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                <title>reprimand - Amrit Vichar</title>
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                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी और शाह पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले वकील को फटकार लगाई </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले एक वकील की फटकार लगायी है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान चेतावनी दी कि किसी कानून या विचारधारा से असहमति को आपराधिक अपराध में नहीं बदला जा सकता। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने पूछा, "अगर संसद कोई अवैध कानून पारित करती है, तो क्या यह अपराध है?" अदालत ने स्पष्ट किया कि इसका समाधान संवैधानिक चुनौती में है, न कि कानून निर्माताओं पर मुकदमा चलाने में। जब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/573565/supreme-court-reprimands-lawyer-who-sought-fir-against-pm-modi-and-shah"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-01/सुप्रीम-कोर्ट.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले एक वकील की फटकार लगायी है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान चेतावनी दी कि किसी कानून या विचारधारा से असहमति को आपराधिक अपराध में नहीं बदला जा सकता। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने पूछा, "अगर संसद कोई अवैध कानून पारित करती है, तो क्या यह अपराध है?" अदालत ने स्पष्ट किया कि इसका समाधान संवैधानिक चुनौती में है, न कि कानून निर्माताओं पर मुकदमा चलाने में। जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को पता चला कि उक्त वकील 1995 से प्रैक्टिस कर रहे हैं, तो उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि लोग कानूनी पेशे के सदस्यों पर भरोसा करते हैं, इसलिए ऐसे तुच्छ आवेदन नहीं दाखिल करने चाहिए। न्यायालय की टिप्पणियों के बाद वकील ने अपनी गलती स्वीकार की और कहा कि वह मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने वचन दिया कि वह अलवर में पुलिस को दी गई अपनी पिछली शिकायत के संबंध में कोई समान शिकायत या याचिका दायर नहीं करेंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">वकील के खेद व्यक्त करने और भविष्य में ऐसी कार्यवाही न करने का वचन देने के बाद, न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उन पर लगाए गए 50,000 रुपये के जुर्माने को स्थगित कर दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वकील ने अपने वचन का उल्लंघन किया, तो यह जुर्माना आदेश प्रभावी हो जाएगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 20:39:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पेश होने का निर्देश  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के अलावा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को तीन नवंबर को अदालत में उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों के मामले में अनुपालन हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया गया।</p>
<p>न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि केवल दिल्ली नगर निगम और पश्चिम बंगाल तथा तेलंगाना राज्यों ने ही शीर्ष अदालत के 22 अगस्त के आदेश के अनुपालन में अपने हलफनामे दाखिल किए हैं। </p>
<p>पीठ ने अनुपालन हलफनामा दाखिल न करने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/557535/supreme-court-reprimands-chief-secretaries-of-all-states-and-union-territories-over-stray-dog-%E2%80%8B%E2%80%8Bissue--directing-them-to-appear-before-it"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-10/untitled-design-(5)15.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>दिल्ली। </strong>उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के अलावा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को तीन नवंबर को अदालत में उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों के मामले में अनुपालन हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया गया।</p>
<p>न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि केवल दिल्ली नगर निगम और पश्चिम बंगाल तथा तेलंगाना राज्यों ने ही शीर्ष अदालत के 22 अगस्त के आदेश के अनुपालन में अपने हलफनामे दाखिल किए हैं। </p>
<p>पीठ ने अनुपालन हलफनामा दाखिल न करने के लिए अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आलोचना करते हुए कहा कि 22 अगस्त के हलफनामे में सब कुछ कहा गया था। पीठ आवारा कुत्तों से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। </p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने 22 अगस्त को आवारा कुत्तों के मामले का दायरा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से आगे बढ़ाते हुए निर्देश दिया था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाया जाए। </p>
