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                <title>religion news - Amrit Vichar</title>
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                <description>religion news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए शुरू आवेदन, जानें क्या है लास्ट डेट और कैसे होगा रजिस्ट्रेशन?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊः </strong>करोड़ों हिंदुओं, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए आज एक बेहद सुखद और बड़ी खबर सामने आई है। महादेव के निवास स्थान यानी 'कैलाश मानसरोवर' की यात्रा का इंतजार अब खत्म हो गया है। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि इस साल जून से अगस्त के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित की जाएगी। कोविड महामारी और सीमा पर उपजे तनाव के चलते लंबे समय तक बंद रही यह यात्रा अब पूरी तरह से बहाल हो रही है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस साल की यात्रा दो पारंपरिक मार्गों से संचालित की जाएगी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580558/apply-to-start-kailash-mansarovar-yatra--know-what-is-the-last-date-and-how-will-the-enrollment-happen"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/muskan-dixit.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊः </strong>करोड़ों हिंदुओं, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए आज एक बेहद सुखद और बड़ी खबर सामने आई है। महादेव के निवास स्थान यानी 'कैलाश मानसरोवर' की यात्रा का इंतजार अब खत्म हो गया है। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि इस साल जून से अगस्त के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित की जाएगी। कोविड महामारी और सीमा पर उपजे तनाव के चलते लंबे समय तक बंद रही यह यात्रा अब पूरी तरह से बहाल हो रही है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस साल की यात्रा दो पारंपरिक मार्गों से संचालित की जाएगी। पहला रास्ता उत्तराखंड का 'लिपुलेख दर्रा' होगा और दूसरा रास्ता सिक्किम का 'नाथू ला' दर्रा। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए यात्रियों की संख्या भी तय कर दी गई है। लिपुलेख दर्रे से 50-50 यात्रियों के 10 जत्थे रवाना होंगे, वहीं नाथू ला दर्रे से भी इतने ही जत्थे महादेव के दर्शन के लिए तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र जाएंगे।</p>
<p><strong>आवेदन की अंतिम तिथि: </strong>19 मई 2026<br /><strong>आधिकारिक वेबसाइट: </strong>kmy.gov.in<br /><strong>चयन प्रक्रिया: </strong>कंप्यूटर-जनित रैंडम सिलेक्शन (पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी)<br /><strong>योग्यता: </strong>शारीरिक फिटनेस का विशेष ध्यान</p>
<p>आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साल 2020 में कोरोना महामारी और फिर पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर सैन्य गतिरोध के कारण इस यात्रा को स्थगित कर दिया गया था। पिछले साल इसे सीमित स्तर पर शुरू करने की कोशिश हुई थी, लेकिन इस साल यह यात्रा पूरे उत्साह के साथ अपने पुराने स्वरूप में लौट रही है।</p>
<p>जो श्रद्धालु इस पावन यात्रा पर जाना चाहते हैं, उन्हें अब किसी पत्र या फैक्स की जरूरत नहीं है। वे सीधे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। महादेव के दर्शन की आस लगाए बैठे भक्तों के लिए 19 मई तक का समय है। तो जल्द करें और अपनी किस्मत आजमाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 16:08:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खत्म हुआ खरमास... कल 15 अप्रैल से शुरू होंगे विवाह और मांगलिक कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> लखनऊ, अमृत विचारः </strong>एक महीने बाद 14 अप्रैल को सुबह 11:45 बजे सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही 14 मार्च से चल रहा खरमास समाप्त हो जाएगा। 15 अप्रैल से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि 14 मार्च को सूर्य के मीन राशि में चले जाने से खरमास लग गया था। 14 अप्रैल को ये समाप्त हो रहा है। 15 अप्रैल से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य आयोजित किए जा सकेंगे। 15 अप्रैल से 14 मई तक विवाह के 16 शुभ मुहूर्त हैं। इसके बाद 17 मई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578692/kharmas-is-over----marriages-and-auspicious-functions-will-start-tomorrow-from-15th-april"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/शादी.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> लखनऊ, अमृत विचारः </strong>एक महीने बाद 14 अप्रैल को सुबह 11:45 बजे सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही 14 मार्च से चल रहा खरमास समाप्त हो जाएगा। 15 अप्रैल से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि 14 मार्च को सूर्य के मीन राशि में चले जाने से खरमास लग गया था। 14 अप्रैल को ये समाप्त हो रहा है। 15 अप्रैल से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य आयोजित किए जा सकेंगे। 15 अप्रैल से 14 मई तक विवाह के 16 शुभ मुहूर्त हैं। इसके बाद 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ मलमास लग जाएगा। इस एक महीने में भी विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माना गया है। मलमास प्रत्येक 32 महीने और 16 दिन बाद आता है। चंद्र वर्ष (354 दिन) और सूर्य वर्ष (365 दिन) के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसे ही अधिक मास, पुरुषोत्तम मास या मलमास करते हैं। 