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                <title>संकट - Amrit Vichar</title>
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                <description>संकट RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पर्यटन पर भी पड़ा गहरा असर, रोजगार पर संकट     </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हिमालयी पर्यटन नगरी नैनीताल में बुधवार को घटित नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की वीभत्स घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी मोहम्मद उस्मान के विरुद्ध जहां आम जनता का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है, वहीं इसका व्यापक असर नैनीताल के पर्यटन व्यवसाय पर भी देखने को मिल रहा है।</p>
<p>घटना के विरोध में गुरुवार को शहर पूरी तरह बंद रहा। मुख्य बाजारों की दुकानें, माल रोड, होटल, रेस्टोरेंट, और लोकल व्यवसायों ने स्वतः ही दुकानों के शटर गिरा दिए। शहर में सन्नाटा पसरा रहा, जो आम दिनों में सैलानियों से गुलजार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536170/there-was-a-deep-impact-on-tourism-also-on-employment"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/23762486_pick-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हिमालयी पर्यटन नगरी नैनीताल में बुधवार को घटित नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की वीभत्स घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी मोहम्मद उस्मान के विरुद्ध जहां आम जनता का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है, वहीं इसका व्यापक असर नैनीताल के पर्यटन व्यवसाय पर भी देखने को मिल रहा है।</p>
<p>घटना के विरोध में गुरुवार को शहर पूरी तरह बंद रहा। मुख्य बाजारों की दुकानें, माल रोड, होटल, रेस्टोरेंट, और लोकल व्यवसायों ने स्वतः ही दुकानों के शटर गिरा दिए। शहर में सन्नाटा पसरा रहा, जो आम दिनों में सैलानियों से गुलजार रहता है। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाने की मांग करते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की अपील की है।</p>
<p><strong>पर्यटक लौटने लगे, पार्किंग स्थल खाली</strong><br />घटना के बाद नैनीताल आने वाले पर्यटक भय और असुरक्षा के कारण वापस लौटने लगे हैं। शहर के सभी प्रमुख पार्किंग स्थल, टैक्सी स्टैंड, फ्लैट्स और कैविन रोड लगभग खाली हो गए हैं। होटल रजिस्ट्रेशन में गिरावट आई है और कई बुकिंग्स भी कैंसिल कर दी गईं। नाव चालक, घोड़े वाले, फोटोग्राफर और टूर गाइड सभी पूरे दिन खाली बैठे रहे।</p>
<p><strong>प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा, जनता को न्याय का आश्वासन</strong><br />शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि आरोपी को सख्त सजा दिलाने के लिए सभी कानूनी प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जाएंगी।</p>
<p><strong>सामाजिक संगठनों की मांग-बेटियों के लिए सुरक्षित नैनीताल</strong><br />महिला संगठनों, नागरिक मंचों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में कहा कि अब वक्त आ गया है कि पर्यटक नगरी को सिर्फ सुंदरता से नहीं, बल्कि सुरक्षा और संवेदनशीलता से भी सजाया जाए। प्रशासन से मांग की गई है कि ऐसे अपराधियों को चिह्नित कर हमेशा के लिए शहर से बाहर किया जाए।<br /><br /></p>
<p><strong>आरोपी को नोटिस, अवैध अतिक्रमण पर भी प्रशासन सख्त</strong><br /><br />दुष्कर्म की घटना के बाद नगर पालिका परिषद, नैनीताल ने आरोपी मोहम्मद उस्मान को अवैध अतिक्रमण हटाने का नोटिस थमाया है। संयुक्त निरीक्षण के दौरान पाया गया कि आरोपी द्वारा पालिका एवं वन विभाग की भूमि पर कब्जा किया गया है, जो उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 के तहत दंडनीय अपराध है। नोटिस में तीन दिन के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।</p>
<p><br /><strong>क्या है नोटिस में</strong></p>
<p>नगर पालिका द्वारा आरोपी उस्मान को जारी नोटिस में कहा गया है कि 1 मई 2025 को नगरपालिका, पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग एवं जिला विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मोहम्मद उस्मान द्वारा पालिका एवं वन विभाग की भूमि पर अवैध निर्माण/कब्जा किया गया है। यह कार्य उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 के अंतर्गत नियमों का उल्लंघन है। नोटिस में आरोपी को तीन दिनों के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने अथवा अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। अन्यथा की दशा में नियमानुसार कानूनी एवं दण्डनीय कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 11:33:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संकट: बच्चे होली खेलेंगे या परीक्षा देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार:</strong> स्कूली बच्चों के सामने एक संकट खड़ा हो गया है। दरअसल सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो गईं हैं। 15 मार्च को सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा का हिंदी का पेपर है। इस दिन कुमाऊं में होली मनाई जा रही है। बच्चों के सामने संकट आ खड़ा हुआ है वह होली खेलेंगे या फिर परीक्षा देंगे।<br />दीवाली के बाद होली की तिथि भी इस बार दो दिन हो गई है।</p>