<p>शीर्ष अदालत ने 22 अगस्त के अपने आदेश में दिल्ली-एनसीआर में टीकाकरण किए गए आवारा कुत्तों को बाड़ों से बाहर छोड़ने पर रोक लगाने के अपने पहले के निर्देश को संशोधित किया था और कुत्तों को नसबंदी तथा कृमि-मुक्त करने के बाद छोड़ने का आदेश दिया था। उसने अपने पहले के आदेश को ‘‘बहुत कठोर’’ बताया था। </p>
<p><strong>ये भी पढ़े : </strong></p>
<h5 class="post-title"><a href="https://www.amritvichar.com/article/557532/imd-warning-regarding-cyclone-montha--deep-depression-over-the-bay-of-bengal--yellow-alert-issued-for-these-states"><span class="t-red">चक्रवात मोन्था को लेकर IMD की चेतावनी:</span> बंगाल की खाड़ी के ऊपर गहरा दबाव, इन राज्यों के लिए येलो अलर्ट जारी </a></h5>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/557535/supreme-court-reprimands-chief-secretaries-of-all-states-and-union-territories-over-stray-dog-%E2%80%8B%E2%80%8Bissue--directing-them-to-appear-before-it</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Oct 2025 11:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : लोक अदालत के फैसले को चुनौती देने पर एलआईसी को लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा एक पॉलिसीधारक के पक्ष में पारित बहुत छोटी धनराशि को चुनौती देने पर आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि याची यानी बीमा कंपनी ने बहुत ही दयनीय राशि के खिलाफ वर्तमान याचिका दाखिल की है। इसके साथ ही याचिका दाखिल करने में खर्च हुई कानूनी फीस को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने पाया कि याचिका को आगे बढ़ाने की लागत लोक अदालत, अलीगढ़ द्वारा दी गई राशि से अधिक प्रतीत होती है।</p>
<p>कोर्ट ने एलआईसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को हलफनामे के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/535712/lic-reprimanded-for-challenging-the-decision-of-prayagraj-lok-adalat"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/कोर्ट-इलाहाबाद-कोर्ट6.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा एक पॉलिसीधारक के पक्ष में पारित बहुत छोटी धनराशि को चुनौती देने पर आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि याची यानी बीमा कंपनी ने बहुत ही दयनीय राशि के खिलाफ वर्तमान याचिका दाखिल की है। इसके साथ ही याचिका दाखिल करने में खर्च हुई कानूनी फीस को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने पाया कि याचिका को आगे बढ़ाने की लागत लोक अदालत, अलीगढ़ द्वारा दी गई राशि से अधिक प्रतीत होती है।</p>
<p>कोर्ट ने एलआईसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को हलफनामे के माध्यम से यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि लोक अदालत द्वारा पारित धनराशि पॉलिसीधारक को क्यों न दी जाए। दरअसल एलआईसी ने लोक अदालत के एक आदेश के खिलाफ वर्तमान याचिका दाखिल की, जिसमें उसे मेघ श्याम शर्मा (पॉलिसीधारक) को जमा राशि 7% ब्याज और 5 हजार रुपए मुकदमेबाजी के खर्च के साथ वापस करने का निर्देश दिया गया था। उक्त आदेश पॉलिसीधारक के आवेदन पर पारित किया गया था, जिसने एलआईसी से पांच बीमा पॉलिसियां खरीदी थीं,जो बाद में पॉलिसी की शर्तों को पूरा न करने के कारण समाप्त हो गईं।</p>
<p>समाप्त हो चुकी पॉलिसियों के तहत कोई लाभ अर्जित ना होने के कारण लोक अदालत ने एलआईसी को जमा राशि वापस करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के समक्ष एलआईसी ने बताया कि विपक्षी ने पॉलिसियों की शर्तों का पालन नहीं किया, इसलिए वह किसी भी राशि का हकदार नहीं है। हालांकि इस तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विपक्षी केवल पहले से जमा की गई राशि मांग रहा है और लोक अदालत ने भी उसे कोई अतिरिक्त या अनुचित राहत नहीं दी है। इसके साथ ही लोक अदालत द्वारा पॉलिसीधारक को 74,508 रुपए देने के आदेश को चुनौती देने पर एलआईसी की खिंचाई की।<br /><br /></p>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong><span style="color:rgb(0,0,0);">यह भी पढ़ें:-</span><a style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/535710/prayagraj-sambhal-jama-masjid-case-will-now-be-heard-on#gsc.tab=0">प्रयागराज : संभल जामा मस्जिद मामले की सुनवाई अब 5 मई को होगी</a></strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 22:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : नीलामी से जुड़े एक मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा की &quot;अवैध और मनमाना कार्यवाही के लिए लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपत्ति की नीलामी से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के "अवैध और मनमाना" व्यवहार पर फटकार लगाते हुए कहा कि इस विशेष मामले में बैंक की उपरोक्त कार्रवाई स्पष्ट रूप से कानून के दायरे से परे, मनमानी, स्वेच्छाचारी और कानून में स्थापित सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। बयाना राशि स्वीकार कर नीलामी क्रेता को संपत्ति बेचने के बाद बैंक किसी भी तरह से मूल उधारकर्ता को संपत्ति वापस नहीं कर सकता है।</p>
