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                <title>मजबूरी - Amrit Vichar</title>
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                <description>मजबूरी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नैनीताल: रोडवेज बसों की कमी से लोग परेशान, पास बनाने के बावजूद टैक्सी में जाना मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> नैनीताल बस स्टैंड में रोजाना 4 से 5 बजे तक रोडवेज की एक भी बस उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>4 बजे के बाद ही स्कूली बच्चे और कर्मचारियों का सबसे अधिक आना-जाना रहता है। और इस समय पर रोडवेज बस स्टैंड में एक भी बस उपलब्ध नहीं होती। जिसके कारण लोगों को घंटो बस का इंतज़ार करना पड़ता है और टैक्सी में दो से तीन गुना किराया देना पड़ता है।</p>
<p>जहां पर्यटन सीजन के दौरान रोजाना 33 बसें चलाई जाती है और वह रोजाना लगभग 45 चक्कर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/425140/nainital-roadways-people-troubled-due-to-lack-of-buses-forced"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-07/08m52-उत्तराखंण्ड-बसो-का-आवागमन-शुरूपुराने-रोडवेज-बस-स्टैण्ड-से-उत्तराखंण्ड-की-बसें-जाती-हुई।.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> नैनीताल बस स्टैंड में रोजाना 4 से 5 बजे तक रोडवेज की एक भी बस उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>4 बजे के बाद ही स्कूली बच्चे और कर्मचारियों का सबसे अधिक आना-जाना रहता है। और इस समय पर रोडवेज बस स्टैंड में एक भी बस उपलब्ध नहीं होती। जिसके कारण लोगों को घंटो बस का इंतज़ार करना पड़ता है और टैक्सी में दो से तीन गुना किराया देना पड़ता है।</p>
<p>जहां पर्यटन सीजन के दौरान रोजाना 33 बसें चलाई जाती है और वह रोजाना लगभग 45 चक्कर लगाती हैं। वहीं आफ सीजन में इन बसों को कम कर दिया जाता है जिसके बाद मात्र 25 बसें चलाई जाती हैं, जो सिर्फ 34 चक्कर लगाती हैं। हालात यह है कि नैनीताल रोडवेज बस स्टैंड में बसें नही होने के कारण रोजाना आवाजाही करने वाले यात्रियों को बस पास होने के बाद भी टैक्सी में अधिक किराया देकर जाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>नियमों का किया जा रहा उल्लंघन </strong><br />नैनीताल में रोडवेज बसों में क्षमता से अधिक सवारी ले जाने पर कमिश्नर ने चालक व परिचालक के चालान भी काटे थे। और सख्त निर्देश दिए थे कि रोडवेज बस में एक भी स्टैंडिंग सवारी नहीं ले जा सकते उसके बाद भी बसों में यात्रियों को ठूंस कर ले जाया जा रहा है।</p>
<p><strong>चालक परिचालक लगाते हैं मात्र दो चक्कर </strong><br />रोडवेज बसों में अधिकतर चालक व परिचालक संविदा  पर कार्यरत हैं। जिसके कारण वह नैनीताल हल्दवानी के सिर्फ़ दो ही चक्कर लगाते हैं और उसके बाद बसों को खड़ा कर देते हैं।</p>
<p><em><strong>इन दिनों सवारियों की कमी के कारण लोकल बसें कम कर दी जाती हैं। रूटीन व लम्बी दूरी की कोई भी बस रद नही की गई हैं। कोशिश की जाएगी कि यात्रियों को अच्छी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। जल्द ही बसों को बढ़ाया जाएगा।</strong></em><br /><em><strong>-सुरेंद्र सिंह बिष्ट, रोडवेज सहायक महाप्रबंधक हल्द्वानी</strong></em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Dec 2023 18:06:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: 'लापरवाही' की सीलन से एसटीएच में 'मजबूरी' का ताला</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> एसटीएच में हड्डी रोग (ऑर्थो) ओटी व मेडिसिन आईसीयू की छत पर 42 बेड का प्री फैब आईसीयू बन रहा है। लेकिन कार्यदायी संस्था की कारगुजारी का खामियाजा एसटीएच को भुगतना पड़ रहा है। छत पर तोड़फोड़ के कारण आई सीलन से जुलाई माह से ऑर्थो ओटी व मेडिसिन आईसीयू में ताला लटका है।<br />  </p>
<p>केंद्र सरकार के इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज फेज-टू (ईसीआरपी-सेकेंड) के तहत एसटीएच में आठ करोड़ रुपये की लागत से 42 बेड का प्री फैब पीडियाट्रिक केयर यूनिट निर्माण का जिम्मा नामित कंपनी हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएससीएल) को दिया गया था।</p>
<p>इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/409570/haldwani-due-to-negligence-sth-is-locked-due-to-compulsion"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-07/एसटीएच.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> एसटीएच में हड्डी रोग (ऑर्थो) ओटी व मेडिसिन आईसीयू की छत पर 42 बेड का प्री फैब आईसीयू बन रहा है। लेकिन कार्यदायी संस्था की कारगुजारी का खामियाजा एसटीएच को भुगतना पड़ रहा है। छत पर तोड़फोड़ के कारण आई सीलन से जुलाई माह से ऑर्थो ओटी व मेडिसिन आईसीयू में ताला लटका है।<br /> </p>
<p>केंद्र सरकार के इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज फेज-टू (ईसीआरपी-सेकेंड) के तहत एसटीएच में आठ करोड़ रुपये की लागत से 42 बेड का प्री फैब पीडियाट्रिक केयर यूनिट निर्माण का जिम्मा नामित कंपनी हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएससीएल) को दिया गया था।</p>
<p>इस वर्ष मई माह में कंपनी ने निर्माण शुरू किया था। कार्य के दौरान मजदूरों ने हड्डी रोग (ऑर्थो) ओटी व मेडिसिन आईसीयू की छत को जगह-जगह तोड़ा। जिससे बरसात में छत में पानी जमा होने से रिसाव हो गया और ऑर्थो ओटी व मेडिसिन आईसीयू में पानी टपकने लगा।</p>