21 जून से 12 जुलाई तक 12 विवाह मुहूर्त हैं। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरु हो जाएगा। इन चार महीनों में विवाह और अन्य शुभ कार्य नहीं होंगे।20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ पुनः विवाह कार्य शुरू होंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रमुख विवाह मुहूर्त</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल: 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29<br />मई: 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14<br />जून: 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29<br />जुलाई: 1, 6, 7, 11, 12<br />नवंबर: 21, 24, 25, 26<br />दिसंबर: 2, 3, 4, 5, 6</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 12:21:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाप के अंत के लिए विधि को करनी पड़ती है व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">सलिल पांडेय, मिर्जापुर</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(67)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (67)" width="219" height="123" /></span></strong></p>
<p style="text-align:justify;">रातों-रात धनी बनने एवं रौबदार जीवन जीने के लिए हमेशा झूठ बोलना, दूसरों को धोखा देना, चुगली-निंदा में लगे रहना तथा किसी से कुछ लेकर उसे वापस न करना, यह सब निंदनीय कार्य है। ऐसे कार्यों में लगे रहने वाला यदि धन कमा भी लेता है तो भी लोग उसे बुरी नजर से ही देखते है। उसकी बहुत जल्द बदनामी भी  होने लगती है, लेकिन अपने रुआब में वह किसी की बात की परवाह नहीं करता है। प्रायः ऐसे लोग एक जबरदस्त गिरोह बना लेते हैं। लोगबाग गिरोह से मुकाबला न करने की स्थिति में चुप रहना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578341/law-has-to-make-arrangements-to-end-sin"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(68)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">सलिल पांडेय, मिर्जापुर</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(67)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (67)" width="219" height="123"></img></span></strong></p>
<p style="text-align:justify;">रातों-रात धनी बनने एवं रौबदार जीवन जीने के लिए हमेशा झूठ बोलना, दूसरों को धोखा देना, चुगली-निंदा में लगे रहना तथा किसी से कुछ लेकर उसे वापस न करना, यह सब निंदनीय कार्य है। ऐसे कार्यों में लगे रहने वाला यदि धन कमा भी लेता है तो भी लोग उसे बुरी नजर से ही देखते है। उसकी बहुत जल्द बदनामी भी  होने लगती है, लेकिन अपने रुआब में वह किसी की बात की परवाह नहीं करता है। प्रायः ऐसे लोग एक जबरदस्त गिरोह बना लेते हैं। लोगबाग गिरोह से मुकाबला न करने की स्थिति में चुप रहना ही उचित समझते हैं, लेकिन किसी न किसी दिन कोई ऐसा प्रकट हो जाता है जो ऐसे गिरोह को नेस्तनाबूद कर देता है। आए दिन समाज में देखने को मिलता है कि जिसके नाम से लोग थर्राते थे, उसका अंत अत्यंत बुरे ढंग से होता है। ऐसी स्थिति में इन कथित रुआबदारों का कोई साथ नहीं देता।</p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरण के रूप में लिया जाए तो द्वापर युग में कृष्ण का मामा कंस था। वह अन्यायी था। जब भविष्यवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी का आठवां पुत्र उसका विनाश करेगा, तब वह कांपने लगा। उसकी भरसक कोशिश यही थी कि देवकी के पुत्रों को वह मार डाले। उसने ऐसा जघन्य कार्य किया भी, लेकिन पाप का चूंकि अंत होना था, तो विधि ने ऐसी व्यवस्था की कि कृष्ण रातोंरात नन्द के घर चले गए और उनकी जगह योगमाया आ गई, जिसको जब कंस ने मारना चाहा तो योगमाया उसके हाथों से छूट कर आकाश मार्ग की ओर चली गई तथा कंस को चेतावनी देते हुए कहा, 'रे कंस, तुझे मारने वाला पैदा हो गया है।' योगमाया की इस ध्वनि को कंस ने 'काल-ध्वनि' के रूप में लिया और हर संभव कोशिश करने लगा कि कृष्ण को मार डाला जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक उद्धरणों की तरह समाज में पनपने वाले कंस सरीखे लोगों का भी यही हश्र होता है। कोई न कोई ऐसा प्रकट हो जाता है, जिसके हाथों ऐसे लोगों को सबक सिखाने का मौका मिल जाता है। अतः इंसान को चाहिए कि वह बुरी लतों से दूर रहे। वरना किसी न किसी दिन दंड मिलकर रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 08:43:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हनुमान भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी : इस बार ज्येष्ठ में 8 मंगलवार, अधिक मास में 4 विशेष मंगल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>इस वर्ष अधिमास के कारण ज्येष्ठ माह 60 दिनों का होगा। काशी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा। इस दौरान कुल आठ बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं, जिनमें भक्तगण पूरे श्रद्धा भाव से हनुमान जी की पूजा-अर्चना करेंगे।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार मई माह में 5, 12, 19 और 26 तारीख को तथा जून में 2, 9, 16 और 23 तारीख को बड़े मंगल पड़ेंगे। अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान 19 और 26 मई तथा 2 और 9 जून को अधिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577613/great-news-for-hanuman-devotees--this-year--there-are-8-tuesdays-in-jyeshtha-and-4-special-tuesdays-in-adhik-maas"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(88).png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>इस वर्ष अधिमास के कारण ज्येष्ठ माह 60 दिनों का होगा। काशी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा। इस दौरान कुल आठ बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं, जिनमें भक्तगण पूरे श्रद्धा भाव से हनुमान जी की पूजा-अर्चना करेंगे।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार मई माह में 5, 12, 19 और 26 तारीख को तथा जून में 2, 9, 16 और 23 तारीख को बड़े मंगल पड़ेंगे। अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान 19 और 26 मई तथा 2 और 9 जून को अधिक ज्येष्ठ मंगल पड़ेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। </p>
