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                <title>world heritage day - Amrit Vichar</title>
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                <description>world heritage day RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>World Heritage Day: विश्व धरोहर संरक्षण सबकी जिम्मेदारी, प्रो. आरएन राय का अयोध्या में जोरदार आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. आरएन राय ने कहा कि विश्व धरोहर हमारी पहचान और इतिहास का अमूल्य हिस्सा है। इसको संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। अयोध्या की धरोहर स्थलों के बारे में विस्तार से बताते हुए छात्रों से कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी है कि धरोहर स्थलों को संरक्षित करने का प्रयास सभी करें।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579196/world-heritage-day--world-heritage-conservation-is-everyone-s-responsibility--prof--r-n--rai-makes-a-strong-appeal-in-ayodhya"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(13)8.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अयोध्या, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. आरएन राय ने कहा कि विश्व धरोहर हमारी पहचान और इतिहास का अमूल्य हिस्सा है। इसको संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। अयोध्या की धरोहर स्थलों के बारे में विस्तार से बताते हुए छात्रों से कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी है कि धरोहर स्थलों को संरक्षित करने का प्रयास सभी करें। यदि ये स्थल ही संरक्षित नहीं रहेंगे तो पर्यटक क्या देखने आएंगे और आपकी विरासत भी संरक्षित नहीं रह पाएगी। भारत में पर्यटन के लिए अनेकों विकल्प उपस्थित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">विशिष्ट वक्ता प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने धरोहरों के आर्थिक और पर्यटन महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि इनके संरक्षण से स्थानीय विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग हमें केवल रोजगार ही नहीं देता बल्कि देश को विकासशील बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि विश्व धरोहर दिवस हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का संदेश देता है। संयोजक डॉ. महेन्द्र पाल सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. राणा रोहित सिंह, डॉ. आशुतोष पांडेय, डॉ. अंशुमान पाठक, डॉ. रविन्द्र भारद्वाज सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 17:31:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व धरोहर दिवस :  सभ्यता की अमूल्य धरोहरों को संरक्षण की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व विरासत दिवस, वर्ल्ड हेरिटेज डे तथा आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (इंटरनेशनल डे फोर मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स) कहा जाता है। यह दिवस मानवता की साझा सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इन स्थलों का संरक्षण यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन, 1972 के अंतर्गत किया जाता है, जिसे यूनेस्को सदस्य देशों द्वारा स्वीकार किया गया एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता माना जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य विश्वभर के ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक स्थलों, पुरातात्विक अवशेषों, प्राकृतिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579148/civilization-s-priceless-heritage-needs-protection"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/निराश्रित-पशु-का-अंतिम-संस्कार-करातीं-भावना-सक्सेना-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व विरासत दिवस, वर्ल्ड हेरिटेज डे तथा आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (इंटरनेशनल डे फोर मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स) कहा जाता है। यह दिवस मानवता की साझा सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इन स्थलों का संरक्षण यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन, 1972 के अंतर्गत किया जाता है, जिसे यूनेस्को सदस्य देशों द्वारा स्वीकार किया गया एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता माना जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य विश्वभर के ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक स्थलों, पुरातात्विक अवशेषों, प्राकृतिक संपदाओं तथा मानव सभ्यता से जुड़ी अमूल्य विरासतों के संरक्षण के प्रति जनचेतना उत्पन्न करना है। वास्तव में धरोहर केवल पत्थरों से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा, कला, ज्ञान, संघर्ष, इतिहास और सामूहिक पहचान की जीवंत प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%B6%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-(2).jpg" alt="निराश्रित पशु का अंतिम संस्कार करातीं भावना सक्सेना (2)"></img></p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में 10 चयन मानदंड निर्धारित हैं, जिनमें से कम से कम एक को पूरा करना आवश्यक है। इनमें ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक प्रभाव, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता तथा वैज्ञानिक महत्व जैसे पहलू सम्मिलित हैं। विश्व धरोहर मुख्यतः तीन प्रकार की होती है- पहली, सांस्कृतिक धरोहर, जिसमें स्मारक, मंदिर, मस्जिद, चर्च, किले, मूर्तियां, प्राचीन नगर, स्थापत्य कला, भाषा, संगीत, नृत्य और परंपराएं शामिल हैं। दूसरी, प्राकृतिक धरोहर, जिसमें पर्वत, नदियां, समुद्र, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक परिदृश्य आते हैं तथा तीसरी, मिश्रित धरोहर, जिनमें सांस्कृतिक और प्राकृतिक दोनों विशेषताएं विद्यमान होती हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यूनेस्को केवल स्थायी संरचनाओं या प्राकृतिक स्थलों को ही नहीं, बल्कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को भी मान्यता देता है। भारत की योग परंपरा और कुंभ मेला इसके प्रमुख उदाहरण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्तर पर सबसे अधिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों वाला देश इटली है, जिसके बाद चीन का स्थान आता है। भारत