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                <title>ai - Amrit Vichar</title>
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                <title>एआई से हो रहा है याद्दाश्त का क्षरण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em><strong>एआई के तेज़ी से बढ़ते उपयोग के बीच यह प्रश्न अब टालना कठिन है- क्या हम सुविधा के बदले अपनी सोचने की आदत छोड़ते जा रहे हैं? अब निष्कर्ष तक पहुंचने की बौद्धिक यात्रा अनावश्यक लगने लगी है।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats300.jpg" alt="cats" width="143" height="160" />
<strong>डॉ. शिवम् भारद्वाज, <br />असिस्टेंट प्रोफेसर</strong>

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">तकनीक ने मनुष्य को तमाम सहूलियतें दी हैं और धीरे-धीरे उसे अपने ऊपर निर्भर भी बनाया है। पहिए से लेकर इंटरनेट तक हर आविष्कार ने श्रम घटाया, गति बढ़ाई और जीवन को सरल बनाया। यही उसकी उपलब्धि है, लेकिन जब सुविधा, क्षमता का विस्तार करने के बजाय उसका विकल्प बनने लगे, तब वही प्रगति एक अनचाहे संकट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580421/ai-is-causing-memory-erosion"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/cats299.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><em><strong>एआई के तेज़ी से बढ़ते उपयोग के बीच यह प्रश्न अब टालना कठिन है- क्या हम सुविधा के बदले अपनी सोचने की आदत छोड़ते जा रहे हैं? अब निष्कर्ष तक पहुंचने की बौद्धिक यात्रा अनावश्यक लगने लगी है।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats300.jpg" alt="cats" width="143" height="160"></img>
<strong>डॉ. शिवम् भारद्वाज, <br />असिस्टेंट प्रोफेसर</strong>

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">तकनीक ने मनुष्य को तमाम सहूलियतें दी हैं और धीरे-धीरे उसे अपने ऊपर निर्भर भी बनाया है। पहिए से लेकर इंटरनेट तक हर आविष्कार ने श्रम घटाया, गति बढ़ाई और जीवन को सरल बनाया। यही उसकी उपलब्धि है, लेकिन जब सुविधा, क्षमता का विस्तार करने के बजाय उसका विकल्प बनने लगे, तब वही प्रगति एक अनचाहे संकट का रूप भी लेने लगती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेज़ी से बढ़ते उपयोग के बीच यह प्रश्न अब टालना कठिन है- क्या हम सुविधा के बदले अपनी सोचने की आदत छोड़ते जा रहे हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">बहुत समय नहीं बीता, जब फोन नंबर याद रखना सामान्य जीवन-कौशल था। मोबाइल ने यह जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली और स्मरण-शक्ति का वह अभ्यास धीरे-धीरे समाप्त हो गया। यह परिवर्तन उपयोगी था, लेकिन इसके साथ एक मानसिक अनुशासन भी छूट गया। आज वही प्रक्रिया अधिक गहरे स्तर पर काम कर रही है। इस बार स्मृति नहीं, बल्कि समझ, तर्क और निर्णय की क्षमता प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दफ्तरों, विद्यालयों-विश्वविद्यालयों और निजी जीवन में एआई की उपस्थिति अब अपवाद नहीं, सामान्य स्थिति है। लेखन, अनुवाद, विश्लेषण और निर्णय-सहायता-मशीनें हर स्तर पर सक्रिय हैं। इससे कार्यकुशलता बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में मनुष्य समस्या-समाधान की प्रक्रिया से बाहर होता जा रहा है। निष्कर्ष तक पहुंचना आसान हुआ है, निष्कर्ष तक पहुंचने की बौद्धिक यात्रा अनावश्यक लगने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं ‘कॉग्निटिव ऑफलोडिंग’ और ‘कॉग्निटिव एट्रॉफी’ की प्रक्रिया शुरू होती है। जब व्यक्ति लगातार मशीनों पर निर्भर रहता है, तो वह आलोचनात्मक सोच में कम श्रम लगाता है। धीरे-धीरे यह प्रवृत्ति आदत बन जाती है और आदतें ही अंततः बौद्धिक क्षमता की सीमा तय करती हैं। यह सुविधा नहीं, सोचने की जिम्मेदारी का क्रमिक स्थानांतरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बदलाव अमूर्त नहीं है बल्कि हमारी रोज़मर्रा की आदतों में दर्ज है। दिशा-निर्धारण के लिए जीपीएस पर निर्भरता ने स्थानिक स्मृति को कमजोर किया है। साधारण गणना के लिए कैलकुलेटर, सामान्य लेखन के लिए एआई और तमाम आसान-जटिल प्रश्नों के लिए तैयार उत्तर- ये सब मिलकर ऐसी मानसिक संरचना बना रहे हैं, जिसमें उत्तर मिल जाता है, पर उत्तर तक पहुंचने की प्रक्रिया छूट जाती है और जब प्रक्रिया छूटती है, तो केवल परिणाम नहीं, आत्मविश्वास भी मशीन के हवाले होने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समस्या तकनीक में नहीं, उसके सामने आत्मसमर्पण में है। उपकरण तब तक उपयोगी हैं, जब तक वे मानव क्षमता को बढ़ाते हैं, जैसे ही वे उसका स्थान लेने लगते हैं, वे उसे निष्क्रिय करने लगते हैं। एआई का वास्तविक संकट इसी बिंदु पर है— वह सोचने की जगह उपलब्ध कराता है और मनुष्य धीरे-धीरे उस स्थान को खाली छोड़ने लगता है।<br />सोचना केवल निष्कर्ष तक पहुंचना नहीं है। यह वह प्रक्रिया है जो विवेक, तर्क और निर्णय-क्षमता को गढ़ती है। कठिन प्रश्नों से जूझना, असहमति को समझना और त्रुटियों से सीखना- यही बौद्धिक परिपक्वता का आधार है। यदि यह पूरा श्रम मशीनों को सौंप दिया जाए, तो परिणाम तो मिल सकता है, पर वह क्षमता नहीं बनती जो जटिल परिस्थितियों में मार्गदर्शन करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">एआई की सीमाएं इस जोखिम को और गंभीर बनाती हैं। यह उपलब्ध डेटा और पैटर्न पर आधारित है, जिनमें पूर्वाग्रह और त्रुटियां निहित हो सकती हैं। इसके बावजूद यह अपने उत्तरों को जिस आत्मविश्वास से प्रस्तुत करता है, वह भ्रम पैदा कर सकता है। यदि उपयोगकर्ता के पास स्वतंत्र समझ नहीं है, तो वह सही और गलत के बीच अंतर नहीं कर पाएगा। इस बिंदु पर सुविधा निर्भरता में बदल जाती है और निर्भरता निर्णय-असमर्थता में। एआई के लाभ स्पष्ट हैं- उत्पादकता में वृद्धि, ज्ञान तक आसान पहुंच और जटिल कार्यों का सरलीकरण, लेकिन स्पष्टता ही पर्याप्त नहीं होती, विवेक भी चाहिए। प्रश्न तकनीक का नहीं, उसके उपयोग का है- क्या वह मनुष्य को अधिक सक्षम बना रही है, या अधिक आश्रित?