<p>इस पर अस्पताल प्रशासन को ओटी को न्यूरो तथा मेडिसिन आईसीयू को जे वार्ड में बने 20 बेड के आईसीयू में शिफ्ट कर वहां ताला लगाना पड़ा था। कंपनी की लापरवाही से गायनी ओटी तक सीलन आ गई थी। मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने कंपनी को नोटिस देकर ओटी व आईसीयू ठीक करने को कहा था। लेकिन नोटिस का कंपनी पर कोई असर नहीं हुआ। जिस कारण ऑर्थो ओटी व मेडिसिन आईसीयू वर्तमान में बंद है।</p>
<p><strong>अब एचएससीएल को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी</strong><br />राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने निर्माण में लापरवाही बरतने व नोटिस देने के बावजूद ओटी व मेडिसिन आईसीयू, गायनी ओटी को ठीक न करने पर एचएससीएल को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि कंपनी को कई बार नोटिस दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं किया है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन अपनी ओर से ओटी व आईसीयू की मरम्मत कराएगा। इसका जो भी खर्च आयेगा उसकी धनराशि कंपनी को भुगतान के समय काटी जाएगी।</p>
<p><strong>छह अन्य जगहों पर भी लापरवाही की शिकायत</strong><br />अपर मिशन निदेशक अमनदीप कौर ने बीती 22 सितंबर को एचएससीएल को नोटिस जारी किया है। इसमें हल्द्वानी एसटीएच के अलावा जिला अस्पताल बागेश्वर, उप जिला अस्पताल रानीखेत, उप जिला अस्पताल रामनगर, जिला अस्पताल टिहरी, राजकीय मेडिकल कॉलेज देहरादून और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में भी मानक के अनुरूप कार्य न होने की बात कही है। साथ ही मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने चेताया कि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो संस्था को काली सूची में डालने की कार्रवाई की जायेगी।</p>
<p><br /><em><strong>कंपनी को 22 सितंबर को नोटिस दिया था, जिसमें एक सप्ताह के अंदर कार्य करने के निर्देश दिये थे। लेकिन अभी तक मरम्मत नहीं हो पाई है। कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की भी तैयारी चल रही है। ओटी व मेडिसिन आईसीयू को चालू करने के लिए अस्पताल प्रशासन खुद मरम्मत कार्य करायेगा। इसका सारा खर्च कंपनी के भुगतान से काटा जायेगा। </strong></em><br /><em><strong>- डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी</strong></em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2023 22:20:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Joshimath: अब सिर्फ निहारना ही मजबूरी, प्रशासन ने लगाया 'UNUSABLE’ का पोस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>चमोली (जोशीमठ), अमृत विचार। </strong>उत्तराखंड के जोशीमठ में ना केवल जमीन सरक रही है, बल्कि मकानों के साथ यहां के वाशिंदों के सपने भी दरक रहे हैं। शनिवार को सर्वे करने पहुंचे इंजीनियरों की टीम ने जर्जर हो चुके इमारतों को चिन्हित कर उनकी दीवारों पर <strong>‘UNUSABLE’</strong> का पोस्टर लगा दिया। लोग दूर खड़े होकर अपने घरों को निहार तो रहे थे, लेकिन हालात के मारे ये लोग फूट फूट कर रोने के अलावा कुछ नहीं कर पाए। इंजीनियरों की टीम ने शनिवार दो दर्जन से अधिक इमारतों पर इस तरह के पोस्टर लगाए हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः</strong><span style="color:rgb(230,126,35);"> <a style="color:rgb(230,126,35);" href="https://www.amritvichar.com/article/333591/joshimath--at-the-behest-of-uttarakhand-minister--isro-removed-pictures-from-website--said--fear-was-spreading#gsc.tab=0">Joshimath: उत्तराखंड</a></span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/333601/joshimath-now-only-compulsion-to-watch"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/ततततततततततततततततत.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चमोली (जोशीमठ), अमृत विचार। </strong>उत्तराखंड के जोशीमठ में ना केवल जमीन सरक रही है, बल्कि मकानों के साथ यहां के वाशिंदों के सपने भी दरक रहे हैं। शनिवार को सर्वे करने पहुंचे इंजीनियरों की टीम ने जर्जर हो चुके इमारतों को चिन्हित कर उनकी दीवारों पर <strong>‘UNUSABLE’</strong> का पोस्टर लगा दिया। लोग दूर खड़े होकर अपने घरों को निहार तो रहे थे, लेकिन हालात के मारे ये लोग फूट फूट कर रोने के अलावा कुछ नहीं कर पाए। इंजीनियरों की टीम ने शनिवार दो दर्जन से अधिक इमारतों पर इस तरह के पोस्टर लगाए हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः</strong><span style="color:rgb(230,126,35);"> <a style="color:rgb(230,126,35);" href="https://www.amritvichar.com/article/333591/joshimath--at-the-behest-of-uttarakhand-minister--isro-removed-pictures-from-website--said--fear-was-spreading#gsc.tab=0">Joshimath: उत्तराखंड के मंत्री के कहने पर ISRO ने WEBSITE से हटाईं तस्वीरें, कहा- फैल रहा था डर</a></span></p>
<p><strong>खतरा बेकाबू हो रहा </strong></p>
<p>बता दें कि जोशीमठ में आपदा का दौर अभी जारी है। आज ही मनोहर बाग में जमीन सरकने और दरार आने का मामला सामने आया है. इसके चलते एक गोशाला भरभराकर गिर गई। इस सूचना पर सर्वे करने पहुंचे पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने भी माना कि खतरा बेकाबू हो रहा है। जोशीमठ को बचाना बहुत बड़ा चैलेंज है। स्थिति हाथ से निकलती जा रही है। दूसरी यह सब देख और सुनकर स्थानीय लोग दूर खड़े होकर केवल आशूं ही बहा पा रहे हैं। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः </strong><span style="color:rgb(230,126,35);"><a style="color:rgb(230,126,35);" href="https://www.amritvichar.com/article/333569/joshimath-sinking--cracks-on-joshimath-auli-ropeway-due-to-landslide--operation-stopped#gsc.tab=0">Joshimath Sinking: भू-धंसाव से जोशीमठ-औली रोपवे पर आईं दरारें, संचालन बंद</a></span></p>