<p>पूरे देश में अधिकांश जगह होली 14 मार्च को मनाई जा रही है लेकिन कुमाऊं अंचल में धर्म के जानकारों ने तय किया है कि होली को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/527006/crisis-children-will-play-holi-or-give-exams"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/6cab829f-be3d-4688-b575-264ead7d9691.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार:</strong> स्कूली बच्चों के सामने एक संकट खड़ा हो गया है। दरअसल सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो गईं हैं। 15 मार्च को सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा का हिंदी का पेपर है। इस दिन कुमाऊं में होली मनाई जा रही है। बच्चों के सामने संकट आ खड़ा हुआ है वह होली खेलेंगे या फिर परीक्षा देंगे।<br />दीवाली के बाद होली की तिथि भी इस बार दो दिन हो गई है।</p>
<p>पूरे देश में अधिकांश जगह होली 14 मार्च को मनाई जा रही है लेकिन कुमाऊं अंचल में धर्म के जानकारों ने तय किया है कि होली को 15 मार्च के दिन मनाया जाएगा। कुमाऊं अंचल में पर्वतीय लोग इस दिन रंग खेलेंगे। हालांकि होली का राष्ट्रीय अवकाश 14 मार्च को ही है। अब संकट यह है कि सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा 15 मार्च को पड़ रही है। इस दिन सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा के हिंदी विषय का पेपर होगा। बच्चों के सामने संकट यह खड़ा हो गया है कि वह परीक्षा देंगे या फिर होली खेलेंगे। परीक्षा का समय सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक है। होली खेलने का समय भी यही होता है। शहर में होली का माहौल होगा और बच्चों को परीक्षा केंद्र जाना होगा। <br /><br /><strong>बच्चों को संभालकर लाएं परीक्षा केंद्र: सिटी कोर्डिनेटर</strong><br />हल्द्वानी। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा 15 मार्च को होने से बच्चों के साथ ही अभिभावकों की दिक्कतें भी बढ़ गईं हैं। सीबीएसई की सिटी कोर्डिनेटर मंजू जोशी ने कहा कि केवल कुमाऊं में ही 15 मार्च को होली मनाई जा रही है। जबकि देशभर में सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। अभिभावकों से इस दिन बच्चों को परीक्षा केंद्रों में सतर्कता से लाने-ले जाने के लिए कहा गया है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 10:46:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देहरादून: उत्तराखंड: स्टेट डाटा सेंटर पर साइबर हमले का असर, ई-डीपीआर योजना पर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="flex-shrink-0 flex flex-col relative items-end">
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<p><strong>देहरादून, अमृत विचार।</strong> उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की ई-डीपीआर योजना पर हाल ही में हुए साइबर हमले का गंभीर प्रभाव पड़ा है। इस हमले में राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) द्वारा ई-डीपीआर के लिए की गई सभी तैयारियां और फीडबैक गायब हो गए हैं।</p>
<p>कई प्रयासों के बावजूद, इन महत्वपूर्ण जानकारियों को पुनः प्राप्त नहीं किया जा सका, जिससे एनआईसी और लोनिवि के अधिकारियों में चिंता का माहौल है। ई-डीपीआर योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक नया पोर्टल तैयार किया जा रहा था, जिसमें लोनिवि और अन्य विभागों के सुझावों को शामिल किया गया था।</p></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/500625/impact-of-cyber-attack-on-dehradun-uttarakhand-state-data-centre"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/साइबर-सिक्योरिटी-असिसटेंट.jpg" alt=""></a><br /><div class="flex-shrink-0 flex flex-col relative items-end">
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<div class="markdown prose w-full break-words dark:prose-invert light">
<p><strong>देहरादून, अमृत विचार।</strong> उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की ई-डीपीआर योजना पर हाल ही में हुए साइबर हमले का गंभीर प्रभाव पड़ा है। इस हमले में राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) द्वारा ई-डीपीआर के लिए की गई सभी तैयारियां और फीडबैक गायब हो गए हैं।</p>
<p>कई प्रयासों के बावजूद, इन महत्वपूर्ण जानकारियों को पुनः प्राप्त नहीं किया जा सका, जिससे एनआईसी और लोनिवि के अधिकारियों में चिंता का माहौल है। ई-डीपीआर योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक नया पोर्टल तैयार किया जा रहा था, जिसमें लोनिवि और अन्य विभागों के सुझावों को शामिल किया गया था।</p>
<p>जब पोर्टल के लिए बदलाव किए जा रहे थे, तभी अचानक वायरस के हमले ने दस्तक दी। इसके चलते, ई-डीपीआर के लिए किए गए महत्वपूर्ण सुधार गायब हो गए हैं। फिलहाल, केवल पुराना वर्जन ही रिस्टोर किया जा सका है, जबकि नवीनतम करेक्शन वर्जन खो गया है।</p>
<p>डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया</p>
<p>लोक निर्माण विभाग में 54 डिवीजन हैं, जिनमें हर साल औसतन 5,400 से अधिक डीपीआर तैयार होती हैं। यह प्रक्रिया अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक जाती है, और अंततः शासन के सचिव के पास फाइल भेजी जाती है। इस प्रक्रिया में समय और कागजी कार्रवाई की आवश्यकता होती है।</p>