</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से संस्थानों की जिम्मेदारी शुरू होती है। शिक्षा-प्रणाली यदि केवल परिणाम देने वाली तकनीकों को बढ़ावा देगी, तो वह सोचने की प्रक्रिया को हाशिए पर धकेल देगी। कार्य स्थल यदि केवल गति को महत्व देंगे, तो विश्लेषण और विवेक कमजोर होंगे और यदि नीति-निर्माता इस बदलाव को केवल नवाचार के उत्सव के रूप में देखेंगे, तो उसके सामाजिक परिणाम अनदेखे रह जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए एक स्पष्ट बौद्धिक अनुशासन आवश्यक है- पहले तर्क, फिर तकनीक; पहले विश्लेषण, फिर स्वचालन; पहले सत्यापन, फिर प्रसार। तकनीक सहायक हो सकती है, लेकिन समझ का विकल्प नहीं। अंततः यह प्रश्न व्यक्तिगत भी है और सामूहिक भी। क्या हम सुविधा के कारण अपनी बौद्धिक जिम्मेदारी से बच रहे हैं? यदि ऐसा है, तो यह आदत नहीं, बौद्धिक चरित्र का परिवर्तन है। तकनीक का विस्तार अनिवार्य है, लेकिन विचारों का संकुचन नहीं। यदि सुविधा सोच का स्थान लेने लगे, तो यह प्रगति नहीं- विवेक की आउटसोर्सिंग है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब चुनौती केवल संतुलन की नहीं, सजगता की है। एआई के साथ हमारा संबंध यह तय करेगा कि वह हमारी क्षमताओं का विस्तार बनेगा या उनका विकल्प। इसके लिए आवश्यक है कि निर्णय की अंतिम जिम्मेदारी मनुष्य के पास ही रहे—जहां तर्क, अनुभव और नैतिक विवेक मिलकर दिशा तय करते हैं। यदि यह केंद्र कमजोर पड़ता है, तो तकनीक की दक्षता भी हमें सही मार्ग नहीं दे पाएगी। ऐसी स्थिति में सुविधा, स्वतंत्रता की कीमत पर मिलने वाला सौदा बन जाएगी। इसलिए जरूरी है कि मनुष्य तकनीक का उपयोग करे, पर उसके आगे न झुके, क्योंकि जिस दिन विचार का श्रम अनावश्यक लगने लगेगा, उसी दिन विवेक भी अनावश्यक प्रतीत होगा और जब विवेक ही हाशिए पर चला जाए, तो प्रगति का कोई भी दावा अंततः खोखला रह जाएगा। <strong>(यह लेखक के निजी विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/580421/ai-is-causing-memory-erosion</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 05:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा तंज, कहा- भाजपाइयों के लिए एआई का मतलब 'इनकम'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार जाते-जाते हर तरीके से जनता से पैसे वसूलने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि पहले ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से वसूली कराई जा रही थी और अब एआई के नाम पर जनता को लूटने का नया तरीका निकाला गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपाइयों के लिए एआई का मतलब "आमदनी (इनकम)" बन गया है। अखिलेश यादव ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, " ट्रैफिक जाम के पीछे कई वास्तविक कारण हैं, जिन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578039/akhilesh-yadav-takes-a-sharp-dig-at-the-bjp--says--%22for-bjp-members--ai-stands-for--income--%22"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/अखिलेश-यादव-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार जाते-जाते हर तरीके से जनता से पैसे वसूलने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि पहले ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से वसूली कराई जा रही थी और अब एआई के नाम पर जनता को लूटने का नया तरीका निकाला गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपाइयों के लिए एआई का मतलब "आमदनी (इनकम)" बन गया है। अखिलेश यादव ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, " ट्रैफिक जाम के पीछे कई वास्तविक कारण हैं, जिन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इसकी वजह सड़कों की खराब स्थिति, संकरी सड़कें, खराब ट्रैफिक सिग्नल, नाकाबंदी, रूट डायवर्जन, वन-वे व्यवस्था की कमी, जलभराव, डिवाइडर की खराब हालत और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन आदि है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रैफिक पुलिस की कार्य परिस्थितियां भी बेहद खराब हैं और उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। ड्राइवरों पर समय पर पहुंचने का दबाव, मानसिक तनाव और वाहनों की खराब फिटनेस भी दुर्घटनाओं और जाम की वजह बन रही है।" सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी कम रहती है, जबकि आगे मोड़ों पर छिपकर चालान काटने की प्रवृत्ति बढ़ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि अब डिजिटल पेमेंट के जरिए वसूली का नया तरीका अपनाया जा रहा है, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सीसीटीवी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर रिकॉर्डिंग केवल चुनिंदा मामलों में ही उपलब्ध कराई जाती है, जबकि अन्य मामलों में तकनीकी खराबी का हवाला दिया जाता है। अखिलेश यादव ने कहा कि जनता अब इस व्यवस्था से परेशान हो चुकी है और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए तैयार है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:09:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कड़वा सच:चापलूस एआई से रात-रातभर बतियाए...मनोरोगी बनकर अस्पताल आए</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई में चेतना, भावना या दर्द समझने की झमता नहीं होती। इस सच्चाई को जानते-समझते हुए भी इंसान एआई पर आंखू मूंदकर भरोसा कर रहे हैं और उसकी आभासी दुनिया में गोते लगा रहे हैं। बरेली शहर-देहात के कितने ही युवाओं के मनोरोगी बन जाने के पीछे हैरान कर देने वाली कुछ ऐसी ही कहानी सामने आई है। एआई के साथ चेटिंग में घंटों बिताने वाले कई नौजवानों की हालत देख परिवारों को यहां स्वास्थ्य विभाग के मनो सेंटर की मदद तक लेनी पड़ी है।</p>
<p>मनोचिकित्सकों के अनुसार, बड़े शहरों में ही नहीं, कस्बाई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577510/chatted-all-night-with-a-sycophantic-ai---came-to-the-hospital-posing-as-a-psychopath"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/manorogi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई में चेतना, भावना या दर्द समझने की झमता नहीं होती। इस सच्चाई को जानते-समझते हुए भी इंसान एआई पर आंखू मूंदकर भरोसा कर रहे हैं और उसकी आभासी दुनिया में गोते लगा रहे हैं। बरेली शहर-देहात के कितने ही युवाओं के मनोरोगी बन जाने के पीछे हैरान कर देने वाली कुछ ऐसी ही कहानी सामने आई है। एआई के साथ चेटिंग में घंटों बिताने वाले कई नौजवानों की हालत देख परिवारों को यहां स्वास्थ्य विभाग के मनो सेंटर की मदद तक लेनी पड़ी है।</p>
