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                <title>सेहत - Amrit Vichar</title>
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                <description>सेहत RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सेहत: गर्मी बढ़ी तो बढ़ने लगा डायरिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार:</strong> गर्मी का असर बढ़ने लगा है। गर्मी के मौसम में डायरिया की समस्या बढ़ जाती है। इन दिनों बड़ों से लेकर बच्चे तक डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। पेट से संबंधित इस बीमारी में परहेज का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। </p>
<p><br />सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल और डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में डायरिया पीड़ित मरीज भर्ती हैं। इसके साथ ही ओपीडी में भी डायरिया की समस्या को लेकर कई मरीज पहुंच रहे हैं। डायरिया में मरीज को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हो जाती है। शरीर कमजोर होने लगता है। अगर उपचार न</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/532007/diarrhea-started-increasing-when-health-heat-increased"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/what-is-diarrhea.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार:</strong> गर्मी का असर बढ़ने लगा है। गर्मी के मौसम में डायरिया की समस्या बढ़ जाती है। इन दिनों बड़ों से लेकर बच्चे तक डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। पेट से संबंधित इस बीमारी में परहेज का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। </p>
<p><br />सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल और डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में डायरिया पीड़ित मरीज भर्ती हैं। इसके साथ ही ओपीडी में भी डायरिया की समस्या को लेकर कई मरीज पहुंच रहे हैं। डायरिया में मरीज को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हो जाती है। शरीर कमजोर होने लगता है। अगर उपचार न किया जाए तो समस्या और भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों के अनुसार खान-पान की आदतों को सुधारना बहुत जरूरी है। तला-भुना भोजन के सेवन और कम पानी पीने से डायरिया हो सकता है।</p>
<p>साथ ही लोगों को साफ-सफाई का भी ध्यान देना जरूरी है। एसटीएच की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि अपने हाथों को नियमित रूप से साफ रखें, उबला हुआ या फिल्टर पानी इस्तेमाल करें। हल्के भोजन का प्रयोग करें। बताया कि ओपीडी में डायरिया मरीज आने लगे हैं। जिनकी सेहत ठीक नहीं लग रही है उन्हें भर्ती किया जा रहा है। बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. केके पांडे ने बताया कि अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें और साथ ही यह भी ध्यान रखें की साफ पानी ही पिएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 10:52:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Pawan Singh Kunwar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अल्मोड़ा: जिन गांवों को गोद लिया उनकी ही सेहत नहीं सुधार पाए सांसद </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बृजेश तिवारी, अल्मोड़ा, अमृत विचार।</strong> लोकसभा क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों व आजादी से लेकर अब तक बुनियादी सुविधाओं से महरूम गांवों की दशा को सुधारने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सपना देखा और उनके निर्देश पर उत्तराखंड के सांसदों द्वारा भी कई गांवों को गोद भी लिया।</p>
<p>कुछ अपवाद छोड़ दें तो सांसदों द्वारा गोद लिए अधिकांश गांवों की सेहत आज भी सुधर नहीं पाई है। इन गांवों के लोग पहले की तरह आज भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं। मजे की बात यह कि अधिकांश सांसदों ने जिन गांवों को गोद लिया। वहां</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/455841/almora-mps-could-not-improve-the-health-of-the-villages"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-04/capture17.png" alt=""></a><br /><p><strong>बृजेश तिवारी, अल्मोड़ा, अमृत विचार।</strong> लोकसभा क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों व आजादी से लेकर अब तक बुनियादी सुविधाओं से महरूम गांवों की दशा को सुधारने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सपना देखा और उनके निर्देश पर उत्तराखंड के सांसदों द्वारा भी कई गांवों को गोद भी लिया।</p>
<p>कुछ अपवाद छोड़ दें तो सांसदों द्वारा गोद लिए अधिकांश गांवों की सेहत आज भी सुधर नहीं पाई है। इन गांवों के लोग पहले की तरह आज भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं। मजे की बात यह कि अधिकांश सांसदों ने जिन गांवों को गोद लिया। वहां के लोगों ने आज तक गांव में कभी अपने सांसद को देखा तक नहीं। </p>
<p>बात अल्मोड़ा लोकसभा सीट की करते हैं। इस सीट पर पिछले दस सालों से भाजपा का कब्जा है और दोनों बार अजय टम्टा यहां से सांसद चुने गए। सांसद के तौर पर उनके दस सालों के कार्यकाल की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने भी कई गांवों को गोद लिया। जिनमें से कुछ की पड़ताल की गई।</p>
<p>सांसद टम्टा ने अपने दस सालों के कार्यकाल में बागेश्वर जिले के सूपी और मजकोट, पिथौरागढ़ के जुम्मा, चंपावत के गोशनी व सल्ली, अल्मोड़ा के सुनोली व अन्य कुछ गांवों को गोद लिया। सांसद द्वारा गोद लिए इन गांवों के लिए केंद्र की निर्धारित गाइड लाइन की बात करें तो सांसदों को चयनित गांवों में ढांचागत सुविधाओं के अलावा पंचायती राज, भूमि संरक्षण, वन एवं पर्यावरण, स्वास्थ्य व शिक्षा, पेयजल, बिजली, दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, खेलकूद तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से विकास योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाना था। इन गांवों के ग्रामीणों की मानें तो विकास योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। लेकिन सच्चाई यह है कि विकास योजनाएं गांवों तक पहुंची ही नहीं। ऐसे में सांसद द्वारा गोद लिए इन गांवों के वाशिंदे आज भी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>इन समस्याओं से जूझ रहे गोद लिए गांव </strong></span><br />सांसद अजय टम्टा द्वारा गोद लिए लगभग सभी गांवों में बिजली,पानी की नियमित आपूर्ति न होना, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाओं का अभाव है। चंपावत जिले के गोशनी व सल्ली गांव की बात करें तो यहां के लोग एक बड़ी लिफ्ट पेयजल योजना बनाने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण करने, महिला डिग्री कॉलेज खोलने, बारात घर, पर्यटक आवासगृह , केंद्रीय विद्यालय, गैस गोदाम, जीआईसी और जीजीआईसी में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। बागेश्वर जिले के सूपी और मजकोट में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं।</p>
