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                <title>Lucknow High Court - Amrit Vichar</title>
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                <description>Lucknow High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लखनऊ : घाघरा नदी के पुल की दो महीने में होगी मरम्मत, छोटे वाहनों के लिए पंटून पुल, भारी वाहनों का होगा डायवर्जन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार : </strong>घाघरा नदी पर बने संजई पुल की जर्जर हालत के बीच जान जोखिम में डालकर गुजरने वालों के लिए अच्छी खबर है।  राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से कहा कि, दो महीने के भीतर पुल का मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। मानसून से पहले पुल दुरुस्त करने की कोशिश है। छोटे वाहनों के लिए अस्थायी पंटून पुल बनाया जा रहा है। 15 अप्रैल तक आंशिक यातायात सुचारू किया जाएगा। </p>
<p>घाघरा नदी के इस खस्ताहाल पुल से किसी अप्रिय हादसे को टालने की ये कोशिशें हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार सिंह की जनहित याचिका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/578609/lucknow--ghaghra-river-bridge-to-be-repaired-in-two-months--pontoon-bridge-for-small-vehicles--heavy-vehicles-to-be-diverted"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(40)3.png" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार : </strong>घाघरा नदी पर बने संजई पुल की जर्जर हालत के बीच जान जोखिम में डालकर गुजरने वालों के लिए अच्छी खबर है।  राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से कहा कि, दो महीने के भीतर पुल का मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। मानसून से पहले पुल दुरुस्त करने की कोशिश है। छोटे वाहनों के लिए अस्थायी पंटून पुल बनाया जा रहा है। 15 अप्रैल तक आंशिक यातायात सुचारू किया जाएगा। </p>
<p>घाघरा नदी के इस खस्ताहाल पुल से किसी अप्रिय हादसे को टालने की ये कोशिशें हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सामने आ रही हैं। </p>
<p>एडवोकेट आशीष कुमार सिंह ने वक्त रहते पुल की मरम्मत के संबंध में पीआईएल दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने बड़े जनमानस की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई शुरू की और अब इसमें महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। </p>
<p> </p>
<p>हाईकोर्ट ने बहराइच, गोंडा और बाराबंकी के जिलाधिकारी को निर्देशित किया है कि वे अगली सुनवाई से पहले इस प्रकरण की प्रगति के संबंध में शपथ पत्र दाखिल करें। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एवं उसकी कार्यदायी संस्था को भी मरम्मत कार्य की प्रगति रिपोर्ट (Status Report) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। </p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/muskan-dixit-(40)3.png" alt="MUSKAN DIXIT (40)" width="407" height="229"></img></p>
<p>याचिकाकर्ता द्वारा दायर अंतरिम राहत प्रार्थना-पत्र, जिसमें टोल शुल्क को स्थगित करने की मांग की गई है, उस पर भी कोर्ट ने संज्ञान लेकर राज्य एवं अन्य विपक्षी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि मरम्मत कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। मानसून सत्र शुरू होने से पहले काम पूरा करने का प्रयास सुनिश्चित करें। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 25 मई मुकर्रर की है। </p>
<h3><strong>बड़े वाहनों के लिए डायवर्जन </strong></h3>
<p>लखनऊ से घाघरा होकर जाने वाले भारी वाहनों को पुल की मरम्मत होने तक अयोध्या–गोंडा–बहराइच मार्ग के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा। डायवर्जन से लोगों की थोड़ी मुश्किलें जरूर बढ़ेंगी। क्योंकि लखनऊ से संबंधित जिलों की दूरी पहले की अपेक्षा दोगुनी हो सकती है। रोडवेज हो या फिर निजी यातायात वाहन-उनका किराया भी बढ़ने की संभावना है। बहरहाल, पुल की मरम्मत के लिए भारी वाहनों के डायवर्जन के सिवाय प्रशासन के पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। </p>
<h3><strong>बढ़ जाएगी जिम्मेदारी </strong></h3>
<p>चूंकि ये मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है। ऐसे में क्षेत्रीय जनता, व्यापारिक गतिविधियों एवं आवागमन पर इसके प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए सभी पक्षों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>गाजियाबाद</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11 साल काटने के बाद हाईकोर्ट ने किया दोष मुक्त, मानसिक दिव्यांग किशोरी से दुराचार मामले में हुई थी उम्र कैद की सजा, जानें क्या बोले जज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>दुराचार के मामले में 11 वर्ष से जेल में सजा काट रहे दोषी को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस जांच में गंभीर त्रुटियां पाई। कोर्ट ने कहा कि, साक्ष्य की कमी के कारण अभियुक्त को दुराचार के आरोप में दोष सिद्ध करना उचित नहीं है। ये निर्णय न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने निर्मल कुमार की अपील को मंजूर करते हुए पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या जनपद के मवई थाने में वर्ष 2010 रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वादी ने 14 वर्षीय मानसिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/577900/after-11-years--the-high-court-acquitted-him-of-the-charges--he-was-sentenced-to-life-imprisonment-for-molesting-a-mentally-challenged-teenager--find-out-what-the-judge-said"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(13)3.