<p><strong>मूल्यांकन रिपोर्ट सरकार को जा रही भेजी</strong></p>
<p><br />सीबीआरआई के मुख्य अभियंता डॉ. अजय चौरसिया ने बताया कि जिन घरों में दरार आने की सूचना मिली है, उनके बाहर मीटर नाप कर मूल्यांकन रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को भेजी जा रही हैं। इसके हिसाब से ही एक प्रशासनिक योजना तैयार हो सकेगी।</p>
<p><strong>एक बार फिर से जोशीमठ बसाने की योजना</strong></p>
<p>हालात को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने जोशीमठ को एक बार फिर से बसाने की योजना तैयार की है। इसके लिए मौजूदा जोशीमठ के आसपास में ही चार स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां नए शहर की बसावट की जाएगी। नए शहर के बसने तक राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए अस्थाई तौर पर रहने खाने का इंतजाम किया है। इसके एवज में सभी प्रभावितों को सरकार की ओर से एक राहत राशि दी जाएगी। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ेंः </strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/333567/dehradun--this-time-chardham-yatra-will-start-in-april--date-will-be-decided-after-panchang-calculation#gsc.tab=0"><span style="color:rgb(230,126,35);">देहरादून: इस बार अप्रैल में शुरू होगी चारधाम यात्रा, पंचांग गणना के बाद तय होगी तिथि </span></a></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>चमोली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/333601/joshimath-now-only-compulsion-to-watch</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Jan 2023 14:19:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गरमपानी:  मैदान के अभाव में नदी व सड़क पर खेलना मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>गरमपानी, अमृत विचार। </strong>तमाम गांवों के मध्य में स्थित गरमपानी खैरना क्षेत्र के आसपास मिनी स्टेडियम निर्माण की मांग जोर पकड़ने लगी है। खेल मैदान के अभाव में नौनिहाल नदी किनारे तक सड़क पर खेलने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों ने आसपास ही मिनी स्टेडियम निर्माण की मांग उठाई है ताकी गांवों के नौनिहाल भी लाभान्वित हो सकें।</p>
<p>खेल मैदान के अभाव में नौनिहाल मायूस हो चुके हैं। खेल मैदान न होने से नौनिहाल दूर दराज रुख करने को मजबूर हैं। कभी नदी किनारे तो कभी सड़क पर खेल अपना मन बहला रहे हैं। बेतालघाट ब्लॉक मुख्यालय में तो मिनी स्टेडियम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/319432/compulsion-to-play-on-river-and-road-due-to-lack"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-12/game-of-tip-cat.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गरमपानी, अमृत विचार। </strong>तमाम गांवों के मध्य में स्थित गरमपानी खैरना क्षेत्र के आसपास मिनी स्टेडियम निर्माण की मांग जोर पकड़ने लगी है। खेल मैदान के अभाव में नौनिहाल नदी किनारे तक सड़क पर खेलने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों ने आसपास ही मिनी स्टेडियम निर्माण की मांग उठाई है ताकी गांवों के नौनिहाल भी लाभान्वित हो सकें।</p>
<p>खेल मैदान के अभाव में नौनिहाल मायूस हो चुके हैं। खेल मैदान न होने से नौनिहाल दूर दराज रुख करने को मजबूर हैं। कभी नदी किनारे तो कभी सड़क पर खेल अपना मन बहला रहे हैं। बेतालघाट ब्लॉक मुख्यालय में तो मिनी स्टेडियम निर्माण किया गया पर तमाम गांवों के मध्य में स्थित गरमपानी खैरना क्षेत्र के आसपास एक अदद खेल मैदान तक नहीं है‌‌ की बार मांग उठाए जाने के बावजूद कोई सुधलेवा नहीं है।</p>
<p>खेल मैदान के अभाव में बच्चे खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य कैसे बनाएं यह भी बडा़ सवाल है। बीते दिनों ब्लॉक स्तरीय खेल महाकुंभ की तैयारियों को नौनिहाल ने कोसी नदी किनारे रेत में खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी की।</p>
<p>व्यापारी राकेश जलाल, भैरव नैनवाल, गजेंद्र नेगी, विरेंद्र सिंह बिष्ट, मनोज नैनवाल, फिरोज अहमद, बिशन सिंह जंतवाल, पंकज नेगी, नंदन सिंह, सुनील मेहरा, हरीश चंद्र आदि ने मिनी स्टेडियम निर्माण की पुरजोर मांग उठाई है ताकि नौनिहाल विभिन्न खेलों में भी भविष्य बना सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Dec 2022 16:44:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चित्रकूट : रपटे के ऊपर से पानी, जान जोखिम में डाल निकलने की मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमृत विचार, चित्रकूट। रसिन बांध में क्षमता से अधिक पानी उफना गया है। इससे भगवतपुर-कोलौंहा के पास बने रपटे के ऊपर पानी आ गया है। गांववाले जान जोखिम में डालकर निकलने को विवश हो रहे हैं। पुल का निर्माण कार्य धीरे चलने से भी दिक्कत बढ़ी है। गांववालों ने बताया कि भगवतपुर कोलौहा के पास …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/307443/chitrakoot-water-from-the-top-of-the-roof-compulsion-to-come-out-at-risk"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/नदी.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार, चित्रकूट।</strong> रसिन बांध में क्षमता से अधिक पानी उफना गया है। इससे भगवतपुर-कोलौंहा के पास बने रपटे के ऊपर पानी आ गया है। गांववाले जान जोखिम में डालकर निकलने को विवश हो रहे हैं। पुल का निर्माण कार्य धीरे चलने से भी दिक्कत बढ़ी है।<br />
गांववालों ने बताया कि भगवतपुर कोलौहा के पास रपटा पूरी तरह से पानी में डूबा है।</p>
