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                <title>LU News - Amrit Vichar</title>
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                <description>LU News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Lucknow University Students Protest: फीस वृद्धि और निष्कासन के विरोध में छात्र आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, कथित वित्तीय अनियमितताओं और छात्रों के निष्कासन के विरोध में चल रहे आंदोलन को शनिवार को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिला। धरना स्थल पर पहुंचे अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर चिंता जताई। अवधेश प्रसाद ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना छात्रों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो वह मामले को राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर संसद में भी मुद्दा रखेंगे। उन्होंने छात्रों पर दर्ज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/584131/lucknow-university-students-protest--student-movement-against-fee-hike-and-expulsion-gets-political-support"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/muskan-dixit-(29)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, कथित वित्तीय अनियमितताओं और छात्रों के निष्कासन के विरोध में चल रहे आंदोलन को शनिवार को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिला। धरना स्थल पर पहुंचे अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर चिंता जताई। अवधेश प्रसाद ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना छात्रों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो वह मामले को राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर संसद में भी मुद्दा रखेंगे। उन्होंने छात्रों पर दर्ज एफआईआर और निष्कासन की कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">धरना स्थल पर कांग्रेस नेता रुद्र दमन सिंह ‘बब्लू’ भी पहुंचे और छात्रों के समर्थन में बैठे। वहीं, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि उच्च शिक्षा सभी वर्गों के छात्रों के लिए सुलभ रहनी चाहिए और फीस संबंधी नीतियों में पारदर्शिता आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन संवाद के बजाय उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। नेताओं ने भी छात्रों के संवैधानिक अधिकारों और न्यायपूर्ण शिक्षा व्यवस्था के समर्थन में निष्कासन आदेशों व अन्य कार्रवाई की समीक्षा की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:00:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'यूनिवर्सिटी है, स्कूल नहीं!' लखनऊ विश्वविद्यालय में ड्रेस कोड के खिलाफ सड़क पर लेटे छात्र, कुलपति और प्रशासन के खिलाफ फूटा छात्रों का गुस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ:</strong> लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) परिसर एक बार फिर राजनीति और विरोध का अखाड़ा बन गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा नए शैक्षणिक सत्र से अनिवार्य किए गए ड्रेस कोड के खिलाफ विद्यार्थियों ने मोर्चा खोल दिया है। छात्रों का आरोप है कि नियमों की आड़ में संस्थान उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहा है। विरोध इस कदर बढ़ा कि उग्र छात्रों ने छात्र भवन चौराहे को पूरी तरह जाम कर दिया और विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ तीखी नारेबाजी की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सड़क पर लेटकर जताया विरोध, पुलिस ने खदेड़ा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन को अनोखा और आक्रामक रूप देते हुए दर्जनों छात्र मुख्य सड़क पर लेट गए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/583074/-this-is-a-university--not-a-school---students-at-lucknow-university-lay-down-on-the-street-to-protest-the-dress-code--venting-their-anger-against-the-vice-chancellor-and-the-administration"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit21.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ:</strong> लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) परिसर एक बार फिर राजनीति और विरोध का अखाड़ा बन गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा नए शैक्षणिक सत्र से अनिवार्य किए गए ड्रेस कोड के खिलाफ विद्यार्थियों ने मोर्चा खोल दिया है। छात्रों का आरोप है कि नियमों की आड़ में संस्थान उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहा है। विरोध इस कदर बढ़ा कि उग्र छात्रों ने छात्र भवन चौराहे को पूरी तरह जाम कर दिया और विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ तीखी नारेबाजी की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सड़क पर लेटकर जताया विरोध, पुलिस ने खदेड़ा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन को अनोखा और आक्रामक रूप देते हुए दर्जनों छात्र मुख्य सड़क पर लेट गए और आवागमन ठप कर दिया। 'विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही' और 'तानाशाही नहीं चलेगी' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। सड़क जाम होने और हंगामे की स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास जब विफल रहा, तो पुलिस ने सड़क पर लेटे छात्रों को जबरन उठाकर वहां से हटाया और हिरासत में ले लिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>शायराना अंदाज में बगावत का बिगुल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस आंदोलन के दौरान छात्रों के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। अपनी आवाज बुलंद करते हुए एक प्रदर्शनकारी छात्र ने मशहूर शेर पढ़ते हुए कहा कि "उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है, जो जिंदा हैं, वो जिंदा नजर आना भी जरूरी है।"</p>
<p style="text-align:justify;">छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>"गवर्नर की मनमर्जी बर्दाश्त नहीं"</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं का सीधा निशाना उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल पर था। छात्रों का तर्क है कि राजभवन की ओर से विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में ड्रेस कोड थोपने का फैसला पूरी तरह तर्कहीन है। छात्रों ने कहा, "यह तानाशाही रवैया है, जिसे छात्र समुदाय कभी स्वीकार नहीं करेगा।" इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को संबोधित एक मांगपत्र (ज्ञापन) भी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>यूनिवर्सिटी और स्कूल के अंतर पर उठे सवाल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन में शामिल छात्र अमितेश पाल ने शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी खामियों को उजागर करते हुए कहा कि गवर्नर महोदया का यह कदम पूरी तरह अव्यावहारिक है। </p>
<p style="text-align:justify;">अमितेश ने सवाल उठाया कि अगर शासन वाकई समानता लाना चाहता है, तो शिक्षा के स्तर और संसाधनों में समानता क्यों नहीं लाता? देश के सामाजिक और शैक्षणिक ढांचे में इतनी असमानताएं हैं, उन्हें दूर करने के बजाय कपड़ों पर ध्यान दिया जा रहा है। एक बच्चा पहली से बारहवीं कक्षा तक यूनिफॉर्म में ही रहता है। क्या हम ताउम्र सिर्फ स्कूल ड्रेस ही पहनते रहेंगे? कॉलेज और यूनिवर्सिटी वैचारिक स्वतंत्रता की जगह हैं, इन्हें स्कूल न बनाया जाए।"</p>
<p style="text-align:justify;">यूनिवर्सिटी कैंपस में इस गतिरोध के बाद तनाव का माहौल बना हुआ है, वहीं छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:20:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाविद्यालयों में गुणवत्ता, शोध और नामांकन बढ़ाएं: राज्यपाल ने लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों संग की समीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महाविद्यालयों को नैक मूल्यांकन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए शोध, प्रकाशन और नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पुस्तक लेखन के लिए प्रोत्साहित किया जाए और संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">वे गुरुवार को जन भवन स्थित गांधी सभागार में लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध शासकीय एवं वित्त पोषित महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रही थीं। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और राज्यमंत्री रजनी तिवारी भी मौजूद रहीं। बैठक में 17 शासकीय और 33 वित्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577326/enhance-quality--research-and-enrolment-in-colleges--governor-reviews-with-principals-of-colleges-affiliated-to-lucknow-university"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(3)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महाविद्यालयों को नैक मूल्यांकन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए शोध, प्रकाशन और नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पुस्तक लेखन के लिए प्रोत्साहित किया जाए और संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">वे गुरुवार को जन भवन स्थित गांधी सभागार में लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध शासकीय एवं वित्त पोषित महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रही थीं। