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                <title>India - Amrit Vichar</title>
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                <title>सामयिकी : चाबहार बंदरगाह के विकास पर ईरान की उम्मीदें </title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats374.jpg" alt="cats" width="134" height="136" />
<strong>प्रमोद भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p>  </p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ईरान में भारत के सहयोग से निर्माणाधीन चाबहार बंदरगाह को एक सुनहरे दरवाजे और सहयोग का प्रतीक बताते हुए उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह को विकसित करना जारी रहेगा। भारत ही इस क्षेत्र में प्रभावशाली रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के बाद नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में ठहरे थे। यहीं उनकी विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई द्विपक्षीय वार्ता में यह बात निकलकर आई है।</p>
<p>अराघची ने इस बंदरगाह के विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582763/current-affairs--iran-s-hopes-for-the-development-of-chabahar-port"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats373.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/cats374.jpg" alt="cats" width="134" height="136"></img>
<strong>प्रमोद भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार</strong>

<p> </p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ईरान में भारत के सहयोग से निर्माणाधीन चाबहार बंदरगाह को एक सुनहरे दरवाजे और सहयोग का प्रतीक बताते हुए उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह को विकसित करना जारी रहेगा। भारत ही इस क्षेत्र में प्रभावशाली रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के बाद नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में ठहरे थे। यहीं उनकी विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई द्विपक्षीय वार्ता में यह बात निकलकर आई है।</p>
<p>अराघची ने इस बंदरगाह के विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना में सुस्ती आ गई है, लेकिन मुझे विश्वास है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और फिर इस आवागमन मार्ग के रूप में यूरोप तक पहुंचने का सुनहरा दरवाजा साबित होगा। साथ ही यूरोपीय लोगों, मध्य-एशियाई लोगों और अन्य लोगों के लिए हिंद महासागर तक पहुंचने का भी माध्यम बनेगा। यह रणनीतिक दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह है। ईरान और भारत के अलावा अन्य देशों के लोगों के लिए भी यह बंदरगाह उपयोगी साबित होगा। मुझे उम्मीद है कि भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना को पूरा करेगा, ताकि अन्य देश भी इसका लाभ उठा सकें। अराघची ने यहां तक कहा कि भारत ही वह देश है, जो पश्चिम एशिया में शांति के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।</p>
<p>दिल्ली में संपन्न हुए ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के बाद आया अराघची का बयान इस बात का संकेत है कि भारत ही वह देश है, जिससे शांति और समावेशन की उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि इस भू-राजनीतिक क्षेत्र के ईरान समेत लगभग सभी देशों से भारत के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते अराघची के बयान को बढ़ते ऊर्जा और आर्थिक संकट के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक चिंता के रूप में भी देखने की जरूरत है। भारत ने ईरान के साथ चाबहार स्थित शाहिद बेहेस्ती बंदरगाह के संचालन के लिए एक समझौता किया हुआ है। 10 वर्षों के लिए हुए इस समझौते पर दोनों देशों के संधि पत्र पर हस्ताक्षर भी हो चुके थे, परंतु हस्ताक्षर के चंद घंटों बाद भी ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह समझौता खटाई में पड़ा हुआ है।</p>
<p>इंडियन पोर्टस ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के बंदरगाह एवं समुद्री संगठन के बीच 13 मई 2016 को समझौता हुआ था। भारत के तबके जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोबाल ने ईरान पहुंचकर अपने समकक्ष के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इंडिया पोर्ट ग्लोबल लिमिटेड को करीब 120 मिलियन डॉलर का निवेश करना था। भारत सरकार की यह संस्था सागरमाला विकास कंपनी की सहायक कंपनी है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक चाबहार स्थित शाहिद बेहिश्ती बंदरगाह को विकसित करने के लिए ही इस कंपनी को अस्तित्व में लाया गया था। </p>
<p>इसका लक्ष्य भूमि से घिरे अफगानिस्तान और मध्य-एशियाई देशों के लिए मार्ग तैयार करना था। यह कंपनी कंटेनरों के संचालन से लेकर वेयरहाउसिंग तक का काम करती है। इंडिया पोर्ट ने इस बंदरगाह का संचालन सबसे पहले साल 2018 के अंत में शुरू किया था। तब ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मानवाधिकार उल्लंघन और चरमपंथी संगठनों को मदद करने के आरोप में अमेरिका ने ईरान पर अनेक व्यापक असर डालने वाले प्रतिबंध लगा दिए थे। 1998 में जब पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किया था तब भी अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे।</p>
<p><strong>(ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>Special Articles</category>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 05:42:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस से बढ़ती पाकिस्तान की नजदीकी और भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:right;"><em><strong>भारत के स्वाभाविक मित्र रूस से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए बहुत अच्छे संकेत नहीं हैं। इन सबके बीच ही पाकिस्तान ने ब्रिक्स का भी पूर्ण सदस्य बनने के लिए लॉबिंग शुरू की है। </strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/digvijay.jpg" alt="Digvijay" width="163" height="162" />
<strong>दिग्विजय सिंह, कानपुर</strong>

<p>  </p>
<p style="text-align:justify;">भारत के स्वाभाविक मित्र रूस से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। इन सबके बीच ही पाकिस्तान ने ब्रिक्स का भी पूर्ण सदस्य बनने के लिए लाबिंग शुरू की है। तुर्किए भी चाहता है कि उसे सदस्य बनाया जाए। पाकिस्तान को चीन का समर्थन है। 2024 में रूस भी समर्थन कर चुका है। पुन: रूस समर्थन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/582560/pakistan-s-growing-closeness-to-russia-and-india"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats322.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:right;"><em><strong>भारत के स्वाभाविक मित्र रूस से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए बहुत अच्छे संकेत नहीं हैं। इन सबके बीच ही पाकिस्तान ने ब्रिक्स का भी पूर्ण सदस्य बनने के लिए लॉबिंग शुरू की है। </strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/digvijay.jpg" alt="Digvijay" width="163" height="162"></img>
<strong>दिग्विजय सिंह, कानपुर</strong>

<p> </p>
<p style="text-align:justify;">भारत के स्वाभाविक मित्र रूस से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। इन सबके बीच ही पाकिस्तान ने ब्रिक्स का भी पूर्ण सदस्य बनने के लिए लाबिंग शुरू की है। तुर्किए भी चाहता है कि उसे सदस्य बनाया जाए। पाकिस्तान को चीन का समर्थन है। 2024 में रूस भी समर्थन कर चुका है। पुन: रूस समर्थन न कर देगा, इसके लिए भारत की निगाह रूस पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">देखना है कि रूस, भारत की भावनाओं की कद्र करता है या पाकिस्तान का समर्थन, हालांकि ब्रिक्स समूह में पाकिस्तान तभी शामिल हो सकेगा, जब भारत मंजूरी देगा। ऐसे में फिलहाल पाकिस्तान हो या तुर्किए, इनका सपना तो नहीं पूरा होने जा रहा है। पाकिस्तान इस मामले में भारत के समक्ष बातचीत का प्रस्ताव रखने जा रहा है, ताकि उसकी यह मुराद पूरी हो जाए, जबकि तुर्किए ने चुप्पी साध रखी है। वह समय का इंतजार कर रहा है।  </p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया की सबसे प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का प्रमुख समूह ब्रिक्स वैश्विक जीडीपी में लगभग 37 फीसद का योगदान देता है और 40 फीसद से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स का गठन किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हैं, जबकि बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान भागीदार देश के रूप में शामिल हैं। पाकिस्तान चाहता है कि इस समूह का वह भी पूर्ण सदस्य बन जाए। चीन उसकी सदस्यता का वर्षों से समर्थन कर रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस वक्त ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। पाकिस्तान ने पूर्ण सदस्य बनने के लिए स्थायी सदस्य देशों के बीच लॉबिंग शुरू की है। इसमें उसे कुछ हद तक सफलता मिलती नजर आ रही है, लेकिन उसकी राह में सबसे बड़ी बाधा भारत है, क्योंकि बिना सर्वसहमति के किसी भी देश को सदस्य नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में पाकिस्तान इस मुद्दे पर भारत से बात करने के लिए आतुर दिख रहा है। इसके संकेत पाकिस्तानी राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान, भारत के साथ बातचीत करने को तैयार है। </p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान को लगता है कि ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन में उसे सदस्यता मिल सकती है, इसीलिए वह भारत को मनाना चाहता है। पाकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन का भी सदस्य है, इसलिए वह अपना दावा मजबूती से पेश कर रहा है, लेकिन ब्रिक्स में उसका शामिल होना भारत के लिए किसी भी स्थिति में अच्छा नहीं है, क्योंकि शंघाई सहयोग संगठन की तरह ही वह ब्रिक्स में भी जम्मू- कश्मीर का मुद्दा उठा सकता है। इस मंच पर भी उसे चीन, कश्मीर के मुद्दे पर समर्थन दे सकता है। साथ ही ब्रिक्स बैंक से पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद भी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थक देश है। वह भारत में लगातार आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है। पहलगाम में आतंकी हमले के कारण ही भारत को ऑपरेशन सिंदूर लांच करने के साथ ही सिंधु नदी जल समझौते को रद करना पड़ा था। ब्रिक्स में शामिल होने के बाद तो पाकिस्तान यहां सिंधु जल समझौते की बहाली की भी मांग करेगा। ऐसे में इस विशाल समूह से उसका बाहर रहना ही उचित होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">चीन के अतिरिक्त कोई देश उसका समर्थन न करे भारत को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए। रही बात रूस की तो पिछले कुछ महीनों से वह पाकिस्तान के साथ तेजी से गलबहियां कर रहा है, जो भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। 2024 में रूस ने पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन किया था, हालांकि अब इस बार वह समर्थन करेगा या नहीं यह देखना होगा। भारत पर जब भी संकट आया, रूस ने ही आगे बढ़कर हमारी मदद की, लेकिन बदलते भू राजनीतिक समीकरणों के बीच अब पाकिस्तान उसे साधने में लगा हुआ है और कुछ हद तक सफल हुआ है। उसकी सफलता के पीछे चीन भी है। </p>
<p style="text-align:justify;">चीन अब रूस की मजबूरी बन चुका है। यूक्रेन युद्ध में आर्थिक रूप से कमजोर हुआ रूस, अब कई मामलों में चीन के सहारे है। ऐसे में चीन उसे पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है। पाकिस्तान ने ग्वादर बंदरगाह को रूस के इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जोड़ने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर रूस ने सहमति दे दी है। जब ग्वादर बंदरगाह और रूस का ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे, तो इसका लाभ चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को भी मिलेगा। इसका जुड़ाव भी उससे हो जाएगा। ऐसा होना भारत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने ग्वादर बंदरगाह को रूस के कॉरिडोर से जोड़ने के प्रस्ताव पर बनी सहमति की घोषणा की है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर 7,200 किलोमीटर का है जो रूस के मुख्य केंद्रों को ईरान के बंदरगाहों और हिंद महासागर से जोड़ता है। अब अगर इसमें पाकिस्तान भी शामिल होता है, तो यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी झटका होगा, क्योंकि पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए बड़ी चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस की पाकिस्तान के साथ दोस्ती भारत के लिए कई मामलों में चुनौती बन सकती है। ऐसे में अब भारत किसी न किसी तरह से रूस-पाकिस्तान की दोस्ती के बीच में दीवार भी बनना होगा। पाकिस्तान ने पहले ही सऊदी अरब से सुरक्षा समझौता करके भारत को झटका दिया था। रही बात ब्रिक्स की तो भारत, पाकिस्तान और उसके दोस्त तुर्किए को रोक तो लेगा, लेकिन रूस जैसे देश यदि उसे समर्थन देते हैं तो इसका असर भारत की छवि पर भी पड़ेगा।  </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 06:08:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी, विदेश मंत्रालय ने दिया ताजा अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।</strong> भारत के 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल गए हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा, "हमने प्रगति देखी है और ईरानी पक्ष के साथ राजनयिक बातचीत और संवाद के बाद अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल चुके हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हए हैं। हम ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शेष जहाज भी होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करके भारत पहुंच सकें।"</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581256/indian-ships-continue-to-sail-despite-west-asia-tensions--with-the-ministry-of-external-affairs-providing-the-latest-update"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(5)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली।</strong> भारत के 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल गए हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा, "हमने प्रगति देखी है और ईरानी पक्ष के साथ राजनयिक बातचीत और संवाद के बाद अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल चुके हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हए हैं। हम ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शेष जहाज भी होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करके भारत पहुंच सकें।"</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरानी जहाजों और समुद्री पहुंच से जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि अन्य देशों के जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालन के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा, "यदि अन्य देशों के जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चलना चाहते हैं, तो किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन आपके इस विशिष्ट प्रश्न के बारे में कि क्या वे भारतीय जलक्षेत्र में आना चाहते हैं, यह ऐसा विषय है जिसका उत्तर जहाजरानी मंत्रालय या संबंधित तकनीकी अधिकारी दे पाएंगे।" </p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब ईरान ने उन जहाजों के लिए नियमों का एक नया सेट पेश किया है जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना चाहते हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा और जहाजरानी के लिए एक प्रमुख अवरोधक बिंदु है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने वाला अमेरिकी सैन्य अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा। उन्होंने इसे ईरान के साथ बातचीत में हुई प्रगति और पाकिस्तान के अनुरोध का परिणाम बताया। </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "पाकिस्तान एवं अन्य देशों के अनुरोध के साथ ही ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान हमें मिली जबरदस्त सैन्य सफलता और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक पूर्ण तथा अंतिम समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है। हमने आपसी सहमति से यह तय किया है कि नाकेबंदी पूरी तरह से लागू और प्रभावी रहेगी। फिर भी 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' (होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही) को थोड़े समय के लिए रोक दिया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि क्या समझौता अंतिम रूप ले पाता है और उस पर हस्ताक्षर हो पाते हैं या नहीं।" </p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन (यूकेएमटीओ) संगठन ने कहा कि पिछले 48 घंटों में हुए हमलों की एक श्रृंखला के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरा एक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। संगठन ने बताया कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका की नौसेना इकाइयां होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रही थीं और उसने कल और आज विभिन्न खतरों को नाकाम किया।" इसमें बताया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में 'नौवहन में रुकावट, नाकाबंदी लागू करना, बारूदी सुरंगों की रिपोर्ट और हमलों या गलत अनुमानों का जोखिम' जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">ओमान की खाड़ी को भी 'गंभीर' श्रेणी में रखा गया है। यूकेएमटीओ ने कहा कि ऐसा 'ऐतिहासिक प्रोजेक्टाइल/यूएवी हमलों' (बिना पायलट वाले हवाई वाहन या ड्रोन) के कारण हुआ है और इसलिए भी क्योंकि वहां सशस्त्र नौसेना की मौजूदगी बहुत अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस जलडमरूमध्य से होने वाला वाणिज्यिक यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है और 4 मई को यहां से केवल पांच जहाज गुजरे और 3 मई को छह, जबकि इसका ऐतिहासिक दैनिक औसत 138 जहाजों का रहा