<p>ई-डीपीआर व्यवस्था को सिंचाई विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में भी लागू करने का आदेश दिया गया था, जिसे 16 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। ई-डीपीआर से कार्य में तेजी आएगी, पारदर्शिता बढ़ेगी, और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।</p>
<p>हालांकि, हालिया साइबर हमले के कारण इस योजना में बाधा आई है, लेकिन अधिकारियों को उम्मीद है कि इसे जल्द ही पुनर्स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>— दीपक यादव, विभागाध्यक्ष लोनिवि</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://www.amritvichar.com/article/500620/dead-body-of-a-youth-found-disguised-as-a-mussoorie#gsc.tab=0">मसूरी: महिला के वेश में मिला युवक का शव... इस तरह की मौत का प्रदेश में दूसरा मामला</a></p>
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</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>देहरादून</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/500625/impact-of-cyber-attack-on-dehradun-uttarakhand-state-data-centre</link>
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                <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 12:30:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: दून से आपूर्ति रुकी, बेस अस्पताल में रेबीज वैक्सीन का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> शहर के एकमात्र सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है, लेकिन इन दिनों अस्पताल में वैक्सीन खत्म हो गई। मरीजों को बाहर से वैक्सीन खरीद कर लानी पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार देहरादून से ही वैक्सीन की आपूर्ति रुकी हुई है।</p>
<p>बीते सोमवार को अस्पताल में रेबीज वैक्सीन की 12 वायल मौजूद थीं। जिनसे 48 लोगों को टीके लगाये गये। इसके बाद वैक्सीन खत्म हो गई। मरीजों को बताया गया कि यदि उन्हें वैक्सीन लगानी है तो बाहर से खरीदकर लानी पड़ेगी। इस पर मजबूरी में मरीजों को मेडिकल स्टोरों से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/486027/supply-stopped-from-haldwani-doon-rabies-vaccine-crisis-in-base"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-08/capture31.png" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> शहर के एकमात्र सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है, लेकिन इन दिनों अस्पताल में वैक्सीन खत्म हो गई। मरीजों को बाहर से वैक्सीन खरीद कर लानी पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार देहरादून से ही वैक्सीन की आपूर्ति रुकी हुई है।</p>
<p>बीते सोमवार को अस्पताल में रेबीज वैक्सीन की 12 वायल मौजूद थीं। जिनसे 48 लोगों को टीके लगाये गये। इसके बाद वैक्सीन खत्म हो गई। मरीजों को बताया गया कि यदि उन्हें वैक्सीन लगानी है तो बाहर से खरीदकर लानी पड़ेगी। इस पर मजबूरी में मरीजों को मेडिकल स्टोरों से 400 रुपये में वैक्सीन खरीदकर लानी पड़ी।</p>
<p>अस्पताल में एक दिन में 70 से 90 लोग वैक्सीन लगाने के लिए आते हैं। अस्पताल प्रशासन ने स्थानीय स्तर से रेबीज वैक्सीन की खरीद की और 50 वायल मंगाए। मौजूदा स्टॉक अगले दो दिनों तक चलेगा। इसके बाद फिर से वैक्सीन मंगानी पड़ेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार देहरादून स्थित स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय से ही वैक्सीन की आपूर्ति ठप है। वैक्सीन मंगाने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।</p>
<p>इधर, डीएम वंदना सिंह से अनुमति लेने के बाद अस्पताल प्रशासन बाजार से रेबीज वैक्सीन खरीद रहा है। लेकिन धन की कमी होने के कारण एक बार में कम स्टॉक ही मंगाया जा रहा है। बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. केके पांडे ने बताया कि मरीजों को परेशान न हो, इसके लिए बाहर से रेबीज वैक्सीन खरीद कर लगाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Aug 2024 13:42:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी-देहरादून हाईवे पर बना पुल भी संकट, दोनों पिलर क्षतिग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>भारी बारिश के चलते कहीं सड़के बंद हैं तो कहीं पुल खतरे में हैं।  रविवार को हल्द्वानी-देहरादून स्टेट हाईवे पर चकलुवा के पास बने पुल को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है और पुल कभी भी टूट सकता है। पिछले तीन दिनों से पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश के चलते नाले में उफान है इस कारण पानी के तेज बहाव से पुल के दोनों पिलर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में यह पुल कभी भी ढह सकता है।</p>