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार: </strong>दुराचार के मामले में 11 वर्ष से जेल में सजा काट रहे दोषी को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस जांच में गंभीर त्रुटियां पाई। कोर्ट ने कहा कि, साक्ष्य की कमी के कारण अभियुक्त को दुराचार के आरोप में दोष सिद्ध करना उचित नहीं है। ये निर्णय न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने निर्मल कुमार की अपील को मंजूर करते हुए पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या जनपद के मवई थाने में वर्ष 2010 रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वादी ने 14 वर्षीय मानसिक दिव्यांग पुत्री के साथ दुराचार का आरोप लगाया था। घटना के तीन दिन बाद पीड़िता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद किशोरी के पिता ने दुराचार के साथ हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2018 में दुराचार के आरोप में दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मृत्यु के कारण की पुष्टि न होने के कारण हत्या के आरोप से बरी कर दिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को खारिज करते हुए कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में मानव वीर्य के सैंपल इस बात के तथ्यात्मक साक्ष्य नहीं बन सके कि वे सैंपल आरोपी के थे, क्योंकि डीएनए टेस्ट या कोई अन्य ठोस जांच नहीं कराई गई थी। इस चूक को कोर्ट ने जांच में गंभीर त्रुटि करार दिया। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों में केवल संदेह या आशंका के आधार पर किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। कोर्ट ने पाया कि साक्ष्य की कमी के कारण मामले में दोष सिद्धि सुरक्षित नहीं कही जा सकती। न्यायालय ने अपीलार्थी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:13:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर लगाया 40 हजार रुपये का हर्जाना, प्रमुख सचिव वन, बागवानी समेत विभाग के अधिकारियों को किया तलब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span>अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने समुचित जवाब न देने और अपने पूर्व के आदेश का अनुपालन न करने पर सख्त नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव वन, प्रमुख वन संरक्षक व डीएफओ लखनऊ को कोर्ट के समक्ष हाजिर होने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार पर 40 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है।</p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जयंत सिंह तोमर की ओर से वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566627/the-high-court-imposed-a-fine-of-%E2%82%B940-000-on-the-state-government-and-summoned-the-principal-secretary-of-forest-and-horticulture-and-other-department-officials"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(62)1.png" alt=""></a><br /><p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">लखनऊ, </span>अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने समुचित जवाब न देने और अपने पूर्व के आदेश का अनुपालन न करने पर सख्त नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव वन, प्रमुख वन संरक्षक व डीएफओ लखनऊ को कोर्ट के समक्ष हाजिर होने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार पर 40 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है।</p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जयंत सिंह तोमर की ओर से वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका में मैंगो बेल्ट में आम के पेड़ों की अवैध कटान का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट ने जनवरी 2014 में ही आदेश पारित कर राज्य सरकार से मामले पर जानकारी मांगी थी। यह जानकारी न आने पर 12 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान ने राज्य सरकार पर 15000 रुपये का हर्जाना लगाया था। याचिका पर पुनः सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि उसके आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं किया गया है। कोर्ट को यह भी नहीं बताया जा सका कि पिछले आदेश में लगाया गया हर्जाना जमा किया गया है अथवा नहीं। वहीं याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा का कहना था कि जनवरी 2014 के आदेश में पेड़ों की जियो टैगिंग और पेड़ों की कटान का विषय उठाया गया था। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि जियो टैगिंग 2018 से हो रही है, लेकिन इस संबंध में लिखित में कोई तथ्य न रखने पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव बागवानी को भी तलब कर लिया है।</span></p>