<p>ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि बड़े मंगल के दिन व्रत रखकर और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। इस दिन हनुमान जी की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:40:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मां बाल सुंदरी मंदिर: काशीपुर का चमत्कारी शक्तिपीठ जहां गिरी थी सती मां की बायीं भुजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कुंदन बिष्ट, काशीपुरः</strong> ऊधम सिंह नगर के काशीपुर में कुंडेश्वरी मार्ग पर मां बाल सुंदरी मंदिर स्थित है। यह 52 शक्तिपीठों में से एक है। माता का यह नाम उनके द्वारा बाल रूप में की गई लीलाओं की वजह से पड़ा है। इसे पूर्व में उज्जैनी एवं उनकी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता था। यहां प्रतिवर्ष चैत्र मास की नवरात्रि में चैती मेले का आयोजन किया जाता है। धार्मिक एवं पौराणिक काल में इसे गोविषाण नाम से भी जाना जाता था। महाभारत काल का इतिहास समेटे काशीपुर में मुगल शासक औरंगजेब जैसे मूर्तिभंजक शासक को नतमस्तक होना पड़ा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575947/maa-bal-sundari-temple--the-miraculous-shaktipeeth-of-kashipur-where-sati-s-left-arm-fell"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(39)5.png" alt=""></a><br /><p><strong>कुंदन बिष्ट, काशीपुरः</strong> ऊधम सिंह नगर के काशीपुर में कुंडेश्वरी मार्ग पर मां बाल सुंदरी मंदिर स्थित है। यह 52 शक्तिपीठों में से एक है। माता का यह नाम उनके द्वारा बाल रूप में की गई लीलाओं की वजह से पड़ा है। इसे पूर्व में उज्जैनी एवं उनकी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता था। यहां प्रतिवर्ष चैत्र मास की नवरात्रि में चैती मेले का आयोजन किया जाता है। धार्मिक एवं पौराणिक काल में इसे गोविषाण नाम से भी जाना जाता था। महाभारत काल का इतिहास समेटे काशीपुर में मुगल शासक औरंगजेब जैसे मूर्तिभंजक शासक को नतमस्तक होना पड़ा था। यहां उज्जैनी शक्तिपीठ के नाम से प्रसिद्ध मां भगवती बाल सुंदरी का मंदिर शक्तिपीठ भी माना जाता है। किवदंतियां है कि औरंगजेब की बहन का स्वास्थ्य खराब हुआ, तो मां बाल सुंदरी ने उनकी बहन को सपने में दर्शन दिये। तब उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।</p>
<h3><strong>मंदिर में गिरी थी माता सती की बायीं भुजा</strong></h3>
<p>मुख्य पंडा विकास कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि चैती परिसर में भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से माता सती के अंगों को काट दिये जाने के बाद माता की बायीं भुजा यहां गिरी थी। तब यहां माता की कोई मूर्ति नहीं, बल्कि एक शिला पर उनकी बायीं भुजा की आकृति गढी हुई है। जिसकी श्रद्धालु पूजा करते हैं।</p>
<h3><strong>अष्टमी से उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़</strong></h3>
<p>मुख्य पंडा विकास बताते हैं कि शाक्य संप्रदाय से संबंधित अधिकांश मंदिरों में नवरात्रि में मेले लगते हैं। इसी तरह मां बाल सुंदरी मंदिर भी नवरात्रि में अष्टमी, नवमी व दशमी के दिन श्रद्धालुओं की भारी संख्या में भीड़ उमड़ती है। माता पक्काकोट मंदिर से सप्तमी की अर्धरात्रि को पहुंचती हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(40)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (40)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><strong>मंदिर परिसर में स्थित है खोखला कदंब वृक्ष</strong></h3>
<p>लोक मान्यता अनुसार जो लोग इस मंदिर के वर्तमान पंडा है, उनके पूर्वज मुगलों के समय से यहां आए थे, तभी से मां बाल सुंदरी मंदिर में पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। इस मंदिर परिसर में एक कदंब वट, पीपल आदि के पेड़ स्थित हैं। कदंब का तना और पतली टहनी तक सब खोखला है। पंडा पेड़ के संबंध में मान्यता बताते हैं कि एक बार एक महात्मा आए उन्होंने मंदिर के पंडा को शक्ति दिखाने को कहा तो पंडा ने कदंब के पेड़ पर सरसों मारी तो पेड़ तुरंत सूख गया। उन्होंने फिर उसे हरा करने को कहा तो पंडा ने पानी छिड़का, इसके बाद पेड़ हरा हो गया, लेकिन पेड़ खोखला रह गया।</p>
<h3><strong>जहांआरा के सपनों में आई थीं मां बाल सुंदरी</strong></h3>
<p>औरंगजेब की बहन जहांआरा का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। औरंगजेब ने बड़े-बड़े वैद्य और हकीमों को बुलाया, लेकिन उसकी बहन पर दवाओं का कोई असर नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद औरंगजेब की बहन के सपने में मां बाल सुंदरी ने बाल रूप में दर्शन दिए। मां ने सपने में आकर कहा कि उसका भाई औरंगजेब मंदिर का जीर्णोद्धार कराए तो वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएगी। अगले दिन यह बात जहाँआरा ने औरंगजेब को बताई। जिसके बाद औरंगजेब ने तुरंत मंदिर के लिए अपने श्रमिक भेजकर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मंदिर के ऊपर बनी मस्जिद नुमा आकृति एवं तीन गुंबद इस बात को प्रमाणित करते हैं।</p>