भी विश्व धरोहर स्थलों की दृष्टि से अग्रणी देशों में सम्मिलित है। यूनेस्को एक विशेष सूची ‘वर्ल्ड हेरिटेज इन डेंजर’ भी संचालित करता है, जिसमें उन स्थलों को शामिल किया जाता है, जो युद्ध, प्रदूषण, प्राकृतिक आपदा, अतिक्रमण, अत्यधिक पर्यटन, जलवायु परिवर्तन या उपेक्षा के कारण संकट में हों। यदि कोई स्थल संरक्षण मानकों का पालन न करे या उसका मूल स्वरूप गंभीर रूप से बदल जाए, तो उसे सूची से हटाया भी जा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरणस्वरूप ओमान का अरेबियन ओरिक्स अभयारण्य तथा जर्मनी की ड्रेसडेन एल्बे घाटी को सूची से हटाया जा चुका है। यहां यह उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 तक विश्वभर के 196 देशों में लगभग 1,223 विश्व धरोहर स्थल थे, जिनमें 952 सांस्कृतिक, 231 प्राकृतिक और 40 मिश्रित स्थल शामिल हैं। भारत जैसे प्राचीन और बहुसांस्कृतिक देश में इस दिवस का विशेष महत्व है। अप्रैल 2025 तक भारत में 43 विश्व धरोहर स्थल (34 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 2 मिश्रित) तथा 62 स्थल संभावित सूची में सम्मिलित थे। भारत के प्रमुख धरोहर स्थलों में ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, अजंता-एलोरा गुफाएं, एलीफेंटा गुफाएं, खजुराहो समूह, सांची स्तूप, महाबोधि मंदिर, हम्पी, महाबलीपुरम, जंतर-मंतर, कुतुब मीनार, लाल किला, कोणार्क सूर्य मंदिर, नालंदा, भीमबेटका, सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिमी घाट तथा कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष एक विशेष थीम घोषित की जाती है। वर्ष 2026 की थीम है-‘संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया’ रखी गई है। इसका आशय यह है कि युद्ध, संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं के समय केवल भवनों और स्मारकों की ही नहीं, बल्कि जीवित विरासतों-जैसे लोक परंपराएं, सामाजिक ज्ञान, सांस्कृतिक पहचान और समुदाय आधारित परंपराएं की भी त्वरित सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। विश्व धरोहर दिवस केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, बल्कि मानवता की साझा विरासत को सुरक्षित रखने का वैश्विक संकल्प है। यदि हम अपनी धरोहरों की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास, संस्कृति और पहचान से वंचित हो जाएंगी। अतः विकास के साथ-साथ विरासतों के संरक्षण, संवर्द्धन और सम्मान के लिए हमें दृढ़ संकल्पित होकर कार्य करना चाहिए।-<span style="color:rgb(186,55,42);">सुनील कुमार महला</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 12:33:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UNESCO के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ में शामिल हुई भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां, विरासत दिवस पर भारत को मिली उपलब्धि  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार ।</strong> आज विश्व विरासत दिवस पर भारत की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां उन 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रहों का हिस्सा हैं जिन्हें यूनेस्को के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ यानि 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस ऐलान के साथ ही भारत की 14 अमूल्य कृतियां अब इस अंतरराष्ट्रीय सूची का हिस्सा बन चुकी हैं. यूनेस्को के अनुसार, 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों की वैज्ञानिक क्रांति, इतिहास में महिलाओं के योगदान और बहुपक्षवाद की प्रमुख</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534072/india-achieved-the-manuscripts-of-bhagavad-geeta-natyashastra-on-heritage"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(9)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार ।</strong> आज विश्व विरासत दिवस पर भारत की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि भगवद् गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियां उन 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रहों का हिस्सा हैं जिन्हें यूनेस्को के ‘विश्व स्मृति रजिस्टर’ यानि 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस ऐलान के साथ ही भारत की 14 अमूल्य कृतियां अब इस अंतरराष्ट्रीय सूची का हिस्सा बन चुकी हैं. यूनेस्को के अनुसार, 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों की वैज्ञानिक क्रांति, इतिहास में महिलाओं के योगदान और बहुपक्षवाद की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रविष्टियां रजिस्टर में शामिल की गईं। </p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाहिर की खुशी</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इसे ‘दुनिया भर में हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘गीता और नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में शामिल किया जाना हमारे शाश्वत ज्ञान और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से सभ्यता और चेतना को पोषित किया है। उनकी अंतर्दृष्टि दुनिया को प्रेरित करती रहती है।’ </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/narendramodi/status/1913094867074294034">https://twitter.com/narendramodi/status/1913094867074294034</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">नाट्यशास्त्र को कलाओं का एक मौलिक ग्रन्थ माना जाता है। यूनेस्को ने 17 अप्रैल को अपने विश्व स्मृति रजिस्टर में 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रह जोड़े, जिससे कुल अंकित संग्रहों की संख्या 570 हो गई है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी कहा कि यह भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि यह भारत की शाश्वत मेधा और कलात्मक प्रतिभा का सम्मान है। </p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/gssjodhpur/status/1913072671144690045">https://twitter.com/gssjodhpur/status/1913072671144690045</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;"><br /><strong>ये भी पढ़े : </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533873/nehru-manzil-sealed-in-lucknow--ed-took-action--know-what-congress-said#gsc.tab=0">लखनऊ में नेहरू मंजिल सील, ED ने की कार्रवाई, जानिये कांग्रेस ने क्या कहा...</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533832/maha-kumbh-of-sports-will-be-organized-in-lucknow--defense-minister-rajnath-singh-will-inaugurate-it-in-kd-singh-babu-stadium#gsc.tab=0">लखनऊ में आयोजित होगा खेलों का महाकुंभ, KD सिंह बाबू स्टेडियम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Tourism</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/534072/india-achieved-the-manuscripts-of-bhagavad-geeta-natyashastra-on-heritage</link>
