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                <title>GTRI - Amrit Vichar</title>
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                <title>चांदी संकट से अवसर तक: भारत को अब घरेलू प्रसंस्करण और आयात विविधता पर फोकस करना चाहिए – GTRI रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>भारत को आयातित तैयार चांदी पर निर्भरता कम करने तथा आयात स्रोतों में विविधता लाकर इसके प्रसंस्करण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने एक रिपोर्ट में यह बात कही। रिपोर्ट में कहा गया कि विश्व में चांदी का सबसे अधिक प्रसंस्करण चीन में किया जाता है। चीन वैश्विक स्तर पर 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर के चांदी अयस्क एवं सांद्रण के आयात में से करीब 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात करता है। यह धातु को घरेलू स्तर पर परिष्कृत करता है और इलेक्ट्रॉनिक, चिकित्सकीय उपकरणों और सौर पैनल में प्रयुक्त उच्च मूल्य वाली चांदी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/566668/from-silver-crisis-to-opportunity--india-should-now-focus-on-domestic-processing-and-import-diversification-%E2%80%93-gtri-report"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2026-01/muskan-dixit-(84).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः </strong>भारत को आयातित तैयार चांदी पर निर्भरता कम करने तथा आयात स्रोतों में विविधता लाकर इसके प्रसंस्करण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने एक रिपोर्ट में यह बात कही। रिपोर्ट में कहा गया कि विश्व में चांदी का सबसे अधिक प्रसंस्करण चीन में किया जाता है। चीन वैश्विक स्तर पर 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर के चांदी अयस्क एवं सांद्रण के आयात में से करीब 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात करता है। यह धातु को घरेलू स्तर पर परिष्कृत करता है और इलेक्ट्रॉनिक, चिकित्सकीय उपकरणों और सौर पैनल में प्रयुक्त उच्च मूल्य वाली चांदी का निर्यात करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘घरेलू मूल्यवर्धन के लिए भारत को अयस्क अवस्था से ही चांदी को संसाधित करना सीखना होगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त वर्ष 2024-25 में, भारत ने केवल 47.84 करोड़ अमेरिकी डॉलर के चांदी उत्पादों का निर्यात किया जबकि 4.83 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात भी किया जो इसकी गहरी आयात निर्भरता को रेखांकित करता है। वर्ष 2025 में यह निर्भरता तेजी से बढ़ी। केवल अक्टूबर में आयात बढ़कर 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जो पिछले वर्ष की तुलना में 529 प्रतिशत अधिक है। इसके बाद नवंबर में यह 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया जो सालाना आधार पर 126 प्रतिशत की वृद्धि है। कुल आयात जनवरी-नवंबर 2025 के दौरान 8.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया और समूचे वर्ष के लिए इसका अनुमान 9.2 अरब अमेरिकी डॉलर है। यह 2024 की तुलना में करीब 44 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान भारत ने 5.94 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की चांदी का आयात किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘‘भारत को चांदी को महज एक कीमती वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं ऊर्जा-बदलाव धातु के रूप में मान्यता देनी चाहिए और इसे अपनी खनिज तथा स्वच्छ ऊर्जा रणनीति में एकीकृत करना चाहिए।’’ श्रीवास्तव ने कहा कि इसके लिए विदेशी खनन साझेदारियों के माध्यम से दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना और आयातित तैयार चांदी पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू शोधन एवं पुनर्चक्रण क्षमता को प्रोत्साहित करने के साथ ही कुछ व्यापारिक केंद्रों से परे आयात स्रोतों में विविधता लाना आवश्यक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जीटीआरआई के संस्थापक ने कहा, ‘‘खंडित होती वैश्विक व्यवस्था में, चांदी की सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है जितनी ऊर्जा की सुरक्षा। भारत के नीतिगत ढांचे में यह बदलाव दिखना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि सोने के विपरीत, चांदी की आपूर्ति श्रृंखलाएं कहीं कम पारदर्शी हैं। यह एक ऐसी कमजोरी है जो बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ रणनीतिक महत्व प्राप्त कर रही है। आयात में विविधता लाना महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन ने निर्यात नियंत्रण को कड़ा कर दिया है और एक जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात को लाइसेंस-आधारित प्रणाली में स्थानांतरित कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए नियमों के तहत, केवल अनुमोदित कंपनियां ही चांदी का निर्यात कर सकती हैं। प्रत्येक खेप के लिए सरकारी अनुमति आवश्यक है जिससे पुरानी कोटा व्यवस्था का स्थान ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह पूर्णतः निर्यात प्रतिबंध नहीं है लेकिन इसने वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है और कीमतों में नई अस्थिरता उत्पन्न की है। विशेष रूप से चांदी प्रसंस्करण में चीन की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">नई खनन क्षमता को सीमित करने एवं प्रौद्योगिकी उपयोगों के तेजी से विस्तार के साथ चांदी को भविष्य के औद्योगिक एवं ऊर्जा प्रभुत्व से सीधे तौर पर जुड़ी धातु के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक चांदी की मांग का वर्तमान में 55-60 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक है जो इलेक्ट्रॉनिक, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा उपकरणों और चिकित्सकीय प्रौद्योगिकियों द्वारा संचालित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा में चांदी की भूमिका विशेष रूप से परिवर्तनकारी है क्योंकि यह सौर ‘फोटोवोल्टिक सेल्स’ में एक महत्वपूर्ण घटक है, जहां इसका उपयोग दक्षता में सुधार के लिए एक ‘कंडक्टिव पेस्ट’ के रूप में किया जाता है। सौर ऊर्जा में पहले से ही वैश्विक चांदी की मांग का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा जाता है और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ यह हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सकीय एवं स्वास्थ्य सेवा में, चांदी के जीवाणुरोधी गुणों का उपयोग घाव की पट्टियों, चिकित्सकीय उपकरणों की कोटिंग, कैथेटर, शल्य चिकित्सा उपकरणों, जल शोधन प्रणालियों और औषधीय यौगिकों में किया जाता है। यह धातु आभूषणों, चांदी के बर्तनों तथा सिक्कों में प्रमुखता से उपयोग की जाती है विशेष रूप से भारत जैसे देशों में जहां सांस्कृतिक मांग गहराई से निहित है। अब इसका रणनीतिक महत्व हालांकि मुख्य रूप से उद्योग जगत से आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चांदी में किसी भी धातु की तुलना में सबसे अधिक विद्युत एवं तापीय चालकता होती है जो इसे इलेक्ट्रॉनिक, सर्किट बोर्ड, कनेक्टर, बैटरी और ऑटोमोटिव सिस्टम के लिए अपरिहार्य बनाती है। चांदी के अयस्कों और सांद्रों का व्यापार पिछले दो दशकों में 2000 में मात्र 0.1 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 6.27 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। परिष्कृत चांदी का व्यापार और भी तेजी से बढ़ा है। चांदी की छड़ों, सिल्लियों, छड़ों, तारों, पाउडर और सर्राफा का वैश्विक व्यापार 2000 में 4.06 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 31.42 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/566668/from-silver-crisis-to-opportunity--india-should-now-focus-on-domestic-processing-and-import-diversification-%E2%80%93-gtri-report</link>
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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 12:23:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक जनवरी से लागू होगा ईयू का कार्बन कर, भारत के स्टील और एल्युमिनियम निर्यातकों को नुकसान की आशंका </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> यूरोपीय संघ (ईयू) का कुछ धातुओं पर कार्बन कर (सीबीएएम) एक जनवरी से लागू होने जा रहा है जिससे भारत के इस्पात एवं एल्युमीनियम निर्यात को झटका लग सकता है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने बुधवार को यह जानकारी दी। यूरोपीय संघ के 27 देशों का समूह उन वस्तुओं पर यह कर लगा रहा है जिनके निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन होता है।</p>
