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                <title>EWS Reservation - Amrit Vichar</title>
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                <description>EWS Reservation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> EWS Quota : लाखों की फीस भरकर भी EWS कोटे से लिया लाभ, क्या वाकई 'जरूरतमंदों' को मिल रहा लाभ या सिस्टम की कमियों पर सेंधमारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार : </strong>संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। परीक्षा में जहां एक ओर बेहद गरीब परिवारों के बच्चों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं, वहीं दूसरी ओर इस कोटे के तहत संपन्न पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल उठने लगे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(15)13.jpg" alt="Untitled design (15)" width="1200" height="720" /></p>
<h4 style="text-align:justify;">पारदर्शिता और नियमों के पुनरीक्षण की मांग</h4>
<p style="text-align:justify;">अब सोशल मीडिया पर EWS कोटे की पारदर्शिता को लेकर मांग तेज हो गई है। जानकारों की मानें तो 'सिस्टम के खामियों का फायदा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/585173/ews-quota--availing-benefits-under-the-ews-quota-despite-paying-exorbitant-fees%E2%80%94are-the--truly-needy--actually-benefiting--or-is-the-system-being-exploited-due-to-its-loopholes"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-06/untitled-design-(18)12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृत विचार : </strong>संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। परीक्षा में जहां एक ओर बेहद गरीब परिवारों के बच्चों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं, वहीं दूसरी ओर इस कोटे के तहत संपन्न पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल उठने लगे हैं। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(15)13.jpg" alt="Untitled design (15)" width="1280" height="720"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;">पारदर्शिता और नियमों के पुनरीक्षण की मांग</h4>
<p style="text-align:justify;">अब सोशल मीडिया पर EWS कोटे की पारदर्शिता को लेकर मांग तेज हो गई है। जानकारों की मानें तो 'सिस्टम के खामियों का फायदा उठाकर आर्थिक रूप से मजबूत लोग इस कोटे में सेंधमारी करेंगे, तो उन गरीब और जरूरतमंद अभ्यर्थियों का हक मारा जाएगा जो वास्तव में इस आरक्षण के हकदार हैं। ऐसे में सरकार और आयोग को EWS प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने की आवश्यकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्यों उठ रहे गंभीर सवाल</h4>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि विवाद का मुख्य कारण, EWS कोटे से चयनित कई उम्मीदवारों ने देश के उन नामचीन और महंगे निजी कोचिंग सेंटरों से तैयारी की है, जिनकी सालाना फीस लाखों रुपये में होती है। अब सवाल ये है कि जो परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग के लिए लाखों रुपये खर्च करने में सक्षम है, वह 'आर्थिक रूप से कमजोर' (EWS) की श्रेणी में कैसे आ सकता है?</p>
<h4 style="text-align:justify;">कुली के बेटे से लेकर IIT-DU के छात्र तक </h4>
<p style="text-align:justify;">सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में EWS कोटे के तहत दो बेहद विपरीत सामाजिक और आर्थिक तस्वीरें देखने को मिली हैं, इस बार के परिणाम में सुरक्षा गार्ड और रेलवे कुली जैसे बेहद सीमित संसाधनों वाले परिवारों के बच्चों ने देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर मिसाल कायम की है। तो वही इसके विपरीत, कोटे का लाभ उठाकर कई ऐसे अभ्यर्थी भी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS/IPS) के लिए चयनित हुए हैं। इनमें से कई छात्र IIT (आईआईटी), दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों और महंगे निजी स्कूलों से पढ़े हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">104 में 67 उम्मीदवारों ने भरी ज्यादा कोचिंग फीस</h4>
