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                <title>rajya sabha - Amrit Vichar</title>
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                <description>rajya sabha RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूपी सरकार ने अफसरों को जारी किए निर्देश, जनप्रतिनिधियों के प्रति व्यवहार में बर्दाश्त नहीं होगी लापरवाही</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> उत्तर प्रदेश सरकार ने सांसदों और विधायकों के प्रति अधिकारियों के व्यवहार को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या असम्मानजनक आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों का समयबद्ध निस्तारण और संवाद के दौरान शालीनता व पारदर्शिता बनाने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सभा की विशेषाधिकार समिति के 80 प्रतिवेदन में यूपी के अधिकारियों को लेकर हुई शिकायतों पर केंद्र सरकार से आई आपत्तियों पर बुधवार को प्रमुख सचिव जे.पी. सिंह-II द्वारा जारी शासनादेश में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578845/up-government-issues-directives-to-officials--no-laxity-will-be-tolerated-in-conduct-towards-public-representatives"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/वायरल-तस्वीर-(18)12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> उत्तर प्रदेश सरकार ने सांसदों और विधायकों के प्रति अधिकारियों के व्यवहार को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या असम्मानजनक आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों का समयबद्ध निस्तारण और संवाद के दौरान शालीनता व पारदर्शिता बनाने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सभा की विशेषाधिकार समिति के 80 प्रतिवेदन में यूपी के अधिकारियों को लेकर हुई शिकायतों पर केंद्र सरकार से आई आपत्तियों पर बुधवार को प्रमुख सचिव जे.पी. सिंह-II द्वारा जारी शासनादेश में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शासनादेश के अनुसार, संसद और राज्य विधानमंडल के सदस्य लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, इसलिए उनके साथ शिष्टाचारपूर्ण, संवेदनशील और त्वरित व्यवहार सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों और संचार का समयबद्ध निस्तारण किया जाए तथा अनावश्यक विलंब से बचा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सांसद या विधायक द्वारा जानकारी मांगी जाती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। किसी भी पत्राचार का जवाब निर्धारित समयसीमा में देना होगा और यदि देरी की संभावना हो तो अंतरिम सूचना देना अनिवार्य होगा। सरकार ने अधिकारियों को यह भी हिदायत दी है कि जनप्रतिनिधियों से संवाद के दौरान शालीनता और पारदर्शिता बनाए रखें। बैठकों, कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में उन्हें उचित सम्मान और प्रोटोकॉल के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, शासनादेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की शिकायत या संवाद को नजरअंदाज करना गंभीर माना जाएगा। फोन, संदेश या अन्य माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का भी समय पर संज्ञान लेना होगा। सरकार ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि इन दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, अनुपालन की निगरानी भी की जाएगी और उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">क्या हैं प्रमुख निर्देश</h5>
<p style="text-align:justify;">• सांसद-विधायकों के पत्रों का समयबद्ध जवाब</p>
<p style="text-align:justify;">• सूचना उपलब्ध कराने में प्राथमिकता</p>
<p style="text-align:justify;">• शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य</p>
<p style="text-align:justify;">• देरी होने पर अंतरिम सूचना देना जरूरी</p>
<h5 style="text-align:justify;">क्यों जरूरी हैं निर्देश</h5>
<p style="text-align:justify;">• लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका</p>
<p style="text-align:justify;">• प्रशासन और जनता के बीच सेतु का काम</p>
<p style="text-align:justify;">• पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/578842/chief-minister-yogi-says--the-landscape-has-transformed-in-9-years--uttar-pradesh-has-now-become-a-hub-for-investment--employment--and-innovation"><span class="t-red">मुख्यमंत्री योगी बोले- </span>9 साल में बदली तस्वीर, अब निवेश, रोजगार और इनोवेशन का बना केंद्र उत्तर प्रदेश </a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578845/up-government-issues-directives-to-officials--no-laxity-will-be-tolerated-in-conduct-towards-public-representatives</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:30:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय:  जेल नहीं बस जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026 राज्यसभा से पास होने के बाद कानून बनेगा। सरकार को यकीन है कि इस प्रस्तावित कानून के आने के बाद कारोबारी माहौल और सुगम, बेहतर तथा भयमुक्त होगा क्योंकि छोटे-मोटे अपराधों से जेल की सजा हटाकर उसे जुर्माने में बदला गया है और पहली बार कम गंभीर अपराध, छोटे मोटे अपराध, अपराध की श्रेणी से ही बाहर कर दिए गए हैं। इसे तर्क संगत तथा व्यावहारिक बनाने के लिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 संशोधनों किए गए, जिसे संसद की मंजूरी मिल गई है। </p>