<p>बैंक के आचरण को अनुचित मानते हुए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और बैंक को निर्देश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/534825/bank-of-baroda-reprimanded-for-illegal-and-arbitrary-action-in"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/कोर्ट-इलाहाबाद-कोर्ट5.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपत्ति की नीलामी से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के "अवैध और मनमाना" व्यवहार पर फटकार लगाते हुए कहा कि इस विशेष मामले में बैंक की उपरोक्त कार्रवाई स्पष्ट रूप से कानून के दायरे से परे, मनमानी, स्वेच्छाचारी और कानून में स्थापित सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। बयाना राशि स्वीकार कर नीलामी क्रेता को संपत्ति बेचने के बाद बैंक किसी भी तरह से मूल उधारकर्ता को संपत्ति वापस नहीं कर सकता है।</p>
<p>बैंक के आचरण को अनुचित मानते हुए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और बैंक को निर्देश दिया कि वह नीलामी क्रेता को बयाना राशि पर 24% प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करे । यद्यपि अपने अधिवक्ता के माध्यम से बैंक ने अवैध कार्रवाई के लिए बिना शर्त माफी मांगी, फिर भी कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह नीलामी क्रेता को क्षतिपूर्ति के रूप में 24% ब्याज दर के साथ बयाना राशि वापस करे। उक्त आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति डॉ योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सौरभ सिंह चौहान द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याची ने सरफेसाई अधिनियम के तहत उक्त संपत्ति के लिए सफलतापूर्वक बोली लगाई थी।</p>
<p>मामले के अनुसार नीलामी प्रक्रिया पूरी करने और सफल बोलीदाता (नीलामी क्रेता) से बयाना राशि स्वीकार करने के बावजूद नीलाम की गई संपत्ति को उधारकर्ता (मूल उधारकर्ता) को वापस कर दिया गया, जिसके लिए कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा की कार्रवाई को "मनमाना, सनकी और स्वेच्छाचारी " बताया। अंत में कोर्ट ने बैंक को मामले की अगली सुनवाई पर यानी 30 अप्रैल को पूरी निर्दिष्ट राशि के लिए डिमांड ड्राफ्ट के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:- <a href="https://www.amritvichar.com/article/534823/mother-and-two-children-died-innocent-serious-by-burning-barabanki#gsc.tab=0">बाराबंकी : आग से जलकर मां व दो बच्चों की मौत, पति मासूम गंभीर</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/534825/bank-of-baroda-reprimanded-for-illegal-and-arbitrary-action-in</link>
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                <pubDate>Tue, 22 Apr 2025 21:15:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Prayagraj News : श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले की गलत रिपोर्टिंग पर लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में चल रही अदालती कार्यवाही की गैर- जिम्मेदाराना और गलत रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यह न्यायालय उम्मीद करता है कि मीडियाकर्मी इस मामले की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय उचित संयम बरतेंगे और इस संबंध में न्यायालय के आदेशों की गरिमा और पवित्रता बनाए रखेंगे, साथ ही जो मामले की कार्यवाही या आदेशों को गलत तरीके से प्रस्तुत करें,इस तरह की रिपोर्टिंग को अवमानना के बराबर समझा जाएगा।</p>
<p>उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकलपीठ ने विवाद से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/509452/prayagraj-news-reprimanded-for-wrong-reporting-of-shri-krishna-janmabhoomi-shahi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-12/कोर्ट1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज, अमृत विचार : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में चल रही अदालती कार्यवाही की गैर- जिम्मेदाराना और गलत रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यह न्यायालय उम्मीद करता है कि मीडियाकर्मी इस मामले की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय उचित संयम बरतेंगे और इस संबंध में न्यायालय के आदेशों की गरिमा और पवित्रता बनाए रखेंगे, साथ ही जो मामले की कार्यवाही या आदेशों को गलत तरीके से प्रस्तुत करें,इस तरह की रिपोर्टिंग को अवमानना के बराबर समझा जाएगा।</p>
<p>उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकलपीठ ने विवाद से संबंधित वाद संख्या 18 के अधिवक्ता द्वारा दाखिल आवेदन पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में मामले की गलत रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग की गई थी।</p>