<p>भारी जलभराव से उपजाऊ भूमि तो बर्बाद हो रही है। कई गांवों का संपर्क भी टूट गया है। इनमें खोही, डढ़वा मानपुर कल्याणपुर महुई छतैनी सिंधौरा रक्सी सड़ा नरदहा कालिंजर बघेलाबारी आदि गांवों के बाशिंदे ज्यादा परेशान हैं। बताया कि मरीजों और प्रसवपीड़िताओं को ज्यादा दिक्कत हो रही है।</p>
<p>गांववालों को भी जान जोखिम में डालकर रपटा पार करना पड़ रहा है। भारतीय आज़ाद मंच प्रवक्ता दीपक पांडेय ने बताया कि पुल के निर्माण के लिए 10.59 करोड़ रुपये का बजट जारी हो चुका है, जिसकी पहली किस्त के रूप में 2.64 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। पुल का निर्माण मंद गति से चलने से भी गांववालों को दिक्कत हो रही है। गांववालों ने प्रशासन से इस ओर ध्यान देने की अपील की है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://amritvichar.com/chitrakoot-girl-student-lost-her-life-due-to-mobile-theft-family-members-allege-murder/">चित्रकूट: मोबाइल चोरी के विवाद में चली गई छात्रा की जान, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>चित्रकूट</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Oct 2022 19:38:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डायरेक्शन पर एक्शन : बीमारी की मजबूरी बताकर बेचते थे लूटी हुई चेन</title>
                                    <description><![CDATA[अमृत विचार, लखनऊ। राजधानी में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में दो थानों की पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। हसनगंज कोतवाली पुलिस ने दो लुटेरों को गिरफ्तार किया है। जबकि अलीगंज कोतवाली पुलिस ने एक चोर को गिरफ्तार कर उसके पास से चोरी की गई बाइक की है। इसके बाद …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/295099/action-on-direction-the-looted-chains-used-to-sell-because-of-the-compulsion-of-the-disease"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-10/हसनगंज.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अमृत विचार, लखनऊ।</strong> राजधानी में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में दो थानों की पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। हसनगंज कोतवाली पुलिस ने दो लुटेरों को गिरफ्तार किया है। जबकि अलीगंज कोतवाली पुलिस ने एक चोर को गिरफ्तार कर उसके पास से चोरी की गई बाइक की है। इसके बाद पुलिस ने पकड़े गए बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।</p> <p>इस सम्बन्ध में हसनगंज कोतवाली प्रभारी अतुल श्रीवास्तव के मुताबिक, पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर वजीरगंज थानाक्षेत्र निवासी सुफियान सिद्दीकी और महानगर निवासी मो.आदिल को डालीगंज रेलवे क्रॉसिंग के पास से उठाया है। लुटेरों के पास से चार सोने की चेन समेत सात हजार रुपये की नकदी और एक बाइक मिली है। उन्होंने बताया कि विगत दो माह मे लुटेरों ने राजधानी में पांच वारदात की है। डीसीपी नार्थ एमएस कासिम आब्दी ने बताया कि सुफियान सिद्दीकी उनके गैंग का सरगना है। वह लूटी हुई ज्वैलरी को सर्राफ के पास बीमारी की मजबूरी बताकर बेच देता था। लुटेरे बाइक में लगी नंबर प्लेट में हेरफेर का लूट की वारदात करते थे। जिससे उन्हें कोई पकड़ न सके।</p> <p><img class="alignnone wp-image-584153" src="https://www.amritvichar.com/media/2022-10/%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%9C.jpg" alt="" width="774" height="441"></img></p> <p>उधर, अलीगंज कोतवाली पुलिस ने चोरी की बाइक के साथ गुड़बा के प्रवीण कुमार चौरसिया को गिरफ्तार किया है। एडीसीपी उत्तरी अभिजीत आरशंकर के मुताबिक, लुटेरा चोरी के वाहनों को ई-कॉमस साइट पर बेचता था। वह चोरी किए गए वाहन के कागज पर मालिक का नाम देखकर उसी नाम का ऐप के माध्यम से आधार कार्ड बनाता था और उस आधार कार्ड पर अपना फोटो चस्पा कर दिया करता था ताकि वाहन खरीदने वाले ग्राहक को इस पर शक न हो और वो इस चोर को वाहन का असली मालिक समझकर वाहन खरीद ले। उसके खिलाफ आधा दर्जन से ज्यादा अपराधिक मुकदमें दर्ज हैं।</p> <p><strong>यह भी पढ़ें:- <a href="https://amritvichar.com/lucknow-police-action-on-the-direction-of-the-high-officer/">लखनऊ : आलाधिकारी के डायरेक्शन पर पुलिस का एक्शन</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                            <category>Crime</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/295099/action-on-direction-the-looted-chains-used-to-sell-because-of-the-compulsion-of-the-disease</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Oct 2022 17:09:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेयजल के लिये पदयात्रा करना इटावा के इस गांव के लोगों की है मजबूरी, जानें वजह</title>
                                    <description><![CDATA[इटावा। दुर्लभ घडियाल,मगरमच्छ समेत तमाम जलचरो का आशियाना चंबल नदी के किनारे बसे उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के सहसो गांव के हजारो लोग सदियों से मीठे पानी के लिये हर रोज करीब एक किमी की पदयात्रा करने को मजबूर हैं। ग्रामीण महिलाएं को खाना बनाने व पीने के लिए चंबल नदी अथवा गांव के …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/190083/it-is-the-compulsion-of-the-people-of-this-village-of-etawa-to-travel-for-drinking-water-know-the-reason"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-03/जल.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इटावा।</strong> दुर्लभ घडियाल,मगरमच्छ समेत तमाम जलचरो का आशियाना चंबल नदी के किनारे बसे उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के सहसो गांव के हजारो लोग सदियों से मीठे पानी के लिये हर रोज करीब एक किमी की पदयात्रा करने को मजबूर हैं।</p>
