ट्विन टावर को ढहाए जाने पर एक बयान जारी कर कहा है, हम शीर्ष न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं और इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुपरटेक ने दावा किया कि टावर्स को 2009 में नोएडा अथॉरिटी ने स्वीकृति दी थी और बिल्डिंग के प्लान में कोई बदलाव नहीं किया गया था।</p> <p><img class="aligncenter" src="https://pbs.twimg.com/media/FbOy_-7VEAA8Upk?format=png&amp;name=small" alt="Image"></img></p> <div class="news-card-footer news-right-box"></div> <blockquote class="twitter-tweet"> <p lang="und" dir="ltr" xml:lang="und">Noida Supertech Twin Towers Demolition: पलक झपकते ही जमींदोज हुई करप्शन की बहुमंजिला इमारत<a href="https://twitter.com/CP_Noida?ref_src=twsrc%5Etfw">@CP_Noida</a><a href="https://twitter.com/noida_authority?ref_src=twsrc%5Etfw">@noida_authority</a><a href="https://twitter.com/noidapolice?ref_src=twsrc%5Etfw">@noidapolice</a><a href="https://twitter.com/hashtag/NoidaTowerDemolition?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NoidaTowerDemolition</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Noida?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Noida</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/NoidaTwinTower?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NoidaTwinTower</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Noidatwintowers?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Noidatwintowers</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/NoidaTwinTowerDemolition?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#NoidaTwinTowerDemolition</a> <a href="https://t.co/A1pp3MjeT4">pic.twitter.com/A1pp3MjeT4</a></p> <p>— Amrit Vichar (@AmritVichar) <a href="https://twitter.com/AmritVichar/status/1563819452461789185?ref_src=twsrc%5Etfw">August 28, 2022</a></p></blockquote> <p></p> <p>सुपरटेक ट्विन टावर्स विध्वंस पर अपर मुख्य सचिव(गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि इन अवैध ट्विन टावरों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्त कार्रवाई में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था। यह एक संदेश देगा कि राज्य में अवैध काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p> <p>ट्विन टावर्स के विध्वंस पर यू.बी.एस. तेवतिया (RWA अध्यक्ष, एमराल्ड कोर्ट और याचिकाकर्ता) ने कहा कि 10 साल की लड़ाई के बाद अगर जीत मिलती है तो उसका कितना आनंद आता है वो हर आदमी जानता है। हमने 2012 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। विध्वंस के दीर्घकालिक लाभ 3 महीने में दिखाई देंगे।</p> <p>बता दें कि नोएडा (उत्तर प्रदेश) में सुपरटेक के 318 फीट और 338 फीट ऊंचाई वाले ट्विन टावर 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रविवार को ढहाए गए। सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाने की लागत ₹20 करोड़ आंकी गई है। इन दोनों इमारतों को बनाने में करीब ₹70 करोड़ लगे थे। सुपरटेक इसे ढहाने के लिए करीब ₹5 करोड़ का भुगतान कर रहा है जबकि बाकी ₹15 करोड़ की रकम इसके लगभग 80,000 टन के मलबे को बेचकर प्राप्त की जाएगी।</p> <div class="news-card-content news-right-box"> <div>नोएडा के ट्विन टावर को ढहाने जा रही कंपनियों में से एक दक्षिण अफ्रीका की जेट डिमोलिशन के सीईओ जो ब्रिंकमैन ने कहा है, डिमोलिशन (इमारतों को ध्वस्त करना) इंजीनियरिंग का एक खूबसूरत करतब है…शो का मज़ा लो। ब्रिंकमैन ने कहा कि विस्फोटकों से निकलने वाले रसायन हानिकारक नहीं होंगे क्योंकि वे हवा में जल्दी घुल जाएंगे।</div> </div> <div class="news-card-footer news-right-box"></div> <p>2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया था कि इनके निर्माण के दौरान अग्नि सुरक्षा नियमों सहित कई मानदंडों का उल्लंघन किया गया। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।</p> <p>नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाए जाने के बाद अनुमानित 80,000 टन मलबा निकलेगा। नोएडा अथॉरिटी के जनरल मैनेजर (योजना) इश्तियाक अहमद ने बताया है कि 21,000 क्यूबिक मीटर मलबे को एक खाली ज़मीन पर डंप किया जाएगा और बाकी बचे मलबे को टावरों के बेसमेंट सेक्शन में बनाए गए गड्ढे में ही छोड़ दिया जाएगा।</p> <p><iframe title="नोएडा: जमींदोज हुआ ट्विन टावर, चार महीने में हटेगा पूरा मलबा" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/jPkph6pJQe8?feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p> <p><strong>खरीदारों का क्या होगा?</strong><br /> सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सुपरटेक को दो महीने के भीतर 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ ट्विन टावरों में फ्लैट खरीदारों को सभी राशि वापस करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही बिल्डर को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को 2 करोड़ का भुगतान करने का भी निर्देश दिया था।