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                <title>गोटबाया राजपक्षे - Amrit Vichar</title>
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                <description>गोटबाया राजपक्षे RSS Feed</description>
                
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                <title>Sri Lanka: उच्चतम न्यायालय ने दी गोटबाया और महिंदा राजपक्षे खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका उच्चतम न्यायालय ने पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और 37 अन्य के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं तथा अर्थव्यवस्था कुप्रबंधन के लिए कानूनी कार्रवाई संबंधी कई मौलिक अधिकारों की याचिकाओं पर कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। द आइलैंड अखबार ने शनिवार को बताया कि ये मामले ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल श्रीलंका …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/295901/approval-of-legal-action-against-gotabaya-mahindra"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/untitled-18-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका उच्चतम न्यायालय ने पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और 37 अन्य के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं तथा अर्थव्यवस्था कुप्रबंधन के लिए कानूनी कार्रवाई संबंधी कई मौलिक अधिकारों की याचिकाओं पर कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। द आइलैंड अखबार ने शनिवार को बताया कि ये मामले ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल श्रीलंका (टीआईएसएल) और सीलोन चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष चंद्र जयरत्ने सहित अन्य लोगों द्वारा दायर किए गए थे। प्रतिवादी के रूप में नामित अन्य लोगों में पूर्व वित्त मंत्री बेसिल राजपक्षे के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारी हैं जो अब श्रीलंका मौद्रिक बोर्ड और सेंट्रल बैंक के साथ काम करते हैं या पहले इसका नेतृत्व करते थे।</p>
<p>महिंदा राजपक्षे इस साल मई तक प्रधानमंत्री थे और उनके भाई गोटबाया राजपक्षे जुलाई तक राष्ट्रपति थे। हिंसक प्रदर्शन होने के बाद गोटबाया श्रीलंका से भाग गए। देश की आर्थिक स्थिति खराब करने के लिए इनके एक अन्य भाई तुलसी राजपक्षे को भी जिम्मेदार माना जाता है। देश की अर्थव्यवस्था के ढहने से पहले तीनों भाइयों ने श्रीलंका पर शिकंजा जैसा बना रखा था। अदालत ने महालेखा परीक्षक को एक ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने और तीन नवंबर तक एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जो कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये के मूल्य को 203 रुपये पर निर्धारित करने के मौद्रिक बोर्ड की ओर से किए गए निर्णय के संबंध में आईएमएफ से सहायता मांगने में देरी पर आधारित होगा।</p>
<p>साथ ही 18 जनवरी को विदेशी भंडार का उपयोग करते हुए 50 करोड़ रुपये के सॉवरेन बांड के निपटान से संबंधित सभी मामले भी इस ऑडिट में शामिल होंगे। इसके अलावा उन्हें इस तरह के भुगतानों से सेंट्रल बैंक को हुए नुकसान का ऑडिट करने के लिए भी कहा गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सेंट्रल बैंक के गवर्नर डॉ नंदलाल वीरसिंघे, पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, पूर्व वित्त मंत्रियों महिंदा राजपक्षे और बासिल राजपक्षे, कैबिनेट, मौद्रिक बोर्ड, सेंट्रल बैंक के पूर्व गवर्नरों एवं ट्रेजरी के पूर्व सचिव को दिए गए सभी संचार तथा सिफारिशों की प्रतियां पेश करें।</p>
<p>जनवरी 2023 में इस मुद्दे को फिर से अदालत की ओर से उठाया जाएगा। पीठ में मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या और न्यायमूर्ति बुवानेका अलुविहारे, विजित मललगोडा तथा एल टी बी देहदेनिया शामिल थे। वर्ष 1948 में स्वतंत्रता के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसके कारण अभूतपूर्व मुद्रास्फीति और आवश्यक वस्तुओं की भी भारी कमी हो गई है। इस संकट के लिए काफी हद तक राजपक्षे परिवार को जिम्मेदार ठहराया गया है।</p>
<p><strong>श्रीलंका में भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए</strong><br />
श्रीलंका के दो प्रमुख सांसदों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह देश में कैंसर बन गया है। मुख्य विपक्षी दल एसएलपीपी पार्टी के प्रो जी एल पीरिस ने कहा कि श्रीलंका को अपने आर्थिक संकट से उबरने के लिए विदेशों से सार्थक सहायता प्राप्त करने से पहले ‘व्यापक भ्रष्टाचार’ को रोकने की जरूरत है। द आइलैंड अखबार ने संसद में कही गयी सांसद पीरिस की बातों के हवाले से कहा,“विश्व बैंक ने कहा है कि जब वह भविष्य में श्रीलंका को सहायता और ऋण देगा, तो वह खुद ऑडिट करेगा। हमें वास्तव में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को समाप्त करने की आवश्यकता है।”</p>
<p>समागी जाना बालवेगया (एसजेबी) के सदस्य और श्रीलंका के पूर्व सेना प्रमुख सरथ फोन्सेका ने कहा कि सरकार को पहले भ्रष्टाचार से लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा,“सबसे पहले, हमें देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के बारे में कुछ करना चाहिए। नेता देश को लूट रहे हैं और चूस रहे हैं। इससे गरीबी में विस्फोट हुआ है।” श्री फोन्सेका के हवाले से कहा गया कि जब तक भ्रष्ट राजनेताओं को संसद से खदेड़ नहीं दिया जाता, कार्यकारी अध्यक्ष पद को समाप्त करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा,“मान लीजिए कि हम इस सप्ताह कार्यकारी अध्यक्ष पद को समाप्त कर देते हैं। फिर किसे जिम्मेदारी सौंपी जायेगी? भ्रष्ट मोटी बिल्लियों का एक झुंड कार्यभार संभालेगा। सबसे पहले बदमाशों से छुटकारा पाएं। अगर राष्ट्रपति ऐसा करते हैं तो हम उनका समर्थन करेंगे।”