<p>इस्पात क्षेत्र में ब्लास्ट फर्नेस–बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (बीएफ–बीओएफ) मार्ग में उत्सर्जन सबसे अधिक होता है जबकि गैस आधारित डीआरआई में यह कम तथा कबाड़ (स्क्रैप) आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) में सबसे कम होता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/565661/eu-carbon-tax-to-come-into-effect-from-january-1--fears-losses-for-indian-steel-and-aluminium-exporters"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-12/muskan-dixit-(46)15.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> यूरोपीय संघ (ईयू) का कुछ धातुओं पर कार्बन कर (सीबीएएम) एक जनवरी से लागू होने जा रहा है जिससे भारत के इस्पात एवं एल्युमीनियम निर्यात को झटका लग सकता है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने बुधवार को यह जानकारी दी। यूरोपीय संघ के 27 देशों का समूह उन वस्तुओं पर यह कर लगा रहा है जिनके निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन होता है।</p>
<p>इस्पात क्षेत्र में ब्लास्ट फर्नेस–बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (बीएफ–बीओएफ) मार्ग में उत्सर्जन सबसे अधिक होता है जबकि गैस आधारित डीआरआई में यह कम तथा कबाड़ (स्क्रैप) आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) में सबसे कम होता है। इसी तरह एल्युमीनियम में बिजली का स्रोत एवं ऊर्जा की खपत अहम भूमिका निभाती है। कोयले से उत्पादित बिजली से कार्बन बोझ बढ़ता है जिससे सीबीएएम लागत भी अधिक होती है।</p>
<p>ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, कई भारतीय निर्यातकों को कीमतों में 15 से 22 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ सकती है ताकि ईयू के आयातक उसी मुनाफे (मार्जिन) से सीबीएएम कर का भुगतान कर सकें। भारतीय निर्यातकों को सीधे तौर पर कर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा क्योंकि यूरोपीय संघ स्थित आयातकों (जो अधिकृत सीबीएएम घोषणाकर्ता के रूप में पंजीकृत हैं) को आयातित वस्तुओं में निहित उत्सर्जन से संबंधित सीबीएएम प्रमाणपत्र खरीदने होंगे। इसका भार अंततः भारतीय निर्यातकों पर पड़ेगा।</p>
<p>आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ एक जनवरी 2026 से ईयू में प्रवेश करने वाली भारतीय इस्पात एवं एल्युमीनियम की हर खेप पर कार्बन लागत जुड़ेगी क्योंकि सीबीएएम ‘रिपोर्टिंग’ चरण से भुगतान चरण में प्रवेश करेगा।’’</p>
<p>उन्होंने कहा कि जटिल आंकड़ा और सत्यापन प्रक्रियाओं से अनुपालन लागत बढ़ेगी, जिससे कई छोटे निर्यातक ईयू बाजार से बाहर हो सकते हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि उत्सर्जन का सही आकलन अब प्रतिस्पर्धा का आधार बन गया है। 2026 से उत्सर्जन आंकड़ों का स्वतंत्र सत्यापन अनिवार्य होगा और केवल ईयू-मान्यता प्राप्त या आईएसओ 14065 के अनुरूप सत्यापनकर्ताओं को ही स्वीकार किया जाएगा।</p>
<p>‘आईएसओ 14065’ पर्यावरणीय सूचना विवरणों के सत्यापन एवं प्रमाणीकरण करने वाले निकायों के लिए सिद्धांतों और आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करता है। कम उत्सर्जन वाले उत्पादकों के लिए हालांकि सीबीएएम प्रतिस्पर्धात्मक लाभ भी बन सकता है।</p>
<p>जीटीआरआई के अनुसार, भारत का ईयू को इस्पात एवं एल्युमीनियम निर्यात वित्त वर्ष 2023-24 में 7.71 अरब डॉलर से घटकर 2025 में 5.82 अरब डॉलर रह गया जो 24.4 प्रतिशत की गिरावट है। भारत और ईयू के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की वार्ताओं में भी कार्बन कर एक अहम मुद्दा बना हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:16:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुसी तेल खरीदने में भारत को फायदा: अमेरिकी शुल्क दबाव को खारिज करे सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने के अमेरिकी दबाव में नहीं आना चाहिए और उसका विरोध करना चाहिए। रूस से तेल आयात से भारत को महंगाई को काबू में करने और अस्थिर वैश्विक माहौल में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदारों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘भारत को इस दबाव को खारिज करना चाहिए और अपनी रूस रणनीति पर टिके रहना चाहिए।