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                <title>Sri lanka Crisis - Amrit Vichar</title>
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                <description>Sri lanka Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>अभी एक साल और झेलना होगा आर्थिक संकट, नए क्षेत्रों पर देना होगा ध्यान : विक्रमसिंघे</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने ऐसी आशंका जताई है कि देश को अभी एक साल तक इस मुश्किल दौर का सामना करना पड़ सकता है। विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को एक सम्मेलन में कहा कि संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए अलग हटकर सोचना होगा और लॉजिस्टिक्स …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/260683/president-ranil-wickremesinghe-said-economic-crisis-will-have-to-be-faced-for-one-more-year-attention-will-have-to-be-given-on-new-areas"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/राष्ट्रपति-रानिल-विक्रमसिंघे.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने ऐसी आशंका जताई है कि देश को अभी एक साल तक इस मुश्किल दौर का सामना करना पड़ सकता है। विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को एक सम्मेलन में कहा कि संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए अलग हटकर सोचना होगा और लॉजिस्टिक्स एवं नाभिकीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा।</p>
<p>उन्होंने ‘‘श्रीलंका को दें नया रूप’’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि देश में किए जाने वाले जरूरी सुधारों के लिए ऊंचे कराधान की भी जरूरत होगी। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा अनुमान है कि अगले छह महीने से एक साल तक यानी अगले साल जुलाई तक हमें अभी मुश्किल दौर का सामना करना पड़ेगा। पुनरुद्धार के लिए श्रीलंका को लॉजिस्टिक्स और परमाणु ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा।’’</p>
<p>राजपक्षे शासन के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शन और अशांति के बाद पिछले महीने राष्ट्रपति पद संभालने वाले विक्रमसिंघे ने कहा, ‘‘अगर आप भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं को देखें तो यह पाएंगे कि कोलंबो, हम्बनटोटा और त्रिंकोमली में भी लॉजिस्टिक्स की बड़ी भूमिका हो सकती है। हमारी सामरिक स्थिति कुछ ऐसी ही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘संपत्ति पर कराधान जैसे उपायों को हमें अपनाना होगा। आर्थिक पुनरुद्धार के अलावा सामाजिक सुरक्षा के लिए भी ऐसा करना होगा।’’ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उतरने की जरूरत बताते हुए विक्रमसिंघे ने कहा, ‘‘आपके पास ज्यादा ऊर्जा होगी तो आप उसे भारत को बेच सकते हैं। हमें अलग हटकर सोचना होगा।’’</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/north-korea-furious-at-nancy-pelosi-called-america-a-destroyer-of-peace/">नैंसी पेलोसी पर भड़का नॉर्थ कोरिया, अमेरिका को बताया शांति विध्वंसक</a></strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Aug 2022 15:52:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>Sri Lanka Crisis : संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका में आर्थिक संकट के समाधान के लिए समावेशी चर्चा पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने देश में सभी पक्षकारों से मौजूदा आर्थिक संकट और लोगों की शिकायतों का हल करने के लिए व्यापक तथा समावेशी रूप से विचार-विमर्श करने का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने गुरुवार को यहां दैनिक संवाददाता सम्मेलन …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/252565/sri-lanka-crisis-un-stresses-on-inclusive-discussions-to-resolve-economic-crisis-in-sri-lanka"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/संयुक्त-राष्ट्र.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने देश में सभी पक्षकारों से मौजूदा आर्थिक संकट और लोगों की शिकायतों का हल करने के लिए व्यापक तथा समावेशी रूप से विचार-विमर्श करने का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने गुरुवार को यहां दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र की रेजीडेंट कोऑर्डिनेटर हैना सिंगर हामदी ने ‘‘नए राष्ट्रपति को सत्ता का संवैधानिक रूप से हस्तांतरण करने को मान्यता दी’’ है।</p>
<p>गौरतलब है कि अनुभवी नेता रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। हक ने बताया कि हैना सिंगर हामदी ने सभी पक्षकारों से मौजूदा आर्थिक संकट और लोगों की शिकायतों का हल निकालने के लिए व्यापक तथा समावेशी रूप से विचार-विमर्श करने का आह्वान किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और स्थिर श्रीलंका के लिए संवाद, लोकतंत्र, मानवाधिकारों और कानून-व्यवस्था का पूर्ण सम्मान करने की आवश्यकता होगी। साथ ही एकत्रित होने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने की भी आवश्यकता होगी। हक ने कहा कि सिंगर हामदी के नेतृत्व में श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र का दल मौजूदा आर्थिक संकट से प्रभावित लाखों लोगों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/indian-man-in-us-jailed-for-about-four-years-for-running-a-fake-scheme-during-covid-19/">अमेरिका में भारतीय शख्स को कोविड-19 के दौरान फर्जी योजना चलाने पर करीब चार साल की जेल</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Jul 2022 14:04:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Sri Lanka Crisis : अब रानिल विक्रमसिंघे के खिलाफ श्रीलंका में बवाल, सैन्य बल कार्रवाई में एक महिला सहित 14 लोग घायल</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुने जाने के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। देश को नया राष्ट्रपति मिलने के बाद श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति सचिवालय से हटा दिया। वहीं शुक्रवार को अनुभवी राजनेता दिनेश गुणवर्धने को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/252527/sri-lanka-crisis-now-ruckus-in-sri-lanka-against-ranil-wickremesinghe-14-people-including-a-woman-injured-in-military-force-action"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/sri-lanka-crisis-3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुने जाने के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। देश को नया राष्ट्रपति मिलने के बाद श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति सचिवालय से हटा दिया। वहीं शुक्रवार को अनुभवी राजनेता दिनेश गुणवर्धने को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया है। श्रीलंका में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने रानिल विक्रमसिंघे को नए राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने विक्रमसिंघे को देश के अभूतपूर्व आर्थिक और राजनीतिक संकट के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p>श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे के खिलाफ राष्ट्रपति भवन के नजदीक प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए शुक्रवार को सुरक्षा बलों और पुलिस की कार्रवाई में एक महिला सहित 14 लोग घायल हो गये। प्रदर्शनकारियों को गालेफेस ग्रीन से हटाने के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई में नौ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया। सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ सैन्य बलों की कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और एजेंसियों ने आपत्ति जताई है। सरकार की ओर से सुरक्षा बलों को प्रशासनिक डिस्ट्रिक में कानून-व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये गये थे जिसके तहत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सैन्य और पुलिस बल ने कड़ी कार्रवाई की।</p>
<p>इसी बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में अमेरिकी राजदूत जूली चुन ने आधी रात में गाले फेस में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ श्रीलंकाई सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की। चुन ने ट्विटर  पर अधिकारियों से संयम बरतने और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की मांग की। राजदूत चुंग ने शुक्रवार को ट्वीट किया, “आधी रात में गाले फेस में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में बहुत चिंतित हूं। हम अधिकारियों से संयम बरतने और घायलों के लिए तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह करते हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://amritvichar.com/us-capitol-violence-donald-trump-did-adding-fuel-to-the-fire-by-tweeting-aggressively/">US Capitol Violence : ‘डोनाल्ड ट्रंप ने आक्रामक ट्वीट कर ‘आग में घी डालने’ का काम किया’, जांच समिति ने जारी किया वीडियो</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Jul 2022 13:15:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>दिनेश गुणवर्धने बने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के रहे हैं सहपाठी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। वरिष्ठ नेता दिनेश गुणवर्धने को शुक्रवार को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। श्रीलंका के नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई। गुणवर्धने को अप्रैल में, पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यकाल के दौरान गृह मंत्री बनाया गया था। वह विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री के तौर पर …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/252461/dinesh-gunawardene-appointed-as-the-new-prime-minister-of-sri-lanka-ranil-wickremesinghe-administered-the-oath-to-the-cabinet"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/दिनेश-गुणवर्धने.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> वरिष्ठ नेता दिनेश गुणवर्धने को शुक्रवार को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। श्रीलंका के नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई। गुणवर्धने को अप्रैल में, पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यकाल के दौरान गृह मंत्री बनाया गया था। वह विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।</p>
<p>विक्रमसिंघे के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री पद खाली हो गया था। छह बार प्रधानमंत्री रह चुके विक्रमसिंघे ने गुरुवार को देश के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण की थी। उन्होंने देश के सामने आ रहे अभूतपूर्व आर्थिक संकट को दूर करने के लिए सभी दलों से मिलकर काम करने का आह्वान किया है। वे रानिल विक्रमसिंघे के सहपाठी रहे हैं। विक्रमसिंघे और गुणवर्धने की जोड़ी पर अब श्रीलंका को आर्थिक संकट से उबारने का भार है।</p>
<p>वहीं रानिल विक्रमसिंघे के राष्ट्रपति बनने के बाद भी श्रीलंका में शांति में बहाली नहीं हुई है। उन्हें गोटबाया का मोहरा बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन और तेज कर दिया है। इधर, गुरुवार देर रात कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति सचिवालय के परिसर के बाहर, गाले फेस में फोर्स और सैकड़ों प्रदर्शनकारी आमने-सामने हो गए।</p>