</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/emergency-imposed-in-new-york-amid-increasing-number-of-migrants/">प्रवासियों की बढ़ती संख्या के बीच न्यूयॉर्क में लगा आपातकाल</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Oct 2022 19:32:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>स्वदेश वापसी के बाद गोटबाया राजपक्षे से मिले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरुवार को यहां श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से मुलाकात की। स्वामी ऐसे पहले विदेशी मेहमान बन गये हैं, जिन्होंने अपदस्थ श्रीलंकाई राष्ट्रपति राजपक्षे से उनकी स्वदेश वापसी के बाद मुलाकात की है। श्रीलंका में सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने में …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>कोलंबो।</strong> भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरुवार को यहां श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से मुलाकात की। स्वामी ऐसे पहले विदेशी मेहमान बन गये हैं, जिन्होंने अपदस्थ श्रीलंकाई राष्ट्रपति राजपक्षे से उनकी स्वदेश वापसी के बाद मुलाकात की है। श्रीलंका में सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने में विफल रहने के चलते विरोध-प्रदर्शन का सामना कर रहे राजपक्षे देश छोड़कर चले गए थे।</p>
<p>राजपक्षे परिवार के करीबी मित्र सुब्रमण्यम स्वामी जनरल सर जॉन कोटेलावाला रक्षा विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेने श्रीलंका पहुंचे हैं। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि स्वामी ने बुधवार को गोटबाया के भाई महिंदा राजपक्षे से मुलाकात की थी और उनके आवास पर नवरात्रि पूजा में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, ‘‘स्वामी ने महिंदा राजपक्षे के आधिकारिक आवास पर बुधवार रात हुई नवरात्रि पूजा में भाग लिया और उन्होंने गुरुवार सुबह गोटबाया राजपक्षे से मुलाकात की।’’</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/sri-lankan-parliament-will-discuss-the-22nd-constitutional-amendment-next-week-the-presidents-powers-will-be-reduced/">श्रीलंकाई संसद 22वें संविधान संशोधन पर अगले हफ्ते करेगी चर्चा, घट जाएंगी राष्ट्रपति की शक्तियां</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 18:37:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>मानवाधिकार आयोग ने पूर्व राष्ट्रपति से गोटबाया राजपक्षे को सुरक्षा मुहैया कराने का किया अनुरोध</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे से अनुरोध किया है कि पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए, क्योंकि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है। यह भी अनुरोध किया गया है संकट प्रभावित अपने देश वापस आने में गोटबाया का सहयोग किया जाए। श्रीलंकाई मानवाधिकार …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/269689/human-rights-commission-requests-former-president-to-provide-security-to-gotabaya-rajapaksa"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/6-12.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे से अनुरोध किया है कि पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए, क्योंकि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है। यह भी अनुरोध किया गया है संकट प्रभावित अपने देश वापस आने में गोटबाया का सहयोग किया जाए।</p>
<p>श्रीलंकाई मानवाधिकार आयोग (एचआरसीएसएल) ने एक पत्र में सोमवार को कहा कि उसे कई शिकायतें मिली हैं जिनमें आरोप लगाया गया है कि पूर्व राष्ट्रपति ने धमकी और जबरदस्ती के चलते इस्तीफा दिया था और सरकार इस अवधि के दौरान उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही थी। पत्र में कहा गया कि अब पूर्व राष्ट्रपति और उनका परिवार देश वापस आने का इरादा रखता है। शिकायत का आधार यह है कि मौजूदा खतरों के कारण पूर्व राष्ट्रपति और उनका परिवार कारण देश वापस नहीं आ सकते। यह संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।</p>
<p>हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि राजपक्षे बुधवार को देश वापस आएंगे या नहीं, जैसा कि उनके चचेरे भाई उदयंग वीरातुंगा ने पिछले हफ्ते संभावना जताई थी। अपने खिलाफ जनाक्रोश तेज होने पर 73 वर्षीय राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन के लिए अपनी सरकार के खिलाफ विद्रोह के मद्देनजर राजपक्षे ने पिछले महीने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। श्रीलंका से राजपक्षे पहले मालदीव गए, वहां से वह सिंगापुर गए और फिर बैंकाक पहुंचे। वह फिलहाल अपनी पत्नी लोमा राजपक्षे के साथ बैंकॉक के एक होटल में ठहरे हुए हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:-<a href="https://amritvichar.com/pakistan-ali-zardaris-taunt-on-imran-khan-lust-for-power-is-making-him-mad/">Pakistan: अली जरदारी का इमरान खान पर तंज, सत्ता की लालसा बना रही है उन्हें पागल</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Aug 2022 18:57:32 +0530</pubDate>
