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                <title>हाईकोर्ट - Amrit Vichar</title>
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                <description>हाईकोर्ट RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चुनाव की तिथियां नजदीक, हस्तक्षेप का औचित्य नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने सितारगंज ग्राम सभा क्षेत्र से प्रधान पद के प्रत्याशी बिजेंद्र सिंह को कोई राहत न देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया। पीठ ने कहा कि चुनाव की तिथियां नजदीक आ चुकी हैं इसलिए अब इसमें हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। </p>
<p>प्रत्याशी सिंह ने याचिका में बताया कि चुनाव आयोग ने उनके नामांकन पत्र को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उनके द्वारा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ है जबकि उनके द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं किया गया है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/547184/election-dates-are-not-justified-with-close-intervention"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/manoj-34.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने सितारगंज ग्राम सभा क्षेत्र से प्रधान पद के प्रत्याशी बिजेंद्र सिंह को कोई राहत न देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया। पीठ ने कहा कि चुनाव की तिथियां नजदीक आ चुकी हैं इसलिए अब इसमें हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। </p>
<p>प्रत्याशी सिंह ने याचिका में बताया कि चुनाव आयोग ने उनके नामांकन पत्र को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उनके द्वारा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ है जबकि उनके द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं किया गया है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से पीठ को अवगत कराया गया कि पूर्व के आदेशों के अनुपालन में अतिक्रमणकारियों की जांच कर जो सूची जारी की गई, उसमें बिजेंद्र सिंह  सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने के दोषी पाए गए जिन्हें मई माह में नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने को कहा गया था लेकिन उनके द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया गया। जब इनके द्वारा नामांकन भरा गया तो आयोग ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि उनके द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ है। उसे हटाने के लिए कई बार नोटिस दिया गया। इस आधार पर उनका नामांकन पत्र रद्द किया गया।</p>
<p>वहीं, पंचायत चुनाव में निर्वाचन आयोग द्वारा डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापकों की ड्यूटी पीठासीन अधिकारी के रूप में लगाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने याचिका को हाईकोर्ट के पूर्व के आदेश के आधार पर निस्तारित कर दिया।  मामले के अनुसार, कई डिग्री कालेजों के प्राध्यापकों ने याचिका में कहा कि वे क्लास वन कर्मचारी हैं इसलिए उनकी ड्यूटी चुनाव में नहीं लगाई जा सकती। चुनाव में पीठासीन अधिकारी क्लास टू श्रेणी का कर्मचारी होता है। ऐसे में कॉलेज के प्राध्यापकों का रैंक पीठासीन अधिकारी से ऊंचा है इसलिए उन्हें चुनाव ड्यूटी पर नहीं लगाया जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Jul 2025 11:08:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने नहीं दी चुनाव लड़ने की अनुमति </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अतिक्रमणकारी को ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं देते हुए अपील को खारिज कर दिया है। खटीमा के बंडिया निवासी अशोक मौर्य की अपील पर खंडपीठ में सुनवाई हुई। अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि उसने बंडिया गांव के ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिये नामांकन पत्र भरा था लेकिन चुनाव आयोग ने अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए उसका नामांकन निरस्त कर दिया है। उसने इस कदम को हाईकोर्ट में चुनौती दी लेकिन एकलपीठ ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया। कहा गया कि उसने कोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/547081/high-court-did-not-allow-permission-to-contest-elections"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/student-union-elections-in-srinagar_16686784941.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अतिक्रमणकारी को ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं देते हुए अपील को खारिज कर दिया है। खटीमा के बंडिया निवासी अशोक मौर्य की अपील पर खंडपीठ में सुनवाई हुई। अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि उसने बंडिया गांव के ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिये नामांकन पत्र भरा था लेकिन चुनाव आयोग ने अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए उसका नामांकन निरस्त कर दिया है। उसने इस कदम को हाईकोर्ट में चुनौती दी लेकिन एकलपीठ ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया। कहा गया कि उसने कोई अतिक्रमण नहीं किया है।  </p>