<p>राष्ट्रपति सचिवालय के परिसर के बाहर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सशस्त्र सैनिकों को तैनात किया गया था। प्रदर्शन को कंट्रोल करने के लिए सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों के टेंट उखाड़ना शुरू कर दिए तो वे उग्र हो उठे। गाले फेस पर प्रदर्शनकारी जमा हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रानिल विक्रमसिंघे हमें नष्ट करना चाहते हैं, वे फिर से ऐसा कर रहे हैं, लेकिन हम कभी हार नहीं मानेंगे। सशस्त्र बलों की कार्रवाई के बीच एक प्रदर्शनकारी ने कहा- हम अपने देश को ऐसी घटिया राजनीति से मुक्त बनाना चाहते हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/italian-prime-minister-regins-italian-prime-minister-mario-draghi-resigns/">Italian Prime Minister Regins: इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी ने दिया इस्तीफा</a></strong></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Fri, 22 Jul 2022 10:55:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>रानिल विक्रमसिंघे : मुश्किल वक्त में श्रीलंका के प्रधानमंत्री से राष्ट्रपति तक का तय किया सफर</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। अभूतपूर्व आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में मई में प्रधानमंत्री पद संभालने वाले रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। उन पर अब इस नई भूमिका में देश की अर्थव्यवस्था को संभालने, आर्थिक उथल-पथल को दूर करने और एक बंटे हुए देश को फिर से एकजुट करने का सबसे …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/252011/ranil-wickremesinghe-the-journey-from-prime-minister-to-president-of-sri-lanka-in-difficult-times"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/राष्ट्रपति-रानिल-विक्रमसिंघे-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> अभूतपूर्व आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में मई में प्रधानमंत्री पद संभालने वाले रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। उन पर अब इस नई भूमिका में देश की अर्थव्यवस्था को संभालने, आर्थिक उथल-पथल को दूर करने और एक बंटे हुए देश को फिर से एकजुट करने का सबसे बड़ा दारोमदार है। श्रीलंका के नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे 45 साल से संसद में हैं। उन्हें राजनीतिक हलकों में व्यापक रूप से एक ऐसे व्यक्ति के रूप में स्वीकार किया जाता है जो दूरदर्शी नीतियों से अर्थव्यवस्था का प्रबंधन कर सकता है।</p>
<p>वकील से नेता बने विक्रमसिंघे ने अगस्त 2020 में हुए आम चुनाव में अपनी यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के हारने और एक भी सीट न जीत पाने के लगभग दो साल बाद देश के सर्वोच्च पद पर वापसी की है। भारत के करीबी माने जाने वाले 73 वर्षीय नेता को देश में सबसे खराब आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने मई में श्रीलंका का 26वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। उनकी नियुक्ति ने द्वीपीय देश में नेतृत्व के खालीपन को भरा है क्योंकि श्रीलंका में तब से सरकार नहीं थी जब गोटबाया के बड़े भाई और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने अपने समर्थकों द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किए जाने से भड़की हिंसा के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था। विक्रमसिंघे को राजनीतिक हलकों में व्यापक रूप से एक ऐसे व्यक्ति के रूप में स्वीकार किया जाता है, जो दूरदर्शी नीतियों के साथ अर्थव्यवस्था का प्रबंधन कर सकता है। वह उस अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसके बारे में उन्होंने कहा था कि वह मई में उनकी नियुक्ति के समय ध्वस्त हो चुकी थी।</p>
<p>राजपक्षे के देश छोड़कर चले जाने के बाद विक्रमसिंघे को 13 जुलाई को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। बुधवार को वह देश के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर निर्वाचित हुए। विक्रमसिंघे को श्रीलंका में ऐसा नेता माना जाता है जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमान संभाल सकते हैं। उन्होंने अपने लगभग पांच दशक के राजनीतिक करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने श्रीलंका के निकट पड़ोसी भारत के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए और प्रधानमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान चार अवसरों – अक्टूबर 2016, अप्रैल 2017, नवंबर 2017 और अक्टूबर 2018 में देश का दौरा किया। इसी अवधि के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका की दो यात्राएं कीं और उन्होंने विक्रमसिंघे के एक व्यक्तिगत अनुरोध का भी जवाब दिया जो द्वीपीय राष्ट्र में 1990 एम्बुलेंस प्रणाली स्थापित करने में मदद करने के लिए था। यह मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल सेवा कोविड-19 के दौरान श्रीलंका में बेहद मददगार साबित हुई।</p>
<p>तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के विरोध के बावजूद विक्रमसिंघे ने कोलंबो बंदरगाह के पूर्वी टर्मिनल पर भारत के साथ समझौते का समर्थन किया था जिसे राजपक्षे ने 2020 में खारिज कर दिया था। उनकी पार्टी यूएनपी देश की सबसे पुरानी पार्टी है जो 2020 के संसदीय चुनाव में एक भी सीट जीतने में विफल रही थी। 1977 के बाद यह पहली बार हुआ जब उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली।</p>
<p>यूएनपी के मजबूत गढ़ रहे कोलंबो से चुनाव लड़ने वाले विक्रमसिंघे खुद भी हार गए थे। बाद में वह सकल राष्ट्रीय मतों के आधार पर यूएनपी को आवंटित राष्ट्रीय सूची के माध्यम से संसद पहुंच सके थे। श्रीलंका के पहले कार्यकारी राष्ट्रपति जूनियस जयवर्धने के भतीजे विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास की हत्या के बाद पहली बार 1993-1994 तक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। वह 2001 से 2004 तक भी तब प्रधानमंत्री रहे जब 2001 में संयुक्त राष्ट्रीय मोर्चा ने आम चुनाव जीता था। लेकिन चंद्रिका कुमारतुंगा द्वारा जल्द चुनाव कराए जाने के बाद, 2004 में उन्होंने सत्ता खो दी।</p>
<p>प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लिट्टे के साथ शांति वार्ता शुरू की, यहां तक कि सत्ता-साझा करने की पेशकश भी की। कुमारतुंगा और महिंदा राजपक्षे ने उन पर लिट्टे के साथ बहुत नरमी बरतने और उसे बहुत अधिक रियायतें देने का आरोप लगाया था। विक्रमसिंघे ने 2015 के चुनाव में महिंदा राजपक्षे को करारी शिकस्त दी थी और अल्पमत सरकार का नेतृत्व किया था। वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति सिरिसेना ने प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया और महिंदा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। सिरिसेना के इस कदम से देश में संवैधानिक संकट पैदा हो गया।</p>