<p>यह ठीक है कि सामान्य अपराध में किसी व्यवसायी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577491/editorial--no-jail--just-fine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/edit.jpg" alt=""></a><br /><p>जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026 राज्यसभा से पास होने के बाद कानून बनेगा। सरकार को यकीन है कि इस प्रस्तावित कानून के आने के बाद कारोबारी माहौल और सुगम, बेहतर तथा भयमुक्त होगा क्योंकि छोटे-मोटे अपराधों से जेल की सजा हटाकर उसे जुर्माने में बदला गया है और पहली बार कम गंभीर अपराध, छोटे मोटे अपराध, अपराध की श्रेणी से ही बाहर कर दिए गए हैं। इसे तर्क संगत तथा व्यावहारिक बनाने के लिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 संशोधनों किए गए, जिसे संसद की मंजूरी मिल गई है। </p>
<p>यह ठीक है कि सामान्य अपराध में किसी व्यवसायी को जेल में डालकर अनुत्पादक भीड़ बढाने से बेहतर है जुर्माने के तौर पर उनसे कुछ धन हासिल किया जाए, जो ज्यादा सार्थक और उत्पादक कृत्य होगा। देश की अदालतों में जो तकरीबन पांच करोड़ मामले लंबित हैं, इसमें से साढ़े करोड़ से ज्यादा मामले आपराधिक हैं। इनमें से बहुतायत संख्या अत्यंत साधारण किस्म के आपराधिक आरोपों के हैं। ऐसे में यह कानून आया तो वह अदालतों से आपराधिक मामलों का और जेल प्रशासन से कैदियों के देखरेख का बोझ हटाने में सफल हो जाएगी।</p>
<p>साधारण या अनजाने में किए अपराधों से संबंधित अदालत में लंबित लाखों मुकदमों का निपटारा आसानी से और त्वरित तौर पर संभव होगा तथा धन, समय, ऊर्जा, संसाधन के अपव्यय का कारण बनने वाले इन लंबित मुकदमों की संख्या भी आगे नहीं बढेगी। साधारण मामलों वाले इन खिंचते मुकदमों के चलते जनता, अदालतें, सरकार और कारोबारी तथा दूसरे वर्ग परेशान होते थे। कानून के प्रभावी होने से अदालतें बेवजह के कागज पत्र, कार्रवाइयों के बोझ से कम दबेंगी कोर्ट के कामकाज में फुर्ती आएगी। </p>
<p>साधारण अपराध में जेल जाने वाला व्यक्ति देश, समाज, परिवार के लिए बोझ बन जाता है और रिहा होने के बाद भी कलंक नहीं छूटता। सो बेहतर है कि जुर्माना भरकर अथवा अदालत से बाहर एक दंड राशि चुकाकर दोनों पक्ष समझौता कर अपराध और मुकादमा मुक्त हो लें। मोदी सरकार ने लोगों रहन-सहन एवं व्यापार करने में सुगमता, सुविधा लाने के लिए पिछले दशक भर से लगभग 40 हजार कानूनी प्रावधानों को सरल बना चुकी है। इस बार की कारगुजारी को जोड़ लें तो उसने 1562 कानूनी प्रावधानों को कानून की किताब से हटाया है। </p>
<p>यह सही है कि देश में प्रचलित 1536 कानूनों के 70 हजार प्रावधानों में से अधिकतर छोटे कारोबारियों के विकास में बाधा बनते हैं। ऐसे में सामान्य और कामकाज के दौरान असावधानी के चलते हो जाने वाले अपराधों के लिए जेल चले जाने का भय व्यापार के पारिस्थितिकी तंत्र और व्यापारी, निर्माता के व्यक्तिगत आत्मविश्वास के विकास में बाधा डालने वाला एक प्रमुख कारक है। सरकार का यह प्रयास उचित है कि वह व्यवस्था की अड़चनें कम करने के लिए वर्तमान की स्थिति के मद्देनजर पुराने नियमों में बदलाव करे और जो कारोबारी छोटे-छोटे अपराधों के कारण जेल की सजा और जुर्माने से डरते हैं। वे व्यवसायी और सरकारी एजेंसियां सामान्य या तकनीकी रूप से सामान्य उल्लंघनों के लिए जेल जाने की चिंता से निर्भय हो अपना काम करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577491/editorial--no-jail--just-fine</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 08:06:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा में पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने कहा: 'मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना' </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को कहा कि ''मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना''। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी अपनी ही पार्टी ने कहा है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाए। चड्ढा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, ''जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता हूं, जिनमें अक्सर अनदेखी किए जाने वाले विषय भी शामिल हैं। लेकिन क्या आम लोगों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577375/after-being-removed-from-the-rajya-sabha--chadha-said---don-t-mistake-my-silence-for-my-defeat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(19)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को कहा कि ''मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना''। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी अपनी ही पार्टी ने कहा है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाए। चड्ढा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, ''जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता हूं, जिनमें अक्सर अनदेखी किए जाने वाले विषय भी शामिल हैं। लेकिन क्या आम लोगों की समस्याओं के बारे में बात करना अपराध है? क्या मैंने कोई अपराध किया है?''</p>
<p style="text-align:justify;">चड्ढा ने अपनी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि उनके संसद में बोलने पर रोक लगा दी जाए। चड्ढा ने कहा, ''आप ने संसद को सूचित किया है कि मुझे बोलने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। मैं उनसे कहना चाहता हूं - मेरी खामोशी को मेरी हार नहीं समझें।'' उन्होंने कहा, ''मैंने कई ऐसे मुद्दे उठाए जिनसे आम आदमी को फायदा हुआ। इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान हुआ? कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहता है?''</p>