<p>गौरतलब है कि हाई कोर्ट वर्तमान में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से संबंधित कई मुकदमों की एक साथ सुनवाई कर रहा है, जिसमें मथुरा में कटरा केशव देव मंदिर की 13.37 एकड़ के परिसर से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। अतिरिक्त प्रार्थनाओं में शाही ईदगाह परिसर पर कब्जा करने और वर्तमान संरचना को ध्वस्त करने की मांग भी शामिल है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- <a href="https://www.amritvichar.com/article/509451/prayagraj-news-bench-recuses-itself-from-hearing-zubairs-petition#gsc.tab=0">Prayagraj News : जुबैर की याचिका पर सुनवाई से पीठ ने खुद को किया अलग</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                            <category>मथुरा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Dec 2024 20:32:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Prayagraj News :  मृत कर्मचारियों के परिवारीजनों की परेशानी के प्रति उदासीन अधिकारियों को लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार, प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के सेवानिवृत्त परिलाभों के बकाया भुगतान के प्रति राज्य अधिकारियों की उदासीनता पर चिंता जताते हुए कहा कि सेवानिवृत्त बकाया राशि के भुगतान में देरी का कारण संबंधित अधिकारियों की उदासीनता है। अधिकारियों से कानून के अनुसार तत्परता और सहानुभूति के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारी कर्मचारियों के प्रति अधिकारी असंवेदनशील हो गए हैं, इसीलिए कर्मचारियों के परिवारीजनों की दुर्दशा और परेशानी उन्हें दिखाई नहीं देती।</p>
<p>उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकलपीठ ने कृष्णावती की याचिका को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/507428/prayagraj-news"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/कोर्ट12.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार, प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के सेवानिवृत्त परिलाभों के बकाया भुगतान के प्रति राज्य अधिकारियों की उदासीनता पर चिंता जताते हुए कहा कि सेवानिवृत्त बकाया राशि के भुगतान में देरी का कारण संबंधित अधिकारियों की उदासीनता है। अधिकारियों से कानून के अनुसार तत्परता और सहानुभूति के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारी कर्मचारियों के प्रति अधिकारी असंवेदनशील हो गए हैं, इसीलिए कर्मचारियों के परिवारीजनों की दुर्दशा और परेशानी उन्हें दिखाई नहीं देती।</p>
<p>उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकलपीठ ने कृष्णावती की याचिका को स्वीकार करते हुए, साथ ही मृत कर्मचारी की पेंशन और अन्य टर्मिनल बकाया राशि के विलंबित भुगतान के लिए याची को 8% प्रतिवर्ष ब्याज का 3 महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने 18 अगस्त 2005 से 23 दिसंबर 2019 तक ब्याज राशि के भुगतान का निर्देश दिया है और यह भी स्पष्ट किया कि अगर उक्त अवधि के भीतर राशि जारी नहीं की जाती है तो संबंधित अधिकारी 3 महीने के बाद ब्याज के विलंबित भुगतान के लिए उत्तरदायी होंगे। दरअसल वर्ष 2005 में सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो गई।</p>
<p>पति की मृत्यु के बाद लंबे समय तक बकाया राशि का भुगतान न होने पर कर्मचारी की पत्नी ने याचिका दाखिल की, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि बकाया राशि को सक्षम अधिकारियों द्वारा अगस्त 2005 में ही प्रमाणित और सत्यापित कर दिया गया, लेकिन उनकी पत्नी को दिसंबर 2019 तक बकाया राशि प्राप्त नहीं हुई। अतः उन्होंने अवमानना याचिका दाखिल की। कोर्ट ने अधिकारियों के ऐसे लापरवाह रवैए पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि दबंग अधिकारियों द्वारा मृत कर्मचारियों के परिवार को उसके अधिकारों के लिए परेशान नहीं किया जा सकता है। विपक्षियों की उदासीनता के कारण कर्मचारी की पत्नी की दुर्दशा हो गई। अंत में कोर्ट ने कर्मचारी के लंबित भुगतान को शीघ्र निस्तारित करने का आदेश दिया।</p>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><em><strong>यह भी पढ़ें- <a style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.amritvichar.com/article/507425/barabanki-news#gsc.tab=0">Barabanki News : औषधि निरीक्षक टीम ने चार मेडिकल स्टोरों को कराया बंद</a></strong></em></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/507428/prayagraj-news</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Nov 2024 21:09:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज : अधिवक्ता द्वारा प्रवर्तन निदेशालय को ईमेल भेजने पर लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अमृत विचार, प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धन शोधन से संबंधित एक मामले में एक आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सीधे संवाद करने के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि ईमेल भेजकर अधिकारियों को अदालत के आदेश की याद दिलाना और उनसे इसका अनुपालन करने का अनुरोध करना मामले से संबंधित अधिवक्ताओं के कर्तव्यों के दायरे में नहीं आता है। अगर अधिकारियों द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है तो इसके लिए पीठ को सूचित करना चाहिए।</p>
