<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.amritvichar.com/tag/30133/supreme-court" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Amrit Vichar RSS Feed Generator</generator>
                <title>Supreme court - Amrit Vichar</title>
                <link>https://www.amritvichar.com/tag/30133/rss</link>
                <description>Supreme court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डेढ़ दशक के लिव-इन संबंध, फिर ब्रेकअप : क्या यह दुष्कर्म का मामला है? सुप्रीम कोर्ट ने उठाये सवाल, मध्यस्थता का दिया सुझाव </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि क्या 15 साल लंबे लिव-इन रिलेशनशिप के टूटने को दुष्कर्म का मामला माना जा सकता है, खासकर तब जब जोड़े का एक बच्चा भी हो और पुरुष संबंध तोड़कर अलग हो गया हो। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने 15 साल के लिव-इन रिलेशनशिप के बाद शादी के वादे से मुकरने पर एक व्यक्ति पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने इस बात पर संदेह जताया कि क्या ऐसी परिस्थितियों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580160/a-decade-and-a-half-long-live-in-relationship--followed-by-a-breakup--does-this-constitute-rape--supreme-court-raises-questions--suggests-mediation"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/सुप्रीम-कोर्ट.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि क्या 15 साल लंबे लिव-इन रिलेशनशिप के टूटने को दुष्कर्म का मामला माना जा सकता है, खासकर तब जब जोड़े का एक बच्चा भी हो और पुरुष संबंध तोड़कर अलग हो गया हो। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने 15 साल के लिव-इन रिलेशनशिप के बाद शादी के वादे से मुकरने पर एक व्यक्ति पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने इस बात पर संदेह जताया कि क्या ऐसी परिस्थितियों में आपराधिक मामला बनता है। पीठ ने टिप्पणी की कि कई वर्षों तक चले आपसी सहमति के संबंधों को ब्रेकअप के बाद आपराधिक मामले में नहीं बदला जा सकता। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या किसी पुरुष का ऐसे रिश्ते से बाहर निकलना अपने आप में एक अपराध माना जाएगा?</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता महिला ने बताया कि जब वह आरोपी से मिली थी, तब वह 18 साल की विधवा थी। आरोपी ने उससे शादी का वादा किया था, जिसके भरोसे उसने डेढ़ दशक तक उसके साथ जीवन बिताया और उनका एक बच्चा भी हुआ। महिला का आरोप है कि बाद में उसे पता चला कि वह व्यक्ति पहले से शादीशुदा था और उसके अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध थे। अदालत ने रिश्ते की लंबी अवधि, उसकी प्रकृति और शिकायत दर्ज करने में हुई देरी (रिश्ते में आने के 15 साल बाद) पर गंभीर कानूनी चिंताएं जतायीं। </p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता की स्थिति सहानुभूति पैदा कर सकती है, लेकिन अपराध के तत्वों को स्पष्ट रूप से स्थापित किये बिना आपराधिक कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता। अदालत ने इस मामले के दायरे को अन्य महिलाओं से जुड़े आरोपों तक बढ़ाने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने सुझाव दिया कि महिला बच्चे के भरण-पोषण सहित अन्य कानूनी उपचारों का विकल्प चुन सकती है, लेकिन आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए एक स्पष्ट कानूनी आधार होना आवश्यक है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने इस विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/580160/a-decade-and-a-half-long-live-in-relationship--followed-by-a-breakup--does-this-constitute-rape--supreme-court-raises-questions--suggests-mediation</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/580160/a-decade-and-a-half-long-live-in-relationship--followed-by-a-breakup--does-this-constitute-rape--supreme-court-raises-questions--suggests-mediation</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 21:19:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2022-11/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F.webp"                         length="36052"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बंगाल मतदाता सूची से बाहर हुए अधिकारियों को झटका,  सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिकाएं सुनने से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उन व्यक्तियों की रिट याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिन्हें मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था, जबकि वे वर्तमान विधानसभा चुनाव में निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उन अपीलीय न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के पास जाने का निर्देश दिया, जिन्हें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की चुनौतियों की सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के आदेश पर गठित किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं की ओर से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579808/bengal-voters--list-officials-suffer-setback--supreme-court-refuses-to-hear-writ-petitions"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/untitled-design-(15)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उन व्यक्तियों की रिट याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिन्हें मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था, जबकि वे वर्तमान विधानसभा चुनाव में निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उन अपीलीय न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के पास जाने का निर्देश दिया, जिन्हें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की चुनौतियों की सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के आदेश पर गठित किया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने अदालत को बताया कि कई अधिकारियों के नाम बिना किसी कारण के मनमाने ढंग से मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। न्यायमूर्ति बागची ने स्वीकार किया कि जिन लोगों की अपील अभी लंबित है, वे शायद पश्चिम बंगाल के मौजूदा विधानसभा चुनावों में मतदान नहीं कर पाएंगे, लेकिन वे अपनी अपील जारी रख सकते हैं ताकि भविष्य के लिए मतदाता सूची में उनका नाम बहाल किया जा सके। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने बताया कि वर्तमान में लगभग 19 अपीलीय न्यायाधिकरण कार्य कर रहे हैं और वे न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ अपीलों की सुनवाई कर रहे हैं। इससे पहले 13 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने कहा था कि पश्चिम बंगाल के जिन मतदाताओं के नाम चुनाव से कम से कम दो दिन पहले अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा स्वीकृत किए जाते हैं, वे विधानसभा चुनाव में मतदान के हकदार होंगे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले चरण का मतदान गुरुवार को संपन्न हो गया है, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/579778/prime-minister-went-boating-on-the-hooghly-river-in-kolkata--photographed-the-howrah-bridge--met-with-boatmen"><span class="t-red">कोलकाता में हुगली नदी पर प्रधानमंत्री ने किया नौका विहार:</span> हावड़ा ब्रिज की फोटोग्राफी, नाविकों से की मुलाकात</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579808/bengal-voters--list-officials-suffer-setback--supreme-court-refuses-to-hear-writ-petitions</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/579808/bengal-voters--list-officials-suffer-setback--supreme-court-refuses-to-hear-writ-petitions</guid>
                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:08:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/untitled-design-%2815%295.jpg"                         length="112574"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: कुत्तों की नसबंदी में लापरवाही...ठेकेदार को अंतिम नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> शहर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रस्तावित नसबंदी अभियान ठेकेदार की मनमानी से अधर में लटका है।</p>
<p>नगर निगम ने ''संतुलन जीव कल्याण'' फर्म को चार महीने पहले इस कार्य का ठेका दिया था, लेकिन अब तक अभियान शुरू नहीं हो सका। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह के अनुसार, फर्म को अंतिम नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। </p>
<p>इधर, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के बावजूद अभियान में हो रही देरी से शहरवासियों में असुरक्षा बढ़ रही है, जबकि निगम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579680/negligence-in-dog-sterilization----final-notice-to-contractor"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/nasbandi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> शहर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रस्तावित नसबंदी अभियान ठेकेदार की मनमानी से अधर में लटका है।</p>
<p>नगर निगम ने ''संतुलन जीव कल्याण'' फर्म को चार महीने पहले इस कार्य का ठेका दिया था, लेकिन अब तक अभियान शुरू नहीं हो सका। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह के अनुसार, फर्म को अंतिम नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। </p>
<p>इधर, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के बावजूद अभियान में हो रही देरी से शहरवासियों में असुरक्षा बढ़ रही है, जबकि निगम जल्द से जल्द कार्य शुरू कराने के प्रयास में है। मंगलवार को मेयर डा. उमेश गौतम की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने भी इसे मुद्दे को जोरशोर से उठाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579680/negligence-in-dog-sterilization----final-notice-to-contractor</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/579680/negligence-in-dog-sterilization----final-notice-to-contractor</guid>
                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 07:09:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/nasbandi.jpg"                         length="254242"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> एक्सप्रेसवे न बनें खतरे का गलियारा ...देशभर में सड़क सुरक्षा पर Supreme Court सख्त, जारी किये नए दिशा निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली</strong>। उच्चतम न्यायालय ने देशभर में सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई निर्देश जारी करते हुए कहा है कि प्रशासनिक सुस्ती या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि देश की सड़कों की कुल लंबाई का केवल दो प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्ग हैं लेकिन सड़क हादसों में होने वाली मौत की कुल संख्या में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। </p><p style="text-align:justify;">पीठ ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को सड़कें अधिक सुरक्षित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579316/expressways-must-not-become-corridors-of-danger----supreme-court-takes-strict-stance-on-road-safety-nationwide--issues-new-guidelines"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/untitled-design-(24).