<p style="text-align:justify;">आप ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाने की मांग की और उनके स्थान पर पंजाब के सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया। सूत्रों के अनुसार, पत्र में कहा गया है कि पंजाब से राज्यसभा सदस्य चड्ढा को आप के कोटे से सदन में बोलने का समय नहीं दिया जाए। कभी आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले और देश के सबसे युवा सांसदों में से एक राघव चड्ढा ने पार्टी के कामकाज में खासकर पंजाब और दिल्ली में आप के कार्यकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577375/after-being-removed-from-the-rajya-sabha--chadha-said---don-t-mistake-my-silence-for-my-defeat</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 13:52:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए महाबोधि मंदिर का प्रबंधन, राज्यसभा में सपा सांसद ने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/लखनऊ। </strong>राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने बृहस्पतिवार को बिहार के बोध गया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि इसका नियंत्रण बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सुमन ने कहा कि महाबोधि मंदिर अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल है और यह वही स्थान माना जाता है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है और लगभग 55 करोड़ लोग यानी दुनिया की लगभग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577257/management-of-mahabodhi-temple-should-be-handed-over-to-followers-of-buddhism--sp-mp-demands-in-rajya-sabha"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/02.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/लखनऊ। </strong>राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने बृहस्पतिवार को बिहार के बोध गया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि इसका नियंत्रण बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सुमन ने कहा कि महाबोधि मंदिर अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल है और यह वही स्थान माना जाता है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है और लगभग 55 करोड़ लोग यानी दुनिया की लगभग सात प्रतिशत आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है। अन्य धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल किया, "क्या अयोध्या मंदिर की प्रबंधन समिति में कोई मुस्लिम, सिख या ईसाई सदस्य है?" </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आम तौर पर धार्मिक स्थलों का प्रबंधन उसी धर्म के लोगों को सौंपा जाता है और यही सिद्धांत महाबोधि मंदिर पर भी लागू होना चाहिए। सपा सदस्य सुमन ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर को खासा राजस्व मिलता है, लेकिन इसके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> उन्होंने गया के हवाई अड्डे का नाम गौतम बुद्ध के नाम पर रखने की मांग भी की तथा इसे सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक भावना से जुड़ा विषय बताया। वर्तमान में मंदिर का प्रबंधन महाबोधि मंदिर प्रबंधन अधिनियम 1949 के तहत गठित समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें बौद्ध और गैर-बौद्ध दोनों सदस्य शामिल होते हैं। यह व्यवस्था लंबे समय से देशभर के बौद्ध समुदाय के बीच विवाद का विषय रही है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/577257/management-of-mahabodhi-temple-should-be-handed-over-to-followers-of-buddhism--sp-mp-demands-in-rajya-sabha</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 14:18:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राज्यसभा में बोले सभापति राधाकृष्णन-  ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों को सशक्त बनाना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों को केवल समायोजित करने के बजाय उन्हें समाज के महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में पूर्ण रूप से सशक्त बनाया जाना चाहिए और यह एक साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। संयुक्त राष्ट्र ने दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान किया था। तब से हर साल दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। </p>
<p>राज्यसभा में अपने संबोधन में सभापति ने कहा कि संसद ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और उनके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577252/rajya-sabha-chairman-radhakrishnan-says--empowering-individuals-with-autism-is-essential"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/01.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों को केवल समायोजित करने के बजाय उन्हें समाज के महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में पूर्ण रूप से सशक्त बनाया जाना चाहिए और यह एक साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। संयुक्त राष्ट्र ने दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान किया था। तब से हर साल दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। </p>
<p>राज्यसभा में अपने संबोधन में सभापति ने कहा कि संसद ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का विषय "तंत्रिका विविधता को आगे बढ़ाना और सतत विकास लक्ष्य" यह रेखांकित करता है कि न्यूरोडायवर्सिटी को मानव विविधता का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए और विकास के प्रयास समावेशी तथा टिकाऊ होने चाहिए।</p>
<p>राधाकृष्णन ने कहा कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर संचार, व्यवहार और सामाजिक सहभागिता को प्रभावित करता है, लेकिन इससे जुड़े व्यक्तियों में विशिष्ट क्षमताएं और प्रतिभाएं भी होती हैं, जो उचित समर्थन और अवसर मिलने पर समाज को समृद्ध कर सकती हैं। उन्होंने भारत में मौजूद कानूनी ढांचे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और राष्ट्रीय ट्रस्ट अधिनियम 1999 का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अधिकारों की सुरक्षा और सहायता सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। </p>