<p>कोर्ट ने अधिवक्ताओं के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/506101/prayagraj-advocate-reprimanded-for-sending-email-to-enforcement-directorate"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-11/कोर्ट7.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार, प्रयागराज : </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धन शोधन से संबंधित एक मामले में एक आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सीधे संवाद करने के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि ईमेल भेजकर अधिकारियों को अदालत के आदेश की याद दिलाना और उनसे इसका अनुपालन करने का अनुरोध करना मामले से संबंधित अधिवक्ताओं के कर्तव्यों के दायरे में नहीं आता है। अगर अधिकारियों द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है तो इसके लिए पीठ को सूचित करना चाहिए।</p>
<p>कोर्ट ने अधिवक्ताओं के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के व्यावसायिक आचरण से संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई भी अधिवक्ता किसी भी तरह से विवाद के विषय पर किसी भी पक्ष के साथ संवाद या बातचीत नहीं कर सकता है। मामले से जुड़े अधिवक्ताओं की कार्यवाही उचित नहीं थी। इसकी सराहना किसी भी दशा में नहीं की जा सकती है। कोई अधिवक्ता अपने मुवक्किल के साथ अपनी पहचान नहीं बन सकता है। वह किसी भी स्थिति में किसी भी जांच अधिकारी से सीधे बातचीत नहीं कर सकता है, जब तक अदालत द्वारा ऐसा करने के लिए आदेश न दिया जाए। उक्त आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दिल्ली स्थित तेल कंपनी के प्रमोटर पदम सिंघी को जमानत देते हुए पारित किया। याची के खिलाफ आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,1988 की धारा के तहत मामला दर्ज किया गया था।</p>
<p>याची ने मेसर्स एसवीओजीएल ऑयल गैस एंड एनर्जी लिमिटेड के नाम पर लोन लेकर पंजाब नेशनल बैंक से 252 करोड़ रुपए की ठगी की और विभिन्न फर्जी कंपनियों में पैसा ट्रांसफर किया। अंत में कोर्ट ने अधिवक्ताओं के आचरण पर गहरी नाराजगी जताते हुए उनके कृत्य को न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन बताया। हालांकि अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि भेजे गए ईमेल, एजेंसी को न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने के लिए केवल एक अनुस्मारक के रूप में थे, लेकिन उनके तर्क को कोर्ट ने खारिज कर दिया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- <a href="https://www.amritvichar.com/article/506100/prayagraj%C2%A0#gsc.tab=0">प्रयागराज : GST Registration निलंबन के आधार पर पारगमन में माल पर जुर्माने की मांग उचित नहीं</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/506101/prayagraj-advocate-reprimanded-for-sending-email-to-enforcement-directorate</link>
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                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 23:04:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>8.25 करोड़ में 45 लाख खर्च, फटकार : डीपीआरओ ने की बीकेटी और माल ब्लॉक की समीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ, अमृत विचार </strong>: जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों के लिए मिला 8.25 करोड़ बजट में मात्र 45 लाख रुपये खर्च किए गए। केंद्र व राज्य वित्त की धनराशि भी पूरी खर्च नहीं की गई। जिला पंचायत राज अधिकारी हिमांशू शेखर ठाकुर को समीक्षा में लापरवाही मिलने पर सचिवों को फटकार लगाई।</p>
<p>उन्होंने गुरुवार विकास भवन कार्यालय में बीकेटी और माल ब्लॉक की एडीओ पंचायत व सचिवों के साथ विकास कार्यों व भुगतान की समीक्षा की। इस दौरान केंद्र व राज्य वित्त आयोग की धनराशि पूरी खर्च न होने पर नाराजगी जताई। जो इस माह और प्रगति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/496185/45-lakh-expenditure-out-of-825-crores-reprimanded%C2%A0"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-10/समीक्षा-बैठक.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ, अमृत विचार </strong>: जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों के लिए मिला 8.25 करोड़ बजट में मात्र 45 लाख रुपये खर्च किए गए। केंद्र व राज्य वित्त की धनराशि भी पूरी खर्च नहीं की गई। जिला पंचायत राज अधिकारी हिमांशू शेखर ठाकुर को समीक्षा में लापरवाही मिलने पर सचिवों को फटकार लगाई।</p>