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/546439/india-benefits-from-buying-russian-oil--india-should-reject-us-tariff-pressure"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-07/untitled-design-(31)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली। </strong>शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने के अमेरिकी दबाव में नहीं आना चाहिए और उसका विरोध करना चाहिए। रूस से तेल आयात से भारत को महंगाई को काबू में करने और अस्थिर वैश्विक माहौल में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है। </p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदारों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘भारत को इस दबाव को खारिज करना चाहिए और अपनी रूस रणनीति पर टिके रहना चाहिए। रियायती रूसी तेल खरीदने से भारत को महंगाई को नियंत्रित करने और अस्थिर वैश्विक माहौल में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है।’’ </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस नीति में बदलाव करने से अमेरिकी चेतावनी नहीं रुकेगी और यह बढ़ती रहेगी। यह कोई अलग मामला नहीं है। ट्रंप नियमित रूप से विभिन्न कारणों से शुल्क को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘इस प्रवृत्ति को देखते हुए, भारत को रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने में कोई फायदा नहीं है। इससे भविष्य में अमेरिका की अप्रत्याशित मांगों का बड़ा मुद्दा हल नहीं होगा। अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौता भी सुरक्षा की गारंटी नहीं देगा, क्योंकि ट्रंप अन्य मामलों में भी इस तरह का रुख अपना सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ये भी पढ़े : <a href="https://www.amritvichar.com/article/546421/iraq-fire-break-out--50-people-died-in-a-massive-fire-in-iraq-s-mall--governor-announced-3-days-of-mourning">Iraq Fire Break Out: इराक के मॉल में भीषण आग से 61 लोगों की मौत, गवर्नर ने की 3 दिनों के शोक की घोषणा</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/546439/india-benefits-from-buying-russian-oil--india-should-reject-us-tariff-pressure</link>
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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 16:36:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anjali Singh]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन की अमेरिका पर सख्ती ने खोले भारतीय ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए दरवाजे, मिला सुनहरा मौका: जीटीआरआई </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> चीन से कम मूल्य वाले ई-कॉमर्स आयात पर अमेरिका द्वारा सख्ती बरतने से भारतीय ऑनलाइन निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खुल गए हैं, क्योंकि अगर लालफीताशाही कम हो जाए और सरकार समय पर समर्थन प्रदान करे तो वे इस कमी को पूरा कर सकते हैं। शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने रविवार को यह बात कही। </p>
<p>जीटीआरआई ने कहा कि एक लाख से अधिक ई-कॉमर्स विक्रेताओं और पांच अरब डॉलर के मौजूदा निर्यात के साथ भारत, विशेष रूप से हस्तशिल्प, फैशन और घरेलू सामान जैसे अनुकूलित, छोटे बैच उत्पादों के क्षेत्र में चीन द्वारा छोड़े गए अंतर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/533214/delhi-e-commerce-gtri-american-tariff"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2025-04/2025-(14)7.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> चीन से कम मूल्य वाले ई-कॉमर्स आयात पर अमेरिका द्वारा सख्ती बरतने से भारतीय ऑनलाइन निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खुल गए हैं, क्योंकि अगर लालफीताशाही कम हो जाए और सरकार समय पर समर्थन प्रदान करे तो वे इस कमी को पूरा कर सकते हैं। शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने रविवार को यह बात कही। </p>