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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 14:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Heritage Day 2025: आज मनाया जा रहा है विश्व विरासत दिवस, इस मौके पर यूपी करा रहा हेरिटेज वॉक, जान लीजिए पूरा प्रोसेस  </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार | </strong>दुनियाभर में मौजूद ऐतिहसिक, प्राकृर्तिक और सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित आज का ये दिन विश्व धरोहर दिवस के नाम से सेलिब्रेट किया जाता है | हर साल की तरह 18 अप्रैल के दिन इसे मनाया जाता है | बता दे कि विश्व भर में ऐसे कई धरोहर है जिन्हें आज की पीढ़ी, इससे पहले और हमारे पूर्वजो के समय पर भी मौजूद थी और इनकी रक्षा करना इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए अस्तित्व में ज़िंदा रखना बेहद जरुरी है |  इसी कारण इस दिवस की महत्ता और भी बढ़ जाती है |</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम बात करें</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534046/world-heritage-day-2025--world-heritage-day-is-being-celebrated-today--on-this-occasion-up-is-organizing-heritage-walk--know-the-complete-process"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/news-post--(6)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार | </strong>दुनियाभर में मौजूद ऐतिहसिक, प्राकृर्तिक और सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित आज का ये दिन विश्व धरोहर दिवस के नाम से सेलिब्रेट किया जाता है | हर साल की तरह 18 अप्रैल के दिन इसे मनाया जाता है | बता दे कि विश्व भर में ऐसे कई धरोहर है जिन्हें आज की पीढ़ी, इससे पहले और हमारे पूर्वजो के समय पर भी मौजूद थी और इनकी रक्षा करना इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए अस्तित्व में ज़िंदा रखना बेहद जरुरी है |  इसी कारण इस दिवस की महत्ता और भी बढ़ जाती है |</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम बात करें प्राचीनतम धरोहरों में से एक ताजमहल, कुतुबमीनार, हम्पी ये सभी हमारी पहचान है और पर्यटन, सांस्कृतिक शिक्षा का आधार भी है | बहुत सारे देश इन धरोहरों को संभालने में आर्थिक स्तर पर अपनी विशेष भूमिका निभाते हैं |     </p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>आखिर विश्व धरोहर दिवस की जरूरत क्यों पड़ी जानिए इसका इतिहास क्या कहता है ?</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">इसका उद्भव साल 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स ICOMOS<br />ने अलग देशों में धरोहर की जागरूकता के लिए एक खास दिन को रखने का विचार दिया था और अगले साल ही UNESCO द्वारा प्रस्ताव को 22वीं जनरल कॉन्फ्रेंस में पारित कर दिया तब से ही हर साल इस दिन को मनाये जाने लगा |</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>विश्व धरोहर दिवस की थीम </strong></h6>
<p style="text-align:justify;">विश्व धरोहर दिवस को मानाने के के लिए हर साल इसकी थीम चुनी जाती है | और इस साल आपदा और संघर्ष प्रतिरोधी विरासत (Heritage under Threat from Disasters and Conflicts) इसकी थीम रखी गयी है | इसका अर्थ प्राकृर्तिक आपदाओं से इन धरोहरों को बचाने के लिए एक कदम, तैयारी और इनसे सीख लेना है |</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>यूपी में आयोजित होगा हेरिटेज वॉक </strong></h6>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन मंत्री की ओर से बताया गया कि 18 अप्रैल को UPSTDC की ओर से अपटूअर्स ट्रैवल डिवीजन द्वारा हेरिटेज वॉक का आयोजन किया जाएगा | जिसमें विशेष रूप से प्रतिभागी ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी साझा करेंगे | भ्रमण के दौरान पर्यटक प्रदेश की समृद्ध विरासत और ऐतिहासिक धरोहर से रूबरू होंगे | उन्हें स्थानीय लोक कला, व्यंजन, संस्कृति और हस्तशिल्प का भी लुफ्त उठाएंगे | इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जन जन तक पहुंचाना है |</p>
<p style="text-align:justify;">इस हेरिटेज वॉक के लिए विशेष पैकेज तैयार किये गए है इसमें प्रतिभागी को ट्रांसपोर्ट प्रवेश शुल्क नाश्ता गाइड सेवा इत्यादि सुविधाएं प्रदान की जाएगी | इसका समय ढाई बजे से ३ बजे के बीच होगा | इसके पैकेज शुल्क इस प्रकार है - </p>
<p style="text-align:justify;">आगरा- 899 रुपए प्रति पर्यटक, <br />वाराणसी- 475 रुपए प्रति पर्यटक, <br />झांसी- 850 रुपए प्रति पर्यटक, <br />प्रयागराज- 500 रुपए प्रति पर्यटक, <br />लखनऊ- 800 रुपए</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी बुकिंग के लिए आपको इसकी वेबसाइट UPSTDC <a href="https://www.upstdc.co.in">www.upstdc.co.in</a>से कर सकेंगे | </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े :</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533873/nehru-manzil-sealed-in-lucknow--ed-took-action--know-what-congress-said#gsc.tab=0">लखनऊ में नेहरू मंजिल सील, ED ने की कार्रवाई, जानिये कांग्रेस ने क्या कहा...</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/533832/maha-kumbh-of-sports-will-be-organized-in-lucknow--defense-minister-rajnath-singh-will-inaugurate-it-in-kd-singh-babu-stadium#gsc.tab=0">लखनऊ में आयोजित होगा खेलों का महाकुंभ, KD सिंह बाबू स्टेडियम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>Knowledge</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 13:21:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लघुचित्र भारतीय शास्त्रीय परंपरा की अमूल्य धरोहर है : मो. शकील </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>विश्व धरोहर दिवस के मौके पर राज्य संग्रहालय लखनऊ द्वारा महत्त्वपूर्ण कलाकृतियों पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी कला दर्शन आयोजन किया गया, जिसका उदघाटन राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ चित्रकार मो. शकील ने किया।</p>