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और राज्यमंत्री रजनी तिवारी भी मौजूद रहीं। बैठक में 17 शासकीय और 33 वित्त पोषित महाविद्यालयों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें फैकल्टी, शोध, एमओयू, खेल गतिविधियां, नामांकन, प्लेसमेंट, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और छात्रवृत्ति जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यपाल ने महाविद्यालयों को गांवों में सामाजिक सहभागिता बढ़ाने, नशा और तंबाकू के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने तथा छात्रों को कौशल विकास और नवाचार से जोड़ने को कहा। उन्होंने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड का प्रभावी उपयोग करने और उद्योगों व बैंकों से समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही आंगनबाड़ी, टीबी उन्मूलन और एचपीवी टीकाकरण जैसे कार्यक्रमों में कॉलेजों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>रिक्त पद भरने और सुविधाएं मजबूत करने के निर्देश</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, लैब और कंप्यूटर कक्षों को सुदृढ़ करने तथा छात्र संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। कम नामांकन पर नाराजगी जताते हुए कारणों के समाधान के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577326/enhance-quality--research-and-enrolment-in-colleges--governor-reviews-with-principals-of-colleges-affiliated-to-lucknow-university</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 10:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>LU में पीएचडी के नए नियम: साल में दो बार एडमिशन, 4-वर्षीय ग्रेजुएट्स को भी मिलेगा मौका</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय मैं अब प्रत्येक वर्ष दो बार एचडी में प्रवेश लियाजाएगा। विश्वविद्यालय के विद्या परिषद ने नए 'पी.एच.डी. अध्यादेश 2026' को मंजूरी प्रदान कर दी है। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में इस बैठक का आयोजन किया गया जिसमें महत्वपूर्ण फैसले किए गए।</p>
<p>लखनऊ विश्वविद्यालय अब साल में दो बार (मई और दिसंबर) पी.एच.डी. प्रवेश अधिसूचना जारी करेगा । प्रवेश को तीन चरणों में व्यवस्थित किया गया है। प्रथम चरण: यूजीसी-जेआरएफ, सीएसआईआर-जेआरएफ, आईसीएमआर, डीबीटी और एआईसीटीई डॉक्टोरल फेलोशिप प्राप्त अभ्यर्थी । द्वितीय चरण: प्रथम चरण के बाद रिक्त सीटों पर वे अभ्यर्थी जो सहायक प्रोफेसर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576832/lu-s-new-phd-rules--admissions-twice-a-year--4-year-graduates-also-get-a-chance"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(50)7.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय मैं अब प्रत्येक वर्ष दो बार एचडी में प्रवेश लियाजाएगा। विश्वविद्यालय के विद्या परिषद ने नए 'पी.एच.डी. अध्यादेश 2026' को मंजूरी प्रदान कर दी है। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में इस बैठक का आयोजन किया गया जिसमें महत्वपूर्ण फैसले किए गए।</p>
<p>लखनऊ विश्वविद्यालय अब साल में दो बार (मई और दिसंबर) पी.एच.डी. प्रवेश अधिसूचना जारी करेगा । प्रवेश को तीन चरणों में व्यवस्थित किया गया है। प्रथम चरण: यूजीसी-जेआरएफ, सीएसआईआर-जेआरएफ, आईसीएमआर, डीबीटी और एआईसीटीई डॉक्टोरल फेलोशिप प्राप्त अभ्यर्थी । द्वितीय चरण: प्रथम चरण के बाद रिक्त सीटों पर वे अभ्यर्थी जो सहायक प्रोफेसर या पी.एच.डी. प्रवेश के लिए यूजीसी-नेट/सीएसआईआर-नेट उत्तीर्ण हैं । तृतीय चरण: शेष सीटों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित शोध प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश होगा।</p>
<h3><strong>4-वर्षीय स्नातक धारकों के लिए भी पीएचडी की सुविधा</strong></h3>
<p>अकादमिक लचीलेपन को बढ़ावा देते हुए, अब 4-वर्षीय, 8-सेमेस्टर स्नातक डिग्री वाले मेधावी छात्र पी.एच.डी. में प्रवेश ले सकते हैं ।</p>
<h3><strong>'फास्ट लर्नर' शोधार्थियों को विशेष रियायत</strong></h3>
<p>अध्यादेश में शोध की न्यूनतम अवधि 3 वर्ष और अधिकतम 6 वर्ष रखी गई है । हालांकि, असाधारण प्रतिभा वाले 'फास्ट लर्नर' शोधार्थियों के लिए कुलपति की अनुमति से थीसिस जमा करने की अवधि में 6 महीने की कटौती की जा सकती है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576832/lu-s-new-phd-rules--admissions-twice-a-year--4-year-graduates-also-get-a-chance</link>
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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 11:01:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामूहिक नकल की शिकायत पर ब्लैक लिस्ट होंगे महाविद्यालय,  Lucknow University में परीक्षा समिति बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित परीक्षा समिति की बैठक में नकल रोकने और परीक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विश्वविद्यालय अब नकल संबंधी मामलों के निस्तारण के लिए विशेषज्ञ समिति और छात्रों के लिए अपीलीय समिति का गठन करेगा। साथ ही सभी सेमेस्टर के परीक्षा फार्म जल्द खोले जाएंगे और “परीक्षा केंद्र” व “परीक्षार्थी” की स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, जिसमें संबद्ध महाविद्यालयों के साथ एक्स-स्टूडेंट, बैक पेपर, इम्प्रूवमेंट और एक्जेम्प्टेड छात्र भी शामिल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">नए नियमों के तहत मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, वायरलेस उपकरण सहित किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576722/colleges-will-be-blacklisted-following-complaints-of-mass-cheating--important-decisions-were-taken-at-the-lucknow-university-examination-committee-meeting"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-01/एलयू.