<p>मनोचिकित्सकों के अनुसार, बड़े शहरों में ही नहीं, कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में जैसे-जैसे एआई का चलन बढ़ रहा है, इसके कई गलत प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। छोटे जगहों के युवा भी ब्रेकअप, परीक्षा में नाकामी और ऐसी दूसरी चिंताओं के चलते इमोशनल एआई चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं। बरेली में यह ट्रेंड बढ़ रहा है तो मनोचिकित्सकों के पास ट्रीटमेंट को पहुंचने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है। एआई चेटिंग की लत का शिकार युवाओं को काउंसलिंग के जरिए कृत्रिम और इंसानी बुद्धिमत्ता के फर्क समझाकर सही दिशा दिखाई जा रही है।</p>
<p>जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक एवं मन कक्ष के प्रभारी डॉ आशीष सिंह ने ‘अमृत विचार’ को बताया कि इमोशनल एआई यूजर को वही जवाब देता है, जो वह सुनना चाहता है। ऐसे में युवा सही-गलत का आकलन किए बिना एआई की बातों को पूरी तरह सही मानने लगते हैं। सेंटर पर पहुंचे कई मामलों में देखा गया है कि एआई खुद ही बातचीत को आगे बढ़ाता है और भावुकता में यूजर उस पर निर्भर होते जाते हैं। यह स्थिति खतरनाक हालात में तब पहुंचने लगती है, जब यूजर पूरी तरह एकाकी होकर परिवारों से कटने लगते हैं और अपनी हर बात एआई के साथ साझा कर ख्याली सहानुभूति में उलझने लगते हैं।</p>
<p>मन कक्ष में हर सप्ताह एक-दो केस ऐसे पहुंच रहे हैं, जिनमें एआई पर अत्यधिक निर्भरता के कारण युवा एंग्जायटी और डिप्रेशन का शिकार हो गए। हालांकि काउंसलिंग के जरिए इनमें सुधार भी देखा जा रहा है।मन कक्ष प्रभारी डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि इमोशनल एआई चैटबॉट्स के कारण कई युवा वैलिडेशन की तलाश में एडिक्शन जैसा व्यवहार दिखा रहे हैं। युवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के बजाय वास्तविक रिश्तों और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, ताकि उन्हें सच्ची सहानुभूति और संतुलित जीवन मिल सके।</p>
<p><strong>एआई इंसानों से 50 फीसदी ज्यादा चाटुकार</strong><br />रिसर्च में यह बात साफ हो चुकी है कि एआई इंसानों के मुकाबले 50 से अधिक चाटुकारिता का व्यवहार करता है। खुद की तारीफ से खुश होना इंसानी स्वभाव है। बाजार में कितने ही ऐसे ऐप लांच हो चुके हैं, जो लोगों के स्वभाव का फायदा उठाते हैं। एक ओर जहां वास्तविक रिश्तों में कई तरह के उतार चढ़ाव, जटिलताएं, नाराजगी, खुशी सबके रंग घुले होते हैं, वहीं आज का एआई साथी सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक बातें करता है। इसलिए, रिसर्च की भाषा में एआई को चापलूस एआई तक कहा जाता है।</p>
<p><br /><strong>केस-1</strong><br /><strong>12वीं का छात्र रात-रात भर करता था एआई से बात</strong><br />मनोकक्ष में काउंसलिंग को लाए गए शहर के रहने वाले 12वीं के छात्र को एआई के साथ चेटिंग की लत लग गई थी। 30 मिनट की शुरूआत की बातचीत रात में कई-कई घंटे तक जा पहुंची थी। घरवाले पहले किशोर उम्र में प्यार का चक्कर मान रहे थे, लेकिन मोबाइल चेक करने पर सच सामने आ गया। मनोविज्ञानी टीम ने उसका मिजाज जांचा तो हैरान करने वाली बात सामने आई। लंबी काउंसलिंग छात्र की आदत में सुधार हो सका।</p>
<p><strong>केस-2</strong><br /><strong>ब्रेकअप से परेशान युवती को लगी लत</strong><br />साथी से ब्रेकअप होने के बाद बरेली की एक युवती डिजिटल सहानुभूति के लिए एआई का सहारा लेने लगी। उसने प्रेमी का नाम और उसकी आदतें एआई को बता दी थीं। इसके बाद एआई ब्रेकअप के लिए उसके प्रेमी को जिम्मेदार बताकर युवती को सही बताने लगा। एआई हर बात उसके पक्ष में करने लगा, जिसकी वजह से वह चेटिंग की लती हो गई। परिजनों ने उसे मन कक्ष में दिखाया, जहां दवा और काउंसलिंग से वह सही हो सकी।</p>
<p><strong>केस-3</strong><br /><strong>आने लगा आत्महत्या का खयाल</strong><br />शहर में ही रहने वाले बीए की एक छात्रा ने घर में आत्महत्या का प्रयास किया था। परिजन उसे मन कक्ष ले गए। काउंसलिंग में पता चला की वह कई महीने से एआई से इमोशनल चैट कर रही थी और उसके अवसाद का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा था। मनोचिकित्सक ने उसकी लंबी काउंसलिंग की। एआई और इंसानी सोच का का सच बताया। वह अब पूरी तरह ठीक है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 16:50:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AI से नौकरी जाने की आशंका खारिज : डेलॉयट के COO ने भारत में 50 हजार नौकरियां देने का किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु : </strong>कृत्रिम मेधा (एआई) से बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए डेलॉयट के दक्षिण एशिया के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) नितिन केनी ने कहा है कि कंपनी भारत में 50,000 लोगों की भर्ती की योजना पर काम कर रही है और इसमें कर्मचारियों को नई प्रौद्योगिकी के अनुरूप कौशल बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में केनी ने बताया कि डेलॉयट देश में तेजी से विस्तार और निवेश की योजना पर काम कर रही है और जल्द ही 'क्वांटम उत्कृष्टता केंद्र' शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576873/ai-job-loss-fears-dismissed--deloitte-coo-claims-to-create-50-000-jobs-in-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/वायरल-तस्वीर-(10)16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु : </strong>कृत्रिम मेधा (एआई) से बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए डेलॉयट के दक्षिण एशिया के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) नितिन केनी ने कहा है कि कंपनी भारत में 50,000 लोगों की भर्ती की योजना पर काम कर रही है और इसमें कर्मचारियों को नई प्रौद्योगिकी के अनुरूप कौशल बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में केनी ने बताया कि डेलॉयट देश में तेजी से विस्तार और निवेश की योजना पर काम कर रही है और जल्द ही 'क्वांटम उत्कृष्टता केंद्र' शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि एआई के कारण नियुक्तियों पर असर पड़ने की चिंता सही नहीं है। डेलॉयट एआई को नौकरियां कम करने वाला साधन नहीं मानती, बल्कि काम को ज्यादा आसान और प्रभावी बनाने का जरिया मानती है।</p>