<p>गांव के लोगों को फोन कनेक्टिविटी के लिए कई किमी दूर जाना पड़ता है। पिथौरागढ़ जिले का जुम्मा गांव भी विकास की रात ताकते ताकते थक गया। सालों बीत गए सड़क तक नहीं बन पाई। रही सही कसर प्राकृतिक आपदाओं ने पूरी कर दी। कई बार जनहानि का सामना भी करना पड़ा।</p>
<p>इसी तरह अल्मोड़ा के सुनोली के विकास की तस्वीर किसी धुंधलके से कम नहीं है। अस्पताल फार्मासिस्टों के सहारे तो गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव की कोई सुविधा नहीं, आंतरिक रास्ते खड़ंजे तक की बाट जोह रहे हैं। जंगली जानवरों के आतंक से फसलें चौपट हो गई हैं तो स्कूलों में विज्ञान विषय पढ़ने तक की सुविधा नहीं है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव इतना ही सांसद के गोद लिए इन गांवों से पलायन लगातार जारी है। </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>स्वतंत्रता सेनानियों ने बजाया था आजादी का बिगुल </strong></span><br />चंपावत जिले के गोशनी का इतिहास आजादी की लड़ाई से जुड़ा है। इस गांव के वीर रणबांकुरे स्वतंत्रता सेनानी पं. हर्षदेव ओली, पं. दुर्गादत्त ओली, पं. दयाराम ओली, पं.पूर्णानंद जोशी ने इसी गांव से आजादी की अलख जगाई और ब्रितानी हुकूमत को लड़ाई के दौरान लोहे के चने चबाने को मजबूर कर दिया था। इसी तरह अल्मोड़ा का सुनोली गांव स्वतंत्रता सेनानी सोबन सिंह जीना से वास्ता रखता है। उनके नाम जिला मुख्यालय पर एसएसजे विवि और अन्य कई संस्थान तो खुल गए। लेकिन उनके पैतृक गांव की दशा आज भी दयनीय बनी हुई है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>अल्मोड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Apr 2024 19:29:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: रसोई तक पहुंचा 'बिच्छू', 'घास' से सुधरेगी सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लक्ष्मण मेहरा, हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> बदन पर छू जाए तो खुजलाते-खुजलाते प्राण निकलने को आ जाएं, लेकिन बदन के अंदर जाए तो जड़ी बूटी बन जाए। पहाड़ पर माताएं कभी-कभी इस बिच्छू घास का इस्तेमाल बच्चों को दंड देने के लिए भी करती थीं। हालांकि अब बिच्छू घास रसोई तक पहुंच चुकी है। औषधीय गुणों व पोषक तत्वों से भरपूर ये बिच्छू घास सेहत सुधारने में कारगर है। जिसे अल्मोड़ा की नैटल हिमालया संस्था विभिन्न उत्पादों के जरिये आपके घर की रसोई तक पहुंचाने के प्रयास में जुटी है।</p>
<p>  </p>
<p>संस्था के उत्पाद इन दिनों पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में चल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/434261/nettle-grass-reaches-haldwani-kitchen-health-will-improve"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-01/capture27.png" alt=""></a><br /><p><strong>लक्ष्मण मेहरा, हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> बदन पर छू जाए तो खुजलाते-खुजलाते प्राण निकलने को आ जाएं, लेकिन बदन के अंदर जाए तो जड़ी बूटी बन जाए। पहाड़ पर माताएं कभी-कभी इस बिच्छू घास का इस्तेमाल बच्चों को दंड देने के लिए भी करती थीं। हालांकि अब बिच्छू घास रसोई तक पहुंच चुकी है। औषधीय गुणों व पोषक तत्वों से भरपूर ये बिच्छू घास सेहत सुधारने में कारगर है। जिसे अल्मोड़ा की नैटल हिमालया संस्था विभिन्न उत्पादों के जरिये आपके घर की रसोई तक पहुंचाने के प्रयास में जुटी है।</p>
<p> </p>
<p>संस्था के उत्पाद इन दिनों पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में चल रहे उत्तरायणी मेले में छाए हैं। जिसमें लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर बिच्छु घास से निर्मित उत्पादों की जानकारी ले रहे हैं। संस्था के सदस्य भूपेंद्र वल्दिया कहते हैं कि बिच्छु खास औषधीय एवं पोषक गुणों से भरपूर है। इसमें 28 प्रतिशत प्रोटीन, .92 प्रतिशत मैगनीशियम, .58 प्रतिशत फॉस्फोरेस, 4.7 प्रतिशत कैल्शियम, .75 प्रतिशत पोटेशियम और .03 प्रतिशत आयरन की मात्रा होती है।</p>
<p>इसके अलावा जिंक, मैगनीशियम, कॉपर, विटामिन ए, विटामिन सी, पॉली फिनॉल्स एवं एंटीऑक्सीडेंस पोषक तत्व भी शामिल रहते हैं। सभी पोषक तत्व स्वास्थ्य वर्धक एवं रोग प्रतिरोधी हैं। यह डाईबिटीज, ब्लड प्रेशर, ऑर्थराइटिस, गाउट आदि में लाभकारी है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पंतनगर विश्वविद्यालय, जीबी पंत पर्यावरण कोसी कटारमल और ग्रीन हिल ट्रस्ट ने मिलकर कुछ समय पूर्व इस मुहिम को शुरू किया था। इसके लिए नैटल हिमालया संस्था का गठन किया गया, जिसका मुख्य केंद्र अल्मोड़ा में स्थित है। संस्था जिन गांवों में बिच्छु घास होता है वहां से समूहों के माध्यम से घास एकत्र कराती है। इसके बाद घास को अल्मोड़ा केंद्र में लाया जाता है, जहां घास से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं।<br /> <br /><strong>बिच्छु घास से बने ये उत्पाद हैं उपलब्ध</strong><br />उत्तरायणी मेले में संस्था के लगे स्टॉल में बिच्छु बूटी चाय (रोज मैरी, तुलसी, अदरक, दालचीनी के साथ), बिच्छु बूटी आटा मिक्स, बिच्छु बूटी पैन केक मिक्स, बिच्छु बूटी चीला मिक्स, बिच्छु बूटी नमकीन (मडुवा, मादिरा, चुवा आटा के साथ), बिच्छु बूटी नमक मिक्स (लहसुन के साथ), बिच्छु बूटी चाट मसाला (अनेक मसालों के साथ), बिच्छू बूटी बेक्ड नमकीन और बिच्छु बूटी के पपटौले आदि उत्पाद उपलब्ध हैं। </p>
<p><strong>हल्द्वानी उत्तरायणी मेले से हुई लॉचिंग</strong><br />नैटल हिमालया संस्था के सदस्य भूपेंद्र वल्दिया ने बताया कि संस्था के बिच्छु घास के उत्पादों की लॉचिंग हल्द्वानी उत्तरायणी मेले से हुई है। मेला संपन्न होने के बाद संस्था बरेली में लगने वाले उत्तरायणी मेले में स्टॉल लगायेगा। उन्होंने बताया कि लाइफ में बदलाव के लिए भोजन बदलना होगा। तभी शरीर स्वस्थ और रोग मुक्त रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jan 2024 18:28:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: जेल में मिलेगी दाल फ्राई, देसी घी से बनेगी कैदियों की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong>  वो दिन गए जब जेल की दाल-रोटी बदनाम थी। अब न तो जेल में सूखी रोटी मिलेगी और न ही पानी वाली दाल। अब तो जेल में बंद कैदियों और बंदियों को दाल फ्राई परोसी जाएगी और सेहत बनाने के लिए देसी घी भी खिलाया जाएगा। हालांकि अगर सिर्फ घी का हिसाब जोड़ें तो जेल प्रशासन को हर माह घी पर ही करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च करने होंगे। </p>