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                <title>श्रीलंका: विपक्षी पार्टी ने की राजपक्षे पर ‘धन के दुरुपयोग’ का मुकदमा चलाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जना बालवेगया (एसजेबी) ने कहा है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश लौटने का अधिकार है, लेकिन धन के दुरुपयोग के आरोपों के लिए उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि उन्हें कानूनी छूट नहीं है। राजपक्षे (73) देश छोड़कर चले गए हैं और देश …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/268499/sri-lankas-opposition-party-calls-for-rajapaksa-to-be-prosecuted-for-misuse-of-money"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/untitled-10-6.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जना बालवेगया (एसजेबी) ने कहा है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश लौटने का अधिकार है, लेकिन धन के दुरुपयोग के आरोपों के लिए उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि उन्हें कानूनी छूट नहीं है। राजपक्षे (73) देश छोड़कर चले गए हैं और देश की अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन के लिए सरकार के खिलाफ हुए विद्रोह के कारण उन्होंने पिछले महीने इस्तीफा दे दिया था। ‘डेली मिरर’ अखबार ने एसजेबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अजीत पी. परेरा के हवाले से बताया, ‘‘गोटबाया राजपक्षे इस देश के नागरिक हैं और उन्हें अपनी मातृभूमि लौटने का अधिकार है।</p>
<p>इस अधिकार से कोई इनकार नहीं कर सकता। लेकिन, धन के दुरुपयोग के आरोपों के लिए उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।’’ श्रीलंका का संविधान पूर्व राष्ट्रपतियों को व्यक्तिगत सुरक्षा और कर्मचारियों के साथ एक कार्यालय सहित विशेषाधिकार देता है। परेरा ने शुक्रवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘उनके खिलाफ अपने माता-पिता के स्मारक के लिए राजकीय कोष को कथित रूप से खर्च करने का मामला था। उन्हें मुकदमे का सामना करना होगा और दोषी पाए जाने पर दंडित किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें संविधान के अनुसार कानूनी छूट नहीं है।’’</p>
<p>एसजेबी ने राजपक्षे की सरकार पर भारत द्वारा प्रदान की गई एक अरब अमेरीकी डॉलर की ऋण सुविधा का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है, जो कि वित्तीय सहायता के तहत नकदी की कमी वाले राष्ट्र को अपने अभूतपूर्व आर्थिक संकट से निपटने में मदद करने के लिए दी गई थी। बृहस्पतिवार की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजपक्षे अमेरिका के ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं क्योंकि वह अपनी पत्नी लोमा राजपक्षे के अमेरिकी नागरिक होने के कारण आवेदन करने के योग्य हैं। राजपक्षे ने 2019 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अपनी अमेरिकी नागरिकता त्याग दी थी।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/ukraine-is-making-bravery-its-new-brand-and-making-it-a-weapon-of-war/">यूक्रेन ‘बहादुरी’ को अपना नया ब्रांड बता कर बना रहा युद्ध का हथियार</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Aug 2022 18:25:47 +0530</pubDate>
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                <title>सिंगापुर सरकार ने राजपक्षे को कोई विशेष लाभ और छूट नहीं दी: मंत्री बालाकृष्णन</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर। सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने कहा कि श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को उनकी सरकार ने कोई विशेष लाभ, छूट या आतिथ्य-सत्कार नहीं दिया है। गोटबाया उनकी सरकार के खिलाफ श्रीलंका में हुए व्यापक प्रदर्शनों के बीच पिछले महीने देश छोड़कर सिंगापुर आए थे। वह 13 जुलाई को मालदीव पहुंचे और …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/258601/singapore-government-did-not-give-any-special-benefits-and-exemptions-to-rajapaksa-minister-balakrishnan"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-08/untitled-15.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सिंगापुर।</strong> सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने कहा कि श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को उनकी सरकार ने कोई विशेष लाभ, छूट या आतिथ्य-सत्कार नहीं दिया है। गोटबाया उनकी सरकार के खिलाफ श्रीलंका में हुए व्यापक प्रदर्शनों के बीच पिछले महीने देश छोड़कर सिंगापुर आए थे। वह 13 जुलाई को मालदीव पहुंचे और वहां से अगले दिन सिंगापुर आए।</p>
<p>सिंगापुर में ‘‘निजी यात्रा’’ पर प्रवेश की अनुमति दिए जाने के बाद 73 वर्षीय गोटबाया ने संसद के अध्यक्ष को 14 जुलाई को अपना इस्तीफा ‘ई-मेल’ कर दिया था। बालाकृष्णन ने विपक्षी ‘वर्कर्स पार्टी’ के सदस्य एवं सांसद गेराल्ड गियाम के एक सवाल के लिखित जवाब में कहा, ‘‘सिंगापुर सरकार किसी पूर्व राष्ट्राध्यक्ष या किसी सरकार के पूर्व प्रमुख को कोई विशेष लाभ, छूट और आतिथ्य-सत्कार नहीं देती है।’’</p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को भी कोई विशेष लाभ, छूट या आथित्य-सत्कार नहीं दिया गया।’’ सत्तारूढ़ ‘पीपल्स एक्शन पार्टी’ के सदस्य एवं सांसद यिप योन वेंग ने चिंता जताई कि सिंगापुर ‘‘राजनीतिक भगोड़ों के लिए पनाहगाह’’ न बन जाए, इसके जवाब में गृह एवं विधि मंत्री के. षण्मगुगम ने कहा, ‘‘जिन विदेशी नागरिकों के पास वैध दस्तावेज हैं और जो देश में प्रवेश संबंधी अनिवार्यताओं को पूरा करते हैं, उन्हें ही सिंगापुर में आने की अनुमति दी जाएगी।</p>
<p>इसके अलावा, हमारे पास हमारे राष्ट्रहित के मद्देनजर किसी भी विदेशी को प्रवेश न देने का अधिकार है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि सिंगापुर आने वाला कोई विदेशी नागरिक अपने देश की सरकार के लिए वांछित है और उसकी सरकार उसे प्रत्यर्पित करने का आग्रह करती है, तो सिंगापुर सरकार अपने कानून के अनुसार उस सरकार की मदद करेगी।’’ राजपक्षे को सिंगापुर द्वारा एक नया वीजा जारी किया गया है, जिससे देश में उनका प्रवास 11 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/jammu-and-kashmir-combined-competitive-examination-2022-answer-key-released-check-this-way/">जम्मू-कश्मीर कंबाइंड कांपटीटिव परीक्षा 2022 की आंसर-की हुई जारी, ऐसे करें चेक</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 15:59:51 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे सिंगापुर से श्रीलंका लौटेंगे, कैबिनेट प्रवक्ता दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे छिपे नहीं हैं और सिंगापुर से उनके स्वदेश लौटने की संभावना है। कैबिनेट प्रवक्ता बंडुला गुणवर्धने ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी । राजपक्षे (73) नौ जुलाई को हुये लोगों के विद्रोह के बाद श्रीलंका से भाग गए थे। वर्ष 1948 के बाद से देश के …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/254791/former-president-rajapaksa-will-return-to-sri-lanka-from-singapore-cabinet-spokesperson"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/untitled-10-15.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे छिपे नहीं हैं और सिंगापुर से उनके स्वदेश लौटने की संभावना है। कैबिनेट प्रवक्ता बंडुला गुणवर्धने ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी । राजपक्षे (73) नौ जुलाई को हुये लोगों के विद्रोह के बाद श्रीलंका से भाग गए थे। वर्ष 1948 के बाद से देश के सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने में विफल रहने के लिये राजपक्षे के खिलाफ महीनों के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के बाद लोग राष्ट्रपति भवन में घुस गए थे।</p>
<p>राजपक्षे पहले 13 जुलाई को भागकर पहले मालदीव चले गये थे और वहां से अगले दिन सिंगापुर के लिए रवाना हुए थे। साप्ताहिक कैबिनेट मीडिया ब्रीफिंग में राजपक्षे के बारे में पूछे जाने पर, कैबिनेट प्रवक्ता गुणवर्धने ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्व राष्ट्रपति छिपे नहीं हैं और उनके सिंगापुर से लौटने की संभावना है । गुणवर्धने ने कहा कि वह ऐसा नहीं मानते हैं कि पूर्व राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग गए हैं और छिपे हुए हैं।</p>
<p>गुणवर्धने परिवहन एवं राजमार्ग और मास मीडिया मंत्री भी हैं। हालांकि, उन्होंने राजपक्षे की संभावित वापसी के बारे में कोई अन्य विवरण नहीं दिया। सिंगापुर ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति को 14 जुलाई को निजी यात्रा पर देश में प्रवेश करते ही 14 दिनों का अल्पकालिक यात्रा पास प्रदान किया था।</p>
<p>‘डेली मिरर’ की खबर के अनुसार, श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति को हिरासत में लेने के लिए सिंगापुर के अटॉर्नी जनरल से किए गए अनुरोध पर टिप्पणी करते हुए, कैबिनेट प्रवक्ता ने कहा कि यदि कोई स्थिति है, तो देश में जिम्मेदार अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएंगे कि पूर्व राष्ट्रपति को कोई नुकसान न हो।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a class="post-title the-subtitle" href="https://amritvichar.com/guatemalan-president-giamattai-arrives-in-kyiv-shows-solidarity-with-ukraine/">ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति जियामात्तेई पहुंचे कीव, यूक्रेन के साथ एकजुटता प्रदर्शित की</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 16:46:22 +0530</pubDate>
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                <title>श्रीलंकाई राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास से एक हजार से अधिक कलाकृतियां गायब, एसआईटी करेगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास से मूल्यवान वस्तुओं समेत एक हजार से अधिक कलाकृतियां गायब हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने नौ जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के आवासों पर कब्जा कर लिया था। पुलिस ने बताया कि …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/253333/over-1000-artifacts-missing-from-sri-lankan-rashtrapati-bhavan-prime-ministers-residence"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/श्रीलंकाई-राष्ट्रपति-भवन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास से मूल्यवान वस्तुओं समेत एक हजार से अधिक कलाकृतियां गायब हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने नौ जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के आवासों पर कब्जा कर लिया था।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन और यहां ‘टेंपल ट्री’ में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास से आवश्यक वस्तुओं समेत एक हजार से अधिक मूल्यवान कलाकृतियां गायब हो गई हैं। वेब पोर्टल ‘कोलंबो पेज’ ने पुलिस सूत्रों के हवाले से अपनी खबर में बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर राष्ट्रपति भवन के साथ-साथ प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास से दुर्लभ कलाकृतियों सहित कम से कम 1,000 मूल्यवान वस्तुएं गायब हो गई हैं। खबर के अनुसार जांच शुरू करने के लिए विशेष जांच दल गठित किए गए हैं।</p>
<p>खबर के अनुसार जांच अधिकारियों के लिए परेशानी की बात यह है कि श्रीलंका के पुरातत्व विभाग के पास राष्ट्रपति भवन में प्राचीन वस्तुओं और विभिन्न कलाकृतियों का विस्तृत रिकॉर्ड नहीं है। पुरातत्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को समाचार पत्र ‘लंकादीपा’ को बताया कि गायब हुई प्राचीन वस्तुओं की सही संख्या के बारे में विशिष्ट और स्पष्ट जानकारी प्राप्त करना मुश्किल होगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि हालांकि पुलिस का अनुमान है कि गायब हुई वस्तुओं की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि वह राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री के निजी आवास जैसे किसी अन्य सरकारी भवन पर प्रदर्शनकारियों को कब्जा नहीं करने देंगे। विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने श्रीलंका के सशस्त्र बलों और पुलिस को लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर धावा बोलने और संसद को बाधित करने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/man-arrested-for-allowing-israeli-journalist-to-enter-mecca/">मक्का में इजराइली पत्रकार को प्रवेश कराने वाला व्यक्ति गिरफ्तार, पुलिस ने की कार्रवाई</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jul 2022 18:52:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Sri Lanka Crisis : विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से पीछे हटे, दुल्लास अल्हाप्परुमा को समर्थन का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका में 20 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है।  विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने अपनी राष्ट्रपति पद से उम्मीदवारी वापस लेने से ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने दुल्लास अल्हाप्परुमा को समर्थन देने का फैसला किया है। इस बात की जानकारी उन्होंने ट्विटर के माध्यम से दी। उन्होंने ट्वीट …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/250893/sri-lanka-crisis-opposition-leader-sajith-premadasa-withdraws-from-presidential-candidacy"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/साजिथ-प्रेमदासा.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका में 20 जुलाई यानी कल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है।  विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने अपनी राष्ट्रपति पद से उम्मीदवारी वापस लेने से ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने दुल्लास अल्हाप्परुमा को समर्थन देने का फैसला किया है। इस बात की जानकारी उन्होंने ट्विटर के माध्यम से दी। उन्होंने ट्वीट किया,  मैं अपने देश, जिसे मैं प्यार कता हूं, उसकी भलाई के लिए राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से अपना नाम वापस लेता हूं। उन्होंने कहा, हमारी पार्टी विपक्षी सहयोग की दिशा में कड़ी मेहनत करेंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">For the greater good of my country that I love and the people I cherish I hereby withdraw my candidacy for the position of President. <a href="https://twitter.com/sjbsrilanka?ref_src=twsrc%5Etfw">@sjbsrilanka</a> and our alliance and our opposition partners will work hard towards making <a href="https://twitter.com/DullasOfficial?ref_src=twsrc%5Etfw">@DullasOfficial</a> victorious.</p>
<p>— Sajith Premadasa (@sajithpremadasa) <a href="https://twitter.com/sajithpremadasa/status/1549246554199928832?ref_src=twsrc%5Etfw">July 19, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p> </p>
<p><strong>राष्ट्रपति पद के लिए आज हो रहा नॉमिनेशन</strong><br />
श्रीलंका में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया आज सुबह 10 बजे से शुरू हो गई है। प्रेमदासा की उम्मीदवारी वापस लेने के बाद अब कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (SLPP) दुलस अल्हाप्परुमा और और जनता विमुक्ति पेरामुना (JVP) नेता अनुरा कुमारा में मुकाबला होगा। आर्थिक और राजनीतिक उठापटक के बीच जनविद्रोह के कारण गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़कर सिंगापुर भाग गए थे। जिसके बाद प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया।</p>
<p><strong>राष्ट्रपति चुनाव से पहले श्रीलंका में संसद परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई</strong><br />
श्रीलंका की संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने की शिकायत के बाद मंगलवार को श्रीलंका संसद परिसर में तथा उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। महिंदा यापा अभयवर्धने ने पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी और सांसदों को सोशल मीडिया पर धमकी देने वाले भड़काऊ संदेशों के खिलाफ विस्तृत जांच की मांग की थी। यह शिकायत ऐसे समय में की गई है, जब गोटबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद देश में 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव किए जाने की उम्मीद है। श्रीलंका की सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के सांसदों ने सोमवार को शिकायत की थी कि उन्हें सोशल मीडिया पर श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के खिलाफ मतदान करने के लिए चेतावनी दी जा रही है। इसके बाद, मंगलवार को संसद परिसर में और उसके आसपास पुलिस तथा सेना को तैनात किया गया। पुलिस ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर सांसदों को धमकियां देने वालों, ऐसे संदेश प्रसारित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>गोटबाया राजपक्षे ने सिंगापुर से ही इस्तीफा पत्र भेजा </strong><br />
गौरतलब है कि गोटबाया राजपक्षे देश की अर्थव्यवस्था को न संभाल पाने के कारण अपने और अपने परिवार के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच पहले मालदीव गए और वहां से सिंगापुर चले गए हैं। उन्होंने सिंगापुर से ही इस्तीफा पत्र भेजा है। उनके इस्तीफे के बाद देश के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। श्रीलंका में 1978 के बाद से पहली बार देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव सांसदों द्वारा गुप्त मतदान के जरिए होगा न कि जनादेश के जरिए। इससे पहले केवल 1993 में कार्यकाल के बीच में ही राष्ट्रपति का पद खाली हुआ था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास की हत्या कर दी गयी थी। तब डी बी विजेतुंगा को संसद ने सर्वसम्मति से प्रेमदास का कार्यकाल पूरा करने का जिम्मा सौंपा था।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/sri-lanka-crisis-npc-seeks-consent-on-sri-lankan-presidents-ballot/">Sri Lanka Crisis: एनपीसी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति के मतपत्र पर मांगी गई सहमति</a></strong></p>