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित परीक्षा समिति की बैठक में नकल रोकने और परीक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विश्वविद्यालय अब नकल संबंधी मामलों के निस्तारण के लिए विशेषज्ञ समिति और छात्रों के लिए अपीलीय समिति का गठन करेगा। साथ ही सभी सेमेस्टर के परीक्षा फार्म जल्द खोले जाएंगे और “परीक्षा केंद्र” व “परीक्षार्थी” की स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, जिसमें संबद्ध महाविद्यालयों के साथ एक्स-स्टूडेंट, बैक पेपर, इम्प्रूवमेंट और एक्जेम्प्टेड छात्र भी शामिल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">नए नियमों के तहत मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, वायरलेस उपकरण सहित किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग नकल की श्रेणी में माना जाएगा। परीक्षा केंद्रों पर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और बिना अनुमति किसी भी कर्मचारी को परीक्षा कक्ष में जाने की अनुमति नहीं होगी। किसी परीक्षार्थी की अनुचित सहायता करने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दंड व्यवस्था को भी कड़ा किया गया है। विषय से संबंधित सामग्री मिलने पर प्रश्नपत्र निरस्त होगा, जबकि नकल का उपयोग करने पर पूरे सेमेस्टर की परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। गंभीर मामलों में निष्कासन और एफआईआर तक दर्ज होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सामूहिक नकल की स्थिति में संबंधित परीक्षा केंद्र की परीक्षा निरस्त कर उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा, जिससे वह भविष्य में परीक्षा केंद्र नहीं बन सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>परीक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 11:14:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गैस सिलेंडर संकट पर भड़के छात्रः समाजवादी छात्र सभा ने लखनऊ विश्वविद्यालय पर किया शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊः</strong> बढ़ती महंगाई और गैस सिलेंडर की किल्लत-कालाबाजारी के खिलाफ समाजवादी छात्र सभा, लखनऊ विश्वविद्यालय ने मंगलवार को गेट संख्या 1 पर जोरदार किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।</p>
<p>प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी (मार्च में ₹60 की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में ₹913 तक पहुंच गई) और समय पर उपलब्धता न होने से आम जनता का जीवन मुश्किल हो गया है। कालाबाजारी चरम पर है, जहां सिलेंडर कहीं-कहीं दोगुने-तिगुने दाम पर बिक रहे हैं, जबकि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575458/students-enraged-over-gas-cylinder-crisis--samajwadi-chhatra-sabha-staged-a-peaceful-protest-at-lucknow-university"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(28)7.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः</strong> बढ़ती महंगाई और गैस सिलेंडर की किल्लत-कालाबाजारी के खिलाफ समाजवादी छात्र सभा, लखनऊ विश्वविद्यालय ने मंगलवार को गेट संख्या 1 पर जोरदार किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।</p>
<p>प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी (मार्च में ₹60 की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में ₹913 तक पहुंच गई) और समय पर उपलब्धता न होने से आम जनता का जीवन मुश्किल हो गया है। कालाबाजारी चरम पर है, जहां सिलेंडर कहीं-कहीं दोगुने-तिगुने दाम पर बिक रहे हैं, जबकि सरकारी आपूर्ति में कमी और होर्डिंग की समस्या बनी हुई है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(29)7.png" alt="MUSKAN DIXIT (29)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>छात्रों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वे इन मुद्दों पर पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। समाजवादी छात्र सभा ने मुख्य मांगें रखीं:<br />- गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए<br />- आम जनता को सुलभ और उचित दरों पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए<br />- बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण किया जाए और सब्सिडी बढ़ाई जाए</p>
<p>कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। अंत में सभा के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द समाधान नहीं करती तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।</p>