है। इस क्षेत्र में जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों को देखते हुए परिचालन माहौल अभी भी बहुत अधिक जोखिम भरा बना हुआ है। पिछले 48 घंटों में ईरानी इकाइयों द्वारा जहाजों को आक्रामक तरीके से रोकना और जबरदस्ती कार्रवाई करना जैसी कई घटनाएं सामने आयी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें : </h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/581213/millions-of-jobs-will-open-up-for-up-youth-in-russia--thanks-to-the-yogi-government-s-%22employment-mission-%22"><span class="t-red">रूस में यूपी के युवाओं के लिए खुलेंगे लाखों नौकरियों के द्वार, </span>योगी सरकार के 'रोजगार मिशन' से मिलेगा मौका</a></h5>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/581256/indian-ships-continue-to-sail-despite-west-asia-tensions--with-the-ministry-of-external-affairs-providing-the-latest-update</link>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 11:30:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'वियतनाम के साथ भारत ठोस परिणामों की ओर अग्रसर'... राष्ट्रपति टो लैम के साथ साझा प्रेस वार्ता में बोले पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम की मौजूदगी में हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए। महत्वपूर्ण ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इसके बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने इन समझौतों की अहमियत बताई। पीएम मोदी ने टो लैम का स्वागत करते हुए कहा, "राष्ट्रपति टो लैम का भारत में स्वागत है।</p>
<p style="text-align:justify;">वियतनाम के राष्ट्रपति बनने के बाद इनका उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और बिजनेस लीडर्स के साथ आना ये दर्शाता है कि वो हमें कितनी प्राथमिकता देते हैं। बोधगया से दोनों देशों के साझा संबंधों पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/581088/-india-and-vietnam-moving-towards-concrete-results-----pm-modi-speaks-at-joint-press-conference-with-president-to-lam"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/013.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम की मौजूदगी में हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए। महत्वपूर्ण ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इसके बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने इन समझौतों की अहमियत बताई। पीएम मोदी ने टो लैम का स्वागत करते हुए कहा, "राष्ट्रपति टो लैम का भारत में स्वागत है।</p>
<p style="text-align:justify;">वियतनाम के राष्ट्रपति बनने के बाद इनका उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और बिजनेस लीडर्स के साथ आना ये दर्शाता है कि वो हमें कितनी प्राथमिकता देते हैं। बोधगया से दोनों देशों के साझा संबंधों पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा, इन्होंने भारत की यात्रा की शुरूआत बोधगया से की थी। यह हमारे दोनों देशों की आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाता है। हम अपने संबंधों को ठोस परिणामों में बदल रहे हैं। भारत और वियतनाम की साझेदारी में विरासत और विकास का महत्व है। पिछले वर्ष जब भारत से बौद्ध अवशेष वियतनाम गए तो उनके दर्शन 1.5 करोड़ से अधिक लोगों ने किए थे, जो वियतनाम की कुल जनसंख्या का 15 फीसदी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा, हमारी साझा विरासत को जीवंत रखने के लिए, हम वियतनाम के प्राचीन चम्पा सभ्यता के मी सॉन और न्हान टवर मंदिरों का जीर्णोद्धार कर रहे हैं। अब हम चम्पा सभ्यता की पांडुलिपियों को भी डिजिटिलाइज करेंगे, और इस अमूल्य धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करेंगे।" प्रधानमंत्री मोदी ने मजबूत होते ट्रेड संबंधों का भी जिक्र किया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ".हर क्षेत्र में हमारा सहयोग नए स्तर तक पहुंचेगा। भारत और वियतनाम का द्विपक्षीय व्यापार पिछले 1 दशक में दोगुना होकर 16 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। 2030 तक इसे 25 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए हमने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।बहुत जल्द वियतनाम भारत के अंगूर और अनार का स्वाद लेगा। हमें बहुत खुशी है कि दोनों देशों के बीच एयर कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है।"</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच कई अहम क्षेत्रों में बनी सहमति को लेकर पीएम मोदी ने कहा, "हमारी ड्रग अथॉरिटिज के बीच एमओयू से अब भारत की दवाइयों का वियतनाम में एक्सेस बढ़ेगा। भारत के कृषि, मत्स्य और पशु उत्पाद का भी, वियतनाम तक निर्यात और सुगम होने जा रहा है।" </p>
<p style="text-align:justify;">एक्ट ईस्ट पॉलिसी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा," वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और विज़न महासागर का एक मुख्य स्तंभ है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी हमारी समझ एक सी है। हम अपनी सुदृढ़ होती हुई रक्षा और सुरक्षा सहयोग से, कानून के राज, शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति योगदान देते रहेंगे। वियतनाम के सहयोग से भारत, आसियान के साथ अपने संबंधों को भी और व्यापक बनाएगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:12:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया की नंबर-1 टीम भारत, ICC T20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर बरकरार, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड पिछड़े</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दुबई।</strong> तीन बार के विश्व कप विजेता भारत ने मंगलवार को आईसीसी टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा जबकि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। भारत मार्च में इतिहास रचते हुए टी20 विश्व कप का खिताब सफलतापूर्वक बचाव करने वाली पहली टीम बना था। साथ ही टीम ने रिकॉर्ड तीसरी बार यह खिताब जीता था। भारत ने श्रीलंका के साथ मिलकर इस टूर्नामेंट की मेजबानी की थी। </p>
<p style="text-align:justify;">आईसीसी ने अपनी वेबसाइट पर कहा, ''नवीनतम रैंकिंग में मई 2025 के बाद खेले गए सभी मुकाबलों को शत प्रतिशत और उससे पिछले दो वर्षों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580995/world-s-no--1-team--india--remains-at-the-top-of-the-icc-t20-international-rankings--with-australia-and-england-lagging-behind"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(46)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दुबई।</strong> तीन बार के विश्व कप विजेता भारत ने मंगलवार को आईसीसी टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा जबकि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। भारत मार्च में इतिहास रचते हुए टी20 विश्व कप का खिताब सफलतापूर्वक बचाव करने वाली पहली टीम बना था। साथ ही टीम ने रिकॉर्ड तीसरी बार यह खिताब जीता था। भारत ने श्रीलंका के साथ मिलकर इस टूर्नामेंट की मेजबानी की थी। </p>
<p style="text-align:justify;">आईसीसी ने अपनी वेबसाइट पर कहा, ''नवीनतम रैंकिंग में मई 2025 के बाद खेले गए सभी मुकाबलों को शत प्रतिशत और उससे पिछले दो वर्षों के मुकाबलों को 50 प्रतिशत भार दिया गया है।'' आईसीसी ने कहा, ''275 अंक के साथ शीर्ष पर काबिज भारत की इंग्लैंड (262 अंक) पर बढ़त एक अंक कम हुई है जबकि ऑस्ट्रेलिया 258 अंक के साथ तीसरे स्थान पर इंग्लैंड के और करीब आ गया है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">दो बार के विजेता इंग्लैंड के 262 जबकि एक बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के 258 अंक हैं। आईसीसी टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष सात टीम की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। न्यूजीलैंड (247), दक्षिण अफ्रीका (244), पाकिस्तान (240) और वेस्टइंडीज (233) अपने-अपने स्थानों पर बरकरार हैं। हालांकि श्रीलंका (221) को छह रेटिंग अंक का नुकसान हुआ है जिससे वह नौवें स्थान पर खिसक गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">वहीं बांग्लादेश (225) एक स्थान ऊपर आठवें स्थान पर पहुंच गया है। अफगानिस्तान (220) 10वें स्थान पर है और श्रीलंका तथा उसके बीच का अंतर बहुत कम है। जिम्बाब्वे और आयरलैंड क्रमशः 11वें और 12वें स्थान पर हैं। आईसीसी ने कहा, ''उत्तरी अमेरिका में क्रिकेट की उभरती हुई शक्ति अमेरिका ने छह अंक हासिल करते हुए दो स्थान की छलांग लगाई है। वह 13वें स्थान पर पहुंच गया है और उसने नीदरलैंड (14वें) तथा स्कॉटलैंड (15वें) को पीछे छोड़ दिया है।'' </p>
<p style="text-align:justify;">आईसीसी ने कहा, ''नामीबिया 16वें स्थान पर बरकरार है जबकि नेपाल (17वें) और ओमान (19वें) को एक-एक स्थान का फायदा हुआ है। उन्होंने क्रमशः यूएई(18वें) और कनाडा (20वें) को पीछे छोड़ा।'' आईसीसी ने साथ ही बताया कि रैंकिंग में शामिल टीम की संख्या 102 से घटकर 98 हो गई है क्योंकि पिछले तीन साल में जरूरी आठ टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने में नाकाम रहने के कारण फिजी, गाम्बिया, यूनान और इजराइल इस सूची में जगह नहीं बना पाए। </p>