<p>जीटीआरआई ने कहा कि एक लाख से अधिक ई-कॉमर्स विक्रेताओं और पांच अरब डॉलर के मौजूदा निर्यात के साथ भारत, विशेष रूप से हस्तशिल्प, फैशन और घरेलू सामान जैसे अनुकूलित, छोटे बैच उत्पादों के क्षेत्र में चीन द्वारा छोड़े गए अंतर को भरने की अच्छी स्थिति में है। अमेरिका में दो मई से 800 डॉलर से कम कीमत वाले चीनी और हांगकांग ई-कॉमर्स निर्यात पर 120 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क लगेगा, जिससे उनका शुल्क-मुक्त प्रवेश समाप्त हो जाएगा। इस कदम से चीनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान उत्पन्न होने और अन्य देशों के लिए द्वार खुलने की उम्मीद है। चीनी फर्म शीन और टेमू इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हैं। वर्ष 2024 में विश्व भर से 140 करोड़ से अधिक कम मूल्य के पैकेट अमेरिका में पहुंचे, जिनमें से अकेले चीन ने 46 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे सामान का निर्यात किया।</p>
<p>जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “भारत विशेष रूप से हस्तशिल्प, फैशन और घरेलू सामान जैसे अनुकूलित, छोटे बैच के उत्पादों में चीन द्वारा छोड़े गए अंतर को सिर्फ उस स्थिति में भरने की अच्छी स्थिति में है, जब वह बैंकिंग, सीमा शुल्क और निर्यात प्रोत्साहन में बाधाओं को जल्दी से दूर कर ले।” भारत की मौजूदा व्यापार प्रणाली अभी भी बड़े, पारंपरिक निर्यातकों के लिए है, न कि छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए। उन्होंने कहा, “इन ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए, लालफीताशाही अक्सर समर्थन से ज़्यादा भारी पड़ती है।”</p>
<p>अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय बैंक ई-कॉमर्स निर्यात की उच्च मात्रा और छोटे मूल्य की प्रकृति को संभालने के लिए संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई के नियम घोषित आयात मूल्य और अंतिम भुगतान के बीच केवल 25 प्रतिशत का अंतर रखने की अनुमति देते हैं, जो ऑनलाइन निर्यात के लिए बहुत कड़ा है, जहां छूट, रिटर्न और मंच शुल्क अक्सर बड़े अंतर का कारण बनते हैं। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ेः <a href="https://www.amritvichar.com/article/533200/right-time-mp-for-india-and-uae-to-invest-in">भारत और यूएई के लिए द्विपक्षीय संबंधों में निवेश का सही समय, बोले अली राशिद अल नुएमी</a></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Apr 2025 17:31:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Muskan Dixit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्मार्टफोन बनाने में घटकों पर आयात शुल्क में न करे कटौती सरकार, जानिए  GTRI रिपोर्ट में और क्या कहा?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>सरकार को आगामी बजट में स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों पर आयात शुल्क में कटौती नहीं करनी चाहिए क्योंकि मौजूदा शुल्क संरचना अभी तक सफल साबित हुई है और उसे बदलने से स्थानीय विनिर्माण को नुकसान हो सकता है। जीटीआरआई की एक रिपोर्ट में सोमवार को यह बात कही गई। </p>
<p>आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, मौजूदा दरों को बनाए रखने से भारत के बढ़ते स्मार्टफोन बाजार में उद्योग की वृद्धि तथा दीर्घकालिक विकास को संतुलित करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ वर्तमान में भारत में स्मार्टफोन के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/437613/government-should-not-cut-import-duty-on-components-used-in"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2024-01/64654.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>सरकार को आगामी बजट में स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों पर आयात शुल्क में कटौती नहीं करनी चाहिए क्योंकि मौजूदा शुल्क संरचना अभी तक सफल साबित हुई है और उसे बदलने से स्थानीय विनिर्माण को नुकसान हो सकता है। जीटीआरआई की एक रिपोर्ट में सोमवार को यह बात कही गई। </p>
<p>आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, मौजूदा दरों को बनाए रखने से भारत के बढ़ते स्मार्टफोन बाजार में उद्योग की वृद्धि तथा दीर्घकालिक विकास को संतुलित करने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ वर्तमान में भारत में स्मार्टफोन के आयातित घटकों पर शुल्क 7.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच है। बजट में इन करों को बरकरार रखा जाना चाहिए। </p>
<p>बजट में स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले घटकों पर आयात शुल्क में कटौती नहीं की जानी चाहिए।’’ वित्त मंत्री सीतारमण एक फरवरी को 2024-25 का अंतरिम बजट पेश करेंगी। जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्माण और निर्यात के लिए आवश्यक कच्चे माल या पूंजीगत सामान शुल्क-मुक्त आयात कर सकती हैं। </p>