<p>ग्रामीण महिलाएं को खाना बनाने व पीने के लिए चंबल नदी अथवा गांव के बाहर डाल्फिन परियोजना विश्राम गृह के वोर वेल से मीठा पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने पेयजल की समस्या निस्तारण के लिए भले ही तमाम प्रयास किए हों लेकिन उनके गांव में कोई वैकल्पिक व्यवस्था शासन प्रशासन ने नहीं की है। बरसात के समय नदी में बाढ़ आने के दौरान पेयजल का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो जाता है।</p>
<p>ग्रामीणों को गांव के बाहर एक किलोमीटर दूर जाकर बिजली चलित मोटर पंपों से पानी लाना होता है, बिजली ना आने पर घंटों इंतजार करना पड़ता है। गरीब तबके के लोगों को पेयजल की ज्यादा समस्या का सामना करना पड़ता है। सामान्य वर्ग के लोग मोटरसाइकिल से अपने लिए पानी सुबह लाकर रख लेते हैं। गरीब तबके के लोग चंबल का ही पानी घरों में प्रयोग करने को मजबूर हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण की संरक्षित नदी में सैकड़ों की संख्या में घातक खूंखार मगरमच्छ व घड़ियालों का कुनबा पानी में घूमते रहता है फिर भी ग्रामीण नदी के पानी में जाकर मौत के दरिया से पीने का पानी लाते हैं।</p>
<p>पुरातन जल स्रोत कुंआ रखरखाव के अभाव में ध्वस्त हो गए।ग्रामीण हादसों से बचने के लिए कटीले तार की घेराबंदी या फिर अन्य तरीकों से ढक दिया है।हैंडपंपों का दौर आने पर लोगों ने बिजली चलित मोटर से घरों में लगवा ली । कुआं से पानी खींचने का सिस्टम धीरे-धीरे विलुप्त ही हो गया।</p>
<p>आधुनिकता के दौर में मीठा ठंडा स्वच्छ पानी देने वाले पुरातन जल स्रोत आज की स्थिति में पूर्णतया समाप्त हो चुके हैं। कोई भी व्यक्ति रस्सी बाल्टी से पानी खींचने का झंझट में नहीं पड़ना चाहता ।</p>
<p><strong>पढ़ें- <a href="https://amritvichar.com/world-water-day-lets-pledge-to-save-every-drop-of-water/">विश्व जल दिवस: आइए…पानी की एक-एक बूंद बचाने का संकल्प लें</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>इटावा</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/190083/it-is-the-compulsion-of-the-people-of-this-village-of-etawa-to-travel-for-drinking-water-know-the-reason</link>
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                <pubDate>Tue, 22 Mar 2022 14:16:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरेली में मानवता शर्मसार: पांच माह के भ्रूण की हत्या कर नाली में फेंका, मजबूरी या पाप?</title>
                                    <description><![CDATA[बरेली, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में मानवता को शर्मसार करने वाला एक और मामला सामने आया है। पेट में पल रहे महज पांच माह के बच्चे की हत्या कर उसे नाली में फेंक दिया गया। सबसे दर्दनीय है कि उस भ्रूण के तन पर एक कपड़ा भी नहीं था। आस-पास के लोगों …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/171265/humanity-embarrassed-in-bareilly-after-killing-a-five-month-old-fetus-thrown-into-the-drain-compulsion-or-sin"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-02/नवजात-का-शव.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में मानवता को शर्मसार करने वाला एक और मामला सामने आया है। पेट में पल रहे महज पांच माह के बच्चे की हत्या कर उसे नाली में फेंक दिया गया। सबसे दर्दनीय है कि उस भ्रूण के तन पर एक कपड़ा भी नहीं था। आस-पास के लोगों ने जब नाली में पड़ा हुआ भ्रूण देखा तो भीड़ लग गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसका पंचानामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक वह एक भ्रूण एक लड़के का है।</p>
<p><strong>शहर के व्यस्त इलाके में फेंका गया, फिर भी किसी ने नहीं देखा</strong><br />
दरअसल, कोतवाली क्षेत्र के बिहारीपुर इलाके की चौपुला चौक गली में बुधवार शाम करीब 4:00 बजे एक पांच माह का भ्रूण नाले में पड़ा मिला। हैरत की बात है कि जिस इलाके में यह भ्रूण फेंका गया वो इलाका काफी व्यस्त रहता है। फिर भी किसी ने उस भ्रूण को फेंकते हुए कैसे नहीं देखा? आस-पास के लोगों ने जब भ्रूण को नाली में देखा तो दंग रहे गए। आनन फानन में पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस के मुताबिक जिस वक्त शहर में बारिश हो रही थी उसी वक्त उसे फेंका गया होगा। जिसकी वजह से किसी की नजर फेंकने वाले पर नहीं पड़ी।</p>
<p><strong>भ्रूण देख-तरह तरह की होने लगी बातें</strong><br />
भ्रूण को नाली में देख लोगों ने तरह-तरह की बातें बनाना शुरू कर दिया। कोई बोला- किसी की मजबूरी रही होगी। तो किसी ने कहा यह किसी का पाप है। कुल मिलाकर यह भ्रूण कहां से आया? किसने फेंका अभी तक इसका कोई पता नहीं लग सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। कोतवाली इंस्पेक्टर हिमांशु निगम का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। आस-पास में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला जाएगा। पता लगते ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई भी जाएगी।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>
<p class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/game-of-consuming-cash-and-liquor-is-in-full-swing-in-the-seven-assemblies-of-uttarakhand/">उत्तराखंड की सात विधानसभाओं में नकदी और शराब खपाने का खेल जोरों पर, ऐसे हुआ खुलासा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/171265/humanity-embarrassed-in-bareilly-after-killing-a-five-month-old-fetus-thrown-into-the-drain-compulsion-or-sin</link>