<h5 style="text-align:justify;">ये भी पढ़ें :</h5>
<h5 class="post-title" style="text-align:justify;"><a href="https://www.amritvichar.com/article/580979/hockey-mega-match--india-and-australia-s-stalwarts-will-clash-in-bhopal--with-the-men-s-and-women-s-under-18-teams-showcasing-their-strength"><span class="t-red">हॉकी महामुकाबला: </span>भोपाल में भिड़ेंगे भारत-ऑस्ट्रेलिया के धुरंधर, पुरुष और महिला अंडर-18 टीमें दिखाएंगी दमखम</a></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/580995/world-s-no--1-team--india--remains-at-the-top-of-the-icc-t20-international-rankings--with-australia-and-england-lagging-behind</link>
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:35:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एकात्म चिंतन की जन्मभूमि है भारत </title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/%E0%A4%B9%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3.jpg" alt="हृदयनारायण" width="179" height="233" />
<strong>हृदयनारायण दीक्षित, <br />पूर्व विधानसभा अध्यक्ष यूपी</strong>

<p>  </p>
<p style="text-align:justify;">हम सब सोंचते हैं। अनेक प्रश्न उठते हैं। प्रश्न स्वयं को जानने का भी है। संसार और स्वयं का बोध जरूरी है। प्रश्न बड़ा है- कैसे जानें इस असीम संसार को। समझ छोटी अति अल्प और संसार बड़ा। प्रश्न और भी हैं। जैसे सृष्टि क्या है? सृष्टि का कोई निर्माता भी है क्या? यह सृष्टि नहीं थी तो क्या था? जो था वह क्या था? क्या शून्य था? क्या सृष्टि ऊर्जा का खेल है? पृथ्वी जल, अग्नि और आकाश प्रत्यक्ष है। इनका सारभूत क्या है? सूर्य चंद्र और तारागण कहां से प्रकाश पाते हैं?</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580729/india-is-the-birthplace-of-integral-thought"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/cats32.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-05/%E0%A4%B9%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3.jpg" alt="हृदयनारायण" width="179" height="233"></img>
<strong>हृदयनारायण दीक्षित, <br />पूर्व विधानसभा अध्यक्ष यूपी</strong>

<p> </p>
<p style="text-align:justify;">हम सब सोंचते हैं। अनेक प्रश्न उठते हैं। प्रश्न स्वयं को जानने का भी है। संसार और स्वयं का बोध जरूरी है। प्रश्न बड़ा है- कैसे जानें इस असीम संसार को। समझ छोटी अति अल्प और संसार बड़ा। प्रश्न और भी हैं। जैसे सृष्टि क्या है? सृष्टि का कोई निर्माता भी है क्या? यह सृष्टि नहीं थी तो क्या था? जो था वह क्या था? क्या शून्य था? क्या सृष्टि ऊर्जा का खेल है? पृथ्वी जल, अग्नि और आकाश प्रत्यक्ष है। इनका सारभूत क्या है? सूर्य चंद्र और तारागण कहां से प्रकाश पाते हैं? सृष्टि निर्माण का आदि तत्व क्या है? कोई परमतत्व है क्या? क्या एक तत्व से ही यह सृष्टि बनी? या सबका साझा प्रयास यह सृष्टि है? सृष्टि और हमारे संबंध क्या हैं? आदि।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार अस्तित्व को कैसे जानें? कैसे शांत करें जिज्ञासा को? कठिनाई दूसरी भी है- जितना देखते हैं, उतने का सार तत्व कैसे ग्रहण करें? हमारी जीवन दृष्टि क्या हो? इंटरनेट ने लाखों-करोड़ों सूचनाएं भर दी हैं। किसे छोड़ें? किसे पढ़ें? क्या शास्त्र पढ़ें? पढ़ें तो विवेचन विश्लेषण कैसे करें? जानने के लिए सोचना जरूरी है और सोचने के पहले ठीक से देखना भी। देखने की एक दृष्टि वैदिक पूर्वजों ने दी है। बाद के इतिहास और दर्शन में प्रायः उसी विवेक को आधार बनाया गया है। इस समझ को प्राप्त करने का दुनिया का सबसे पुराना ग्रंथ है ऋग्वेद। भारत के लोगों ने ऋग्वेद की रचना के पहले से ही वैज्ञानिक चिंतन प्रारंभ कर दिया था। </p>
<p style="text-align:justify;">ऋग्वेद में इसी सोच-विचार के दर्शन हैं। चिंतन की यह दृष्टि निर्णयात्मक नहीं है। दर्शन और विज्ञान निर्णयात्मक नहीं होते। जहां तक जान लिया, वहीं रुक जाना उचित नहीं होता। सामान्य धारणा है कि विश्व किसी शक्ति द्वारा बनाया गया है। सृष्टि निर्माण ‘विश्वकर्म’ है। सृष्टि निर्माता को विश्वकर्मा कहा गया है। ऋग्वेद के एक दार्शनिक सूक्त (10.81) के देवता विश्वकर्मा हैं। ऋषि पूछते हैं, ‘सृष्टि निर्माण के पहले वे कहां पर बैठे?’ प्रश्न उचित है। जब पृथ्वी, आकाश आदि थे ही नहीं तो विश्वकर्मा ने कहां बैठकर यह सृजन कर्म पूरा किया? पूछते हैं कि ‘सृष्टि निर्माण का मूल द्रव्य क्या था? वह वन, वृक्ष कौन सा था? जिससे विश्वकर्मा ने सामग्री ली और विराट विश्व बनाया? यह सब मनीषी लोग जानने का प्रयास करें।’ स्तुति है कि ‘वे विश्वकर्मा मित्र भाव से हमें ज्ञान दें।’</p>
<p style="text-align:justify;">ऋग्वेद के एक ऋषि देवताओं के भी पहले का विचार करते हैं कि ‘देवताओं के पहले युग समय में असत् से सत् का जन्म हुआ।’ (10.72) यह युग विचारणीय है। तब देवता भी नहीं हैं, लेकिन ‘समय’ है। ऋग्वेद में सत् का अर्थ व्यक्त है और असत् का अव्यक्त। नासदीय सूक्त (10.129) में प्रकृति सृष्टि के संबंध में और भी गहन-चिंतन हैं ‘तब न सत् था और न असत्। आकाश से परे भी कुछ नहीं था- नो व्योमा परो यत्। अंधकार था।’ यहां अंधकार प्रकाश का अभाव नहीं है। अंधकार का अस्तित्व है। इसी तरह एक और महत्वपूर्ण अस्तित्व ‘वह एक’ था। </p>
<p style="text-align:justify;">ऋषि के अनुसार वह एक-तत् एकं अपनी शक्ति के दम पर वायुहीन दशा में भी प्राण ले रहा था। ऋग्वेद का ‘वह एक’ सृष्टि के पहले भी है। उस समय जल भी है- अप्रकेत सलिलं। फिर काम उत्पन्न हुआ। इसके बाद प्रकाश की दीप्ति चारों ओर फैल गई। फिर विसृष्टि हुई।’ फिर कहते हैं, ‘क्या पता ऊंचे आकाश में बैठा सृष्टि का अध्यक्ष सृष्टि रचना की बात जानता है? या वह भी न जानता? यह विवरण रोमांचक है। यहां शुद्ध वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या अंधकार होता है? या प्रकाश के अभाव का नाम ही अंधकार है। अंधकार सृष्टि के पूर्व भी है। संभवतः आकाश या प्रकाश का सूक्ष्म रूप। ‘वह एक’ बिना वायु ही प्राण ले रहा था। क्या प्राण का विकास वायु हो सकती है। काम का जन्म भी सृष्टि के साथ हुआ। यह ताप या अग्नि ऊर्जा का सूक्ष्म रूप हो सकता है। सबसे अंत में है- विसृष्टि। विसृष्टि-सृष्टि है, इसमें पृथ्वी भी है। भारतीय चिंतन में आकाश सूक्ष्मतम है। आकाश से वायु, वायु के बाद अग्नि, इसके बाद जल और फिर पृथ्वी। सृष्टि का विकास किसी एक तत्व से हुआ है। यहां आकाश प्रमुख तत्व है। कपिल के सांख्य दर्शन में आकाश प्राचीनतम है। भारतीय चिंतन के पांच महाभूतों में से प्रथम।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय दर्शन में असीम आकाश का गुण शब्द है। आकाश का अस्तित्व है। छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार ‘सभी भूत आकाश से पैदा होते हैं और आकाश में ही विलीन हो जाते हैं।’ आकाश से आना और आकाश में ही लौटना विचारणीय है। ऋग्वेद में ठीक ही आकाश पिता है। ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में ‘पुरुष’ का वर्णन है। यह ‘पुरुष’ देश-काल की सीमा का अतिक्रमण करता है। उसका सिर आकाश है और सहस्त्रशीर्षा है। इस पुरुष के प्राण का विस्तार वायु है। पुरुष समूचे अस्तित्व को घेरता है। </p>
<p style="text-align:justify;">दश अंगुल इसके बाहर भी हैं। संपूर्ण संसार इसका एक चरण है। इसके तीन चरण अन्य लोकों में हैं। यहां जो कुछ चेतन या अचेतन मनुष्य, पशु, कीट, पतिंग, नदी, समुद्र या वन है। पुरुष सब में व्याप्त है। यहां तक हुआ दिक् या दिशा का अतिक्रमण। अब काल। बताते हैं कि यह पुरुष ही सब कुछ है- पुरुष एवेदं सर्वं। जो भूतकाल में हो गया है और जो आगे भविष्य में होगा वह सब पुरुष ही है- यद् भूतं यच्च भव्यं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऋग्वेद के एक देवता हैं अदिति। अदिति भी सर्वस्व धारण करते हैं। वह अंतरिक्ष है, पृथ्वी हैं। पिता-माता और पुत्र है। वे पांच जन हैं। अब तक जो हो चुका है और जो भविष्य में होगा वह सब अदिति ही हैं। समूचे अस्तित्व को एक देखना और स्वयं को उसी का भाग जानना भारतीय चिंतन की मूल भूमि है। यहां अस्तित्व या सृष्टि का कोई निर्माता नहीं। प्रकृति के गोचर प्रपंच गतिशील हैं। सम्यक गति से प्रगति होती है। प्रकृति का वैज्ञानिक अध्ययन भी मूलतः गति का ही अध्ययन है। प्राचीन यूनानी दार्शनिक थेल्स (लगभग 500 ई. पूर्व) जल को सृष्टि का आदि तत्व मानते थे। इसके हजारों वर्ष पहले ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में ‘अप्रकेत सलिल’- जल है। जल से सृष्टि का जन्म हुआ, तो जल को माता कहना ही चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ऋग्वेद में जल को ‘बहुवचन रूप में आपः मातरम्-जल माताएं कहा गया है। स्थावर जंगम को जन्म देने वाली यही जल माताएं ही हैं।’ थेल्स जल संबंधी चिंतन ऋग्वेद के संगत है। वैसे ऋग्वेद में अनेक विचार हैं। एक यूनानी दार्शनिक अनक्सिमेनेस ‘वायु’ को सृष्टि का मूल तत्व बताते थे। ऋग्वेद (10.168) में ऋ तावा-नियम वायु है। यहां वायु जलों के मित्र कहे गए हैं- अपां सखा। ऋग्वेद के जल और वायु आदि तत्व इसी रूप में उपनिषदों में भी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हिराक्लिटस अग्नि को प्रधान तत्व जानते थे। अग्नि ऋग्वेद के प्रधान देवता हैं। अग्नि सब जगह हैं। वे जलों में हैं। मनुष्य के भीतर हैं। यत्र तत्र सर्वत्र हैं। कठोपनिषद् में यम ने नचिकेता को अग्नि विज्ञान समझाया था। यहां अग्नि ही प्रत्येक जगह उपस्थित होकर रूप-रूप प्रतिरूप होते हैं- अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपों वभूवाः। जानने और गहराई से देखने समझने के एकात्म चिंतन की जन्मभूमि भारत ही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 04:52:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखबारों के ‘सेवक’ और बाल मन के पारखी: डॉ. निरंकार देव </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">साहित्य की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो केवल कागजों पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के चरित्र में जीवित रहते हैं। बरेली की साहित्यिक विरासत के ऐसे ही एक अनमोल रत्न थे डॉ. निरंकार देव सेवक, जिसने अभावों के बीच रहकर भी बाल साहित्य के माध्यम से बरेली का मान पूरे भारतवर्ष में बढ़ाया। यह कहानी है एक विद्रोही कवि के कोमल बाल साहित्यकार बनने की, एक समर्पित मित्र की और एक ऐसे साधक की जिसने अंत तक अपनी कलम का साथ नहीं छोड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरेली के इस बाल साहित्यकार की शख्सियत से रू-ब-रू करा रही रतन सिंह</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580620/%22servant%22-of-newspapers-and-expert-on-children-s-minds--dr--nirankar-dev"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-05/untitled-design-(44).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">साहित्य की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो केवल कागजों पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के चरित्र में जीवित रहते हैं। बरेली की साहित्यिक विरासत के ऐसे ही एक अनमोल रत्न थे डॉ. निरंकार देव सेवक, जिसने अभावों के बीच रहकर भी बाल साहित्य के माध्यम से बरेली का मान पूरे भारतवर्ष में बढ़ाया। यह कहानी है एक विद्रोही कवि के कोमल बाल साहित्यकार बनने की, एक समर्पित मित्र की और एक ऐसे साधक की जिसने अंत तक अपनी कलम का साथ नहीं छोड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरेली के इस बाल साहित्यकार की शख्सियत से रू-ब-रू करा रही रतन सिंह गुर्जर की विशेष रिपोर्ट... </strong></p>
<p style="text-align:justify;">सादगी और सिद्धांतों का अनूठा संगम-डॉ. निरंकार देव सेवक का जीवन किसी खुली किताब की तरह था, जिसके हर पन्ने पर सादगी और अनुशासन की इबारत लिखी थी। बरेली के सैदपुरिया मोहल्ले में जन्मे सेवक जी के भीतर साहित्य के संस्कार अपने पिता मुंशी रामभरोसे लाल ‘सेवक’ से विरासत में मिले थे। पेशे से अग्रणी वकील होने के बावजूद उनका हृदय साहित्य के लिए धड़कता था। उनकी सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें खाने में कभी स्वाद की परवाह नहीं रही, उनके लिए भोजन केवल शरीर चलाने का साधन था।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चन जी से आत्मीय रिश्ता- साहित्यिक गलियारों में सेवक जी और महाकवि हरिवंशराय बच्चन की मित्रता के किस्से आज भी मशहूर हैं। यह सेवक जी ही थे, जिन्होंने ज्ञान प्रकाश जौहरी के साथ मिलकर बरेली में बच्चन जी और तेजी सूरी की मुलाकात और फिर सगाई तय करवाई थी। बच्चन जी उन्हें ‘भाई साहब’ कहते थे और उन्होंने सेवक जी को करीब 250 पत्र लिखे। बच्चन जी का स्नेह इतना था कि वे अक्सर बरेली आकर बसने की इच्छा व्यक्त करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अखबारों का जुनून और समय की धारा- सेवक जी का दिन सुबह 5 बजे शुरू होता था और घर में 14 अखबारों का अंबार लगता था। जिला जेल के सामने वाले नाले के किनारे अखबार पढ़ते हुए टहलना उनका नियमित क्रम था। वे पढ़ने में इतने मशगूल हो जाते कि उन्हें आसपास की दुनिया का होश नहीं रहता था। यही एकाग्रता उनकी लेखनी में भी दिखती थी। विद्रोह से वैज्ञानिक चेतना तक सेवक जी ने अपने लेखन की शुरुआत ‘चिंगारी’ जैसे विद्रोही कविता संग्रह से की थी। उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी के दौर में संतान न पैदा करने का कठिन संकल्प लिया था। हालांकि बाद में पारिवारिक दबाव में उन्होंने गृहस्थ जीवन को अपनाया। बाल साहित्य में उन्होंने एक नई चेतना फूंकी। उन्होंने पौराणिक कथाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लिखा। वे कहते थे कि धर्म और रूढ़ियां बच्चों के मानसिक विकास में बाधा नहीं बननी चाहिए। उनके 36 प्रकाशित संग्रह आज भी हिंदी साहित्य की अमूल्य थाती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पारिवारिक त्रासदी और सेवा की मिसाल</h4>
<p style="text-align:justify;">सेवक जी का अंतिम समय काफी कष्टपूर्ण रहा। आंखों की रोशनी चली जाने के कारण उन्हें अपनी थाली का खाना तक नहीं दिखता था, लेकिन उनकी पुत्रवधू पूनम सेवक ने एक बेटी का धर्म निभाते हुए अंत तक अपने हाथों से उन्हें भोजन कराया। साल 1994 में सेवक जी का निधन हुआ और उसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 1999 में उनके पुत्र प्रदीप और पत्नी का देहांत हुआ और बाद में पोते पुनीत को भी नियति ने छीन लिया। आज सेवक जी का वह विशाल 2000 गज का बंगला भले ही वक्त की मार से छोटे से हिस्से में सिमट गया हो, लेकिन उनकी रचनाओं की गूंज आज भी हर उस बच्चे के मन में है, जिसने ‘दूध जलेबी’ या ‘ईसप की गाथाएं’ पढ़ी हैं। डॉ. निरंकार देव सेवक आज भी हमारे बीच अपनी कालजयी रचनाओं और अपनी बेबाक प्रगतिशील सोच के रूप में जीवित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 10:36:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परंपरा, बाजार और बदलती पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats252.jpg" alt="cats" width="86" height="121" />
<strong>डॉ. प्रियंका सौरभ, <br />शिक्षका</strong>

<p>  </p>
<p style="text-align:justify;">भारत की सांस्कृतिक संरचना में त्योहारों का स्थान केवल आनंद और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की ऐतिहासिक स्मृति, आर्थिक संरचना, प्रकृति के साथ संबंध और मानवीय संवेदनाओं के गहरे ताने-बाने से जुड़े होते हैं। यहां त्योहार जीवन के हर पहलू को स्पर्श करते हैं— खेती, ऋतु परिवर्तन, पारिवारिक संबंध, सामूहिकता और आस्था, लेकिन वर्तमान समय में यह प्रश्न गंभीरता से उठाया जाने लगा है कि क्या हमारे पारंपरिक त्योहार अपनी मूल आत्मा से दूर होते जा रहे हैं? क्या उन पर एक प्रकार का ‘कल्चरल अटैक’ हो रहा है, जो धीरे-धीरे उनकी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580062/tradition--the-market--and-changing-identities"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/cats251.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats252.jpg" alt="cats" width="86" height="121"></img>
<strong>डॉ. प्रियंका सौरभ, <br />शिक्षका</strong>

<p> </p>
<p style="text-align:justify;">भारत की सांस्कृतिक संरचना में त्योहारों का स्थान केवल आनंद और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की ऐतिहासिक स्मृति, आर्थिक संरचना, प्रकृति के साथ संबंध और मानवीय संवेदनाओं के गहरे ताने-बाने से जुड़े होते हैं। यहां त्योहार जीवन के हर पहलू को स्पर्श करते हैं— खेती, ऋतु परिवर्तन, पारिवारिक संबंध, सामूहिकता और आस्था, लेकिन वर्तमान समय में यह प्रश्न गंभीरता से उठाया जाने लगा है कि क्या हमारे पारंपरिक त्योहार अपनी मूल आत्मा से दूर होते जा रहे हैं? क्या उन पर एक प्रकार का ‘कल्चरल अटैक’ हो रहा है, जो धीरे-धीरे उनकी असल पहचान को बदल रहा है?</p>