<p>नई उत्तराखंड नियमावली 2023 लागू कर दी गई है और इस नियमावली में कैदियों और बंदियों की सेहत को खास तवज्जो दी गई है। नई नियमावली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/430151/in-haldwani-jail-dal-fried-with-desi-ghee-will-improve"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/30_12_2019-jail_ki_roti.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> वो दिन गए जब जेल की दाल-रोटी बदनाम थी। अब न तो जेल में सूखी रोटी मिलेगी और न ही पानी वाली दाल। अब तो जेल में बंद कैदियों और बंदियों को दाल फ्राई परोसी जाएगी और सेहत बनाने के लिए देसी घी भी खिलाया जाएगा। हालांकि अगर सिर्फ घी का हिसाब जोड़ें तो जेल प्रशासन को हर माह घी पर ही करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च करने होंगे। </p>
<p>नई उत्तराखंड नियमावली 2023 लागू कर दी गई है और इस नियमावली में कैदियों और बंदियों की सेहत को खास तवज्जो दी गई है। नई नियमावली के मुताबिक अब जेल में बंद बंदियों और कैदियों को पोषक आहार परोसा जाना है। जिसके तहत हर कैदी और बंदी को हर रोज 5 ग्राम देसी घी दिया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। सिर्फ उप कारागार हल्द्वानी की बात करें तो इसकी क्षमता साढ़े 5 सौ से कुछ ज्यादा है, लेकिन यहां 15 सौ बंदी और कैदी से कम कभी नहीं रहते।</p>
<p>कभी-कभी तो ये संख्या 18 सौ के पार चली जाती है। मौजूदा वक्त में देसी घी का दाम साढ़े छह सौ रुपये के आस-पास है। अब अगर 5 ग्राम घी प्रति बंदी का हिसाब लगाएं तो 15 सौ कैदियों व बंदियों के लिए हर रोज साढ़े 7 हजार ग्राम घी यानी साढ़े 7 किग्रा देसी घी जेल प्रशासन को हर रोज चाहिए। इस लिहाज से जेल प्रशासन को हर रोज करीब 48 सौ रुपये खर्च करने होंगे और अगर महीने का हिसाब लगाएं तो 15 सौ बंदी व कैदी पर जेल प्रशासन को सवा लाख रुपये से ज्यााद खर्च करना होगा। </p>
<p>बहरहाल, ये सिर्फ देसी घी की बात थी। इसके अतिरिक्त प्रति बंदी व कैदी को प्रति दिन 25 ग्राम प्याज, दो ग्राम लहसुन, तीन ग्राम जीरा और टमाटर देना होगा। साथ ही मसालों में हल्दी, मिर्च, सब्जी मसाले को एक ग्राम से बढ़ाकर दो ग्राम कर दिया गया है। जबकि डायबिटीज वाले मरीजों को सप्ताह में दो अंडे और 60 मिली लीटर दूध रोज पीने को मिलेगा। उत्तराखंड कारागार नियमावली को 14 नवंबर से प्रदेश की सभी जेलों में लागू कर दिया गया है। </p>
<p>इनसेट<br />नियमावली बदली तो बदल गया खाने का स्वाद<br />हल्द्वानी : उत्तराखंड राज्य गठन को भले ही 23 साल हो गए हैं और अब से पहले राज्य की जेलों पर उत्तर प्रदेश कारागार नियमावली ही चलती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब उत्तराखंड कारागार नियमावली 2023 बन चुकी है। पहले उत्तर प्रदेश की नियमावली के आधार पर ही बंदियों और कैदियों को भोजन परोसा जाता था। नई नियमावली के साथ अब बंदियों और कैदियों को न सिर्फ खाने में स्वाद मिलेगा बल्कि पोषक तत्व भी मिलेंगे। बता दें कि पुरानी नियमावली के तहत अभी तक जेल के खाने में लहसुन, प्याज, जीरा, टमाटर और घी नहीं डाला जाता था। </p>
<p>इनसेट<br />बच्चों और गर्भवतियों को हर रोज मिलेगा दूध<br />हल्द्वानी : नई नियमावली के मुताबिक अब मां या अन्य परिजनों के साथ जेल में रह रहे चार साल से छह साल तक के बच्चों को 500 एमएल दूध तीन टाइम दिया जाएगा। इसके अलावा गर्भवतियों को प्रतिदिन दूध मिलेगा। इसी के साथ तीन ग्राम चायपत्ती, 50 ग्राम गुड़ प्रति दिन दिया जाएगा। जब गर्मियों का सीजन शुरू होगा तो अप्रैल से जून तक 20 ग्राम नीबू भी दिया जाएगा। खाने-पीने के साथ ही जेलों में साफ-सफाई पर भी खास ध्यान दिया जाना है। इसे लेकर भी उत्तराखंड कारागार नियमावली 2023 में खास दिशा-निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p>बयान<br />उत्तराखंड कारागार नियमावली 2023 लागू हो चुकी है। जिसके तहत अब कैदियों को पोषक भोजन दिया जाना है। उप कारागार में भी नई नियमावली के तहत काम शुरू कर दिया गया है। <br />प्रमोद पांडेय, जेल अधीक्षक, उप कारागार हल्द्वानी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Dec 2023 08:04:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: जेल में मिलेगी दाल फ्राई, देसी घी से बनेगी कैदियों की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>वो दिन गए जब जेल की दाल-रोटी का नाम लेकर डराया जाता है। क्योंकि अब न तो जेल में सूखी रोटी मिलेगी और न ही पानी वाली दाल। अब तो जेल में बंद कैदियों और बंदियों को दाल फ्राई परोसी जाएगी और सेहत बनाने के लिए देसी घी भी खिलाया जाएगा। हालांकि अगर सिर्फ घी का हिसाब जोड़ें तो जेल प्रशासन को हर माह घी पर ही करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च करने होंगे। </p>
<p>नई उत्तराखंड नियमावली 2023 लागू कर दी गई है और इस नियमावली में कैदियों और बंदियों की सेहत को खास तवज्जों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/429143/in-haldwani-jail-dal-fried-with-desi-ghee-will-improve"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/uttarakhand-haldwani-jail-offer-real-jail-experience-just-rupees-500-95246392.webp" alt=""></a><br /><p><strong>सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>वो दिन गए जब जेल की दाल-रोटी का नाम लेकर डराया जाता है। क्योंकि अब न तो जेल में सूखी रोटी मिलेगी और न ही पानी वाली दाल। अब तो जेल में बंद कैदियों और बंदियों को दाल फ्राई परोसी जाएगी और सेहत बनाने के लिए देसी घी भी खिलाया जाएगा। हालांकि अगर सिर्फ घी का हिसाब जोड़ें तो जेल प्रशासन को हर माह घी पर ही करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च करने होंगे। </p>
<p>नई उत्तराखंड नियमावली 2023 लागू कर दी गई है और इस नियमावली में कैदियों और बंदियों की सेहत को खास तवज्जों दी गई है। नई नियमावली के मुताबिक अब जेल में बंद बंदियों और कैदियों को पोषक आहार परोसा जाना है। जिसके तहत हर कैदी और बंदी को हर रोज 5 ग्राम देसी घी दिया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।</p>