<p>उसे अतिक्रमण के मामले में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई अमल में लायी गयी है। आयोग द्वारा कहा गया कि अपीलकर्ता के खिलाफ आपत्ति के निस्तारण के बाद नामांकन रद्द किया गया है। अदालत में पेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट के 12 दिसंबर 2024 को जारी आदेश के आलोक में 80 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। खंडपीठ ने अपीलकर्ता को कोई राहत नहीं देते हुए अपील को खारिज कर दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 15:27:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने दी दो प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने की अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी का नामांकन पत्र रिटर्निंग अधिकारी द्वारा निरस्त करने के मामले पर सुनवाई करते हुए चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दे दी है। </p>
<p>मामले के अनुसार, डीडीहाट से जिपं सदस्य का चुनाव नरेंद्र सिंह देवपा लड़ना चाह रहे थे। नामांकन की तिथि को उनके द्वारा नामांकन फार्म भरा गया लेकिन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा उनका नामांकन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उन्होंने पूर्व के आपराधिक मामलों का जिक्र फॉर्म में नहीं किया है, उस कॉलम को नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/546624/high-court-allowed-two-candidates-to-contest-elections"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/images-(6)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी का नामांकन पत्र रिटर्निंग अधिकारी द्वारा निरस्त करने के मामले पर सुनवाई करते हुए चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दे दी है। </p>
<p>मामले के अनुसार, डीडीहाट से जिपं सदस्य का चुनाव नरेंद्र सिंह देवपा लड़ना चाह रहे थे। नामांकन की तिथि को उनके द्वारा नामांकन फार्म भरा गया लेकिन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा उनका नामांकन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उन्होंने पूर्व के आपराधिक मामलों का जिक्र फॉर्म में नहीं किया है, उस कॉलम को नहीं भरा। याचिका में कहा गया कि नामांकन पत्र का जो प्रारूप राज्य निवार्चन आयोग की तरफ से बनाया गया, वह राज्य  पंचायतीराज नियमावली की धारा 9 के विरुद्ध है जबकि वे आपराधिक केसों में पहले ही बरी हो चुके हैं। उस कॉलम को भरना जरूरी नहीं था। वर्तमान में राज्य चुनाव आयोग ने एक्ट को दरकिनार कर उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया। </p>
<p><br /> इस मामले को उनके द्वारा पहले एकलपीठ में चुनौती दी गयी। एकलपीठ ने उसे निरस्त कर दिया। जिसके बाद उनके द्वारा मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी गयी। खंडपीठ ने एक्ट के विरुद्ध जाकर नामांकन पत्र को निरस्त करने के आदेश पर रोक लगाते हुए आयोग से पूछा कि क्या चुनाव के सिंबल (चुनाव प्रतीक चिन्ह) जारी हो गए हैं? जिस पर आयोग की तरफ से कहा गया कि नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हो चुकी है। जिनका फॉर्म सही नहीं था उसे एक्ट के विरुद्ध मानकर रिटर्निंग अधिकारी ने निरस्त कर दिया और बैलेट पत्र छपने के लिए प्रेस में भेज दिए गए हैं। इस पर खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इलेक्शन हुआ नहीं है, प्रोसेस में है। न्यायालय में पीड़ितों की याचिकाएं विचाराधीन हैं लेकिन सिंबल आवंटन से पहले कैसे बैलेट पेपर की प्रिंटिंग की जा सकती है? कौन उम्मीदवार किस सिंबल पर चुनाव लड़ना चाहता है, उसकी पसंद का ख्याल नहीं रखा गया।</p>
<p><strong>यहां ग्राम प्रधान प्रत्याशी को मिली राहत</strong><br />नैनीताल: दूसरी सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने ग्राम प्रधान पद की प्रत्याशी का नामांकन पत्र निरस्त करने पर रोक लगाते हुए उन्हें चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दी है। मामले के अनुसार, ग्राम सभा फिरोजपुर मानपुर काशीपुर निवासी नेहा गौतम का नामांकन पत्र इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उनकी माता वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमणकारी हैं और नेहा का अपनी माता के घर आना-जाना रहता है। नामांकन निरस्तीकरण की प्रक्रिया को नेहा गौतम ने उच्च न्यायालय में चुनौती  देते हुए कहा कि वे विवाहित हैं और अपनी ससुराल में निवास करती हैं। उनकी माता को वन विभाग द्वारा अतिक्रमण का कोई नोटिस नहीं दिया गया है और न ही उनके खिलाफ कोई कार्यवाही आज तक की गई है। उनका नामांकन गलत तरीके से निरस्त किया गया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को