</p> <p>हालांकि, मार्च 2022 में सुपरटेक कंपनी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने दिवालिया घोषित कर दिया है। कंपनी पर करीब 1200 करोड़ रुपये का कर्ज है. इस फैसले के बाद से 25 हजार से ज्यादा ग्राहकों को झटका लगा है, जिन्होंने सुपरटेक से घर खरीदा है और डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं. इसमें ट्विन टावर के ग्राहक भी शामिल हैं।</p> <p><strong>क्या है ‘वॉटरफॉल इम्प्लोशन’ तकनीक ?<br /> </strong>नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर को ढहाने में ‘वॉटरफॉल इम्प्लोशन’ तकनीक इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत ढांचा अंदर की ओर और अपने ऊपर गिरेगा जो एक वॉटरफॉल के इफेक्ट को दर्शाएगा। यह इम्प्लोशन गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का इस्तेमाल करता है और इसमें विस्फोटक और डेटोनेटर्स की ज़रूरत पड़ती है। यह तरीका लागत, समय और सुरक्षा के आधार पर इस्तेमाल होता है।</p> <p><img class="aligncenter wp-image-541562 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-08/whatsapp-image-2022-08-28-at-2.36.25-pm.jpeg" alt="" width="633" height="340"></img> <img class="aligncenter wp-image-541563 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-08/whatsapp-image-2022-08-28-at-2.36.24-pm-2.jpeg" alt="" width="629" height="343"></img> <img class="aligncenter wp-image-541564" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-08/whatsapp-image-2022-08-28-at-2.36.24-pm-1.jpeg" alt="" width="613" height="415"></img> <img class="aligncenter wp-image-541565 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-08/whatsapp-image-2022-08-28-at-2.36.24-pm.jpeg" alt="" width="604" height="326"></img> <img class="aligncenter wp-image-541566 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-08/whatsapp-image-2022-08-28-at-2.36.23-pm.jpeg" alt="" width="596" height="343"></img></p> <p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/why-twin-towers-are-being-demolished-in-noida-with-a-height-of-more-than-300-feet-what-will-happen-to-the-buyers-know-everything-here/">Noida में 300 फीट से अधिक ऊंचाई वाले Twin Towers क्यों ढहाए गए, खरीदारों का क्या होगा? यहां जानिए सबकुछ</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>गौतम बुद्ध नगर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Aug 2022 13:57:24 +0530</pubDate>
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                <title>एसबीआई को 2021-22 में &amp;#8216;बट्टे&amp;#8217; खातों से 8,000 करोड़ रुपये की वसूली की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को  31 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ( एनसीएलटी) द्वारा समाधान वाले खातों सहित बट्टे खातों से लगभग 8,000 करोड़ रुपये की वसूली की उम्मीद है। एसबीआई ने  दिसंबर, 2021 को समाप्त तीसरी तिमाही के दौरान बट्टे खातों से 1,500 …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/172997/sbi-expects-recovery-of-rs-8000-crore-from-write-off-accounts-in-2021-22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-02/sbi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को  31 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ( एनसीएलटी) द्वारा समाधान वाले खातों सहित बट्टे खातों से लगभग 8,000 करोड़ रुपये की वसूली की उम्मीद है। एसबीआई ने  दिसंबर, 2021 को समाप्त तीसरी तिमाही के दौरान बट्टे खातों से 1,500 करोड़ रुपये की वसूली की और वित्त वर्ष 2021-22 के पहले नौ महीनों अप्रैल-दिसंबर के दौरान कुल वसूली राशि 5,600 करोड़ रुपये रही।</p>
<p>बैंक ने निवेशकों के साथ एक वार्ता में यह बात कही।  बैंक ने कहा कि कुल  मिलाकर उसे चालू वित्त वर्ष में लगभग 8,000 करोड़ रुपये की वसूली की उम्मीद है। इसमें न्यायाधिकरण  द्वारा हल किए गए मामलों से वसूल की गई राशि भी शामिल है।  इसके चलते बैंक के फंसे हुए कर्ज में भी सुधार हुआ है और 31 दिसंबर, 2021 के अंत में उसका सकल एनपीए घटकर 4.5 प्रतिशत रह गया, जो सितंबर, 2021 के अंत में 4.9 प्रतिशत था।</p>
<p>शुद्ध एनपीए भी तिमाही आधार पर 1.52 फीसदी से गिरकर 1.34 फीसदी पर आ गया। एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही के आंकड़ों से पता चलता है कि बैंक के प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े-</strong></p>
<p><a href="https://amritvichar.com/government-to-issue-expression-of-interest-for-sale-of-alliance-air-in-the-next-financial-year/">अलायंस एयर की बिक्री के लिए अगले वित्त वर्ष में रुचि पत्र निकालेगी सरकार</a></p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Feb 2022 14:25:34 +0530</pubDate>
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