<p>सिर्फ उप कारागार हल्द्वानी की बात करें तो इसकी क्षमता साढ़े 5 सौ से कुछ ज्यादा है, लेकिन यहां 15 सौ बंदी और कैदी से कम कभी नहीं रहते। कभी-कभी तो ये संख्या 18 सौ के पार चली जाती है। मौजूदा वक्त में देसी घी का दाम साढ़े छह सौ रुपये के आस-पास है।</p>
<p>अब अगर 5 ग्राम घी प्रति बंदी का हिसाब लगाएं तो 15 सौ कैदियों व बंदियों के लिए हर रोज साढ़े 7 हजार ग्राम घी यानी साढ़े 7 किग्रा देसी घी जेल प्रशासन को हर रोज चाहिए। इस लिहाज से जेल प्रशासन को हर रोज करीब 48 सौ रुपये खर्च करने होंगे और अगर महीने का हिसाब लगाएं तो 15 सौ बंदी व कैदी पर जेल प्रशासन को सवा लाख रुपये से ज्यााद खर्च करना होगा। </p>
<p>बहरहाल, ये सिर्फ देसी घी की बात थी। इसके अतिरिक्त प्रति बंदी व कैदी को प्रति दिन 25 ग्राम प्याज, दो ग्राम लहसुन, तीन ग्राम जीरा और टमाटर देना होगा। साथ ही मसालों में हल्दी, मिर्च, सब्जी मसाले को एक ग्राम से बढ़ाकर दो ग्राम कर दिया गया है। जबकि डायबिटीज वाले मरीजों को सप्ताह में दो अंडे और 60 मिली लीटर दूध रोज पीने को मिलेगा। उत्तराखंड कारागार नियमावली को 14 नवंबर से प्रदेश की सभी जेलों में लागू कर दिया गया है। </p>
<p><strong>नियमावली बदली तो बदल गया खाने का स्वाद</strong><br />हल्द्वानी : उत्तराखंड राज्य गठन को भले ही 23 साल हो गए हैं और अब से पहले राज्य की जेलों पर उत्तर प्रदेश कारागार नियमावली ही चलती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब उत्तराखंड कारागार नियमावली 2023 बन चुकी है। पहले उत्तर प्रदेश की नियमावली के आधार पर ही बंदियों और कैदियों को भोजन परोसा जाता था। नई नियमावली के साथ अब बंदियों और कैदियों को न सिर्फ खाने में स्वाद मिलेगा बल्कि पोषक तत्व भी मिलेंगे। बता दें कि पुरानी नियमावली के तहत अभी तक जेल के खाने में लहसुन, प्याज, जीरा, टमाटर और घी नहीं डाला जाता था। </p>
<p><strong>बच्चों और गर्भवतियों को हर रोज मिलेगा दूध</strong><br />हल्द्वानी : नई नियमावली के मुताबिक अब मां या अन्य परिजनों के साथ जेल में रह रहे चार साल से छह साल तक के बच्चों को 500 एमएल दूध तीन टाइम दिया जाएगा। इसके अलावा गर्भवतियों को प्रतिदिन दूध मिलेगा। इसी के साथ तीन ग्राम चायपत्ती, 50 ग्राम गुड़ प्रति दिन दिया जाएगा। जब गर्मियों का सीजन शुरू होगा तो अप्रैल से जून तक 20 ग्राम नीबू भी दिया जाएगा। खाने-पीने के साथ ही जेलों में साफ-सफाई पर भी खास ध्यान दिया जाना है। इसे लेकर भी उत्तराखंड कारागार नियमावली 2023 में खास दिशा-निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p><em><strong>उत्तराखंड कारागार नियमावली 2023 लागू हो चुकी है। जिसके तहत अब कैदियों को पोषक भोजन दिया जाना है। उप कारागार में भी नई नियमावली के तहत काम शुरू कर दिया गया है। </strong></em><br /><em><strong>- प्रमोद पांडेय, जेल अधीक्षक, उप कारागार हल्द्वानी</strong></em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Dec 2023 13:12:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: गुलाबी ठंड से बच्चों की सेहत 'लाल', पहुंच रहे अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम का बदलता मिजाज सेहत को नुकसान पहुंचाने लगा है। वायरल बुखार के साथ सर्दी और जुकाम ने पहले से ज्यादा पैर पसार लिए हैं। सबसे ज्यादा बच्चे मौसम की मार की चपेट में आ रहे हैं। इस कारण अस्पतालों में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ गई है।</p>
<p>मौसम में बदलाव से अब धीरे-धीरे सर्दी का एहसास होने लगा है। इन दिनों सुबह के समय न्यूनतम तापमान जहां 15 से 16 डिग्री सेल्सियस पहुंच रहा है, वहीं रात में 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक तापमान लुढ़क रहा है। मौसम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/422757/haldwani-childrens-health-is-deteriorating-due-to-cold-and-they"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-12/2018_11image_13_30_476279840sickchild.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार।</strong> गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम का बदलता मिजाज सेहत को नुकसान पहुंचाने लगा है। वायरल बुखार के साथ सर्दी और जुकाम ने पहले से ज्यादा पैर पसार लिए हैं। सबसे ज्यादा बच्चे मौसम की मार की चपेट में आ रहे हैं। इस कारण अस्पतालों में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ गई है।</p>
<p>मौसम में बदलाव से अब धीरे-धीरे सर्दी का एहसास होने लगा है। इन दिनों सुबह के समय न्यूनतम तापमान जहां 15 से 16 डिग्री सेल्सियस पहुंच रहा है, वहीं रात में 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक तापमान लुढ़क रहा है। मौसम के इस बदलाव को चिकित्सक सेहत के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं। बेस अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस बिष्ट की मानें तो मौसम में परिवर्तन होना अपने साथ बीमारियां लेकर आता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे बच्चों की सेहत पर पड़ता है। बच्चे बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ वायरल की चपेट में आ जाते हैं। इससे बचाव को लेकर अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है। </p>
<p><strong>टाइफाइड और पीलिया का बढ़ा प्रकोप</strong><br />सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस बिष्ट कहते हैं कि बच्चों में वयस्कों की अपेक्षा रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने से बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। ठंड के साथ ही बच्चों में कई तरह की बीमारियां होती हैं। इन दिनों ओपीडी में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ गई है।</p>
<p>रोजाना 25 से 30 बच्चे ऐसे आ रहे हैं जो सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के साथ वायरल से पीड़ित हैं। इसके अलावा 10 से 15 बच्चों में टायफाइड और पीलिया के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। गंभीर बीमार बच्चों को इलाज चल रहा है। अभिभावकों को सलाह है कि बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Dec 2023 07:38:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हल्द्वानी: एल्युमिनियम छोड़, सेहत ‘स्टील’ बना रहे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>दीपावली से पहले बाजारों में रौनक लौट आई है। धनतेरस के त्योहार को लेकर बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक, सर्राफा, ऑटोमोबाइल्स के बाजार सज चुके हैं हालांकि इस दिन बर्तनों की खरीदारी ज्यादा होती है। इस बार बर्तनों की खरीदारी में लोग सेहत का विशेष ध्यान रख रहे हैं।</p>