<p>प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल रहे: रोहित यादव, आदित्य पाण्डेय, शिवा जी यादव, प्रसन्न शुक्ला उर्फ मिट्ठू, शिवपूजन पाण्डेय, अजीतेंद्र यादव, शिवमणि तिवारी, प्रशांत पाल, अनादि तिवारी, अक्षत पाण्डेय, प्रभात राज यादव, आशीष यादव, आर्यन गुप्ता, विनय शाक्य, प्रियांशु, रुद्रवीर, सूर्यांश, पंकज, अर्जुन, अश्वनी आदि छात्र।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:50:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सुशासन के नए आयाम: आपदा प्रबंधन से नीति मूल्यांकन में एआई की बड़ी भूमिका, जानें क्या बोले विशेषज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>सरकार और प्रशासन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से एक कदम आगे रहना होगा। आपदा प्रबंधन में एआई का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इसके लिए स्वदेशी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अटल सुशासन पीठ में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कही। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि एआई का प्रयोग नीतिगत मूल्यांकन, भ्रष्टाचार निवारण और लैंगिक विविधता जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। साथ ही विशेषज्ञों ने एआई से होने वाले संभावित नुकसान पर भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575414/artificial-intelligence-opens-new-dimensions-to-good-governance--ai-plays-a-major-role-in-policy-evaluation--from-disaster-management-to-policy-evaluation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(19)9.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>सरकार और प्रशासन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से एक कदम आगे रहना होगा। आपदा प्रबंधन में एआई का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इसके लिए स्वदेशी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अटल सुशासन पीठ में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कही। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि एआई का प्रयोग नीतिगत मूल्यांकन, भ्रष्टाचार निवारण और लैंगिक विविधता जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। साथ ही विशेषज्ञों ने एआई से होने वाले संभावित नुकसान पर भी चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(19)9.png" alt="MUSKAN DIXIT (19)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं सुशासन के नए आयाम विषय पर आयोजित संगोष्ठी में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने कहा कि एआई के प्रयोग में इसके नकारात्मक पक्षों से बचना होगा। उन्होंने कहा कि सुशासन सुनिश्चित करने में शोधार्थियों की जिम्मेदारी अधिक है। पूर्व कुलपति प्रो. मनुका खन्ना ने एआई के संभावित खतरों के प्रति आगाह किया। कार्यक्रम में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की प्रो. चारु मल्होत्रा ने एआई के स्वदेशीकरण पर बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(20)7.png" alt="MUSKAN DIXIT (20)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सुशासन में एआई की भूमिका अहम</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के सचिव अनुराग यादव ने कहा कि एआई को प्रभावी ढंग से लागू कर सुशासन की अवधारणा को साकार किया जा सकता है। उन्होंने स्टार्टअप और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में भी एआई की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रॉम्प्ट तैयार करने में एआई का करें प्रयोग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">वाणिज्य विभाग की भाऊराव देवरस शोध पीठ द्वारा ग्लोबल इकोनॉमी और एआई विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें कुलपति ने कहा कि डिजिटल साक्षरता आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की अवधारणा का उल्लेख करते हुए बताया कि सही प्रकार से प्रॉम्प्ट तैयार करने से एआई टूल्स का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575414/artificial-intelligence-opens-new-dimensions-to-good-governance--ai-plays-a-major-role-in-policy-evaluation--from-disaster-management-to-policy-evaluation</link>
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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 12:18:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो दशकों से फ्रीज लखनऊ विश्वविद्यालय की अनुदान राशि देने की मांग, शिक्षक संघ की बैठक में कई अहम प्रस्ताव पारित</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की कार्यकारिणी बैठक गुरुवार को स्टाफ क्लब में आयोजित हुई, जिसमें शिक्षकों और विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। लूटा अध्यक्ष प्रो. अनित्य गौरव ने बताया कि कार्यकारिणी ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को स्वीकार करने पर धन्यवाद देने का प्रस्ताव भी पारित किया।</p>
<p>वहीं विश्वविद्यालय में छात्रों से लिए जाने वाले परीक्षा शुल्क को कम करने के संबंध में मंत्री की हालिया घोषणा पर चिंता व्यक्त की गई। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय की आय मुख्य रूप से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575116/demand-for-release-of-lucknow-university-grant-money-frozen-for-two-decades--several-important-resolutions-passed-in-the-teachers--union-meeting"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/एलयू.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की कार्यकारिणी बैठक गुरुवार को स्टाफ क्लब में आयोजित हुई, जिसमें शिक्षकों और विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। लूटा अध्यक्ष प्रो. अनित्य गौरव ने बताया कि कार्यकारिणी ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को स्वीकार करने पर धन्यवाद देने का प्रस्ताव भी पारित किया।</p>