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                <pubDate>Wed, 09 Feb 2022 18:17:02 +0530</pubDate>
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                <title>आप की मजबूरी का नाम भगवंत मान : बादल</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़।  शिराेमणि अकाली दल (शिअद) अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आज आरोेप लगाया कि जनता की राय सेे मुख्यमंत्री का चेहरा चुननेे की आम आदमी पार्टी (आप) की कवायद ढोंग के अलावा कुछ नहीं थी और श्री मान को मजबूरी में चुना गया है क्योंकि उनका कोई और नेता तैयार नहीं था। शिअद अध्यक्ष ने …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/161753/the-name-of-your-compulsion-is-bhagwant-mann-badal"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-01/आप2.jpg" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़।  शिराेमणि अकाली दल (शिअद) अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आज आरोेप लगाया कि जनता की राय सेे मुख्यमंत्री का चेहरा चुननेे की आम आदमी पार्टी (आप) की कवायद ढोंग के अलावा कुछ नहीं थी और श्री मान को मजबूरी में चुना गया है क्योंकि उनका कोई और नेता तैयार नहीं था।</p>
<p>शिअद अध्यक्ष ने यहां जारी बयान में कहा कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल कभी श्री मान को पंजाब में पार्टी का चेहरा नहीं बनाना चाहते थे और वह श्री मान के मुंह पर कह चुके हैं कि पार्टी कोई सक्षम प्रत्याशी ढूंढ रही थी। श्री बादल ने कहा कि पार्टी नेे कई नामों पर विचार किया था पर कोई जिम्मेवारी लेने के लिए तैयार नहीं था इसलिए मजबूरी में श्री मान को ही चुना गया।</p>
<p>मान ने आरोप लगाया कि श्री मान के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार से सब परिचित हैं औैर आप का उन्हें मुख्यमंत्री का प्रत्याशी चुनना पार्टी का राजनीतिक दिवालियेपन है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jan 2022 19:30:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
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                <title>कृषि कानून की वापसी मजबूरी का नहीं बल्कि पीएम का साहसिक फैसला: सतीश द्विवेदी</title>
                                    <description><![CDATA[झांसी। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्रप्रभार) सतीश द्विवेदी ने कहा है कि नये कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा प्रधानमंत्री का बेहद साहसिक फैसला है न कि कुछ विधानसभाओं में चुनावों की मजबूरी का परिणाम। यहां भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यक्रम में शिरकत करने आये प्रदेश मंत्री …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/138285/return-of-agriculture-law-is-not-a-compulsion-but-bold-decision-of-pm-satish-dwivedi"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/amrit-vichar-67-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>झांसी।</strong> उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्रप्रभार) सतीश द्विवेदी ने कहा है कि नये कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा प्रधानमंत्री का बेहद साहसिक फैसला है न कि कुछ विधानसभाओं में चुनावों की मजबूरी का परिणाम। यहां भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यक्रम में शिरकत करने आये प्रदेश मंत्री सतीश द्विवेदी ने बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा से साहसिक निर्णयों के लिए जाने जाते हैं और जिन कृषि कानूनों पर किसानों के कुछ वर्गों की सहमति नहीं बन पा रही थी उस असहमति को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने कानून वापस लेकर लोकतांत्रिक मर्यादा को उस ऊंचाई को निर्धारित किया है जो किसी भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लिए दुर्लभ होती है।</p>
<p>जहां तक कुछ राज्यों में विधान सभा चुनाव की मजबूरी के चलते फैसला वापसी के लगाये जा रहे आरोपों का सवाल है तो यह आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। आपको साफ कर दें कि भारतीय जनता पार्टी कभी चुनाव के आधार पर निर्णय नहीं लेती है। कृषि कानून आने के बाद कई प्रदेशों के चुनाव हुए। खासकर उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन बॉर्डर पर था लेकिन 75 जिलों में से 68 जिलों में भारतीय जनता पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष बने। चुनाव के नजरिये से इसे बिल्कुल नहीं देखना चाहिए।</p>
<p>इसके साथ ही सतीश द्विवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद अब किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है। उन कानूनों को पारित कर देश की कृषि को आगे ले जाने और किसानों की स्थिति को बेहतर करने, उनकी आमदनी बढ़ाने का सोचा गया था। बिचौलिए जो किसानों का हिस्सा ले जाते थे वह सीधा किसानों के पास पहुंचे इसके लिए यह लागू किए गए थे। लेकिन सरकार इसे स्पष्ट रूप से किसानों तक पहुंचा नहीं पाई और किसानों की असहमति को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने इन कानूनों को वापस लिया।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में 2022 के चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ की जोड़ी, जनता अभी बनाए रखना चाहती है।भाजपा एक बार फिर प्रदेश में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी। अखिलेश के जिन्ना वाले बयान पर उन्होंने कहा कि विनाश काले विपरीत बुद्धि।</p>