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                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 11:57:02 +0530</pubDate>
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                <title>गोटबाया राजपक्षे ने त्यागपत्र में किया खुद का बचाव, कहा- पूरी क्षमता के अनुसार मातृभूमि की सेवा की</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने त्यागपत्र में खुद का बचाव करते हुए कहा उन्होंने पूरी क्षमता के साथ मातृभूमि की रक्षा की और भविष्य में भी ऐसा ही करते रहेंगे। राजपक्षे के इस त्यागपत्र को शनिवार को संसद के विशेष सत्र के दौरान पढ़ा गया। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति पद …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/249297/gotabaya-rajapaksa-defended-himself-in-the-resignation-letter-said-served-the-motherland-to-the-best-of-his-ability"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/गोटबाया-राजपक्षे-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने त्यागपत्र में खुद का बचाव करते हुए कहा उन्होंने पूरी क्षमता के साथ मातृभूमि की रक्षा की और भविष्य में भी ऐसा ही करते रहेंगे। राजपक्षे के इस त्यागपत्र को शनिवार को संसद के विशेष सत्र के दौरान पढ़ा गया। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति पद के लिए हुई रिक्ति की घोषणा करने के सिलसिले में संक्षिप्त समय के लिए श्रीलंकाई संसद की बैठक हुई। अर्थव्यस्था को संभालने में सरकार की नाकामी के चलते श्रीलंका में तेज हुए विरोध प्रदर्शनों के चलते बुधवार को राजपक्षे देश से भाग गए थे।</p>
<p>सिंगापुर से राजपक्षे द्वारा भेजे गए त्यागपत्र को संसद के 13 मिनट के सत्र के दौरान पढ़ा गया। राजपक्षे (73) ने अपने त्यागपत्र में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के बदतर होने के लिए कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने आर्थिक मंदी का मुकाबला करने के लिए सर्वदलीय सरकार बनाने की कोशिश करने जैसे बेहतरीन कदम उठाए। राजपक्षे ने त्यागपत्र में लिखा, ”मैंने पूरी क्षमता के साथ मातृभूमि की रक्षा की और भविष्य में भी ऐसा ही करता रहूंगा।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद तीन महीने के अंदर पूरी दुनिया कोविड-19 की चपेट में आ गई। राजपक्षे ने कहा, ”मैंने उस समय पहले से ही खराब आर्थिक माहौल से विवश होने के बावजूद लोगों को महामारी से बचाने के लिए कार्रवाई की।” उन्होंने कहा, “2020 और 2021 के दौरान मुझे लॉकडाउन का आदेश देने के लिए मजबूर होना पड़ा और विदेशी मुद्रा की स्थिति बिगड़ गई। मेरे विचार में, मैंने स्थिति से निपटने के लिए एक सर्वदलीय या राष्ट्रीय सरकार बनाने का सुझाव देकर सबसे अच्छा कदम उठाया।”</p>
<p>राजपक्षे ने पत्र में कहा, “नौ जुलाई को पार्टी नेताओं की इच्छा के बारे में पता चलने के बाद मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया।” वह बुधवार को मालदीव भाग गए थे और इसके बाद गुरुवार को सिंगापुर पहुंच गए। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि न तो राजपक्षे ने शरण मांगी है और न ही उन्हें शरण दी गई है तथा उन्हें ”निजी यात्रा” के लिए देश में प्रवेश की अनुमति दी गई।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/sri-lanka-crisis-opposition-leader-sajith-premadasa-said-if-i-win-the-presidential-election-then-i-will-not-allow-dictatorship-in-sri-lanka/">Sri Lanka Crisis : विपक्षी नेता सजित प्रेमदासा बोले- यदि मैं राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत गया, तो श्रीलंका में तानाशाही नहीं होने दूंगा</a></strong></p>
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                                                            <category>Breaking News</category>
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                <pubDate>Sat, 16 Jul 2022 13:56:07 +0530</pubDate>
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                <title>Gotabaya Rajapaksa : ‘युद्ध नायक’ से जन आक्रोश का केंद्र बनने तक की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। उग्रवादी संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (लिट्टे) को कुचलने और लगभग 30 साल तक चले गृह युद्ध को खत्म करने के लिए किसी जमाने में ‘‘युद्ध नायक’’ माने जाने वाले गोटबाया राजपक्षे आज उन्हीं लोगों के आक्रोश का सामना कर रहे हैं जिन्होंने कभी उन्हें सिर आंखों पर बैठाया था। पूर्व राष्ट्रपति महिंदा …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/249007/gotabaya-rajapakse-from-war-hero-to-becoming-the-center-of-public-outcry"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/11-7.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> उग्रवादी संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (लिट्टे) को कुचलने और लगभग 30 साल तक चले गृह युद्ध को खत्म करने के लिए किसी जमाने में ‘‘युद्ध नायक’’ माने जाने वाले गोटबाया राजपक्षे आज उन्हीं लोगों के आक्रोश का सामना कर रहे हैं जिन्होंने कभी उन्हें सिर आंखों पर बैठाया था। पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई और 73 वर्षीय नेता गोटबाया राजपक्षे एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं, जिन्होंने 1980 में असम में ‘काउंटर इन्सर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल’ में प्रशिक्षण लिया था।</p>
<p>वह सैन्य पृष्ठभूमि वाले पहले शख्स हैं जिन्हें 2019 में भारी जनादेश के साथ श्रीलंका का राष्ट्रपति चुना गया था। उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा ऐसे वक्त में दिया है जब देश की अर्थव्यवस्था को गर्त में ले जाने का जिम्मेदार उन्हें ठहराते हुए प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर कब्जा जमा लिया था। श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।</p>