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली</strong>। उच्चतम न्यायालय ने देशभर में सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई निर्देश जारी करते हुए कहा है कि प्रशासनिक सुस्ती या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि देश की सड़कों की कुल लंबाई का केवल दो प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्ग हैं लेकिन सड़क हादसों में होने वाली मौत की कुल संख्या में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। </p><p style="text-align:justify;">पीठ ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को सड़कें अधिक सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए। पीठ ने कहा कि अवैध रूप से वाहन खड़ा करना या दुर्घटना संभावित स्थलों जैसे टाले जा सकने वाले खतरों के कारण एक भी व्यक्ति की जान जाना, नागरिकों की रक्षा करने में राज्य की विफलता को दर्शाता है। </p><p style="text-align:justify;">न्यायालय ने 13 अप्रैल के अपने आदेश में कहा, ''भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिया गया जीवन का अधिकार जीवन को केवल गैरकानूनी तरीके से छीने जाने के विरुद्ध गारंटी नहीं देता, बल्कि राज्य पर यह सकारात्मक दायित्व भी डालता है कि वह ऐसा सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करे, जहां मानव जीवन सुरक्षित रहे और उसका सम्मान हो।'' </p><p style="text-align:justify;">पीठ ने राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में दो और तीन नवंबर, 2025 को हुई सिलसिलेवार सड़क दुर्घटनाओं में 34 लोगों की मौत के बाद दर्ज किए गए स्वतः संज्ञान मामले में यह आदेश पारित किया। इन दुर्घटनाओं के लिए प्रणालीगत लापरवाही और विनाशकारी बुनियादी ढांचागत विफलताओं को जिम्मेदार ठहराया गया है। </p><p style="text-align:justify;">पीठ ने देशभर के लिए निर्देश जारी करते हुए कहा, ''भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार के अभिन्न हिस्से के रूप में यात्रियों की सुरक्षा को संवैधानिक दायित्व मानते हुए यह आवश्यक है कि इन अंतरिम निर्देशों के माध्यम से व्यवस्थागत मूल कारणों का समाधान किया जाए और भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए ये अंतरिम निर्देश जारी किए जाएं।'' </p><p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि न्यायालय इस बात को दोहराता है कि कोई भी आर्थिक या प्रशासनिक बाधा मानव जीवन की शुचिता से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हो सकती और यहां दी गई सख्त समयसीमा इस संवैधानिक दायित्व की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाती है। उसने निर्देश दिया कि वाहन खड़े करने के लिए निर्धारित स्थल को छोड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों को कहीं भी खड़ा या रोका नहीं जाएगा। </p><p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि इस निर्देश को लागू करने के लिए उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएमएस) के जरिये राज्य पुलिस को सतर्क किया जाएगा, जीपीएस आधारित तस्वीरों को साक्ष्य बनाया जाएगा जिनमें समय दर्शाया होगा और एकीकृत ई-चालान प्रणाली का इस्तेमाल होगा। पीठ ने कहा, ''इन निर्देशों का पालन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य पुलिस और राज्य परिवहन विभाग के अधिकारी एवं कर्मी करेंगे। संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेट इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेंगे, जिसमें इन सभी एजेंसियों द्वारा नियमित निरीक्षण और गश्त का प्रावधान होगा। </p><p style="text-align:justify;">इस आदेश की तारीख से 60 दिन के भीतर इन निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।'' महत्वपूर्ण निर्देशों में से एक निर्देश यह है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के मार्ग अधिकारी क्षेत्र में किसी नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण अथवा संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी। पीठ ने निर्देश दिया, ''जिला मजिस्ट्रेट सात अगस्त, 2025 की मानक संचालन प्रक्रिया और सीएनएच अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 60 दिन के भीतर सभी नए या मौजूदा अनधिकृत ढांचों को हटाना सुनिश्चित करें।'' </p><p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि कोई भी विभाग, प्राधिकरण या स्थानीय निकाय राजमार्ग सुरक्षा क्षेत्र के भीतर स्थित किसी स्थल के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की पूर्व अनुमति के बिना कोई लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) या व्यापार मंजूरी न दे और न ही उसका नवीनीकरण करे। ऐसे सभी मौजूदा लाइसेंस की 30 दिन के भीतर समीक्षा की जाए। </p><p style="text-align:justify;">पीठ ने निर्देश दिया कि जिस जगह से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, वहां संबंधित जिला मजिस्ट्रेट इस आदेश के 15 दिन के भीतर जिला राजमार्ग सुरक्षा कार्यबल का गठन करें जिसमें जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या संबंधित भूमि स्वामी एजेंसी, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। </p><p style="text-align:justify;">इसी तरह न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी, गश्त, अवैध पार्किंग पर नजर रखने, उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली के संचालन, कैमरों, गति पहचान उपकरणों, आपात प्रतिक्रिया और मार्ग किनारे सुविधाओं की व्यवस्था, ट्रक के रुकने के लिए स्थलों के निर्माण, दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान एवं प्रकाश व्यवस्था और संस्थागत समन्वय के लिए भी निर्देश जारी किए।</p><h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579316/expressways-must-not-become-corridors-of-danger----supreme-court-takes-strict-stance-on-road-safety-nationwide--issues-new-guidelines</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/579316/expressways-must-not-become-corridors-of-danger----supreme-court-takes-strict-stance-on-road-safety-nationwide--issues-new-guidelines</guid>