<p>मो. शकील ने बताया कि लघुचित्र भारतीय शास्त्रीय परंपरा की अमूल्य धरोहर है। इससे बड़ी धरोहर दुनिया में क्या हो सकती है। इसको जो संभालकर रखने वाले हैं,वो अनूठा इतिहास रचते हैं। ऐसी धरोहरें हमारी सभ्यता का प्रतीक हैं, यह संग्रहालय में हमें आज भी देखने को मिल जाती है। देश हमेशा विश्व गुरु रहा है, इन्हीं धरोहरों की वजह से हमेशा विश्वगुरु रहेगा।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/361725/mo-shakeel-miniature-painting-is-an-invaluable-heritage-of-indian"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/कलाकृति.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>विश्व धरोहर दिवस के मौके पर राज्य संग्रहालय लखनऊ द्वारा महत्त्वपूर्ण कलाकृतियों पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी कला दर्शन आयोजन किया गया, जिसका उदघाटन राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ चित्रकार मो. शकील ने किया।</p>
<p>मो. शकील ने बताया कि लघुचित्र भारतीय शास्त्रीय परंपरा की अमूल्य धरोहर है। इससे बड़ी धरोहर दुनिया में क्या हो सकती है। इसको जो संभालकर रखने वाले हैं,वो अनूठा इतिहास रचते हैं। ऐसी धरोहरें हमारी सभ्यता का प्रतीक हैं, यह संग्रहालय में हमें आज भी देखने को मिल जाती है। देश हमेशा विश्व गुरु रहा है, इन्हीं धरोहरों की वजह से हमेशा विश्वगुरु रहेगा। प्रदर्शनी में समुद्र मंथन, भगीरथ द्वारा शिव स्तुति, राम एवं हनुमान द्वारा उमा-महेश्वर की स्तुति, शेषशायी विष्णु वामनावतार, नृसिंह अवतार बलराम द्वारा यमुनाकर्षण, हरिहर आदि दृष्टव्य हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी का अवलोकन करने पर सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है कि कलाकृतियां अपनी शैलीगत विशिष्टता को समाहित किये हुए तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक स्थिति को दर्शाने के साथ ही आम जनमानस को भारतीय धर्म एवं संस्कृति के गूढ़ तत्व ज्ञान का भी बोध कराती हैं। प्रदर्शित कलाकृतियों के माध्यम से दर्शकों को राज्य संग्रहालय में संग्रहीत ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। इस मौके पर सहायक निदेशक अल शाज फातमी,  सहायक निदेशक डॉ. तृप्ति राय, डॉ. अनिता चौरसिया, शशिकला राय, शालिनी श्रीवास्तव एवं गायत्री गुप्ता उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>18 अप्रैल को मनाया जाता है विश्व धरोहर दिवस </strong></p>
<p>मानव सभ्यता से जुड़ी धरोहरों को जन सामान्य के मध्य जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व पटल पर प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। धरोहर एवं संस्कृति को संरक्षित करना तथा नयी पीढ़ी को अपनी गौरवमयी धरोहर से परिचित कराने के साथ ही उसे सरंक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। धारोहर गौरवशाली इतिहास के अस्तित्व का जीवन्त प्रमाण है और वर्तमान में अतीत की साक्षात हस्ताक्षर है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/361723/lucknow-covid-infected-woman-died">लखनऊ : कोविड संक्रमित महिला की मौत</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/361725/mo-shakeel-miniature-painting-is-an-invaluable-heritage-of-indian</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Apr 2023 23:44:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व धरोहर दिवस : औद्योगिक धरोहर सहेजने की हुई पहल, उद्यमियों ने दिया इंडस्ट्रियल हेरिटेज, पढ़ें- पूरी खबर </title>
                                    <description><![CDATA[औद्योगिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध शहर में जहां एक ओर आकर्षक पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं, वहीं पुरानी धरोहरें लगातार नष्ट होती जा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/361530/world-heritage-day-is-celebrated-on-18-april"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-04/विश्व-धरोहर-दिवस-.jpg" alt=""></a><br /><p>अंग्रजों के शासन काल के दौरान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सेनानायक नाना साहब पेशवा की शरण स्थली कानपुर के बिठूर में स्थित पेशवा महल अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है, जिसे पुरातत्व विभाग ने संरक्षित करते हुए आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। झकरकटी पुल के निकट बना कानपुर का पुराना रेलवे स्टेशन से कलकत्ता, बॉम्बे के रूट की ट्रेनों का आवागमन हुआ करता था। वर्ष 1924 में  घन्टाघर, कैंट साइड में कानपुर सेंट्रल स्टेशन के बनने से पुराना रेलवे स्टेशन से रेल का संचालन बंद हो गया। पुराना रेलवे स्टेशन में रेल लाइन, प्लेटफार्म और रेल के अवशेष अभी भी मौजूद हैं। रिजर्व पुलिस लाइन के मुख्य द्वार पर रखी वर्ष 1880 की निर्मित तोप जो राहगीरों व शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र बनी है। देश-विदेश में कानपुर का नाम रोशन करने वाली द ब्रिटिश इण्डिया कारपोरेशन लिमिटेड कानपुर वूलेन मिल्स ब्रांच यानि लालइमली जो बंद कर दी गई अब निशानी के तौर पर सिर्फ इमारत खड़ी है। ये धरोहर अब खंडहर भले ही हो गईं लेकिन कानपुर वासियों की विरासत बनी है। <span style="color:rgb(224,62,45);">फोटो - मनोज तिवारी</span></p>
<p><strong>कानपुर, अमृत विचार।</strong> औद्योगिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध शहर में जहां एक ओर आकर्षक पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं, वहीं पुरानी धरोहरें लगातार नष्ट होती जा रही हैं। इसे देखते हुए  उद्यमियों ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को ‘इंडस्ट्रियल हेरिटेज पार्क’ स्थापित करने का प्लान सौंपा है। इस पार्क में बंद होने के बाद खंडहर होती जा रही सूती मिलों की अनुकृति (रेप्लिका) स्थापित करने की योजना बनाई गई है।</p>
<p>लाल इमली, स्वदेशी मिल, लक्ष्मीरतन कॉटन, म्योर मिल, न्यू विक्टोरिया मिल, अथर्टन मिल, कानपुर जूट उद्योग, जेके रेयान समेत एक दर्जन मिलों की अनुकृति बनाकर उसमें इन मिलों के इतिहास का उल्लेख किया जाएगा। इसमें यूपी चैम्बर ऑफ कॉमर्स, बीआईसी सदरलैंड की अनुकृति भी होगी। यह प्रस्ताव प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनोज बंका ने उद्योगबन्धु की बैठक में डीएम को सौंपा था। </p>