<h3><strong>बुक्सा जनजाति की कुलदेवी  </strong></h3>
<p>चैती मंदिर के मुख्य पंडा बताते हैं कि आदि शक्ति की बाल रूप में पूजा होने के कारण ही इसे बाल सुंदरी कहा जाता है। मां बाल सुंदरी बुक्सा समाज की कुलदेवी है। आज भी बुक्सा समाज के लोग वर्ष में एक बार माता की विधिवत पूजा करने आते हैं और जागरण व भंडारे का आयोजन करते हैं। बताया कि गदरपुर, बाजपुर और रामनगर में बुक्सा समाज के लोग रह रहे हैं। माघ से फाल्गुन तक इन गांव के प्रत्येक घर में चिरागी (पूजा) कर उठावनी होती है। बुक्सा समाज के लोग चैत्र नवरात्र में अष्टमी, नवमी, दशमी पर पूजा अर्चना कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।</p>
<h3><strong>डाकू सुल्ताना से लेकर फुलन देवी तक आते थे नखासा बाजार में घोड़े खरीदने</strong></h3>
<p>चैती मेले में लगे आ रहे नखासा बाजार का भी अपना इतिहास है। मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री के मुताबिक पंडा परिवार नौ पीढ़ियों से भी अधिक माता की सेवा करता आ रहा है। इस दौरान लगने वाले चैती मेले में नखासा बाजार भी लगता था। जहां राजस्थान, गुजरात समेत यूपी के अन्य जगहों से घोड़ों की कई तरह की नस्ल बेचने को लाई जाती थी। पंडा अग्निहोत्री ने बताया कि नखासा बाजार में मशहूर डाकू सुल्ताना और फूलन देवी भी घोड़े खरीदने आया करते थे।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(41)5.png" alt="MUSKAN DIXIT (41)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><strong>मेले में बरेली और झारखंड की लाठी है मशहूर</strong></h3>
<p>चैती मेले में एक दशक पूर्व तक लाठी-डंडों का बाजार खासा प्रसिद्ध था। लोग सालभर इसका इंतजार करते थे। खासतौर पर बरेली और झारखंड की लाठियां मशहूर थी। लाठी कारोबारी वहां से लाठी थोक में लेकर आते थे।</p>
<h3><strong>हाईकोर्ट के बाद बलि प्रथा पर लगी रोक</strong></h3>
<p>चैती मेला में मां बाल सुंदरी से मन्नतें मांगने वाले लोग मन्नत पूरी होने पर बकरों की बलि देते थे, लेकिन वर्ष 2009 में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा बलि प्रथा पर रोक लगाने के बाद मंदिर में बलि प्रथा पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। हालांकि लोग आज भी मन्नते पूरी होने पर बकरे लाते हैं, लेकिन उन्हें छोड़ जाते हैं।</p>
<h3><strong>समय के साथ मंदिर का किया जा रहा जीर्णोद्धार</strong></h3>
<p>जैसे-जैसे समय गुजरता गया मंदिर का भी जीर्णोद्धार होता रहा। आज मंदिर का स्वरूप कई हद तक बदल गया है। मुख्य पंडा विकास के मुताबिक इस बार श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर परिसर में यात्रियों की सुविधा के लिए दो नए यात्री निवास बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु निशुल्क ठहर सकेंगे। इन यात्री निवासों में पंखों सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही मुंडन संस्कार के लिए एक बड़ा हॉल भी तैयार किया जा रहा है, ताकि छोटे बच्चों और उनके परिवारों को भीड़भाड़ से अलग व्यवस्थित स्थान मिल सके। इसके साथ मंदिर के दक्षिण द्वार के पास श्रद्धालुओं के लिए एक नया प्याऊ बनाया जा रहा है। इसके लिए करीब 300 फुट गहरा बोर कराया गया है।</p>
<h3><strong>बंटवारे के बाद बची कम भूमि</strong></h3>
<p>पंडा परिवार के भूमि बंटवारे के बाद चैती मंदिर में लगने वाले मेले के लिये अब पहले से कम भूमि बची है। खासतौर पर जिस स्थान पर नखासा बाजार लगता था। वहां लगभग कई निर्माण हो चुके हैं।</p>
<h3><strong>वर्ष 2018 से मेले का आयोजन करा रहा प्रशासन</strong></h3>
<p>वर्ष 2018 से पूर्व मंदिर के पंडाओं द्वारा मेले का आयोजन किया जाता था, लेकिन वर्ष 2018 के बाद प्रशासन मेले का आयोजन कर रहा है। हालांकि मेले का आयोजन कौन करेगा इसका वाद हाईकोर्ट में अभी भी विचाराधीन चल रहा है। लेकिन प्रशासन के मेला आयोजन करने के बाद दुकानदारों को मेले में दुकाने लेने के लिये भारी कीमतें चुकानी पड़ रही है।</p>
<h3><strong>12 वां उप ज्योतिर्लिंग</strong></h3>
<p>चैती मैदान परिसर में ही महाभारत कालीन मोटेश्वर महादेव मंदिर का शिवलिंग 12 वां उप ज्योतिर्लिंग है। शिवलिंग की मोटाई अधिक होने के कारण यह मोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से विख्यात है। स्कंद पुराण में भगवान शिव ने कहा कि जो भक्त कांवड़ कंधे पर रखकर हरिद्वार से गंगा जल लाकर यहां चढ़ाएगा उसे मोक्ष मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पॉजिटिव स्टोरीज</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 08:00:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RAMADAN 2026: अल्लाह की रहमत और गुनाहों से माफी दिलाने वाला महीना है रमजान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> दुबग्गा हरदोई रोड स्थित मस्जिद-ए-अबूतालिब में शुक्रवार को अलविदा की नमाज मौलाना अफजल हैदर की इमामत में अदा की गई। नमाज-ए-जुमा के खुतबे में उन्होंने कहा कि रमजान का बरकत वाला महीना अपने समापन के करीब है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(76)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (76)" width="1200" height="720" /></p>
<p style="text-align:justify;">वे लोग बहुत भाग्यशाली हैं जिन्होंने इस पवित्र महीने में अल्लाह की रहमतों और उसकी कृपा से अपनी झोलियां भरीं, और रो-रोकर दुआएं मांगकर अपने पापों की क्षमा प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(77)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (77)" width="1200" height="720" /></p>