<p>धनतेरस को लेकर हल्द्वानी का बर्तन बाजार सज गया है। कोविड-19 महामारी और विभिन्न बीमारियों के आने के बाद लोगों ने सिर्फ भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया है बल्कि भोजन पकाने के लिए भी बर्तनों में भी गुणवत्ता का ध्यान रख रहे हैं। यही वजह है कि लोगों का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/416947/haldwani-people-are-leaving-aluminum-and-making-health-steel"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-11/capture16.png" alt=""></a><br /><p><strong>हल्द्वानी, अमृत विचार। </strong>दीपावली से पहले बाजारों में रौनक लौट आई है। धनतेरस के त्योहार को लेकर बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक, सर्राफा, ऑटोमोबाइल्स के बाजार सज चुके हैं हालांकि इस दिन बर्तनों की खरीदारी ज्यादा होती है। इस बार बर्तनों की खरीदारी में लोग सेहत का विशेष ध्यान रख रहे हैं।</p>
<p>धनतेरस को लेकर हल्द्वानी का बर्तन बाजार सज गया है। कोविड-19 महामारी और विभिन्न बीमारियों के आने के बाद लोगों ने सिर्फ भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया है बल्कि भोजन पकाने के लिए भी बर्तनों में भी गुणवत्ता का ध्यान रख रहे हैं। यही वजह है कि लोगों का तांबा, स्टील के बर्तनों के लिए रुझान बढ़ा है।</p>
<p>इसके बाद बाजारों में भी तांबे और स्टील के बर्तन के नए-नए आइटम आ रहे हैं जिनमें खाद्य पकने के साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इस बार बाजार में स्टील के कुकर, तांबे के जार, स्टील की कढ़ाही की काफी मांग है। <br />स्टील के कुकर-कढ़ाही बन रहे पसंद</p>
<p>अमर बर्तन भंडार के स्वामी राजीव अग्रवाल ने बताया कि इस बार स्टील के कुकरों की काफी मांग है। इनकी कीमत 2 हजार से शुरू होकर 4 हजार रुपये तक है। इन कुकर में भी कई वैरायटी हैं, हालांकि सबसे ज्यादा मांग इंडक्शन व गैस दोनों चूल्हे पर चलने वाले कुकर की है।</p>
<p><strong>तांबे का पानी का जार बीमारियां भगाए हजार</strong><br />बाजार में इस बार तांबे का वाटर कैंपर आया है। घर में पानी रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक के वाटर कैंपर की जगह यह लोगों के लिए ज्यादा सेहतमंद है। तांबे का जार होने से पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह 4, 6, 8, 10 लीटर अलग-अलग क्षमता में उपलब्ध है, इसकी कीमत 600 रुपये से 3 हजार रुपये तक है।</p>
<p><strong>स्टील लालटेन से नहीं बुझेगा दीया</strong><br />मुरादाबाद से आए व्यापारी मो. नदीम ने बताया कि स्टील का एक लालटेन बनाया है। इस लालटेन में एक दीया भी है। लालटेन के चारों ओर कांच है ऐसे में दीया हवा से नहीं बुझेगा। छोटे आकार के इस लालटेन को मंदिर में भी रख सकते हैं, कहीं लटका भी सकते हैं। इसकी कीमत अधिकतम 250 रुपये है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>हल्द्वानी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 07:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनीताल: जलवायु परिवर्तन ने बिगाड़ी नैनी झील की सेहत, 5 फीट से कम पहुंचा झील का जलस्तर </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> सरोवर नगरी की लाइफलाइन नैनी झील की सेहत ठीक नहीं है। इस बार फरवरी में ही तापमान बढ़ने लगा था, जिसके कारण मार्च तक झील का जल स्तर काफी कम हो गया है। जल स्तर में अभी से ही कमी देखी जा रही है।</p>
<p>हालांकि नैनी झील का जल स्तर हर साल गर्मियों में कम होना पर्यावरणविदों के लिए लंबे समय से चिंता की वजह बना हुआ है, लेकिन इस बार इसका गिरना सर्दियों के मौसम से ही जारी है। </p>
<p>मालूम हो कि नैनीताल में आने वाले पर्यटकों के लिए नैनी झील आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/349861/nainital-climate-change-spoiled-the-health-of-naini-lake-the"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/underground_lake_in_nainital_1_0.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैनीताल, अमृत विचार।</strong> सरोवर नगरी की लाइफलाइन नैनी झील की सेहत ठीक नहीं है। इस बार फरवरी में ही तापमान बढ़ने लगा था, जिसके कारण मार्च तक झील का जल स्तर काफी कम हो गया है। जल स्तर में अभी से ही कमी देखी जा रही है।</p>
<p>हालांकि नैनी झील का जल स्तर हर साल गर्मियों में कम होना पर्यावरणविदों के लिए लंबे समय से चिंता की वजह बना हुआ है, लेकिन इस बार इसका गिरना सर्दियों के मौसम से ही जारी है। </p>
<p>मालूम हो कि नैनीताल में आने वाले पर्यटकों के लिए नैनी झील आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है। झील जहां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षिक करती है। वहीं, यह शहर के मौसम और जलवायु का निर्धारण भी करती है। यही नहीं, झील से ही शहर को पानी की आपूर्ति भी की जाती है। शुक्रवार तक नैनी झील का जलस्तर 4 फीट 11 इंच तक पहुंच गया, जोकि पिछले छह सालों में मार्च महीने का सबसे कम जलस्तर है। </p>
<p><strong>कम बर्फबारी और बारिश न होना है कारण</strong><br />नैनी झील का जलस्तर इस बार बरसात खत्म होते ही यानी बीते अगस्त माह के बाद से ही कम होने लगा था। इसकी वजह इस बार सर्दियों में बारिश और बर्फबारी न होना भी रहा। इसका असर यह रहा कि झील बरसात के बाद से ही रिचार्ज नहीं हो सकी। हालांकि इस बार मानसून में भी पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी। वर्ष 2016-17 में भी नैनी झील का जल स्तर गिरने से झील में डेल्टा बन गए थे। वर्ष 2020 और 2022 में यहां पर मानसून के बाद भी सर्दियों में बारिश और बर्फबारी देखने को मिली थी। इसकी वजह से वर्ष 2020 की गर्मियों में झील का जलस्तर इतनी तेजी से नहीं गिरा था।</p>
<p><strong>2017 में यह लिया गया था निर्णय </strong><br />वर्ष 2017 से पहले झील से शहर को लगातार 24 घंटे पानी की सप्लाई दी जाती थी, लेकिन झील के गिरते हुए जलस्तर को देखते हुए इसे वर्ष 2017 में सुबह और शाम को एक-एक घंटे कर दिया गया था। गर्मियों में पर्यटन सीजन होने की वजह से पानी की खपत बढ़ जाती है। वर्ष 2017 से पहले झील से रोजाना 18 एमएलडी तक पानी की सप्लाई की जाती थी, लेकिन अब यह रोजाना 8 एमएलडी रह गई है। इस बार मौसम जल्दी गर्म होने से मार्च माह की शुरुआत में ही झील का जलस्तर कम हो गया है। अगर ऐसा ही रहा तो मई-जून तक हालात चिंताजनक हो सकते हैं। अभी सुबह शाम ढाई-ढाई घंटे पानी सप्लाई किया जा रहा है।</p>