<p>उन्होंने गुरुवार विकास भवन कार्यालय में बीकेटी और माल ब्लॉक की एडीओ पंचायत व सचिवों के साथ विकास कार्यों व भुगतान की समीक्षा की। इस दौरान केंद्र व राज्य वित्त आयोग की धनराशि पूरी खर्च न होने पर नाराजगी जताई। जो इस माह और प्रगति बढ़ाते हुए और 10 फीसद खर्च करने के निर्देश दिए। वहीं, ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों के लिए आवंटित 8.25 करोड़ रुपये में 45 लाख खर्च होने पर सचिवों को फटकर लगाई।</p>
<p>बीकेटी के बेहटा गांव में पंचायत भवन का लिंटर, इंटरलॉकिंग व माल की आंट ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल अधूरा होने पर संबंधित सचिवों को कार्रवाई की चेतावनी देते हुए एक सप्ताह में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके अलावा सभी गांव में कूड़ा गाड़ी चलाकर घर-घर कूड़ा कलेक्शन करने को कहा। बैठक में जिला समन्वयक अभिनव त्रिवेदी, अभिषेक गुप्ता व जिला परियोजना प्रबंधक कृष्ण प्रताप सिंह रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/496185/45-lakh-expenditure-out-of-825-crores-reprimanded%C2%A0</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2024 19:55:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैट की आपत्तिजनक टिप्पणी पर लगाई फटकार, जानें क्या कहा...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण द्वारा एक आदेश में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को अनुचित ठहराते हुए कहा कि कोर्ट कर्मचारी के पक्ष में कानून के आधार पर उसके पक्ष में फैसला सुनाती है, इसमें कोई एहसान नहीं करती। जो आदेश अधिकरण अथवा कोर्ट देती है, वह कानून के मुताबिक होता है। उक्त टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने रेलवे कर्मी अविनाशी प्रसाद की याचिका को स्वीकार करते हुए की। </p>
<p>याचिका कैट द्वारा आक्षेपित आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। आदेश के माध्यम से कैट ने याची को पुरानी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/486999/allahabad-high-court-reprimanded-cat-for-its-objectionable-comment--know-what-it-said-"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-08/इलाहाबाद-हाईकोर्ट1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण द्वारा एक आदेश में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को अनुचित ठहराते हुए कहा कि कोर्ट कर्मचारी के पक्ष में कानून के आधार पर उसके पक्ष में फैसला सुनाती है, इसमें कोई एहसान नहीं करती। जो आदेश अधिकरण अथवा कोर्ट देती है, वह कानून के मुताबिक होता है। उक्त टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने रेलवे कर्मी अविनाशी प्रसाद की याचिका को स्वीकार करते हुए की। </p>
<p>याचिका कैट द्वारा आक्षेपित आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। आदेश के माध्यम से कैट ने याची को पुरानी पेंशन स्कीम में शामिल करने से इस आधार पर इनकार कर दिया था कि नौकरी मिल गई उसे धन्यवाद देना चाहिए, वरना सैकड़ों लोग कोर्ट में नौकरी के लिए मुकदमा लड़ रहे हैं। याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची की पदोन्नति 3 फरवरी 1990 की बनी वरिष्ठता सूची के आधार पर हुई थी। इस कारण याची को सभी सेवाजनित परिणामी लाभ उसी तिथि से मिलने चाहिए, लेकिन कैट ने उसे देने से मना कर दिया। </p>
<p>दरअसल याची रेलवे में ट्रैकमैन ग्रुप (डी) पद पर कार्यरत था। उसका सीनियर सेक्शन इंजीनियर पद पर कर दिया गया। याची की मांग थी कि उसकी नौकरी को देखते हुए उसे पुरानी पेंशन योजना में शामिल कर लिया जाए। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका को स्वीकार कर कैट के आदेश को रद्द कर दिया और याची को पुरानी पेंशन स्कीम में शामिल करने का निर्देश दिया।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a class="post-title" href="https://www.amritvichar.com/article/486946/bhim-sena-chiefs-warning-on-bharat-bandh-on-august-21">21 अगस्त: भारत बंद पर भीम सेना प्रमुख की चेतावनी, हिंसा भड़कने की आशंका, इंटेलिजेंस ने दिए इनपुट</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>प्रयागराज</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Aug 2024 08:31:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोचिंग सेंटर में अभ्यर्थियों की मौत मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राधिकारियों को लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक कोचिंग सेंटर की इमारत के 'बेसमेंट' में पानी भरने से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत के मामले में प्राधिकारियों को बुधवार को फटकार लगाई और कहा कि जब ‘‘मुफ्त की सौगातें बांटने की संस्कृति’’ के कारण कर संग्रह नहीं होता है, तब ऐसी त्रासदियां होना स्वाभाविक है।</p>
<p>  कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की पीठ ने कहा कि एक 'अजीब जांच' चल रही है, जिसमें कोचिंग सेंटर के पास से गुजरने वाले कार चालक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई, लेकिन दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों के</p>