<p>प्रदेश में चुनाव से पहले एक बार फिर विपक्षी दलों के एक साथ आने को लेकर शुरू हुई कवायद और इससे भाजपा के हितों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा गठबंधन 2019 के चुनाव में हो चुका है,इसको महागठबंधन नाम दिया था। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का तो प्रदेश में कोई बहुत अस्तित्व नहीं है लेकिन यहां की दो बड़ी पार्टियों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने इसमें शिरकत की थी।</p>
<p>इस महागठबंधन को किस तरह की शिकस्त पिछले चुनाव में मिली थी यह किसी से छिपा नहीं है। हालात तो यह रहे कि भाजपा से गठबंधन करके ही कई दलों के लोग विधायक बन गये वरना लोग कभी नहीं बन पाते थे। गठबंधन के सारे प्रयोग पहले ही विफल हो चुके हैं और यह भानुमति का जो कुनबा जोड़ा जा रहा है , उससे कोई फायदा नहीं होगा। हम फिर 2019 की तरह पूरी ताकत से लडेंगे और 51 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करेंगे।</p>
<p>हमारी केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों जैसे रोजगार, चिकित्सा, शिक्षा, कानून व्यवस्था, भगवान राम की जन्मभूमि पर राममंदिर का निर्माण , धारा 370,हर गांव हर घर को बिजली,हर गरीब महिला को गैस का चूल्हा, हर गांव को सड़क , हर गरीब तबके को अनाज, हर प्रदेश और पूरे देश में कोराना से प्रतिरक्षा देने को मुफ्त टीकाकरण जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जायेंगे और एक बार फिर प्रचंड बहुमत से सरकार बनायेंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-<a href="https://amritvichar.com/with-the-fall-in-the-market-there-was-a-decline-in-the-wealth-of-investors-by-rs-4-48-lakh-crore/">बाजार में गिरावट के साथ निवेशकों की संपत्ति में 4.48 लाख करोड़ रुपये की आई गिरावट</a></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>झांसी</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/138285/return-of-agriculture-law-is-not-a-compulsion-but-bold-decision-of-pm-satish-dwivedi</link>
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                <pubDate>Fri, 26 Nov 2021 15:58:09 +0530</pubDate>
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                <title>बरेली: शौक नहीं मजबूरी है, पुरानी पेंशन जरूरी है</title>
                                    <description><![CDATA[बरेली, अमृत विचार। पुरानी पेंशन बहाली सहित 17 मांगों को लेकर गुरुवार को संयुक्त संघर्ष संचालन समिति के बैनर तले कई विभागों के सैकड़ों कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। पहले कर्मचारी सेठ दामोदार पार्क में एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन किया। बाद में जुलूस की शक्ल में नारेबाजी कर कलेक्ट्रेट …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/138101/bareilly-hobby-is-not-a-compulsion-old-pension-is-necessary"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-11/25am707.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।</strong> पुरानी पेंशन बहाली सहित 17 मांगों को लेकर गुरुवार को संयुक्त संघर्ष संचालन समिति के बैनर तले कई विभागों के सैकड़ों कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। पहले कर्मचारी सेठ दामोदार पार्क में एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन किया। बाद में जुलूस की शक्ल में नारेबाजी कर कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। पुरुष कर्मचारियों के साथ ही महिला कर्मचारियों की संख्या भी काफी रही।</p>
<p>संयुक्त संघर्ष संचालन समिति के जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश गंगवार के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारी सेठ दामोदार पार्क में एकत्र हुए और पुरानी पेंशन बहाली सहित 17 मांगों को लेकर एकजुटता बनाए रखने को लेकर जोश भरा। कर्मचारियों ने नारेबाजी कर कहा कि शौक नहीं मजबूरी है, पुरानी पेंशन जरूरी है। कर्मचारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन की मांग को लेकर हम कर्मचारी पिछले 15 वर्षों से मांग करते आ रहे हैं, पर कोई भी सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।</p>
<p>प्रदेश के 17 लाख कर्मचारियों की यह मांग है। कर्मचारियों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग कि है कि पुरानी पेंशन बहाल की जाए, भत्ता, सीसीए, सचिवालय भत्ता, परिवार नियोजन विशेष वेतन वृद्धि पर लगी रोक को बहाल किया जाए। निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाई जाए। छठे वेतनमान की सभी वेतन विसंगतियों को दूर कर शतप्रतिशत बढ़ाया जाए। आईसीडीएस की मुख्य सेविकाओं को तथा लिपिक की मांगों पर ध्यान दिया जाए। वर्षों से लंबित कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था लागू की जाए। मृतक आश्रितों को नौकरी दी जाए आदि विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाई।</p>
<p><strong>कलेक्ट्रेट का गेट बंद होने से लगा जाम</strong><br />
पार्क से कलेक्ट्रेट रवाना हुए सैकड़ों कर्मचारियों को देख सुरक्षा कर्मियों ने कलेक्ट्रेट का गेट बंद कर दिया। ऐसे में सभी कर्मचारियों ने गेट पर ही मांगों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। आक्रोशित कर्मचारियों ने कहा कि वह वर्षों से मांगों को लेकर आवाज उठाते आ रहे हैं पर कोई भी कुछ सुनने वाला नहीं है। कर्मचारियों के कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन के दौरान कुछ देर के लिए वाहनों का जाम भी लग गया।</p>