<p>हालांकि, उच्चतम न्यायालय के एक फैसले ने राष्ट्रपति सिरिसेना को विक्रमसिंघे को बहाल करने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे राजपक्षे का संक्षिप्त शासन समाप्त हो गया। श्रीलंका को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद 1949 में जन्मे विक्रमसिंघे 1977 में 28 साल की उम्र में संसद के लिए चुने गए थे। वह विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) की यूथ लीग में शामिल हो गए थे। उस समय श्रीलंका में सबसे कम उम्र के मंत्री के रूप में, उन्होंने राष्ट्रपति जयवर्धने के अधीन उप विदेश मंत्री का पद संभाला था। उन्हें बाद में युवा मामलों और रोजगार मंत्री के तौर पर मंत्रिमंडल में भी नियुक्त किया गया। उनके पास शिक्षा विभाग भी रहा। इसके बाद 1989 में उन्हें प्रेमदास की सरकार में सदन का नेता बनाया गया। वह उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री भी रहे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/president-wickremesinghe-said-i-am-a-friend-of-the-people-not-the-rajapaksa-family/">राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे बोले- मैं राजपक्षे परिवार का नहीं, जनता का मित्र हूं</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 13:18:53 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे बोले- मैं राजपक्षे परिवार का नहीं, जनता का मित्र हूं</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो।  श्रीलंका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने शासन की प्रणाली में बदलाव लाने का संकल्प जताते हुए देशवासियों से कहा कि वह राजपक्षे परिवार के नहीं बल्कि जनता के मित्र हैं। अभूतपूर्व आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में मई में प्रधानमंत्री पद संभालने वाले विक्रमसिंघे ने गुरुवार को राष्ट्रपति के तौर पर …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/252007/president-wickremesinghe-said-i-am-a-friend-of-the-people-not-the-rajapaksa-family"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/राष्ट्रपति-रानिल-विक्रमसिंघे.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो। </strong> श्रीलंका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने शासन की प्रणाली में बदलाव लाने का संकल्प जताते हुए देशवासियों से कहा कि वह राजपक्षे परिवार के नहीं बल्कि जनता के मित्र हैं। अभूतपूर्व आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में मई में प्रधानमंत्री पद संभालने वाले विक्रमसिंघे ने गुरुवार को राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। उन पर अब इस नई भूमिका में देश की अर्थव्यवस्था को संभालने, आर्थिक उथल-पथल को दूर करने और एक बंटे हुए देश को फिर से एकजुट करने का सबसे बड़ा दारोमदार है। विक्रमसिंघे 45 साल से संसद में हैं और उन्हें राजनीतिक हलकों में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में स्वीकार किया जाता है जो दूरदर्शी नीतियों से अर्थव्यवस्था का प्रबंधन कर सकता है।</p>
<p>राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद विक्रमिसंघे (73) बुधवार को कोलंबो के सबसे पुराने बौद्ध मंदिरों में से एक गंगाराम मंदिर भी गए थे। गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़कर चले जाने और राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। वह संविधान के अनुसार संसद द्वारा निर्वाचित श्रीलंका के पहले राष्ट्रपति हैं। विक्रमसिंघे की जीत से एक बार फिर स्थिति बिगड़ सकती है क्योंकि सरकार विरोधी कई प्रदर्शनकारी उन्हें पूर्ववर्ती राजपक्षे सरकार का करीबी मानते हैं। प्रदर्शनकारी देश के मौजूदा संकट के लिए राजपक्षे परिवार को जिम्मेदार ठहराते हैं।</p>
<p>विक्रमसिंघे के राष्ट्रपति निर्वाचित होने के तुरंत बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी जगह जगह एकत्रित हो गए थे। यह पूछे जाने पर कि विक्रमसिंघे राजपक्षे परिवार से अलग कैसे होंगे क्योंकि वह उनके पुराने मित्र हैं, नए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं राजपक्षे परिवार का पुराना मित्र कैसे हूं? मैं उनका विरोध करता रहा हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं राजपक्षे परिवार का मित्र नहीं हूं, मैं जनता का मित्र हूं…मैंने पहले पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगे के साथ काम किया है। वह किसी और पार्टी की थीं और मैं किसी और पार्टी का हूं। मेरे लिए किसी दूसरी पार्टी के राष्ट्रपति के साथ काम करने का मतलब यह नहीं है कि मैं उनका मित्र हूं।’’</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि वह ऐसा बदलाव लाएंगे, जो लोग चाहते हैं और यह जरूरी भी है। विक्रमसिंघे ने कहा कि वह अपनी यूनाइटेड नेशनल पार्टी को मजबूत करने के अवसर पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने नौ जुलाई को यहां प्रदर्शनकारियों के ऐतिहासिक सरकारी इमारतों में घुसने तथा तोड़फोड़ करने पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति कार्यालय और प्रधानमंत्री के कार्यालय पर जबरन कब्जा जमाना गैरकानूनी है और ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>गौरतलब है कि प्रदर्शनकारियों ने विक्रमसिंघे के निजी आवास को भी जला दिया था। विक्रमसिंघे ने कहा, ‘‘अरागालया (जन संघर्ष) व्यवस्था के खिलाफ था। सरकार गिराने, घरों को आग लगाने तथा महत्वपूर्ण कार्यालयों पर कब्जा जमाने के लिए हमें अरागालया का उपयोग कतई नहीं करना चाहिए। यह लोकतंत्र नहीं है बल्कि यह गैरकानूनी है।’’ उन्होंने कहा ‘‘हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को प्रदर्शन करने की अनुमति देनी चाहिए। हम उनसे बातचीत भी कर सकते हैं।’’