<p>शनिवार को रामनगर -भतरौंजखान मार्ग पर मोहान स्थित पन्याली नाले में आए तेज बहाव के कारण इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/478880/the-bridge-built-on-haldwani-dehradun-highway-is-also-in-trouble"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/capture7.png" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>भारी बारिश के चलते कहीं सड़के बंद हैं तो कहीं पुल खतरे में हैं।  रविवार को हल्द्वानी-देहरादून स्टेट हाईवे पर चकलुवा के पास बने पुल को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है और पुल कभी भी टूट सकता है। पिछले तीन दिनों से पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश के चलते नाले में उफान है इस कारण पानी के तेज बहाव से पुल के दोनों पिलर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में यह पुल कभी भी ढह सकता है।</p>
<p>शनिवार को रामनगर -भतरौंजखान मार्ग पर मोहान स्थित पन्याली नाले में आए तेज बहाव के कारण इस पर बना पुल टूट गया। इससे भतरौंजखान, भिकियासैंण, रानीखेत के लिए आवाजाही बंद हो गई है। राहगीरों को चिमटाखाल, हरड़ा मार्ग से भेजा रहा है।वहीं, पिथौरागढ़ जिले में दारमा घाटी के माइग्रेशन ग्राम बोन को जोड़ने के लिए च्युति गधेरे में बना पुल भी बारिश की भेंट चढ़ गया है। इसके चलते गांव के 30 परिवारों का संपर्क मुख्य सड़क से कट गया है। तीजम और वतन तोक को जोड़ने वाला लकड़ी का पैदल पुल बह गया है। इससे 18 परिवारों का संपर्क कट गया है। उधर, चीन सीमा को जोड़ने वाला कैलाश मार्ग पर स्थित वैली ब्रिज भी खतरे की जद में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 14:39:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: संकट - एसटीएच में हेपेटाइटिस की दवा खत्म, सीएमओ कार्यालय के माध्यम से होती है दवा की आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में हेपेटाइटिस की दवा खत्म हो गई है। सीएमओ कार्यालय का कहना है कि जल्द ही दवा की आपूर्ति करवा दी जाएगी। फिलहाल दवा नहीं होने से मरीज परेशान हैं।</p>
<p>हेपेटाइटिस लीवर से जुड़ी बीमारी है। यह गंभीर बीमारी होती है। जिसमें रोगी की मृत्यु होने का भी खतरा रहता है। हेपेटाइटिस के निशुल्क उपचार के लिए एसटीएच में मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर खोला गया है। यहां रोजाना 15 से 20 मरीज मरीज हेपेटाइटिस के पहुंच रहे हैं। हर माह 50 से 100 नए हेपेटाइटिस के मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं।</p>
<p>शुक्रवार को अस्पताल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/455993/haldwani-crisis-hepatitis-medicine-runs-out-in-sth-medicine"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-04/capture20.png" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में हेपेटाइटिस की दवा खत्म हो गई है। सीएमओ कार्यालय का कहना है कि जल्द ही दवा की आपूर्ति करवा दी जाएगी। फिलहाल दवा नहीं होने से मरीज परेशान हैं।</p>
<p>हेपेटाइटिस लीवर से जुड़ी बीमारी है। यह गंभीर बीमारी होती है। जिसमें रोगी की मृत्यु होने का भी खतरा रहता है। हेपेटाइटिस के निशुल्क उपचार के लिए एसटीएच में मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर खोला गया है। यहां रोजाना 15 से 20 मरीज मरीज हेपेटाइटिस के पहुंच रहे हैं। हर माह 50 से 100 नए हेपेटाइटिस के मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं।</p>
<p>शुक्रवार को अस्पताल में हेपेटाइटिस की दवा खत्म हो गई। यहां आने वाले रोगियों में उत्तर प्रदेश के रोगियों की भी बड़ी संख्या है। एसटीएच में दवा की आपूर्ति सीएमओ कार्यालय नैनीताल से होती है तथा मुख्य चिकित्साधीक्षक (सीएमओ) कार्यालय में दवा की आपूर्ति देहरादून से होती है।</p>
<p>देहरादून में हेपेटाइटिस की दवा केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की ओर से भेजी जाती है। हर माह दवा की आपूर्ति के लिए एसटीएच में बने सेंटर से मांग पत्र सीएमओ कार्यालय को भेजा जाता है। इस बार भी मांग पत्र सीएमओ कार्यालय को भेजा गया है लेकिन सीएमओ कार्यालय में देहरादून से दवा नहीं आने की वजह से दवा की आपूर्ति शुक्रवार सुबह तक नहीं हो पाई। फिलहाल अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों को बिना दवा के ही लौटना पड़ा है। सीएमओ कार्यालय से जानकारी मिली है कि हेपेटाइटिस की दवाओं की आपूर्ति जल्द हो जाएगी।<br /><br /><strong>निजी अस्पतालों में हर माह खर्च होते हैं 40 हजार</strong><br />हल्द्वानी। हेपेटाइटिस का निशुल्क उपचार स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाता है। प्राइवेट अस्पतालों में हेपेटाइटिस के उपचार के लिए आने वाली दवाओं की कीमत प्रतिमाह 40 हजार रुपये तक पड़ती है। इसका उपचार भी लंबे समय तक चलता है। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल स्टोरों पर हेपेटाइटिस के उपचार में इस्तेमाल होने वाले एक इंजेक्शन की कीमत 15 हजार रुपये तक होती है। एसटीएच में नोडल ऑफिसर डॉ. सुभाष जोशी ने बताया कि हेपेटाइटिस की निशुल्क दवा से मरीजों को काफी राहत पहुंचती है। <br /><br /><strong>टीबी की दवा की आपूर्ति भी होगी जल्द</strong><br />हल्द्वानी। एसटीएच की टीबी की निशुल्क मिलने वाली दवाओं की आपूर्ति बंद हो गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि दवा की आपूर्ति जल्द करवा दी जाएगी। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><br /><em><strong>हेपेटाइटिस की दवा केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग से राज्य में भेजी जाती है। हमने मांग पत्र भेज दिया है। जल्द ही हेपेटाइटिस की दवा आ जाएगी।