<p>सभापति ने चेतावनी दी कि कानून और योजनाएं तभी प्रभावी होती हैं जब उनके लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचें। उन्होंने शुरुआती पहचान, समावेशी शिक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक जागरूकता पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि एक समावेशी समाज तभी मजबूत होता है जब हर नागरिक को, उसकी क्षमताओं की परवाह किए बिना, योगदान देने और सफल होने का अवसर मिले। साथ ही उन्होंने सदस्यों से समझ, स्वीकृति और समान भागीदारी का वातावरण बनाने के लिए सामूहिक संकल्प दोहराने का आह्वान किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संसद सत्र : सभी भारतीय भाषाओं में हो यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा... DMK सांसद ने राज्यसभा में की माग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने पर असंतोष जाहिर करते हुए सोमवार को राज्यसभा में द्रमुक (DMK) सदस्य पी विल्सन ने कहा कि इस स्थिति में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी मेधावी छात्र परेशानी महसूस करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए विल्सन ने कहा ''यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करना हर विद्यार्थी का सपना होता है क्योंकि यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जीवन की बड़ी चुनौती का हल मिल जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में छात्र यूपीएससी की परीक्षा देते हैं''। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा ''लेकिन दिक्कत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576936/parliament-session--upsc-preliminary-examination-should-be-conducted-in-all-indian-languages%E2%80%94dmk-mp-demands-in-rajya-sabha"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/dmk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने पर असंतोष जाहिर करते हुए सोमवार को राज्यसभा में द्रमुक (DMK) सदस्य पी विल्सन ने कहा कि इस स्थिति में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी मेधावी छात्र परेशानी महसूस करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए विल्सन ने कहा ''यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करना हर विद्यार्थी का सपना होता है क्योंकि यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जीवन की बड़ी चुनौती का हल मिल जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में छात्र यूपीएससी की परीक्षा देते हैं''। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा ''लेकिन दिक्कत यह है कि यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होती है जबकि मुख्य परीक्षा 22 अधिसूचित भाषाओं में होती है। प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी होशियार छात्र इसमें परेशानी महसूस करते हैं।'' </p>
<p style="text-align:justify;">द्रमुक सदस्य ने कहा कि यूपीएससी के लिए छात्र एक साल मेहनत करते हैं और उनके पास न होने पर यह साल खराब हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा को चक्रीय व्यवस्था के तहत लिया जाना चाहिए ताकि छात्रों का साल खराब न हो। उन्होंने मांग की कि संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में लिया जाना चाहिए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तित्व परीक्षा बंद होना चाहिए। द्रमुक सदस्य ने दावा किया कि यूपीएससी परीक्षा में अंक लाने की पद्धति अंग्रेजी को प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि पास होने के बाद साक्षात्कार में सबसे कम अंक मिलते हैं। उन्होंने कहा ''ओबीसी छात्रों, एससी, एसटी के साथ खास तौर पर ऐसा होता है।'' </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:32:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फेफड़ों के कैंसर के 40 फीसदी मरीजों ने नहीं किया धूम्रपान, राष्ट्रीय जांच कार्यक्रम बनाए सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> गुजरात से भाजपा सांसद बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने शुक्रवार को राज्यसभा में धूम्रपान नहीं करने वालों में फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सरकार से इस बीमारी का शीघ्र पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जांच कार्यक्रम शुरू करने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए देसाई ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के निष्कर्षों का हवाला दिया, जिनके अनुसार देश में हर साल सामने आने वाले फेफड़ों के कैंसर के लगभग एक लाख नए मामलों में करीब 40 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576627/40-percent-of-lung-cancer-patients-have-never-smoked--the-government-should-establish-a-national-screening-program"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/cats190.