राहत देते हुए चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 11:18:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> पंचायत चुनाव की याचिका हाईकोर्ट में निस्तारित</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार:</strong> उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने बरसात के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश के 12 जिलों में कराए जा रहे पंचायत चुनाव को अगस्त माह के बाद कराए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। <br />मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एवं सचिव पंचायती राज की तरफ से शपथपत्र पेश करते हुए कहा गया कि पंचायत चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार और पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है। कांवड़ यात्रा भी शांतिपूर्वक चल रही है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/546387/panchayat-election-petition-settled-in-high-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/uttrakhand-highcourt.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार:</strong> उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने बरसात के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश के 12 जिलों में कराए जा रहे पंचायत चुनाव को अगस्त माह के बाद कराए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। <br />मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एवं सचिव पंचायती राज की तरफ से शपथपत्र पेश करते हुए कहा गया कि पंचायत चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार और पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है। कांवड़ यात्रा भी शांतिपूर्वक चल रही है। इससे चुनाव में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं होगा। शपथ पत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।</p>
<p><br />हाईकोर्ट में सचिव पंचायती राज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। मंगलवार को भी उनके द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया था कि पंचायत चुनाव और कांवड़ यात्रा को व्यवस्था के अनुरूप चलाया जा रहा है। पुलिस-प्रशासन ने कांवड़ मेले को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रदेश की 30 प्रतिशत फोर्स लगा रखी है। 10 प्रतिशत पुलिस चारधाम यात्रा में है। होने वाले चुनाव के लिए  विभाग ने 10 प्रतिशत फोर्स रिजर्व रखी है। चुनाव और कांवड़ के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी होने पर भी विभाग ने फोर्स को रिजर्व में  रखा है। वहीं, चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि आयोग को चुनाव कराने में किसी तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा है। जहां तक कांवड़ मेले का सवाल है तो इसमे खासकर हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, यूपी और दिल्ली के कांवड़िये आ रहे हैं जिनका प्रथम जत्था चुनाव की प्रथम तिथि से पहले समाप्त हो जाएगा। सचिव द्वारा यह भी कहा गया कि कांवड़ से प्रभावित जिलों में चुनाव दूसरे फेज में हैं। डीजीपी द्वारा कोर्ट के निर्देश पर शपथ पत्र पेश किया गया।</p>
<p><br />मामले के अनुसार, देहरादून निवासी डॉ. बैजनाथ ने जनहित याचिका में कहा था कि अभी राज्य में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम चल रहा है। वहीं, दूसरी तरफ कांवड़ यात्रा, चारधाम यात्रा और बरसात का सीजन भी चल रहा। प्रदेश में बाढ़ राहत के बचाव में प्रशासन, पुलिस व एसडीआरफ की टीमें लगी हैं। ऐसी स्थिति में पंचायत चुनाव कराना खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की कि पंचायत चुनाव की तारीख अगस्त महीने में घोषित की जाए। इस पर कोर्ट ने वास्तविकता जानने के लिए डीजीपी और सचिव को वीसी के माध्यम से पेश होने को कहा था।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 10:33:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कब तक करा सकते हैं पंचायत चुनाव: हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार:</strong> हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि पंचायतों के चुनाव कब तक कराए जा सकते हैं, 20 मई तक प्लान पेश करें। <br />  पंचायत चुनाव और उनमें प्रशासकों की तैनाती को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि हरिद्वार जिले को छोड़कर शेष अन्य जिलों में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल पिछले साल नवंबर में समाप्त हो गया है। सरकार चुनाव कराने में विफल रही और उनमें प्रशासकों की नियुक्ति कर दी</p>