</strong></em><br /><em><strong>-डॉ. श्वेता भंडारी, सीएमओ, नैनीताल  </strong></em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Apr 2024 13:44:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनीताल: सरकार से बजट मिलने के बावजूद संकट में सिंचाई नहरों का अस्तित्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>गरमपानी, अमृत विचार।</strong> सरकार से बजट मिलने के बावजूद बेतालघाट ब्लॉक की सिंचाई नहरें बदहाल है। महत्वपूर्ण सिंचाई नहरों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने छह करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट अवमुक्त भी कर दिया है बावजूद  आज तक नहरों की मरम्मत का कार्य शुरु नहीं हो सका है। बजट के बावजूद कार्य न होने से किसान मायूस हैं। अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। </p>
<p>बेतालघाट ब्लॉक की करीब 11 महत्वपूर्ण सिंचाई नहरें तीन वर्ष पूर्व आपदा की भेंट चढ़ गई। सिंचाई नहरों के ध्वस्त हो जाने से किसानों को भी भारी नुक्सान उठाना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/437690/despite-getting-budget-from-nainital-government-existence-of-irrigation-canals"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-01/rdescontroller.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>गरमपानी, अमृत विचार।</strong> सरकार से बजट मिलने के बावजूद बेतालघाट ब्लॉक की सिंचाई नहरें बदहाल है। महत्वपूर्ण सिंचाई नहरों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने छह करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट अवमुक्त भी कर दिया है बावजूद  आज तक नहरों की मरम्मत का कार्य शुरु नहीं हो सका है। बजट के बावजूद कार्य न होने से किसान मायूस हैं। अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। </p>
<p>बेतालघाट ब्लॉक की करीब 11 महत्वपूर्ण सिंचाई नहरें तीन वर्ष पूर्व आपदा की भेंट चढ़ गई। सिंचाई नहरों के ध्वस्त हो जाने से किसानों को भी भारी नुक्सान उठाना पड़ा। लगातार मांग उठने के बाद राज्य सरकार ने गांवों में तीन वर्ष से ध्वस्त पड़ी सिंचाई नहरों की मरम्मत को छह करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया।</p>
<p>बीते दिनों सिंचाई विभाग ने निविदाएं भी आमंत्रित कर दी। उम्मीद जगी की जल्द कार्य शुरु हो सकेंगे पर फिर टेंडर निरस्त कर दिए गए। सरकार से बजट मिलने के बावजूद सिंचाई नहरों को दुरुस्त किए जाने का कार्य न होने से किसान मायूस हो चुके हैं। पहले ही बारिश न होने से खेतीबाड़ी प्रभावित हो चुकी है और अब सिंचाई नहरों का कार्य न होने से किसानों के ज़ख्मों में नमक छिड़कने का कार्य किया जा रहा है।</p>
<p>भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिलीप सिंह बोहरा ने सिंचाई नहरों का निर्माण शुरु न होने पर गहरी नाराजगी जताई है। साफ कहा है कि बजट उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कार्य शुरू न कर किसानों के हितों से खिलवाड़ किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jan 2024 17:04:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अल्मोड़ृा: पर्याप्त बारिश नहीं होने से रबी की फसल पर संकट गहराया </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अल्मोड़ा, अमृत विचार।</strong> लगातार बदल रहे मौसम का असर अब पर्वतीय जिलों की खेती पर भी दिखने लगा है। अक्टूबर में वर्षा नहीं होने तथा नवंबर में आंशिक तौर पर कुछ ही स्थानों पर वर्षा होने से रबी की फसल पर असर पड़ा है। खेतों में पर्याप्त तौर पर गेहूं, जौ व अन्य फसलें समान रूप से नहीं उग पाई हैं। इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ने की संभावना है। मौसम के इस बदले मिजाज और खेती पर पड़ रहे विपरीत असर के कारण अब किसानों के माथे पर पसीना दिखने लगा है। </p>
<p>अल्मोड़ा जिले में 22,302 हेक्टेयर क्षेत्रफल में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/424881/almora-crisis-on-rabi-crop-deepens-due-to-lack-of"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/gk-tricks-rabi-and-kharif-crops.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अल्मोड़ा, अमृत विचार।</strong> लगातार बदल रहे मौसम का असर अब पर्वतीय जिलों की खेती पर भी दिखने लगा है। अक्टूबर में वर्षा नहीं होने तथा नवंबर में आंशिक तौर पर कुछ ही स्थानों पर वर्षा होने से रबी की फसल पर असर पड़ा है। खेतों में पर्याप्त तौर पर गेहूं, जौ व अन्य फसलें समान रूप से नहीं उग पाई हैं। इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ने की संभावना है। मौसम के इस बदले मिजाज और खेती पर पड़ रहे विपरीत असर के कारण अब किसानों के माथे पर पसीना दिखने लगा है। </p>
<p>अल्मोड़ा जिले में 22,302 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी फसल की बुआई की गई है। नवंबर में गेहूं, जौ आदि की बुआई के बाद तो जिले के कुछ ही क्षेत्रों में आंशिक तौर पर वर्षा हुई। इससे कुछ नमी वाले इलाकों में गेहूं उगा तथा अन्य क्षेत्रों में गेहूं व जौ व अन्य फसलें आधी अधूरी ही उग पाई। वर्षा नहीं होने से गेहूं व जौ की पौध पीली पड़ने लगी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार रबी की फसल को बोआई के बाद दिसंबर तक कम से कम 40 मिलीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है। मगर इस बार ऐसा नहीं हो पाया।</p>