<h3><strong>हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा, मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी क्या होगी</strong></h3>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के तहत संचालित महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी के भुगतान के संबंध में कोई अधिसूचना जारी की गई है? कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तिथि नियत की है।</span></p>
<p>यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने संदीप सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। याचिका में मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्यरत कृषि श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दिए जाने की मांग की गई है। मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रश्न यह है कि क्या मनरेगा के तहत कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत निर्धारित मजदूरी पाने का अधिकार है। मनरेगा अधिनियम, 2005 की धारा 2(एच) में ही न्यूनतम मजदूरी की परिभाषा दी गई है। जिसके अनुसार राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 की धारा 3 के तहत कृषि मजदूरों के लिए निर्धारित मजदूरी ही लागू होगी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि मनरेगा, अधिनियम, 2005 के अंतर्गत संचालित है, तो उस योजना के तहत कार्यरत श्रमिकों को वही न्यूनतम मजदूरी देय होनी चाहिए, जो राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 की धारा 3 के अंतर्गत संबंधित क्षेत्र के कृषि मजदूरों के लिए निर्धारित की गई है। कोर्ट को यह भी अवगत कराया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों को 230 रुपये प्रतिदिन मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से काफी कम है। कोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि वे कृषि मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी से संबंधित सभी अधिसूचनाएं अगली तिथि पर प्रस्तुत करें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 09:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लॉयर्स टी-20 फाइनल सेट: दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच होगी खिताबी भिड़ंत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> ऑल इंडिया लॉयर्स टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है। खिताबी मुकाबले में दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की टीमें आमने-सामने होंगी। शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने लखनऊ हाईकोर्ट को छह विकेट से जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को 39 रन से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। टूर्नामेंट के को-ऑर्डिनेटर और अधिवक्ता वैभव जैन ने बताया कि सेमीफाइनल मुकाबलों से पूर्व रायबरेली सदर की विधायक अदिति सिंह ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और टॉस कराया।</p>
<p>डॉ. अखिलेश दास स्टेडियम में खेले गए पहले सेमीफाइनल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/565264/lawyers-t20-final-set--delhi-high-court-and-supreme-court-to-clash-for-the-title"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(44)12.png" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार:</strong> ऑल इंडिया लॉयर्स टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है। खिताबी मुकाबले में दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की टीमें आमने-सामने होंगी। शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने लखनऊ हाईकोर्ट को छह विकेट से जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को 39 रन से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। टूर्नामेंट के को-ऑर्डिनेटर और अधिवक्ता वैभव जैन ने बताया कि सेमीफाइनल मुकाबलों से पूर्व रायबरेली सदर की विधायक अदिति सिंह ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और टॉस कराया।</p>
<p>डॉ. अखिलेश दास स्टेडियम में खेले गए पहले सेमीफाइनल में लखनऊ हाईकोर्ट ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट के नुकसान पर 137 रन बनाए। टीम की ओर से अब्दुल्ला ने सर्वाधिक 33 रन बनाए। दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से दीपक राठी, प्रदीप और मधुर ने दो-दो विकेट झटके। लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 14.3 ओवर में चार विकेट खोकर जीत हासिल कर ली। अंकित ने 29 गेंदों पर चार चौके और पांच छक्कों की मदद से नाबाद 59 रन की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली। लखनऊ हाईकोर्ट की ओर से आशुतोष को दो विकेट मिले।</p>