<p>दरअसल, कानपुर का पर्यटन की दृष्टि से अधकचरा विकास हुआ है। बदलते समय के साथ अब ऐतिहासिकता संजोए स्थलों की विकास योजनाओं पर कार्य चल रहा है। रामायण थीम पार्क, अटल घाट, बोट क्लब, बॉटनिकल पार्क, घाटमपुर के चर्चित मंदिर और शहर के पुराने स्टेशन को पर्यटन के लिहाज से तैयार करने की बात चल रही है। इस संबंध में सांसद सत्यदेव पचौरी कहते हैं कि गंगा बैराज, बॉटनिकल गार्डन की भूमि पर गंगा जैव विविधता पार्क का निर्माण कराने की योजना है। इसी तरह अटल घाट के पीछे 32 एकड़ में गंगा थीम पार्क की स्थापना होनी है।</p>
<p>इसमें गंगा की पौराणिकता के साथ वर्ष 1857 की क्रांति से जुड़ा इतिहास भी लोग जान सकेंगे। करीब 50 एकड़ में बॉटनिकल गार्डन बनाने की योजना है, जिसमे औषधीय पौधे होंगे। मोतीझील के तुलसी पार्क में रामायण थीम पार्क में लेजर लाइट शो से त्रेतायुग जीवंत दर्शन कराने की योजना कछुआ चाल में है। घाटमपुर स्थित गुप्तकालीन और जगन्नाथ मंदिर को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर काम चल रहा है।</p>
<p>बिठूर में लवकुश आश्रम, वाल्मीकि आश्रम, पेशवा और रानी लक्ष्मीबाई के इतिहास से लोगों को परिचित कराने की योजना है। ग्रीन पार्क में विजिटर्स गैलरी शुरू हो चुकी है। टाट मिल के निकट 135 वर्ष पुराने रेलवे स्टेशन को भी पर्यटक स्थल बनाया जाना है। इसे वर्ष 2002 में रेलवे ने धरोहर घोषित किया था।<br />इन खंडहरों का इतिहास बुलंद है...</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/361530/world-heritage-day-is-celebrated-on-18-april</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/361530/world-heritage-day-is-celebrated-on-18-april</guid>
                <pubDate>Tue, 18 Apr 2023 15:55:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनीताल राजभवन: ब्रिटिश वास्तुकला की अनोखी विरासत, दीदार को लगता है तांता</title>
                                    <description><![CDATA[हल्द्वानी, अमृत विचार। नैनीताल में ब्रिटिश शासन की विरासत के रूप में मौजूद गौथिक वास्तुकला पर आधारित बेहद खूबसूरत प्राकृतिक परिवेश में बसा राजभवन देश के सर्वश्रेष्ठ राजभवनों में से एक है। यहां उत्तर भारत का खूबसूरत गोल्फ कोर्स और सुल्ताना डाकू के हथियार समेत जेव विविधता हर किसी को अपनी तरफ खींच लेती है। …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/203975/nainital-raj-bhavan-a-unique-heritage-of-british-architecture"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-04/img-20210426-wa0059-e1650283992919.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> नैनीताल में ब्रिटिश शासन की विरासत के रूप में मौजूद गौथिक वास्तुकला पर आधारित बेहद खूबसूरत प्राकृतिक परिवेश में बसा राजभवन देश के सर्वश्रेष्ठ राजभवनों में से एक है। यहां उत्तर भारत का खूबसूरत गोल्फ कोर्स और सुल्ताना डाकू के हथियार समेत जेव विविधता हर किसी को अपनी तरफ खींच लेती है। समुद्र सतह से 6,785 फीट ऊंचाई पर स्थित इस राजभवन की नींव 27 अप्रैल 1897 को रखी गई थी और मार्च 1900 में यह बनकर तैयार हुआ था।</p> <p><strong>राजभवन में नैनीताल का पहला गुरुद्वारा</strong><br /> इतिहासकार प्रो. अजय रावत बताते हैं कि गौथिक शैली में बने राजभवन की नींव 27 अप्रैल 1897 को रखी गई थी। 1900 में इसका निर्माण पूरा हुआ। प्रो. रावत के अनुसार राजभवन में अंदर गुरुद्वारा की अनुमति दी गई। यह नैनीताल का पहला गुरुद्वारा था।</p> <img class="wp-image-412915 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/navbharat-times-15-e1650284054204.webp" alt="" width="480" height="360"></img>इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ के स्कॉटलैंड स्थित समर पैलेस बलमोराल से मिलती  राजभवन की इमारत। <p><strong>आकृति बकिंघम पैलेस जैसी नहीं बलमोराल जैसी है </strong><br /> राजभवन की निर्माण शैली गौथिक है। यह इंग्लैंड के लंदन के बकिंघम पैलेस के जैसी है और उससे बहुत ज्यादा मिलती-जुलती है। लेकिन यह भी एक तथ्य है कि इनमें समानता नजर नहीं आती। इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ के स्कॉटलैंड स्थित समर पैलेस बलमोराल से यह बहुत ज्यादा मिलता जुलता है। एक बार को यह समर पैलेस की ही प्रतिकृति नजर आता है। पहले इस राजभवन में भी बलमोराल जैसी ऊंची व तीखी ढलान वाली चिमनीनुमा मीनार लगी थीं तब यह हूबहू बलमोरल जैसा ही नजर आता था। बाद में उनके कारण यहां बिजली गिरने की कुछ घटनाओं के बाद इन्हें हटा दिया गया। भवन की मूल आकृति बलमोराल वाली ही है।</p> <img class="wp-image-412917 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/whatsapp-image-2022-04-07-at-8.42.37-am-1024x768-1-e1650284135775.jpeg" alt="" width="480" height="360"></img>नैनीताल का गोल्फ कोर्स मैदान। <p><strong>गोल्फ कोर्स है आकर्षण का केंद्र</strong><br /> राजभवन के खूबसूरत गोल्फ कोर्स में शौकिया गोल्फ खिलाड़ियों के लिए गवर्नर्स गोल्फ कप प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद से यह प्रतियोगिता लोकप्रिय हुई। हॉफ कोर्स प्रबंधक कर्नल हरीश साह ने बताया कि कई मौकों पर इसमें विदेशी खिलाड़ी भी शामिल हुए हैं। 2015 से यहां विद्यार्थियों के लिए भी एक टूर्नामेंट शुरू किया गया है।</p> <p><strong>जैव विविधता से भरपूर है राजभवन</strong><br /> राजभवन परिसर में करीब आठ एकड़ में भवन और बगीचे आदि हैं। 45 एकड़ में गोल्फ कोर्स, जबकि 160 एकड़ में घना जंगल है। प्रख्यात उद्घोषक हेमंत बिष्ट के अनुसार यहां बांज, तिलौंज, पुतली, देवदार, सुरई, अखरोट, चिनार सहित तमाम प्रजातियों के वृक्षों के अलावा बेहद दुर्लभ लिविंग फॉसिल माना जाने वाला जिंकोबा बाइलोबा वृक्ष भी है। यहां बार्किंग डियर, सांभर, पाम सिवेट कैट, घुरल, कलीज फेसेंट, कोलरस तीतर, हिमालयन ब्लू व्हिस्लिंग थ्रश, बारबेट, मैगपाई सहित दर्जनों प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। अनेक बार यहां भालू और गुलदार भी देखे जा चुके हैं।</p> <img class="wp-image-412920 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/raj-bhawan-nainital-indian-tourism-opening-time-closing-e1650284181311.jpg" alt="" width="480" height="256"></img>राजभवन के भीतर का आकर्षक नजारा। <p><strong>संग्रहालय में रखे हैं सुल्ताना डाकू के हथियार</strong><br /> राजभवन में दुर्लभ और बेहद आकर्षक एंटीक फर्नीचर के साथ ही संग्रहालय में सुल्ताना डाकू के हथियार, भाले, तलवार आदि और पुराने समय के बर्तन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।