<p><strong>विगत 6 वर्षों में मार्च माह में नैनी झील का न्यूनतम जल स्तर </strong></p>
<p><em><strong>वर्ष         जल स्तर</strong></em><br /><em><strong>2018 - 5 फीट 1 इंच</strong></em><br /><em><strong>2019 -  5 फीट 5 इंच</strong></em><br /><em><strong>2020 - 7 फीट</strong></em><br /><em><strong>2021 -  5 फीट 7 इंच</strong></em><br /><em><strong>2022 - 7 फीट 4 इंच</strong></em><br /><em><strong>2023 - 4 फीट 11 इंच</strong></em><br /><strong><em>(आंकड़े सिंचाई विभाग द्वारा दिए गए हैं)</em></strong></p>
<p><br /><strong><em>इस बार बारिश-बर्फबारी नहीं होने से प्राकृतिक जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए हैं, जिससे नैनी झील का जलस्तर भी काफी कम हो गया है। इस संबंध में जल संस्थान को अवगत कराया जाएगा, जिससे अधिक गिरावट होने से पानी की कटौती की जा सके।</em></strong><br /><strong><em>- एके वर्मा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग</em></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>नैनीताल</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/349861/nainital-climate-change-spoiled-the-health-of-naini-lake-the</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Mar 2023 19:25:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhupesh Kanaujia]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरेली: गो आधारित प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी आय, सुधरेगी सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बरेली, अमृत विचार :</strong> जैविक और गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मकसद से गुरुवार को विकास भवन में डीएम शिवाकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में कृषि प्रदर्शनी एवं कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों ने सम्मेलन में अपने अनुभाव साझा करने के साथ ही सुझाव दिए।</p>
<p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">ये भी पढ़ें - </span><span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/341697/bareilly-principals-xi-won-the-cricket-match">बरेली: प्रिसिंपल एकादश ने जीता क्रिकेट मुकाबला</a></span></strong></p>
<p>डीएम ने गो आधारित खेती करने वाले किसानों के क्षेत्र का भ्रमण कराकर उक्त पद्धति अपनाने को प्रेरित करने और उप कृषि निदेशक कार्यालय में हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही किसानों को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/341699/bareilly-cow-based-natural-farming-will-increase-income-and-improve"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-02/09mg251_519.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बरेली, अमृत विचार :</strong> जैविक और गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मकसद से गुरुवार को विकास भवन में डीएम शिवाकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में कृषि प्रदर्शनी एवं कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों ने सम्मेलन में अपने अनुभाव साझा करने के साथ ही सुझाव दिए।</p>
<p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">ये भी पढ़ें - </span><span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/341697/bareilly-principals-xi-won-the-cricket-match">बरेली: प्रिसिंपल एकादश ने जीता क्रिकेट मुकाबला</a></span></strong></p>
<p>डीएम ने गो आधारित खेती करने वाले किसानों के क्षेत्र का भ्रमण कराकर उक्त पद्धति अपनाने को प्रेरित करने और उप कृषि निदेशक कार्यालय में हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही किसानों को जैविक एवं गो आधारित प्राकृतिक खेती में अंतर को समझाते हुए इसके महत्व बताएं। प्रदर्शनी में उद्यान विभाग के अलावा जैविक उत्पाद तैयार करने वाले एफपीओ के स्टाल का निरीक्षण किया।</p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">केवीके के वैज्ञानिक डा. वीपी सिंह ने प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, पंचगव्य, अग्नि अस्त्र, ब्रम्हास्त्र, दशपर्णी अर्क, सप्त धान्यांकुर आदि को बनाने की जानकारी दी। </span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;">डा. आरआर सागर ने बताया कि पलेवा के समय और खड़ी फसल में जीवामृत, घनजीवामृत, पंचगव्य; फसल पोषण के लिए सप्त धान्यांकुर; बीज उपचार के लिए बीजामृत एवं रोगों और कीटों से बचाने हेतु अग्नि अस्त्र, ब्रम्हास्त्र, नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क का प्रयोग किया जाता है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"> यह भी बताया कि मृदा में रहने वाले जीवाणु, जो मिट्टी से पोषक तत्वों को पौधों को उपलब्ध कराती है, उन्हीं जीवाणुओं को प्राकृतिक खेती द्वारा सशक्त किया जाता है और इन जीवाणुओं की संख्या प्राकृतिक खेती द्वारा बढ़ाई जा सकती है।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"> मुख्य विकास अधिकारी, उप कृषि निदेशक डा. दीदार सिंह, जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी, डीएचओ पुनीत पाठक, पीपीओ अर्चना प्रकाश वर्मा, प्रखर सक्सेना, शिव कुमार, गिरीश चंद्र सिंह, प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश, सर्वेश गंगवार, मनोज शर्मा, सत्यपाल महराज, दिनेश शर्मा, ओमप्रकाश कुमार, ने जीवामृत आदि का उपयोग करने के तरीके बताए।</span></p>
<p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">जिला मिशन समिति की बैठक में किसानों ने रखे विचार: </span></strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">विकास भवन सभागार में जिला मिशन समिति की बैठक में कृषि वैज्ञानिक डा. वीपी सिंह, डा. वाणी यादव, कृषक दीपक शर्मा, सतपाल महाराज, मनोज शर्मा, राकेश गंगवार, सीताराम आदि गो आधारित प्राकृतिक खेती के लाभ कृषकों से साझा करते हुए इस पद्धति से खेती करने का अनुरोध किया।</span></p>
<p><span style="font-family:NewswrapWeb;"> प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश कन्नौजिया ने बताया कि जीवामृत से बेहतर उत्पादन मिलता है। पैदावार उच्च गुणवत्ता की होने से बाजार में कीमत भी अच्छी मिलती है। कहा कि फसलों में लगने वाले रोगों के लिए वह रसायनिक कीटनाशक दवाओं का प्रयोग नहीं करते, उसकी जगह गोमूत्र से तैयार दवाओं का प्रयोग किया जाता है। ग्रेम के जैविक खेती करने वाले किसान सर्वेश ने गो आधारित खेती की लागत, भूमि स्वास्थ्य में जीवांश व कार्बन के स्तर, उत्पादन एवं गुणवत्ता की जानकारी दी।</span></p>