<p>ये एडवांस ऑथराइजेशन, एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स जैसी योजनाओं और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) या 100 प्रतिशत निर्यात उन्मुख इकाइयों में संचालन के जरिए मुमकिन हो पाया है। इसके अतिरिक्त कंपनियां स्थानीयकरण आवश्यकताओं के बिना शुल्क-मुक्त आयात के लिए सीमा शुल्क बांड योजना का इस्तेमाल कर सकती हैं।’’ </p>
<p>जीटीआरआई ने रिपोर्ट में कहा, भारत का स्मार्टफोन उद्योग 2022 में 7.2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2023 में 13.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने के साथ पीएलआई (उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन) योजना तहत सबसे बेहतर करने वाला क्षेत्र बन गया है। भारत में बेचे जाने वाले 98 प्रतिशत से अधिक स्मार्टफोन स्थानीय स्तर पर बनाए जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के स्मार्टफोन विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और गहराई को बनाए रखने के लिए मौजूदा आयात शुल्क को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। </p>
<p><strong>यह भी पढ़ें- <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/437593/sc-calls-ban-on-live-broadcast-from-ayodhya-a-blow">अयोध्या से सीधे प्रसारण पर रोक मामले में SC से तमिलनाडु सरकार को झटका, कहा- कानून के अनुरूप करे काम</a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jan 2024 13:57:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजराइल-हमास संघर्ष से भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे में हो सकती है देरी: GTRI</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> इजरायल-हमास संघर्ष के कारण भारत - पश्चिम एशिया - यूरोप आर्थिक गलियारा परियोजना में देरी और जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने यह बात कही।</p>
<p>जीटीआरआई ने कहा कि हालांकि संघर्ष के तात्कालिक परिणाम इजराइल और गाजा तक ही सीमित हैं, लेकिन पूरे पश्चिम एशिया में इसके प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता है।</p>
<p>थिंक टैंक ने कहा कि संघर्ष इजरायल और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते की संभावना को पटरी से उतार सकता है, जो भारत - पश्चिम एशिया - यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईईसी) ढांचे में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/410746/india-west-asia-europe-economic-corridor-may-get-delayed-due-to-israel-hamas"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-10/images-(40).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> इजरायल-हमास संघर्ष के कारण भारत - पश्चिम एशिया - यूरोप आर्थिक गलियारा परियोजना में देरी और जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने यह बात कही।</p>
<p>जीटीआरआई ने कहा कि हालांकि संघर्ष के तात्कालिक परिणाम इजराइल और गाजा तक ही सीमित हैं, लेकिन पूरे पश्चिम एशिया में इसके प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता है।</p>
<p>थिंक टैंक ने कहा कि संघर्ष इजरायल और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते की संभावना को पटरी से उतार सकता है, जो भारत - पश्चिम एशिया - यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईईसी) ढांचे में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।</p>
<p>हालांकि, सऊदी अरब और इजराइल के बीच ऐतिहासिक रूप से कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन हाल के वर्षों के दौरान संबंधों में नरमी के संकेत देखे गए हैं। जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि युद्ध की स्थिति में दोनों देशों के बीच बातचीत पटरी से उतर सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ''मौजूदा इजराइल-हमास संघर्ष परियोजना की समयसीमा और परिणामों को बाधित कर सकता है। हालांकि, युद्ध का प्रत्यक्ष प्रभाव स्थानीय स्तर तक सीमित है, लेकिन इसके भू-राजनीतिक परिणाम बहुत दूर तक होंगे।'' आईएमईईसी एक प्रस्तावित आर्थिक गलियारा है, जिसका उद्देश्य एशिया, फारस की खाड़ी और यूरोप के बीच संपर्क और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है। यह गलियारा भारत से लेकर यूरोप तक फैला होगा। </p>