<p>पीठ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/483424/delhi-high-court-reprimanded-the-authorities-in-the-case-of-death-of-candidates-in-coaching-center"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/cats633.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक कोचिंग सेंटर की इमारत के 'बेसमेंट' में पानी भरने से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत के मामले में प्राधिकारियों को बुधवार को फटकार लगाई और कहा कि जब ‘‘मुफ्त की सौगातें बांटने की संस्कृति’’ के कारण कर संग्रह नहीं होता है, तब ऐसी त्रासदियां होना स्वाभाविक है।</p>
<p> कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की पीठ ने कहा कि एक 'अजीब जांच' चल रही है, जिसमें कोचिंग सेंटर के पास से गुजरने वाले कार चालक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई, लेकिन दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों के खिलाफ नहीं। </p>
<p>पीठ ने कहा कि बहुमंजिला इमारतों को संचालित करने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन पानी की उचित निकासी की व्यवस्था नहीं है। उसने कहा, ‘‘आप मुफ्त की सौगातें बांटने की संस्कृति चाहते हैं, कर नहीं वसूलना चाहते... इसलिए ऐसा तो होना ही है।’’ पीठ ने प्राधिकारियों पर तंज करते हुए कहा कि उन्हें बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की जरूरत है, लेकिन वे दिवालिया हो गए हैं और वेतन भी नहीं दे पा रहे हैं। </p>
<p>उच्च न्यायालय 27 जुलाई की शाम को ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में एक कोचिंग सेंटर की इमारत के 'बेसमेंट' में बारिश का पानी भर जाने के कारण तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत के मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। मृतक अभ्यर्थियों में उत्तर प्रदेश की श्रेया यादव (25), तेलंगाना की तान्या सोनी (25) और केरल के नेविन डेल्विन (24) शामिल थे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें -<a href="https://www.amritvichar.com/article/483346/santosh-gangwar-became-the-12th-governor-of-jharkhand--chief-justice-of-high-court-administered-the-oath-at-raj-bhavan#gsc.tab=0">झारखंड के 12वें राज्यपाल के रूप में संतोष गंगवार ने ली शपथ, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी रहे मौजूद</a></strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 14:29:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायबरेली: सीएचसी में अव्यवस्था देख डिप्टी सीएम का चढ़ा पारा, जमकर लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायबरेली, अमृत विचार।</strong> उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बछरावां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उपमुख्यमंत्री के निरीक्षण से अफरा-तफरी का माहौल हो गया और निरीक्षण में कमियां मिलने पर सीएचसी अधीक्षक को फटकार लगाई और जल्द से जल्द कमियों को सुधारने के निर्देश दिए।              </p>
<p>बृहस्पतिवार को सुबह-सुबह डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बछरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँच गए। पहुंचते ही डिप्टी सीएम वहां पर बैठे बुजुर्ग के पास गए उनसे पूछा क्या है तो बुजुर्ग ने कहा अपने बेटे को दिखाने लाया हूं। फिर डिप्टी सीएम ने पर्चा काउंटर में जाकर बुजुर्ग का पर्चा बनवाया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/480766/raebareli--deputy-cm-got-furious-after-seeing-chaos-in-chc--reprimanded-him-severely"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-07/cats328.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायबरेली, अमृत विचार।</strong> उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बछरावां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उपमुख्यमंत्री के निरीक्षण से अफरा-तफरी का माहौल हो गया और निरीक्षण में कमियां मिलने पर सीएचसी अधीक्षक को फटकार लगाई और जल्द से जल्द कमियों को सुधारने के निर्देश दिए।              </p>
<p>बृहस्पतिवार को सुबह-सुबह डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बछरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँच गए। पहुंचते ही डिप्टी सीएम वहां पर बैठे बुजुर्ग के पास गए उनसे पूछा क्या है तो बुजुर्ग ने कहा अपने बेटे को दिखाने लाया हूं। फिर डिप्टी सीएम ने पर्चा काउंटर में जाकर बुजुर्ग का पर्चा बनवाया और डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी।</p>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2024-07/311.jpg" alt="3" width="1280" height="720"></img></p>
<p>उपमुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण की जानकारी होते ही सीएचसी के कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। डिप्टी सीएम ने निरीक्षण के दौरान गंदगी और पार्किंग को लेकर सीएचसी अधीक्षक को खूब फटकार लगाई। परिसर में खड़ी गाड़ियो को तत्काल हटाने के निर्देश दिए।</p>