<p>वहीं विश्वविद्यालय में छात्रों से लिए जाने वाले परीक्षा शुल्क को कम करने के संबंध में मंत्री की हालिया घोषणा पर चिंता व्यक्त की गई। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय की आय मुख्य रूप से परीक्षा शुल्क और सेमेस्टर शुल्क पर निर्भर है, इसलिए शुल्क में कटौती से विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की लगभग दो दशकों से स्थिर पड़ी अनुदान राशि बढ़ाने और सक्रिय करने का अनुरोध किया जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575116/demand-for-release-of-lucknow-university-grant-money-frozen-for-two-decades--several-important-resolutions-passed-in-the-teachers--union-meeting</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 10:38:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के लिए अंतरिक्ष के अगले 20 साल 'सुनहरा दौर', जानें क्या बोले जीओकॉन-2026 में वैज्ञानिक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>जलवायु परिवर्तन पर लखनऊ विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने कहा कि आने वाले दो दशक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय और संस्थान मिलकर इस महत्वपूर्ण विषय पर निरंतर विचार-विमर्श कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संगोष्ठी में 54 विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रतिभागियों ने 215 शोध पत्रों और पोस्टर प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में आठ मुख्य व्याख्यान और छह प्लेनरी व्याख्यान भी हुई। इनमें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575026/the-next-20-years-of-space-are-a--golden-era--for-india--learn-what-scientists-said-at-geocon-2026"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(10)6.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>जलवायु परिवर्तन पर लखनऊ विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने कहा कि आने वाले दो दशक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय और संस्थान मिलकर इस महत्वपूर्ण विषय पर निरंतर विचार-विमर्श कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संगोष्ठी में 54 विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रतिभागियों ने 215 शोध पत्रों और पोस्टर प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में आठ मुख्य व्याख्यान और छह प्लेनरी व्याख्यान भी हुई। इनमें विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने शोध निष्कर्ष और विचार साझा करते हुए पृथ्वी विज्ञान, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।</p>
<p style="text-align:justify;">समापन सत्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक राजेंद्र कुमार ने भूवैज्ञानिक मानचित्रण और खनिज अन्वेषण में आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता पर बल दिया। बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एम. जी. ठक्कर ने अतीत के जलवायु परिवर्तनों को समझकर भविष्य की चुनौतियों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता बताई। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, नई दिल्ली के डॉ. नीलाय खरे ने महासागरीय संसाधनों के सतत दोहन और तटीय पर्यावरण की सुरक्षा को समय की मांग बताया। अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र, नई दिल्ली से आए पंकज कुमार ने पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में उन्नत प्रयोगशाला उपकरणों और प्रयोगात्मक अनुसंधान के महत्व को साझा किया। </p>
<p style="text-align:justify;">नागालैंड विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय के डीन प्रो. संतोष कुमार सिंह, बीएचयू वाराणसी के प्रो. उमा कांत शुक्ला, केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, धनबाद के डॉ. अभय कुमार सिंह, प्रो. राज कुमार सिंह (आईआईटी, भुवनेश्वर) , राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील सिंह, प्रो. अनिल भारद्वाज, प्रो. उमा कांत शुक्ल, प्रो. संतोष कुमार सिंह, प्रो. ध्रुव सेन सिंह, सह-संयोजक डॉ. राजेश सिंह, सह-संयोजक डॉ. मनोज कुमार यादव एवं डॉ. विनीत कुमार ने भी विचार रखे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>छात्रों ने दो पोस्टर प्रस्तुति</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जीओकॉन-2026 के पोस्टर सत्र में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के शोधार्थियों व वैज्ञानिकों द्वारा 65 शोध पत्र पोस्टरों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। पोस्टर प्रस्तुति में शिवेंद्र द्विवेदी प्रथम, विशेष गुप्ता द्वितीय, प्रीति को तृतीय स्थान तथा वैभव सिंह को सांत्वना पुरस्कार मिला।