<p>निवर्तमान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/538476/how-long-can-panchayat-elections-be-held-high-court"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/student-union-elections-in-srinagar_1668678494-(1).webp" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार:</strong> हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि पंचायतों के चुनाव कब तक कराए जा सकते हैं, 20 मई तक प्लान पेश करें। <br /> पंचायत चुनाव और उनमें प्रशासकों की तैनाती को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि हरिद्वार जिले को छोड़कर शेष अन्य जिलों में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल पिछले साल नवंबर में समाप्त हो गया है। सरकार चुनाव कराने में विफल रही और उनमें प्रशासकों की नियुक्ति कर दी गई है।</p>
<p>निवर्तमान ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक घोषित कर दिया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार प्रशासकों का दोबारा कार्यकाल बढ़ाने जा रही है। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि आरक्षण के निर्धारण को लेकर विलंब हुआ है। सरकार ने इसके लिए 25 मार्च 2025 को अधिसूचना जारी कर दी थी। सरकार की ओर से जवाब देने के लिए समय की मांग की गयी। दूसरी ओर राज्य चुनाव आयोग के अधिवक्ता की ओर से जवाब दिया गया कि आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है और मतदाता सूची भी तैयार कर ली गई हैं। उसे सरकार की हरी झंडी का इंतजार है। अंत में अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि वह बताए कि कब तक चुनाव कराये जा सकेंगे। इस मामले में खंडपीठ आगामी 20 मई को सुनवाई करेगी। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 May 2025 11:35:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट में सुनवाई, नैनीताल के लोगों की समस्या का समाधान   </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने नैनीताल शहर सहित अन्य जगहों की ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या संबंधी कई जनहित याचिकाओ पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के बाद स्थानीय नागरिकों की महत्वपूर्ण समस्या का समाधान करते हुए दिशा निर्देश जारी किए हैं। खंडपीठ ने बीडी पांडे राजकीय अस्पताल के समीप चौड़ी जगह में तीन गाड़ी मरीजों की और एक एंबुलेंस खड़ी करने की अनुमति दे दी है।</p>
<p>खंडपीठ ने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए जू शटल सेवा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/537942/hearing-in-high-court-solution-to-the-problem-of-people"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/images-(3).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने नैनीताल शहर सहित अन्य जगहों की ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या संबंधी कई जनहित याचिकाओ पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के बाद स्थानीय नागरिकों की महत्वपूर्ण समस्या का समाधान करते हुए दिशा निर्देश जारी किए हैं। खंडपीठ ने बीडी पांडे राजकीय अस्पताल के समीप चौड़ी जगह में तीन गाड़ी मरीजों की और एक एंबुलेंस खड़ी करने की अनुमति दे दी है।</p>
<p>खंडपीठ ने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए जू शटल सेवा के लिए चार की जगह आठ इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की अनुमति दी है। इसके अलावा न्यायालय ने तल्लीताल की लेक ब्रिज चुंगी पर पर्ची के माध्यम से टैक्स वसूलने पर सवाल उठाते हुए नगर पालिका परिषद से कहा कि आप इसके लिए फास्टैग से टैक्स वसूलें। खंडपीठ ने सुनवाई में नगर पालिका परिषद से कहा कि स्थानीय वाहन स्वामियों के लिए बाजार, अस्पताल, मंदिर आदि आवागमन की जगहों को एयर मार्क करें और उनकी व्यवस्था करें। <br /><br /><strong>सीआरआरआई और सीबीआरआई को यह निर्देश </strong><br />मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) नोएडा को निर्देश दिए हैं कि वह राज्य के निर्देश पर सड़कों का सर्वे करें। इसमें हल्द्वानी, काठगोदाम, कालाढूंगी और भवाली कैंची धाम से नैनीताल को आने वाले मार्गों का सर्वे करें। न्यायालय ने इस संबंध में तीन माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही खंडपीठ ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुड़की <br />को निर्देश दिए हैं कि वह क्षेत्र की भौगोलिक भार वहन क्षमता की जांच कर सकती है। खंडपीठ ने टैक्सी बाइकों और स्थानीय टैक्सी वाहनों को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। इसके अलावा पालिका परिषद को घरों से ही कूड़े का पृथक्करण करने के लिए शीघ्र ही प्रत्येक घर को तीन-तीन डस्टबिन देने के निर्देश दिए हैं।<br /><br /><strong>हाईकोर्ट ने मांगा शपथपत्र</strong><br />सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लेक ब्रिज चुंगी पर रात आठ बजे के बाद बिना पर्ची कटे वाहनों को आने दिया जा रहा है। मंदिर जाने पर उनके वाहनों से 25 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से लिया जा रहा है। नारायण नगर क्षेत्र की तरफ से कहा गया कि नारायण नगर में छोटी गाड़ियों से कूड़ा बड़ी गाड़ियों में डालने से नारायण नगर, चार खेत, सरितताल व खुर्पाताल के क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। खंडपीठ ने कहा कि इस पर शपथपत्र पेश करें। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मई की तिथि नियत की है।<br /><br /></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 18:19:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उपनल सचिव को अवमानना का नोटिस, हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में मांगा जवाब  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने उपनल कर्मचारियों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए नवनियुक्त सचिव को अवमानना नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। <br />  </p>