<p><strong><span style="font-family:NewswrapWeb;">ये भी पढ़ें - </span><span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/341694/in-bareilly-where-the-cruel-game-of-abortion-was-going">बरेली: जहां चल रहा था गर्भपात का क्रूर खेल... वहां सरकारी सिस्टम के भी तार</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बरेली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Feb 2023 23:21:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Om Parkash chaubey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जापानी बैंगन: सेहत के साथ देगा अच्छी कीमत, प्रजाति का परीक्षण सफल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लोहाघाट (चंपावत), अमृत विचार। </strong>कृषि विज्ञान केंद्र में औषधीय गुणों से भरपूर बैंगन पर किया गया ट्रायल काफी सफल रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र की उद्यान एवं सब्जी वैज्ञानिक डॉ. रजनी पंत ने जापानी एग वाइट नाम से जानी-पहचानी बैंगन की इस प्रजाति को परीक्षण के लिए केंद्र में लगाया था, जो यहां की जलवायु में काफी फलत देने में सक्षम है। निकट भविष्य में इसकी पौध किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। </p>
<h5><strong>मैग्नीसियम का स्रोत, किडनी के लिए रामबाण</strong></h5>
<p>वैज्ञानिक डॉ. पंत के अनुसार, यह अंडाकार बैंगन पोटेशियम, विटामिन बी, मैग्नीसियम एवं कॉपर का प्राकृतिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/338851/japanese-brinjal-will-give-good-price-with-health"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/बैंगन1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लोहाघाट (चंपावत), अमृत विचार। </strong>कृषि विज्ञान केंद्र में औषधीय गुणों से भरपूर बैंगन पर किया गया ट्रायल काफी सफल रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र की उद्यान एवं सब्जी वैज्ञानिक डॉ. रजनी पंत ने जापानी एग वाइट नाम से जानी-पहचानी बैंगन की इस प्रजाति को परीक्षण के लिए केंद्र में लगाया था, जो यहां की जलवायु में काफी फलत देने में सक्षम है। निकट भविष्य में इसकी पौध किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। </p>
<h5><strong>मैग्नीसियम का स्रोत, किडनी के लिए रामबाण</strong></h5>
<p>वैज्ञानिक डॉ. पंत के अनुसार, यह अंडाकार बैंगन पोटेशियम, विटामिन बी, मैग्नीसियम एवं कॉपर का प्राकृतिक स्रोत है। इसमें कॉलस्ट्रॉल का स्तर कम करने तथा उसे सामान्य स्तर पर लाने की अद्भुत क्षमता होने के कारण यह डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है। यही नहीं, यह किडनी के लिए भी रामबाण है जो पाचन क्रिया को गतिशील रखता है। तमाम औषधीय गुणों को समेटे यह प्रजाति किसानों की आय को दोगुना करने में काफी सहायक होगी। </p>
<h5><strong>गोबर और पंचामृत का किया गया प्रयोग</strong></h5>
<p>इसके औषधीय गुणों को बनाए रखने के लिए इसमें गोबर की खाद व कीटनाशक के लिए पंचामृत का प्रयोग किया गया है। एक पौधे से 2-3 किग्रा तक उत्पादन लिया जा सकता है। इस बैंगन में प्राकृतिक रूप से ऐसी क्षमता होती है कि इसमें रोगों का प्रभाव बहुत कम होता है। </p>
<h5><strong>कीवी बना सेब का विकल्प</strong></h5>
<p>डॉ. पंत ने मौसम चक्र में आए बदलाव के कारण यहां सेब की डिलीशियस प्रजाति का वजूद समाप्त होता देख उसके विकल्प के रूप में कीवी का इससे पूर्व जो परीक्षण किया गया था, वह भी सफल रहा है। अब किसान कीवी की खेती की ओर भी अग्रसर होने लगे हैं। केंद्र में अनुसंधान सफल होने के बाद अब यहां कीवी के हजारों पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। </p>
<h5><strong>पूर्वजों की विरासत का सवाल</strong></h5>
<p>डॉ. पंत का मानना है कि कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के निरंतर प्रयास एवं किसानों के लंबे अनुभव से ऐसा प्रयास किए जाने की एक सोच पैदा की जा रही है, जिससे किसी भी स्तर पर किसानों का खेती से मोहभंग न हो तथा वह अपने पूर्वजों की विरासत को संभालकर पलायन के बारे में सोचे तक नहीं।</p>
<div class="pbwidget w-l543 postdisplay_title h1">
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<h6 class="tag_h1 node_title"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/338842/nainital--sacked-district-panchayat-president-reached-the-high-court-demanding-reinstatement-of-the-post#gsc.tab=0">यह भी पढ़ें- नैनीतालः पद की बहाली की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंचीं बर्खास्त जिला पंचायत अध्यक्ष </a></span></strong></h6>
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                                                            <category>उत्तराखंड</category>
                                            <category>चंपावत</category>
                                            <category>Special</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Jan 2023 19:38:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनिया की सेहत में हो रहा है सुधार: सर गंगाराम अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> वायरल श्वसन संक्रमण के कारण सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की सेहत में सुधार हो रहा है। अस्पताल ने यह जानकारी दी है। सर गंगाराम अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘‘वायरल श्वसन संक्रमण के बाद भर्ती कराईं गईं सोनिया गांधी की हालत स्थिर है और उनकी सेहत में धीरे-धीरे सुधार भी हो रहा है।’’</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें -</strong> <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/331247/sages-and-saints-should-announce-the-date-of-completion-of">राम मंदिर के निर्माण पूरा होने की तारीख की घोषणा साधु-संतों को करनी चाहिए, अमित शाह को नहीं: खरगे</a></span></p>