</p> <p><strong>राष्ट्रपति समेत आठ प्रधानमंत्री रह चुके हैं यहां</strong><br /> नैनीताल स्थित राजभवन में विभिन्न अवसरों पर भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद, प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु समेत लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, गुलजारी लाल नंदा, राजीव गांधी, एचडी देवगौड़ा, अटल बिहारी बाजपेयी, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी नेपाल के राजा त्रिभुवन वीर विक्रम शाह सहित कई राज्यपाल और विशिष्ट हस्तियां निवास कर चुकी हैं।</p> <img class="wp-image-412922 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/raj-bhawan-nainital-indian-tourism-entry-ticket-price-e1650284235827.jpg" alt="" width="480" height="256"></img>राजभवन नैनीताल।]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 17:47:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>World Heritage Day: जानिए बेहद खूबसूरत भारत की धरोहर के बारे में</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली World Heritage Day: वर्ल्ड हेरिटेज डे दुनियाभर में हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य विश्व के संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा देना है। इसके अलावा यह दिन हमें अपनी सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण की भी याद दिलाता है। भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थान हैं जिनका संस्कृति, शिल्प और …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/203953/know-about-the-most-beautiful-heritage-sites-of-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-04/3-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली World Heritage Day:</strong> वर्ल्ड हेरिटेज डे दुनियाभर में हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य विश्व के संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा देना है। इसके अलावा यह दिन हमें अपनी सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण की भी याद दिलाता है। भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थान हैं जिनका संस्कृति, शिल्प और कला के रूप में भी विशेष महत्व है। अगर आपने ये धरोहर स्थल नहीं देखे हैं, तो आप अपने परिवार के साथ इन जगहों पर घूमकर अच्छा अनुभव कर सकते है।</p> <h2><strong>महाबोधि मंदिर</strong></h2> <img class="wp-image-412814 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitled111.jpg" alt="" width="2296" height="1724"></img>(महाबोधि मंदिर)image form social media <p>महाबोधि मंदिर परिसर भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र स्थानों में से एक है और विशेष रूप से इसे आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए जाना जाता है। यह स्थान जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान बुद्ध ने यहां ज्ञान प्राप्त किया था। यह उन सबसे पुराने बौद्ध मंदिरों में से एक है जिसका निर्माण पूरी तरह से ईंटों द्वारा किया गया था जो गुप्त काल से अभी भी भारत में मौजूद है। ईटों से बने 160 फुट ऊंचे महाबोधि मंदिर का निर्माण पहली से दूसरी ईस्वी शताब्दी के दौरान किया गया था। मंदिर लगभग 4.8 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। फाह्यान (एक चीनी पर्यटक) ने पहली बार मुख्य मंदिर और बोधि वृक्ष के बारे में 404-05 ईस्वी के दौरान वर्णन किया था।</p> <h2><strong>ताजमहल</strong></h2> <img class="wp-image-412854" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/2-2.jpg" alt="" width="692" height="511"></img>(ताजमहल) image from social media <p>ताजमहल भारतीय शहर आगरा में यमुना नदी के दक्षिण तट पर एक हाथीदांत-सफेद संगमरमर का मकबरा है। इसे 1632 में मुगल सम्राट शाहजहां (1628 से 1658 तक शासन किया गया) द्वारा अपनी पसंदीदा पत्नी मुमताज महल की मकबरे के लिए शुरू किया गया था। मकबरा 17-हेक्टेयर (42 एकड़) परिसर का केंद्रबिंदु है, जिसमें एक मस्जिद और एक गेस्ट हाउस शामिल है, और इसे तीन तरफ एक अनियंत्रित दीवार से घिरा औपचारिक उद्यान में स्थापित किया गया है।</p> <h2><strong>अजंता की गुफाएं</strong></h2> <img class="wp-image-412845 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/1-6.jpg" alt="" width="1259" height="720"></img>(अजंता की गुफाएं) image from social media <p>चट्टानों को काटकर बनाए गए बौद्ध गुफ़ा मंदिर व मठ, अजंता गाँव के समीप, उत्तर-मध्य महाराष्ट्र, पश्चिमी भारत में स्थित है, जो अपनी भित्ति चित्रकारी के लिए विख्यात है। औरंगाबाद से 107 किलोमीटर पूर्वोत्तर में वगुर्ना नदी घाटी के 20 मीटर गहरे बाएँ छोर पर एक चट्टान के आग्नेय पत्थरों की परतों को खोखला करके ये मंदिर बनाए गए हैं।</p> <h2><strong>कोणार्क सूर्य मंदिर</strong></h2> <img class="wp-image-412841 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitle3337.jpg" alt="" width="1200" height="675"></img>(कोणार्क सूर्य मंदिर) image from social media <p>केसरी वंश के राजा द्वारा निर्मित इस मंदिर की शिल्पकला दर्शनीय है। मंदिर का निर्माण सूर्य के काल्पनिक रथ का रूप देकर किया गया है। सूर्य मंदिर चौकोर परकोटे से घिरा है। इसके तीन तरफ ऊंचे−ऊंचे प्रवेशद्वार हैं। पूरब दिशा में मुख्य द्वार है जिसके सामने समुद्र से सूर्य उदय होता दिखाई पड़ता है। कई कथाओं में इस प्रकार का उल्लेख मिलता है कि कोणार्क सूर्य मंदिर के शिखर पर एक चुम्बकीय पत्थर लगा है जिसके प्रभाव से, कोणार्क के समुद्र से गुजरने वाले सागरपोत इस ओर खिंचे चले आते हैं, जिससे उन्हें भारी क्षति हो जाती है।</p> <h2><strong>सांची का स्तूप</strong></h2> <img class="wp-image-412834 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitle3336.jpg" alt="" width="800" height="464"></img>(सांची का स्तूप) image form social media <p>सांची में बौद्ध स्मारक बौद्ध संरचनाओं की एक श्रृंखला है जो 200 ईसा पूर्व से 100 ईसा पूर्व की है. सांची मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 24 जनवरी 1989 को यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया था।