<p>मामले के अनुसार, हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़े प्रकरण में पूर्व में आदेश देकर कहा था कि इनके नियमतिकरण के लिए सरकार विचार करे लेकिन तय समय सीमा के भीतर कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। अनुपालन नहीं करने पर पूर्व में सचिव के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की गई। इसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/537320/high-court-seeks-reply-in-contempt-of-contempt-to-upanal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/student-union-elections-in-srinagar_1668678494.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने उपनल कर्मचारियों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए नवनियुक्त सचिव को अवमानना नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। <br /> </p>
<p>मामले के अनुसार, हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़े प्रकरण में पूर्व में आदेश देकर कहा था कि इनके नियमतिकरण के लिए सरकार विचार करे लेकिन तय समय सीमा के भीतर कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। अनुपालन नहीं करने पर पूर्व में सचिव के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की गई। इसी बीच सरकार ने सचिव का तबादला कर उनकी जगह आनंद वर्धन को विभाग का जिम्मा संभालने के आदेश दिए।</p>
<p>अब विभागीय अधिकारी बदलने की वजह से कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट ने कहा कि नवनियुक्त सचिव को पक्षकार बनाएं और उन्हें नोटिस जारी कर अपना जवाब कोर्ट में प्रस्तुत करें। हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 जून की तारीख तय की है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 May 2025 10:51:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन सप्ताह में जांच पूरी करे पुलिस: हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल के गेठिया में स्थित महायोगी पायलट बाबा ट्रस्ट और बाबा की चल व अचल सम्पति को कूटरचित दस्तावेज वनाकर उसे हड़पने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई की। </p>
<p>मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ ने एसएसपी हरिद्वार को जो मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था, उस पर तीन सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि अगर उनको जानमाल का खतरा है तो उसके लिए भी वे प्रार्थनापत्र एसएसपी को दे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/536166/police-high-court-should-complete-investigation-in-three-weeks"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-05/high-court-uttarakhand-shift-nainital-to-haldwani-98993533.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल के गेठिया में स्थित महायोगी पायलट बाबा ट्रस्ट और बाबा की चल व अचल सम्पति को कूटरचित दस्तावेज वनाकर उसे हड़पने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई की। </p>
<p>मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ ने एसएसपी हरिद्वार को जो मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था, उस पर तीन सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि अगर उनको जानमाल का खतरा है तो उसके लिए भी वे प्रार्थनापत्र एसएसपी को दे सकते हैं। मामले के अनुसार, महायोगी पायलट बाबा के शिष्य स्वामी ब्रह्मानंद ने नैनीताल के तल्लीताल थाने में प्रार्थनापत्र देकर कहा कि पायलट बाबा ट्रस्ट व उनकी चल अचल सम्पति को हड़पने के लिए उनके कुछ सहयोगियों के द्वारा कूटरचित दस्तावेज बना लिए हैं।</p>
<p>यही नहीं, बाबा की वसीयत में भी हेराफेरी तक कर दी। बाबा की मृत्यु भी रहस्यमय कारणों से हुई है। बीमारी के दौरान उन्हें सही तरीके से स्वास्थ्य सुविधाएं तक नहीं मुहैय्या कराई गई। अस्पताल की अनुमति के बिना उन्हें डिस्चार्ज करा लिया गया। जब इसकी जांच कराने के लिए उन्होंने एसएसपी हरिद्वार को शिकायत की तो अभी तक उस पर जांच पूर्ण नहीं हुई जबकि नियमावली के तहत शिकायत करने के 15 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच हो जानी चाहिए थी। अब उनको भी जानमाल की धमकी दी जा रही है। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि मामले की जांच शीघ्र कराई जाय और उन्हें सुरक्षा भी दिलाई जाए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/536166/police-high-court-should-complete-investigation-in-three-weeks</link>