<p style="text-align:justify;">‘कल्चरल अटैक’ शब्द भले ही आक्रामक प्रतीत होता हो, लेकिन इसका आशय किसी एक वर्ग या समूह पर आरोप लगाना नहीं है। यह उस धीमी, सूक्ष्म और कई बार अनदेखी प्रक्रिया की ओर संकेत करता है, जिसके माध्यम से परंपराएं अपने मूल सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ से हटकर नए अर्थ ग्रहण करने लगती हैं। यह परिवर्तन कभी स्वाभाविक होता है, तो कभी सुनियोजित आर्थिक और वैचारिक प्रभावों का परिणाम भी हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय त्योहारों की जड़ें मुख्यतः कृषि और प्रकृति से जुड़ी रही हैं। देश का अधिकांश समाज सदियों तक कृषि-आधारित रहा है, इसलिए फसल, मौसम और भूमि के साथ उसका गहरा रिश्ता रहा। फसल कटने की खुशी, नई बुवाई की शुरुआत, वर्षा के आगमन का स्वागत— ये सब त्योहारों के माध्यम से व्यक्त होते थे। इन उत्सवों में किसान केंद्र में होता था, क्योंकि वही अन्न का उत्पादक था और वही समाज की जीवन-रेखा को बनाए रखता था। ऐसे त्योहारों में आडंबर कम और सहभागिता अधिक होती थी। लोग मिलकर गाते-बजाते, सामूहिक भोज करते और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे-जैसे समाज में शहरीकरण बढ़ा, औद्योगिकीकरण हुआ और बाजार की ताकतें मजबूत हुईं, त्योहारों का स्वरूप भी बदलने लगा। अब त्योहारों को केवल सांस्कृतिक या सामाजिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर के रूप में भी देखा जाने लगा। बाजार ने त्योहारों को उपभोग से जोड़ दिया— जहां खरीदारी, सजावट और प्रदर्शन को प्रमुखता मिलने लगी। त्योहारों के साथ ‘ऑफर’, ‘डिस्काउंट’ और ‘शुभ खरीदारी’ जैसे विचार जुड़ गए, जिसने उनके मूल स्वरूप को प्रभावित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बदलाव केवल बाहरी नहीं है, बल्कि मानसिकता में भी आया है। पहले त्योहारों का अर्थ था- मिलना-जुलना, साझा करना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना। अब कई जगहों पर यह प्रतिस्पर्धा का रूप ले चुका है। किसने कितना खर्च किया, किसने क्या खरीदा, किसका आयोजन कितना भव्य था। इस प्रक्रिया में त्योहारों की आत्मा कहीं पीछे छूटती चली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">त्योहारों पर ‘कल्चरल अटैक’ की चर्चा करते समय एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है— लोक परंपराओं का हाशिए पर जाना। भारत में हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट परंपराएं रही हैं, जो स्थानीय जीवनशैली, भाषा और संसाधनों से जुड़ी होती थीं, लेकिन आज मीडिया और बाजार के प्रभाव में एक प्रकार की सांस्कृतिक एकरूपता (cultural homogenization) देखने को मिल रही है। कुछ खास त्योहारों और उनके खास तरीकों को पूरे देश में मानक बना दिया गया है, जिससे स्थानीय विविधताएं धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। <strong>(यह लेखिका के निजी विचार हैं)      </strong>                                            </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 10:00:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या भारत का नया निवेश दौर बदल रहा है!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:center;"><em><strong>आंकड़े बताते हैं कि भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश की गति धीमी हुई है। एक समय निवेशक तेजी से पूंजी लगाते थे, अब वे अधिक सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats250.jpg" alt="cats" width="230" height="205" />
<strong>रजत मेहरोत्रा, वित्तीय एंव अर्थिक विशेषज्ञ</strong>

<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में भारत ने स्टार्टअप इकोसिस्टम के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। सस्ते इंटरनेट, डिजिटल भुगतान क्रांति, युवा उद्यमियों की बढ़ती संख्या और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के कारण भारत आज दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप हब में शामिल हो चुका है। देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं और यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/580061/is-india-s-new-investment-cycle-changing"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/cats249.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:center;"><em><strong>आंकड़े बताते हैं कि भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश की गति धीमी हुई है। एक समय निवेशक तेजी से पूंजी लगाते थे, अब वे अधिक सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं।</strong></em></p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/cats250.jpg" alt="cats" width="230" height="205"></img>
<strong>रजत मेहरोत्रा, वित्तीय एंव अर्थिक विशेषज्ञ</strong>

<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में भारत ने स्टार्टअप इकोसिस्टम के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। सस्ते इंटरनेट, डिजिटल भुगतान क्रांति, युवा उद्यमियों की बढ़ती संख्या और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के कारण भारत आज दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप हब में शामिल हो चुका है। देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं और यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, लेकिन 2025 के बाद एक नई प्रवृत्ति देखने को मिली है— स्टार्टअप फंडिंग में गिरावट। यह गिरावट केवल अस्थायी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि निवेश के बदलते दृष्टिकोण का संकेत देती है। यही कारण है कि आज यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या भारत का निवेश दौर अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश की गति धीमी हुई है। जहां एक समय निवेशक तेजी से पूंजी लगाते थे, वहीं अब वे अधिक सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं। 2025 में स्टार्टअप फंडिंग में पिछले वर्षों की तुलना में कमी देखी गई और 2026 की शुरुआत भी अपेक्षाकृत कमजोर रही। इसका सबसे बड़ा कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विकसित देशों में ऊंची ब्याज दरों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कम कर दिया है। जब वैश्विक स्तर पर पूंजी महंगी हो जाती है, तो उसका सीधा प्रभाव उभरते बाजारों जैसे भारत पर भी पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स के अत्यधिक वैल्यूएशन ने भी इस स्थिति को जन्म दिया है। कई कंपनियों ने बिना स्थिर लाभप्रदता के केवल ग्रोथ के आधार पर भारी फंडिंग हासिल की। निवेशकों ने उस समय ‘ग्रोथ एट ऑल कॉस्ट’ की रणनीति अपनाई थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। अब निवेशक केवल यूजर बेस या मार्केट शेयर नहीं, बल्कि कंपनी की कमाई, नकदी प्रवाह और टिकाऊपन को महत्व दे रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि केवल मजबूत बिजनेस मॉडल और स्पष्ट राजस्व रणनीति वाले स्टार्टअप्स को ही फंडिंग मिल रही है, जबकि कमजोर मॉडल वाले स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना कठिन हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर भी कुछ ऐसे कारक हैं, जो इस बदलाव को प्रभावित कर रहे हैं। ब्याज दरों का स्तर, लिक्विडिटी की स्थिति और मौद्रिक नीति निवेश के माहौल को तय करती है। जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची रहती हैं, तो निवेशक सुरक्षित साधनों जैसे बैंक एफडी, बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड इनकम विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे जोखिम भरे निवेश जैसे स्टार्टअप्स में पूंजी का प्रवाह कम हो जाता है। यही कारण है कि वर्तमान समय में निवेशकों की प्राथमिकताएं बदलती दिखाई दे रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस गिरावट को केवल नकारात्मक रूप में देखना सही नहीं होगा। इसे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के परिपक्व होने की प्रक्रिया के रूप में भी समझा जा सकता है। अब कंपनियां अनियंत्रित विस्तार के बजाय संतुलित विकास पर ध्यान दे रही हैं। वे लागत को नियंत्रित कर रही हैं, मुनाफे पर जोर दे रही हैं और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रही हैं। इससे भविष्य में अधिक मजबूत और टिकाऊ कंपनियों का निर्माण होगा। यह बदलाव निवेशकों के लिए भी सकारात्मक है, क्योंकि उन्हें अब बेहतर गुणवत्ता वाली कंपनियों में निवेश का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही, निवेश का फोकस भी बदल रहा है। पहले जहां ई-कॉमर्स, फिनटेक और फूड डिलीवरी जैसे सेक्टर्स में अधिक निवेश होता था, वहीं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, डीप टेक, हेल्थ टेक और डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है। यह बदलाव न केवल वैश्विक ट्रेंड को दर्शाता है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक प्राथमिकताओं को भी प्रतिबिंबित करता है। सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल भी इन क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे इन सेक्टर्स में नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्टार्टअप फंडिंग में गिरावट का प्रभाव रोजगार और नवाचार पर भी पड़ा है। कई स्टार्टअप्स ने लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी की है और कुछ कंपनियां बंद भी हुई हैं। इससे युवाओं के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन यह समय आत्ममंथन का भी है। उद्यमियों को अब यह समझना होगा कि केवल बाहरी फंडिंग पर निर्भर रहना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। उन्हें अपने बिजनेस मॉडल को इस तरह विकसित करना होगा कि वह स्वयं टिकाऊ हो सके। बूटस्ट्रैपिंग, एंजेल निवेश और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग इस दिशा में मददगार हो सकता है। इस बदलते परिदृश्य में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। <strong>(यह लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Special</category>
                                            <category>Special Articles</category>