</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/sri-lanka-crisis-ranil-wickremesinghe-sworn-in-as-president-of-sri-lanka/">Sri Lanka Crisis : रानिल विक्रमसिंघे ने ली श्रीलंका के राष्ट्रपति पद की शपथ, नए प्रधानमंत्री की करेंगे नियुक्ति</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 13:05:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Sri Lanka Crisis : रानिल विक्रमसिंघे ने ली श्रीलंका के राष्ट्रपति पद की शपथ, नए प्रधानमंत्री की करेंगे नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। अनुभवी नेता रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। प्रधान न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने संसद भवन परिसर में 73 वर्षीय विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। अब रानिल विक्रमसिंघे नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेंगे। गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़कर चले जाने और राष्ट्रपति पद से इस्तीफा …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/251953/sri-lanka-crisis-ranil-wickremesinghe-sworn-in-as-president-of-sri-lanka"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/रानिल-विक्रमसिंघे1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो</strong>। अनुभवी नेता रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। प्रधान न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने संसद भवन परिसर में 73 वर्षीय विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। अब रानिल विक्रमसिंघे नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेंगे। गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़कर चले जाने और राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। वह संविधान के अनुसार संसद द्वारा निर्वाचित श्रीलंका के पहले राष्ट्रपति हैं।</p>
<p>मई 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. प्रेमदास के निधन के बाद दिवंगत डी. बी. विजेतुंगा को निर्विरोध चुना गया था। विक्रमसिंघे को बुधवार को देश का नया राष्ट्रपति निर्वाचित किया गया। इससे नकदी के संकट से जूझ रहे इस द्वीपीय देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ चल रही वार्ता के जारी रहने की उम्मीद की जा सकती है। श्रीलंका की 225 सदस्यीय संसद में विक्रमसिंघे को 134 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एवं सत्तारूढ़ दल के असंतुष्ट नेता डलास अल्हाप्पेरुमा को 82 वोट मिले।</p>
<p>वामपंथी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके को महज तीन वोट मिले। संसद में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान कराया गया। विक्रमसिंघे पर देश को आर्थिक बदहाली से बाहर निकालने और महीनों से चल रहे प्रदर्शनों के बाद कानून-व्यवस्था बहाल करने की जिम्मेदारी है। राजपक्षे की श्रीलंका पोदुजन पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के समर्थन से विक्रमसिंघे की जीत सत्ता पर राजपक्षे परिवार की पकड़़ को दिखाती है जबकि गोटबाया राजपक्षे, पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और पूर्व वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे ने सरकारी विरोधी प्रदर्शनों के बाद इस्तीफे दे दिए हैं।</p>
<p>विक्रमसिंघे की जीत से एक बार फिर स्थिति बिगड़ सकती है क्योंकि सरकार विरोधी कई प्रदर्शनकारी उन्हें पूर्ववर्ती राजपक्षे सरकार का करीबी मानते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ अहम बातचीत का नेतृत्व कर रहे विक्रमसिंघे ने पिछले सप्ताह कहा था कि बातचीत निष्कर्ष के करीब है। श्रीलंका को अपनी 2.2 करोड़ की आबादी की मूल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अगले महीनों में करीब पांच अरब डॉलर की आवश्यकता है। विक्रमसिंघे अब गोटबाया राजपक्षे के बाकी बचे कार्यकाल तक राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे, जो नवंबर 2024 में खत्म होगा।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/runway-melted-railway-tracks-are-spreading-europe-suffering-from-heat-1000-killed-in-spain-portugal-only/">सड़कें टूट रहीं, रनवे पिघल रहे…गर्मी से बेहाल यूरोप, सिर्फ स्पेन-पुर्तगाल में 1000 लोगों की मौत</a></strong></p>
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                                                            <category>Breaking News</category>
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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 10:45:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Sri Lanka Crisis : श्रीलंका में महंगाई से हाहाकार, खाने और दवाइयों के बदले सेक्स के लिए मजबूर हो रही महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका में आर्थिक हालात दिन-ब दिन-खराब होते जा रहे हैं। लोगों को अपना घर तक चलाना मुश्किल हो रहा है। यहां तक कि खाने और दवाइयों तक के लाले पड़ गए हैं। इसके चलते पिछले कुछ दिनो में यहां वेश्यावृत्ति तेजी से बढ़ी है। पेट पालने के लिए यहां कई महिलाएं सेक्स वर्कर बनने …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/250969/sri-lanka-crisis-due-to-inflation-in-sri-lanka-women-are-being-forced-to-have-sex-in-exchange-for-food-and-medicines"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/demo-image-01-12.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका में आर्थिक हालात दिन-ब दिन-खराब होते जा रहे हैं। लोगों को अपना घर तक चलाना मुश्किल हो रहा है। यहां तक कि खाने और दवाइयों तक के लाले पड़ गए हैं। इसके चलते पिछले कुछ दिनो में यहां वेश्यावृत्ति तेजी से बढ़ी है। पेट पालने के लिए यहां कई महिलाएं सेक्स वर्कर बनने को मजबूर हैं। श्रीलंका के डेली न्यूजपेपर द मॉर्निंग के अनुसार, स्पा सेंटरों को अस्थायी वेश्यालय बना दिया गया है और इसे रोकने वाला कोई नहीं है। इसका एक कारण यह भी है कि मजबूरी में खुद महिलाएं भी इससे जुड़ रही हैं, ताकि उन्हें दो वक्त का खाना मिल सके।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक कपड़ा उद्योग में कार्यरत महिलाएं नौकरी जाने के डर से वैकल्पिक रोजगार के रूप में वेश्यावृत्ति की ओर बढ़ रही हैं। एक सेक्स वर्कर के हवाले से रिपोर्ट में छापा गया है कि इस समय हम जो सबसे अच्छा विकल्प देख रहे हैं वो यही इंडस्ट्री है और इसलिए इस तरफ हमारा रुझान बढ़ा है। इससे कम से कम हमें खाना तो मिल जाएगा।</p>