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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 11:25:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बनभूलपुरा दंगे के आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर हुई सुनवाई      </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बनभूलपुरा दंगे में शामिल कई आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर शुक्रवार को एक साथ सुनवाई की। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने फिलहाल उन्हें कोई राहत न देते हुए उनके प्रार्थनापत्र पर सरकार से अपनी आपत्ति दर्ज कराने को कहा है। अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई है।</p>
<p><br />    शुक्रवार को हुई सुनवाई पर आरोपी अब्दुल मोईद की ओर से एक अतिरिक्त शपथपत्र पेश कर कहा गया कि घटना के वक्त वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं था। शपथपत्र में उनके द्वारा</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/526472/hearing-on-the-bail-pleas-of-the-accused-of-banbhulpura"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/6650b9c4e35c8-haldwani-riot-240107522-16x9.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार: </strong>उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बनभूलपुरा दंगे में शामिल कई आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर शुक्रवार को एक साथ सुनवाई की। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने फिलहाल उन्हें कोई राहत न देते हुए उनके प्रार्थनापत्र पर सरकार से अपनी आपत्ति दर्ज कराने को कहा है। अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई है।</p>
<p><br />  शुक्रवार को हुई सुनवाई पर आरोपी अब्दुल मोईद की ओर से एक अतिरिक्त शपथपत्र पेश कर कहा गया कि घटना के वक्त वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं था। शपथपत्र में उनके द्वारा अपने पक्ष में कई साक्ष्य एवं बयान भी पेश किए गए, जिस पर कोर्ट ने सरकार से इनकी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। वहीं, कोर्ट ने अब्दुल चौधरी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि  घटना के समय जो अभियुक्त वहां मौजूद थे उन सबकी एक चार्जशीट बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत करें जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्हें बेवजह इसमें शामिल किया जा रहा है, लिहाजा उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। इस मामले से जुड़े कई आरोपियों की जमानत हो चुकी है। उसी के आधार पर उन्हें भी साक्ष्यों के अभाव पर जमानत पर रिहा किया जाए। इस मामले की पैरवी आज उनके अधिवक्ता विकाश गुगलानी और दीप चन्द्र जोशी ने की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/526472/hearing-on-the-bail-pleas-of-the-accused-of-banbhulpura</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 11:01:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने दी स्वतंत्र पत्रकार को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने कोटद्वार के स्वतंत्र पत्रकार के विरुद्ध कोटद्वार पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही करने पर रोक लगा दी है।</p>
<p>राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की पीठ में हुई। कोटद्वार के स्वतंत्र पत्रकार व सोशल मीडिया कर्मी सुधांशु थपलियाल ने याचिका में कहा कि 'हिट एन्ड रन' से पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने की एक पोस्ट उन्होंने फेसबुक पर 29 जनवरी 2025 को पोस्ट की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/526108/high-court-gave-relief-to-independent-journalist"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> हाईकोर्ट ने कोटद्वार के स्वतंत्र पत्रकार के विरुद्ध कोटद्वार पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही करने पर रोक लगा दी है।</p>
<p>राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की पीठ में हुई। कोटद्वार के स्वतंत्र पत्रकार व सोशल मीडिया कर्मी सुधांशु थपलियाल ने याचिका में कहा कि 'हिट एन्ड रन' से पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने की एक पोस्ट उन्होंने फेसबुक पर 29 जनवरी 2025 को पोस्ट की थी। इसको पुलिस की छवि खराब करने वाला बताते हुए पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।</p>