                                            <category>विशेष लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 07:42:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक सौंदर्य का दर्शनीय स्थल अमरकंटक </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश भारत के उत्तर और दक्षिण तथा पूर्व और पश्चिम का संधि- स्थल ही नहीं है, अपितु भौगोलिक दृष्टि से यहां पहाड़ पठार, घने वन, विस्तृत मैदान और नदी घाटियों का आकर्षक एवं समृद्ध प्रकृति का वरदान भी है। प्रकृति, कला और सौंदर्य की दृष्टि से यह पर्यटकों के लिए स्वर्ग है। ऐसा संयोग कम ही स्थलों को मिलता है, जहां प्रकृति की सुंदर छटा भी बिखरी हो और साथ ही धार्मिकता का पुण्य-लाभ भी प्राप्त हो, कदाचित मध्य प्रदेश का अमरकंटक ऐसा ही अनुपम स्थान है। <strong>-गौरीशंकर वैश्य विनम्र </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमरकंटक में प्रकृति रोमांचित करती है। घने जंगल आनंदित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579863/amarkantak--a-place-of-natural-beauty"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/untitled-design-(31)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश भारत के उत्तर और दक्षिण तथा पूर्व और पश्चिम का संधि- स्थल ही नहीं है, अपितु भौगोलिक दृष्टि से यहां पहाड़ पठार, घने वन, विस्तृत मैदान और नदी घाटियों का आकर्षक एवं समृद्ध प्रकृति का वरदान भी है। प्रकृति, कला और सौंदर्य की दृष्टि से यह पर्यटकों के लिए स्वर्ग है। ऐसा संयोग कम ही स्थलों को मिलता है, जहां प्रकृति की सुंदर छटा भी बिखरी हो और साथ ही धार्मिकता का पुण्य-लाभ भी प्राप्त हो, कदाचित मध्य प्रदेश का अमरकंटक ऐसा ही अनुपम स्थान है। <strong>-गौरीशंकर वैश्य विनम्र </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अमरकंटक में प्रकृति रोमांचित करती है। घने जंगल आनंदित करते हैं तथा अध्यात्म और धर्म इस नगरी को एक विशिष्ट पहचान दिलाते हैं। वास्तव में यह ऐसी जगह भी है, जो दो बड़ी नदियों नर्मदा और सोन का उद्गम स्थल भी है। पूर्व से पश्चिम की दिशा में बहने वाली देश की दो नदियों में एक नर्मदा का उद्गम एक छोटे कुंड से हुआ देखकर आश्चर्य होता है। पानी की झिर इस कुंड से होकर बड़े आयताकार कुंड में एकत्र होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस जलसंरचना का निर्माण कल्चुरी काल में किया गया। इसी प्रकार सोनमूढ़ा नर्मदाकुंड से 1.5 किलोमीटर की दूरी पर मैकल पहाड़ियों के किनारे पर है। सोन नदी 100 फीट ऊंची पहाड़ी से एक झरने के रूप में यहां से गिरती है। इनके उद्गम को देखेंगे, तो लगेगा ही नहीं कि छोटे - छोटे कुंडों से निकलकर काफी दूर तक बहुत पतली धारा में बहने वाली ये नदियां देश की संस्कृति और धार्मिकता एवं विकास को नए आयाम देती हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">पहाड़ों पर बसा अमरकंटक </h5>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित अमरकंटक को तीर्थराज की संज्ञा भी दी गई है। यह समुद्र तट से लगभग 1065 मीटर ऊंचाई पर स्थित हिल स्टेशन की अनुभूति कराता है। कल्चुरी कालीन प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध अमरकंटक घने जंगल तथा औषधीय गुणों से भरपूर पौधों की सम्पदा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ खदानें भी हैं और जलप्रपात भी, जल के अदृश्य स्रोत भी और सुंदर आश्रम तथा मंदिर भी। यहाँ का शांत वातावरण पर्यटकों को सहज ही आत्ममुग्ध कर देता है। अमरकंटक की यात्रा आध्यात्मिक स्पर्श कराती है। यहाँ आते ही हवा में ताजगी और शुद्धता का आभास होने लगता है। </p>
<p style="text-align:justify;">प्राचीन मान्यताओं के अनुसार माता सती के दो अंग इस क्षेत्र में गिरे थे, अतः यह क्षेत्र दो शक्तिपीठों का क्षेत्र होने के कारण अति पवित्र है। उन दो स्थानों में से एक सोनमूढ़ा सोन नदी के उद्गम स्थल के पास है और दूसरा माँ नर्मदा के उद्गम के पास स्थित देवी पार्वती जी का मंदिर है। यहाँ से मनमोहक झरने, पवित्र तालाब, ऊँची पहाड़ियों और शांत वातावरण यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">100 फीट ऊंचा जलप्रपात </h5>
<p style="text-align:justify;">पहले अमरकंटक शहडोल जिले में था। अब यह अनूपपुर जिले में है।यह मैकल पर्वत श्रृंखला पर स्थित है। पत्थरों की चारदीवारी के अंदर पत्थर से निर्मित नर्मदाकुंड मंदिर, शिव परिवार, कार्तिकेय मंदिर, श्री सूर्यनारायण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, ग्यारह रुद्र मंदिर, अन्नपूर्णा, गुरु गोरखनाथ, श्री रामजानकी, श्री राधाकृष्ण मंदिर, श्री ज्वालेश्वर महादेव, सर्वोदय जैन मंदिर, कबीर चबूतरा, कपिलाधारा, माई की बगिया आदि स्थल सदियों पुरानी स्थापत्यकला को सहेजे हुए हैं, जहाँ धार्मिक पर्यटकों को आना उपकृत करता है। मंदिर परिसर के आसपास परिक्रमावासियों के समूह अमरकण्टक को तपस्थली के रूप में प्रतिबिंबित करते हैं। नर्मदा विश्व की एक मात्र सरिता है, जिसकी परिक्रमा की जाती है। कुंड से आगे निकलकर नर्मदा कल - कल बहने लगती है। लगभग 6 किलोमीटर की यात्रा कर नर्मदा 100 फीट ऊँचा जलप्रपात बनाती है, जिसे कपिलाधारा के नाम से जाना जाता है। हरे - भरे वातावरण से घिरे इस झरने के आगे दूध धारा है, जो छोटा जलप्रपात है। यहाँ पर्यटक निडर होकर स्नान करते हैं। कालिदास भी यहाँ आए थे और वे यहाँ की सुंदरता में निमग्न हो गए। उनके मेघदूत के बादल इसी अमरकंटक नगरी के ऊपर से विचरण करते हैं। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने भी यहाँ आकर तप किया था। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रमुख स्थल :</strong></p>
<h5 style="text-align:justify;">भगवान शिव का त्रिमुखी मंदिर </h5>
<p style="text-align:justify;">अमरकंटक के प्रमुख मंदिरों में भगवान शिव का त्रिमुखी मंदिर है। इसे कल्चुरी शासक कर्ण देव महाचंद्र ने 1041-1073 ई ० में निर्माण कराया था। मंदिर में कल्चुरी कालीन शिल्पकारों की बनाई आकृतियाँ सम्मोहित करती हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">कपिलाधारा</h5>
<p style="text-align:justify;">अमरकंटक की यात्रा कपिलाधारा देखे बिना अधूरी रहेगी। यहाँ 100 फीट की ऊँचाई से पानी गिरता है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि कपिल मुनि यहाँ रहते थे। कपिल मुनि ने सांख्य दर्शन की रचना इसी स्थान पर की थी। कपिलाधारा के निकट ही कपिलेश्वर मंदिर भी बना है। इस जगह के आसपास कई गुफाएँ हैं, जहाँ अब भी साधु - संत ध्यानमग्न देखे जा सकते हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">कबीर चबूतरा </h5>
<p style="text-align:justify;">कबीरपंथियों के लिए इस स्थान का बहुत महत्व है। कहा जाता है कि संत कबीरदास संवत 1569 में बांधवगढ़ से जगन्नाथपुरी प्रवास के समय यहाँ लंबे समय तक रहे थे। उन्होंने यहाँ पर ध्यान लगाया था। ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर कबीरदास के प्रवास के बीच गुरु नानक देव जी उनसे मिलने आए थे। कबीर चबूतरे के निकट ही रानी झरना (कबीर झरना) भी है। कबीर चबूतरे के ठीक नीचे एक जलकुंड है, जिसके बारे में कहा जाता है कि सुबह की किरणों के साथ ही यहाँ के जलकुंड का पानी दूध की तरह सफेद हो जाता है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">धूनी पानी </h5>
<p style="text-align:justify;">यहाँ गर्म पानी का झरना  है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह झरना औषधीय गुणों से भरपूर है।इसमें स्नान करने से शरीर के असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">दुग्धधारा </h5>
<p style="text-align:justify;">दुग्धधारा एक ऐसा  झरना है , जिसका जल दूध के समान प्रतीत होता है, इसीलिए इसे दुग्धधारा के नाम से जाना जाता है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">सोनमूढ़ा </h5>
<p style="text-align:justify;">यह सोन नदी का उद्गम स्थल है। यहाँ से घाटी और जंगल से ढकी पहाड़ियों के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">माँ की बगिया </h5>
<p style="text-align:justify;">यह माता नर्मदा को समर्पित है। कहा जाता है कि इस हरी - भरी बगिया से शिव जी की पुत्री नर्मदा पुष्पों को चुनती थीं। यह बगिया नर्मदा कुंड से एक किलोमीटर की दूरी पर है। </p>
<h5 style="text-align:justify;">सर्वोदय जैन मंदिर </h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/untitled-design-(33)1.jpg" alt="Untitled design (33)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">यह मंदिर भारत के अद्वितीय मंदिरों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। इस मंदिर को बनाने में सीमेंट और लोहे का प्रयोग नहीं किया गया है। मंदिर में स्थित मूर्ति का वजन 24 टन के लगभग है। भगवान आदिनाथ अष्ट धातु के कमल सिंहासन पर विराजमान हैं, कमल सिंहासन का वजन 17 टन है। प्रतिमा को मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज ने 6 नवंबर, 2006 को विधि - विधान से स्थापित किया था। </p>
<h5 style="text-align:justify;">नर्मदा परिक्रमा </h5>
<p><img src="https://www.amritvichar.com/media/2026-04/untitled-design-(32)2.jpg" alt="Untitled design (32)" width="1280" height="720"></img></p>