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> गुजरात से भाजपा सांसद बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने शुक्रवार को राज्यसभा में धूम्रपान नहीं करने वालों में फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सरकार से इस बीमारी का शीघ्र पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जांच कार्यक्रम शुरू करने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए देसाई ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के निष्कर्षों का हवाला दिया, जिनके अनुसार देश में हर साल सामने आने वाले फेफड़ों के कैंसर के लगभग एक लाख नए मामलों में करीब 40 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "यह धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर होने की पारंपरिक धारणा को पूरी तरह चुनौती देता है और इस बीमारी के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।" भाजपा सांसद ने इस प्रवृत्ति के लिए वायु प्रदूषण को एक प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि पीएम 2.5 एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहा शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और वाहनों की बढ़ती संख्या वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट ला रही है, जो जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि एम्स इस संबंध में लगभग 3,200 लोगों पर व्यापक शोध कर रहा है। देसाई ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर से निपटने में सबसे बड़ी चुनौती, इस बीमारी का देर से निदान है, क्योंकि अधिकतर मामलों में बीमारी का पता करीब-करीब अंतिम चरण में चलता है, जिसके कारण करीब 70 प्रतिशत मरीजों की एक वर्ष के भीतर मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा, "यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों और जन जागरूकता की सीमाओं को भी उजागर करता है।" </p>
<p style="text-align:justify;">आयुष्मान भारत योजना के तहत कैंसर के निदान और उपचार के लिए सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने, फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए लक्षित राष्ट्रीय जांच कार्यक्रम शुरू करने, जन जागरूकता फैलाने और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की अपील की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/576627/40-percent-of-lung-cancer-patients-have-never-smoked--the-government-should-establish-a-national-screening-program</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:53:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट से भारत में स्थिति चिंताजनक... राज्यसभा में बोले पीएम मोदी- गरीबों, श्रमिकों व प्रवासियों के हित में कदम उठायें राज्य </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया के हालात पर राज्यसभा को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से भारत में स्थिति चिंताजनक है। हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। गैस-तेल जैसे जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है तथा भारत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576292/parliament-session--pm-modi-speaks-in-rajya-sabha-%E2%80%94-situation-in-india-concerning-amid-west-asia-crisis"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/020.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया के हालात पर राज्यसभा को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से भारत में स्थिति चिंताजनक है। हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। गैस-तेल जैसे जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है तथा भारत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर राज्यसभा में वक्तव्य देते हुए कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। ''इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है।'' मोदी ने कहा कि उन्होंने युद्ध की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर में फोन पर बात की है। ''हम खाड़ी के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं।'' </p>
<p>उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने संघर्ष को कम करने और होर्मुज मार्ग को खोलने के बारे में भी बातचीत की है।'' मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका जीवन एवं आजीविका भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दुनिया के कई जहाज फंसे हुए हैं। उनमें भारतीय चालक दल की संख्या भी बहुत अधिक है तथा यह भी भारत की एक बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति एवं संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए। </p>
<p>पीएम मोदी ने सदन में कहा, बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं. एनर्जी इंपोर्ट का विकेंद्रीकरण ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। पहले 27 देशों से एनर्जी इंपोर्ट होता था, आज 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है भारत। हमारी तेल कंपनियां संकट के समय के लिए काफी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का भंडार रखती हैं।</p>
<p>इस युद्ध से व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। गैस, फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई प्रभावित हो रही है। गल्फ देशों में एक करोड़ से ज्यादा भारतीय लोग रहते हैं। उनकी सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है। होर्मुज स्ट्रेट में बहुत सारे जहाज फंसे हैं, इसमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं।</p>
<h5><strong>भारत ने संवाद का ही रास्ता सुझाया : पीएम मोदी</strong></h5>
<p>पीएम मोदी ने कहा, भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। युद्ध में किसी के भी जीवन में संकट मानवता के हक में नहीं है। भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को शांति पूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है। </p>
<p> </p>