<p><strong>ये भी पढे़ं<span style="color:rgb(224,62,45);">- <a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/410717/sanjay-raut-targeted-maharashtra-assembly-speaker--said---like-a-person-who-gives-shelter-to-a-murderer-">संजय राउत ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष पर साधा निशाना, कहा- हत्यारे को पनाह देने वाले व्यक्ति की तरह...</a></span></strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/410746/india-west-asia-europe-economic-corridor-may-get-delayed-due-to-israel-hamas</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Oct 2023 15:38:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत को 2030 तक ई-कॉमर्स के जरिए 350 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखना चाहिए: GTRI</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत को 2030 तक ई-कॉमर्स के जरिये 350 अरब डॉलर के माल निर्यात का लक्ष्य रखना चाहिए और इसके लिए सरकार को एक अलग नीति तैयार करने की जरूरत है। आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही।</p>
<p>ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि भारत में थोक निर्यातकों (बी2बी) के लिए मौजूदा ई-कॉमर्स निर्यात प्रावधानों में कई जटिलताएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के ई-कॉमर्स निर्यात में 2000 के दशक की शुरुआत में देखे गए आईटी निर्यात की तुलना में तेज गति से बढ़ने की क्षमता है। रिपोर्ट के मुताबिक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.amritvichar.com/article/352411/india-should-aim-to-export-350-billion-through-e-commerce-by"><img src="https://www.amritvichar.com/media/400/2023-03/06-16.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत को 2030 तक ई-कॉमर्स के जरिये 350 अरब डॉलर के माल निर्यात का लक्ष्य रखना चाहिए और इसके लिए सरकार को एक अलग नीति तैयार करने की जरूरत है। आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही।</p>
<p>ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि भारत में थोक निर्यातकों (बी2बी) के लिए मौजूदा ई-कॉमर्स निर्यात प्रावधानों में कई जटिलताएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के ई-कॉमर्स निर्यात में 2000 के दशक की शुरुआत में देखे गए आईटी निर्यात की तुलना में तेज गति से बढ़ने की क्षमता है। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक व्यापार-से-उपभोक्ता (बी2सी) या खुदरा ई-कॉमर्स निर्यात 2030 तक मौजूदा 800 अरब डॉलर से बढ़कर 8,000 अरब डॉलर होने का अनुमान है।</p>
<p>भारत इन रुझानों से फायदा उठाने की प्रमुख स्थिति में है। जीटीआरआई ने ऑनलाइन माध्यम से देश के निर्यात में तेजी लाने के लिए 21 कार्रवाई बिंदुओं की पहचान की है।</p>
<p>भारत का मौजूदा ई-कॉमर्स निर्यात उसकी क्षमता से काफी कम है। इस समय ई-कॉमर्स निर्यात केवल दो अरब डॉलर का है, जो देश के कुल माल निर्यात का 0.5 प्रतिशत से भी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश को 2030 तक ई-कॉमर्स के जरिए 350 अरब डॉलर का निर्यात करने की योजना बनानी चाहिए। ऐसे में ई-कॉमर्स निर्यात के लिए पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर ध्यान देने की जरूरत होगी। </p>
<p><strong>ये भी पढ़ें : <span style="color:rgb(224,62,45);"><a style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.amritvichar.com/article/352408/khalistan-supporter-amritpal-is-still-absconding-police-is-searching">खालिस्तान समर्थक अमृतपाल अब भी फरार, पुलिस कर रही है तलाश </a></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Top News</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.amritvichar.com/article/352411/india-should-aim-to-export-350-billion-through-e-commerce-by</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Mar 2023 11:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Amrit Vichar]]></dc:creator>
                            </item>

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