<p style="text-align:justify;">आंकड़े बताते हैं कि ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों में से एक बड़ा हिस्सा बेहद महंगे और नामचीन कोचिंग संस्थानों से पढ़कर निकला है, EWS  कोटे से पास हुए कुल 104 उम्मीदवारों में से 67 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने दिल्ली और देश के अन्य बड़े शहरों के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों से तैयारी की। इन संस्थानों की सालाना फीस 2.50 लाख से 2.65 लाख रुपये तक है। इन उम्मीदवारों ने 'वाजीराम एंड रवि', 'वाजीराव एंड रेड्डी' और 'दृष्टि IAS' जैसे नामी संस्थानों से पढ़ाई की है। कुल 104 में से 84 उम्मीदवारों ने सिविल सर्विस की फॉर्मल कोचिंग ली थी, जिसमें 'फोरम IAS', 'नेक्स्ट IAS', 'किंगमेकर्स IAS' और 'UPSC वाला' जैसे संस्थान शामिल हैं। इस गिनती में सरकारी या यूनिवर्सिटी द्वारा चलाए जा रहे मुफ्त कोचिंग प्रोग्राम के छात्र शामिल नहीं हैं। </p>
<h4 style="text-align:justify;">MNC में नौकरी और 'Upper-middle class' बैकग्राउंड</h4>
<p style="text-align:justify;">कई उत्तीर्ण अभ्यर्थी पहले मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) में काम कर रहे थे। कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी के दौरान इन अभ्यर्थियों की सालाना आमदनी 'अपर मिडिल क्लास' (उच्च मध्यम वर्ग) के स्तर की थी, जो सामान्यत ईडब्ल्यूएस की श्रेणी में नहीं आते।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्राइवेट स्कूलों से हुई स्कूली शिक्षा</h4>
<p style="text-align:justify;">वही 46 उम्मीदवारों ने नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और विभिन्न राज्यों की राजधानियों (जैसे लखनऊ, रायपुर और जयपुर) के नामचीन और महंगे प्राइवेट स्कूलों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है 103वां संविधान संशोधन</h4>
<p style="text-align:justify;">देश की आरक्षण नीति में आर्थिक आधार पर बड़ा बदलाव लाने वाला EWS कोटा भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है। मोदी सरकार द्वारा अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान शुरू की गई इस व्यवस्था ने देश में जातिगत आरक्षण से अलग एक नया आयाम स्थापित किया। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक कानून के सफर और इसके मुख्य प्रावधानों के बारे में।</p>
<p style="text-align:justify;">इस आरक्षण को कानूनी रूप देने के लिए केंद्र सरकार को संविधान के बुनियादी ढांचे में संशोधन करना पड़ा। यह ऐतिहासिक कोटा संसद के 103वें संवैधानिक संशोधन के तहत अस्तित्व में आया।  इसके तहत भारतीय संविधान में दो नए अनुच्छेद 15 (6) और 16 (6) जोड़े गए, ताकि शिक्षा और नौकरियों में इस व्यवस्था को कानूनी सुरक्षा मिल सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सिर्फ 7 दिनों में बना कानून</h4>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(16)13.jpg" alt="Untitled design (16)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मोदी कैबिनेट ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण कोटे को आधिकारिक मंजूरी दी। इस ऐतिहासिक विधेयक को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पेश किया गया और भारी बहुमत से पारित कराया गया। संसद से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून देश भर में प्रभावी रूप से लागू हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है इस कोटे का मकसद </h4>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-06/untitled-design-(17)14.jpg" alt="Untitled design (17)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस कानून का मुख्य उद्देश्य जातिगत पहचान से परे जाकर सामान्य वर्ग के उन गरीब परिवारों को आगे बढ़ाना है, जो आर्थिक तंगी के कारण पिछड़ जाते हैं। इस कोटे का लाभ केवल उन परिवारों को मिलता है जिनकी कुल वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होती है। यह देश के इतिहास में मौजूदा 50 फीसदी (SC, ST, OBC) आरक्षण की सीमा से अलग, पूरी तरह से आर्थिक आधार पर उठाया गया पहला बड़ा कदम था।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें  : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/585139/temporary-ban-on-telegram-is-right-delhi-high-court-said"><span class="t-red">Telegram पर अस्थायी रोक सही, </span>दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- सरकार को है पूरा अधिकार</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                            <category>करियर </category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/585173/ews-quota--availing-benefits-under-the-ews-quota-despite-paying-exorbitant-fees%E2%80%94are-the--truly-needy--actually-benefiting--or-is-the-system-being-exploited-due-to-its-loopholes</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:27:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>69,000 शिक्षक भर्ती: हाईकोर्ट ने खारिज की ईडब्ल्यूएस आरक्षण की मांग, जानें क्या कहा...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य में सहायक अध्यापकों के 69,000 पदों पर की गई भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्लूएस) को आरक्षण की मांग वाली विशेष अपील खारिज कर दी है। ये विशेष अपील इस अदालत के एकल न्यायाधीश के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी। एकल न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा था कि ईडब्लूएस वर्ग में आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने से पहले ही भर्ती शुरू हो चुकी थी।</p>