<p>आपको बता दें कि श्रीलंका में आर्थिक संकट की शुरुआत विदेशी कर्ज के बोझ के कारण हुई। कर्ज की किस्तें चुकाते-चुकाते श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया। स्थिति ऐसी हो गई कि श्रीलंका में डीजल-पेट्रोल और खाने-पीने की चीजों की कमी हो गई। बेहद जरूरी दवाएं तक पड़ोसी देश में समाप्त हो गईं।सरकार को पेट्रोल पंपों पर सेना तैनात करने की जरूरत पड़ गई। हालांकि इससे भी स्थिति में सुधार नहीं आया और हालात लगातार बिगड़ते चले गए।</p>
<p>बताया जा रहा है कि आजादी के बाद श्रीलंका के सामने यह अब तक का सबसे बड़ा संकट है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों का मानना है कि गैर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्टर के चलते कर्ज काफी बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि श्रीलंका पर अभी करीब 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/sea-waves-moving-across-a-two-storey-building-in-hawaii-island-of-america/">कैमरे में कैद तबाही का भयावह मंजर, इमारतों को चीरतीं समुद्री लहरें, सब डूब जाने का संकेत</a></strong></p>
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                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 14:04:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sri Lanka Crisis : विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से पीछे हटे, दुल्लास अल्हाप्परुमा को समर्थन का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका में 20 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है।  विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने अपनी राष्ट्रपति पद से उम्मीदवारी वापस लेने से ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने दुल्लास अल्हाप्परुमा को समर्थन देने का फैसला किया है। इस बात की जानकारी उन्होंने ट्विटर के माध्यम से दी। उन्होंने ट्वीट …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/250893/sri-lanka-crisis-opposition-leader-sajith-premadasa-withdraws-from-presidential-candidacy"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/साजिथ-प्रेमदासा.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका में 20 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है।  विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने अपनी राष्ट्रपति पद से उम्मीदवारी वापस लेने से ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने दुल्लास अल्हाप्परुमा को समर्थन देने का फैसला किया है। इस बात की जानकारी उन्होंने ट्विटर के माध्यम से दी। उन्होंने ट्वीट किया,  मैं अपने देश, जिसे मैं प्यार कता हूं, उसकी भलाई के लिए राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से अपना नाम वापस लेता हूं। उन्होंने कहा, हमारी पार्टी विपक्षी सहयोग की दिशा में कड़ी मेहनत करेंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">For the greater good of my country that I love and the people I cherish I hereby withdraw my candidacy for the position of President. <a href="https://twitter.com/sjbsrilanka?ref_src=twsrc%5Etfw">@sjbsrilanka</a> and our alliance and our opposition partners will work hard towards making <a href="https://twitter.com/DullasOfficial?ref_src=twsrc%5Etfw">@DullasOfficial</a> victorious.</p>
<p>— Sajith Premadasa (@sajithpremadasa) <a href="https://twitter.com/sajithpremadasa/status/1549246554199928832?ref_src=twsrc%5Etfw">July 19, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p> </p>
<p><strong>राष्ट्रपति पद के लिए आज हो रहा नॉमिनेशन</strong><br />
श्रीलंका में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया आज सुबह 10 बजे से शुरू हो गई है। प्रेमदासा की उम्मीदवारी वापस लेने के बाद अब कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (SLPP) दुलस अल्हाप्परुमा और और जनता विमुक्ति पेरामुना (JVP) नेता अनुरा कुमारा में मुकाबला होगा। आर्थिक और राजनीतिक उठापटक के बीच जनविद्रोह के कारण गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़कर सिंगापुर भाग गए थे। जिसके बाद प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया।</p>
<p><strong>राष्ट्रपति चुनाव से पहले श्रीलंका में संसद परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई</strong><br />
श्रीलंका की संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने की शिकायत के बाद मंगलवार को श्रीलंका संसद परिसर में तथा उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। महिंदा यापा अभयवर्धने ने पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी और सांसदों को सोशल मीडिया पर धमकी देने वाले भड़काऊ संदेशों के खिलाफ विस्तृत जांच की मांग की थी। यह शिकायत ऐसे समय में की गई है, जब गोटबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद देश में 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव किए जाने की उम्मीद है। श्रीलंका की सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के सांसदों ने सोमवार को शिकायत की थी कि उन्हें सोशल मीडिया पर श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के खिलाफ मतदान करने के लिए चेतावनी दी जा रही है। इसके बाद, मंगलवार को संसद परिसर में और उसके आसपास पुलिस तथा सेना को तैनात किया गया। पुलिस ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर सांसदों को धमकियां देने वालों, ऐसे संदेश प्रसारित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>गोटबाया राजपक्षे ने सिंगापुर से ही इस्तीफा पत्र भेजा </strong><br />