<p>कॅरिअर क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में सुप्रीम कोर्ट ने पहले बल्लेबाजी करते हुए आठ विकेट खोकर 207 रन बनाए। मयंक वाधवा ने 49 और गोविंद ने 39 रन की अहम पारियां खेलीं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से नायडू ने तीन, जबकि हरजोत सिंह ने दो विकेट लिए। जवाब में उतरी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की टीम आठ विकेट खोकर 168 रन ही बना सकी। टीम की ओर से जीशान खान ने 44 रन बनाए। सुप्रीम कोर्ट के गेंदबाज ऋषभ मलिक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 26 रन देकर पांच विकेट झटके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 14:37:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ हाईकोर्ट ने बीएड शिक्षकों को दी अंतरिम राहत, ब्रिज कोर्स के लिए सशर्त आवेदन की अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बीएड डिग्रीधारक प्राथमिक शिक्षकों के ब्रिज कोर्स से जुड़े मामले में राज्य सरकार को आदेश दिया है कि याची शिक्षकों को अंतरिम रूप से ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने पंकज शर्मा व 24 अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला राज्य सरकार द्वारा 6 अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश और 13 दिसंबर 2025 को पारित आदेश से जुड़ा है। जिसमें बीएड डिग्रीधारक सहायक अध्यापकों को छह माह के ब्रिज कोर्स में नामांकन करने का निर्देश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/564970/lucknow-high-court-grants-interim-relief-to-b-ed-teachers--allows-conditional-application-for-bridge-course"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/untitled-design-(11)13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बीएड डिग्रीधारक प्राथमिक शिक्षकों के ब्रिज कोर्स से जुड़े मामले में राज्य सरकार को आदेश दिया है कि याची शिक्षकों को अंतरिम रूप से ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने पंकज शर्मा व 24 अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला राज्य सरकार द्वारा 6 अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश और 13 दिसंबर 2025 को पारित आदेश से जुड़ा है। जिसमें बीएड डिग्रीधारक सहायक अध्यापकों को छह माह के ब्रिज कोर्स में नामांकन करने का निर्देश दिया गया था। शासनादेश में यह भी उल्लेख था कि प्रशिक्षण में आवेदन न करने पर सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">याचियों की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने पहले ही एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से छह माह का ब्रिज कोर्स पूरा कर लिया है, जिसे वैध योग्यता माना जा चुका है, ऐसे में दोबारा प्रशिक्षण के लिए बाध्य करना अनुचित है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यह शासनादेश सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है और विभाग उसी के अनुसार कार्य कर रहा है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई नौ जनवरी 2026 को तय करते हुए स्पष्ट किया कि तब तक याचियों को अस्थायी रूप से आवेदन करने दिया जाए और विभाग उनके आवेदनों को स्वीकार करने के लिए हर संभव प्रयास करे।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़े : </h5>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/564969/guard-beaten-up-at-food-valley--video-of-the-incident-goes-viral--report-filed-at-gomti-nagar-police-station"><span class="t-red">फूड वैली में गार्ड की पिटाई:</span> घटना का वीडियो वायरल, गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>एजुकेशन</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/564970/lucknow-high-court-grants-interim-relief-to-b-ed-teachers--allows-conditional-application-for-bridge-course</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 12:13:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सात साल बिताए जेल में.... अब हाईकोर्ट ने अभियुक्त को किया दोषमुक्त, NDPS एक्ट के तहत हुई थी दस साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हेरोइन रखने के आरोप में दस साल की सजा पाए अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। खास बात यह रही कि उक्त अभियुक्त गिरफ़्तारी और सत्र अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद से अब तक लगभग सात साल (छह साल 11 महीना और 24 दिन) जेल में काट चुका है। कोर्ट ने उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।</span></p>
<p>यह निर्णय न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की एकल पीठ ने विनय कुमार शर्मा की अपील पर पारित किया। अभियोजन का कहना था कि सेंट्रल नार्कोटिक्स ब्यूरो को सूचना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/564192/spent-seven-years-in-jail-----now-the-high-court-has-acquitted-the-accused--who-was-sentenced-to-ten-years-under-the-ndps-act"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(2)14.png" alt=""></a><br /><p><span style="font-family:NewswrapWeb;"><strong>लखनऊ, अमृत विचार। </strong>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हेरोइन रखने के आरोप में दस साल की सजा पाए अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। खास बात यह रही कि उक्त अभियुक्त गिरफ़्तारी और सत्र अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद से अब तक लगभग सात साल (छह साल 11 महीना और 24 दिन) जेल में काट चुका है। कोर्ट ने उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।</span></p>