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<h5><strong>खबर अपडेटड हो रही....</strong></h5>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:16:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कंपनियां कर रही हैं अनयूज्ड डेटा की लूट... राज्यसभा में बोले राघव चड्ढा- 'वैलिडिटी' खत्म होने के साथ समाप्त न हो मोबाइल फोन का अनयूज्ड डेटा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> मोबाइल फोन के प्लान के अनुसार रोजाना मिलने वाले डेटा का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाने की स्थिति में उसका बाद में उपयोग करने की व्यवस्था होने की मांग करते हुए सोमवार को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि यह केवल डेटा की ही नहीं बल्कि उपभोक्ता के अधिकार की भी बात है। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए चड्ढा ने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति मोबाइल फोन रीचार्ज कराता है तो उसे उसके प्लान के अनुसार डेटा मिलता है। ''यह डेटा रात बारह बजे समाप्त हो जाता है।''</p>
<p style="text-align:justify;">ॉउन्होंने कहा ''उपभोक्ता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/576167/companies-are-looting-unused-data----raghav-chadha-states-in-the-rajya-sabha---unused-mobile-data-should-not-expire-when-its-validity-ends"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/cats166.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> मोबाइल फोन के प्लान के अनुसार रोजाना मिलने वाले डेटा का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाने की स्थिति में उसका बाद में उपयोग करने की व्यवस्था होने की मांग करते हुए सोमवार को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि यह केवल डेटा की ही नहीं बल्कि उपभोक्ता के अधिकार की भी बात है। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए चड्ढा ने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति मोबाइल फोन रीचार्ज कराता है तो उसे उसके प्लान के अनुसार डेटा मिलता है। ''यह डेटा रात बारह बजे समाप्त हो जाता है।''</p>
<p style="text-align:justify;">ॉउन्होंने कहा ''उपभोक्ता से पैसा पूरा लिया जाता है लेकिन रात बारह बजे तक अनुपयुक्त डेटा दिन समाप्त होने के साथ ही समाप्त हो जाता है। यह अनुपयुक्त डेटा हमें अगले दिन नहीं मिलता जबकि यह हमारी मेहनत के पैसों से खरीदा जाता है।'' उन्होंने कहा ''विडंबना यह है कि रोज के डेटा की सीमा तय होती है, लेकिन मासिक डेटा सीमा नहीं होती। मासिक डेटा सीमा होने पर पूरा डेटा इस्तेमाल होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि लोग छुट्टी के दिन डेटा का अधिक उपयोग करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं होता और बचा हुआ डेटा वैलिडिटी समाप्त होने पर एक्सपायर हो जाता है।''</p>
<p style="text-align:justify;">चड्ढा ने कहा कि आज इंटरनेट हर चीज के लिए जरूरी हो गया है और यह हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है। आप सांसद ने मांग की कि अनुपयुक्त डेटा का बाद में इस्तेमाल करने की सुविधा दी जानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डेटा वैलिडिटी समाप्त होने के साथ समाप्त न हो। ''यह डेटा की ही बात नहीं है बल्कि उपभोक्ता के अधिकार की भी बात है।''</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि माह के अंत में अगर अधिक डेटा बचा हो तो उपयोगकर्ता को इस डेटा का समायोजन अपने रीचार्ज प्लान में करने की छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुपयुक्त डेटा को 'डिजिटल संपत्ति' माना जाए और उसे स्थानांतरित करने की सुविधा उपयोगकर्ता को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितनी बिजली की खपत की जाती है उतना ही पैसा हम देते हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह जितना डेटा इस्तेमाल हो, उपयोगकर्ता से उतने का ही पैसा लिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युवाओं में फिल्में-वेब सीरीज भी धूम्रपान का मुख्य कारण, भाजपा सांसद तनावड़े ने राज्यसभा में उठाई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>फिल्मों और वेब सीरीज का बच्चों, किशोरों और युवाओं पर प्रभाव पड़ने का जिक्र करते हुए भारतीय जनता पार्टी सांसद सदानंद महालू शेट तनावड़े ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि निर्माताओं को सामग्री का चयन बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा सदस्य तनावड़े ने कहा कि फिल्मों में, वेब सीरीज में जो कुछ दिखाया जाता है उससे बच्चे, किशोर और युवा खास तौर पर प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा ''फिल्मों और वेब सीरीज में बच्चे, किशोर और युवा जो कुछ देखते हैं वह अक्सर उसकी नकल करते हैं। पहले भी यह कहा जा चुका है और अध्ययन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575461/movies-and-web-series-are-also-the-main-reason-for"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/muskan-dixit-(30)7.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>फिल्मों और वेब सीरीज का बच्चों, किशोरों और युवाओं पर प्रभाव पड़ने का जिक्र करते हुए भारतीय जनता पार्टी सांसद सदानंद महालू शेट तनावड़े ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि निर्माताओं को सामग्री का चयन बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा सदस्य तनावड़े ने कहा कि फिल्मों में, वेब सीरीज में जो कुछ दिखाया जाता है उससे बच्चे, किशोर और युवा खास तौर पर प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा ''फिल्मों और वेब सीरीज में बच्चे, किशोर और युवा जो कुछ देखते हैं वह अक्सर उसकी नकल करते हैं। पहले भी यह कहा जा चुका है और अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि फिल्म में नायकों से प्रभावित हो कर बच्चे, किशोर और युवा उनके जैसे कदम उठाते हैं।''</p>