गौरतलब है कि गोटबाया राजपक्षे देश की अर्थव्यवस्था को न संभाल पाने के कारण अपने और अपने परिवार के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच पहले मालदीव गए और वहां से सिंगापुर चले गए हैं। उन्होंने सिंगापुर से ही इस्तीफा पत्र भेजा है। उनके इस्तीफे के बाद देश के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। श्रीलंका में 1978 के बाद से पहली बार देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव सांसदों द्वारा गुप्त मतदान के जरिए होगा न कि जनादेश के जरिए। इससे पहले केवल 1993 में कार्यकाल के बीच में ही राष्ट्रपति का पद खाली हुआ था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास की हत्या कर दी गयी थी। तब डी बी विजेतुंगा को संसद ने सर्वसम्मति से प्रेमदास का कार्यकाल पूरा करने का जिम्मा सौंपा था।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/sri-lanka-crisis-npc-seeks-consent-on-sri-lankan-presidents-ballot/">Sri Lanka Crisis: एनपीसी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति के मतपत्र पर मांगी गई सहमति</a></strong></p>
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                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 11:57:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Sri Lanka Crisis: एनपीसी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति के मतपत्र पर मांगी गई सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका की राष्ट्रीय शांति परिषद (एनपीसी) ने कहा है कि देश की चरमराई अर्थव्यवस्था से निपटने के लिए सर्वसम्मति से श्रीलंका के नए राष्ट्रपति का चयन किया जाना चाहिए। इस गैर-लाभकारी संस्था के हवाले से द आईलैंड न्यूजपेपर ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में बताया, संसद में राजनीतिक दलों के नेताओं का यह कर्तव्य …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/250613/sri-lanka-crisis-npc-seeks-consent-on-sri-lankan-presidents-ballot"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/sri-lanka-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका की राष्ट्रीय शांति परिषद (एनपीसी) ने कहा है कि देश की चरमराई अर्थव्यवस्था से निपटने के लिए सर्वसम्मति से श्रीलंका के नए राष्ट्रपति का चयन किया जाना चाहिए। इस गैर-लाभकारी संस्था के हवाले से द आईलैंड न्यूजपेपर ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में बताया, संसद में राजनीतिक दलों के नेताओं का यह कर्तव्य और जिम्मेदारी थी कि जब तक राष्ट्रीय चुनाव नहीं हो जाता और लोगों से एक नया जनादेश प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक सर्वसम्मति से एक नए राष्ट्रपति पर निर्णय लेना चाहिए था।</p>
<p>श्रीलंका में राष्ट्रपति पद की दौड़ में देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा, मार्क्सवादी जेवीपी नेता अनुरा कुमार दिसानायके और एसएलपीपी से अलग हुए दुलस अल्हाप्परुमा शामिल हैं। इसके लिए चुनाव 20 जुलाई को होने वाले हैं। संस्था ने बताया, “यह चुनाव कोई नियमित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देशभर में हो रहे सार्वजनिक विद्रोह का परिणाम है, जिसे अरागलया के नाम से भी जाना जाता है। इसने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कैबिनेट के अन्य मंत्रियों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया। तीन साल पहले जनादेश से चुनी गई सरकार को रद्द कर दिया।”</p>
<p>एनजीओ ने बताया, “एनपीसी प्रचार, पैरवी और बयानबाजी से बहुत परेशान है। इनसे उन जमीनी वास्तविकताओं की अनदेखी होती है, जिसकी वजह से आर्थिक, नैतिक और सामाजिक रूप से देश की बर्बादी का कारण बना है।” एनपीसी ने कहा, “हमारा ध्यान इस ओर भी है कि नए राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेने वाले सांसद ऐसा जनादेश का पूरी तरह से पालन करें, जिसे देशव्यापी आंदोलन के द्वारा प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया गया।</p>
<p>यह विशेष रूप से सत्तारूढ़ दल और पिछली सरकार के सदस्यों पर लागू होता है जिन्होंने देश पर शासन करने के लिए अपनी नैतिक वैधता खो दी जो उनके इस्तीफे का कारण बना। ” एनपीसी के मुताबिक, “इस संदर्भ में हम मानते हैं कि संसद में राजनीतिक दलों के नेताओं का यह कर्तव्य है कि जब तक राष्ट्रीय चुनाव नहीं हो जाता और लोगों से सीधे तौर पर एक नया जनादेश प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक वे सर्वसम्मति से नए राष्ट्रपति पर निर्णय लें। एक ऐसे राष्ट्रपति का चुनाव करे जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरी से काम करने में सक्षम हो और सबसे जरूरी जो देश की जनता द्वारा स्वीकृत हो।”</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/rishi-sunak-clarified-on-family-property/">‘मुझे सास-ससुर पर अत्यंत गर्व है…’, ऋषि सुनक ने पारिवारिक संपत्ति पर दी सफाई</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/250613/sri-lanka-crisis-npc-seeks-consent-on-sri-lankan-presidents-ballot</link>