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>छोटे प्रयास, बड़ा प्रभाव अभियान की शुरुआत</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनमानस को छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित करना है। इसके अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण, जल व ऊर्जा के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, हरित गृह गैसों में कमी तथा प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम करने की अपील की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 10:24:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘जियोकोन-2026’ में जुटेंगे देशभर के भूविज्ञानी, दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज से शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में “सतत पर्यावरण के लिए भू-विज्ञान और जलवायु परिवर्तन” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन जियोकोन-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में 29 विश्वविद्यालयों व करीब 20 प्रमुख राष्ट्रीय शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक भी सम्मिलित होंगे। सम्मेलन का उद्घाटन आज विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित होगा।</p>
<p>देशभर से आए वैज्ञानिक सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, सतत संसाधन प्रबंधन, हिमालयी भूविज्ञान, भूजल अध्ययन, पृथ्वी की पर्पटी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574779/geologists-from-across-the-country-will-gather-at-lucknow-university-for--geocon-2026---a-two-day-national-conference-starting-today"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/एलयू.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में “सतत पर्यावरण के लिए भू-विज्ञान और जलवायु परिवर्तन” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन जियोकोन-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में 29 विश्वविद्यालयों व करीब 20 प्रमुख राष्ट्रीय शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक भी सम्मिलित होंगे। सम्मेलन का उद्घाटन आज विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित होगा।</p>
<p>देशभर से आए वैज्ञानिक सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, सतत संसाधन प्रबंधन, हिमालयी भूविज्ञान, भूजल अध्ययन, पृथ्वी की पर्पटी का विकास व आधुनिक भू-विज्ञान तकनीकों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। देश भर के विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों द्वारा 100 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।</p>
<h3><strong>यह वैज्ञानिक रहेंगे मौजूद</strong></h3>
<p>भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना के निदेशक प्रो. टीएन सिंह, सीएसआईआर-उत्तर पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, जोरहाट के निदेशक डॉ. वीएम तिवारी, सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा के निदेशक प्रो. सुनील कुमार सिंह, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद के निदेशक डॉ. धीरज पाण्डेय, राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम के निदेशक प्रो. एनवी चालपति राव, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलरेटर सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एसी पाण्डेय उपस्थित रहेंगे। विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुव सेन सिंह ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और युवा शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 10:43:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ध्यान करने से तनाव के हार्मोन कॉर्टिसोल होता है कम, लखनऊ विश्वविद्यालय में साप्ताहिक योग शिविर का हो रहा आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> ध्यान करने से मन की एकाग्रता बढ़ती, ध्यान का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह मन को शांत करता है और तनाव को काम करता है। आज के समय में काम का दबाव, पढ़ाई का तनाव और व्यक्तिगत समस्याएं व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान कर देती हैं, नियमित रूप से ध्यान करने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ योग एंड अल्टरनेटिव मेडिसिंस विभाग के आयोजित कार्यक्रम में योग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत यादव ने कहा। विश्वविद्यालय में इंडियन योग फेडरेशन के तत्वाधान में योग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574460/meditation-reduces-the-stress-hormone-cortisol--lucknow-university-is-organizing-a-weekly-yoga-camp"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(18)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> ध्यान करने से मन की एकाग्रता