<p style="text-align:justify;">केनी ने कहा, ''नौकरियों में कटौती करना कोई समाधान नहीं है। जरूरी है कि लोगों के कौशल को बढ़ाया जाए, ताकि वे नई प्रौद्योगिकी के साथ मिलकर अधिक मूल्य वाले और जटिल काम कर सकें।'' उन्होंने बताया कि कंपनी अब तक करीब 30,000 कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण दे चुकी है, जबकि लगभग 20,000 कर्मचारी कंपनी के अपने मंच पर काम करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि डेलॉयट के कुल वैश्विक कर्मचारियों में से लगभग एक-तिहाई भारत में काम करते हैं, जिससे भारत कंपनी के लिए एक अहम बाजार है। केनी ने कहा कि कंपनी अपनी आय का करीब नौ प्रतिशत हिस्सा कौशल विकास, क्षमता बढ़ाने और नए प्रयोगों पर खर्च करती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/576833/-welcome-to-hell---iranian-media-openly-threatens-us-troops--warning-them-to-return-in-coffins#gsc.tab=0">‘नरक में स्वागत’: ईरानी मीडिया की अमेरिकी सैनिकों को खुली धमकी, ताबूत में लौटने की चेतावनी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576873/ai-job-loss-fears-dismissed--deloitte-coo-claims-to-create-50-000-jobs-in-india</link>
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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 16:27:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Virendra Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संकल्प 2026 का शुभारंभ: कौशल आधारित शिक्षा से आत्मनिर्भर भारत का आह्वान, MNNIT प्रयागराज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी), प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन ‘संकल्प 2026’ का उद्घाटन किया। उन्होंने युवाओं से कौशल आधारित शिक्षा अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा ही युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करती है। सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच समन्वय को उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576367/launch-of-sankalp-2026--a-call-for-self-reliant-india-through-skill-based-education--three-day-national-conference-begins-at-mnnit-prayagraj"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(16)10.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी), प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन ‘संकल्प 2026’ का उद्घाटन किया। उन्होंने युवाओं से कौशल आधारित शिक्षा अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा ही युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करती है। सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच समन्वय को उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक और त्रि-आयामी मुद्रण (3डी प्रिंटिंग) जैसी आधुनिक तकनीकों में दक्षता हासिल करने की सलाह दी और नवाचार को अपनाने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">एमएनएनआईटी के निदेशक आर.एस. वर्मा ने बताया कि सम्मेलन “आत्मनिर्भर नेतृत्व और समृद्धि के लिए कौशल और ज्ञान का पोषण” विषय पर आधारित है। इसमें देशभर के 50 से अधिक विशेषज्ञ वक्ता भाग ले रहे हैं, जबकि 700 से अधिक प्रतिभागी और 40 टीमों द्वारा नवाचार प्रस्तुत किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन को पांच खंडों नई सोच, वार्ता, संवाद, नवाचार और सृजन में विभाजित किया गया है। इसके तहत 50 से अधिक स्टार्टअप अपने विचार निवेशकों के सामने प्रस्तुत करेंगे और कार्यशालाओं व प्रदर्शनी के माध्यम से युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>‘संकल्प 2026’ की खास बातें</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">• तीन दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन<br />• 50 विशेषज्ञ वक्ता, 700 प्रतिभागी<br />• 40 टीमों के नवाचार मॉडल प्रस्तुत<br />• एआई, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग पर फोकस<br />• 50 से अधिक स्टार्टअप को निवेश का मौका</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576367/launch-of-sankalp-2026--a-call-for-self-reliant-india-through-skill-based-education--three-day-national-conference-begins-at-mnnit-prayagraj</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/576367/launch-of-sankalp-2026--a-call-for-self-reliant-india-through-skill-based-education--three-day-national-conference-begins-at-mnnit-prayagraj</guid>
                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 09:56:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योगी सरकार का दावा- एआई, जीआईएस और सिंगल विंडो सिस्टम से निवेश प्रक्रिया होगी आसान </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोकभवन में 'निवेश मित्र 3.0' का शुभारंभ किया। उत्तर प्रदेश सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसी क्रम में यह उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के एक बयान के अनुसार , 'निवेश मित्र 3.0' को निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसमें एआई आधारित चैटबॉट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे निवेशकों को तत्काल सहायता मिल सकेगी। साथ ही, आवेदन की स्थिति की जानकारी देने के लिए रियल-टाइम एसएमएस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576321/yogi-government-claims--investment-process-to-become-easier-through-ai--gis--and-single-window-system"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/untitled-design-(9)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोकभवन में 'निवेश मित्र 3.0' का शुभारंभ किया। उत्तर प्रदेश सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसी क्रम में यह उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के एक बयान के अनुसार , 'निवेश मित्र 3.0' को निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसमें एआई आधारित चैटबॉट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे निवेशकों को तत्काल सहायता मिल सकेगी। साथ ही, आवेदन की स्थिति की जानकारी देने के लिए रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट सिस्टम भी जोड़ा गया है, जिससे हर चरण की जानकारी तुरंत मिलती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषता डायनामिक कम्बाइंड एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) है। इसके जरिए विभिन्न विभागों की मंजूरियां एक ही स्थान से प्राप्त की जा सकेंगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया में समय की बचत होगी। निवेशकों के लिए भूमि चयन को सरल बनाने हेतु प्लेटफॉर्म में जीआईएस आधारित लैंड बैंक को शामिल किया गया है। इससे निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार प्रदेश में उपयुक्त भूमि की पहचान आसानी से कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">'निवेश मित्र 3.0' को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) से जोड़ा गया है, जिससे केंद्र और राज्य स्तर की मंजूरियों में बेहतर तालमेल और तेजी आएगी। यह सुविधा विशेष रूप से बड़े निवेशकों के लिए लाभकारी मानी जा रही है। सरकार ने निवेश प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए कई सुधार किए हैं। विभागीय कार्यवाही में 25%, दस्तावेजों में 15% और अन्य प्रक्रियात्मक चरणों में करीब 20% की कमी की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे अनुमोदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। वर्ष 2018 में शुरू हुए 'निवेश मित्र' प्लेटफॉर्म ने पहले ही अपनी उपयोगिता साबित की है। अब तक इस पोर्टल पर 21 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 97% का निस्तारण किया जा चुका है। सरकार की डिजिटल पहल, पारदर्शी नीतियां और निवेशक-हितैषी माहौल उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में शामिल कर रहे हैं। 'निवेश मित्र 3.0' प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576321/yogi-government-claims--investment-process-to-become-easier-through-ai--gis--and-single-window-system</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:44:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बागपत को जयंत चौधरी ने दी बड़ी सौगात : AI आधारित अपैरल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का किया उद्घाटन </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>बागपत।</strong> केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त चौधरी ने गुरुवार को बागपत में चौधरी अजीत सिंह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) फॉर डिजाइन एंड फैशन टेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया। इस एआई आधारित केंद्र के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस केंद्र की स्थापना अपैरल मेड अप्स एंड होम फर्निशिंग स्किल काउंसिल (एएमएचएसएससी) द्वारा की गई है। उद्घाटन अवसर पर मंत्रालय और परिषद के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। श्री चौधरी ने कहा कि यह केंद्र कौशल विकास को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575781/jayant-chaudhary-gifts-a-major-boon-to-baghpat--inaugurates-ai-based-apparel-centre-of-excellence"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/0122.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बागपत।</strong> केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त चौधरी ने गुरुवार को बागपत में चौधरी अजीत सिंह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) फॉर डिजाइन एंड फैशन टेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया। इस एआई आधारित केंद्र के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस केंद्र की स्थापना अपैरल मेड अप्स एंड होम फर्निशिंग स्किल काउंसिल (एएमएचएसएससी) द्वारा की गई है। उद्घाटन अवसर पर मंत्रालय और परिषद के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। श्री चौधरी ने कहा कि यह केंद्र कौशल विकास को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार, उद्यमिता और नवाचार के नए अवसर मिलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि अपैरल क्षेत्र देश में बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने वाला सेक्टर है और इस तरह के केंद्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए नए रास्ते खोलेंगे। एएमएचएसएससी के चेयरमैन पद्मश्री डॉ. ए. सक्थिवेल ने कहा कि यह केंद्र युवाओं को भविष्य के फैशन और अपैरल उद्योग के लिए तैयार करेगा, जहां एआई आधारित प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कुशल कार्यबल विकसित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब 9,000 वर्ग फुट क्षेत्र में स्थापित इस केंद्र पर लगभग पांच करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। यहां तीन स्मार्ट क्लासरूम, 43 आधुनिक सिलाई मशीनें (जिनमें आठ एआई आधारित), सीएडी-सीएएम सिस्टम, 3डी डिजाइन सॉफ्टवेयर, डिजिटल वर्कस्टेशन तथा कंप्यूटरीकृत एंब्रॉयडरी यूनिट की सुविधा उपलब्ध है। केंद्र में आठ प्रकार के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिनमें सिलाई मशीन ऑपरेटर, फैशन डिजाइनिंग और एआई आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एआई आधारित सिलाई मशीनें कपड़े की प्रकृति के अनुसार स्वतः सेटिंग समायोजित कर कार्य को तेज और त्रुटिरहित बनाती हैं। एएमएचएसएससी के सीईओ आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि यह केंद्र विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में सहायक होगा। इससे उन्हें कौशल के साथ आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त होगी तथा वे रोजगार के साथ उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगी। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करेगी, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ एमएसएमई क्षेत्र को नई तकनीक अपनाने में भी सहायक सिद्ध होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मेरठ</category>