                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:55:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/untitled-design-%2824%29.jpg"                         length="106967"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को झटका,  ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकराई </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">  पवन खेड़ा का आरोप था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं। खेड़ा की उस अर्जी को भी अदालत ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579031/setback-for-congress-leader-pawan-khera-from-supreme-court--plea-to-extend-transit-anticipatory-bail-rejected"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/सुप्रीम-कोर्ट1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;"> पवन खेड़ा का आरोप था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं। खेड़ा की उस अर्जी को भी अदालत ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी ताकि वह सोमवार को असम की अदालत में पेश हो सकें। यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के दो दिन बाद सामने आया है। यह अग्रिम जमानत उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय ने दी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने टिप्पणी की कि यदि संबंधित अदालत काम नहीं कर रही है, तो मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर मौजूदा चलन के अनुसार विचार किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि न तो वह और न ही तेलंगाना उच्च न्यायालय असम की उस अदालत के काम में कोई दखल देगा जो पवन खेड़ा के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि 5 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और कई देशों में उनकी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र असम के मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसके बाद खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579031/setback-for-congress-leader-pawan-khera-from-supreme-court--plea-to-extend-transit-anticipatory-bail-rejected</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/579031/setback-for-congress-leader-pawan-khera-from-supreme-court--plea-to-extend-transit-anticipatory-bail-rejected</guid>
                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:50:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2023-01/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F1.jpg"                         length="93386"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनिल अंबानी को बड़ा झटका : सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कीं याचिकाएं, हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी की बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने तीन बैंकों द्वारा उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ''फर्जी'' घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने साथ ही अंबानी को बैंकों के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष अपनी याचिका जारी रखने की अनुमति दी। पीठ ने एकल पीठ से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578885/major-blow-to-anil-ambani--supreme-court-dismisses-petitions-challenging-high-court-order"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी की बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने तीन बैंकों द्वारा उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ''फर्जी'' घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने साथ ही अंबानी को बैंकों के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष अपनी याचिका जारी रखने की अनुमति दी। पीठ ने एकल पीठ से अनुरोध किया कि वह इन बैंक द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ अंबानी की याचिका पर शीघ्र निर्णय करे। </p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश अंबानी द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें उन्होंने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 23 फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ खातों को ''फर्जी'' घोषित करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही खंडपीठ ने तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ऑडिट कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा दिसंबर 2025 में एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया था। एकल पीठ के आदेश में इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा की जा रही वर्तमान और भविष्य की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगाई गई थी। </p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा था कि यह कार्रवाई कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण 'फॉरेंसिक ऑडिट' पर आधारित है और भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है। अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी जिनमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को ''फर्जी'' खाते घोषित करने की मांग की गई थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578885/major-blow-to-anil-ambani--supreme-court-dismisses-petitions-challenging-high-court-order</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578885/major-blow-to-anil-ambani--supreme-court-dismisses-petitions-challenging-high-court-order</guid>