<h5><strong><em>11 अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई का आदेश</em></strong></h5>
<p>डिप्टी सीएम के निरीक्षण के दौरान सीएचसी में मौजूद 41 स्टाफ कर्मियों में से 11 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। यही नही अस्पताल परिसर में गंदगी व अवैध वाहनों की पार्किंग पर सीएचसी अधीक्षक को खरी खोटी सुनाई । साथ ही अनुपस्थित रहने वाले स्टाफ के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">रायबरेली <br /><br />सरकारी अस्पताल, बछरांवा CHC पहुंचे उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक<br /><br />औचक निरीक्षण में मिले 11 कर्मचारी गैरहाजिर, एक डॉक्टर एक महीने से गायब, सभी के खिलाफ कारवाई के दिये गए आदेश <a href="https://twitter.com/brajeshpathakup?ref_src=twsrc%5Etfw">@brajeshpathakup</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Raibareily?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Raibareily</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/UttarPradesh?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#UttarPradesh</a> <a href="https://t.co/ufWixxeomt">pic.twitter.com/ufWixxeomt</a></p>
— Amrit Vichar (@AmritVichar) <a href="https://twitter.com/AmritVichar/status/1813806626748723704?ref_src=twsrc%5Etfw">July 18, 2024</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://www.amritvichar.com/article/480758/dgp-expressed-displeasure-over-lack-of-compliance-with-orders">लखनऊ : आदेशों के अनुपालन में कमी को लेकर डीजीपी ने जताई नाराजगी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>रायबरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 10:39:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीतापुर : जमीन नपाई के नाम पर लेखपाल ने लिए 4 हजार तो भाजपा विधायक ने लगाई फटकार </title>
                                    <description><![CDATA[सिधौली के बाद सेवता विधायक ने तहसील प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/475011/sitapur-accountant-took-4-thousand-rupees-in-the-name-of"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-06/विधायक-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सीतापुर,अमृत विचार। </strong>विकासखंड सेउता इलाके में ग्राम चौपाल में सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक ने फरियादी की शिकायत पर घूसखोरी का आरोप लगाकर लेखपाल को जमकर फटकार लगाई। गरीब व्यक्ति से खेतों की नपाई के नाम पर लिए गये 4 हजार रूपये की वसूली की शिकायत सुनकर विधायक का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। विधायक ने जनता और फरियादी के सामने ही लेखपाल को बुलाकर पैसे लेने की बात स्वीकार करवाई। विधायक की फटकार के बाद लेखपाल ने गरीब व्यक्ति के पैसे वापस करने की बात कहीं। विधायक ने सिस्टम को भी कटघरे में खड़े कर सवालियां निशान खड़े कर दिए है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार सेवता विधायक ज्ञान तिवारी क्षेत्र के बजहा गांव में ग्राम चौपाल में शामिल होने गए थे। इस दौरान एक फरियादी ने शिकायत की कि लेखपाल कुर्बान अली ने जमीन की नपाई के लिए चार हजार रुपए लिए है। यह सुनते ही विधायक का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उन्होने लेखपाल को बुलाकर फरियादी के पैसे वापस करने को कहा और सभी के सामने खरी खोटी सुनाते हुए पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। ग्रामीण की शिकायत के बाद भड़के विधायक ने पूरे सिस्टम को घूसखोर बता दिया।</p>
<p>जनप्रनिधियों के आरोप से कही न कही सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है। लेखपाल को फटकारते हुए  विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस नीति के अनुसार कार्य कर रहे है और आप सब उन्हे बदनाम करने में लगे है। विधायक ने कहा कि मेरे क्षेत्र में किसी प्रकार की दलाली नही चलेगी। विधायक के गुस्से को देखकर लेखपाल ने पैसे लेने की बात स्वीकार करते हुए जल्द ही पैसे वापस करने की बात स्वीकार की। ग्राम चौपाल के दौरान विधायक की नाराजगी से अफसर सख्ते में आ गये। एसडीएम बिसवां ने बताया कि विधायक के आरोप संज्ञान में है,पूरे प्रकरण की जांच तहसीलदार को सौंपी गई है। जांच आख्या आने पर सम्बंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।</p>
<p> </p>
<p><em><strong>यह भी पढ़ें:- <a href="https://www.amritvichar.com/article/474643/digital-arrest-hello-i-am-cbi-officer-akash-kulhari-you#gsc.tab=0">Hello! मैं CBI अधिकारी बोल रहा हूं, आप राजकुंदरा मनी लॉन्ड्रिंग में दोषी है..., लखनऊ के व्यासायी से ठगे 43 लाख</a></strong></em></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>सीतापुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jun 2024 22:19:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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