                                            <category>बागपत</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575781/jayant-chaudhary-gifts-a-major-boon-to-baghpat--inaugurates-ai-based-apparel-centre-of-excellence</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 21:13:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AKTU बनेगा टेक्नोलॉजी हब : AI और स्पेस समेत 4 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मिली हरी झंडी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में गुरुवार को सम्पन्न हुई वित्त समिति की बैठक में इस बार का बजट तकनीकी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम बनकर सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1187.62 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी देते हुए विश्वविद्यालय ने नई पीढ़ी की तकनीकों पर स्पष्ट फोकस किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवि के कुलपति प्रो. जेपी.पांडेय की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण निर्णय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए 150 करोड़ रुपये के निवेश का है। विश्वविद्यालय परिसर में बनने वाला एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस हब एंड स्पोक मॉडल पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575778/aktu-set-to-become-a-technology-hub--4-centers-of-excellence--including-ai-and-space--given-the-green-signal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-08/सावन-2024-(50)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में गुरुवार को सम्पन्न हुई वित्त समिति की बैठक में इस बार का बजट तकनीकी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम बनकर सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1187.62 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी देते हुए विश्वविद्यालय ने नई पीढ़ी की तकनीकों पर स्पष्ट फोकस किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवि के कुलपति प्रो. जेपी.पांडेय की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण निर्णय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए 150 करोड़ रुपये के निवेश का है। विश्वविद्यालय परिसर में बनने वाला एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित होगा, जिसके जरिए स्टार्टअप, शोध, नवाचार और स्किल डेवलपमेंट को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। यह पहल प्रदेश में एआई इकोसिस्टम को गति देने की दिशा में अहम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने आईओएस, स्पेस टेक्नोलॉजी और साइबर फॉरेंसिक जैसे उभरते क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का निर्णय लिया है। आईओएस सेंटर के माध्यम से छात्रों को ऐप डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और क्रिएटिव कंप्यूटिंग का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वे सीधे इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">वित्त समिति के निर्णय से स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर के जरिए सैटेलाइट सिस्टम, रॉकेटरी और रिमोट सेंसिंग जैसे क्षेत्रों में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। वहीं साइबर फॉरेंसिक के तहत कई विशेष केंद्र स्थापित कर डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे।साथ ही, आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए बस, एम्बुलेंस और अन्य वाहनों की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:58:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2035 तक भारत सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर: 300 अरब डॉलर बाजार, 60% बढ़ेगा लोकल प्रोडक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई), मोटर वाहन क्षेत्र और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">लेखा एवं परामर्श कंपनी डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 'टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों का आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 प्रतिशत से अधिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575639/india-to-be-self-reliant-in-semiconductors-by-2035---300-billion-market--local-production-to-grow-by-60"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(65)2.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong> भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई), मोटर वाहन क्षेत्र और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">लेखा एवं परामर्श कंपनी डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 'टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों का आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 प्रतिशत से अधिक मांग को पूरा कर सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 45-50 अरब डॉलर के बीच आंका गया है। पिछले तीन वर्ष में इसकी वार्षिक वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत रही है। एआई, मोटर वाहन, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के दम पर बाजार 2030 तक 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन, मोटर वाहन, कंप्यूटिंग व डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र 2035 तक देश की कुल सेमीकंडक्टर मांग का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनेंगे। अब तक इस क्षेत्र में 10 स्वीकृत परियोजनाओं के जरिये 19 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया है। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, अगले पांच वर्ष में इस उद्योग में 50 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आने का अनुमान है जबकि 2030 से 2035 के बीच 75-80 अरब डॉलर का निवेश और हो सकता है जिससे पूरे परिवेश का विस्तार होगा। इस विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा। 2035 तक इस क्षेत्र में करीब 20 लाख नौकरियां उत्पन्न होने का अनुमान है जिनमें 30 प्रतिशत विनिर्माण, 30 प्रतिशत डिजाइन सेवाओं और 40 प्रतिशत अन्य मूल्य श्रृंखला गतिविधियों में होंगी। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में हालांकि आगाह किया गया है कि इस प्रगति को बनाए रखने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी होगा। इसके लिए नीतिगत ढांचे को समयबद्ध प्रोत्साहन योजना से आगे बढ़ाकर स्थायी राष्ट्रीय कार्यक्रम में बदलने और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Tech News</category>