बढ़ती, ध्यान का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह मन को शांत करता है और तनाव को काम करता है। आज के समय में काम का दबाव, पढ़ाई का तनाव और व्यक्तिगत समस्याएं व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान कर देती हैं, नियमित रूप से ध्यान करने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ योग एंड अल्टरनेटिव मेडिसिंस विभाग के आयोजित कार्यक्रम में योग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत यादव ने कहा। विश्वविद्यालय में इंडियन योग फेडरेशन के तत्वाधान में योग सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">योग सप्ताह के दूसरे दिन विश्वविद्यालय के गौरव स्थल पर ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं ने ध्यान का अभ्यास किया। फैकल्टी ऑफ योग के कोआर्डिनेटर डॉ. अमरजीत यादव ने बताया कि कई वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि ध्यान करने से कॉर्टिसोल का स्तर कम हो जाता है जिससे व्यक्ति अधिक शांत और संतुलित महसूस करता है। नियमित अभ्यास से मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ती है और स्मरण शक्ति भी बेहतर होती है। ध्यान का प्रभाव मन ही नहीं शरीर पर भी पड़ता है। ध्यान शिविर में योग विभाग के अंकित गौतम, संजना, मनीषा, अर्चना, कृष्ण बिहारी वाजपेई, दिवाकर, श्वेतालिका, पूजा पाठक, सुनीता यादव मोनिका सिंह, विनीत, सविता रंजन, उषा गौतम, आशा रघुवंशी ने भाग लिया।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>ध्यान से होने वाले लाभ</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">-रक्तचाप नियंत्रित रहता है।<br />-हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है।<br />-नींद की गुणवत्ता सुधरता है।<br />-प्रतिरक्षा प्रणाली में मजबूत होती है।<br />-अनिद्रा की बीमारी दूर होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574460/meditation-reduces-the-stress-hormone-cortisol--lucknow-university-is-organizing-a-weekly-yoga-camp</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 12:21:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एआई से लेकर सूचना प्रौद्यौगिकी तक है संस्कृत प्रासंगिक, वैश्विक विदुषी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में संस्कृत विशेषज्ञों ने रखे विचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि संस्कृत भाषा धर्म और जाति से अलग भारत की सांस्कृतिक भाषा है। आज भी यह भाषा कंम्पयूटर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तक के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भाषा है।</p>
<p>ग्लोबल संस्कृत फोरम एवं संस्कृत तथा प्राकृत भाषा विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित तृतीय वैश्विक विदुषी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस पर चार विशिष्ट व्याख्यान सत्रों का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता आर्य कन्या पीजी कॉलेज, लखीमपुर खीरी की आचार्या प्रो. सुरचना त्रिवेदी ने की उपाध्यक्षता डॉ. दीप्ति विष्णु ने निभाई। नौ विदुषियों ने “शक्ति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574444/sanskrit-is-relevant-from-ai-to-information-technology--sanskrit-experts-share-their-views-at-the-global-scholars-international-conference"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-02/एलयू.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि संस्कृत भाषा धर्म और जाति से अलग भारत की सांस्कृतिक भाषा है। आज भी यह भाषा कंम्पयूटर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तक के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भाषा है।</p>
<p>ग्लोबल संस्कृत फोरम एवं संस्कृत तथा प्राकृत भाषा विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित तृतीय वैश्विक विदुषी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस पर चार विशिष्ट व्याख्यान सत्रों का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता आर्य कन्या पीजी कॉलेज, लखीमपुर खीरी की आचार्या प्रो. सुरचना त्रिवेदी ने की उपाध्यक्षता डॉ. दीप्ति विष्णु ने निभाई। नौ विदुषियों ने “शक्ति अपनी पूर्णकला में स्फुरित” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।</p>
<p>कार्यक्रम में डॉ. अशोक कुमार शतपथी, डॉ. शोभाराम दुबे, डॉ. नमिता निगम, प्रो. वंदना द्विवेदी, प्रो. शालिनी साहनी ने शोध पत्रों का वाचन किया। मुख्य अतिथि ग्लोबल संस्कृत फोरम के अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. कपिल मेहता (टेक्सास विश्वविद्यालय, अमेरिका) रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574444/sanskrit-is-relevant-from-ai-to-information-technology--sanskrit-experts-share-their-views-at-the-global-scholars-international-conference</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 11:12:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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