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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 17:32:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sri Lanka Crisis : संकट में फंसे श्रीलंका को कर्ज सहायता देने में भारत पहले नंबर पर, चीन को भी पीछे छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। बुरी तरह से आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका को कर्ज देकर मदद करने के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ कर पहले नंबर का कर्जदाता बन गया है। अखबार डेली मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष के चार महीने के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत ने श्रीलंका को 37.69 करोड़ डॉलर …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/250507/sri-lanka-crisis-india-at-number-one-in-providing-loan-assistance-to-sri-lanka-in-crisis-also-left-behind-china"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/untitled-7-10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> बुरी तरह से आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका को कर्ज देकर मदद करने के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ कर पहले नंबर का कर्जदाता बन गया है। अखबार डेली मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष के चार महीने के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत ने श्रीलंका को 37.69 करोड़ डॉलर की कर्ज सहायता उपलब्ध करायी जबकि इसी अवधि में चीन ने इस देश को 6.79 करोड़ डॉलर की कर्ज सहायता पहुंचायी है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार भारत की ओर से इन चार महीनों में उपलब्ध कराई गयी यह सहायता पड़ोसी देश द्वारा इस द्वीप देश के लिए मंजूर किये गये 3.5 अरब डॉलर के सहायता पैकेज का हिस्सा नहीं है। भारत ने संकटग्रस्त देश को सहायता पैकेज में कर्ज के अलावा पैकेज में सामान खरीदने और सावधि ऋण के अलावा पुराने कर्ज की किश्तों को टालने जैसी सुविधा भी दी है। विदेशी और आंतरिक कारणों से इस वर्ष की शुरुआत में ही बुरी तरह से आर्थिक संकट में घिर गये श्रीलंका से उसके अन्य सहयोगी देशों द्वारा मुंह मोड़ लेने के बाद भारत इस समय इस देश को सबसे अधिक मदद कर रहा है।</p>
<p>भारत के श्रीलंका को अप्रैल से लेकर अब तक दिये गये 3.5 अरब के सहायता पैकेज घोषित कर चुका है। भारत ने श्रीलंका को उधार पर निर्यात करने का 1.5 अरब डॉलर का करार किया है। दोनों पक्षों ने दो फरवरी को 50 करोड़ डॉलर के दो वर्ष के एक अल्पावधि ऋण सहायता समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। इस कर्ज की अवधि एक साल बढ़ाने का भी प्रावधान है। इसी तरह 17 मार्च को आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए एक अरब डालर की सहायता के समझौते पर भी हस्ताक्षर किये गये थे।</p>
<p>गौरतलब है भारत से श्रीलंका को ईंधन खरीदने के लिए दी गयी कर्ज सुविधा जून के मध्य में पूरी हो जाने के बाद श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में ठहराव आ गया और जनता ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया । जनांदोलन के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को देश छोड़ना पड़ा और उन्होंने अब इस्तीफा दे दिया है। भारत अलावा श्रीलंका को एशियाई विकास बैंक से भी चार महीनों में 35.96 करोड़ डॉलर की कर्ज सहायता मिली है । इस तरह यह संस्थान इसका दूसरा सबसे बड़ा कर्जदाता बन गया है। विश्व बैंक ने भी श्रीलंका को 6.73 करोड़ डॉलर की कर्ज सहायता दी है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/narinder-batra-resigns-as-ioa-president-due-to-personal-reasons/">Narinder Batra Resigns : नरेंद्र बत्रा ने इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा, आईओसी की सदस्यता भी छोड़ी</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 15:39:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Sri Lanka Crisis : आंसू गैस के गोलों के लिए तरसी कोलंबो पुलिस, एक व्यक्ति गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस के पास आंसू गैस के गोलों के साथ-साथ पानी भी लगभग नहीं बचा है। द आइलैंड अखबार ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि बाहरी पुलिस स्टेशनों से आंसू गैस के कनस्तरों को कोलंबो …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/250473/sri-lanka-crisis-colombo-police-yearned-for-tear-gas-shells-in-sri-lanka-one-person-arrested"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/untitled-5-10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस के पास आंसू गैस के गोलों के साथ-साथ पानी भी लगभग नहीं बचा है।</p>
<p>द आइलैंड अखबार ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि बाहरी पुलिस स्टेशनों से आंसू गैस के कनस्तरों को कोलंबो ले जाया गया है, क्योंकि पुलिस ने कोलंबो और उपनगरों में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी मात्रा में आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था। अखबार ने एक अधिकारी के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि कोलंबो के थानों में सीमित मात्रा में आंसू गैस के गोले छोड़े बचे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा,“हमें कोलंबो के अन्य हिस्सों के थानों से अपने स्टॉक कोलंबो भेजने के लिए कहना पड़ा है।” उन्होंने कहा कि पुलिस ने हाल के हफ्तों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल किया था और पुलिस ने अभी तक राष्ट्रीय जल आपूर्ति और जल निकासी बोर्ड को भुगतान नहीं किया है।</p>
<p><strong>आंसू गैस के 50 कनस्तर बरामद </strong><br />
श्रीलंका की संसद के पास सड़क पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से चोरी किए गए आंसू गैस के 50 कनस्तरों के साथ 31 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।</p>
<p>डेली मिरर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने 13 जुलाई को पोलडुवा जंक्शन पर आंसू गैस के कनस्तर ले जा रहे पुलिस के एक तिपहिया वाहन पर हमला किया था, जिसको लेकर पुलिस ने जांच शुरू की थी। घटना के समय वाहन संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश कर रही पुलिस और सेना के लिए आंसू गैस के लिए गोले लेकर जा रहा था।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने वाहन में सवार कई पुलिसकर्मियों पर हमला किया और कनस्तरों को चुरा लिया। इस सिलसिले में रविवार को एक राजमिस्त्री को बोरेला में स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया और पुलिस ने उसके पास से 50 कनस्तर बरामद किए।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 15:00:03 +0530</pubDate>
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