<p>इस बार नवंबर माह में अल्मोड़ा व इसके आसपास के कुछ क्षेत्रों में 16 मिलीमीटर वर्षा हो पाई। जिले में रबी की फसल के कुल कृषि क्षेत्र का सिर्फ 10 प्रतिशत ही सिंचाई सुविधा से जुड़ा है, बाकि 90 प्रतिशत क्षेत्र वर्षा के जल पर ही निर्भर है। पूरे रबी सीजन में इस फसल को कम से कम 300 मिलीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है, जो अब तक मात्र 16 मिलीमीटर ही हो पाई है। वर्षा नहीं होने से केवल फसल पर ही असर नहीं पड़ रहा बल्कि काश्तकारों की ओर से बोई गई सब्जियों पर भी पड़ा है। काश्तकार बोई गई सब्जियों को सिंचाई के माध्यम से बचाने में लगे हैं।</p>
<p>बारिश ना होने का सीधा असर उत्पादन पर भी पड़ा है। मुख्य कृषि अधिकारी आनंद गोस्वामी का कहना है कि रबी की फसल की बोआई के दौरान जिन क्षेत्रों में नमी थी। उन क्षेत्रों में रबी की फसल समान तौर पर उगी। जिन क्षेत्रों में जीवाश्म खाद का उपयोग कम होता है वहां नमी कम रहने से फसल समान रूप से नहीं उग पाई। बुआई के बाद आवश्यकता अनुसार वर्षा नहीं होने से कम नमी वाले क्षेत्रों में चार प्रतिशत फसल पर असर पड़ा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>अल्मोड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Dec 2023 17:56:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: बॉटल नेक पर संकट, संकरी सड़क पर अव्यवस्था का संक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> भारी यातायात का बोझ झेलने वाली बेहद संकरी मंगलपड़ाव से लेकर बेस चौराहे तक की सड़क (बॉटल नेक) से अव्यवस्था का संक्रमण खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को भी बॉटल नेक का यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। सुबह से शुरू हुई जद्दोजहद में मुसाफिरों का पूरा दिन गुजर गया और पुलिस की सुस्ती पर ऑटो व टुकटुक चालकों की मनमानी हावी रही। </p>
<p>बरेली रोड और रामपुर रोड की ओर जाने वालों को बॉटल नेक से होकर गुजरना पड़ता है, जिसमें शहरियों के साथ कई राज्यों से आने वाले पर्यटक भी शामिल हैं। इस सड़क</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/419072/crisis-at-haldwani-bottle-neck-infection-of-chaos-on-narrow"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-04/ट्रैफिक-जाम-की-बढ़ती-समस्या-1.png" alt=""></a><br /><p><strong> हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> भारी यातायात का बोझ झेलने वाली बेहद संकरी मंगलपड़ाव से लेकर बेस चौराहे तक की सड़क (बॉटल नेक) से अव्यवस्था का संक्रमण खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को भी बॉटल नेक का यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। सुबह से शुरू हुई जद्दोजहद में मुसाफिरों का पूरा दिन गुजर गया और पुलिस की सुस्ती पर ऑटो व टुकटुक चालकों की मनमानी हावी रही। </p>
<p>बरेली रोड और रामपुर रोड की ओर जाने वालों को बॉटल नेक से होकर गुजरना पड़ता है, जिसमें शहरियों के साथ कई राज्यों से आने वाले पर्यटक भी शामिल हैं। इस सड़क पर दो तरफा अस्थाई अतिक्रमण है। उस पर बाहरी राज्य से आने वाले पर्यटक अपने चार पहिया वाहन दूसरे वाहनों के पीछे रखने के बजाय ओवरटेक कर आगे निकलना चाहते हैं जिससे जाम लगता है।</p>
<p>मंगलपड़ाव से बेस चौराहे तक टुकटुक और ऑटो पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं, लेकिन शुक्रवार को पुलिस की मौजूदगी में चालकों ने जमकर मनमानी की। सड़क से सटी दुकानों आने वाले अपने वाहन सड़क पर खड़े करते हैं, फिर वह दो पहिया हो या चार पहिया। इससे सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है और यातायात ठहर जाता।</p>
<p>इन्हीं अव्यवस्थाओं के बीच सुबह से यातायात का जो रेंगना शुरू हुआ तो वह पूरे दिन जारी रहा। एसपी सिटी हरबंस सिंह का कहना है कि यातायात को लेकर कोतवाली पुलिस को सख्त चेतावनी दी गई है। यदि स्थिति नहीं सुधरती तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। </p>
<p><br /><strong>रोडवेज की बसें जाम की बड़ी वजह</strong><br />हल्द्वानी : रोडवेज की बसें यातायात में बड़ी बाधक हैं। कुछ माह पूर्व पुलिस ने इन बसों के सड़क पर रुकने पर प्रतिबंध लगा दिया था और सड़क पर खड़ी हालत में मिलने वाली बसों के ताबड़तोड़ चालान किए गए थे। कुछ समय तो सब ठीक था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई थमते ही बस चालकों ने मनमानी शुरू कर दी। मंगलपड़ाव, सिंधी चौराहा, कालाढूंगी और रोडवेज गेट के बाहर ही बस चालक सवारियां उतारते हैं, जो जाम का कारण बनाता है। </p>