<p>कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष 76 वर्षीय सोनिया गांधी को वायरल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/331272/sonias-health-is-improving-at-sir-gangaram-hospital"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-01/sonia-gandhi-discharged-from-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> वायरल श्वसन संक्रमण के कारण सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की सेहत में सुधार हो रहा है। अस्पताल ने यह जानकारी दी है। सर गंगाराम अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘‘वायरल श्वसन संक्रमण के बाद भर्ती कराईं गईं सोनिया गांधी की हालत स्थिर है और उनकी सेहत में धीरे-धीरे सुधार भी हो रहा है।’’</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें -</strong> <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/331247/sages-and-saints-should-announce-the-date-of-completion-of">राम मंदिर के निर्माण पूरा होने की तारीख की घोषणा साधु-संतों को करनी चाहिए, अमित शाह को नहीं: खरगे</a></span></p>
<p>कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष 76 वर्षीय सोनिया गांधी को वायरल श्वसन संक्रमण के कारण बुधवार को गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में भर्ती कराने के समय सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका गांधी वाद्रा उनके साथ थीं।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें - <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/331242/rajkot-a-dam-named-after-pm-modis-mother-hiraba">राजकोट: एक बांध का नाम रखा गया PM मोदी की मां हीराबा के नाम पर </a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/331272/sonias-health-is-improving-at-sir-gangaram-hospital</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Jan 2023 17:36:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Om Parkash chaubey]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पपीते का जूस सेहत के लिए है बेहद लाभकारी, जानें इसके फायदे और इसे बनाने का तरीका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हम सभी जानते हैं कि पपीता हमारी सेहत के लिए कितना लाभकारी है। वहीं हम में से कई लोग ऐसे हैं जिन्हें पपीते के फायदे तो पता है लेकिन पपीते के पानी के फायदों के बारे में शायद ही पता होगा। आज हम आपको पपीते के पानी के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। बता दें हाल ही में कंटेंट क्रिएटर अर्मेन अदमजन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया था जिसमें उन्होंने पपीता के पानी के अनेक फायदों का जिक्र किया है। उन्होंने पपीता के पानी बनाने का तरीका भी बताया है।  </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- </strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/316421/papaya-water-is-very-beneficial-for-health--know-its-benefits-and-how-to-make-it"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2022-11/pagyuu.jpg" alt=""></a><br /><p>हम सभी जानते हैं कि पपीता हमारी सेहत के लिए कितना लाभकारी है। वहीं हम में से कई लोग ऐसे हैं जिन्हें पपीते के फायदे तो पता है लेकिन पपीते के पानी के फायदों के बारे में शायद ही पता होगा। आज हम आपको पपीते के पानी के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। बता दें हाल ही में कंटेंट क्रिएटर अर्मेन अदमजन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया था जिसमें उन्होंने पपीता के पानी के अनेक फायदों का जिक्र किया है। उन्होंने पपीता के पानी बनाने का तरीका भी बताया है।  </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- </strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/316235/health-tips-include-this-drink-in-the-diet-in-the-morning-for-weight-loss-immunity-will-also-increase">Health Tips: वजन घटाने के लिए सुबह इस ड्रिंक को करें शामिल, इम्यूनिटी भी बढ़ेगी</a></p>
<p><strong>पपीता के पानी बनाने का तरीका</strong><br />सबसे पहले पपीते को अच्छे तरीके से काटकर धो लें। फिर उसमें से आधा काट लें फिर उसके छिलके को निकाल लें। उसके बाद पपीता के बीज को अच्छे से साफ कर लें। फिर इसके बाद इसके छोटे- छोटे टुकड़े कर लें। पपीता के इन टुकड़ों को पानी में 5 मिनट तक उबालें। उबालने के बाद इसे इसे ठंडा कर लें। फिर इस पानी को फ्रिज में रखें और फिर इसे रेगुलर पिएं। बता दें ये पानी पूरी तरह से नेचुरल है और इस पानी को आप रोजाना पी सकते हैं। यह आपके हेल्थ के लिए काफी ज्यादा लाभकारी भी है। अर्मेन अदमजन के मुताबिक पपीता विटामिन से भरपूर होता है। ये कैंसर की बीमारी से भी रोकथाम करता है। साथ ही यह पेट के लिए काफी अच्छा होता है। पीरियड्स में होने वाले तेज दर्द की भी रोकथाम करता है। किडनी को हेल्दी बनाता है और माइग्रेन और गठिया की बीमारी में भी काफी फायदेमंद होता है।</p>
<p>बता दें पपीते के पानी में 'लाइकोपीन' नाम का एक तत्व पाया जाता है। लाइकोपीन शरीर के लिए इतना ज्यादा फायदेमंद होता है कि यह आपके शरीर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम करता है। फ्रेश पपीता में अधिक मात्रा में </p>
<img src="https://www.amritvichar.com/media/2022-11/pagyuu.jpg" alt="pagyuu"></img>
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<p>पाया जाता है लेकिन जब इसे पानी में उबालते हैं तो उसमें से लाइकोपीन निकलता है जो शरीर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है। </p>
<p><br /><strong>पपीते के पानी पीने का सही समय </strong><br />बता दें अगर आप वजन घटाने की सोच रहे हैं तो पपीता इसमें भी बेहद लाभकारी है। पपीते का पानी सुबह के वक्त पीना चाहिए क्योंकि यह आपके आंतों को साफ और हेल्दी बनाता है। शरीर की गंदगी को साफ करने का भी काम करता है। पपीते के उबले हुए पानी में आप पपीते के क्यूब्स भी मिला सकते हैं। बता दें कि पपीता उबालकर खाने में शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। हालांकि कोई भी फल का पानी दिन में किसी वक्त भी लिया जा सकताहै। लेकिन सुबह खाली पेट पपीते का पानी पीने से काफी ज्यादा फायदा पहुंचता है। इसमें पपैन एंजाइम होती है। जो आंत के लिए काफी फायदेमंद होता है। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं- </strong><a href="https://www.amritvichar.com/article/315885/know-the-benefits-of-eating-dates-in-winter-a-boon-for-cholesterol-blood-pressure-patients">जानिए सर्दी में खजूर खाने के फायदे, कोलेस्ट्रॉल-ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए वरदान</a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Nov 2022 12:58:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Moazzam Beg]]></dc:creator>
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