<p>यह निर्णय न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की एकल पीठ ने विनय कुमार शर्मा की अपील पर पारित किया। अभियोजन का कहना था कि सेंट्रल नार्कोटिक्स ब्यूरो को सूचना मिली थी कि गणेशगंज के होटल मनीषा में अपीलार्थी बाराबंकी के एक व्यक्ति से हीरोईन खरीदने वाला है। उक्त सूचना के आधार पर 27 फरवरी 1995 को सेंट्रल नार्कोटिक्स ब्यूरो की टीम ने होटल में छापा मारकर अपीलार्थी व कथित तौर पर हीरोईन बेंचने आए। मो. इस्लाम उर्फ फारुक को गिरफ्तार कर, उनके कब्जे से क्रमशः 120 ग्राम और 80 ग्राम हीरोईन बरामद की। सत्र अदालत ने 28 मई 1998 को अपीलार्थी को दस साल कारावास की सजा सुनाई। अपीलार्थी की ओर से दलील दी गई कि छापे के समय टीम ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का पालन न करते हुए, अपीलार्थी की तलाशी राजपत्रित अधिकारी के समक्ष नहीं ली। कहा गया कि उक्त टीम का एक अधिकारी स्वयं राजपत्रित अधिकारी था लेकिन प्रावधान के तहत अपीलार्थी की तलाशी टीम के बाहर के राजपत्रित अधिकारी के समक्ष होनी चाहिए थी। कोर्ट ने भी अपने निर्णय में कहा कि अपीलार्थी की तलाशी के दौरान धारा 50 के अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया गया, लिहाजा बरामदगी संदिग्ध मानी जाएगी। कोर्ट ने जेल अधीक्षक, जिला कारागार, लखनऊ द्वारा भेजी रिपोर्ट के आधार पर कहा कि अपीलार्थी 72 साल का है और छह साल 11 महीना और 24 दिन जेल में बिता चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/564192/spent-seven-years-in-jail-----now-the-high-court-has-acquitted-the-accused--who-was-sentenced-to-ten-years-under-the-ndps-act</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 08:45:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ के बाहर वाले भी शहर में ई-रिक्शा का करवा सकेंगे पंजीकरण </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी में ई-रिक्शा के पंजीकरण के लिए लखनऊ का स्थायी निवासी होने की अनिवार्य शर्त संबंधी आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्त समानता, व्यवसाय की स्वतंत्रता व जीवन के मौलिक अधिकारों का साफ उल्लंघन है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट के इस आदेश से अब लखनऊ के बाहर रहने वाले भी शहर में ई-रिक्शा का पंजीकरण करा सकेंगे। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश अजीत यादव की याचिका समेत चार याचिकाओं पर दिया है। याचिकाओं में कहा गया था कि पांच फरवरी, 2025</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561653/people-from-outside-lucknow-will-also-be-able-to-register-their-e-rickshaws-in-the-city"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी में ई-रिक्शा के पंजीकरण के लिए लखनऊ का स्थायी निवासी होने की अनिवार्य शर्त संबंधी आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्त समानता, व्यवसाय की स्वतंत्रता व जीवन के मौलिक अधिकारों का साफ उल्लंघन है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट के इस आदेश से अब लखनऊ के बाहर रहने वाले भी शहर में ई-रिक्शा का पंजीकरण करा सकेंगे। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश अजीत यादव की याचिका समेत चार याचिकाओं पर दिया है। याचिकाओं में कहा गया था कि पांच फरवरी, 2025 को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) लखनऊ के आदेश में राजधानी में ई-रिक्शा के पंजीकरण में दो प्रतिबंध लगा दिए गए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">पहले प्रतिबंध के तहत जिस व्यक्ति के पास पहले से ई-रिक्शा का पंजीकरण है, उसे नए रिक्शे का पंजीकरण नहीं मिलेगा और दूसरे प्रतिबंध के तहत लखनऊ में स्थायी तौर पर निवास करने वाले व्यक्ति को ही नए ई-रिक्शा का पंजीकरण मिलेगा। कोर्ट ने याचिकाएं निस्तारित करके आदेश में लगाए गए इस दूसरे प्रतिबंध को रद्द कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/561653/people-from-outside-lucknow-will-also-be-able-to-register-their-e-rickshaws-in-the-city</link>
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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 20:53:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ : बिजली मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के तबादले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उप्र बिजली मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शशांक निगम का लखनऊ से सोनभद्र किए गए तबादले के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार समेत विद्युत विभाग को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने यह आदेश शशांक निगम की याचिका पर दिया। इसमें याची ने तबादला आदेशों को चुनौती दी थी। </p>
<p>याची के अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल का कहना था कि याची उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि शक्तिभवन लखनऊ में बतौर एकाउंटेंट तैनात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/561651/lucknow--high-court-puts-stay-on-the-transfer-of-the-state-president-of-the-electricity-workers--union"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उप्र बिजली मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शशांक निगम का लखनऊ से सोनभद्र किए गए तबादले के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार समेत विद्युत विभाग को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने यह आदेश शशांक निगम की याचिका पर दिया। इसमें याची ने तबादला आदेशों को चुनौती दी थी। </p>