</p> <h2><strong>खजुराहो के स्मारक</strong></h2> <img class="wp-image-412830 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitle3335.jpg" alt="" width="700" height="500"></img>(खजुराहो के स्मारक) image from social media <p>शायद देश के सबसे प्रसिद्ध हिंदू स्मारकों में से एक, खजुराहो स्मारकों में कामुक पोज में पत्थर की नक्काशी के साथ नगाड़ा कामुक प्रतीकों का चित्रण है। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए वसीयतनामा खड़ा है, इन स्मारकों को 950 और 1050 ईस्वी के बीच बनाया गया था और इसमें चंदेल स्थापत्य शैली में निर्मित 85 मंदिर शामिल थे।</p> <h2><strong>चोल मंदिर</strong></h2> <img class="wp-image-412824" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitle3334.jpg" alt="" width="693" height="462"></img>(चोल मंदिर) image from social media <p>चोल शासन के दौरान निर्मित, तंजावुर के महान जीवित चोल मंदिरों ने अपनी भव्यता और शानदार डिजाइनों के साथ पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया को प्रेरित किया। इन मंदिरों को दक्षिण भारत में निर्माण कला का अग्रणी माना जाता है।</p> <h2><strong>काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान</strong></h2> <img class="wp-image-412823 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitle3333-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1707"></img>(काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) image from social media <p>पूर्वी राज्य असम में स्थित, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को अपने असाधारण प्राकृतिक वातावरण के लिए विश्व धरोहर स्थल माना जाता था। इसमें दुनिया के ग्रेट वन-हॉर्न वाले गैंडों के दो-तिहाई घर हैं।</p> <h2><strong>कुतुब मीनार</strong></h2> <img class="wp-image-412818 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitle222.jpg" alt="" width="1396" height="776"></img>(कुतुब नीनार) image from social media <p>कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है। इसमें 379 सीढ़ियां है, जो मीनार के शिखर तक पहुंचती हैं। जमीन पर इस इमारत का व्यास 14.32 मीटर है, जो शिखर तक पहुंचने पर 2.75 मीटर रह जाता है। इस इमारत की स्थापत्य कला देखने में भव्य लगती है। कुतुब कॉम्प्लेक्स में घूमने पर एक 10 मिनट की फिल्म भी दिखाई जाती है, जिसमें कुतुब मीनार और कुतुब कॉम्प्लेक्स में स्थित अन्य इमारतों के बारे में कई दिलचस्प बातें जानने को मिलती हैं।</p> <h2><strong>भारत का पर्वतीय रेलवे</strong></h2> <img class="wp-image-412808 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/untitled000.jpg" alt="" width="700" height="400"></img>(भारत का पर्वतीय रेलवे) image from social media <p>माउंटेन रेलवे ऑफ़ इंडिया को वर्ष 1999, 2005, यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित किया गया था, 2008 में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (1999), नीलगिरि माउंटेन रेलवे (2005) और कालका-शिमला रेलवे (2008) शामिल हैं। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे पहली पहाड़ी यात्री रेलवे है जिसे स्वदेशी इंजीनियरिंग समाधानों के साथ लागू किया गया है। 326 मीटर से 2203 मीटर की ऊँचाई पर नीलगिरि पर्वतीय रेलवे ने उस समय की नवीनतम तकनीक पर काम किया। शिमला में कालका शिमला रेलवे 96 किलोमीटर लंबी, सिंगल-ट्रैक वर्किंग रेल लिंक है।</p> <h2>लाल किला</h2> <img class="wp-image-412902 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/5-2.jpg" alt="" width="600" height="350"></img>(लाल किला) image from social media <p>लाल किले का निमार्ण शाहजहां ने 1638 ईसवी में करवाई थी। इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। इस किले को बनवाने के लिए शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा को दिल्ली स्थानांतरित कर लिया था। यहां पर रहकर उन्‍होंने इस शानदार किले को दिल्ली के केन्द्र में यमुना नदी के पास बनवाया। यह यमुना नदीं के तीन तरफ से घिरा हुआ है, जिसके अद्भुत सौंदर्य और आर्कषण को देखते ही बनता है। इस किले का निर्माण 1638 से शुरू होकर 1648 ईसवी तक चला, इसके निमार्ण में करीब 10 साल का समय लगा। इस भव्य किला बनने की वजह से भारत की राजधानी दिल्ली को शाहजहांनाबाद कहा जाता था, साथ ही यह शाहजहां के शासनकाल की रचनात्मकता का मिसाल माना जाता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 17:07:23 +0530</pubDate>
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                <title>World Heritage Day 2022 : 18 अप्रैल को क्यों मनाया जाता है व‌र्ल्ड हेरिटेज डे? जानें इतिहास और इस साल की थीम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दुनिया भर में 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस यानि ‘व‌र्ल्ड हेरिटेज डे’ मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद स्मारकों को संरक्षित करने के उपायों और लोगों को उनके जीवन में सांस्कृतिक और धरोहर के मूल्य को पहचानने के लिए प्रोत्साहित व जागरूकता करना होता है। व‌र्ल्ड हेरिटेज डे …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/203777/world-heritage-day-2022-why-is-world-heritage-day-celebrated-on-18-april-learn-history-and-this-years-theme"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-04/world-heritage-day-2022-01-1.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> दुनिया भर में 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस यानि ‘व‌र्ल्ड हेरिटेज डे’ मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद स्मारकों को संरक्षित करने के उपायों और लोगों को उनके जीवन में सांस्कृतिक और धरोहर के मूल्य को पहचानने के लिए प्रोत्साहित व जागरूकता करना होता है।</p> <h2><strong>व‌र्ल्ड हेरिटेज डे 2022 की थीम</strong></h2> <p>हर वर्ष वर्ल्ड हेरिटेज डे को मनाने की एक अलग थीम होती है।<strong> इस साल मनाए जा रहे विश्व धरोहर दिवस की थीम है धरोहर और पर्यावरण।</strong> ICOMOS (International Council on Monuments and Sites) ने इस बार सरकारी, गैरसरकारी और तमाम संस्थाओं को सारे कार्यक्रम इसी थीम के इर्द-गिर्द करने की अपील की है। इस बार की थीम विरासत की रक्षा के लिए जलवायु और समानता को प्राथमिकता देने की बात करता है। आज यह दिन यह दिन “विरासत और जलवायु” विषय के तहत मनाया जा रहा है।