<p style="text-align:justify;">तनावड़े ने कहा कि बच्चे, किशोर और युवा अपने पसंदीदा नायक को धूम्रपान करते देख तेजी से धूम्रपान की ओर आकर्षित होते हैं और यह शुरुआती शौक जल्द ही निकोटिन की लत में बदल जाता है। ''हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत में युवाओं की आबादी अधिक है।''</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह बात सर्वविदित है कि धूम्रपान सेहत के लिए नुकसानदायक होता है और निकोटिन समय से पहले कई बीमारियों तथा मौत की वजह बनता है। उन्होंने मांग की कि फिल्मों और वेब सीरीज में ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया जाना चाहिए जो बच्चों, किशोर और युवाओं के भविष्य के लिए घातक हो। इसी पार्टी की धर्मशीला गुप्ता ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की नियमित देखभाल एवं रखरखाव किए जाने की मांग करते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन के संसाधनों का उपयोग करती है। उन्होंने अलीगढ़ की एक घटना का जिक्र किया जब करीब आठ साल की एक बच्ची बस का जर्जर फर्श टूट जाने से नीचे सड़क पर गिर गई और बस का पिछला पहिया उसके ऊपर से गुजर गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">गुप्ता ने कहा कि अगर बस का रखरखाव किया जाता, या अत्यंत खस्ताहाल हो चुकी बस को सेवा से हटा दिया जाता तो न यह हादसा होता और न बच्ची की जान जाती। झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी ने होमियोपैथी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा की एक प्राचीन विधा है और आदिवासियों को इसका खासा ज्ञान है। जड़ी-बूटियों के उपयोग की गहरी जानकारी रखने वाला यह समुदाय ही इसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि होमियोपैथी का न तो पर्याप्त दस्तावेजीकरण किया गया और न ही इसे सरकारी संरक्षण मिला। होमियोपैथी के प्राकृतिक चिकित्सा ज्ञान को अगर समुचित तरीके से संरक्षण दिया जाए तो इसमें बड़ी बीमारियों के इलाज की भी क्षमता है। महुआ ने मांग की कि इस विधा के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान किया जाए और झारखंड में अनुसंधान के लिए संस्थान स्थापित किए जाएं। राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने ऑनलाइन कन्सल्टेन्सी को लेकर कड़े नियम बनाने, ई-फार्मेसी को सख्त बनाने और नियमों का कड़ाई से पालन किए जाने की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि लंबित फार्मेसी नियमावली को भी अद्यतन किया जाना चाहिए। भाजपा के बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने खेल अवसंरचनाओं के सुदृढ़ीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं और यह सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा ''लेकिन राज्य में युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए और परियोजनाओं की जरूरत है।''</p>
<p style="text-align:justify;">देसाई ने कहा ''गुजरात में अहमदाबाद के नारणपुरा इलाके में सावरकर खेल परिसर (वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) बनाया गया है। 825 करोड़ रुपये की लागत से 21 एकड़ में फैला यह गुजरात का सबसे बड़ा अत्याधुनिक खेल परिसर है, जिसका उद्घाटन सितंबर 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। यह केंद्र ओलंपिक स्तर की सुविधाओं से सुसज्जित है।'' उन्होंने मांग की कि राज्य के हर जिले में इस तरह का खेल परिसर बनाया जाए। शून्यकाल में ही भाजपा के गुलाम अली, बालयोगी उमेशनाथ, रामभाई मोकरिया, सुमेर सिंह सोलंकी, माया नारोलिया, सतपाल शर्मा, कांग्रेस के नीरज डांगी, रजनी अशोकराव पाटिल, डॉ सैयद नासिर हुसैन, बीजू जनता दल के देवाशीष सामंत राय और नेशनल कॉन्फ्रेंस के चौधरी मोहम्मद रमजान ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 16:03:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद सत्र: मुख्य सचिव को हटाने पर TMC सासंदों ने किया राज्यसभा से वॉकआउट, किरेन रिजिजू बोले- यह ठीक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। ये सांसद चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने का विरोध कर रहे थे। तृणमूल सांसदों ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध जताते हुए पूरे दिन के लिए सदन से वॉक आउट करने का फैसला किया। </p>
<p>गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी गई है। रविवार को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा की थी। सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने के थोड़ी देर बाद ही तृणमूल कांग्रेस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575202/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0--%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A4%86%E0%A4%89%E0%A4%9F--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%82-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%87--%E0%A4%AF%E0%A4%B9-%E0%A4%A0%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/314.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। ये सांसद चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने का विरोध कर रहे थे। तृणमूल सांसदों ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध जताते हुए पूरे दिन के लिए सदन से वॉक आउट करने का फैसला किया। </p>
<p>गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी गई है। रविवार को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा की थी। सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने के थोड़ी देर बाद ही तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने यह विषय सदन में उठाया।</p>
<p>उन्होंने सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा कि हम शून्यकाल में कोई व्यवधान नहीं डालना चाहते। इसलिए हमें 30 सेकंड का समय दीजिए, क्योंकि हमारा उद्देश्य सदन की कार्यवाही को बाधित करना नहीं है। उन्होंने सदन में कहा कि बीती रात के अंधेरे में पश्चिम बंगाल राज्य के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को निर्वाचन आयोग द्वारा हटा दिया गया है। </p>
<p>डेरेक ओ ब्रॉयन ने कहा कि चुनाव आयोग के पास ऐसा करने की पूरी शक्ति है। डेरेक ओ ब्रॉयन ने सभापति से कहा, “महोदय, उनके (चुनाव आयोग) के पास यह अधिकार है कि वे ऐसा करें। वे यह भी कह सकते हैं कि मैं सफेद शर्ट की जगह नीली शर्ट पहनूं।” </p>
<p>तृणमूल सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुख्य निर्वाचन आयुक्त जो कर रहे हैं उसके विरोध में राज्यसभा में उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस सोमवार के लिए सदन से वॉकआउट कर रही है। डेरेक ओ'ब्रायन के इस वक्तव्य व तृणमूल सांसदों के वॉकआउट के उपरांत संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू इसका जवाब देने के लिए खड़े हुए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि माननीय सदस्य (डेरेक ओ ब्रॉयन) सदन में अचानक खड़े हो गए हैं, जबकि उनका मुद्दा कार्यसूची में सूचीबद्ध नहीं है। वे एक संवैधानिक प्राधिकरण से जुड़े विषय को उठा रहे हैं, जिसका इस सदन या सरकार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। किरेन रिजिजू ने कहा, "यदि हर सदस्य न्यायालय या चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक प्राधिकरणों के निर्णयों पर यहां सवाल उठाने लगे, तो यह उचित नहीं होगा। चुनाव आयोग की शक्तियां अलग हैं।"</p>
<p>चुनाव आयोग को यह अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है। इसलिए इस विषय को सदन में उठाने का कोई औचित्य नहीं है। किरेन रिजिजू ने कहा, "मेरा मानना है कि सभी को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। लेकिन ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और इंडियन नेशनल कांग्रेस ने हमेशा ही संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने की आदत बना ली है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यह ठीक नहीं है और इससे सदन के समय का भी दुरुपयोग हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 15:04:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
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                <title>संसद सत्र : रसोई गैस आपूर्ति पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में भिड़ंत, नड्डा बोले- विपत्ति के समय भी लोगों को भड़का रही कांग्रेस </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने का मुद्दा सोमवार को सदन में उठाया जिस पर नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने यह कहते हुए विरोध किया कि कांग्रेस विपत्ति के समय भी राजनीति कर लोगों को भड़का रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">  खड़गे ने शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण हाहाकार मचा है और इससे विशेष रूप से गरीब, मध्यम वर्ग तथा छोटे रेस्तरां प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा</p>
<p style="text-align:justify;">खड़गे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/575160/parliament-session--ruling-and-opposition-parties-clash-in-rajya-sabha-over-cooking-gas-supply--nadda-alleges-congress-is-inciting-people-even-during-times-of-crisis"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-03/cats122.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने का मुद्दा सोमवार को सदन में उठाया जिस पर नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने यह कहते हुए विरोध किया कि कांग्रेस विपत्ति के समय भी राजनीति कर लोगों को भड़का रही है। </p>
<p style="text-align:justify;"> खड़गे ने शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण हाहाकार मचा है और इससे विशेष रूप से गरीब, मध्यम वर्ग तथा छोटे रेस्तरां प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत की 60 प्रतिशत रसोई गैस आयात करता है और इसमें से भी 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। </p>
<p style="text-align:justify;">खड़गे ने कहा कि आपूर्ति प्रभावित होने से सामुदायिक किचन बंद करने पड़ रहे हैं और सिलेंडर की कीमत भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि देश में गैस सिलेंडर की कमी नहीं है और लोग अफवाहों पर ध्यान ना दें तो फिर यह लाइन क्यों लग रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के मध्य नजर जब सरकार वहां रह रहे भारतीयों के लिए परामर्श जारी कर रही थी तो आपूर्ति के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई और आपूर्ति क्यों नहीं बढ़ाई गई। </p>
<p style="text-align:justify;">सदन के नेता नड्डा ने कहा कि यह शून्य काल है और इसमें हर सदस्य को तीन मिनट का समय अपनी बात कहने के लिए दिया जाता है लेकिन खरगे नेता विपक्ष होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। सभापति द्वारा खरगे को अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद उनके बोलते रहने पर नड्डा ने कहा कि यह वैश्विक विपत्ति का समय है और इसमें भारत की कोई भूमिका नहीं है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विपत्ति के समय भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है । उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सदन में पूरी स्थिति की जानकारी दी है लेकिन कांग्रेस के सदस्यों ने उसे समय उनकी बातों को नहीं सुना। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश में शांतिपूर्ण स्थिति को भड़काकर अराजकता लाने का प्रयास कर रही है यह बहुत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक नेता सिलेंडर की जमाखोरी के मामले में भी पकड़ा गया है। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य जोर-जोर से एक दूसरे का प्रतिवाद करते रहे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 13:37:07 +0530</pubDate>
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