<p>देश में विदेशी मुद्रा का भंडार खत्म हो गया है, जिसका मतलब है कि वह खाद्य पदार्थ और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर सकता, जिससे इन चीजों की भारी किल्लत हो गयी है और महंगाई आसमान छू रही है। राजपक्षे ने बढ़ते दबाव के बाद अप्रैल मध्य में अपने बड़े भाई चामल और बड़े भतीजे नामल को मंत्रिमंडल से हटा दिया था। बाद में महिंदा राजपक्षे ने भी इस्तीफा दे दिया था, जब उनके समर्थकों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया था, जिससे देश के कई हिस्सों में राजपक्षे परिवार के समर्थकों के खिलाफ हिंसा भड़क उठी थी। गोटबाया राजपक्षे ने रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री बनाकर कुछ हफ्तों तक संकट पर काबू करने की कोशिश की लेकिन अंतत: वह नाकाम रहे और व्यापक प्रदर्शनों के बीच उन्हें अपना आधिकारिक आवास छोड़ना पड़ा।</p>
<p>एक अज्ञात स्थान से गोटबाया राजपक्षे ने शनिवार रात को संसद अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने को सूचित किया कि वह बुधवार को इस्तीफा देंगे। हालांकि, वह पद से इस्तीफा दिए बगैर देश छोड़कर मालदीव चले गए। मालदीव से वह सिंगापुर चले गए। सिंगापुर पहुंचने के बाद राजपक्षे ने अध्यक्ष को अपना इस्तीफा पत्र भेजा। श्रीलंका के सिंहली बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने लिट्टे के नेता वी. प्रभाकरण की 2009 में मौत के बाद संघर्ष खत्म करने में निभायी भूमिका के लिए राजपक्षे को ‘‘युद्ध नायक’’ ठहराया।</p>
<p>हालांकि, उन पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा। राजपक्षे पर राजनीतिक हत्याओं के भी आरोप लगे। लिट्टे के निशाने पर आए राजपक्षे दिसंबर 2006 में एक आत्मघाती हमलावर की हत्या की कोशिश में बच गए थे। उन्हें चीन की ओर झुकाव रखने वाला भी माना जाता है। महिंदा के कार्यकाल में चीन ने श्रीलंका में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करना शुरू किया था।</p>
<p>आलोचकों का कहना है कि महिंदा के कारण देश ‘‘चीन के कर्ज के जाल’’ में फंसना शुरू हुआ। महिंदा के कार्यकाल में चीन ने हंबनटोटा बंदरगाह के लिए कर्ज दिया और कर्ज न चुका पाने के कारण देश ने उसे 99 साल के पट्टे पर बीजिंग को सौंप दिया था। श्रीलंका हिंद महासागर में अपनी अहम सामरिक स्थिति के कारण समुद्री मार्गों पर व्यापार करने का ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और चीन भी हिंद-महासागर में तेजी से अपना दबदबा बना रहा है। मतारा जिले के पलातुवा में 20 जून 1949 को जन्मे राजपक्षे नौ भाई-बहनों में पांचवें नंबर के हैं।</p>
<p>उनके पिता डी. ए. राजपक्षे 1960 के दशक में विजयनंद दहानायके की सरकार में प्रमुख नेता थे और श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के संस्थापक सदस्य भी थे। राजपक्षे ने कोलंबो में आंनदा कॉलेज से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा हासिल की और कोलंबो विश्वविद्यालय से 1992 में सूचना प्रौद्योगिकी में परास्नातक की डिग्री हासिल की। वह 1971 में कैडेट अधिकारी के तौर पर सीलोन आर्मी में शामिल हुए। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में 1983 में मास्टर की डिग्री प्राप्त की।</p>
<p>उन्हें 1991 में सर जॉन कोटेलावाला रक्षा अकादमी में डिप्टी कमांडेंट नियुक्त किया गया। सेना में 20 साल तक दी सेवा के दौरान राजपक्षे को देश के तीन राष्ट्रपति जे. आर. जयवर्दने, राणासिंघे प्रेमदास, राजपक्षे से वीरता पुरस्कार मिले। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद राजपक्षे ने कोलंबो की एक आईटी कंपनी में नौकरी की। इसके बाद वह 1998 में अमेरिका चले गए और लॉस एंजिलिस में लोयोला लॉ स्कूल में एक आईटी पेशेवर के तौर पर काम किया।</p>
<p>वह 2005 में अपने भाई महिंदा के राष्ट्रपति पद के लिए प्रचार अभियान में मदद करने के लिए श्रीलंका लौटे। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका से दोहरी नागरिकता हासिल की। इसके बाद नवंबर 2005 में तत्कालीन नव निर्वाचित राष्ट्रपति महिंदा ने उन्हें रक्षा मंत्री बनाया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने मई 2009 में लिट्टे को कुचल दिया और ‘‘युद्ध नायक’’ का खिताब हासिल किया। राजपक्षे विवाहित हैं और उनका एक बेटा है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/thailand-to-save-the-child-the-elephant-sacrificed-its-life-watch-the-video/">थाईलैंड : बच्चे को बचाने के लिए हथिनी ने लगाई जान की बाजी, देखें वीडियो</a></strong></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 18:41:41 +0530</pubDate>
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                <title>Sri Lanka Crisis : पीएम विक्रमसिंघे बने अंतरिम राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने गोटबाया राजपक्षे का उत्तराधिकारी चुने जाने तक अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर शुक्रवार को शपथ ग्रहण की। राजपक्षे ने दिवालिया हो चुके देश की अर्थव्यवस्था को न संभाल पाने के लिए अपनी सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया। Determination, striving and a clear strategy made …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/248777/sri-lanka-crisis-pm-wickremesinghe-appointed-as-interim-president-chief-justice-administered-oath"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/untitled-21-3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने गोटबाया राजपक्षे का उत्तराधिकारी चुने जाने तक अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर शुक्रवार को शपथ ग्रहण की। राजपक्षे ने दिवालिया हो चुके देश की अर्थव्यवस्था को न संभाल पाने के लिए अपनी सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Determination, striving and a clear strategy made him the President of <a href="https://twitter.com/hashtag/SriLanka?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#SriLanka</a> now he is His Excellency Ranil Wickramasinghe <a href="https://twitter.com/RW_UNP?ref_src=twsrc%5Etfw">@RW_UNP</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/SriLankaProtests?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#SriLankaProtests</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/SriLankanCrisis?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#SriLankanCrisis</a> <a href="https://t.co/a17KYdhgG2">https://t.co/a17KYdhgG2</a></p>