<p style="text-align:justify;">मौलाना अफजल हैदर ने इस मौके पर कहा कि जुमातुल विदा इस बात का अहसास दिलाता है कि अब केवल कुछ ही दिन बाकी हैं, और वह पवित्र महीना समाप्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574889/ramadan-2026--ramadan-is-the-month-of-allah-s-mercy-and-forgiveness-of-sins"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(76)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> दुबग्गा हरदोई रोड स्थित मस्जिद-ए-अबूतालिब में शुक्रवार को अलविदा की नमाज मौलाना अफजल हैदर की इमामत में अदा की गई। नमाज-ए-जुमा के खुतबे में उन्होंने कहा कि रमजान का बरकत वाला महीना अपने समापन के करीब है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(76)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (76)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">वे लोग बहुत भाग्यशाली हैं जिन्होंने इस पवित्र महीने में अल्लाह की रहमतों और उसकी कृपा से अपनी झोलियां भरीं, और रो-रोकर दुआएं मांगकर अपने पापों की क्षमा प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(77)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (77)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मौलाना अफजल हैदर ने इस मौके पर कहा कि जुमातुल विदा इस बात का अहसास दिलाता है कि अब केवल कुछ ही दिन बाकी हैं, और वह पवित्र महीना समाप्त होने वाला है जिसमें प्रतिदिन ईश्वरीय दरबार से गुनाहों की मगफिरत दुआ की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-03/muskan-dixit-(78)1.png" alt="MUSKAN DIXIT (78)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने जोर दिया कि इस महीने के सम्मान में जो भी कमी या कोताही रह गई हो, उसके लिए सच्चे दिल से अल्लाह के दरबार में माफी मांगी जाए। जो दिन बाकी रह गए हैं, उनकी कद्र की जाए और अपने गुनाहों को बख्शवाकर रहमत की बहारें हासिल की जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/574889/ramadan-2026--ramadan-is-the-month-of-allah-s-mercy-and-forgiveness-of-sins</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 09:09:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Papmochani Ekadashi 2026: कल है पापमोचनी एकादशी व्रत, जानें क्या है शुभ मुहूर्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>इस्कॉन मन्दिर के अध्यक्ष अपरिमेय श्याम दास ने बताया कि 15 मार्च को पापमोचनी एकादशी है। हमें सदैव द्वादशी प्रधान एकादशी का व्रत रखना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जिसमें दशमी का लेश मात्र मिश्रण न हो, द्वादशी प्रधान एकादशी कृष्ण भावनामृत को बढ़ाने वाली और विशेष फल देने वाली है। एकादशी को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्येक एकादशी को मन्दिर अध्यक्ष अपरिमेय श्याम दास द्वारा इस्कॉन मन्दिर में भक्तों के लिए श्रीमद भागवतम की कक्षा सुबह 6 बजे से संचालित करते हैं। भक्तगण एकादशी पर श्रीमद भागवतम कक्षा के लिए मन्दिर आ सकते हैं। एकादशी व्रत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574888/papmochani-ekadashi-2026--tomorrow-is-papmochani-ekadashi-fast--know-the-auspicious-time"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(75)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>इस्कॉन मन्दिर के अध्यक्ष अपरिमेय श्याम दास ने बताया कि 15 मार्च को पापमोचनी एकादशी है। हमें सदैव द्वादशी प्रधान एकादशी का व्रत रखना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जिसमें दशमी का लेश मात्र मिश्रण न हो, द्वादशी प्रधान एकादशी कृष्ण भावनामृत को बढ़ाने वाली और विशेष फल देने वाली है। एकादशी को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्येक एकादशी को मन्दिर अध्यक्ष अपरिमेय श्याम दास द्वारा इस्कॉन मन्दिर में भक्तों के लिए श्रीमद भागवतम की कक्षा सुबह 6 बजे से संचालित करते हैं। भक्तगण एकादशी पर श्रीमद भागवतम कक्षा के लिए मन्दिर आ सकते हैं। एकादशी व्रत रखने के साथ-साथ अगले दिन समय से व्रत का पारण किया जाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि व्रत पारण समय 16 मार्च को प्रातः 6:15 से 9:43 बजे तक है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 09:01:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अभी पांच लग्न, फिर एक महीने नहीं हो पाएंगे मांगलिक कार्य... 14 मार्च से शुरू हो रहे मीन खरमास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>मार्च में अभी पांच शुभ लग्न हैं, इसके बाद 14 मार्च से मीन खरमास शुरू हो जाएगा, जिससे 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे। उसके बाद 15 अप्रैल से 12 जुलाई तक 29 विवाह आदि मांगलिक कार्यों के लिए 29 शुभ लग्न हैं। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चार महीने के लिए फिर मांगलिक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि 14 मार्च के बाद एक माह के लिए मीन खरमास लग जाएगा। इस अवधि में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। 15 अप्रैल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/574540/there-are-five-marriages-now--and-no-auspicious-events-will-be-possible-for-a-month-afterward----pisces-kharmas-begins-on-march-14th"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-06/शादी.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>मार्च में अभी पांच शुभ लग्न हैं, इसके बाद 14 मार्च से मीन खरमास शुरू हो जाएगा, जिससे 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे। उसके बाद 15 अप्रैल से 12 जुलाई तक 29 विवाह आदि मांगलिक कार्यों के लिए 29 शुभ लग्न हैं। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चार महीने के लिए फिर मांगलिक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि 14 मार्च के बाद एक माह के लिए मीन खरमास लग जाएगा। इस अवधि में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। 15 अप्रैल से पुनः विवाह मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरु हो जाएगा। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के बाद से विवाद और अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>विवाह के प्रमुख शुभ मुहूर्त</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>मार्च: </strong>7, 8, 9, 11, 12<br /><strong>अप्रैल: </strong>15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29<br /><strong>मई:</strong> 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14<br /><strong>जून: </strong>21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29<br /><strong>जुलाई: </strong>1, 6, 7, 11, 12<br /><strong>नवंबर: </strong>21, 24, 25, 26<br /><strong>दिसंबर:</strong> 2, 3, 4, 5, 6</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 10:09:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>माता सीता:  त्याग, धैर्य और आत्मशक्ति की अनुपम प्रतिमूर्ति... एक जीवन जो युगों से नारी चेतना को करता है प्रेरित </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक चेतना में माता सीता केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण, धैर्य, करुणा, असीम पवित्रता और नारी मर्यादा की ऐसी जीवंत प्रतिमूर्ति हैं, जो युगों-युगों से नारी शक्ति को परिभाषित करती आई हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी ही कठिन क्यों न हों, यदि मन में धर्म, संयम और आत्मविश्वास अडिग हो, तो जीवन की हर अग्निपरीक्षा सार्थक बन जाती है। माता सीता का व्यक्तित्व स्त्री चेतना का वह स्वरूप प्रस्तुत करता है, जिसमें सौम्यता के साथ अडिग शक्ति का संतुलन  दिखाई देता है।<br /><br />माता सीता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570683/mother-sita--a-unique-embodiment-of-sacrifice--patience-and-self-power%E2%80%A6-a-life-that-inspires-women-s-consciousness-for-ages"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(86).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक चेतना में माता सीता केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण, धैर्य, करुणा, असीम पवित्रता और नारी मर्यादा की ऐसी जीवंत प्रतिमूर्ति हैं, जो युगों-युगों से नारी शक्ति को परिभाषित करती आई हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी ही कठिन क्यों न हों, यदि मन में धर्म, संयम और आत्मविश्वास अडिग हो, तो जीवन की हर अग्निपरीक्षा सार्थक बन जाती है। माता सीता का व्यक्तित्व स्त्री चेतना का वह स्वरूप प्रस्तुत करता है, जिसमें सौम्यता के साथ अडिग शक्ति का संतुलन  दिखाई देता है।<br /><br />माता सीता के प्राकट्य की कथा भारतीय परंपरा की सबसे दिव्य और अर्थपूर्ण कथाओं में से एक है। रामायण के अनुसार मिथिला में एक समय भयंकर अकाल पड़ा था। ऋषियों के परामर्श पर मिथिला के राजा जनक ने स्वयं हल चलाने का संकल्प लिया, जिससे धरती माता प्रसन्न हों और वर्षा हो। जब राजा जनक खेत जोत रहे थे, तब हल का अग्र भाग, जिसे ‘सीत’ कहा जाता है, धरती में गड़े एक स्वर्ण कलश से टकराया। उस कलश से एक दिव्य, तेजस्वी और अनुपम सौंदर्य से युक्त कन्या प्रकट हुई। निःसंतान राजा जनक ने उसे ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार किया। हल के अग्र भाग से उत्पन्न होने के कारण उनका नाम सीता पड़ा, राजा जनक की पुत्री होने के कारण वे जानकी कहलाईं और धरती से जन्म लेने के कारण भूमिजा। इस प्रकार माता सीता का जन्म स्वयं प्रकृति और धर्म के पवित्र मिलन का प्रतीक बन गया।</p>
<p style="text-align:justify;">माता सीता का संपूर्ण जीवन त्याग, सहनशीलता और आत्मबल की जीवंत मिसाल है। राजमहल की सुख-सुविधाओं को छोड़कर वनवास स्वीकार करना, अपहरण, अकेलापन, लोकापवाद और कठोर परीक्षाओं को सहन करना-इन सबके बावजूद उन्होंने अपने चरित्र, आत्मसम्मान और धर्म से कभी समझौता नहीं किया। वे केवल भगवान राम की अर्धांगिनी नहीं थीं, बल्कि उनके धर्मपथ की सहचरी और नैतिक शक्ति भी थीं। उनका जीवन यह दर्शाता है कि नारी शक्ति मौन सहनशीलता नहीं, बल्कि मूल्यों के प्रति अडिग प्रतिबद्धता है।</p>
<p style="text-align:justify;">माता सीता को आदर्श पत्नी, पुत्री और स्त्री के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनकी भूमिका इन पारंपरिक सीमाओं से कहीं आगे जाती है। वे संबंधों में समर्पण के साथ आत्मसम्मान का संतुलन स्थापित करती हैं। उनका आचरण यह सिखाता है कि प्रेम में भी स्वाभिमान आवश्यक है और त्याग का अर्थ आत्मविस्मरण नहीं होता। यही कारण है कि माता सीता आज भी पारिवारिक जीवन, सामाजिक संरचना और नैतिक मूल्यों की आधारशिला मानी जाती हैं।