<p>याची के अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल का कहना था कि याची उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि शक्तिभवन लखनऊ में बतौर एकाउंटेंट तैनात था। वह उप्र बिजली मजदूर संगठन का प्रदेश अध्यक्ष भी है। याची, संगठन के अन्य लोगों के साथ एक टेंडर के विरोध में धरना देने लगा। इससे क्षुब्ध होकर उसका तबादला लखनऊ से ओबरा थर्मल पावर स्टेशन सोनभद्र कर दिया गया। </p>
<p>अधिवक्ता ने एक नजीर के हवाले से तर्क दिया कि किसी कर्मचारी को दंड के विकल्प के रूप उसका तबादला नहीं किया जा सकता। उधर, विभागीय अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया।कोर्ट ने मामले को गौर करने योग्य कहकर अगली सुनवाई के लिए जनवरी में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। साथ ही अगले आदेशों तक याची के तबादला आदेशों पर रोक लगा दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/561651/lucknow--high-court-puts-stay-on-the-transfer-of-the-state-president-of-the-electricity-workers--union</link>
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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 20:45:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दोषी को पूरी उम्र जेल में रहना होगा : हाईकोर्ट ने शिशु से रेप और हत्या के मामले में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पांच महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की फांसी की सजा को बुधवार को उम्रकैद में बदल दिया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि दोषी को पूरी उम्र जेल में रहना होगा और उसे कोई रियायत नहीं दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति राजनीश कुमार और न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने सत्र न्यायालय द्वारा भेजे गए संदर्भ पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया। सत्र न्यायालय के संदर्भ में फांसी की सजा की पुष्टि के लिए कहा गया था। अपने फैसले में, न्यायालय ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/560487/convict-to-undergo-life-imprisonment--high-court-commutes-death-sentence-to-life-imprisonment-in-case-of-rape-and-murder-of-a-child"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/लखनऊ-हाईकोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पांच महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की फांसी की सजा को बुधवार को उम्रकैद में बदल दिया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि दोषी को पूरी उम्र जेल में रहना होगा और उसे कोई रियायत नहीं दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति राजनीश कुमार और न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने सत्र न्यायालय द्वारा भेजे गए संदर्भ पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया। सत्र न्यायालय के संदर्भ में फांसी की सजा की पुष्टि के लिए कहा गया था। अपने फैसले में, न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत का दोषी को सजा देना बिल्कुल सही था।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, अदालत ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलते हुए कहा कि दोषी का अपराध का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है, और उसका 3-4 साल का बच्चा भी है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरोपी ने यह अपराध किसी पूर्व-नियोजित योजना के तहत किया था। </p>
<p style="text-align:justify;">घटना 16 फरवरी 2020 को मडियाओं पुलिस थाना क्षेत्र में हुई थी। बच्ची के माता-पिता एक रिश्तेदार के विवाह समारोह में एसआर मैरिज लॉन गए थे, जहां आरोपी प्रेमचंद उर्फ पप्पू दीक्षित भी उपस्थित था। आरोपी ने किसी बहाने बच्ची को उसकी मां की गोद से ले लिया और फिर वहां से चला गया। जब वह काफी समय बाद भी नहीं लौटा, तो परिवार ने बच्ची की तलाश शुरू की। </p>
<p style="text-align:justify;">काफी तलाश करने के बाद, बच्ची शादी के लॉन से कुछ दूरी पर झाड़ियों मिली। उसे तुरंत केजीएमयू अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोपी की शर्ट का बटन और उसके तीन बाल घटनास्थल से मिले थे। सत्र न्यायालय ने 30 सितंबर 2021 को आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/560487/convict-to-undergo-life-imprisonment--high-court-commutes-death-sentence-to-life-imprisonment-in-case-of-rape-and-murder-of-a-child</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 21:55:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>HC के आदेश और मरम्मत का बजट पास, फिर भी टूट रही उम्मीदें...  छोटे इमामबाड़े के दोनों जर्जर गेट निहार रहे फूड हब में उमड़ती बेहिसाब भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>शबाहत हुसैन विजेता, लखनऊ, अमृत विचार:</strong> हाईकोर्ट के आदेश और स्मार्ट सिटी योजना से नगर निगम की ओर से 6 करोड़ 17 लाख रुपये का बजट पास होने के बाद भी ऐतिहासिक छोटे इमामबाड़े के दोनों जर्जर गेटों की मरम्मत की उम्मीदें ध्वस्त होती दिख रही हैं। हाईकोर्ट ने जनवरी में मरम्मत का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के 10 महीने पूरे होने के बाद भी मरम्मत कार्य की शुरुआत नहीं हो पाया है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(28)8.png" alt="MUSKAN DIXIT (28)" width="1200" height="720" /></p>