                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 13:55:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2025-08/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F.jpg"                         length="174866"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अनिवार्य मतदान की मांग वाली याचिका, कहा- नागरिकों को वोट के लिए मजबूर नहीं कर सकते </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अनिवार्य मतदान लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से मताधिकार प्रयोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578881/supreme-court-dismisses-plea-seeking-mandatory-voting--states--citizens-cannot-be-compelled-to-vote"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अनिवार्य मतदान लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से मताधिकार प्रयोग करने की अपेक्षा होती है, लेकिन राज्य किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया था कि अदालत चुनाव आयोग को अनिवार्य मतदान के लिए दिशानिर्देश बनाने और बिना वैध कारण वोट न देने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दे। </p>
<p style="text-align:justify;">इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मताधिकार के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, लेकिन हम इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते। न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं और इन पर उचित विधायी और कार्यकारी अधिकारियों (संसद और सरकार) द्वारा विचार किया जाना ही सबसे बेहतर है। पीठ ने दोहराया कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578881/supreme-court-dismisses-plea-seeking-mandatory-voting--states--citizens-cannot-be-compelled-to-vote</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578881/supreme-court-dismisses-plea-seeking-mandatory-voting--states--citizens-cannot-be-compelled-to-vote</guid>
                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 13:43:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2024-11/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F.jpg"                         length="492786"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आवारा कुत्तों के आतंक पर लगाम! लखनऊ में बनेंगे दो बड़े डॉग शेल्टर होम, प्रत्येक में 1000 कुत्तों की क्षमता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>आवारा कुत्तों के आतंक से आम जनता को निजात दिलाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम शहर में में दो डॉग शेल्टर होम बनाएगा। इसके लिए सदर तहसील के ग्राम जेहटा में खसरा संख्या 101 की 1.493 हेक्टेयर भूमि और सरोजनीनगर तहसील के ग्राम नटकुर में खसरा संख्या 165 की 1.2650 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। प्रत्येक शेल्टर होम में 1,000 कुत्तों की रखने की क्षमता होगी। लगभग 15464 वर्गमीटर क्षेत्रफल में ये शेल्टर होम बनेंगे। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी ने इसका प्रस्ताव दिया है, जिसे 15 अप्रैल को प्रस्तावित</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578669/putting-an-end-to-the-menace-of-stray-dogs--two-large-dog-shelters-will-be-built-in-lucknow--each-with-a-capacity-to-accommodate-1-000-dogs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/कुत्ता.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>अमृत विचार : </strong>आवारा कुत्तों के आतंक से आम जनता को निजात दिलाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम शहर में में दो डॉग शेल्टर होम बनाएगा। इसके लिए सदर तहसील के ग्राम जेहटा में खसरा संख्या 101 की 1.493 हेक्टेयर भूमि और सरोजनीनगर तहसील के ग्राम नटकुर में खसरा संख्या 165 की 1.2650 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। प्रत्येक शेल्टर होम में 1,000 कुत्तों की रखने की क्षमता होगी। लगभग 15464 वर्गमीटर क्षेत्रफल में ये शेल्टर होम बनेंगे। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी ने इसका प्रस्ताव दिया है, जिसे 15 अप्रैल को प्रस्तावित नगर निगम सदन की बैठक में रखा जाएगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;">आम नागरिकों पर आक्रामक कुत्तों द्वारा हमला करने और काटने की बढ़ती घटनाओं का संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था। नगर निगम कार्यकारिणी बैठक और सदन में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए डॉग शेल्टर होम बनाने का प्रस्ताव स्वीकार किया जा चुका है। इस सम्बंध में शासन ने 25 जनवरी 2026 को शासनादेश जारी करके नगर निगम सीमा में दो शेल्टर बनाने के लिए भूमि चिन्हित करने के नगर निगम को निर्देश दिए थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सार्वजनिक स्थलों से पकड़कर शेल्टर होम में रखे जाएंगे आवारा कुत्ते</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><span><span style="font-family:NewswrapWeb;">शिक्षण संस्थाओं, अस्पतालों, खेल कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड, और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को