<br />भारतीय परंपरा में माता सीता को लक्ष्मी स्वरूप भी माना गया है-सुख, समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक। उनके व्यक्तित्व में बाहरी वैभव से अधिक आंतरिक समृद्धि का महत्व दिखाई देता है। यही संदेश आज के उपभोक्तावादी और भौतिकतावादी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। स्त्री को केवल सहनशील या त्यागमूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि सृजन, संतुलन और सामाजिक शक्ति के केंद्र के रूप में देखने की दृष्टि माता सीता के जीवन से ही विकसित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आधुनिक जीवन की भागदौड़, मानसिक तनाव और रिश्तों में बढ़ती जटिलताओं के बीच माता सीता का जीवन आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है। वे सिखाती हैं कि धैर्य कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है। जब मन स्थिर होता है, तो निर्णय स्पष्ट होते हैं और रिश्तों में मधुरता स्वतः विकसित होती है। यही कारण है कि आज भी ग्रामीण समाज से लेकर महानगरों तक, माता सीता का नाम पारिवारिक शांति और सामाजिक संतुलन से जुड़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">माता सीता की आराधना केवल बाह्य पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके गुणों-संयम, करुणा, आत्मबल और सत्यनिष्ठा-को जीवन में उतारने का संकल्प है। यदि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं, चाहे वह परिवार हो, समाज हो या व्यक्तिगत संघर्ष, तो जीवन की कठिन से कठिन राह भी सहज और अर्थपूर्ण बन सकती है। जिस प्रकार उन्होंने अशोक वाटिका में रहते हुए भी अपने आत्मसम्मान और धैर्य को अडिग रखा, वह हर युग के लिए एक प्रेरणास्रोत है। आज के समय में, जब नारी सम्मान, मानसिक संतुलन और संवेदनशील रिश्तों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, माता सीता का जीवन हमें सच्ची शक्ति का अर्थ समझाता है-वह शक्ति जो भीतर से आती है और पूरे समाज को दिशा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्वेता गोयल, लेखक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                            <category>Trending News</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>अंतस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 07:00:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Mahashivratri 2026 Shubh Sanyog: महाशिवरात्रि कल, बनेंगे विशेष शुभ योग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः</strong> इस बार फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 15 फरवरी रविवार को है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह उत्सव महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि ने चतुर्दशी रविवार को शाम 5:04 बजे 16 फरवरी को शाम पांच बजे तक है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सुबह 6:43 से शाम 7:48 तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के बाद श्रवण नक्षत्र शुरु होगा, जो 16 फरवरी सांय 8:47 तक रहेगा। श्रवण नक्षत्र में शिव पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:48 से 12:53 तक और अमृतकाल 12:59 से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/571203/mahashivratri-2026--auspicious-conjunctions-for-mahashivratri-will-be-formed-tomorrow"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(7)5.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचारः</strong> इस बार फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 15 फरवरी रविवार को है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह उत्सव महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि ने चतुर्दशी रविवार को शाम 5:04 बजे 16 फरवरी को शाम पांच बजे तक है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सुबह 6:43 से शाम 7:48 तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के बाद श्रवण नक्षत्र शुरु होगा, जो 16 फरवरी सांय 8:47 तक रहेगा। श्रवण नक्षत्र में शिव पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:48 से 12:53 तक और अमृतकाल 12:59 से 2:41 बजे तक रहेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चार प्रहर की पूजा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्रथम प्रहर 5:58 से 9:09, द्वितीय 9:09 से 12:20, तृतीय 12:20 से 3:31 और चतुर्थ 3:31 से 6:42 बजे तक रहेगा। रात्रि के चारों प्रहरों में बेलपत्र अर्पित करना पुण्यकारी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पूजन विधि और लाभ</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जल, दूध, दही, घी, शहद व गन्ने के रस से अभिषेक करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ जप, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र, शिव पुराण व शिव तांडव स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस योग में पूजा से रोग मुक्ति, धन लाभ, विवाह बाधा निवारण और दोष शांति के विशेष फल प्राप्त होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>अयोध्या</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/571203/mahashivratri-2026--auspicious-conjunctions-for-mahashivratri-will-be-formed-tomorrow</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 09:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पौराणिक कथा: गरुड़ की करुणा और मृत्यु का अटल सत्य... जो भाग्य लिखा, वही होता है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक बार भगवान विष्णु गरुड़ पर आरूढ़ होकर कैलाश पर्वत पहुंचे। द्वार पर गरुड़ को छोड़कर वे स्वयं महादेव से मिलने भीतर चले गए। गरुड़ बाहर खड़े कैलाश की अलौकिक प्राकृतिक शोभा को निहार रहे थे। हिमशिखरों की दिव्यता, मंद समीर और दिव्य शांति उन्हें मंत्रमुग्ध कर रही थी। तभी उनकी दृष्टि एक अत्यंत सुंदर, नन्हीं-सी चिड़िया पर पड़ी। वह इतनी कोमल और आकर्षक थी कि गरुड़ का मन अनायास ही उसी में उलझ गया। उसी क्षण यमराज कैलाश पधारे। भीतर जाने से पहले उन्होंने उस चिड़िया को एक गहरी और आश्चर्यपूर्ण दृष्टि से देखा।</p>