<p>  राहत देने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने कहा, “भर्ती प्रक्रिया ना</p>
<p>हलफनामा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/537957/69-000-teacher-recruitment--high-court-rejects-demand-for-ews-reservation--know-what-it-said-"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/कोर्ट20.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य में सहायक अध्यापकों के 69,000 पदों पर की गई भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्लूएस) को आरक्षण की मांग वाली विशेष अपील खारिज कर दी है। ये विशेष अपील इस अदालत के एकल न्यायाधीश के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी। एकल न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा था कि ईडब्लूएस वर्ग में आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने से पहले ही भर्ती शुरू हो चुकी थी।</p>
<p> राहत देने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने कहा, “भर्ती प्रक्रिया ना केवल शुरू हो गई, बल्कि संपन्न भी हो चुकी है। बोर्ड के सचिव ने व्यक्तिगत हलफनामा में बताया है कि सहायक अध्यापकों के विज्ञापित 69,000 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं और चयनित किसी भी अभ्यर्थी को मौजूदा अपील में पक्षकार नहीं बनाया गया है।” </p>
<p>हलफनामा में बताया गया है कि ईडब्लूएस आरक्षण लागू करने की स्थिति में ईडब्लूएस वर्ग से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए एक मेरिट सूची तैयार करनी होगी। चूंकि परीक्षा फार्म में ईडब्लूएस का विवरण नहीं मांगा गया था, इसलिए रिकॉर्ड में दिखाने के लिए कुछ नहीं है और कौन व्यक्ति इस वर्ग में आते हैं, यह तय करना मुश्किल है। </p>
<p>अदालत ने कहा, “भले ही ये विवरण उपलब्ध करा दिए जाएं, इस तरह का आरक्षण लागू करने के लिए अनारक्षित वर्ग से 10 प्रतिशत अभ्यर्थियों को बाहर करना होगा। चयनित व्यक्ति पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे हैं और उनकी नियुक्तियों को चुनौती नहीं दी गई है।” अदालत ने आगे कहा, “ऐसी परिस्थिति में सहायक अध्यापकों की भर्ती में 10 प्रतिशत ईडब्लूएस आरक्षण लागू करने का कोई निर्देश जारी करना इस अदालत के लिए विवेकपूर्ण नहीं होगा क्योंकि ऐसे निर्देश का क्रियान्वयन संभव नहीं होगा।” </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/537957/69-000-teacher-recruitment--high-court-rejects-demand-for-ews-reservation--know-what-it-said-</link>
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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 18:42:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती में ईडब्ल्यूएस आरक्षण देने से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>Allahabad High Court Decision </strong>: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापकों के 69000 पदों के लिए की गई भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण (ईडब्ल्यूएस) देने के संदर्भ में दाखिल दर्जनों अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान मुद्दे से संबंधित भर्ती प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। बोर्ड के सचिव ने अपने हलफनामे में स्पष्ट रूप से बताया है कि सभी नियुक्तियां सहायक अध्यापकों के विज्ञापित 69000 रिक्त पदों पर की गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि परीक्षा फॉर्म में किसी भी अभ्यर्थी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/537842/prayagraj-refuses-to-give-ews-reservation-in-recruitment-of-69000"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/कोर्ट-इलाहाबाद-कोर्ट4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Allahabad High Court Decision </strong>: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापकों के 69000 पदों के लिए की गई भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण (ईडब्ल्यूएस) देने के संदर्भ में दाखिल दर्जनों अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान मुद्दे से संबंधित भर्ती प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। बोर्ड के सचिव ने अपने हलफनामे में स्पष्ट रूप से बताया है कि सभी नियुक्तियां सहायक अध्यापकों के विज्ञापित 69000 रिक्त पदों पर की गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि परीक्षा फॉर्म में किसी भी अभ्यर्थी से उसकी ईडब्ल्यूएस स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी। ऐसे में यह पता लगाना कठिन होगा कि वास्तव में कौन से अभ्यर्थी ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आते हैं। ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों के विवरण के अभाव में उनकी मेरिट सूची तैयार करना और भी कठिन हो जाएगा और अगर उक्त आरक्षण के कार्यान्वयन के लिए आदेश दिया जाता है तो अनारक्षित श्रेणी के 10% अभ्यर्थियों को बाहर करना पड़ेगा, जिससे ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सके। चयनित व्यक्ति पिछले कई वर्षों से कार्यरत हैं और वर्तमान अपीलों में उनकी नियुक्ति और चयन को कोई चुनौती नहीं दी गई है, साथ ही किसी भी चयनित अभ्यर्थी को पक्षकार नहीं बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में कोर्ट द्वारा प्रश्नगत भर्ती में 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण बढ़ाने के लिए कोई भी निर्देश जारी करना विवेकपूर्ण और न्यायोचित नहीं होगा, क्योंकि ऐसे आदेश का कार्यान्वयन संभव नहीं है। इसके अलावा अधिकांश अपीलकर्ता बी.एड डिग्री धारक हैं, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के आधार पर नियुक्ति के लिए अपात्र हैं। उक्त आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की खंडपीठ ने शिवम पांडेय सहित दर्जनों विशेष अपीलों को खारिज करते हुए पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मालूम हो कि वर्तमान अपीलें एकल न्यायाधीश द्वारा 29 फरवरी 2024 को दिए गए निर्णय के खिलाफ दाखिल की गई हैं, जिसमें 69000 सहायक अध्यापकों के पदों पर भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण देने से इनकार कर दिया गया था। एकल न्यायाधीश ने माना था कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आरक्षण लागू होने से पहले ही भर्ती शुरू हो गई थी। अतः भर्ती नियमों के विपरीत अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:-<span style="color:rgb(186,55,42);"> <a style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/537841/ipl-2025-revised-schedule-starts-again-on-ipl-from-may#gsc.tab=0">IPL 2025 Revised Schedule : 17 मई से आईपीएल फिर से शुरू, BCCI का शेड्यूल का जारी, इस दिन होगा फाइनल मैच</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/537842/prayagraj-refuses-to-give-ews-reservation-in-recruitment-of-69000</link>
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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 23:20:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>EWS आरक्षण से संबंधित सैकड़ों याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मामले में अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि अधिनियम का किसी भी कार्यालय ज्ञापन की तुलना में हमेशा अधिक कानूनी मूल्य होता है। अधिनियम के लागू होने के बाद ही संबंधित कार्यालय ज्ञापन को मान्यता प्राप्त हो पाती है।  </p>
<p>मालूम हो कि वर्तमान मामले में याचियों ने सामान्य श्रेणी के अंतर्गत सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा- 2019 में भाग लिया था और उसका परिणाम मई 2020 में जारी हुआ। याचियों का तर्क है कि उन्होंने सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र 10% आरक्षण के लिए दिखाया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/447247/allahabad-high-court-rejected-hundreds-of-petitions-related-to-ews-reservation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-02/आगरा.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मामले में अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि अधिनियम का किसी भी कार्यालय ज्ञापन की तुलना में हमेशा अधिक कानूनी मूल्य होता है। अधिनियम के लागू होने के बाद ही संबंधित कार्यालय ज्ञापन को मान्यता प्राप्त हो पाती है।  </p>
<p>मालूम हो कि वर्तमान मामले में याचियों ने सामान्य श्रेणी के अंतर्गत सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा- 2019 में भाग लिया था और उसका परिणाम मई 2020 में जारी हुआ। याचियों का तर्क है कि उन्होंने सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र 10% आरक्षण के लिए दिखाया था। </p>