<p>— Barath Arullsamy (@BarathArulsamy) <a href="https://twitter.com/BarathArulsamy/status/1547843901733883909?ref_src=twsrc%5Etfw">July 15, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p>वह देश छोड़ कर पहले मालदीव और फिर वहां से सिंगापुर चले गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में बताया कि मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने विक्रमसिंघे (73) को श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर शपथ दिलाई।</p>
<p>संसद अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से घोषणा की कि राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया है। राजपक्षे ने अपने तथा अपने परिवार के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच देश छोड़कर चले जाने के दो दिन बाद इस्तीफा दिया।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/saudi-arabia-lifts-ban-on-israel-flights-a-decision-taken-due-to-joe-bidens-visit/">सऊदी अरब ने इजराइल की उड़ानों से हटाया प्रतिबंध, जो बाइडेन की यात्रा के कारण लिया गया फैसला</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 13:26:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sri lanka Crisis : श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के मालदीव भागने से कोलंबो में उग्र प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका में आर्थिक-राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। इस बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर चले गये हैं। जानकारी के मुताबिक, गोटबाया राजपक्षे फिलहाल मालदीव पहुंचे हैं। यहां से वह दुबई जाने वाले हैं। राष्ट्रपति  राजपक्षे के देश छोड़ने के बाद लोगों को गुस्सा भड़क गया है। राजधानी कोलंबो की सड़कों पर प्रदर्शनकारी जमकर …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/247689/declaration-of-emergency-in-sri-lanka-furious-protests-in-colombo-as-president-gotabaya-rajapaksa-flees-to-maldives"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-07/राष्ट्रपति-गोटबाया-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका में आर्थिक-राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। इस बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर चले गये हैं। जानकारी के मुताबिक, गोटबाया राजपक्षे फिलहाल मालदीव पहुंचे हैं। यहां से वह दुबई जाने वाले हैं। राष्ट्रपति  राजपक्षे के देश छोड़ने के बाद लोगों को गुस्सा भड़क गया है। राजधानी कोलंबो की सड़कों पर प्रदर्शनकारी जमकर उत्पात कर रहे हैं। उग्र भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। लोगों के उग्र विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है।</p> <p><img class="alignnone wp-image-495082 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-07/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87-1.jpg" alt="Sri lanka Crisis" width="700" height="464"></img></p> <p>प्रधानमंत्री कार्यालय ने मीडिया संगठनों को सूचना दी कि देश में आपातकाल लागू किया गया है और पश्चिमी प्रांत में कर्फ्यू लगाया गया है। इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के कार्यालय की ओर कूच करते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे गए लेकिन इसके बावजूद वे अवरोधकों को हटाकर प्रधानमंत्री के कार्यालय में घुस गए और उनसे इस्तीफा देने की मांग की। प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने पहले ही कहा है कि वह इस्तीफा देने और सर्वदलीय सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए तैयार हैं।</p> <p><strong>20 जुलाई को होगा नए राष्ट्रपति का चुनाव </strong><br /> आपको बता दें कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कुछ दिनों पहले एलान किया था कि वो 13 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि उनके देश से भाग जाने के बाद अब उनके इस्तीफे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव होना है।</p> <p><img src="https://pbs.twimg.com/media/FXPYo6QUEAAZ-gO?format=jpg&amp;name=large" alt="Image"></img></p> <p><strong>श्रीलंका के पास नहीं है विदेशी मुद्रा</strong><br /> श्रीलंका के पास सबसे जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए भी विदेशी मुद्रा समाप्त हो गई है, जिससे उसके 22 मिलियन लोगों के लिए गंभीर कठिनाइयां पैदा हो गई हैं। देश अप्रैल में अपने 51 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज के भुगतान में चूक गया और संभावित राहत के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत कर रहा है।</p> <p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/sri-lanka-crisis-sri-lankan-president-gotabaya-rajapaksa-left-the-country-reached-maldives/">Sri Lanka Crisis : श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने छोड़ा देश, पहुंचे मालदीव</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 11:12:06 +0530</pubDate>
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