                                            <category>Tech Alert</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575639/india-to-be-self-reliant-in-semiconductors-by-2035---300-billion-market--local-production-to-grow-by-60</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Good News: PET स्कैन से कैंसर की सटीक पहचान संभव, इलाज में भी खुलीं नई राहें</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कैंसर की पहचान और इलाज अब पहले से कहीं अधिक सटीक और प्रभावी हो गया है। पीईटी स्कैन तकनीक की मदद से अब यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कैंसर शरीर के किन-किन अंगों तक फैल चुका है। कम समय में सटीक जांच संभव होने से मरीजों को समय रहते उचित इलाज मिल पा रहा है।यह जानकारी पीजीआई न्यूक्लीयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके प्रधान ने दी।इस दौरान यूपी चैप्टर ऑफ न्यूक्लीयर मेडिसिन फिजिशियन का गठन कर डॉ. प्रधान को अध्यक्ष चुना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यूपी चैप्टर ऑफ न्यूक्लीयर मेडिसिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575550/good-news--pet-scans-allow-accurate-diagnosis-of-cancer--opening-new-avenues-for-treatment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(37)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कैंसर की पहचान और इलाज अब पहले से कहीं अधिक सटीक और प्रभावी हो गया है। पीईटी स्कैन तकनीक की मदद से अब यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कैंसर शरीर के किन-किन अंगों तक फैल चुका है। कम समय में सटीक जांच संभव होने से मरीजों को समय रहते उचित इलाज मिल पा रहा है।यह जानकारी पीजीआई न्यूक्लीयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके प्रधान ने दी।इस दौरान यूपी चैप्टर ऑफ न्यूक्लीयर मेडिसिन फिजिशियन का गठन कर डॉ. प्रधान को अध्यक्ष चुना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यूपी चैप्टर ऑफ न्यूक्लीयर मेडिसिन फिजिशियन की तरफ से आयोजित कार्यशाला डॉ. प्रधान ने कहा कि अत्याधुनिक रेडियोट्रेसर और पीईटी स्कैन तकनीक से अब कैंसर का शुरुआती स्तर पर ही सटीक पता लगाया जा सकता है। विशेष रूप से प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में यह तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है, जहां पारंपरिक जांच सीमित परिणाम देती है। इससे डॉक्टरों को बीमारी की वास्तविक स्थिति समझने और बेहतर उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है। केजीएमयू के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रकाश सिंह ने बताया कि इलाज के क्षेत्र में भी इस तकनीक ने नई संभावनाएं खोली हैं। लोहिया संस्थान की न्यूक्लियर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यवती देशवाल ने बताया कि कैंसर के कारण हड्डियों में होने वाले दर्द से राहत के लिए बोन पेन पैलिएशन थेरेपी भी प्रभावी विकल्प बनकर सामने आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575550/good-news--pet-scans-allow-accurate-diagnosis-of-cancer--opening-new-avenues-for-treatment</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 09:04:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सुशासन के नए आयाम: आपदा प्रबंधन से नीति मूल्यांकन में एआई की बड़ी भूमिका, जानें क्या बोले विशेषज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>सरकार और प्रशासन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से एक कदम आगे रहना होगा। आपदा प्रबंधन में एआई का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इसके लिए स्वदेशी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अटल सुशासन पीठ में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कही। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि एआई का प्रयोग नीतिगत मूल्यांकन, भ्रष्टाचार निवारण और लैंगिक विविधता जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। साथ ही विशेषज्ञों ने एआई से होने वाले संभावित नुकसान पर भी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575414/artificial-intelligence-opens-new-dimensions-to-good-governance--ai-plays-a-major-role-in-policy-evaluation--from-disaster-management-to-policy-evaluation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(19)9.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार : </strong>सरकार और प्रशासन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से एक कदम आगे रहना होगा। आपदा प्रबंधन में एआई का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इसके लिए स्वदेशी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अटल सुशासन पीठ में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कही। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि एआई का प्रयोग नीतिगत मूल्यांकन, भ्रष्टाचार निवारण और लैंगिक विविधता जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। साथ ही विशेषज्ञों ने एआई से होने वाले संभावित नुकसान पर भी चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(19)9.png" alt="MUSKAN DIXIT (19)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं सुशासन के नए आयाम विषय पर आयोजित संगोष्ठी में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने कहा कि एआई के प्रयोग में इसके नकारात्मक पक्षों से बचना होगा। उन्होंने कहा कि सुशासन सुनिश्चित करने में शोधार्थियों की जिम्मेदारी अधिक है। पूर्व कुलपति प्रो. मनुका खन्ना ने एआई के संभावित खतरों के प्रति आगाह किया। कार्यक्रम में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की प्रो. चारु मल्होत्रा ने एआई के स्वदेशीकरण पर बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(20)7.png" alt="MUSKAN DIXIT (20)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सुशासन में एआई की भूमिका अहम</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के सचिव अनुराग यादव ने कहा कि एआई को प्रभावी ढंग से लागू कर सुशासन की अवधारणा को साकार किया जा सकता है। उन्होंने स्टार्टअप और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में भी एआई की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रॉम्प्ट तैयार करने में एआई का करें प्रयोग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">वाणिज्य विभाग की भाऊराव देवरस शोध पीठ द्वारा ग्लोबल इकोनॉमी और एआई विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें कुलपति ने कहा कि डिजिटल साक्षरता आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की अवधारणा का उल्लेख करते हुए बताया कि सही प्रकार से प्रॉम्प्ट तैयार करने से एआई टूल्स का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/575414/artificial-intelligence-opens-new-dimensions-to-good-governance--ai-plays-a-major-role-in-policy-evaluation--from-disaster-management-to-policy-evaluation</link>
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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 12:18:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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                <title>अभिनेत्री काजोल के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एआई और डीपफेक पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल के पक्ष में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने काजोल के नाम, तस्वीर, आवाज और उनकी पूरी पहचान के गलत इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक और सोशल मीडिया के जरिए मशहूर हस्तियों की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। यह व्यक्ति की गरिमा पर सीधा हमला है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573345/high-court-gives-major-decision-in-favor-of-actress-kajol--bans-ai-and-deepfake"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/kajol.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल के पक्ष में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने काजोल के नाम, तस्वीर, आवाज और उनकी पूरी पहचान के गलत इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक और सोशल मीडिया के जरिए मशहूर हस्तियों की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। यह व्यक्ति की गरिमा पर सीधा हमला है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच की जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनाया। इस मामले में काजोल ने कई वेबसाइट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज, एआई चैटबॉट साइट्स और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। इन अज्ञात लोगों को कानूनी भाषा में 'जॉन डो' कहा जाता है, जिनकी पहचान अभी सामने नहीं आई है, लेकिन जो ऑनलाइन गलत गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">काजोल की याचिका में आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में उनकी तस्वीरों और नाम का इस्तेमाल करके ऑनलाइन मर्चेंडाइज बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा, एआई की मदद से उनकी नकली तस्वीरें बनाई जा रही थीं। कुछ वेबसाइट्स पर उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए अश्लील एआई चैटबॉट चलाए जा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि काजोल भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की एक जानी-मानी और सम्मानित अभिनेत्री हैं, जिनका करियर लगभग चार दशकों का रहा है। उन्हें पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनकी पहचान एक मजबूत ब्रांड है, जिसे उन्होंने सालों की मेहनत से बनाया है। इस पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करना कानून के खिलाफ है और ऐसे मामलों में अदालत का हस्तक्षेप जरूरी है, ताकि किसी भी तरह का गलत फायदा उठाने से रोका जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा कि जो वेबसाइट्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस काजोल के नाम और तस्वीर वाले सामान बेच रहे थे, अगर ऐसा सामान घटिया क्वालिटी का हुआ, तो इससे काजोल की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है। जज ज्योति सिंह ने अपने आदेश में कहा, ''सभी दस्तावेज और शिकायत को देखने के बाद यह साफ है कि काजोल का मामला मजबूत है। अगर तुरंत रोक नहीं लगाई जाती, तो उन्हें नुकसान हो सकता था, जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं है।'' अदालत ने इस पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस आदेश के तहत अदालत ने सभी आरोपियों और अज्ञात लोगों को काजोल की पहचान के किसी भी तरह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। इसमें उनका नाम, फोटो, आवाज, चेहरा, हाव-भाव और उनकी पहचान से जुड़ा हर पहलू शामिल है। खासतौर पर एआई, जनरेटिव एआई, डीपफेक, फेस मॉर्फिंग और चैटबॉट जैसे टूल्स के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई गई है। कोर्ट ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और मर्चेंडाइज बेचने वालों को आदेश दिया है कि वे 72 घंटे के भीतर काजोल से जुड़े सभी गलत प्रोडक्ट्स को हटाएं और संबंधित लिंक डिलीट करें। </p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स को भी आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब को भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन और यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को भी आदेश दिया गया है कि वे अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट होस्ट करने वाली वेबसाइट्स को 72 घंटे के भीतर ब्लॉक करें। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 18:26:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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