<p>याचियों के अधिवक्ता ने कोर्ट को यह बताया कि राज्य सरकार 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण प्रदान करने के लिए बाध्य है, क्योंकि उक्त परीक्षा 103वें संवैधानिक संशोधन के अधिसूचित होने के साथ-साथ फरवरी 2019 के कार्यालय ज्ञापन के बाद आयोजित की गई थी। </p>
<p>इस पर कोर्ट ने कहा कि सहायक शिक्षकों के पदों पर भर्ती अधिनियम लागू होने से पहले शुरू की गई थी, इसलिए प्रदेश सरकार उक्त भर्ती प्रक्रिया में कानूनी रूप से आरक्षण प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने शिवम पांडेय और 11 अन्य सहित सैकड़ों याचिकाओं को खारिज करते हुए पारित किया। </p>
<p>अंत में कोर्ट ने कहा कि कार्यालय ज्ञापन में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि आरक्षण की व्यवस्था राज्य सेवाओं की भर्ती के लिए फरवरी 2019 के बाद जारी अधिसूचना पर लागू होगी। हालांकि उस समय कोई अधिनियम लागू नहीं हुआ था। बाद में वर्ष 2020 के यूपी अधिनियम संख्या 10 के अधिनियमन के माध्यम से उपरोक्त कार्यालय ज्ञापन को मान्यता प्राप्त हुई।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Feb 2024 22:30:13 +0530</pubDate>
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                <title>ईडब्ल्यूएस आरक्षण वैध</title>
                                    <description><![CDATA[ईडब्ल्यूएस कोटे में आरक्षण को लेकर पिछले काफी समय से सवाल उठ रहे थे। सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत करने वाले संविधान में 103वें संशोधन की संवैधानिक वैधता पर मुहर लगा दी है। शीर्ष …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/311693/ews-reservation-valid"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/capture-190.jpg" alt=""></a><br /><p>ईडब्ल्यूएस कोटे में आरक्षण को लेकर पिछले काफी समय से सवाल उठ रहे थे। सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत करने वाले संविधान में 103वें संशोधन की संवैधानिक वैधता पर मुहर लगा दी है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण के विभिन्न पहलुओं से संबंधित 40 याचिकाओं को सुनवाई के लिए मंजूर किया था। संविधान पीठ का गठन हुआ और सुनवाई शुरू हुई। ईडब्ल्यूएस आरक्षण के विरोधियों का कहना था कि ये संविधान में दिए गए आरक्षण की मूल भावना का उल्लंघन है।</p>
<p>ईडब्ल्यूएस कोटा सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को बाहर करता है और लाभ केवल ‘अगड़े वर्गों’ तक सीमित रखता है। हालांकि सरकार का कहना था कि इसका उद्देश्य सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की मदद करना है। भाजपा के वर्ष 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण’ शामिल था, जिसे केंद्र सरकार ने 2019 में संविधान में 103वें संशोधन अधिनिय के तौर पर पारित किया।</p>
<p>इस फैसले को लेकर श्रेय लेने की होड़ भी नजर आ रही है। भाजपा इसे मोदी के मिशन की जीत बता रही है। वहीं कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि यह आरक्षण मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा आरंभ की गई प्रक्रिया का परिणाम है। कांग्रेस का कहना है कि जातीय जनगणना पर सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।</p>
<p>गुजरात में पाटीदार आरक्षण समर्थकों ने भी न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ऐसे में बेंच का ये फैसला याद रखा जाएगा। इस बेंच में चीफ जस्टिस यूयू ललित के अलावा एस रवींद्र भट, दिनेश माहेश्वरी, जेबी पारदीवाला और बेला एम त्रिवेदी शामिल थे। महत्वपूर्ण है कि शीर्ष अदालत ने कहा आर्थिक मापदंड को ध्यान में रखते हुए ईडब्ल्यूएस आरक्षण संविधान के बुनियादी ढांचे या समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता।</p>
<p>ईडब्ल्यूएस आरक्षण कोटे की 50 प्रतिशत की सीमा सहित संविधान की किसी भी आवश्यक विशेषता को क्षति नहीं पहुंचाता, क्योंकि कोटे की सीमा पहले से ही लचीली है। कहा जा रहा है कि ये फैसला आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सक्षम बनाएगा। फैसले का महत्व इस तथ्य में निहित है कि आरक्षण के आधार के रूप में आर्थिक पिछड़ापन अब एक संवैधानिक सिद्धांत के रूप में स्वीकार किया जाएगा।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2022 01:20:29 +0530</pubDate>