पकड़कर इन शेल्टर होम में रखा जाएगा। इनका बधियाकरण और टीकाकरण किया जाएगा। आवारा कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा, जिससे क्षेत्रीय नागरिकों को इनके आतंक से काफी राहत मिलेगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578669/putting-an-end-to-the-menace-of-stray-dogs--two-large-dog-shelters-will-be-built-in-lucknow--each-with-a-capacity-to-accommodate-1-000-dogs</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578669/putting-an-end-to-the-menace-of-stray-dogs--two-large-dog-shelters-will-be-built-in-lucknow--each-with-a-capacity-to-accommodate-1-000-dogs</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 10:21:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2025-07/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE.jpg"                         length="196257"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेरठ से शुरू होगा नया 'आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन', अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर बोला तीखा हमला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>हाल ही में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर मेरठ की सेंट्रल मार्केट में सरकार की तरफ से की गई सीलिंग की कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा है कि देश में एक नए "आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन" की शुरुआत मेरठ से हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को सोशल मीडिया के जरिये अखिलेश यादव ने ऐतिहासिक 1857 की क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह मेरठ ने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी, उसी तरह अब यह शहर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578586/a-new--economic-freedom-movement--will-begin-in-meerut--akhilesh-yadav-launched-a-scathing-attack-on-the-bjp-government"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/अखिलेश-यादव-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong>हाल ही में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर मेरठ की सेंट्रल मार्केट में सरकार की तरफ से की गई सीलिंग की कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा है कि देश में एक नए "आर्थिक स्वतंत्रता आंदोलन" की शुरुआत मेरठ से हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को सोशल मीडिया के जरिये अखिलेश यादव ने ऐतिहासिक 1857 की क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह मेरठ ने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी, उसी तरह अब यह शहर आर्थिक नीतियों के खिलाफ जनआंदोलन का केंद्र बन सकता है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/yadavakhilesh/status/2043582291583394170?s=20">https://twitter.com/yadavakhilesh/status/2043582291583394170?s=20</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियाँ किसानों, छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए नुकसानदायक साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण, कुछ कानूनों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के जरिए सरकार पारंपरिक व्यापार और खेती को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की इन नीतियों का लाभ बड़े उद्योगपतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मिल रहा है, जबकि छोटे कारोबारी हाशिए पर जा रहे हैं। सपा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि अब व्यापारी वर्ग में असंतोष बढ़ रहा है और धीरे-धीरे यह वर्ग सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जो बड़े व्यापारी अभी तक सरकार का समर्थन कर रहे हैं, वे भी भविष्य में इन नीतियों से प्रभावित होंगे। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह चंदा और कमीशन के जरिए कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने "बुलडोजर राजनीति" पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इसका असर केवल मकानों और दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही तो देश आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मेरठ कभी अन्याय के सामने नहीं झुका है और न ही आगे झुकेगा। व्यापारी, किसान और उद्यमी मिलकर इस कथित आर्थिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे और एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>मेरठ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578586/a-new--economic-freedom-movement--will-begin-in-meerut--akhilesh-yadav-launched-a-scathing-attack-on-the-bjp-government</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578586/a-new--economic-freedom-movement--will-begin-in-meerut--akhilesh-yadav-launched-a-scathing-attack-on-the-bjp-government</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:40:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2024-12/%E0%A4%85%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B5-%283%291.jpg"                         length="79657"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: आपकी अमरनाथ यात्रा को फीका कर सकते हैं साइबर ठग, सोशल मीडिया पर आने लगे लिंक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है, वहीं साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। 15 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा से पहले सोशल मीडिया पर फर्जी लिंक और मैसेज फैलाए जा रहे हैं, जिनके जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने की योजना है।</p>