<p><br /><strong>पैदल सड़क पर, फुटपाथ पर कब्जा</strong><br />हल्द्वानी : इस सड़क पर कहीं फुटपाथ नजर आता है तो अग्रसेन चौक से लेकर कालाढूंगी तिराहे तक महिला अस्पताल की ओर, लेकिन अब फुटपाथ पर कब्जा हो चुका है। अग्रसेन चौक के बाद स्थाई दुकानदारों ने फुटपाथ पर कब्जा किया है तो महिला अस्पताल के बाहर फल, बीज और अखरोट बेचने वालों का कब्जा है। इसके चलते पैदल चलने वालों को यातायात के साथ सड़क पर चलना पड़ता है, जो कभी भी हादसे का सबब बन सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Nov 2023 18:47:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरेली: 72 हजार किसानों की सम्मान निधि पर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार :</strong> जिले के 72 हजार किसानों को सम्मान निधि की 15वीं किस्त से वंचित रहना पड़ सकता है। उप कृषि निदेशक अभिनंदन सिंह ने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में जिले में 418651 लाभार्थियों के ई-केवाईसी और आधार सीडिंग अनिवार्य की गई है। इनको 15वीं किस्त जारी करने के लिए गांव-गांव में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।</p>
<p>जिले की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक, रोजगार सेवकों के अलावा कृषि विभाग के कर्मचारियों को लगाया गया है। उसके बाद भी करीब 72 हजार किसानों ने ई-केवाईसी और खातों की एनपीसीआई नहीं कराई है। यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/417043/crisis-on-samman-nidhi-of-bareilly-72-thousand-farmers"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-11/19_10_2022-pm_23150260.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार :</strong> जिले के 72 हजार किसानों को सम्मान निधि की 15वीं किस्त से वंचित रहना पड़ सकता है। उप कृषि निदेशक अभिनंदन सिंह ने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में जिले में 418651 लाभार्थियों के ई-केवाईसी और आधार सीडिंग अनिवार्य की गई है। इनको 15वीं किस्त जारी करने के लिए गांव-गांव में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।</p>
<p>जिले की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक, रोजगार सेवकों के अलावा कृषि विभाग के कर्मचारियों को लगाया गया है। उसके बाद भी करीब 72 हजार किसानों ने ई-केवाईसी और खातों की एनपीसीआई नहीं कराई है। यह किसान सम्मान निधि से वंचित रह सकते हैं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/417042/ott-world-seen-in-bareilly-freshers-party-hrithik-and-sundhara">बरेली: फ्रेशर्स पार्टी में दिखी ओटीटी की दुनिया, ऋतिक और सुंधरा बने मिस्टर और मिस फ्रेशर</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 00:00:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Om Parkash chaubey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: हेपेटाइटिस की दवाओं का संकट, अधर में फंसे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस की दवाओं का संकट हो गया है। जिस कारण मरीज बाहर से महंगे दाम में दवा खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। दवाएं महंगी होने से गरीब मरीजों का इलाज अधर में फंस गया है।</p>
<p>सरकार के नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत हेपेटाइटिस की जांच और इलाज निशुल्क किया जाता है। इसके लिए जनपद नैनीताल में दो सेंटर बनाए गये हैं। इनमें एक एसटीएच तथा दूसरा बीडी पांडे अस्पताल है।</p>
<p>दोनों ही सेंटरों में हेपेटाइटिस ए, बी और सी के मरीजों की जांच से लेकर दवाएं निशुल्क मुहैया कराने जाने की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/413064/haldwani-hepatitis-patients-stuck-in-limbo-due-to-medicine-crisis"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-10/polotno-44-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस की दवाओं का संकट हो गया है। जिस कारण मरीज बाहर से महंगे दाम में दवा खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। दवाएं महंगी होने से गरीब मरीजों का इलाज अधर में फंस गया है।</p>
<p>सरकार के नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत हेपेटाइटिस की जांच और इलाज निशुल्क किया जाता है। इसके लिए जनपद नैनीताल में दो सेंटर बनाए गये हैं। इनमें एक एसटीएच तथा दूसरा बीडी पांडे अस्पताल है।</p>
<p>दोनों ही सेंटरों में हेपेटाइटिस ए, बी और सी के मरीजों की जांच से लेकर दवाएं निशुल्क मुहैया कराने जाने की व्यवस्था है। लेकिन पिछले डेढ़ माह से हेपेटाइटिस बी और सी की कुछ दवाओं की किल्लत बनी हुई है। जिसके चलते मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।</p>
<p>मरीज दवाओं के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं भी दवा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उन्हें बाहर मोटी रकम चुकाकर दवा खरीदनी पड़ रही है। इधर, मामले में एसटीएच के फार्मेसी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दवाओं के लिए निदेशालय को डिमांड भेजी गई है। लेकिन अभी तक दवा उपलब्ध नहीं हो पाई है। दवा आते ही तुरंत बंटनी शुरू हो जायेगी।</p>
<p><strong>एसटीएच में बाहरी मरीजों की संख्या अधिक</strong><br />हेपेटाइटिस की दवा के लिए एसटीएच में रोजाना मरीज आते हैं। इनमें बाहरी जनपदों व राज्यों के मरीजों की संख्या सबसे अधिक होती है। कुमाऊं का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के कारण यहां रोजाना सैकड़ों मरीजों को निशुल्क दवा दी जाती है। यहां कुमाऊं के अलावा रुद्रपुर, किच्छा, सितारगंज, बाजपुर, केलाखेड़ा, काशीपुर, जसपुर, बहेड़ी, बिलासपुर और मुरादाबाद तक से मरीज दवा लेने पहुंचते हैं।</p>