<p>गरुड़ यह संकेत समझ गए।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/570681/mythological-story--garuda-s-compassion-and-the-unwavering-truth-of-death----whatever-is-written-in-fate--happens"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-02/muskan-dixit-(85).png" alt=""></a><br /><p>एक बार भगवान विष्णु गरुड़ पर आरूढ़ होकर कैलाश पर्वत पहुंचे। द्वार पर गरुड़ को छोड़कर वे स्वयं महादेव से मिलने भीतर चले गए। गरुड़ बाहर खड़े कैलाश की अलौकिक प्राकृतिक शोभा को निहार रहे थे। हिमशिखरों की दिव्यता, मंद समीर और दिव्य शांति उन्हें मंत्रमुग्ध कर रही थी। तभी उनकी दृष्टि एक अत्यंत सुंदर, नन्हीं-सी चिड़िया पर पड़ी। वह इतनी कोमल और आकर्षक थी कि गरुड़ का मन अनायास ही उसी में उलझ गया। उसी क्षण यमराज कैलाश पधारे। भीतर जाने से पहले उन्होंने उस चिड़िया को एक गहरी और आश्चर्यपूर्ण दृष्टि से देखा।</p>
<p>गरुड़ यह संकेत समझ गए। उन्हें आभास हो गया कि उस चिड़िया की मृत्यु निकट है और यमराज कैलाश से लौटते समय उसे अपने साथ ले जाएंगे। करुणा से भरकर गरुड़ का हृदय द्रवित हो उठा। वे इतनी छोटी और सुंदर चिड़िया को मरते हुए नहीं देख सके। उन्होंने उसे अपने पंजों में सहेजा और कैलाश से हजारों कोस दूर एक निर्जन वन में, एक ऊंची चट्टान पर सुरक्षित छोड़ दिया। इसके बाद वे पुनः कैलाश लौट आए। जब यमराज बाहर आए, तो गरुड़ ने विनम्रतापूर्वक पूछा-“प्रभु, आपने उस छोटी-सी चिड़िया को इतनी आश्चर्य भरी दृष्टि से क्यों देखा था?”</p>
<p>यमराज बोले- “गरुड़, जब मैंने उस चिड़िया को देखा, तब मुझे ज्ञात हुआ कि कुछ ही क्षणों बाद वह यहां से हजारों कोस दूर एक नाग द्वारा निगल ली जाएगी। मैं इसी बात पर विचार कर रहा था कि वह इतनी अल्प अवधि में इतनी दूर कैसे पहुंचेगी? पर अब वह यहां नहीं है, तो निश्चय ही उसका अंत हो चुका होगा।” यह सुनकर गरुड़ को सत्य का बोध हो गया। वे समझ गए कि मृत्यु को टाला नहीं जा सकता, चाहे कितनी ही चतुराई क्यों न कर ली जाए। इसीलिए परमात्मा कहते हैं- “तू करता वही है, जो तू चाहता है, पर होता वही है, जो मैं चाहता हूं। तू वही कर, जो मैं चाहता हूं- फिर होगा वही, जो तू चाहेगा।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Breaking News</category>
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                <link>https://www.amritvichar.com/article/570681/mythological-story--garuda-s-compassion-and-the-unwavering-truth-of-death----whatever-is-written-in-fate--happens</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 07:00:17 +0530</pubDate>
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                <title>मौनी अमावस्या कलः इस बार दुर्लभ योगों का बन रहा महासंयोग... स्नान-दान से मिलेगा पुण्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>माघ की अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार 17 जनवरी की रात 12:03 बजे से अमावस्या 18 जनवरी रात 1:21 बजे तक रहेगी, इसलिए स्नान-दान 18 जनवरी को सुबह होगा।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इस वर्ष मौनी अमावस्या पर हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है, जिससे यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, चंद्रमा धनु राशि में स्थित होंगे,जबकि सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/568035/mauni-amavasya-tomorrow--this-time-a-great-combination-of-rare-yogas----you-will-get-virtue-by-bathing-and-donating"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(21)9.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचारः </strong>माघ की अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार 17 जनवरी की रात 12:03 बजे से अमावस्या 18 जनवरी रात 1:21 बजे तक रहेगी, इसलिए स्नान-दान 18 जनवरी को सुबह होगा।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इस वर्ष मौनी अमावस्या पर हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है, जिससे यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, चंद्रमा धनु राशि में स्थित होंगे,जबकि सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल चारों ग्रह मकर राशि में संयोग बनाएंगे। इसके साथ ही अर्धोदय योग का भी निर्माण होगा। स्कंद पुराण में इस योग को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस योग में स्नान, दान और पूजा करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है।</p>
<h3><strong>ग्रह दोषों से मिलती है शांति</strong></h3>
<p>मौनी अमावस्या के दिन की गई पूजा-अर्चना और दान से राहु, केतु और शनि से संबंधित दोषों की शांति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दिन ग्रह दोष निवारण के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पूरे दिन मौन व्रत रखते हैं। मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु के साथ पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहने और कटु शब्दों का प्रयोग न करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या के दिन तिल, तिल का तेल, आंवला, कंबल एवं वस्त्र आदि का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। ऐसे दान से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संचार होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>धर्म संस्कृति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 10:43:20 +0530</pubDate>
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