</p> <img class="wp-image-412518" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/demo-image-3.png" alt="" width="701" height="488"></img>फोटो-सोशल मीडिया। <h2><strong>व‌र्ल्ड हेरिटेज डे का इतिहास</strong></h2> <p>साल 1982 में अंतर्राष्ट्रीय परिषद और स्मारक और स्थल (International Council on Monuments and Sites) ने प्राचीन संस्कृति और उसके ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन को मनाने का सुझाव दिया था। जिसके बाद स्टॉकहोम में आयोजित हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पारित कर दिया गया। इसके बाद यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की स्थापना हुई और 18 अप्रैल 1978 में विश्व स्मारक दिवस के तौर पर इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। उस दौरान विश्व में कुल 12 स्थलों को ही विश्व स्मारक स्थलों की सूची में शामिल किया गया था। बाद में 18 अप्रैल 1982 को ट्यूनीशिया में ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स’ ने सबसे पहले विश्व धरोहर दिवस मनाया। फिर 1983 नवंबर माह में यूनेस्को ने स्मारक दिवस को ‘विश्व धरोहर दिवस’ (व‌र्ल्ड हेरिटेज डे) के तौर पर मनाने का ऐलान किया।</p> <img class="wp-image-412524 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/demo-image-4.png" alt="" width="1080" height="720"></img>फोटो-सोशल मीडिया। <h2><strong>व‌र्ल्ड हेरिटेज डे का महत्व</strong></h2> <p>विश्व धरोहर दिवस (व‌र्ल्ड हेरिटेज डे) के महत्व की तो हर देश का अपने अतीत और उस अतीत से जुड़ी कई सारी गौरव गाथा है। इन गौरव गाथा की कहानी बयां करती हैं वहां स्थित तात्कालिक समय के स्मारक और धरोहरें। इस दिन का लक्ष्य और महत्व ऐतिहासिक स्मारकों और स्थानों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह सांस्कृतिक अखंडता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इतनी समृद्ध और विविध संस्कृति के प्रति ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम न केवल इस विरासत को संजोएं बल्कि इसे नुकसान पहुंचने से भी बचाएं।</p> <h2><strong>व‌र्ल्ड हेरिटेज डे मनाने का तरीका</strong></h2> <p>दुनियाभर में बहुत सारे संगठन हैं, जो धरोहरों के संरक्षण पर काम कर रहे हैं। विश्व विरासत दिवस को यह संगठन अपने अपने तरीके से मनाते हैं। हेरिटेज वाॅक और फोटो वाॅक आदि का इस दिन आयोजन होता है। लोग धरोहरों की यात्रा पर जाते हैं। उनके संरक्षण की शपथ लेते हैं। लोगों को उनके देश की धरोहरों को लेकर जागरूक किया जाता है।</p> <img class="wp-image-412526 size-full" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-04/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%8F%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A5%A4-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE.png" alt="" width="648" height="432"></img>महाराष्ट्र में स्थित एलोरा की गुफाएं। फोटो-सोशल मीडिया <h2><strong>भारत की विश्व धरोहर</strong></h2> <p>भारत की पहली विश्व धरोहर महाराष्ट्र में स्थित एलोरा की गुफाएं हैं। वर्तमान में भारत में 40 विश्व धरोहरे हैं। यूनेस्को ने जिन 40 विश्व धरोहरों को घोषित किया है,उसमें सात प्राकृतिक, 32 सांस्कृतिक और एक मिश्रित स्थल हैं। भारत का 39 वां और 40 वां क्रमश: कालेश्वर मंदिर तेलंगाना और हड़प्पा सभ्यता का शहर धोलावीरा है। महाराष्ट्र में पांच यूनेस्को विश्व विरासत स्थल हैं।</p> <p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/worlds-shortest-war-that-lasted-only-1-hour/">दुनियां का सबसे छोटा युद्ध जो महज 1 घण्टे तक चला</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 12:53:15 +0530</pubDate>
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                <title>आगरा: विश्व धरोहर दिवस के दिन पर्यटक फ्री में कर सकेंगे ताज का दीदार</title>
                                    <description><![CDATA[आगरा। प्रेम की निशानी कहे जाने वाले ताजमहल का दीदार पर्यटक विश्व धरोहर दिवस के दिन फ्री में कर सकेंगे। विश्व धरोहर दिवस यानी की 18 अप्रैल के दिन ताज व्यू प्वाइंट से पर्यटकों को ताजमहल दिखाया जायेगा।  ताज व्यू पॉइंट से ताजमहल का दीदार करने में अलग ही खूबसूरती का अनुभव होता है। दरअसल,ताजमहल …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>आगरा।</strong> प्रेम की निशानी कहे जाने वाले ताजमहल का दीदार पर्यटक विश्व धरोहर दिवस के दिन फ्री में कर सकेंगे। विश्व धरोहर दिवस यानी की 18 अप्रैल के दिन ताज व्यू प्वाइंट से पर्यटकों को ताजमहल दिखाया जायेगा।  ताज व्यू पॉइंट से ताजमहल का दीदार करने में अलग ही खूबसूरती का अनुभव होता है।</p>
<p>दरअसल,ताजमहल को देखने के लिए रोजाना हजारों पर्यटक आगरा पहुंचते हैँ, प्रेम की निशानी कहे जाने वाले ताजमहल को देखने के लिए देश से ही नहीं विदेश भी भारी तादात में पर्यटक पहुंचते हैं,ऐसे में पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है। विश्व ध्ररोहर के दिन ताजमहल को देखने के लिए पर्यटकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।</p>
<p>बताया जा रहा है कि विश्व धरोहर दिवस 18 अप्रैल को पूरी दुनिया मे मनाया जाता है,इस दिवस को मनाने की वजह विश्व की पुरानी इमारतों अथवा धरोहरों को सुरक्षित रखना तथा उनका प्रचार प्रसार करना है।</p>
<p>अप्रैल महिने में एडीए ने ताज व्यू प्वाइंट को चार दिनों के लिए फ्री रखने का निर्णय लिया है। इसके अलावा शुल्क दरों में भी कुछ राहत देने की बात सामने  आयी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://amritvichar.com/agra-bulldozer-of-ada-ran-on-illegal-colony-construction-was-being-done-on-10-thousand-square-meters-without-passing-the-map/">आगरा: अवैध कॉलोनी पर चला एडीए का बुलडोजर, बिना नक्शा पास कराए 10 हजार वर्ग मीटर पर हो रहा था निर्माण</a></strong></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आगरा</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/202565/agra-tourists-will-be-able-to-see-the-taj-for-free-on-the-day-of-world-heritage-day</link>
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                <pubDate>Fri, 15 Apr 2022 17:22:53 +0530</pubDate>
                
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