<p> जबकि उन्होंने 'हिट एंड रन' में हुई युवती के मौत पर चालक पर कार्यवाही करने को लेकर पोस्ट की थी। याचिका में कहा गया कि पुलिस कानून का दुरुपयोग करके आम आदमी के अधिकार को दबाने का प्रयास कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 11:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने किया सरकार से शपथपत्र तलब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार। </strong>हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव की आरक्षण रोटेशन नियमावली-2024 को चुनौती देती कई याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई की। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने के साथ ही सभी विजयी प्रत्याशियों को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने विजयी प्रत्याशियों का अपना पक्ष रखने का विकल्प खुला रखा है। मामले की सुनवाई 24 मार्च को होगी।</p>
<p>एक अन्य मामले में, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने पौड़ी जिले के कीर्ति नगर में मानकों के विरुद्ध चल रहे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/525744/high-court-summoned-affidavits-from-government"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-03/nainital-high-court-नैनीताल-हाईकोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार। </strong>हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव की आरक्षण रोटेशन नियमावली-2024 को चुनौती देती कई याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई की। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने के साथ ही सभी विजयी प्रत्याशियों को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने विजयी प्रत्याशियों का अपना पक्ष रखने का विकल्प खुला रखा है। मामले की सुनवाई 24 मार्च को होगी।</p>
<p>एक अन्य मामले में, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने पौड़ी जिले के कीर्ति नगर में मानकों के विरुद्ध चल रहे स्टोन क्रशर के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य प्रदूषण बोर्ड को 24 घंटे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>वहीं, शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के रूप में अधिसंख्यक पद पर चतुर्थ श्रेणी कार्मिक की नियुक्ति में सेवा की गणना, वेतन निर्धारण तथा सेवा निवृत्त लाभों से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की एकलपीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक, पिथौरागढ़ को 26 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 10:18:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>यूसीसी: 4 सप्ताह में सरकार दे जवाब   </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार:</strong> हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को चुनौती देती नैनीताल निवासी प्रो. उमा भट्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज तिवारी एवं न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने राज्य सरकार से याचिका में लगाए गए आरोपों पर चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने को कहा। हाईकोर्ट ने इस याचिका को भी यूसीसी को चुनौती देती पूर्व में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ सम्बद्ध कर दिया है। इन सभी याचिकाओं की सुनवाई हेतु 1 अप्रैल की तिथि नियत है।</p>
<p>यूसीसी के खिलाफ हाईकोर्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/524899/ucc-gives-the-government-reply-in-4-weeks"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-02/download-8-10.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार:</strong> हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को चुनौती देती नैनीताल निवासी प्रो. उमा भट्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज तिवारी एवं न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने राज्य सरकार से याचिका में लगाए गए आरोपों पर चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने को कहा। हाईकोर्ट ने इस याचिका को भी यूसीसी को चुनौती देती पूर्व में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ सम्बद्ध कर दिया है। इन सभी याचिकाओं की सुनवाई हेतु 1 अप्रैल की तिथि नियत है।</p>
<p>यूसीसी के खिलाफ हाईकोर्ट में अब तक कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। इन याचिकाओं में मुख्यतः 'लिव इन रिलेशनशिप' व 'मुस्लिम समुदाय की विवाह पद्धति में किए गए बदलाव व मुस्लिम, पारसी के रीति रिवाजों की अनदेखी करने के प्रावधानों को चुनौती दी गई है। लिव इन रिलेशन में रह रहे लोगों का कहना है कि उनसे जो फार्म रजिस्ट्रेशन के लिए भरवाया जा रहा है उसमें कई तरह की पूर्व जानकारी मांगी गई हैं। अगर वे पूर्व की जानकारी फार्म में भरते हैं तो उन्हें जानमाल का खतरा भी हो सकता है। यह उनकी निजता का उल्लंघन भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/524899/ucc-gives-the-government-reply-in-4-weeks</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 19:05:51 +0530</pubDate>
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