<p style="text-align:justify;">नर्मदा परिक्रमा विधि - विधान - नियम से की जाए,तो 1300 किमी से भी अधिक लंबी परिक्रमा होती है,जो 3 वर्ष 3 महीने 13 दिन में पूर्ण होती है, किन्तु आज के समय में मोटरसाइकिल या चौपहिया वाहन के द्वारा यात्रा को जल्दी पूरा कर लिया जाता है। नर्मदा परिक्रमा में नर्मदा नदी को पार नहीं किया जाता है। परिक्रमा में सभी स्थानों पर दर्शनीय स्थल देखने को मिलते हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;">यहां कैसे पहुंचें </h5>
<p style="text-align:justify;">अमरकंटक जबलपुर और बिलासपुर के निकट है। शहडोल से भी सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।अमरकंटक का निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर में है। यहाँ से अमरकंटक की दूरी 245   किमी है। जबलपुर - बिलासपुर ट्रैक पर पेंट्रा रोड स्टेशन अमरकंटक के सबसे समीपस्थ रेलवे-स्टेशन है। बिलासपुर, अनूपपुर और जबलपुर जंक्शन से भी अमरकंटक पहुँचा जा सकता है। शहडोल रेलवे-स्टेशन से अमरकंटक से  80 किमी तथा अनूपपुर रेलवे-स्टेशन से 72 किमी दूर है, जहाँ से लगातार बसें और टैक्सियां चलती रहती हैं। <br />  <br /><strong>-गौरीशंकर वैश्य विनम्र </strong><br /><strong>117 आदिलनगर, विकासनगर </strong><br /><strong>लखनऊ 226022 </strong><br /><strong>दूरभाष 09956087585 </strong><br /><strong>ईमेल - <a href="mailto:gsvaish51@gmail.com">gsvaish51@gmail.com</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विशेष लेख</category>
                                            <category>शब्द रंग</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 10:21:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय महिला टीम को पहले T20 में झटका, दक्षिण अफ्रीका ने 6 विकेट से हराया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>डरबनः </strong>कप्तान लौरा वोल्वार्ट के अर्धशतक की मदद से दक्षिण अफ्रीका ने पहले महिला टी20 क्रिकेट मैच में भारत को छह विकेट से हरा दिया। दो महीने बाद होने वाले टी20 विश्व कप की 'ड्रेस रिहर्सल' मानी जा रही श्रृंखला के पहले मैच में भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए शुक्रवार को सात विकेट पर 157 रन ही बना सकी। दक्षिण अफ्रीका ने भारत की दिशाहीन गेंदबाजी का फायदा उठाते हुए लक्ष्य पांच गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय गेंदबाजों ने 14 वाइड गेंदें फेंकी। वोल्वार्ट ने 39 गेंद में 51 रन बनाये । एनेरी डर्कसेन ने 34 गेंद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579167/indian-women-s-team-suffers-setback-in-first-t20i--defeated-by-south-africa-by-6-wickets"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-04/muskan-dixit-(8)8.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डरबनः </strong>कप्तान लौरा वोल्वार्ट के अर्धशतक की मदद से दक्षिण अफ्रीका ने पहले महिला टी20 क्रिकेट मैच में भारत को छह विकेट से हरा दिया। दो महीने बाद होने वाले टी20 विश्व कप की 'ड्रेस रिहर्सल' मानी जा रही श्रृंखला के पहले मैच में भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए शुक्रवार को सात विकेट पर 157 रन ही बना सकी। दक्षिण अफ्रीका ने भारत की दिशाहीन गेंदबाजी का फायदा उठाते हुए लक्ष्य पांच गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय गेंदबाजों ने 14 वाइड गेंदें फेंकी। वोल्वार्ट ने 39 गेंद में 51 रन बनाये । एनेरी डर्कसेन ने 34 गेंद में नाबाद 44 रन बनाये। पांच मैचों की श्रृंखला का दूसरा मैच रविवार को खेला जायेगा। पिछली चार श्रृंखलायें जीत चुकी भारतीय टीम के लिये स्पिनर श्रेयांका पाटिल और श्रीचरणी ने प्रभावित किया लेकिन तेज गेंदबाज अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके। अरूंधति रेड्डी की दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों ने जमकर धुनाई की। आखिरी पांच ओवर में भारत के पुछल्ले बल्लेबाज भी कोई कमाल नहीं कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रेयांका ने सुने लूस को जल्दी आउट कर दिया लेकिन वोल्वार्ट ने टीम पर दबाव नहीं बनने दिया और चौथे ओवर में दीप्ति शर्मा को तीन चौके लगाये। श्रेयांका ने वोल्वार्ट को आउट किया लेकिन तब तक जीत लगभग तय हो चुकी थी। क्लो ट्रायोन ने दीप्ति को छक्का लगाकर टीम को जीत दिलाई। इससे पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने पर शेफाली वर्मा (20 गेंदों में 34 रन) ने भारत को तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने पारी में पांच चौके और स्पिनर सुने लुस पर एक शानदार छक्का लगाया। स्मृति मंधाना (14 गेंदों में 13 रन) ज्यादा देर टिक नहीं सकीं और कवर क्षेत्र में कैच आउट हो गईं, जिससे पावरप्ले में ही भारत को दो झटके लगे। इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर (33 गेंदों में नाबाद 47) और जेमिमा रोड्रिग्स (29 गेंदों में 36) ने तीसरे विकेट के लिए 71 रनों की साझेदारी कर पारी को संभाला। लेकिन पावरप्ले के बाद भारत की रन गति धीमी पड़ गई और टीम 10 ओवर में दो विकेट पर 75 रन तक ही पहुंच सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">हरमनप्रीत ने बीच के ओवरों में नडाइन डी क्लर्क के खिलाफ छक्का और चौका लगाकर आक्रामकता दिखाई, जबकि जेमिमा ने ट्रायोन के खिलाफ शानदार छक्का जड़ा। भारतीय पारी हालांकि अंतिम ओवरों में गति नहीं पकड़ सकी और आखिरी पांच ओवरों में केवल 33 रन बने, जबकि इस दौरान तीन विकेट भी गिर गए। दक्षिण अफ्रीका की ओर से आयाबोंगा खाका (16 रन पर तीन विकेट) और तुमी सेखुखुने (27 रन पर दो विकेट) ने प्रभावशाली गेंदबाजी की, जबकि नॉनकुलुलेको म्लाबा (30 रन पर एक विकेट) ने स्पिन आक्रमण की अगुवाई की। भारत ने इस मैच में काशवी गौतम को टी20 अंतरराष्ट्रीय में पदार्पण का मौका दिया। उन्होंने आठ गेंदों पर 10 रन का योगदान दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/579167/indian-women-s-team-suffers-setback-in-first-t20i--defeated-by-south-africa-by-6-wickets</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:01:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Census 2027: सम्राट चौधरी ने 'भारत की जनगणना 2027' का बिहार में किया शुभारंभ </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पटनाः </strong>बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय अभियान- 'भारत की जनगणना-2027' का राज्य में शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री चौधरी ने 'भारत की जनगणना-2027' का सचिवालय से माउस क्लिक कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्री चौधरी ने राज्यवासियों से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। </p>
<p>मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि जनगणना सुशासन की आधारशिला है, जो आगामी वर्षों में विकास योजनाओं, नीतियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। उन्होंने कहा कि जनगणना-2027 तकनीकी दृष्टि से एक ऐतिहासिक पहल है। इसमें पहली बार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/579019/census-2027--samrat-chaudhary-launches-census-of-india-2027-in-bihar"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/census.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटनाः </strong>बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय अभियान- 'भारत की जनगणना-2027' का राज्य में शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री चौधरी ने 'भारत की जनगणना-2027' का सचिवालय से माउस क्लिक कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्री चौधरी ने राज्यवासियों से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। </p>
<p>मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि जनगणना सुशासन की आधारशिला है, जो आगामी वर्षों में विकास योजनाओं, नीतियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। उन्होंने कहा कि जनगणना-2027 तकनीकी दृष्टि से एक ऐतिहासिक पहल है। इसमें पहली बार पूर्णतः डिजिटल डेटा संग्रहण तथा स्व-गणना की सुविधा 17 अप्रैल 2026 से 01 मई 2026 उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में जनगणना-2027 के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 02 मई 2026 से 31 मई 2026 तक किया जाएगा।</p>
<p> ृमुख्यमंत्री चौधरी ने राज्य के सभी नागरिकों से अपील करते हुये कहा कि वे इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें। स्व-गणना के माध्यम से या प्रगणकों को सहयोग प्रदान कर एक सटीक, समावेशी और विश्वसनीय जनगणना संपन्न करने में अपना सहयोग दें। </p>
<p>उन्होंने कहा कि 'जनगणना-2027' बिहार एवं देश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, कुमार रवि, गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह उपस्थित थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मुजफ्फरनगर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:48:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
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