<p>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में वर्ष 2013 में याचिका दायर की गई थी। इसमें बताया गया था कि छोटे इमामबाड़े के दोनों गेट देखरेख</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/559412/hc-orders-and-repair-budgets-passed--yet-hopes-are-dashed%E2%80%A6-the-two-dilapidated-gates-of-the-chota-imambara-overlook-the-untold-crowds-thronging-the-food-hub--who-will-take-responsibility-if-an-accident-occurs"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-11/muskan-dixit-(28)8.png" alt=""></a><br /><p><strong>शबाहत हुसैन विजेता, लखनऊ, अमृत विचार:</strong> हाईकोर्ट के आदेश और स्मार्ट सिटी योजना से नगर निगम की ओर से 6 करोड़ 17 लाख रुपये का बजट पास होने के बाद भी ऐतिहासिक छोटे इमामबाड़े के दोनों जर्जर गेटों की मरम्मत की उम्मीदें ध्वस्त होती दिख रही हैं। हाईकोर्ट ने जनवरी में मरम्मत का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के 10 महीने पूरे होने के बाद भी मरम्मत कार्य की शुरुआत नहीं हो पाया है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(28)8.png" alt="MUSKAN DIXIT (28)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में वर्ष 2013 में याचिका दायर की गई थी। इसमें बताया गया था कि छोटे इमामबाड़े के दोनों गेट देखरेख के अभाव में पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं और जबरदस्त अतिक्रमण का शिकार हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(32)8.png" alt="MUSKAN DIXIT (32)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>12 वर्ष की लंबी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने 9 जनवरी 2025 को राजधानी के प्रशासन को छोटे इमामबाड़े के दोनों गेटों को अतिक्रमण मुक्त कराने और मरम्मत की तत्काल व्यवस्था कराने के आदेश दिए थे।इसके बाद जिम्मेदार फिर सो गए। पुरातत्व विभाग भी जर्जर गेटों की तत्काल मरम्मत न होने पर गिरने की अंदेशा जता चुका है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(29)9.png" alt="MUSKAN DIXIT (29)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><strong>इंटेक कंजर्वेशन इंस्टीट्यूट को जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी</strong></h3>
<p>हाईकोर्ट ने हुसैनाबाद ट्रस्ट और जिला प्रशासन को दोनों गेट से अतिक्रमण और अवैध कब्जों को हटाने का निर्देश देते हुए जीर्णोद्धार का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखरेख में कराए जाने का निर्देश दिया। इसके बाद नगर निगम ने बजट पास कर दिया था। जीर्णोद्धार का काम इंटेक कंजर्वेशन इंस्टीट्यूट को सौंप दिया गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(30)8.png" alt="MUSKAN DIXIT (30)" width="1280" height="720"></img></p>
<h3><em><strong>दोनों जर्जर गेटों के बीच बना दिया फूड हब</strong></em></h3>
<p>छोटे इमामबाड़े के दोनों जर्जर गेटों के बीच फूड हब तैयार कर दिया गया है। सूरज डूबते ही यहां खाने का बाजार सज जाता है। लोगों और वाहनों की वजह से बमुश्किल 100 मीटर का रास्ता तय करने में कभी-कभी 30 मिनट भी लग जाते हैं।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2025-11/muskan-dixit-(33)8.png" alt="MUSKAN DIXIT (33)" width="1280" height="720"></img></p>
<p>फूड हब से पैसा कमाने की होड़ के बीच अगर इन दोनों गेट में से किसी एक में भी कोई हादसा हुआ तो हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>फोटो गैलरी</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 11:24:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अविवाहित भाई भी अनुकंपा नियुक्ति का हकदार, बशर्ते मृतक विधुर हो : हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सेवा मामले में दिए अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी कर्मचारी की पत्नी का उसके पहले निधन हो गया हो तो कर्मचारी का भाई भी अनुकंपा नियुक्ति पाने का हकदार है। इसमें संबंधित नियम का प्रतिबंध लागू नहीं होगा। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने यह फैसला विधिक माप विज्ञान, फैजाबाद रेंज के मृतक कर्मचारी के अविवाहित भाई देवेंद्र प्रताप सिंह की याचिका को मंजूर करके दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">याची ने 25 मई 2016 के उस विभागीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने की अर्जी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/558849/unmarried-brother-also-entitled-to-compassionate-appointment--provided-the-deceased-is-a-widower--high-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/इलाहाबाद-हाईकोर्ट-प्रयागराज-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सेवा मामले में दिए अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी कर्मचारी की पत्नी का उसके पहले निधन हो गया हो तो कर्मचारी का भाई भी अनुकंपा नियुक्ति पाने का हकदार है। इसमें संबंधित नियम का प्रतिबंध लागू नहीं होगा। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने यह फैसला विधिक माप विज्ञान, फैजाबाद रेंज के मृतक कर्मचारी के अविवाहित भाई देवेंद्र प्रताप सिंह की याचिका को मंजूर करके दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">याची ने 25 मई 2016 के उस विभागीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। याची ने मृतक भाई की जगह अनुकंपा नियुक्ति देने की गुजारिश की थी। फैसले के मुताबिक सरकारी कर्मचारी, याची के बड़े भाई महेंद्र प्रताप सिंह की 9 अक्तूबर 2015 को सेवाकाल में मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी की भी उनके पहले 12 फरवरी 2010 को मृत्यु हो चुकी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में याची ने खुद को मृताई आश्रित होने का दावा करते हुए एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाला कहा है। विभागीय अफसरों ने याची का दावा महज नियमों के तहत इस आधार पर खारिज कर दिया चूंकि मृतक कर्मचारी विवाहित था। इसलिए याची अनुकंपा नियुक्ति का हकदार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर याची का दावा खारिज किया जाना ठहराने योग्य नहीं है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याची का दावा खारिज करने वाले 25 मई 2016 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही फैजाबाद रेंज के विधिक माप विज्ञान के सहायक नियंत्रक को निर्देश दिया कि याची की अनुकंपा नियुक्ति की अर्जी पर छह सप्ताह में फिर से विचार कर निर्णय लें, अगर याची अपने भाई का आश्रित होना साबित कर सके।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/558849/unmarried-brother-also-entitled-to-compassionate-appointment--provided-the-deceased-is-a-widower--high-court</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 21:29:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Deepak Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहारा को फिलहाल नहीं मिली राहत, लखनऊ नगर निगम और राज्य सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को लखनऊ नगर निगम और राज्य सरकार को राजधानी स्थित सहारा शहर को सील करने के आदेश को चुनौती देने के लिए सहारा इंडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर 30 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर में 170 एकड़ में फैली सहारा टाउनशिप को लखनऊ नगर निगम ने पट्टा और लाइसेंस समझौतों के कथित उल्लंघन के कारण सील कर दिया है। इस मुद्दे पर सहारा समूह ने आपत्ति जताई है। उसने हाल ही में सीलिंग आदेश के खिलाफ अदालत का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/555489/sahara-did-not-get-any-relief-from-the-high-court--next-hearing-will-be-on-october-30"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-08/कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ। </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को लखनऊ नगर निगम और राज्य सरकार को राजधानी स्थित सहारा शहर को सील करने के आदेश को चुनौती देने के लिए सहारा इंडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर 30 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।</p>
<p>लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर में 170 एकड़ में फैली सहारा टाउनशिप को लखनऊ नगर निगम ने पट्टा और लाइसेंस समझौतों के कथित उल्लंघन के कारण सील कर दिया है। इस मुद्दे पर सहारा समूह ने आपत्ति जताई है। उसने हाल ही में सीलिंग आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया था।</p>
<p>न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ राय की पीठ ने सहारा इंडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका पर बुधवार को यह आदेश पारित किया। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद पीठ ने कहा कि इस मामले पर विचार-विमर्श की जरूरत है और इसलिए पक्षकारों को मामले में अपनी दलीलें साझा करने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p>सहारा इंडिया ने सहारा शहर स्थित भूमि पर कब्जा करने और उसके सभी छह द्वारों को सील करने के नगर निगम के रुख का कड़ा विरोध किया। उसने कहा कि सहारा शहर के अंदर स्थित संपत्तियों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की कोई सूची तैयार नहीं की गई थी। पूरी कार्रवाई बिना सुनवाई का उचित अवसर दिये और परिसर खाली करने के लिए नोटिस जारी किये बगैर जल्दबाजी में की गई।</p>
<p>नगर निगम के अधिवक्ता ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सहारा इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 1994 में दिए गए लीज डीड की शर्तों का उल्लंघन किया गया था। इसके लिए उसे 2020 और 2025 में भी नोटिस जारी किए गए थे और सुनवाई का उचित अवसर दिए जाने के बाद परिसर को सील करने की कार्रवाई की गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 13:09:06 +0530</pubDate>
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