<p><strong>लखनऊ में होगा महासम्मेलन</strong><br />
संयुक्त संघर्ष संचालन समिति के जिलाध्यक्ष ने कहा कि गुरुवार को प्रदेश के आह्वान पर कार्य बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन किया गया। अगर हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो पांच दिसम्बर को लखनऊ में महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर के कर्मचारी पहुंचेंगें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Nov 2021 00:18:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बरेली: अधिकारियों में मची खलबली, पेड़ों को काटना बताया मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[बरेली, अमृत विचार।  मिनी बाईपास पर रोडवेज बस अड्डा के लिए प्रस्तावित भूमि के हरे पेड़ों को काटने के विरोध के बाद कई मामले सामने आए हैं। पर्यावरण प्रेमियों के विरोध से प्रशासनिक और वन विभाग के अधिकारियों में खलबली मची है। उनकी हड़बड़ी तब सामने आयी, जब प्रभागीय वनाधिकारी भारत लाल ने पर्यावरण प्रेमी …
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/97749/bareilly-there-was-a-ruckus-among-the-officials-it-was-a-compulsion-to-cut-the-trees"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2021-07/capture-69.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार।  </strong>मिनी बाईपास पर रोडवेज बस अड्डा के लिए प्रस्तावित भूमि के हरे पेड़ों को काटने के विरोध के बाद कई मामले सामने आए हैं। पर्यावरण प्रेमियों के विरोध से प्रशासनिक और वन विभाग के अधिकारियों में खलबली मची है। उनकी हड़बड़ी तब सामने आयी, जब प्रभागीय वनाधिकारी भारत लाल ने पर्यावरण प्रेमी डा. प्रदीप कुमार को फोन करके बात करने के लिए अपने कार्यालय बुलाया लेकिन डा. प्रदीप अपने घर पर थे, इसलिए उन्होंने अपने साथी मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष शैलेश कुमार को डीएफओ से मिलने के लिए भेज दिया।</p> <p>चर्चा में यह बात निकलकर सामने आयी है कि पेड़ों को ट्रांसलोकेट करने के लिए ज्यादा बजट की जरूरत पड़ती। बजट के अभाव में पेड ट्रांसलोकेट नहीं किए गए। इससे यह बात साफ हो गयी कि सागौन के करीब 22 साल पुराने पेड़ों को भी बलि चढ़ाने से बचाया जा सकता था। दूसरी बात सामने आयी कि यह रोडवेज बस अड्डा मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल है, इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों का बस अड्डा का निर्माण शुरू कराने के लिए पेड़ों का कटान कराकर भूमि खाली कराने का भी दबाव था। यदि अधिकारी चाहते तो हरे पेड़ों को कटने से बचा सकते थे।</p> <p><strong>खट्रांसलोकेट प्रक्रिया से बचने को काटे हरे पेड़</strong></p> <p>बरेली कॉलेज के विधि विभागाध्यक्ष डा. प्रदीप कुमार अपने कुछ साथियों के साथ पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ों का कटान होने का खुलकर विरोध में उतरे हुए हैं। उन्होंने मिनी बाईपास स्थित भूमि पर काटे जा रहे हरे पेड़ों को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर भी मुहिम चलायी है। सेव एनवायरनमेंट नाम से व्हाट्सग्रुप बनाया है। इस ग्रुप से लोगों को जोड़ने के लिए लिंक फेसबुक पर शेयर किया है।</p> <p>काफी लोग इससे जुड़ गए हैं। डा. प्रदीप ने विरोध और तेज करने के लिए इसी ग्रुप पर पोस्ट शेयर कर कहा है कि सैकड़ों पेड़ों को काटने का फैसला जल्दबाजी में हुआ है। ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया चूंकि खर्चीली और समय लेने वाली थी, इसलिए आनन फानन में पेड़ों को काट डालने का आसान रास्ता चुना गया। जब बजट मिलने पर ट्रांसलोकेशन हो सकता है तो ये कहना कि सागौन ट्रांसलोकेट नहीं होते, यह पूरी तरह झूठ है। सागौन के पेड़ों को बंगलौर में ट्रांसलोकेट करने वाली संस्था जायम प्लांट ट्रांसलोकेशन सर्विसेज फर्म के मालिक जेम्स से फोन पर बात हुई, तब उन्होंने बताया कि 20 से 22 साल तक का सागौन पेड़ आसानी से ट्रांसलोकेट किया जा जाता है। सागौन की उम्र 30 साल होती है, जिसके बाद इसे काटा जा सकता है।</p> <img class="size-medium wp-image-213373" src="https://www.amritvichar.com/media/2021-07/capture-68-300x193.jpg" alt="" width="300" height="193"></img>हरे पेड़ों को बचाने के लिए अपर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन <p>मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति के पदाधिकारी सोमवार को कमिश्नरी में अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपकर हरे पेड़ों को कटने से बचाते हुए बचे पेड़ों को ट्रांसलोकेट कराने की मांग की। ज्ञापन सौंपकर कहा कि हरे पेड़ों को काटना पर्यावरण संरक्षण के हित में नहीं है। बरेली जिले का वन क्षेत्र करीब 0.01 प्रतिशत ही रह गया है। इस दृष्टिकोण से अगर ऐसे कटान होता रहा तो यह पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। बरेली के विकास के और पर्यावरण संरक्षण के लिए नए बस अड्डे के निर्माण के लिए मिनी बाईपास पर काटे जा रहे पेड़ों के कटान पर रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में डा. प्रदीप कुमार, शैलेश कुमार, सुधीर मेहरोत्रा, रजनेश सिंह, प्रतीक के शर्मा, राजेश चौधरी आदि शामिल थे।</p> <p><strong>इसे भी पढ़ें…</strong></p> <h1 class="post-title entry-title"><a href="https://amritvichar.com/bareilly-fraud-report-filed-against-former-branch-manager/">बरेली: पूर्व शाखा प्रबंधक पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज</a></h1> <p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jul 2021 23:54:38 +0530</pubDate>
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