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                <title>टीचर्स फोरम की मांग : डीयू के कुलपति प्रोफेसर काले कमेटी की रिपोर्ट लागू करवाएं</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) एससी एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम ने वाइस चांसलर से शिक्षकों की स्थायी नियुक्तियों से पूर्व रोस्टर, काले कमेटी की रिपोर्ट, 10 फीसदी अतिरिक्त ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करते हुए व विज्ञापनों की सही से जांच कराने के लिए एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाने की मांग की है। शिक्षकों का कहना …
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/239843/teachers-forum-demand-get-the-report-of-du-vice-chancellor-professor-kale-committee-implemented"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-06/capture-1532.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) एससी एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम ने वाइस चांसलर से शिक्षकों की स्थायी नियुक्तियों से पूर्व रोस्टर, काले कमेटी की रिपोर्ट, 10 फीसदी अतिरिक्त ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करते हुए व विज्ञापनों की सही से जांच कराने के लिए एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि कमेटी में वरिष्ठ प्रोफेसर्स, पूर्व विद्वत परिषद सदस्य के अलावा रोस्टर की जानकारी रखने वालों को रखा जाए और यह कमेटी अपनी रिपोर्ट एक महीने के अंदर दे।</p>
<p>शिक्षकों ने वाइस चांसलर से कहा है कि सही रोस्टर के बाद ही कॉलेजों के विज्ञापन निकालकर शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की जाए। साथ ही उनका कहना है कि य पांच सदस्यीय कमेटी बनाने, रोस्टर की सही जांच व प्रोफेसर काले कमेटी को लागू कराने की मांग के अलावा हाल ही में 10 फीसदी अतिरिक्त ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करते हुए सभी वर्गो के शिक्षकों को नियुक्तियों में प्रतिनिधित्व दिया जाए।</p>
<p>दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम के महासचिव व पूर्व विद्वत परिषद सदस्य डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि हाल ही में आ रहे स्थायी शिक्षकों की नियुक्तियों के विज्ञापनों में अनेक प्रकार की विसंगतियां है। कॉलेजों द्वारा निकाले जा रहे विज्ञापनों में भारत सरकार की आरक्षण नीति व डीओपीटी के निर्देशों को सही से लागू नहीं किया गया है। साथ ही जो पद निकाले जा रहे हैं उनमें शॉर्टफाल, बैकलॉग और विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई प्रोफेसर काले कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकारते हुए करेक्ट रोस्टर नहीं बनाया गया है।</p>
<p>इससे एससी,एसटी, ओबीसी अभ्यर्थियों को जिस अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए था नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया है कुछ कॉलेजों में लंबे समय से पढ़ा रहे एससी एसटी व ओबीसीकोटे के शिक्षकों की सीटें ही खत्म कर दी हैं। वाइस चांसलर को लिखे गए पत्र में विश्वविद्यालय में सामाजिक न्याय दिलाने की मांग करते हुए आरक्षण, रोस्टर और विज्ञापनों की जांच करने के लिए एक वरिष्ठ प्रोफेसर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन की मांग है।</p>
<p>आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो (ईडब्ल्यूएस आरक्षण) का 10 फीसदी आरक्षण फरवरी, 2019 में आया था, जिसे विश्वविद्यालय और कॉलेजों ने स्वीकारते हुए इसको रोस्टर में शामिल कर लिया। शिक्षकों का कहना है कि कॉलेजों ने ईडब्ल्यूएस रोस्टर को फरवरी 2019 से न बनाकर उसे एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण के आरक्षण लागू होने से पहले लागू करते हुए रोस्टर बना दिया। वहीं 10 फीसदी आरक्षण के स्थान पर किसी-किसी कॉलेज ने 10 फीसदी से ज्यादा आरक्षण दे दिया, जिससे कि एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण कम कर दिया गया और ईडब्ल्यूएस बढ़ाकर दिया गया।</p>
<p>फोरम का कहना है कि यूजीसी भी ओबीसी की बकाया सेकेंड ट्रांच के पदों को भरने के निर्देश कॉलेजों को कई बार दे चुकी हैं, लेकिन अभी तक कॉलेजों ने ओबीसी एक्सपेंशन की बढ़ी हुई सीटों को रोस्टर में शामिल नहीं किया है। कॉलेज ईडब्ल्यूएस व सेकेंड ट्रांच को रोस्टर में शामिल किए बिना ही पदों को निकाल रहे थे, इसमें किसी तरह का आरक्षण न देना डीओपीटी के नियमों का सरेआम उल्लंघन है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़े –</strong><a href="https://amritvichar.com/tuna-scam-mps-relative-exports-fish-to-foreign-company-without-payment/">ट्यूना घोटाला : सांसद के रिश्तेदार ने भुगतान किए बिना विदेशी कंपनी को मछलियां निर्यात किया</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 15:12:41 +0530</pubDate>
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