<p><strong>रुद्रपुर जिला अस्पताल में भी दवा खत्म</strong><br />हेपेटाइटिस की दवाओं का संकट जनपद नैनीताल ही नहीं, ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में भी हो गया है। यहां जिला अस्पताल में पिछले एक माह से हेपेटाइटिस की दवा खत्म है। हर दिन सैकड़ों मरीज मायूस होकर अस्पताल से लौट रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने दवा केंद्र के बाहर सूचना चस्पा कर दी है। जिसमें लिखा है कि 'काले पीलिया की दवाई वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।' अस्पताल के पीएमएस डॉ. राकेश सिन्हा के अनुसार दवा के लिए डिमांड भेजी गई है।</p>
<p><br /><em><strong>हेपेटाइटिस दवा केंद्र के माध्यम से देहरादून आती है। अभी तक किसी भी अस्पताल से डिमांड नहीं आई है। डिमांड आने पर महानिदेशालय से दवा उपलब्ध करा दी जाएगी।</strong></em><br /><em><strong>- डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमओ नैनीताल</strong></em></p>
<p><br /><em><strong>हेपेटाइटिस की दवाओं की कोई किल्लत नहीं है। अस्पतालों से कोई डिमांड आई है। डिमांड आते ही दवाएं उपलब्ध करा दी जायेंगी।</strong></em><br /><em><strong>- डॉ. राजेश ढकरियाल, जिला क्षय रोग अधिकारी नैनीताल</strong></em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2023 13:18:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: प्राइवेट टैंकरों के हड़ताल पर होने से शहर के कई क्षेत्रों में छाया पानी का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[हरिपुर रतनसिंह, दमुवाढूंगा, सांई विहार, कुसुमखेड़ा, गौला गेट और भरतपुर में विभाग के 6 टैंकरों ने पांच चक्कर लगाकर की पानी की आपूर्ति 
बिजली विभाग से कटौती की सूचना न मिलने से जलापूर्ति में होती है कठिनाई- रवींद्र कुमार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/400142/haldwani-private-tankers-are-on-strike-water-crisis-in-many"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-09/strike1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>प्राइवेट टैंकरों के हड़ताल में जाने से शनिवार को शहर के कई क्षेत्रों में लोगों को पानी नहीं मिला। इन दिनों 10-12 प्राइवेट टैंकरों से प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की जा रही थी। शुक्रवार से प्राइवेट टैंकरों के हड़ताल में जाने से चौफुला, बिठौरिया, ऊंचापुल, दमुवाढूंगा क्षेत्रों में पानी न मिलने पर लोग परेशान रहे।</p>
<p>हालांकि जल संस्थान के सहायक अभियंता रवींद्र कुमार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में विभागीय टैंकरों से पानी की आपूर्ति की गई। लेकिन पर्याप्त टैंकर न होने से विभाग को पानी की आपूर्ति करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि रामपुर रोड के हरिपुर रतनसिंह, दमुवाढूंगा, सांई विहार, कुसुमखेड़ा, गौला गेट और भरतपुर में विभाग के 6 टैंकरों ने पांच चक्कर लगाकर पानी की आपूर्ति की।</p>
<p>रवींद्र ने बताया कि चौफुला में पेयजल लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है इस कारण वहां लोगों को पानी नहीं मिल पाया। बताया कि प्राइवेट टैंकरों के न होने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है।   वहीं दूसरी तरफ कई घंटों तक हो रही बिजली कटौती के कारण ट्यूबवेलों से पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि बिजली विभाग से कटौती की कोई सूचना नहीं मिलती इस कारण विभाग को पानी की आपूर्ति करने में कठिनाई आती है। बिजली आपूर्ति सुचारू होने के बाद ट्यूबवेल को अतिरिक्त चलाकर लोगों को पानी दिया जाता है।</p>
<p><br />जज फार्म का ट्यूबवेल शनिवार को ठीक कर लिया गया। पेयजल आपूर्ति सुचारू होने पर लगभग 4 हजार की आबादी को मिली है। इधर विकास एवं पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष विशंभर कांडपाल ने ट्यूबवेल के लिए करीब 4.60 लाख रुपये की लागत से केबिल मुहैया कराने के लिए मेयर जोगेंद्र रौतेला का आभार जताया है। साथ ही नया पंप व मोटर लगाने तथा ट्यूबवेल से जलापूर्ति सुचारू करने पर जल संस्थान के अधिकारियों व फील्ड पर काम करने वाले कर्मचारियों की सराहना की है।</p>
<p><br /> विभाग के अधिकारियों ने 25 अगस्त तक पुराना बकाया चुकाने का आश्वासन दिया था लेकिन अगस्त बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इस पर सभी ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया। भुगतान होने पर काम पर वापस लौटेंगे।<em> - बसंत सनवाल, प्राइवेट टैंकर ठेकेदार</em></p>
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<div class="pbwidget-body">
<h6 class="tag_h1 node_title"><span style="color:rgb(224,62,45);background-color:rgb(255,255,255);"><strong>यह भी पढ़ें: हल्द्वानी: हिल डिपो की फाइल शासन में खा रही हिचकोले </strong></span></h6>
</div>
</div>
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<div class="pbwidget-body"> </div>
</div>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/400142/haldwani-private-tankers-are-on-strike-water-crisis-in-many</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 19:13:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shweta Kalakoti]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
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