<p>प्रेमनगर के नेहरू पार्क कॉलोनी निवासी सुप्रीम कोर्ट साइबर बार के चेयरमैन अनुज अग्रवाल ने बताया कि अमरनाथ और चारधाम यात्रा के नाम पर हर साल बड़ी संख्या में साइबर ठगी के मामले सामने आते हैं। ठग खुद को ट्रैवल एजेंट या अधिकृत संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों को रजिस्ट्रेशन,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578488/cyber-%E2%80%8B%E2%80%8Bscammers-could-ruin-your-amarnath-yatra--links-begin-appearing-on-social-media"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/amarnath.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है, वहीं साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। 15 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा से पहले सोशल मीडिया पर फर्जी लिंक और मैसेज फैलाए जा रहे हैं, जिनके जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने की योजना है।</p>
<p>प्रेमनगर के नेहरू पार्क कॉलोनी निवासी सुप्रीम कोर्ट साइबर बार के चेयरमैन अनुज अग्रवाल ने बताया कि अमरनाथ और चारधाम यात्रा के नाम पर हर साल बड़ी संख्या में साइबर ठगी के मामले सामने आते हैं। ठग खुद को ट्रैवल एजेंट या अधिकृत संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों को रजिस्ट्रेशन, हेलीकॉप्टर बुकिंग और वीआईपी दर्शन के नाम पर फर्जी लिंक भेजते हैं। </p>
<p>इन लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन में ‘रिमोट एक्सेस ट्रोजन (आरएटी)’ इंस्टॉल हो जाता है, जिससे ठग आपके फोन का पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसके बाद बैंक डिटेल, ओटीपी और निजी जानकारी आसानी से चोरी कर ली जाती है। अनुज अग्रवाल ने कहा किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय स्रोतों से ही यात्रा से जुड़ी जानकारी लें। अपने टिकट को अधिकृत एजेंसी के माध्यम से ही बुक कराएं। यदि कोई संदिग्ध कॉल या मैसेज आए तो नजरअंदाज करें या इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन पर दें।</p>
<p>भावनाओं से खेलते है साइबर ठग<br />साइबर ठग लोगों की भावनाओं से खेलते हैं। वह ऐसे मैसेज भेजते हैं जिससे आप तुरंत उनके मैसेज पर क्लिक करते हैं। ठग इस तरीके के मैसेज भेजते हैं कहीं ये आपके बेटे की तस्वीर तो नहीं, देखिए आपकी पत्नी क्या कर रही है या आपकी बेटी का वीडियो जैसे भ्रामक संदेशों के जरिए लोगों को क्लिक करने के लिए उकसाया जा रहा है। साइबर अपराधी गैस सिलेंडर बुकिंग, कोरियर डिलीवरी और बैंक अपडेट के नाम पर भी लिंक भेज रहे हैं। इन लिंकों से हमेशा सावधान रहे। अपना ओटीपी किसी को भी न बताए।</p>
<p>एसपी सिटी मानुष परीक ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों पर नजर रखी जा रही है और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके लिए अलग से थाना भी बनाया गया है वहीं पर विवेचना भी होती है। ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर फोन करें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578488/cyber-%E2%80%8B%E2%80%8Bscammers-could-ruin-your-amarnath-yatra--links-begin-appearing-on-social-media</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578488/cyber-%E2%80%8B%E2%80%8Bscammers-could-ruin-your-amarnath-yatra--links-begin-appearing-on-social-media</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:03:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/amarnath.jpg"                         length="190474"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागरिक शिष्टाचार भी संविधान का अंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>आकाश सपेलकल, वकील, सुप्रीम कोर्ट-</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(60)1.png" alt="आकाश सपेलकर" width="153" height="86" /></p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी देश में राजदूतों की नियुक्तियां प्रायः सत्ता दल की मर्जी पर ही होते हैं। इनमें ज्यादातर नियुक्तियां राजनीतिक होती और कुछ ब्यूरोक्रेट्स आधारित होती है। राजदूतों की नियुक्ति में यही प्रक्रिया नेपाल की भी है। अभी जिन देशों के राजदूतों को वापस बुलाने का फरमान जारी हुआ है उसमें भारत, चीन, अमेरिका, जापान,यूके और आस्ट्रेलिया शामिल हैं। इन देशों के राजदूतों को एक महीने के भीतर नेपाल वापस आना होगा। इसके पहले रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, इजरायल, श्रीलंका, स्पेन, जर्मनी, दक्षिण कोरिया,कतर, डेनमार्क और मलेशिया के राजदूतों को वापस बुलाने का फरमान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578332/civic-etiquette-is-also-a-part-of-the-constitution"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(60)1.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>आकाश सपेलकल, वकील, सुप्रीम कोर्ट-</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(60)1.png" alt="आकाश सपेलकर" width="153" height="86"></img></p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी देश में राजदूतों की नियुक्तियां प्रायः सत्ता दल की मर्जी पर ही होते हैं। इनमें ज्यादातर नियुक्तियां राजनीतिक होती और कुछ ब्यूरोक्रेट्स आधारित होती है। राजदूतों की नियुक्ति में यही प्रक्रिया नेपाल की भी है। अभी जिन देशों के राजदूतों को वापस बुलाने का फरमान जारी हुआ है उसमें भारत, चीन, अमेरिका, जापान,यूके और आस्ट्रेलिया शामिल हैं। इन देशों के राजदूतों को एक महीने के भीतर नेपाल वापस आना होगा। इसके पहले रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, इजरायल, श्रीलंका, स्पेन, जर्मनी, दक्षिण कोरिया,कतर, डेनमार्क और मलेशिया के राजदूतों को वापस बुलाने का फरमान जारी हुआ था। नेपाल के 182 देशों से राजनयिक संबंध हैं, नई सरकार के सत्ता रूढ़ होने के बाद अब इनमें व्यापक बदलाव शुरू हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व के राजदूतों की वापसी और नए की नियुक्ति प्रक्रिया में करीब एक माह तक समय लग सकता है। इस बीच नए राजदूतों के चयन को लेकर सत्ता रूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के भीतर मंथन का दौर जारी है। चर्चा है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह, गृहमंत्री सुडान गुरूंग और पार्टी अध्यक्ष रवि लामी छाने के बीच राजदूतों की नियुक्ति को लेकर लगातार बैठकें चल रही है। प्रधानमंत्री बालेन शाह और गृहमंत्री सुडान गुरूंग चाहेंगे कि इस पद पर राजनीतिक नियुक्तियां कम से कम हों ताकि नेताओं की सिफारिश और लाविंग जैसी स्थिति से बचा जा सके। राजदूत जैसे उच्च पद पर ज्यादातर नियुक्तियां पूर्व जज,और उच्च पदों पर रहे ईमान दार अफसरों में से होने की उम्मीद है। ऐसे अफसरों को टटोलने का क्रम जारी है जिनमें वैश्विक समझ हो और वे नेपाल और अपनी नियुक्त वाले देश से बेहतर तालमेल बैठाने की समझ रखते हों। </p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल अब  पहले वाला नेपाल नहीं रहा। यहां न तो राजशाही है और न भ्रष्टाचार में लिप्त केवल अपने परिवार को लेकर चिंतित रहने वालों की हुकूमत है। जेन जी आंदोलन के बाद नेपाल को जरूर थोड़ा बहुत नुक्सान सहना पड़ा लेकिन उसके बाद एक युवा और अपेक्षाकृत जनता को परिवर्तन की अनुभूति दिलाने वाली सरकार का जन्म भी हुआ। यह अनुभूति दुनिया के अन्य देशों को भी हो ताकि वे नेपाल को देखने वाले अपने पुराने नजरिए में बदलाव ला सकें। जाहिर है नेपाल अपने राजनयिक संबंध वाले देशों में ऐसा बदलाव तभी ला पाएगा जब उसके नई सरकार की सोच और अपेक्षा पर खरा उतरने में सक्षम राजनयिक हों। राजदूतों की नियुक्त को लेकर बालेन सरकार काफी सोच समझकर निर्णय लेगी ताकि उसे न तो अंतर्विरोध का सामना करना पड़े और न ही राजदूतों की योग्यता पर सवाल खड़ा हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578332/civic-etiquette-is-also-a-part-of-the-constitution</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578332/civic-etiquette-is-also-a-part-of-the-constitution</guid>
                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 07:00:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-%2860%291.png"                         length="372099"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bareilly: सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी से खलबली, सरकारी जमीन पर निर्माण करने वालों की सांसें अटकीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> मेरठ के शास्त्री नगर में 859 अवैध निर्माणों को ढहाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बरेली प्रशासन को भी आइना दिखा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेटबैक में हुए निर्माणों को किसी भी कीमत पर नियमित नहीं किया जा सकता। बरेली में भी ऐसी ही स्थिति कई प्रमुख इलाकों में बनी हुई है। हालांकि नगर निगम और बीडीए ने तमाम जगहों पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाकर ध्वस्तीकरण किया है।</p>
<p>शहर के बीचो-बीच नावल्टी प्लाजा के सामने पहलवान साहब की मजार के आसपास का क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578283/supreme-court-s-warning-sparks-turmoil--those-building-on-government-land-hold-their-breath"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/uit.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> मेरठ के शास्त्री नगर में 859 अवैध निर्माणों को ढहाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बरेली प्रशासन को भी आइना दिखा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेटबैक में हुए निर्माणों को किसी भी कीमत पर नियमित नहीं किया जा सकता। बरेली में भी ऐसी ही स्थिति कई प्रमुख इलाकों में बनी हुई है। हालांकि नगर निगम और बीडीए ने तमाम जगहों पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाकर ध्वस्तीकरण किया है।</p>
<p>शहर के बीचो-बीच नावल्टी प्लाजा के सामने पहलवान साहब की मजार के आसपास का क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां नगर निगम की बेशकीमती जमीन पर अवैध तरीके से तमाम दुकानें बनी हैं। इसके अलावा भी शहर के कई प्रमुख इलाकों में अवैध अतिक्रमण कर पक्के निर्माण करा लिए गए हैं। पीलीभीत रोड पर कई होटल मालिकों ने अवैध निर्माण करा रखा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहां भी कड़े कदम उठाने की दरकार है।</p>
<p> नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य का कहना है कि शहरी सीमा में लगातार अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश प्राधिकरणों को लेकर है। इधर, बीडीए वीसी डा. मनिकंडन.ए का कहना है कि अवैध निर्माण को लेकर प्राधिकार लगातार कार्रवाई कर रहा है। लोगों को सचेत किया गया है निर्माण कराने से पहले बीडीए से नक्शा अवश्य पास करा लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/578283/supreme-court-s-warning-sparks-turmoil--those-building-on-government-land-hold-their-breath</link>
                <guid>https://www.amritvichar.com/article/578283/supreme-court-s-warning-sparks-turmoil--those-building-on-government-land-hold-their-breath</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 14:02:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/uit.jpg"                         length="319572"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Monis Khan]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        